• लौकी के रस में, पांच पुदीने की पत्तियां और तुलसी की 10 पत्तियों का रस निकाल लें और इस रस को दिन में तीन बार यानी सुबह, दोपहर और रात को भोजन के आधा घंटा बाद लेना चाहिए। पहले तीन-चार दिन रस की मात्रा कुछ कम ली जा सकती है। बाद में ठीक से हजम होने पर रोजाना तीन बार 250 मिलीलीटर रस लें। रस हर बार ताजा लेना चाहिए।
• घीये का रस पेट में जो भी पाचन विकार होते हैं, उन्हें दूर करके मल के द्वारा बाहर निकाल देता है, जिसके कारण शुरुआत में पेट में कुछ खलबली, गड़गड़ाहट आदि महसूस होती है, जोकि एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। इससे घबराना नहीं चाहिए। तीन-चार दिन में पेट के विकार दूर होकर सामान्य स्थिति हो जाती है। इसे नियमित दो-तीन मास आवश्यकतानुसार लेने से हृदय रोगी ठीक होने लगता है और बाईपास सर्जरी कराने की जरूरत नहीं पड़ती है।
 
20. . होठों के लिए:
 लौकी के बीजों को पीसकर होठों पर लगाने से जीभ और होठों के छाले ठीक हो जाते हैं।
21. कंठमाला: 
लौकी के तूंबे में सात दिन तक पानी भरकर रख दें। सात दिन बाद इस पानी को पीने से कंठमाला (गले की गांठे) बैठ जाती हैं।पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने के लिए |अगर आपको पाचन क्रिया से जुड़ी कोई समस्या है तो लौकी का जूस आपके लिए बेहतरीन उपाय है. लौकी का जूस काफी हल्का होता है और इसमें कई ऐसे तत्व होते हैं जो कब्ज और गैस की समस्या में राहत देने का काम करते हैं.
22. शरीर को शक्तिशाली बनाना: 
घिया या लौकीके पत्तों का काढ़ा बनाकर पीने से शरीर की शक्ति बढ़ती है।
कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए
लौकी का इस्तेमाल करना दिल के लिए बेहद फायदेमंद होता है. इसके इस्तेमाल से हानिकारक कोलेस्ट्रॉल कम हो जाता है. कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होने से दिल से जुड़ी कई बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है. 

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