2015-11-11

कष्ट साध्य रोगों की मंत्र -चिकित्सा : Spells doom diseases






कई बार देखा गया है कि कोई भयंकर रूप से बीमार हो गया है लेकिन सभी प्रकार की चिकित्सीय जांच किसी बीमारी का कोई लक्षण नहीं बताती तो हो सकता हो कि जातक प्रेत बाधा से पीड़ित हो।
किसी भी प्रेत बाधा से मुक्त होने लिए लगातार 21 दिन तक प्रतिदिन सूर्यास्त के समय गाय का आधा किलो दूध लें तथा उसमें नौ बूंद शुद्ध शहद और 10 बूंद गंगाजल डालें। शहद और गंगाजल मिश्रित दूध को शुद्ध बर्तन में रखकर शुद्ध वस्त्र पहनकर हर-हर गंगे बोलते हुए घर में छिड़काव करें।
छिड़काव करने के बाद मुख्य दरवाजे पर आकर शेष बचे हुए दूध को धार बांधकर वहीं पर गिरा दें और बोलें-संकट कटे मिटे सब पीरा
जो सुमिरे हनुमत बलवीरा
यह क्रिया 21 दिन तक करते रहें।
अब हम कुछ मंत्रों का उल्लेख  करेंगे जो रोग व्याधि -मुक्ति  मे  सहायक होते हैं-

कैंसर रोग


ॐ नम: शिवाय शंभवे कर्केशाय नमो नम:

यह मंत्र किसी भी तरह के कैंसर रोग में लाभदायक होता है।

मस्तिष्क रोग


ॐ उमा देवीभ्यां नम:।

यह मंत्र मस्तिष्क संबंधी विभिन्न रोगों जैसे सिरदर्द, हिस्टीरिया, याददाश्त जाने आदि में लाभदायी माना जाता है।

आंखों के रोग

ॐ शंखिनीभ्यां नम:।

इस मंत्र से जातक को मोतियाबिंद सहित रतौंधी, नेत्र ज्योति कम होने आदि की परेशानी में लाभ मिलता है।

हृदय रोग

ॐ नम: शिवाय संभवे व्योमेशाय नम:।

हृदय संबंधी रोगों से अधिकांश लोग पीड़ित होते हैं। इसलिए अगर वे इस मंत्र का जप करें, तो उन्हें लाभ मिलता है।

स्नायु रोग

ॐ धं धर्नुधारिभ्यां नम:।





कान संबंधी रोग

ॐ व्हां द्वार वासिनीभ्यां नम:।

कर्ण विकारों को दूर करने में यह मंत्र आश्चर्यजनक भूमिका निभाता है।



कफ संबंधी रोग


ॐ पद्मावतीभ्यां नम:।


श्वास (दमा) रोग

ॐ नम: शिवाय संभवे श्वासेशाय नमो नम:।


पक्षाघात (लकवा) रोग

ॐ नम: शिवाय शंभवे खगेशाय नमो नम:।


इन मंत्रों की शक्ति से रोग भागते हैं मंत्रों में गजब की शक्ति होती है। इनका नियमित जप न केवल जातक को मानसिक शांति देता है, बल्कि उन्हें होने वाली गंभीर बीमारियों को भी दूर भगा सकता हैं अब आप कितना करते है यह तो आप पर निर्भर करता हैं। इसमे कोई अतिशोक्ति नही यदि कुछ रोग जड से सामाप्त हो जाये। 

हर समस्या का बस एक उपाय : गायत्री मंत्र

वेदों का सर्वश्रेष्ठ मंत्र : गायत्री मंत्र

गायत्री मंत्र:-

ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।

शास्त्रों के अनुसार गायत्री मंत्र को वेदों का सर्वश्रेष्ठ मंत्र बताया गया है। इसके जप के लिए तीन समय बताए गए हैं। गायत्री मंत्र का जप का पहला समय है प्रात:काल, सूर्योदय से थोड़ी देर पहले मंत्र जप शुरू किया जाना चाहिए। जप सूर्योदय के पश्चात तक करना चाहिए।

मंत्र जप के लिए दूसरा समय है दोपहर का। दोपहर में भी इस मंत्र का जप किया जाता है।

तीसरा समय है शाम को सूर्यास्त के कुछ देर पहले मंत्र जप शुरू करके सूर्यास्त के कुछ देर बाद तक जप करना चाहिए। इन तीन समय के अतिरिक्त यदि गायत्री मंत्र का जप करना हो तो मौन रहकर या मानसिक रूप से जप करना चाहिए। मंत्र जप तेज आवाज में नहीं करना चाहिए।

गायत्री मंत्र का अर्थ -

सृष्टिकर्ता प्रकाशमान परामात्मा के तेज का हम ध्यान करते हैं, वह परमात्मा का तेज हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर चलने के लिए प्रेरित करें।

अथवा
उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अंत:करण में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करें।

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