26.5.20

सफ़ेद दाग जड़ से मिटाने के रामबाण नुस्खे


सफेद दाग एक तरह का त्वचा रोग है, जो किसी एलर्जी या त्वचा की समस्या के कारण होता है। कई बार ये जेनेटिक भी होता हे। पूरी दुनिया के दो प्रतिशत लोग इस बीमारी के शिकार हैं और भारत में तो चार प्रतिशत लोग इस से पीड़ित हैं। भारतीय समाज में तो इसे छुआ-छूत की बीमारी के तौर पर माना जाता है। इसे ठीक करने के लिए काफी धैर्य की जरूरत है। इसलिए डॉक्टर को दिखाने के साथ-साथ कुछ घरेलू उपायों से इस प्रॉब्लम को जल्द दूर किया जा सकता है। सफेद दाग को अंग्रेजी में ल्यूकोडरमा कहा जाता है। यह एक प्रकार का त्वचा का रोग है जिसमें त्वचा के रंग में सफेद चकते पड़ जाते हैं। ल्योकोडरमा यानी की सफेद दाग। यह शरीर के जिस हिस्से में होता है उसी जगह सफेद रंग के दाग बनने लगते हैं। धीरे-धीरे यह दाग बढ़ने लगते हैं। भारत में 2 फीसदी आबादी इस समस्या से परेशान है। समाज में यह धारण बन गई है की यह कुष्ठ रोग है पर यह कुष्ठ रोग नहीं होता। यह न तो कैंसर है, न ही कोढ़ रोग है|
सफेद दाग के मुख्य कारण है-
1. अत्याधिक चिंता करना और तनाव लेना
2. पेट में गैस की समस्या
3. लीवर की समस्या
4. विपरीत भोजन की वजह से जैसे मछली के साथ दूध का सेवन करना
5. आनुवंशिक समस्या
6. जलने या चोट लगना
7. पाचन तंत्र में कीड़े होना
8. कैलिश्यम की कमी
9. खून में खराबी
10. पेट में कीड़े होना आदि


सफेद दाग होना एक आम समस्या है यह दाग हाथों, पैरों, चेहरे, होठों आदि पर छोटे रूप में होते हैं फिर ये बडे़ सफेद दाग का रूप ले लेते हैं।यह संक्रामक रोग छोटे बच्चों को भी हो सकता है। सफेद दाग का इलाज आयुर्वेद में उपल्ब्ध है। अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। आयुर्वेद के अनुसार पित्त दोष की वजह से सफेद दाग की समस्या होती है।

 सफेद दाग के कारगर रामबाण इलाज इस प्रकार है-
सफेद धब्बों  को दूर करने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है अपनी जीवन शैली और खान पान में परिवर्तन लाना।


:*करेले की सब्जी का सेवन अधिक से अधिक करना-

*खट्टे पादार्थ, ज्यादा नमक, मछली और दही आदि का परहेज करें|इनकी मनाही है|

अनार का प्रयोग -

अनार त्वचा रोग से संबंधित रोगों के लिए फायदेमंद होता है। सफेद दाग की समस्या से छुटकारा पाने के लिए आप अनार की पत्तियों को तोड़कर सुखा लें और उसका चूर्ण बना लें। इसके बाद इस चूर्ण की एक फंकी एक गिलास पानी मे मिलाकर पीने से सफेद दाग से जल्द ही राहत मिलती है।

शरीर को साफ रखें-

कई बार लोग यूरीन को रोक कर रखते हैं, जो कि बहुत गलत है। इससे शरीर के अंदर गंदे पदार्थों का जमावड़ा बन जाता है जिससे शरीर को नुकसान होता है। इसलिए हमेशा शरीर के विषैले तत्व को बाहर निकालें और शरीर को शुद्ध रखें।

हरड़ -

हरड़ को घिसकर लहसुन के रस में मिलाकर इसके पेस्ट को सफेद दाग पर लगाएं। एैसा करने से सफेद दाग ठीक हो जाते हैं।

उड़द की दाल-

रात में आप उड़द की दाल को पानी में भिगों लें और उसे दरदरा पीसकर नियमित कम से कम पाच महीनों तक सफेद दाग वाले हिस्से पर लगाएं इस उपाय से आपको सफेद दाग से मुक्ति मिलेगी।

तांबे में रखा हुआ पानी-

सफेद दाग की समस्या को ठीक करने के लिए आप रात के समय में तांबे के लोटे में साफ पानी भर दें। और सुबह के समय एकदम खाली पेट इस पानी को पीएं। इस उपाय को लगातार कुछ महीनों तक करें। आपको इससे फायदा मिलेगा।
*नदी घाटी में मिलने वाली लाल मिट्टी और अदरक लाल मिट्टी जो नदी के किनारे मिलती है इसके प्रयोग से भी सफेद दाग से मुक्ति पाई जा सकती है। लाल मिट्टी में काॅपर पाया जाता है जो शरीर से सफेद दाग को खत्म करता है।

कैसे बनाएं लाल मिट्टी का पेस्ट-

सबसे पहले आप अदरक का पेस्ट बना लें कम से  कम पचास ग्राम। अब आप इस पेस्ट में लाल मिट्टी दो चम्मच डालकर इसे अच्छी तरह से मिलाकर पुनः पेस्ट बना लें। और इस लाल मिट्टी के बने पेस्ट को सफेद दाग वाली जगह पर लगाएं।

तुलसी तेल -

तुलसी के तेल से भी सफेद दाग ठीक होता है। आप रोज तुलसी के तेल से सफेद दाग के उपर मालिश करें।

सरसों तेल-

सरसों तेल स्किन से लेकर बालों तक के लिए फायदेमंद है। इस तेल में हल्दी पाउडर मिलाकर उसे सफेद दाग पर लगाएं। सूखने के बाद ठंडे पानी से धो लें। साबुन का इस्तेमाल कम से कम करें। चिकनाहट मिटाने के लिए बेसन का इस्तेमाल करें।
*गर्म दूध में पीसी हल्दी को डालकर दिन में 2 बार पीने से 5 महीने में सफेद दाग से मुक्ति मिल जाती है।
*1 चम्मच हल्दी पाउडर, 2 चम्मच सरसों का तेल को मिलाएं फिर इस पेस्ट को सफेद चक्तों वाली जगह पर लगाएं और 15 मिनट तक रखने के बाद उस जगह को धो लें एैसा दिन में 3 से 4 बारी करते रहें।

अदरक की पत्तियां -

अदरक की पत्तियों से बने पेस्ट को पानी के साथ मिलाकर लेप तैयार करें। और फिर इस लेप को सफेद दाग वाली जगह पर सुबह और शाम में समय लगाएं।

बथुआ

ज्यादा से ज्यादा अपने खाने में बथुआ शामिल करें। रोज बथुआ उबाल कर उसके पानी से शरीर के सफेद दाग को धोएं। कच्चे बथुआ का रस दो कप निकाल कर, उसमें आधा कप तिल का तेल मिलाकर धीमी आंच पर पकाएं। जब केवल तेल रह जाएं तो उसे उतार लें। अब इसे रोज दाग पर लगाएं।

नारियल का तेल -

सफेद दाग दूर करने के लिए नारियल तेल से दिन में तीन बार मालिश करें। इससे शरीर में सफेद चकते कम होने लगते हैं।
*2 चम्मच अखरोट का पाउडर उसमें थोड़ा सा पानी मिलाकर पेस्ट बनाएं और इसे 20 मिनट तक लगा कर रखें दिन में 3 से 4 बार  एैसा करें।
साबुन और डिटरजेंट का इस्तेमाल न करें।
*मूली और मांस के साथ दूध न पीएं।
* नींद पूरी लें, कम से कम 8 घंटे की नींद लें।
*गाजर, लौकी और दालें अधिक से अधिक सेवन करें। 
*एलोवेरा का जूस पीएं।
 *7 बादाम नित्य सेवन करें। 
*सफेद तिल को खाने में इस्तेमाल करें।
* पालक, गाय का घी, खजूर का इस्तेमाल करते रहें।
*नीम की पत्तीयों का पेस्ट बनाएं उसे छननी में डालकर उसका रस निकाल लें फिर उसमें 1 चम्मच शहद डालें और मिलाकर दिन में 3 बार पीएं।

टमाटर का सेवन न करें -

सफेद दाग की समस्या से ग्रसित लोगों को टमाटर और टमाटर से संबंधित किसी भी तरह की चीज का सेवन नहीं करना चाहिए। यानि की आपको कच्चा पका टमाटर और टमाटर की चटनी से भी परहेज करना चाहिए।
सफेद दाग की समस्या कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। आयुर्वेदिक उपायों के जरिए इसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। साथ ही यह बीमारी छूने से किसी से हाथ मिलाने से, या फिर शारीरिक संबंध बनाने से भी नहीं फैलती है।

1.5.20

आलू से वजन कम करने के तरीके



आपने अक्सर लोगों को यह कहते सुना होगा कि अगर आप वजन घटाने की कोशिश कर रहे हैं तो आपको कार्बोहाइड्रेट्स से दूर रहना चाहिए या फिर बेहद कम मात्रा में इनका सेवन करना चाहिए। वजन घटाते वक्त ज्यादातर लोग आलू से तो सबसे पहले दूरी बना लेते हैं। लेकिन आज हम आपको बता रहे हैं एक खास पटेटो डायट के बारे में जिसमें आपको 5 दिन तक सिर्फ पटेटो यानी आलू खाना है और फिर देखें कैसे घटेगा आपका वजन|

रोजाना खाएं आलू

जर्नल मॉलिक्युलर ऑफ न्यूट्रिशन एंड फूड रिसर्च में प्रकाशित एक नई स्टडी के मुताबिक, अगर पतला होना है तो रोजाना आलू खाएं। इतना ही नहीं, अगर आप केवल 5 दिन तक पटेटो डायट फॉलो कर लें, तो आपका वजन कई किलो तक कम हो जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि आलू खाने के बाद आपको भूख का एहसास नहीं होता। इससे पेट जल्दी भर जाता है और आप ओवरईटिंग से भी बच जाते हैं।

कैलरी होती है कम

इस नई स्टडी के मुताबिक आलू वजन घटाने में असरदार रूप से काम करता है क्योंकि यह एक ऐसा स्टार्ची फूड है जिसमें कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट ज्यादा होता है जबकी कैलरीज कम। साथ ही मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने के साथ साथ वजन को कंट्रोल करने में मदद करता है आलू।
जब हम कहते हैं कि आलू वजन कम करने में मदद करता है तो इसका मतलब फ्राइज और चिप्स खाने से नहीं होता है। जाहिर है तेल में तले खाद्य पदार्थ खाने से आपका वजन तो बढ़ेगा ही साथ ही यह आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी होता है फिर चाहे वह आलू हो या खीरा। इसलिए जब आलू की बात आती है तो इसे खाने का सही तरीका वजन कम करने में काफी सहायक होता है। हम जानते हैं कि शरीर में फैट जमा होने से तरह-तरह की बीमारियां होने लगती है। इसके कारण वजन बढ़ना, कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाना, हाई ब्लड प्रेशर और घुटनों में दर्द की शिकायत शुरू हो जाती है।

वजन घटाता है, सेहत नहीं

एक मीडियम साइज के आलू में जहां 168 कैलरी होती है वहीं उबले आलू में सिर्फ 100 कैलरीज। वैज्ञानिकों का कहना है आलू एक ऐसा फूड है जो वजन तो घटाता है लेकिन सेहत नहीं। इसे अगर आप दिनभर में 10 भी खा लेते हैं, तो भी आप दूसरे फूड से कम कैलरी इनटेक करेंगे और साथ में हेल्दी भी रहेंगे।

पोषक तत्व से भरपूर

आलू में फाइबर और प्रोटीन के अलावा विटमिन बी, सी, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीज, फॉस्फॉरस जैसे पोषक तत्व काफी तादाद में होते हैं।

उबालकर खाना फायदेमंद


यदि दो-तीन आलू उबालकर छिलके सहित थोड़े से दही के साथ खा लिए जाएं तो ये एक संपूर्ण आहार का काम करता है।

आलू नहीं, चिकनाई से मोटापा

आलू को तलकर तीखे मसाले, घी आदि लगाकर खाने से जो चिकनाई पेट में जाती है, वह चिकनाई मोटापा बढ़ाती है आलू नहीं। वहीं, अगर आप आलू को उबालकर खाते हैं तो हेल्थ को तो फायदा मिलता ही है साथ ही वजन भी कम होता है।

आलू के छिलके भी हैं फायदेमंद

आलू के छिलके ज्यादातर फेंक दिए जाते हैं, जबकि छिलके सहित आलू खाने से ज्यादा शक्ति मिलती है। जिस पानी में आलू उबाले गए हों, वह पानी न फेंकें, बल्कि इसी पानी से आलुओं का रसा बना लें। इस पानी में मिनरल और विटमिन बहुत होते हैं।

आवश्यक सामग्री:

उबला हुआ आलू - 2
दही - 1 मीडियम साइज कप
नमक - 1 चम्मच यदि आप इस प्राकृतिक उपाय का सही तरीके से और नियमित इस्तेमाल करते तो खासतौर पर वजन घटाने में यह काफी सहायक है।
इस उपाय के साथ-साथ आपको नियमित कम से कम 45 मिनट व्यायाम करना चाहिए और कम ऑयली और कम फैटी खाद्य पदार्थों को खाना चाहिए। उचित भोजन और नियमित आहार के बिना यह उपाय प्रभावी तरीके से काम नहीं करता है।

30.4.20

हरी मिर्च खाने के स्वास्थ्य लाभ व नुकसान



हरी मिर्च स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होती है। हरी मिर्च एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर होती है जो कई तरह की होती है। शिमला मिर्च भी हरी मिर्च की श्रेणी में आती है जो कि स्वास्थ्य के लिए उपयोगी सुपरफूड होता है। भारतीय घरों में हरी मिर्च पाउडर और हरी मिर्च का खाना बनाने, मसालों और चटनी आदि बनाने में इस्तेमाल करते हैं साथ ही इसे कच्चा खाने का इस्तेमाल कर सकते हैं।
हरी मिर्च खाने के स्वास्थ्यवर्धक लाभ
विटामिन सी हरी मिर्च में पर्याप्त मात्रा में होता है। आपने अक्सर महसूस किया होगा की हरी मिर्च खाने से बंद नाक खुल जाती है। हरी मिर्च का सेवन करने से उसमें मौजूद विटामिन सी इम्यूनिटी बूस्ट करते हैं। जिससे रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
खाना पचाने के लिए लाभकारी
मिर्च में फाईबर पर्याप्त मात्रा में होता है इसलिए इसे खाने से पाचन तंत्र को मदद मिलती है। यहीं कारण है कि खाना पचाने के हेतु हरी मिर्च का सेवन लाभकारी होता है।
त्वचा के लिए लाभकारी
मिर्च में विटामिन सी के साथ विटामिन ई भी पर्याप्त मात्रा में होता है । इसका सेवन करने से त्वचा को नेचुरल ऑयल मिलता है जिससे त्वचा खूबसूरत और निखरी बनी रहती है।
ब्लड शुगर लेवल को सही रखने में
डायबिटीज के रोगियों के लिए हरी मिर्च खाना बहुत लाभदायक होता है। हरी मिर्च खाने से रक्त शर्करा का लेवल सही बना रहता है इस कारण डायबिटीज के पीड़ित लोगों के लिए हरी मिर्च खाना लाभकारी रहता है।
जुकाम और साइनस के लिए
कैप्साइसिन नामक तत्व हरी मिर्च में पाया जाता है जो कि म्यूकस को तरल बनाता है। यह नाक और साइनस के छिद्रों को खोलने में मदद करता है। इसलिए हरी मिर्च खाना सर्दी-जुकाम और साइनस इंफेक्शन के लिए फायदेमंद होता है।
खून की कमी दूर करने में
मिर्च मे पर्याप्त मात्रा में आयरन होता है। इसलिए इसे खाने से खून में हिमोग्लोबिन की कमी नहीं होती है। यहीं कारण है कि हरी मिर्च खाने से खून की कमी जैसे रोग नहीं होते हैं।
कैंसर का खतरा दूर होता है
में एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं जो मुक्त-मूलकों को खत्म करते हैं और कैंसर के खतरे को दूर करते हैं।
तनाव को कम करने में
जब आप हरी मिर्च का सेवन करते हैं तो यह एंडोर्फिन नामक एक हार्मोन के स्तर को बढ़ा देती है। एंडोर्फिन तनाव को कम करके मूड को ठीक करने वाला एक हार्मोन होता है इसलिए हरी मिर्च का सेवन करने से तनाव कम होता है।
हरी मिर्च खाने के नुकसान
वैसे तो हरी मिर्च खाना सेहत के लिए लाभकारी होता है पर अति किसी भी चीज की अच्छी नहीं होती। ऐसे में आवश्यकता से अधिक सेवन आपकी सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। 
ज्यादा हरी मिर्च खाने के नुकसान और हानिकारक दुष्प्रभाव
ज्यादा हरी मिर्च खाना मां बनने वाली महिलाओं के लिए हानिकारक: हरी मिर्च खाने से पेट की गर्मी बढ़ जाती है जिससे मां बनने वाली महिलाओं को ज्यादा हरी मिर्च ना खाने की सलाह दी जाती है।
हरी मिर्च खाना जीभ के लिए हानिकारक: ज्यादा हरी मिर्च खाने से मुंह में जलन लग सकती है और इसका तीखापन आपकी जीभ की त्वचा को काट सकता है। इसलिए अधिक हरी मिर्च का सेवन हानिकारक होता है।
ज्यादा हरी मिर्च खाने से मेटाबोलिज्म प्रभावित होना: हरी मिर्च में कैप्साइसिन नामक तत्व पाया जाता है जिसकी मात्रा शरीर में ज्यादा होने पर यह मेटाबोलिज्म को प्रभावित करता है इसलिए जरूरत से ज्यादा हरी मिर्च का सेवन नहीं करना चाहिए।
इसके अलावा ज्यादा हरी मिर्च खाने से निम्न लक्षण भी हो सकते है
डायरिया
अल्सर
जलन
ब्लीडिंग जैसी समस्याएं भी हो सकती है।

कार्बोवेज औषधि के गुण और लाभ

व्यापक-लक्षण 
पेट के ऊपरी भाग में वायु का प्रकोप – पुराना अजीर्ण रोग, खट्टी तथा खाली डकारें आना ठंडी हवा; पंखे की हवा
किसी कठिन रोग के पश्चात उपयोगी डकार आने से कमी
सिर्फ गर्म हालत से जुकाम; अथवा गर्म से एकदम ठंडक में आने से होने वाले रोग (जैसे, जुकाम, सिर-दर्द आदि) पांव ऊँचे कर के लेटना
हवा की लगातार इच्छा (न्यूमोनिया, दमा, हैजा आदि) लक्षणों में वृद्धि
जलन, ठंडक तथा पसीना-भीतर जलन बाहर ठंडक (जैसे, हैजा आदि में) गर्मी से रोगी को परेशानी
शरीर तथा मन की शिथिलता (रुधिर का रिसते रहना, विषैला फोड़ा, सड़ने वाला वैरीकोज़ वेन्ज, थकान आदि ) वृद्धावस्था की कमजोरी
यह मृत-संजीवनी दवा कही जाती है गरिष्ट भोजन से पेट में वायु का बढ़ जाना

*पेट के ऊपरी भाग में वायु का प्रकोप – 

कार्बो वेज औषधि वानस्पतिक कोयला है। हनीमैन का कथन है कि पहले कोयले को औषधि शक्तिहीन माना जाता था, परन्तु कुछ काल के बाद श्री लोविट्स को पता चला कि इसमें कुछ रासायनिक तत्त्व हैं जिनसे यह बदबू को समाप्त कर देता है। इसी गुण के आधार पर ऐलोपैथ इसे दुर्गन्धयुक्त फोड़ों पर महीन करके छिड़कने लगे, मुख की बदबू हटाने के लिये इसके मंजन की सिफारिश करने लगे और क्योंकि यह गैस को अपने में समा लेता है इसलिये पेट में वायु की शिकायत होने पर शुद्ध कोयला खाने को देने लगे। कोयला कितना भी खाया जाय वह नुकसान नहीं पहुँचाता है। परन्तु हनीमैन का कथन था कि स्थूल कोयले का यह असर चिर-स्थायी नहीं है। मुँह की बदबू यह हटायेगा परन्तु कुछ देर बाद बदबू आ जायेगी, फोड़े की बदबू में जब तक यह लगा रहेगा तभी तक हटेगी, पेट की गैस में भी यह इलाज नहीं है। हनीमैन का कथन है कि स्थूल कोयला वह काम नहीं कर सकता जो शक्तिकृत कोयला कर सकता है। कार्बो वेज पेट की गैस को भी रोकता है, विषैले, सड़ने वाले जख्म-गैंग्रीन-को भी ठीक करता है। पेट की वायु के शमन में होम्योपैथी में तीन औषधियां मुख्य हैं – वे हैं: कार्बो वेज, चायना तथा लाइको।

कार्बो वेज, चायना तथा लाइकोपोडियम की तुलना – 

डॉ० नैश का कथन है कि पेट में गैस की शिकायत में कार्बो वेज ऊपरी भाग पर, चायना संपूर्ण पेट में गैस भर जाने पर, और लाइको पेट के निचले भाग में गैस होने पर विशेष प्रभावशाली है।

*पुराना अजीर्ण रोग, खट्टी तथा खाली डकारें आना – 

पुराने अजीर्ण रोग में यह लाभकारी है। रोगी को खट्टी डकारें आती रहती हैं, पेट का ऊपर का हिस्सा फूला रहता है, हवा पसलियों के नीचे अटकती है, चुभन पैदा करती है, खट्टी के साथ खाली डकारें भी आती हैं। डकार आने के साथ बदबूदार हवा भी खारिज होती है। डकार तथा हवा के निकास से रोगी को चैन पड़ता है। पेट इस कदर फूल जाता है कि धोती या साड़ी ढीली करनी पड़ती है। कार्बो वेज में डकार से आराम मिलता है, परन्तु चायना और लाइको में डकार से आराम नहीं मिलता।

*किसी कठिन रोग के पश्चात उपयोगी – 

अगर कोई रोग किसी पुराने कठिन रोग के बाद से चला आता हो, तब कार्बो वेज को स्मरण करना चाहिये। इस प्रकार किसी पुराने रोग के बाद किसी भी रोग के चले आने का अभिप्राय यह है कि जीवनी-शक्ति की कमजोरी दूर नहीं हुई, और यद्यपि पुराना रोग ठीक हो गया प्रतीत होता है, तो भी जीवनी शक्ति अभी अपने स्वस्थ रूप में नहीं आयी। उदाहरणार्थ, अगर कोई कहे कि जब से बचपन में कुकुर खांसी हुई तब से दमा चला आ रहा है, जब से सालों हुए शराब के दौर में भाग लिया तब से अजीर्ण रोग से पीड़ित हूँ, जब से सामर्थ्य से ज्यादा परिश्रम किया तब से तबीयत गिरी-गिरी रहती है, जब से चोट लगी तब से चोट तो ठीक हो गई किन्तु मौजूदा शिकायत की शुरूआत हो गई, ऐसी हालत में चिकित्सक को कार्बो वेज देने की सोचनी चाहिये। बहुत संभव है कि इस समय रोगी में जो लक्षण मौजूद हों वे कार्बो वेज में पाये जाते हों क्योंकि इस रोग का मुख्य कारण जीवनी-शक्ति का अस्वस्थ होना है, और इस शक्ति के कमजोर होने से ही रोग पीछा नहीं छोड़ता।
जब तक कार्बो वेज के रोगी का नाक बहता रहता है, तब तक उसे आराम रहता है, परन्तु यदि गर्मी से हो जाने वाले इस जुकाम में वह ठंड में चला जाय, तो जुकाम एकदम बंद हो जाता है और सिर-दर्द शुरू हो जाता है। बहते जुकाम में ठंड लग जाने से, नम हवा में या अन्य किसी प्रकार से जुकाम का स्राव रुक जाने से सिर के पीछे के भाग में दर्द, आँख के ऊपर दर्द, सारे सिर में दर्द, हथौड़ों के लगने के समान दर्द होने लगता है। पहले जो जुकाम गर्मी के कारण हुआ था उसमें कार्बो वेज उपयुक्त दवा थी, अब जुकाम को रुक जाने पर कार्बो वेज के अतिरिक्त कैलि बाईक्रोम, कैलि आयोडाइड, सीपिया के लक्षण हो सकते हैं।

*हवा की लगातार इच्छा (न्यूमोनिया, दमा, हैज़ा आदि) – 

कार्बो वेज गर्म-मिजाज़ की है, यद्यपि कार्बो एनीमैलिस ठंडे मिजाज़ की है। गर्म-मिजाज की होने के कारण रोगी को ठंडी और पंखे की हवा की जरूरत रहती है। कोई भी रोग क्यों न हो-बुखार, न्यूमोनिया, दमा, हैजा-अगर रोगी कहे-हवा करो, हवा करो-तो कार्बो वेज को नहीं भुलाया जा सकता। अगर रोगी कहे कि मुँह के सामने पंखे की हवा करो तो कार्बो वेज, और अगर कहे कि मुँह से दूर पंखे को रख कर हवा करो तो लैकेसिस औषधि है। कार्बो वेज में जीवनी-शक्ति अत्यन्त शिथिल हो जाती है इसलिये रोगी को हवा की बेहद इच्छा होती है। अगर न्यूमोनिया में रोगी इतना निर्बल हो जाय कि कफ जमा हो जाय, और ऐन्टिम टार्ट से भी कफ नहीं निकल रहा। उस हालत में अगर रोगी हवा के लिये भी बेताब हो, तो कार्बो वेज देने से लाभ होगा। दमे का रोगी सांस की कठिनाई से परेशान होता है। उसकी छाती में इतनी कमजोरी होती है कि वह महसूस करता है कि अगला सांस शायद ही ले सके। रोगी के हाथ-पैर ठंडे होते हैं, मृत्यु की छाया उसके चेहरे पर दीख रही होती है, छाती से सांय-सांय की आवाज आ रही होती हे, सीटी-सी बज रही होती है, रोगी हाथ पर मुंह रखे सांस लेने के लिये व्याकुल होता है और कम्बल में लिपटा खिड़की के सामने हवा के लिये बैठा होता है और पंखे की हवा में बैठा रहता है। ऐसे में कार्बो वेज दिया जाता है। न्यूमोनिया और दमे की तरह हैजे में भी कार्बो वेज के लक्षण आ जाते हैं जब रोगी हवा के लिये व्याकुल हो जाता है। हैजे में जब रोगी चरम अवस्था में पहुँच जाय, हाथ-पैरों में ऐंठन तक नहीं रहती, रोगी का शरीर बिल्कुल बर्फ के समान ठंडा पड़ गया हो, शरीर के ठंडा पसीना आने लगे, सांस ठंडी, शरीर के सब अंग ठंडे-यहां तक कि शरीर नीला पड़ने गले, रोगी मुर्दे की तरह पड़ जाय, तब भी ठंडी हवा से चैन मिले किन्तु कह कुछ भी न सके-ऐसी हालत में कार्बो वेज रोगी को मृत्यु के मुख से खींच ले आये तो कोई आश्चर्य नहीं।

*सिर्फ गर्म हालत से जुकाम; यह गर्म से एकदम ठंड में आने से होने वाले जुकाम, खांसी, सिर दर्द आदि – 

कार्बो वेज जुकाम-खांसी-सिरदर्द आदि के लिए मुख्य-औषधि है। रोगी जुकाम से पीड़ित रहा करता है। कार्बो वेज की जुकाम-खांसी-सिरदर्द कैसे शुरू होती है? – रोगी गर्म कमरे में गया है, यह सोच कर कि कुछ देर ही उसने गर्म कमरे में रहना है, वह कोट को डाले रहता है। शीघ्र ही उसे गर्मी महसूस होने लगती है, और फिर भी यह सोचकर कि अभी तो बाहर जा रहा हूँ-वह गर्म कोट को उतारता नहीं। इस प्रकार इस गर्मी का उस पर असर हो जाता है और वह छीकें मारने लगता है, जुकाम हो जाता है। नाक से पनीला पानी बहने लगता है और दिन-रात वह छींका करता है। यह तो हुआ गर्मी से जुकाम हो जाना। औषधियों का जुकाम शुरू होने का अपना-अपना ढंग है। कार्बो वेज का जुकाम नाक से शुरू होता है, फिर गले की तरफ जाता है, फिर श्वास-नलिका की तरफ जाता है और अन्त में छाती में पहुंचता है। फॉसफोरस की ठंड लगने से बीमारी पहले ही छाती में या श्वास-नलिका में अपना असर करती है।

*शरीर तथा मन की शिथिलता (रुधिर का रिसते रहना, विषैला फोड़ा, सड़ने वाला वैरीकोज़ वेन्ज, थकान आदि 

शिथिलता कार्बो वेज का चरित्रगत-लक्षण है। प्रत्येक लक्षण के आधार में शिथिलता, कमजोरी, असमर्थता बैठी होती है। इस शिथिलता का प्रभाव रुधिर पर जब पड़ता है तब हाथ-पैर फूले दिखाई देते हैं क्योंकि रुधिर की गति ही धीमी पड़ जाती है, रक्त-शिराएं उभर आती हैं, रक्त-संचार अपनी स्वाभाविक-गति से नहीं होता, वैरीकोज़ वेन्ज़ का रोग हो जाता है, रक्त का संचार सुचारु-रूप से चले इसके लिये टांगें ऊपर करके लेटना या सोना पड़ता है। रक्त-संचार की शिथिलता के कारण अंग सूकने लगते हैं, अंगों में सुन्नपन आने लगती है। अगर वह दायीं तरफ लेटता है तो दायां हाथ सुन्न हो जाता है, अगर बायीं तरफ लेटता है तो बायां हाथ सुन्न हो जाता है। रक्त-संचार इतना शिथिल हो जाता है कि अगर किसी अंग पर दबाव पड़े, तो उस जगह का रक्त-संचार रुक जाता है। रक्त-संचार की इस शिथिलता के कारण विषैले फोड़े, सड़ने वाले फोड़े, गैंग्रीन आदि हो जाते हैं जो रक्त के स्वास्थ्यकर संचार के अभाव के कारण ठीक होने में नहीं आते, जहां से रुधिर बहता है वह रक्त-संचार की शिथिलता के कारण रिसता ही रहता है।

रुधिर का नाक, जरायु, फेफड़े, मूत्राशय आदि से रिसते रहना – 

रुधिर का बहते रहना कार्बो वेज का एक लक्षण है। नाक से हफ्तों प्रतिदिन नकसीर बहा करती है। जहां शोथ हुई वहाँ से रुधिर रिसा करता है। जरायु से, फेफड़ों से, मूत्राशय से रुधिर चलता रहता है, रुधिर की कय भी होती है। यह रुधिर का प्रवाह वेगवान् प्रवाह नहीं होता जैसा एकोनाइट, बेलाडोना, इपिकाका, हैमेमेलिस या सिकेल में होता है। इन औषधियों में तो रुधिर वेग से बहता है, कार्बो वेज में वेग से बहने के स्थान में वह रिसता है, बारीक रक्त-वाहिनियों द्वारा धीमे-धीमे रिसा करता है। रोगिणी का ऋतु-स्राव के समय जो रुधिर चलना शुरू होता है वह रिसता रहता है और उसका ऋतु-काल लम्बा हो जाता है। एक ऋतु-काल से दूसरे ऋतु-काल तक रुधिर रिसता जाता है। बच्चा जनने के बाद रुधिर बन्द हो जाना चाहिये, परन्तु क्योंकि इस औषधि में रुधिर-वाहिनियां शिथिल पड़ जाती हैं, इसलिये रुधिर बन्द होने के स्थान में चलता रहता है, धीरे-धीरे रिसता रहता है। ऋतु-काल, प्रजनन आदि की इन शिकायतों को, तथा इन शिकायतों से उत्पन्न होनेवाली कमजोरी को कार्बो वेज दूर कर देता है। कभी-कभी जनने के बाद प्लेसेन्टा को बाहर धकेल देने की शक्ति नहीं होती। अगर इस हालत में रुधिर धीरे-धीरे रिस रहा हो, तो कार्बो वेज की कुछ मात्राएँ उसे बहार धकेल देंगी और चिकित्सक को शल्य-क्रिया करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

विषैला फोड़ा, सड़नेवाला ज़ख्म, गैंग्रीन – 

क्योंकि रक्त-वाहिनियां शिथिल पड़ जाती हैं इसलिये जब भी कभी कोई चोट लगती है, तब वह ठीक होने के स्थान में सड़ने लगती है। फोड़े ठीक नहीं होते, उनमें से हल्का-हल्का रुधिर रिसा करता है, वे विषैले हो जाते हैं, और जब फोड़े ठीक न होकर विषैला रूप धारण कर लेते हैं, तब गैंग्रीन बन जाती है। जब भी कोई रोग शिथिलता की अवस्था में आ जाता है, ठीक होने में नहीं आता, तब जीवनी शक्ति की सचेष्ट करने का काम कार्बो वेज करता है।

वेरीकोज़ वेन्ज – 

रुधिर की शिथिलता के कारण हदय की तरफ जाने वाला नीलिमायुक्त अशुद्ध-रक्त बहुत धीमी चाल से जाता है, इसलिये शिराओं में यह रक्त एकत्रित हो जाता है और शिराएँ फूल जाती हैं। इस रक्त के वेग को बढ़ाने के लिये रोगी को अपनी टांगें ऊपर करके लेटना या सोना पड़ता है। रक्त की इस शिथिलता को कार्बो वेज दूर कर देता है क्योंकि इसका काम रक्त-संचार की कमजोरी को दूर करना है।



शारीरिक तथा मानसिक थकान –
 शारीरिक-थकान तो इस औषधि का चरित्रगत-लक्षण है ही क्योंकि शिथिलता इसके हर रोग में पायी जाती है। शारीरिक-शिथिलता के समान रोगी मानसिक-स्तर पर भी शिथिल होता है। विचार में शिथिल, सुस्त, शारीरिक अथवा मानसिक कार्य के लिये अपने को तत्पर नहीं पाता।
*यह दवा मृत-संजीवनी कही जाती है – 
कार्बो वेज को होम्योपैथ मृत-संजीवनी कहते हैं। यह मुर्दों में जान फूक देती है। इसका यह मतलब नहीं कि मुर्दा इससे जी उठता है, इसका यही अभिप्राय है कि जब रोगी ठंडा पड़ जाता है, नब्ज़ भी कठिनाई से मिलती है, शरीर पर ठंडे पसीने आने लगते हैं, चेहरे पर मृत्यु खेलने लगती है, अगर रोगी बच सकता है तब इस औषधि से रोगी के प्राण लौट आते हैं। कार्बो वेज जैसी कमजोरी अन्य किसी औषधि में नहीं है, और इसलिये मरणासन्न-व्यक्ति की कमजोरी हालत में यह मृत-संजीवनी का काम करती है। उस समय 200 या उच्च-शक्ति की मात्रा देने से रोगी की जी उठने की आशा हो सकती है।
*जलन, ठंडक तथा पसीना-भीतर जलन बाहर ठंडा (जैसे, हैज़ा आदि में) – 
कार्बो वेज का विशेष-लक्षण यह है कि भीतर से रोगी गर्मी तथा जलन अनुभव करता है, परन्तु बाहर त्वचा पर वह शीत अनुभव करता है। कैम्फर में हमने देखा था कि भीतर-बाहर दोनों स्थानों से रोगी ठंडक अनुभव करता है परन्तु कपड़ा नहीं ओढ़ सका। जलन कार्बो वेज का व्यापक-लक्षण है – शिराओं (Veins) में जलन, बारीक-रक्त-वाहिनियों (Capillaries) में जलन, सिर में जलन, त्वचा में जलन, शोथ में जलन, सब जगह जलन क्योंकि कार्बो वेज लकड़ी का अंगारा ही तो है। परन्तु इस भीतरी जलन के साथ जीवनी-शक्ति की शिथिलता के कारण हाथ-पैर ठंडे, खुश्क या चिपचिपे, घुटने ठंडे, नाक ठंडी, कान ठंडे, जीभ ठंडी। क्योंकि शिथिलावस्था में हृदय का कार्य भी शिथिल पड़ जाता है इसलिये रक्त-संचार के शिथिल हो जाने से सारा शरीर ठंडा हो जाता है। यह शरीर की पतनावस्था है। इस समय भीतर से गर्मी अनुभव कर रहे, बाहर से ठंडे हो रहे शरीर को ठंडी हवा की जरूरत पड़ा करती है। इस प्रकार की अवस्था प्राय: हैजे आदि सांघातिक रोग में दीख पड़ती है जब यह औषधि लाभ करती है।
 अन्य-लक्षण
*ज्वर की शीतावस्था में प्यास, ऊष्णावस्था में प्यास का अभाव –
 यह एक विचित्रण-लक्षण है क्योंकि शीत में प्यास नहीं होनी चाहिये, गर्मी की हालत में प्यास होनी चाहिये। सर्दी में प्यास और गर्मी में प्यास का न होना किसी प्रकार समझ में नहीं आ सकता, परन्तु ऐसे विलक्षण-लक्षण कई औषधियों में दिखाई पड़ते है। जब ऐसा कोई विलक्षण लक्षण दीखे, तब वह चिकित्सा के लिये बहुत अधिक महत्व का होता है क्योंकि वह लक्षण रोग का न होकर रोगी का होता है, उसके समूचे अस्तित्व का होता है। होम्योपैथी का काम रोग का नहीं रोगी का इलाज करना है, रोगी ठीक हो गया तो रोग अपने-आप चला जाता है।
* तपेदिक की अन्तिम अवस्था – 
तपेदिक की अन्तिम अवस्था में जब रोगी सूक कर कांटा हो जाता है, खांसी से परेशान रहता है, रात को पसीने से तर हो जाता है, साधारण खाना खाने पर भी पतले दस्त आते हैं, तब इस औषधि से रोगी को कुछ बल मिलता है, और रोग आगे बढ़ने के स्थान में टिक जाता है।
*वृद्धावस्था की कमजोरी – 
युवकों को जब वृद्धावस्था की लक्षण सताने लगते हैं या वृद्ध व्यक्ति जब कमजोर होने लगते हैं, हाथ-पैर ठंडे रहते हैं, नसें फूलने लगती हैं, तब यह लाभप्रद है। रोगी वृद्ध हो या युवा, जब उसके चेहरे की चमक चली जाती है, जब वह काम करने की जगह लेटे रहना चाहता है, अकेला पड़े रहना पसन्द करता है, दिन के काम से इतना थक जाता है कि किसी प्रकार का शारीरिक या मानसिक श्रम उसे भारी लगता है, तब इस औषधि से लाभ होता है।
शक्ति तथा प्रकृति – यह गहरी तथा दीर्घकालिक प्रभाव करने वाली औषधि है।


24.4.20

सुबह सुबह किशमिश का पानी पीने के फायदे


 किशमिश खाने के स्वाद को तो बढ़ाती ही है साथ ही यह आपकी सेहत का भी पूरा ध्यान रखती है. इसको पानी में डालकर अगर 20 मिनट तक उबाला जाए और पानी को रातभर रखने के बाद सुबह पीने से इसके कई लाभ होते हैं-
1. रोजाना सुबह के समय किशमिश के पानी का नियमित सेवन करने से कब्ज, एसिडि‍टी और थकान से निजात मिलती है
2॰ किशमिश का पानी  पीने से कोलेस्ट्रॉल लेवल नॉर्मल हो जाता है. यह आपके शरीर में ट्राईग्लिसेराइड्स के स्तर को कम करने में मददगार है.
3. इसमें फ्लेवेनॉइड्स एंटी ऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो त्वचा पर होने वाली झुर्रियों को तेजी से कम करने में सहायक है.
4. प्रतिदि‍न किशमिश का पानी पीने से लीवर मजबूत रहता है और यह मेटाबॉलिज्म के स्तर को नियंत्रित करने में भी सहायक है.
5.कब्ज या पाचन संबंधी समस्याओं से निपटने के लिए किशमिश का पानी बेहद लाभदायक पेय है और इसे पीने से पाचन तंत्र भी ठीक र‍हता है.

21.4.20

खीरा खाने के स्वास्थ्य लाभ


बालों व त्वचा की देखभाल

खीरे में सिलिकन व सल्फर बालों की ग्रोथ में मदद करते हैं। अच्छे परिणाम के लिए आप चाहें तो खीरे के जूस को गाजर व पालक के जूस के साथ भी मिलाकर ले सकते हैं। फेस मास्क में शामिल खीरे के रस त्वचा में कसाव लाता है। इसके अलावा खीरा त्वचा को सनबर्न से भी बचाता है। खीरे में मौजूद एस्कोरबिक एसिड व कैफीक एसिड पानी की कमी( जिसके कारण आंखों के नीचे सूजन आने लगती है।) को कम करता है।
शरीर को जलमिश्रित रखने में मदद करता है
खीरे में 95% पानी रहता है। इसलिए यह शरीर से विषाक्त और अवांछित पदार्थों को निकालने में मदद करके शरीर को स्वस्थ
 और जलमिश्रित रखने में मदद करता है।

मासिक धर्म में फायदेमंद

खीरे का नियमित सेवन से मासिक धर्म में होने वाली परेशानियों से छुटकारा मिलता है। लड़कियों को मासिक धर्म के दौरान काफी परेशानी होती है, वो दही में खीरे को कसकर उसमें पुदीना, काला नमक, काली मिर्च, जीरा और हींग डालकर रायता बनाकर खाएं इससे उन्हें काफी आराम मिलेगा।

मसूडे स्वस्थ रखता है


खीरा खाने से मसूडों की बीमारी कम होती हैं। खीरे के एक टुकड़े को जीभ से मुंह के ऊपरी हिस्से पर आधा मिनट तक रोकें। ऐसे में खीरे से निकलने वाला फाइटोकैमिकल मुंह की दुर्गंध को खत्म करता है।

विटामिन के का अच्छा माध्यम

खीरे के छिलके में विटामिन-के पर्याप्त मात्रा में मिलता है. ये विटामिन प्रोटीन को एक्ट‍िव करने का काम करता है. जिसकी वजह से कोशिकाओं के विकास में मदद मिलती है. साथ ही इससे ब्लड-क्लॉटिंग की समस्या भी पनपने नहीं पाती है।

कैंसर से बचाए

खीरा के नियमित सेवन से कैंसर का खतरा कम होता है। खीरे में साइकोइसोलएरीक्रिस्नोल, लैरीक्रिस्नोल और पाइनोरिस्नोल तत्व होते हैं। ये तत्व सभी तरह के कैंसर जिनमें स्तन कैंसर भी शामिल है के रोकथाम में कारगर हैं।

मुँह के बदबू से राहत दिलाता है

अगर मुँह से बदबू आ रही है तो कुछ मिनटों के लिए मुँह में खीरे का टुकड़ा रख लें क्योंकि यह जीवाणुओं को मारकर धीरे-धीरे बदबू निकलना कम कर देता है। आयुर्वेद के अनुसार पेट में गर्मी होने के कारण मुँह से बदबू निकलता है, खीरा पेट को शीतलता प्रदान करने में मदद करता है।

के लिए फायदेमंद

खीरे के छिलके में ऐसे फाइबर मौजूद होते हैं जो घुलते नहीं है. ये फाइबर पेट के लिए संजीवनी बूटी की तरह काम करता है. कब्ज की परेशानी को दूर करने में भी ये कारगर है. खीरे के छिलके से पेट अच्छी तरह साफ हो जाता है।



यह हैंगओवर को कम करने में मदद करता है

शराब पीने के बहुत सारे दुष्परिणाम होते हैं उनमें अगले दिन का हैंगओवर बहुत ही कष्ट देनेवाला होता है। इससे बचने के लिए आप रात को सोने से पहले खीरा खाकर सोयें। क्योंकि खीरे में जो विटामिन बी, शुगर और इलेक्ट्रोलाइट होते हैं वे हैंगओवर को कम करने में बहुत मदद करते हैं।

वजन कम करने में सहायक

अगर आप वजन कम करना चाह रही हैं तो आज से खीरे के छिलके को अपनी डाइट का हिस्सा बना लें. वैसे तो खीरा भी वजन कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है लेकिन छिलके के साथ इसका सेवन करना और भी अधिक फायदेमंद रहता है।

     सलाद के तौर पर प्रयोग किए जाने वाले खीरे में इरेप्सिन नामक एंजाइम होता है, जो प्रोटीन को पचाने में सहायता करता है। खीरा पानी का बहुत अच्छा स्रोत होता है, इसमें 96% पानी होता है। खीरे में विटामिन ए, बी1, बी6 सी,डी पौटेशियम, फास्फोरस, आयरन आदि प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। नियमित रुप से खीरे के जूस शरीर को अंदर व बाहर से मजबूत बनाता है।



मधुमेह व रक्तचाप में फायदेमंद


मधुमेह व रक्तचाप की समस्या से बचने के लिए नियमित रुप से खीरे का सेवन फायदेमंद हो सकता है। खीरे के रस में वो तत्व हैं जो पैनक्रियाज को सक्रिय करते हैं। पैनक्रियाज सक्रिय होने पर शरीर में इंसुलिन बनती है। इंसुलिन शरीर में बनने पर मधुमेह से लड़ने में मदद मिलती है। खीरा खाने से कोलस्ट्रोल का स्तर कम होता है। इससे हृदय संबंधी रोग होने की

 आशंका कम रहती है। खीरा में फाइबर, पोटैशियम और मैगनीशियम होता है जो ब्लड प्रेशर दुरुस्त रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। खीरा हाई और लो ब्लड प्रेशर दोनों में ही एक तरह से दवा का कार्य करता है।

आंखों के लिए लाभकारी


अक्सर फेसपैक लगाने के बाद आंखों की जलन से बचने के लिए खीरे को स्लाइस की तरह काटकर आंखों की पलक के ऊपर पर रखते हैं। इससे आंखों को ठंडक मिलती है। खीरा की तासीर जलन कम करने की होती है। जरूरी नहीं है कि सिर्फ फेसपैक लगाने के बाद ही ऐसा कर सकते हैं। जब भी आंखों में जलन महसूस हो तो आप खीरे की मदद ले सकते हैं।

20.4.20

लहसुन की औषधीय गुण और लाभ



सर्दी से बचाव-

लहसुन की तासीर गर्म होने के कारण यह ठण्‍ड को दूर करने का कुदरती उपाय है। कई शोध इस बात को साबित कर चुके हैं कि ठंड के दिनों में लहसुन के सेवन से सर्दी नहीं लगती। सर्दियों के मौसम में गाजर, अदरक और लहसुन का जूस बनाकर पीने से शरीर को एंटीबायोटिक्स मिलते हैं और ठंड कम लगती है। सर्दी-जुकाम में लहसुन रामबाण है, इसे दूध में उबालकर पिलाने से बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।


दिल के लिए फायदेमंद

उच्‍च रक्‍तचाप को दूर करने में भी लहसुन काफी फायदेमंद होता है। इसमें मौजूद एलिसिन नामक तत्‍व उच्‍च रक्त
उच्‍च रक्‍तचापचाप को सामान्‍य करने में मदद करते है। उच्‍च रक्तचाप के मरीज अगर नियमित रूप से लहसुन का सेवन करते है तो इससे उनका रक्चाप नार्मल रहता है। 'जर्नल आफ न्यूट्रीशन' के अनुसार, रोजाना लहसुन के सेवन से कोलेस्ट्राल में 10 फीसदी की गिरावट आती है, जिससे हृदयरोगों की संभावना कम हो जाती है।

गर्भावस्‍था के लिए उत्तम

गर्भावस्था के दौरान लहसुन का नियमित सेवन मां और शिशु, दोनों के स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है। यह गर्भ के भीतर शिशु के वजन को बढ़ाने में सहायक है। गर्भवती महिलाओं को लहसुन का सेवन नियमित तौर पर करना चाहिए। गर्भवती महिला को अगर उच्च रक्तचाप की शिकायत हो तो, उसे पूरी गर्भावस्था के दौरान किसी न किसी रूप में लहसुन का सेवन करना चाहिए। यह रक्तचाप को नियंत्रित रख कर शिशु को नुकसान से बचाता है। उससे भावी शिशु का वजन भी बढ़ता है और समय पूर्व प्रसव का खतरा भी कम होता है।


बालों की समस्याओं में-

बालों की किसी भी तरह की समस्या चाहे वों रूसी की हो या जूं कि या फिर बालों के झड़ने की, सभी के लिए लहसुन का जूस वरदान की तरह काम करता है। लहसुन में एलीसिन नाम का सल्फर कंपाउंड होता है जो बालों के झड़ने की समस्या को तो खत्म ही करता है, बाकि परेशानियों का भी इलाज माना जाता है। इसे दिन में दो बार कम बाल वाली जगह पर लगाकर सुखने तक रखना चाहिए। इससे न सिर्फ नए बाल उगते हैं बल्कि रुसी और जूं जैसी समस्याओं से भी छुटकारा मिलता है।


16.4.20

शाबर मंत्र-समस्त रोग निवारण




शाबर मंत्र दुर्बलता का इलाज :-


तू है वीर बड़ा हनुमान |
लाल लंगोटी मुख में पान |
ऐर भगावै |
बैर भगावै |
अमुक में शक्ति जगावै |
रहे इसकी काया दुर्बल |
तो माता अंजनी की आन |
दुहाई गौरा पार्वती की |
दुहाई राम की |
दुहाई सीता की |
ले इसके पिण्ड की खबर |
ना रहे इसमें कोई कसर |
यदि कोई अकारण ही दुर्बल होता जा रहा हो और कारण समझ में नहीं आये तो इस मंत्र का 7 बार जाप करते हुए प्रत्येक मंत्र के बाद रोगी पर फूँक लगाए और यही रोगी स्वयं करता है तो रोगी खुद को फूक लगाए इसके साथ ही रोगी को हनुमान जी के मंदिर में हनुमान जी की प्रतिमा से उनके चरणों का सिन्दूर लाकर तिलक भी करें | रोगी किसी भी रोग से पीड़ित हो उसे स्वास्थ्य लाभ अवश्य मिलेगा |

शाबर मंत्र, मासिक पीड़ा का निवारण :


ॐ नमो आदेश मनसा माता का |
बड़ी – बड़ी अदरख |
पतली पतली रेश |
बड़े विष के जल फाँसी दे |
शेष गुरु का वचन न जाये खाली |
पिया पंच मुंड के बाम पद ठेली |
विषहरी राई की दुहाई |
थोड़ी सी अदरख लेकर इस मंत्र से सात बार फूंककर मासिक धर्म में होने वाली पीड़ाओं से ग्रसित स्त्री को खिलाने से मासिक पीड़ा शांत हो जाती है ||

शाबर मंत्र, नाभि का उखड़ना : 
ॐ नमो नाड़ी नाड़ी |
 नौ से नाड़ी |
 बहत्तर कोठा | 
चलै अगाड़ी | 
डिगै न कोठा |
 चले नाड़ी रक्षा करे
यती हनुमन्त कि आन | 
शब्द साँचा | 
पिंड काँचा | 
फुरे मंत्र ईश्वरोवाचा |

आप एक पीला बाँस ले ले जिसमे 9 गाँठें हो | अब रोगी को जमीन पर लिटा दे और उसकी नाभि के ऊपर यह बाँस खड़ा करके इस मंत्र का जाप करते हुए बाँस के छेद में जोर – जोर से फूंक मरते रहे इस प्रकार करने से उखड़ी हुई नाभि तुरंत ठीक हो जाती है ||


शाबर मंत्र, रोग(रोग समझ न आने पर 
) निवारण :-

ॐ नमो आदेश गुरु का |
काली कमली वाला श्याम |
उसको कहते है घनश्याम |
रोग नाशे |
शोक नाशे |
नहीं तो कृष्ण की आन |
राधा मीरा मनावे |
अमुक का रोग जावे |

जब यह समझ में नहीं आये की वास्तव में रोगी किस रोग से पीड़ित है तो इस मंत्र का जाप करते हुए रोगी को झाड़ा दे | रोगी को अवश्य लाभ मिलेगा ||
शाबर मंत्र, बवासीर का निवारण :

ॐ काका कता क्रोरी कर्ता |
ॐ करता से होय |
यरसना दश हूंस प्रकटे |
खूनी बादी बवासीर न होय |
मंत्र जान के न बताये |
द्वादश ब्रह्म हत्या का पाप होय |
लाख जप करे तो उसके वंश में न होय |
शब्द साँचा |
पिण्ड काँचा |
हनुमान का मंत्र साँचा |
फुरो मंत्र ईश्वरोवाचा


रात को पानी एक बर्तन में रख दे, सुबह होने पर उस पानी को ऊपर दिए मंत्र से 21 बार अभिमंत्रित करके गुदा प्रक्षालन करें | ऐसा करने से बवासीर कैसी भी हो शीघ्र ही ठीक हो जाती है ||
शाबर मंत्र, अनियमित मासिक-धर्म :
ॐ नमो आदेश श्री रामचंद्र सिंह गुरु का |
तोडूं गाँठ ओंगा ठाली |
तोड़ दूँ लाय |
तोड़ दूँ सरित |
परित देकर पाय |
यह देख हनुमन्त दौड़कर आये |
अमुक की देह शांति पाय |
रोग कूँ वीर भगाये |
रोग न नसै तो नरसिंह की दुहाई |
फुरे हुकुम खुदाई |







शाबर मंत्र, कमर दर्द निवारण :
चलता जाये |
उछलता जाये |
भस्म करन्ता |
डह डह जाये |
सिद्ध गुरु की आन |
महादेव की शान |
शब्द साँचा |
पिंड काँचा |
फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा |

इस मंत्र से रोगी को झाड़ा दे | इसके बाद एक कला धागा लेकर रोगी के सर से पाँव तक नापकर अलग कर ले और इस मंत्र को 21 बार पढ़े और हर मंत्र के साथ जहां मंत्र में फुरो शब्द आता है वहां दागे पर फूंक लगते जाये | इसके बाद इस दागे को रोगी को धारण करवा दे | ऐसा करने से रोगी को दर्द से शीघ्र मुक्ति मिल जाएगी ||
शाबर मंत्र, दांत-दाढ़ के दर्द का उपाय :-

ॐ नमो आदेश गुरु का |
बन में ब्याई अञ्जनी |
जिन जाया हनुमंत |
कीड़ा मकुड़ा माकड़ा |
ये तीनों भस्मन्त |
गुरु की शक्ति |
मेरी भक्ति |
फुरे मंत्र ईश्वरो वाचा |

मंत्र प्रयोग विधि: – एक नीम की टहनी लेकर दर्द के स्थान पर छुआते हुए इस मंत्र को सात बार जपें | इस प्रकार करने से रोगी का दांत या दाढ़ का दर्द समाप्त हो जायेगा और पीड़ित व्यक्ति अपने दर्द में आराम की अनुभूति करेगा |

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शाबर मंत्र, आँख के दर्द का निवारण :-


ॐ नमो आदेश गुरु का |
समुद्र |
समुद्र में खाई |
इस (मरद) की आँख आई |
पाकै, फूटे न पीड़ा करे |
गुरु गोरख की आज्ञा करें |
मेरी भक्ति |
गुरु की शक्ति |
फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा
मंत्र प्रयोग विधि :-
नमक की सात डली लेकर इस मंत्र का उच्चारण करते हुए सात बार झाड़ा करें तो नेत्रों (आँख) की पीड़ा दूर हो जाती है ( मंत्र में “मरद” की जगह आप रोगी भी कह सकते है या आप रोगी का नाम भी ले सकते है ||
शाबर मंत्र, समस्त रोग निवारण :-

वन में बैठी वानरी |
अंजनी जायो हनुमन्त |
बाल डमरू ब्याही बिलाई |
आँख कि पीड़ा |
मस्तक कि पीड़ा |
चौरासी बाई |
बलि बलि भस्म हो जाय |
पके न फूटे |
पीड़ा करें तो गोरखयती रक्षा करें |
गुरु कि शक्ति |
मेरी भक्ति |
फुरे मंत्र ईश्वरो वाचा |

इस मंत्र को 108 बार जाप करते हुए रोगी को झाड़ा देने से रोगी के समस्त रोग नष्ट हो जाते है ||





31.3.20

किशमिश के स्वास्थ्य लाभ


                                 

किशमिश बहुत छोटी होती है लेकिन इसमें कई सारे गुण मौजूद होते हैं। आपको बता दें कि किशमिश में आयरन, पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम और फाइबर की बहुत ज्यादा मात्रा होती है। इसके साथ ही किशमिश में प्रचुर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट भी मौजूद होता है और यह हमारे शरीर के लिए एनर्जी का सबसे अच्छा सोर्स भी है। इसे हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माना गया है। वहीं अगर आयुर्वेद की मानें तो उसके मुताबिक अगर आप रोजाना सूखी किशमिश खाने की जगह भीगी हुई किशमिश खाएंगे तो इससे आपको फायदा और भी ज्यादा मिलेगा।
इस मीठे सेहत के खजाने में सिर्फ अंगूर ही नहीं बल्कि दूध के भी लगभग सभी तत्व पाये जाते हैं। चिकित्सको का कहना है कि किशमिश को दूध के अभाव में प्रयोग में लाया जा सकता है, क्योंकि किशमिश दूध की तुलना में जल्दी पच जाती है। वृद्धावस्था के दौरान इसका सेवन करने से न केवल बीमारियों से शरीर की रक्षा होती है अपितु यह उम्र वृद्धि में भी सहायक है।
आयुर्वेद के अनुसार, किशमिश में मौजूद शर्करा शरीर में आसानी से पच जाती है| नतीजनत् शरीर को शक्ति और स्फूर्ति प्राप्त होती है। जब कभी भी बहुत ज्यादा परिश्रम, या किसी बड़ी बीमारी के पश्चात् जब हमारे शरीर की शक्ति क्षीण हो जाती है, तब खोई हुई ऊर्जा को वापिस हासिल करने के लिए किशमिश शरीर हेतु संजीवनी की तरह काम करती है|आप रात को सोते समय 10 से 15 किशमिश को पानी में भिगोकर रख दें और सुबह खाली पेट किशमिश को चबाकर खा जाएं।आपको बता दें कि अंगूर को सुखाकर किशमिश बनाई जाती है इस वजह से इसमें कई पोषक तत्व और भी ज्यादा कंसनट्रेटेड रहते हैं। किशमिश में शुगर और कैलोरी बहुत ज्यादा होती है। लेकिन यह आपको नुकसान नहीं पहुंचाती बल्कि फायदा पहुंचाती है।किशमिश की इस बात को जानने के बाद आप हैरान रह जाएंगे कि किशमिश खाने से आप अपने मोटापे को भी कम कर सकते हैं। अगर आप रोजाना एक्सरसाइज करें और साथ में किशमिश भी खाएं तो आपका वजन काफी तेजी के साथ कम होगा।


पाचन में मददगार
किशमिश में फाइबर बहुत ज्यादा मात्रा में मौजूद होता है। जो कि पाचन में मददगार साबित होता है। आप रात को 1-12 किशमिश एक गिलास पानी में भिगोकर रख दें और सुबह खाली पेट उस पानी को किशमिश के साथ ही पी जाएं।
*किशमिश के नियमित सेवन से खून बनता है, वायु दोष दूर होता है, पित्त दूर होता है, कफ दूर होता, और यह हृदय के लिये बड़ी हितकारी तथा हार्ट अटैक को दूर रखने में मदद करती है|
बुखार ठीक करे-

आपने अक्सर देखा होगा की जब किसी को बुखार होता है तो उसे किशमिश खाने की सलाह दी जाती है| दरअसल किशमिश में मौजूद फिनॉलिक पायथोन्‍यूट्रियंट जो कि जर्मीसाइडल, एंटी बॉयटिक और एंटी ऑक्‍सीडेंट तत्‍वों की वजह से जाने जाते हैं, वो वाइरल तथा बैक्‍टीरियल इंफेक्‍शन से लड़ कर बुखार को जल्‍द ठीक कर देते हैं।
सांसो से आने वाली बदबू को दूर करने में मददगार
आपको बता दें कि किशमिश में एंटी-बैक्टीरियल गुण मौजूद होते हैं। जिससे बैक्टीरिया से लड़ने में काफी मदद मिलती है और आपके मुंह से आने वाली बदबू भी गायब हो जाती हैं।
शादीशुदा मर्दों को सुबह जरूर पीना चाहिए किशमिश का पानी
सफल और सुखमय वैवाहिक जीवन का राज छिपा है किशमिश में। आसानी से उपलब्‍ध मेवे में ऐसे चमत्‍कारी गुण हैं कि महिलाओं के साथ पुरुषों के लिए भी इसक सेवन जरूरी है। खासतौर पर किशम‍िश का पानी तो गुणों की खान बताया जाता है।
किशम‍िश के पानी को अगर हफ्ते में 3 दिन भी पिया जाए तो कई समस्‍याएं दूर हो सकती हैं। इस पानी को नाश्‍ते से पहले पीना चाहिए।
कैंसररोधी
कैंसर कोशिकाओं के विकास के लिए फ्री रेडिकल्‍स सबसे प्रमुख कारणों में से एक है| इसके अलावा यह मेटास्टेसिस को भी प्रोत्साहित करते हैं। किशमिश में उच्‍च स्‍तर में काट्चिंस तत्‍व होता है यह तत्‍व रक्त में पॉलीफेनोलिक एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। एंटीऑक्‍सीडेंट शरीर के आस-पास रहने वाले फ्री रेडिकल्‍स को शरीर से बाहर निकालता है।


वजन बढ़ाने में उपयोगी-
जो लोग अपना वजन बढ़ाने के बारे में सोच रहे है| उन्हें बतादे की किशमिश उनके लिए बेहद फायदेमंद है| किशमिश में भरपूर मात्रा में फ्रुक्टोज और ग्लूकोज पाया जाता हैं। जो एनर्जी देने के साथ साथ वजन बढ़ाने में भी मदद करता है। अगर आप सही प्रकार से वजन बढ़ाना चाहते हैं, तो बिना इन्तेजार किये आज से ही किशमिश खाना शुरु कर दें।
एनीमिया
आयरन किशमिश में प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है। अगर आप रोजाना पानी में भीगी हुई किशमिश खाते हैं तो इससे आपके शरीर में खून बढ़ता है और साथ ही आप एनीमिया से भी अपने आप को बचाए रखते हैं।
शराब से छुटकाराकिशमिश की मदद से आप शराब के नशे से छुटकारा पा सकते है| जब भी आपकी शराब पीने की इच्छा हो तब शराब की जगह 10 से 12 ग्राम किशमिश को चबा-चबाकर खाए या किशमिश का शरबत पियें। जहा एक तरफ शराब पीने से ज्ञानतंतु सुस्त हो जाते हैं वही किशमिश के सेवन से शीघ्र ही पोषण मिलता है जिसके चलते मनुष्य उत्साह, शक्ति और प्रसन्नता का अनुभव करने लगता है। यह प्रयोग लगातार करते रहने से कुछ ही दिनों में शराब छूट जायेगी।
हड्डियों के लिए है फायदेमंद
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि किशमिश में बहुत ज्यादा मात्रा में कैल्शियम और माइक्रो न्यूट्रिएंट्स मौजूद होते हैं। इन्हीं की वजह से आपके शरीर की हड्डियां स्वस्थ और मजबूत बनी रहती हैं।
आँखों के लिए फायदेमंदकिशमिश में विटामिन ए, ए-कैरोटीनॉइड और ए-बीटा कैरोटीन मौजूद होता है, जो कि आँखों को फ्री रैडिकल्‍स से लड़ने में मदद करता है। इसमें एंटी ऑक्‍सीडेंट गुण भी पाये जाते है| किशमिश खाने से मोतियाबिंद, उम्र बढने की वजह से आँखों में आने वाली कमजोरी, मसल्‍स डैमेज आदि नहीं होता।
बढ़ेगी रोगों से लड़ने की क्षमता
रात में भीगी हुई किशमिश खाने और इसका पानी पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स के कारण इम्यूनिटी बेहतर होती है जिससे बाहरी वायरस और बैक्टीरिया से हमारा शरीर लड़ने में सक्षम होता है और ये बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश नहीं कर पाते हैं।
बीपी भी रहता सामान्य
रात की भिगाई हुई किशमिश वैसे तो सभी के लिए फायदेमंद है मगर इसका लाभ उन लोगों को मिल सकता है, जो हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन से परेशान हैं। किशमिश शरीर के ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करती है। इसमें मौजूद पोटैशियम तत्व आपको हाइपरटेंशन से बचाता है।


कोलेस्ट्रोल घटाए-बहुत कम लोग यह बात जानते है कि किशमिश पूरी तरह से कोलेस्‍ट्रॉल मुक्त होता है। किशमिश में घुलनशील फाइबर बहुत अधिक मात्रा में होता है। यह घुलनशील फाइबर बुरे कोलेस्‍ट्रॉल का विरोध करता है| इसके अलावा किशमिश पोलीफेनोल्स एंजाइम को भी दबाता है जो शरीर में कोलेस्ट्रॉल को अवशोषित के लिए जिम्मेदार होता है।
लीवर
किशमिश एक उत्तम ड्रायफ्रूट भी है। यह हमारे शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थों को निकालने में मददगार होता है। साथ ही हमारे लिवर को प्रभावित होने से भी बचाए रखता है।
*इसमें बोरान नामक तत्व पाया जाता है जो दिमाग को तेज़ बनाने का काम करता है. किशमिश विटामिन ए, ए-बीटा कैरोटीन और ए-कैरोटिनाइड से भरपूर होता है, जो आई साइट तेज़ करने में मदद करता है. इसमें मौजूद पोटैशियम और मैग्नीशियम दोनों मिलकर पेट को हेल्थी बनाए रखते हैं. इसके अलावा इसमें विटामिन बी कॉम्लेक्स और कॉपर भी भरपूर होता है जिस वजह से यह एनिमिया में आराम दिलाती है और रेड ब्लड सेल्स बनाती है.
कैसे तैयार करें किशम‍िश का पानी
अच्छी क्‍वॉलिटी के 20 दाने किशमिश लें धोने के बाद पीने के एक गिलास पानी में रात भर के लिए भ‍िगोकर रख दें। सुबह किशमिश को पानी से निकाल लें और नाश्‍ते से पहले कर अच्छी तरह चबाते हुए खा लें।
वैसे भीगी हुई किशमिश को उसी पानी में चम्मच से अच्छी तरह मैश करें और फिर पी लें।
अगर ना भिगो पाएं किशमिश
अगर आप किशमिश भ‍िगोना भूल जाते हैं तो सुबह इसके 20 दानों को धोकर खाली पेट खाएं. इसके बाद एक गिलास गुनगुना पानी भी पी सकते हैं।


21.3.20

दिल की धड़कन असामान्य होने के कारण और उपाय


दिल की धड़कन बिगड़ने को अतालता भी कहते है। इसमें हृदय की धड़कन असामान्‍य हो जाती हैं। ऐसे में हार्ट बीट या तो रूक-रूक कर या बहुत तेज हो जाती है। बहुत तेज धड़कनों को टेककार्डिया और धीमी धड़कनों को ब्रैडीकार्डिया कहते हैं।
अक्‍सर कई बार हम सभी के दिल की धड़कन असमान हो जाती है, मसलन दौड़ने पर या कोई खुशी की खबर मिलने के मौके पर। दिल की असमान धड़कन बार-बार होना या ज्‍यादा होना हानिकारक भी हो सकती है। यदि आपकी दिल की धड़कन न्‍यूनतम 60 और अधिकत 85 प्रति मिनट है तो यह सामान्‍य होती है। यदि आपके दिल की धड़कन इससे कम या ज्‍यादा होती है तो चिंता की बात हो सकती है। इस लेख के जरिये हम बात करते हैं दिल की असमान धड़कन के लक्षण और कारणों के बारे में।
असामान्य धड़कन के लक्षण
यह जरूरी नहीं कि यदि किसी व्‍यक्ति में दिल की असमान धड़कन से संबंधित लक्षण पाये जाते हैं तो उसे ह्दय संबंधी बीमारी हो। ऐसा भी हो सकता है कि कुछ रोगियों में हृदय की असमान धड़कन होने का कोई भी लक्षण न मिलें और डॉक्‍टर उनकी जांच के बाद उसके दिल की असमान धड़कन होने की पुष्टि कर दें। इसके लक्षण होने पर यह भी जरूरी नहीं कि उसे गंभीर समस्‍या हो। उसी तरह कुछ रोगियों को कोई भी लक्षण नहीं होने पर उनकी समस्‍या गंभीर हो सकती है। दिल की असमान धड़कन के कुछ लक्षण निम्‍नलिखित हैं।
सांस लेने में तकलीफ होना
कई बार कुछ लोगों को सांस लेने में तकलीफ होती है। यदि ऐसी समस्‍या ज्‍यादा हो तो डॉक्‍टर से परामर्श लें और उचित उपचार कराना चाहिए।
चक्‍कर आना
कभी- कभी चक्‍कर आने पर नहीं बल्कि आपको या आपके मित्र को अक्‍सर चक्‍कर आने की शिकायत रहती है तो हो सकता है कि उसका रक्‍त संचार बाधित हो रहा हो। ऐसे में दिल की असमान धड़कन होने की भी आशंका होती है।
अचानक बेहोश हो जाना
अचानक किसी का बेहोश होने भी इस रोग का बड़ा लक्षण होती है। इसलिए ऐसी किसी भी स्थिति को हल्‍के में नहीं लेना चाहिए और डॉक्‍टर से परामर्श करना चाहिए।
छाती में धड़कन होना
छाती में तेज या हल्‍की धड़कन होना इस रोग का प्रमुख लक्षण है। धड़कन हल्‍की हो या तेज दोनों ही खतरनाक हो सकती हैं।
अचानक कमजोरी आना
शरीर में अचानक कमजोरी महसूस करना या कमजोरी की वजन से किसी काम में मन न लगना इसका लक्षण हो सकता है।
एकाग्रता की समस्‍या होना
जिन लोगों को दिल की असमान धड़कन की शिकायत होती है उनमें अक्‍सर एकाग्रता की कमी पायी जाती है। ऐसा व्‍यक्ति कई बार लोगों को पहचानने में कनफ्यूज भी हो जाते हैं।
व्‍यायाम करने में परेशानी
दिल की असामान्‍य धड़कन वाले रोगियों को दौड़ने, पैदल चलने या फिर कोई मेहनत का काम करने में परेशानी होती है। इन्‍हें थोड़ा सा काम करने पर बहुत ज्‍यादा थकान का अनुभव होता है। ये ज्‍यादा लंबे समय तक काम नहीं कर पाते।
छोटी-छोटी सांसे आना
इस प्रकार के रोगियों में अक्‍सर छोटी सांसे आने की शिकायत भी पाई जाती है।
दिल की असामान्‍य धड़कन दिल की कमजोरी का प्रतीक होती है। इससे रक्‍त संचार बढ़ जाता है। दिल का आकार बढ़ने पर धड़कन बिगड़ने की शिकायत आम होती है। कई बार आपने अपने अड़ौस-पड़ौस में भी किसी के दिल का आकार बढ़ने के बारे में सुना होगा। दिल की असामान्‍य धड़कन के निम्‍न लिखित कारण हैं।
एनीमिया से ग्रसित होना
मोटे व्‍यक्ति को ऐसी समस्‍या हो सकती है।
अस्‍थमा की बीमारी होना
फेफड़ों में रक्‍त के थक्‍के जमे होना
थाइराइड की समस्‍या
फेफड़ों में इनफेक्‍शन
ज्‍यादा परिश्रम करना
बुखार या डिहाइड्रेशन की समस्‍या
शरीर में खून की कमी होना
दवाईयों का साइड इफेक्‍ट होना
धूम्रपान
हाई ब्‍लड प्रेशर
डायबिटीज
तनाव
वायु प्रदूषण
घरेलू आयुर्वेदिक उपाय -

अनार के पत्तों का घोल
आनार के 50 पत्ते पीसकर एक गिलास पानी मे मिलाकर दिन मे 2 बार सुबह शाम पीने से हृदय गति सामान्य होने मे मदद मिलती है |
प्याज-
एक कच्चा प्याज नित्य खाना हृदय गति को सामान्य बनाने मे सहायक है|प्याज का रस हृदय की कई बीमारियों मे लाभप्रद माना गया है|
*पैर के अंगूठे मे काला धागा बांधने से हृदय रोगों मे आशातीत फायदा होता है|औरतों मे ज्यादा प्रभावशाली उपाय है|
सूखा धनिया-
हृदय गति सामान्य करने के लिए सूखा धनिया और मिश्री समान मात्रा मे मिलाकर चूर्ण बनालें |एक चम्मच रोज पानी के साथ लें|
अंगूर
अंगूर का नियमित सेवन करना हृदय की धड़कन को सामान्य बनाने मे सहायक उपाय है|
गाजर-
हृदय कि धड़कन बढ़ने और रक्त गाढ़ा होने मे गाजर विशेष रूप से प्रभावकारी होती है|