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8.2.17

सेहत और सौंदर्य का खजाना :कमल का पौधा : A wealth of health and beauty: lotus plant

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    कमल का पौधा (कमलिनी, नलिनी, पद्मिनी) पानी में ही उत्पन्न होता है और भारत के सभी उष्ण भागों में तथा ईरान से लेकर आस्ट्रेलिया तक पाया जाता है। कमल का फूल सफेद या गुलाबी रंग का होता है और पत्ते लगभग गोल, ढाल जैसे, होते हैं। पत्तों की लंबी डंडियों और नसों से एक तरह का रेशा निकाला जाता है जिससे मंदिरों के दीपों की बत्तियाँ बनाई जाती हैं। कहते हैं, इस रेशे से तैयार किया हुआ कपड़ा पहनने से अनेक रोग दूर हो जाते हैं। कमल के तने लंबे, सीधे और खोखले होते हैं तथा पानी के नीचे कीचड़ में चारों ओर फैलते हैं। तनों की गाँठों पर से जड़ें निकलती हैं।

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उपयोग-
कमल के पौधे के प्रत्येक भाग के अलग-अलग नाम हैं और उसका प्रत्येक भाग चिकित्सा में उपयोगी है-अनेक आयुर्वेदिक, एलोपैथिक और यूनानी औषधियाँ कमल के भिन्न-भिन्न भागों से बनाई जाती हैं। चीन और मलाया के निवासी भी कमल का औषधि के रूप में उपयोग करते हैं।
कमल के फूलों का विशेष उपयोग पूजा और शृंगार में होता है। इसके पत्तों को पत्तल के स्थान पर काम में लाया जाता है। बीजों का उपयोग अनेक औषधियों में होता है और उन्हें भूनकर मखाने बनाए जाते हैं। तनों (मृणाल, बिस, मिस, मसींडा) से अत्यंत स्वादिष्ट शाक बनता है।
आयुर्वेद ने पता लगाया है कि फेंगशुई में अहम स्थान रखने वाला और लक्ष्मी देवी के प्रिय इस फुल कमल की जड़, तना, पत्ते और बीज सभी मानव जीवन के लिए लाभकारी है. तो अब जानते है कि कीचड़ में पैदा होने वाले कमल के इस फुल के कौन से हिस्से को हम किस तरह इस्तेमाल कर सकते है.

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स्वप्नदोष -

 जवानी में अक्सर बच्चे आकर्षण में आ जाते है और वहीँ आकर्षण सोते वक़्त भी उनके दिमाग में रहता है. इसलिए जब वे सपने देखते है तो स्वपन दोष का शिकार हो जाते है. ये बहुत बुरी बिमारी है क्योकि इससे आपके शरीर की सारी ताकत निकल जाती है और आप कमजोर होने लगते हो. किन्तु आप कमल की जड़ों को सुखाकर उनका पाउडर बनायें और रोजाना इस चूर्ण की 4 ग्राम की मात्रा को पानी के साथ ग्रहण करें. करीब 1 माह तक आप इस उपाय को नियमानुसार अपनायें, इसे आपके शरीर की ताकत भी बढ़ेगी और आपको स्वपन दोष से भी मुक्ति मिलेगी


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उल्टी -
उल्टी होने का मुख्य कारणविशुद्ध आहार या दूषित आहार होता है. इसलिए हमेशा ताजा और पौष्टिक भोजन ही करना चाहियें किन्तु अगर आप उल्टी से परेशान है तो आप कमल के कुछ बीज लें और उन्हें तवे पर अच्छी तरह भुनें. अब आप बीजों को छिलें,इनके अंदर आपको एक सफ़ेद भाग मिलेगा. इस सफ़ेद भाग को आप पिस लें और शहद मिलाकर खा जाएँ, तुरंत आपको उल्टी आनी बंद हो जायेगी.

बालों को काला करें-  

जब भी कभी आपको लगे कि आपके बाल सफ़ेद होने लगे है या सारे बाल सफ़ेद भी हो चुके हो तब भी आप 500 से 600 ग्राम कमल के फूलों का इंतजाम करें, उन्हें एक हांडी में डाले और फूलों में गाय का दूध मिलाएं. अब आप इस हांडी को करीब 1 महीने के लिए जमीन में गाद दें. तत्पश्चात आप हांडी को निकालें और रोजाना इसे अपने सिर पर तेल की तरह लगाएं. ध्यान रहे कि 2½ घंटे बाद आपको अपना सिर भी अवश्य धोना

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 है. इस उपाय को करीब 1 माह तक अपनाएँ. आपके बाद पहले की तरह काले और घने होने आरम्भ हो जायेगे.
गर्भस्त्राव -
 ये एक अजीब सा रोग है क्योकि कोई भी महिला नहीं चाहती कि उनका बार बार गर्भ स्त्राव हो, इसलिए वे पूरी सावधानी से गर्भधारण करती है किन्तु फिर भी उनको स्त्राव हो जाता है. इस समस्या से तुरंत निजात पाने के लिए आप कमल की नाल और नागकेसर को सुखा लें और उनको पीसकर पाउडर बनायें. आप इस मिश्रण को गाय के दूध के साथ रोजाना ग्रहण करें. आपकी गर्भ स्त्राव की समस्या शत प्रतिशत दूर हो जायेगी. 
 स्तन सौन्दर्य - 
अक्सर जब महिलायें माँ बन जाती है तो स्तनपान की वजह से उनके स्तन ढीले पड जाते है. ये उनकी सुंदरता में कमी लाता है, किन्तु महिलायें अपने स्तनों को दुबारा से गोल,नर्म और सुडौल बनाने के लिए कमल के बीजों का प्रयोग कर सकती है. इनका इस्तेमाल करने के लिए उन्हें कमल के 500 ग्राम बीजों को पीसकर एक शीशी में रख लेना चाहियें और रोजाना 5 से 6 ग्राम की मात्रा में गाय के दूध के साथ सेवन करना चाहियें. मात्रा 2 माह के बाद ही उनके स्तन पहले से भी अधिक आकर्षक और हष्ट पुष्ट हो जायेगे. महिलाओं के स्तनों का स्वस्थ होना जरूरी भी है क्योकि ये उनके शरीर का सबसे महत्वपूर्ण और आकर्षक अंग है.


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 खुनी बवासीर-
बवासीर का नाम सुनते ही लोगों में भय उत्पन्न हो जाता है और जब बात खुनी बवासीर की हो तो आप समझ ही सकते है कि ये रोग पीड़ित का क्या हाल करता होगा. लेकिन खुनी बवासीर की शिकायत वाले लोगों के लिए कमल की केसर बहुत अधिक लाभदायी होती है. इसलिए इन्हें ½ ग्राम कमल की केसर में थोडा मक्खन और चीनी मिलाकर ग्रहण करना चाहियें. करीब 1 सप्ताह इसका नियमित रूप से इस्तेमाल ही आपको सार्थक परिणाम देगा. किन्तु इसका ये अर्थ नहीं है कि आप इसे मात्र 1 सप्ताह तक ही लें बल्कि आप इस उपाय को तब तक अपनाएँ जब तक आप बवासीर से पूरी तरह से मुक्त नही हो जाते.


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चर्म रोग -
 त्वचा रोग होने पर भी कमल की जल लें और उसे पानी के साथ घिसते हुए एक लेप तैयार करें. इस लेप को आप अपने शरीर के उन स्थानों पर लगाएं जहाँ आपको चर्म रोग है. कुछ दिन इसी तरह इसका इस्तेमाल आपको नयी त्वचा प्रदान करता है और सभी चर्म रोग दूर करता है.
हार्ट अटैक -
बढता कोलेस्ट्रॉल, तनाव,रक्त विकार और अनियमित व तला खाना हृदय को नुकसान पहुंचाता है. किन्तु कमल का फुल हृदय रोगियों के लिए एक अमृत की तरह होता है. वे कमल के फुल के साथ मुलेठी, सफ़ेद चन्दन और नागरमोथा मिलाकर उनका पाउडर बनायें और एक दवा तैयार करें. इस दवा का दिन में 2 बार पानी या दूध के साथ सेवन करने से सभी तरह के हृदय रोग और हार्ट अटैक जैसी समस्या उत्पन्न ही नहीं होती. वैसे आप इस दवा का निर्माण खुद ना करते हुए किसी अच्छे वैद से ही करायें क्योकि इसमें सभी चीजों की मात्रा का ध्यान में रखना बहुत अनिवार्य है.

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28.1.17

बरगद के पेड़ के औषधीय उपयोग// Medicinal use of the banyan tree

  

   विशाल  छायादार बरगद का पेड़ तो लगभग आप सभी ने देखा होगा। और आपने इस पेड़ पर लगने वाले छोटे-छोटे फल भी देखे होंगे। इसकी जड़ों की लताओं को पकड़ कर आपने खूब झूला भी झूला होगा। लेकिन आज तक इसका इस्तेमाल कभी नहीं किया होगा जैसे घर में नीम, आम, गुलाब आदि का करते हैं।
बरगद के पेड़ का औषधीय और धार्मिक दोनों ही महत्व हैं। बरगद के पेड़ के कभी भी नष्ट न होने के कारण इसे अक्षय वट भी कहा जाता है। यह भारत का राष्ट्रीय वृक्ष है। इसका वानस्पतिक नाम फाइकस बेंघालेंसिस है। इसे तमाम औषधियों में उपयोग किया जाता है। इसके अलावा इसके पत्तों से निकलने वाले दूध को भी उपचार में प्रयोग किया जाता है।
    बरगद के  फल आपके पौरुष शक्ति बढ़ाने में  मददगार है। इसके इस्तेमाल से शीघ्र पतन, स्वपनदोष, कमजोरी, प्रमेह, वीर्य का पतलापन और वीर्य के अन्य विकार दूर होते हैं। साथ ही यह काम शक्ति और स्पर्म बढ़ाने वाला होता है जिससे आप अपने विवाहित जीवन में भरपूर आनंद ले सकते हैं। यह इस्तेमाल बेहद सस्ता और चमत्कारिक परिणाम देने वाला है। यह इस्तेमाल स्पर्म की बीमारी और कमजोरी से ग्रस्त रोगियों के लिए अच्छे से अच्छे नुस्खों से कहीं अच्छा है।
फल के इस्तेमाल का तरीका
बरगद में काम शक्तिवर्धक और शुक्रवर्धक गुण पाए जाते हैं। बरगद के पेड़ में लाल लाल छोटे छोटे बेर के समान फल लगते हैं। बरगद के पेड़ के ये लाल लाल पके हुए फल हाथ से तोड़ें। जमीन पर गिरे हुए न लें। इनको जमीन पर कपड़ा बिछा कर छाया में सुखाएं। सूखने के बाद पत्थर पर पीसकर पाउडर बना लें। सुखाते समय पीसते समय लोहे का उपयोग नहीं होना चाहिए। लोहे से इन्हें नहीं छूना है। इस पाउडर के तोल के बराबर पीसी हुई मिश्री मिला लें। मिश्री भी पत्थर पर ही पीसें। भली प्रकार मिश्री और बरगद के फलों के पाउडर को मिलाकर मिट्टी के बर्तन में सुरक्षित रखें। इसकी आधी चम्मच सुबह शाम दो बार गर्म दूध से फंकी लें। इससे शीघ्र पतन समाप्त होकर काम शक्ति प्रबल हो जाती है। विवाहित जीवन का भरपूर आनंद आता है। शारीरिक स्वास्थय अच्छा होकर चेहरे पर लाली चमकने लगती है। इस सस्ते लेकिन मेहनत से भरपूर प्रयोग को करके देखें।
*बच्चे पैदा करने वाले कीटाणु (स्पर्म) यदि वीर्य में ना हो तो इस प्रयोग से बच्चे पैदा करने वाले कीटाणु वीर्य में पैदा हो जाते हैं। आदमी बच्चे पैदा करने योग्य हो जाता है। शुक्राणुओं के न होने से जो पुरुष बच्चे पैदा करने के अयोग्य घोषित कर दिए गए हैं, वो इस प्रयोग को ज़रूर करें, और ये प्रयोग करने के बाद अपना अनुभव ज़रूर बताएं, जिस से और लोगों को भी ये प्रयोग करने की प्रेरणा ले सकें।

शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 


* बरगद के फल का इस्तेमाल पौरुष शक्ति बढ़ाने के लिए किया जाता है। जहां अधिकतर लोग पौरुष शक्ति बढ़ाने के लिए वियाग्रा जैसी महंगी दवाई का इस्तेमाल करते हैं वहीं गांव में अब भी लोग बरगद के फल का इस्तेमाल करते हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि वियाग्रा के कई सारे साइडइफेक्ट भी होते हैं जबकि बरगद के इस फल का कोई साइडइफेक्ट भी नहीं होता।

गुप्त रोग दूर करे-

बरगद का ये फल पौरुष शक्ति बढ़ाने के साथ कई सारे गुप्त रोग भी ठीक कर करता है। इसका इस्तेमाल करने से शीघ्र पतन, स्वपनदोष, कमजोरी, प्रमेह, वीर्य का पतलापन और वीर्य संबंधी अन्य सारी समस्याएं दूर हो जाती हैं। साथ ही ये सेक्स से संबंधी हर तरह की समस्या को दूर करता है।

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लो मोबीलिटी की समस्या ठीक करे-

बीते कई सालों में पुरुषों में लो मोबिलिटी की समस्या काफी सामने आई है। इस समस्या में पुरुषों का स्पर्म महिला के शरीर में ज्यादा दिन तक रह नहीं पाता जिससे महिलाओं को गर्भधारण करने में समस्या होती है। साथ ही इस कारण कई बार पुरुषों को शीघ्रपतन की भी समस्या होती है। ऐसे में लोग विवाहित जीवन का भरपूर आनंद नहीं ले पाते। इस समस्या के उपचार के लिए लोग बड़े-बड़े हकीमों और चिकित्सकों से इलाज कराते हैं। लेकिन कोई परिणाम नहीं निकलता।  जबकि इस समस्या के लिए बरगद का फल बड़ा कारगर है। इसका इस्तेमाल बहुत ही सस्ता और चमत्कारिक परिणाम देने वाला है। ये तुरंत स्पर्म की क्वांटिटी और क्वालिटी में बढ़ोतरी करता है जिससे आप अपने वैवाहिक जीवन का भरपूर आनंद उठा पाते हैं। इसका इस्तेमाल स्पर्म की बीमारी और कमजोरी से ग्रस्त रोगियों के लिए रामबाण इलाज है।

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नाक से खून बहना :

बरगद की सूखी हुई जड़ को बारीक पीस लें। अब इसमें से आधी चम्मच पाउडर को लस्सी के साथ पीने से नाक से खून बहना बंद हो जाता है। नाक में बरगद के दूध की दो बूंद डालने से भी नकसीर (नाक से खून बहना) ठीक हो जाता है।

पतले दस्त-

यदि बच्चे को पतले दस्त हो रहे हैं तो नाभि में बरगद का दूध लगाने से दस्त में आराम मिलता है। इसके अलावा एक बताशे में दो से तीन बूंद बरगद का दूध डालकर दिन में तीन चार बार रोगी को खिलाने से भी दस्त में आराम मिलता है।


कमर दर्द में -

   कमर दर्द में सिकाई करने के बाद बरगद के दूध की मालिश करने से कुछ ही दिन में आराम मिलने लगता है। ऐसा दिन में कम से कम तीन बार करना होता है। इसके अलावा बरगद का दूध अलसी के तेल में मिलाकर मालिश करने से भी कमर दर्द से छुटकरा मिलता है।यदि आपके शरीर का कोई हिस्सा जल जाता है तो बरगद का पेड़ उसमें भी राहत देता है। बरगद के पत्ते को पीसकर, उसमें जरूरत के मुताबिक दही मिला लें। अब इस लेप को जले हुए भाग पर लगाने से जलन दूर होती है। जले हुए स्थान पर बरगद की कोपल या कोमल पत्तों को गाय के दही में पीसकर लगाने से भी आराम मिलता है।

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चोट, मोच और सूजन-

बरगद का दूध चोट, मोच और सूजन पर दिन में दो से तीन बार लगाने और मालिश करने से काफी आराम मिलता है। यदि कोई खुली चोट है तो बरगद के पेड़ के दूध में आप हल्दी मिलाकर चोट वाली जगह बांध लें। घाव जल्द भर जाएगा।

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 बरगद की कली, डंठल को तोड़कर इससे निकलने वाले दूध की पांच बूंदें एक बताशे पर टपका कर खा जाएं। इस प्रकार चार बताशे हर रोज खाएं। यह सूर्योदय से पहले खाएं। नित्य दूध की एक बूंद बढ़ाते जाएं। इस प्रकार दस दिन लेकर फिर एक बूंद रोज कम करते जाएं। इस प्रकार 20 दिन यह इस्तेमाल करने से वीर्य का पतलापन,प्रमेह,स्वप्नदोष ठीक हो जाता हैं|

बिवाई-

हाथों की फटी हुई हथेली हो या एडिया (बिवाई), दोनों के ही उपचार में बरगद के पेड़ का दूध काफी कारगर है। ताजे-ताजे दूध को एडियों की फटी हुई दरारों पर भरकर मालिश करते रहने से कुछ ही दिनों में वह ठीक हो जाती हैं। घांव में दूध भरने से पहले एडियों को गर्म पानी से धो लें

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बार-बार पेशाब आना -


बरगद के पेड़ की छाल को सुखाकर उसका चूर्ण बना लें। अब इसमें से आधा चम्मच चूर्ण का एक कप गुनगुने पानी के साथ दिन में 3-4 बार सेवन करें। ऐसा लगातार 15 दिन तक करने से बार-बार पेशाब आने के रोग में फायदा होगा। बरगद के फल के बीज को बारीक पीसकर चौथाई चम्मच सुबह के समय गाय के दूध के साथ खाने से भी रोग ठीक हो जाता है।

बाल मजबूत-

बरगद के सूखे हुए पत्तों को जलाने पर बनी 20 ग्राम राख को अलसी के 100 मिलीलीटर तेल में मिलाकर मालिश करते रहने से सिर के उड़े हुए बाल उग आते हैं। कोमल पत्तों के रस में बराबर मात्रा में सरसों का तेल मिलाकर आग पर पकाकर गर्म कर लें, इस तेल को बालों में लगाने से बाल मजबूत बनते हैं।

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