2016-05-12

मालिश के लाभ Benefits of massage





कमर दर्द रहता है? पैरों की सूजन और दर्द सोने नहीं देते? दवा खाते-खाते थक चुके हैं या फिर दिन भर के काम के बाद शरीर की थकान बेचैन करती है तो किसी अच्छे विशेषज्ञ से मालिश करवाना दवा और व्यायाम की तरह ही राहत देता है। परंपरागत आयुर्वेदिक मालिश से लेकर इन दिनों कई मसाज थेरेपी चलन में हैं-

मालिश तन और मन को तनावमुक्त करने और उसे ताजगी देने का अचूक नुस्खा माना जाता है। मालिश का इतिहास 5000 साल से भी पुराना माना जाता है। दुनियाभर में करीब 200 तरह की मालिश की जाती हैं। नवजात शिशु से लेकर गर्भवती महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों के लिए खास तरह की मसाज थेरेपी हैं। यही नहीं सिर, चेहरे, गर्दन, हाथों, पैरों, कमर के लिए भी अलग-अलग तरह की मसाज हैं। नियमित मालिश कराने वाले खुद को अधिक युवा, ऊर्जावान व स्वस्थ अनुभव करते हैं।
मालिश के प्रकार -
आम धारणा है कि किसी तेल का उपयोग करते हुए हथेलियों और उंगलियों से शरीर को रगड़ना और दबाव डालना मालिश करना होता है, जबकि ऐसा नहीं है। हर तरह की मसाज की अलग तकनीक होती है और उसके लाभ भी। प्रचलित मसाज के तरीके…
अभयानगम
आयुर्वेदिक मसाज को अभयानगम कहते हैं। इस मालिश में भाप स्नान कराया जाता है और चिकित्सकीय गुणों वाले हर्बल तेल से मालिश की जाती है। एक साथ दो थेरेपिस्ट बड़े तालमेल के साथ यह मालिश करते हैं। इसमें लगभग 45 मिनट का समय लगता है। कितना दबाव व स्ट्रोक दिया जाएगा, यह व्यक्ति विशेष की स्थिति पर निर्भर करता है। मालिश के बाद अंत में भाप दी जाती है।
लाभ: ‘शरीर को ऊर्जा मिलती है व इम्यून तंत्र मजबूत होता है।
‘नींद अच्छी आती है। त्वचा मुलायम होती है व उसमें कसाव आता है।
तेलधारा
तेलधारा एक प्रसिद्ध केरल मसाज है। इसमें पूरे शरीर को कुनकुने औषधीय गुणों से युक्त तेल की धारा से नहला दिया जाता है। इसके बाद दो से तीन थेरेपिस्ट हल्के हाथों से पूरे तालमेल के साथ मसाज करते हैं।
लाभ: ‘उत्तेजना कम होती है। दर्द में आराम मिलता है। अवसाद दूर होता है। ‘रक्तदाब नियंत्रित रहता है। जोड़ों का दर्द, लकवा व तंत्रिका तंत्र से जुड़े रोगों के उपचार में राहत मिलती है।
स्वीडिश मसाज थेरेपी
यह सबसे प्रचलित मसाज थेरेपी है। इसमें लंबे व हल्के स्ट्रोक लगाए जाते हैं, मांसपेशियों की सबसे ऊपरी परत पर थपथपाने वाले स्ट्रोक भी लगाए जाते हैं। हथेली व उंगलियों की मदद से गोलाकार गतियां दी जाती हैं। मसाज लोशन या तेल का उपयोग किया जाता है। यह बड़ी धीमी और आरामदायक होती है।
लाभ: ‘खून में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है। ‘मांसपेशियों से विषैले पदार्थ दूर होते हैं व तनाव में कमी आती है। जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है। शरीर को ऊर्जा मिलती है। चोटिल होने की स्थिति में भी यह मालिश की जाती है।
अरोमा थेरेपीइसमें व्यक्ति की जरूरत के अनुसार एक या दो खुशबूदार पौधों के तेल का उपयोग किया जाता है। यह मसाज भावनात्मक तनाव को कम करने के लिए जानी जाती है। शरीर को ऊर्जा मिलती है।
हॉट स्टोन मसाज



यह मसाज गर्म और चिकने पत्थरों से की जाती है। इन पत्थरों को शरीर के निश्चित बिंदुओं पर रखा जाता है, ताकि कड़ी हो चुकी मांसपेशियों को ढीला किया जा सके और शरीर में ऊर्जा के केंद्रों को संतुलित किया जा सके। पत्थरों की गर्मी बहुत आराम पहुंचाती है। हॉट स्टोन मसाज उनके लिए बहुत उपयोगी है, जिन्हें मांसपेशियों में खिंचाव व अकड़न महसूस हो रही हो। गर्म पत्थरों के जरिए शरीर में अंदर तक गर्मी पहुंचायी जाती है।
डीप टिश्यु मसाज
डीप टिश्यू मसाज मांसपेशियों की गहरी परत को आराम पहुंचाने के लिए की जाती है। इसमें बहुत धीमे, लेकिन गहरे स्ट्रोक लगाए जाते हैं। इस मसाज के बाद ढेर सारा पानी पीने को कहा जाता है, जिससे टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं। यह मांसपेशियों की जकड़न, खिंचाव,पॉश्चर बिगड़ने, कमर दर्द और किसी चोट से उबरने में बड़ी कारगर है। इसके बाद एक-दो दिन तक शरीर में हल्का दर्द रह सकता है।
लाभ: ‘मांसपेशियों को आराम पहुंचाती है। तनाव व दर्द में आराम मिलता है।
‘रक्तदाब को कम करती है। खून का संचार सही होता है।
शियात्सु
यह मालिश की जापानी विधि है। शियात्सु का मतलब होता है ‘फिंगर प्रेशर’। इसमें शरीर पर उंगलियों से दबाव डाला जाता है। एक्युप्रेशर बिंदुओं पर दो से आठ सेकेंड के लिए रुका जाता है, ताकि ऊर्जा का प्रवाह सुधारा जा सके। पहली बार करवाने वालों को इससे आश्चर्यजनक रूप से सुखद अनुभव होता है। इससे शरीर के कुछ खास बिंदुओं पर दबाव पड़ता है। दर्द का अनुभव नहीं होता।
लाभ
‘सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। मांसपेशियों के दर्द में कमी होती है।
‘यह अनिद्रा और अवसाद से निबटने में सहायता करती है।
थाई मसाज
थाई मसाज की शुरुआत तो भारत में हुई, लेकिन यह थाईलैंड में इतनी लोकप्रिय हुई कि इसका नाम ही थाई मसाज पड़ गया। यह प्राचीन हीलिंग थेरेपी का ही एक रूप है। इसमें शरीर के विशेष ऊर्जा बिंदुओं को धीरे-धीरे दबाया जाता है। इसमें दबाव और खिंचाव भी शामिल होते हैं। यह मसाज बिना तेल के की जाती है। शरीर के कई हिस्सों को स्ट्रेच किया जाता है, जैसे हाथों और पैरों की उंगलियों को खींचना, उंगलियों को चटकाना, पीठ पर कोहनियों से दबाव डालना आदि। यह मसाज लेटे-लेटे योग करने के समान है, इसलिए इसे थेरेपी भी कहते हैं। इस मसाज से शरीर को ऊर्जा मिलती है। तनाव कम होता है और लचीलापन बढ़ता है। शरीर को आराम पहुंचाने के साथ ही आंतरिक कार्यप्रणाली में सुधार होता है।
मालिश के लाभ
‘आधुनिक शोधों में भी यह बात सामने आयी है कि मालिश के बाद ऊतकों की मरम्मत का काम तेज हो जाता है। मांसपेशियों का तनाव व दर्द कम होता है। मांसपेशियों को फुलाने वाले रसायन साइटोकाइनेस का निर्माण कम होता है।
‘मांसपेशियों, ऊतकों और लिगामेंट्स में रक्त का संचार बढ़ता है।
‘मसाज तनाव को कम कर क्रोध, हताशा और अवसाद को कम करती है और अप्रत्यक्ष रूप से सिरदर्द, पाचन तंत्र संबंधी गड़बडि़यों, अनिद्रा, अल्सर, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और स्ट्रोक को रोकने में भी मददगार होती है।
‘शरीर का पॉश्चर सुधरता है। त्वचा की रंगत में सुधार आता है।
‘जोड़ों का दर्द कम होता है और उनका लचीलापन बढ़ता है।
‘तनाव पैदा करने वाले हार्मोन, कार्टिसोल का स्तर कम होता है। मूड अच्छा करने वाले हार्मोन सेरेटोनिन का स्तर बढ़ता है।
मालिश से अधिकतम लाभ के लिए:
‘मालिश हमेशा बंद कमरे में या ऐसे स्थान पर करें, जहां धूप आ रही हो।
‘मालिश करने के तुरंत बाद न नहाएं। कम से कम 15 मिनट का अंतराल रखें। थोड़ी देर धूप में बैठने से तेल अवशोषित हो जाता है।
‘मालिश के तुरंत बाद कूलर या एसी वाले कमरे में न जाएं।
‘मालिश किसी विशेषज्ञ से ही कराएं। अधिक दबाव या दर्द होना मालिश होना नहीं है।
कौन सा तेल है बेहतर
आमतौर पर मालिश करने के लिए उसी तेल का इस्तेमाल किया जाता है, जो उस मसाज तकनीक के अनुरूप हो। कई बार तेल का चयन व्यक्ति विशेष की जरूरत के अनुसार भी किया जाता है। कई तेलों को दो तीन तेलों में जड़ी-बूटियों के मिश्रण से भी तैयार किया जाता है।
अलसी का तेल: त्वचा से संबंधित रोगों के उपचार में यह तेल काफी कारगर है। रक्त संचार भी नियमित होता है।
नारियल का तेल : यह तेल मसाज के लिए इस्तेमाल होने वाले सबसे प्रचलित तेलों में से एक है। इसका उपयोग थकान दूर करने और शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ाने के लिए किया जाता है। यह त्वचा की सुंदरता भी बढ़ाता है।
रोजमेरी तेल : यह रक्त संचरण को सुधारने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। बालों के विकास और मानसिक सक्रियता बढ़ाने के लिए इस तेल का इस्तेमाल होता है।



सरसों का तेल: सभी प्रकार की सूजन में गर्म सरसों के तेल से मसाज करना फायदा पहुंचाता है। जिन लोगों की तिल्ली या प्लीहा बढ़ा हुआ है, अगर वो कुनकुने सरसों के तेल से मालिश करें तो उन्हें आराम मिलेगा। सर्दी और कफ से परेशानी होने पर सरसों के तेल में कुछ लहसुन की कलियों को डाल कर गर्म कर लें। खासकर छाती पर मालिश करने से सर्दी और कफ में आराम मिलता है।
जैतून का तेल: कमजोर, बूढ़े बच्चों और बीमार लोगों के लिए जैतून के तेल से मालिश करने की सलाह दी जाती है। यह सूजन, दर्द, मांसपेशियों का कड़ापन दूर करता है और त्वचा में निखार लाता है।
तिल का तेल : आयुर्वेद में इस तेल का बहुत उपयोग किया जाता है। सामान्य मसाज के लिए यह सबसे उपयोगी माना जाता है। त्वचा के अलावा इसे जोड़ों के दर्द में फायदेमंद माना जाता है।
जिंजर ऑयल: मांसपेशियों का कड़ापन दूर करने के लिए अदरक के तेल में इलायची मिला कर मसाज करें। अगर शरीर कड़ा हो गया हो तो जिंजर ऑयल से मालिश करने से लचीलापन बढ़ता है।
मालिश की सही तकनीक
मसाज को या तो पैरों से शुरू किया जा सकता है या सिर से। अगर आप पैरों से शुरू करते हैं तो इसके बाद टांगों, फिर हाथों, पेट, कमर, छाती, गर्दन, कंधे, चेहरे और अंत में सिर की मसाज करनी चाहिए।
जो भी तेल आप मसाज के लिए इस्तेमाल करें, उसे पहले कुनकुना गर्म कर लें। पहले इस तेल को उस भाग पर लगाएं, जिसकी मसाज करनी है। फिर धीरे-धीरे हथेलियों से मसाज करें, जब तक कि तेल त्वचा में अवशोषित न हो जाए। इसके बाद हथेलियों और उंगलियों द्वारा ऊपर की ओर स्ट्रोक लगाएं। स्ट्रोक्स की गति एक समान (न बहुत तेज, न बहुत धीमी) होनी चाहिए। और प्रेशर केवल मांसपेशियों पर लगाना चाहिए, हड्डियों पर नहीं। शरीर के अलग-अलग भागों की मसाज करने के लिए उंगलियों और हाथों की मूवमेंट अलग-अलग होती है, इसलिए मसाज प्रशिक्षित व्यक्ति से ही कराएं।
मालिश  के मामले मे सावधानियाँ -
चिकित्सा जगत हालांकि शरीर पर मालिश के सकारात्मक प्रभावों को मानता है, पर पूरी तरह मान्यता नहीं देता। ठीक तरह से या प्रशिक्षित लोगों द्वारा मालिश न किए जाने पर कई बार राहत मिलने की जगह दर्द बढ़ जाता है।
‘मसाज कराने के दूसरे दिन शरीर में दर्द हो सकता है, विशेषकर डीप टिश्यू मसाज के बाद, क्योंकि इसमें धीमे, लेकिन दबाव वाले स्ट्रोक लगाए जाते हैं।
‘कई बार मसाज के बाद खून में शर्करा का स्तर कम हो जाता है।
‘डीप टिश्यू मसाज में अगर थेरेपिस्ट ज्यादा प्रेशर लगा दे तो तंत्रिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है, विशेषकर गर्दन और कंधे के क्षेत्र की तंत्रिकाओं को।
ये लोग मसाज से रहें दूर
‘ जिन लोगों को त्वचा का संक्रमण है या खुले जख्म हैं या फिर तुरंत सर्जरी हुई है।
‘कीमोथेरेपी और रेडिएशन के तुरंत बाद, जब तक कि डॉक्टर ने न सुझाया हो।
‘जिन लोगों में खून में थक्का बनने की समस्या है, उन्हें मालिश नहीं करवानी चाहिए या विशेषज्ञों की राय से ही ऐसा करना चाहिए।
‘ हृदय रोगियों को भी खास सावधानी रखने की जरूरत है।
‘गर्भवती महिलाएं भी बिना डॉक्टर से सलाह लिए मसाज न कराएं। उन्हीं से मालिश करवाएं, जिन्होंने इसमें प्रमाण-पत्र हासिल किया हुआ है।
‘शरीर के जिस हिस्से में फ्रेक्चर हुआ हो, उस हिस्से में भी तुरंत मालिश नहीं करानी चाहिए।

बरतें सावधानी
‘ मसाज करवाने से पहले भारी खाना न खाएं।
‘कम से कम दस मिनट के लिए अपने शरीर को ढीला छोड़ दें। साफ-सफाई का ध्यान रखें।