26.1.20

किडनी स्टोन के अचूक घरेलू हर्बल उपचार



किडनी स्टोन या किडनी में पथरी होना एक आम समस्या है। गुर्दे की पथरी से बहुत से लोग पीड़ित होते हैं। किडनी की पथरी की समस्या किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकती है। यह महिला और पुरुष दोनों पर समान प्रभाव डालती है। किडनी की पथरी अगर छोटी हो तो यह अपने आप बाहर निकल आती है लेकिन मध्यम या बड़ी आकार की पथरी होने पर इलाज की जरुरत पड़ती है। पथरी के दर्द को कम करने के लिए कई घरेलू उपचार मौजूद है। इसके साथ ही किडनी की पथरी को कई घरेलू नुस्खे की मदद से भी तोड़ा भी जा सकता है। अगर गुर्दे की पथरी शुरूआती स्टेज में है तो पथरी के घरेलू उपायों से इसके लक्षणों को दूर किया जा सकता है। आइये जानते हैं किन घरेलू उपायों से अपने आप निकल जाएगी किडनी की पथरी।
गुर्दे की पथरी या किडनी स्टोन क्रिस्टलयुक्त खनिज और लवण होते हैं जो डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) के कारण बनते हैं। गुर्दे में पथरी तब बनती है जब मिनरल और साल्ट जैसे कैल्सियम ऑक्जलैट किडनी में क्रिस्टलीकृत होकर जमने लगते हैं और कठोर होकर जमा हो जाते हैं। हालांकि पथरी किडनी में ही बनती है लेकिन यह यूरिनरी ट्रैक्ट को भी प्रभावित करती है। किडनी स्टोन को कैल्कुली (calculi) या यूरोलिथियासिस भी कहते हैं।

पथरी होने के कारण
गुर्दे में पथरी या किडनी स्टोन आमतौर पर एक नहीं बल्कि कई कारणों से होती है। गुर्दे की पथरी तब होती है जब यूरिन में कैल्शियम, ऑक्जलेट और यूरिक एसिड जैसे पदार्थ जमा होकर अधिक मात्रा में क्रिस्टल का निर्माण करते हैं और यूरिन के फ्लुइड को पतला कर देते हैं। इस दौरान यूरिन में क्रिस्टल को एक दूसरे से जोड़ने से रोकने वाले पदार्थों की कमी हो जाती है जिससे किडनी में पथरी बन जाती है। इसके अलावा यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन, रिनल ट्यूबुलर एसिडोसिस, हाइपरथायरॉयडिज्म सहित कई बीमारियों के कारण किडनी की पथरी हो सकती है।
पथरी के लक्षण 
आमतौर पर किडनी स्टोन के लक्षण तब तक पता नहीं चल पाते हैं जब तक पथरी किडनी के चारों ओर घूमने नहीं लगती या किडनी और ब्लैडर के बीच स्थित मूत्रवाहिनी में नहीं आ जाती है। उसके बाद किडनी की पथरी के ये लक्षण सामने आते हैं:
पसलियों के नीचे और पीठ में तेज दर्द
पेशाब के दौरान दर्द
गुलाबी, लाल या भूरे रंग की यूरिन
पेशाब से तीक्ष्ण दुर्गंध आना
मितली और उल्टी होना
बार-बार पेशाब लगना
सामान्य से अधिक पेशाब होना
इंफेक्शन
ठंड लगना और बुखार
कम मात्रा में पेशाब होना
इसके साथ ही किडनी स्टोन के कारण शरीर के विभिन्न हिस्सों में हल्का और गंभीर दर्द भी होता रहता है।
गुर्दे की पथरी एक आम समस्या है जिसे घरेलू उपचार से भी काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। घर में ऐसी कई चीजें मौजूद होती हैं जिनमें भरपूर मात्रा में औषधीय गुण पाये जाते हैं और ये वस्तुएं किडनी की पथरी को बढ़ने से रोकने के साथ ही दर्द में भी राहत देती हैं।

पथरी का घरेलू इलाज पानी
किडनी की पथरी का सबसे आसान घरेलू उपचार है पानी। किडनी स्टोन होने पर रोजाना सामान्य रुप से 8 गिलास पानी पीने की बजाय 12 गिलास पानी पीने से पथरी का ग्रोथ रुक जाता है। वास्तव में गुर्दे की पथरी का एक बड़ा कारण डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) है। शरीर में पानी की कमी होने पर यह बीमारी उत्पन्न होती है।
पानी किसी भी बीमारी को दूर करने में कितना मददगार साबित हो सकता है, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं की केवल पानी पीने से ही पथरी को बाहर किया जा सकता है। इसलिए अधिक से अधिक पानी पीने के साथ ही यूरिन के रंग पर भी ध्यान देना चाहिए। आपके यूरिन का रंग लाइट और कम पीला होना चाहिए। यदि आपका यूरिन का रंग गहरा पीला है तो इसका मतलब यह है कि आपके शरीर में पानी की कमी हो गई है। अगर गुर्दे की पथरी का आकर छोटा है तो इसे अधिक मात्रा में पानी पीकर बाहर निकाला जा सकता है।
नींबू से पथरी का इलाज किया जा सकता है। नींबू से पथरी का इलाज भी बहुत आसान है और इस घरेलू उपाय को बहुत से लोग आजमाते हैं। नींबू में साइट्रेट नामक रसायन पाया जाता है जो गुर्दे में कैल्शियम स्टोन बनने से रोकता है। इसके साथ ही साइट्रेट किडनी की पथरी को छोटी-छोटी पथरी में ब्रेक करता है और उन्हें बढ़ने से रोकता है। किडनी स्टोन के घरेलू इलाज के रुप में सबसे पहले एक बार सुबह खाली पेट नींबू पानी और रात के खाने के कुछ घंटे पहले नींबू पानी का सेवन करना चाहिए। यह घरेलू उपाय करने से कई बार किडनी स्टोन को निकालने के लिए ऑपरेशन की जरुरत भी नहीं पड़ती है। अगर आप बिना सर्जरी के किडनी स्टोन को ठीक करना चाहते हैं (Remove Kidney Stones Without Surgery), तो आपको यह नुस्खा रोज करना होगा।
तुलसी का  रस 

पथरी तोड़ने की दवा के रुप में तुलसी के रस का इस्तेमाल भी किया जाता है। यह किडनी की पथरी निकालने का घरेलू नुस्खा माना जाता है। जिससे किडनी स्टोन से राहत पाने में मदद मिलती है। तुलसी में एसिटिक एसिड पाया जाता है जो गुर्दे की पथरी को तोड़ता है और दर्द कम करने में मदद करता है। इसके साथ ही तुलसी पोषक तत्वों से भरपूर है।
आमतौर पर तुलसी को पाचन और सूजन की समस्याओं को दूर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होने के कारण तुलसी का रस किडनी की पथरी के घरेलू उपचार में मदद करता है। किडनी की पथरी निकालने के लिए तुलसी की ताजी पत्तियों की चाय दिन में कई बार सेवन करें। इसके साथ ही तुलसी की पत्तियों का जूस पीने से भी गुर्दे की पथरी ठीक हो जाती है। हालांकि छह सप्ताह से ज्यादा तुलसी के रस का सेवन नहीं करना चाहिए। 
सेब का सिरका
किडनी की पथरी का देसी इलाज है सेब का सिरका। इसमें पर्याप्त मात्रा में एसिटिक एसिड पाया जाता है जो गुर्दे की पथरी को गलाने में मदद करता है। इसके साथ ही यह पथरी के कारण होने वाले दर्द को भी कम करता है। किडनी स्टोन को गलाने के लिए एक गिलास पानी में एक चम्मच एपल साइडर विनेगर मिलाकर दिन में कई बार सेवन करें। सेब के सिरके का इस्तेमाल सलाद में भी किया जा सकता है। हालांकि यदि आपको डायबिटीज है या आप इंसुलिन, डिगॉक्सिन या कोई डाइयूरेटिक दवा ले रहे हों तो आपको सेब के सिरके का सेवन नहीं करना चाहिए।
 अजवाइन का रस
किडनी की पथरी के लिए अजवाइन का रस बेहद फायदेमंद है। यह विषाक्त पदार्थों को दूर करके किडनी स्टोन बनने से रोकने में मदद करती है। अजवाइन में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो पेशाब की मात्रा को बढ़ाता है और किडनी स्टोन को पेशाब के माध्यम से बाहर निकालने में प्रभावी तरीके से कार्य करता है। अजवाइन के रस को पानी में मिलाएं और पूरे दिन में कई पानी सेवन करें। लेकिन यदि आपको किसी तरह की ब्लीडिंग होती हो या लो ब्लड प्रेशर से पीड़ित हों एवं दवाओं का सेवन कर रहे हों तो डॉक्टर से परामर्श लेकर ही अजवाइन के रस का सेवन करना चाहिए।


व्हीटग्रास जूस 
व्हीटग्रास जूस पथरी के घरेलू इलाज के काम आता है। व्हीटग्रास जूस में कई तरह के पोषक तत्व पाये जाते हैं जो यूरिन को बढ़ाते हैं और पेशाब के माध्यम से किडनी स्टोन को बाहर निकालने में मदद करते हैं। किडनी स्टोन को निकालने के लिए रोजाना दिन में कई बार व्हीटग्रास जूस का सेवन करना चाहिए। इससे गुर्दे की पथरी बढ़ती भी नहीं है और उससे होने वाले दर्द में भी आराम मिलता है।
 अनार का रस
किडनी स्टोन के असहनीय दर्द के इलाज के लिए अनार का रस उपयोगी होता है। किडनी से जुड़ी सभी समस्याओं के लिए अनार के रस का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है। यह सिस्टम से पथरी और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। अनार के रस में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो यूरिन के एसिडिक लेवल को कम करता है और गुर्दे की पथरी को बढ़ने से रोकता है। दिन में कई बार अनार का जूस पीने से किडनी स्टोन के असहनीय दर्द से राहत पाया जा सकता है।
ऑलिव ऑयल
एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल किडनी स्टोन का घरेलू इलाज है। यह ऑयल काभी गाढ़ा और पोषक तत्वों से समृद्ध होता है जो मूत्रमार्ग को चिकना करके किडनी स्टोन को बाहर निकालने में मदद करता है। एक गिलास पानी में वर्जिन ऑलिव ऑयल की कुछ बूंदे मिलाकर सुबह दोपहर और शाम को सेवन करने से किडनी स्टोन टूट जाता है और दर्द एवं बेचैनी भी कम हो जाती है।

किडनी स्टोन का होना आपकी सेहत पर बुरा असर डाल सकता हैं। इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि आप गुर्दे की पथरी के लक्षण को पहचान कर समय रहते ही इसके लिए इलाज तलाश लें। अक्सर लोग किडनी स्टोन के घरेलू उपाय आजमाते हैं, जो इस्तेमाल में आसान और किडनी स्टोन को घोलकर पेशाब के माध्यम से बाहर निकालने में मददगार होते हैं। यदि आप भी किडनी स्टोन की बीमारी से जूझ रहें है तो इस लेख में बताये गए किडनी स्टोन को निकालने के लिए घरेलू इलाज को आजमा सकते हैं। हालांकि यह थोड़ा असुविधाजनक हो सकता है, लेकिन अपने दम पर गुर्दे की पथरी को बाहर करना संभव है।
पथरी ठीक होने तक उपचार जारी रखना सुनिश्चित करें, और शराब न पियें।
आप इन उपायों को अपने सामान्य आहार में शामिल कर सकते हैं और पथरी की बीमारी ठीक होने के बाद भी इनका उपयोग जारी रख सकते हैं। यह फिर से पथरी बनने से रोकने में मदद कर सकते है।
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गुर्दे की सूजन ,पेशाब मे जलन ,मूत्रकष्ट मे यह औषधि रामबाण की तरह असरदार है| आपरेशन की जरूरत ही नहीं पड़ती| औषधि से पथरी न गले तो मनी बेक गारंटी युक्त है|




4.1.20

आई पिल (गर्भ निरोधक गोली) के फायदे व नुकसान



 आज कल आपातकालीन गर्भ निरोधक गोली जैसे आई पिल का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है, पर क्या आपको पता हैं इसके साइड इफेक्ट्स भी होते हैं। आसानी से मिलने वाली यह गोली असुरक्षित सेक्स के बाद अनचाहे गर्भ को रोकने का कारगर उपाय हो सकती है, लेकिन इसका नियमित इस्तेमाल किसी भी लड़की या महिला के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। जिंदगी को बिंदास अंदाज से जीने वाली लड़कियों के लिए अनचाही प्रेगनेंसी से बचने के लिए आइ-पिल मानो ईश्वर का वरदान है। क्योंकि उन्हें फिर इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता जिस पुरुष के साथ वह संबंध बना रही हैं, उसने कंडोम पहना है या नहीं। अगर आपके पास उस समय गोली न भी हो तो इसे लेने के लिए आपके पास पूरे 72 घंटे होते हैं।
आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली को आम बोल-चाल की भाषा में हम इसे इमरजेंसी कॉनट्रासेप्टिव पिल भी कहते हैं। आई पिल और अन्य इमरजेंसी गर्भनिरोधक गोलियां किसी भी दवाईयों की दुकान से आसानी से खरीदी जा सकती है।” आइये जानतें हैं आई पिल गोली लेने से पहले आपको दो बार क्यों सोचना चहिये? और यौन सबंध के बाद इमरजेंसी गर्भनिरोधक गोली लेना कितना सही है? हर वो बात जो आप और आपके पार्टनर को जाननी चाहिए।
आई पिल क्या है?
आई पिल कैप्सूल एक मौखिक गर्भनिरोधक गोली है।
इसमें लिवोनारजेस्ट्रल इसके मुख्य घटक के रूप में शामिल है।
असुरक्षित यौन संबंध के बाद अवांछित गर्भावस्था से बचने के लिए आम तौर पर महिलाओं द्वारा पिल का उपयोग किया जाता है।
यह गर्भावस्था को रोकने की एक समर्थन विधि है और नियमित उपयोग के लिए नहीं है।
आई पिल से जुड़े मुख्य तथ्य
आई-पिल एक आपातकालीन गर्भनिरोधक है; यह गर्भपात की गोली नहीं।
यह एक अनियोजित गर्भावस्था को रोकने में मदद करती है।
सेक्सुअल रिलेशन बनाने के 72 घंटे के भीतर आई-पिल लेनी चाहिए। असुरक्षित यौन संबंध के 12 घंटे के भीतर लेने पर यह सबसे प्रभावी रूप से काम करती है।
किशोरों (teenagers) के लिए आई-पिल उपयुक्त नहीं है।
यदि आप आई-पिल लेने के बारे में सोच रहीं हैं तो आपकी उम्र 25 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।
आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों की बढ़ती लोकप्रियता और इसके इस्तेमाल के पीछे का कारण प्रभावी विज्ञापन का नतीजा हो सकता है, जिसमें कंडोम का फटना या अनियमित बर्थ कंट्रोल जैसी समस्याओं ने इस गोली को इतना खास बना दिया है। लेकिन इसके इस्तेमाल से होने वाले नुकसान की जानकारी आपको जरूर होनी चहिये।
आई-पिल की रूपरेखा और उपयोग
आई-पिल गर्भावस्था को रोक सकती है लेकिन अगर कोई महिला पहले से ही गर्भवती है तो उसकी मदद नहीं हो सकती है
24 घंटे के भीतर असुरक्षित यौन संबंध रखने के तुरंत बाद गोली लेनी चाहिए।
यदि कोई लंबी अवधि की दवा चल रही है, तो आई-पिल लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श करना सबसे अच्छा है।
आई-पिल यौन संक्रमित बीमारियों के खिलाफ सुरक्षा नहीं करता है।
कोई भी जो लिवोनारजेस्ट्रल (गर्भ निरोधक गोलियों) के लिए एलर्जी है, इन गोलियों को लेने की कोशिश करने से पहले एक डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
ये पिल काम कैसे करती है?
“संयुक्त गर्भनिरोधक गोली तीन तरीकों से गर्भधारण को रोकती है, जिससे यह एक बहुत प्रभावी गर्भनिरोधक विकल्प बन जाती है। यह ओव्यूलेशन को रोकती है, शुक्राणु के प्रवेश को रोकने के लिए गर्भ के द्वार पर बलगम को गाढ़ा करती है, और एक अंडे को रोकने के लिए गर्भ के अस्तर को बदल देती है जहाँ वह बढ़ रहा है। ”
आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियां गर्भावस्था को अवरुद्ध करने वाले हार्मोन का उपयोग करती हैं। इसमें अधिकांश वही हार्मोन का उपयोग किया जाता है जो नियमित गर्भनिरोधक गोलियों में होते हैं।
ये शरीर में होने वाले फ़र्टिलाइजेशन को रोक देता है। आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियां मुख्य रूप से अंडे बनाने की क्रिया या ओव्यूलेशन की रिहाई में देरी करने का काम करती हैं। गर्भाशय के निचले हिस्से से एक फ्लूइड निकलता है। जिसे सर्विकल म्यूकस कहते हैं. यह कुछ हद तक अंडे की सफ़ेदी जैसा होता है। इमरजेंसी पिल की वजह से यह बहुत गाढ़ा बनने लगता है। जिसकी वजह से स्पर्म वहां मौजूद अंडों तक नहीं पहंच पता है। इसके साथ ही यह अंडों को ओवरीज़ से जल्दी निकलने नहीं देता है। लेकिन एक बार आरोपण (implantation) हो जाने के बाद, आपातकालीन गर्भनिरोधक अब प्रभावी नहीं है। यदि आप पहले से ही गर्भवती हैं, तो इन गोलियों का गर्भनिरोधक विधि के रूप में कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
क्या इमरजेंसी पिल हर बार काम करती है?
आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियां जैसे आई पिल अच्छी तरह से काम करती है। लेकिन आपको इसे जल्दी से लेना चाहिए – अधिमानतः सेक्स के 24 घंटों के भीतर। जितनी जल्दी आप इसे लेंगीं, उतनी ही अधिक यह प्रभावी होगी। अध्ययनों से पता चलता है कि यदि आप सेक्स के 72 घंटों के भीतर आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली लेती हैं, तो आपके गर्भवती होने की केवल 1% से 2% संभावना ही होती है।
ये तो हुई बात कि आई पिल कब ली जाती है और यह कैसे काम करती है। अब आते हैं सबसे ज़रूरी मुद्दे पर।
आपको आई-पिल के इन साइड इफेक्ट्स का पता होना चाहिए
जी मिचलाना
सरदर्द
पेट के निचले हिस्से में दर्द
स्तन में कोमलता
योनि स्राव
कई दिनों के लिए अतिरिक्त रक्तस्राव
लंबे समय तक मासिक धर्म चक्र का न आना (3 से 6 महीने)
कामेच्छा में कमी (सेक्स ड्राइव) प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है
पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (औरतों में डिंबग्रंथि संबंधी विकार) की अधिक संभावना
आई-पिल का पीरियड पर कैसा असर पड़ता है?
क्योंकि ये पिल्स आपके हॉर्मोन्स के साथ छेड़छाड़ करती हैं इसलिए इसके बार बार इस्तेमाल करने पर आपके पीरियड्स में गड़बड़ी आ सकती है। इससे आपको पीरियड्स वक़्त से पहले हो सकते हैं या काफ़ी लेट हो सकते हैं। और पीरियड्स के दौरान दर्द हर बार से कई गुना ज़्यादा हो सकता है। आई-पिल का पीरियड पर कैसा असर पड़ता है की बात यहीं ख़त्म नहीं होती इसे लेने के बाद बीच-बीच में हल्की स्पॉटिंग भी हो सकती है। मतलब हल्का सा खून आएगा जिससे आपको लगेगा कि फिर से पीरियड्स शुरू हो गए हैं, पर ऐसा होगा नहीं।
ऐसी स्थति में आपके पीरियड्स को नॉर्मल होने में कुछ समय लग सकता है। इससे आपको बहुत ज़्यादा परेशान होने की ज़रुरत नहीं है। लेकिन यदि लम्बे समय तक ऐसा हो तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलें और उन्हें सारी बात सच-सच बताएं।
आई पिल लेने के बाद क्या होता है?
जिन महिलाओं ने आई पिल गोली ली थी उन्होंने इसे लेने के बाद मतली, उल्टी, निचले पेट में दर्द, सिरदर्द, थकावट और स्तन कोमलता की शिकायत की है। आप आपातकालीन गर्भनिरोधक लेने के बाद ” पीरियड्स के पहले दिन जैसा दर्द दर्द ” या कुछ रक्तस्राव का भी अनुभव भी कर सकतीं हैं।
क्या मैं गोली लेने के बाद भी गर्भवती हो सकती हूं?
हां, गर्भवती होना संभव है। आई पिल – मॉर्निंग आफ्टर पिल – असुरक्षित यौन संबंध के बाद गर्भधारण को रोकने में मदद कर सकती है। लेकिन यह गोलियों को लेने के बाद किये जाने वाले किसी भी सेक्स के लिए गर्भावस्था को नहीं रोकेगी।
आई-पिल की सामान्य खुराक
मैं असुरक्षित संभोग के एक प्रकरण के बाद इसे जितनी जल्दी लेती हूं उतना बेहतर काम करता है।
जितनी जल्दी हो सके पहले टैबलेट को लें लेकिन असुरक्षित संभोग के 72 घंटे बाद नहीं।
12 घंटे बाद दूसरा टैबलेट लें।
क्या आई पिल खतरनाक है?
भले ही जन्म नियंत्रण की गोलियाँ बहुत सुरक्षित हैं, आई पिल की तरह ही अन्य आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली का उपयोग स्वास्थ्य समस्याओं के आपके जोखिम को थोड़ा बढ़ा सकता है। जटिलताओं में इनका होना दुर्लभ हैं, लेकिन वे गंभीर हो सकते हैं। इनमें हार्ट अटैक, स्ट्रोक, ब्लड क्लॉट और लिवर ट्यूमर शामिल हैं।
क्या गोली लेने के बाद पीरियड्स आ सकता हैं?
आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली लेने के बाद मैं अपने अगले मासिक धर्म की उम्मीद कब कर सकती हूं? आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली लेने के 3 सप्ताह के भीतर आपका पीरियड्स शुरू होना चाहिए। आपका अगला पीरियड्स सामान्य से थोड़ा जल्दी या कुछ दिनों बाद शुरू हो सकता है। यदि आपके अगले पीरियड में देर हो रही है, तो अपने स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता से संपर्क करें और गर्भावस्था परीक्षण करायें।
क्या गोली पीरियड्स रोकती है?
गर्भनिरोधक गोलियां लेना गर्भावस्था को रोकने और कई चिकित्सा स्थितियों का इलाज करने का एक प्रभावी तरीका है। चूंकि गोली आपके सिस्टम में विभिन्न हार्मोनों को कम और ज्यादा करके काम करती है, इसलिए यह आपके मासिक धर्म चक्र को प्रभावित कर सकती है। कुछ महिलाओं को हल्का रक्तस्राव हो सकता है, और अन्य के पीरियड्स पूरी तरह से रूक सकते हैं।
आई पिल के इस्तेमाल से जुड़ी बहुत महत्वपूर्ण बात
I-pill में 10% विफलता दर है।
आई-पिल को 6 महीने के भीतर दोहराना नहीं चाहिए। मतलब 6 महीने में केवल एक बार आई-पिल को लिया जाना चाहिए। न की हर बार सेक्स करने के बाद रेगुलर गर्भनिरोधक गोलियों की तरह।
अगर इसका बार-बार इस्तेमाल किया जाए तो इससे शरीर के नेचुरल हार्मोन पैटर्न के बदलने का खतरा होता है, जो बाद में उस महिला के प्रेग्नेंट होने की राह में मुश्किलें पैदा कर सकता है।
आई-पिल HIV / एड्स और यौन संचारित रोगों से सुरक्षा प्रदान नहीं करती है।
इसके बजाय आपके पार्टनर को कंडोम जैसे सुरक्षित गर्भनिरोधक विकल्प का उपयोग करना चाहिए। क्योंकि यह अवांछित गर्भावस्था, एचआईवी और यौन संचारित रोगों से सुरक्षा प्रदान करता है।
लोगों के बीच में इमरजेंसी कन्ट्रासेप्टिव पिल्स को लेकर कोई विरोध नहीं है, न ही इसपर कोई बहस उठती है। हर छोटी दवा की दुकानों पर इनका आसानी से उपलब्ध होना, हर साल नए-नए ब्रांड का बाजार में आना इस ओर इशारा कर रहा है कि भारत के बड़े शहरों से लेकर अब छोटे शहरों तक की युवतियों के बीच ये गोलियां तेजी से अपनी जगह बनाती जा रही हैं। यदि आपकी कोई दोस्त इसका इस्तेमाल करती हैं तो उसे इसके नुकसान के बारे में अवश्य बताएं और उन्हें ये भी बताएं कि आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली का इस्तेमाल इमरजेंसी में ही करें।
- आई-पिल से कब बचें
एलर्जी से लेवोनोर्जेस्ट्रेल के मामले में आई पिल से बचना चाहिए।
आई-पिल नियमित रूप से जन्म नियंत्रण विधि के रूप में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
यदि आप पहले से गर्भवती हैं तो आई -पिल का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
अगर ट्यूबल गर्भावस्था की प्रवृत्ति से पीड़ित हैं तो आई पिल का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
मधुमेह के मामलों में।
योनि से असामान्य रक्तस्राव के इतिहास वाले मरीजों में।
यदि आपको स्तन कैंसर है तो आई पिल का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
यदि आप स्ट्रोक से पीड़ित हैं तो आई पिल का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
यदि आपको खून बह रहा है या क्लोटिंग डिसऑर्डर है तो आई पिल का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए
यदि आप पोर्फ्रिया (रक्त और लिम्फैटिक प्रणाली के अनुवांशिक विकार) से पीड़ित हैं तो आईपिल का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
सोलह वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में आई पिल का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि आई पिल एचआईवी या अन्य यौन संक्रमित बीमारियों से रक्षा नहीं करता है।
जिगर में ट्यूमर वाले मरीजों में पिल का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
आई पिल संभवतः थायराइड फंक्शनिंग परीक्षण में हस्तक्षेप कर सकता हूं और गलत रिर्पोट देता है। थायरॉइड फ़ंक्शन टेस्ट से गुजरने से पहले इस दवा का उपयोग करने पर डॉक्टर को रिपोर्ट करें।

3.1.20

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हर्बल नुस्खे और आरोग्य : मूत्राशय प्रदाह,पेशाब मे जलन के उपचार // Bladder inflammation, irritation tips 


हर्बल नुस्खे और आरोग्य : टायफाईड ज्वर की चिकित्सा //Home Remedies to cure Toyphoid fever. 


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हर्बल नुस्खे और आरोग्य : ग्रीन काफी के फायदे-नुकसान //Advantages and disadvantages of green coffee 

हर्बल नुस्खे और आरोग्य : शराब पीने के दुष्प्रभाव // The side effects of alcohol 


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हर्बल नुस्खे और आरोग्य : पेट फूलने की समस्या को दूर करने के घरेलू उपाय // Domestic measures to overcome the problem of flatulence 


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हर्बल नुस्खे और आरोग्य : सेमल के आयुर्वेदिक और औषधीय गुण//Herbal and medicinal use of Semal 

हर्बल नुस्खे और आरोग्य : 80 रोगों की एक दवा :वायविडंग// 80 diseases Medication: Wayvidng 


हर्बल नुस्खे और आरोग्य : विभिन्न ज्वरों की होम्योपैथिक औषधियाँ // various homeopathic medicines for Fevers 


हर्बल नुस्खे और आरोग्य : बहरापन का ईलाज//Deafness Treatment In Homeopathy/ 


हर्बल नुस्खे और आरोग्य : स्त्री रोगों की मुख्य घरेलू औषधियाँ // top home remedies for Women's diseases 


हर्बल नुस्खे और आरोग्य : सर्दी के मौसम मे स्वास्थ्यकारी पदार्थ// Healthy foods in the winter season


हर्बल नुस्खे और आरोग्य : श्वेत प्रदर ,ल्यूकोरिया,सफ़ेद पानी जाने के घरेलू,आयुर्वेदिक उपचार 

हर्बल नुस्खे और आरोग्य : जैतून का तेल अमृत तुल्य है,(Benefits of Olive oil) 


हर्बल नुस्खे और आरोग्य : तिल्ली बढ़ जाने (स्प्लेनोमेगाली) के आयुर्वेदिक घरेलू उपचार 


हर्बल नुस्खे और आरोग्य : घरेलू उपायों से टांसिल को करें दूर //Domestic measures to remove the tonsils 


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हर्बल नुस्खे और आरोग्य : गुलाब के फूल के औषधीय गुण// Medicinal properties of roses 


हर्बल नुस्खे और आरोग्य : सिर्फ आपरेशन से नहीं, हर्बल औषधि से प्रोस्टेट वृद्धि का कारगर इलाज 

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हर्बल नुस्खे और आरोग्य : होम्योपैथिक औषधि फास्फोरस के लक्षण उपयोग 


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हर्बल नुस्खे और आरोग्य : अपराजिता के गुण औषधीय उपयोग // Medicinal Properties of Aparajita


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हर्बल नुस्खे और आरोग्य : शराब को शरीर पर रगड़ने से होते है कई फायदे// Many benefits are due to rubbing alcohol on the body 

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हर्बल नुस्खे और आरोग्य : शाबर मंत्रों द्वारा कठिन रोगों का निवारण // Troubleshoot the Tough Diseases by Shabar Mantras 

हर्बल नुस्खे और आरोग्य : मानसिक रोगों के लक्षण और चिकित्सा //Signs of Mental Illness and treatment 

हर्बल नुस्खे और आरोग्य : किडनी विकृति के कारण और उपचार //kidney failure and ayurvedic treatment 


हर्बल नुस्खे और आरोग्य : अर्निका(होम्योपैथिक) दवा के उपयोग और फायदे//Arnica (homeopathic) drug use and benefits 


हर्बल नुस्खे और आरोग्य : जामुन के सिरके के फायदे और बनाने की विधि // Benefits of berries vinegar and the method of making 

हर्बल नुस्खे और आरोग्य : सिर्फ गंजेपन की ही नहीं अनेक रोगों की दिव्य औषधि है कलोंजी //Not only baldness, it is the divine medicine of many diseases-Kalonji/ 

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हर्बल नुस्खे और आरोग्य : किडनी स्टोन की ग्यारण्टेड हर्बल चिकित्सा.


हर्बल नुस्खे और आरोग्य : जायफल के फायदे


हर्बल नुस्खे और आरोग्य : एंग्जाइटी(चिंता तनाव)से मिनटों में राहत 

हर्बल नुस्खे और आरोग्य : दिल की धड़कन असामान्य होने के कारण और उपाय 


हर्बल नुस्खे और आरोग्य : काला नमक वाला पानी पीने के स्वास्थ्य लाभ 


हर्बल नुस्खे और आरोग्य : मिट्टी के मटके के पानी के स्वास्थ्य लाभ //Clay pot benefits 

हर्बल नुस्खे और आरोग्य : अखरोट के स्वास्थ्य लाभ 


हर्बल नुस्खे और आरोग्य : आलस्य और सुस्ती दूर करने के उपाय 


हर्बल नुस्खे और आरोग्य : तेज नाड़ी के उपचार और उपाय 


हर्बल नुस्खे और आरोग्य : आंवला के औषधीय गुण और फायदे 

हर्बल नुस्खे और आरोग्य : चने खाने के फायदे 


हर्बल नुस्खे और आरोग्य : औषधीय गुणों से भरपूर है ग्‍वार की फली 


हर्बल नुस्खे और आरोग्य : जौ (बारले)के स्वास्थ्य के लिए फायदे 


हर्बल नुस्खे और आरोग्य : अनार के छिलके के फायदे 


हर्बल नुस्खे और आरोग्य : मुनक्का कई रोगों मे फायदे मंद औषधि


हर्बल नुस्खे और आरोग्य : अरबी सब्जी के स्वास्थ्य लाभ 


हर्बल नुस्खे और आरोग्य : आम खाने के स्वास्थ्य लाभ और नुकसान 


हर्बल नुस्खे और आरोग्य : केला खाने के फायदे और नुकसान 


हर्बल नुस्खे और आरोग्य : लौंग चर्बी घटाने के अलावा स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी 

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हर्बल नुस्खे और आरोग्य : फेफड़े मे पानी भर जाने की समस्या और उपाय 


हर्बल नुस्खे और आरोग्य : किशमिश खाने के स्वास्थ्य लाभ 


हर्बल नुस्खे और आरोग्य : अमचूर खाने के स्वास्थ्य के लिए फायदे व दुष्प्रभाव 

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हर्बल नुस्खे और आरोग्य : अनिद्रा रोग दूर करने के घरेलू उपचार// Home remedies to relieve insomnia 

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हर्बल नुस्खे और आरोग्य : औषधीय गुणों से भरपूर केले के छिलके// Banana peels rich in medicinal 

properties 

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हर्बल नुस्खे और आरोग्य : November 2019


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किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि 

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचा





26.12.19

विक्स वेपोरब के कमाल के फायदे



सर्दी आते ही सब विक्स का इस्तेमाल अपनी बंद नाक और गले के आराम के लिए करते है। लेकिन क्या आपको पता है की विक्स वेपोरब के इस्तेमाल करने के और भी बहुत सारे तरीके हैं। विक्स वेपोरब का उपयोग स्ट्रेच मार्क्स के निशान हटाने और वजन क म करने के लिए किया जा सकता है जी हाँ विक्स विक्स वापोरोब में नीलगिरी के तेल, देवदार के पत्ते के तेल, पेट्रोलोलम, कपूर और टर्पेन्टाइन तेल का संयोजन होता है। जो हमे कई स्वास्थ्य समस्याओं के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करती है।
स्ट्रेच मार्क्स के निशान हटाने के लिए विक्स का प्रयोग
कई कारणों से स्ट्रेच मार्क्स के निशान हो सकते हैं इसमें गर्भावस्था सबसे आम है। स्ट्रेच मार्क्स के निशान विकास की गति के दौरान भी हो सकते हैं या कम समय में वजन कम करने के कारण भी हो सकते हैं।
माने या नहीं, विक्स की अनगिनत समीक्षाओं का कहना है कि यह गर्भावस्था के बाद स्ट्रेच मार्क्स के निशान या ढीले त्वचा के लिए यह इरेज़र की तरह है। मेन्थॉल, तेल और अन्य त्वचा शीतलन सामग्री का संयोजन खिंचाव के निशान के सबसे जिद्दी होने की चमक को कम करने के लिए बिल्कुल सही है! इस विधि का उपयोग करने वाले बहुत से लोग इसके बारे में बताते है, कि विक्स वेपोरब के इस्तेमाल से कुछ ही दिनों के भीतर आप स्ट्रेच मार्क्स से छुटकारा पा सकते है जबकि विक्स वेपोरब के निर्माता दावा नहीं करते हैं कि इसका उत्पाद वास्तव में खिंचाव के निशान को कम कर सकता है या उपचार के रूप में इसका उपयोग करने की सिफारिश कर सकता है।
त्वचा के स्ट्रेच मार्क्स या स्कार्फिंग के लिए, उत्पाद में नीलगिरी की एंटी इन्फ्लामेंट्री तत्व होते है, जिसमें महिलाओं का कहना है कि इसका उपयोग करने के एक सप्ताह के भीतर, उनके खिंचाव के निशान 60 से 100 प्रतिशत चले गए थे। चूंकि विक्स वेपोरब में नीलगिरी के तेल, देवदार के पत्ते के तेल, पेट्रोलोलम, कपूर और टर्पेन्टाइन तेल का संयोजन होता है, ये तेल गठबंधन करते हैं और अत्यधिक खिंचाव वाली त्वचा को नरम बनाते हैं, और ड्राईनेस को भी कम करता है जो खिंचाव के निशान को दूर करता है।
स्ट्रेच मार्क्स हटाने के लिए विक्स वेपोरब का उपयोग करने के दो तरीके हैं यदि आप खिंचाव के निशान की दृश्यता को कम करना चाहते हैं, प्रभावित क्षेत्र पर विक्स वेपोरब को हल्के होथों से रगड़े। आप नियमित रूप से दो सप्ताह के बाद सकारात्मक परिणाम देखेंगे।
अपने सभी स्ट्रेच मार्क्स पर इसे रगड़ें और अपने कूल्हों के चारों तरफ एक चिपकने वाले पनी का टुकड़ा रखें। बाद में, टाइट लेगिंग्स (tight leggings) पहने और इसे रात भर के लिए छोड़ दें। जब आप जागते हैं तो स्ट्रेच मार्क्स चले जाना चाहिए। अगर वे गायब नहीं होते हैं, तो आप इसे अगली रात दोहरा सकते हैं।
वज़न कम करने के लिए विक्स वेपोरब का प्रयोग आप अपना वजन कम करने के लिए 2 चम्मच विक्स, 1 चम्मच बेकिंग सोडा (खाने का सोड़ा) आधा चम्मच कपूर पाउडर, और 2 चम्मच एल्कॉहल का एक मिश्रण बना लें। ध्यान रहे की इस मिश्रण में इतना विक्स वेपोरब मिलाएं कि पेस्ट जैसा बन जाएं।
एक बर्तन में इन सभी सामग्री को मिलाएं और इस पेस्ट को अपने पेट पर लगाएं। 5 मिनट के लिए धीरे मालिश करें और फिर अपने पेट को प्लास्टिक शीट से लपेट लें। इसे 1-2 घंटे के लिए ऐसे ही छोड़ दें। इस बीच आप फिजीकल एक्सरसाइज करेंगें तो इसका असर डबल हो जायेगा, एक्सरसाइज करने के थोड़ी देर बाद इसे खोलकर पानी से धो लीजिए। यह विधि तुरंत परिणाम नहीं देती है, अच्छे रिजल्ट पाने के लिए लगभग 7 दिनों के लिए आपको यह करने की आवश्यकता हो सकती है।
विक्स वेपोरब के कुछ और प्रयोग जो आप कर सकते है –
अगर आपके हाथो या पैरो के नाखुनो में फंगस या पैरो की उंगलियो में खारवे या फंगस हो गई है तो आप वहाँ पर भी इसका इस्तेमाल कर सकते है।
पेट में गैस की वजह से दर्द 
अगर किसी के पेट में गैस की वजह से दर्द हो रहा है तो थोड़ा सा विक्स अपने पेट तथा नाभि के आस-पास लगा लें। कुछ ही देर में गैस्ट्रिक प्रॉब्लम दूर हो जाएगी और पेटदर्द से आराम आ जाएगा।

जब आपके सिर में हल्का सा दर्द हो तो आप हल्के हाथ से माथे पर इसकी मालिश कर सकते है
अगर आपको मच्छर, मक्खियां परेशान कर रहे हैं तो आप थोड़ा सा विक्स वेपोरब थोड़ी सी रूई में लगाकर अपने पास रख लें। विक्स वेपोरब की मेंथॉल खुशबू से ही मच्छर-मक्खियां आपके पास नहीं आएंगे। 
विक्स वेपोरब के हैरान कर देने वाले फायदे
vicks की बोतल को अगर खुले में रख देते है तो उस जगह के आस पास मक्खिया नही आएगी।
अगर पैरों में मौजे पहनने पर बदबू आती है तो रात को सोते समय पैरों में हल्की सी विक्स लगाकर मौजे पहन कर सो जाएं। सुबह उठ कर पैर ठंडे पानी से धो लें। एक ही दिन में पैरों की बदबू दूर हो जाएगी।
अगर आपके कान में दर्द है तो थोड़ी सी vicks रुई में लगा कर अपने कान के पास रख ले इस में मौजूद मेंथोल अपना काम करेगा और आपको दर्द से आराम मिल जायेगा।
 मांस-पेशियों में खिंचाव
खेलते समय या कोई काम करते समय अगर शरीर की मांस-पेशियों में खिंचाव के कारण दर्द हो रहा है तो प्रभावित हिस्से तथा उसके आस-पास के हिस्से में विक्स वेपोरब लगा लें। इससे कुछ ही मिनट में आराम आ जाएगा। पीठ दर्द में भी विक्स वेपोरब से राहत मिलती है।
अगर आपकी त्वचा कहीं से कट गई है तो आप वहां पर भी vicks लगा सकते है यह बहुत दर्द करेगा पर आप इन्फेक्शन से बचे रहेगे।
अगर कोई ताज़ा खरोच लग गई हो तो vicks veporub में थोडा सा नमक मिला के लगाये |चोट का रंग नही बिगड़ेगा।

19.12.19

खाने के बाद 30-40 मिनट पैदल चलने से मोटापा और हार्ट रोग रहेंगे दूर


पैदल चलना (Walking) अपने आप में एक बेहतरीन एक्सरसाइज है। सुबह से लेकर रात तक जब भी समय और मौका मिले, आपको पैदल जरूर चलना चाहिए। रेगुलर वॉक करने से आप न सिर्फ शारीरिक रूप से फिट रहते हैं, बल्कि शरीर की कई बीमारियों की भी 'टाटा बाय-बाय' कह सकते हैं। जी हां, शायद आपको जानकर हैरानी होगी कि सिर्फ 3 मिनट पैदल चलकर आप अपना बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर कंट्रोल कर सकते हैं। इसी तरह 5 मिनट पैदल चलकर आप अपने खराब मूड को ठीक कर सकते हैं।
दरअसल प्रकृति ने आपका शरीर आराम करने के लिए नहीं बनाया गया है। अगर आप दिन भर एक ही जगह बैठे-बैठे या लेटे हुए गुजार देते हैं, तो आपका शरीर कई तरह की बीमारियों का शिकार बनता जाता है। इसलिए अपने बॉडी पार्ट्स को मूव करते रहना और थोड़ा-बहुत काम करते रहना बेहद जरूरी है। अगर आप जिम जाकर वर्कआउट नहीं कर सकते हैं, सुबह उठकर पार्क में एक्सरसाइज नहीं कर सकते हैं, घर में योगासन भी नहीं कर सकते हैं, तो कम से कम आपको पैदल तो चलना ही चाहिए। आइए आपको बताते हैं दिन में थोड़ा-थोड़ा पैदल चलना आपके लिए कैसे फायदेमंद साबित होता है।
10 मिनट चलकर घटा सकते हैं ब्लड प्रेशर

शोध बताते हैं कि अगर आप हाइपरटेंशन (हाई ब्लड प्रेशर) के शिकार हैं, तो दिन में 3-4 बार 10 मिनट तेज गति से पैदल चलने से आपका ब्लड प्रेशर कंट्रोल हो सकता है। ये ऐसे लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है, जो काफी बिजी रहते हैं। ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करना इसलिए जरूरी है क्योंकि इसके कारण आपको हार्ट अटैक, किडनी फेल्योर और स्ट्रोक आदि गंभीर स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।
5 मिनट पैदल चलने से आपका बिगड़ा मूड सही हो जाता है
इस बात को आपने भी महसूस किया होगा कि जब आप बहुत अधिक टेंशन में हों, तो उठकर थोड़ी दूर पैदल चलने से आपकी टेंशन कम हो जाती है। दरअसल पैदल चलना आपके मूड को सही करता है। जब भी आपका मूड थोड़ा खराब हो, कमरे से बाहर निकलें और 5-7 मिनट चीजों-लोगों को देखते हुए पैदल चलें। इससे आपका मूड तुरंत सही हो जाएगा और तनाव भी कम होगा। शोध बताता है कि जो लोग ऑफिस में देर तक बैठकर काम करते हैं, वो अगर अपनी सीट से उठकर हर 1-2 घंटे में 5 मिनट पैदल चलें, तो उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ती है।
5-10 मिनट पैदल चलने से बढ़ती है आपकी क्रिएटिविटी

अगर आप कोई क्रिएटिव आइडिया खोज रहे हैं या कोई समस्या सुलझा रहे हैं, जो आपको काफी देर से उलझाए हुए है, तो 5 मिनट पैदल चलें और आप पाएंगे कि आप ज्यादा बेहतर सोच पा रहे हैं। जी हां, रिसर्च बताती है कि पैदल चलने से आपकी क्रिएटिविटी बेहतर होती है और आप ज्यादा बेहतर सोच सकते हैं।
रात के खाने के बाद 15 मिनट पैदल चलें, कंट्रोल होगा ब्लड शुगर
रात के खाने के बाद आपको तुरंत लेटना या बैठना नहीं चाहिए। खाने के बाद 15 मिनट पैदल चलने से आप अपने ब्लड शुगर को बढ़ने से रोक सकते हैं। जी हां, अमेरिकन डायबिटीज सेंटर के डायबिटीज केयर नाम के जर्नल में छपे अध्ययन के अनुसार आप रात के खाने के बाद सिर्फ 15 मिनट पैदल चलकर, दिनभर अपना ब्लड शुगर कंट्रोल रख सकते हैं।
खाने के बाद 30-40 मिनट पैदल चलने से मोटापा और हार्ट रोग रहेंगे दूर
रोजाना खाना खाने के बाद अगर आप सिर्फ 30 मिनट पैदल चलते हैं, तो इससे आपका मोटापा कम होता है और शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी घटती है। इसके अलावा अगर आप खाने के बाद 40 मिनट पैदल चलते हैं, तो आप कार्डियोवस्कुलर बीमारियों (हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट और स्ट्रोक आदि) के खतरे को कम कर सकते हैं।
अध्ययन से पता चलता है कि सुबह की गई नियमित सैर जोड़ों के दर्द और अकड़न से निजात दिला सकती है । सुबह की सैर हड्डियों के साथ-साथ मांसपेशियों की क्षमता को भी बढ़ाती हैं। ऑस्टियोपोरोसिस के मरीजों के लिए सुबह की सैर फायदा पहुंचा सकती है। इसके अलावा, कुछ अध्ययन बताते हैं कि रजोनिवृत्ति के बाद जो महिलाएं रोजाना एक मील चलती हैं, उनमें हड्डियों का घनत्व रोजाना कम चलने वाली महिलाओं की तुलना में अधिक रहता है।
डिप्रेशन से मुक्ति
इस समय की सबसे बड़ी बीमारियों में डिप्रेशन को गिना जाता है। यह कई मानसिक व शारीरिक रोगों का कारण बन सकता है और सबसे घातक परिणाम मृत्य भी हो सकता है। यह एक धातक विकार है, लेकिन अच्छी खबर यह है कि अगर आप सुबह भ्रमण पर निकलते हैं, तो आप तनाव मुक्त हो सकते हैं। सुबह की ताजगी भरी सैर मन-मस्तिष्क को शांत करने में मदद करेगी।
शोध में पता चलता है कि अगर तनाव से ग्रसित इंसान रोज 20 से 40 मिनट की सैर करे, तो वो अपने तनाव का स्तर कम कर सकता है। इसलिए, डिप्रेशन से मुक्त होने के लिए आप रोजाना नियमित सुबह की सैर कर सकते हैं
हृदय स्वास्थ्य
मॉर्निंग वॉक का सबसे बड़ा फायदा हृदय का ध्यान रखना भी है। सुबह की नियमित सैर आपको मजबूत बनाती है, जिससे आपको हृदय से जुड़े रोगों से लड़ने में मदद मिलती है। हृदय की बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए सुबह की सैर अच्छा विकल्प हो सकता है।
शोध से पता चलता है कि मात्र चलने से हृदय संबंधी जोखिम 31 प्रतिशत और इससे मरने का जोखिम 32 प्रतिशत तक कम हो सकता है। यह लाभ पुरुष और महिलाओं दोनों पर लागू होता है। हृदय स्वास्थ्य को बरकरार रखने के लिए आप रोज सुबह की सैर का आनंद ले सकते हैं

मधुमेह नियंत्रण

Pinit
मधुमेह अनियंत्रित जीवनशैली के कारण होनी वाली आम बीमारियों में से एक है। वहीं, अगर आप सुबह घूमने जाते हैं, तो आप इस समस्या को कुछ हद तक कम कर सकते हैं। शोध के अनुसार, सुबह 30 मिनट की सैर ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के साथ-साथ टाइप-2 डायबिटीज से निजात दिलाने में मदद कर सकती है (5)।
 कैंसर से बचाव
विशेषज्ञों का मानना है कि कैंसर का खतरा सुस्त और व्यस्त जीवनशैली की वजह से भी हो सकता है। ऐसे में सुबह की सैर कई तरह के कैंसर को दूर रखने में मदद करती है। सुबह की ताजगी भरी सैर आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने का काम करती, जिससे कैंसर से लड़ने में मदद मिलती है।
यहां हम यह नहीं कर रहे हैं कि मॉर्निंग वॉक कैंसर का सटीक इलाज है, लेकिन यह कैंसर की आशंका को कम कर सकती है। शोध बताते हैं कि सुबह की सैर स्तन, किडनी, ओवेरियन और सर्वाइकल से जुड़े कैंसर से लड़ने में मदद कर सकती है|
बढ़ती है मस्तिष्क की कार्यक्षमता
मस्तिष्क की कार्यप्रणाली के लिए भी सुबह की सैर जरूरी है। नियमित व्यायाम जैसे मॉर्निंग वॉक आपकी याददाश्त को बढ़ा सकता है और मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बेहतर कर सकता है (9)। जब आप चलते हैं, तो मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है और रक्त की आपूर्ति (Supply) में तेजी आती है, जिससे याददाश्त मजबूत होती है |
 वजन घटाने में मदद
अनियंत्रित खान-पान और खराब जीवनशैली मोटापे का सबसे बड़ा कारण है। जब हम बिना शारीरिक परिश्रम के किसी भी वक्त भोजन का सेवन करने लग जाते हैं, तो इससे शरीर का वजन बढ़ने लगता है। बाद में यही मोटापा कई बीमारियों का कारण बन सकता है। अगर आप इसे कम करना चाहते हैं, तो रोजाना नियमित रूप से मॉर्निंग वॉक करें। प्रतिदिन 30-40 मिनट की सैर आपकी अतिरिक्त कैलोरी को कम करने में मदद करेगी।

18.12.19

यात्रा के दौरान मितली उल्टी आने के उपाय व उपचार


बस या कार में यात्रा करते हुए जी मचलना या उल्टी आना, ऐसी परेशानी बहुत लोगों को होती है. असल में ऐसा मस्तिष्क के जबरदस्त हुनर के चलते होता है.हममें से कई लोग यात्रा के दौरान होने वाली मतली या उल्टी के कारण, बस में या कार में सफर करना अवॉयड करते हैं। मोशन सिकनेस बीमारी (Motion sickness)(यात्रा संबंधी मतली) एक ऐसी स्थिति है जिसमें आँखों के द्वारा मूवमेंट को भापना और वेस्टिबुलर सिस्टम की मूवमेंट की भावना के बीच के अंतर के कारण होता है। इसके कई कारण हो सकते हैं जिनके बारे में हम आमतौर पर ध्यान नहीं देते। यात्रा के दौरान उल्टी को कार सिकनेस (बीमारी), सिमुलेशन सिकनेस या एयर सिकनेस के रूप में भी समझा जा सकता है।
बस, कार, विमान या पानी के जहाज में यात्रा करने के दौरान शरीर और मस्तिष्क के बीच एक असमंजस की स्थिति बन जाती है. कार्डिफ यूनिवर्सिटी के न्यूरोसाइंटिस्ट डॉक्टर डिएन बर्नेट के मुताबिक यात्रा के दौरान दिमाग को ऐसा लगता है जैसे शरीर में जहर फैल रहा है. जान बचाने के लिए मस्तिष्क हरकत में आता है. जी मचलने लगता है और उल्टी सी आने लगती है. इस तरह दिमाग शरीर से विषैले तत्वों को बाहर करने की कोशिश करता है.
चक्कर आना, थकान और मतली, मोशन सिकनेस के सबसे आम लक्षण हैं। सोपाइट सिंड्रोम (Sopite syndrome), जिसमें एक व्यक्ति थकान या थकावट महसूस करता है, मोशन सिकनेस से भी जुड़ा हुआ है। ग्रीक में “मतली”(nausea) का अर्थ सी-सिकनेस (See-sick syndrome) है। अगर मतली पैदा करने वाली गति का समाधान नहीं होता है, तो पीड़ित को आमतौर पर उल्टी हो जाएगी। उल्टी से अक्सर कमजोरी और मतली की भावना से छुटकारा नहीं मिलता है, जिसका मतलब है कि जब तक मतली का इलाज नहीं किया जाता है तब तक व्यक्ति को उल्टियां आती रहेगी।
मोशन सिकनेस आमतौर पर पेट के खराब होने का कारण बनती है। इसके अन्य लक्षणों में ठंडा पसीना और चक्कर आना शामिल है। मोशन सिकनेस वाले व्यक्ति को सिरदर्द, और पीले पड़ने की शिकायत हो सकती है। मोशन सिकनेस के परिणामस्वरूप निम्न लक्षणों का अनुभव करना भी आम है:
यात्रा सम्बन्धी मतली के गंभीर लक्षणों में शामिल हैं:
हल्की बेचैनी
उबासी लेना
पसीना आना
असुविधा की एक सामान्य भावना
अच्छी तरह से महसूस नहीं करना (malaise)
हल्की सांस लेना (सांस की कमी)
सिर चकराना
जी मिचलाना
उल्टी
पीलापन
उनींदापन
सरदर्द
किसी को भी यात्रा के दौरान उल्टी (मोशन सिकनेस) हो सकती है, लेकिन यह बच्चों और गर्भवती महिलाओं में सबसे आम है। यह संक्रामक नहीं है।
2 से 12 वर्ष की उम्र के बच्चों को मोशन सिकनेस से ग्रस्त होने की सबसे अधिक संभावना है। गर्भवती महिलाओं को भी इसका सामना करने की संभावना अधिक होती है।
आपकी इंद्रियों के बीच में संघर्ष होने पर आपको मोशन सिकनेस की बीमारी होती है। मान लें कि आप मेले में एक झूले पर हैं, और यह आपको चारों ओर और ऊपर घुमाया जा रहा है। आपकी आंखें एक चीज को देखती हैं, आपकी मांसपेशियों को कुछ और महसूस होता है, और आपके कान के भीतर कुछ और समझ आता है।
आपका दिमाग उन मिश्रित संकेतों को एक साथ नहीं ले सकता है। यही कारण है कि आप को चक्कर आना और बीमार महसूस होने जैसा लगता है।
सफर के दौरान उल्टियां होने पर (मोशन सिकनेस) अधिकांश मामले में आप खुद इलाज कर सकते हैं।
बहुत गंभीर मामले, और जो प्रगतिशील रूप से बदतर हो जाते हैं, जैसे कान में असंतुलन और तंत्रिका तंत्र की बीमारियों में, अपने चिकित्सक से जाकर मिले।
मोशन सिकनेस का निदान करने में मदद के लिए, डॉक्टर आपके लक्षणों के बारे में पूछेगा और पता लगाएगा कि आम तौर पर समस्या का कारण क्या होता है (जैसे नाव में सवारी करना, विमान में उड़ना, या कार में सफर करना और गाड़ी चलाना)।
मोशन सिकनेस के लक्षण आमतौर पर तब बंद हो जाते हैं जब आप रुक जाते हैं। लेकिन यह हमेशा सच नहीं है। ऐसे लोग हैं जो यात्रा खत्म होने के कुछ दिनों बाद भी लक्षण से पीड़ित रहते हैं। अतीत में यात्रा के दौरान उल्टी (मोशन सिकनेस) वाले ज्यादातर लोग अपने डॉक्टर से पूछते हैं कि अगली बार सफर के दौरान उल्टियां होने पर क्या करें और कैसे रोकें। निम्नलिखित उपचार आपकी यात्रा के दौरान उल्टी और मतली ठीक करने में मदद कर सकते हैं:
एक्यूप्रेशर में सुइयों को डालने के बजाये उंगली के दबाव से मतली में राहत मिलती है। कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि एक्यूप्रेशर एक्यूपंक्चर के समान मोशन सिकनेस के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है।
सफर के दौरान उल्टियां होने पर ताजा, ठंडी हवा भी मोशन सिकनेस में थोड़ी राहत दे सकती है। यदि आप कार, बस, ट्रेन में सफर कर रहें हैं तो खिड़की से ताजी हवा ले सकते हैं।
च्यूइंग गम मोशन सिकनेस को कम करने का एक आसान तरीका है। सफर के दौरान उल्टियां होने पर सामान्य और हल्की कार सिकनेस से मुक्त होने के लिए यह एक सरल विधि है। च्यूइंग गम या लौंग या इलायची चबाने से कार में वोमिटिंग के हल्के प्रभाव से छुटकारा पाने में मदद मिलती है।
यात्रा के दौरान उल्टी रोकने के लिए एक आम सुझाव है कि चलती गाड़ी की खिड़की से बाहर यात्रा की दिशा में क्षितिज (सामने की तरफ) की ओर देखे। यह गति की द्रश्य में नयापन लाकर आपके संतुलन की भावना को फिर से चालू करने में मदद करता है।
यात्रा या हवाई यात्रा के दौरान उल्टी रोकने के लिए जहाज में, आंखों को बंद करना उपयोगी होता है, इसलिए यदि संभव होतो झपकी लें। यह आंखों और आंतरिक कान के बीच के इनपुट संघर्ष को हल करता है।
एक बार यात्रा खत्म होने के बाद मोशन सिकनेस बीमारी आमतौर पर दूर हो जाती है। लेकिन अगर आप को अभी भी चक्कर आ रहे हैं, सिरदर्द है, उल्टी, सुनने में कमी या छाती में दर्द है, तो अपने डॉक्टर से मिले।
यात्रा के दौरान मितली होने पर, यात्रा के दौरान आप कहां बैठते हैं इससे भी फर्क पड़ता है। कार की आगे की सीट, ट्रेन-बस में खिड़की वाली सीट, नाव में ऊपरी डेक या विमान में विंग सीट आपको यात्रा के दौरान उल्टी के बिना एक आसान सवारी का मजा दे सकती है। यात्रा करते वक्त खिड़की के बहार दाए और बाए दिशा में देखें। वाहन में कुछ पढ़ने या देखने की कोशिश ना करें, और यात्रा के पहले भारी भोजन, शराब और अन्य सॉफ्ट ड्रिंक्स से बचें। इसके अलावा यात्रा के दौरान उल्टी से बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पियें।
यात्रा में उल्टी- घबराहट से बचने के घरेलू उपाय
अदरक:
अदरक में ऐंटीमैनिक गुण होते हैं। एंटीमैनिक एक ऐसा पदार्थ है जो उल्टी और चक्कर आने से बचाता है। सफर के दौरान जी मिचलाने पर अदरक की गोलियां या फिर अदरक की चाय का सेवन करें। इससे आपको उल्टी नहीं आएगी। अगर हो सके तो अदरक अपने साथ ही रखें। अगर घबराहट हो तो इसे थोड़ा-थोड़ा खाते रहें।
प्याज का रस
सफर में होने वाली उल्टियों से बचने के लिए सफर पर जाने से आधे घंटे पहले 1 चम्मच प्याज के रस में 1 चम्मच अदरक के रस को मिलाकर लेना चाहिए। इससे आपको सफर के दौरान उल्टियां नहीं आएंगी। लेकिन अगर सफर लंबा है तो यह रस साथ में बनाकर भी रख सकते हैं।
लौंग
सफर के दौरान जैसे ही आपको लगे कि जी मिचलाने लगा है तो आपको तुरंत ही अपने मुंह में लौंग रखकर चूसनी चाहिए। ऐसा करने से आपका जी मिचलाना बंद हो जाएगा।लौंग को भूनकर इसे पीस लें और किसी डिब्बी में भरकर रख लें। जब भी सफर में जाएं या उल्टी जैसा मन हो तो इसे सिर्फ एक चुटकी मात्रा में चीनी या काले नमक के साथ लें और चूसें।
रुमाल में पुदीना रख लें
पुदीना पेट की मांसपेशियों को आराम देता है और इस तरह चक्कर आने और यात्रा के दौरान तबीयत खराब लगने की स्थिति को भी खत्म करता है। पुदीने का तेल भी उल्टियों को रोकने में बेहद मददगार है। इसके लिए रुमाल पर पुदीने के तेल की कुछ बूंदे छिड़कें और सफर के दौरान उसे सूंघते रहें। सूखे पुदीने के पत्तों को गर्म पानी में मिलाकर खुद के लिए पुदीने की चाय बनाएं। इस मिश्रण को अच्छे से मिलाएं और इसमें 1 चम्मच शहद मिलाएं। कहीं निकलने से पहले इस मिश्रण को पिएं।
नींबू
नींबू में मौजूद सिट्रिक ऐसिड उलटी और जी मिचलाने की समस्या को रोकते हैं। एक छोटे कप में गर्म पानी लें और उसमें 1 नींबू का रस व थोड़ा सा नमक मिलाएं। इसे अच्छे से मिलाकर पिएं। आप नींबू के रस को गर्म पानी में मिलाकर या शहद डालकर भी पी सकते हैं। यात्रा के दौरान होने वाली परेशानियों को दूर करने का यह एक कारगर इलाज है।