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11.2.17

सीने और पसली मे दर्द के कारण और उपचार


दरअसल सीने का दर्द स्वयं में कोई रोग नहीं यह तो रोगों का लक्षण मात्र है। जिस व्यक्ति को ग्लीसरिल नाइट्रेट की गोली से सीने के दर्द में आराम मिल जाता है वह एंजाइना का रोगी होता है। दूसरी और यदि दर्द प्लूरिसी या न्यूमोनिया के कारण हो तो रोगी को बुखार−खांसी होती है तथा खांसने या सांस की तकलीफ के साथ उठने वाला दर्द दिल का दौरा पड़ने का संकेत हो सकता है।
प्लूरिसी में फेफड़े के पर्दे में पानी भर जाता है, फेफड़ो में सूजन हो जाती हैं, रोगी को ज्वर होता है, सांस रुक-रुक कर आता है, छाती में दर्द रहता है, आदि लक्षण होते है। आयुर्वेद में इसका उपचार बहुत सरल हैं।\

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उपचार :

इस बीमारी में तुलसी के ताजा पत्तों का स्वरस आधा ओंस (15 ग्राम) से एक ओंस (30 ग्राम) धीरे-धीरे बढ़ाते हए प्रात: सायं (सुबह और शाम) दिन में दो बार खाली पेट लेने से प्लूरिसी में शीघ्र आश्चर्यजनक रूप से लाभ होता है। इससे दो तीन दिन में बुखार नीचे उतरकर सामान्य हो जाता है और सप्ताह या अधिक आठ दस रोज में फेफड़े के पर्दे में भरा पानी सूख जाता है। किसी भी कारण से यह बीमारी क्यों न हो, बिना किसी अन्य दुष्प्रभाव के शत-प्रतिशत लाभ होता है और साथ ही फुस्फुस(फेफड़ो) और ह्रदय की अन्य बीमारियां हो तो भी इससे ठीक हो जाती है।

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*चंद्रामृत रस 4 रत्ती, श्रृंग भस्म 1 1/2 रत्ती, नौसादर 1 1/2 रत्ती, मल्लसिंदूर 1 रत्ती लेकर सबको एकसार करके मिला लें। फिर इसकी चार बराबर-बराबर पुड़िया बनाएँ। 1-1 पुड़िया 4-4 घंटे पर दें। यह पसली के दर्द(पार्श्वशूल) का सफल अनुभूत नुस्खा है।
पसली व सीने का दर्द प्राय: संक्रमण होने के अलावा सर्दी लगने, अनियमित आहार-विहार तथा कब्ज रहने के कारण होता है। इसके अलावा दूषित जल के सेवन से भी यह दर्द उत्पन्न हो जाते हैं।


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अदरकः 30 ग्राम अदरक या सोंठ को पीसकर आधा किलो पानी में उबालकर छानकर दिन में चार बार पीएं। इससे पसली का दर्द ठीक हो जाता है।

पसली व सीने के दर्द का उपचार-

गाजरः गाजरों को उबालकर उनका रस निकाल लें। इस रस में शहद मिलाकर पीने से सीने का दर्द ठीक हो जाता है।
आजकल पसलियों में दर्द की समस्या अधिकतर लोगों में देखी जा रही है। युवाओं में भी पसलियों के दर्द की परेशानी अधिक हो रही है। बच्चों को भी यह रोग होता है। ये दर्द खांसी व छींक आने से और ज्यादा होता है। क्योंकि ऐसा होने पर पसलियों पर झटका लगता है और वे दुखने लगती है। पसलियों में दर्द होने का मुख्य कारण है शरीर में खून की कमी और विटामिन डी की कमी ।
जो लोग फ्रिज में रखी चीजों और अधिक ठंडी चीजों का सेवन करते हैं वे इस दर्द से अधिक परेशान होते हैं।

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पसलियों के दर्द से बचने के उपाय

शहद और चूना-

शहद और पान में मिलाया जाने वाला चूना को मिलाकर पेस्ट बनाएं और इसका लेप पसलियों में दर्द होने वाली जगह पर लगाने से आराम मिलता है।

हींग-

अंडे की जर्दी को एक ग्राम हींग के साथ मिलाकर पीस लें और इसका लेप बनाकर पसलियों में होने वाले दर्द पर लगाएं। यह उपाय दर्द को दूर करता है।

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मेथी दाने-

मेथी भी पसलियों के दर्द में बेहद राहत देती है। 100 ग्राम मेथी दानों को हल्का भूनें और इसे कूट लें फिर इसमें बेहद थोड़ा काला नमक भी मिला लें।और इसका सेवन सुबह और शाम एक-एक चम्मच खाएं। एक महीने तक लगातार खाने से पसलियों का दर्द ठीक होने लगता है।

जीरा-

जीरा दो चम्मच, को एक गिलास गर्म पानी में मिला लें। और किसी कपड़े में डालकर निचोड़ लें और इसकी सिकाई पसली वाली जगह पर करें। इससे काफी आराम मिलता है।

गेहूं-

गेहूं से बनी रोटी को इस तरह से बनाए जिससे कि यह एक तरफ से सिकी हुई हो और दूसरी तरफ से कच्ची हो। और कच्ची तरफ वाली जगह पर सरसों का गर्म तेल लगा लें और इसे पसलियों के उपर लगा लें और किसी कपड़े से बांध लें। इस उपाय से रोगी को काफी आराम और दर्द से मुक्ति मिलेगी।

राई-

एक चम्मच राई के दानों को अच्छी तरह से पीस लें और इसे गर्म करके दर्द वाली जगह पर इसका लेप लगाएं। ऐसा करने से पसलियों के दर्द में आराम मिलता है।

दूध-

छोटी इलायची को पीसकर गर्म दूध में डाल लें और इसमें एक चुटकी हल्दी मिला लें। रात को सोने से पहले इस दूध का सेवन करें। आपको फायदा मिलेगा।
*अदरक, तुलसी, तथा कालीमिर्च का काढ़ा बनाकर उसमें एक चुटकी सेंधा नमक मिलाकर सेवन कराना चाहिए.


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शहद और चूना-

शहद और पान में मिलाया जाने वाला चूना को मिलाकर पेस्ट बनाएं और इसका लेप पसलियों में दर्द होने वाली जगह पर लगाने से आराम मिलता है।

अदरक-

तुलसी, अदरक और कालीमिर्च को मिलाकर काढ़ा बना लें और उसमें एक चुटकी सेंधा नमक मिलाकर सेवन करें।
*सरसों के तेल में तारपीन का तेल मिलाकर थोड़ी-थोड़ी देर बाद रोगी की पसलियों पर हल्के हाथों से मालिश करें.


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हींग-


अंडे की जर्दी को एक ग्राम हींग के साथ मिलाकर पीस लें और इसका लेप बनाकर पसलियों में होने वाले दर्द पर लगाएं। यह उपाय दर्द को दूर करता है।
   न्यूमोनिया की अवस्था में यह योग मिश्रण कफ को द्रव करके निकालता है। फेफड़ों की रोगावस्था को मृदु करके खाँसी कम करता है। इससे हृदय की वेदना कम हो जाती है।
एंजाइना और हार्ट अटैक (मायोकार्डियल इंफेक्शन) जैसे दिल के रोग भी सीने में दर्द पैदा करते हैं। एंजाइना के रोगी में दर्द सीने के बीच में या कुछ बाईं ओर होता है। लगभग तीन से दस मिनट तक लगातार होने वाले इस दर्द की तीव्रता मामूली भी हो सकती है और बहुत अधिक भी। अधिक ठंड, रोगी की मानसिक स्थित, आवश्यकता से अधिक भोजन, दैनिक जीवन का तनाव, दिल की धड़कन बढ़ना तथा रक्तचाप आदि कुछ ऐसे कारक हैं जो दर्द को उभारने में सहायक होते हैं। जीभ के नीचे ग्लीसरिल नाइट्रेट की गोली रखने से इस रोग में तुरन्त लाभ होता है। 


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