2017-12-11

शिवलिंगी बीज के गुण उपयोग



    शिवलिंगी बीज एक आयुर्वेदिक औषधि हैं जिसका घटक सिर्फ एक बीज ही हैं और वो हैं ब्रयोनोप्सिस लेसिनियोसा का बीज जिसे समान्यतया शिवलिंगी कहा जाता हैं। शिवलिंगी बीज का प्रयोग पुरे देश में प्रजनन क्षमता बढ़ाने और स्त्रियों के रोग विकारो को दूर करने के लिए किया जाता हैं,इसका प्रयोग स्वस्थ बच्चे के जन्म के लिए भी किया जाता हैं। इसके अलावा शिवलिंगी बीज लिवर, श्वसन, पाचन तंत्र, गठिया, चयापचय विकारों और संक्रामक रोगों के लिए भी लाभदायक हैं,साथ में इसके सेवन से इम्युनिटी भी बढ़ती हैं। महिलायो में बाँझपन की समस्या मुख्यता हार्मोन्स के असन्तुलन की वजह से होती हैं पर शिवलिंगी बीज हार्मोन्स का संतुलन बनाये रखने में असरदार हैं,जिसकी वजह से महिलायो में बाँझपन की समस्या नही होती।
शिवलिंगी बीज के लाभ एवं उपयोग
  महिलाओं के यौन स्वास्थ्य में सुधार के लिए :-
 शिवलिंगी बीज महिलायो के रोगों की रोकथाम के लिए अत्यंत लाभदायक हैं जैसे महिलायो की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के लिए इससे बेहतर और बिना दुष्प्रभावो के और कोई उत्पाद नही हैं इसके अलावा यह हार्मोन्स को संतुलित करता हैं जिससे महिलायो को मासिक धर्म अनियमितताओं से छुटकारा मिलता हैं।
गर्भधारण के लिए
जैसा की पहले भी बताया गया हैं की यह औषधि हार्मोन्स को संतुलित करती हैं,जिसके परिणामस्वरूप महिलायो को सुरक्षित गर्भधारण करने में शिवलिंगी बीज मदद करती हैं और जो महिलाये बार बार हो रहे गर्भपात की समस्या से जूझ रही हो, उनके लिए भी यह लाभदायक हैं।
बाँझपन के लिए
बाँझपन को दूर करने के लिए शिवलिंगी बीज एक उपयोगी औषधि हैं।
अन्य रोगों में भी लाभदायक
स्त्री रोगों के अलावा शिवलिंगी बीज इम्युनिटी बढ़ाने के लिए भी एक अच्छी औषधि हैं और गठिया, जोड़ो के दर्द, दमा और पाचन सम्बन्धी रोगों की रोकथाम करने में भी यह सहायक हैं।
औषधीय मात्रा निर्धारण एवं व्यवस्था
शिवलिंगी बीजो को कूट कर पीस और छान लें, इसके बाद इसका पाउडर बना के रख लें। अच्छे परिणामो के लिए पुत्रजीवक बीजो के चूर्ण और शिवलिंगी पाउडर को मिक्स कर लें इसके बाद इस मिश्रण का एक चम्मच दिन में दो बार लें एक बार सुबह नाश्ते से एक घंटे पहले और शाम के भोजन के एक घंटे पहले और इसके सेवन से सम्बंधित सबसे महत्वपूर्ण सुझाव यह दिया जाता हैं की इस औषधि का सेवन गाय के दूध के साथ करना चाहिए और वो भी उस गाय के दूध के साथ जिसका बछड़ा हो।

उलट कम्बल के लाभ और औषधीय प्रयोग

   
    उलट कम्बल गर्भाशय संबंधी विकारो की रोकथाम के लिए उपयुक्त औषधि हैं। इसके अलावा इसका सेवन करने से गठिया, गठिये में होने वाले दर्द, कष्टार्तव, मधुमेह जैसी समस्याओं में फायदा होता हैं। उलट कम्बल से साइनसाइटिस से होने वाले सिरदर्द से भी राहत मिलती हैं।
औषधीय भाग
जड़ और जड़ की छाल उलट कम्बल (एब्रोमा ऑगस्टा) का महत्वपूर्ण औषधीय भाग हैं। इसकी जड़ों का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाओं में किया जाता हैं। यह गर्भाशय के लिए टॉनिक, आर्तवजनक, गर्भाशय के विकारो से मुक्त करने वाला और पीड़ानाशक होता हैं। इसी वजह से इसका प्रयोग भारतीय पारंपरिक दवाईयों में भी किया जाता हैं। कुछ मामलों में इसकी पत्तियां और तना भी राहत प्रदान करने का काम करती हैं।
औषधीय कर्म
उलट कम्बल में निम्नलिखित औषधीय गुण है:
गर्भाशय-बल्य
गर्भाशय उतेजक
आर्तव जनन
वेदनास्थापन – पीड़ाहर (दर्द निवारक)
चिकित्सकीय संकेत 
उलट कम्बल निम्नलिखित व्याधियों में लाभकारी है:
रजोरोध
अनियमित माहवारी (अनियमित ऋतुस्त्राव)
संधिशोथ 
उलट कम्बल के लाभ और औषधीय प्रयोग
उलट कम्बल कई बिमारियों के लिए एक बहुत अच्छी आयुर्वेदिक औषधि हैं। इसके कुछ लाभ और औषधीय प्रयोग इस प्रकार हैं।
रजोरोध, अनियमित माहवारी और अंडे (अंडाणु) का न बनना
उलट कम्बल के जड़ की छाल मासिक धर्म को नियंत्रित करने सहायक हैं। यह औषधि हार्मोन्स को संतुलित करती हैं। जिससे अंडे (अंडाणु) के बनने की प्रक्रिया भी संतुलित होती हैं।
यह औषधि दोनों तरह की रजोरोध में भी लाभदायक हैं। यह अंडाशय को उभारता हैं, जिससे हार्मोन्स संतुलित होते हैं। यह माहवारी को शुरू करने में सहायक है।
माहवारी न आती हो (रजोरोध के इलाज के लिए)
इन बिमारियों में उलट कम्बल की जड़ की छाल का चूर्ण (1 to 3 ग्राम) और काली मिर्च (125 से 500 मिलीग्राम) दिये जाते हैं। इस औषषि का सेवन पानी के साथ तब तक किया जाता हैं जब तक की माहवारी शुरू न हो जाये।
माहवारी नियमित करने के लिए
इस औषधि का सेवन माहवारी आने की तिथि से सात दिन पहले शुरू किया जाता हैं। महावरी के चार दिन बाद तक इस औषधि को दिया जाता हैं। इस उपाय से माहवारी नियमित हो जाती हैं। ऐसे ही इसका प्रयोग कम से कम चार महीनो तक करना चाहिए।
कष्टार्तव
उलट कंवल जड़ की छाल माहवारी में होने वाली दर्द और माहवारी से पहले के दर्द और अन्य लक्षण पर भी अपना असर डालती हैं। इन रोगों का उपचार करने के लिए, जड़ की छाल के चूर्ण का सेवन माहवारी आने की तारीख से 3 से 7 दिन पहले शुरू करना चाहिए। इसका सेवन तब तक करना चाहिए जब तक ब्लीडिंग रुक न जाये।
संधिशोथ
उलट कम्बल का प्रयोग संधिशोथ में बहुत ही कम किया जाता हैं। मगर इस औषधि में सूजन और पीड़ा कम करने वाले गुण होते हैं। इस गुणों की वजह से संधिशोथ के रोगियों को जोड़ो में होने वाली सूजन और पीड़ा से राहत मिलती हैं।
 

2017-11-27

शरीर के विषैले तत्वों से छुटकारा पाने के आसान तरीके



    विषहरण करना (Detox), या विषहरण आहार-संयम शरीर को विषाक्त पदार्थों से मुक्त करने की पद्धति है। 
    क्या आप हमेशा सुस्ती का अनुभव करते हैं? क्या अचानक से आपके चेहरे पर मुहांसे और त्वचा पर फुंसी निकल आती हैं? क्या आप अपने पाचन तंत्र में गड़बड़ी महसूस कर रहे हैं? अगर हां, तो आपके शरीर को डीटाक्स करने की जरूरत है। एक स्वस्थ्य जिंदगी का सबसे बड़ा राज यह है कि अपने शरीर से विषैले तत्वों को निकाला जाए। इसलिए अब तक आप अपने शरीर के साथ जो बुरा करते आए हैं, उन्हें सुधार लें। आइए हम आपको बताते हैं कुछ आसान तरीके, जिन्हें अपना कर आप अपने शरीर में मौजूद विषैले तत्वों से छुटकारा पा सकते हैं।
   *एंटी-ऑक्सीडेंट की आदत डालें डीटाक्सीफाइ का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप ज्यादा से ज्यादा फल और हरी सब्जियां खाएं। इससे लीवर एंजाइम सक्रिय होंगे और शरीर में मौजूद नुकसानदायक पदार्थो को बाहर निकालने में मदद करेंगे।
*  
विषहरण-फलाहार करें: 
अपने को भूखा रखे बिना उपवास करने का एक शानदार तरीका विषहरण-फलाहार है। इसके जहां कई अन्य स्वास्थ्य वर्द्धक फायदे हैं, वहीं पर्याप्त मात्रा में फल खाने से आपकी ऊर्जा के स्तर में बढ़ोतरी हो सकती है, वजन संतुलित करने में मदद मिल सकती है, यहां तक कि आघात (stroke) की संभावना को भी कम किया जा सकता हैं। कई प्रकार के फलों के समन्वय या सिर्फ एक ही किस्म का फल खाकर आप विषहरण कर सकते हैं। सर्वोत्तम परिणाम के लिए, वह फल चुनिए जिसे खाने में आपको मज़ा आता है, इससे आप अपने को पीड़ित महसूस नहीं करेंगे। केवल फलाहार पर एक बार में लगातार 7 दिनों से ज्यादा न रहें।
*खट्टे फल खाएँ: 
इन फलों में सर्वाधिक विषहारी क्षमता होती है और संतरे, कीनू, अंगूर, नींबू इनमें शामिल हैं।आप इन्हें ऐसे ही खा सकते हैं, या अन्य फलों में इन्हें मिलाकर खा सकते हैं। एक बार फिर ध्यान दीजिए, केवल फलाहार पर एक बार में लगातार 7 दिनों से ज्यादा न रहें।
*अंगूर-विषहरण (grape detox) को आजमाइए: 
अंगूर में रिज्वेराट्रोल होते हैं, जो कैंसर और मधुमेह से रक्षा कर सकते हैं, और संभवतः खून के थक्कों को रोक सकते हैं। यह पोटैशियम और विटामिन C का एक बड़ा स्रोत भी है। 3-5 दिनों तक अंगूर के सिवाय कुछ भी न खाएँ।
*ऑर्गेनिक प्रोडक्ट का चयन करें कीटनाशक दवाइयों और विषैले तत्वों के खतरे से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि ऑर्गेनिक फूड का सहारा लिया जाए।
हर्बल चाय का सेवन करें 
पाचन तंत्र की समस्या से निजात पाने के लिए ग्रीन टी या कैमोमाइल टी का सेवन करें। इससे नींद भी अच्छी आएगी। ये चाय शरीर में रक्त संचार को भी बढ़ाता है, जो शरीर से विषैले तत्वों को हटाने में मददगार होते हैं।
*हल्का खाना खाएं 
लगातार हल्का आहार लें और करीब एक महीने तक शराब से दूर रहें। इस विधि से न सिर्फ आपकी ऊर्जा बढ़ेगी, बल्कि इससे आपके वजन के साथ-साथ कोलेस्ट्रोल और ब्लड सूगर का स्तर भी कम होगा
हर दिन 45 मिनट व्यायाम करें अपने दिन की शुरुआत ब्रिस्क वॉकिंग, रनिंग, जॉगिंग या साइकलिंग से करें। इससे शरीर के साथ-साथ दिमाग को भी लाभ पहुंचेगा।
*सिर्फ पेय लेकर उपवास करें: 
2-3 दिनों के लिए पेय (पानी, चाय, फलों का रस, सब्जी का रस, और / या प्रोटीन शेक) के अलावा कुछ भी न खाएँ। तरल आहार कैलोरी की मात्रा को सीमित करके वजन घटाने में काफी मदद कर सकते हैं, और माना जाता है कि, कुछ जहरीले तत्वों को बाहर निकालकर ये आपके शरीर की सफाई करते हैं, हालाँकि इस दावे के पक्ष में किसी ठोस अनुसंधान का साक्ष्य नहीं है।
सिर्फ पेय लेकर उपवास के दौरान फल और / या सब्जियों का रस शामिल करना न भूलें, जिससे आपके शरीर को उचित पोषण मिलना निश्चित हो सके।
*आपका लक्ष्य यदि वजन कम करना है, तो पेय उपवास ख़त्म होते ही आपको अपने खाने की आदतों में परिवर्तन करना होगा, वरना आप घटाए गए वजन को जल्दी ही दोबारा हासिल कर लेंगे।
चीनी को कहें ना अगर आप अपने शरीर के मेटाबोलिज्म को बढ़ाना चाहते हैं और इसे विषैले तत्वों से दूर रखना चाहते हैं, तो चीनी सेवन की मात्रा घटा दीजिए। हर तरह के मीठे से जहां तक हो सके दूरी बनाइए।

*खुद का एंटी-ऑक्सीडेंट बनाएं
 ज्यादा से ज्यादा लहसुन और अंडे खाएं। ये सल्फ्यूरिक तत्वों से भरपूर होते हैं। ये तत्व शरीर में ग्लूथाथीओन नामक एंटी-ऑक्सीडेंट के निर्माण में सहायक होते हैं। ये शरीर में मौजूद रसायन और भारी धातु सहित अन्य विषैले तत्वों को भी बाहर निकाल देते हैं।
*पर्याप्त मात्रा में पानी पीजिए: 
आपकी सेहत के लिए पर्याप्त पानी आवश्यक है। कई प्रकार के स्वास्थ्य संबंधी फायदों के अलावा, यह आपके शरीर के तरल पदार्थ के स्तर को बनाए रखने में मदद करता है, जिससे शरीर से मुख्य जहरीले तत्वों, रक्त की यूरिया नाइट्रोजन आदि को बाहर निकालने में गुर्दे को काफी सहायता मिलती है।
नींबू का शरबत पीजिए। पानी में नींबू, संतरा, या मुसम्मी घोलकर दिन भर पीते रहें। इन फलों में साइट्रिक एसिड होता है, जो शरीर की वसा (fat) में कटौती करता है।इसके अतिरिक्त, पानी में स्वाद लाने से रोजाना 8 ग्लास पी पाना आपके लिए आसान हो जाएगा! नींबू से दांतों के अम्लीय क्षय (acid erosion) को रोकने के लिए भोजन के अंतराल में ब्रश करते रहें।
*योग करें 
योग न सिर्फ डीटाक्सीफाइ में मददगार होता है, बल्कि इससे दिमाग को भी फायदा पहुंचता है। हर सुबह आप कुछ साधारण योग करके भी अपने शरीर के विषैले तत्वों से छुटकारा पा सकते हैं।
नाक की करें सफाई हम एक ऐसे वातावरण में रहते हैं, जो धूल और प्रदुषण से भरे पड़े हैं। इससे आपको एलर्जी हो सकती है। इससे बचने के लिए अपने नाक को नियमित रूप से धोएं। ऐसा करने पर वायु प्रदुषक से छुटकारा मिलेगा और नींद भी अच्छी आएगी।
*गहरी सांस लें गहरी सांस लें। इससे स्वास्थ्य बेहतर होने के साथ-साथ पूरे शरीर में ऑक्सीजन का भी अच्छे से संचार होगा।
*सात दिनों तक केवल फल और सब्जियां खायें: फलों और सब्जियों में विटामिन, खनिज तत्व (minerals) और अन्य पोषक तत्व (nutrients) होते हैं, जिनकी जरूरत सेहतमंद रहने के लिए आपके शरीर को पड़ती है। शरीर को उचित मात्रा में आवश्यक पोषक तत्व मिलता रहे, यह निश्चित करने के लिए विविधतापूर्ण आहार लेने का ख़ास ख़याल रखें। अपने 7 दिवसीय उपवास के दौरान क्या खाना है, यह तय करने के लिए आगे बताए गए गाइड का इस्तेमाल कीजिए:
राजमा, काली सेम, सेब, सोयाबीन, ब्लूबेरी, और वज्रांगी (artichoke) से रेशे (fiber) प्राप्त करें।
गाजर, केले, लीमा बीन्स (फली), सफेद आलू, पकाये गए साग, और शकरकंद से पोटैशियम प्राप्त करें।
कीवी, स्ट्रॉबेरी, गोभी, फूलगोभी, टमाटर, संतरा, अंकुरित ब्रसेल्स, आम, और शिमला मिर्च से विटामिन C लें।
पकाई हुई पालक, खरबूजे, शतावरी, संतरे, और लोबिया से फोलेट (folate) प्राप्त कीजिए।
रुचिरा (avocado), जैतून, और नारियल से स्वास्थ्यकारी वसा (good fat) पाइए।
*धीरे-धीरे खाएं खाना 
धीरे-धीरे खाएं। भले ही इसमें ज्यादा समय लगे, पर भोजन को अच्छी तरह से चबाएं। धीरे-धीरे खाने से पाचन की समस्या से निजात मिलेगा और आप अपने भोजन का आनंद भी उठा सकेंगे।
*लेमन जूस पीएं एक ग्लास लेमन जूस पीने से न सिर्फ शरीर शुद्ध होता है, बल्कि इससे शरीर में क्षार की मात्रा भी बढ़ती है। यह एक सर्वश्रेष्ठ डीटाक्स ड्रिंक है। इसलिए ताजे लेमन जूस पीने पर ज्यादा ध्यान दें।
जूस पीएं ताजे फलों और सब्जियों के जूस पीने की मात्रा को बढ़ाएं।
*माइक्रोवेव से बचें खाने को माइक्रोवेव में रखने से इसमें मौजूद प्रोटीन की संरचना बदल जाती है। इसे खाने से शरीर को काफी नुकसान पहुंचता है। इतना ही नहीं, माइक्रोवेव से रेडिएशन भी निकलता है, जो शरीर को नुकसान पहुंचाता है।
*कुछ आदतों को छोड़ें अगर आप सिगरेट और शराब का अधिक सेवन करते हैं, तो यह आदत छोड़ दें। यहां तक की थोड़ा सिगरेट पीना भी शरीर के लिए नुकसानदायक होता है। इसके अलावा, अगर आप शराब पीते हैं, तो इसे जहां तक हो सके, कम से कम पीएं।
*आराम भी करें आलस्य और सुस्ती से छुटकारा पाने के लिए जरूरी है कि आप पर्याप्त नींद लें। इस बात को सुनिश्चित करें कि आप हर दिन 8 घंटे की नींद लेते हों।
*ध्यान कीजिए : 
कई धर्मों और दर्शन में मन को एकाग्रचित्त करने और मन में शांति-भाव विकसित करने के एक माध्यम के रूप में उपवास का समर्थन है। अपने शरीर को विष-मुक्त करते समय, शिकवे-शिकायतें, क्रोध, उदासी, और अन्य नकारात्मक भावों से अपने आप को दूर करने का प्रयास करें। जिस समय आप खाना बना रहे हैं, या खा रहे हैं, उस समय का उपयोग अपने लक्ष्यों और आकांक्षाओं के बारे में सोचने में करें। एक डायरी या जर्नल में अपनी सोच को परिष्कृत कीजिए।

2017-11-25

भोजन मे कार्बोहाईड्रेट का महत्व जाने



यह सच है कि भोजन से कार्बोहाइड्रेट की कटौती करने से वजन अचानक से कम होता है लेकिन शरीर में इसकी कमी हो जाती है। भोजन में पर्याप्त मात्रा में कार्बोहाइड्रेट के नहीं होने से ब्लड ग्लूकोज कम हो जाता है साथ ही साथ शरीर में स्टोर ग्लाइकोजेन भी कम हो जाता है। और लगातार कार्बोहाइड्रेट की कमी रहने से कई सारी परेशानियों के लक्षण उभरने लगते हैं।
ऐसिडोसिस : जब शरीर को ऊर्जा की जरूरत होती है तो कार्बोहाइड्रेट की स्थिति में ग्लाइकोलाइसिस लिपोलाइसिस और केटोजेनेसिस की ओर शिफ्ट हो जाता है। केटोजेनेसिस की वृद्धि से रक्त और शरीर के अन्य टिशूज में अम्लता बढ़ जाती है इससे धमनियों के रक्त का पीएच मान बदल जाता है और इसकी वजह से कोशिकाओं की अपूरणीय क्षति हो जाती है।
हाइपोग्लाइसेमिया : कार्बोहाइड्रेट के अभाव में ग्लूकोज की अनुपलब्धता हो जाती है जिससे कि ब्लड शुगर का स्तर गिर जाता है।  

ऐसे में हाइपोग्लाइसेमिया होने का खतरा बढ़ जाता है, जिसकी वजह से चक्कर, थकान,तनाव और भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है।
वजन का असामान्य रूप से कम हो जाना : फैट और मसल मास के अभाव में निर्बलता आ जाती है और वजन अचानक ही कम हो जाता है।
इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है : शरीर से तरल का तेजी से हृास होता है और विटामिन सी के कम होने की दर तेज हो जाती है। लगातार डिहाइड्रेशन की स्थिति में इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है और इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
कब्जियत : कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद्य पदार्थों में डाइटरी फाइबर महत्वपूर्ण तत्व होते हैं। इसके अभाव में कब्जियत की समस्या हो सकती है।
मूड स्विंग : भोजन में कार्बोहाइड्रेट की कमी से ब्रेन सेरोटोनिन को नियंत्रित करना बंद कर देते हैं और सेरोटोनिन की कमी से मूड स्विंग और डिप्रेशन की समस्या हो सकती है।
कार्बोहाइड्रेट पाएं हेल्दी तरीके से
अत्यधिक मात्रा में क्रीम या चीज़ खाने से कार्बोहाइड्रेट की तो पूर्ति हो जाएगी साथ ही वजन भी तेजी से बढ़ने लगेगा, ऐसे में हेल्दी तरीके से इसकी पूर्ति करने की कोशिश करनी चाहिए। कुछ खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक रूप से कार्बोहाइड्रेट मौजूद होता है, जो इसकी कमी की पूर्ति करता है, जो इस प्रकार हैं :

गेहूं
अरबी
काबुली चना

शकरकंद

ब्राउन राइस
ओट्स
केला
आलू

2017-10-26

सिर्फ आपरेशन से नहीं ,किडनी की पथरी का १००% सफल इलाज जड़ी बूटियों से


    वृक्क अश्मरी या गुर्दे की पथरी (वृक्कीय कैल्कली, नेफरोलिथियासिस) (अंग्रेजी:Kidney stones) मूत्रतंत्र की एक ऐसी स्थिति है जिसमें, वृक्क (गुर्दे) के अन्दर छोटे-छोटे पत्थर सदृश कठोर वस्तुओं का निर्माण होता है। गुर्दें में एक समय में एक या अधिक पथरी हो सकती है। सामान्यत: ये पथरियाँ बिना किसी तकलीफ मूत्रमार्ग से शरीर से बाहर निकाल दी जाती हैं, किन्तु यदि ये पर्याप्त रूप से बड़ी हो जाएं (२-३ मिमी आकार के) तो ये मूत्रवाहिनी में अवरोध उत्पन्न कर सकती हैं। इस स्थिति में मूत्रांगो के आसपास असहनीय पीड़ा होती है।
   वृक्कों गुर्दों में पथरी होने का प्रारंभ में रोगी को कुछ पता नहीं चलता है, लेकिन जब वृक्कों से निकलकर पथरी मूत्रनली  में पहुंच जाती है तो तीव्र शूल की उत्पत्ति करती है। पथरी के कारण तीव्र शूल से रोगी तड़प उठता है।
पथरी क्यों बनती है-
भोजन में कैल्शियम, फोस्फोरस  और ऑक्जालिकल अम्ल की मात्रा अधिक होती है तो पथरी का निर्माण होने लगता है। उक्त तत्त्वों के सूक्ष्म कण मूत्र के साथ निकल नहीं पाते और वृक्कों में एकत्र होकर पथरी की उत्पत्ति करते हैं। सूक्ष्म कणों से मिलकर बनी पथरी वृक्कों में तीव्र शूल की उत्पत्ति करती है। कैल्शियम, फोस्फेट, कोर्बोलिक युक्त खाद्य पदार्थों के अधिक सेवन से पथरी का अधिक निर्माण होता है।
“गुर्दे की पथरी की चिकित्सा”:
लक्षण -
पथरी के कारण मूत्र का अवरोध होने से शूल की उत्पत्ति होती है। मूत्र रुक-रुक कर आता है और पथरी के अधिक विकसित होने पर मूत्र पूरी तरह रुक जाता है।
 
पथरी होने पर मूत्र के साथ रक्त भी निकल आता है। रोगी को हर समय ऐसा अनुभव होता है कि अभी मूत्र आ रहा है। मूत्र त्याग की इच्छा बनी रहती है।
पथरी के कारण रोगी के हाथ-पांवों में शोध के लक्षण दिखाई देते हैं। मूत्र करते समय पीड़ा  होती है। कभी-कभी पीड़ा बहुत बढ़ जाती है तो रोगी पीड़ा से तड़प उठता है। रोगी कमर के दर्द से भी परेशान  रहता है।
पथरी रोगी का आहार- 
* चुकंदर का सूप बनाकर पीने से पथरी रोग में लाभ होता है।
* मूली का रस सेवन करने से पथरी नष्ट  होती है।
* जामुन, सेब (apple) और खरबूजे खाने से पथरी के रोगी को बहुत लाभ होता है।
* वृक्कों में पथरी पर नारियल  का अधिक सेवन करें।

* करेले के 10 ग्राम रस में मिसरी मिलाकर पिएं।
* पालक का 100 ग्राम रस गाजर के रस  के साथ पी सकते हैं।
* लाजवंती की जड़ को जल में उबालकर कवाथ बनाकर पीने से पथरी का निष्कासन हो जाता है।
* इलायची, खरबूजे के बीजों की गिरी और मिसरी सबको कूट-पीसकर जल में मिलाकर पीने से पथरी नष्ट होती है।
* बथुआ, चौलाई, पालक, करमकल्ला या सहिजन की सब्जी खाने से बहुत लाभ होता है।
* वृक्कों की पथरी होने पर प्रतिदिन खीरा, प्याजव चुकंदर का नीबू के रस से बना सलाद खाएं।
* गन्ने का रस) पीने से पथरी नष्ट होती है।
* मूली के 25 ग्राम बीजों को जल में उबालकर, क्वाथ बनाएं। इस क्वाथ को छानकर पिएं।
* आंवले का 5 ग्राम चूर्ण  मूली के टुकड़ों पर डालकर खाने से वृक्कों की पथरी नष्ट होती है।

* शलजम की सब्जी का कुछ दिनों तक निरंतर सेवन  करें।
* गाजर का रस पीने से पथरी खत्म होती है।
वर्जित आहार-
 कॉफी व शराब का सेवन न करें।* चइनीज व फास्ट फूड वृक्कों की विकृति में बहुत हानि पहंुचाते हैं।
* मूत्र के वेग को अधिक समय तक न रोकें।
* अधिक शारीरिक श्रम और भारी वजन उठाने के काम न करें।
* वृक्कों में पथरी होने पर चावलों का सेवन न करें।
* उष्ण मिर्च-मसालों व अम्लीय रस से बने खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
* गरिष्ठ व वातकारक खाद्य व सब्जियों का सेवन न करें।
गुर्दे की पथरी का दर्द असनीय होता है, इसके मरीजों की संख्‍या लगातार बढ़ रही है, लेकिन औषधियों के प्रयोग से इससे निजात मिलती है।
किडनी स्‍टोन गलत खानपान का नतीजा है, इसके मरीजों की संख्‍या लगातार बढ़ रही है। गुर्दे की पथरी होने पर असहनीय दर्द होता है। जब नमक एवं अन्य खनिज (जो मूत्र में मौजूद होते हैं) एक दूसरे के संपर्क में आते हैं तब पथरी बनती है। कुछ पथरी रेत के दानों की तरह बहुत छोटे आकार के होते हैं तो कुछ मटर के दाने की तरह। आमतौर पर पथरी मूत्र के जरिये शरीर के बाहर निकल जाती है, लेकिन जो पथरी बड़ी होती है वह बहुत ही परेशान करती है।
पथरी के उपचार के लिए रामबाण नुस्खे

 आंवला –
किड्नी स्‍टोन होने पर आंवले का सेवन करना चाहिए। आंवला का चूर्ण मूली के साथ खाने से गुर्दे की पथरी निकल जाती है। इसमें अलबूमीन और सोडियम क्लोराइड बहुत ही कम मात्रा में पाया जाता है जिनकी वजह से इन्हें गुर्दे की पथरी के उपचार के लिए बहुत ही उत्तम (perfect) माना जाता है। इसलिए गुर्दे की पथरी होने पर आंवले का सेवन कीजिए।
 चौलाई
गुर्द की पथरी को गलाने के लिए चौलाई का प्रयोग कीजिए। इसके अलावा चौलाई की सब्‍जी भी गुर्दे की पथरी से निजात दिलाती है, यह पथरी को गलाने के लिये रामबाण की तरह है। चौलाई को उबालकर धीरे-धीरे चबाकर खाएं। इसे दिन में 3 से 4 बार इसका प्रयोग कीजिए।
 बेल पत्र
बेल पत्र को पर जरा सा पानी मिलाकर घिस लें, इसमें एक साबुत काली मिर्च डालकर सुबह खायें। दूसरे दिन काली मिर्च दो कर दें और तीसरे दिन तीन, ऐसे सात दिनों तक लगातार इसका सेवन कीजिए। बाद में इसकी संख्‍या कम कीजिए, दो सप्ताह तक प्रयोग करने के बाद पथरी बाहर निकल जायेगी।
 काली मिर्च –
काली मिर्च भी गुर्दे की पथरी से निजात दिलाती है, काली मिर्च का सेवन बेल पत्‍तर के साथ करने से दो सप्‍ताह में गुर्दे की पथरी पेशाब (urine) के रास्‍ते बाहर निलक जाती है।
 बथुआ
बथुआ भी किड़नी स्‍टोन से निजात दिलाता है। आधा किलो बथुआ लेकर इसे 800 मिलि पानी में उबालें। अब इसे कपड़े या चाय की छलनी में छान लीजिए। बथुआ की सब्जी भी इसमें अच्छी तरह मसलकर मिला लीजिए। आधा चम्‍मच काली मिर्च और थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर दिन में 3 से 4 बार पीयें। इससे गुर्दे की पथरी निकल जाती है।
 तुलसी की पत्‍ती-
गुर्दे की पथरी होने पर तुलसी के पत्‍तों का सेवन कीजिए। तुलसी के पत्तों में विटामिन बी पाया जाता है जो पथरी से निजात दिलाने में मदद करता है। यदि विटामिन बी-6 को विटामिन बी ग्रुप के अन्य विटामिंस के साथ सेवन किया जाये तो गुर्दे की पथरी के इलाज में बहुत सहायता मिलती है। शोधकर्ताओं की मानें तो विटामिन बी की 100-150 मिग्रा की नियमित खुराक लेने से गुर्दे की पथरी से निजात मिलती है।
 जीरा
किड्नी स्‍टोन को बाहर निकालने में जीरा बहुत कारगर है। जीरा और चीनी को समान मात्रा में लेकर पीस लीजिए, इस चूर्ण को एक-एक चम्‍मच ठंडे पानी के साथ रोज दिन में तीन बार लीजिए। इससे बहुत जल्‍दी ही गुर्दे की पथरी से निजात मिल जाती है।
 सौंफ
सौंफ भी गुर्दे की पथरी के लिए रामबाण उपचार है। सौंफ, मिश्री, सूखा धनिया इनको 50-50 ग्राम मात्रा में लेकर रात को डेढ़ लीटर पानी में भिगोकर रख दीजिए, इसे 24 घंटे के बाद छानकर पेस्‍ट (paste) बना लीजिए। इसके एक चम्‍मच पेस्‍ट में आधा कप ठंडा पानी मिलाकर पीने से पथरी पेशाब के रास्‍ते बाहर निकल जाती है।
इलायची
इलायची भी गुर्दे की पथरी से निजात दिलाती है। एक चम्‍मच इलायची, खरबूजे के बीज की गिरी, और दो चम्‍मच मिश्री एक कप पानी में डालकर उबाल लीजिए, इसे ठंडा होने के बाद छानकर सुबह-शाम पीने से पथरी पेशाबके रास्‍ते से बाहर निकल जाती है।
विशिष्ट परामर्श-



 पथरी के भयंकर दर्द  को तुरंत समाप्त करने मे हर्बल औषधि सर्वाधिक  कारगर साबित होती है| वैध्य श्री दामोदर 9826795656  की जड़ी बूटी - निर्मित दवा से 30 एम एम तक के आकार की बड़ी  पथरी  भी  आसानी से नष्ट हो जाती है| 
 गुर्दे की सूजन ,पेशाब मे जलन ,मूत्रकष्ट मे यह  औषधि  रामबाण की तरह असरदार है| आपरेशन की जरूरत ही नहीं पड़ती|औषधि मनी बेक गारंटी युक्त है|

यह औषधि लकवा रोगी के लिए किसी वरदान से कम नहीं॰



पुरादेवऽसुरायुद्धेहताश्चशतशोसुराः।
हेन्यामान्यास्ततो देवाः शतशोऽथसहस्त्रशः।

जीवन मे चाहे धन, एश्वर्य, मान, पद, प्रतिष्ठा आदि सभी कुछ हो, परंतु शरीर मे बीमारी है तो सब कुछ बेकार है ओर जीवन भी नीरस है। ऐसी ही एक बीमारी है पक्षाघात, जिससे पीड़ित व्यक्ति जीवनभर सारे परिवार पर बोझ बन जाता है। पक्षाघात पीड़ित व्यक्तियों के किए आज की ये पोस्ट एक नयी सुबह साबित होगी ये हमारा दावा है। पक्षाघात (लकवा) या अँग्रेजी मे पेरालाइसिस का एकदम प्रमाणिक ओर राम-बाण इलाज़।
पक्षाघात की पहचान :-
    जैसे किसी का मुह टेढ़ा हो जाना, आँख का टेढ़ा हो जाना, हाथ या पैर का टेढ़ा हो जाना, या शरीर किसी एक साइड से बिलकुल काम करना बंद कर दे, ये सामान्यतया पक्षाघात की पहचान है।
अगर मेरा कोई भाई बहिन पक्षाघात से पीड़ित है तो कहीं जाने की जरूरत नहीं है। अगर शरीर का कोई अंग या शरीर दायीं तरफ से लकवाग्रस्त है तो उसके लिए व्रहतवातचिंतामणि रस ले ले। उसमे छोटी-छोटी गोली (बाजरे के दाने से थोड़ी सी बड़ी) मिलेंगी। उसमे से एक गोली सुबह ओर एक गोली साँय को शुद्ध शहद से लेवें। अगर कोई भाई बहिन बायीं तरफ से लकवाग्रस्त है उसको वीर-योगेन्द्र रस सुबह साँय एक एक गोली शहद के साथ लेनी है।
अब गोली को शहद से कैसे ले?
उसके लिए गोली को एक चम्मच मे रखकर दूसरे चम्मच से पीस ले, उसके बाद उसमे शहद मिलकर चाट लें। ये दवा निरंतर लेते रहना है, जब तक पीड़ित स्वस्थ न हो जाए। पीड़ित व्यक्ति को मिस्सी रोटी (चने का आटा) और शुद्ध घी (मक्खन नहीं) का प्रयोग प्रचुर मात्र मे करना है। शहद का प्रयोग भी ज्यादा से ज्यादा अच्छा रहेगा।*लाल मिर्च, गुड़-शक्कर, कोई भी अचार, दही, छाछ, कोई भी सिरका, उड़द की दाल पूर्णतया वर्जित है। 
*फल मे सिर्फ चीकू ओर पपीता ही लेना है, अन्य सभी फल वर्जित हैं।
* शरुआती दिनों मे किसी भी मालिश से परहेज रखें। तब तक कोई मालश न करें जब तक पीड़ित कम से कम 60% तक स्वस्थ न हो जाए।
   यह नुस्खा लाखों पीड़ित व्यक्तियों के लिए रामबाण की तरह अचूक असर रहा है। जो आज स्वस्थ जीवन जी रहे है। स्वास्थ्य वह मूल तत्व है जो जीवन की सारी खुशियों को जीवंत बनाता है और स्वास्थ्य के बिना वे सभी नष्ट और नीरस होती हैं। 

2017-10-15

नाखून खूबसूरत और मजबूत होंगे इन उपाय से



नाखून अच्छे स्वस्थ की भी निशानी होते हैं और हाथों का खूबसूरती को बढ़ाने का भी काम करते हैं। कुछ लोगों के नाखून जल्दी टूट जाते हैं। इनको बढाने के लिए वह कई तरह की क्रीम का इस्तेमाल करते हैं लेकिन इसका खास असर नहीं दिखाई देता। नाखूनों का पीलापन दूर करने और इनकी ग्रोथ को बढ़ाने के लिए खास केयर की जरूरत होती है। छोटे-छोटे टिप्स अपना कर नाखूनों को मजबूत किया जा सकता है। 

बादाम का तेल-
बादाम के तेल से नाखूनों की मसाज करने से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है, जिससे नाखून की ग्रोथ तेजी से होती है। रात के समय रोजाना बादाम के तेल से नाखूनों की मसाज करें। फायदा मिलेगा।
सरसों का तेल -
नाखून कमजोर होकर टूटतो हैं तो रात को सोने से पहले नाखूनों को 5 मिनट के लिए सरसों के तेल में डुबो कर रखें। कुछ दिन लगातर यह प्रक्रिया दोहराने से नाखून बढ़ने शुरू हो जाएंगे, इसके साथ ही इनको मजबूती भी मिलेगी।
टूथपेस्ट-
कुछ लोगों को नाखून पीले होते हैं जो खूबसूरत दिखने के बजाएं भद्दे लगते हैं। इनको सफेद करने के लिए टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें। नेल रिमूवर की तरह नाखूनों पर टूथपेस्ट को रगड़ें। इससे यह सफेद और मजबूत होने शुरू हो जाएंगे।
दूध
दूध हड्डियों, दांतों और नाखूनों के लिए बहुत फायदेमंद है। एक अंड़े के सफेद भाग में दूध मिलाकर फैंट लें और इसमें 5 मिनट के लिए अपने नाखून डुबो कर रखें। हफ्ते में 2-3 बार ऐसा करने से नाखूनों को मजबूती मिलेगी और तेजी से बढ़ने शुरू हो जाएंगे। 

2017-10-10

ये चीजें दुबारा गरम करके इस्तेमाल ना करें / Do not heat these things again/



खान-पान
आप अपने खान-पान का कितना ख्याल रखते हैं? क्या समय से भोजन करते हैं? क्या सही मात्रा में भोजन करते हैं? क्या भोजन के अलावा अन्य पौष्टिक आहार के लिए समय निकाल पाते हैं? शायद इनमें से कुछ सवालों का जवाब आप ‘ना’ में ही दें, जिसका सबसे बड़ा कारण है हमारी बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल।
दिनचर्या
इसी बिगड़ी हुई दिनचर्या के चलते लोग बाकी सारे कार्य तो याद रखते हैं, लेकिन सबसे अहम कार्य जो भूल जाते हैं वह है समय से भोजन करना। हम यह नहीं कहते कि वे भोजन नहीं करते, पापी पेट तो अपनी प्यास बुझाने के लिए जरिया ढूंढ़ ही लेता है लेकिन इसके लिए विलंब करते रहना इंसान की आदत सी हो गई है।
समय से भोजन ना करना
समय से भोजन ना करना और फिर विभिन्न बीमारियों के शिकार हो जाना, यह आजकल आम बात हो गई है। ताज्जुब होता है यह सोचकर कि लोगों के पास खाना खाने तक का समय नहीं है। मैंने तो ऐसे लोग भी देखे जो खाने की प्लेट सामने तो रख लेते हैं लेकिन किसी और काम में व्यस्त हो जाते हैं।
खाना बेचारा भी ठंडा हो जाता है
   ऐसे में खाना बेचारा भी ठंडा हो जाता है और फिर ऐसे लोग उसे दोबारा गर्म करने की जद्दोजहद में लग जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि खाना गर्म करना तो सही बात है, गर्मागर्म भोजन करना भी अच्छी आदत है लेकिन कुछ भोजन ऐसे हैं जो एक बार पकाने के बाद दुबारा गर्म किए जाने पर नुकसान पहुंचाते हैं।
 
दोबारा गर्म करना
दोबारा गर्म करने पर ना केवल उनके पोषक तत्व मर जाते हैं, साथ ही वह दे जाते हैं कुछ ऐसे कण जो शरीर को केवल और केवल नुकसान ही पहुंचाते हैं। इसलिए आज हम यहां ऐसी ही एक लिस्ट प्रस्तुत करने जा रहे हैं, जिसमें कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिन्हें दोबारा गर्म करना शरीर के लिए नुकसानदेह है।
शलगम
पालक की तरह ही शलगम भी लोग दिनों तक बार-बार गर्म करके खाने के शौकीन होते हैं, लेकिन पालक की ही तरह इसमें भी नाइट्रेट तत्व पाया जाता है, जो पकने के कुछ घंटों के बाद नाइट्रायट में बदल जाता है। इसलिए इसे भी पकने के तुरंत बाद ही ग्रहण कर लेना चाहिए।
आलू
आलू के कई पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं, यह एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जिसे खाने से आप चुस्त-दुरुस्त महसूस कर सकते हैं। लेकिन आलू के सभी पौष्टिक तत्व तभी खत्म हो जाते हैं जब उसे एक बार पकाने के बाद दोबारा गर्म किया जाता है। यह ना केवल खाने लायक बचते हैं, बल्कि शरीर को खतरनाक प्रभाव देते हैं।
पालक
मैंने कई लोगों से यह कहते सुना है कि पालक तो पकने के कुछ घंटों बाद दोबारा गर्म करके खाने पर ही अधिक स्वादिष्ट लगता है। इसे दोबारा गर्म करके खाने का मज़ा ही अलग है, यदि आप भी इन्हीं लोगों में से हैं तो कृपया अपनी यह आदत बदल डालिए।
मशरूम
शायद आपने सुना भी हो कि मशरूम गर्म करके खाने वाली चीज़ नहीं है, यह तो जैसे ही थोड़ा पक जाए इसे खा लेना चाहिए। अब अच्छे से पकाने के बाद, थोड़ी देर रख के और फिर से इसे गर्म किया जाए, तो इससे अधिक अन-हेल्दी खाद्य पदार्थ कोई नहीं हो सकता।
चावल
चावल कच्चे नहीं खाने चाहिए, शायद आपने सुना भी होगा क्योंकि कच्चे चावलों में मौजूद कीटाणु के समान तत्व हमें बीमार कर सकते हैं। चावलों को पकाने से वह तत्व मर जाते हैं, लेकिन पकाने के बाद उन्हें रख दिया जाए तो वह तत्व दोबारा उजागर होना आरंभ हो जाते हैं। इसलिए इन्हें दोबारा गर्म करके खाया जाए तो यह कीटाणु कभी नहीं मरते, और यह हमें बीमार करने के लिए काफी हैं।


2017-10-03

हाजमा ताकत बढ़ाने के बेहद असरदार नुस्खे // Extremely effective tips for increasing digestive power



1.काला नमक, जीरा और अजवाइन बराबर मात्रा में ले और मिक्स करके इस मिश्रण का एक चम्मच पानी के ले।
2. इलायची के बीजों को पीस कर चूर्ण बना ले और बराबर मात्रा में मिश्री मिला ले। तीन ग्राम मात्रा में ये देसी दवा दिन में दो से तीन बार खाए।
3. एक छोटा टुकड़ा अदरक ले और इस पर नींबू का रस डाल कर चूसे, इस घरेलू नुस्खे से पाचन क्रिया बढ़ती है।
4. आँवले का पाउडर, भूना हुआ जीरा, सौंठ, सेंधा नमक, हींग और काली मिर्च मिलाकर इसकी छोटी छोटी वडी बनाकर सेवन करे। इस उपाय से पाचन शक्ति मजबूत होती है और इससे भूख भी बढ़ती है।
5. अजवाइन के पानी से भी पाचन मजबूत होता है।
6. पाचन शक्ति बढ़ाने के योग-
भुजंगासन
पश्चिमोत्तासन
हलासन
धनुरासन
नौकासन
इन आसनों को करने से पहले आप किसी योग गुरु की मदद से इन्हे सही तरीके से करने की जानकारी ले।
पाचन क्रिया बलवान बनाने के उपाय-
7.  हरी सब्जियाँ पालक, मेथी पाचन सुधारने का अछा उपाय है, इनके सेवन से क़ब्ज़ का उपचार होता है और शरीर को ज़रूरी पोषण मिलता है।
8. संतरे का रस पीने से पाचन क्रिया दरुस्त होती है।
9. अंकुरीत गेंहू, मूँग दाल और चने खाने से भी पाचन शक्ति ठीक रहती है।
10. तांबे के बर्तन में रखा पानी सुबह खाली पेट पीने से पाचन शक्ति बढ़ती है।
11. विटामिन सी और फाइबर युक्त चीज़े खाने से डिजेस्शन की प्राब्लम से छुटकारा मिलता है।
12. मूली का सेवन पेट में गैस की समस्या में रामबाण इलाज है। मूली पर काला नमक लगाये और सलाद जैसे खाये। मूली की सब्जी और रस पिने से भी फायदा होता है। इसे रात को ना खाए।
13.  पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए पानी अधिक पिए। खाना खाने से आधा घंटा पहले गुनगुना पानी पीने से पाचन मजबूत होता है।
14.संतरे का रस पीने से पाचन क्रिया दरुस्त होती है।
15.  पुदीने का प्रयोग पेट की कई बीमारियों के उपचार में होता है। रोजाना इसका सेवन करने से पेट की बीमारियों से छुटकारा मिलता है।
16.हरी सब्जियाँ पालक, मेथी पाचन सुधारने का अछा उपाय है, इनके सेवन से क़ब्ज़ का उपचार होता है और शरीर को ज़रूरी पोषण मिलता है।
17.खाने में फलों का इस्तेमाल अधिक करे। फलों में पपीता, अमरूद, अंजीर, संतरे और अनार खाए। इनमें फाइबर अधिक मात्रा में होता है जिससे पाचन क्रिया ठीक होती है और पेट भी साफ़ रहता है।
अन्य उपाय- 
1. पाचन क्रिया सुधारने के लिए सलाद अधिक खाए। सलाद में टमाटर, कला नमक और नींबू का प्रयोग करे।
लगातार कई घंटों तक एक ही जगह पर ना बैठे और अगर आपने काम की वजह से आपको एक ही जगह बैठना पड़ता है तो एक दो घंटे में पांच से दस मिनट का ब्रेक ले और कुछ कदम चले।
2. सुबह दोपहर और रात का भोजन सही समय पर करे।
3. खाना चबा चबा कर खाए।
4. तला हुआ और मसालेदार खाने से परहेज करे।
5. रात को देर से ना सोए, छह से आठ घंटे की नींद ले।
5. धूम्रपान, तंबाकू और शराब से दूर रहे।

2017-09-17

खांसी मे तुरंत राहत पाने के उपचार // Cures for immediate relief in cough


मौसम बदलते ही, हर घर में सर्दी या जुकाम का होना एक आम बात हो जाती है। वातावरण में मौजूद वायरस, बदलते मौसम में काफी सक्रिय हो जाता है, जिसके कारण जुकाम या सांस की अन्य बीमारियां होती हैं. सामान्य ज़ुकाम के लिए कोई इलाज नहीं है, लेकिन इसके लक्षणों का इलाज किया जा सकता है। यह, मनुष्यों में सबसे अधिक होने वाला संक्रामक रोग है। औसत वयस्क को प्रतिवर्ष दो से तीन बार ज़ुकाम होता है। औसत बच्चे को प्रतिवर्ष छह से लेकर बारह बार ज़ुकाम होता है। लेकिन शुरुआत में ही अगर कुछ घरेलू उपाय कर लिए जाएं तो इस पर आसानी से काबू पाया जा सकता है। तो आइये जानते है कुछ घरेलु और आसान उपाय।
*अदरक -
अदरक को १ ग्लास पानीमे १/२ रहने तक उबाल ले और उसमे १ चम्मच शहद मिलाकर पिये।
अदरक के छोटे छोटे टुकड़े करके १ उसे दिनभर चूसते रहे आराम मिलेगा।
*लहसुन -
१ कप पानी में ३-४ लहसुन की कलियों को उबाल ले और ठंडा होनेपर इसमें १ चम्मच शहद मिलाकर ले।
. प्याज -
१/२ चम्मच प्याज का रस और १/२ चम्मच शहद मिलाकर लेने से खांसी में आराम मिलता है।
*चाय -
चाय में १/२ चम्मच हल्दी , १/२ चम्मच काली मिर्च पाउडर , तुलसी की कुछ पत्तियाँ और अदरक मिलाकर पिने से काफी हदतक आराम मिलता है।
* गाजर -
१ कप गाजर के ज्यूस में १ चम्मच शहद मिलाकर दिन में ३-४ बार ले।
*बादाम -
४-५ बादाम को रात में पानी में भिगोंकर सुबह इसका पेस्ट बनाये और १ चम्मच बटर में मिलाकर रोज सुबह -शाम जब तक आपको आराम न हो तबतक लेते रहे।
३. तुलसी -
तुलसी के रस में अदरक का रस और शहद मिलाकर लेने से भी खांसी में राहत मिलती है।
.* काली मिर्च -
काली मिर्च कफ में बहुत  आराम देती है। इसे पीसकर १ चम्मच घी में १/४ मिलाकर लेने से बहोत जल्दी आराम मिलता है।
कुनकुने दूध में भी इसे मिलाकर पिने से खांसी में राहत मिलती है।