30.6.19

गिलोय जड़ी बूटी है गुणों का खजाना


गिलोय की बेल पूरे भारत देश में पाई जाती है. इसको लोग मधुपर्णी, अमृता, तंत्रिका, कुण्डलिनी गुडूची आदि नामों से जानते हैं. आम तौर पर गिलोय की बेल नीम के पेड़ या फिर आम के पेड़ के आस पास उगती है. नीम के पेड़ पर पाई जाने वाली गिलोय की बेल को सबसे सर्वश्रेष्ठ आयुर्वेदिक औषधि माना जाता है. इस लेख में हम आपको गिलोय केऔषधीय गुण बताने जा रहे हैं जिनसे शायद आप पहले से वाकिफ नहीं होंगे. लेकिन उससे पहले हम आपको बता दें कि गिलोय का फल दिखने में मटर के दानो में समान होता है. इसमें मुख्य रूप से एलकेलायड और ग्लुकोसाइड गिलोइन पाया जाता है जोकि कईं प्रकार के रोगों के लिए वरदान साबित होते हैं.
हमारे भारत में सदियों से आयुर्वेदिक जड़ी बूटियो का इस्तेमाल रोगों का खात्मा करने के लिए किया जाता रहा है. इन्ही में से गिलोय भी एक ऐसी बेल है जिसके पत्ते और कांड दोनों ही मनुष्य के लिए लाभकारी साबित होते हैं. गिलोय की बेल का एक प्रमुख गुण यह भी है कि इस बेल को जिस पेड़ पर चढ़ाया जाए, यह उसी के गुण अपने में ग्रहण कर लेती है. नीम के पेड़ के साथ मिल कर गिलोय के औषधीय गुण और भी अधिक असरदार हो जाते हैं. 

गिलोय के गुणों की संख्या काफी बड़ी है। इसमें सूजन कम करने, शुगर को नियंत्रित करने, गठिया रोग से लड़ने के अलावा शरीर शोधन के भी गुण होते हैं। गिलोय के इस्तेमाल से सांस संबंधी रोग जैसे दमा और खांसी में फायदा होता है। इसे नीम और आंवला के साथ मिलाकर इस्तेमाल करने से त्वचा संबंधी रोग जैसे एग्जिमा और सोराइसिस दूर किए जा सकते हैं। इसे खून की कमी, पीलिया और कुष्ठ रोगों के इलाज में भी कारगर माना जाता है।

गिलोय के औषधीय गुण
गिलोय आयुर्वेद ग्रंथ में सबसे उत्तम मानी जाती है. इसकी पत्तियां, जडें और तना तीनो ही भाग सेहत के लिए गुणकारी हैं. परंतु बिमारियों में गिलोय के डंठल का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है.
गिलोय में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट , एंटी इंफ्लेमेटरी और कैंसर नाशक तत्व मौजूद होते हैं जोकि हमे कब्ज़, डायबिटीज़, अपच, मूत्र संबंधी रोगों से छुटकारा दिलवाते हैं.
गिलोय में मौजूद औषधीय गुण वात, पित्त और कफ़ तीनो की रोकथाम करते हैं.
गिलोय की बेल में टोक्सिन मौजूद होते हैं जोकि ज़हरीले तत्वों को शरीर से बाहर निकालने में सहायक हैं.
गिलोय के फायदे
गिलोय के औषधीय गुण और फायदों के चलते ही इसका इस्तेमाल कईं तरह की दवाइयों में किया जाता है. गिलोय के फायदे निम्नलिखित हैं-
पेशाब में रुकावट
यदि आपको पेशाब आने में किसी प्रकार की रुकावट या दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है तो गिलोय के औषधीय गुण आपके लिए उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं. इसके लिए पीड़ित व्यक्ति को 10 से 20 ग्राम गिलोय के रस में 1 चम्मच शहद मिला कर दिन में तीन से चार बार चाटने को दें. इससे पेशाब संबंधित सभी रोग जड़ से मिट जाते हैं.
नेत्र रोग
आँखों से संबंधित रोगों के लिए गिलोय के औषधीय गुण प्रभावी हैं. इसके लिए मरीज़ को नियमित रूप से 11.5 ग्राम गिलोय के रस में 1 ग्राम सेंध नामक म्क्ला कर दें इससे आपके सभी प्रकार के नेत्र रोग नष्ट हो जाएंगे और साथ ही आँखों की रौशनी में बढ़ावा होगा.
दस्त के लिए
दस्त के लिए गिलोय के औषधीय गुण लाभकारी हैं. इसके लिए दस्त ग्रसित व्यक्ति को 10 से 15 ग्राम गिलोय के रस में 4 से 6 ग्राम मिश्री मिला कर सुबह शाम दें. ऐसा करने के कुछ ही समय में आपको लाभ अनुभव होगा
स्वास्थ्य के लिए गिलॉय के लाभ
 प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा
गिलॉय प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने का कार्य करता है। इस आश्चर्यजनक जड़ी बूटी में कायाकल्प करने के भी गुण होते हैं| इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण जिगर और गुर्दों से विषैले पदार्थों को हटाने में मदद करते हैं। इसकी एंटी बैक्टीरियल गुण जिगर और मूत्र पथ की समस्याओं से लड़ने में सहायक होते हैं।
 लंबे बुखार और खांसी में सहायक
गिलॉय प्रकृति में एंटी-पायरेटिक होने के वजह से रक्त की मात्रा को बढ़ाता है और डेंगू के से भी लड़ता है। गिलॉय का उपयोग पीलिया के लक्षणों से भी राहत दिलाने में सहायक है। यह जड़ी बूटी फेफड़ों को साफ़ करके खांसी और यहां तक ​​कि अस्थमा में भी आराम दिलाती है। शहद के साथ गिलॉय मिलाकर पीने से मलेरिया का इलाज भी हो सकता है|
 पाचन तंत्र का इलाज
पाचन प्रणाली के इलाज में गिलॉय घरेलू इलाज़ के रूप में उपयोग किया जा सकता है। गिलॉय का रस मक्खन के साथ लेने से बवासीर का इलाज़ किया जा सकता है।
शरीर में पाचनतंत्र को सुधारने में गिलोय काफी मददगार होता है। गिलोय के चूर्ण को आंवला चूर्ण या मुरब्बे के साथ खाने से गैस में फायदा होता है। गिलोय के ज्यूस को छाछ के साथ मिलाकर पीने से अपाचन की समस्या दूर होती है साथ ही साथ बवासीर से भी छुटकारा मिलता है।
*गिलोय में शरीर में शुगर और लिपिड के स्तर को कम करने का खास गुण होता है। इसके इस गुण के कारण यह डायबीटिज टाइप 2 के उपचार में बहुत कारगर है।
*गिलोय एडाप्टोजेनिक हर्ब है अत:मानसिक दवाब और चिंता को दूर करने के लिए उपयोग अत्यधिक लाभकारी है। गिलोय चूर्ण को अश्वगंधा और शतावरी के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है। इसमें याददाश्त बढ़ाने का गुण होता है। यह शरीर और दिमाग पर उम्र बढ़ने के प्रभाव की गति को कम करता है।


मधुमेह का इलाज
गिलॉय हाइपोग्लाइकेमिक एजेंट है जो रक्तचाप और लिपिड के स्तर को कम करके टाइप 2 डायबिटीज के उपचार के लिए भी उपयोगी है।
 तनाव कम करे
गिलॉय को अन्य जड़ी बूटियों के साथ मिलाकर एक स्वास्थ्य टॉनिक बनाने के लिए प्रयोग किया जा सकता है। गिलॉय के एडाप्टोजेनिक गुण इसको एक उचक स्तरीय तनाव और चिंता हरण करने वाला बनाते हैं| यह दिमाग को एक सुखद और शांत प्रभाव देने के साथ साथ दिमाग की कोशिकाओं को मुक्त कणों की वजह से हुई क्षति से भी बचाता है।
संधिशोथ का इलाज
गिलॉय में एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी-पायरेटिक गुण होते हैं जो गठिया के विभिन्न लक्षणों जैसे जोड़ों के दर्द के इलाज में मदद करते हैं।
एफ़्रोडायसियक की तरह काम करे
गिलॉय में कामेच्छा बढ़ाने के गुण होते हैं जो यौन जीवन को बढ़ा देते हैं।
 आँखों की समस्याओं का इलाज
गिलॉय नज़र की स्पष्टता को बढ़ाकर चश्मे से छुटकारा पाने में भी मदद करता हैं। बस थोड़े से पानी में इसको उबाल लें| इस मिश्रण को ठंडा होने दे और अपनी आँखों पर चारों और लगा लें|
एलर्जिक राइनाइटिस का इलाज
एलर्जिक राइनाइटिस एक ऐसी अवस्था है जिसमे बहता हुआ नाक, छींकना, नाक बंद होना, लाल और पानी से भरी आँखें आदि लक्ष्ण होते हैं जोकि धूल, प्रदूषण, पराग, घास, जैसे विभिन्न पदार्थों की एलर्जी की वजह से होते हैं| इस तरह के लक्षणों को दूर करने के लिए गिलॉय टेबलेट्स के रूप में लेना बहुत प्रभावी होता है।
गिलॉय त्वचा पर कैसे लगायें?
*सूजन कम करने के गुण के कारण, यह गठिया और आर्थेराइटिस से बचाव में अत्यधिक लाभकारी है। गिलोय के पाउडर को सौंठ की समान मात्रा और गुगुल के साथ मिलाकर दिन में दो बार लेने से इन बीमारियों में काफी लाभ मिलता है। इसी प्रकार अगर ताजी पत्तियां या तना उपलब्ध हों तो इनका ज्यूस पीने से भी आराम होता है।
आयुर्वेद के हिसाब से गिलोय रसायन यानी ताजगी लाने वाले तत्व के रुप में कार्य करता है। इससे इम्यूनिटी सिस्टम में सुधार आता है और शरीर में अतिआवश्यक सफेद सेल्स की कार्य करने की क्षमता बढ़ती है। यह शरीर के भीतर सफाई करके लीवर और किडनी के कार्य को सुचारु बनाता है। यह शरीर को बैक्टिरिया जनित रोगों से सुरक्षित रखता है। इसका उपयोग सेक्स संबंधी रोगों के इलाज में भी किया जाता है।
लंबे समय से चलने वाले बुखार के इलाज में गिलोय काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह शरीर में ब्लड प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाता है जिससे यह डेंगू तथा स्वाइन फ्लू के निदान में बहुत कारगर है। इसके दैनिक इस्तेमाल से मलेरिया से बचा जा सकता है। गिलोय के चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर इस्तेमाल करना चाहिए।


घावों और कटने का उपचार
गिलॉय की पत्तियों का एक पेस्ट बनाइए|
एक पैन में गिलॉय पेस्ट के साथ अरंडी का तेल या नीम का तेल मिलाएं|
इस मिश्रण को कुछ मिनटों के लिए पकाइए|
इस मिश्रण को ठंडा कर लें|
इसे घाव पर लगायें और घाव को एक पट्टी के साथ बाँध दें|
गिलॉय का उपयोग कैसे करें?
इसे एक कप पानी में गिलॉय का सूखे हुए तने का पाउडर लगभग 1 चम्मच की मात्रा में मिलाएं|
मिश्रण को उबालकर आधे से भी कम कर लें|
इस मिश्रण को छाने|
प्रतिदिन एक बार इस मिश्रण का उपयोग भोजन लेने से पहले करें|
गिलॉय सेवन करने के लिए कैप्सूल और गोलियों भी बाजार में उपलब्ध है।
साइड इफेक्ट्स और बचाव
हलांकि गिलॉय का उपयोग मधुमेह के इलाज के लिए किया जाता है, लेकिन यह ग्लूकोज के स्तर को इतना कम कर देता है कि अन्य दवाओं के साथ इसे लेना खतरनाक हो सकता है|
गर्भावस्था के दौरान गिलॉय का सेवन करना निषेध है|



28.6.19

तिल खाने के स्वास्थ्य लाभ एवं औषधीय गुण



तिल का सेवन करना सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होता हैं। आयुर्वेद के अनुसार तिल बलवर्धक होता हैं। इसका सर्दी के मौसम में सेवन विशेष लाभकारी माना जाता हैं। तिल में पोषक तत्वों का खजाना हैं। इसमें पर्याप्त मात्रा में विटामिन बी पाया जाता हैं जिसके कारण यह भूख बढाता हैं भोजन को भली भाति हज़म करता हैं तन्त्रिका तंत्र को बल प्रदान करता हैं।
आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञानं के अनुसार तिल स्निग्ध, मधुर और उष्ण होने से वात का शमन करता हैं यह कफ़ और पित्त को नष्ट करता हैं। बालों के लिए इसका तेल बहुत अच्छा होता हैं जाड़ों के दिनों में इसके तेल कि मालिश बहुत अच्छी रहती हैं। आयुर्वेद के अनुसार तिल के तेल से प्रतिदिन मालिश करने से बुढ़ापा, थकावट दूर होती हैं द्रष्टि बढती हैं, प्रसन्नता, पुष्टता और आयु, निद्रा में वृद्धि होती हैं यह त्वचा की सुन्दरता बढ़ाने तथा रूखापन दूर करने में उपयोगी हैं। सर्दी के दिनों में इसका नित्य उपयोग तिल्कूटा, चटनी, लड्डू, तिलपट्टी गजक के रूप में किया जाता हैं।
तिल तीन प्रकार के होते हैं काले सफ़ेद और लाल। काले तिल सर्वोत्तम और बल वीर्यवर्धक होते हैं सफ़ेद तिल मध्यम और लाल तिल हीन गुण वाले होते हैं। काले तिल तंत्र-मंत्र, हवं पूजा आदि धार्मिक कार्यों के साथ साथ औषधीय कार्यों में भी उपयोगी होते हैं।
तिल खाने के फायदे
1. फटी एड़ि‍यों में तिल का तेल गर्म करके, उसमें सेंधा नमक और मोम मिलाकर लगाने से एड़ि‍यां जल्दी ठीक होने के साथ ही नर्म व मुलायम हो जाती है।
2. मुंह में छाले होने पर, तिल के तेल में सेंधा नमक मिलाकर लगाने पर छाले ठीक होने लगते हैं।
3. तिल को कूटकर खाने से कब्ज की समस्या नहीं होती, साथ ही काले तिल को चबाकर खाने के बाद ठंडा पानी पीने से बवासीर में लाभ होता है। इससे पुराना बवासीर भी ठीक हो जाता है।
4. शरीर के किसी भी अंग की त्वचा के जल जाने पर, तिल को पीसकर घी और कपूर के साथ लगाने पर आराम मिलता है, और घाव भी जल्दी ठीक हो जाता है।
5. सूखी खांसी होने पर तिल को मिश्री व पानी के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है। इसके अलावा तिल के तेल को लहसुन के साथ गर्म करके, गुनगुने रूप में कान में डालने पर कान के दर्द में आराम मिलता है।
6. सर्दियों में तिल का सेवन शरीर में उर्जा का संचार करता है, और इसके तेल की मालिश से दर्द में राहत मिलती है।
7. तिल, दांतों के लिए भी फायदेमंद है। सुबह शाम ब्रश करने के बाद तिल को चबाने से दांत मजबूत होते हैं, साथ ही यह कैल्शियम की आपूर्ति भी करता है।

8. तिल का प्रयोग मानसिक दुर्बलता को कम करता है, जिससे आप तनाव, डिप्रेशन से मुक्त रहते हैं। प्रतिदिन थोड़ी मात्रा में तिल का सेवन कर आप मानसिक समस्याओं से निजात पा सकते हैं।
9. तिल का प्रयोग बालों के लिए वरदान साबित हो सकता है। तिल के तेल का प्रयोग या फिर प्रतिदिन थोड़ी मात्रा में तिल को खाने से, बालों का असमय पकना और झड़ना बंद हो जाता है
10.तिल का उपयोग चेहरे पर निखार के लिए भी किया जाता है। तिल को दूध में भिगोकर उसका पेस्ट चेहरे पर लगाने से चेहरे पर प्राकृतिक चमक आती है, और रंग भी निखरता है। इसके अलावा तिल के तेल की मालिश करने से भी त्वचा कांतिमय हे जाती है।

11.हृहय की मांसपेशि‍यों के लिए-तिल में कई तरह के लवण जैसे कैल्श‍ियम, आयरन, मैग्नीशियम, जिंक और सेलेनियम होते हैं जो हृदय की मांसपेशि‍यों को सक्रिय रूप से काम करने में मदद करते हैं.
12.आयुर्वेद में तिल को गर्म प्रकृति का , गैस मिटाने वाला तथा दिमाग और हृदय को ताकत देने वाला बताया गया है। यह मूत्राशय और प्रजनन अंगों को स्वस्थ करता है। Til के तेल में पॉलीअनसेचुरेटेड तथा मोनोअनसेचुरेटेड फैटी एसिड होते है जो हृदय के लिए लाभदायक होते है।
13.तिल के उपयोग का एक आसान तरीका यह भी है कि इसे तवे पर भून लें। इसमें थोड़ा सा नमक डालकर कूट लें। इसे सुबह शाम गरम पानी के साथ एक एक चम्मच फांक लें। इस तरह कुछ दिन लेने से शारीरिक कमजोरी , सिरदर्द , बदन दर्द आदि दूर होते है।
14.इसमें कोलेस्ट्रॉल कम करने वाले फीटोस्टेरोल की मात्रा सभी मेवे , फलियां या अनाज से अधिक पाई जाती है। फीटोस्टेरोल की वजह से आंतें कोलेस्ट्रॉल का अवशोषण नहीं कर पाती। तिल के छिलकों में कैल्शियम , फाइबर , पोटेशियम तथा आयरन अधिक मात्रा में होता है। अतः इसे छिलके सहित काम में लेना अधिक फायदेमन्द होता है।

ईसबगोल की भूसी के फायदे



आयुर्वेद के अनुसार ईसबगोल मधुर, शीतल, स्निग्ध, चिकनी, मृदु, विपाक में मधुर, कफ व पित्त नाशक, पौष्टिक कसैली, थोड़ी वातकारक, रक्तपित्त व रक्तातिसार नाशक, कब्ज दूर करने वाली, अतिसार, पेचिश में लाभप्रद, श्वास व कास में गुणकारी, मूत्र रोग में लाभकारी है.
यूनानी मतानुसार, इसकी बीज शीतल एवं शांति दायक होते हैं. जीर्ण रक्तातिसार, अंतड़ियों की पीड़ा, कब्ज, मरोड़, अतिसार, पेचिस आंतों के व्रण, दमे की बीमारी, पित्त संबंधी विकार, ठंड और कफ की बीमारियों में भी लाभदायक है.
वैज्ञानिकों के अनुसार, ईसबगोल की रासायनिक संरचना का विश्लेषण करने पर यह पता चलता है कि इसके बीजों में 30% म्युसिलेज होता है जो Xylose, Arabinose और Galecturonic Acid से बना होता है. इसके अलावा म्युसिलेज में एक स्थिर तेल Aucubin 5% होता है. थोड़ी मात्रा में इसमें रह रैमनोज और गैलेक्टोज भी पाए जाते हैं. बीज मज्जा में कोलेस्ट्रॉल घटाने की छमता वाला 17.7 प्रतिशत लिनोलिक एसिड बहुल तेल होता है. एक भाग बीच में इतना म्युसिलेज होता है कि वह 20 भाग के जल में थोड़ी ही देर में जेली बना लेता है.बाजार में औषधि‍ के रूप में मिलने वाले ईसबगोल का उपयोग आपने कभी किया हो या न किया हो। लेकिन इसके गुणों को जानना आपके लिए बेहद फायदे का सौदा साबित हो सकता है। यदि‍ आप सोच रहे हैं कि वह कैसे, तो जरूर पढ़ें नीचे दिए गए ईसबगोल के उपाय -


1. डाइबिटीज - 
ईसबगोल का पानी के साथ सेवन, रक्त में बढ़ी हुई शर्करा को कम करने में मदद करता है।
2.अतिसार -
 पेट दर्द, आंव, दस्त व खूनी अतिसार में भी ईसबगोल बहुत जल्दी असर करता है, और आपकी तकलीफ को कम कर देता है ।
3.पाचन तंत्र - 
यदि आपको पाचन संबंधित समस्या बनी रहती है, तो ईसबगोल आपको इस समस्या से निजात दिलाता है। प्रतिदिन भोजन के पहले गर्म दूध के साथ ईसबगोल का सेवन पाचन तंत्र को दुरूस्त करता है।
4. जोड़ों में दर्द - 
जोड़ों में दर्द होने पर ईसबगोल का सेवन राहत देता है। इसके अलावा दांत दर्द में भी यह उपयोगी है। वि‍नेगर के साथ इसे दांत पर लगाने से दर्द ठीक हो जाता है।
5.वजन कम करे -
वजन कम करने के लिए भी फाइबर युक्त ईसबगोल उपयोगी है। इसके अलावा यह हृदय को भी स्वस्थ रखने में मदद करता है।
6. सर दर्द -
ईसबगोल का सेवन सि‍रदर्द के लिए भी उपयोगी है। नीलगिरी के पत्तों के साथ इसका लेप दर्द से राहत देता है, साथ ही प्याज के रस के साथ इसके उपयोग से कान का दर्द भी ठीक होता है।
7.सांस की दुर्गन्ध
ईसबगोल के प्रयोग से सांस की दुर्गन्ध से बचाता है, इसके अलावा खाने में गलती से कांच या कोई और चीज पेट में चली जाए, तो ईसबगोल सकी मदद से वह बाहर निकलने में आसानी होती है।
8.कफ - 
कफ जमा होने एवं तकलीफ होने पर ईसबगोल का काढ़ा बनाकर पिएं। इससे कफ निकलने में आसानी होती है।
9. नकसीर -
नाक में से खून आने पर ईसबगोल और सिरके का सर पर लेप करना, फायदेमंद होता है।
10. बवासीर -
 खूनी बवासीर में अत्यंत लाभकारी ईसबगोल का प्रतिदिन सेवन आपकी इस समस्या को पूरी तरह से खत्म कर सकता है। पानी में भि‍गोकर इसका सेवन करना लाभदायक है।
11.आंव
एक कप गरम दूध में एक चम्मच ईसबगोल डालें, फूलने पर रात्रि में सेवन करें | सुबह एक कप दही में एक चम्मच इसबगोल डालकर अच्छी तरह फुल जाने दें | अब इसमें इच्छानुसार थोड़ा जीरा , नमक और सौंठ मिलाकर लगातार तीन दिन तक सेवन करने से आंव आने की समस्या खत्म हो जाती है |
12.मुंह के छालों में फायदे
एक गिलास पानी में एक चम्मच इसबगोल भिगोकर दो घंटे बाद कुल्ला करने से आराम महसूस होता है | इसका चिकना गुण मुंह के छालों में आराम पहुंचता है |
13.पेट में मरोड़ या एंठन –
 ताजा दही या छाछ में एक चम्मच ईसबगोल की भूसी मिलाकर सेवन करने से पेट में उठने वाली मरोड़ एवं एंठन से आराम मिलता है | यह प्रयोग दिन में तीन या चार बार तक किया जा सकता है 
14.संग्रहणी रोग में फायदे
हरा बेलपत्र और ईसबगोल दोनों को सामान मात्रा में मिलाकर पिसलें | दो चम्मच की मात्रा गुनगुने दूध में मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने करें | यह प्रयोग कम से कम एक सप्ताह तक करें | काफी आराम मिलता है |
15.पेशाब में जलन – 
एक गिलास पानी में 2 चम्मच इसबगोल मिलाकर और साथ में स्वाद के अनुसार चीनी मिलाकर पिने से पेशाब में जलन की समस्या खत्म हो जाती है |


25.6.19

मूँगफली के स्वास्थ्य लाभ फायदे

                                           


मूंगफली को सस्ता काजू कहा जाता है और इसमें स्वाद के साथ साथ कई प्रकार के स्वास्थ्य को लाभ पंहुचाने संबंधी गुण भी होते हैं। मूंगफली को कई प्रकार से उपयोग किया जाता है। इसका तेल भी स्वाद और स्वास्थ्य के लिए बहुत प्रचलित है। मूंगफली हमारे देश में हर तरह के खाने में इस्तेमाल की जाती है चाहे वह मीठे पकवान हो या नमकीन, इससे बिना कुछ पकवान तो संभव ही नहीं।
मूंगफली, जिसे अंग्रेजी में पीनट कहा जाता है अखरोट और बादाम जैसे स्‍वाद और पौष्टिक आहार के समान होती है। इसे जमीन से निकाला जाता है इसलिए इसे ग्राउंडनट (groundnuts) भी कहा जाता है मूंगफली अपने गुणों के कारण बहुत उपयोगी होती है। इसमें बहुत से पोषक तत्व होते है, जो मूंगफली के फायदे बताते है। ये मैंगनीज, नियासिन इत्‍यादि का एक अच्‍छा स्रोत होते है। इसमें विटामिन ई, फोलेट, फाइबर और फास्‍फोरस भी अच्‍छी मात्रा में होते है। मूंगफली औषधी तो नहीं पर उनके सहयोगी के रूप में जानी जाती है।
मूंगफली के फायदे हृदय रोग के जोखिम को कम करने, वजन घटाने, रक्त शर्करा के स्तर को स्थिर रखने, और मानव शरीर में चयापचय को बढ़ाने आदि के लिए जाने जाते है।
मूंगफली के घटक
ये कार्ब्स  में कम और पोषक तत्वों में ज्यादा संपन्न है। मूंगफली प्रोटीन  का एक बहुत बड़ा स्रोत है। बायोटिन , नियासिन,फॉलेट, मैग्‍नीज, विटामिन ई, थियामीन, फास्‍फोरस ओर मैग्‍नीशियम से भी भरपूर है। जो सभी स्वस्थ शरीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते है।
प्रोटीन
प्रोटीनहमारे कोशिकाओं के स्‍वास्‍थ के लिए आवश्‍यक है, यह हमारे शरीर की कोशिकाओं को लगातार वृद्धि में सहायक होता है। साथ ही यह क्षतिग्रस्‍त कोशिकाओं की मरम्‍मत भी करता है। हमारे शरीर को प्रोटीन की आवश्‍यक्‍ता होती है, जिसकी पूर्ती हम मूंगफली के रूप कर सकते है। बच्‍चों और कम प्रोटीन वाले लोगों को नियमित रूप से आहार के रूप में इसका सेवन करना चाहिए।
एंटीऑक्सिडेंटस (Antioxidants)
मूंगफली में एंटीऑक्सिडेट पॉलीफेनोल की उच्‍च मात्रा होती है, मुख्‍यत: पी-कूमरिक एसिड और ओलिक एसिड नामक एक यौगिक, जो न केवल हृदय की रक्षा करती है बल्कि हानीकारक तत्‍वों के उत्‍पादन को रोकती है।
खनिज
मूंगफली में मैग्‍नीशियम, फास्‍फोरस , पोटेशियम , जस्‍ता (zinc), कैल्शियम , सोडियम आदि जैसे खनिजों का एक अच्‍छा स्रोत है। ये हमारे शरीर के अच्‍छे तरह से कार्य करने के लिए आवश्‍यक होते है। मूंगफली के नियमित आहार से हम इन को तत्‍वों शरीर के स्‍वास्‍थ के लिए उपलब्‍ध करा सकते है। इन खनिजों की आपूर्ती स्‍वस्‍थ हृदय और रोगों के खतरों को कम करती है।
विटामिन
समग्र विकास के लिए विटामिन महत्‍वपूर्ण हैं। विटामिन कोशिकाओं और ऊतकों के लिए महत्‍वपूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य सुनिश्चित करते हैं, और संक्रमणों से बचाते है। मूंगफली हमारे शरीर को आवश्‍यक विटामिन प्रदान करती है, जो चयापचय (Metabolism) को विनियमित करने, वसा और कार्बोहाइड्रेट को ऊर्जा में बदलने का काम करती है। प्रोटीन हड्डी और ऊतकों के गठन की सुविधा प्रदान करने में भी मदद करते है।
स्‍वस्‍थ दिल के लिए मूंगफली –
मूंगफली में मानोअनसैचुरेटेड और पॉली अनसेचुरेटेड वसा बाले होते है। जों हृदय को स्‍वस्‍थ रखते हैं। ये दोनों वसा रक्‍त कोलस्‍ट्रॉल के स्‍तर को कम करते है, और इस तरह कोरोनरी हृदय रोगों के जोखिमों को कम करते है। मूंगफली के फायदे लेने के लिए इसका सेवन अवश्य करें।
मूंगफली अल्‍जाइमर और नसों की बीमारी के लिए
ग्राउंडनट प्रमुख रूप से कैंसर, हृदय रोग), तंत्रिका रोगों और वायरल या किसी भी प्रकार के कवक संक्रमणों (Fungal infection) को रोकते है। शरीर में नाइट्रिक ऑक्‍साइड के उत्‍पादन को बढ़ाते है जो Resveratrol नामक एंटीऑक्‍सीडेंट द्वारा स्‍ट्रोक की संभावना को कम करता है।
मूंगफली के फायदे ब्‍लड शुगर को कम करे
मूंगफली का नियमित सेवन कैल्शियम, वसा, ओर कार्बोआइड्रेट को मैंगनीज के माध्‍यम से अवशोषित करने में मदद करता है। जो मूंगफली में पाया जाता है। यह व्‍यक्ति के शरीर में शुगर के स्‍तर को नियंत्रित करता है। मूंगफली के फायदे लेने के लिए इसका सेवन अवश्य करें।
स्वस्थ हड्डियों के लिए
मूंगफली में उपस्थित आयरन और कैल्शियम की प्रचुर मात्रा रक्‍त में आक्‍सीजन के परिवहन और हड्डियों को मजबूत बनाने का काम करते है। यह आपके शरीर के विकास में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह पोषण संबंधी सभी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है। पीनट्स, विटामिन, खनिज, और एंटीऑक्‍सीडेंट के कारण शरीर को पर्याप ऊर्जा दिलाते है। मूंगफली के फायदे लेने के लिए इसका सेवन अवश्य करें।
*मूंगफली के आश्चर्यजनक गुणों में क्रोनिक त्वचा संबंधी बीमारियां जैसे एग्जीमा और सोराइसिस का भी इलाज संभव है। इसमें पाए जाने वाले फेटी एसिड सूजन और त्वचा में होने वाला लालपन भी कम हो जाता है।
पेट के कैंसर के लिए
मूंगफली में उच्‍च साद्रंता में पोली-फेनोलिक जैसे ओक्सिडेंट मौजूद रहते है। एसिड पी-कैमररिक में पेट के कैंसर को कम करने की क्षमता है। यह कैंसर जनिक नाइट्रस अमाइन के निर्माण को कम करने के द्वारा किया जाता है।
*मूंगफली का खास गुण यह है कि यह शरीर पर स्मार्टली काम करती है। यह शरीर में से बुरे कॉलेस्ट्रोल को कम करती है और अच्छे कॉलेस्ट्रोल को बढ़ाती है। इसमें मोनो-अनसचुरेटेड फैटी एसिड खासतौर पर ऑलइक एसिड होता है जिससे दिल संबंधी बीमारियों से छुटकारा मिलता है।
मूंगफली त्‍वचा के लिए
पीनट्स में मौजूद एंटी-ऑक्‍सीडेंट पर्याप्‍त मात्रा में होते है। जो पकाने या उबालने के बाद ज्‍यादा सक्रीय होते है। पकाने के बाद जैनिस्‍टीइन में चार गुना वृद्धि होती है और बायोइकिन-एनामक एंटी-ऑक्‍सीडेंट में दो गुनी वृद्धि होती है। ये त्‍वचा में होने वाले हानीकारक प्रभावों को रोकने में मदद करता है। जिससे आपकी त्‍वचा स्‍वस्‍थ व निरोगी होती है। साथ ही यह आपकी भूख की शांत करने में भी मदद करती है।
*मूंगफली को प्रेंगनेंसी के पहले और शुरुआत में खाना शुरू कर देने से बच्चे में हो सकने वाले गंभीर न्यूरल ट्यूब डीफेक्ट 70 प्रतिशत तक कम हो जाता है।

23.6.19

स्वस्थ रहने के उपाय ,उपचार



दिनचर्या में थोड़ा-सा व आसान परिवर्तन आपको स्वस्थ व दीर्घायु बना सकता है। बशर्ते आप कुछ चीजों को जीवनभर के लिए अपना लें और कुछ त्याज्य चीजों को हमेशा के लिए दूर कर दें। इसके लिए अपनाइए सरल-सा 20 सूत्री जीवन।
* शरीर का प्रत्येक अंग-प्रत्यंग रोम छिद्रों के माध्यम से श्वसन करता है। इसीलिए शयन के समय कपड़े महीन, स्वच्छ एवं कम से कम पहनें। सूती वस्त्र अतिउत्तम होते हैं।
* बालों को हमेशा सँवार कर रखें। अपने बालों में तेल का नियमित उपयोग करें। बाल छोटे, साफ रखें, अनावश्यक बालों को साफ करते रहें।
* प्रतिदिन प्रातः सूर्योदय पूर्व (5 बजे) उठकर दो या तीन किमी घूमने जाएँ। सूर्य आराधना से दिन का आरंभ करें। इससे एक शक्ति जागृत होगी जो दिल-दिमाग को ताजगी देगी।
* शरीर को हमेशा सीधा रखें यानी बैठें तो तनकर, चलें तो तनकर, खड़े रहें तो तनकर अर्थात शरीर हमेशा चुस्त रखें।
* नियमित रूप से अपने आराध्य देव के दर्शन हेतु समय अवश्य निकालें। आप चाहे किसी भी धर्म के अनुयायी हों, अपनी धर्म पद्धति के अनुसार ईश्वर की प्रार्थना अवश्य करें।
* क्रोध के कारण शरीर, मन तथा विचारों की सुंदरता समाप्त हो जाती है। क्रोध के क्षणों में संयम रखकर अपनी शारीरिक ऊर्जा की हानि से बचें।
* भोजन से ही स्वास्थ्य बनाने का प्रयास करें। इसका सबसे सही तरीका है, भोजन हमेशा खूब चबा-चबाकर आनंदपूर्वक करें ताकि पाचनक्रिया ठीक रहे, इससे कोई भी समस्या उत्पन्न ही नहीं होगी।
* मोटापा आने का मुख्य कारण तैलीय व मीठे पदार्थ होते हैं। इससे चर्बी बढ़ती है, शरीर में आलस्य एवं सुस्ती आती है। इन पदार्थों का सेवन सीमित मात्रा में ही करें।
* गरिष्ठ-भारी भोजन या हजम न होने वाले भोजन का त्याग करें। यदि ऐसा करना भी पड़े तो एक समय उपवास कर उसका संतुलन बनाएँ।
* वाहन के प्रति मोह कम कर उसका प्रयोग कम करने की आदत डालें। जहाँ तक हो कम दूरी के लिए पैदल जाएँ। इससे मांसपेशियों का व्यायाम होगा, जिससे आप निरोगी रहकर आकर्षक बने रहेंगे, साथ ही पर्यावरण की रक्षा में भी सहायक होंगे।
* अपने जीवन में लक्ष्य, उद्देश्य और कार्य के प्रति समर्पण का भाव रखें।
* शरीर की सुंदरता उसकी सफाई में है। इसका विशेष ध्यान रखें।
* सुबह एवं रात में मंजन अवश्य करें। साथ ही सोने से पूर्व स्नान कर कपड़े बदलकर पहनें। आप ताजगी महसूस करेंगे।
* मन एवं वाणी की चंचलता से अनेक अवसरों पर अपमानित होना पड़ सकता है। अतः वाणी में संयम रखकर दूसरों से स्नेह प्राप्त करें, घृणा नहीं।
* भोजन में अधिक से अधिक मात्रा में फल-सब्जियों का प्रयोग करें। उनसे आवश्यक तैलीय तत्व प्राप्त करें, शरीर के लिए आवश्यक तेल की पूर्ति प्राकृतिक रूप के पदार्थों से ही प्राप्त करें।
* दिमाग में सुस्ती नहीं आने दें, कार्य को तत्परता से करने की चाहत रखें।
* घर के कार्यों को स्वयं करें- यह कार्य अनेक व्यायाम का फल देते हैं।
* व्यस्तता एक वरदान है, यह दीर्घायु होने की मुफ्त दवा है, स्वयं को व्यस्त रखें।
* कपड़े अपने व्यक्तित्व के अनुरूप पहनें। थोड़े चुस्त कपड़े पहनें, इससे फुर्ती बनी रहेगी।
* जीवन चलने का नाम है, गतिशीलता ही जीवन है, यह सदा ही याद रखें।

20.6.19

सर्दी,जुकाम,खांसी के असरदार उपचार



सर्दी जुकाम और खांसी बरसात और ठंड के मौसम में सामान्‍य समस्‍या होती है। लेकिन सर्दी जुकाम आपको बहुत ही परेशानी में डाल सकता है। सामान्‍य सर्दी की वजह से जब आपको खांसी या बुखार होता है और आप घर पर ही बिस्‍तर पर आराम  करते हैं तो यह आपके लिए सुखद अनुभव नहीं होता है। इस स्थिति में सिर दर्द, बदन दर्द, बुखार, सर्दी, नाक का बहना आदि असुविधाजनक घटनाएं आपके साथ घटित होती हैं। आप इनका इलाज भी करा सकते हैं, लेकिन आपके लिए अच्‍छी बात यह है कि इस सामान्‍य समस्‍या का उपचार आप अपने घर पर ही कुछ घरेलू उपायों के माध्‍यम से कर सकते हैं। आइए जाने सर्दी-खांसी-जुकाम के घरेलू इलाज के बारे में।
सर्दी जुकाम का आयुर्वेदिक उपचार है लहसुन
एलिसिन नामक यौगिक की अच्‍छी मात्रा लहसुन में पाई जाती है जिसमें एंटीमाइक्रोबायल गुण होते हैं। आप अपने आहार में लहसून का उपयोग करके सर्दी के लक्षणों को दूर कर सकते हैं। कुछ अध्‍ययन बताते हैं कि यदि लहसुन का नियमित रूप से सेवन किया जाता है तो यह सर्दी जुकाम के प्रारंभिक या शुरुआती दौर में ही इसे रोकने में मदद करते हैं। लहसुन प्रकृति में गर्म होता है जो कि आपके शरीर को पर्याप्‍त गर्मी और पोषक तत्‍व उपलब्‍ध कराने में मदद करता है। इस तरह से आप सर्दी और जुकाम आदि के लक्षणों से बचने के लिए लहसुन का उपयोग कर सकते हैं। लहसुन को सर्दी जुकाम की आयुर्वेदिक दवा के रूप भी जाना जाता है।

सर्दी जुकाम की घरेलू दवा दूध और हल्‍दी
रसोई घर में उपलब्‍ध सबसे सामान्‍य मसाला हल्‍दी जिसका उपयोग हम अपने भोजन को स्‍वादिष्‍ट बनाने के लिए करते हैं। हल्‍दी में एंटीऑक्‍सीडेंट बहुत अच्‍छी मात्रा में होते हैं जो कई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को हल करने में हमारी मदद करते हैं। यदि सर्दी जुकाम से जल्‍दी राहत पाना है तो आपको हल्‍दी और दूध का इस्‍तेमाल करना चाहिए। दूध और हल्‍दी सर्दी जुकाम का सबसे प्रभावी और उपयोगी घरेलू उपचारों में से एक है। आप रात में सोने से पहले 1 गिलास गुनगुने दूध में 1 छोटा चम्‍मच हल्‍दी मिलाकर सेवन करें। यह सर्दी जुकाम से राहत पाने का सबसे अच्‍छा तरीका हो सकता है।
खांसी जुकाम के घरेलू नुस्खे में करें नमक और पानी से गरारे
पानी में नमक मिलाकर गरारे करने से आपको गले की खरास से राहत मिल सकती है। नमक वाला पानी सर्दी के लक्षणों को कम करने में मदद करता है। पानी के साथ नमक का उपयोग करने से यह कफ की मात्रा को कम कर सकता है जिसमें बैक्‍टीरिया होते हैं। इस उपाय को अजमाने के लिए एक गिलास गुनगुने पानी में 1 चम्‍मच नमक डालें और फिर इस पानी से गरारे  करें। यह सर्दी के कारण होने वाले आपके गले के दर्द, और खरास आदि का प्रभावी तरीके से इलाज कर सकता है।
पुराने जुकाम का इलाज है हनी और ब्रांडी
आपने बुर्जुगों से सुना होगा कि ब्रांडी का उपयोग सीने को गर्म रखने के लिए उपयोग किया जाता है। ब्रांडी का उपयोग करने से शरीर के तापमान को बढ़ाया जाता है। यदि ब्रांडी में शहद को मिलाकर सेवन किया जाए तो यह सर्दी के दौरान होने वाली खांसी को कम करने में मदद करती है। इसके लिए आपको ब्रांडी की एक बोलत पीने की आवश्‍यकता नहीं है। आप केवल 1 चम्‍मच ब्रांडी में कुछ बूंदे शहद की मिला सकते हैं और इसका सेवन कर सकते हैं। यह आपको सर्दी और खांसी दोनों से राहत दिलाने में मदद करती है।
सर्दी जुकाम का आयुर्वेदिक उपचार है मसालेदार चाय
आप सर्दी जुकाम के दौरान अपनी सामान्‍य चाय को और अधिक स्‍वादिष्‍ट और प्रभावी बनाने के लिए इसे मसालेदार बना सकते हैं। इस प्रकार की चाय आपकी सर्दी को मिटाने में बहुत ही प्रभावी होती है। आप अपनी चाय बनाते समय इसमें तुलसी, अदरक और काली मिर्चको मिला सकते हैं जो आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत ही फायदेमंद होती है। ये तीनों मसाले  आपकी सामन्‍य सर्दी और जुकाम को दूर करने वाले औषधीय गुणों से भरपूर होती है।
जुकाम के घरेलू उपचार के लिए पीये गर्म पानी
सामान्‍य शीत और गले की खरास के लिए आप गुनगुने पानी का उपयोग कर सकते हैं। गर्म पानी का उपयोग करने से गले की सूजन को कम करने में मदद मिलती है। इसका एक और फायदा यह है कि गर्म पानी पीने से या गरारे करने से आपके गले और मुंह में मौजूद बैक्‍टीरिया की सफाई की जा सकती है। इसलिए सर्दी के दौरान हमेशा गुनगुना पानी  पीने की सलाह दी जाती है।
सर्दी जुकाम बुखार का घरेलू उपचार विटामिन सी
आपके शरीर के अच्‍छे विकास के लिए विटामिन सी बहुत ही महत्‍वपूर्ण होता है, इसके बहुत से स्‍वास्‍थ्‍य लाभ जिनमें सर्दी जुकाम भी शामिल हैं। संतरा, नींबू, अंगूर, पत्‍तेदार सब्जियां और अन्‍य फलों से विटामिन सी (vitamin C) की अच्‍छी मात्रा प्राप्‍त की जा सकती है। गर्म चाय में नींबू का रस और शहद मिलाकर सेवन करने से यह सर्दी के दौरान कफ को कम करने में मदद करता है। हालांकि इस तरह के विटामिन सी से भरपूर फलों का सेवन करने पर यह पूरी तरह से सर्दी को ठीक नहीं करता है लेकिन वे आपको पर्याप्‍त विटामिन सी उपलब्‍ध करा सकते हैं जो आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद करते हैं। विटामिन सी का उपयोग कर सर्दी से संबंधित संक्रमणों से भी बच सकते हैं।
सर्दी जुकाम के घरेलू नुस्खे में करें चिकिन सूप का सेवन
यदि आप समझ रहे है कि चिकिन सूप का उपयोग हमेशा ही किसी दवा के रूप में उपयोग किया जा सकता है तो यह गलत है। लेकिन यदि आप सामान्‍य सर्दी या जुकाम से पीड़ित हैं तो यह आपके लिए अच्‍छा विकल्‍प हो सकता है। अध्‍ययनों से पता चलता है कि सब्जियों के साथ चिकिन सूप का सेवन करने से आपके शरीर को गर्मी प्रदान करता है और यह आपके शरीर में न्‍यूट्रोफिल की गति को धीमा कर सकता है जिससे यह प्रभावित क्षेत्र में अधिक समय तक ठहरता है और आपकी उपचार प्रक्रिया को बढ़ाने में मदद करता है।
न्‍युट्रोफिल सफेद रक्‍त कोशिकाओं का एक प्रकार है जो आपके शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करता है। अध्‍ययनों में पाया गया कि चिकिन सूप विशेष रूप से ऊपरी श्‍वसन संक्रमण के लक्षणों को कम करने में प्रभावी होता है। कम सोडियम सूप भी पोषण दिलाने में मदद करते हैं और आपको हाइड्रेट रखने में सहायक होते हैं।
गर्मी के जुकाम का इलाज है आंवला –
एक बहुत ही शक्तिशाली इम्यूनो मॉड्यूलेटर होने के कारण आंवला कई बीमारियों से हमारे शरीर की रक्षा करता है। नियमित रूप से आंवला का सेवन करने से बहुत से स्‍वास्‍थ्‍य लाभ प्राप्‍त हो सकते हैं। सामान्‍य मौसम में बदलाव या गर्मी के जुकाम को ठीक करने का सबसे अच्‍छा उपाय आंवला के रूप में मौजूद है। आवंला का सेवन करने से यह यकृत की उचित कार्यप्रणाली सुनिश्चित करता है और रक्‍त परिसंचरण में सुधार करता है। इसलिए आप गर्मी के जुकाम का उपचार करने के लिए आंवले का फायदेमंद उपयोग कर सकते हैं।
सर्दी का घरेलू इलाज है अदरक और नमक –
आप सोच रहे होगें कि एक अदरक कितने प्रकार से सर्दी का उपचार कर सकता है। लेकिन यह ऐसी जड़ी बूटी  है कि यह कई प्रकार से हमारे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए फायदेमंद होती है। आप यदि अदरक की चाय  का सेवन नहीं करना चाहते हैं तो आप अदरक को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें और इसमें अपने स्‍वादानुसार नमक मिलाएं। गले की खरास, सर्दी और खांसी से बचने के लिए आप अदरक के इन टुकड़ों को मुंह में लें और चबाएं। यह आपके गले को राहत देगा और आपकी सर्दी का उपचार भी करेगा।
पुराने जुकाम का इलाज है अदरक की चाय
यह आयुर्वेद की सबसे ज्‍यादा शक्तिशाली जड़ी बूटीयों में से एक है। इसमें एंटीवायरल  गुण अच्‍छी मात्रा में होते हैं जो पर्याप्‍त मात्रा में सेवन करने पर सर्दी के लक्षणों को कम करने में सहायक होते हैं। इसके लिए आप अदरक को कच्‍चा ही खा सकते हैं लेकिन अदरक की चाय ज्‍यादा सुविधाजनक और फायदेमंद होती है। इसके लिए आप अदरक का पेस्‍ट बनाकर इसका रस निकालकर इसमें नींबू का रस और शहद  को मिलाकर चाय तैयार करें। यह आपकी सर्दी को रोकने में आपकी मदद करती है।
सर्दी जुकाम की घरेलू दवा है शहद
कच्‍चा शहद (Unpasteurized) में एंटीमाइक्रोबायल और एंटीऑक्‍सीडेंट गुण अच्‍छी मात्रा में मौजूद रहते हैं। शहद के ये गुण प्रतिरक्षा को बढाते हैं और खांसी के प्रभाव को कम करने में मदद करते हैं। कच्‍चे शहद का उपयोग विशेष रूप से 6 वर्ष की आयु से छोटे बच्‍चों के लिए बहुत ही प्रभावी होता है। लेकिन कुछ जानकार सलाह देते हैं कि 1 वर्ष से कम आयु वाले बच्‍चों को शहद (Honey) का सेवन नहीं कराया जाना चाहिए। यदि आप सर्दी जुकाम के दौरान शहद का उपयोग करते हैं और इससे आपको आराम नहीं मिलता है तो आपको डॉक्‍टर से संपर्क करना चाहिए। लेकिन आयुर्वेद में ऐसा माना जाता है कि यदि नियमित रूप से शहद का सेवन किया जाए तो यह सर्दी, खांसी जैसी सामान्‍य समस्‍याओं से छुटकारा दिला सकता है।
सर्दी जुकाम की घरेलू दवा अलसी के बीज –
सामान्‍य सर्दी और खांसी को ठीक करने के लिए अलसी के बीज (Flax seeds) एक प्रभावी उपाय हैं। इसके लिए आप थोड़े से अलसी के बीजों को पानी में उबालें जब तक की मिश्रण गाढ़ा ना हो जाये। जब अच्‍छी तरह से अलसी बीज उबल जाएं तो आप इसे ठंडा करके इसमें नींबू का रस और शहद की कुछ बूंदे मिलाएं। इस मिश्रण को अच्‍छी तरह से मिलाने के बाद आप इसका सेवन कर सकते हैं। यह आपको सर्दी जुकाम से राहत दिलाने का सबसे अच्‍छा घरेलू उपाय है।
सर्दी जुकाम से बचने के लिए भाप का प्रयोग
आप सर्दी के कारण अपनी बंद नाक को साफ करने के लिए अपने चेहरे को एक गर्म पानी से भरे बर्तन के ऊपर ले जाएं और इससे निकलने वाली भाप से धीरे-धीरे सांस लें इससे आपकी बंद नाक साफ होगी और आपको सर्दी से राहत भी मिल सकती है।

18.6.19

लंबी आयु पाने के उपाय



जीवन के प्रति मोह होना इंसानी फितरत है। जीवन के प्रति यही लगाव इंसान को अधिक से अधिक जीने की प्रेरणा देता है। हर व्यक्ति चाहता है कि वह अधिक से अधिक जीकर अपने घरवालों के साथ खुशियां बांट सकें। इसीलिए 100 साल का होने के बाद भी व्यक्ति को मोह रहता है कि वह कुछ समय और जी लें। क्या आप जानते हैं लंबी उम्र के लिए आपको कई प्रकार के प्रयास करने होंगे यानी स्वस्थ जीवन के लिए न सिर्फ अच्छी नींद जरूरी है बल्कि आपको और भी कुछ खास लंबे जीवन के उपाय अपनाने होंगे। आइए जानें लंबी उम्र के 3 उपायों के बारे में।
लंबी उम्र पाने के लिए आपको तीन मुख्य उपायों को अपनाना चाहिए। संतुलित खानपान, एक्सरसाइज और तनावमुक्‍त जीवन। ये तीन ऐसे फंडे है जिन्हें आप अपनाएंगे तो जीवनभर सेहतमंद रहने के साथ ही आप लंबी आयु भी पाएंगे।
एक्सरसाइज

शरीरिक फिटनेस के लिए एक्सरसाइज बहुत जरूरी है। आप योगा, प्रणायाम इत्यादि को भी अपने जीवन में शामिल करना चाहिए। लंबी उम्र का सबसे महत्वपूर्ण फॉमूला है एक्सरसाइज। व्यक्ति को फिट रहने और लंबी आयु के लिए जरूरत है शारीरिक सक्रियता की। ऐसे में आपके लिए व्यायाम से बेहतर कोई और विकल्प हो ही नहीं सकता। आपको प्रतिदिन सुबह उठकर कम से कम 30 मिनट टहलना चाहिए। इस दौरान आप बीच-बीच में दौड़ भी लगा सकते हैं और वॉर्मअप करते हुए एरोबिक्स क्रियाएं अपना सकते हैं। कहते हैं ना जिसने एक्सरसाइज करना अपने जीवन की आदत बना लिया हो उससे बीमारियां भी डरने लगती हैं।


तनाव मुक्त


तनाव ऐसी बीमारी है जो सब बीमारियों का मूल है। तनावयुक्त व्यक्ति न तो अपने काम पर ठीक से फोकस कर पाता है, न ही वह जीवन में सफल हो पाता है। यह भी सच है कि जो व्यक्ति अवसाद में ही घिरे रहते हैं वे जल्दी ही काल का ग्रास बन जाते हैं। तनाव मुक्त रहना आपके लिए बहुत जरूरी है। तनावमुक्त व्यक्ति को न तो बीमारियां छू पाती है बल्कि यह उसकी लंबी उम्र का भी राज होता है। तनावमुक्त रहने के लिए मेडीटेशन किया जा सकता है साथ ही खुशनुमा माहौल में रहना भी जरूरी है। यदि आप अवसाद में घिरे रहते हैं तो आपको अपने आचरण में बदलाव लाना होगा।
संतुलित खान-पान

उम्र को लंबा करने के लिए की सबसे जरूरी चीज है वह है आपका खान-पान। आपका खानपान आपको स्वस्थ रखने में बहुत मदद करता है। यदि आपको भोजन संतुलित होगा तो निश्चित रूप से आप भी सेहतमंद रहेंगे। खान-पान आपका ऐसा होना चाहिए जिससे आपका वजन न बढ़े। इसके अलावा भी आपको बहुत मसालेदार, चिकनाई से भरपूर खाना नहीं खाना चाहिए। सिर्फ यही नहीं आपको हल्का खानपान करना चाहिए और भोजन में सलाद को भी भरपूर मात्रा में शामिल करना चाहिए। इसके अतिरिक्त आप अपने खाने में फलों को शामिल करें, ऐसे फल जो कि विटामिन, कैलिशयम और प्रोटीन से भरपूर हो। आप चाहे तो अपने एक समय के खाने में फलाहार ले सकते हैं। इसके अलावा आपको प्रतिदिन कम से कम 3 से 4 लीटर पानी पीना चाहिए। इससे आपके शरीर के भीतर जमा टॉक्सिंस लगातार निकलते रहेंगे। पानी के अलावा आप फलों का रस, सब्जियों का रस, नींबू पानी, शहद पानी इत्यादि भी ले सकते हैं। ये सभी फंडे आपकी उम्र बढ़ाने में लाभदायक है। यानी खानपान सेहतमंद तो आप सेहतमंद।उम्र बढ़ने के साथ ही स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ती जाती हैं, ऐसे में खुद को फिट रखना और हेल्थ से जुड़ी कुछ बातों का ध्यान रखना काफी जरूरी है। अगर आपको भी खुद को हेल्दी बनाए रखते हुए लंबी उम्र पाना है तो इन टिप्स को जरूर अपनाएं।
डायबीटीज उन बीमारियों में से एक है जो उम्र को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को हेल्थ से जुड़ी कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में जरूरी है कि यह बीमारी शुरुआती स्टेज में ही पता चल जाए, इसके लिए समय-समय पर मेडिकल टेस्ट जरूर करवाएं। जिन महिलाओं की कमर 31.5 इंच से ज्यादा और पुरुषों में 37 इंच से अधिक होती है उन्हें हाइ ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी और डायबीटीज होने का ज्यादा खतरा होता है।
आजकल दिल की बीमारी सिर्फ बड़ी उम्र में ही नहीं बल्कि कम उम्र के युवाओं को भी अपना शिकार बना रही है। लाइफस्टाइल से जुड़े कुछ बदलाव लाकर हार्ट अटैक के खतरे को कम किया जा सकता है।
स्मोकिंग की आदत सिर्फ आपके लंग्स ही नहीं बल्कि दिल को भी बहुत नुकसान पहुंचाती है, ऐसे में इससे दूरी बनाए रखना ही बेहतर है। अपना बीएमआई टेस्ट करवाएं और उसके मुताबिक वेट को बनाए रखने की कोशिश करें। जिन लोगों को हाइ ब्लड प्रेशर की परेशानी है वह अपनी डायट का विशेष ध्यान रखें। खासतौर पर ज्यादा नमक या तेल-मसाले की चीजें खाने से बचें।
डिमेंशिया याद्दाश्त से जुड़ी बड़ी बीमारी है। इसमें व्यक्ति लोगों को पहचान तक नहीं पाता है। बढ़ती उम्र के साथ आपको यह परेशानी न हो इसके लिए कुछ मेमरी एक्सरसाइज को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। उदाहरण के तौर पर 100 से 1 तक उल्टी गिनती करना, पजल सॉल्व करना, चेस खेलना, छोटी-छोटी कविताओं को याद करना आदि।
किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि 

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचा


15.6.19

वर्षा ऋतु में क्या खाएं,क्या न खाएं ?



अमूमन हम इस ओर ध्यान नहीं देते कि बारिश के मौसम में हमें क्या खाना चाहिए और क्या नहीं। और इसका नतीजा हमें डॉक्टर और दवाईयों के भारी बिल चुकाकर भुगतना पड़ता है।
तो आइए जानते हैं कि मॉनसून में कौन सी चीजों का परहेज करने से आप स्वस्थ रहकर बारिश के मौसम को एंजॉय कर सकते हैं।
पकौड़े और दूसरी तली हुई चीजें
बारिश में चाय के साथ अगर पकौड़े मिल जाएं तो कहना ही क्या। लेकिन ऐसे समय में सड़क किनारे बिकने वाले पकौड़े भूलकर भी न खाएं। इन पकौड़ों को तलने के लिये जो तेल इस्तेमाल किया जाता है, वो अच्छा नहीं होता। मॉनसून में आपकी पचान क्षमता कम हो जाती है। इसलिये पकौड़ों के अलावा बाहर के दूसरे तेल युक्त चीजों जैसे कचौड़ी, समोसे, चाट-टिक्की, छोले-भटूरे आदि बिलकुल न खाएं। अगर बहुत मन है तो आप घर पर ही इन चीजों को बना लें।
गोल-गप्पे
वैसे तो किसी भी मौसम में सड़के के किनारे चाट और गोल-गप्पे का  ठेला देखकर मुंह में पानी आ जाता है। लेकिन अगर आप बारिश के मौसम में इसे खाने से बचें तो बेहतर है। वजह ये है कि बारिश के मौसम में गोल-गप्पों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पानी के दूषित होने के ज्यादा खतरे रहते हैं, जिससे आप कई बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं।
मछली और दूसरे सी-फूड
बारिश के मौसम में मछली, प्रॉन्स और दूसरे सी-फूड्स खाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह उनका ब्रीडिंग (प्रजनन) का समय होता है। तो साल के मौसम में सी-फूड से पूरी तरह मुंह मोड़ लें। इनकी बजाय आप चिकन या मटन खा सकते हैं। इसके बावजूद भी अगर आप सी-फूड खाना चाहते हैं, तो बिल्कुल ताजा ही खाएं, जिसे घर में ज्यादा देखभाल के साथ अच्छे से पकाया गया हो।
हरी पत्तेदार सब्जियां
वैसे तो हरी पत्तेदार सब्जियां हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होती हैं, लेकिन मॉनसून के दौरान इन्हें न खाया जाना ही बेहतर है। वजह ये है कि बारिश के दिनों में इनमें गंदगी और नमी आ जाती है, जिससे इनमें कीड़े और रोग पैदा करने वाले कीटाणु पैदा हो जाते हैं। पालक, पत्ता गोभी, फूल गोभी जैसी सब्जियों को बारिशों में बिल्कुल न खाएं। इनकी जगह दूसरी सब्जियों को खाने की लिस्ट में शामिल करें। साथ ही हर सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही पकाएं।
कच्चा सलाद और जूस
बरसात के मौसम में कच्चा सलाद खाने से परहेज करें। कच्चे सलाद में कई तरह के कीड़े और बैक्टीरिया होने का खतरा बना रहता है। इसलिए सलाद को स्टीम्ड करके खाएं। इससे सलाद के कीटाणु भी नष्ट हो जाएंगे और ये ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक भी रहेगा। इसके अलावा बाजार में खुले में बिकने वाले जूस से भी इन्‍हीं वजहों से परहेज करें।
डेयरी प्रोडक्ट्स
बारिश के मौसम में दूध से बने प्रोडक्ट्स भी कम से कम खाना चाहिए। मॉनसून में इनमें बैक्‍टीरिया पनपने की संभावना ज्‍यादा रहती है। कच्चा दूध भी इस मौसम में पीने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे आपके पाचनतंत्र पर असर पड़ सकता है।ऋतुएँ प्रकृति का अमूल्य उपहार होती हैं। वर्षा की पहली ही फुहार मन को आनंदित कर देती है। लेकिन इस ऋतु में आहार-विहार पर सर्वाधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। तभी यह निरापद हो सकती है अन्यथा बीमार पड़ते देर नहीं लगती।
वर्षा ऋतु में उन खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जो पाचक रस उत्पन्न करने वाले तथा शीघ्र पचने वाले हों। जिन खाद्य पदार्थों में जलीय अंश कम हो, उन्हें प्राथमिकता देनी चाहिए। बारिश के मौसम में कुछ विशेष किस्म की सब्जियाँ स्वास्थ्य के लिए लाभदायक रहती हैं। इनमें तुरई, लौकी, टिंडी, भिंडी, बैंगन, मूली, कद्दू, सहजन परवल आदि प्रमुख हैं। इसके अलावा अदरक और पुदीना भी हितकर रहता है।
इस ऋतु में बिना चोकर निकले आटे की रोटियों का सेवन करना चाहिए। दालों में उड़द की दाल ठीक रहती है। दलिया-खिचड़ी का सेवन भी किया जा सकता है। वर्षा ऋतु में जब तक आम आते हों, उनका सेवन करना चाहिए। इसके अलावा नींबू की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए। जामुन का सेवन भी लाभदायक है। इस मौसम में भुने चने, भुने हुए भुट्टे का सेवन लाभदायक रहता है।
बारिश के मौसम में चाट-पकौड़ी से परहेज करना चाहिए। विशेषकर ठेले-खोमचे वालों से तो कदापि न खरीदें। कचौड़ी, समोसा, आलू बड़ा, पकौड़े आदि हजम नहीं होते। इसी प्रकार मिठाइयों का सेवन भी कम करना चाहिए। वर्षा ऋतु में अधिकांश बीमारियाँ दूषित जल के इस्तेमाल से होती हैं। इसलिए पेयजल का शुद्ध एवं कीटाणुरहित होता नितान्त आवश्यक है। नदी या तालाब का पानी बिना फिल्टर किए नहीं पीना चाहिए। बेहतर होगा कि पानी को उबालकर और छानकर सेवन करें।
बारिश के दिनों में दिन में नहीं सोना चाहिए और न ही रात्रि-जागरण करना चाहिए। रात में भरपूर नींद लें। इन दिनों में नदी, नाले और तालाब में तैरना नहीं चाहिए। एक तो उनका जल दूषित होता है, दूसरे नदी-नालों का बहाव भी इन दिनों तेज हो जाता है जिससे कोई अप्रिय हादसा घटित हो सकता है।
 

इस ऋतु में सदैव सूखे वस्त्र धारण करें। गीले कपड़ों से सर्दी-जुकाम और चर्म रोग होने की आशंका बढ़ जाती है। इसी प्रकार ओढ़ने और बिछाने के बिस्तर आदि भी सूखे होने चाहिए। जूते-मौजे भी सूखे होने चाहिए। बारिश में बासी भोजन पूर्णतः निषिद्ध है। सदैव शुद्ध ताजा, व शाकाहारी भोजन ही करें। मांसाहार का सेवन इस ऋतु में ठीक नहीं है। भोजन गर्म होना चाहिए।
इस मौसम में मक्खी, मच्छर और कीड़े-मकोड़ों का प्रकोप बढ़ जाता है जो अनेक बीमारियों का कारण बनते हैं। मच्छरों से मलेरिया, डेंगू, पीतज्वर, कालाजार, आदि रोग होने की आशंका रहती है इसलिए इनसे बचाव करना चाहिए। बेहतर होगा कि इनकी उत्पत्ति रोकें। इसके लिए घर और आसपास के गड्ढों में पानी जमा न होने दें। कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें। पानी भरे गड्ढों में क्रूड ऑयल या मिट्टी का तेल छिड़क दें। इसके अलावा रात को सोते समय मच्छरदानी लगाएँ या अन्य किसी साधन, उपकरण का इस्तेमाल करें जिनसे मच्छरों से बचाव होता हो।
समस्त खाद्य सामग्री और पेय पदार्थों को ढककर रखें याद रखें कि पर्याप्त सफाई नहीं रखी गई तो हैजा, पीलिया, डायरिया आदि रोग हो सकते हैं।
बारिश में कोई भी फल या सब्जी बिना धोए इस्तेमाल नहीं करें। इसी प्रकार कटी-फटी और खुली फल-सब्जियाँ न खदीदें। बारिश का मौसम आरम्भ होने से पूर्व ही अपने घर की छत, नालियों और आस-पास के गड्ढों को ठीक करा लें।

14.6.19

चुकंदर एक फायदे अनेक



अपने गहरे लाल रंग के लिए लोकप्रिय चुकंदर स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ानी हो या सौंदर्यता बरकरार रखनी हो, चुकंदर हर तरीके से फायदा पहुंचाता है। यह जीनस बीटा वल्गेरिस की किस्मों में से एक है और पौधे का जड़ वाला हिस्सा होता है। इसका सेवन अक्सर सलाद और जूस के रूप में किया जाता है।
भोजन के साथ सलाद के तौर पर सेवन करने के अलावा चुकंदर का प्रयोग औषधि और फूड कलर के रूप में भी किया जाता है। इसका रंग इतना गहरा होता है कि सेवन करने के बाद जीभ भी लाल रंग की नजर आती है। विभिन्न भाषाओं में इसके अलग-अलग नाम हैं, जैसे अंग्रेजी में बीटरूट, स्पेनिश में ला रेमोलाचा (la remolacha) और चीनी भाषा में हांग कै टू (Hong cai tou)। इस लेख में हम चुकंदर के विभिन्न शारीरिक फायदों और इसे इस्तेमाल करने के तरीकों को बारे में विस्तार से बताएंगे।
*डायबिटीज एक वैश्विक बीमारी है, जो शरीर में इंसुलिन की कमी के कारण होती है, और सही समय पर रोकथाम के अभाव में इसके परिणाम घातक भी हो सकते हैं। इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के मुताबिक 2012 तक दुनिया भर में मधुमेह से प्रभावित लोगों की संख्या 382 मिलियन थी और ऐसा माना जा रहा है, कि 2035 तक यह आंकड़ा 592 मिलियन तक पहुंच जाएगा । ऐसे में आपका सावधान रहना बेहद जरूरी है।चकुंदर खाने के फायदों में मधुमेह पर नियंत्रण भी शामिल है। डायबिटीज के प्राकृतिक इलाज के रूप में आप चुकंदर का सेवन कर सकते हैं। यह एक गुणकारी खाद्य पदार्थ है। रोजाना इसका सेवन करने से रक्त शर्करा संतुलित हो जाती है। डायबिटीज के मरीजों के लिए यह काफी फायदेमंद हो सकता है। चुकंदर, फाइटोकेमिकल्स और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले बायोएक्टिव यौगिक जैसे पॉलीफेनोल्स, फ्लेवोनोइड्स और एंथोकायनिन का एक बड़ा स्रोत है। ये सभी तत्व मधुमेह के स्तर को कम करने का काम करते हैं।
*हृदय स्वास्थ्य
हृदय को ठीक रखने के लिए भी चुकंदर के कई फायदे हैं। शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है हृदय, जिसका स्वस्थ रहना हर हाल में जरूरी है। इससे जुड़ी कोई भी तकलीफ मौत का कारण सकती है। चुकंदर का रोजाना सेवन हृदय को स्वस्थ रखने का काम करता है। इसमें मौजूद नाइट्रेट तत्व रक्तचाप को सामान्य कर हृदय रोगों और हृदयाघात से बचाता है । एक अध्ययन के अनुसार, बीटरूट मायोकार्डियल इन्फार्कशन से बचाता है । चुकंदर में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस और हृदय रोग से जुड़े इंफ्लेमेशन को कम करने का काम करता है । इसमें मौजूद जरूरी विटामिन्स और मिनरल्स हृदय को स्वस्थ रखते हैं। दिल के रोगों से बचने के लिए आप चुकंदर का सेवन रोजाना कर सकते हैं।
*उच्च रक्तचाप एक गंभीर शारीरिक समस्या है, जिसमें धमनियों में रक्त का दबाव सामान्य से अधिक बढ़ जाता है । स्ट्रोक, हृदय रोग, आंखों की समस्या, किडनी खराब होना आदि हाई ब्लड प्रेशर के घातक परिणाम हो सकते हैं। सही स्वास्थ्य के लिए धमनियों में रक्त का प्रवाह सामान्य रहना बहुत जरूरी है। उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के कई आधुनिक उपाय मौजूद हैं, लेकिन अगर आप प्राकृतिक उपचार की खोज में हैं, तो आप चुकंदर का सेवन कर सकते हैं। बीट रूट में नाइट्रेट नामक तत्व पाया जाता है , जो हाई बीपी को कम करने का काम करता है। उच्च रक्तचाप के देसी उपचार के रूप में आप रोजाना चुकंदर का जूस या इसे सलाद के रूप में ले सकते हैं।
*कैंसर मानव शरीर में कहीं भी हो सकता है, जो खरबों कोशिकाओं से बना होता है। आमतौर पर कोशिकाएं विकसित होती हैं और नई कोशिकाओं को बनाने के लिए विभाजित होती हैं, क्योंकि शरीर को उनकी आवश्यकता होती है। वहीं, जब कोशिकाएं पुरानी हो जाती हैं या क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, तो उनकी जगह नई कोशिकाएं विकसित होती हैं, लेकिन जब कैंसर होता है, तो यह प्रक्रिया टूट जाती है ।
कैंसर से बचने के लिए आप चुकंदर का सेवन कर सकते हैं। चुकंदर एक गुणकारी खाद्य पदार्थ है, जो आपको कर्करोग जैसी घातक बीमारी से बचा सकता है। एक अध्ययन में पाया गया है कि बीटरूट फेफड़ाें और स्किन कैंसर को शरीर में विकसित होने से रोकता है । एक अन्य अध्ययन में इस बात की भी पुष्टि की गई है कि गाजर और चुकंदर का जूस एक साथ मिलाकर पीने से शरीर में ब्लड कैंसर की आशंका को खत्म किया जा सकता है
*एनीमिया
हीमोग्लोबिन एक आयरन युक्त प्रोटीन है, जो लाल रक्त कोशिकाओं को फेफड़ों से ऑक्सीजन को शरीर के बाकी हिस्सों तक ले जाने में मदद करता है। अगर आपको एनीमिया है, तो शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त रक्त मिलने में कमी होने लगती है। परिणामस्वरूप आपको थकान या कमजोरी महसूस हो सकती है। आपको सांस की तकलीफ, चक्कर आना या सिरदर्द हो सकता है। चुकंदर आयरन से भरपूर होता हैं, जो शरीर में आयरन की आपूर्ति करने का काम करता है। इसके सेवन से एनीमिया में धीरे-धीरे सुधार होने लगता है। भविष्य में एनीमिया के डर से बचने के लिए आप रोजाना थोड़ी मात्रा में चुकंदर का सेवन कर सकते हैं।
*पाचन क्रिया
शरीर को पोषित रखने के लिए पाचन क्रिया का मजबूत रहना बहुत जरूरी है। जब पोषक तत्व आंत द्वारा अवशोषित हो जाते हैं, तो वो रक्त प्रवाह के जरिए लिवर तक पहुंचते हैं। फिर लिवर का काम होता है सभी पोषक तत्वों और विटामिन्स की प्रोसेसिंग करना, जिससे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह होता है ।
पाचन क्रिया की मजबूती के लिए आप चुकंदर का सेवन कर सकते हैं। चुंकदर में ग्लूटामाइन नाम का एमिनो एसिड होता है, जो भोजन को पचने में मदद करने के साथ-साथ इम्यून सिस्टम को ठीक रखता है
*बढ़ाता है ऊर्जा
चुकंदर शरीर को कई रूप में फायदा पहुंचाता है। शरीर को ऊर्जावान बनाने के लिए आप इसका सेवन कर सकते हैं। चुकंदर प्राकृतिक रूप से आयरन का एक बड़ा स्रोत है, जो शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं और ऊर्जा के विकास में मदद करता है। यह आतों में कैंडिडा (एक प्रकार का संक्रमण) को पनपने से रोकता है, जो ऊर्जा के स्तर को कम करने का काम करता है। शरीर में ऊर्जा के लिए लिवर का सही काम करना जरूरी है। चुकंदर में फ्लेवोनोइड, सल्फर और बीटा कैरोटीन भी होते हैं, जो लिवर की कार्य प्रणाली को सुचारू रूप से चलाने में मदद करते हैं 
* लिवर को रखता है स्वस्थ
बीट के फायदों में लिवर स्वास्थ्य भी शामिल है। शरीर को पोषित करने के लिए लिवर का स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है। लिवर से जुड़ी समस्याओं से बचने के लिए आप चुकंदर का रोजाना सेवन कर सकते हैं। बीटरूट हाई फैट वाले भोजन से होने वाली लिवर की क्षति को कम करने में मदद करता है। इसमें फ्लेवोनॉयड्स भी पाया जाता है, जो मेटाबॉलिज्म को बनाए रखने में सहायता करता है 

*मजबूत दांत और हड्डियां
हड्डियां हमारे शरीर को मजबूती प्रदान करती हैं और हमारे आकार को बनाने में मदद करती हैं। शरीर के पूरे वजन को संभालने के लिए हड्डियों का मजबूत रहना बहुत जरूरी है। इसके अलावा, हड्डियां शरीर के अंगों की रक्षा भी करती हैं, जैसे खोपड़ी मस्तिष्क की रक्षा करती है और चेहरे का आकार बनाती है। पसलियां एक पिंजरे का निर्माण करती हैं, जिससे हृदय और फेफड़े सुरक्षित रहते हैं। वहीं, पेलविस मूत्राशय, आंतों के हिस्से और महिलाओं के प्रजनन अंगों की रक्षा करने का काम करता है।
हड्डियों की मजबूती के लिए शरीर में कैल्शियम का होना बहुत जरूरी है और चुकंदर कैल्शियम का अच्छा स्रोत है। रोजाना इसका सेवन न सिर्फ आपकी हड्डियों, बल्कि आपके दांतों को भी मजबूत बनाने में मदद करेगा।
*त्वचा के लिए
चुकंदर का रस एंटीऑक्सीडेंट का बेहतरीन स्रोत है, जो त्वचा के लिए एक प्रभावशाली एंटी-एजिंग एजेंट के रूप में काम करता है। इसमें विटामिन-सी भी पाया जाता है, जो त्वचा को झुर्रियों और सूखेपन से बचाने में मदद करता है (25)। चुकंदर आपकी त्वचा को नर्म और कोमल बना सकता है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि यह मृत कोशिकाओं की शीर्ष परत को हटा देता है। चुकंदर का रस पीने से आपकी त्वचा हाइड्रेट रहती है।
15. बालों के लिए
चुकंदर में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन-ए, विटामिन-सी, कैल्शियम, आयरन और पोटैशियम की मात्रा अधिक होती है। यह शरीर को कई मायनों में लाभ पहुंचाता है। बालों के स्वास्थ्य के लिए भी आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। यह बाल झड़ने और स्कैल्प में खुजली से निजात दिलाने का काम करता है। चुकंदर में कैरोटीनॉयड नामक तत्व पाया जाता है, जो बालों की गुणवत्ता, वृद्धि, मोटाई और चमक में सुधार करता है ।
* कोलेस्ट्रॉल
कोलेस्ट्रॉल शरीर के मेटाबॉलिज्म के लिए आवश्यक है। साथ ही यह बाइल एसिड, स्टेरॉयड हार्मोन और विटामिन-डी के संकलन के लिए जिम्मेदार होता है । वहीं, अगर शरीर में इसका स्तर अधिक हो जाए, तो कई प्रकार से नुकसान हो सकता है। अधिक कोलेस्ट्रॉल हृदय रोग व स्ट्रोक का कारण बन सकता है, जिससे मौत भी हो सकती है।
बीट के फायदों में कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण भी शामिल है। कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने और इसके घातक परिणामों से बचने के लिए आप चुकंदर का सेवन कर सकते हैं। चुकंदर में कैलोरी की मात्रा कम होती है और इसमें शून्य कोलेस्ट्रॉल होता है ।
गर्भावस्था
गर्भावस्था के दौरान आप चुकंदर का सेवन कर सकते हैं। इसमें फोलेट के साथ-साथ मैंगनीज, पोटैशियम, विटामिन-सी, फास्फोरस, कॉपर और आयरन भी पाया जाता है। ये सभी तत्व गर्भावस्था के दौरान मां और बच्चे को स्वस्थ रखने का काम करते हैं। एक अध्ययन में पाया गया है कि रोजाना 500ml चुकंदर का जूस पीने से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। चुकंदर फोलिक एसिड का भी एक बड़ा स्रोत है, जो बच्चे में न्यूरल ट्यूब दोष को रोकने में मदद करता है 
 वजन घटाने में मददगार
चुकंदर स्वस्थ खनिज और विटामिन से भरपूर होता हैं। चुकंदर के रस में फाइबर की मात्रा अधिक होती है और अधिक फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ वजन कम करने में मदद करते हैं (22)। हाई फाइबर फूड्स में कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है, इसलिए ये पेट भरने का काम करने के साथ-साथ शरीर को मोटापे से भी बचाते हैं।
* मोतियाबिंद

मोतियाबिंद आंख से जुड़ी बीमारी है, जो 60 साल की उम्र के बाद ज्यादा देखने को मिलती है। इस बीमारी के कारण देखने की क्षमता कमजोर हो जाती हैं। अगर आप बुढ़ापे में ऐसी बीमारी से बचना चाहते हैं, तो विटामिन-सी से युक्त चुकंदर का सेवन रोजाना जूस या सलाद के रूप में कर सकते हैं। विटामिन-सी आंखों को स्वस्थ रखने का काम करता है।
* यौन स्वास्थ्य
चुकंदर खाने के फायदों में यौन स्वास्थ्य भी आता है। बीट में अच्छी मात्रा में बोरॉन मौजूद होता है । यह खनिज सीधे सेक्स हार्मोन के उत्पादन से संबंधित है।
*सफेद चुकंदर को पानी में उबाल कर छान लें। यह पानी फोड़े, जलन और मुहांसों के लिए काफी उपयोगी होता है। खसरा और बुखार में भी त्वचा को साफ करने में इसका उपयोग किया जा सकता है.
कब्ज और बवासीर-
चुकंदर का नियमित सेवन करेंगे, तो कब्ज की शिकायत नहीं होगी। बवासीर के रोगियों के लिए भी यह काफी फायदेमंद होता है। रात में सोने से पहले एक गिलास या आधा गिलास जूस दवा का काम करता है.
चुकंदर खाने के फायदों को जानने के बाद अब पता करते हैं कि इसमें कौन-कौन से पौष्टिक तत्व होते हैं।
चुकंदर के उपयोग – 
चुकंदर का सेवन आप निम्नलिखित रूपों में कर सकते हैं –
कच्चा – बीट्स को आप कच्चा खा सकते हैं। इसे काटकर और फिर उस पर हल्का नमक और नींबू छिड़क कर खाएं।
पनीर के साथ भुना हुआ – बीट को तब तक भूनें, जब तक कि वह नरम और रसदार न हो जाए। भूने हुए चुकंदर के साथ पनीर मिलाकर खाएं।
जूस- आप चुकंदर का जूस निकाल कर रोजाना पी सकते हैं।
सलाद के रूप में – भोजन के साथ सलाद के रूप में भी आप चुकंदर का सेवन कर सकते हैं। आप इसके साथ प्याज भी मिला सकते हैं।
सब्जी – बीट को आप अन्य सब्जी की तरह बनाकर भी खा सकते हैं।
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4.6.19

तुलसी के बीज के फायदे


                                                                       

तुलसी एक औषधीय पौधा है, जिसका हर हिस्सा कई दवाओं को बनाने के काम आता है। अधिकतर लोग इसके पत्तों के फायदों के बारे में ही जानते हैं, मगर आपको बता दें कि तुलसी के बीज भी कई शारीरिक समस्याओं का निदान कर सकते हैं। इन्हें अधिकतर मिठाई या पेय पदार्थों में इस्तेमाल किया जाता है।
तुलसी एक ऐसी औषधि है जो हमारे शरीर और वातावरण दोनों के लिए फायदेमंद होती है। तुलसी के बीज हमारे खाने के स्वाद को बढ़ाते हैं। यह ऐसा घटक है जो सदियों से लोगों के द्वारा प्रयोग किया जाता रहा है।तुलसी के बीज को ‘सुपर फूड’ के रूप में जाना जाता है क्योंकि यह आपके शरीर को आवश्यक फाइबर को पूरा करने में मदद करता है। इसके अलावा, यह आपका वजन कम करने, त्वचा के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने, पाचन में सुधार, बालों को मजबूत करने और रक्त परिसंचरण को सही रखने में भी मदद करता है|
आयुर्वेद और चाइनीज औषधीय विज्ञान में तुलसी के बीजों को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। इनमें काफी मात्रा में पोषण, प्रोटीन, फाइबर और आयरन होता है। इन्हें सब्जा भी कहा जाता है, जो कि आपको कई स्वास्थ्य लाभ पहुंचाते हैं। 
प्राचीन काल में सब्जा (मीठी तुलसी के बीज ) को भी स्वास्थ्य लाभ के लिए जाना जाता है। सब्जा का प्रमुख लाभ यह है कि यह शरीर को ठंडा रखने के साथ- साथ कब्ज और हर्टबर्न जैसी बीमारियों के इलाज में मदद करता है। इस प्रकार यह गर्मियों के लिए एक विशेष प्रकार का घटक होता है। यह कब्ज और सूजन से राहत देता है। इसके अलावा इसको नारियल के तेल में मिलाकर त्वचा पर लगाने से त्वचा के संक्रमण की बीमारी ठीक हो जाती है।
सब्जा के बीजों को आम भाषा में ‘फालूदा बीज’ या ‘तुक्मरिया बीजों’ के नाम से जाना जाता है। यह देखने में तो बहुत छोटे होते हैं लेकिन शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। 
फाइबर से भरपूर
सब्जा के बीज को एक चम्मच से थोड़ा कम यानि 4 ग्राम लेने से कभी भी शरीर में फाइबर की कमी नहीं होती है।
कब्ज को दूर हटाता है और शरीर को ठंडा रखता है
यह पेट में कब्ज की समस्या को खत्म करने के साथ ही शरीर को ठंडा रखता है। इसके अलावा यह मधुमेह के टाइप ए और टाइप बी को सही करने में एक बड़ी भूमिका निभाता है। क्योंकि खाना खाने के कुछ मिनट पहले यह शरीर में फाइबर की मात्रा वद्धि कर देता है जिससे खून में शर्करा के स्तर में कमी नहीं होने देता है।
सूजन में कमी
तुलसी के बीज में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो कि शरीर के किसी हिस्से में आई सूजन और एडिमा जैसी बीमारियों का उपचार कर सकते हैं। साथ ही इसका इस्तेमाल डायरिया में भी आपको राहत दिलाता है
एस्ट्रोजन का स्तर कम करने में
यह शरीर में एस्ट्रोजन के स्तर को कम करने में सक्षम हैं और इसलिए यह एस्ट्रोजन प्रमुख कैंसर के मामले में अच्छी तरह से काम करता है।
हृदय को स्वस्थ बनाना
तुलसी के बीज शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित करते हैं, जिससे यह हृदयघात के प्रमुख कारण उच्च रक्तचाप और स्ट्रेस को कम करते हैं। ये बीज शरीर में लिपिड स्तर को बढ़ाते हैं और हृदय को सुरक्षा प्रदान करते हैं।
खांसी-जुकाम में राहत
इन बीजों में एंटी-स्पैसमोडिक गुण होते हैं, जो खांसी-जुकाम जैसी बीमारियों में राहत पहुंचाते हैं। साथ ही इसकी मदद से बुखार का इलाज भी किया जा सकता है।
वजन कम करना
तुलसी के बीज में कैलोरी की मात्रा कम होती है और यह आपकी भूख भी मिटाता है। इसलिए इन्हें वजन कम करने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह आपके पेट को ज्यादा देर तक भरा रखते हैं और आपकी अस्वस्थ खानपान करने की संभावनाओं को कम करते हैं।
त्वचा संबधी समस्याओं को दूर करना
यह बीज हमारी त्वचा को ठीक करने में बेहद प्रभावी होते हैं। इस बीज को आप नारियल तेल में भिगो लें और फिर अपनी त्वचा पर धीरे-धीरे मसाज करें। ऐसा करने से आपकी त्वचा के हानिकारक तत्व बाहर निकलेगें और स्किन में निखार आयेगा।
पाचन क्षमता बढ़ाना
ये बीज पेट में जाने के बाद जिलेटनयुक्त परत बनाते हैं, जो कि पाचन क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करती है। साथ ही इसमें मौजूद फाइबर तत्व पाचन को बढ़ाता है।

1.6.19

दूध गर्म पीना चाहिए या ठंडा


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आपको दूध पीना पसंद हो चाहे न हो लेकिन इस बात को हर कोई मानता है कि दूध सबसे हेल्दी और पोषक तत्वों से भरपूर फूड आइटम है। कैल्शियम, प्रोटीन, आयोडीन, पोटैशियम, फॉस्फॉरस और विटमिन बी 12 जैसे पोषक तत्वों से भरपूर 1 गिलास दूध आपके दिन भर के पोषक जरूरतों को पूरा कर सकता है। लिहाजा फिट और हेल्दी रहने के लिए हर व्यक्ति को रोजाना कम से कम 1 गिलास दूध जरूर पीना चाहिए।
दूध गर्म पीना चाहिए या ठंडा यह सवाल हर किसी के द‍िमाग में यहीं सवाल आता है। ज्यादातर लोगों को देखा होगा कि वो यह सोचते रहते हैं कि किसका दूध सबसे अच्छा होता है। अगर आप रोजाना दूध पीते हैं तो ये सब जानकारी रखनी चाहिए। दूध स्‍वास्‍थ्‍य के लिए लाभकारी माना जाता है। ये कैल्शियम, पोटेशियम और विटामिन डी का बहुत अच्छा स्रोत होता है। कुछ लोग गर्म दूध पीना पसंद करते हैं तो कुछ लोगों को ठंडा दूध अच्‍छा लगता है। आइए जानते है कि ठंडा या गर्म दूध हमें क्‍या पीना चाह‍िए?
लैक्‍टोज पाचने में दिक्‍कत गर्म दूध का सबसे बड़ा लाभ ये है कि ये आसानी से पच जाता है। अगर आपको लैक्‍टोज नहीं पचता तो आप ठंडा दूध पीने से बचें क्‍योंकि इसे पचाना आपके लिए मुश्किल होगा। आप ठंडे दूध का आनंद उसमें अनाज के पदार्थ मिलाकर ही ले सकते हैं। गर्म दूध में लैक्‍टोज कम हो जाता हैं और इससे दस्‍त और बदहजमी जैसी समस्या नहीं होती।
दूध गर्म पीने से आती है अच्‍छी नींद अगर आपको नींद न आने की बीमारी है तो आप बिस्‍तर पर जाने से पहले एक गिलास गर्म दूध पी सकते हैं। दूध में ट्रिप्‍टोफैन नाम का एमिनो एसिड होता है जो सेरोटोनिन और मेलाटोनिन नाम का केमिकल पैदा करते हैं जिससे आपको आराम मिलता है और अच्‍छी नींद आती है।
एसिडिटी खत्‍म करने के लिए पिएं ठंडा दूध ठंडा दूध पेट में एसिडिटी के कारण होने वाली जलन में राहत पहुंचाने के लिए बेहतर पदार्थ है। खाने के बाद आधा गिलास ठंडा दूध पीने से एसिड उत्‍पादन खत्‍म हो जाता है और एसिडिटी से राहत मिलती है।
पानी की कमी को रोकने के लिए पिएं ठंडा दूध ठंडा दूध पीने से आपके शरीर में पानी की कमी नहीं होगी। सुबह के समय ठंडा दूध पीने का सबसे बेहतर समय होता है। अगर आप फ्लू और कोल्‍ड से पीड़ित हैं, तो ठंडा दूध पीने से बचें।