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13.9.17

प्रोस्टेट बढ़ने पर आपरेशन जरूरी नहीं ,करें ये उपचार



प्रोस्टेट ग्रन्थि एक बहुत ही छोटी ग्रन्थि होती है | इस ग्रन्थि का आकार एक अखरोट की भांति होता है | यह ग्रन्थि पुरुषों में पाई जाती है | यह पुरुषो के मूत्राशय के नीचे मुत्र्नाली के पास होती है | इसमें पुरुषों के सेक्स हार्मोन्स की एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है | जब किसी भी पुरुष की आयु 50 साल की हो जाती है या इससे उपर हो जाती है तो इस ग्रन्थि का आकार बढ़ने लगता है | जैसे – जैसे प्रोस्टेट ग्रन्थि बढती है , इसका सीधा प्रभाव मूत्र नली पर पड़ता है | मूत्र नली का दबाव बढ़ता है जिसके कारण पेशाब के रुकावट की स्थित बन जाती है | जब यह स्थिति बन जाती है | तब पेशाब रुक –रुक कर एक पतली दार में और थोड़ी – थोड़ी मात्रा में आता है | कभी – कभी तो पेशाब टपक – टपक कर आता है और जलन होती है | कभी – कभी तो रोगी अपने मूत्र के वेग को रोक नही पाता है | जिससे रोगी को रात के समय में भी पेशाब करने के लिए नींद से उठाना पड़ता है | इस रोग का अधिक प्रभाव लगभग 60 से ७० साल की उम्र मे हो जाता है | 
इस उम्र तक जाते – जाते यह रोग और भी उर हो जाता है | इस रोग में पेशाब पूरी तरह से रुक जाने की संभावना भी बन जाती है | ऐसी अवस्था में रोगी को किसी अच्छे डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए | डॉक्टर एक केथेटर नली लगाकर यूरिन बैग में मूत्र करने की व्यवस्था कर देते है | इस रोग का प्रकोप लगभग 50 % पुरुषों में देखने को मिलता है | यह रोग मनुष्य को 60 साल की उम्र के बाद होने लगता है | और समय बीतने के साथ – साथ इस रोग और भी प्रबल हो जाता है | 80 साल से 90 साल तक रह रोग पेरी तरह से व्यक्ति को जकड़ लेता है | जब किसी व्यक्ति की प्रोस्टेट ग्रन्थि बढ़ जाती है तो इसके बारे में कैसे मालूम करते है | इसके क्या लक्षण होते है | इस बात की जानकारी हम आपको दे रहे है |
प्रोस्टेट ग्रन्थि के बढ़ने के लक्षण :-
मूत्र करने में कठनाई महसूस करना |
पेशाब की धार चालू होने में देरी लगना |
रात के समय उठ – उठकर पेशाब के लिए जाना |
थोड़ी – थोड़ी मात्रा में पेशाब का आना
मूत्राशय का पूरी तरह से खाली ना होना | इस रोग में मूत्राशय में थोड़ी सा मूत्र शेष रह जाता है | इस इक्कठे हुए मूत्र में रोगाणु जन्म लेने लगते है | इसके कारण किडनी खराब होने लगती है |
पेशाब करने के बाद पेशाब की बुँदे टपकती रहती है | इसके आलावा आप अपने मूत्र पर काबू भी नही पा सकता है |
इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को हमेशा यह लगता है कि उसे पेशाब आया है | लेकिन बाथरूम जाने के बाद पेशाब रुक रुककर आता है |
पेशाब में जलन होती है |
संभोग करते समय बहुत दर्द होता है और वीर्य भी निकलता रहता है |
प्रोस्टेट ग्रन्थि के बढ़ने से अंडकोष में दर्द भी होता है |
इस रोग को ठीक करने के लिए आज के समय में भी कोई औषधी नही बनी है | इस रोग का कोई भी सफल इलाज नही है | इस रोग से पीड़ित रोगी को ओपरेशन करने की सलाह दी जाती है | इस बीमारी से छुटकारा पाने के लिए ओपरेशन में बहुत पैसे खर्च करने पड़ते है | लेकिन फिर भी यह रोग दोबारा हो सकता है |मैं अपने दीर्घ चिकित्सा अनुभव के आधार पर कुछ बहुत ही असरदार आयुर्वेदिक घरेलू उपचार यहा लिख देता हूँ |इन उपायों के चलते आप आपरेशन की त्रासदी से बच जाएँगे|
   *एक दिन में कम से कम 3 से 4 लीटर पानी पीना चाहिए | परन्तु शाम के समय अपनी जरूरत के अनुसार ही पानी पीयें | ऐसा करने से रात के समय पेशाब करने के लिए बार – बार नही उठना पड़ेगा |
*अलसी के बीजों को अच्छी तरह से पीसकर उसका पावडर बना लें | इस पावडर को रोजाना 15 ग्राम की मात्रा में पानी एक साथ घोलकर पीने से इस रोग को लाभ मिलता है | यह एक असरदार उपाय है |
*कद्दू में जिंक की मात्रा अधिक होता है | कडू के बीजों को तवे पर अच्छी तरह से सेंक लें | भुने हुए बीजों को पीसकर उसका पावडर बना लें | इस पावडर की 15 से 20 ग्राम की मात्रा को रोजाना पानी के साथ खाएं | इस उपचार को करने से रोगी का मूत्र खुलकर आने लगता है |
*जिस भोजन में वसा की मात्रा अधिक हो या जो भोजन चर्बी को बढ़ाने वाला हो उस भोजन से परहेज करें | विशेष तौर पर मांस का सेवन बंद कर दें |
*कैफीन युक्त चीजों का उपयोग ना करें | चाय और कॉफ़ी में अधिक कैफीन होता है | जो प्रोस्टेट ग्रन्थि की तकलीफ को और भी बढ़ा देता है | केफीन का प्रयोग करने से मूत्राशय की ग्रीवा कठोर हो जाती है | जो इस रोग के लिए हानिकारक होता है |
*जो व्यक्ति इस रोग से पीड़ित है उसे अपना चेक अप करवाते रहना चाहिए | ताकि यह रोग आगे और ना बढ़ सके |
*इस रोग में रोगी को सोयाबीन का सेवन करना चाहिए | क्योंकि सोयाबीन में कुछ ऐसे तत्व होते है जो हमारे शरीर में टेस्टोंस्टोरन के लेवल को कम करता है | इसलिए हमे रोजाना लगभग 35 से 40 ग्राम सोयाबीन के बीजों को गलाकर खाना चाहिए | यह एक बहुत ही अच्छा उपाय है |
*रोगी को विटामिन सी का अधिक प्रयोग करना चाहिए | इसका सेवन करने से खून संचार की नलियाँ स्वस्थ रहती है और अच्छी तरह से कार्य करती है | इसलिए रोगी को प्रतिदिन विटामिन सी की एक गोली का सेवन करना चाहिए |
*जो लोग इस रोग से पीड़ित है , उन्हें रोजाना दो टमाटर का सेवन करना चाहिए | यदि रोजाना नही खा सकते तो हफ्ते में कम से कम 3 से 4 बार अवश्य खाएं | इस उपाय को करने से प्रोस्टेट ग्रन्थि में होने वाला कैंसर नही होता है | टमाटर में लायकोपिन नामक तत्त्व होता है जो कैंसर की रोकथाम करने के लिए बहुत ही आवश्यक होता है |
*जो लोग इस रोग से पीड़ित है उन्हें नियमित समय के अन्तराल पर सेक्स करना  उचित है|इससे प्रोस्टेट ग्रंथि ठीक रहती है | रोगी व्यक्ति हो या स्वस्थ व्यक्ति दोनों को ही ना तो सेक्स अधिक करना चाहिए और ना ही कम करना चाहिए | महीने में कम से कम 4 से 6 बार सेक्स करे | इससे दोनों का स्वास्थ्य ठीक रहता है |


विशिष्ट परामर्श-


प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने मे हर्बल औषधि सर्वाधिक कारगर साबित हुई हैं| यहाँ तक कि लंबे समय से केथेटर नली लगी हुई मरीज को भी केथेटर मुक्त होकर स्वाभाविक तौर पर खुलकर पेशाब आने लगता है| प्रोस्टेट ग्रंथि के अन्य विकारों मे भी रामबाण प्रभाव |प्रोस्टेट केंसर की नोबत  नहीं आती| आपरेशन  से बचाने वाली औषधि हेतु वैध्य श्री दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क कर सकते हैं|





https://aalokremedies.wordpress.com/2010/05/02/सफ़ेद-दागल्युकोडर्मा-के
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