2015-10-21

भोजन मे विटामिन बी का महत्व

संतुलित और स्वस्थ आहार में विटामिन्स और मिनरल्स बेहद महत्वपूर्ण हैं| । इनमें विटामिन बी की ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका होती है। विटामिन बी में मौजूद 8 तरह के विटामिन्स (बी1, बी2, बी3, बी5, बी6, बी 7, बी9 और बी12) एक परिवार की तरह हैं। ये सभी मिलकर विटामिन बी-कॉम्पलेक्स के रूप में जाने जाते हैं। ये आठों विटामिन्स अपने-आपमें विशिष्ट हैं और हमारे शरीर और मानसिक विकास में इनके योगदान को समझना उपकारी होगा -
*थायमिन (विटामिन बी1)
यह हमारे द्वारा खाए गए खाने को पचाने और सेलुलर एनर्जी रिलीज करने में मदद करता है। यह शरीर से डीएनए और आरएनए का संश्लेषण कर नर्वस सिस्टम को स्वस्थ रखता है। हमारे प्रतिरक्षा तंत्र की रक्षा करता है। थायमिन दाल, साबुत अनाज, गुड़, मूंगफली, फलों, ड्राई फ्रूट्स, गोभी, पालक, ब्रोकली, बीन्स, होलग्रेन ब्रेड, दूध, अंडे, मांस, मछली में मिलता है।
कमी से होने वाले रोग
विटामिन बी1 की कमी से बेरीबेरी रोग हो जाता है। इसमें नर्वस सिस्टम में गड़बड़ी हो जाती है, तनाव रहता है।
*राइबोप्लेविन (बी2)
यह पूरे शरीर में ऑक्सीजन के प्रवाह को बनाए रखता है, जिससे लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में कोई दिक्कत नहीं आती। त्वचा, आंखों और नर्वस सिस्टम को स्वस्थ रखता है। राइबोप्लेविन दूध, पालक, ब्रोकली, अंडों, मछली, मांस में पाया जाता है।
कमी से होने वाले रोग
इसकी कमी से होंठ फटने लगते हैं, जीभ में जलन रहती है।
*नियासिन (बी3)
निकोटिनिक एसिड के रूप में नियासिन एचडीएल कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखकर हृदय को स्वस्थ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दूध, गेहूं, मूंगफली, दालें, हरी सब्जियां, मछली, अंडे अच्छे स्रोत हैं।
कमी से होने वाले रोग
इसकी कमी से पैलेग्रा बीमारी हो जाती है, जिसमे डायरिया, त्वचा में जलन, चिड़चिड़ापन, मानसिक तनाव रहता है।
*पैंटोथैनिक एसिड (विटामिन बी5)
अध्ययनों से साबित हुआ है कि पैंटोथैनिक दाग-धब्बों से रहित स्वस्थ त्वचा के विकास में सहायक है। यह साबुत अनाज, काजू, मूंगफली, मसूर की दाल, सोयाबीन, ब्राउन राइस, दलिया, ब्रोकली, दूध और दूध से बने पदार्थ, आलू, बीन्स, टमाटर और मीट, मुर्गा, अंडे में मिलता है।
कमी से होने वाले रोग
इससे त्वचा संबंधी रोग हो जाते हैं, जिसमें त्वचा में जलन, इचिंग और चुभन होती है। मुहांसों की समस्या हो जाती है।
*पाइरीडॉक्सिन (विटामिन बी6)
यह हमारे शरीर में प्रोटीन और कार्बोहाईड्रेट से एनर्जी स्टोर करने में मदद करता है। यह लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद हीमोग्लोबिन को बनाने में मदद करता है, ताकि शरीर में ऑक्सीजन का संचालन आसानी से हो सके। अध्ययनों से साबित हो चुका है कि विटामिन बी 6 रुमेटी गठिया में होने वाली सूजन और दर्द को कम करने में सहायक है। मीट, चिकन, मछली, ब्रेड, दलिया, ब्राउन राइस, अंडे, सोयाबीन, मूंगफली, आलू, गाजर, दूध और दूध से बने पदार्थ इसके अच्छे स्रोत हैं।
कमी से होने वाले रोग
कमी से मानसिक तनाव, अवसाद, चिड़चिड़ापन रहता है।
*बायोटिन (विटामिन बी7)
नाखून, बाल और त्वचा के स्वास्थ्य में मदद करने के कारण इसे सौंदर्य विटामिन के रूप में भी जाना जाता है। रक्त में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करके डायबिटीज के रोगियों के लिए मददगार होता है। यह स्ट्रॉबेरी, पनीर, जौ, सोयाबीन, आलू, फूलगोभी, मांस, मीट, अंडे आदि में पाया जाता है।
कमी से होने वाले रोग
इससे त्वचा संबंधी रोग हो जाते हैं, जिसमें त्वचा में जलन, इचिंग और चुभन होती है।
*फोलिक एसिड (विटामिन बी9)
इसे फोलेट भी कहा जाता है। यह डीएनए संश्लेषण, विटामिन बी12 के साथ मिलकर लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और एमिनो एसिड के चयापचय के लिए आवश्यक है। यह गर्भ में पल रहे बच्चे के न्यूरल ट्यूब दोष के जोखिम को कम करने में सहायक है। यह बच्चे की रीढ़ की हड्डी और नर्वस सिस्टम के गठन के लिए महत्वपूर्ण है। ब्रोकली, स्प्राउट्स, पालक, बीन्स, हरी पत्तेदार सब्जियां, मटर, चना, ब्राउन ब्रेड, दूध और दूध से बने पदार्थ, चुकंदर, खजूर आदि इसके अच्छे स्रोत हैं।
कमी से होने वाले रोग
इसकी कमी से एनीमिया हो जाता है। इससे छोटे बच्चांे में न्यूरोजिकल डिसॉर्डर की समस्या हो जाती है।
*साइनोकोबालामिन (बी12)
यह विटामिन एक टीम खिलाड़ी है और शरीर में भोजन से एनर्जी रिलीज करने का मुख्य स्रोत है। यह हमारे मस्तिष्क, स्पाइनल कॉर्ड और नर्व्स के कुछ तत्वों के निर्माण में भी सहायक है। लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण, हीमोग्लोबिन बनाने और नर्वस सिस्टम में प्रोटीन की आपूर्ति कर स्वस्थ रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दूध और दूध से बने पदार्थ, मीट, सामन और कॉड जैसी मछलियां, अंडे विटामिन बी12 के अच्छे स्रोत हैं।
कमी से होने वाले रोग
एनीमिया, नर्वस सिस्टम में विकार, हाथ-पैरों में झनझनाहट, जलन, जीभ में सूूजन, कमजोरी, थकान डिपेे्रशन, याददाश्त खोने, उम्रदराज लोगों में मतिभ्रंश होने का खतरा रहता है।