2016-04-01

अलसी के तेल के फायदे health benefits of linseed oil




भारत देश के कुछ प्रांतों में अलसी का तेल खाद्य तेलों के रूप में आज भी प्रचलन में है। धीरे-धीरे अलसी को हम भूलते जा रहे हैं, परंतु अलसी पर हुए नए शोध-अध्ययनों ने बड़े चमत्कारी प्रभाव एवं चैंकाने वाले तथ्य दुनिया के सामने लाए हैं। आज सारे संसार में इसके गुणगान हो रहे हैं। विशिष्ट चिकित्सकों की सलाह में भी अलसी के चमत्कारों की महिमा गाई जा रही है।
*अलसी की तरह अलसी के बीजों में मौजूद ढेर सारा तेल भी अनेक प्रकार की औषधियों का भंडार  है।
*अलसी में 23 प्रतिशत ओमेगा-3 फैटी एसिड, 20 प्रतिशत प्रोटीन, 27 प्रतिशत फाइबर, लिगनेन, विटामिन बी ग्रुप, सेलेनियम, पोटेशियम, मेगनीशियम, जिंक आदि होते हैं। जिसके कारण अलसी शरीर को स्वस्थ रखती है व आयु बढ़ाती है। इन्हीं गुणों  के कारण अलसी को सुपर  फूड भी कहा जाता है।
*अलसी का तेल खाने की लालसा और चर्बी को कम करती है और शरीर में बी.एम.आर. और शक्ति व स्टेमिना बढ़ाती है। साथ ही इसका सेवन आलस्य दूर और वजन कम करने में सहायता करता है। साथ ही ओमेगा-3 और प्रोटीन मांस-पेशियों का विकास करते हैं अतः बॉडी बिल्डिंग के लिये भी श्रेष्ठ प्रकार का  पूरक आहार    है अलसी।
*अलसी की तरह अलसी के बीजों में मौजूद ढेर सारा तेल भी अनेक प्रकार की औषधियों का भंडार  है। इसमें विटामिन ई और ओमेगा 3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा इसमें अनेकों तत्व जैसे पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, लोहा, कॉपर, ​जिंक, प्रोटीन, विटामिन बी आदि भी पाये जाते हैं।


*हड्डी टूटने के बाद जुड़ने पर भी उस जगह  की मांसपेशियां अकड़ जाती हैं। उस परिस्थिति में अलसी के तेल की लगातार मालिश करने से मांसपेशियां मुलायम हो जाती है।
*अलसी के शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट ओमेगा-3 व लिगनेन त्वचा के कोलेजन की रक्षा करते हैं और त्वचा को आकर्षक, कोमल, नम, बेदाग व गोरा बनाते हैं। अलसी सुरक्षित, स्थाई और उत्कृष्ट भोज्य सौंदर्य प्रसाधन है जो त्वचा में अंदर से निखार लाता है|
*अलसी में विद्यमान ओमेगा-3 फैट, जिंक और मेगनीशियम आपके शरीर में पर्याप्त टेस्टोस्टिरोन हार्मोन और उत्कृष्ट श्रेणी के फेरोमोन ( आकर्षण के हार्मोन) स्रावित होंगे। टेस्टोस्टिरोन से आपकी कामेच्छा चरम स्तर पर होगी। आपके साथी से आपका प्रेम, अनुराग और परस्पर आकर्षण बढ़ेगा। आपका मनभावन व्यक्तित्व, मादक मुस्कान और षटबंध उदर देख कर आपके साथी की कामाग्नि भी भड़क उठेगी।
*वसा रहित होने के कारण अलसी के तेल से बना खाना दिल के रोगों से दूर रखता है। अलसी का तेल व बीज कोलेस्ट्रोल को कम करने के साथ हृदय संबंधी अन्य रोगों से बचाता है। साथ ही अलसी का तेल एनजाइना व हाइपरटेंशन से भी बचाता है।
*अलसी का तेल शर्करा  को नियंत्रित ही नहीं करता, बल्कि मधुमेह के दुष्प्रभावों से सुरक्षा और उपचार भी करता है। अलसी में रेशे भरपूर 27 प्रतिशत लेकिन  शर्करा  की मात्रा मात्र 1.8 प्रतिशत यानी न के बराबर होती है। इसलिए यह शून्य-शर्करा आहार कहलाती है और मधुमेह के लिए आदर्श आहार है।
*आयुर्वेद के अनुसार, हर बीमारी की जड़ हमारा पेट है और पेट को साफ रखने में अलसी का तेल इसबगोल से भी अधिक  प्रभावशाली होता है। पेट से जुड़ी बीमारियां जैसे आई.बी.एस., अल्सरेटिव कोलाइटिस, अपच, बवासीर, मस्से आदि का भी उपचार करती है अलसी|  देखेंगे की अलसी के सेवन से कैसे प्रेम और यौवन की रासलीला सजती है, जबर्दस्त अश्वतुल्य स्तंभन होता है, जब तक मन न भरे सम्भोग का दौर चलता है, देह के सारे चक्र खुल जाते हैं, पूरे शरीर में दैविक ऊर्जा का प्रवाह होता है और सम्भोग एक यांत्रिक क्रीड़ा न रह कर एक आध्यात्मिक उत्सव बन जाता है, समाधि का रूप बन जाता है।



*अलसी के तेल और चूने के पानी का इमल्सन आग से जलने के घाव पर लगाने से घाव बिगड़ता नहीं और जल्दी भरता है।
*अलसी तेल के सेवन से झुंझलाहट या क्रोध नहीं आता, मन प्रसन्‍न रहता है इसलिए इसे फीलगुड फूड भी कहा जाता है। इसके सेवन से सकारात्‍मक सोच बनी रहती है और आपके तन, मन और आत्मा को शांत और सौम्य कर देती है।
*डायबिटीज़ के रोगियों के पैर में घाव हो जाते हैं जो जल्दी भरते नहीं हैं, ऐसी स्थिति में अलसी के तेल की मालिश करने से रक्‍त संचार सुचारू रूप से होता है एवं घाव भी जल्दी भर जाते हैं। साथ ही आग से जले हुए घाव पर इस तेल का फोहा लगाने से जलन और दर्द में तुरन्त राहत मिलती है।बवासीर, भगदर, फिशर आदि रोगों में अलसी का तेल (एरंडी के तेल की तरह) लेने से पेट साफ हो मल चिकना और ढीला निकलता है। इससे इन रोगों की वेदना शांत होती है।
*अलसी के तेल का पनीर के साथ इस्‍तेमाल करने से डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, अर्थराइटिस, हार्ट अटैक, अस्थमा और डिप्रेशन आदि जैसी बीमारियों से राहत पाई जा सकती है। अलसी के तेल का पनीर के साथ उपयोग करने से सल्फर युक्त प्रोटीन मिलता है।