15.8.19

दारुहरिद्रा है गुणों का खजाना


दारुहल्दी एक आयुर्वेदिक औषधीय पौधा है | इसे दारुहरिद्रा भी कहा जाता है जिसका अर्थ होता है हल्दी के समान पिली लकड़ी | इसका वृक्ष अधिकतर भारत और नेपाल के हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाते है | इसके वृक्ष की लम्बाई 6 से 18 फीट तक होती है | पेड़ का तना 8 से 9 इंच के व्यास का होता है | भारत में दारूहल्दी के वृक्ष अधिकतर समुद्रतल से 6 – 10 हजार फीट की ऊंचाई पर जैसे – हिमाचल प्रदेश, बिहार, निलगिरी की पहाड़ियां आदि जगह पाए जाते है |
दारुहरिद्रा (वानस्पतिक नाम:Berberis aristata) एक औषधीय जड़ी बूटी है। दारुहरिद्रा के फायदे जानकर आप हैरान हो जाएगें। इसे दारू हल्दी के नाम से भी जाना जाता हैं । यह मधुमेह की चिकित्सा में बहुत उपयोगी है। यह ऐसी जड़ी बूटी है जो कई असाध्‍य स्‍वास्‍थ्‍य सस्‍याओं को प्रभावी रूप से दूर कर सकती है। दारू हल्दी का पौधा भारत और नेपाल के पर्वतीय हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है। यह श्रीलंका के कुछ स्थानों में भी पाया जाता है। दारुहरिद्रा के फायदे होने के साथ ही कुछ सामान्‍य नुकसान भी होते हैं। दारुहरिद्रा को इंडियन बारबेरी (Indian barberry) या ट्री हल्‍दी (tree turmeric) के नाम से भी जाना जाता है। यह बार्बरीदासी परिवार से संबंधित जड़ी बूटी है। इस जड़ी बूटी को प्राचीन समय से ही आयुर्वेदिक चिकित्‍सा प्रणाली में उपयोग किया जा रहा है।
दारुहरिद्रा के फायदे लीवर सिरोसिस, सूजन कम करने, पीलिया, दस्‍त का इलाज करने, मधुमेह को नियंत्रित करने, कैंसर को रोकने, बवासीर का इलाज करने, मासिक धर्म की समस्‍याओं को रोकने आदि में होते हैं। 
आयुर्वेदिक मतानुसार दारुहल्दी गुण में लघु , स्वाद में कटु कषाय, तिक्त तासीर में गर्म, अग्निवद्धक, पौष्टिक, रक्तशोधक, यकृत उत्तेजक, कफ नाशक, व्रण शोधक, पीड़ा, शोथ नाशक होती है। यह ज्वर, श्वेत व रक्त प्रदर, नेत्र रोग, त्वचा विकार, गर्भाशय के रोग, पीलिया, पेट के कृमि, मुख रोग, दांतों और मसूड़ों के रोग, गर्भावस्था की जी मिचलाहट आदि में गुणकारी है।
यूनानी चिकित्सा पद्धति में दारुहल्दी दूसरे दर्जे की सर्द और खुश्क तथा जड़ की छाल पहले दर्जे की गर्म और खुश्क मानी गई है। इसके फल जरिश्क, यूनानी में एक उत्तम औषधि मानी गई है। यह आमाशय, जिगर और हृदय के लिए बलवर्द्धक है। इसके सेवन से जिगर और मेदे की खराबी से दस्त लगना, मासिक धर्म की अधिकता, सूजन, बवासीर के कष्टों में आराम मिलता है।
दारुहरिद्रा की तासीर
दारुहरिद्रा की तासीर गर्म होती है जिसके कारण यह हमारे पाचन तंत्र के अच्‍छे स्‍वास्‍थ्‍य में मदद करता है। इसके अलावा दारुहरिद्रा में अन्‍य पोषक तत्‍वों और खनिज पदार्थों की भी उच्‍च मात्रा होती है। जिसके कारण यह हमारे शरीर को कई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं से बचाता है।
दारुहरिद्रा के अन्‍य नाम
दारुहरिद्रा एक प्रभावी जड़ी बूटी है जिसे अलग-अलग स्‍थानों पर कई नामों से जाना जाता है। दारुहरिद्रा का वान‍स्‍पतिक नाम बर्बेरिस एरिस्‍टाटा डीसी (Berberis aristata Dc) है जो कि बरबरीदासी (Berberidaceae) परिवार से संब‍ंधित है। दारुहरिद्रा के अन्‍य भाषाओं में नाम इस प्रकार हैं :
अंग्रेजी नाम – इंडियन बारबेरी (Indian berberi)
हिंदी नाम – दारु हल्‍दी (Daru Haldi)
तमिल नाम – मारा मंजल (Mara Manjal)
बंगाली नाम – दारुहरिद्रा (Daruharidra)
पंजाबी नाम – दारू हल्‍दी (Daru Haldi)
मराठी नाम – दारुहलद (Daruhalad)
गुजराती नाम – दारु हलधर (Daru Haldar)
फारसी नाम – दारचोबा (Darchoba)
तेलुगु नाम – कस्‍तूरीपुष्‍पा (Kasturipushpa)
दारुहरिद्रा के फायदे
पोषक तत्वों और खनिज पदार्थों की उच्‍च मात्रा होने के कारण दारुहरिद्रा के फायदे हमारे बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य के लिए होते हैं। यह ऐसी जड़ी बूटी है जो उपयोग करने पर कई जटिल स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को आसानी से दूर कर सकती है। आइए विस्‍तार से समझें दारुहरिद्रा के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ और उपयोग करने का तरीका क्‍या है।
रसौत के लाभ बवासीर के लिए
दारुहरिद्रा या रसौत के फायदे बवासीर के लिए भी होते हैं। बवासीर की समस्‍या किसी भी व्‍यक्ति के लिए बहुत ही कष्‍टदायक होती है। इसके अलावा रोगी इस बीमारी के कारण बहुत ही कमजोर हो जाता है। क्‍योंकि इस दौरान उनके शरीर में रक्‍त की कमी हो सकती है। लेकिन इस समस्‍या से बचने के लिए दारुहरिद्रा के फायदे होते हैं। दारुहरिद्रा में ब्‍लीडिंग पाइल्‍स का उपचार करने की क्षमता होती है। बवासीर रोगी को नियमित रूप से इस जड़ी बूटी को मक्‍खन के साथ 40-100 मिलीग्राम मात्रा का सेवन करना चाहिए। दारुहरिद्रा के यह लाभ इसमें मौजूद एंटीआक्‍सीडेंट, जीवाणुरोधी, एंटीफंगल और एंटीवायरल गुणों के कारण होते हैं। ये सभी गुण बवासीर के लक्षणों को कम करने और शरीर को अन्‍य प्रकार के संक्रमण से बचाने में सहायक होते हैं।
आंखों के लिए
आप अपनी आंखों को स्‍वस्‍थ्‍य रखने और देखने की क्षमता को बढ़ाने के लिए दारु हल्‍दी का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। औषधीय गुणों से भरपूर दारुहरिद्रा को आंखों के संक्रमण दूर करने में प्रभावी पाया गया। इसके लिए आप दारुहरिद्रा को मक्‍खन, दही या चूने के साथ मिलाएं और आंखों की ऊपरी क्षेत्र में बाहृ रूप से लगाएं। यह आंखों की बहुत सी समस्‍याओं को दूर कर सकता है। यदि आप आंख आना या कंजंक्टिवाइटिस से परेशान हैं तो दूध के साथ इस जड़ी बूटी को मिलकार लगाएं। यह आंख के संक्रमण को प्रभावी रूप से दूर कर नेत्रश्‍लेष्‍म को कम करने में मदद करती है।
दारुहरिद्रा के फायदे मधुमेह के लिए
यदि आप मधुमेह रोगी हैं तो दारुहरिद्रा जड़ी बूटी आपके लिए बहुत ही फायदेमंद हो सकती है। क्‍योंकि इस पौधे के फलों में रक्‍त शर्करा को कम करने की क्षमता होती है। नियमित रूप से उपयोग करने पर यह आपके शरीर में चयापचय एंजाइमों को सक्रिय करता है। जिससे आपके रक्‍त में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित किया जा सकता है। आप भी अपने आहार में दारुहरिद्रा और इसके फल को शामिल कर मधुमेह के लक्षणों को कम कर सकते हैं।
बुखार ठीक करे
जब शरीर का तापमान अधिक होता है या बुखार की संभावना होती है तो दारुहरिद्रा का उपयोग लाभकारी होता है। इस दौरान इस जड़ी बूटी का सेवन करने से शरीर के तापमान को कम करने में मदद मिलती है। इसके अलावा यह शरीर में पसीने को प्रेरित भी करता है। पसीना निकलना शरीर में तापमान को अनुकूलित करने का एक तरीका होता है। साथ ही पसीने के द्वारा शरीर में मौजूद संक्रमण और विषाक्‍तता को बाहर निकालने में भी मदद मिलती है। इस तरह से दारुहरिद्रा का उपयोग बुखार को ठीक करने में मदद करता है। रोगी को दारुहरिद्रा के पौधे की छाल और जड़ की छाल को मिलाकर एक काढ़ा तैयार करें। इस काढ़े को नियमित रूप से दिन में 2 बार सेवन करें। यह बुखार को कम करने का सबसे बेहतरीन तरीका हो सकता है।
दस्‍त के इलाज में
आयुर्वेद और अध्‍ययनों दोनों से इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि दारुहरिद्रा जड़ी बूटी दस्‍त जैसी गंभीर समस्‍या का निदान कर सकती है। शोध के अनुसार इस जड़ी बूटी में ऐसे घटक मौजूद होते हैं जो पाचन संबंधी समस्‍याओं को दूर कर सकते हैं। इसके अलावा इसमें मौजूद एंटीबैक्‍टीरियल और एंटीमाइक्रोबियल गुण पेट में मौजूद संक्रामक जीवाणुओं के विकास और प्रभाव को कम करते हैं। जिससे दस्‍त और पेचिश जैसी समस्‍याओं को रोकने में मदद मिलती है। आप सभी जानते हैं कि दूषित भोजन और दूषित पानी पीने के कारण ही दस्‍त और पेचिश जैसी समस्‍याएं होती है। लेकिन इन समस्‍याओं से बचने के लिए दारुहरिद्रा जड़ी बूटी फायदेमंद होती है। दस्‍त का उपचार करने के लिए इस जड़ी बूटी को पीसकर शहद के साथ दिन में 2-3 बार सेवन करना चाहिए।
बेनिफिट्स फॉर स्किन
अध्‍ययनों से पता चलता है कि दारुहरिद्रा में त्‍वचा समस्‍याओं को दूर करने की क्षमता भी होती है। आप अपनी त्वचा समस्‍याओं जैसे मुंहासे
, घाव, अल्‍सर आदि का इलाज करने के लिए दारुहरिद्रा जड़ी बूटी का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। ऐसी स्थितियों का उपचार करने के लिए आप इस पौधे की जड़ का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।
सूजन के लिए
अध्‍ययनों से पता चलता है कि सूजन संबंधी समस्‍याओं को दूर करने के लिए दारुहरिद्रा फायदेमंद होती है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि इस जड़ी बूटी में एंटीऑक्‍सीडेंट और एंटी-इंफ्लामेटरी गुण होते हैं। जिनके कारण यह सूजन और इससे होने वाले दर्द को प्रभावी रूप से कम कर सकता है। अध्‍ययनों से यह भी पता चलता है कि यह गठिया की सूजन को दूर करने में सक्षम होता है। सूजन संबंधी समस्‍याओं को दूर करने के लिए आप दारू हल्‍दी का पेस्‍ट बनाएं और प्रभावित जगह पर लगाएं। ऐसा करने से आपको सूजन और दर्द से राहत मिल सकती है।
कैंसर से बचाव
दारुहरिद्रा या रसौत में कैंसर कोशिकाओं को रोकने और नष्‍ट करने की क्षमता होती है। क्‍योंकि यह जड़ी बूटी एंटीऑक्‍सीडेंट से भरपूर होती है। कैंसर का उपचार अब तक संभव नहीं है लेकिन आप इसके लक्षणों को कम कर सकते हैं। कैंसर के मरीज को नियमित रूप से दारुहरिद्रा और हल्‍दी के मिश्रण का सेवन करना चाहिए। क्‍योंकि इन दोनो ही उत्‍पादों में कैंसर विरोधी गुण होते हैं। जो ट्यूमर के विकास को रोकने में सहायक होते हैं। इस तरह से दारुहरिद्रा का सेवन करने के फायदे कैंसर के लिए प्रभावी उपचार होते हैं।
ऊपर बताए गए लाभों के अलावा भी इस जड़ी बूटी के अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य लाभ होते हैं जो इस प्रकार हैं :
और भी स्वास्थ्य लाभ हैं दारूहरिद्रा के-
इसका उपयोग घावों की त्‍वरित चिकित्‍सा के लिए भी किया जाता है। इस औषधीय जड़ी बूटी के पेस्‍ट को फोड़ों, अल्सर आदि में उपयोग किये जाते हैं।
शारीरिक मांसपेशियों के दर्द को कम करने के लिए भी इस जड़ी बूटी का इस्‍तेमाल किया जाता है। क्‍योंकि इस जड़ी बूटी में दर्द निवारक गुण होते हैं जो ल्‍यूकोरिया (leucorrhoea) और मेनोरेजिया (menorrhagia) जैसी समस्‍याओं के लिए लाभकारी होते हैं।
पीलिया के उपचार में भी यह जड़ी बूटी आंशिक रूप से मददगार होती है। क्‍योंकि इस जड़ी बूटी का उपयोग करने से शरीर में मौजूद विषाक्‍तता को दूर करने में मदद मिलती है। यह यकृत को भी विषाक्‍तता मुक्‍त रखती है और पीलिया के लक्षणों और संभावना को कम करती है।
दारुहरिद्रा में कैंसर के लक्षणों को कम करने की क्षमता होती है। क्‍योंकि इस जड़ी बूटी में एंटीकैंसर गुण होते हैं। जिसके कारण इसका नियमित सेवन करने से पेट संबंधी कैंसर की संभावना को कम किया जा सकता है।
कान के दर्द को कम करने के लिए भी दारू हल्‍दी लाभकारी होती है। इसके अलावा यह कान से होने वाले स्राव को भी नियंत्रित कर सकती है।
पाचन शक्ति को बढ़ाने के लिए इस औषधी का नियमित सेवन किया जाना चाहिए। यह आपकी भूख को बढ़ाने और पाचन तंत्र को मजबूत करने में प्रभावी होती है।
कब्‍ज जैसी पेट संबंधी समस्‍या के लिए दारुहरिद्रा का इस्‍तेमाल फायदेमंद होता है।
बुखार होने पर इसकी जड़ से बनाये गए काढ़े को इस्तेमाल करने से जल्द ही बुखार से छुटकारा मिलता है |
दालचीनी के साथ दारू हल्दी को मिलाकर चूर्ण बना ले | इस चूर्ण को नित्य सुबह – शाम 1 चम्मच की मात्रा में शहद के साथ उपयोग करने से महिलाओं की सफ़ेद पानी की समस्या दूर हो जाती है |
अगर शरीर में कहीं सुजन होतो इसकी जड़ को पानी में घिसकर इसका लेप प्रभावित अंग पर करने से सुजन दूर हो जाती है एवं साथ ही दर्द अगर होतो उसमे भी लाभ मिलता है | इस प्रयोग को आप घाव या फोड़े – फुंसियों पर भी कर सकते है , इससे जल्दी ही घाब भर जाता है |
इसका लेप आँखों पर करने से आँखों की जलन दूर होती है |
दारुहल्दी के फलों में विभिन्न प्रकार के पूरक तत्व होते है | यह वृक्ष जहाँ पाया जाता है वहां के लोग इनका इस्तेमाल करते है , जिससे उन्हें विभिन्न प्रकार के पौषक तत्वों के सेवन से विभिन स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होते है 
पीलिया रोग में भी इसका उपयोग लाभ देता है | इसके फांट को शहद के साथ गृहण लाभ देता है |
मधुमेह रोग में इसका क्वाथ बना कर प्रयोग करने से काफी लाभ मिलता है |
इससे बनाये जाने वाले रसांजन से विभिन्न रोगों में लाभ मिलता है |

किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

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6.8.19

कुटज (इन्द्रजौ) के स्वास्थ्य लाभ और नुस्खे


कुटज (संस्कृत), कूड़ा या कुरैया (हिन्दी), कुरजी (बंगला), कुड़ा (मराठी), कुड़ी (गुजराती), वेप्पलाई (तमिल), कछोडाइस (तेलुगु) तथा मोलेरीना एण्टी डिसेण्टीरिका (लैटिन) कहते हैं। इन्द्रजौ 5 से10 फुट ऊंचा जंगली पौधा होता है जिसके पत्ते बादाम के पत्तों की तरह लंबे होते हैं। कोंकण (महाराष्ट्र) में इन्द्रजौ ‌‌‌के पत्तों का बहुत उपयोग किया जाता है। इसके फूलों की सब्जी बनायी जाती है। इसमें फलियां पतली और लंबी होती हैं, इन फलियों का भी साग और अचार बनाया जाता है। फलियों के अंदर से जौ की तरह बीज निकलते हैं। इन्ही बीजों को इन्द्रजौ कहते हैं। सिरदर्द तथा साधारण प्रकृति वाले मनुष्यों के लिए यह नुकसानदायक है। इसके दोषों को दूर करने के लिए इसमें धनियां मिलाया जाता है। इसकी तुलना जायफल से भी की जा सकती है। इसके फूल भी कड़वे होते हैं। इनका एक पकवान भी बनाया जाता है। इन्द्रजौ के पेड़ की दो जातियां – काली ‌‌‌वसफेदइन्द्र जौ होती हैं और इन दोनों में ये कुछ अन्तर इस प्रकार होते हैं। कुटज का पेड़ मध्यम आकार का, कत्थई या पीलाई लिये कोमल छालवाला होता है। कुटज के पत्ते 6-12 इंच लम्बे, 1-1 इंच चौड़े होते हैं। कुटज के फूल सफेद, 1-1 इंच लम्बे, चमेली के फूल की तरह कुछ गन्धयुक्त होते हैं। कुटज के फल 8-16 इंच लम्बे, फली के समान होते हैं। दो फलियाँ डंठल तथा सिरों पर भी मिली-सी रहती हैं। बीज जौ (यव) के समान अनेक, पीलापन लिये कत्थई रंग के होते हैं। ऊपर से रूई चढ़ी रहती है। इसे ‘इन्द्रजौ‘ (इन्द्रयव) कहते हैं। इसकी जातियाँ दो होती हैं : (क) कृष्ण-कुटज (स्त्री-जाति का) और (ख) श्वेत-कुटज (पुरुष-जाति का) । यह हिमालय प्रदेश, बंगाल, असम, उड़ीसा, दक्षिण भारत तथा महाराष्ट्र में प्राप्त होता है।
विभिन्न रोगों में उपचार -
‌‌‌जलोदर: –
 इन्द्रजौ की जड़ को पानी के साथ पीसकर 14-21 दिन नियमित लेने से जलोदर समाप्त हो जाता है।
पीलिया: 
पीलिया के रोग में इसका रस नियमित रूप से 3 दिन पीने से अच्छा लाभ मिलता है।
‌‌‌पुराना ज्वर ‌‌‌व बच्चों में दस्त: – 
इन्द्रजौ व टीनोस्पोरा की छाल को पानी में उबाल कर काढ़ा या इन्द्रजौ की छाल को रातभर पानी में भिगो कर रखने से व पानी को छान कर लेने से पुराना ज्वर लाभ प्रदान करता है।
‌‌‌पेट में एंठन: –
 गर्म किये हुए इन्द्रजौ के बीजों को पानी में भिगो कर लेने से पेट की एंठन में लाभ मिलता है।
‌‌‌बवासीर: – इन्द्रजौ को पानी के साथ पीस कर बाराबर मात्रा में जामुन के साथ मिला कर छोटी-छोटी गोलींयां बना लें। सोते समय दो गोलीयां ठण्डे पानी के साथ लेने से बवासीर में लाभ मिलता है।
पुराना बुखार :
इन्द्र जौ के पेड़ की छाल और गिलोय का काढ़ा पिलायें अथवा रात को छाल को पानी में गला दें और सुबह उस पानी को छानकर पिलायें। इससे पुराना बुखार दूर हो जाता है।
हैजा :
इन्द्र जौ की जड़ और एरंड की जड़ को छाछ के पानी में घिसकर और उसमें थोड़ी हींग डालकर पिलाने से लाभ मिलता है।
बच्चों के दस्त :
छाछ के पानी में इन्द्र जौ के मूल को घिसे और उसमें थोड़ी हींग डालकर पिलायें। इससे बच्चों का दस्त आना बंद हो जाता है।
पथरी :
इन्द्र जौ और नौसादर का चूर्ण दूध अथवा चावल के धोये हुए पानी में डालकर पीना चाहिए। इससे पथरी गलकर निकल जाती है।
इन्द्र जौ की छाल को दही में पीसकर पिलाना चाहिए। इससे पथरी नष्ट हो जाती है।
फोड़े-फुंसियां :
इन्द्र जौ की छाल और सेंधानमक को गाय के मूत्र में पीसकर लेप करने से लाभ मिलता है।
बुखार में दस्त होना :
10 ग्राम इन्द्र जौ को थोड़े से पानी में ड़ालकर काढ़ा बनाकर उसमें शहद मिलायें और पियें। इससे सभी तरह के बुखार दूर हो जाते हैं।
मुंह के छाले :
इन्द्र जौ और काला जीरा 10-10 ग्राम की मात्रा में लेकर कूटकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को छालों पर दिन में 2 बार लगाने से छाले नष्ट होते हैं।
दस्त :
इन्द्र-जौ को पीसकर चूर्ण को 3 ग्राम की मात्रा में ठंडे पानी के साथ दिन में 3 बार पिलाने से अतिसार समाप्त हो जाती है।
इन्द्र जौ की छाल का रस निकालकर पिलायें।
इन्द्र-जौ की जड़ को छाछ में से निकले हुए पानी के साथ पीसकर थोड़ी-सी मात्रा में हींग को डालकर खाने से बच्चों को दस्त में आराम पहुंचता है।
इन्द्रजौ की जड़ की छाल और अतीस को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बनाकर लगभग 2 ग्राम को शहद के साथ 1 दिन में 3 से 4 बार चाटने से सभी प्रकार के दस्त समाप्त हो जाते हैं।
इन्द्रजौ की 40 ग्राम जड़ की छाल और 40 ग्राम अनार के छिलकों को अलग-अलग 320-320 ग्राम पानी में पकाएं, जब पानी थोड़ा-सा बच जाये तब छिलकों को उतारकर छान लें, फिर दोनों को 1 साथ मिलाकर दुबारा आग पर पकाने को रख दें, जब वह काढ़ा गाढ़ा हो जाये तब उतारकर रख लें, इसे लगभग 8 ग्राम की मात्रा में छाछ के साथ पिलाने से अतिसार में लाभ पहुंचता है।
बवासीर (अर्श) :
कड़वे इन्द्रजौ को पानी के साथ पीसकर बेर के बराबर गोलियां बना लें। रात को सोते समय दो गोली ठंडे जल के साथ खायें। इससे बादी बवासीर ठीक होती है।
आंवरक्त (पेचिश) :
50 ग्राम इन्द्रजौ की छाल पीसकर उसकी 10 पुड़िया बना लें। सुबह-सुबह एक पुड़िया गाय के दूध की दही के साथ सेवन करें। भूख लगने पर दही-चावल में डालकर लें। इससे पेचिश के रोगी को लाभ मिलेगा।
अग्निमान्द्य (हाजमे की खराबी) :
इन्द्रजौ के चूर्ण को 2-2 ग्राम खाने से पेट का दर्द और मंदाग्नि समाप्त हो जाती है।
कान से पीव बहना :
इन्द्रजौ के पेड़ की छाल का चूरन कपड़छन करके कान में डालकर और इसके बाद मखमली के पत्तों का रस कान में डालना चाहिए।
दर्द :
इन्द्र जौ का चूर्ण गरम पानी के साथ देना चाहिए।
वातशूल :
इन्द्र जौ का काढ़ा बना लें और उसमें संचर तथा सेंकी हुई हींग डालकर पिलायें। इससे वातशूल नष्ट हो जाती है।
वात ज्वर :
इन्द्र जौ की छाल 10 ग्राम को बिलकुल बारीक कूटे और 50 ग्राम पानी में डालकर तथा कपड़े में छानकर पिलायें।
पित्त ज्वर :
इन्द्र जौ, पित्तपापड़ा, धनिया, पटोलपत्र और नीम की छाल को बराबर भाग में लेकर काढ़ा बनाकर पी लें। इससे पित्त-कफ दूर होता है। काढ़े में मिश्री और शहद भी मिलाकर सेवन करने से पित्त ज्वर नष्ट हो जाता है।
जलोदर :
इन्द्रजौ चार ग्राम, सुहागा चार ग्राम, हींग चार ग्राम और शंख भस्म चार ग्राम और छोटी पीपल 6 ग्राम को गाय के पेशाब में पीसकर पीने से जलोदर सहित सभी प्रकार के पेट की बीमारियां ठीक हो जाती हैं।
पेट के कीड़े :
इन्द्रजौ को पीस और छानकर 1-1 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम पीने से पेट के कीडे़ मरकर, मल के साथ बाहर निकल जाते हैं।
अश्मरी: – 
इन्द्रजौ के पाउडर व सालमोनिक को दूध या चावल के धोवल के साथ ‌‌‌या पीसी हुई इन्द्रजौ की छाल को दही के साथ लेने से पत्थरी टूटकर बाहर आ जाती है।
‌‌‌गर्भ निरोधक: –
 10-10 ग्राम पीसी हुई इन्द्रजौ, सुवा सुपारी, कबाबचीनी और सौंठ को छानकर 20 ग्राम मिश्री मिला लें। मासिक धर्म के बाद, 5-5 ग्राम, दिन में दो बार लेने से गर्भधारण नही होगा।
‌‌‌हैजा: – 
इन्‍द्रजौ की जड़ को अरंडी के साथ पीसकर हींग ​मिलाकर लेने से हैजे में आराम ​मिलता है।
रक्त-पित्तातिसार : कुटज की छाल को पीसकर सोंठ के साथ देने से रक्त बन्द होता है। रक्त-पित्त में घी के साथ देने से रक्त आना रुकता है। कुटज के फल पीसकर देने से रक्तातिसार और पित्तातिसार में लाभ होता है।
रक्तार्श :
 इसकी छाल पीसकर पानी में रात्रि को भिगोकर सुबह छानकर पीने से खूनी बवासीर में निश्चित लाभ होता है।
प्रमेह :
 प्रमेह में उपर्युक्त विधि से फूलों को पीसकर दें।
डायबिटीज़ का काल है इन्द्रजौ का यह नुस्खा
इन्द्र जो कडवा या इन्द्र जो तल्ख़ 250 ग्राम
बादाम 250 ग्राम
भुने चने 250 ग्राम
यह योग बिल्कुल अजूबा योग है अनेकों रोगियों पर आजमाया गया है मेरे द्वारा 100% रिजल्ट आया है आप इस नुस्खे के रिजल्ट का अंदाजा यूं लगा सकते हैं कि अगर इसको उसकी मात्रा से ज्यादा लिया जाए तो शुगर इसके सेवन से लो होने लगती है |बादाम को इस वजह से शामिल किया गया यह शुगर रोगी की दुर्बलता कमजोरी सब दूर कर देता है चने को इन्द्र जो की कड़वाहट थोड़ी कम करने के लिए मिलाया गया |
बनाने की विधि :
तीनों औषधियों का अलग अलग पावडर बनाए और तीनो को मिक्स कर लीजिये और कांच के जार में रख लें और खाने के बाद एक चाय वाला चम्मच एक दिन में केवल एक बार खाएं सादे जल से |

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3.8.19

लोबिया फली (चवला) खाने के स्वास्थ्य लाभ


लोबिया एक फली है जैसी चावली की फली के नाम से भी जाना जाता है। स्वास्थ्य लाभ और सेहत के लिए फायदेमंद लोबिया कई पौष्टिक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें ज्यादातर प्रोटीन, फाइबर, आयरन पाया जाता है। आपको जब मौका मिले इस सब्जी का आनंद जरूर लें। यह हमारे शरीर के लिए एक महत्वपूर्ण सब्जी है जो कई औषधीय गुणों से भरपूर है। मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए यह एक बेहतरीन पौष्टिक भोजन है

लोबिया को हिंदी में चवली की फली के नाम से भी जाना जाता है ये एक प्रकार की फली है| ब्लैक आई पीज के नाम से जानी जाने वाली ये फलियां भारत के अधिकांश घरों में इस्तेमाल की जाती हैं| इनमें शानदार टेस्ट और फ्लेवर होने के साथ ही ये पोषक तत्वों से भरपूर हैं जो शरीर के लिए जरूरी हैं|
लोबिया के फायदे :-
मधुमेह के रोगियों के लिए
लोबिया को फाइबर का एक अच्छा स्रोत माना जाता है जो डायबिटीज के मरीजों के लिए एक अच्छा आहार है। जो लोग शुगर की समस्या से परेशान हैं उनके लिए यह सबसे अच्छा भोजन है। यह हमारे खून में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करता है साथ ही ब्लड शुगर को बनाये रखता है। लोबिया में ग्लायसेमिक इंडेक्स पाया जाता है जो शुगर को नियंत्रित करता है।
*लोबिया में फाइबर और प्रोटीन की मात्रा भरपूर होती है। ये खाने को आसानी से पचाता है और खाने में मौजूद सारे पोषक तत्वों का रस निकालने में मदद करता है। इससे पेट संबंधी कोई भी परेशानी से बचाव होता है।
वजन कम करने में मददगार 
इन ब्लैक आई पीज को खाने से कैलोरी कम होती है इसलिए ये वजन कम करने की दृष्टि से एक अच्छा आहार है| लोबिया डाइटरी फाइबर का एक अच्छा स्त्रोत है जिससे आपका पेट ज्यादा समय तक भरा रहता है|
स्वस्थ त्वचा के लिए उपयोगी
*स्किन को सुचारू रूप से रिपेयर करते हुए लोबिया त्वचा को हेल्दी रखती हैं| इन फलियों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट में विटामिन ए और सी की उपस्थिति होती है जो कि फ्री रेडिकल्स से स्किन को हुए नुकसान को दूर करती हैं| लोबिया के सेवन करने से त्वचा स्वस्थ और नरम बनती है। इस फली में एंटी-ऑक्सीडेंट में विटामिन ए और सी उच्च होता है जी फ्री रेडिकल्स से त्वचा को हानिकारक प्रभाव से बचाता है
*इंफेक्शन को दूर करने में लोबिया अहम है। इसमे विटामिन ए और एंटीऑक्सीडेंट होने के कारण ये हर इफेक्शन से बचाता है। लोबिया शरीर से जहरीले पदार्थो को निकालता है साथ ही बॉडी में होने वाले किसी भी इंफेक्शन फंगल को पनपने भी नही देता।
*एक डाईजेस्टीव के रूप में मददगार लोबिया में फाइबर और प्रोटीन की अधिकता होती है जो कि पेट पर सकारात्मक प्रभाव डालती है और पाचन क्रिया में मदद करती है| फाइबर की उपस्थिति पेट से सम्बंधित बिमारियों को दूर रखती है, पेट को आराम प्रदान करती है और भोजन को बेहतर तरीके से पचाती है|
*पोटेशियम और मैग्नीशियम की उपस्थिति लोबिया को ह्वदय से संबंधित बीमारियों को दूर करने में उपयोगी बनाती है। खून में कॉलेस्ट्रॉल के लेवल को सही बनाने का काम लोबिया करता है। कॉलेस्ट्रॉल के कंट्रोल होने से हार्ट संबंधी बीमारियां नही होती।
*ब्लैक आई पीज ब्लड कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने के लिए जानी जाती हैं और कई प्रकार की दिल की बिमारियों को दूर रखती हैं| पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे फ्लेवोनॉयडस और लिग्निन (एक साइटोस्ट्रोजिन) की उपस्थिति लोबिया को हृदय से सम्बंधित बिमारियों को दूर करने में उपयोगी बनती है|
संक्रमण से बचाव विटामिन ए जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स का खजाना होने के कारण ये फलियां कई प्रकार की बिमारियों को दूर रखती हैं| ये फलियां शरीर को स्वस्थ रखने में उपयोगी हैं क्योंकि ये शरीर से विभिन्न विषाक्त पदार्थों और हानिकारक ऑक्सीजन रहित तत्वों को बाहर करने में मदद करती हैं|
लोबिया के गुण पाचन शक्ति बढ़ाये
लोबिया में प्रोटीन और फाइबर भरपूर पाया जाता है जो पाचन को मजबूती देने में मदद करता है और पाचन को दुरस्त रखता है। फाइबर की मौजूदगी होने के कारण इससे पेट से समन्धित बीमारियां दूर होती है और पेट को सुकून मिलता है जिससे भोजन बेहतर तरीके से पचता है।
संक्रामक रोगों से बचाये
विटामिन A और C जैसे एंटी-ऑक्सीडेंट होने के कारण यह काफी बिमारियों को दूर करने में मदद करता है। यह शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है क्यूंकि ये शरीर से विषाक्त पदार्थों को बहार कर शरीर को हैल्थी बनाने में मदद करता है।
*लोबिया के सेवन करने से ब्लड कोलेस्ट्रॉल लेवल कम होता है और हृदय की बिमारियों से राहत मिलती है। इसमें पोटेशियम और मैग्नेशियम जैसे फ्लेवोनॉयडस और लिग्निन यौगिक होते हैं जो दिल की बिमारियों को दूर करने में मदद करते हैं।
*लोबिया का सलाद आप खाने के समय या फिर सुबह नाश्‍ते के समय बना सकती हैं। Lobiya में बहुत सारा प्रोटीन और विटामिन होता है जो कि हर किसी के लिये फायदेमंद है। अगर आप डाइटिंग कर रहे हैं तो भी आपको ज्यादा इधर-उधर देखने की जरुरत नहीं है , लोबिया सलाद आपकी हर जरुरत को पूरा करेगा।
लोबिया पेट के खून को साफ़ करता है
*लोबिया धातु को मजबूत बनाता है और वीर्य भी बढाता है
इसको खाने से पेशाब खुल कर आता है.
*लोबिया को आटे के रूप में पीस कर इसकी रोटी बना कर खाना या दाल के रूप में सब्जी की तरह खाना फायदेमंद होता है।
सावधानी-
लोबिया की सब्जी का अधिक सेवन करने से पेटदर्द, अपच, पेट में जलन, पेट फूलना, कब्ज जैसी समस्या हो सकती है।
कुछ लोगों को लोबिया की सब्जी का सेवन करने से एलेर्जी हो सकती है।
गर्भवती और स्तनपान करने वाली महिलाओं को लोबिया की सजी का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी जरूरी है।

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31.7.19

दूध मे अदरक मिलाकर पीने के फायदे

     
                                 
दूध का स्वाद बढ़ाने और स्वास्थ्यवर्धक गुणों को बढ़ाने के लिए अदरक काफी फायदेमंद होती है। अदरक में एंटी-इंफ्लेमेट्र्री, एंटी-बैक्टीरियल गुण होने के साथ-साथ अनेक मेडिकल प्रोपर्टीज पाई जाती है। इसलिए अदरक के दूध का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। सर्दी-जुकाम से बचाने के साथ अदरक का दूध, हल्दी के दूध की तरह बदन दर्द को दूर करने के लिए उपयोगी होता है। दूध पोषक तत्वों से भरपूर होता है और इसमें अदरक मिलाने से इसके स्वास्थ्यवर्धक लाभ और भी बढ़ जाते हैं। आइए जानते हैं कि अदरक का दूध पीना स्वास्थ्य के लिए कैसे फायदेमंद होता है।
अदरक के फायदों के बारे में तो अधिकतर लोगों को पता है लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि अगर अदरक को दूध में मिलाकर पिया जाए तो इसके फायदे कई गुना बढ़ जाते हैं। अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाने के कारण चाहे सर्दी-जुकाम हो या वायरल फ्लू, मरीज को अदरक के सेवन की सलाह दी जाती है।
गर्भवती महिलाओं को भी मॉर्निंग सिकनेस से आराम दिलाने के लिए अदरक की चाय पीने की सलाह दी जाती है। दूध अपने आप में ही एक पूर्ण पौष्टिक आहार है और जब आप इसमें अदरक मिला देते हैं तो आप इन दोनों पौष्टिक चीजों के फायदे एक साथ हासिल कर लेते हैंयह बात बहुत कम लोग ही जानते हैं कि अदरक को दूध में मिलाकर पिया जाए तो इसके फायदे कई गुना बढ़ जाते हैं। अदरक में मिलनें वाले एंटी बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी के गुण शरीर के अंदर होने वाली कई तरह की बीमारियों को दूर करने की क्षमता रखते है।
गठिया के दर्द से जल्दी आराम –
बैसे तो हर कोई जानता है। कि दूध में कैल्शियम और पोटैशियम की भरपूर मात्रा पाई जाती है। जो हमारे शरीर की हड्डियों को मजबूत बनाने का काम करती हैं। दूध का सेवन करने हड्डियों की कमजोरी दूर होती है और यदि दूध के साथ अदरक को मिलाकर इसका सेवन रोज किया जाये, तो इनमें मौजूद एंटी इंफ्लेमेटरी के गुण हड्डियों को मजबूती देने के साथ उसकी सूजन को भी कम कर देते है। इसीलिए यह ड्रिंक गठियावाद(ऑस्टियोपोरोसिस )के मरीजों के लिए वरदान है। इसे पीने से गठिया के दर्द से जल्दी राहत मिलती है।
पाचन शक्ति मजबूत करता है –
अदरक का दूध पाचन क्रिया को मजबूत बनाने में काफी लाभकारी होता है। यह पेट दर्द से जुड़ी हर समस्या को दूर करने का सबसे अच्छा घरेलू उपचार माना गया है। नाश्ता करने के बाद आप अदरक वाले दूध का सेवन अवश्य करें।
रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है –
बदलते मौसम के साथ ही बीमारियां भी अपना रूख बदलने लगती है। जिससे इस दौरान लोग सार्दी, खांसी-जुकाम या फ्लू की चपेट में आ जाते हैं। दरअसल ऐसा शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी के कारण होता है। इसलिए जिनका शरीर अत्याधिक कमजोर होता है। उन लोगों को अदरक दूध का सेवन अवश्य ही करना चाहिए। अदरक के एंटी बैक्टीरियल गुण पाये जाते है। जो शरीर में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करने में अहम भूमिका निभाते है और शरीर को बाहरी संक्रामण से बचाने में मदद करते है।
गले का इंफेक्‍शन –
सर्दियों के समय में ज्यादातर लोग सर्दी-खांसी से परेशान रहते है। जिसमें अधिकतर बच्चे इसकी चपेट में आ जाते है इस समस्या को दूर करने के लिये अदरक वाले दूध काफी अच्छा उपचार माना गया है। इसका सेवन करने से ना केवल गले की खराश जल्दी दूर होती है बल्कि गले में होने वाले इंफेक्‍शन से भी राहत मिल जाती है। यदि आप गले के इंफेक्‍शन से पीड़ित हैं तो रात में सोने से पहले अदरक वाला दूध अवश्य पिए, और इसके एक घंटे बाद तक पानी न पियें। आपको जल्द ही इसका असर देखने को मिल जायेगा।
हड्डियों की मजबूती :
दूध में मौजूद कैल्शियम और पोटैशियम हड्डियों के लिए बहुत फायदेमंद हैं। दूध से हड्डियों की कमजोरी दूर होती है वही अदरक में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होने के कारण हड्डियों की सूजन कम होती है। इसीलिए यह ड्रिंक ऑस्टियोपोरोसिस के मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद है। इसे पीने से गठिया के दर्द से जल्दी आराम मिलता है।
अदरक का दूध बनाने का तरीका :
सबसे पहले अदरक को साफ़ पानी से धोलें और छोटे छोटे टुकड़ों में काट लें और फिर एक पतीले में दूध गर्म करें। जब दूध उबलने लगे तो उसमें अदरक के ये टुकड़े डालकर कुछ देर तक उबालें जिससे अदरक का सारा अर्क दूध में मिल जाए। इसके बाद दूध को छान लें और हल्का गुनगुना होने पर इसे पियें।

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पेशाब मे खून आने के कारण और उपचार


प्रौढ़ों में अगर पेशाब में रक्त आए, तो यह जबरदस्त पेशाब संक्रमण के लक्षण हैं या फिर यह पत्थरी भी हो सकती है। किडनी, यूरीनरी ब्लैडर या प्रोस्टेट में कैंसर या ट्यूबरक्लोसिस का ट्यूमर भी हो सकता है। ठीक होने के लिए इन बीमारियों की समय पर जांच बहुत जरूरी है। जांच में देरी हो जाए, तो यह किडनी को खराब कर सकता है या कैंसर की रसौली बढ़ सकती है।
पेशाब में खून आना पुरुषों में होने वाली आम समस्या है लेकिन इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इस समस्या को नजरअंदाज करना आपको भारी पड़ सकता है। पेशाब में खून आने को मेडिकल टर्म में हेमटुरीअ कहा जाता है। यहां हम आपको पेशाब में रक्त आने के कारणों और लक्षणों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। अगर आपको भी यह समस्या हो रही है तो फौरन डॉक्टरी सलाह लें। आमतौर पर माना जाता है कि पेशाब में खून पेशाब के रास्ते में होने वाले संक्रमण की वजह से आता है लेकिन इसकी कई वजह हो सकती हैं। जिनमें गुर्दे से लेकर मूत्राशय तक की पथरी शामिल है।
अक्सर हमारे शरीर में कोई भी समस्या होती है तो हमारे शरीर के अंग हमे उसका संकेत देने लगते हैं कि शरीर में कुछ दिक्कत आ रही है। हालांकि हम उन छोटी-छोटी बातों को नज़रअंदाज कर दिया करते हैं, जो हमें नहीं करना चाहिए। इन्हीं में से एक लक्षण है पेशाब के दौरान होने वाली दिक्‍कत। अगर आप भी लंबे समय से पेशाब के दौरान जलन या पेशाब के साथ खून आने की दिक्कत का सामना कर रहे हैं तो सावधान हो जाइए और इसे अनदेखा करने से बचिए। पेशाब में खून आने के कई कारण हो सकते हैं इसलिए लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्‍टर से परामर्श लें। पेशाब में खून आने ये कारण हो सकते हैं।
किडनी की समस्या की वजह से भी पेशाब में खून आने की समस्या होती है। दरअसल, किडनी से रक्त को छानने का काम ग्लोमेरुली करता है। यह गुर्दे के अंदर की छोटी संरचनाएं हैं। इनकी वजह से ही किडनी से रक्त छनता है। इन संरचनाओं को ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस नुकसान पहुंचाता है। इसकी वजह से हमारे गुर्दे शरीर के अपशिष्ट पदार्थ और अतिरिक्त तरल पदार्थ को बाहर नहीं निकाल पाते हैं। इस समस्या का अगर सही वक्त पर इलाज नहीं किया गया तो किडनी फेल भी हो सकती है। इस बीमारी में सुनने और देखने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। यानी इस बीमारी से ग्रसित लोग अंधे और बहरे भी हो सकते हैं। किडनी में घाव होने के चलते ही पेशाब में खून भी आता है।
प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना
पेशाब में खून आने की वजह प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना भी है। प्रोस्टेट ग्रंथि मूत्राशय के नीचे और मलाशय के सामने होती है। यह ग्रंथि प्रजनन के लिए वीर्य का उत्पादन करती है। अगर प्रोस्टेट बढ़ जाता है तो पेशाब में तेज दर्द के साथ खून आने की समस्या हो सकती है।
यूरिन इंफेक्‍शन या यूरिनरी ट्रैक्‍ट इंफेक्‍शन (यूटी
आई)
यूरिनरी ट्रैक्‍ट इंफेक्‍शन (यूटीआई) महिलाओं में होने वाली बेहद आम समस्या होती है। मूत्र मार्ग में संक्रमण होने के कारण महिलाओं को काफी समस्या होती है और जलन के साथ-साथ कई बार पेशाब के साथ खून भी आने लगता है।
गुर्दे में पथरी या गुर्दे या पित्‍ताशय में ट्यूमर के कारण
अगर किसी इंसान को गुर्दे में पथरी की समस्या हो तो भी कई बार पेशाब में खून आ सकता है क्‍योंकि पथरी की वजह से पेशाब की प्राकृतिक प्रक्रिया में रूकावट पैदा हो जाती है। इसका उपचार हो सकता है इसलिए समय रहते डॉक्‍टर से सम्‍पर्क करें। इसके अलावा गुर्दे या पित्‍ताशय में ट्यूमर होने पर भी पेशाब में खून आने लगता है। ऐसे में डॉक्‍टरों द्वारा सर्जरी की मदद से इलाज किया जाता है।
ग्‍लोमेरूलोनेफ‍रिटिस के कारण
पेशाब या मल में खून आने का ग्‍लोमेरूलोनेफ‍रिटिस या ग्‍लोमेरूलर नेफीरिटिस सबसे आम कारण होता है। बढ़ते बच्‍चों और छोटे बच्‍चों में यह समस्‍या सबसे ज्‍यादा देखने को मिलती है। लेकिन कई बार बड़े लोग को भी इस समस्‍या का सामना करना पड़ता है।
सिस्टिक ग्रोथ
महिलाओं में सिस्‍ट का बढ़ जाना आम बात है। ये समस्या काफी पीड़ादायक होती है और इसके कारण पेशाब में खून भी आने लगता है। आमतौर पर सिस्‍ट, गुर्दे में बढ़ता है जिसके कारण पेशाब करने में दर्द औश्र जलन की समस्या होती है। एक समय के बाद खून भी आना शुरू हो जाता है।
पेशाब में अगर खून आता हो तो उसे रक्तमेह कहा जाता है। रक्तमेह के रोग में गुर्दे की गडबड़ी के कारण रक्त पूरी तरह नहीं छन पाता है। लम्बे समय से पेशाब में जलन हो रही हो या उसमें से खून आ रहा हो, तो आपको खुद पर ध्यान देने की आवश्यकता है। पेशाब में खून आने पर करें ये घरेलु उपाय।
* रात को सोते समय एक गिलास पानी में मुनक्का भिगो दें। सुबह मुनक्का उसी पानी के साथ पीस लें। इसे छानकर इसमें थोड़ा भुना पिसा जीरा मिलाकर पी ले। इससे पेशाब की जलन मिट जाती है और पेशाब खुलकर आता है साथ ही खून का आना भी बंद हो जाता है।
* लगभग 12 ग्राम आंवला और 12 ग्राम हल्दी को मोटा-मोटा पीसकर रात को पानी मे डालकर भिगों दें। सुबह इस पानी को छानकर पीने से पेशाब मे खून आने का रोग दूर होता है।
* 1 ग्राम भुनी हुई फिटकरी को सुबह और शाम पानी के साथ लेने से पेशाब मे खून आना बंद हो जाता है।
* सात बूँद बड़ का दूध शक्कर के साथ देने से पेशाब तथा गुदा द्वारा होने वाले रक्तस्राव में लाभ होता है।
* अडूसी के पत्तों का 1 तोला (लगभग 12 ग्राम) रस रोज सुबह पीने से अथवा केले के फूल का 2 से 10 मि।ली। रस 10 से 50 मि।ली। दही के साथ खाने से रक्तस्राव में लाभ होता है।
* एक गिलास पानी में दो चम्मच धनिया और एक चम्मच पिसा हुआ आंवला रात को भिगो दें। सुबह उसी पानी में मसल कर छानकर पी लें। ऐसा ही पानी शाम को भी पिएँ। इस पानी को सुबह शाम पीने से पेशाब में जलन मिट जाती है साथ ही खून गिरने में भी राहत मिलती है।
* एक कटोरी गेंहू रात को एक गिलास पानी में भिगो दें। सुबह इसी पानी के साथ इसे बारीक पीस ले। इसमें एक चम्मच मिश्री मिलाकर पी लें। इसे एक सप्ताह तक लगातार पीने से पेशाब के साथ वीर्य जाना बंद होता है। खून आना भी बंद हो सकता है।
* 10 से 20 ग्राम लोध्रासव को बराबर मात्रा में पानी में मिलाकर सुबह-शाम भोजन के बाद खाने से पेशाब साफ आने लगता है।
* लगभग आधे से एक ग्राम सुहागे की खील को शहद मिले पानी में घोंटकर सुबह-शाम पीने से दूषित पेशाब भी ठीक हो जाता है।
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30.7.19

ज्यादा पानी पीना हो सकता है खतरनाक



पानी की कमी और अधिकता दोनों ही है खतरनाक
पानी की कमी और अधिकता दोनों ही सेहत के लिए खतरनाक है. पानी की कमी से जहां डी-हाइड्रेशन होने का खतरा बढ़ जाता है वहीं बहुत ज्यादा पानी पीने वाले व्यक्त‍ि को ओवरहाइड्रेशन की शिकायत हो जाती है
इस समस्या से सबसे अधिक एथलीट प्रभावित होते हैं. पानी की कमी से एक ओर जहां उनकी मांस-पेशियों में ऐंठन आ जाती है वहीं बहुत अधिक पानी पीने से उनके खून का गाढ़ापन कम हो जाता है. विशेषज्ञों की मानें पानी उतना ही पीना चाहिए जितने से प्यास बुझ जाए. प्यास नहीं लगी हो तो जबरदस्ती पानी नहीं पिएं.
बहुत अधिक पानी पी लेने से चक्कर आने लगते हैं और व्यक्त‍ि असहज महसूस करने लगता है. कई बार तो दिल की धड़कन भी तेज हो जाती है. पर इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि कम पानी पीना चाहिए. अल्कोहल को छोड़कर हम जो भी तरल लेते हैं, उसमें पानी की कुछ मात्रा तो होती ही है.
प्यास लगने का मतलब शरीर में पानी की कमी हो गई है. प्यास लगना सेहत के लिए अच्छा है. पानी तभी पिएं जब आपको इसकी जरूरत महसूस हो. घड़ी-घड़ी, जबरदस्ती पानी पीना सही नहीं है. शरीर में पानी की मात्रा बनी रहनी चाहिए लेकिन ज्यादा नहीं.पानी सेहत के लिए जरूरी है। मगर जरूरत से ज्यादा पानी मोटापा भी दे सकता है। आमतौर पर लोग यह मानते हैं कि पानी पीने से वजन घटता है और फैट बर्न होता है। ये बातें सही भी हैं। आमतौर पर डॉक्टर मानते हैं कि एक स्वस्थ व्यक्ति को एक दिन में 2-4 लीटर पानी पीना चाहिए। विशेष स्थितियों जैसे-जिम, एक्सरसाइज, भारी मेहनत या गर्मी के कारण इसकी मात्रा बढ़ा सकते हैं। मगर आप सामान्य तौर पर रोजाना 5-6 लीटर से ज्यादा पानी पीते हैं, तो यह आपके स्वास्थ्य पर विपरीत असर भी डाल सकता है। 
हम सभी जानते हैं कि पानी हमारे स्वास्थ्य और जीवन के लिए कितना जरूरी है। इसके अलावा खुद को हाइड्रेट रखने के लिए दिन में कम से कम दो लीटर पानी जरूर पीना चाहिए , जैसा कि डॉक्टर भी सिफारिश करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सही समय पर पर्याप्त मात्रा में पानी पिया जाए, तो हमें कई रोगों से बचने में मदद मिलती है और हमारा शरीर भी तंदरुस्त रहता है। हालांकि आप इस बात से जरूर अंजान होंगे कि जरूरत से ज्यादा पानी पीने के दुष्परिणाम भी हो सकते हैं। ऐसे में इस बात का ख्याल रखना बेहद जरूरी है कि प्यास न लगने पर भी पानी न पीएं, जो कि आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।
ज्यादा पानी पीने से आ सकती है सूजन
ज्यादा पानी पीने से न केवल आपके शरीर में मौजूद इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन होता है बल्कि आपके हाथ, पैर और होठों पर भी सूजन आ सकती है। अधिक मात्रा में पानी पीने से खून में मौजूद सोडियम की मात्रा घटने लगती है, जिसके कारण हाथ, पैर और होंठों में सूजन आ जाती है और शरीर के कई अंगों को भी नुकसान पहुंचता है।
किडनी पर भी बुरा प्रभाव
जरूरत से ज्यादा पानी पीने से ओवरहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है। ओवरहाइड्रेशन का असर सीधा किडनी पर पड़ता है। दरअसल किडनियां ही हमारे शरीर में पानी को फिल्टर करने का काम करती हैं। अगर आप रोजाना ज्यादा मात्रा में पानी पीते हैं, तो किडनियों पर काम का बोझ ज्यादा पड़ता है, जिससे लंबे समय में किडनी फेल होने का भी खतरा हो सकता है।
पेशाब का रंग साफ आना भी समस्या
सभी जानते हैं कि जब पेशाब गहरे रंग का होता है तो यह डीहाइड्रेशन का संकेत होता है। लोग इसका गलत मतलब निकाल लेते हैं और ज्यादा पानी पीने लगते हैं उन्हें लगता है कि ऐसा करने से आपके पेशाब का रंग बिल्कुल साफ हो जाएगा। हाइड्रेशन उस वक्त हेल्दी लेवल पर होता है जब आपके पेशाब का रंग हल्का पीला हो। अगर पेशाब बिल्कुल साफ आ रहा है तो समझ लीजिए कि आप जरूरत से ज्यादा ज्यादा हाइड्रेट हैं और पानी की मात्रा को कम करें।
ज्यादा पानी से दिमाग में सूजन
एक शोध में पाया गया है कि शरीर में ज्यादा मात्रा में पानी हो जाने पर सोडियम का लेवल तेजी से कम होने लगता है। सोडियम का स्तर घटने से मस्तिष्क में सूजन आ सकती है, जो कि एक खतरनाक स्टेज है। शोध में पाया गया है कि ज्यादा पानी पीने के कारण शरीर में असामान्य रूप से सोडियम कम होने लगता है इसलिए हाइपोट्रिमिया का खतरा बढ़ जाता है। सोडियम एक तरह का इलेक्ट्रोलाइट है, जो हमारे शरीर में पानी की मात्रा को नियंत्रित करता है।
ज्यादा पेशाब आना
अगर आप भी उन लोगों में शामिल हैं, जिन्हें बार-बार पेशाब आता है तो ज्यादा पानी पीने की आदत को छोड़ दे। हालांकि यह समस्या पेशाब की नली में संक्रमण, डायबिटीज और प्रोस्टेट कैंसर की दिक्कत के कारण भी हो सकती है।
पानी पीने से ऐसे बढ़ता है वजन
हमारा वजन तब बढ़ता है, जब शरीर में फैट जमा होता है। जमे हुए फैट सेल्स में पानी की मात्रा भी होती है। ऐसे में अगर आप जरूरत से ज्यादा पानी पीते हैं, तो किडनी पूरे पानी को शरीर से बाहर निकालने में सक्षम नहीं होती है। बचा हुआ पानी शरीर में इलेक्ट्रोलाइट का बैलेंस बिगाड़ता है। इससे पानी शरीर में जमा हो जाता है और आपका वजन बढ़ जाता है। 24 घंटे में ही यह जमा हुआ पानी शरीर से निकल जाता है। हालांकि अगर आपको रोज ज्यादा पानी पीने की आदत है, तो मोटापे की समस्या हो सकती है।
ज्यादा पानी पीने से इलेक्ट्रोलाइट्स हो सकते हैं असंतुलित
जब आपको प्यास नहीं लगती है लेकिन फिर भी बोतल या गिलास को मुंह से लगाकर पानी पीने लगते हैं तो इस आदत को त्याग दें। प्यास लगने पर शरीर को जितनी जरूरत है उतने पानी की पूर्ति हो जाती है लेकिन आपको प्यास नहीं लगी है और फिर ही आप पानी पी रहे हैं तो आपके शरीर में पाए जाने वाले इलेक्ट्रोलाइट्स असंतुलित होना शुरू हो जाते हैं। इस स्थिति के कारण इलेक्ट्रोलाइट्स में असंतुलन हो जाता है।
हार्ट फंक्शन बिगाड़ सकता है ज्यादा पानी पीना
जरूरत से ज्यादा पानी पीने से पोटेशियम, सोडियम और मैग्नेशियम जैसे शरीर के इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ सकता है, जो हमारी किडनी से लेकर ह्रदय गतिविधियों तक के का संचालन को खराब कर सकती है। ऐसी स्थिति में आपका शरीर सही तरह से काम करना बंद कर देगा और कई रोग आपको अपनी चपेट में ले लेंगे। अगर आप मेहनत कर रहे हैं या गर्मी में घर से बाहर हैं तभी आपको ज्यादा पानी पीना चाहिए।

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27.7.19

नींद मे पसीना आने के उपचार


तापमान और हवा का दबाव ज्यादा होने पर रात में पसीना आना बहुत आम बात है। लेकिन ये कारण अगर मौजूद नहीं हैं, तो रात में पसीना ज्यादा आना किसी ऐसी बात का लक्षण हो सकता है जिसका पता लगाने की ज़रूरत है।
हालांकि रात को बहुत ज्यादा पसीना आम बात है। इसके अलावा कभी-कभी जब हम सर्दी लगने से ऊबर रहे होते हैं या हमें कोई छोटा-मोटा संक्रमण हुआ हो, तो भी इसका अनुभव करते हैं। इसके अलावा रजोनिवृत्ति (menopause) के दौरान रात में अक्सर पसीना आता है।
हालांकि रात में पसीने का अनुभव करने वाला हर कोई हाइपरहाइड्रोसिस से पीड़ित नहीं होता है, यह स्थिति अक्सर स्वास्थ्य केंद्रों के मरीजों में दिखाई देती है। कई मामलों में, अत्यधिक पसीना आने का कारण अनिद्रा (insomnia), तनाव (stress) या रात को अच्छी नींद न मिलने पर होने वाली एंग्जायटी भी होती है।
लेकिन कुछ मामलों में, अंदरूनी बीमारियां जो अपेक्षाकृत गंभीर होती हैं, इस स्थिति का कारण बन सकती हैं। इन बीमारियों का इलाज किया जाना ज़रूरी होता है।
जब आपके कमरे में अधिक गर्मी होती है या फिर आप एक साथ कई चादरें औढ लेते हैं तो आपको पसीना आ सकता है। लेकिन हम इसके बारे में बात नहीं कर रहे हैं। आधी रात में पसीना आने से मतलब है आप पसीने से तरबतर होकर उठते हैं और कभी-कभार आपको चादरें बदलने की नौबत तक पड़ जाती है। आमतौर पर यह चिकित्सा से संबंधित हो सकता है। अगर आप भी उन लोगों में शामिल हैं, जिन्हें रात को सोते वक्त बेहद पसीना आ जाता है  इसके पीछे के ऐसे 5 कारण  हैं, जिनको आप ठीक कर इससे निजात पा सकते हैं।
लो ब्लड शुगर (Low Blood Sugar)
क्या आपको डायबिटीज है? जब आप सोते वक्त जांचते हैं तो आपका ब्लड ग्लूकोज स्थिर होता है लेकिन सोने के बाद इसमें अचानक गिरावट आ जाती है। इसके पीछे आपकी दिन भर की भागदौड़, शाम को की गई एक्सरसाइज या फिर देर रात खाना खाना हो सकता है। अगर आप अपनी डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन का प्रयोग करते हैं तो इसके लिए रात को ली गई हाइपोगिल्समिया जिम्मेदार हो सकती है। जब आपका ग्लूकोज सोने से पहले 140 मिलीग्राम/डीएल के मुकाबले कम हो जाए या कुछ घंटे में इसमें गिरावट आ जाए तो कुछ खा लें।
नींद में सांस लेने मे दिक्कत (Sleep Apnea)
जब आप इस स्थिति से गुजर रहे होते हैं तो आपको रात में सांस लेने के दौरान कई बार दिक्कत होती है। क्योंकि आपकी बॉडी को ऑक्सीजन नहीं मिल पा रहा होता है, जिसके कारण आपको पसीना आने लगता है। हर बार जब आप दोबारा से सांस लेना शुरू करते हैं तो आपकी मांसपेशियों को दोगुना काम करना पड़ता है। जो लोग रात में सांस लेने के लिए सीपीएपी मशीन का प्रयोग करते हैं उन्हें रात में अक्सर पसीना आता है।
एसिड रिफलक्स (Acid Reflux)
सीने में जलन और सीने में दर्द ही आपको रात में नहीं उठाता। पेट की समस्या का उपचार न कराना आपको रात में पसीना से तरबतर कर सकता है। सोने से पहले कम खाना खाएं और हो सके तो टहलें। फैटी, तले और टमाटार से बने उत्पाद खाने से बचें। अगर आपको सप्ताह में दो बार भी इसके लक्षण दिखाई देते हैं तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
दवाएं (Medications)
बहुत सी दवाएं रात में पसीने के कारण बन सकती हैं, इसमें बुखार के लिए मेडिकल से खरीदी गई दवाएं भी शामिल हैं। ट्राइसाइक्लिक या टीसीए जैसे पुराने एंटीडिप्रेसेंट्स के साथ-साथ बुप्रोपियन व वेनलाफैक्सिन, हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी और कोर्टिसोन व प्रेडनिसोन जैसे स्टेरॉयड सामान्य रूप से रात में पसीना आने का कारण बन सकते हैं। ग्लूकोमा के लिए दवाएं और मुंह का सूखना भी पसीने की ग्रंथियों को उत्तेजित करती हैं।
थाइरॉयड का अतिसक्रिय होना (Overactive Thyroid)
ज्यादा पसीना आना और गर्मी के प्रति संवेदनशील होना हाइपरथाइरॉयडिज्म का प्रमुख लक्षण है। आपकी थाइरॉयड ग्रंथि आपके मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है इसलिए जब यह अधिक हार्मोन बनाने लगती है तो आपकी बॉडी अतिसक्रिय होने लगती है। आपके शरीर का तापमान बढ़ जाता है और आपको भूख व प्यास लग सकती है, आपकी नब्ज तेज चलने लगती है या फिर आपके हाथ कांपने लगते हैं।हमें यह ध्यान रखना चाहिए, जब थायराइड ग्रंथि थायरॉक्सिन हॉर्मोन से जुड़ा कोई बदलाव अनुभव करती है, तो यह हमारे मेटाबोलिज्म पर असर डालता है। इसके मुख्य नतीजों में  गर्मी को लेकर असहनशीलता और अत्यधिक पसीना आना है।
*रात में पसीना आना गेस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज का संकेत भी हो सकता है
गेस्ट्रोइसोफेगल रिफलक्स के प्रमुख लक्षण
1-रोगी के सीने या छाती में जलन.
2-कई बार एसिडिटी के कारण सीने में दर्द भी रहता है, मुंह में खट्टा पानी आता रहता है.
3-एसिडिटी के कारण कई बार रोगी ऐसा महसूस करता है जैसे भोजन उसके गले में आ रहा है या कई बार डकार के साथ खाना मुंह में आ जाता है.
4-रात में सोते समय इस तरह की शिकायत ज्यादा होती है और बहुत ज्यादा पसीना आता है.
5-कई बार एसिड भोजन नली से सांस की नली में भी पहुंच जाता है, जिससे मरीज को दमा या खांसी की तकलीफ भी हो सकती है.
आमतौर पर पसीना आना चिंता का विषय नहीं होता, लेकिन तब परेशान होना जरूरी है जब जरूरत से ज्यादा पसीना आए और वो भी रात में आता हो. दरअसल डॉक्टर्स का मानना है कि रात में अत्यधिक पसीना आना या बैचेनी महसूस करना खतरे की घंटी है. इस समस्या को नजरअंदाज करने की बजाय तुरंत डॉक्टर से सलाह लें और यदि यह गेस्ट्रोइसोफेगल रिफलक्स के कारण हो तो इसके उपचार के लिये डॉक्टर की सलाह से दवाएं लें.
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26.7.19

गाय के घी के स्वास्थ्य लाभ



अध्यात्म और शारीरिक दोनों ही रूप से गाय के घी का बहुत ही महत्व है। शास्त्रों में और आयुर्वेद में इसको अमृत सामान माना गया है। इसको देवी देवता को खुश करने के लिए शुद्ध घृत की ज्योति एवं हवन में उपयोग किया जाता है। इसके सेवन से कमजोर व्यक्ति के कई रोग दूर होकर शरीर बलवान और शक्तिशाली बनता है। इससे त्वचा,सिर,पेट के रोगो में लाभ होता है। इसकी कुछ बुँदे नाक में डालने से, एनिमा लेने से पित्त और वात रोग का इलाज किया जाता है। घृत के सेवन के अनगिनत फायदे है।
स्त्री यौन रोग (श्वेत प्रदर) में
घी, छिलका सहित पिसा हुआ काला चना और पिसी शक्कर (बूरा) तीनों को समान मात्रा में मिलाकर लड्डू बाँध लें। प्रातः खाली पेट एक लड्डू खूब चबा-चबाकर खाते हुए एक गिलास मीठा गुनगुना दूध घूँट-घूँट करके पीने से स्त्रियों के प्रदर रोग में आराम होता है, पुरुषों का शरीर मोटा ताजा यानी सुडौल और बलवान बनता है।
गाय के घी के सेवन कमजोरी का इलाज
यह स्मरण रहे कि घृत के सेवन से कॉलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता है। वजन भी नही बढ़ता, बल्कि वजन को संतुलित करता है । यानी के कमजोर व्यक्ति का वजन बढ़ता है, मोटे व्यक्ति का मोटापा (वजन) कम होता है।
आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए
एक चम्मच शुद्ध घृत में एक चम्मच बूरा और 1/4 चम्मच पिसी काली मिर्च इन तीनों को मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय चाट कर ऊपर से गर्म मीठा दूध पीने से आँखों की ज्योति बढ़ती है।
यादाशत बढाएं
गाय के घी को नाक में डालने से यादाशत अच्छी होती है और बच्चों के लिए यह बहुत फायदेमंद है।
बलगम से छुटकारा
घी की झाती पर मालिस करने से बच्चो के बलगम को बहार निकालने मे सहायक होता है।
फफोले का उपचार
फफोलो पर गाय का देसी घी लगाने से आराम मिलता है।
अच्छी नींद
रात को नींद नहीं आती तो रात को नाक में घी डालकर सोएं,नींद अच्छी आएगी और सारा दिन फ्रैश रहेगें।
पुराने जुखाम से राहत
लंबे समय से जुखाम से परेशान हैं और दवाइयों से भी कोई फर्क नहीं पड़ रहा तो रात को रोजाना गाय का घी डालकर सोएं। इसके लगातार इस्तेमाल से जुखाम से राहत पाई जा सकती है।
उच्च कोलेस्ट्रॉल
उच्च कोलेस्ट्रॉल के रोगियों को गाय का घी ही खाना चाहिए। यह एक बहुत अच्छा टॉनिक भी है। आप घी की कुछ बूँदें दिन में तीन बार, नाक में प्रयोग करें।
खर्राटे गायब
रात को सोने से पहले हल्का गुनगुना करके एक-एक बूंद नाक में डाल कर सोमे से खर्राटों की परेशानी दूर हो जाएगी।
तनाव दूर
किसी भी तरह के मानसिक तनाव से दूर हैं तो गाय का शुद्ध घी रात को रोजाना नाक में डालकर सोएं। इससे तनाव दूर हो जाएगा और कोई नुकसान भी नहीं होगा।
गाय के घृत से सांप काटने पर उपचार
सांप के काटने पर 100 -150 ग्राम घी पिलायें उपर से जितना गुनगुना पानी पिला सके पिलायें जिससे उलटी और दस्त तो लगेंगे ही लेकिन सांप का विष कम हो जायेगा।
चर्म रोग का इलाज
चर्म रोग का घरेलू इलाज – गाय के घी को ठन्डे जल में फेंट ले और फिर इसको पानी से अलग कर ले यह प्रक्रिया लगभग सौ बार करे और इसमें थोड़ा सा कपूर डालकर मिला दें। इस विधि द्वारा प्राप्त घी एक असर कारक औषधि में परिवर्तित हो जाता है जिसे त्वचा सम्बन्धी हर चर्म रोगों में चमत्कारिक कि तरह से इस्तेमाल कर सकते है। यह सौराइशिस के लिए भी कारगर है।
अन्य लाभ 
गाय के घी के नियमित सेवन से आपको कब्ज और एसिडिटी की समस्या नहीं होगी|
अगर आपके हाथ पैर में जलन हो रही है तो गाय के घी से तलवों की मालिश करें| ऐसा करने से हाथ पैरों की जलन समाप्त हो जाएगी|
शरीर में थकान या कमजोरी महसूस हो रही है तो आप दूध में एक चम्मच गाय का घी और मिश्री को मिलाकर पीएं, कमजोरी दूर हो जाएगी|
अगर आप माइग्रेन के दर्द से पीड़ित है तो गाय के घी की 2 बूंदे सुबह व शाम नाक में डालें| आपको आराम मिलेगा|
गाय के घी के इस्तेमाल से शरीर का मोटापा नहीं बढ़ता क्यूंकि इसके सेवन से कोलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता|
गाय के घी के प्रयोग से व्यक्ति की शारीरिक व मानसिक ताकत बढ़ती है|
गाय के घी को नाम में डालने से एलर्जी की समस्या दूर हो जाती है|
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25.7.19

रूखी आँखें (ड्राय आई सिंड्रोम) के घरेलू उपचार


ऑंखे आपके प्रमुख अंगों में से एक है। यदि आपकी आंखें हवा या गर्मी के प्रति अति संवेदनशील है, और उनमें आसानी से खुजली और जलन हो जाती हैं, तो यह संभव है कि आप ऑंखों का सूखापन (Dry Eyes) से ग्रसित हो सकते है। जो बताता है कि आपको ड्राई ऑय सिंड्रोम (dry eyes syndrome) हुआ है।
ड्राई आई सिंड्रोम यानि आंखों में रूखापन होने की बीमारी एक आम स्वास्थ्य के मुद्दों में से एक है। बच्‍चे हो या बुजुर्ग कोई भी इससे वचिंत नहीं है। आजकल धूल- मिट्टी, प्रदूषण व गलत लाइफस्‍टाइल के साथ मोबाइल, कंप्यूटर और डिजिटल स्क्रीन गैजेट्स के ज्‍यादा उपयोग इसके पीछे का सबसे बड़े कारणों में शामिल है। आंखों में ड्राईनेस होने से आंखों में खुजली, जलन, आंखों से आंसू निकलना और बिना कारण के आंखों में थकान आदि आंखों के रूखेपन के मुख्‍य लक्षण हैं। ऐसे में बहुत से लोगों को टीवी देखते समय, फोन का इस्‍तेमाल करने और पढ़ने में दिक्‍कत होने लगती है।
यह सिंड्रोम तब होता है जब आंसू ग्रंथियां आंखों को चिकना या गीला करने के लिए पर्याप्त आँसू पैदा नहीं करती हैं। आंसू, आंखों के कार्निया एवं कन्जंक्टाइवा को नम और गीला रखता है, जिससे आंखें सूखती नहीं हैं। आंखों में टियर फिल्म पायी जाती है और इसके सबसे बाहरी परत को लिपिड या ऑयली परत कहते हैं। यह लिपिड या ऑयली परत आंसू के सूखने को कम करती है और आंखों को चिकनाई प्रदान करती है। लेकिन देर तक कंप्यूटर पर काम करने, मोबाइल फोन का ज्‍यादा इस्‍तेमाल और टीवी देखने के साथ लगातार एसी में रहने से आंखों की यह टियर फिल्म प्रभावित होती है, जो कि ड्राई आई सिंड्रोम का कारण बनते हैं। यदि आप आंखों में सूखेपन की समस्‍या से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो आप इन आसान घरेलू उपायों से राहत पा सकते हैं।
फैटी एसिड युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन
अध्ययनों के अनुसार, यदि आपको आंखों में रूखेपन की समस्‍या है, तो आपको ओमेगा -3 फैटी एसिड युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए क्योंकि यह आपको आंखों की इस समरूश में राहत देने में मदद कर सकता है। इन खाद्य पदार्थों के एंटीइंफ्लामेटरी गुण आंखों की सूजन व जलन को कम करने में मदद करते हैं। ओमेगा 3 से भरपूर खाद्य पदार्थों में अखरोट, फैटी फिश, चिया सीड्स और अंडे शामिल हैं, ऐसे में आप इन खाद्य-पदार्थों का सेवन कर सकते हैं।
एलोवेरा
एलोवेरा स्‍वास्‍थ्‍य के लिए कितना लाभदायक है, ये आप सभी जानते ही होंगे लेकिन क्‍या यह आपको आंखों के सूखेपन में भी राहत दिला सकती है? इसका जवाब है, हां। एलोवेरा में एल्‍कलाइन व एंटीइंफ्लामेटरी गुण होते हैं। जिसकी वजह से यह आपकी ड्राई आंखों की समस्‍या को दूर कर सकता है। एलोवेरा जेल एक मॉश्‍चराइजर के रूप में भी काम करता है। इयलिए आंखों की ड्राईनेस की समस्‍या होने पर आप नेचुरल एलोवेरा जेल का इस्‍तेमाल ही करें। आप एलोवेरा की पत्‍ती से जेल निकालें और अपनी आंखों की पुतली पर उंगली की मदद से लगाएं। इसके 5-10 मिनट के बाद आप इसे साफ कर दें।
मेकअप से दूरी व गुलाब जल का उपयोग
यदि आप आंखों का मेकअप करते हैं, तो आंखों में रूखेपन के दौरान आई मेकअप से दूरी बना लें। इसके अलावा, दिन भर का काम खत्‍म करने के बाद आप अपनी आंखों को आराम देने के लिए गुलाबजल का इस्‍तेमाल करें। कंप्‍यूटर पर लगातार काम करने से आपकी आंखे थक जाती हैं, इसके लिए आप गुलाब जल में कॉटन को भिगोकर अपनी आंखों के ऊपर 15 मिनट के लिए रख लें। ऐसा करने से आपकी आखों की ड्राईनेस दूर होगी। यदि आप रोजाना कंप्यूटर पर काम करते हैं, तो आप रोजाना अपनी आंखों की थकान मिटाने के लिए गुलाबजल का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। यह आपकी आंखों की नमी को वापस पाने के लिए फायदेमंद साबित हेागा।
आंखों के ड्राप या मलहम
शुष्‍क आंखों के उपचार के लिए आज बहुत से डॉक्‍टरी तरीके और दवाएं उपलब्‍ध है जो आपको राहत दिलाने में मदद कर सकते है। डॉक्‍टर द्वारा बताए गए ऑय ड्राप आपको अस्थायी राहत दिला सकते है। ध्‍यान रखने वाली बात यह है कि कुछ आंखों के ड्राप बचाव करने वाले पदार्थ (preservatives) होते है। ये आमतौर पर शीशीयों में कई बार उपयोग करने लायक मात्रा में आते है, जो शीशी खोले जाने के बाद बैक्‍टीरिया से प्रभावित होकर आपकी आंखों को भी संक्रमित कर सकते है। यदि आप एक दिन में चार बार से ज्यादा इसका उपयोग करते हैं, तो आपको संरक्षक मुक्त ड्राप का उपयोग करना चाहिए। संरक्षक मुक्त ड्राप (Preservative-free drops) आमतौर पर एकल खुराक शीशियों में आते हैं।
मरहम ड्राप से गाढ़े होते हैं और आंखों को ढंकने और सूखेपन से लंबे समय तक बचाते हैं। हांलांकि, जब आप उनका उपयोग कर रहे हों तो महलम आपकी द्रष्टि को धुंधला कर सकते हैं। सोने के समय से पहले उनका उपयोग करना सबसे अच्‍छा होता है।
गर्म सेक
आंखों की चिकनाई और आंसू की गुणवत्‍ता में सुधार लाने के लिए आंखों को गर्म सेक देना बेहद फायदेमंद व बेहतर विकल्‍प है। इसके लिए आप गुनगुना पानी लें और फिर काटन की मदद से अपने आंखों को सेक दें। ऐसा करने से आंखों की टियर फिल्म को फायदा मिलेगा और आपकी आंखों के सूखेपन से होने वाली एलर्जी जैसी सारी समस्‍याएं दूर हो जाएंगी।
पर्याप्त पानी और चीनी से दूरी
अध्ययनों के अनुसार, यदि आप आंखों के रूखेपन की समस्‍या से परेशान हैं, तो आप उस दौरान चीनी युक्त खाद्य पदार्थों से दूरी बना लें, यही आपके लिए बेहतर होगा। इसके अलावा, आप रोजाना 8-10 गिलास पानी जरूर पिएं। यहद आप ऐसा करते हैं, तो जल्‍द ही आपको इस समस्‍या से निजात मिलेगी।
अरंडी का तेल-
आपकी आंखों में जैविक अरंडी तेल (Organic castor oil) की एक या दो बूंदे डालें। शुद्ध कैस्‍टर ऑयल ना होने पर आप कास्‍ट ऑयल से बने स्‍नेहक आंखों के ड्राप का भी उपयोग कर सकते हैं। ऐसा आपको रोजाना 2-3 बार करना है।
यह क्‍यों काम करता है: शुष्‍क आंखों के लिए कास्‍टल तेल का उपयोग करना फायदेमंद है क्‍योंकि यह कास्‍ट प्‍लांट (Ricinus communis) के बीज दबाकर व्‍युत्‍पन्‍न होते हैं और इसमें ऐसिड अच्‍छी मात्रा में होते है। यह स्‍वाभाविक यप से स्‍नेहक गुण प्रदान करता है। इसमें विरोधी भड़काऊ (Anti-inflammatory) गुण भी होते है जो आंखों में सूखे जे जुड़ी जलन और खुजली को दूर करने में मदद करते है।
नारियल तेल
आपको चाहिए : कार्बनिक (organic virgin) नारियल तेल की कुछ बूंदें ।
आप अपनी आंखों में इस नारियल तेल की कुछ बूंदे डालें। और आपनी पलकों को झपका कर इस तेल को अवशोषित करने का प्रयास करें। अच्‍छे परिणाम पाने के लिए आप इसे सुबह और रात में उपयोग कर सकते है।नारियल तेल का उपयोग विभिन्‍न उद्देश्‍यों को पूरा करने के लिए किया जाता है। इसमें कैप्रिक ऐसिड और लॉरिक एसिड (capric and lauric acid) जैसे फैटी ऐसिड होते हैं, जो आपकी त्‍वचा और बालों के लिए फायदेमंद होते हैं। ये भी अत्यधिक नमी और एंटी-इन्फ्लामेट्री होते हैं, इसलिए इसका उपयोग आपकी शुष्‍क और खुजली वाली आंखों में तुरंत राहत दिलाने में मदद करते है।
ककड़ी से
आप अपनी शुष्‍क आंखों का उपचार ककड़ी से कर सकते है। इसके लिए आप ककड़ी को गोल आकार में काट लें। तुरंत आराम पाने के लिए अपनी आंखों को बंद कर उनके ऊपर ककड़ी के काटे गऐ तुकड़ों को रखें। अपनी आंखों को आराम दिलाने और उन्‍हें स्‍वस्‍थ्‍य रखने के लिए ऐसा दिन में 2-3 बार कर सकते हैं।
खीरा (Cucumber) शुष्‍क आंखों के उपचार के सबसे अच्‍छा और आसान उपचार हैं। ककड़ी में पानी पर्याप्‍त मात्रा में होता है जो आपकी आंखों को शांत करने में मदद करता है। ककड़ी में विटामिन ए भी होता है, जो सूखी आंखों के उपचार में लाभकारी होता है।
सौंफ की चाय
एक कप पानी में एक चम्‍मच सौंफ डालकर इसे 10-15 मिनिट तक उबालें। थोड़ा ठंडा होने के बाद इस गर्म चाय में सूती कपड़े को भिगों कर अपनी आंखों में रखें। और इसे कम से कम दस मिनिट के लिए छोड़ दें। आपको ऐसा प्रतिदिन 2-3 बार करना चाहिए।
सौंफ के बीज में एंथोल (anethole), एक कार्बनिक यौगिक होता है। जो एंटी-इन्फ्लामेट्री और सुखदायक गुण प्रदान करता है। सौंफ के बीज की एंटी-इन्फ्लामेट्री गतिविधियां सूजन और चिड़चिड़ापन को कम करने में मदद कर सकती हैं, आपकी आंखों में नमी को बनाए रखने के लिए इसके गुणों का उपयोग किया जा सकता है।
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