1.10.26

रोज गिलोय पीने से क्या होता है? इम्यूनिटी से लेकर शुगर तक के फायदे और जरूरी सावधानी



नमस्कार! अगर आप रोज सुबह खाली पेट चाय पीते हैं और दिन भर थकान, सर्दी जुकाम, और शुगर की टेंशन में रहते हैं... तो अगले 30 सेकंड ध्यान से सुनिए। आयुर्वेद की एक बेल है जिसे अमृता कहा जाता है... गिलोय। रोज सही मात्रा में गिलोय पीने से आपकी इम्यूनिटी कैसे बदलती है, शुगर कैसे कंट्रोल में रहती है, और कौन सी एक गलती आपका लिवर खराब कर सकती है... आज सब क्लियर करेंगे।
क्या रोज गिलोय पीना सच में इम्यूनिटी बूस्टर है या सिर्फ ट्रेंड है? इस वीडियो में मैं आपको बताऊंगा 7 दिन, 15 दिन और 30 दिन गिलोय पीने से शरीर में असल में क्या होता है, 12 साइंटिफिक फायदे, और 5 लोग जिन्हें भूलकर भी गिलोय नहीं पीना चाहिए। वीडियो को अंत तक देखिए, क्योंकि आखिर में मैं बताऊंगा वो 3 गलतियां जो 90% लोग करते हैं।
हर घर में तुलसी है, पर हर घर को गिलोय की जरूरत है। आयुर्वेद में गिलोय को अमृता कहा गया है, यानी जो अमरता दे। आजकल हर दूसरा व्यक्ति इम्यूनिटी, शुगर, जोड़ों के दर्द और थकान से परेशान है। इस लेख में हम समझेंगे कि रोज गिलोय पीने से आपके शरीर में क्या बदलाव आते हैं, इसे पीने का सही तरीका क्या है, और किन लोगों को इससे बचना चाहिए। यह जानकारी Ministry of Ayush और रिसर्च पेपर्स पर आधारित है।
क्या रोज गिलोय पीना सही है?
नमस्कार, मैं आपका दोस्त। आज हम बात करने वाले हैं आयुर्वेद के सबसे पावरफुल पौधे के बारे में, जिसका नाम है गिलोय। जिसे संस्कृत में अमृता कहते हैं।
देखिए, पिछले 3 सालों में गिलोय की डिमांड 300% बढ़ी है। कोविड के बाद हर कोई इम्यूनिटी बढ़ाना चाहता है। पर सवाल यह है, क्या रोज गिलोय पीना हर किसी के लिए फायदेमंद है? क्या यह शुगर, बुखार और जोड़ों के दर्द में सच में काम करता है? और सबसे जरूरी, इसे पीने का सही तरीका क्या है?
आज इस वीडियो में मैं आपको बिना किसी फिल्टर के, रिसर्च और आयुर्वेद दोनों के आधार पर बताऊंगा कि रोज गिलोय पीने से आपके शरीर में क्या होता है, किसे फायदा होगा और किसे नुकसान। तो वीडियो को आखिर तक देखिए, क्योंकि आखिर में मैं वो 3 गलतियां भी बताऊंगा जो लोग रोज करते हैं और फिर कहते हैं गिलोय से लिवर खराब हो गया।
गिलोय क्या है? अमृता क्यों कहते हैं?
गिलोय का वैज्ञानिक नाम है Tinospora cordifolia। यह एक बेल है जो नीम के पेड़ पर अक्सर लिपटी हुई मिलती है। आयुर्वेद में कहा गया है कि जो गिलोय नीम पर उगती है, वह सबसे ज्यादा प्रभावी होती है, उसे नीम गिलोय कहते हैं।
इसे अमृता क्यों कहते हैं? पुरानी कथा के अनुसार जब समुद्र मंथन से अमृत निकला तो उसकी कुछ बूंदें जमीन पर गिरीं और वहां से गिलोय का पौधा उगा। इसलिए इसे अमृता कहा गया। पर साइंस की भाषा में बात करें तो इसमें टीनोस्पोरिन, कॉर्डिफोलियोसाइड, बर्बेरिन जैसे एल्कलॉइड्स होते हैं जो इसे इम्यूनोमॉड्यूलेटर बनाते हैं। मतलब यह इम्यूनिटी को न तो बहुत ज्यादा बढ़ाता है न घटाता है, बल्कि बैलेंस करता है।
आयुर्वेद में इसे त्रिदोषशामक कहा गया है। यानी वात, पित्त, कफ तीनों को संतुलित करती है। इसका स्वाद कड़वा होता है पर असर मीठा। यह रसायन है, यानी जो शरीर को फिर से युवा बनाने में मदद करे। इसीलिए पुराने वैद्य कहते थे कि जो रोज गिलोय लेता है, उसे जल्दी बुढ़ापा नहीं आता।
लेकिन ध्यान दीजिए, गिलोय कोई जादू नहीं है। यह धीरे काम करती है। इसलिए रोज पीने से क्या होता है, यह समझने के लिए टाइमलाइन समझना जरूरी है।
रोज गिलोय पीने से शरीर में क्या होता है? 7 दिन, 15 दिन, 30 दिन
अब सबसे प्रैक्टिकल सवाल। अगर आप आज से रोज गिलोय पीना शुरू करते हैं तो क्या होगा?
पहले 7 दिन: पहले हफ्ते में आपको सबसे पहला बदलाव पाचन में दिखेगा। गिलोय दीपन और पाचन है। यानी यह आपके डाइजेस्टिव फायर को तेज करती है। कई लोगों को सुबह पेट हल्का लगने लगता है, गैस कम होती है। हल्का डिटॉक्स जैसा असर दिखता है। कुछ लोगों को कड़वाहट के कारण हल्की मतली लग सकती है, इसलिए खाली पेट बहुत ज्यादा मात्रा में न लें।
15 दिन के बाद: दूसरे हफ्ते में इम्यूनिटी वाला असर शुरू होता है। आपको बार बार होने वाला जुकाम, गले में खराश कम लगने लगती है। जिन लोगों को हर मौसम बदलने पर बुखार आता है, उन्हें फर्क महसूस होता है। शुगर के पेशेंट में फास्टिंग शुगर में 5 से 10 पॉइंट का स्टेबल असर देखा गया है, पर यह दवा का विकल्प नहीं है। यह शरीर की सूजन यानी chronic inflammation को कम करने में मदद करती है।
30 दिन के बाद: एक महीने तक सही मात्रा में लेने पर असली रसायन वाला असर दिखता है। एनर्जी लेवल बेहतर, थकान कम, जोड़ों में हल्का दर्द कम, और स्किन में निखार। क्योंकि गिलोय ब्लड प्यूरिफायर की तरह काम करती है। याद रखिए, आयुर्वेद में कोई भी जड़ी बूटी 30 से 45 दिन से पहले जज नहीं की जाती। रोज पीने का मतलब है नियमितता, ज्यादा मात्रा नहीं।
12 वैज्ञानिक फायदे - इम्यूनिटी से शुगर तक
अब बात करते हैं 12 फायदों की जो रिसर्च में देखे गए हैं। मैं हर फायदे को आसान भाषा में समझाता हूं।
1. इम्यूनिटी बैलेंस
Heliyon 2024 की रिव्यू में बताया गया है कि गिलोय मैक्रोफेज और NK सेल्स को एक्टिव करती है। यानी शरीर की पहली रक्षा पंक्ति मजबूत होती है। यह रोज के वायरल इंफेक्शन से बचाव में मदद करती है।
2. बुखार में सहायक
आयुर्वेद में इसे ज्वरघ्न कहा गया है। डेंगू, चिकनगुनिया, वायरल बुखार के बाद की कमजोरी में गिलोय काढ़ा प्लेटलेट्स और एनर्जी रिकवरी में सपोर्ट करता है। पर बुखार में डॉक्टर की दवा जरूरी है।
3. शुगर कंट्रोल में मदद
गिलोय में बर्बेरिन जैसे कंपाउंड इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर करने में मदद करते हैं। टाइप 2 डायबिटीज में यह सपोर्टिव रोल निभा सकती है, पर यह मेटफॉर्मिन या इंसुलिन का रिप्लेसमेंट नहीं है।
4. पाचन और मेटाबॉलिज्म
यह लिवर एंजाइम्स को सपोर्ट करती है और भूख को सामान्य करती है। जिनको खाना पचता नहीं, खट्टी डकार आती है, उन्हें हल्का फायदा मिलता है।
5. जोड़ों का दर्द और गठिया
गिलोय में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण हैं। वात रोग और आमवात में गिलोय घी या काढ़ा सूजन कम करने में मदद करता है। यह यूरिक एसिड मैनेजमेंट में भी सहायक मानी जाती है।
6. स्किन और एलर्जी
ब्लड प्यूरिफिकेशन के कारण बार बार होने वाले फोड़े फुंसी, एलर्जिक रैश में मदद मिलती है। यह एंटी ऑक्सीडेंट है जो स्किन ग्लो को सपोर्ट करता है।
7. स्ट्रेस और थकान
एडेप्टोजेन की तरह काम करती है। कोर्टिसोल को बैलेंस करने में मदद, जिससे स्ट्रेस और नींद की क्वालिटी बेहतर होती है।
8. रेस्पिरेटरी हेल्थ
बार बार सर्दी, नाक बंद, एलर्जिक कफ में गिलोय और तुलसी का कॉम्बिनेशन काफी उपयोगी है।
9. लिवर हेल्थ - सही मात्रा में
सही मात्रा और शुद्ध गिलोय लिवर को प्रोटेक्ट करती है। पर मिलावटी या बहुत ज्यादा मात्रा से उल्टा असर हो सकता है, इस पर आगे बात करेंगे।
10. हार्ट हेल्थ सपोर्ट
कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड को मैनेज करने में सहायक, क्योंकि यह मेटाबॉलिज्म को सुधारती है।
11. यूरिन इन्फेक्शन में
मूत्रकृच्छ में जहां जलन होती है, गिलोय ठंडक देने वाली और यूरिन फ्लो को बेहतर करने में मदद करती है।
12. एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी एजिंग
रसायन होने से यह सेल डैमेज को कम करती है। रोज लेने से थकान कम और रिकवरी तेज होती है।
नोट: ये सारे फायदे सपोर्टिव हैं। किसी भी गंभीर बीमारी में केवल गिलोय पर निर्भर न रहें।
पीने का सही तरीका - जूस, काढ़ा, पाउडर, टेबलेट
सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन यहीं होता है। गिलोय को कैसे लें? देखिए चार फॉर्म हैं।
1. गिलोय काढ़ा: सबसे ट्रेडिशनल। 1 इंच ताजी गिलोय की डंडी को कूट लें, 200 ml पानी में धीमी आंच पर उबालें जब तक 50 ml रह जाए। यह एक डोज है। सामान्य वयस्क के लिए 20 से 30 ml काढ़ा दिन में एक बार, सुबह खाली पेट या खाने से 30 मिनट पहले।
2. गिलोय जूस: मार्केट में जो जूस मिलता है, उसमें 10 से 20 ml जूस को 50 ml गुनगुने पानी में मिलाकर सुबह ले सकते हैं। हमेशा बिना शुगर वाला लें।
3. गिलोय पाउडर यानी घनसत्व: 1 से 3 ग्राम पाउडर गुनगुने पानी या शहद के साथ। शुगर वालों के लिए शहद अवॉइड करें, पानी के साथ लें।
4. टेबलेट: 1 टेबलेट दिन में एक या दो बार खाने के बाद, पर कंपनी के लेबल और डॉक्टर के अनुसार।
सही समय: इम्यूनिटी और पाचन के लिए सुबह खाली पेट बेस्ट। शुगर और जोड़ों के दर्द में सुबह शाम खाने से पहले डॉक्टर की सलाह से।
कितने दिन: 30 से 45 दिन लें, फिर 15 दिन गैप दें। लगातार 3 महीने से ज्यादा बिना डॉक्टर की सलाह के न लें।
किसे नहीं पीना चाहिए? 5 बड़ी सावधानियां
यह चैप्टर सबसे जरूरी है। गिलोय अमृत है पर हर अमृत हर किसी के लिए नहीं होता।ऑटोइम्यून बीमारी: अगर आपको रूमेटॉइड आर्थराइटिस, ल्यूपस, मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसी बीमारी है, या आप इम्यूनोसप्रेसेंट दवा ले रहे हैं, तो गिलोय आपकी इम्यूनिटी को और ज्यादा एक्टिव कर सकती है। इससे बीमारी बढ़ सकती है। डॉक्टर से पूछे बिना बिल्कुल न लें।
प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग: गर्भावस्था और दूध पिलाने के दौरान गिलोय की सेफ्टी पर पर्याप्त डेटा नहीं है। इसलिए अवॉइड करना ही बेस्ट है।
सर्जरी से पहले: सर्जरी से कम से कम 2 हफ्ते पहले गिलोय बंद कर दें। क्योंकि यह ब्लड शुगर और इम्यून सिस्टम पर असर डालती है जो सर्जरी में रिस्क बना सकती है।
लिवर की समस्या: Ministry of Ayush ने 2022 में कहा था कि सही मात्रा और शुद्ध गिलोय सेफ है। पर कुछ केस रिपोर्ट्स में देखा गया कि मिलावटी, गलत पहचान वाली बेल या बहुत ज्यादा डोज लेने से लिवर इंजरी हुई। अगर आपको पहले से लिवर की बीमारी है, पीलिया है, या SGPT SGOT ज्यादा है, तो बिना डॉक्टर के न लें और अच्छी क्वालिटी ही लें।
लो ब्लड शुगर की दवा के साथ: अगर आप डायबिटीज की दवा या इंसुलिन लेते हैं तो गिलोय शुगर को और कम कर सकती है। इससे हाइपोग्लाइसीमिया का रिस्क है। इसलिए शुगर रोज चेक करें और डॉक्टर को बताकर ही लें।

सेफ्टी मंत्र: शुद्ध प्रोडक्ट, सही मात्रा, सही समय, और डॉक्टर की सलाह। इसी से गिलोय अमृत बनती है, नहीं तो समस्या बन सकती है।

3 बड़ी गलतियां जो 90% लोग करते हैं


मैंने 100 से ज्यादा लोगों को गिलोय लेते हुए देखा है और 3 गलतियां कॉमन हैं।

गलती नंबर 1 - ज्यादा मतलब ज्यादा फायदा: लोग सोचते हैं 20 ml की जगह 100 ml पी लेंगे तो जल्दी फायदा होगा। ऐसा नहीं है। आयुर्वेद में कहा गया है अतिमात्रा में अमृत भी विष बन जाता है। ज्यादा डोज से पेट खराब, मुंह में कड़वाहट, लिवर पर लोड और शुगर लो होना जैसे नुकसान हो सकते हैं।

गलती नंबर 2 - लोकल, बिना टेस्ट वाला पाउडर लेना: गिलोय जैसी दिखने वाली कई बेलें होती हैं। अगर गलत बेल पाउडर में मिल गई तो लिवर खराब हो सकता है। हमेशा GMP सर्टिफाइड कंपनी, लैब टेस्टेड, एक्सपायरी डेट वाला प्रोडक्ट लें। सस्ते के चक्कर में सेहत से समझौता न करें।

गलती नंबर 3 - साल भर लगातार पीना और लाइफस्टाइल न बदलना: गिलोय कोई परमानेंट शॉर्टकट नहीं है। अगर आप रोज रात 1 बजे सोते हैं, जंक फूड खाते हैं, पानी कम पीते हैं और सोचते हैं गिलोय सब ठीक कर देगी तो गलत है। गिलोय तभी काम करती है जब नींद, खाना, पानी और वॉक सही हो। 30 से 45 दिन कोर्स करें, फिर गैप दें, और लाइफस्टाइल सुधारें।

आपका 30 दिन का प्लान


तो दोस्तों, आज हमने समझा कि रोज गिलोय पीने से क्या होता है। पहले हफ्ते पाचन, 15 दिन में इम्यूनिटी, 30 दिन में एनर्जी और रिकवरी। इसके 12 फायदे, सही तरीका, और 5 सावधानियां।

अगर आप पहली बार शुरू कर रहे हैं तो यह सिंपल प्लान फॉलो करें: रोज सुबह 20 ml गिलोय जूस गुनगुने पानी के साथ, हफ्ते में 5 दिन, 30 दिन तक। साथ में रोज 30 मिनट वॉक, 7 घंटे नींद, और तला भुना कम। और हां, अगर आपको शुगर, लिवर या ऑटोइम्यून की समस्या है तो पहले डॉक्टर से जरूर पूछें।

गिलोय अमृता है, पर अमृत भी सही मात्रा में ही अमृत है।

अब आपकी बारी है। आपको गिलोय का कौन सा फायदा सबसे ज्यादा चाहिए? इम्यूनिटी, शुगर, या जोड़ों का दर्द? नीचे कमेंट में लिखिए। वीडियो पसंद आया तो लाइक करिए, ऐसे ही साइंस बेस्ड आयुर्वेद के लिए चैनल को सब्सक्राइब करिए और बेल आइकन दबाइए।

17.9.26

Dr.Dayaram Aalok से जानिए - पेट के रोगों के घरेलु आयुर्वेदिक उपचार




पेट ही सभी रोगों की जड़ है - आयुर्वेद का सच!
गोली नहीं, रसोई से ही ठीक होगा आपका पेट!
40 साल के अनुभव से बता रहा हूँ पेट ठीक करने के 3 नियम
क्या आप भी सुबह उठते ही सबसे पहले पेट के बारे में सोचते हैं? "आज पेट साफ होगा या नहीं? गैस तो नहीं बनेगी? खाना पचेगा या नहीं?"
अगर हाँ, तो आप अकेले नहीं हैं। आज हर 10 में से 7 व्यक्ति पेट की किसी न किसी समस्या से परेशान है।
आयुर्वेद में एक बहुत सुंदर सूत्र कहा गया है - "रोगा: सर्वेऽपि मन्देऽग्नौ" अर्थात सभी रोगों की उत्पत्ति मंद अग्नि से होती है। यानी आपका पाचन बल, आपकी जठराग्नि कमजोर हुई तो रोग आना ही आना है। आधुनिक विज्ञान इसे Gut Health कहता है, आयुर्वेद हजारों साल पहले इसे ही जीवन का केंद्र मानता आया है।
नमस्कार, मैं Dr. Dayaram Aalok। आज इस लेख में मैं कोई किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि अपने वर्षों के अनुभव से आपको बताऊंगा कि क्यों बिगड़ता है हमारा पेट और कैसे आपकी रसोई में रखी 10 चीजों से ही आप पेट के 90% रोगों को ठीक कर सकते हैं। इस लेख को अंत तक पढ़िए, क्योंकि अंत में मैं एक ऐसा रात का नियम बताऊंगा जिससे सुबह पेट अपने आप साफ होगा।
1. आयुर्वेद पेट के रोगों को कैसे देखता है?
आधुनिक चिकित्सा गैस, एसिडिटी, कब्ज को अलग-अलग बीमारी मानती है। आयुर्वेद इन्हें एक ही मूल के अलग-अलग लक्षण मानता है - अग्नि का बिगड़ना और त्रिदोष का असंतुलन।
हमारी जठराग्नि 4 प्रकार की होती है:समाग्नि: सब कुछ ठीक से पचाती है - यही स्वस्थ व्यक्ति की निशानी है।
विषमाग्नि: कभी तेज, कभी मंद। ये वात दोष बिगड़ने से होती है। इसमें गैस, पेट में गुड़गुड़, कब्ज और दस्त का चक्र चलता है।
तीक्ष्णाग्नि: बहुत तेज भूख, खाते ही जलन, एसिडिटी, खट्टी डकारें। ये पित्त बिगड़ने से होती है।
मन्दाग्नि: भूख ही नहीं लगना, खाना पड़ा रहना, भारीपन, आलस्य। ये कफ बिगड़ने से होती है।
अधिकतर लोगों में आज विषमाग्नि और मंदाग्नि ही मिलती है। कारण क्या है?
पेट बिगड़ने के 6 मुख्य कारण - जो हम रोज करते हैं:विरुद्ध आहार: दूध के साथ नमकीन, दही के साथ पराठा, फल और भोजन एक साथ। ये पेट में जहर - आम बनाता है।
अध्यशन: पहले का खाना पचा नहीं और फिर से खा लिया।
विषमाशन: समय पर न खाना। कभी 10 बजे, कभी 4 बजे।
चिंता और तनाव: आयुर्वेद कहता है - चिंता वात को सबसे ज्यादा बढ़ाती है और वात ही गैस का पिता है।
वेग धारण: मल, मूत्र, अपान वायु को रोकना।
रात में जागना और दिन में सोना: इससे सीधे पाचन चक्र टूटता है।
जब ये कारण रोज होते हैं तो पेट में 'आम' बनता है। आम यानी अधपचा, सड़ा हुआ आहार रस जो आंतों में चिपक जाता है। यही आम आगे चलकर अम्लपित्त, विबंध [कब्ज], आध्मान, अजीर्ण और ग्रहणी जैसे रोग बनाता है।[Acidity][Gas]
2. पेट के 5 मुख्य रोग और उनके आयुर्वेदिक लक्षण
1. आध्मान / गैस बनना [वातज रोग]: पेट फूलना, डकारों से आराम लगना, पेट में दर्द जो घूमता-फिरता है, मल कठोर और कम मात्रा में।
2. अम्लपित्त / एसिडिटी [पित्तज रोग]: सीने में जलन, खट्टी-तीखी डकार, गले में खराश, भूख लगने पर भी घबराहट, सिरदर्द।
3. विबंध / कब्ज [वात-कफज]: मल का सूखा, कठोर होना, रोज मल प्रवृत्ति न होना, पेट साफ न होने से भारीपन, आलस्य, मुंह से दुर्गंध।
4. अजीर्ण / अपच: खाया हुआ भोजन भारी लगना, भूख न लगना, जी मिचलाना, आलस्य।
5. ग्रहणी दोष / IBS: आयुर्वेद का सबसे जटिल पेट रोग। कभी कब्ज, कभी दस्त, खाना खाने के बाद तुरंत शौच जाना, पेट में मरोड़, दुर्बलता।
अब सवाल है - क्या हर छोटी बात के लिए दवा लेनी चाहिए? नहीं। आयुर्वेद कहता है - पहले घर को ही औषधालय बनाओ।
3. Dr. Dayaram Aalok द्वारा बताए गए 15 रामबाण घरेलु आयुर्वेदिक उपचार
नोट: ये सामान्य जानकारी है। किसी भी उपाय को नियमित करने से पहले अपने वैद्य से परामर्श अवश्य लें।
समूह 1: गैस और पेट फूलने के लिए
1. हींग और अजवायन का चमत्कार: आधा चम्मच अजवायन + चुटकी भर हींग + काला नमक। भोजन के बाद गुनगुने पानी से लें। हींग वात को अनुलोम करती है यानी गैस को नीचे की ओर ले जाती है।
2. त्रिकटु फांट: सोंठ, काली मिर्च, पिप्पली तीनों बराबर मात्रा में। आधा चम्मच चूर्ण को 1 कप गर्म पानी में 5 मिनट भिगोकर छान लें और भोजन से आधा घंटा पहले पिएं। यह अग्नि को प्रदीप्त करता है।
समूह 2: कब्ज के लिए - सुबह पेट साफ करने के लिए
3. त्रिफला - आयुर्वेद का सबसे सुरक्षित मित्र: 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण रात को सोते समय गुनगुने पानी या दूध के साथ। यह मल को चिकना नहीं, बल्कि आंतों को बल देकर बाहर निकालता है। ध्यान रहे - त्रिफला रोज की आदत नहीं, 15 दिन लेकर 5 दिन का अंतर दें।
4. घी और दूध का योग: रात को एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच गाय का घी। यह वृद्धों और जिनका शरीर रूखा है, उनके लिए सर्वोत्तम है। यह मल को कठोर नहीं होने देता।
5. सौंफ और मिश्री का शर्बत: 1 चम्मच सौंफ को रात भर पानी में भिगो दें, सुबह उसी पानी में मिश्री मिलाकर पिएं। यह आंतों की गर्मी शांत करता है और मल को मुलायम करता है।
समूह 3: एसिडिटी और जलन के लिए
6. धनिया-सौंफ-जीरा शीतल जल: धनिया, सौंफ, जीरा तीनों एक-एक चम्मच। रात भर 1 लीटर पानी में भिगो दें। सुबह छानकर दिन भर थोड़ा-थोड़ा पिएं। ये तीनों पित्तशामक हैं।
7. आंवला - अम्लपित्त का शत्रु: एक चम्मच आंवला चूर्ण सुबह खाली पेट। आंवला खट्टा होते हुए भी पित्त को शांत करता है, ये आयुर्वेद का विशेष सिद्धांत है।
8. ठंडा दूध नहीं, शतावरी सिद्ध दूध: जलन होने पर ठंडा पानी या कोल्ड ड्रिंक न लें। गाय के दूध में थोड़ी शतावरी उबालकर ठंडा करके पिएं।
समूह 4: पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए
9. भोजन का पहला नियम - अदरक और सेंधा नमक: भोजन से 15 मिनट पहले अदरक के छोटे टुकड़े पर सेंधा नमक और नींबू लगाकर चबाएं। इसे आयुर्वेद में "रोचन" कहा गया है - यह भूख को जगाता है।
10. तक्र - दही नहीं, छाछ अमृत है: दिन के भोजन के बाद पतली छाछ में भुना जीरा, काली मिर्च और सेंधा नमक मिलाकर लें। आयुर्वेद कहता है - "तक्रं शक्रस्य दुर्लभम्" - देवताओं को भी छाछ दुर्लभ है। ग्रहणी रोग में यह रामबाण है। पर रात में छाछ वर्जित है।
11. लंघनम् - सबसे बड़ी औषधि: सप्ताह में एक दिन हल्का खाना या केवल मूंग की खिचड़ी और घी। पेट को आराम देना भी चिकित्सा है।
समूह 5: दिनचर्या और योग
12. उषापान: सुबह उठते ही 2-3 गिलास गुनगुना पानी। बैठकर, घूंट-घूंट करके। यह बड़ी आंत को जगाता है।
13. भोजन के 3 सुनहरे नियम:भूख लगने पर ही खाएं।
भोजन के बीच में ज्यादा पानी न पिएं। भोजन के 40 मिनट बाद पानी पिएं।
रात का भोजन सूर्यास्त से पहले और हल्का।
14. वज्रासन और पवनमुक्तासन: भोजन के बाद 10 मिनट वज्रासन में बैठना - पाचन के लिए अमृत। सुबह पवनमुक्तासन और मंडूकासन गैस को जड़ से निकालते हैं।
15. चिंता का उपाय - अनुलोम-विलोम: रोज 10 मिनट अनुलोम-विलोम। तनाव कम होगा तो वात अपने आप शांत होगा और पेट ठीक रहेगा।
4. एक दिन की आदर्श पेट-अनुकूल दिनचर्या [आप पाठकों को दे सकते हैं]
सुबह 6 बजे: उषापान - गुनगुना पानी
6:30 - शौच, दंतधावन, 10 मिनट प्राणायाम
8 बजे - अदरक-सेंधा नमक, फिर हल्का नाश्ता जैसे दलिया, उपमा
1 बजे - दिन का मुख्य भोजन - रोटी, मूंग दाल, चावल, सब्जी, छाछ
शाम 4 बजे - फल या भुने चने
शाम 7:30 बजे - हल्का सुपाच्य भोजन - खिचड़ी, सूप
रात 9:30 बजे - त्रिफला या घी-दूध [आवश्यकतानुसार] और सोना
निष्कर्ष
पेट का इलाज मेडिकल स्टोर में नहीं, आपकी रसोई और आपकी आदतों में है। दवाएं आग बुझाती हैं, पर आदतें आग लगने से रोकती हैं।
याद रखिए, आयुर्वेद एक दिन में जादू नहीं करता। यह जड़ पर काम करता है। इसलिए इन उपायों को कम से कम 21 दिन नियम से कीजिए। अगर समस्या पुरानी है, बार-बार खून आता है, वजन तेजी से घट रहा है, या लगातार उल्टी है तो तुरंत अपने नजदीकी वैद्य या चिकित्सक से मिलें। स्व-चिकित्सा से बचें।
आपको यह जानकारी कैसी लगी?
अगर इस लेख से आपको थोड़ी भी मदद मिली हो तो इसे अपने उन मित्रों और परिवारजनों के साथ Share अवश्य करें जो पेट की समस्या से परेशान हैं।
ऐसे ही आयुर्वेद के सरल और अनुभवी उपायों के लिए हमारे Blog को Follow करें और मेरे YouTube Channel Dr. Dayaram Aalok को Subscribe करें, जहाँ मैं रोज एक नया घरेलु नुस्खा बताता हूँ।
स्वस्थ रहें, प्रसन्न रहें!आपका अपना, Dr. Dayaram Aalok
Disclaimer 
यह लेख केवल शैक्षिक और जानकारी के उद्देश्य से है। यह किसी भी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी उपचार, दवा या आहार को अपनाने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

16.9.26

"आयुर्वेद में हाई बीपी का स्थायी समाधान है? जानिए वैद्य की राय"




मेरे पास 55  साल के एक रोगी आए, 5 साल से बीपी की अंग्रेजी दवा पर थे। बोले - वैद्य जी, क्या इससे छुटकारा नहीं मिलेगा? आज 1 साल बाद वे बिना दवा के स्वस्थ हैं। कैसे? यही आज का विषय है।
हाई ब्लड प्रेशर आज महामारी बन चुका है। 30 साल की उम्र के बाद हर तीसरा व्यक्ति इससे पीड़ित है। हम इसे साइलेंट किलर कहते हैं क्योंकि यह बिना लक्षण के हृदय, मस्तिष्क और गुर्दे को नुकसान पहुंचाता है। आधुनिक चिकित्सा में इसे जीवनभर प्रबंधन योग्य बीमारी माना जाता है। पर क्या आयुर्वेद में इसका स्थायी समाधान है? इसका उत्तर हां भी है और नहीं भी, इसे समझना जरूरी है।
आयुर्वेद में हाई बीपी को एक स्वतंत्र रोग नहीं, बल्कि कई प्रणालीगत असंतुलन का परिणाम माना गया है। इसे मुख्यतः रक्तगत वात, सिरागत वात और धमनी प्रतिचय के नाम से समझा जाता है। जब वात दोष दूषित होकर रक्त को दूषित करता है और हृदय की धमनियों में रुकावट या कठोरता पैदा करता है, तो रक्तचाप बढ़ता है।
भाग 1: आयुर्वेद के अनुसार हाई बीपी के 5 मुख्य कारण
1. आहार जन्य कारण: अत्यधिक नमक, अचार, तला-भुना, मांसाहार, फास्ट फूड, चाय-कॉफी और शराब का अधिक सेवन पित्त और रक्त को दूषित करता है।
2. विहार जन्य कारण: दिन में सोना, रात में देर तक जागना, अत्यधिक मानसिक श्रम, व्यायाम का अभाव। यह वात को बढ़ाता है।
3. मानसिक कारण: यह सबसे बड़ा कारण है। आयुर्वेद कहता है - चिंता वातकराणां श्रेष्ठा। चिंता, क्रोध, भय, तनाव और ईर्ष्या सीधे हृदय और मनोवह स्रोतस को प्रभावित करते हैं।
4. वात-पित्त-कफ असंतुलन: वात - रक्त संचार की गति बढ़ाता है, पित्त - रक्त में उष्णता और तीक्ष्णता लाता है, कफ - धमनियों में अवरोध और मोटापा पैदा करता है।
5. अग्निमांद्य और आम: पाचन कमजोर होने से शरीर में आम विष बनता है, जो स्रोतसों को बंद कर देता है और बीपी बढ़ाता है।
भाग 2: क्या स्थायी समाधान सच में संभव है? वैद्य की राय
यहाँ आपको स्पष्ट समझना होगा। आयुर्वेद जादू नहीं करता। अगर बीपी 160/100 से ऊपर है और हृदय रोग है, तो अंग्रेजी दवा तुरंत बंद करना जानलेवा हो सकता है।
स्थायी समाधान का अर्थ है - मूल कारण को ठीक करना।
अंग्रेजी दवा नल से आ रहे पानी को बाल्टी से निकालती है, आयुर्वेद नल को ही बंद करता है। जब हम आहार, जीवनशैली, मानसिक तनाव और धमनियों की कठोरता को ठीक कर देते हैं, तो शरीर खुद बीपी को सामान्य रखने लगता है। इसमें 3 से 6 महीने लगते हैं, पर परिणाम स्थायी होते हैं। इसके लिए किसी अनुभवी वैद्य से परामर्श जरूरी है।
भाग 3: हाई बीपी के लिए 5 स्तंभ चिकित्सा
स्तंभ 1: आहार चिकित्सा - क्या खाएं क्या नहीं
पथ्य आहार: जौ, रागी, पुराना चावल, मूंग दाल, लौकी, करेला, परवल, लहसुन की 1-2 कली सुबह, आंवला, अनार, पपीता, दही का पानी, गाय का घी कम मात्रा में।
अपथ्य: नमक 5 ग्राम से कम प्रतिदिन, सेंधा नमक का प्रयोग करें। अचार, पापड़, बेकरी, नमकीन, रेड मीट, शराब, धूम्रपान पूर्णतः बंद।
स्तंभ 2: जीवनशैली और योग
सुबह 5 बजे उठना, 30 मिनट तेज चलना, और ये 3 प्राणायाम अमृत हैं:
अनुलोम-विलोम: 10 मिनट रोज - तनाव का सबसे बड़ा दुश्मन।
भ्रामरी: 7 बार - मन को तुरंत शांत करती है।
शवासन: बीपी बढ़ने पर 10 मिनट शवासन तुरंत 10 mmHg तक बीपी कम कर सकता है।
स्तंभ 3: प्रमुख आयुर्वेदिक औषधियां - वैद्य की राय में
1. अर्जुन छाल: हृदय की सबसे बड़ी औषधि। यह धमनियों को लचीला बनाती है और हृदय की मांसपेशियों को बल देती है। इसे अर्जुनारिष्ट या चूर्ण के रूप में वैद्यकीय सलाह से लिया जाता है।
2. अश्वगंधा: यह तनाव जन्य हाई बीपी के लिए सर्वोत्तम है। यह कोर्टिसोल हार्मोन को कम करती है।
3. सर्पगंधा: यह बहुत तीव्र औषधि है। इसका प्रयोग केवल वैद्य की देखरेख में ही करना चाहिए, स्वयं से नहीं। यह अनिद्रा और अत्यधिक बढ़े बीपी में उपयोगी है।
4. जटामांसी और ब्राह्मी: मस्तिष्क को शांत कर बीपी के मनोवैज्ञानिक कारण को ठीक करती हैं।
5. लहसुन और आंवला: प्राकृतिक ब्लड थिनर और एंटीऑक्सीडेंट।
महत्वपूर्ण सलाह: इन औषधियों की मात्रा हर व्यक्ति के प्रकृति और बीपी के स्तर के अनुसार अलग होती है। कृपया कोई भी औषधि शुरू करने से पहले अपने नजदीकी आयुर्वेदिक वैद्य से परामर्श अवश्य लें।
स्तंभ 4: पंचकर्म - शरीर का शोधन
जब आम और स्रोतस अवरोध ज्यादा हो तो शिरोधारा, हृदय बस्ती और विरेचन कर्म अद्भुत काम करते हैं। शिरोधारा में माथे पर औषधीय तेल की धारा 45 मिनट तक गिराई जाती है, जिससे 1 ही सत्र में बीपी और अनिद्रा में गहरा आराम मिलता है।
स्तंभ 5: दिनचर्या का एक आदर्श प्रारूप
सुबह: गुनगुना पानी + 5 भीगे बादाम + अनुलोम-विलोम
दोपहर: जौ की रोटी + लौकी की सब्जी + छाछ
शाम: हल्का दलिया + भ्रामरी प्राणायाम
रात: 10 बजे तक सोने का प्रयास, सोने से पहले पैरों में सरसों तेल की मालिश।
निष्कर्ष
तो क्या आयुर्वेद में हाई बीपी का स्थायी समाधान है? उत्तर है - हाँ, यदि आप केवल गोली नहीं, बल्कि जीवनशैली बदलने को तैयार हैं। आयुर्वेद आपको बीपी के साथ जीना नहीं, बल्कि बिना बीपी के जीना सिखाता है। यह धीमी प्रक्रिया है पर जड़ से काम करती है।
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डिस्क्लेमर: यह लेख केवल शैक्षिक जानकारी के लिए है। यह किसी भी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। यदि आपका रक्तचाप 140/90 से अधिक रहता है तो तुरंत अपने चिकित्सक से संपर्क करें।

15.9.26

"जीरा - गरीबों की दवा, अमीरों का राज़ | Cumin Benefits


                             

     
नमस्कार! क्या आपने कभी सोचा है, आपकी रसोई में डिब्बे में पड़ा 20 रुपये का जीरा, क्यों आयुर्वेद में इसे 'जीरक' यानी जो जीर्ण करे, पचाए, उसे कहा गया है?
एक तरफ अमीर लोग हजारों रुपये के Detox Drink और Weight Loss Supplements लेते हैं, वहीं हमारे दादा-दादी इसी जीरे के पानी से सौ साल तक स्वस्थ रहते थे।
तो आखिर इस छोटे से जीरे में ऐसा क्या है, कि इसे गरीबों की दवा और अमीरों का राज़ कहा जाता है? पाचन, वजन, शुगर, कोलेस्ट्रॉल, इम्युनिटी... क्या सच में एक मसाला इतना कुछ कर सकता है?
आज इस वीडियो में मैं आपको जीरे के 12 वैज्ञानिक फायदे, उसे खाने का सही तरीका, जीरा पानी बनाने की परफेक्ट विधि, और सबसे जरूरी - किसे जीरा नहीं खाना चाहिए, सब कुछ बताऊंगा। वीडियो को अंत तक देखिएगा।
जीरा, जिसका वैज्ञानिक नाम Cuminum Cyminum है, सिर्फ भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले मसालों में से एक है। आयुर्वेद में जीरे को दीपन यानी पाचन अग्नि को बढ़ाने वाला, और पाचन यानी खाने को पचाने वाला कहा गया है।
आधुनिक साइंस की बात करें तो जीरे में आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, विटामिन A, C, E, एंटी-ऑक्सीडेंट्स, और सबसे खास थाइमोल नामक तत्व पाया जाता है जो हमारे पेट के लिए बहुत फायदेमंद है।
लेकिन समस्या ये है कि 90% लोग जीरे को सिर्फ तड़के तक सीमित रखते हैं। तड़के में जीरा जल जाता है, उसका तेल उड़ जाता है और फायदा आधा रह जाता है। जीरे का असली फायदा लेना है तो उसे सही समय पर, सही मात्रा में, सही तरीके से लेना होगा। तो चलिए एक-एक करके समझते हैं।
 12 फायदे
1. पाचन तंत्र का सबसे अच्छा दोस्त:
जीरा पाचक रसों को एक्टिव करता है। अगर आपको खाना खाने के बाद भारीपन, गैस, अपच, डकार आना लगता है तो जीरा आपके लिए अमृत है। यह पेट में बनने वाली गैस को बाहर निकालता है और कब्ज को दूर करने में मदद करता है। जिन लोगों को IBS की समस्या रहती है, उन्हें भी भुना जीरा और हींग का पाउडर बहुत आराम देता है।
2. वजन घटाने में मददगार:
ये सबसे ज्यादा सर्च किया जाने वाला फायदा है। जीरे में मौजूद तत्व मेटाबॉलिज्म को तेज करते हैं और फैट बर्निंग में मदद करते हैं। कई स्टडी में पाया गया है कि रोज सुबह जीरा पानी पीने वालों का वजन और बॉडी फैट कंट्रोल में रहता है। लेकिन याद रखिए, जीरा कोई जादू नहीं है, यह आपके सही खान-पान और चलने-फिरने के साथ मिलकर काम करता है।
3. ब्लड शुगर कंट्रोल:
जीरा इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाने में मदद करता है। डायबिटीज के मरीजों के लिए जीरा पानी सुबह खाली पेट फायदेमंद माना जाता है। यह अचानक से शुगर बढ़ने से रोकने में सहायता करता है।
4. इम्युनिटी बूस्टर:
बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम से बचने के लिए जीरा बहुत अच्छा है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। जीरा और गुड़ का काढ़ा पुराने समय में बुखार के बाद कमजोरी दूर करने के लिए दिया जाता था।
5. आयरन की कमी और थकान में:
एक चम्मच जीरे में लगभग 1.4 mg आयरन होता है। जिन महिलाओं में आयरन की कमी, थकान, चक्कर आने की शिकायत रहती है, उनके लिए जीरा बहुत उपयोगी है। यह हीमोग्लोबिन बनाने में मदद करता है।
6. कोलेस्ट्रॉल और दिल के लिए:
जीरा बैड कोलेस्ट्रॉल LDL को कम करने और गुड कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखने में मदद करता है। इसका एंटी-ऑक्सीडेंट गुण दिल की नलियों को स्वस्थ रखने में सहायक है।
7. नींद और तनाव में:
जीरे में मेलाटोनिन को सपोर्ट करने वाले तत्व होते हैं। रात में एक कप जीरे की चाय पीने से मन शांत होता है और अच्छी नींद आती है। जिनको बहुत ज्यादा एसिडिटी के कारण रात में नींद नहीं आती, उन्हें भी फायदा मिलता है।
8. त्वचा और बालों के लिए:
जीरा बॉडी को अंदर से डिटॉक्स करता है। जब पेट साफ रहेगा तो चेहरे पर मुंहासे, दाग-धब्बे कम होंगे। जीरे का पानी स्किन को ग्लो देता है।
9. महिलाओं के लिए विशेष:
पीरियड्स के दौरान पेट दर्द, ऐंठन और सूजन में भुना जीरा और अजवाइन का पानी बहुत आराम देता है। प्रेगनेंसी के बाद भी जीरा पानी पाचन के लिए दिया जाता है, पर डॉक्टर की सलाह से।
10. सूजन कम करने में:
शरीर में कहीं भी सूजन हो, जोड़ों में दर्द हो, जीरे में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सूजन को कम करने में मदद करते हैं।
11. याददाश्त और दिमाग:
जीरे में विटामिन B6 और एंटी-ऑक्सीडेंट्स दिमाग की नसों को पोषण देते हैं। रोजमर्रा में जीरे का सेवन फोकस और याददाश्त को बेहतर रखने में सहायक है।
12. लिवर डिटॉक्स:
जीरा लिवर से टॉक्सिन्स निकालने में मदद करता है। यह लिवर के एंजाइम्स को एक्टिव करता है, जिससे फैटी लिवर की शुरुआती स्टेज में फायदा देखा गया है।
जीरा पानी बनाने का सही तरीका - सबसे जरूरी भाग
अब सबसे बड़ा सवाल - जीरा खाएं कैसे?
तरीका 1 - रात वाला जीरा पानी [सबसे असरदार]:
एक गिलास पानी में एक चम्मच जीरा रात भर भिगो दें। सुबह उसी पानी को जीरे सहित 2-3 मिनट उबाल लें, छान लें, गुनगुना होने पर खाली पेट पिएं। स्वाद के लिए नींबू या शहद नहीं, तो बेहतर है।
तरीका 2 - भुना जीरा पाउडर:
जीरे को हल्का भूनकर पाउडर बना लें। रोज खाने के बाद आधा चम्मच गुनगुने पानी या छाछ के साथ लें। इससे गैस और मोटापे में तुरंत आराम मिलता है।
तरीका 3 - जीरा-अजवाइन-सौंफ का त्रिवेणी पानी:
आधा चम्मच जीरा, आधा चम्मच सौंफ, चौथाई चम्मच अजवाइन - तीनों को एक लीटर पानी में उबालें, जब आधा रह जाए तो दिन में 2-3 बार पिएं। यह पेट के सभी रोगों के लिए बहुत अच्छा है।
कितना खाएं?
सामान्य व्यक्ति के लिए दिन में 1 से 1.5 चम्मच जीरा, यानी 3 से 5 ग्राम काफी है। इससे ज्यादा खाने से नुकसान हो सकता है।
किसे सावधानी रखनी चाहिए? - SIDE EFFECTS
हर अच्छी चीज की अति बुरी होती है।जिनको बहुत ज्यादा एसिडिटी, जलन, अल्सर है, वे खाली पेट तेज जीरा पानी न पिएं।
लो ब्लड प्रेशर और लो ब्लड शुगर वाले लोग ज्यादा जीरा न लें, क्योंकि यह शुगर और BP को और कम कर सकता है।
सर्जरी होने वाली हो तो 2 हफ्ते पहले जीरा का ज्यादा सेवन बंद कर दें।
गर्भवती महिलाएं ज्यादा मात्रा में जीरा पाउडर सप्लीमेंट के रूप में न लें, खाने में तड़के वाला जीरा ठीक है।
तो देखा आपने, 20 रुपये का जीरा अगर सही तरीके से लिया जाए तो हजारों रुपये की दवाओं से बचा सकता है। इसे ही कहते हैं - गरीबों की दवा, अमीरों का राज़।
आप जीरे को किस तरह इस्तेमाल करते हैं? पानी के रूप में या पाउडर के रूप में? नीचे कमेंट में जरूर बताइए।
अगर आपको ये जानकारी उपयोगी लगी हो तो वीडियो को Like कीजिए, अपने परिवार और दोस्तों के साथ Share कीजिए, क्योंकि अच्छी सेहत का ज्ञान बांटने से बढ़ता है। और ऐसे ही आसान, साइंस और आयुर्वेद से जुड़े वीडियो के लिए चैनल को Subscribe करके बेल आइकन दबाना मत भूलिए।
मैं मिलता हूं अगले वीडियो में एक और रसोई के राज़ के साथ। तब तक स्वस्थ रहिए, मस्त रहिए। नमस्कार!
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11.9.26

दुबले हो? वजन नहीं बढ़ रहा? ये 5 कारण और समाधान आज ही जान लो




दुबले हो? वजन नहीं बढ़ रहा? ये 5 कारण और समाधान आज ही जान लो
क्या आप उन लोगों में से हैं... जो दिन में 4 बार खाना खाते हैं, घी, मक्खन, केले सब खा चुके हैं, फिर भी वजन कांटे पर 50-55 किलो से ऊपर जाता ही नहीं?
लोग मजाक में कहते हैं - अरे कितने दुबले हो, हवा में उड़ जाओगे। सुन-सुन कर थक गए हैं ना?
तो आज ये वीडियो आपके लिए है। मैं आपको डांटने नहीं वाला, घी पीने को भी नहीं कहूंगा। आज मैं आपको बताऊंगा वो 5 असली कारण, जिनकी वजह से आपका वजन नहीं बढ़ रहा, और डॉक्टर के बताए हुए 5 समाधान, जो वजन को मोटा नहीं, बल्कि हेल्दी और मजबूत बनाएंगे।
वीडियो को अंत तक देखिए, क्योंकि अंत में मैं आपको एक ऐसा 1 दिन का डाइट चार्ट दूंगा, जो आप कल से ही शुरू कर सकते हैं।
चलिए शुरू करते हैं।
नमस्कार, मैं डॉ. आलोक दयाराम
आज हम बात करेंगे एक ऐसी समस्या की जो बहुत आम है, पर उस पर बात बहुत कम होती है। मोटापे पर हजारों वीडियो हैं, पर दुबलेपन पर कोई सही जानकारी नहीं देता।
सबसे पहले एक बात समझ लीजिए। दुबला होना बीमारी नहीं है। लेकिन अगर आपका वजन आपकी हाइट और उम्र के हिसाब से बहुत कम है, तो इसे हम अंडरवेट कहते हैं। इससे थकान, कमजोरी, बाल झड़ना, और बार-बार बीमार पड़ना जैसी समस्याएं आती हैं।
तो वजन क्यों नहीं बढ़ता? इसके पीछे घी खाना कम खाना कारण नहीं है। इसके पीछे 5 बड़े कारण हैं।
 5 कारण और 5 समाधान
कारण नंबर 1: आपका मेटाबॉलिज्म बहुत तेज है
कुछ लोगों का शरीर एक फर्नेस की तरह होता है। आप जो भी खाते हैं, वो बहुत तेजी से जल जाता है। इसे हम हाई BMR कहते हैं। आपने देखा होगा, आप दोस्तों से ज्यादा खाते हैं, फिर भी आपके दोस्त का वजन बढ़ जाता है और आपका नहीं।
इसका मतलब आपका पाचन तेज है, ये अच्छी बात भी है, पर वजन बढ़ाने में ये रुकावट है।
समाधान नंबर 1:
तेज मेटाबॉलिज्म वालों को दिन में 3 बार पेट भर कर खाने से कुछ नहीं होगा। आपको 6 बार खाना होगा, पर थोड़ा-थोड़ा। हर 3 घंटे में कुछ खाना है।
जैसे - सुबह 8 बजे नाश्ता, 11 बजे केला और मूंगफली, 1 बजे दोपहर का खाना, 4 बजे शेक, 7 बजे शाम को हल्का नाश्ता, 9.30 बजे रात का खाना। जब आप बार-बार खाएंगे तो शरीर को कैलोरी जलाने का समय नहीं मिलेगा और वो उसे स्टोर करना शुरू कर देगा।
कारण नंबर 2: आप कैलोरी तो खा रहे हैं, पर प्रोटीन नहीं खा रहे
ये सबसे बड़ी गलती है। ज्यादातर दुबले लोग सोचते हैं वजन बढ़ाने के लिए सिर्फ चावल, रोटी, आलू और घी खाना है। इससे आपका पेट तो निकलेगा, पर शरीर मजबूत नहीं बनेगा। ये फैट वाला वजन है, जो बीमारी लाता है।
वजन बढ़ाने के लिए मसल्स बनानी है, और मसल्स प्रोटीन से बनती है।
समाधान नंबर 2:
अपने खाने में प्रोटीन को राजा बनाइए।
आपका लक्ष्य है - हर 1 किलो वजन पर 1.5 ग्राम प्रोटीन। अगर आपका वजन 50 किलो है, तो आपको रोज 75 ग्राम प्रोटीन चाहिए।
शाकाहारी स्रोत: दूध, पनीर, दही, सोयाबीन, चना, मूंग दाल, मूंगफली, बादाम।
मांसाहारी स्रोत: अंडा, चिकन, मछली।
एक आसान तरीका बताता हूँ। रोज 500 ml दूध, 100 ग्राम पनीर, एक कटोरी अंकुरित चना और एक मुट्ठी मूंगफली। इससे ही आपका 60-70 ग्राम प्रोटीन पूरा हो जाएगा।
कारण नंबर 3: आपकी आंतें खाने को सोख नहीं पा रही - पेट की समस्या
बहुत से दुबले लोगों को लगता है उन्हें भूख ही नहीं लगती। या खाते ही पेट में गैस, जलन, या सुबह पेट साफ नहीं होता। अगर आपकी आंतें कमजोर हैं, तो आप कितना भी अच्छा खा लें, वो शरीर में लगेगा ही नहीं।
बार-बार चाय, बाहर का तला-भुना, बहुत ज्यादा मीठा खाने से हमारी आंतें खराब हो जाती हैं।
समाधान नंबर 3:
पहले पाचन को ठीक करना होगा, तभी वजन बढ़ेगा।
तीन काम कीजिए।
एक, रोज सुबह उठकर गुनगुना पानी पीजिए।
दो, खाने के साथ दही या छाछ जरूर लीजिए, ये नेचुरल प्रोबायोटिक है।
तीन, रोज 20 मिनट तेज चलना शुरू कीजिए। चलने से आंतें एक्टिव होती हैं और भूख तेज लगती है।
अगर आपको बहुत ज्यादा गैस या कब्ज रहती है, तो एक बार डॉक्टर से मिलकर डी-वर्मिंग और विटामिन B12, D3 और थायराइड की जांच जरूर करा लें। कई बार इनकी कमी से भी वजन नहीं बढ़ता।
कारण नंबर 4: आप सिर्फ खा रहे हैं, वजन उठा नहीं रहे
ये कड़वी सच्चाई है। बिना एक्सरसाइज के जो वजन बढ़ेगा, वो सिर्फ आपके पेट और चेहरे पर चर्बी बन कर बढ़ेगा। आप हेल्दी नहीं दिखेंगे।
वजन बढ़ाने के लिए जिम में घंटों पसीना बहाने की जरूरत नहीं है। आपको मसल्स को सिग्नल देना है कि तुम्हें बड़ा होना है।
समाधान नंबर 4:
हफ्ते में 4 दिन, सिर्फ 30 मिनट वेट ट्रेनिंग कीजिए।
पुश-अप्स, स्क्वैट्स, डम्बल प्रेस, लंजेस। ये चार एक्सरसाइज ही काफी हैं। जब आप मसल्स पर जोर डालेंगे, तो शरीर खुद बोलेगा - मुझे ज्यादा प्रोटीन और खाने की जरूरत है, और आपका वजन मसल्स के रूप में बढ़ेगा। दुबले शरीर पर मसल्स बहुत सुंदर लगते हैं।
और हां, वजन बढ़ाने वालों को कार्डियो यानी बहुत ज्यादा दौड़ना नहीं है। सिर्फ वेट ट्रेनिंग।
कारण नंबर 5: आप लगातार तनाव में हैं और नींद पूरी नहीं ले रहे
क्या आप रात को 1-2 बजे तक मोबाइल देखते हैं? और दिन भर टेंशन लेते हैं?
नींद के दौरान ही हमारा शरीर ग्रोथ हार्मोन बनाता है, जो मसल्स और वजन बढ़ाने के लिए सबसे जरूरी है। अगर आप 6 घंटे से कम सोते हैं, तो आप कितना भी खा लें, वजन नहीं बढ़ेगा। तनाव में हमारा कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ जाता है जो मसल्स को तोड़ता है।
समाधान नंबर 5:
रोज 7 से 8 घंटे की गहरी नींद। ये कोई ऑप्शन नहीं, ये वजन बढ़ाने की दवा है।
रात को 10.30 से 11 बजे तक सोने की कोशिश कीजिए। सोने से 1 घंटा पहले मोबाइल बंद कर दीजिए। और दिन में 10 मिनट आंख बंद करके गहरी सांसें लीजिए। जब तनाव कम होगा, वजन अपने आप बढ़ना शुरू होगा।
अब वो वादा किया हुआ 1 दिन का सैंपल डाइट चार्ट
सुबह उठते ही - 5 भीगे हुए बादाम + 2 खजूर + 1 गिलास पानी
नाश्ता 8.30 बजे - 2 पराठे + दही + 1 गिलास दूध या 3 अंडे की भुर्जी + ब्रेड
11 बजे - 1 केला + एक मुट्ठी रोस्टेड मूंगफली
दोपहर 1.30 बजे - 2-3 रोटी + चावल + दाल + हरी सब्जी + पनीर की सब्जी + छाछ
शाम 4.30 बजे - बनाना शेक - 1 केला + 500 ml दूध + 1 चम्मच पीनट बटर + 2 खजूर
रात 8.30 बजे - 2 रोटी + कोई भी दाल + चिकन/सोया चंक्स + सलाद
सोने से पहले 10.30 बजे - 1 गिलास दूध + 1 चम्मच अश्वगंधा पाउडर [डॉक्टर की सलाह से]
याद रखिए, ये चार्ट एक सैंपल है। आपको अपने शरीर के हिसाब से इसे बदलना है। और एकदम से ज्यादा खाना शुरू मत कीजिए, धीरे-धीरे बढ़ाइए।
अंत में एक जरूरी बात। वजन बढ़ाना एक धीमी प्रक्रिया है। 10 दिन में 10 किलो वाला कोई जादू नहीं होता। अगर कोई पाउडर, कैप्सूल आपको ये वादा करे, तो उससे बचिए। वो स्टेरॉयड हो सकते हैं जो लीवर और किडनी खराब कर देते हैं।
हेल्दी वजन बढ़ने की स्पीड है - महीने का 2 से 3 किलो। 3 महीने दीजिए, आपका शरीर बदल जाएगा।
तो आज से कौन सी गलती आप सुधारने वाले हैं? नीचे कमेंट में जरूर लिखिए।
अगर आपको ये जानकारी काम की लगी हो, तो इस वीडियो को लाइक करके अपने उस दुबले-पतले दोस्त को शेयर जरूर कीजिए जिसे इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।
और ऐसे ही डॉक्टर द्वारा बताई गई सही और ईमानदार हेल्थ जानकारी के लिए चैनल को सब्सक्राइब करके बेल आइकन दबा दीजिए।
मैं मिलता हूँ अगले वीडियो में। तब तक अपना ध्यान रखिए, हेल्दी खाइए और मजबूत बनिए।
धन्यवाद।

6.9.26

रोज एक कटोरी सोयाबीन, और बीमारियों से छुट्टी

                                  



क्या आप जानते हैं... अंडे से भी ज्यादा प्रोटीन... दूध से भी ज्यादा कैल्शियम... और नॉनवेज से भी ज्यादा ताकत... एक छोटी सी सस्ती सी चीज में है?
हाँ। मैं बात कर रहा हूँ सोयाबीन की।
अगर आप रोज सिर्फ एक कटोरी सोयाबीन खा लें... तो आपकी हड्डियां मजबूत... दिल स्वस्थ... शुगर कंट्रोल... और बुढ़ापा भी दूर रहेगा।
पर 90% लोग सोयाबीन को गलत तरीके से खाते हैं... जिससे गैस, बदहजमी और यूरिक एसिड बढ़ जाता है।
आज इस वीडियो में मैं आपको बताऊंगा... सोयाबीन खाने के 12 चमत्कारी फायदे... इसे खाने का सही तरीका क्या है... और किसे नहीं खाना चाहिए।
इसलिए वीडियो को अंत तक जरूर देखिए। [PAUSE]
PART 2: INTRO
नमस्कार, मैं हूँ आपका दोस्त... और आज हम बात करेंगे एक ऐसी चीज की जिसे शाकाहारियों का मांस कहा जाता है। सुपरफूड कहा जाता है।
सोयाबीन।
हमारे भारत में इसे बहुत हल्के में लिया जाता है। लोग सोचते हैं... ये तो गरीबों का खाना है। पर सच तो ये है... कि अमेरिका, जापान जैसे देशों में इसे सोने से भी कीमती माना जाता है।
आज हम इसी पर विस्तार से बात करेंगे।
 सोयाबीन आखिर है क्या?
सबसे पहले समझते हैं सोयाबीन है क्या। सोयाबीन एक दाल नहीं है... बल्कि एक तिलहन है। यानी ऑयल सीड।
इसमें 40% प्रोटीन होता है। सोचिए... दाल में 20 से 22% प्रोटीन होता है... अंडे में 13%... और सोयाबीन में 40%।
यानी ये प्रोटीन का सबसे सस्ता और सबसे शुद्ध शाकाहारी स्रोत है। इसमें 9 के 9 एसेंशियल अमीनो एसिड होते हैं जो हमारी बॉडी खुद नहीं बनाती।
 एक कटोरी सोयाबीन में क्या क्या मिलता है? [यहाँ ग्राफिक्स दिखाएं]
अगर आप 100 ग्राम सोयाबीन खाते हैं तो आपको क्या मिलता है...
प्रोटीन - 36 से 40 ग्राम।
फाइबर - 9 ग्राम।
कैल्शियम - 277 मिलीग्राम।
आयरन - 15 मिलीग्राम।
मैग्नीशियम, पोटेशियम, विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स, और ओमेगा-3 फैटी एसिड।
और सबसे खास बात... इसमें कोलेस्ट्रॉल जीरो है। लैक्टोज जीरो है। ग्लूटेन फ्री है।
रोज एक कटोरी सोयाबीन खाने के 12 फायदे
फायदा नंबर 1: मसल्स और ताकत के लिए वरदान।
जो लोग जिम जाते हैं... या जिनकी उम्र 50 साल से ऊपर है... जिनके हाथ पैरों में दर्द रहता है... उनके लिए सोयाबीन अमृत है। इसमें मौजूद ल्यूसीन नाम का अमीनो एसिड मसल्स को रिपेयर करता है। रोज एक कटोरी खाने से कमजोरी दूर होती है।
फायदा नंबर 2: हड्डियों को लोहे जैसा मजबूत बनाता है।
60 साल के बाद हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। महिलाओं में मेनोपॉज के बाद तो और ज्यादा। सोयाबीन में कैल्शियम और विटामिन D और आइसोफ्लेवोन्स होते हैं... जो हड्डियों के घनत्व को बढ़ाते हैं। ऑस्टियोपोरोसिस से बचाता है।
फायदा नंबर 3: दिल का सबसे अच्छा दोस्त।
सोयाबीन में सैचुरेटेड फैट बहुत कम है और अनसैचुरेटेड फैट अच्छा है। ये आपके खराब कोलेस्ट्रॉल यानी LDL को कम करता है। और अच्छे कोलेस्ट्रॉल HDL को बढ़ाता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने भी माना है कि रोज 25 ग्राम सोया प्रोटीन दिल की बीमारियों के खतरे को 30% तक कम कर देता है।
फायदा नंबर 4: डायबिटीज में रामबाण।
सोयाबीन का ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत कम है... सिर्फ 18। यानी इसे खाने से शुगर एकदम से नहीं बढ़ती। इसमें फाइबर और प्रोटीन दोनों हैं जो शुगर को धीरे-धीरे रिलीज करते हैं। डायबिटीज के मरीजों के लिए ये दालों से भी बेहतर है।
फायदा नंबर 5: वजन घटाने में मददगार।
अगर आप वजन कम करना चाहते हैं तो सोयाबीन से अच्छा कुछ नहीं। इसमें फाइबर बहुत ज्यादा है... जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है। भूख कम लगती है। प्रोटीन ज्यादा है... जिससे फैट बर्न होता है। पर याद रखें... वजन कम करने के लिए उबली हुई सोयाबीन खाएं... तली हुई नहीं।
फायदा नंबर 6: महिलाओं के लिए वरदान।
सोयाबीन में फाइटोएस्ट्रोजन यानी पौधों वाला एस्ट्रोजन होता है जिसे आइसोफ्लेवोन्स कहते हैं। ये महिलाओं में हार्मोन बैलेंस करता है। पीरियड्स की अनियमितता, मेनोपॉज के बाद गर्मी लगना, मूड स्विंग... इन सब में बहुत आराम देता है।
फायदा नंबर 7: पाचन तंत्र मजबूत।
इसमें घुलनशील और अघुलनशील दोनों तरह का फाइबर है। ये कब्ज को दूर करता है... आंतों की सफाई करता है... और अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाता है।
फायदा नंबर 8: बालों और त्वचा के लिए।
सोयाबीन में बायोटिन, विटामिन E और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। ये बालों को झड़ने से रोकते हैं... स्किन में निखार लाते हैं... और झुर्रियों को कम करते हैं। जापान की महिलाएं जवान दिखती हैं... उसका एक राज सोया ही है।
फायदा नंबर 9: दिमाग तेज करता है।
इसमें लेसिथिन होता है जो दिमाग के लिए बहुत जरूरी है। याददाश्त बढ़ाता है... अल्जाइमर के खतरे को कम करता है।
फायदा नंबर 10: कैंसर से बचाव में सहायक।
कई रिसर्च में पाया गया है कि सोयाबीन में मौजूद आइसोफ्लेवोन्स ब्रेस्ट कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं।
फायदा नंबर 11: अच्छी नींद के लिए।
सोयाबीन में मैग्नीशियम होता है जो नींद की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है।
फायदा नंबर 12: थायराइड और एनर्जी।
इसमें सेलेनियम और आयरन होता है जो थकान को दूर करता है और एनर्जी लेवल को दिन भर बनाए रखता है।
 सबसे बड़ी गलती - सोयाबीन कौन न खाए और कैसे न खाए? [बहुत जरूरी]
अब एक बहुत जरूरी बात। हर अच्छी चीज का भी एक नियम होता है।
1. किसे नहीं खाना चाहिए?
अगर आपका यूरिक एसिड बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है... आपको किडनी स्टोन है... या थायराइड की दवा ले रहे हैं... तो डॉक्टर से पूछकर ही खाएं। सोयाबीन में प्यूरीन और गोइट्रोजन होते हैं।
2. गलत तरीका क्या है?
कई लोग सोयाबीन को बिना भिगोए सीधे उबाल देते हैं। इससे इसमें मौजूद एंटी-न्यूट्रिएंट्स नहीं निकलते और गैस बनती है। कई लोग इसे बहुत ज्यादा तेल में फ्राई करके खाते हैं... जिससे इसका फायदा नुकसान में बदल जाता है।
 खाने का सही और हेल्दी तरीका क्या है?
सही तरीका सुनिए...
स्टेप 1: सोयाबीन को 6 से 8 घंटे के लिए पानी में भिगो दें।
स्टेप 2: उस पानी को फेंक दें। अच्छे से 2 से 3 बार धो लें।
स्टेप 3: फिर 10 मिनट तक खुला उबालें। कुकर में एक सीटी भी ले सकते हैं।
स्टेप 4: अब आप इसे सब्जी की तरह बना सकते हैं, पुलाव में डाल सकते हैं, या सलाद में खा सकते हैं।
एक स्वस्थ व्यक्ति को रोज 50 से 75 ग्राम... यानी एक छोटी कटोरी सोयाबीन बहुत है। हफ्ते में 4 से 5 बार काफी है। रोज खाना जरूरी नहीं।
सबसे अच्छा समय है... दोपहर के लंच में। रात में भारी होने के कारण न खाएं।
 मेरी सलाह
देखिए, कोई भी एक चीज अकेले आपको बीमारियों से छुट्टी नहीं दिला सकती। लेकिन सही खानपान... रोज की थोड़ी सैर... और एक कटोरी सोयाबीन जैसी प्रोटीन वाली चीज... आपको दवाइयों से जरूर दूर रख सकती है।
सोयाबीन महंगा नहीं है। 100 रुपये किलो में आ जाता है। पर इसके फायदे लाखों के हैं।
तो दोस्तों, आपको आज की जानकारी कैसी लगी? क्या आप भी सोयाबीन खाते हैं? आप इसे किस तरीके से बनाते हैं? नीचे कमेंट में जरूर बताइए।
अगर ये वीडियो आपको काम का लगा हो तो... इसे अपने परिवार के उस सदस्य को जरूर शेयर करें... जिसे प्रोटीन की कमी है... या हड्डियों में दर्द रहता है।
और ऐसे ही आसान हेल्थ टिप्स के लिए... चैनल को सब्सक्राइब करके बेल आइकन जरूर दबा दीजिए।
मैं मिलूंगा आपसे अगले वीडियो में एक और नई जानकारी के साथ। तब तक अपना ध्यान रखिए... स्वस्थ रहिए।
धन्यवाद।

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5.9.26

"रोज 1 चम्मच अजवाईन और 7 बीमारियां गायब"




क्या आपको पता है?
आपकी रसोई में एक ऐसी चीज पड़ी है,
जो आपकी 7 बड़ी बीमारियों को जड़ से खत्म कर सकती है।
रोज सिर्फ 1 चम्मच...
और ना गैस, ना कब्ज, ना मोटापा, ना जोड़ों का दर्द।
मैं आज आपको बताऊंगा,
अजवाईन खाने का सही तरीका क्या है,
कब खानी है, कैसे खानी है,
और किसे अजवाईन भूलकर भी नहीं खानी चाहिए।
वीडियो को आखिर तक देखना,
क्योंकि आखिर में मैं एक ऐसी गलती बताऊंगा जो 90% लोग करते हैं,
जिससे अजवाईन फायदे की जगह नुकसान करने लगती है।
तो चलिए शुरू करते हैं।
नमस्कार, मैं डॉ. दयाराम आलोक
आज हम बात करेंगे अजवाईन के बारे में।
आयुर्वेद में अजवाईन को कहा गया है - "यमानी"।
यमानी यानी जो यम के समान दर्द को नष्ट करे।
अजवाईन में होता है थाइमोल।
यही थाइमोल हमारी पाचन शक्ति को 10 गुना तक बढ़ा देता है।
बीमारी नंबर 1 - गैस, एसिडिटी, खट्टी डकार
पहली बीमारी - गैस और एसिडिटी।
आज हर दूसरे व्यक्ति को गैस है।
पेट फूल जाता है, डकार आती है, सीने में जलन होती है।
क्यों होता है ऐसा?
जब हमारा खाना ठीक से नहीं पचता,
तो पेट में आम बनता है। यही आम गैस बनाता है।
अजवाईन क्या करती है?
अजवाईन सीधे आपके जठराग्नि को तेज करती है।
पेट में पाचक रस ज्यादा बनते हैं, खाना जल्दी पचता है।
कैसे लेनी है?
रात को 1 चम्मच अजवाईन को 1 गिलास पानी में भिगो दें।
सुबह उस पानी को छान कर, हल्का गुनगुना करके,
उसमें आधा नींबू और काला नमक मिलाकर पी लें।
5 दिन में ही आपको फर्क दिखेगा।
खट्टी डकारें बंद हो जाएंगी।
दूसरी बीमारी - पुरानी कब्ज।
सुबह पेट साफ नहीं होता,
तो पूरा दिन खराब हो जाता है।
सिर भारी, आलस, भूख नहीं लगना।
अजवाईन में फाइबर बहुत है।
और थाइमोल आंतों की गति को बढ़ाता है।
यानी आंतें अच्छे से काम करती हैं।
नुस्खा -
1 चम्मच अजवाईन + 1 चम्मच जीरा।
दोनों को हल्का भून लें।
इसमें थोड़ा काला नमक मिलाकर पाउडर बना लें।
रोज रात को खाने के बाद,
गुनगुने पानी के साथ आधा चम्मच ये पाउडर ले लें।
सुबह पेट एकदम साफ।
ये नुस्खा बुजुर्गों के लिए बहुत अच्छा है।
तीसरी बीमारी - मोटापा।
अजवाईन वजन कैसे घटाती है?
तीन तरीके से।
पहला - मेटाबॉलिज्म तेज करती है।
दूसरा - शरीर में जमा एक्स्ट्रा पानी को बाहर निकालती है।
तीसरा - भूख को कंट्रोल करती है, बार-बार खाने की इच्छा खत्म करती है।
फैट कटर ड्रिंक -
1 चम्मच अजवाईन,
1 चम्मच सौंफ,
1 गिलास पानी में रात भर भिगो दें।
सुबह इसे 5 मिनट उबालें।
जब आधा रह जाए तो छान लें।
इसमें 1 चम्मच शहद मिलाएं।
रोज सुबह खाली पेट 15 दिन तक पियें।
साथ में थोड़ा टहलना जरूर करें।
पेट की चर्बी पिघलने लगेगी।
ध्यान दें - अजवाईन अकेले जादू नहीं करेगी।
खान-पान का ध्यान रखना जरूरी है।
चौथी बीमारी - सर्दी, खांसी और कफ।
बदलते मौसम में नाक बंद, कफ जमा हो जाता है।
अजवाईन की तासीर गर्म है।
ये कफ को पिघला कर बाहर निकालती है।
दो बहुत असरदार प्रयोग -
प्रयोग 1 - काढ़ा।
1 चम्मच अजवाईन + 5 तुलसी के पत्ते + छोटा टुकड़ा अदरक।
1.5 गिलास पानी में उबालें।
जब 1 गिलास रह जाए तो शहद मिलाकर पियें।
प्रयोग 2 - धुंआ।
अजवाईन को तवे पर गर्म करें,
एक रुमाल में बांध कर पोटली बना लें।
इसे सूंघें।
बंद नाक 2 मिनट में खुल जाएगी।
छोटे बच्चों को भी सुला सकते हैं, पास में रख दें।
पांचवी बीमारी - जोड़ों का दर्द।
ठंड में दर्द बढ़ जाता है।
अजवाईन में Anti-inflammatory गुण है।
यानी सूजन को कम करती है।
तेल बनाने की विधि -
100 ग्राम सरसों के तेल में,
2 चम्मच अजवाईन और 4-5 लहसुन की कलियां डालें।
तेल को धीमी आंच पर पकाएं।
जब लहसुन काला पड़ जाए तो तेल छान लें।
इस गुनगुने तेल से घुटनों पर मालिश करें।
बहुत आराम मिलेगा।
और साथ में -
अजवाईन की पोटली से सिकाई भी कर सकते हैं।
छठी बीमारी - बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल।
अजवाईन खराब कोलेस्ट्रॉल यानी LDL को कम करने में मदद करती है।
पेट साफ रहेगा तो खून भी साफ रहेगा।
कैसे लें?
सुबह अजवाईन का पानी पीने से,
शरीर में जमा गंदगी बाहर निकलती है।
लिवर साफ होता है, तो कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रहता है।
लेकिन -
जिनको हाई बीपी की दवा चल रही है,
वो अजवाईन ज्यादा मात्रा में ना लें।
क्योंकि इसकी तासीर गर्म है।
सातवीं और आखिरी बीमारी - पेट के कीड़े और कमजोर इम्यूनिटी।
बच्चों के पेट में अक्सर कीड़े हो जाते हैं।
भूख नहीं लगती, वजन नहीं बढ़ता।
अजवाईन में कृमिनाशक गुण है।
ये पेट के कीड़ों को मारती है।
नुस्खा -
आधा चम्मच अजवाईन का चूर्ण + चुटकी भर काला नमक।
गुड़ के साथ सुबह खाली पेट दें। बच्चों को आधी मात्रा दें।
और बड़ों के लिए -
रोज अजवाईन खाने से इम्यूनिटी भी बढ़ती है।
बार-बार सर्दी-जुकाम नहीं होगा।
अब सबसे जरूरी बात।
अजवाईन खानी कैसे है?
मात्रा -
एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए दिन में 1 से 2 चम्मच से ज्यादा नहीं।
छोटा चम्मच, जो चाय वाला होता है।
सही समय -
सुबह खाली पेट पानी के रूप में,
या रात को खाने के 1 घंटे बाद चूर्ण के रूप में।
कभी भी दोपहर में खाली पेट ज्यादा मात्रा में ना लें।
किसे नहीं खानी चाहिए?
ये जरूर सुनें।
गर्भवती महिलाओं को ज्यादा मात्रा में नहीं लेनी चाहिए।
जिनको अल्सर है, मुंह में छाले पड़ते हैं, उन्हें नहीं लेनी।
जिनको बवासीर में खून आता है, वो परहेज करें।
5 साल से छोटे बच्चों को सीधे अजवाईन ना दें।
वो गलती जो 90% लोग करते हैं
अब वो गलती।
बहुत लोग अजवाईन को कच्चा, ज्यादा मात्रा में,
रोज-रोज महीनों तक खाते रहते हैं।
याद रखिए, अजवाईन दवा है, रोज का भोजन नहीं।
लगातार 15-21 दिन लें, फिर 10 दिन का गैप दें।
और हमेशा भून कर या पानी में उबाल कर लें।
कच्ची अजवाईन तेज होती है, एसिडिटी बढ़ा सकती है।
तो देखा आपने,
सिर्फ 10 रुपये की अजवाईन कैसे लाखों की दवाओं पर भारी है।
आप इनमें से कौन सा नुस्खा ट्राई करना चाहेंगे?
कमेंट में जरूर बताइए।
अगर आपको ये जानकारी काम की लगी,
तो वीडियो को लाइक कर दीजिए।
ऐसे ही घरेलू और आयुर्वेदिक नुस्खों के लिए
चैनल को सब्सक्राइब करके बेल आइकन दबा दीजिए।
आप स्वस्थ रहें, मस्त रहें।
फिर मिलते हैं अगले वीडियो में।
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