2016-01-04

भोजन पदार्थ कब खाएं कब न खाएँ





कौनसी चीज कब खाएं और कब न खाएं इसका विवरण आयुर्वेद में मिलता है। अगर व्यक्ति इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करे तो निरोग रह सकता है।
*भादों और सावन में दही और मठा नहीं खाना चाहिए।
*कार्तिक मास में करेला और बैगन नहीं खाना चाहिए
*श्रावण में हरी सब्जियां (जैसे पालक) नहीं खाना चाहिए , (क्योंकि उनमें जंतु होते हैं)
*भाद्रपद में दही नहीं खाना चाहिए|
*आश्विन में दूध और कार्तिक में दाल नहीं खाना चाहिए।
*सूर्यास्त के बाद तिल की कोइ भी वास्तु का प्रयोग नहीं करनी चाहिए।
अमावस्या , रविवार और पूनम को तिल का तेल हानिकारक होता है
*रविवार को तुलसी, अदरक, लाल मिर्च और लाल सब्जी नहीं खाना चाहिए।
*आँवला रविवार, शुक्रवार और षष्ठी को नहीं खाना चाहिए।·
*तृतीया तिथि को परवल नहीं खाना चाहिए |तृतीया को परवल खाने से शत्रुओं की वृद्धि होती है|·


चतुर्थी को मूली नहीं खाना चाहिए |चतुर्थी को मूली खाने से धन-नाश होता है|
अष्टमी को नारियल नहीं खाना चाहिए अष्टमी नारियल खाने से बुद्धि कमजोर होगा, रातको नारियल नहीं खाना चाहिए|त्रयोदशी को बैगन नहीं खाना चाहिए | त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र नाश या पुत्र से दुख मिलता है|·
श्रावण में हरड़ और कार्तिक में मूली स्वास्थ्य के लिए अच्छा है |श्रावण में जठराग्नि कम होने से पेट के बीमारियाँ ज्यादा होती हैं, इसलिए हरड़ खाना चाहिए||
भाद्रपद में दूध या दूध से बनी हुई खीर स्वास्थ्य के लिए अच्छा है, इससे शरीर का पित्त निकल जाता है|

नोट - कुछ जानकारी ज्योतिष पर आधारित है| कुछ लोग ज्योतिष को अंध विश्वास मानते हैं| अपने विवेक से काम लें|