2016-07-16

चिरोंजी के फायदे //The advantages of Chironji


       चिरौंजी को भला कौन नहीं जानता। यह हर घर में एक सूखे मेवे की तरह प्रयोग की जाती है। इसका प्रयोग भारतीय पकवानों, मिठाइयों और खीर व सेंवई इत्यादि में किया जाता है। चिरौंजी को चारोली के नाम से भी जाना जाता है। चारोली का वृक्ष अधिकतर सूखे पर्वतीय प्रदेशों में पाया जाता है। दक्षिण भारत, उड़ीसा, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, छोटा नागपुर आदि स्थानों पर यह वृक्ष विशेष रूप से पैदा होता है।
चारोली का उपयोग अधिकतर मिठाई में जैसे हलवा, लड्डू, खीर, पाक आदि में सूखे मेवों के रूप में किया जाता है।
   मीठी चीजों में खासतौर पर इस्तेमाल होने वाली चिरौंजी में कई ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. चिरौंजी में प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा पाई जाती है. इसके अलावा इसमें विटामिन सी और बी भी पर्याप्त मात्रा में होता है. वहीं इससे निर्मित तेल में अमीनो एसि‍ड और स्टीएरिक एसि‍ड भी पाया जाता है.
   हालांकि यह एक महंगा ड्राई फ्रूट है पर इससे होने वाले स्वास्थ्य लाभ वाकई बेजोड़ हैं.
चिरौंजी स्‍वास्‍थ्‍य और सौंदर्य दोनों के लिहाज से बहुत अच्‍छी मानी जाती है
चिरौंजी का लेप लगाने से चेहरे के मुंहासे, फुंसी और अन्‍य चर्म रोग दूर होते हैं। चिरौंजी को खाने से ताकत मिलती है, पेट में गैस नहीं बनती एंव शिरःशूल को मिटाने वाली होती है। चिरौंजी का पका हुआ फल मधुर, स्निग्ध, शीतवीर्य तथा दस्तावार और वात पित्त, जलन, प्यास और ज्वर का शमन करने वाला होता है।
खूनी दस्‍त रोके-
5-10 ग्राम चारोली को पीसकर दूध के साथ लेने से खूनी दस्त में लाभ होता है।
खांसी में-
खांसी में चिरौंजी का काढ़ा बनाकर सुबह-शाम पीने से लाभ मिलता है।
चिरौंजी पौष्टिक भी होती है, इसे पौष्टिकता के लिहाज से बादाम के स्थान पर इस्तेमाल कर सकते हैं।
किसी को शारीरिक कमजोरी हो तो उसके लिए चिरौंजी खाना बहुत फायदेमंद होता है. यह शारीरिक कमजोरी को दूर करने के साथ ही क्षमता का विकास भी करता है.
बालों को काला करे
चिरौंजी का तेल बालों को काला करने के लिए उपयोगी है
चेहरे को सुंदर बनाने के लिये
चिरौंजी को गुलाब जल के साथ पीस कर चेहरे पर लेप लगाएं। फिर जब यह सूख जाए तब इसे मसल कर धो लें। इससे चेहरा चिकना, सुंदर और चमकदार बन जाएगा।
सर्दी-जुकाम में भी इसका सेवन फायदेमंद होता है. इसे दूध के साथ पकाकर प्रयोग में लाने से इस तकलीफ में फायदा होता है|.
चमकती त्वचा - चारोली को गुलाब जल के साथ सिलबट्टे पर महीन पीस कर लेप तैयार कर चेहरे पर लगाएँ। लेप जब सूखने लगे तब उसे अच्छी तरह मसलें और बाद में चेहरा धो लें। इससे आपका चेहरा चिकना, सुंदर और चमकदार हो जाएगा। इसे एक सप्ताह तक हर रोज प्रयोग में लाए। बाद में सप्ताह में दो बार लगाते रहें। इससे आपका चेहरा लगेगा हमेशा चमकदार।
गीली खुजली - अगर आप गीली खुजली की बीमारी से पीड़ित हैं तो 10 ग्राम सुहागा पिसा हुआ, 100 ग्राम चारोली, 10 ग्राम गुलाब जल इन तीनों को साथ में पीसकर इसका पतला लेप तैयार करें और खुजली वाले सभी स्थानों पर लगाते रहें। ऐसा करीबन 4-5 दिन करें। इससे खुजली में काफी आराम मिलेगा व आप ठीक हो जाएँगे।


मुंहासों को दूर करे
संतरे के छिलके और चिरौंजी को दूध के साथ पीस कर चेहरे पर लेप लगाएं। जब लेप सूख जाए तब चेहरे को धो लें। एक हफ्ते तक प्रयोग के बाद भी असर न दिखाई दे तो लाभ होने तक इसका प्रयोग जारी रखें।
चिरौंजी में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है. कुछ मात्रा में इसके सेवन से शरीर की प्रोटीन की आवश्यकता पूरी हो जाती है. आप चाहें तो इसे कच्चे रूप में भी खा सकते हैं या फिर किसी भी स्वीट डिश के साथ पकाकर ले सकते हैं.


*चिरौंजी बीज, कैलोरी में अपेक्षाकृत कम होते हैं। यह प्रोटीन और वसा का एक अच्छा स्रोत हैं। इनमे फाइबर की भी अच्छी मात्रा होती हैं।इसके अतिरिक्त इसके विटामिंस जैसे की, विटामिन सी , विटामिन बी 1, विटामिन बी 2 और नियासिन आदि भी होते है। खनिज जैसे की, कैल्शियम, फास्फोरस और लोहे भी इन बीजों में उच्च मात्रा में पाए जाते हैं।
*चिरौंजी (मेवे के रूप में), एक टॉनिक है। यह मदुर, बलवर्धक, वीर्यवर्धक, वाट और पित्त को कम करने वाली, दिल के लिए अच्छी, विष को नष्ट करने वाली और आम्वर्धक है
*शीत पित्ती - शरीर पर शीत पित्ती के ददोड़े या फुंसियाँ होने पर दिन में एक बार 20 ग्राम चिरौंजी को खूब चबा कर खाएँ। साथ ही दूध में चारोली को पीसकर इसका लेप करें। इससे बहुत फायदा होगा। यह नुस्खा शीत पित्ती में बहुत उपयोगी है।*सांस की समस्याओं के उपचार में भी किया जाता है। यह श्लेष्मा को ढीला करने में भी मदद करता है और नाक और छाती की जकडन में राहत देता है। यह एंटीऑक्सिडेंटहै। चिरौंजी की बर्फी खाने से शरीर में बल की वृद्धि  होती है | चिरौंजी पित्त, कफ तथा रक्त विकार नाशक है ।*चिरौंजी भारी, चिकनी, दस्तावर, जलन, बुखार और अधिक प्यास को दूर करती है ।चिरौंजी को खाने से शरीर में गरमी कम होती और ठंडक मिलती है।. इसके १०-२० ग्राम दाने चबाने से शीत-पित्त या छपाकी में राहत मिलती है।