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28.6.19

ईसबगोल की भूसी के फायदे



आयुर्वेद के अनुसार ईसबगोल मधुर, शीतल, स्निग्ध, चिकनी, मृदु, विपाक में मधुर, कफ व पित्त नाशक, पौष्टिक कसैली, थोड़ी वातकारक, रक्तपित्त व रक्तातिसार नाशक, कब्ज दूर करने वाली, अतिसार, पेचिश में लाभप्रद, श्वास व कास में गुणकारी, मूत्र रोग में लाभकारी है.
यूनानी मतानुसार, इसकी बीज शीतल एवं शांति दायक होते हैं. जीर्ण रक्तातिसार, अंतड़ियों की पीड़ा, कब्ज, मरोड़, अतिसार, पेचिस आंतों के व्रण, दमे की बीमारी, पित्त संबंधी विकार, ठंड और कफ की बीमारियों में भी लाभदायक है.
वैज्ञानिकों के अनुसार, ईसबगोल की रासायनिक संरचना का विश्लेषण करने पर यह पता चलता है कि इसके बीजों में 30% म्युसिलेज होता है जो Xylose, Arabinose और Galecturonic Acid से बना होता है. इसके अलावा म्युसिलेज में एक स्थिर तेल Aucubin 5% होता है. थोड़ी मात्रा में इसमें रह रैमनोज और गैलेक्टोज भी पाए जाते हैं. बीज मज्जा में कोलेस्ट्रॉल घटाने की छमता वाला 17.7 प्रतिशत लिनोलिक एसिड बहुल तेल होता है. एक भाग बीच में इतना म्युसिलेज होता है कि वह 20 भाग के जल में थोड़ी ही देर में जेली बना लेता है.बाजार में औषधि‍ के रूप में मिलने वाले ईसबगोल का उपयोग आपने कभी किया हो या न किया हो। लेकिन इसके गुणों को जानना आपके लिए बेहद फायदे का सौदा साबित हो सकता है। यदि‍ आप सोच रहे हैं कि वह कैसे, तो जरूर पढ़ें नीचे दिए गए ईसबगोल के उपाय -


1. डाइबिटीज - 
ईसबगोल का पानी के साथ सेवन, रक्त में बढ़ी हुई शर्करा को कम करने में मदद करता है।
2.अतिसार -
 पेट दर्द, आंव, दस्त व खूनी अतिसार में भी ईसबगोल बहुत जल्दी असर करता है, और आपकी तकलीफ को कम कर देता है ।
3.पाचन तंत्र - 
यदि आपको पाचन संबंधित समस्या बनी रहती है, तो ईसबगोल आपको इस समस्या से निजात दिलाता है। प्रतिदिन भोजन के पहले गर्म दूध के साथ ईसबगोल का सेवन पाचन तंत्र को दुरूस्त करता है।
4. जोड़ों में दर्द - 
जोड़ों में दर्द होने पर ईसबगोल का सेवन राहत देता है। इसके अलावा दांत दर्द में भी यह उपयोगी है। वि‍नेगर के साथ इसे दांत पर लगाने से दर्द ठीक हो जाता है।
5.वजन कम करे -
वजन कम करने के लिए भी फाइबर युक्त ईसबगोल उपयोगी है। इसके अलावा यह हृदय को भी स्वस्थ रखने में मदद करता है।
6. सर दर्द -
ईसबगोल का सेवन सि‍रदर्द के लिए भी उपयोगी है। नीलगिरी के पत्तों के साथ इसका लेप दर्द से राहत देता है, साथ ही प्याज के रस के साथ इसके उपयोग से कान का दर्द भी ठीक होता है।
7.सांस की दुर्गन्ध
ईसबगोल के प्रयोग से सांस की दुर्गन्ध से बचाता है, इसके अलावा खाने में गलती से कांच या कोई और चीज पेट में चली जाए, तो ईसबगोल सकी मदद से वह बाहर निकलने में आसानी होती है।
8.कफ - 
कफ जमा होने एवं तकलीफ होने पर ईसबगोल का काढ़ा बनाकर पिएं। इससे कफ निकलने में आसानी होती है।
9. नकसीर -
नाक में से खून आने पर ईसबगोल और सिरके का सर पर लेप करना, फायदेमंद होता है।
10. बवासीर -
 खूनी बवासीर में अत्यंत लाभकारी ईसबगोल का प्रतिदिन सेवन आपकी इस समस्या को पूरी तरह से खत्म कर सकता है। पानी में भि‍गोकर इसका सेवन करना लाभदायक है।
11.आंव
एक कप गरम दूध में एक चम्मच ईसबगोल डालें, फूलने पर रात्रि में सेवन करें | सुबह एक कप दही में एक चम्मच इसबगोल डालकर अच्छी तरह फुल जाने दें | अब इसमें इच्छानुसार थोड़ा जीरा , नमक और सौंठ मिलाकर लगातार तीन दिन तक सेवन करने से आंव आने की समस्या खत्म हो जाती है |
12.मुंह के छालों में फायदे
एक गिलास पानी में एक चम्मच इसबगोल भिगोकर दो घंटे बाद कुल्ला करने से आराम महसूस होता है | इसका चिकना गुण मुंह के छालों में आराम पहुंचता है |
13.पेट में मरोड़ या एंठन –
 ताजा दही या छाछ में एक चम्मच ईसबगोल की भूसी मिलाकर सेवन करने से पेट में उठने वाली मरोड़ एवं एंठन से आराम मिलता है | यह प्रयोग दिन में तीन या चार बार तक किया जा सकता है 
14.संग्रहणी रोग में फायदे
हरा बेलपत्र और ईसबगोल दोनों को सामान मात्रा में मिलाकर पिसलें | दो चम्मच की मात्रा गुनगुने दूध में मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने करें | यह प्रयोग कम से कम एक सप्ताह तक करें | काफी आराम मिलता है |
15.पेशाब में जलन – 
एक गिलास पानी में 2 चम्मच इसबगोल मिलाकर और साथ में स्वाद के अनुसार चीनी मिलाकर पिने से पेशाब में जलन की समस्या खत्म हो जाती है |


13.6.17

पाइल्स/बवासीर का होम्योपैथिक इलाज


• बवासीर के आकार भिन्न हो सकते हैं और गुदा के अंदर या बाहर पाए जाते हैं। पाइल्स गंभीर कब्ज, क्रोनिक डायरिया, भारी वजन उठाने, गर्भावस्था या तनाव के कारण उत्पन्न होते हैं| डॉक्टर आम तौर पर देख कर(परीक्षा करके) पता लगा सकते हैं| ग्रेड 3 या 4 बवासीर के लिए सर्जरी आवश्यक हो सकती है
• बढ़ती उम्र के कारण, अधिक देर तक बैठेने के वजह से बवासीर तीव्र हो सकता है और शौचालय दौरान तनाव के कारण बाहरी बवासीर हो सकते हैं।

नई और पुरानी खांसी के रामबाण उपचार 

• अगर कब्ज ना होतो, पहले और दूसरे डिग्री बवासीर आमतौर पर अपने आप ढल जाते हैं, लेकिन आपका डॉक्टर लक्षणों को दूर करने के लिए हार्मोराइड क्रीम का एक छोटा कोर्स लिख सकते है। तीसरे डिग्री के ढेर भी खुद से दूर हो सकते हैं, लेकिन यदि वे जारी रहें, तो उन्हें उपचार की आवश्यकता हो सकती है|

पाइल्स बवासीर में दर्द और खुजली को कम करने के लिए उपयोगी उपाय 


• गर्म स्नान, 15 मिनट के लिए गर्म पानी में भिगोएँ
• राहत के लिए लगाए विच-हजेल या अन्य होम्योपैथिक क्रीम (जैसे टोपी एस्कुलुस) या ओवर-द-काउंटर वाइप या क्रीम जो कोई साइड इफेक्ट के साथ दर्द और खुजली दूर कर सकते हैं।
• दर्द निवारक गोलियाँ लो (पेन किलर्स)
• प्रभावित भागों को खरोंचना नही
• कपास का इस्तेमाल करें
• तरल पदार्थ का खूब सेवन करें
• अधिक फाइबर खाएं
• उन खाद्य पदार्थों से बचें जो बवासीर को बदतर बनाते है
• बहुत आसान फिटिंग जांघिया पहने
• रसायनों से गुदा क्षेत्र को सुरक्षित रखें

हस्त  मेथुन जनित यौन दुर्बलता के उपचार 

 बवासीर का इलाज होम्योपैथी से 

एसिड नाइट्रिकम :


 आँतों में घोंपने का अहसास, काँटा चुभने जैसा दर्द, मलत्याग के दौरान संकुचन की अनुभूति के साथ में मलत्याग के बाद बनी रहने वाली पीड़ा ।

ऐस्क्युलस हिप. :

 गुदा से बाहर की ओर लटकते हुए बबासीरी मस्सों (गहरे लाल रंग के झूलते अर्श) की श्लैष्मिक झिल्ली का सूखापन तथा जलन । त्रिकास्थि (Sacral) भाग में हल्का-हल्का दर्द, शिरा सम्बन्धी स्थिरता ।

कॉलिन्सोनिया कैन : 

गोणिका (Pelvis) में शिरा सम्बन्धी संकुलन, कब्ज़ियत, पेट फूलना, खूनी बवासीर

*वात रोगों के प्राकृतिक ,आयुर्वेदिक घरेलू उपचार*

ग्रेफाइट्स : 

कब्ज़ियत, चिपचिपा पिंड जैसा मल, पेट फूलना, मलद्वार सम्बन्धी एक्ज़िमा,खुजली

हेमामेलिस :

 शिराओं का फूलना, बवासीर में से रक्तस्राव (Bleeding) ।

कालियम कार्ब : 

पीठ दर्द, पेट-फूलना, । कठोर मल, मलद्वार के मस्सों में जलन

लाइकोपोडियम :

अफारा, पेट फूलना, सूखे मल के साथ, अपूर्ण मलत्याग । रक्त जनित बवासीर साथ में गुदाभ्रंश तथा मलद्वार में ऐंठन । सामान्य रोगभ्रम (Hypochondria) तथा मंदाग्नि (dyspepsia), कब्ज़, पेट में रक्त का अधिक प्रवाह 
पीयोनिया : गीली बवासीर, पीड़ा-प्रद मलद्वार की फटन । बवासीर में खुजली और पीड़ा, साथ में रक्त स्राव की प्रवत्ति । गुदाद्वार की फटन (Rhagades or fissures) । मल त्याग के बाद बना रहने वाला दर्द ।

सल्फर : 

बहुप्रयुक्त एवं प्रभावशाली औषधि, मलद्वार में लाली, खुजली, एक्ज़िमा, अस्वस्थ त्वचा

खुराक की मात्रा : 

सामान्यतः प्रतिदिन 3 बार थोड़े पानी में 10-15 बूँदें ।तीक्ष्ण पीड़ा होने पर, उपचार के प्रारंभ में, दिन में 4-6 बार 10-15 बूँदें । रोग के पूरी तरह समाप्त हो जाने पर , कुछ लंबे समय तक प्रतिदिन एक या दो बार 10-15 बूँदें देते हुए उपचार जारी रखें ।
*कब्ज़ होने पर, साथ ही साथ मलत्याग को नियमित करना बहुत अधिक महत्वपूर्ण है । अतएव, नाश्ते और रात के खाने में रेचक आहार (fibrous food) लेने चाहिए, जैसे : पके फल, अलसी, हरी मटर, rye ब्रेड, खमीर, दही आदि । मैदे की रोटी, चॉकलेट, स्टार्च जैसे कब्ज़ करने वाले भोज्य पदार्थ न लें ।


किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचा

    

20.2.16

गाय के दूध के लाभ //Benefits of Cow's milk




      प्राकृतिक चिकित्सा विज्ञान में कहा गया है कि शुद्ध आहार खाने वाली गाय का दूध पीने से असमय खो चुका यौवन भी लौट आता है। लेकिन इसके अलावा भी इसके कई फायदे हैं। सिर्फ एक गिलास गाय का दूध क्या क्या कमाल कर सकता है, निम्न लेख मे उल्लेख करते हैं-
गाय का दूध पूर्ण भोजन माना गया है| व्यक्ति कई दिनों तक केवल गाय का दूध पीकर एकदम स्वस्थ्य और ताकतवर बना रह सकता है| गाय का दूध बेहद पौष्टिक और सेहतमंद होता है| चिकित्सा अनुसंधान मे प्रमाणित हुआ है कि गाय के दूध मे मिलने वाले प्रोटीन से हार्ट अटेक,,डायबीटीज़ और मानसिक रोग ठीक करने मे सफलता मिली है| रुग्ण लोगों के लिए गाय का दूध आदर्श भोजन होता है|
    कुछ लोग कहते है कि भैंस का दूध ज्‍यादा लाभदायक होता है जबकि कुछ लोगों का मानना है कि गाय के दूध में ज्यादा पोषक तत्व होते हैं। हर प्रकार के दूध में पोषक तत्व की भरमार होती है, बस उम्र और शरीर की आवश्‍यकता के हिसाब से इसका उपयोग किया जाता है।

रोग व क्‍लेश दूर करने के आसान मंत्र

    अगर आप अपना वजन और मासपेशियां बढाना चाहते हैं, तो भैंस का दूध आपके लिये अच्‍छा है। भैंस के दूध में गाय के मुकाबले अधिक प्रोटीन होता है, जो कि मासपेशियां बढाने में मददगार है। अगर आपको पाचन संबंधित समस्या है तो गाय के दूध का सेवन करें। यही कारण है कि बच्चों को गाय का दूध दिया जाता है क्योंकि यह आसानी से पच जाता है। जबकि भैंस का दूध भारी होता है और पचने में गाय के दूध की अपेक्षा अच्छा नहीं होता है क्‍योंकि इसमें पानी की मात्रा कम होती है। गाय के दूध से वीर्य की बढ़ोतरी होती है| यह शुक्राणु बढ़ाने मे मददगार होता है| लिंग मे कड़ापन लाता है और वीर्य छूटने का समय बढ़ाता है|आनंदमय दांपत्यजीवन के लिए गाय का दूध बेहद उपयोगी है|
पेट के केन्सर को प्रारम्भिक स्थिति मे रोकने के लिए गाय के दूध की उपयोगिता प्रमाणित हुई है| ट्यूमर को बढ़ाने वाले बेसलीन के प्रभाव को कम करने मे दूध के पौष्टिक तत्ब मदद करते हैं|
   दूध को उबालकर मलाई निकाली जाती है मलाई 

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 

बलवर्धक,तृप्तिकारक,गरिष्ठ,पुष्टिकारक,वीर्यवर्धक,कफकारक और धातुवर्धक है| इससे पित्त,वायु,रक्तपित्त और रक्त दोष का निवारण होता है|पेशाब मे जलन हो तो दूध मे गुड डालकर सेवन करना चाहिए| रात्री मे पिया हुआ दूध बुद्धि वर्धक, टीबी नाशक,वृद्ध व्यक्तियों मे वीर्य बढ़ाने वाला होता है| दूध एसीडीटी मे भी उपकारी है|
एग्जिमा से त्वचा खराब हो रही है तो सूती कपड़े की पट्टी बनाकर इसे गाय के दूध में भिगोए और एक्जीमा वाली जगह पर दस मिनट के लिए बांध दें। एक हफ्ते तक ये पट्टी करें, देखिए एक्जीमा और उसकी खुजली गायब हो जाएगी।
पीलिया - 
गाय के दूध से बने 50 ग्राम दही में 10 ग्राम हल्दी का चूर्ण मिलाकर रोज सुबह खाली पेट खाने से पीलिया में आराम मिलता है।
बिना आपरेशन प्रोस्टेट  वृद्धि की अचूक औषधि

गाय का दूध रोगों का प्रतिकार करने के साथ ही चेहरे की सुंदरता को भी निखारता है। गाय के दूध में मसूर की दाल और बेसन को भिगोकर रात भर के लिए रख दें। सुबह इन्हें पीस कर पेस्ट बना लें। इसे नियमित तौर पर लगाने से मुंहासे, चेचक के दाग, चेहरे पर बाल और झाइयां खत्म हो जाती हैं।
अगर बाल झड़ रहे हैं और गंजापन आ रहा है तो गाय के दूध से बना मट्ठा कुछ दिन रखकर इससे बाल धोएं, इससे बालों के झड़ने की समस्या दूर होगी।
खूनी बवासीर -
 आयुर्वेद के अनुसार गाय के दूध की छाछ में मसूर की दाल का उबला पानी मिलाकर पीएं। इससे भी बवासीर में रक्तस्राव में आराम मिलता है।
अगर मुंह में छाले परेशान कर रहे हैं तो रात को सोने से पहले इन छालों पर खूब सारी मलाई लगाएं। छाले ठीक हो जाएंगे। यदि सुबह के समय गाय के दूध से बने दही के साथ पका हुआ केला खाएंगे तो मुंह के छाले ठीक हो जाएंगे।

*पित्ताश्मरी(Gallstone) की अचूक औषधि*

कब्ज - 
गाय के दूध से बनी ताजी छाछ 250 मी.ली.के साथ लगभग 5 ग्राम अजवाईन का चूर्ण मिलाकर सुबह सुबह खाली पेट पिए। कब्ज में आराम होगा।
गाय का दूध पीने से पेट में गैस बनने की समस्या खत्म होती है और इससे शरीर में खून की मात्रा बढ़ती है।
दूध अपनी खूबियों के कारण हमारा पहला आहार बनता है। फिर भी काफी लोग दूध से बचने लगते हैं। तो क्यों न हम दूध के फायदों को एक बार फिर याद करें-
दूध में स्वाभाविक रूप से भरपूर पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसमें शरीर के लिए आवश्यक कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, फास्फोरस और विटामिन डी आदि सभी तत्व काफी मात्रा में होते हैं। इस तरह दूध एक संपूर्ण आहार बन जाता है|
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आंखों के लिए भी गुणकारी -
दूध पीने से आंखों को भी काफी फायदा होता है। इसमें पाया जाने वाले विटामिन ए और बी अच्छी दृष्टि का निर्माण करने में मददगार साबित होते हैं।
तनाव दूर करे-
दूध बहुत अच्छा एपेटाईजर होने के साथ तनाव भी कम करता है। थकान होने पर एक गिलास गरम दूध का सेवन करने से तनावयुक्त मांसपेशियों को आराम और अस्तव्यस्त तंत्रिकाओं को शांत करने में मदद मिलती है।



गाय का दूध बेहतर-
गाय का दूध अन्य प्राणियों के दूध की अपेक्षा हल्का और तुरंत शक्तिवर्धक है। गाय के दूध को बुद्घि के लिए बेहतर माना जाता है। इसके सेवन से दिमाग तेज होता है। भैस के दूध की अपेक्षा गाय का दुग्ध आसानी से पचता है। गाय का दूध शरीर के लिए और तरह के फायदे पहुंचाता है। इससे आलस्य नहीं आता और शरीर में फुर्ती बनी रहती है।

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हड्डियों को मजबूत बनाता है-

दूध कैल्शियम का बेहतर स्त्रोत है और हम जानते हैं कि कैल्शियम हमारी हड्डियों के लिए अत्यधिक आवश्यक होता है। इसलिए केवल छोटे बच्चों को ही नहीं, बल्कि वयस्कों को उनकी हड्डियों को मजबूत रखने के लिए और हड्डियों की कमजोरी को रोकने के लिए दूध की जरूरत पड़ती है, ताकि हड्डियों सबंधी रोग जैसे लोअर बोन डेनसिटी या ऑस्टियोपोरोसिस आदि से बचने में मदद मिल सके।

दांतों के लिए फायदेमंद-

दूध में मौजूद कैल्शियम और फास्फोरस स्वस्थ दांतों के विकास और रखरखाव के लिए फायदेमंद होते हैं। दूध में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन केसीन है, जो दांतों के लिए रक्षात्मक कार्य करता है। यह इनेमल सतह पर पतली फिल्म बनाता है, जिससे कैल्शियम और फॉस्फेट की क्षति कम होती है और दांतों को लाभ होता है।


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मांसपेशियों के लिए कारगर -

इस बात में दो राय नहीं कि प्रोटीन हमारी मांसपेशियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है और दूध में प्रोटीन भी शामिल होता है। अत: दूध मांसपेशियों की मजबूती व उनके पुनर्निर्माण में मदद करता है।

त्वचा के लिए लाभदायक-

अपनी त्वचा के प्रति सजग लोगों के लिए दूध का सेवन जैसे अमृत है। इसमें विभिन्न तत्वों का मिश्रण होने से यह त्वचा को सुंदर दिखने में मदद करता है। इसमें लैक्टिक एसिड पाया जाता है, जो त्वचा को कोमल और चमकदार बनाने में मददगार एक्स्फोलिएन्ट और एंजाइम का काम करता है।

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ह्दय रोग व उच्च रक्तचाप से सुरक्षा-

कई अध्ययनों से दूध को स्वस्थ ह्दय के लिए लाभदायक और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में भी प्रभावी बताया गया है।

कैंसर का खतरा कम करे-

दूध के नियमित सेवन से स्तन कैंसर और पेट के कैंसर का शिकार होने की आशंका कम हो जाती है।

टाइप 2 डायबिटीज की आशंका कम-

आजकल बच्चों में बढम्ती टाइप 2 डायबिटीज की बीमारी से बचाव में भी दूध का सेवन हितकर हो सकता है। इस लिए भी दूध का सेवन जरूरी है।

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