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13.3.18

गीली पट्टी के अनुपम फायदे :प्राकृतिक चिकित्सा


पेडू की गीली पट्टी
   दर्द के साथ पेट के सभी रोगों जैसे पेट की सूजन, कब्‍ज के अलावा अनिद्रा, बुखार एवं महिलाओं की सभी समस्‍याओं के लिए रामबाण चिकित्सा है। इसे रात्रि भोजन के दो घंटे बाद पूरी रात तक लपेटा जा सकता है। सूती कपडे की पट्टी इतनी चौड़ी होनी चाहिए कि पेडू सहित नाभि के तीन अंगुल ऊपर तक आ जाये एवं इतनी लंबी कि पेडू के तीन-चार लपेट लग सकें। सूती पट्टी को भिगोकर, निचोड़कर पेडू से नाभि के तीन उंगली ऊपर तक लपेट दें। एक से दो घंटा या सारी रात इसे लपेट कर रखें।

किडनी फेल रोग का अचूक इलाज 

   प्राकृतिक चिकित्सा में साधारण सी दिखने वाली क्रियाएं शरीर पर अपना रोगनिवारक प्रभाव छोडती हैं | किसी सूती या खादी के कपडे की पट्टी को सामान्य ठन्डे जल में भिगोकर , निचोड़कर अंग विशेष पर लपेटने के पश्चात् उसके ऊपर से ऊनी कपडे की [सूखी] पट्टी इस तरह लपेटी जाती है कि अन्दर वाली सूती/खादी पट्टी पूर्ण रूप से ढक जाये 
सिर की गीली पट्टी –
लाभ :- सिर की गीली पट्टी से कान का दर्द , सिरदर्द व सिर की जकड़न दूर होती है |
साधन :-
एक मोटे खद्दर के कपडे की पट्टी जो कि इतनी लम्बी हो कि गले के पीछे, के ऊपर से कानों को ढकते हुए आँखों और मस्तक को पूरा ढक ले |
ऊनी कपडे कि पट्टी [ खादी की पट्टी से लगभग दो इंच चौड़ी और दोगुनी लम्बी ]


मूत्राषय प्रदाह(cystitis)के सरल उपचार


विधि :-
खद्दर की पट्टी को ठन्डे पानी में भिगोकर निचोड़ लें तत्पश्चात इस पट्टी को आँखें,मस्तक एवं पीछे कानों को ढकते हुए एक राउण्ड लपेट दें | अब इसके ऊपर ऊनी पट्टी को लगभग दो राउण्ड इस तरह लपेट दें कि नीचे वाली गीली पट्टी अच्छी तरह से ढक जाये | लगभग एक घंटा इस पट्टी को लगायें |
गले की गीली पट्टी-

लाभ :- इस पट्टी को रोगनिवारक प्रभाव पूरे शरीर पर पड़ता है | गले की पट्टी से गले के ऊपर-नीचे की अनावश्यक गर्मी समाप्त होती है |
टांसिलायिटिस, गले के आस-पास की सूजन, गला बैठना,घेंघा जैसे रोगों में लाभकारी है |

*सिर्फ आपरेशन नहीं ,प्रोस्टेट वृद्धि की 100% अचूक हर्बल औषधि *

साधन –
एक सूती पट्टी -गले की चौडाई जितनी चौड़ी एवं इतनी लम्बी कि गले में तीन-चार लपेट लग जाएँ |
गले में तीन-चार लपेट लगने भर की लम्बी, ऊनी पट्टी या मफलर |
विधि :-

 
सूती पट्टी को ठन्डे पानी में भिगोकर , निचोड़कर गले में तीन-चार लपेटे लगा दें ऊपर से ऊनी पट्टी या मफलर लपेट लें | समय – ४५ मिनट से १ घंटा |

लाभ- छाती के सभी रोग जैसे -खांसी,निमोनिया,क्षय [ फेफड़ों का ] दमा, कफ,पुरानी खांसी में लाभकारी |

*किडनी में क्रिएटिनिन और यूरिया की समस्या के घरेलू उपचार* 

छाती की पट्टी :-
सावधानी –
अत्यंत निर्बल रोगी को पट्टी देते समय सूती/खादी पट्टी को गुनगुने पानी में भिगोकर,निचोड़कर प्रयोग करना चाहिए |
फेफड़ों के रक्तस्राव की अवस्था में पट्टी का प्रयोग कम समय के लिए एवं फेफड़ों की कैविटी [ जैसा कि क्षय में होता है ] भरने हेतु अधिक समय के लिए पट्टी का प्रयोग करना चाहिए |
साधन- खद्दर या सूती कपडे की एक पट्टी जो कि छाती की चौडाई के बराबर चौड़ी हो एवं लम्बाई इतनी कि छाती से पीठ तक घुमाते हुए तीन राउण्ड लग जाएँ |
ऊनी या गर्म कपडे की पट्टी जो नीचे की सूती/खद्दर की पट्टी को ढक ले |
विधि :-
खद्दर या सूती पट्टी को ठन्डे पानी में भिगोकर निचोड़ लें , अब इसे पूरी छाती पर पसलियों के नीचे तक लपेट दें | इस पट्टी के ऊपर ऊनी पट्टी लपेट दें | यह पट्टी रोग की अवस्था के अनुसार १ से ४ घंटे तक बांधी जा सकती है |

फिशर होने के कारण लक्षण और उपचार

धड की गीली पट्टी-
लाभ :- योनि की सूजन, आमाशायिक रोग, पेट-पेडू का दर्द व सूजन, लीवर,तिल्ली के रोगों में अत्यंत लाभकारी है |
विधि :-
यह भी छाती पट्टी की तरह लपेटनी होती है बस इस पट्टी की चौडाई नाभि के नीचे तक बढ़ा लेनी चाहिए एवं पट्टी के दौरान रोगी को लिटाकर सिर खुला रखकर पैर से गर्दन तक कम्बल उढ़ा देना चाहिए | एक से दो घंटा इस पट्टी का प्रयोग करना चाहिए |

स्नायु संस्थान की कमज़ोरी  के नुस्खे

पेडू की गीली पट्टी
लाभ :- पेट के समस्त रोगों,पुरानी पेचिस, कोलायिटिस,पेट की नयी-पुरानी सूजन,अनिद्रा,बुखार एवं स्त्रियों के गुप्त रोगों की रामबाण चिकित्सा है |इसे रात्रि भोजन के दो घंटे बाद पूरी रात तक लपेटा जा सकता है |
साधन –
खद्दर या सूती कपडे की पट्टी इतनी चौड़ी जो पेडू सहित नाभि के तीन अंगुल ऊपर तक आ जाये एवं इतनी लम्बी कि पेडू के तीन-चार लपेट लग सकें |
सूती कपडे से दो इंच चौड़ी एवं इतनी ही लम्बी ऊनी पट्टी |

पेट मे गेस के अनुपम नुस्खे 

विधि :-
उपर्युक्त पट्टियों की विधि से सूती/खद्दर की पट्टी को भिगोकर,निचोड़कर पेडू से नाभि के तीन अंगुल ऊपर तक लपेट दें ,इसके ऊपर से ऊनी पट्टी इस तरह से लपेट दें कि नीचे वाली गीली पट्टी पूरी तरह से ढक जाये |एक से दो घंटा या सारी रात इसे लपेट कर रखें |
जोड़ों की गीली पट्टी-
शरीर के विभिन्न जोड़ों के दर्द एवं सूजन की अवस्था में एक घंटे के लिए जोड़ के आकर के अनुसार गीली फिर ऊनी पट्टी का प्रयोग करें |





पेट की पट्टी लगाने की विधि

विधि- एक सफ़ेद मोटा सूती कपड़ा ( चदरनुमा) लगभग एक मीटर चौड़ा और 2 1/2 मीटर लम्बा लेकर उसे लम्बाई में चार तहकर ले ! लगभग 9 इंच चौड़ी 2 1/2 मीटर लम्बी पट्टी बनाये और साधारण ठन्डे पानी में निचोड़कर व्यक्ति अपने पूरे पेट पर (नाभि को बीच में रखकर आधी पट्टी ऊपर और आधी नाभि से नीचे होनी चाहिए) कमर से घुमाकर लपेट ले जैसे नहाने के बाद तौलिया लपेटते है ! यदि सर्दी बहुत है अथवा रोगी बहुत कमजोर है तो गीली पट्टी के ऊपर कोई पतला तौलिया या ऊनी कपड़ा लपेटे ! आवश्यकता के अनुसार ऊपर से कपड़े पहन कर अपना कोई भी दैनिक कार्य या आराम करे ! 

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यह पट्टी 20 -40 मिनट तक दिन में तीन या चार बार लगायें ! यह पट्टी भोजन के पहले लगाना अधिक अच्छा है परन्तु ऐसा संभव न हो तो दिन में किसी भी समय लगाई जा सकती है ! केवल इस बात का ध्यान रखना है कि जिस समय पट्टी लगाई हुई हो. उस समय कुछ खाना-पीना नहीं है यदि खाना ठीक से न पचता हो तो पट्टी को खाना खाने के बाद लगाने पर खाना हजम करने में सहायता मिलती है ! आपातकाल स्थिति एवं तीव्र रोग की अवस्था में शरीर पर बंधी गीली पट्टी के भाग को वायु के संपर्क में रहने दें! अर्थात गीली पट्टी को सामान्य कपड़ो से न ढके ! प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों में गीली मिटटी का प्रयोग आमतौर पर बताया जाता है! परन्तु आजकल के व्यस्त जीवन में उपयुक्त मिटटी को ढूंढना, घर में रखना, साफ करना असुविधाजनक है ! मिटटी की पट्टी में भी विशेष लाभ तो पानी से ही होता है ! यही लाभ गीले कपड़े की पट्टी से लिया जा सकता है! यह करने में भी आसान है|

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