2016-03-23

आलू खाने के फायदे Benefits of Potato




आलू पौष्टिक तत्वों से भरा होता है। आलू में सबसे ज्यादा मात्रा में स्टॉर्च पाया जाता है। आलू क्षारीय होता है, जिसे खाने से शरीर में क्षारों की मात्रा बरकरार रहती है। आलू में सोडा, पोटाश, और विटामिन ए और डी पर्याप्त मात्रा में होता है।
*आलू को हमेशा छिलके समेत पकाना चाहिए। क्योंकि, आलू का सबसे अधिक पौष्टिक भाग छिलके के एकदम नीचे होता है, जो प्रोटीन और खनिज से भरपूर होता है। आलू को उबालकर या भूनकर खाया जाता है, इसलिए इसके पौष्टिक तत्व आसानी से पच जाते हैं। आइए हम आपको आलू के गुणों के बारे में बताते हैं।
*विटामिन ‘सी’-आलू में विटामिन ‘सी’ बहुत होता है। इसको मीठे दूध में भी मिलाकर पिला सकते हैं। आलू को छिलके सहित गर्म राख में भूनकर खाना सबसे अधिक गुणकारी है या इसको छिलके सहित पानी में उबालकर खायें। पानी, जिसमें आलू उबाले गए हों, को न फेंकें बल्कि इसी पानी में आलुओं की सब्जी बना लें। इस पानी में मिनरल और विटामिन अधिक होते हैं।

*बेरी-बेरी (Beri-Beri)-बेरी-बेरी का अर्थ है-चल नहीं सकता। इस रोग से जंघागत नाड़ियों में क्षीणता का लक्षण विशेष रूप से होता है। आलू पीसकर, दबाकर, रस निकालकर एक चम्मच की एक खुराक के हिसाब से नित्य चार बार पिलायें। कच्चे आलू को चबाकर रस की निगलने से भी समान लाभ मिलता है
गुर्दे की पथरी होने पर आलू का प्रयोग करना चाहिए। पथरी के रोगी को केवल आलू खिलाकर और बार-बार अधिक पानी पिलाकर पथरी को निकाला जा सकता है।
*आलू को गोला काटकर आंखों पर रखने से आंखों के आसपास की झुर्रियां समाप्त होती हैं।
*अम्लता (Acidity)—जिन बीमारों के पाचनांगों में अम्लता (खट्टापन) की अधिकता है, खट्टी डकारें आती हैं और वायु अधिक बनती है, उनके लिए गर्म-गर्म राख या रेत में भुना हुआ आलू बहुत लाभदायक है। भुना हुआ आलू गेहूँ की रोटी से आधी देर में पच जाता है और शरीर को गेहूँ की रोटी से भी अधिक पौष्टिक पदार्थ पहुँचाता है। पुरानी कब्ज़ और अंतड़ियों की सड़ाँध दूर करता है। आलू में पोटेशियम साल्ट होता है जो अम्लपित को रोकता है। आलू की प्रकृति क्षारीय है जो अम्लता को कम करती है। अम्लता के रोगी भोजन में नियमित आलू खाकर अम्लता को दूर कर सकते हैं।
*आंखों का जाला एवं फूला:-कच्चा आलू साफ-स्वच्छ पत्थर पर घिसकर सुबह-शाम आंख में काजल की भांति लगाने से पांच से छ: वर्ष पुराना जाला और चार वर्ष तक का फूला तीन महीने में साफ हो जाता है।
चेहरे की रंगत के लिए आलू बहूत फायदेमंद होता है। आलू को पीसकर त्‍वचा पर लगाने से रंग गोरा हो जाता है।
*सौंदर्यवर्धक-आलू का रस त्वचा को निखारने के लिए उपयोगी है, क्योंकि इसमें पोटेशियम, सल्फर और क्लोरीन की प्रचुर मात्रा होती है। आलू का रस त्वचा पर लगायें, धोयें।
*आलू के रस को शहद में मिलाकर बच्चों को पिलाने से बच्चों का विकास अच्छे से होता है।
बच्चों का पौष्टिक भोजन-आलू का रस दूध पीते बच्चों और बड़े बच्चों को पिलाने से वे मोटे-ताजे हो जाते हैं। आलू के रस में मधु मिलाकर भी पिला सकते हैं। आलू का रस निकालने की विधि यह है कि आलुओं को ताजे पानी में अच्छी तरह धोकर छिलके सहित कद्दूकस करके इस लुगदी को कपड़े में दबाकर रस निकाल लें। इस रस को एक घण्टे तक ढककर रख दें। जब सारा कचरा-गूदा नीचे जम जाए तो ऊपर का निथरा रस अलग करके काम में लें।

*गठिया-चार आलू सेंककर छिलके उतारकर नमक-मिर्च डालकर नित्य खाये। इससे गठिया ठीक हो जाती है।
*गुर्दे या वृक्क (किडनी) के रोगी भोजन में आलू खाएं। आलू में पोटैशियम की मात्रा बहुत अधिक पाई जाती है और सोडियम की मात्रा कम। पोटैशियम की अधिक मात्रा गुर्दों से अधिक नमक की मात्रा निकाल देती है। इससे गुर्दे के रोगी को लाभ होता है। आलू खाने से पेट भर जाता है और भूख में सन्तुष्टि अनुभव होती है। आलू में वसा (चर्बी) यानि चिकनाई नहीं पाई जाती है। यह शक्ति देने वाला है और जल्दी पचता है। इसलिए इसे अनाज के स्थान पर खा सकते हैं।"
*उच्च रक्तचाप के रोगी भी ओलू खायें तो रक्तचाप सामान्य बना रहता है। पानी में नमक डालकर आलू उबालें। छिलका होने पर आलू में नमक कम पहुँचता है और आलू नमकयुक्त भोजन बन जाता है। इस प्रकार यह उच्च रक्तचाप में लाभ करता है। आलू में मैग्नीशियम पाया जाता है जो उच्च रक्तचाप को कम करता है।
विसर्प (छोटी-छोटी फुंसियों का दल):-यह एक ऐसा संक्रामक रोग है जिसमें सूजनयुक्त छोटी-छोटी फुन्सियां होती हैं, त्वचा लाल दिखाई देती है तथा साथ में बुखार भी रहता है। इस रोग में पीड़ित अंग पर आलू को पीसकर लगाने से फुन्सियां ठीक हो जाती हैं और लाभ होता है।
*चोट लगने पर आलू का प्रयोग करना चाहिए। कभी-कभी चोट लगने के बाद त्वचा नीली पड़ जाती है। नीले पडे जगह पर कच्चा आलू पीसकर लगाने से फायदा होता है।
दाद के रोग में:-कच्चे आलू का रस पीने से दाद ठीक हो जाता है।

*आलू खाने से पेट भर जाता है और भूख में संतुष्टि अनुभव होती है। आलू में व्रसा (चर्बी) या चिकनाई नहीं पाई जाती है। यह शक्ति देने वाला है, जल्दी पचता है। इसलिए इसे अनाज के स्थान पर खा सकते हैं।
हृदय की जलन:-*इस रोग में आलू का रस पीएं। यदि रस निकाला जाना कठिन हो तो कच्चे आलू को मुंह से चबाएं तथा रस पी जाएं और गूदे को थूक दें। आलू का रस पीने से हृदय की जलन दूर होकर तुरन्त ठंडक प्रतीत होती है।
*झुर्रियों से बचाव के लिए आलू बहुत फायदेमंद होता है। झुर्रियों पर कच्चे आलू को पीसकर लगाने से झुर्रियां समाप्त होती हैं।
*मोटापा-आलू मोटापा नहीं बढ़ाता। आलू को तलकर तीखे मसाले, घी आदि लगाकर खाने से जो चिकनाई पेट में जाती है, वह चिकनाई मोटापा बढ़ाती है। आलू को उबालकर या गर्म रेत या राख में भूनकर खाना लाभप्रद और निरापद है।
*त्वचा की एलर्जी या फिर त्वचा रोग होने पर आलू का प्रयोग करना चाहिए। कच्चे आलू का रस लगाने से त्वचा रोग में फायदा होता है।
*अगर अं‍तडियों से सडांध आ रही हो तो भुने हुए आलू का प्रयोग करना चाहिए। इससे पेट की कब्ज और अंतडियों की सडांध दूर होती है।