2016-02-25

बेमेल भोजन सेहत के लिए हानिकारक




स्वास्थ्य चेतावनी: बेमेल भोजन रोगों को दावत

ज्यादातर लोग खाने से पहले यह नहीं सोचते कि क्या खा रहे हैं। भारत में लोग पश्चिमी देशों की तुलना में बहुत बेमेल तत्वों या घटकों वाला खाना खाते हैं। वैसे तो बेमेल खाद्य तत्व भोजन का स्वाद बढ़ा देते हैं, लेकिन खाद्य तत्वों के संयोजन या मेल की यदि हमें सही जानकारी हो जाए, तो भोजन ही हमारे लिए दवा का काम करने लगेगा।
 पश्चिमी सिद्धांत के अनुसार यह माना जाता है कि स्वादिष्ट भोजन बनाने के लिए जिन खाद्य पदार्थो का उपयोग किया जाना चाहिए, उन खाद्य पदार्थो में पाए जाने वाले आणविक घटकों या तत्वों की प्रकृति समान होनी चाहिए। दुनिया के अधिकतर देशों में बनने वाले व्यंजन में इसी सिद्धांत का पालन किया जाता है, जहां एक ओर दुनियाभर के देशों में बनने वाले खाने में समान आणविक संचरना वाले खाद्य पदार्थो को शामिल किया जाता है, वहीं भारतीय भोजन में जिन खाद्य पदार्थो का प्रयोग किया जाता है, उनमें पाए जाने वाले आणविक घटकों की प्रकृति में समानता न के बराबर होती है, अर्थात भारतीय खाने में भिन्न-भिन्न प्रकृति वाले खाद्य तत्वों का समावेश किया जाता है, जिसकी वजह से भारतीय खाना स्वादिष्ट बनता है और दुनियाभर में पसंद किया जाता है। script> भारतीय खाने की प्रकृति अन्य देशों के भोजन से भिन्न होने के पीछे मुख्य वजह उपयोग किए जाने वाले मसाले हैं। भारतीय खाने में मौजूद आणविक प्रकृति को लेकर पहली बार ऎसा वैज्ञानिक शोध हुआ है। 194 आणविक घटकों का विश्लेषण गणित और कम्प्यूटर पद्धति से किया गया । शोध में पाया कि किसी भी भारतीय खाने (रेसपी) में जिन खाद्य पदार्थो का उपयोग किया जाता है, उनमें आणविक घटकों की प्रकृति में औसत समानता बहुत कम (करीब 5) होती है। वहीं दुनिया भर के देशों में बनने वाले भोजन में यह समानता काफी अधिक (करीब 15 से 16) होती है। पश्चिमी सिद्धांत में समान प्रकृति वाले आणविक घटकों की पॉजिटिव फूड पेयरिंग होती है और भारतीय भोजन में नेगेटिव फूड पेयरिंग (नकारात्मक खाद्य मेल) होती है। भोजन में अधिक मसाले भारतीय खाने में नेगेटिव फूड पेयरिंग करने के लिए 10 खाद्य पदार्थ मुख्य वजह हैं, इनमें 9 तो मसाले है, इनमें लाल मिर्च, हरी शिमला मिर्च, धनिया, गरम मसाला, इमली, सौंठ-लहसुन चटनी, अदरक, लौंग और दाल-चीनी शामिल है।

 भारतीय खाने को अन्य देशों में बनाए जाने वाले खाने से विशिष्ट बनाने के पीछे मसाले मुख्य आधार हैं। अगर हमें यह मालूम है कि किस खाद्य पदार्थ में क्या आणविक घटक है, तो हम स्वास्थवर्द्धक भोजन तैयार कर सकते हैं। इतना ही नहीं, इन आणविक घटकों की जानकारी होने पर हमारा भोजन भी दवा का रूप ले सकता है।

विरोधी आहार के सेवन से बल, बुद्धि, वीर्य व आयु का नाश, नपुंसकता, अंधत्व, पागलपन, भगंदर, त्वचाविकार, पेट के रोग, सूजन, बवासीर, अम्लपित्त (एसीडिटी), सफेद दाग, ज्ञानेन्द्रियों में विकृति व अष्टौमहागद अर्थात् आठ प्रकार की असाध्य व्याधियाँ उत्पन्न होती हैं। विरुद्ध अन्न का सेवन मृत्यु का भी कारण हो सकता है।

* जो पदार्थ रस-रक्तादी धातुओं के विरुद्ध गुणधर्मवाले व वात-पित्त-कफ इन त्रिदोषों को प्रकुपित करनेवाले हैं, उनके सेवन से रोगों की उत्पत्ति होती है | इन पदार्थों में कुछ परस्पर गुणविरुद्ध, कुछ संयोगविरुद्ध, कुछ संस्कारविरुद्ध और कुछ देश, काल, मात्रा, स्वभाव आदि से विरुद्ध होते हैं | जैसे-दूध के साथ मूँग, उड़द, चना आदि सभी दालें, सभी प्रकार के खट्टे व मीठे फल, गाजर, शककंद, आलू, मूली जैसे कंदमूल, तेल, गुड़, शहद, दही, नारियल, लहसुन, कमलनाल, सभी नमकयुक्त व अम्लीय प्रदार्थ संयोग विरुद्ध हैं | दूध व इनका सेवन एक साथ नहीं करना चाहिए | इनके बीच कम-से-कम २ घंटे का अंतर अवश्य रखें |
अब बताएँगे कि विरुद्ध आहार क्या क्या है-
1) ऐसे ही दही के साथ उड़द, गुड़, काली मिर्च, केला व शहद; शहद के साथ गुड़; घी के साथ तेल नहीं खाना चाहिए |

2) शहद, घी, तेल व पानी इन चार द्रव्यों में से दो अथवा तीन द्रव्यों को समभाग मिलाकर खाना हानिकारक हैं |

3) गर्म व ठंडे पदार्थों को एक साथ खाने से जठराग्नि व पाचनक्रिया मंद हो जाती है |


4) दही व शहद को गर्म करने से वे विकृत बन जाते हैं |

5) दूध को विकृत कर बनाया गया छेना, पनीर आदि व खमीरीकृत प्रदार्थ (जैसे-डोसा, इडली, खमण) स्वभाव से ही विरुद्ध हैं अर्थात इनके सेवन से लाभ की जगह हानि ही होती है |

6) रासायनिक खाद व इंजेकशन द्वारा उगाये गये आनाज व सब्जियाँ तथा रसायनों द्वारा पकाये गये फल भी स्वभावविरुद्ध हैं |

7) हेमंत व शिशिर इन शीत ऋतुओं में ठंडे, रुखे-सूखे, वातवर्धक पदार्थों का सेवन, अल्प आहार तथा वसंत-ग्रीष्म-शरद इन ऊष्ण ऋतुओं में ऊष्ण पदार्थं व दही का सेवन कालविरुद्ध है |

8) मरुभूमि में रुक्ष, उषण, तीक्षण पदार्थों (अधिक मिर्च, गर्म मसाले आदि) व समुद्रतटीय प्रदेशों में चिकने-ठंडे पदार्थों का सेवन, क्षारयुक्त भूमि के जल का सेवन देशविरुद्ध है |

9) अधिक परिश्रम करनेवाले व्यक्तियों के लिए रुखे-सूखे, वातवर्धक पदार्थ व कम भोजन तथा बैठे-बैठे काम करनेवाले व्यक्तियों के लिए चिकने, मीठे, कफवर्धक पदार्थ व अधिक भोजन अवस्थाविरुद्ध है | - अधकच्चा, अधिक पका हुआ, जला हुआ, बार-बार गर्म किया गया, उच्च तापमान पर पकाया गया (जैसे-ओवन में बना व फास्टफूड), अति शीत तापमान में रखा गया (जैसे-फिर्ज में रखे पदार्थ) भोजन पाकविरुद्ध है |
10) मल, मूत्र का त्याग किये बिना, भूख के बिना अथवा बहुत अधिक भूख लगने पर भोजन करना क्रमविरुद्ध है |

11) जो आहार मनोनुकूल न हो वह ह्रदयविरुद्ध है क्योंकि अग्नि प्रदीप्त होने पर भी आहार मनोनुकूल न हो तो सम्यक पाचन नहीं होता |

12) इस प्रकार देश, काल, उम्र, प्रकृति, संस्कार, मात्रा आदि का विचार तथा पथ्य-अपथ्य का विवेक करके नित्य पथ्यकर पदार्थों का ही सेवन करें | अज्ञानवश विरुद्ध आहार के सेवन से हानि हो गयी हो तो वमन-विरेचनादी पंचकर्म से शारीर की शुद्धी एंव अन्य शास्त्रोक्त उपचार करने चाहिए | आपरेशन व अंग्रेजी दवाएँ रोगों को जड़-मूल से नहीं निकालते | अपना संयम और नि:सवार्थ एंव जानकार वैध की देख-रेख में किया गया पंचकर्म विशेष लाभ देता है | इससे रोग तो मिटते ही हैं, १०-१४ वर्ष आयुष्य भी बढ़ सकता है |

13) नासमझी के कारण कुछ लोग दूध में सोडा या कोल्डड्रिंक डालकर पीते हैं | यह स्वाद की गुलामी आगे चलकर उन्हें कितनी भारी पड़ती है, इसका वर्णन करके विस्तार करने की जगह यहाँ नहीं है | विरुद्ध आहार कितनी बिमारियों का जनक है, उन्हें पता नहीं | खीर के साथ नमकवाला भोजन, खिचड़ी के साथ आइसक्रीम, मिल्कशेक - ये सब विरुद्ध आहार हैं | इनसे पाशचात्य जगत के बाल, युवा, वृद्ध सभी बहुत सारी बिमारियों के शिकार बन रहे हैं | अत: खट्टे-खारे के साथ भूलकर भी दूध की चीज न खायें- न खिलायें |