2016-02-14

कम सुनने (बहरापन) के घरेलू उपचार : Simple Remedies to overcome deafness



    जब भी आप किसी से बात करते हैं, तो आपको सामने वाले के शब्द साफ-साफ सुनाई नहीं देते या उन्हें आपके सामने तेज आवाज में बोलना पड़ता है? यदि ऐसा है, तो हो सकता है आप ′हियरिंग लॉस′ की समस्या से पीड़ित हों।
हियरिंग लॉस यानी आवाज सुनने की क्षमता का कम हो जाना। स्पष्ट सुनने में परेशानी,   आवाज का बहुत कम सुनाई देना, शोरगुल के बीच समझने में दिक्कत होना आदि हियरिंग लॉस के अंतर्गत आता है। हियरिंग लॉस दो प्रकार का होता है, पहला कंडक्टिव हियरिंग लॉस और दूसरा सेंसोरीन्यूरल हियरिंग लॉस।
  यदि आपको सुनने में दिक्कत होती है, तो इसे हल्के में न लें, नहीं तो आप बहरेपन के शिकार हो सकते हैं। अमेरिका में होने वाली स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं में हियरिंग लॉस तीसरी सबसे आम बीमारी है। कई बार बढ़ती उम्र के साथ ही सुनने की क्षमता भी कम होने लगती है, तो कई बार फैक्ट्री में काम करने वाले मैकेनिक की सुनने की क्षमता कम हो जाती है। यह समस्या जन्मजात भी होती है और दवाओं के दुष्प्रभावों से भी हो सकता है। चूंकि कान शरीर के महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक है, इसलिए तेज आवाज के संपर्क में लगातार रहने, कानों पर ईयर- फोन लगाकर देर तक गाना सुनने जैसी आदतें भी कान के लिए नुकसान,दायक साबित हो सकती हैं।

लक्षण-
आप दो या दो से ज्यादा लोगों से बात कर रहे हैं और उनकी बातें ठीक से सुनने में परेशानी हो या स्‍पष्ट सुनाई न दे, तो यह हियरिंग लॉस से संबंधित बीमारी के कुछ लक्षण हैं। कई बार सुनने की क्षमता में कमी आने के शुरुआती लक्षण जल्दी समझ नहीं आते। ऐसी स्थिति में लोग इसे नजरअंदाज करते चले जाते हैं, जिससे सुनने की क्षमता में आई कमी समय के साथ-साथ धीरे-धीरे कम होती चली जाती है। सामान्य बातचीत सुनने में भी दिक्कत आना, बार-बार लोगों से बात को दुहराने के लिए कहना, फोन पर बात के दौरान कम सुनाई देना, अन्य लोगों के मुकाबले तेज आवाज में टीवी या संगीत सुनना। यहां तक कि बच्चों, पक्षियों या बारिश की आवाज को भी न सुन पाना आदि इसके कुछ लक्षण हैं।
क्यों सुनाई नहीं देता-
सुनने में तकलीफ कई कारणों और किसी भी उम्र में हो सकती है। कंडक्टिव हियरिंग लॉस कानों से पस बहने, ईयर कनाल में इंफेक्शन, कान की हड्डी में गड़बड़ी, पर्दे के डैमेज होने या कान का ट्यूमर, एलर्जी के कारण होता है। सेंसोरीन्यूरल हियरिंग लॉस तब होता है, जब कान के भीतरी हिस्से (इनर ईयर, जिसे नर्व से संबंधित हियरिंग लॉस भी कहते हैं) में कोई समस्या उत्पन्न हो जाए, सुनने वाली कोशिकाओं में गड़बड़ी, उनका कमजोर हो जाना या नष्ट होना, उम्र के बढ़ने, तेज आवाज में एक्सपोजर, सिर से संबंधित ट्रॉमा, ट्यूमर, वायरस, ऑटोइम्यून इनर ईयर डिजीज आदि से भी होता है। बैक्टीरियल इंफेक्शन, तेज आवाज वाली जगह पर काम करना, दिमागी बुखार, डायबिटीज, स्ट्रोक, कान की नर्व्स का कमजोर होना, दिमागी बुखार या जेनटिक कारणों से भी यह समस्या हो सकती है।

सावधानी बरतें-
अगर आप तेज आवाज वाले स्थान पर काम करते हैं, तो कानों में ईयर प्लग या रुई लगाकर रखें। कान में हर समय ईयरबड, सरसों का तेल न डालें। तेज आवाज में टीवी या संगीत न सुनें। नहाते समय उंगली से कानों की सफाई न करें। ऐसी जगह जहां ध्वनि प्रदूषण ज्यादा होती है जैसे एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन या फैक्ट्री आदि में तो कान को ढक कर रखें। 45 वर्ष की उम्र के बाद कानों का चेकअप कराते रहें। बातचीत के दौरान आपको कम सुनाई पड़ता है, कभी-कभी सुनने के लिए भी सामने वाले के बहुत करीब जाना पड़ता है, तो इसे गंभीरता से लें। और बिना देर किए चिकित्सक से मिलें।
   आमतौर पर हियरिंग लॉस की समस्या बचपन से ही देखी जाती है। प्रेग्नेंसी के समय कई बार महिलाएं सावधानी नहीं बरततीं, जिससे गर्भ में पल रहे शिशु को यह समस्या हो जाती है। तपेदिक, मधुमेह और मलेरिया की दवाओं के सेवन से भी कई बार लोगों की सुनने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। हाई ब्लड प्रेशर, दिमागी बुखार या फिर ज्यादा शोर-शराबे वाला माहौल भी इसका एक मुख्य कारण है। यदि आपका कान लगातार बह रहा हो, तो इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं। कंडक्टिव हियरिंग लॉस में सुनने की शक्ति पहले जैसी हो सकती है, लेकिन सेंसोरीन्यूरल हियरिंग लॉस में इसे वापस नहीं लाया जा सकता। इसलिए तेज आवाज से जितना हो सकें दूर रहें। कान में तेल, ईयरबड, पिन, पेन आदि जैसी चीजें न डालें। सड़क पर बैठे किसी कान साफ करने वाले से कानों को साफ न कराएं।

  कर्ण शरीर का महत्वपूर्ण अंग है| इसकी रचना जटिल और अत्यंत नाजुक है। कान दर्द (earache) का मुख्य कारण युस्टेशियन नली में अवरोध पैदा होना है। यह नली गले से शुरु होकर मध्यकर्ण को मिलाती है। यह नली निम्न कारणों से अवरुद्ध हो सकती है--
१) सर्दी लग जाना।
२) लगातार तेज और कर्कष ध्वनि
३) कान में चोंट लगना
४) कान में कीडा घुस जाना या संक्रमण होना।
५) कान में अधिक मैल(वाक्स
६) नहाते समय कान में पानी प्रविष्ठ होना।

  बडों के बनिस्बत छोटे बच्चों को कान दर्द अक्सर हो जाता है। बच्चों मे प्रतिरक्षा तंत्र अविकसित रहता है और युस्टेशियन नली भी छोटी होती है अत: इसके आसानी से जाम होने के ज्यादा अवसर होते हैं। रात के वक्त कान दर्द अक्सर बढ जाया करता है। कान में किसी प्रकार का संक्रमण होने से पहिले तो कान की पीडा होती है और इलाज नहीं करने पर कान में पीप पडने का रोग हो जाता है।
कान दर्द निवारक घरेलू पदार्थों के उपचार नीचे लिखे रहा हूँ -
१) दर्द वाले कान में हायड्रोजन पेराक्साइड की कुछ बूंदे डालें। इससे कान में जमा मैल( वाक्स) नरम होकर बाहर निकल जाता है। अगर कान में कोइ संक्रमण होगा तो भी यह उपचार उपकारी रहेगा। हायड्रोजन में उपस्थित आक्सीजन जीवाणुनाशक होती है

२) लहसुन संस्कारित तेल कान पीडा में हितकर है। १० मिलि तिल के तेल में ३ लहसुन की कली पीसकर डालें और इसे किसी बर्तन में गरम करें। छानकर शीशी में भरलें। इसकी ४-५ बूंदें रुग्ण कान में टपकादें। रोगी १० मिनिट तक लेटा रहे। फ़िर इसी प्रकार दूसरे कान में भी दवा डालें। कान दर्द और बहरेपन में लाभ प्रद नुस्खा है।
३) जेतुन का तेल मामूली गरम करके कान में डालने से दर्द में राहत होती है।
४) मुलहठी कान दर्द में उपयोगी है। इसे घी में भूनें । बारीक पीसकर पेस्ट बनाएं। इसे कान के बाह्य भाग में लगाएं। कुछ ही मिनिट में दर्द समाप्त होगा।
५) बच्चों के कान में पीब होने पर स्वस्थ स्त्री के दूध की कुछ बूंदें कान में टपकादें। स्त्री के दूध में प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करने के गुण विद्यमान होते हैं। उपकारी उपचार है।




६) कान में पीब होने पर प्याज का रस लाभप्रद उपाय है। प्याज का रस गरम करके कान में २-४ बूंदे डालें। दिन में ३ बार करें। आशातीत लाभकारी उपचार है।
७) अजवाईन का तेल और तिल का तेल 1:3 में मिक्स करें। इसे मामूली गरम करके कान में २-४ बूंदे टपकादें। कान दर्द में उपयोगी है।
८) पांच ग्राम मैथी के बीज एक बडा चम्मच तिल के तेल में गरम करें। छानकर शीशी में भर लें। २ बूंद दवा और २ बूद दूध कान में टपकादें। कान पीप का उम्दा इलाज माना गया है।
९) तुलसी की कुछ पत्तिया और लहसुन की एक कली पीसकर पेस्ट बनालें। इसे गरम करें। कान में इस मिश्रण का रस २-३ बूंद टपकाएं। कान में डालते समय रस सुहाता गरम होना चाहिये। कान दर्द का तत्काल लाभप्रद उपचार है।
१०) कान दर्द और पीब में पेशाब की उपयोगिता सिद्ध हुई है। ताजा पेशाब ड्रापर में भरकर कान में डालें,उपकार होगा।

११) मूली कान दर्द में हितकारी है। एक मूली के बारीक टुकडे करलें । सरसों के तेल में पकावें। छानकर शीशी में भर लें ।कान दर्द में इसकी २-४ बूंदे टपकाने से आराम मिल जाता है।
१२) गरम पानी में सूती कपडा भिगोकर निचोडकर ३-४ तहें बनाकर कान पर सेक के लिये रखें। कान दर्द परम उपकारी उपाय है।
१३) सरसों का तेल गरम करें । सुहाता गरम तेल की २-४ बूंदे कान में टपकाने से कान दर्द में तुरंत लाभ होता है।
१४) सोते वक्त सिर के नीचे बडा तकिया रखें। इससे युस्टेशियन नली में जमा श्लेष्मा नीचे खिसकेगी और नली साफ़ होगी। मुंह में कोई चीज चबाते रहने से भी नली का अवरोध हटाने में मदद मिलती है।