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22.7.19

मक्खन के स्वास्थ्य लाभ और सावधानियाँ


आजकल लोग तेल ही नहीं, मक्खन में भी सब्ज़ियां बनाते हैं। इससे न सिर्फ उस डिश का टेस्ट बदल जाता है, बल्कि मक्खन से शरीर को कैल्शियम, मैग्नीशियम, सेलेनियम और आयोडीन भी मिलता है। इसके अलावा, बटर सेक्स हार्मोन जैसे- एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन और टेस्टोस्टेरोन भी प्रोड्यूस करने में मदद करता है। और-तो-और, यह बॉडी को विटामिन ए, विटामिन डी, विटामिन ई और विटामिन के भी प्रोवाइड करता है, जिससे फर्टिलिटी बढ़ती है।
वर्तमान जीवनशैली में, हम वसायुक्त सभी चीजों को अपनी डाइट से बाहर करते जा रहे हैं। मक्खन की बात करें, तो कभी पुराने जमाने में रोटी के साथ ढेर सारा मक्खन सुबह के नाश्ते में शामिल किया जाता था, आज हम उसे पूरी तरह से नजरअंदाज करने लगे हैं। लेकन क्या आप जानते हैं, कि मक्खन खाने के भी अपने ही कुछ फायदे हैं।
दिल के रोगों में आराम
मेडिकल रिसर्च काउंसिल के शोध के अनुसार, जो लोग मक्खन का सेवन करते हैं उन्हें दिल के रोगों का रिस्क आधा हो जाता है। इनमें विटामिन ए, डी, के2 और ई के अलावा लेसिथिन, आयोडीन और सेलेनियम जैसे तत्व अच्छी मात्रा में होते हैं जो दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हैं।
बुखार - 
गाय के दूध का मक्खन और खड़ी शर्करा का सेवन करने से पुराना बुखार ठीक हो जाता है, इसके अलावा मक्खन के साथ शहद और सोने के वर्क को मिलाकर खाने से टीबी के मरीजों को लाभ मिलता है।
कैंसर - 
मक्खन कोई मामूली चीज नहीं है। यह कैंसर जैसे रोग से बचाव करने में आपकी मदद करता है। दरअसल मक्खन में मौजूद फैटी एसिड कौंजुलेटेड लिनोलेक प्रमुख रूप से कैंसर से बचाव में मदद करता है।
आंखों में जलन - 
आंखों में जलन की समस्या होने पर गाय के दूध का मक्खन आंखों पर लगाना बेहद फायदेमंद होता है। किसी भी कारण से आंखों में होने वाली जलन को यह समाप्त कर देता है।
थायरॉइड - 
मक्खन में आयोडीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो थायरॉइड के मरीजों के लिए फायदेमंद होता है। इसके अलावा इसमें मौजूद विटामिन ए भी थायरॉइड ग्लैंड के लिए बेहद फायदेमंद होता है।
दमा - 
सांस की तकलीफ होने पर भी मक्खन लाभदायक साबित होता है। मक्खन में मौजूद सैचुरेटेड फैट्स फेफड़ों की मदद करते हैं और दमा के मरीजों के लिए भी इसका सेवन फायदेमंद माना जाता है।
पाइल्स - 
गाय के दूध का मक्खन और तिल को मिलाकर खाने से पाइल्स की समस्या में लाभ होता है। इसके अलावा मक्खन में शहद व खड़ी शक्कर मिलाकर खाने से खूनी बवासीर ठीक हो जाती है। इसमें शहद के स्थान पर नागकेसर का प्रयोग भी किया जा सकता है।
 प्रजनन क्षमता -
 प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए मक्खन का बहुत लाभकारक माना जाता है। यह शरीर में गर्मी बढ़ाता है तथा मेल और फीमेल हार्मोन्स को बढ़ाने का कार्य करता है।
एंटीऑक्‍सीडेंट -
 एंटीऑक्‍सीडेंट से भरपूर मक्खन कैंसर या ट्यूमर से आपकी रक्षा करने के साथ ही त्‍वचा को फ्री रैडिकल्‍स से सुरक्षि‍त रखता है। यह त्वचा के लिए काफी फायदेमंद होता है।इसकी मसाज से त्वचा में जान आ जाती है।
 मूड बने मस्‍त - 
मक्खन में पाया जाने वाला सेलीनियम आपके मूड को बेहतर करने में आपकी मदद करता है। तो जब भी आपका मूड खराब हो, थोड़ा सा मक्खन, उसे ठीक करने में आपकी मदद कर सकता है। 
हड्डियाँ मजबूत-
मक्खन में विटामिन्स, मिनिरल्स और कैल्शियम की मात्रा भरपूर होती है जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करती है। दांतों और हड्डियों से जुड़े रोगों, खासतौर पर ओस्टियोपोरोसिस के उपचार में इसका सेवन फायदेमंद है।
सावधानी-
ज़्यादा मक्खन खाने से शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है और इससे कार्डियोवैस्कुलर डिज़ीज़ के चांस भी ज़्यादा हो जाते हैं।
*जितना हो सके, सब्ज़ी में कम बटर का इस्तेमाल करें।
*दिल के लिए ना तो सेचुरेटेड फैट अच्छा है और ना ही कोलेस्ट्रॉल। इसलिए, हाई सेचुरेटेड फैट वाला बटर खाने से बचें।
* 1 चम्मच मक्खन में 30 मिलीग्राम कोलेस्ट्रॉल और 7 ग्राम सेचुरेटेड फैट होता है। हमारे शरीर की रोज़ाना सेचुरेटिड फैट की ज़रूरत 15 ग्राम से ज़्यादा नहीं है।
* बटर की जगह लो ट्रांस-फैट मार्जरीन (नकली बटर) का इस्तेमाल करें। मार्जरीन, वेजिटेबल ऑयल में हाइड्रोजन डालकर बनता है। मक्खन की जगह आप मार्जरीन का उपयोग करें। इसमें 35 प्रतिशत कम फैट होता है और यह ज़ीरो-कोलेस्ट्रॉल से मैच करता है। इससे आपको हेल्थ से जुड़ी परेशानियां कम होंगी।

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11.12.17

शिवलिंगी बीज के गुण उपयोग



    शिवलिंगी बीज एक आयुर्वेदिक औषधि हैं जिसका घटक सिर्फ एक बीज ही हैं और वो हैं ब्रयोनोप्सिस लेसिनियोसा का बीज जिसे समान्यतया शिवलिंगी कहा जाता हैं। शिवलिंगी बीज का प्रयोग पुरे देश में प्रजनन क्षमता बढ़ाने और स्त्रियों के रोग विकारो को दूर करने के लिए किया जाता हैं,इसका प्रयोग स्वस्थ बच्चे के जन्म के लिए भी किया जाता हैं। इसके अलावा शिवलिंगी बीज लिवर, श्वसन, पाचन तंत्र, गठिया, चयापचय विकारों और संक्रामक रोगों के लिए भी लाभदायक हैं,साथ में इसके सेवन से इम्युनिटी भी बढ़ती हैं। महिलायो में बाँझपन की समस्या मुख्यता हार्मोन्स के असन्तुलन की वजह से होती हैं पर शिवलिंगी बीज हार्मोन्स का संतुलन बनाये रखने में असरदार हैं,जिसकी वजह से महिलायो में बाँझपन की समस्या नही होती।
शिवलिंगी बीज के लाभ एवं उपयोग

  महिलाओं के यौन स्वास्थ्य में सुधार के लिए -


     शिवलिंगी बीज महिलाओं के रोगों की रोकथाम के लिए अत्यंत लाभदायक हैं जैसे महिलाओं की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के लिए इससे बेहतर और बिना दुष्प्रभावो के और कोई उत्पाद नही हैं इसके अलावा यह हार्मोन्स को संतुलित करता हैं जिससे महिलायो को मासिक धर्म अनियमितताओं से छुटकारा मिलता हैं।

गर्भधारण के लिए-

जैसा की पहले भी बताया गया हैं की यह औषधि हार्मोन्स को संतुलित करती हैं,जिसके परिणामस्वरूप महिलायो को सुरक्षित गर्भधारण करने में शिवलिंगी बीज मदद करती हैं और जो महिलाये बार बार हो रहे गर्भपात की समस्या से जूझ रही हो, उनके लिए भी यह लाभदायक हैं।
 
बाँझपन के लिए-

बाँझपन को दूर करने के लिए शिवलिंगी बीज एक उपयोगी औषधि हैं।
अन्य रोगों में भी लाभदायक
स्त्री रोगों के अलावा शिवलिंगी बीज इम्युनिटी बढ़ाने के लिए भी एक अच्छी औषधि हैं और गठिया, जोड़ो के दर्द, दमा और पाचन सम्बन्धी रोगों की रोकथाम करने में भी यह सहायक हैं।

औषधीय मात्रा निर्धारण एवं व्यवस्था-

शिवलिंगी बीजो को कूट कर पीस और छान लें, इसके बाद इसका पाउडर बना के रख लें। अच्छे परिणामो के लिए पुत्रजीवक बीजो के चूर्ण और शिवलिंगी पाउडर को मिक्स कर लें इसके बाद इस मिश्रण का एक चम्मच दिन में दो बार लें एक बार सुबह नाश्ते से एक घंटे पहले और शाम के भोजन के एक घंटे पहले और इसके सेवन से सम्बंधित सबसे महत्वपूर्ण सुझाव यह दिया जाता हैं की इस औषधि का सेवन गाय के दूध के साथ करना चाहिए और वो भी उस गाय के दूध के साथ जिसका बछड़ा हो।

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