16.2.20

आँखों की देखभाल और रोगों की चिकित्सा



वैसे तो प्रकृति ने हमारी आंखों की रक्षा का प्रबंध बहुत ही अच्छे ढंग से कर रखा है। आंखों की बनावट इस प्रकार की है कि हडि्डयों से बने हुए कटोरे इनकी रक्षा करते हैं। आंखो के आगे जो दो पलकें होती हैं वे आंखों में धूल तथा मिट्टी तथा अन्य चीजों से रक्षा करती है। आंखो की अन्दरुनी बनावट भी इस प्रकार की है कि पूरी उम्र भर आंखे स्वस्थ रह सकती हैं। सिर्फ आंखों की अन्दरूनी रक्षा के लिए उचित आहार की जरुरत होती है जिसके फलस्वरूप आंखें स्वस्थ रह सकती हैं। सभी व्यक्तियों की आंखें विभिन्न प्रकार की होती हैं तथा उनके रंग भी अलग-अलग हो सकते हैं।
आंख के श्वेत भाग के रोग:- 
इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति की आंख में जो श्वेत (सफेद भाग) होता है उस भाग में लाली या बिन्दु जैसा कोई आकार बन जाता है।

दृष्टिदोष से सम्बन्धित रोग:- 

इस रोग से पीड़ित रोग को आंखो से कुछ भी नहीं दिखाई देता है।
आंखो के आगे अन्धेरा छा जाना:- इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति की आंखो के आगे अन्धेरा छाने लगता है तथा उसे कुछ भी नहीं दिखाई देता है।

आंखो से धुंधला नजर आना:-

इस रोग के कारण रोगी को आंखो से धुंधला नजर आने लगता है।

गुहांजनी (बिलनी या अंजनिया):-

इस रोग के होने के कारण रोगी व्यक्ति की आंखो की पलकों पर फुन्सियां हो जाती हैं।

मोतियाबिन्द:-

इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति की आंखो के काले भाग में सफेदी सी छा जाती है जिसके कारण रोगी व्यक्ति को कम दिखाई पड़ने लगता है तथा उसकी आंखो का लेंस धीरे-धीरे धुंधला हो जाता है।

आंखो में खुजली होना:-

इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति की आंखो में खुजली होने लगती है जो किसी अन्य रोग के होने का लक्षण भी हो सकता है।

आंखो में रोहे, रतौंधी:-

इस रोग से पीड़ित रोगी को रात के समय में दिखाई नहीं देता है।

आंखें पीली होना:- 

शीघ्र पतन से निजात पाने के उपचार 

इस रोग के कारण रोगी की आंखो का सफेद भाग पीला हो जाता है। यह पीलिया रोग का लक्षण होता है।

बरौनियों का झड़ना:-

इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति की आंखो की पलकों के बाल झड़ने लगते हैं।

दूर दृष्टिदोष:–

इस रोग से पीड़ित रोगी को दूर की वस्तुएं ठीक से दिखाई नहीं देती हैं या दिखाई देती भी हैं तो धुंधली-धुंधली सी।

निकट दृष्टिदोष –

इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति को पास की वस्तुएं साफ-साफ दिखाई नहीं देती हैं।

अर्द्ध दृष्टिदोष (आंशिक दृष्टि):-

इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति को कोई भी वस्तु साफ-साफ दिखाई नहीं देती है।

वक्र दृष्टिदोष:-

इस रोग से पीड़ित रोगी को कोई भी वस्तु टेढ़ी-मेढ़ी दिखाई देती है।

दिनौंधी:-

इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति को दिन के समय में दिखाई नहीं देता है।

द्वि- दृष्टिदोष या भेंगापन:-

इस रोग के काण रोगी व्यक्ति को हर वस्तु 2 दिखाई देती हैं

वर्ण दृष्टिदोष या कलर ब्लाइण्डनेस:-

इस रोग से पीड़ित रोगी को आंखो से देखने पर किसी भी रंग की वस्तु के रंग की पहचान नहीं हो पाती है।


धूम दृष्टिदोष:-


इस रोग से पीड़ित रोगी को आंखो से देखने पर हर वस्तु धुंधली दिखाई देने लगती है।
कलान्तृष्टि:– 


इस रोग से पीड़ित रोगी जब किसी भी वस्तु को ज्यादा देर तक देखता है तो उसकी आंखो में दर्द होने लगता है।


नजर कमजोर पड़ जाना:-


इस रोग से पीड़ित रोगी को आंखो पर चश्मा लगवाने की जरूरत पड़ जाती है। इस रोग में बिना चश्मे के रोगी व्यक्ति को कुछ भी नहीं दिखाई देता है या दिखाई देता भी है तो बहुत कम।


क्रोनिक कंजक्टिवाइटिस: 


इस रोग से पीड़ित रोगी की आंखो से पानी निकलने लगता है तथा उसकी अश्रु ग्रन्थियां सूज जाती हैं। रोगी व्यक्ति को नींद भी नहीं आती है।


धुंआ : 


हमारे चारों ओर का वातावरण विषैले धुएं से भर चुका है जिसके कारण जब हमारी आंखें विषैली धुंए के संपर्क में आती है तो आंखो में विभिन्न प्रकार के विकार उत्पन्न हो जाते हैं।


धूल :


वर्तमान समय में हमारे चारों ओर के वातावरण में धूल के कण विद्यमान हैं। धूल के कारण भी हमारी आंखो में रोग उत्पन्न हो जाते हैं।


रात को काफी देर में सोना : 


रात को अधिक समय तक रोशनी में पढ़ना अथवा अधिक समय तक कार्य करना भी स्वास्थ्य की दृष्टि से आंखो के लिए हानिकारक होता है।


तेज धूप : 


गर्मियों के मौसम में दोपहर के समय तेज धूप की किरणें हमारे आंखो की रोशनी के लिए हानिकारक होती है।


अधिक समय तक एक ही स्थान पर देखते रहना :


आंखो को लगातार एक ही जगह जमाकर रखने वाले कार्य जैसे कम्प्यूटर पर एकटक देखते रहना भी आंखो की रोशनी के लिए हानिकारक होता है। इसलिए आंखो को एक स्थान से हटाकर कुछ देर के लिए इधर-उधर भी देखना चाहिए।


आंखो के खराब होने के प्रमुख कारण:-


आंखो के रोग होने के विभिन्न कारण होते हैं जैसे- 

*अधिक गर्म खाद्य-पदार्थों का सेवन, नशीले पदार्थ, धूल के कण, अधिक सोचना, कम्यूटर या टी.बी. पर अधिक समय आंखे टिकाए रहना, अधिक समय तक सेक्स सम्बंधी बातों में लिप्त रहना, मधुमेह या मूत्र रोगों के कारण पुरानी कब्ज का होना, पूरी नींद न लेना तथा भोजन में पोषक तत्वों और विटामिन `ए´ की कमी होना आदि।
*आंखो की कुछ बीमारियां अनुवांशिक होती हैं।
*अधिक ठंड तथा गर्मी के कारण आंखो में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं।
*उत्तेजक वस्तुओं के आंखो में प्रवेश करने के कारण भी आंखो के कई प्रकार के रोग हो सकते हैं।
*शरीर में दूषित द्रव्य के जमा होने के कारण भी आंखो में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं।
*अधिक शराब पीने तथा विभिन्न प्रकार की दवाइयों के एलर्जियों के होने से व्यक्ति का स्वास्थ्य खराब हो जाता है जिसके कारण उसकी आंखें में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं।
*शरीर में विटामिन ए तथा कई प्रकार के लवणों आदि की कमी के कारण आंखो के रोग हो सकते हैं।
अधिक पढ़ने-लिखने का कार्य करने तथा कोई भी ऐसा कार्य जिसके करने से आंखो पर बहुत अधिक जोर पड़ता है, के कारण आंखो में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं।
*अधिक टेलीविजन देखने तथा कम्प्यूटर पर कार्य करने के कारण भी आंखो में रोग हो सकते हैं।
*आंखो में धूल-मिट्टी तथा कीड़े-मकोड़े जाने के कारण भी आंखो में कई प्रकार के रोग हो जाते हैं।
रात के समय में अधिक देर तक जागने तथा कार्य करने और पूरी नींद न लेने के कारण आंखो में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं।
*कम्प्यूटर पर लगातार काम करने से उसकी स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी आंखो में कई प्रकार के रोगों को जन्म दे सकती है क्योंकि उसकी रोशनी आंखो के लिए हानिकारक होती है।
*पढ़ते समय आंखो पर अधिक जोर देने से, अधिक चिंता करने से, अधिक सोच-विचार का कार्य करने के कारण भी आंखो में कई प्रकार के रोग हो जाते हैं।
*बस, चलती हुई रेलगाड़ी, टिमटिमाते हुए बल्ब देखने या कम प्रकाश में पढ़ने के कारण भी आंखो के रोग हो सकते हैं।
*अधिक क्रोध करने के कारण आंखो पर जोर पड़ता है जिसके कारण आंखो में कई प्रकार के रोग हो जाते हैं।
अधिक दु:ख का भाव होने तथा रोने से आंखो से आंसू निकलते है जिसके कारण आंखो के रोग हो सकते हैं।
*सिर में किसी प्रकार से तेज चोट लगने के कारण भी आंखो में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं।
*जहर या अधिक उत्तेजक खाद्य पदार्थों का सेवन करने से भी आंखो के रोग हो सकते हैं।
सूर्य के प्रकाश को अधिक देर तक देखने के कारण भी आंखो के कई प्रकार के रोग हो सकते हैं।
वीर्य के वेग को बार-बार रोकने तथा सैक्स के प्रति कोई अनुचित कार्य करने जैसे हस्तमैथुन या गुदामैथुन करने के कारण भी आंखो के रोग हो सकते हैं।
अधिक संभोग करना तथा धातु रोग के कारण भी कई प्रकार के आंखो के रोग हो सकते हैं।
तेज बिजली की रोशनी में काम-काज करने के कारण भी आंखो के रोग हो सकते हैं।
दांतों से सम्बन्धित रोगों के होने के कारण भी आंखो में बहुत से रोग हो सकते हैं।
ठीक समय पर भोजन न करने, अनुचित ढंग से भोजन करने और जरूरत से अधिक भोजन करने के कारण भी आंखो से सम्बन्धित रोग हो सकते हैं।
मिट्टी के तेल वाली रोशनी में पढ़ने से, रास्ते में चलते-चलते पढ़ने से, दिन के समय में कृत्रिम रोशनी में कार्य करने तथा धूप में पढ़ने-लिखने का कार्य करने के कारण भी आंखो में रोग पैदा हो सकते हैं।
किसी भी न देखने योग्य या अनिच्छित वस्तु को देखने या किसी अंजान स्थान पर जाकर वहां की बहुत सी वस्तुओं को एक ही साथ देखने की कोशिश करने के कारण भी आंखो में रोग हो सकते हैं।
*चश्मे की आवश्यकता न होने पर भी अधिक समय तक चश्मा लगाए रखने के कारण भी आंखो के रोग हो सकते हैं।
*सोते समय अधिक सपनों को देखने के कारण भी आंखो में रोग हो सकते हैं।
*अपने सोने का स्थान खिड़की के ठीक सामने रखने के कारण भी आंखो में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं।
सिलाई-कढ़ाई आदि का कार्य करते समय, सीने-पिरोने का काम करते समय, सुई की गति के साथ नजर को घुमाने के कारण भी आंखो में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं।
*डर-चिंता, क्रोध, मानसिक रोग, दोषयुक्त कल्पना करने, अशुद्ध विचार रखने के कारण भी आंखो के बहुत से रोग हो सकते हैं।
*जब मन तथा आंखें आराम करना चाहते हो उस समय आराम न करने के कारण आंखो में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं।
*स्त्रियों में माहवारी से सम्बन्धित कोई रोग होने के कारण भी उसे आंखो के रोग हो सकते हैं।

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