2016-03-25

उच्च रक्त चाप किडनी खराब होने का मुख्य कारण


यह चिंता का विषय है कि भारत में लगभग एक लाख लोगों की किडनी फेल होती है? एक शौध  के अनुसार उच्च रक्तचाप किडनी के फेल होने का एक मुख्य कारण है और किडनी फेल होने के लगभग 27 प्रतिशत नए केसों के लिए जिम्मेदार है।
ब्लड प्रेशर  के नियंत्रण में किडनी मुख्य भूमिका निभाती हैं। इसलिए किडनी की किसी भी बीमारी से रक्तचाप बढ़ जाता है। उच्च रक्तचाप के कारण रक्त
शिराएँ क्षतिग्रस्त और संकुचित हो जाती हैं। उनकी लचक भी कम हो जाती है। उच्च रक्तचाप के कारण किडनी की रक्तशिराएँ भी क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। जिससे उनकी छानने की क्षमता भी प्रभावित होती है। ऐसी स्थिति में किडनी शरीर से विजातीय पदार्थों  को पूरी तरह से निकालने में अक्षम हो जाती हैं। इसके कारण टॉक्सिन शरीर में जमा होता रहता है और कई सारी बीमारियों जैसे हृदय की बीमारी, हड्डियों और दौरे की बीमारी आदि को जन्म मिलता है।



किडनी की बीमारी  काफी देर से पता चलती हैं, तब तक यह अंग पूरी तरह से खराब हो चुका होता है। ज्यादातर मौकों पर मरीज को कोई भी लक्षण पता नहीं चलता है, जबकि किडनी अपनी आधी क्षमता पर काम कर रही होती है। किडनी फेल्योर के मरीजों को डायलिसिस  की आवश्यकता होती है,|
किडनी की बीमारी की जाँचः-
किडनी की बीमारी की पहचान केवल मेडिकल जाँच द्वारा ही संभव है। रक्त की जाँच द्वारा रक्त में व्यर्थ के उत्पादों जैसे क्रेटिनाइन के बढ़े हुए स्तर की पहचान की जा सकती है।
सामान्य व्यक्तियों में किडनी की छानने की क्रिया की यह सुनिश्चित करती है कि पेशाब में प्रोटीन की हानि न हो। क्षतिग्रस्त किडनी के समय प्रोटीन की थोड़ी मात्रा जैसे एलब्युमिन पेशाब में रिसने लगती है, जो पेशाब की जाँच में पहचानी जा सकती है। यह किडनी के खराब होने के बहुत पूर्व के लक्षणों में एक है।
रोकथाम के उपायः-
रक्तचाप को नियंत्रण में रखने का सबसे अच्छा उपाय किडनी की बीमारी के खतरे को कम से कम करना है। हाईपरटेंशन के लिए कई इलाज किडनी की बीमारी को रोकते हैं और किडनी के फेल होने की संभावना को कम से कम करते हैं।



आप अपने ब्लड प्रेशर की नियमित जाँच कर किडनी का बचाव कर सकते हैं। और यह दबाव 130/80 मि.मी. पारे के दाब से अधिक नहीं होना चाहिए। जीवनशैली में बदलाव जैसे नियमित कसरत और फाइबर की प्रचुरता वाला आहार जिनमें सब्जियाँ और फल शामिल हैं, आपकी किडनी की सुरक्षा करते हैं। नियमित रक्त और पेशाब की जाँच द्वारा किडनी की बीमारी की पहचान बहुत पहले ही की जा सकती है।
किडनी अकर्मण्यता(किडनी फेलयोर)  रोग मे  हर्बल चिकित्सा के अनुकूल परिणाम प्राप्त  होते हैं| डायलिसिस की आवश्यकता मे कमी आने लगती है|वैध्य दामोदर 9826795656 द्वारा बनाई गई हर्बल औषधि से  क्रिएटनीन और यूरिया की मात्रा नार्मल होने मे मदद  मिलती है|