31.7.19

दूध मे अदरक मिलाकर पीने के फायदे

     
                                 
दूध का स्वाद बढ़ाने और स्वास्थ्यवर्धक गुणों को बढ़ाने के लिए अदरक काफी फायदेमंद होती है। अदरक में एंटी-इंफ्लेमेट्र्री, एंटी-बैक्टीरियल गुण होने के साथ-साथ अनेक मेडिकल प्रोपर्टीज पाई जाती है। इसलिए अदरक के दूध का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। सर्दी-जुकाम से बचाने के साथ अदरक का दूध, हल्दी के दूध की तरह बदन दर्द को दूर करने के लिए उपयोगी होता है। दूध पोषक तत्वों से भरपूर होता है और इसमें अदरक मिलाने से इसके स्वास्थ्यवर्धक लाभ और भी बढ़ जाते हैं। आइए जानते हैं कि अदरक का दूध पीना स्वास्थ्य के लिए कैसे फायदेमंद होता है।
अदरक के फायदों के बारे में तो अधिकतर लोगों को पता है लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि अगर अदरक को दूध में मिलाकर पिया जाए तो इसके फायदे कई गुना बढ़ जाते हैं। अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाने के कारण चाहे सर्दी-जुकाम हो या वायरल फ्लू, मरीज को अदरक के सेवन की सलाह दी जाती है।
गर्भवती महिलाओं को भी मॉर्निंग सिकनेस से आराम दिलाने के लिए अदरक की चाय पीने की सलाह दी जाती है। दूध अपने आप में ही एक पूर्ण पौष्टिक आहार है और जब आप इसमें अदरक मिला देते हैं तो आप इन दोनों पौष्टिक चीजों के फायदे एक साथ हासिल कर लेते हैंयह बात बहुत कम लोग ही जानते हैं कि अदरक को दूध में मिलाकर पिया जाए तो इसके फायदे कई गुना बढ़ जाते हैं। अदरक में मिलनें वाले एंटी बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी के गुण शरीर के अंदर होने वाली कई तरह की बीमारियों को दूर करने की क्षमता रखते है।
गठिया के दर्द से जल्दी आराम –
बैसे तो हर कोई जानता है। कि दूध में कैल्शियम और पोटैशियम की भरपूर मात्रा पाई जाती है। जो हमारे शरीर की हड्डियों को मजबूत बनाने का काम करती हैं। दूध का सेवन करने हड्डियों की कमजोरी दूर होती है और यदि दूध के साथ अदरक को मिलाकर इसका सेवन रोज किया जाये, तो इनमें मौजूद एंटी इंफ्लेमेटरी के गुण हड्डियों को मजबूती देने के साथ उसकी सूजन को भी कम कर देते है। इसीलिए यह ड्रिंक गठियावाद(ऑस्टियोपोरोसिस )के मरीजों के लिए वरदान है। इसे पीने से गठिया के दर्द से जल्दी राहत मिलती है।
पाचन शक्ति मजबूत करता है –
अदरक का दूध पाचन क्रिया को मजबूत बनाने में काफी लाभकारी होता है। यह पेट दर्द से जुड़ी हर समस्या को दूर करने का सबसे अच्छा घरेलू उपचार माना गया है। नाश्ता करने के बाद आप अदरक वाले दूध का सेवन अवश्य करें।
रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है –
बदलते मौसम के साथ ही बीमारियां भी अपना रूख बदलने लगती है। जिससे इस दौरान लोग सार्दी, खांसी-जुकाम या फ्लू की चपेट में आ जाते हैं। दरअसल ऐसा शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी के कारण होता है। इसलिए जिनका शरीर अत्याधिक कमजोर होता है। उन लोगों को अदरक दूध का सेवन अवश्य ही करना चाहिए। अदरक के एंटी बैक्टीरियल गुण पाये जाते है। जो शरीर में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करने में अहम भूमिका निभाते है और शरीर को बाहरी संक्रामण से बचाने में मदद करते है।
गले का इंफेक्‍शन –
सर्दियों के समय में ज्यादातर लोग सर्दी-खांसी से परेशान रहते है। जिसमें अधिकतर बच्चे इसकी चपेट में आ जाते है इस समस्या को दूर करने के लिये अदरक वाले दूध काफी अच्छा उपचार माना गया है। इसका सेवन करने से ना केवल गले की खराश जल्दी दूर होती है बल्कि गले में होने वाले इंफेक्‍शन से भी राहत मिल जाती है। यदि आप गले के इंफेक्‍शन से पीड़ित हैं तो रात में सोने से पहले अदरक वाला दूध अवश्य पिए, और इसके एक घंटे बाद तक पानी न पियें। आपको जल्द ही इसका असर देखने को मिल जायेगा।
हड्डियों की मजबूती :
दूध में मौजूद कैल्शियम और पोटैशियम हड्डियों के लिए बहुत फायदेमंद हैं। दूध से हड्डियों की कमजोरी दूर होती है वही अदरक में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होने के कारण हड्डियों की सूजन कम होती है। इसीलिए यह ड्रिंक ऑस्टियोपोरोसिस के मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद है। इसे पीने से गठिया के दर्द से जल्दी आराम मिलता है।
अदरक का दूध बनाने का तरीका :
सबसे पहले अदरक को साफ़ पानी से धोलें और छोटे छोटे टुकड़ों में काट लें और फिर एक पतीले में दूध गर्म करें। जब दूध उबलने लगे तो उसमें अदरक के ये टुकड़े डालकर कुछ देर तक उबालें जिससे अदरक का सारा अर्क दूध में मिल जाए। इसके बाद दूध को छान लें और हल्का गुनगुना होने पर इसे पियें।

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पेशाब मे खून आने के कारण और उपचार


प्रौढ़ों में अगर पेशाब में रक्त आए, तो यह जबरदस्त पेशाब संक्रमण के लक्षण हैं या फिर यह पत्थरी भी हो सकती है। किडनी, यूरीनरी ब्लैडर या प्रोस्टेट में कैंसर या ट्यूबरक्लोसिस का ट्यूमर भी हो सकता है। ठीक होने के लिए इन बीमारियों की समय पर जांच बहुत जरूरी है। जांच में देरी हो जाए, तो यह किडनी को खराब कर सकता है या कैंसर की रसौली बढ़ सकती है।
पेशाब में खून आना पुरुषों में होने वाली आम समस्या है लेकिन इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इस समस्या को नजरअंदाज करना आपको भारी पड़ सकता है। पेशाब में खून आने को मेडिकल टर्म में हेमटुरीअ कहा जाता है। यहां हम आपको पेशाब में रक्त आने के कारणों और लक्षणों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। अगर आपको भी यह समस्या हो रही है तो फौरन डॉक्टरी सलाह लें। आमतौर पर माना जाता है कि पेशाब में खून पेशाब के रास्ते में होने वाले संक्रमण की वजह से आता है लेकिन इसकी कई वजह हो सकती हैं। जिनमें गुर्दे से लेकर मूत्राशय तक की पथरी शामिल है।
अक्सर हमारे शरीर में कोई भी समस्या होती है तो हमारे शरीर के अंग हमे उसका संकेत देने लगते हैं कि शरीर में कुछ दिक्कत आ रही है। हालांकि हम उन छोटी-छोटी बातों को नज़रअंदाज कर दिया करते हैं, जो हमें नहीं करना चाहिए। इन्हीं में से एक लक्षण है पेशाब के दौरान होने वाली दिक्‍कत। अगर आप भी लंबे समय से पेशाब के दौरान जलन या पेशाब के साथ खून आने की दिक्कत का सामना कर रहे हैं तो सावधान हो जाइए और इसे अनदेखा करने से बचिए। पेशाब में खून आने के कई कारण हो सकते हैं इसलिए लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्‍टर से परामर्श लें। पेशाब में खून आने ये कारण हो सकते हैं।
किडनी की समस्या की वजह से भी पेशाब में खून आने की समस्या होती है। दरअसल, किडनी से रक्त को छानने का काम ग्लोमेरुली करता है। यह गुर्दे के अंदर की छोटी संरचनाएं हैं। इनकी वजह से ही किडनी से रक्त छनता है। इन संरचनाओं को ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस नुकसान पहुंचाता है। इसकी वजह से हमारे गुर्दे शरीर के अपशिष्ट पदार्थ और अतिरिक्त तरल पदार्थ को बाहर नहीं निकाल पाते हैं। इस समस्या का अगर सही वक्त पर इलाज नहीं किया गया तो किडनी फेल भी हो सकती है। इस बीमारी में सुनने और देखने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। यानी इस बीमारी से ग्रसित लोग अंधे और बहरे भी हो सकते हैं। किडनी में घाव होने के चलते ही पेशाब में खून भी आता है।
प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना
पेशाब में खून आने की वजह प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना भी है। प्रोस्टेट ग्रंथि मूत्राशय के नीचे और मलाशय के सामने होती है। यह ग्रंथि प्रजनन के लिए वीर्य का उत्पादन करती है। अगर प्रोस्टेट बढ़ जाता है तो पेशाब में तेज दर्द के साथ खून आने की समस्या हो सकती है।
यूरिन इंफेक्‍शन या यूरिनरी ट्रैक्‍ट इंफेक्‍शन (यूटी
आई)
यूरिनरी ट्रैक्‍ट इंफेक्‍शन (यूटीआई) महिलाओं में होने वाली बेहद आम समस्या होती है। मूत्र मार्ग में संक्रमण होने के कारण महिलाओं को काफी समस्या होती है और जलन के साथ-साथ कई बार पेशाब के साथ खून भी आने लगता है।
गुर्दे में पथरी या गुर्दे या पित्‍ताशय में ट्यूमर के कारण
अगर किसी इंसान को गुर्दे में पथरी की समस्या हो तो भी कई बार पेशाब में खून आ सकता है क्‍योंकि पथरी की वजह से पेशाब की प्राकृतिक प्रक्रिया में रूकावट पैदा हो जाती है। इसका उपचार हो सकता है इसलिए समय रहते डॉक्‍टर से सम्‍पर्क करें। इसके अलावा गुर्दे या पित्‍ताशय में ट्यूमर होने पर भी पेशाब में खून आने लगता है। ऐसे में डॉक्‍टरों द्वारा सर्जरी की मदद से इलाज किया जाता है।
ग्‍लोमेरूलोनेफ‍रिटिस के कारण
पेशाब या मल में खून आने का ग्‍लोमेरूलोनेफ‍रिटिस या ग्‍लोमेरूलर नेफीरिटिस सबसे आम कारण होता है। बढ़ते बच्‍चों और छोटे बच्‍चों में यह समस्‍या सबसे ज्‍यादा देखने को मिलती है। लेकिन कई बार बड़े लोग को भी इस समस्‍या का सामना करना पड़ता है।
सिस्टिक ग्रोथ
महिलाओं में सिस्‍ट का बढ़ जाना आम बात है। ये समस्या काफी पीड़ादायक होती है और इसके कारण पेशाब में खून भी आने लगता है। आमतौर पर सिस्‍ट, गुर्दे में बढ़ता है जिसके कारण पेशाब करने में दर्द औश्र जलन की समस्या होती है। एक समय के बाद खून भी आना शुरू हो जाता है।
पेशाब में अगर खून आता हो तो उसे रक्तमेह कहा जाता है। रक्तमेह के रोग में गुर्दे की गडबड़ी के कारण रक्त पूरी तरह नहीं छन पाता है। लम्बे समय से पेशाब में जलन हो रही हो या उसमें से खून आ रहा हो, तो आपको खुद पर ध्यान देने की आवश्यकता है। पेशाब में खून आने पर करें ये घरेलु उपाय।
* रात को सोते समय एक गिलास पानी में मुनक्का भिगो दें। सुबह मुनक्का उसी पानी के साथ पीस लें। इसे छानकर इसमें थोड़ा भुना पिसा जीरा मिलाकर पी ले। इससे पेशाब की जलन मिट जाती है और पेशाब खुलकर आता है साथ ही खून का आना भी बंद हो जाता है।
* लगभग 12 ग्राम आंवला और 12 ग्राम हल्दी को मोटा-मोटा पीसकर रात को पानी मे डालकर भिगों दें। सुबह इस पानी को छानकर पीने से पेशाब मे खून आने का रोग दूर होता है।
* 1 ग्राम भुनी हुई फिटकरी को सुबह और शाम पानी के साथ लेने से पेशाब मे खून आना बंद हो जाता है।
* सात बूँद बड़ का दूध शक्कर के साथ देने से पेशाब तथा गुदा द्वारा होने वाले रक्तस्राव में लाभ होता है।
* अडूसी के पत्तों का 1 तोला (लगभग 12 ग्राम) रस रोज सुबह पीने से अथवा केले के फूल का 2 से 10 मि।ली। रस 10 से 50 मि।ली। दही के साथ खाने से रक्तस्राव में लाभ होता है।
* एक गिलास पानी में दो चम्मच धनिया और एक चम्मच पिसा हुआ आंवला रात को भिगो दें। सुबह उसी पानी में मसल कर छानकर पी लें। ऐसा ही पानी शाम को भी पिएँ। इस पानी को सुबह शाम पीने से पेशाब में जलन मिट जाती है साथ ही खून गिरने में भी राहत मिलती है।
* एक कटोरी गेंहू रात को एक गिलास पानी में भिगो दें। सुबह इसी पानी के साथ इसे बारीक पीस ले। इसमें एक चम्मच मिश्री मिलाकर पी लें। इसे एक सप्ताह तक लगातार पीने से पेशाब के साथ वीर्य जाना बंद होता है। खून आना भी बंद हो सकता है।
* 10 से 20 ग्राम लोध्रासव को बराबर मात्रा में पानी में मिलाकर सुबह-शाम भोजन के बाद खाने से पेशाब साफ आने लगता है।
* लगभग आधे से एक ग्राम सुहागे की खील को शहद मिले पानी में घोंटकर सुबह-शाम पीने से दूषित पेशाब भी ठीक हो जाता है।
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30.7.19

ज्यादा पानी पीना हो सकता है खतरनाक



पानी की कमी और अधिकता दोनों ही है खतरनाक
पानी की कमी और अधिकता दोनों ही सेहत के लिए खतरनाक है. पानी की कमी से जहां डी-हाइड्रेशन होने का खतरा बढ़ जाता है वहीं बहुत ज्यादा पानी पीने वाले व्यक्त‍ि को ओवरहाइड्रेशन की शिकायत हो जाती है
इस समस्या से सबसे अधिक एथलीट प्रभावित होते हैं. पानी की कमी से एक ओर जहां उनकी मांस-पेशियों में ऐंठन आ जाती है वहीं बहुत अधिक पानी पीने से उनके खून का गाढ़ापन कम हो जाता है. विशेषज्ञों की मानें पानी उतना ही पीना चाहिए जितने से प्यास बुझ जाए. प्यास नहीं लगी हो तो जबरदस्ती पानी नहीं पिएं.
बहुत अधिक पानी पी लेने से चक्कर आने लगते हैं और व्यक्त‍ि असहज महसूस करने लगता है. कई बार तो दिल की धड़कन भी तेज हो जाती है. पर इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि कम पानी पीना चाहिए. अल्कोहल को छोड़कर हम जो भी तरल लेते हैं, उसमें पानी की कुछ मात्रा तो होती ही है.
प्यास लगने का मतलब शरीर में पानी की कमी हो गई है. प्यास लगना सेहत के लिए अच्छा है. पानी तभी पिएं जब आपको इसकी जरूरत महसूस हो. घड़ी-घड़ी, जबरदस्ती पानी पीना सही नहीं है. शरीर में पानी की मात्रा बनी रहनी चाहिए लेकिन ज्यादा नहीं.पानी सेहत के लिए जरूरी है। मगर जरूरत से ज्यादा पानी मोटापा भी दे सकता है। आमतौर पर लोग यह मानते हैं कि पानी पीने से वजन घटता है और फैट बर्न होता है। ये बातें सही भी हैं। आमतौर पर डॉक्टर मानते हैं कि एक स्वस्थ व्यक्ति को एक दिन में 2-4 लीटर पानी पीना चाहिए। विशेष स्थितियों जैसे-जिम, एक्सरसाइज, भारी मेहनत या गर्मी के कारण इसकी मात्रा बढ़ा सकते हैं। मगर आप सामान्य तौर पर रोजाना 5-6 लीटर से ज्यादा पानी पीते हैं, तो यह आपके स्वास्थ्य पर विपरीत असर भी डाल सकता है। 
हम सभी जानते हैं कि पानी हमारे स्वास्थ्य और जीवन के लिए कितना जरूरी है। इसके अलावा खुद को हाइड्रेट रखने के लिए दिन में कम से कम दो लीटर पानी जरूर पीना चाहिए , जैसा कि डॉक्टर भी सिफारिश करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सही समय पर पर्याप्त मात्रा में पानी पिया जाए, तो हमें कई रोगों से बचने में मदद मिलती है और हमारा शरीर भी तंदरुस्त रहता है। हालांकि आप इस बात से जरूर अंजान होंगे कि जरूरत से ज्यादा पानी पीने के दुष्परिणाम भी हो सकते हैं। ऐसे में इस बात का ख्याल रखना बेहद जरूरी है कि प्यास न लगने पर भी पानी न पीएं, जो कि आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।
ज्यादा पानी पीने से आ सकती है सूजन
ज्यादा पानी पीने से न केवल आपके शरीर में मौजूद इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन होता है बल्कि आपके हाथ, पैर और होठों पर भी सूजन आ सकती है। अधिक मात्रा में पानी पीने से खून में मौजूद सोडियम की मात्रा घटने लगती है, जिसके कारण हाथ, पैर और होंठों में सूजन आ जाती है और शरीर के कई अंगों को भी नुकसान पहुंचता है।
किडनी पर भी बुरा प्रभाव
जरूरत से ज्यादा पानी पीने से ओवरहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है। ओवरहाइड्रेशन का असर सीधा किडनी पर पड़ता है। दरअसल किडनियां ही हमारे शरीर में पानी को फिल्टर करने का काम करती हैं। अगर आप रोजाना ज्यादा मात्रा में पानी पीते हैं, तो किडनियों पर काम का बोझ ज्यादा पड़ता है, जिससे लंबे समय में किडनी फेल होने का भी खतरा हो सकता है।
पेशाब का रंग साफ आना भी समस्या
सभी जानते हैं कि जब पेशाब गहरे रंग का होता है तो यह डीहाइड्रेशन का संकेत होता है। लोग इसका गलत मतलब निकाल लेते हैं और ज्यादा पानी पीने लगते हैं उन्हें लगता है कि ऐसा करने से आपके पेशाब का रंग बिल्कुल साफ हो जाएगा। हाइड्रेशन उस वक्त हेल्दी लेवल पर होता है जब आपके पेशाब का रंग हल्का पीला हो। अगर पेशाब बिल्कुल साफ आ रहा है तो समझ लीजिए कि आप जरूरत से ज्यादा ज्यादा हाइड्रेट हैं और पानी की मात्रा को कम करें।
ज्यादा पानी से दिमाग में सूजन
एक शोध में पाया गया है कि शरीर में ज्यादा मात्रा में पानी हो जाने पर सोडियम का लेवल तेजी से कम होने लगता है। सोडियम का स्तर घटने से मस्तिष्क में सूजन आ सकती है, जो कि एक खतरनाक स्टेज है। शोध में पाया गया है कि ज्यादा पानी पीने के कारण शरीर में असामान्य रूप से सोडियम कम होने लगता है इसलिए हाइपोट्रिमिया का खतरा बढ़ जाता है। सोडियम एक तरह का इलेक्ट्रोलाइट है, जो हमारे शरीर में पानी की मात्रा को नियंत्रित करता है।
ज्यादा पेशाब आना
अगर आप भी उन लोगों में शामिल हैं, जिन्हें बार-बार पेशाब आता है तो ज्यादा पानी पीने की आदत को छोड़ दे। हालांकि यह समस्या पेशाब की नली में संक्रमण, डायबिटीज और प्रोस्टेट कैंसर की दिक्कत के कारण भी हो सकती है।
पानी पीने से ऐसे बढ़ता है वजन
हमारा वजन तब बढ़ता है, जब शरीर में फैट जमा होता है। जमे हुए फैट सेल्स में पानी की मात्रा भी होती है। ऐसे में अगर आप जरूरत से ज्यादा पानी पीते हैं, तो किडनी पूरे पानी को शरीर से बाहर निकालने में सक्षम नहीं होती है। बचा हुआ पानी शरीर में इलेक्ट्रोलाइट का बैलेंस बिगाड़ता है। इससे पानी शरीर में जमा हो जाता है और आपका वजन बढ़ जाता है। 24 घंटे में ही यह जमा हुआ पानी शरीर से निकल जाता है। हालांकि अगर आपको रोज ज्यादा पानी पीने की आदत है, तो मोटापे की समस्या हो सकती है।
ज्यादा पानी पीने से इलेक्ट्रोलाइट्स हो सकते हैं असंतुलित
जब आपको प्यास नहीं लगती है लेकिन फिर भी बोतल या गिलास को मुंह से लगाकर पानी पीने लगते हैं तो इस आदत को त्याग दें। प्यास लगने पर शरीर को जितनी जरूरत है उतने पानी की पूर्ति हो जाती है लेकिन आपको प्यास नहीं लगी है और फिर ही आप पानी पी रहे हैं तो आपके शरीर में पाए जाने वाले इलेक्ट्रोलाइट्स असंतुलित होना शुरू हो जाते हैं। इस स्थिति के कारण इलेक्ट्रोलाइट्स में असंतुलन हो जाता है।
हार्ट फंक्शन बिगाड़ सकता है ज्यादा पानी पीना
जरूरत से ज्यादा पानी पीने से पोटेशियम, सोडियम और मैग्नेशियम जैसे शरीर के इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ सकता है, जो हमारी किडनी से लेकर ह्रदय गतिविधियों तक के का संचालन को खराब कर सकती है। ऐसी स्थिति में आपका शरीर सही तरह से काम करना बंद कर देगा और कई रोग आपको अपनी चपेट में ले लेंगे। अगर आप मेहनत कर रहे हैं या गर्मी में घर से बाहर हैं तभी आपको ज्यादा पानी पीना चाहिए।

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27.7.19

नींद मे पसीना आने के उपचार


तापमान और हवा का दबाव ज्यादा होने पर रात में पसीना आना बहुत आम बात है। लेकिन ये कारण अगर मौजूद नहीं हैं, तो रात में पसीना ज्यादा आना किसी ऐसी बात का लक्षण हो सकता है जिसका पता लगाने की ज़रूरत है।
हालांकि रात को बहुत ज्यादा पसीना आम बात है। इसके अलावा कभी-कभी जब हम सर्दी लगने से ऊबर रहे होते हैं या हमें कोई छोटा-मोटा संक्रमण हुआ हो, तो भी इसका अनुभव करते हैं। इसके अलावा रजोनिवृत्ति (menopause) के दौरान रात में अक्सर पसीना आता है।
हालांकि रात में पसीने का अनुभव करने वाला हर कोई हाइपरहाइड्रोसिस से पीड़ित नहीं होता है, यह स्थिति अक्सर स्वास्थ्य केंद्रों के मरीजों में दिखाई देती है। कई मामलों में, अत्यधिक पसीना आने का कारण अनिद्रा (insomnia), तनाव (stress) या रात को अच्छी नींद न मिलने पर होने वाली एंग्जायटी भी होती है।
लेकिन कुछ मामलों में, अंदरूनी बीमारियां जो अपेक्षाकृत गंभीर होती हैं, इस स्थिति का कारण बन सकती हैं। इन बीमारियों का इलाज किया जाना ज़रूरी होता है।
जब आपके कमरे में अधिक गर्मी होती है या फिर आप एक साथ कई चादरें औढ लेते हैं तो आपको पसीना आ सकता है। लेकिन हम इसके बारे में बात नहीं कर रहे हैं। आधी रात में पसीना आने से मतलब है आप पसीने से तरबतर होकर उठते हैं और कभी-कभार आपको चादरें बदलने की नौबत तक पड़ जाती है। आमतौर पर यह चिकित्सा से संबंधित हो सकता है। अगर आप भी उन लोगों में शामिल हैं, जिन्हें रात को सोते वक्त बेहद पसीना आ जाता है  इसके पीछे के ऐसे 5 कारण  हैं, जिनको आप ठीक कर इससे निजात पा सकते हैं।
लो ब्लड शुगर (Low Blood Sugar)
क्या आपको डायबिटीज है? जब आप सोते वक्त जांचते हैं तो आपका ब्लड ग्लूकोज स्थिर होता है लेकिन सोने के बाद इसमें अचानक गिरावट आ जाती है। इसके पीछे आपकी दिन भर की भागदौड़, शाम को की गई एक्सरसाइज या फिर देर रात खाना खाना हो सकता है। अगर आप अपनी डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन का प्रयोग करते हैं तो इसके लिए रात को ली गई हाइपोगिल्समिया जिम्मेदार हो सकती है। जब आपका ग्लूकोज सोने से पहले 140 मिलीग्राम/डीएल के मुकाबले कम हो जाए या कुछ घंटे में इसमें गिरावट आ जाए तो कुछ खा लें।
नींद में सांस लेने मे दिक्कत (Sleep Apnea)
जब आप इस स्थिति से गुजर रहे होते हैं तो आपको रात में सांस लेने के दौरान कई बार दिक्कत होती है। क्योंकि आपकी बॉडी को ऑक्सीजन नहीं मिल पा रहा होता है, जिसके कारण आपको पसीना आने लगता है। हर बार जब आप दोबारा से सांस लेना शुरू करते हैं तो आपकी मांसपेशियों को दोगुना काम करना पड़ता है। जो लोग रात में सांस लेने के लिए सीपीएपी मशीन का प्रयोग करते हैं उन्हें रात में अक्सर पसीना आता है।
एसिड रिफलक्स (Acid Reflux)
सीने में जलन और सीने में दर्द ही आपको रात में नहीं उठाता। पेट की समस्या का उपचार न कराना आपको रात में पसीना से तरबतर कर सकता है। सोने से पहले कम खाना खाएं और हो सके तो टहलें। फैटी, तले और टमाटार से बने उत्पाद खाने से बचें। अगर आपको सप्ताह में दो बार भी इसके लक्षण दिखाई देते हैं तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
दवाएं (Medications)
बहुत सी दवाएं रात में पसीने के कारण बन सकती हैं, इसमें बुखार के लिए मेडिकल से खरीदी गई दवाएं भी शामिल हैं। ट्राइसाइक्लिक या टीसीए जैसे पुराने एंटीडिप्रेसेंट्स के साथ-साथ बुप्रोपियन व वेनलाफैक्सिन, हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी और कोर्टिसोन व प्रेडनिसोन जैसे स्टेरॉयड सामान्य रूप से रात में पसीना आने का कारण बन सकते हैं। ग्लूकोमा के लिए दवाएं और मुंह का सूखना भी पसीने की ग्रंथियों को उत्तेजित करती हैं।
थाइरॉयड का अतिसक्रिय होना (Overactive Thyroid)
ज्यादा पसीना आना और गर्मी के प्रति संवेदनशील होना हाइपरथाइरॉयडिज्म का प्रमुख लक्षण है। आपकी थाइरॉयड ग्रंथि आपके मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है इसलिए जब यह अधिक हार्मोन बनाने लगती है तो आपकी बॉडी अतिसक्रिय होने लगती है। आपके शरीर का तापमान बढ़ जाता है और आपको भूख व प्यास लग सकती है, आपकी नब्ज तेज चलने लगती है या फिर आपके हाथ कांपने लगते हैं।हमें यह ध्यान रखना चाहिए, जब थायराइड ग्रंथि थायरॉक्सिन हॉर्मोन से जुड़ा कोई बदलाव अनुभव करती है, तो यह हमारे मेटाबोलिज्म पर असर डालता है। इसके मुख्य नतीजों में  गर्मी को लेकर असहनशीलता और अत्यधिक पसीना आना है।
*रात में पसीना आना गेस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज का संकेत भी हो सकता है
गेस्ट्रोइसोफेगल रिफलक्स के प्रमुख लक्षण
1-रोगी के सीने या छाती में जलन.
2-कई बार एसिडिटी के कारण सीने में दर्द भी रहता है, मुंह में खट्टा पानी आता रहता है.
3-एसिडिटी के कारण कई बार रोगी ऐसा महसूस करता है जैसे भोजन उसके गले में आ रहा है या कई बार डकार के साथ खाना मुंह में आ जाता है.
4-रात में सोते समय इस तरह की शिकायत ज्यादा होती है और बहुत ज्यादा पसीना आता है.
5-कई बार एसिड भोजन नली से सांस की नली में भी पहुंच जाता है, जिससे मरीज को दमा या खांसी की तकलीफ भी हो सकती है.
आमतौर पर पसीना आना चिंता का विषय नहीं होता, लेकिन तब परेशान होना जरूरी है जब जरूरत से ज्यादा पसीना आए और वो भी रात में आता हो. दरअसल डॉक्टर्स का मानना है कि रात में अत्यधिक पसीना आना या बैचेनी महसूस करना खतरे की घंटी है. इस समस्या को नजरअंदाज करने की बजाय तुरंत डॉक्टर से सलाह लें और यदि यह गेस्ट्रोइसोफेगल रिफलक्स के कारण हो तो इसके उपचार के लिये डॉक्टर की सलाह से दवाएं लें.
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26.7.19

गाय के घी के स्वास्थ्य लाभ



अध्यात्म और शारीरिक दोनों ही रूप से गाय के घी का बहुत ही महत्व है। शास्त्रों में और आयुर्वेद में इसको अमृत सामान माना गया है। इसको देवी देवता को खुश करने के लिए शुद्ध घृत की ज्योति एवं हवन में उपयोग किया जाता है। इसके सेवन से कमजोर व्यक्ति के कई रोग दूर होकर शरीर बलवान और शक्तिशाली बनता है। इससे त्वचा,सिर,पेट के रोगो में लाभ होता है। इसकी कुछ बुँदे नाक में डालने से, एनिमा लेने से पित्त और वात रोग का इलाज किया जाता है। घृत के सेवन के अनगिनत फायदे है।
स्त्री यौन रोग (श्वेत प्रदर) में
घी, छिलका सहित पिसा हुआ काला चना और पिसी शक्कर (बूरा) तीनों को समान मात्रा में मिलाकर लड्डू बाँध लें। प्रातः खाली पेट एक लड्डू खूब चबा-चबाकर खाते हुए एक गिलास मीठा गुनगुना दूध घूँट-घूँट करके पीने से स्त्रियों के प्रदर रोग में आराम होता है, पुरुषों का शरीर मोटा ताजा यानी सुडौल और बलवान बनता है।
गाय के घी के सेवन कमजोरी का इलाज
यह स्मरण रहे कि घृत के सेवन से कॉलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता है। वजन भी नही बढ़ता, बल्कि वजन को संतुलित करता है । यानी के कमजोर व्यक्ति का वजन बढ़ता है, मोटे व्यक्ति का मोटापा (वजन) कम होता है।
आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए
एक चम्मच शुद्ध घृत में एक चम्मच बूरा और 1/4 चम्मच पिसी काली मिर्च इन तीनों को मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय चाट कर ऊपर से गर्म मीठा दूध पीने से आँखों की ज्योति बढ़ती है।
यादाशत बढाएं
गाय के घी को नाक में डालने से यादाशत अच्छी होती है और बच्चों के लिए यह बहुत फायदेमंद है।
बलगम से छुटकारा
घी की झाती पर मालिस करने से बच्चो के बलगम को बहार निकालने मे सहायक होता है।
फफोले का उपचार
फफोलो पर गाय का देसी घी लगाने से आराम मिलता है।
अच्छी नींद
रात को नींद नहीं आती तो रात को नाक में घी डालकर सोएं,नींद अच्छी आएगी और सारा दिन फ्रैश रहेगें।
पुराने जुखाम से राहत
लंबे समय से जुखाम से परेशान हैं और दवाइयों से भी कोई फर्क नहीं पड़ रहा तो रात को रोजाना गाय का घी डालकर सोएं। इसके लगातार इस्तेमाल से जुखाम से राहत पाई जा सकती है।
उच्च कोलेस्ट्रॉल
उच्च कोलेस्ट्रॉल के रोगियों को गाय का घी ही खाना चाहिए। यह एक बहुत अच्छा टॉनिक भी है। आप घी की कुछ बूँदें दिन में तीन बार, नाक में प्रयोग करें।
खर्राटे गायब
रात को सोने से पहले हल्का गुनगुना करके एक-एक बूंद नाक में डाल कर सोमे से खर्राटों की परेशानी दूर हो जाएगी।
तनाव दूर
किसी भी तरह के मानसिक तनाव से दूर हैं तो गाय का शुद्ध घी रात को रोजाना नाक में डालकर सोएं। इससे तनाव दूर हो जाएगा और कोई नुकसान भी नहीं होगा।
गाय के घृत से सांप काटने पर उपचार
सांप के काटने पर 100 -150 ग्राम घी पिलायें उपर से जितना गुनगुना पानी पिला सके पिलायें जिससे उलटी और दस्त तो लगेंगे ही लेकिन सांप का विष कम हो जायेगा।
चर्म रोग का इलाज
चर्म रोग का घरेलू इलाज – गाय के घी को ठन्डे जल में फेंट ले और फिर इसको पानी से अलग कर ले यह प्रक्रिया लगभग सौ बार करे और इसमें थोड़ा सा कपूर डालकर मिला दें। इस विधि द्वारा प्राप्त घी एक असर कारक औषधि में परिवर्तित हो जाता है जिसे त्वचा सम्बन्धी हर चर्म रोगों में चमत्कारिक कि तरह से इस्तेमाल कर सकते है। यह सौराइशिस के लिए भी कारगर है।
अन्य लाभ 
गाय के घी के नियमित सेवन से आपको कब्ज और एसिडिटी की समस्या नहीं होगी|
अगर आपके हाथ पैर में जलन हो रही है तो गाय के घी से तलवों की मालिश करें| ऐसा करने से हाथ पैरों की जलन समाप्त हो जाएगी|
शरीर में थकान या कमजोरी महसूस हो रही है तो आप दूध में एक चम्मच गाय का घी और मिश्री को मिलाकर पीएं, कमजोरी दूर हो जाएगी|
अगर आप माइग्रेन के दर्द से पीड़ित है तो गाय के घी की 2 बूंदे सुबह व शाम नाक में डालें| आपको आराम मिलेगा|
गाय के घी के इस्तेमाल से शरीर का मोटापा नहीं बढ़ता क्यूंकि इसके सेवन से कोलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता|
गाय के घी के प्रयोग से व्यक्ति की शारीरिक व मानसिक ताकत बढ़ती है|
गाय के घी को नाम में डालने से एलर्जी की समस्या दूर हो जाती है|
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25.7.19

रूखी आँखें (ड्राय आई सिंड्रोम) के घरेलू उपचार


ऑंखे आपके प्रमुख अंगों में से एक है। यदि आपकी आंखें हवा या गर्मी के प्रति अति संवेदनशील है, और उनमें आसानी से खुजली और जलन हो जाती हैं, तो यह संभव है कि आप ऑंखों का सूखापन (Dry Eyes) से ग्रसित हो सकते है। जो बताता है कि आपको ड्राई ऑय सिंड्रोम (dry eyes syndrome) हुआ है।
ड्राई आई सिंड्रोम यानि आंखों में रूखापन होने की बीमारी एक आम स्वास्थ्य के मुद्दों में से एक है। बच्‍चे हो या बुजुर्ग कोई भी इससे वचिंत नहीं है। आजकल धूल- मिट्टी, प्रदूषण व गलत लाइफस्‍टाइल के साथ मोबाइल, कंप्यूटर और डिजिटल स्क्रीन गैजेट्स के ज्‍यादा उपयोग इसके पीछे का सबसे बड़े कारणों में शामिल है। आंखों में ड्राईनेस होने से आंखों में खुजली, जलन, आंखों से आंसू निकलना और बिना कारण के आंखों में थकान आदि आंखों के रूखेपन के मुख्‍य लक्षण हैं। ऐसे में बहुत से लोगों को टीवी देखते समय, फोन का इस्‍तेमाल करने और पढ़ने में दिक्‍कत होने लगती है।
यह सिंड्रोम तब होता है जब आंसू ग्रंथियां आंखों को चिकना या गीला करने के लिए पर्याप्त आँसू पैदा नहीं करती हैं। आंसू, आंखों के कार्निया एवं कन्जंक्टाइवा को नम और गीला रखता है, जिससे आंखें सूखती नहीं हैं। आंखों में टियर फिल्म पायी जाती है और इसके सबसे बाहरी परत को लिपिड या ऑयली परत कहते हैं। यह लिपिड या ऑयली परत आंसू के सूखने को कम करती है और आंखों को चिकनाई प्रदान करती है। लेकिन देर तक कंप्यूटर पर काम करने, मोबाइल फोन का ज्‍यादा इस्‍तेमाल और टीवी देखने के साथ लगातार एसी में रहने से आंखों की यह टियर फिल्म प्रभावित होती है, जो कि ड्राई आई सिंड्रोम का कारण बनते हैं। यदि आप आंखों में सूखेपन की समस्‍या से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो आप इन आसान घरेलू उपायों से राहत पा सकते हैं।
फैटी एसिड युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन
अध्ययनों के अनुसार, यदि आपको आंखों में रूखेपन की समस्‍या है, तो आपको ओमेगा -3 फैटी एसिड युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए क्योंकि यह आपको आंखों की इस समरूश में राहत देने में मदद कर सकता है। इन खाद्य पदार्थों के एंटीइंफ्लामेटरी गुण आंखों की सूजन व जलन को कम करने में मदद करते हैं। ओमेगा 3 से भरपूर खाद्य पदार्थों में अखरोट, फैटी फिश, चिया सीड्स और अंडे शामिल हैं, ऐसे में आप इन खाद्य-पदार्थों का सेवन कर सकते हैं।
एलोवेरा
एलोवेरा स्‍वास्‍थ्‍य के लिए कितना लाभदायक है, ये आप सभी जानते ही होंगे लेकिन क्‍या यह आपको आंखों के सूखेपन में भी राहत दिला सकती है? इसका जवाब है, हां। एलोवेरा में एल्‍कलाइन व एंटीइंफ्लामेटरी गुण होते हैं। जिसकी वजह से यह आपकी ड्राई आंखों की समस्‍या को दूर कर सकता है। एलोवेरा जेल एक मॉश्‍चराइजर के रूप में भी काम करता है। इयलिए आंखों की ड्राईनेस की समस्‍या होने पर आप नेचुरल एलोवेरा जेल का इस्‍तेमाल ही करें। आप एलोवेरा की पत्‍ती से जेल निकालें और अपनी आंखों की पुतली पर उंगली की मदद से लगाएं। इसके 5-10 मिनट के बाद आप इसे साफ कर दें।
मेकअप से दूरी व गुलाब जल का उपयोग
यदि आप आंखों का मेकअप करते हैं, तो आंखों में रूखेपन के दौरान आई मेकअप से दूरी बना लें। इसके अलावा, दिन भर का काम खत्‍म करने के बाद आप अपनी आंखों को आराम देने के लिए गुलाबजल का इस्‍तेमाल करें। कंप्‍यूटर पर लगातार काम करने से आपकी आंखे थक जाती हैं, इसके लिए आप गुलाब जल में कॉटन को भिगोकर अपनी आंखों के ऊपर 15 मिनट के लिए रख लें। ऐसा करने से आपकी आखों की ड्राईनेस दूर होगी। यदि आप रोजाना कंप्यूटर पर काम करते हैं, तो आप रोजाना अपनी आंखों की थकान मिटाने के लिए गुलाबजल का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। यह आपकी आंखों की नमी को वापस पाने के लिए फायदेमंद साबित हेागा।
आंखों के ड्राप या मलहम
शुष्‍क आंखों के उपचार के लिए आज बहुत से डॉक्‍टरी तरीके और दवाएं उपलब्‍ध है जो आपको राहत दिलाने में मदद कर सकते है। डॉक्‍टर द्वारा बताए गए ऑय ड्राप आपको अस्थायी राहत दिला सकते है। ध्‍यान रखने वाली बात यह है कि कुछ आंखों के ड्राप बचाव करने वाले पदार्थ (preservatives) होते है। ये आमतौर पर शीशीयों में कई बार उपयोग करने लायक मात्रा में आते है, जो शीशी खोले जाने के बाद बैक्‍टीरिया से प्रभावित होकर आपकी आंखों को भी संक्रमित कर सकते है। यदि आप एक दिन में चार बार से ज्यादा इसका उपयोग करते हैं, तो आपको संरक्षक मुक्त ड्राप का उपयोग करना चाहिए। संरक्षक मुक्त ड्राप (Preservative-free drops) आमतौर पर एकल खुराक शीशियों में आते हैं।
मरहम ड्राप से गाढ़े होते हैं और आंखों को ढंकने और सूखेपन से लंबे समय तक बचाते हैं। हांलांकि, जब आप उनका उपयोग कर रहे हों तो महलम आपकी द्रष्टि को धुंधला कर सकते हैं। सोने के समय से पहले उनका उपयोग करना सबसे अच्‍छा होता है।
गर्म सेक
आंखों की चिकनाई और आंसू की गुणवत्‍ता में सुधार लाने के लिए आंखों को गर्म सेक देना बेहद फायदेमंद व बेहतर विकल्‍प है। इसके लिए आप गुनगुना पानी लें और फिर काटन की मदद से अपने आंखों को सेक दें। ऐसा करने से आंखों की टियर फिल्म को फायदा मिलेगा और आपकी आंखों के सूखेपन से होने वाली एलर्जी जैसी सारी समस्‍याएं दूर हो जाएंगी।
पर्याप्त पानी और चीनी से दूरी
अध्ययनों के अनुसार, यदि आप आंखों के रूखेपन की समस्‍या से परेशान हैं, तो आप उस दौरान चीनी युक्त खाद्य पदार्थों से दूरी बना लें, यही आपके लिए बेहतर होगा। इसके अलावा, आप रोजाना 8-10 गिलास पानी जरूर पिएं। यहद आप ऐसा करते हैं, तो जल्‍द ही आपको इस समस्‍या से निजात मिलेगी।
अरंडी का तेल-
आपकी आंखों में जैविक अरंडी तेल (Organic castor oil) की एक या दो बूंदे डालें। शुद्ध कैस्‍टर ऑयल ना होने पर आप कास्‍ट ऑयल से बने स्‍नेहक आंखों के ड्राप का भी उपयोग कर सकते हैं। ऐसा आपको रोजाना 2-3 बार करना है।
यह क्‍यों काम करता है: शुष्‍क आंखों के लिए कास्‍टल तेल का उपयोग करना फायदेमंद है क्‍योंकि यह कास्‍ट प्‍लांट (Ricinus communis) के बीज दबाकर व्‍युत्‍पन्‍न होते हैं और इसमें ऐसिड अच्‍छी मात्रा में होते है। यह स्‍वाभाविक यप से स्‍नेहक गुण प्रदान करता है। इसमें विरोधी भड़काऊ (Anti-inflammatory) गुण भी होते है जो आंखों में सूखे जे जुड़ी जलन और खुजली को दूर करने में मदद करते है।
नारियल तेल
आपको चाहिए : कार्बनिक (organic virgin) नारियल तेल की कुछ बूंदें ।
आप अपनी आंखों में इस नारियल तेल की कुछ बूंदे डालें। और आपनी पलकों को झपका कर इस तेल को अवशोषित करने का प्रयास करें। अच्‍छे परिणाम पाने के लिए आप इसे सुबह और रात में उपयोग कर सकते है।नारियल तेल का उपयोग विभिन्‍न उद्देश्‍यों को पूरा करने के लिए किया जाता है। इसमें कैप्रिक ऐसिड और लॉरिक एसिड (capric and lauric acid) जैसे फैटी ऐसिड होते हैं, जो आपकी त्‍वचा और बालों के लिए फायदेमंद होते हैं। ये भी अत्यधिक नमी और एंटी-इन्फ्लामेट्री होते हैं, इसलिए इसका उपयोग आपकी शुष्‍क और खुजली वाली आंखों में तुरंत राहत दिलाने में मदद करते है।
ककड़ी से
आप अपनी शुष्‍क आंखों का उपचार ककड़ी से कर सकते है। इसके लिए आप ककड़ी को गोल आकार में काट लें। तुरंत आराम पाने के लिए अपनी आंखों को बंद कर उनके ऊपर ककड़ी के काटे गऐ तुकड़ों को रखें। अपनी आंखों को आराम दिलाने और उन्‍हें स्‍वस्‍थ्‍य रखने के लिए ऐसा दिन में 2-3 बार कर सकते हैं।
खीरा (Cucumber) शुष्‍क आंखों के उपचार के सबसे अच्‍छा और आसान उपचार हैं। ककड़ी में पानी पर्याप्‍त मात्रा में होता है जो आपकी आंखों को शांत करने में मदद करता है। ककड़ी में विटामिन ए भी होता है, जो सूखी आंखों के उपचार में लाभकारी होता है।
सौंफ की चाय
एक कप पानी में एक चम्‍मच सौंफ डालकर इसे 10-15 मिनिट तक उबालें। थोड़ा ठंडा होने के बाद इस गर्म चाय में सूती कपड़े को भिगों कर अपनी आंखों में रखें। और इसे कम से कम दस मिनिट के लिए छोड़ दें। आपको ऐसा प्रतिदिन 2-3 बार करना चाहिए।
सौंफ के बीज में एंथोल (anethole), एक कार्बनिक यौगिक होता है। जो एंटी-इन्फ्लामेट्री और सुखदायक गुण प्रदान करता है। सौंफ के बीज की एंटी-इन्फ्लामेट्री गतिविधियां सूजन और चिड़चिड़ापन को कम करने में मदद कर सकती हैं, आपकी आंखों में नमी को बनाए रखने के लिए इसके गुणों का उपयोग किया जा सकता है।
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23.7.19

पैकेट वाले दूध को गरम करना ठीक है या नहीं




दूध में कई प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसी वजह से इसे एक संपूर्ण आहार माना गया है। शरीर में जब भी किसी पोषक तत्व की कमी होती हैं तो दूध पीने की सलाह दी जाती है। दूध कई प्रकार के रोगों से शरीर की रक्षा करता है। यह पित्त दोष में असरदार है। इससे हड्डियां मजबूत बनती है। साथ ही समरण शक्ति भी अच्छी होती है। बढ़ते बच्चों को दूध पीने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह उनके विकास के लिए काफी जरूरी है।
आयुर्वेद में गाय का दूध पीने की सलाह दी गई है। ऐसा माना जाता है कि गाय का दूध ताजा, असली और जैविक होता है। लेकिन कई लोगों को दूध पचने में दिक्कत होती है और पेट फूलने लगता है। जब दूध की क्वालिटी अच्छी नहीं होती तब इसे डाइजेस्ट करने में दिक्कत आती है। आज के समय में असली और अच्छी क्वालिटी का दूध मिलना इतना आसान नहीं है। कई लोग पैकेट वाला दूध भी उपयोग करते हैं लेकिन यह ताज़ा और जैविक नहीं होता।
अब हम इस बात पर चर्चा करते हैं कि पाश्चराइज्ड मिल्क को गर्म करना चाहिए या नहीं। भारत में कई सालों से दूध को इस्तेमाल करने से पहले गर्म किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे दूध में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को आसानी से खत्म किया जा सकता है। कुछ इसी प्रक्रिया को हम आज पैकड पाश्चराइज्ड मिल्क के साथ भी अपनाते हैं। लेकिन फूड कारपोरेशन ऑफ इंडिया के प्रोफेसर सौरभ गुप्ता के अनुसार जब हम दूध को अधिक तापमान पर गर्म करते हैं तो इससे उसे लंबे समय तक ठीक रखा जा सकता है। वहीं जब हम दूध को दोबारा से गर्म करते हैं तो इससे इसकी लंबे समय तक ठीक रखने की क्षमता में कमी आती है।
आजकल ज्यादातर लोग पैकेट वाले दूध का इस्‍तेमाल करने लगे हैं। जो पहले से पॉइश्चराइज्ड (pasteurized) होता है। यानि कि इस दूध को पहले ही अधिक तापमान पर गर्म कर फिर ठंडा किया जा चुका होता है। इस प्रक्रिया को पॉइश्चराइजेशन कहते हैं। जिससे दूध को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और साथ ही दूध में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को भी खत्‍म किया जा चुका है। खुले दूध को इस्तेमाल में लेने से पहले कई बातों का ध्‍यान रखना पड़ता है जैसे दूध छानना, उसे अच्छी तरह उबालना आदि।
बाजार से खुला दूध खरीदने पर दूध को अधिक तापमान पर उबालकर ठंडा करने की आवश्यकता पड़ती है वरना वह कुछ ही घंटों में दूध फट जाता है या फिर जम जाता है। लेकिन पैकेट वाले पॉइश्चराइज्ड दूध के साथ ये सारे झंझट की जरुरत नहीं होती है। लेकिन हम में से कई लोग है जो पैकेट वाले दूध यानि कि पॉइश्चराइज्ड मिल्क को भी गर्म करते है जो कि सही नहीं है
कई लोग इस गलत भ्रम में रहते है कि दूध को प्लास्टिक के पैकेट में पैक किया जाता है, इसलिए इसे सीधे तौर पर इस्तेमाल करने से बचना चाह‍िए। कई लोग दूध को इसलिए गर्म करते हैं ताकि दूध ज्‍यादा देर तक सेवन के उपयोग में ल‍िया जा सकें। लेकिन आपको बता दें कि अगर आप भी पैकेट दूध को गर्म करती है तो ये पूरी तरह पके मन में यह सवाल आना लाजिमी है कि आखिर क्यों पॉइश्चराइज्ड मिल्क को गर्म नहीं करना चाहिए?
क्यों नहीं गर्म करना चाह‍िए पैकेट वाले दूध को? विशेषज्ञों की मानें तो वो भी ये ही सलाह देते हैं कि पॉइश्चराइज्ड मिल्क को गर्म करने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती। दूध कंपनी पैकिंग से पहले ही दूध को अच्छी तरह पॉइश्चराइज करके इसे कीटाणुमुक्त और संरक्षित बना लेती है। अगर आप इसको दोबारा से गर्म करते हैं तो इससे इसमें मौजूद पोषक तत्व या तो कम हो जाते हैं या नष्ट हो जाते हैं।
4 डिग्री तापमान पर रख सकते हैं पैकेट वाला दूध पैकेट वाले दूध की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए इसे घर पर बार-बार गर्म करने की आवश्यकता नहीं है। आप इस दूध को 4 डिग्री तापमान पर सात दिनों तक आसानी से ठीक रख सकते हैं। आपने ध्यान दिया होगा कि दूध के पैक पर एक्सपायरी डेट लिखी होती है। उससे पहले दूध के खराब होने की संभावना कम ही होती है।

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22.7.19

मक्खन के स्वास्थ्य लाभ और सावधानियाँ


आजकल लोग तेल ही नहीं, मक्खन में भी सब्ज़ियां बनाते हैं। इससे न सिर्फ उस डिश का टेस्ट बदल जाता है, बल्कि मक्खन से शरीर को कैल्शियम, मैग्नीशियम, सेलेनियम और आयोडीन भी मिलता है। इसके अलावा, बटर सेक्स हार्मोन जैसे- एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन और टेस्टोस्टेरोन भी प्रोड्यूस करने में मदद करता है। और-तो-और, यह बॉडी को विटामिन ए, विटामिन डी, विटामिन ई और विटामिन के भी प्रोवाइड करता है, जिससे फर्टिलिटी बढ़ती है।
वर्तमान जीवनशैली में, हम वसायुक्त सभी चीजों को अपनी डाइट से बाहर करते जा रहे हैं। मक्खन की बात करें, तो कभी पुराने जमाने में रोटी के साथ ढेर सारा मक्खन सुबह के नाश्ते में शामिल किया जाता था, आज हम उसे पूरी तरह से नजरअंदाज करने लगे हैं। लेकन क्या आप जानते हैं, कि मक्खन खाने के भी अपने ही कुछ फायदे हैं।
दिल के रोगों में आराम
मेडिकल रिसर्च काउंसिल के शोध के अनुसार, जो लोग मक्खन का सेवन करते हैं उन्हें दिल के रोगों का रिस्क आधा हो जाता है। इनमें विटामिन ए, डी, के2 और ई के अलावा लेसिथिन, आयोडीन और सेलेनियम जैसे तत्व अच्छी मात्रा में होते हैं जो दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हैं।
बुखार - 
गाय के दूध का मक्खन और खड़ी शर्करा का सेवन करने से पुराना बुखार ठीक हो जाता है, इसके अलावा मक्खन के साथ शहद और सोने के वर्क को मिलाकर खाने से टीबी के मरीजों को लाभ मिलता है।
कैंसर - 
मक्खन कोई मामूली चीज नहीं है। यह कैंसर जैसे रोग से बचाव करने में आपकी मदद करता है। दरअसल मक्खन में मौजूद फैटी एसिड कौंजुलेटेड लिनोलेक प्रमुख रूप से कैंसर से बचाव में मदद करता है।
आंखों में जलन - 
आंखों में जलन की समस्या होने पर गाय के दूध का मक्खन आंखों पर लगाना बेहद फायदेमंद होता है। किसी भी कारण से आंखों में होने वाली जलन को यह समाप्त कर देता है।
थायरॉइड - 
मक्खन में आयोडीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो थायरॉइड के मरीजों के लिए फायदेमंद होता है। इसके अलावा इसमें मौजूद विटामिन ए भी थायरॉइड ग्लैंड के लिए बेहद फायदेमंद होता है।
दमा - 
सांस की तकलीफ होने पर भी मक्खन लाभदायक साबित होता है। मक्खन में मौजूद सैचुरेटेड फैट्स फेफड़ों की मदद करते हैं और दमा के मरीजों के लिए भी इसका सेवन फायदेमंद माना जाता है।
पाइल्स - 
गाय के दूध का मक्खन और तिल को मिलाकर खाने से पाइल्स की समस्या में लाभ होता है। इसके अलावा मक्खन में शहद व खड़ी शक्कर मिलाकर खाने से खूनी बवासीर ठीक हो जाती है। इसमें शहद के स्थान पर नागकेसर का प्रयोग भी किया जा सकता है।
 प्रजनन क्षमता -
 प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए मक्खन का बहुत लाभकारक माना जाता है। यह शरीर में गर्मी बढ़ाता है तथा मेल और फीमेल हार्मोन्स को बढ़ाने का कार्य करता है।
एंटीऑक्‍सीडेंट -
 एंटीऑक्‍सीडेंट से भरपूर मक्खन कैंसर या ट्यूमर से आपकी रक्षा करने के साथ ही त्‍वचा को फ्री रैडिकल्‍स से सुरक्षि‍त रखता है। यह त्वचा के लिए काफी फायदेमंद होता है।इसकी मसाज से त्वचा में जान आ जाती है।
 मूड बने मस्‍त - 
मक्खन में पाया जाने वाला सेलीनियम आपके मूड को बेहतर करने में आपकी मदद करता है। तो जब भी आपका मूड खराब हो, थोड़ा सा मक्खन, उसे ठीक करने में आपकी मदद कर सकता है। 
हड्डियाँ मजबूत-
मक्खन में विटामिन्स, मिनिरल्स और कैल्शियम की मात्रा भरपूर होती है जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करती है। दांतों और हड्डियों से जुड़े रोगों, खासतौर पर ओस्टियोपोरोसिस के उपचार में इसका सेवन फायदेमंद है।
सावधानी-
ज़्यादा मक्खन खाने से शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है और इससे कार्डियोवैस्कुलर डिज़ीज़ के चांस भी ज़्यादा हो जाते हैं।
*जितना हो सके, सब्ज़ी में कम बटर का इस्तेमाल करें।
*दिल के लिए ना तो सेचुरेटेड फैट अच्छा है और ना ही कोलेस्ट्रॉल। इसलिए, हाई सेचुरेटेड फैट वाला बटर खाने से बचें।
* 1 चम्मच मक्खन में 30 मिलीग्राम कोलेस्ट्रॉल और 7 ग्राम सेचुरेटेड फैट होता है। हमारे शरीर की रोज़ाना सेचुरेटिड फैट की ज़रूरत 15 ग्राम से ज़्यादा नहीं है।
* बटर की जगह लो ट्रांस-फैट मार्जरीन (नकली बटर) का इस्तेमाल करें। मार्जरीन, वेजिटेबल ऑयल में हाइड्रोजन डालकर बनता है। मक्खन की जगह आप मार्जरीन का उपयोग करें। इसमें 35 प्रतिशत कम फैट होता है और यह ज़ीरो-कोलेस्ट्रॉल से मैच करता है। इससे आपको हेल्थ से जुड़ी परेशानियां कम होंगी।

किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

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21.7.19

सौंठ (सूखी अदरक) के गुण व स्वास्थ्य लाभ



सर्दी के मौसम में अदरक का इस्तेमाल सुबह की चाय से लेकर रात की सब्जी तक में किया जाता है। लेकिन जब इसे सुखा कर व पीसकर तैयार किया जाता है तो यह एक मसाले की शक्ल ले लेता है, जिसे सोंठ कहा जाता है। अधिकतर लोग अपने घरों में सोंठ का प्रयोग मसाले के रूप में करते हैं तो कुछ लोग ठंड से बचने के लिए सोंठ के लड्डू बनाकर रखते हैं। वैसे इसकी मदद से कई समस्याओं से भी राहत पाई जा सकती है।
सिरदर्द से राहत
सिरदर्द होने पर सोंठ का प्रयोग करना एक अच्छा विचार हो सकता है। बस इसका पेस्ट बनाकर अपने माथे पर लगाएं। इससे आपको काफी आराम होगा। वहीं जिन लोगों को माइग्रेन है, वह भी दो टेबलस्पून सोंठ को गर्म पानी में डालकर पीएं। इस उपाय से आधे सिर के दर्द से भी आराम मिलता है। आप चाहें तो गले में दर्द होने पर भी इस पेस्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं।
वजन करे कम
अदरक में थर्मोजेनिक एजेंट नामक तत्व होता है जो वसा को जलाने में मदद करता है, जिससे वजन आसानी से कम होता है। गरम पानी के साथ इसका सेवन मोटापे को कम करने में सहायक है
इसके लिए एक चौथाई टीस्पून सोंठ को एक कप गर्म पानी में अच्छे से मिलाएं। अब इसका प्रतिदिन सेवन करें। आप चाहें तो इसमें थोड़ा शहद भी मिला सकते हैं।
सामान्य ठंड,बुखार 
सर्दी में ठंड लगने पर लोग अदरक का सेवन किसी न किसी रूप में अवश्य करते हैं। लेकिन इसके अतिरिक्त सोंठ का प्रयोग करके भी ठंड से निजात पाई जा सकती है। इसके लिए चाहें तो सोंठ को चाय में डालकर पीएं या फिर सोंठ के साथ गुड़ मिलाकर सेवन करें। ऐसा करने से बहती नाक से आराम मिलता है। यह पसीने को निकालने में सहायक है, जिससे शरीर का तापमान कम हो सकता है और शरीर के विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे बुखार में भी आराम मिलता है। शहद के साथ इसे खाने से बुखार कम होता है
यूरिनरी इंफेक्शन
यूरिनरी इंफेक्शन कई बार बेहद गंभीर हो सकता है। इससे बचने का एक आसान उपाय है कि सोंठ को दूध व चीनी के साथ मिलाकर सेवन करें। इससे इंफेक्शन काफी हद तक कम हो जाता है।
*जोड़ों के दर्द में सूखी अदरक, जिसे हम सोंठ कहते हैं, काफी लाभदायक होती है। सोंठ, जायफल को पीसकर तिल के तिल के में डालकर, उसमें भीगी हुई पट्टी जोड़ों पर लगाने से आराम मिल सकता है। इसके अलावा उबले हुए पानी के साथ शहद और अदरक पाउडर को पीने से गठिया में लाभ होता है।
एक्ने से छुटकारा
टीनेज में एक्ने होना एक सामान्य बात है, लेकिन इससे निजात पाने के लिए तरह−तरह की क्रीम अपनाने की आवश्यकता नहीं है। सोंठ भी एक्ने से निजात दिलाने में मददगार हो सकता है। बस, मिल्क पाउडर व सोंठ को आपस में मिलाकर एक स्मूद पेस्ट बनाएं। अब चेहरे को साफ करके इस पेस्ट को अप्लाई करें। करीबन 20 मिनट बाद चेहरा वॉश करके मॉइश्चराइजर इस्तेमाल करें। सप्ताह में एक बार इस पेस्ट का इस्तेमाल करने से कुछ ही दिनों में फर्क नजर आने लगता है।
गैस की समस्या
सोंठ, हींग और काला नमक मिलाकर लेने से गैस की समस्या में लाभ होता है। पिसी हुई सोंठ और कैरम के बीजों को नींबू के रस में भि‍गोकर छाया में सुखाकर प्रतिदिन सुबह लेने से गैस और पेडू के दर्द में आराम मिलता है।
* यह पाचनक्रिया को दुरूस्त कर वजन कम करने में भी मदद करता है। इसके अलावा यह रक्त में मौजूद शर्करा के स्तर को नियंत्रित कर, वसा को सक्रिय करता है।
पेट दर्द, कब्ज

पेट दर्द, कब्ज और अपच जैसी समस्याओं में इसे पीसकर हींग और सेंधा नमक के साथ लेने से आाम मिलता है। इसके अलावा इसे पानी के साथ उबालकर बार-बार पीने से डायरिया में काफी लाभ मिलता है।
हिचकी
सोंठ को दूध में उबालकर, ठंडा करके पीने से हिचकी आना बंद हो जाती है। पसलियों में दर्द होने पर इसे पानी में उबालकर ठंडा कर दिन में कम से कम चार बार पीने से लाभ होता है।
लकवे मे-

लकवे के प्रभाव को कम करने के लिये सूखी अदरक का पाउडर, जिगरी और गर्म मसूर की दाल को मिलाकर खाने से फायदा होता है। इसके अलावा लहसुन, सूखी अदरख और पानी का लेप बनाकर लगाने से भी काफी लाभ होता है।

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18.7.19

घुटने घिसने पर मरम्मत के कमाल के उपचार



उम्र बढ़ने के साथ-साथ घुटनों की ग्रीस कम होने लगती है। लेकिन आजकल कम उम्र मे भी इस समस्‍या से जूझना पड़ता है। अगर किसी के घुटनों की ग्रीस खत्म हो चुकी हो और उनका चलना, उठना और सीढ़ी चढ़ना मुश्किल हो गया हो तो परेशान होने की जरूरत नहीं है क्‍योंकि आज हम इस आर्टिकल में कुछ ऐसी चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्‍हें रेगुलर खाने से आप अपने घुटनों की ग्रीस को आसानी से बढ़ा सकते हैं।
घुटनों में ग्रीस कम होने का असली कारण क्‍या है?
घुटनों की ग्रीस कम होने के कारण
रात को जागने की आदत
अधिक चिंता करना
गिरने से चोट लगना
अधिक वजन होना
कब्ज रहना
खाना जल्दी-जल्दी खाने की आदत
फास्ट-फूड का अधिक सेवन
तली हुई चीजें बहुत ज्‍यादा खाना
कम मात्रा में पानी पीना या खड़े होकर पानी पीना
बॉडी में कैल्शियम की कमी
घुटने घिसने पर मरम्मत के उपचार -
                                 
हरसिंगार के पत्‍ते-
हरसिंगार जिसे पारिजात और नाइट जैस्मिन भी कहते हैं। इसके फूल, पत्ते और छाल का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है। इसके पौधे आपको अपने घर के आस-पास भी देखने को मिल जाएंगे। इस पेड़ के पत्‍ते जोड़ों के दर्द को दूर करने और घुटनों की ग्रीस बढ़ाने में मददगार होते हैं। इसके पत्तों में टेनिक एसिड, मैथिल सिलसिलेट और ग्लूकोसाइड होता है ये द्रव्य औषधीय गुणों से भरपूर हैं। घुटनों की ग्रीस बढ़ाने के लिए हरसिंगार के 3 पत्तों को पीसकर पेस्ट बना लें। फिर इस पेस्ट को 1 बड़े गिलास पानी में मिलाकर धीमी आंच पर पकाएं। जब पानी आधा से भी आधा रह जाये तब इसे छानकर हल्‍का ठंडा करके पियें। इस काढ़े का सेवन सुबह खाली पेट करें।
अखरोट-
घुटनों की ग्रीस बढ़ाने के लिए अखरोट काफी फायदेमंद होता है। आप हर रोज दो अखरोट का सेवन जरूर कीजिये। ऐसा करने से घुटनों का ग्रीस बढ़ने लगता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि अखरोट में प्रोटीन, फैट, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन ई, बी-6, कैल्शियम और मिनरल भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके अलावा अखरोट में एंटी-ऑक्‍सीडेंट के साथ-साथ ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है। यह एक प्रकार का फैट है जो सूजन को कम करने में हेल्‍प करता है।
नारियल पानी-
खाली पेट नारियल का पानी पीने से भी घुटनों में लचीलापन आता है। एक महीना इस उपाय को करके देखें। आपको बहुत फायदा मिलेगा! जरूरी विटामिन और मिनरल के अलावा यह मैग्नीज जैसे तत्वों से भरपूर है। सूखने के दौरान इसमें नेचुरल ऑयल बनने लगता है जो हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत करता है।
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13.7.19

बिस्तर पर ज्यादा देर नहीं टिक पाते?कारण और उपचार


अगर आप शारीरिक संबंध बनाते समय ज्यादा समय तक बिस्तर पर टिक नहीं पाते है। तो यह आपके अंदर की कमजोरी के कारण होता है। लेकिन इसे आप ठीक कर सकते है। इसके लिए आप अच्छा खाना खाने से इस परेशानी से दूर हो सकते है।
 बदलते लाइफ स्टाइल के कारण पुरूष, इन दिनों बिस्तर पर अपने पार्टनर के साथ बेहतर परफॉर्म नहीं कर पाते हैं। जिसके कारण महिलाओं को गर्भधारण करने में परेशानी होती है। हांलाकि मार्केट में ऐसी हज़ारों दवाइयों की भरमार है जो, आपके काम आ सकती हैं। लेकिन आखिर दवाइयों पर आप कब तक निर्भर रहेंगे? इसके लिये जरुरी है कि आप इसका असली कारण जान लें|
बहुत ज्यादा पाने की लालसा: शिक्षा और कॅरियर में बहुत ज्यादा पाने की इच्छा पुरूषों को बेदम कर देती है। वे इसी में लगे रहते हैं कि उन्हें सबसे आगे निकलना है। लेकिन इन सबमें वे सबकुछ खो देते हैं।
फूडिंग हैबिट: 

पुरूषों के खाने पीने का ढंग दिनों-दिन गिरता जा रहा है। वे अपने खान पान पर ध्यान नहीं देते हैं जिससे उनका शरीर कमजोर हो जाता है।
धूम्रपान, शराब या ड्रग्‍स का सेवन: 

इन तीनों ही गंदी लतों से हजारों, लाखों लोगों की जिंदगी चली गई है और सैकड़ों लोगों का घर बर्बाद हो गया। यही नहीं इसकी लत से स्पर्म काउंट भी कम हो जाते हैं।
तनाव: 

तनाव, व्यक्ति को खोखला बना देता है। इन दिनों हर किसी को तनाव सबसे ज्यादा होता है। ऐसे में उनका जीवन बेकार होता जा रहा है और सेक्स लाइफ पर भी बुरा असर पड़ रहा है
काम करने के घंटों में इजाफा:

 ज्यादा जल्दी सफलता या पैसा पाने के चक्कर में आदमी, इन दिनों बदहाल हुआ जा रहा है। 8 घंटे के अलावा भी वह और 2 घंटे काम करता है ताकि अपना टारगेट पूरा करके ज्यादा राशि पाएं। लेकिन इसके कारण उसका परिवार बनने में काफी दिक्क़ते आती हैं।
गैजेट: 

गैजेट ने लाइफ जितनी आसन बना दी है उतनी ही बिगाड़ भी दी है। लोग, सारा समय उसी में लगे रहते हैं, उन्हें अपने पार्टनर की फिक्र नहीं होती है। वे गलत ढंग से एक-दूसरे के साथ सोते हैं और पेश आते हैं। कई बार तो मोबाइल पर चैट या बात करते हुए सो जाते हैं जिससे शरीर में दर्द भी होने लगता है।
बेकार जीवनशैली: जिन पुरूषों की जीवनशैली बेकार होती है वे कभी भी स्वस्थ जीवन की आशा न ही रखें तो बेहतर होगा। अन्यथा उन्हें भरसक प्रयास करने की आवश्यकता है।
X-रेटेड स्टफ को बहुत ज्यादा देखना: 

अगर कोई पुरूष बहुत ज्यादा पोर्न फिल्म देखता है या उसे हर पल सिर्फ सेक्स या रोमांस ही अच्छा लगता है तो उसकी रियल लाइफ पर भयानक असर पड़ सकता है। उसे सच में अपने पार्टनर के साथ कभी अच्छा नहीं लगेगा।
नपुंसकता, स्वप्नदोष, धातु दोष आदि ऐसी समस्याएं हैं जो वैवाहिक जीवन को बहुत अधिक प्रभावित करती हैं। असंयमित खान-पान या शरीर में पोषक तत्वों के कारण या अन्य गलत आदतों से पुरुषों को दुर्बलता या कमजोरी की परेशानी होने लगती है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं बेहद साधारण घरेलू नुस्खे जिनसे आप इस समस्या से बहुत जल्द छुटकारा पा सकते हैं।

 इमली-
आधा किलो इमली के बीज लेकर उसके दो हिस्से कर दें। इन बीजों को तीन दिनों तक पानी में भिगोकर रख लें। इसके बाद छिलकों को उतारकर बाहर फेंक दें और सफेद बीजों को खरल में डालकर पीसें। फिर इसमें आधा किलो पिसी मिश्री मिलाकर कांच के खुले मुंह वाली एक चौड़ी बोतल में रख लें। आधा चम्मच सुबह और शाम के समय में दूध के साथ लें। इस तरह से यह उपाय वीर्य के जल्दी गिरने के रोग तथा संभोग करने की ताकत में बढ़ोतरी करता है।
कौंच का बीज-
100 ग्राम कौंच के बीज और 100 ग्राम तालमखाना को कूट-पीसकर चूर्ण बना लें फिर इसमें 200 ग्राम मिश्री पीसकर मिला लें। हल्के गर्म दूध में आधा चम्मच चूर्ण मिलाकर रोजाना इसको पीना चाहिए। इसको पीने से वीर्य गाढ़ा हो जाता है और नामर्दी दूर होती है।
 जायफल – 
15 ग्राम जायफल, 20 ग्राम हिंगुल भस्म, 5 ग्राम अकरकरा और 10 ग्राम केसर को मिलाकर बारीक पीस लें। इसके बाद इसमें शहद मिलाकर इमामदस्ते में घोटें। उसके बाद चने के बराबर छोटी-छोटी गोलियां बना लें। रोजाना रात को सोने से 2 पहले 2 गोलियां गाढ़े दूध के साथ सेवन करें। इससे शिश्न (लिंग) का ढ़ीलापन दूर होता है तथा नामर्दी दूर हो जाती है।
 तुलसी- 
15 ग्राम तुलसी के बीज और 30 ग्राम सफेद मुसली लेकर चूर्ण बनाएं, फिर उसमें 60 ग्राम मिश्री पीसकर मिला दें और शीशी में भरकर रख दें। 5 ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करें इससे यौन दुर्बलता दूर होती है।
आंवला-
2 चम्मच आंवला के रस में एक छोटा चम्मच सूखे आंवले का चूर्ण तथा एक चम्मच शुद्ध शहद मिलाकर दिन में दो बार सेवन करना चाहिए। इसके इस्तेमाल से सेक्स शक्ति धीरे-धीरे बढ़ती चली जाएगी। इस प्रकार की परेशानी में आंवला बहुत फायदेमंद होता है। अत: प्रतिदिन रात्रि में गिलास में थोड़ा सा हुआ सुखा आंवले का चूर्ण लें और उसमें पानी भर दें। सुबह उठने के बाद इस पानी में हल्दी मिलाएं एवं छानकर पीएं। आंवले के चूर्ण में मिश्री पीसकर मिलाएं। इसके बाद प्रतिदिन रात को सोने से पहले करीब एक चम्मच इस मिश्रित चूर्ण का सेवन करें। इसके बाद थोड़ा सा पानी पीएं। जिन लोगों को अत्याधिक स्वप्नदोष होने की समस्या है, वे प्रतिदिन आंवले का मुरब्बा खाएं।
 सेब-
एक सेब में जितनी हो सके उतनी लौंग लगा दीजिए। इसी तरह का एक अच्छा सा बड़े आकार का नींबू ले लीजिए। इसमें जितनी ज्यादा से ज्यादा हो सके, लौंग लगाकर दोनों फलों को एक सप्ताह तक किसी बर्तन में ढककर रख दीजिए। एक सप्ताह बाद दोनों फलों में से लौंग निकालकर अलग-अलग बोतल में भरकर रख लें। पहले दिन नींबू वाले दो लौंग को बारीक कूटकर बकरी के दूध के साथ सेवन करें। इस तरह से बदल-बदलकर 40दिनों तक 2-2 लौंग खाएं। यह एक तरह से सेक्स क्षमता को बढ़ाने वाला एक बहुत ही सरल उपाय है।
 अश्वगंधा-
अश्वगंधा का चूर्ण, असगंध तथा बिदारीकंद को 100-100 ग्राम की मात्रा में लेकर बारीक चूर्ण बना लें। चूर्ण को आधा चम्मच मात्रा में दूध के साथ सुबह और शाम लेना चाहिए। यह मिश्रण वीर्य को ताकतवर बनाकर शीघ्रपतन की समस्या से छुटकारा दिलाता है।

 सोंठ-
4 ग्राम सोंठ, 4 ग्राम सेमल का गोंद, 2 ग्राम अकरकरा, 28 ग्राम पिप्पली तथा 30 ग्राम काले तिल को एकसाथ मिलाकर तथा कूटकर बारीक चूर्ण बना लें। रात को सोते समय आधा चम्मच चूर्ण लेकर ऊपर से एक गिलास गर्म दूध पी लें। यह रामबाण औषधि शरीर की कमजोरी को दूर करती है और सेक्स शक्ति को बढ़ाती है।
 अजवायन-
100 ग्राम अजवायन को सफेद प्याज के रस में भिगोकर सुखा लें। सूखने के बाद उसे फिर से प्याज के रस में गीला करके सुखा लें। इस तरह से तीन बार करें। उसके बाद इसे कूटकर किसी बोतल में भरकर रख लें। आधा चम्मच इस चूर्ण को एक चम्मच पिसी हुई मिश्री के साथ मिलाकर खा जाएं। फिर ऊपर से हल्का गर्म दूध पी लें। करीब-करीब एक महीने तक इस मिश्रण का उपयोग करें। इस दौरान संभोग बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। यह सेक्स क्षमता को बढ़ाने वाला सबसे अच्छा उपाय है
 छुहारे -

चार-पांच छुहारे, दो-तीन काजू और दो बादाम को 300 ग्राम दूध में खूब अच्छी तरह से उबालकर तथा पकाकर दो चम्मच मिश्री मिलाकर रोजाना रात को सोते समय लेना चाहिए। इससे यौन इच्छा और काम करने की शक्ति बढ़ती है।
 गाजर-
1 किलो गाजर, चीनी 400 ग्राम, खोआ 250 ग्राम, दूध 500 ग्राम, कद्यूकस किया हुआ नारियल 10 ग्राम, किशमिश 10 ग्राम, काजू बारीक कटे हुए 10-15 पीस, एक चांदी का वर्क और 4चम्मच देशी घी ले लें। गाजर को कद्दूकस करके कडा़ही में डालकर पकाएं। पानी के सूख जाने पर इसमें दूध, खोआ और चीनी डाल दें तथा इसे चम्मच से चलाते रहें। जब यह सारा मिश्रण गाढ़ा होने को हो तो इसमें नारियल, किशमिश, बादाम और काजू डाल दें। जब यह गाढ़ा हो जाए तो थाली में देशी घी लगाकर हलवे को थाली पर निकालें और ऊपर से चांदी का वर्क लगा दें। इस हलवे को चार-चार चम्मच सुबह और शाम खाकर ऊपर से दूध पीना चाहिए। यह वीर्यशक्ति बढ़ाकर शरीर को मजबूत रखता है। इससे सेक्स शक्ति भी बढ़ती है।
शंखपुष्पी – 
शंखपुष्पी 100 ग्राम, ब्राह्नी 100 ग्राम, असंगध 50 ग्राम, तज 50 ग्राम, मुलहठी 50 ग्राम, शतावर 50 ग्राम, विधारा 50 ग्राम तथा शक्कर 450 ग्राम को बारीक कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर एक-एक चम्मच की मात्रा में सुबह और शाम को लेना चाहिए। इस चूर्ण को तीन महीनों तक रोजाना सेवन करने से नाईट-फाल (स्वप्न दोष), वीर्य की कमजोरी तथा नामर्दी आदि रोग समाप्त होकर सेक्स शक्ति में ताकत आती है।
 त्रिफला – 
एक चम्मच त्रिफला के चूर्ण को रात को सोते समय 5 मुनक्कों के साथ लेना चाहिए तथा ऊपर से ठंडा पानी पिएं। यह चूर्ण पेट के सभी प्रकार के रोग, स्वप्नदोष तथा वीर्य का शीघ्र गिरना आदि रोगों को दूर करके शरीर को मजबूती प्रदान करता है।
 प्याज-
आधा चम्मच सफेद प्याज का रस, आधा चम्मच शहद और आधा चम्मच मिश्री के चूर्ण को मिलाकर सुबह और शाम सेवन करें। यह मिश्रण वीर्यपतन को दूर करने के लिए काफी उपयोगी रहता है।सफेद प्याज के रस को अदरक के रस के साथ मिलाकर शुद्ध शहद तथा देशी घी पांच-पांच ग्राम की मात्रा में लेकर एक साथ मिलाकर सुबह नियम से एक माह तक सेवन करें और लाभ देखें इससे यौन क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जाती है।
 हल्दी –
वीर्य अधिक पतला होने पर 1 चम्मच शहद में एक चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर रोजाना सुबह के समय खाली पेट सेवन करना चाहिए। इसका विस्तृत रुप से इस्तेमाल करने से संभोग करने की शक्ति बढ़ जाती है।

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