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1.10.26

गिलोय क्या है? फायदे, पीने का सही तरीका और सावधानियाँ

                                    



आयुर्वेद में गिलोय को 'अमृता' कहा गया है, जिसका अर्थ है अमरता देने वाली। इसका वैज्ञानिक नाम Tinospora cordifolia है। यह एक बेल है जो अक्सर नीम के पेड़ पर लिपटी हुई मिलती है। आयुर्वेद के अनुसार नीम पर चढ़ी हुई गिलोय को उत्तम माना जाता है।

गिलोय को त्रिदोष शामक कहा गया है, यानी यह वात, पित्त, कफ तीनों को संतुलित रखने में सहायक मानी जाती है।

रोज़ गिलोय लेने से शरीर में क्या बदलाव महसूस होते हैं?
आयुर्वेद के अनुसार किसी भी जड़ी-बूटी का असर धीरे-धीरे दिखता है।
पहले 7 दिन: पाचन में सुधार, पेट हल्का लगना।
15 दिन बाद: मौसम बदलने पर होने वाली सर्दी-जुकाम में कम परेशानी।
30 दिन बाद: ऊर्जा में सुधार और थकान कम लगना। इसलिए आयुर्वेद में किसी भी जड़ी-बूटी को 30 से 45 दिन तक लेने की सलाह दी जाती है।

गिलोय के सामान्य उपयोगरोग-प्रतिरोधक क्षमता में सहायक: इसे इम्यून सिस्टम को संतुलित रखने में सहायक माना जाता है।
बुखार के बाद की कमजोरी में: डेंगू या वायरल बुखार के बाद होने वाली कमजोरी में सहारे के रूप में इसका काढ़ा लिया जाता है।
पाचन के लिए: यह भूख को सामान्य करने और पाचन को बेहतर करने में मदद करती है।
जोड़ों के दर्द में: इसमें सूजन कम करने वाले गुण होते हैं, इसलिए जोड़ों के दर्द में सहायक मानी जाती है।
त्वचा के लिए: खून को साफ करने वाली मानी जाने के कारण त्वचा संबंधी समस्याओं में सहायक।

पीने का सही तरीका
गिलोय 4 रूप में मिलती है - काढ़ा, जूस, पाउडर और टेबलेट।
काढ़ा (सबसे अच्छा तरीका): 1 इंच ताजी गिलोय की डंडी को कूट लें, 200 मिली पानी में धीमी आँच पर उबालें जब तक 50 मिली रह जाए। सामान्य व्यक्ति के लिए 20 से 30 मिली काढ़ा दिन में एक बार सुबह खाली पेट।
जूस: बाजार वाले जूस में 10 से 20 मिली जूस को 50 मिली गुनगुने पानी में मिलाकर लें।
पाउडर: 1 से 3 ग्राम पाउडर गुनगुने पानी के साथ।
कितने दिन लें: 30 से 45 दिन लें, फिर 15 दिन का गैप दें। लगातार 3 महीने से ज्यादा बिना डॉक्टर की सलाह के न लें।

किन लोगों को गिलोय नहीं लेनी चाहिए? - 5 सावधानियाँऑटो-इम्यून बीमारी वाले: जैसे रूमेटाइड आर्थराइटिस, ल्यूपस। इसमें डॉक्टर से पूछे बिना न लें।
गर्भावस्था और दूध पिलाने के दौरान: इस दौरान इससे बचना ही बेहतर है।
सर्जरी से पहले: सर्जरी से 2 हफ्ते पहले गिलोय बंद कर दें।
लिवर की समस्या वाले: जिन्हें पहले से लिवर की बीमारी या पीलिया है, वे बिना डॉक्टर की सलाह के न लें। आयुष मंत्रालय के अनुसार शुद्ध गिलोय सुरक्षित है, पर मिलावटी या गलत बेल से लिवर को नुकसान हो सकता है।
शुगर की दवा लेने वाले: गिलोय शुगर को और कम कर सकती है, इसलिए शुगर की दवा के साथ लेने पर डॉक्टर को जरूर बताएं।

3 बड़ी गलतियाँ जो लोग करते हैंज्यादा मात्रा लेना: ज्यादा पीने से ज्यादा फायदा नहीं होगा, उल्टा पेट खराब हो सकता है।
बिना जाँच वाला सस्ता पाउडर लेना: गिलोय जैसी दिखने वाली कई बेलें होती हैं। हमेशा GMP सर्टिफाइड और लैब टेस्टेड प्रोडक्ट ही लें।
साल भर लगातार पीना: यह कोई शॉर्टकट नहीं है। अच्छी नींद, सही खाना और रोज वॉक के साथ ही इसका असर दिखता है।


डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सामान्य ज्ञान के लिए है। गिलोय किसी भी दवा का विकल्प नहीं है। किसी भी गंभीर बीमारी में केवल गिलोय पर निर्भर न रहें और उपयोग से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श लें।


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