2016-03-05

मक्का खाने के फायदे: Benefits of eating corn



ऐतिहासिक साक्ष्यों से पता चलता है कि आज से दस हज़ार वर्षों पूर्व सर्वप्रथम, मैक्सिको में भारतीयों द्वारा ही इसकी उपज पैदा की गई थी। भारत में गेहूँ के बाद मक्के का उत्पादन सर्वाधिक होता है। अमेरिका इसका सर्वाधिक निर्यात करने वाला देश है।*कार्न को एक बेहतरीन कोलेस्ट्रॉल फाइटर माना जाता है, जो दिल के मरीजों के लिए बहुत अच्छा है।  भुट्टे के फायदे के बारे में जानकारी देते हैं-
*भुट्टा या मक्का पेट के अल्सर से छुटकारा दिलाने में सहायक है।
*यह कमज़ोरी में बेहतर ऊर्जा प्रदान करता है।
*वजन बढ़ाने में मददगार-
जिन लोगों का वजन कम है, उनके लिए मक्का  बेहद फायदेमंद होता है। कम वजन वाले लोगों को सही प्रकार से अपना वजन बढ़ाने के लिए अधिक मात्रा में कैलोरी का सेवन करना पड़ता है। मक्का  में कार्बोहाइड्रेट और कैलोरी भी प्रचुर  मात्रा में होती है। तो अगर आपका वजन कम है, तो आपका मक्‍का का सेवन जरूर करना चाहिए। याद रखिए एक कप मक्‍का में 130 कैलोरी होती है।
*ऊर्जा बढ़ाये-
कॉर्न को स्टार्च युक्त  सब्जी  माना जाता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा काफी अधिक होती है, जो आपको शार्ट टर्म और लाँग  टर्म ऊर्जा देता है। इसके साथ ही यह दिमाग  और नर्वस सिस्टम को सुचारू रूप से काम करने में मदद करता है। एक कप मक्का  में 29 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है। यह उन लोगों के लिए खासतौर पर फायदेमंद होता है, जो अधिक शारीरिक गतिविधियां करते हैं। ऐसे लोगों को अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है। और तो और मक्का  में मौजूद कार्बोहाइड्रेट के पचने की गति धीमी होती है, इसलिए यह आपको ऊर्जा का संतुलित स्तर मुहैया कराता है। अधिक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए व्यायाम  से एक-दो घंटे पहले मक्का  का सेवन करना चाहिए। कार्न फ्लेक के रूप में लेने पर यह हृदयरोग की रोकथाम में सहायक होता है।

कैंसर से बचाये

कई शोध इस बात को प्रमाणित कर चुके हैं कि मक्का  मे  पाये जाने वाले एंटी-ऑक्‍सीडेंट्स कैंसर से बचाने में मददगार होते हैं। यह कैंसर फैलाने वाले फ्री-रेडिकल्‍स से लड़ते हैं और रोगी  की सेहत दुरुस्त  रखने का काम करते हैं। और तो और इसमें मौजूद  तत्व  लिवर और स्तन  कैंसर में विशेष रूप से उपयोगी होते हैं।भुट्टा विश्व के सबसे अधिक लोकप्रिय खाद्य पदार्थों में से एक है।
दुनिया के हर कोने में बिकने वाला पॉप कार्न मक्के के दानों से बनाया जाता है।         बच्चों के विकास के लिए भुट्टा बहुत फायदेमंद माना जाता है। ताजे दूधिया (जो कि पूरी तरह से पका न हो) मक्का के दाने पीसकर एक खाली शीशी में भरकर उसे धूप में रखिए। जब उसका दूध सूख कर उड़ जाए और शीशी में केवल तेल रह जाए तो उसे छान लीजिए। इस तेल को बच्चों के पैरों में मालिश कीजिए। इससे बच्चों का पैर ज्यादा मजबूत होगा और बच्चा जल्दी चलने लगेगा।
बैड कोलेस्‍ट्रॉल कम करे
अधिक वसायुक्‍त आहार से हमारे रक्त  में बैड कोलेस्‍ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है। इससे हमारे दिल की कार्यक्षमता पर बुरा असर पड़ता है और हमें दिल की बीमारियां होने का खतरा भी बढ़ जाता है।  मक्का  में विटामिन सी, केरोटेनोइड्स और बायोफ्लेवोनॉयड काफी मात्रा में होता है, जो रक्त मे  कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा को कम करके रक्त  प्रवाह को सुचारू बनाता है।
अनीमिया से बचाये -अनीमिया की बड़ी वहज विटामिन बी12 और फोलिक एसिड की कमी होना है। मक्‍का में दोनों की भरपूर मात्रा तो होती ही है, साथ ही इसमें आयरन भी काफी मात्रा में होता है। आयरन नयी लाल रक्‍त कोशिकाओं के निर्माण में बेहद जरूरी होता है। आयरन की कमी भी अनीमिया का कारण हो सकती है।
भुट्टा या मक्का सेहत का खजाना है। भुट्टे को पोषण के हिसाब से बेहतरीन माना जाता है। इसकी खासियत यह है कि पकाने के बाद इसकी पौष्टिकता बढ जाती है। पके हुए भुट्टे में पाया जाने वाला कैरोटीनायड विटामिन-ए का अच्छा स्रोत होता है। जो हमारी नजर के लिए काफी फायदेमंद होता है।

टीबी के मरीजों के लिए मक्का बहुत फायदेमंद है। टीबी के मरीजों को हर रोज मक्के की रोटी खाना चाहिए। इससे टीबी के इलाज में फायदा होगा।खांसी के मरीजों के लिए भुट्टा बहुत फायदेमंद होता है। भुट्टा जलाकर उसकी राख पीस लीजिए। इसमें स्वादानुसार सेंधा नमक मिला लीजिए। हर रोज कम से कम चार बार एक चौथाई चम्मच हल्का गरम पानी के साथ फांक लीजिए। खांसी समाप्त हो जाती है।भुट्टे को पकाने के बाद उसके 50 प्रतिशत एंटी-ऑक्सीअडेंट्स बढ़ जाते हैं। पके हुए भुट्टे में फेरूलिक एसिड होता है जो कि कैंसर जैसी बीमारी में लड़ने में बहुत मददगार होता है। मक्के में कैरोटीन होता है जिसके कारण इसका रंग पीला होता है। इसके अलावा भुट्टे में मिनरल्स और विटामिन प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं।

ताजा मक्का के भुट्टे को पानी में उबालकर उस पानी को छानकर मिश्री मिलाकर पीने से पेशाब की जलन व गुर्दों की कमजोरी समाप्त हो जाती है।
गरीबों का भोजन मक्का अब अपने पौष्टिक गुणों के कारण अमीरों के मेज की शान बढ़ाने लगा है। पहले भारत में यह केवल निम्न वर्ग द्वारा ही खाया जाता था। अब कॉर्नफ्लैक के रूप में अमीरों के नाश्ते और मध्यम वर्ग द्वारा सूप, दलिया, रोटी और न जाने किन-किन रूपों में उपयोग किया जाने लगा है।

प्रोटीन और विटामिनों से भरपूर मक्का जहाँ शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है, वहीं यह बेहद सुपाच्य भी है। इसकी ख़ासियत यह है कि हर रूप में इसमें पोषक तत्व विद्यमान रहते हैं। कच्चे और पके रूप में तो यह फ़ायदेमंद होता ही है। जब इसमें विद्यमान तेल निकाल लिया जाता है और यह सूखे रूप में रह जाता है तब भी इसके अवशिष्ट में वसा को छोड़कर शेष पोषक तत्व विटामिन, प्रोटीन इत्यादि विद्यमान रहते हैं। बच्चों के सर्वांगीण विकास में मक्के का प्रयोग सहायक होता है।
मक्का विभिन्न रूपों में प्रयोग में लाया जाता है। सर्दियों में मक्के के आटे से रोटी बनाई जाती है। पंजाब की मक्के की रोटी और सरसों का साग केवल उत्तर भारतीयों द्वारा ही नहीं, बल्कि पूरे भारतवासियों द्वारा शौक से खाया जाता है। बड़े-बड़े होटलों और रेस्तरां में यह सर्दियों की ख़ास डिश बन जाती है। मक्के के आटे में मूली या मेथी गूँधकर बनाई गई रोटी मक्खन और दही के साथ अत्यंत स्वादिष्ट लगती है। मक्के के आटे से पावरोटी, बिस्कुट तथा टोस्ट भी बनाए जाते हैं।



कच्चे मक्के को सुखाकर उसे दरदरा पीसकर दलिया बनाया जाता है। यह दलिया दूध में पकाकर खाने से सुस्वादु होने के साथ पौष्टिक भी होता है।

बरसात के मौसम में भूना हुआ भुट्टा छोटे-बड़े सभी के मन को भाता है। लोग भुट्टे के अलावा पॉपकार्न, भुने हुए मकई के पक्के दाने के भी दीवाने होते हैं, जो साधारण से भड़भूजे से लेकर बड़ी-बड़ी कम्पनियों द्वारा बेचे जाते हैं। पका भुट्टा उबालकर इमली की चटनी के साथ खाने में अत्यंत स्वादिष्ट लगता है। मक्के का गरम-गरम सूप पीना हर मौसम में स्वास्थ्यवर्धक होता है और स्वीट कार्न सूप का तो जवाब नहीं!

मक्का शर्बत, मुरब्बा मिठाइयों और बनावटी मक्खन बनाने में प्रयुक्त होता है और इसके रेशे मिट्टी के बर्तन, दवाइयाँ, रंगरोगन, काग़ज़ की चीज़ें और कपड़े बनाने के काम आते हैं। पशुओं के लिए खली के रूप में भी यह प्रयुक्त होता है। हृदयरोग विशेषज्ञ मक्के के तेल को खाद्य-पदार्थों में प्रयुक्त करने की सलाह देते हैं। एक किस्म की शराब और बीयर बनाने में भी इसका प्रयोग किया जाता है।
मक्के में विटामिन 'ए', 'बी-२', 'ई' फास्फोरस, पोटेशियम, कैल्शियम, आयरन, आग्जैनिक आम्ल, नारसिन, फैट और प्रोटीन पाया जाता है।
यह पेट के अल्सर और गैस्ट्रिक अल्सर के छुटकारा दिलाने में सहायक है साथ ही यह वज़न घटाने में भी सहायक होता है। कमज़ोरी में यह बेहतर ऊर्जा प्रदान करता है और बच्चों के सूखे के रोग में अत्यंत फायदेमंद है। यह मूत्र प्रणाली पर नियंत्रण रखता है, दाँत मजबूत रखता है और कार्नफ्लेक्स के रूप में लेने से हृदयरोग में भी लाभदायक होता है
मक्का के ताजे दानों को पानी में अच्छी तरह से उबालकर उस पानी को छानकर शहद या मिश्री मिलाकर सेवन करने से गुर्दों की कमजोरी दूर होती है।
मक्का के दाने भूनकर खाने से पाचन तंत्र के रोग दूर होते हैं।
भूना हुआ भुट्टा खाने से दाँत एवं दाढ़ मजबूत होते हैं, तथा ये दाने लार बनाने में भी सहायक हैं, जिससे मुख व दाँतों की दुर्गंध भी दूर होती है।