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17.9.17

खांसी मे तुरंत राहत पाने के उपचार // Cures for immediate relief in cough



    मौसम बदलते ही, हर घर में सर्दी या जुकाम का होना एक आम बात हो जाती है। वातावरण में मौजूद वायरस, बदलते मौसम में काफी सक्रिय हो जाता है, जिसके कारण जुकाम या सांस की अन्य बीमारियां होती हैं. सामान्य ज़ुकाम के लिए कोई इलाज नहीं है, लेकिन इसके लक्षणों का इलाज किया जा सकता है। यह, मनुष्यों में सबसे अधिक होने वाला संक्रामक रोग है। औसत वयस्क को प्रतिवर्ष दो से तीन बार ज़ुकाम होता है। औसत बच्चे को प्रतिवर्ष छह से लेकर बारह बार ज़ुकाम होता है। लेकिन शुरुआत में ही अगर कुछ घरेलू उपाय कर लिए जाएं तो इस पर आसानी से काबू पाया जा सकता है। तो आइये जानते है कुछ घरेलु और आसान उपाय। 


*अदरक -

अदरक को १ ग्लास पानीमे १/२ रहने तक उबाल ले और उसमे १ चम्मच शहद मिलाकर पिये।
अदरक के छोटे छोटे टुकड़े करके  उसे दिनभर चूसते रहे आराम मिलेगा।


*लहसुन -

१ कप पानी में ३-४ लहसुन की कलियों को उबाल ले और ठंडा होने पर इसमें १ चम्मच शहद मिलाकर ले।


 प्याज -

१/२ चम्मच प्याज का रस और १/२ चम्मच शहद मिलाकर लेने से खांसी में आराम मिलता है।


*चाय -

चाय में १/२ चम्मच हल्दी , १/२ चम्मच काली मिर्च पाउडर , तुलसी की कुछ पत्तियाँ और अदरक मिलाकर पिने से काफी हदतक आराम मिलता है। 


* गाजर -

१ कप गाजर के ज्यूस में १ चम्मच शहद मिलाकर दिन में ३-४ बार ले।


*बादाम -

४-५ बादाम को रात में पानी में भिगोंकर सुबह इसका पेस्ट बनाये और १ चम्मच बटर में मिलाकर रोज सुबह -शाम जब तक आपको आराम न हो तबतक लेते रहे।


 तुलसी -


तुलसी के रस में अदरक का रस और शहद मिलाकर लेने से भी खांसी में राहत मिलती है।


* काली मिर्च -

काली मिर्च कफ में बहुत  आराम देती है। इसे पीसकर १ चम्मच घी में १/४ मिलाकर लेने से बहुत जल्दी आराम मिलता है।
कुनकुने दूध में भी इसे मिलाकर पिने से खांसी में राहत मिलती है।


किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचा


11.2.17

सीने और पसली मे दर्द के कारण और उपचार


दरअसल सीने का दर्द स्वयं में कोई रोग नहीं यह तो रोगों का लक्षण मात्र है। जिस व्यक्ति को ग्लीसरिल नाइट्रेट की गोली से सीने के दर्द में आराम मिल जाता है वह एंजाइना का रोगी होता है। दूसरी और यदि दर्द प्लूरिसी या न्यूमोनिया के कारण हो तो रोगी को बुखार−खांसी होती है तथा खांसने या सांस की तकलीफ के साथ उठने वाला दर्द दिल का दौरा पड़ने का संकेत हो सकता है।
प्लूरिसी में फेफड़े के पर्दे में पानी भर जाता है, फेफड़ो में सूजन हो जाती हैं, रोगी को ज्वर होता है, सांस रुक-रुक कर आता है, छाती में दर्द रहता है, आदि लक्षण होते है। आयुर्वेद में इसका उपचार बहुत सरल हैं।\

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

उपचार :

इस बीमारी में तुलसी के ताजा पत्तों का स्वरस आधा ओंस (15 ग्राम) से एक ओंस (30 ग्राम) धीरे-धीरे बढ़ाते हए प्रात: सायं (सुबह और शाम) दिन में दो बार खाली पेट लेने से प्लूरिसी में शीघ्र आश्चर्यजनक रूप से लाभ होता है। इससे दो तीन दिन में बुखार नीचे उतरकर सामान्य हो जाता है और सप्ताह या अधिक आठ दस रोज में फेफड़े के पर्दे में भरा पानी सूख जाता है। किसी भी कारण से यह बीमारी क्यों न हो, बिना किसी अन्य दुष्प्रभाव के शत-प्रतिशत लाभ होता है और साथ ही फुस्फुस(फेफड़ो) और ह्रदय की अन्य बीमारियां हो तो भी इससे ठीक हो जाती है।

*प्रोस्टेट बढ़ने से मूत्र रुकावट की अचूक  औषधि*

*चंद्रामृत रस 4 रत्ती, श्रृंग भस्म 1 1/2 रत्ती, नौसादर 1 1/2 रत्ती, मल्लसिंदूर 1 रत्ती लेकर सबको एकसार करके मिला लें। फिर इसकी चार बराबर-बराबर पुड़िया बनाएँ। 1-1 पुड़िया 4-4 घंटे पर दें। यह पसली के दर्द(पार्श्वशूल) का सफल अनुभूत नुस्खा है।
पसली व सीने का दर्द प्राय: संक्रमण होने के अलावा सर्दी लगने, अनियमित आहार-विहार तथा कब्ज रहने के कारण होता है। इसके अलावा दूषित जल के सेवन से भी यह दर्द उत्पन्न हो जाते हैं।


*पित्ताश्मरी(Gallstone) की अचूक औषधि*

अदरकः 30 ग्राम अदरक या सोंठ को पीसकर आधा किलो पानी में उबालकर छानकर दिन में चार बार पीएं। इससे पसली का दर्द ठीक हो जाता है।

पसली व सीने के दर्द का उपचार-

गाजरः गाजरों को उबालकर उनका रस निकाल लें। इस रस में शहद मिलाकर पीने से सीने का दर्द ठीक हो जाता है।
आजकल पसलियों में दर्द की समस्या अधिकतर लोगों में देखी जा रही है। युवाओं में भी पसलियों के दर्द की परेशानी अधिक हो रही है। बच्चों को भी यह रोग होता है। ये दर्द खांसी व छींक आने से और ज्यादा होता है। क्योंकि ऐसा होने पर पसलियों पर झटका लगता है और वे दुखने लगती है। पसलियों में दर्द होने का मुख्य कारण है शरीर में खून की कमी और विटामिन डी की कमी ।
जो लोग फ्रिज में रखी चीजों और अधिक ठंडी चीजों का सेवन करते हैं वे इस दर्द से अधिक परेशान होते हैं।

बिदारीकन्द के औषधीय उपयोग 


पसलियों के दर्द से बचने के उपाय

शहद और चूना-

शहद और पान में मिलाया जाने वाला चूना को मिलाकर पेस्ट बनाएं और इसका लेप पसलियों में दर्द होने वाली जगह पर लगाने से आराम मिलता है।

हींग-

अंडे की जर्दी को एक ग्राम हींग के साथ मिलाकर पीस लें और इसका लेप बनाकर पसलियों में होने वाले दर्द पर लगाएं। यह उपाय दर्द को दूर करता है।

नई और पुरानी खांसी के रामबाण उपचार 

मेथी दाने-

मेथी भी पसलियों के दर्द में बेहद राहत देती है। 100 ग्राम मेथी दानों को हल्का भूनें और इसे कूट लें फिर इसमें बेहद थोड़ा काला नमक भी मिला लें।और इसका सेवन सुबह और शाम एक-एक चम्मच खाएं। एक महीने तक लगातार खाने से पसलियों का दर्द ठीक होने लगता है।

जीरा-

जीरा दो चम्मच, को एक गिलास गर्म पानी में मिला लें। और किसी कपड़े में डालकर निचोड़ लें और इसकी सिकाई पसली वाली जगह पर करें। इससे काफी आराम मिलता है।

गेहूं-

गेहूं से बनी रोटी को इस तरह से बनाए जिससे कि यह एक तरफ से सिकी हुई हो और दूसरी तरफ से कच्ची हो। और कच्ची तरफ वाली जगह पर सरसों का गर्म तेल लगा लें और इसे पसलियों के उपर लगा लें और किसी कपड़े से बांध लें। इस उपाय से रोगी को काफी आराम और दर्द से मुक्ति मिलेगी।

राई-

एक चम्मच राई के दानों को अच्छी तरह से पीस लें और इसे गर्म करके दर्द वाली जगह पर इसका लेप लगाएं। ऐसा करने से पसलियों के दर्द में आराम मिलता है।

दूध-

छोटी इलायची को पीसकर गर्म दूध में डाल लें और इसमें एक चुटकी हल्दी मिला लें। रात को सोने से पहले इस दूध का सेवन करें। आपको फायदा मिलेगा।
*अदरक, तुलसी, तथा कालीमिर्च का काढ़ा बनाकर उसमें एक चुटकी सेंधा नमक मिलाकर सेवन कराना चाहिए.


हस्त  मेथुन जनित यौन दुर्बलता के उपचार 

शहद और चूना-

शहद और पान में मिलाया जाने वाला चूना को मिलाकर पेस्ट बनाएं और इसका लेप पसलियों में दर्द होने वाली जगह पर लगाने से आराम मिलता है।

अदरक-

तुलसी, अदरक और कालीमिर्च को मिलाकर काढ़ा बना लें और उसमें एक चुटकी सेंधा नमक मिलाकर सेवन करें।
*सरसों के तेल में तारपीन का तेल मिलाकर थोड़ी-थोड़ी देर बाद रोगी की पसलियों पर हल्के हाथों से मालिश करें.


कान दर्द,कान पकना,बहरापन के उपचार


हींग-


अंडे की जर्दी को एक ग्राम हींग के साथ मिलाकर पीस लें और इसका लेप बनाकर पसलियों में होने वाले दर्द पर लगाएं। यह उपाय दर्द को दूर करता है।
   न्यूमोनिया की अवस्था में यह योग मिश्रण कफ को द्रव करके निकालता है। फेफड़ों की रोगावस्था को मृदु करके खाँसी कम करता है। इससे हृदय की वेदना कम हो जाती है।
एंजाइना और हार्ट अटैक (मायोकार्डियल इंफेक्शन) जैसे दिल के रोग भी सीने में दर्द पैदा करते हैं। एंजाइना के रोगी में दर्द सीने के बीच में या कुछ बाईं ओर होता है। लगभग तीन से दस मिनट तक लगातार होने वाले इस दर्द की तीव्रता मामूली भी हो सकती है और बहुत अधिक भी। अधिक ठंड, रोगी की मानसिक स्थित, आवश्यकता से अधिक भोजन, दैनिक जीवन का तनाव, दिल की धड़कन बढ़ना तथा रक्तचाप आदि कुछ ऐसे कारक हैं जो दर्द को उभारने में सहायक होते हैं। जीभ के नीचे ग्लीसरिल नाइट्रेट की गोली रखने से इस रोग में तुरन्त लाभ होता है। 


पित्त पथरी (gallstone) के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार 

किडनी निष्क्रियता की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

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4.6.16

अतिसार की चिकित्सा // Home treatment of diarrhea






असंतुलित और अनियमित खान-पान से,दूषित पानी उपयोग करने से,खाली पेट चाय पीने से, अधिक ठंडे पदार्थों के सेवन करने से,अखाद्य और विजातीय पदार्थ भक्छण करने से ,पाचन क्रिया ठीक न होने से,लिवर की प्रक्रिया में व्यवधान आने से प्राय: अतिसार रोग की उत्पत्ति होती है।इस रोग में रोगी को आम युक्त पानी जैसे पतले दस्त होने लगते हैं। बार-बार शोच के लिये जाना पडता है। रोग लम्बा चलने पर रोगी बहुत दुर्बल हो जाता है और ईलाज नहीं लेने पर रोगी की मृत्यु भी हो जाती है।




अतिसार रोग के लक्षण -

रोगी को बार-बार मल त्यागने जाना,नाभी के आस पास व पेटमें मरोड का दर्द होना,गुड गुडाहट की आवाज के साथ दस्त होना,दस्त में बिना पचा हुआ आहार पदार्थ निकलना,हवा के साथ वेग से दस्त बाहर निकलना,पसीना, बेहोश हो जाना, दस्तों में शरीर का जल निकल जाने से डिहाईड्रेशन की हालत पैदा हो जाना-ये अतिसार रोग के प्रमुख लक्षण हैं।

अब यहां अतिसार की सरल चिकित्सा लिख रहा हूं। अतिसार को तुरंत रोकने का प्रयास घातक भी हो सकता है। आहिस्ता-आहिस्ता अतिसार नियंत्रित करना उत्तम है।



1) अतिसार रोग दूर करने का एक साधारण उपाय है केला दही के साथ खाएं। इससे दस्त बहुत जल्दी नियंत्रण में आ जाते हैं।
२) एक नुस्खा बनाएं। आधा चम्मच निंबू का रस,आधा चम्मच अदरक का रस और चौथाई चम्मच काली मिर्च का पवडर मिश्रण करलें। यह नुस्खा दिन में दो बार लेना उचित है।



३) अदरक की चाय बनाकर पीने से अतिसार में लाभ होता है और पेट की ऐंठन दूर होती है।
४) भूरे चावल पोन घंटे पानी में उबालें।छानकर चावल और पकाये हुए चावल का पानी पीयें। दस्त रोकने का अच्छा उपाय है
५) आम की गुठली का पावडर पानी के साथ लेने से अतिसार ठीक होता है।



६) निंबू बीज सहित पीस लें और पेस्ट बनालें। एक चम्मच पेस्ट दिन में तीन बार लेने से अतिसार में फ़ायदा होता है।

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७) अदरक इस रोग की अच्छी दवा मानी गई है। करीब १०० मिलि गरम पानी में अदरक का रस एक चम्मच मिलाकर गरम-गरम पीयें। अतिसार में अच्छे परिणाम आते हैं
८) एक खास बात याद रखें कि अतिसार रोगी पर्याप्त मात्रा में शुद्ध जल पीता रहे। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होगी। विजातीय पदार्थ पेशाब के जरिये बाहर निकलते रहेंगे।




९) सौंफ़ और जीरा बराबर मात्रा में लेकर तवे पर स्रेक लें और पावडर बनालें। ५ ग्राम चूर्ण पानी के साथ हर तीन घंटे के फ़ासले से लेते रहें। बहुत गुणकारी उपाय है।



१०) जीरा तवे पर सेक लें। पाव भर खट्टी छाछ में २-३ ग्राम जीरा-पावडर डालकर और इसमे आधा ग्राम काला नमक मिलाकर दिन में तीन बार पीने से अतिसार का ईलाज होता है।
११) ५० ग्राम शहद पाव भर पानी में मिलाकर पीने से दस्त नियंत्रण में आ जाते हैं।
१२) आधा चम्मच मैथी के बीज,आधा चम्मच जीरा सिका हुआ और इसमें ५० ग्राम दही मिलाकर पीने से अतिसार रोग में बहुत लाभ होता
१३) अदरक का रस नाभि के आस -पास लगाने से अतिसार में लाभ होता है|


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१४) कच्चा पपीता उबालकर खाने से दस्त में आराम लग जाता है|
१५) मिश्री और अमरूद खाना हितकारी है|

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