2017-09-17

खांसी मे तुरंत आराम करने के उपचार


मौसम बदलते ही, हर घर में सर्दी या जुकाम का होना एक आम बात हो जाती है। वातावरण में मौजूद वायरस, बदलते मौसम में काफी सक्रिय हो जाता है, जिसके कारण जुकाम या सांस की अन्य बीमारियां होती हैं. सामान्य ज़ुकाम के लिए कोई इलाज नहीं है, लेकिन इसके लक्षणों का इलाज किया जा सकता है। यह, मनुष्यों में सबसे अधिक होने वाला संक्रामक रोग है। औसत वयस्क को प्रतिवर्ष दो से तीन बार ज़ुकाम होता है। औसत बच्चे को प्रतिवर्ष छह से लेकर बारह बार ज़ुकाम होता है। लेकिन शुरुआत में ही अगर कुछ घरेलू उपाय कर लिए जाएं तो इस पर आसानी से काबू पाया जा सकता है। तो आइये जानते है कुछ घरेलु और आसान उपाय।
*अदरक -
अदरक को १ ग्लास पानीमे १/२ रहने तक उबाल ले और उसमे १ चम्मच शहद मिलाकर पिये।
अदरक के छोटे छोटे टुकड़े करके १ उसे दिनभर चूसते रहे आराम मिलेगा।
*लहसुन -
१ कप पानी में ३-४ लहसुन की कलियों को उबाल ले और ठंडा होनेपर इसमें १ चम्मच शहद मिलाकर ले।
. प्याज -
१/२ चम्मच प्याज का रस और १/२ चम्मच शहद मिलाकर लेने से खांसी में आराम मिलता है।
*चाय -
चाय में १/२ चम्मच हल्दी , १/२ चम्मच काली मिर्च पाउडर , तुलसी की कुछ पत्तियाँ और अदरक मिलाकर पिने से काफी हदतक आराम मिलता है।
* गाजर -
१ कप गाजर के ज्यूस में १ चम्मच शहद मिलाकर दिन में ३-४ बार ले।
*बादाम -
४-५ बादाम को रात में पानी में भिगोंकर सुबह इसका पेस्ट बनाये और १ चम्मच बटर में मिलाकर रोज सुबह -शाम जब तक आपको आराम न हो तबतक लेते रहे।
३. तुलसी -
तुलसी के रस में अदरक का रस और शहद मिलाकर लेने से भी खांसी में राहत मिलती है।
.* काली मिर्च -
काली मिर्च कफ में बहोत आराम देती है। इसे पीसकर १ चम्मच घी में १/४ मिलाकर लेने से बहोत जल्दी आराम मिलता है।
कुनकुने दूध में भी इसे मिलाकर पिने से खांसी में राहत मिलती है।

2017-09-13

प्रोस्टेट बढ़ने पर आपरेशन जरूरी नहीं ,करें ये उपचार



प्रोस्टेट ग्रन्थि एक बहुत ही छोटी ग्रन्थि होती है | इस ग्रन्थि का आकार एक अखरोट की भांति होता है | यह ग्रन्थि पुरुषों में पाई जाती है | यह पुरुषो के मूत्राशय के नीचे मुत्र्नाली के पास होती है | इसमें पुरुषों के सेक्स हार्मोन्स की एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है | जब किसी भी पुरुष की आयु 50 साल की हो जाती है या इससे उपर हो जाती है तो इस ग्रन्थि का आकार बढ़ने लगता है | जैसे – जैसे प्रोस्टेट ग्रन्थि बढती है , इसका सीधा प्रभाव मूत्र नली पर पड़ता है | मूत्र नली का दबाव बढ़ता है जिसके कारण पेशाब के रुकावट की स्थित बन जाती है | जब यह स्थिति बन जाती है | तब पेशाब रुक –रुक कर एक पतली दार में और थोड़ी – थोड़ी मात्रा में आता है | कभी – कभी तो पेशाब टपक – टपक कर आता है और जलन होती है | कभी – कभी तो रोगी अपने मूत्र के वेग को रोक नही पाता है | जिससे रोगी को रात के समय में भी पेशाब करने के लिए नींद से उठाना पड़ता है | इस रोग का अधिक प्रभाव लगभग 60 से ७० साल की उम्र मे हो जाता है | इस उम्र तक जाते – जाते यह रोग और भी उर हो जाता है | इस रोग में पेशाब पूरी तरह से रुक जाने की संभावना भी बन जाती है | ऐसी अवस्था में रोगी को किसी अच्छे डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए | डॉक्टर एक केथेटर नली लगाकर यूरिन बैग में मूत्र करने की व्यवस्था कर देते है | इस रोग का प्रकोप लगभग 50 % पुरुषों में देखने को मिलता है | यह रोग मनुष्य को 60 साल की उम्र के बाद होने लगता है | और समय बीतने के साथ – साथ इस रोग और भी प्रबल हो जाता है | 80 साल से 90 साल तक रह रोग पेरी तरह से व्यक्ति को जकड़ लेता है | जब किसी व्यक्ति की प्रोस्टेट ग्रन्थि बढ़ जाती है तो इसके बारे में कैसे मालूम करते है | इसके क्या लक्षण होते है | इस बात की जानकारी हम आपको दे रहे है |
प्रोस्टेट ग्रन्थि के बढ़ने के लक्षण :-
मूत्र करने में कठनाई महसूस करना |
पेशाब की धार चालू होने में देरी लगना |
रात के समय उठ – उठकर पेशाब के लिए जाना |
थोड़ी – थोड़ी मात्रा में पेशाब का आना
मूत्राशय का पूरी तरह से खाली ना होना | इस रोग में मूत्राशय में थोड़ी सा मूत्र शेष रह जाता है | इस इक्कठे हुए मूत्र में रोगाणु जन्म लेने लगते है | इसके कारण किडनी खराब होने लगती है |
पेशाब करने के बाद पेशाब की बुँदे टपकती रहती है | इसके आलावा आप अपने मूत्र पर काबू भी नही पा सकता है |
इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को हमेशा यह लगता है कि उसे पेशाब आया है | लेकिन बाथरूम जाने के बाद पेशाब रुक रुककर आता है |
पेशाब में जलन होती है |
संभोग करते समय बहुत दर्द होता है और वीर्य भी निकलता रहता है |
प्रोस्टेट ग्रन्थि के बढ़ने से अंडकोष में दर्द भी होता है |
इस रोग को ठीक करने के लिए आज के समय में भी कोई औषधी नही बनी है | इस रोग का कोई भी सफल इलाज नही है | इस रोग से पीड़ित रोगी को ओपरेशन करने की सलाह दी जाती है | इस बीमारी से छुटकारा पाने के लिए ओपरेशन में बहुत पैसे खर्च करने पड़ते है | लेकिन फिर भी यह रोग दोबारा हो सकता है | मैं अपने दीर्घ चिकित्सा अनुभव के आधार पर कुछ बहुत ही असरदार आयुर्वेदिक घरेलू उपचार यहा लिख देता हूँ |इन उपायों के चलते आप आपरेशन की त्रासदी से बच जाएँगे|
   *एक दिन में कम से कम 3 से 4 लीटर पानी पीना चाहिए | परन्तु शाम के समय अपनी जरूरत के अनुसार ही पानी पीयें | ऐसा करने से रात के समय पेशाब करने के लिए बार – बार नही उठना पड़ेगा |
*अलसी के बीजों को अच्छी तरह से पीसकर उसका पावडर बना लें | इस पावडर को रोजाना 15 ग्राम की मात्रा में पानी एक साथ घोलकर पीने से इस रोग को लाभ मिलता है | यह एक असरदार उपाय है |
*कद्दू में जिंक की मात्रा अधिक होता है | कडू के बीजों को तवे पर अच्छी तरह से सेंक लें | भुने हुए बीजों को पीसकर उसका पावडर बना लें | इस पावडर की 15 से 20 ग्राम की मात्रा को रोजाना पानी के साथ खाएं | इस उपचार को करने से रोगी का मूत्र खुलकर आने लगता है |
*जिस भोजन में वसा की मात्रा अधिक हो या जो भोजन चर्बी को बढ़ाने वाला हो उस भोजन से परहेज करें | विशेष तौर पर मांस का सेवन बंद कर दें |


*कैफीन युक्त चीजों का उपयोग ना करें | चाय और कॉफ़ी में अधिक कैफीन होता है | जो प्रोस्टेट ग्रन्थि की तकलीफ को और भी बढ़ा देता है | केफीन का प्रयोग करने से मूत्राशय की ग्रीवा कठोर हो जाती है | जो इस रोग के लिए हानिकारक होता है |
*जो व्यक्ति इस रोग से पीड़ित है उसे अपना चेकअप करवाते रहना चाहिए | ताकि यह रोग आगे और ना बढ़ सके 
*इस रोग में रोगी को सोयाबीन का सेवन करना चाहिए | क्योंकि सोयाबीन में कुछ ऐसे तत्व होते है जो हमारे शरीर में टेस्टोंस्टोरन के लेवल को कम करता है | इसलिए हमे रोजाना लगभग 35 से 40 ग्राम सोयाबीन के बीजों को गलाकर खाना चाहिए | यह एक बहुत ही अच्छा उपाय है |
*रोगी को विटामिन सी का अधिक प्रयोग करना चाहिए | इसका सेवन करने से खून संचार की नलियाँ स्वस्थ रहती है और अच्छी तरह से कार्य करती है | इसलिए रोगी को प्रतिदिन विटामिन सी की एक गोली का सेवन करना चाहिए |
*जो लोग इस रोग से पीड़ित है , उन्हें रोजाना दो टमाटर का सेवन करना चाहिए | यदि रोजाना नही खा सकते तो हफ्ते में कम से कम 3 से 4 बार अवश्य खाएं | इस उपाय को करने से प्रोस्टेट ग्रन्थि में होने वाला कैंसर नही होता है | टमाटर में लायकोपिन नामक तत्त्व होता है जो कैंसर की रोकथाम करने के लिए बहुत ही आवश्यक होता है |
*जो लोग इस रोग से पीड़ित है उन्हें नियमित समय के अन्तराल पर सेक्स करना  उचित है|इससे प्रोस्टेट ग्रंथि ठीक रहती है | रोगी व्यक्ति हो या स्वस्थ व्यक्ति दोनों को ही ना तो सेक्स अधिक करना चाहिए और ना ही कम करना चाहिए | महीने में कम से कम 4 से 6 बार सेक्स करे | इससे दोनों का स्वास्थ्य ठीक रहता है |


विशिष्ट परामर्श-


प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने मे हर्बल औषधि सर्वाधिक कारगर साबित हुई हैं| यहाँ तक कि लंबे समय से केथेटर नली लगी हुई मरीज को भी केथेटर मुक्त होकर स्वाभाविक तौर पर खुलकर पेशाब आने लगता है| प्रोस्टेट ग्रंथि के अन्य विकारों मे भी हितकारी है|प्रोस्टेट केंसर की नोबत  नहीं आती|आपरेशन  से बचाने वाली जड़ी -बूटियों से निर्मित औषधि हेतु वैध्य श्री दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क कर सकते हैं|


2017-09-10

स्तनों को सुंदर सूडोल बनाने के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपाय // Home remedies for beautiful chest




   सुडौल व उन्नत वक्ष आपके सौन्दर्य में चार-चाँद लगा सकते है. इस बात में कोई दोराय नहीं है की सुन्दर एवम् सुडौल वक्ष प्रक्रति की देन है परन्तु फिर भी उनकी उचित देखभाल से इन्हें सुडौल व गठित बनाया जा सकता है. इससे आपके व्यक्तित्व में भी निखार आ जाता है. अधिकतर महिलाये अपने छोटे ब्रैस्ट को विकसित करना चाहती है उनके लिए दिए गये घरेलु नुस्खे काफी कारगर सिद्ध होंगे. अविकसित वक्ष न तो स्त्री को ही पसंद होते है न ही उनके पुरुष साथी को.
*कुछ स्त्रियां अपने घर में बिल्कुल मेहनत का काम नहीं करती इस वजह से उनकी छाती के क्षेत्र में ब्लड का सरकुलेशन सही तरीके से नहीं हो पाता और उनके वक्षों का साइज़ छोटा रह जाता .हैं छोटे स्तनों को सुडौल व आकर्षक बनाने के लिए अगर हो सके तो आप किचन में मसाला पीसने या चटनी पीसने के लिए मिक्सर का प्रयोग ना करते हुए सिल-बट्टे का प्रयोग करें स्तनों को बढ़ाने के लिए यह एक प्रकार की बहुत ही अच्छी एक्सरसाइज है.
*स्तनों को उचित आकार देने के लिए अपने दोनों हाथों पर को दीवार पर रखे और इस तरह जोर लगाएं जैसे आप दीवार को धक्का दे रहे हों. और ध्यान रखें कि आप की कोहनी दीवार में धक्का या जोर लगते समय बिल्कुल सीधी होना चाहिए. और आप इस तरह से लगभग रोजाना 5 मिनट की एक्सरसाइज कर लिया करें ऐसा करने से आपको एक महीने में ही फर्क दिखने लगेगा.
*वक्षों का आकार सही न रहने के पीछे अनेक कारण हो सकते है. किसी लम्बी बीमारी से ग्रसित होने के कारण भी वक्ष बेडौल हो सकते है, इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान तथा प्रसव के बाद भी स्तनों का बेडौल हो जाना एक आम बात है. ऐसी अवस्था में स्त्रियों के लिए उचित मात्रा में पौष्टिक व संतुलित आहार लेना अति आवश्यक हो जाता है. उनके भोजन में प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, विटामिन्स, मिनरल्स तथा लौह तत्व भरपूर मात्रा में होने चाहिए. इसके साथ साथ ऐसी स्त्रियों को अपने स्तनों पर जैतुन का लगाकर मालिश करनी चाहिये. ऐसा करने से स्तनों में कसाव आ जाता है. मालिश करने की दिशा निचे से उपर की ओर होने चाहिए.
*मालिश करने के बाद ठन्डे व ताज़े पानी से नहाना उचित रहेगा. ऐसा करने से न केवल वक्ष विकसित व सुडौल होने लगेंगे इसके अलावा आपके रक्त संचार की गति में भी तीव्रता आयगी.
वक्ष सौन्दर्य के लिए कुछ सरल उपाय व व्यायाम:-
* सबसे पहले घुटनों के बल बैठ जाए और दोनों हाथों को सामने लाकर हथेलियों को आपस में मिलाकर पुरे बल से आपस में दबाएँ जिससे स्तनों की मांसपेशियों में खिंचाव होगा. फिर इसके बाद धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए अपनी हथेलियों को ढीला कर दें. इस प्रक्रिया को नियमित रूप से १० से १५ बार करे. ( वक्षों को नहीं दबाना ह२. इसके अलावा दोनों हाथों को सामने की ओर फैलाते हुए हथेलियों को दिवार से सटाकर पांच मिनट तक दीवारे पर दबाव डालें. ऐसा करने से वक्ष की मांसपेशियों में खिचांव होगा, जिससे वक्ष पुष्ट हो जायंगे.
*घुटनों के बल चौपाया बन जाए, फिर दोनों कोहनियों को थोडा-सा मोड़ते हुए शारीर के उपरी भाग को निचे की ओर झुकाएं.
अपने शरीर का पूरा भार निचे की ओर डाले. तथा पुनः प्रथम अवस्था में आ जाए. इस व्यायाम को ६ से ८ बार दोहराएँ.
* आप व्यायाम के अलावा एक नुस्खे को अपनाकर भी ढीले पड़े स्तनों में कसावट लाई जा सकती है. इसके लिए अनार के छिलकों को छाया में सुखा लें. फिर इन सूखे हुए छिलको का महीन (बारीक़) चूर्ण बना लें, अब इस चूर्ण को नीम के तेल में मिलाकर कुछ देर के लिए पका लें. फिर इसे कुछ देर ठंडा होने के लिए छोड़ दें, ठंडा हो जाने के बाद दिन में एक बार इस लेप को वक्षों पर लगायें और तकरीबन एक से दो घंटा लगे रहने के बाद इस लेप को सादे पानी से साफ़ कर लें. इसके नियमित उपयोग से कुछ दी दिनों में आपको लाभ अवश्य दिखने लगेगा.
*जो स्त्रियाँ बच्चों को स्तनपान कराती है उन स्त्रियों को अपने वक्षों को देख-रेख की ओर और अधिक ध्यान देने की आवश्कता होती है. क्युकि बच्चों को स्तनपान कराने से स्तनों में ढीलापन आ जाता है. इसके अलावा उनके लिए कुछ बातों की और ध्यान देना भी जरूरी होता है. उन्हें कभी भी बच्चों को लेटकर स्तनपान नहीं कराना चाहिए, हमेशा बैठकर ही बच्चों को दूध पिलाना चाहिए. साथ ही इस बात का भी विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए कि स्तनपान करने के लिए दोनों स्तनों का बारी-बारी से उपयोग करना चाहिए. ऐसा न करने से वक्षों के आकार में भिन्नता आ जाती है. जिससे आपके सम्पूर्ण सौन्दर्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.
*स्तनों का आकार बढ़ाने के लिए तिल भी एक बहुत अच्छा विकल्प है अपने ब्रेस्ट को सही साइज देने के लिए आप तिल को थोड़ी मात्रा में रोज खाएं और यदि संभव हो तो इसके तेल से अपने स्तनों पर रोज़ाना मालिश करें. एस करने से भी बहुत जल्दी फायदा होता है. तिल में कैल्शियम प्रोटीन और फास्फोरस प्रचुर मात्रा में पाया जाता है और यह आपके वक्ष का आकार बढ़ाने में मदद करता है.
*अगर आप शारीरिक रूप से भी कमजोर हैं तो आप ऐसा खाना खाएं जिसमें शक्कर की मात्रा ज्यादा हो और यह आपके शरीर को भी सुडौल बनाएगी और आपके स्तनों को भी.
*वॉशिंग मशीन की जगह कपड़े अपने हाथों से रगड़ रगड़ कर धोने से से भी आपके चेस्ट की एक्सरसाइज होती है और फल स्वरुप आपके ब्रेस्ट का साइज सही हो जाता है.
*आप अपने घर में सफाई के लिए जो झाड़ू लगाती हैं उसमें भी आपके ब्रेस्ट की एक्सरसाइज होती है. अगर आप अपने घर में झाड़ू नहीं लगातीं तो आज ही खुद अपने घर की झाड़ू देना शुरू कर दें इससे आपकी एक्सरसाइज भी हो जाएगी और आपके ब्रेस्ट के लिए भी ये फायदेमंद साबित होगा.
*अपने ब्रेस्ट को सही आकार देने के लिए आप स्वास्थ्यवर्धक वसा का अच्छे से सेवन करें, ऐसा करने से आपके स्तनों का आकार बढ़ने की संभावना बन जाती है स्वास्थ्यवर्धक वसा जैसे कि अंडे, पनीर, बटर, नाशपाती, घी इस तरह की चीजें जिन में वसा की मात्रा अधिक होती है और यह आपके स्तनों तक सीधा पहुंचता है और उनका आकार प्राकृतिक रूप से सही होना शुरू कर देता है.
स्तनों का आकार बढ़ाने में प्याज का प्रयोग
स्तनों का आकार बढ़ाने में प्याज का प्रयोग आप घरेलू नुस्खे के तौर पर कर सकती हैं प्याज के रस में थोड़ी हल्दी और शहद मिला लें और रात को सोते समय अपने दोनों स्तनों पर उसको मॉल लें, और अगली सुबह उठकर इन्हे ठंडे पानी से धो लें इसके प्रयोग से आपके ढीले लटके हुए स्तन एकदम टाइट हो जाते हैं और अगर आपके स्तनों का आकार सामान्य से छोटा है तो यह उन को सुडौल बनाने में बड़ा करने में आपके लिए काफी लाभकारी साबित हो सकता है. वक्षों को कैसे बढ़ाएं यह प्रयोग थोड़ा मुश्किल इसीलिए हो सकता है क्योंकि रात में आपको प्याज के रस की गंध का सामना करना पड़ता है.
*अगर आपका वजन ज्यादा नहीं है तो आप रोजाना बिना नागा किए नियमित रूप से दो केले खा लिया करें आपके स्तनों का आकार आकर्षक बनाने के लिए केले से सस्ता और आसान उपाय कोई दूसरा नहीं है. इसमें वसा की मात्रा बहुत अधिक होती है और यह आपके स्तनों को बढ़ाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है और अगर आप दुबली-पतली हैं तो यह आपके शरीर को भी सुडौल बनाने में मदद करता है

2017-09-02

मैग्नीशियम के स्वास्थ्य लाभ और उपचार


मैग्नीशियम क्या है-

मैग्नीशियम आपके शरीर को सुचारू रूप से चलाने के लिए जरूरी होता हैं। शरीर की मजबूती और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए इसकी बहुत ही जरूरत होती है। यदि शरीर में मैग्नीशियम की कमी हो तो बॉडी में थकान महसूस होने लगती है तथा जोड़ों में दर्द और त्वचा संबंधित समस्या का सामना करना पड़ता है। तो आइए जानते हैं कि शरीर में मैग्नीशियम को कैसे बढ़ाया जाए।
मैग्नीशियम एक प्रकार का रासायनिक तत्व है जो शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है। यह कैल्शियम और बेरियम की तरह एक क्षारीय तत्व है। मैग्‍नीशियम आदमी के शरीर में पाए जाने वाले पांच प्रमुख तत्वों में से एक है।
पूरे शरीर का आधे से अधिक मैग्नीशियम हमारी हड्डियों में पाया जाता है जबकि बाकी शरीर में हाने वाली अन्‍य जैविक क्रियाओं में सहयोग करता है। आमतौर पर एक स्वस्थ खुराक में मैग्‍नीशियम की पर्याप्त मात्रा होनी अनिवार्य है। मैग्‍नीशियम की अधिकता से डायरिया और कमी से न्यूरोमस्कुलर की समस्या हो सकती है। यह हरी सब्जियों में के साथ सूखे मेवे में पाया जाता है। इस लेख में जानिए मैग्‍नीशियम के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ के बारे में।
हाइपरटेंशन मे लाभ -
मैग्‍नीशियम रक्‍तचाप को विनियमित करने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है, यह हाइपरटेंशन से बचाव करता है। इसलिए रक्‍तचाप को सुचारु करने के लिए ताजे फल और हरी सब्जियों का सेवन कीजिए।
आस्टियोपोरोसिस से बचाव-
यदि हड्डियों में मैग्‍नीशियम की कमी हो गई तो इसके कारण हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस की संभावना भी बढ़ जाती है। पूरे शरीर का आधे से अधिक मैग्नीशियम हमारी हड्डियों में पाया जाता है। कई शोधों में भी यह बात सामने आयी है कि मैग्‍नीशियम हड्डियों की बीमारी खासकर आस्टियोपोरोसिस से बचाता है।
दिल के लिए उपयोगी -
मैग्‍नीशियम दिल के लिए बहुत फायदेमंद है। कोरोनरी हार्ट डिजीज से बचाव के लिए मैग्‍नीशियम का सेवन कीजिए। यदि शरीर में मैग्‍नीशियम की कमी हो जाये तो दिल के दौरे का खतरा अधिक होता है। इसलिए दिल को मजबूत बनाने के लिए मैग्‍नीशियम का सेवन भरपूर मात्रा में कीजिए।
याददाश्‍त करे तेज-
खाने में यदि मैग्‍नीशियम की पर्याप्‍त मात्रा है तो इससे याददाश्‍त मजबूत होती है। विज्ञान पत्रिका न्यूरॉन में छपे एक शोध के अनुसार, याददाश्त को बढ़ाने के लिए मैग्नीशियम की मात्रा बढ़ाना कारगर उपाय हो सकता है। मैग्नीशियम मस्तिष्क सहित शरीर के अनेक ऊतकों के सही ढंग से काम करने के लिए अनिवार्य है। इसलिए याददाश्‍त की क्षमता को बढ़ाने के लिए मैग्‍नीशियम का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।
मधुमेह से बचाव-
एक शोध में यह बात सामने आयी है कि यदि शरीर में मैग्‍नीशियम की कमी हो जाये तो इसके कारण टाइप-2 डायबिटीज होने की संभावना अधिक होती है। इसलिए यदि मधुमेह जैसी खतरनाक बीमारी से बचना है तो मैग्‍नीशियमयुक्‍त आहार का सेवन अवश्‍य कीजिए।
मैग्नीशियम के स्रोत
खजूर-
खजूर पौष्टिक होने के साथ-साथ बहुत ही स्वादिष्ट होते हैं। सर्दियों का मेवा कहे जाने वाला खजूर न केवल स्वास्थ्य को दुरुस्त करता है बल्कि कई रोगों को भी भगाता है। जिनके शरीर में मैग्नीशियम की कमी है उन्हें खजूर का सेवन करना चाहिए। 100 ग्राम खजूर में लगभग 43 मिलीग्राम मैग्नीाशियम पाया जाता है। खजूर एक ऐसा फल जो मधुर, शीतल, पौष्टिक और तुरंत शक्ति देने वाला आहार है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस आदि प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
 केला-

केले के सेवन से घटती पोटेशियम की मात्रा संतुलित होने लगती है। इससे शरीर में पानी का स्तर भी नियमित होता है। केले के सेवन के फलस्वरूप मानसिक तनाव से राहत और शरीर को मजबूती मिलती है। यही नहीं, केले में पोटेशियम के अलावा मैग्नीशियम भी पाया जाता है। यदि आप एक केले का सेवन करते हैं तो उसमें 30 से 32 मिलीग्राम मैग्नीशियम पाया जाता है जो शरीर के लिए काफी लाभदायक माना जाता है। इससे शरीर की धमनियों में खून पतला रहने के कारण खून का बहाव सही रहता है।
बादाम-
आपको बता दें कि एक बार बादाम खाने से शरीर को लगभग 75 मिलीग्राम मैग्नीतशियम मिलता है। मैग्नीशियम के अलावा बादाम में विटामिन और मिनरल्स जैसे जिंक, कैल्शियम, विटामिन ई और ओमेगा- 3 फैटी एसिड से भरपूर मात्रा में पाया जाता है। आप रात को बादाम को भिगोकर प्रतिदिन 5 खा सकते हैं।
सोयाबीन-
सोयाबीन का नियमित रूप से सेवन करने न केवल शारीरिक वृद्धि होती है बल्कि कब्ज दूर होता है और दूसरी बीमारियां दूर भागती हैं। इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन, मिनरल और एमिनो एसिड उच्च मात्रा में पाया जाता है। सोयाबीन मैग्नीशियम की कमी को पूरा करता है। इसे भिगोकर अंकुरित करके खाने से भी काफी लाभ होता है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली को बनाए स्वेस्थ बनाये रखने, दिल की धड़कन को सामानय बनाये रखने, हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाये रखने में मदद करता है।
पालक-
पालक डायबटीज और कैंसर के रोगियों के लिए बहुत गुणकारी सब्जी है। यदि आप नियमित रूप से पालक का सेवन करते हैं तो इससे न केवल आपकी आयरन की कमी पूरी होगी बल्कि शरीर को मैग्नीशियम भी प्राप्त होगा।
अलसी-
वजन कम करने में, बालों और त्वचा के लिए, सर्दी, फ्लू, पाचन तंत्र, उच्च रक्तचाप आदि के उपचार में अलसी बहुत ही काम आता है। इसलिए इसे बहुमुखी सुपर आहार का नाम दिया जाता है। इसके अलावा आप एक चम्म च अलसी से दैनिक जरूरत के अनुसार 39 मिलीग्राम मैग्नीमशियम की पूर्ति कर सकते हैं। मैग्नीशियम के अलावा इसमें विटामिन बी, ओमेगा-3 फैटी एसिड एवं कैल्शियम, कॉपर, आयरन, जिंक, पोटेशियम आदि पाये जाते हैं।
मछली-
शरीर में मैग्नीशियम की कमी को पूरा करने के लिए सप्ताह में कम से कम एक मछली का सेवन करना चाहिए। विटामिन डी, विटामिन बी -12, ओमेगा-3 फैटी एसिड और मैग्नीाशियम से भरपूर मछली में दैनिक आहार के लिए मैग्नीसशिम की लगभग 53 मिलीग्राम और 367 कैलोरी होती है।
दही-
अगर कोई हड्डियों और ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या से ग्रसित है उसे रोजाना दही का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा दही के सेवन से कैल्शियम और मैग्नी शियम दोनों पर्याप्तस मात्रा में शरीर में पहुंच जाते हैं। इसलिए इसका सेवन करना चाहिए।

2017-09-01

नीचे के बाल हटाने के उपाय /How to Clean the hair of private parts


      सामान्यतः महिलायों का यें मानना होता है कि गुप्तांगों या बगलों या फिर पुरे शरीर के बाल बेकार अर्थात् अवांछित होते है, विशेषकर जब बात फैशन की हो, परन्तु वास्तविकता कुछ और है, वास्तव में यें बाल हमारे कोमल अंगों की सुरक्षा का काम करते है. बगलों के बाल सर्दियों में उसके आस-पास की त्वचा को गर्मी प्रदान करते है. गर्मियों में बगल में पसीना अपेक्षाकृत ज्यादा आता है क्यूंकि पुरे दिन में हमारे द्वारा हाथ या बांह का प्रयोग/संचालन ज्यादा होता है. यें बाल पसीना सोखने का भी काम करते है. अत: ऐसा मानना गलत होगा कि हमारे शरीर पर इनका कोई उपयोग या काम नहीं है. पसीने के कारण हाथों के आस-पास की त्वचा में दुर्गन्ध रम जाती है, जिससे ना केवल हमे बल्कि हमारे साथ रहने वालों को भी परेशानी होती है और सामने वाले पर हमारा अच्छा प्रभाव नहीं पड़ता. इसीलिए आवश्यक है कि रोजाना नहाते समय बगल को भी साबुन लगाकर अच्छे से साफ़ करें ताकि बगल में मैल व दुर्गन्ध बसी न रहे.
यदि गुप्तांग की बात की जाए तो यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि यहाँ की त्वचा कितनी कोमल होती है. गुप्तांग की नाजुकता व कोमलता किसी से छुपी नहीं है. यहाँ पर हलकी सी चोट लगने पर भी व्यक्ति के प्राणों पर बन आती है, अर्थात व्यक्ति के प्राण भी ले सकती है. इसलिए गुप्तांग की सुरक्षा के लिए ही प्रक्रति ने इस पर बालों की गद्दी बनाई है, जो हमारे गुप्तांगों की रक्षा करते है. हाँ, गर्मियों के दिनों में पसीने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है, ऐसे में इस परेशानी के बचने के लिए आप इन बालों को साफ कर सकती है. परन्तु गुप्तांगो के बाल साफ करने के लिए आप हेयर रेमुविंग क्रीम का ही प्रयोग तो अधिक बेहतर होगा|



2017-08-31

दिल की गति तेज होने के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार


तेजी से दिल धड़कने के घरेलु नुस्खे इस प्रकार हैं: -
प्याज और सेंधा नमक-
दो चम्मच प्याज के रस में सेंधा नमक मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें|
गाय का दूध, किशमिश और बादाम
गाय के दूध में किशमिश तथा बादाम डालकर औटाएं| फिर शक्कर डालकर सहता-सहता घूंट-घूंट पी लें|
गुलाब, धनिया और दूध-
गुलाब की पंखुड़ियों को सुखाकर पीस लें| फिर इसमें धनिया का चूर्ण समभाग में मिलाएं| एक चम्मच चूर्ण खाकर ऊपर से आधा लीटर दूध पिएं|
अनार-
अनार के कोमल कलियों की चटनी बनाकर एक चम्मच की मात्रा में सुबह के समय निहार मुंह खाएं| लगभग एक सप्ताह सेवन करने से दिल की धड़कन सही रास्ते पर आ जाती है|
सेब, पानी और मिश्री-
200 ग्राम सेब को छिलके सहित छोटे-छोटे टुकड़े करके आधा लीटर पानी में डाल दें| फिर इस पानी को आंच पर रखें| जब पानी जलकर एक कप रह जाए तो मिश्री डालकर सेवन करें| यह दिल को मजबूत करता है
बेल और मक्खन-
बेल का गूदा लेकर उसे भून लें| फिर उसमें थोड़ा-सा मक्खन या मलाई मिलाकर सहता-सहता लार सहित गले के नीचे उतारें|
अंगूर-
भोजन के बाद चार चम्मच अंगूर का रस पिएं|
पिस्ता-
पिस्ते की लौज खाने से हृदय की धड़कन ठीक हो जाती है|
आंवला और मिश्री-
आंवले के चूर्ण में मिश्री मिलाकर एक चम्मच की मात्रा में भोजन के बाद खाएं| यह दिल की धड़कन सामान्य करता है| इससे रक्तचाप में भी लाभ होता है क्योंकि दिल की धड़कन तेज होने पर रक्तचाप भी बढ़/घट जाता है|
सेब, कालीमिर्च और सेंधा नमक-
आधे कप सेब के रस में चार कालीमिर्च का चूर्ण तथा एक चुटकी सेंधा नमक मिलाकर सेवन करें|
गाजर-
आधा कप गाजर का रस गरम करके प्रतिदिन दोपहर के समय पिएं|
टमाटर और पीपल-
टमाटर के रस में पीपल के पेड़ के तने की छाल का 4 ग्राम चूर्ण मिलाकर सेवन करें| टमाटर के रस की मात्रा आधा कप होनी चाहिए|दिल धड़कने पर जरा-सा कपूर जीभ पर रखकर चूसें|



2017-08-26

नस पर नस चढ़ना के कारण,लक्षण ,उपचार


      नस पर नस चढ़ना (Muscle Note, Neuro Muscular Disease) एक आम समस्या बन चुकी हैं. क्या आप जानते है कि इस बीमारी के क्या नुक्सान हो सकते हैं. कई बार रात को सोते समय टांगों में एंठन की समस्या होती है. ये नस पर नस चढ़ने के कारण ही होता है. इस रोग में टांगों तथा पिंडलियों में हल्का दर्द महसूस होता है. इसमें पैरों में दर्द, जलन, पैर सुन्न होना, झनझनाहट तथा सुई चुभने जैसा महसूस होता है.
हमारे शरीर में जिन जिन जगहों पर रक्त प्रवाह हो रहा है. उसके साथ साथ बिजली भी प्रवाहित की जा रही है. इसे हम बायो इलेक्ट्रिसिटी कहते हैं. रक्त हमारी धमनियों तथा शिराओं (arteries and veins) में बहता है. जबकि करंट तंत्रिकाओं (nerves) में चलता रहता है. शरीर के जिस हिस्से में रक्त नहीं पहुंच पाता शरीर का वह हिस्सा सुन्न हो जाता है. तथा उन मांसपेशियों पर नियंत्रण (loss of muscle control) नहीं रहता है. उस स्थान पर हाथ रखने पर ठंडा लगता है.
    इसी प्रकार शरीर के जिस हिस्से में बायो इलेक्ट्रिसिटी (bio-electricity) नहीं पहुंच रही है. शरीर के उस हिस्से में दर्द पैदा हो जाता है. उस जगह हाथ रखने पर गर्म लगता है. यह दर्द कार्बोनिक एसिड (H2CO3 Carbonic Acid) के कारण होता है. जो बायो इलेक्ट्रिसिटी की कमी के कारण उस मांसपेशी में अपने आप उत्पन्न होता है. उस मसल में जितनी अधिक बायोइलेक्ट्रिसिटी की कमी होगी. उतना ज्यादा ही कार्बोनिक एसिड पैदा होता है. तथा उतना अधिक दर्द भी पैदा होता है. जब उस प्रभावित मांसपेशी में बायो इलेक्ट्रिसिटी जाने लगती है तो वहां से कार्बन घुलकर रक्त मे मिल जाता है. दर्द बंद हो जाता है. रक्त मे घुले इस कार्बोनिक एसिड को शरीर की रक्त शोधक प्रणाली पसीने और पेशाब से बाहर निकाल देती है.
    नस पर नस चढ़ना (Muscle Note, Neuro Muscular Disease) है तो एक बीमारी पर कब कहाँ कौन सी नस चढ़ जाये कोई नहीं कह सकता. हमारे शरीर में 650 के करीब मांसपेशियां हैं!. जिनमे से 200 में मुस्कुलर स्पासम या मसल नोट का दर्द हो सकता हैं. मस्कुलर स्पाजम या मसल नोट (Muscle Note, Neuromuscular Disease) के कारण होने वाले कुछ दर्द निचे बताये गये है.शरीर में कहीं भी, किसी भी माश्पेसी में दर्द (Muscular pain) हो तो उसका इलाज किसी भी थेरेपी में पेन किलर के अलावा और कुछ नही है! यह आप सब अच्छी तरह जानते हैं और आप यह भी जानते हैं कि पेन किलर कोई इलाज नहीं है! यह एक नशे की तरह है जितनी देर इसका असर रहता है उतनी देर ब्रेन को दर्द का एहसास नहीं होता! और आपको पेन किलर के दुष्प्रभाव (साइड एफेक्ट) के बारे मे भी अच्छी तरहं पता है! जिसे आप चाह कर भी नकार नहीं सकते हैं! इन सभी की मुख्य वजेह होती है गलत तरीके से बैठना – उठना, सोफे या बेड पर अर्ध लेटी अवस्था में ज्यादा देर तक रहना, उलटे सोना, दो – दो सिरहाने रख कर सोना, बेड पर बैठ कर ज्यादा देर तक लैपटॉप या मोबाइल का इस्तेमाल करना या ज्यादा सफर करना या जायदा टाइम तक खड़े रहना या जायदा देर तक एक ही अवस्था में बैठे रहना आदि!
    पहले लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए और मशीनी-करण के ना होने के कारण शारीरिक मेहनत ज्यादा करते थे! जैसे वाहनों के अभाव में मीलों पैदल चलना, पेड़ों पर चढ़ना, लकड़ियां काटना, उन्हें जलाने योग बनाने के लिए उनके टुकड़े करना (फाड़ना), खेतों में काम करते हुए फावड़ा, खुरपा, दरांती आदि का इस्तेमाल करना जिनसे उनके हाथो व पैरों के नेचुरल रिफ्लेक्स पॉइंट्स अपने आप दबते रहते थे और उनका उपचार स्वयं प्रकृति करती रहती थी! इसलिए वे सदा तंदरुस्त रहते थे! मैं शरीर को स्वस्थ रखने में प्रकृति की सहायता करता हूँ उसके खिलाफ नहीं इसलिए मेरे उपचार के कोई दुष्प्रभाव (side effects) नहीं हैं!
    शरीर में किसी भी रोग के आने से पहले हमारी रोग प्रतिरोधी क्षमता कमजोर पड़ जाती है या मांसपेशियों पर नियंत्रण का नुक्सान (loss of muscle control) और किसी बड़े रोग के आने से कम से कम दो – तीन साल पहले हमारी अंत: स्त्रावी ग्रंथियों (endocrine glands) की कार्यप्रणाली सुस्त व् अव्यवस्थित हो जाती है! कुछ ग्रंथियां अपना काम कम करने लग जाती हैं और कुछ ग्रंथियां ज्यादा, जिसके कारण धीरे-धीरे शरीर में रोग पनपने लगते हैं!जिनका हमे या तो पता ही नहीं चलता या फिर हम उन्हें कमजोरी, काम का बोझ, उम्र का तकाजा (बु ढ़ापा), खाने में विटामिन्स – प्रोटीन्स की कमी, थकान, व्यायाम की कमी आदि समझकर टाल देते हैं या फिर दवाइयां खाते रहते हैं! जिनसे ग्रंथियां (endocrine glands) कभी ठीक नहीं होती बल्कि उनकी (malfunctioning) अव्यवस्थित कार्यप्रणाली चलती रहती है जिस का नतीजा कम से कम दो-तीन साल या कभी – कभी इससे भी ज्यादा समय के बाद अचानक सामने आता है किसी बड़े रोग के रुप में, वह कोई भी हो सकता है! जैसे शुगर उच्च – रक्तचाप (high blood pressure) थायराइड (hypothyroidism or hyperthyroidism), दिल की बीमारी, चर्म रोग, किडनी संबंधी रोग, नाड़ी तंत्र संबंधी रोग या कोई और हजारों हैं! लेकिन मेरे उपचार द्वारा सभी अंत: स्त्रावी ग्रंथियां व्यवस्थित (सुचारु) तरीके से काम करने लग जाती हैं! या ये कहे की मांसपेशियों पर नियंत्रण का नुक्सान ( loss of muscle control) कम हो जाता है और रोग प्रतिरोधी क्षमता इम्युनिटी मजबूत हो जाती है! तो किसी प्रकार के रोग शरीर में आने की कोई संभावना ही नहीं रहती, यही कारण है लगभग दो पीढ़ियां पहले आजकल पाए जाने वाले रोग नहीं होते थे! इसीलिए आजकल कुछ रोगों को (lifestyle diseases) रहन सहन के रोग माना जाता है!
नस पर नस चढ़ना तो एक बीमारी पता है लेकिन कहाँ कहाँ की नस कब चढ़ जाये कोई नहीं कह सकता कुछ दर्द यहाँ लिख रहा हूँ जो इस तरह हैं मस्कुलर स्पाजम, मसल नोट के कारण होने वाली सभी दर्दें जैसे कमरदर्द, कंधे की दर्द, गर्दन और कंधे में दर्द, छाती में दर्द, कोहनी में दर्द, बाजू में दर्द, ऊँगली या अंगूठे में दर्द, पूरी टांग में दर्द, घुटने में दर्द, घुटने से नीचे दर्द, घुटने के पीछे दर्द, टांग के अगले हिस्से में दर्द, एडी में दर्द, पंजे में दर्द, नितंब (हिप) में दर्द, दोनो कंधो में दर्द, जबड़े में और कान के आस पास दर्द, आधे सिर में दर्द, पैर के अंगूठे में दर्द आदि सिर से पांव तक शरीर में बहुत सारे दर्द होते हैं ! हमारे शरीर में लगभग 650 मांसपेशियां होती हैं! जिनमे से 200 के करीब मुस्कुलर स्पासम या मसल नोट से प्रभावित होती हैं!
मुस्कुलर स्पासम (Muskulr Spasm) या मसल नोट (Muscle Note ) या नस पर नस चढ़ना :
हमारे शरीर में जहां जहां पर भी रक्त जा रहा है! ठीक उसके बराबर वहां वहां पर बिजली भी जा रही है! जिसे बायो इलेक्ट्रिसिटी कहते हैं रक्त जो है वह धमनियों और शिराओं (arteries and veins) में चलता है! और करंट जो है वह तंत्रिकाओं (nerves) में चलता है! शरीर के किसी भी हिस्से में अगर रक्त नहीं पहुंच रहा हो तो वह हिस्सा सुन्न हो जाता है या मांसपेशियों पर नियंत्रण नहीं रहता (loss of muscle control) और उस स्थान पर हाथ लगाने पर ठंडा महसूस होता है और शरीर के जिस हिस्से में बायो इलेक्ट्रिसिटी (bio-electricity) नहीं पहुंच रही, वहां पर उस हिस्से में दर्द हो जाता है और वहां हाथ लगाने पर गर्म महसूस होता है! इस दर्द का साइंटिफिक कारण होता है कार्बोनिक एसिड (h2co3 carbonic acid) जो बायोइलेक्ट्रिसिटी की कमी के कारण उस मांसपेशी में प्रकृतिक तौर पर हो रही सव्चालित क्रिया से उत्पन्न होता है! उस प्रभावित मसल में जितनी ज्यादा बायोइलेक्ट्रिसिटी की कमी होती है, उतना अधिक कार्बोनिक एसिड उत्पन्न होता है और उतनी ही अधिक दर्द भी होती है! जैसे ही उस मांसपेशी में बायोइलेक्ट्रिसिटी जाने लगती है वहां से कार्बन घुलकर रक्त मे मिल जाता है, और दर्द ठीक हो जाता है! रक्त मे घुले कार्बोनिक एसिड को शरीर की रक्त शोधक प्रणाली पसीने और पेशाब के द्वारा बाहर निकाल देती है!
नस पर नस चढ़ना बीमारी होने के कारण -
1.पैर की धमनियोंकी अंदरूनी सतह में कोलेस्ट्रॉल जमा होने से, इनके संकरे होने (एथ्रीयो स्कोरोसिस) के कारण रक्त प्रवाह कम होने पर,
2.पैरों की स्नायुओं के मधुमेह ग्रस्त होने
3. अत्यधिक सिगरेट, तंबाकू, शराब का सेवन करने, पोष्क तत्वों की कमी, संक्रमण से।
4. अनियंत्रित मधुमेह (रक्त में शक्कर का स्तर)
5. शरीर में जल, रक्तमें सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम स्तर कम होने
6. पेशाब ज्यादा होने वाली डाययूरेटिक दवाओं जैसे लेसिक्स सेवन करने के कारण शरीर में जल, खनिज लवण की मात्रा कम होने
7. मधुमेह, अधिक शराब पीने से, किसी बिमारी के कारण कमजोरी, कम भोजन या पौष्टिक भोजन ना लेने से, ‘Poly-neuropathy’ या नसों की कमजोरी।
8. कुछ हृदय रोगी के लिये दवायें जो कि ‘Beta-blockers’ कहलाती हैं, वो भी कई बार इसका कारण होती हैं।
9. कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवा सेवन करने से.
10. अत्यधिक कठोर व्यायाम करने, खेलने, कठोर श्रम करने से.
11. एक ही स्थिति में लंबे समय तक पैर मोड़े रखने के कारण और पेशियों की थकान के कारण हो सकता है।
नस पर नस चढ़ना बीमारी होने के लक्षण -
1. आधुनिक जीवन शैली –
जिसमें व्यक्ति आराम परक जीवन जीना चाहता है, सभी काम मशीनों के द्वारा करता है, खाओ पीओ और मौज करो की इच्छा रखता है, इस प्रकार के जटिल रोगों को जन्म दे रही हैं।
2. गर्दन के आस-पास के हिस्सों में ताकत की कमी महसूस देना।
3. गर्दन को आगे-पीछे, दाॅंयी-बाॅंयी ओर घुमाने में दर्द होना।
4. शरीर के दाॅंये अथवा बाॅंये हिस्से में दर्द के वेग आना।
5. याददाश्त का कम होते चले जाना।
6. चलने का सन्तुलन बिगड़ना।
7. . हाथ-पैरों में कम्पन्न रहना। (शरीर (हाथ-पैर) में कम्पन के लक्षण कारण और उपचार)
8. माॅंसपेशियों में ऐठन विशेषकर जाॅंघ (Thigh)व घुटनों के नीचे (Calf) में Muscle Cramp होना।
9. शरीर में लेटते हुए साॅंय-साॅंय अथवा धक-धक की आवाज रहना।
10. कोई भी कार्य करते हुए आत्मविश्वास का अभाव अथवा भय की उत्पत्ति होना। इनको (Psychoromatic Disease) भी कहा जाता है।
11. अनावश्यक हृदय की धड़कन बढ़ी हुई रहना।
12. हाथ पैरों में सुन्नपन्न (Numbness) होना, सोते समय यदि हाथ अथवा पैर सोने लगे, सोते हुए हाथ थोड़ा दबते ही सुन्न होने लगते हैं, कई बार एक हाथ सुन्न होता है, दूसरे हाथ से उसको उठाकर करवट बदलनी पड़ती है।
13. हाथों की पकड़ ढीली होना, अथवा पैरों से सीढ़ी चढ़ते हुए घुटने से नीचेके हिस्सों में खिचांव आना।
14. शरीर में सुईंया सी चुभती प्रतीत होना।
14. शरीर के कभी किसी भाग में कभी किसी भाग में जैसे आॅंख, जबड़े,कान आदि में कच्चापन अथवा Paralytic Symptoms उत्पन्न होना।
15. रात को सोते समय पैरों में नस पर नस चढ़ना अर्थात् अचानक कुछ मिनटों के लिए तेज दर्द से आहत होना।
16. शरीर गिरा गिरा सा रहना, मानसिक दृढ़ता का अभाव प्रतीत होना।
17. शरीर में पैरों के तलवों में जलन रहना या हाथ-पैर ठण्डे रहना।
15. सर्दी अथवा गर्मी का शरीर पर अधिक असर होना अर्थात सहन करने में कठिनाई प्रतीत होना।
18. एक बार यदि शरीर आराम की अवस्था में आ जाए तो कोई भी कार्य करने की इच्छा न होना अर्थात् उठने चलने में कष्ट प्रतीत होना।
19. कार्य करते समय सामान्य रहकर उत्तेजना (Anxiety)चिड़चिड़ापन (Irritation) अथवा निराशा (Depression) वाली स्थिति बने रहना।
20. रात्रि में बैचेनी बने रहना, छः-सात घण्टे की पर्याप्त निद्रा न ले पाना।
21. कार्य करते हुए शीघ्र ही थकान का अनुभव होना। पसीना अधिक आने की प्रवृत्ति होना।
22.. किसी भी अंग में फड़फड़ाहट होते रहना।
23. मानसिक कार्य करते ही दिमाग पर एक प्रकार का बोझ प्रतीत होना,मानसिक क्षमता का हृास होना।
Neuromuscular disease :
1. Neuralgia – इसमें व्यक्ति को शरीर के किसी भाग में तेज अथवा हलके दर्द का अनुभव होता है|जैसे जब चेहरे का तान्त्रिक तन्त्र (Facial Nervous) रुग्ण हो जाता है तो इस रोग को triglminal neuralgia कहते है| इसमें व्यक्ति के चेहरे में किसी एक और अथवा पुरे चेहरे जैसे जबड़े, बाल, आंखे के आस-पास एल प्रकार का खिंचाव महसूस होता है| कुछ मनोवैज्ञानिक को ने पाया कि यह रोग उनको अधिक होता है जो दुसरो की ख़ुशी से परेशान होते है| इस रोग का व्यक्ति यदि हसना भी चाहता है तो भी पीड़ा से कराह उड़ता है| अर्थात प्रकृति दुसरो की ख़ुशी छिनने वालो की ख़ुशी छिन  लेती  है| अंग्रेजी चिकित्सक इसको Nervous व muscular को relax करने वाली दवाएं जैसे Pregabalin,Migorill, Gabapentin इत्यादि देते है|
2. Nervousness- व्यक्ति अपने भीतर घबराहट, बैचेनी, बार-बार प्यास का अनुभव करता है| किसी interview को देने, अपरिचित व्यक्तियों से मिलने, भाषण देने आदि में थोडा ह्रदय की धड़कन बढती हा नींद ठीक प्रकार से नहीं आती व रक्तचाप असामन्य रहता है| इसके लिए व्यक्ति के ह्रदय व मस्तिष्क को बल देने वाले पोषक पदार्थ (nervine tonic) का सेवन करना चाहिए तथा अपने भीतर अद्यात्मिक दृष्टिकोण का विकास करना चाहिए| सम भाव, समर्पण का विकास कर व्यक्तिगत अंह से बचना चाहिए| उदाहरण के लिए यदि व्यक्ति मंच पर भाषण देता है तो यह भाव न लाए कि वह कितना अच्छा बोल सकता है अपितु इस भाव से प्रवचन करे कि भगवान उसके माध्यम से kids को क्या संदेश देना चाहते है? भविष्य के प्रति भय, महत्वाकांक्षा इत्यादि व्यक्ति में यह रोग पैदा करते है|
3. Alzheimer- इसमें व्यक्ति की यादगार (Memory)कम होती चली जाती है| न्यूरो मस्कुलर रोगों की चपेट में बहुत बड़े-बड़े व्यक्ति भी आए है| इस युग के जाने-माने भौतिक शास्त्र के वैज्ञानिक प्रो. स्टीफन हाकिन्स इसी से सम्बन्धित एक भयानक रोग से युवावस्था में ही पीड़ित हो गए व उनका सारा शरीर लकवाग्रस्त हो गया था| परन्तु उन्होंने हिम्मत नहीं हारी व कठोर संघर्ष के द्वारा अपनी शोधों (Researches) को जारी रखा आज भी वो 65 वर्ष की उम्र में अपनी जीवन रक्षा के साथ-साथ विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान कर रहे है| उनकी उपलब्धियों के आधार पर उनको न्यूटन व आइंस्टाइन जैसे महान वैज्ञानिकों की श्रेणी में माना जाता है|
4. Parkinson(कम्पवात) – इसमें व्यक्ति के हाथ पैरों में कम्पन होता है| जब व्यक्ति आराम करता है तो हाथ पैर हिलाने लगता है| जब काम में लग जाता है तब ऐसी कठिनाई कम आती है| इसके L-dopa दिया जाता है| कृत्रिम विधि से तैयार किया हुआ यह chennal कम ही लोगो के शरीर स्वीकार करता है| आयुर्वैदिक जड़ी कोंच के बीजों (कपिकच्छु) में यह रसायन मिलता है| अंत: यह औषधि इस रोग में लाभकारी है| इसके लिए कोंच के बीजों को गर्म पानी में मंद आंच पर थोड़ी देर पकायें फिर छिलका उतार कर प्रति व्यक्ति 5 से 10 बीजों को दूध में खीर बना ले| साथ में दलिया अथवा अंकुरित गेंहू भी पकाया जा सकता है| खीर में थोडा गाय का घी अवश्य मिलाएं अन्यथा चूर्ण की अवस्था अथवा कोंच पाक भी लाभदायक है| यह समस्त तान्त्रिक तन्त्र व मासपेशियों के लिए बलदायक है|
नस पर नस चढ़ना के कुछ घरेलू उपचार -
१. ऎंठन वाली पेशियों की मालिश करें.२. पैरों में इलास्टिक पट्टी बांधे जिससे पैरों में खून जमा न हो पाए.३. मधुमेह या उच्च रक्तचाप (High BP) से ग्रसित हैं. तो परहेज, उपचार से नियंत्रण करें४. शराब, तंबाकू, सिगरेट, नशीले पदार्थो का सेवन न करें.
२. जिस पैर की नस चढ़ी है. उसी ओर के हाथ की बीच की ऊँगली के नाखून के नीचे के भाग को दबाए और छोड़ें. जब तक ठीक न हो जाए.
३. ये उपाय करें – लंबाई में शरीर को दो भागों में चिन्हित करें. अब जिस भाग में नस चढ़ी है.उस भाग के विपरीत भाग के कान के निचले जोड़ पर उंगली से दबाते हुए उंगली को हल्का सा ऊपर नीचे की तरफ करे. ऐसा 10 सेकेंड तक करते रहें. नस उतर जाएगी.
४. . पैरों के नीचे मोटा तकिया रखकर सोएं. आराम करें. पैरों को ऊंचाई पर रखें
५. प्रभावित जगह पर बर्फ की ठंडी सिकाई करे. दिन में 3-4 बार यह 15 मिनट करे४ आरामदायक तथा मुलायम जूते पहनें.अपना वजन कम करें. रोज सैर पर जाएं. इससे टांगों की नसें मजबूत होती हैं
.६. फाइबर युक्त भोजन करें जैसे चपाती, ब्राउन ब्रेड, सब्जियां व फल.
नस पर नस चढ़ना (Muscle Note) के रोगी के लिए भोजन-
भोजन में नीबू पानी, नारियल का पानी, फलों जैसे मौसमी, अनार, सेब, पपीता केला को शामिल करें. सब्जिओं में पालक, टमाटर, सलाद, फलियाँ, आलू, गाजर, चकुँदर का सेवन करें. हर रोज अखरोट, पिस्ता, बादाम, किशमिश खाएं.
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2017-08-23

चेहरे की झाइयाँ को दूर करने के उपाय उपचार नुस्खे



झाइयों को दूर करने के सरल व घरलू उपचार :-
आजकल महिलाएं अपनी त्वचा सम्बन्धी समस्याओं को दूर करने के लिए न जाने क्या क्या तरिके आजमाती है. कभी कॉस्मेटिक क्रीम, इंजेक्शन, सर्जरी आदि, परन्तु यें सब क्यूँ? केवल अपने आपको खुबसूरत दिखाने के लिए. अपने आपको सुन्दर बनाने के लिए क्या इन सब तरीको को अपनाना जरूरी है? बिलकुल नहीं. जब हमारी प्रकृति में ही अनेक प्रकार की वनस्पती व जड़ी-बूटियां उपलब्ध है जिनके इस्तेमाल से हम अपने रूप-सौन्दर्य को निखार सकते है. जब हमारे पास खुबसूरत दिखने के प्राक्रतिक तरीके है तो हम निरंतर कृत्रिम खूबसूरती की ओर क्यूँ आकर्षिक होते है, क्यूँ हम कृत्रिम खूबसूरती पाने के लिए अपना समय और पैसा नष्ट करते है? जबकि हम इस बात से भी अनजान नहीं है कि कृत्रिम खुबसूरती ज्यादा दिनों तक नहीं रहती है, वह जल्दी ही हमारा साथ छोड़ देती है. तथा प्राकृतिक सुन्दरता हमेशा हमें जवां बनाए रखती है.
हम आपको कुछ ऐसे प्राकर्तिक तरीके बताते है जिनसे न केवल आपकी त्वचा खुबसूरत बढ़ेगी बल्कि समय से पहले होने वाली त्वचा सम्बन्धी परेशानी (झाइयाँ) से भी निजात मिलेगा.
.*  तीन चमच्च दूध के पाउडर में आधा कप खीरे का पेस्ट, एक निम्बू के रस, एक चमच्च सोयाबीन अथवा जौं का आटा मिलाकर एक लेप तैयार कर लें और इसे फ्रिज में रखें. प्रतिदिन इससे मालिश करें तथा मालिश के बाद इसे चेहरे पर लगाकर कुछ देर के लिए सूखने दें उसके बाद मसलकर धो लें. इसके नियमित इस्तेमाल से चेहरे की झाइयाँ तो दूर होंगी ही साथ साथ त्वचा की रंगत भी निखरेगी.
*. कच्चे दूध में चुटकी भर हल्दी और चंदन पाउडर मिलाकर एक पेस्ट तैयार कर लें. इसको प्रतिदिन चेहरे पर लगायें. इससे चेहरे की झाइयाँ और त्वचा का कालापन दूर हो जायगा.
* केले में शहद मिलाकर चेहरे पर 15 - 20 मिनट के लिए लगायें और फिर गुनगुने पानी से चेहरा धो लें. इससे झाइयाँ आना कम होंगी.
* एक बादाम को घिसकर उसमें एक चम्मच शहद तथा एक चमच्च हाइड्रोजन पैराक्साइड मिलाकर झाइयों वाले स्थान पर लगाये इसके लगभग 30 मिनट पश्चात चेहरा धो लें. कुछ ही दिनों में चेहरे की झाइयाँ गायब होने लगेगी.
* एक चम्मच निम्बू के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर उसमें कुछ मात्रा हाइड्रोजन पैराक्सइड की भी मिला लें. इस पेस्ट को चेहरे पर लगाकर सूखने के लिए छोड़ दें. इसके नियमित इस्तेमाल से आपको अवश्य लाभ होगा.
* दो चमच्च दूध का पाउडर में दो चमच्च हाइड्रोजन पैराक्सइड मिला लें. अब इस लेप को पूरे चेहरे पर लगाये और सूखने के बाद ठन्डे पानी से चेहरा धो लें.
. अंडे के सफ़ेद भाग को निकालकर अच्छी तरह फेंटें, फिर इसमें बादाम का पेस्ट और दो बुँदे शहद की डालकर चेहरे पर 20 मिनट के लिए लगाकर रखें. फिर चेहरा को ठन्डे पानी से धो लें, इसके नियमित उपयोग से कुछ ही दिनों में बदरंग त्वचा का रंग एकसार हो जायगा.
* रात में सोने से पूर्व एक चमच्च बादाम के तेल में ग्लिसरीन और 3-4 बुँदे निम्बू के रस की मिलाकर चेहरे, गर्दन व बाहों पर लगा लें. तथा सुबह हलके गुनगुने पानी से धो लें. कुछ ही दिनों में त्वचा पहले से अधिक स्वस्थ नजर आयगी.
* दो चम्मच बादाम रोगन, दो चमच्च सिरका या निम्बू का रस तथा एक चम्मच ग्लिसरीन मिलाकर फेंटें. इस लेप को रोजाना रात में सोने से पूर्व 2-3 मिनट के लिए चेहरे की मालिश के लिए प्रयोग करें.
चेहरे की झाइयाँ को दूर करने के लिए रीठे के छिलकों को पानी में पीसकर झाई वाले स्थान पर लगाये. तथा दूसरे सप्ताह में तुलसी के पत्तो को पानी में पीसकर झाइयों वाली जगह पर लगाये. इस तरह दो सप्ताह में ही झाइयाँ दूर हो जायंगी तथा चेहरे पर पहले जैसा आकर्षण और निखार आ जाएगा.
* शहद का उपयोग भी झाइयों के लिए उत्तम होता है, इसके लिए एक चमच्च शहद में एक चम्मच सिरका मिलाकर झाइयों वाली जगह पर लगाए. इसका प्रयोग दिन में केवल एक बार ही करें.
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2017-08-21

गर्भाशय की सूजन के कारण ,उपचार// Ayurvedic Treatment of swelling of the womb



      ऋतुकालीन (माहवारी) असावधानियों का कुप्रभाव यदि गर्भाशय को प्रभावित करता है तो उसमें शोथ (सूजन) उत्पन्न हो जाती है। इसमें रोगी महिला को बहुत अधिक कष्ट उठाना पड़ता है। गर्भाशय की सूजन हो जाने पर स्त्रियों को हल्का बुखार रहता है तथा इस रोग के कारण उनके गर्भाशय में सूजन भी हो जाती है। इस रोग के कारण अनेक प्रकार के रोग स्त्रियों को हो जाते हैं जो इस प्रकार हैं- सिर में दर्द, भूख न लगना, कमर तथा पेट के निचले भाग में दर्द और योनि के भाग में खुजली होना आदि।
लक्षण:
गर्भाशय की सूजन होने पर महिला को पेडू में दर्द और जलन होना सामान्य लक्षण हैं, किसी-किसी को दस्त भी लग सकते हैं तो किसी को दस्त की हाजत जैसी प्रतीत होती है किन्तु दस्त नहीं होता है। किसी को बार-बार मूत्र त्यागने की इच्छा होती है। किसी को बुखार और बुखार के साथ खांसी भी हो जाती है। यदि इस रोग की उत्पन्न होने का कारण शीत लगना हो तो इससे बुखार की तीव्रता बढ़ जाती है।
गर्भाशय (बच्चेदानी) की सूजन हो जाने का कारण -
· भूख से अधिक भोजन सेवन करने के कारण स्त्री के गर्भाशय में सूजन आ जाती है।
· पेट में गैस तथा कब्ज बनने के कारण गर्भाशय में सूजन हो जाती है।
· अधिक तंग कपड़े पहनने के कारण भी गर्भाशय में सूजन हो सकती है।
· पेट की मांसपेशियों में अधिक कमजोरी आ जाने के कारण तथा व्यायाम न करने के कारण या अधिक सख्त व्यायाम करने के कारण भी गर्भाशय में सूजन हो सकती है।
· औषधियों का अधिक सेवन करने के कारण भी गर्भाशय में सूजन हो सकती है।
· अधिक सहवास (संभोग) करने के कारण भी गर्भाशय में सूजन हो सकती है।
· गलत खान-पान के कारण गर्भाशय में सूजन हो सकती है।
· प्रसव के दौरान सावधानी न बरतने के कारण भी गर्भाशय में सूजन हो सकती है।
प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार:-
· गर्भाशय में सूजन हो जाने पर स्त्री रोगी को चार से पांच दिनों तक फलों का रस पीकर उपवास रखना चाहिए, फिर इसके बाद बिना पका संतुलित आहार लेना चाहिए।
· गर्भाशय में सूजन से पीड़ित स्त्री को कभी भी नमक, मिर्चमसाला वाला, तली भुनी चीजें तथा मिठाईयां आदि नहीं खानी चाहिए।
· गर्भाशय में सूजन हो जाने पर स्त्री के पेट पर मिट्टी की गीली पट्टी लगानी चाहिए। इसके बाद एनिमा देनी चाहिए और फिर गर्म कटिस्नान कराना चाहिए। इसके बाद टब में नमक डालकर पन्द्रह से बीस मिनट तक स्त्री को इसमें बैठाना चाहिए।
· गर्भाशय में सूजन से पीड़ित स्त्री को प्रतिदिन दो से तीन बार एक-दो घंटे तक अपने पैर को एक फुट ऊंचा उठाकर लेटना चाहिए और आराम करना चाहिए। इसके बाद रोगी स्त्री को श्वासन क्रिया करनी चाहिए जिसके फलस्वरूप उसका रोग ठीक हो जाता है।
घरेलू उपचार :-

अशोक
अशोक की छाल 120 ग्राम, वरजटा, काली सारिवा, लाल चन्दन, दारूहल्दी, मंजीठ प्रत्येक को 100-100 ग्राम मात्रा, छोटी इलायची के दाने और चन्द्रपुटी प्रवाल भस्म 50-50 ग्राम, सहस्त्रपुटी अभ्रक भस्म 40 ग्राम, वंग भस्म और लौह भस्म 30-30 ग्राम तथा मकरध्वज गंधक जारित 10 ग्राम की मात्रा में लेकर सभी औषधियों को कूटछानकर चूर्ण तैयार कर लेते हैं। फिर इसमें क्रमश: खिरेंटी, सेमल की छाल तथा गूलर की छाल के काढ़े में 3-3 दिन खरल करके 1-1 ग्राम की गोलियां बनाकर छाया में सुखा लेते हैं। इसे एक या दो गोली की मात्रा में मिश्रीयुक्त गाय के दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करना चाहिए। इसे लगभग एक महीने तक सेवन कराने से स्त्रियों के अनेक रोगों में लाभ मिलता है। इससे गर्भाशय की सूजन, जलन, रक्तप्रदर, माहवारी के विभिन्न विकार या प्रसव के बाद होने वाली दुर्बलता इससे नष्ट हो जाती है।

चिरायता
चिरायते के काढ़े से योनि को धोएं और चिरायता को पानी में पीसकर पेडू़ और योनि पर इसका लेप करें इससे सर्दी की वजह से होने वाली गर्भाशय की सूजन नष्ट हो जाती है।
रेवन्दचीनी
रेवन्दचीनी को 15 ग्राम की मात्रा में पीसकर आधा-आधा ग्राम पानी से दिन में तीन बार लेना चाहिए। इससे गर्भाशय की सूजन मिट जाती है।
गर्भाशय(Uterus)में सूजन(Swelling)हो जाने पर महिला रोगी को चार-पांच दिनों तक फलों का जूस पीकर उपवास करना चाहिए- उसके बाद बिना पका हुआ संतुलित आहार लेना चाहिए
कासनी
कासनी की जड़, गुलबनफ्सा और वरियादी 6-6 ग्राम की मात्रा में, गावजवां और तुख्म कसुम 5-5 ग्राम, तथा मुनक्का 6 या 7 को एक साथ बारीक पीसकर उन्हें 250 ग्राम पानी के साथ सुबह-शाम को छानकर पिला देते हैं। यह उपयोग नियमित रूप से आठ-दस दिनों तक करना चाहिए। इससे गर्भाशय की सूजन, रक्तस्राव, श्लैष्मिक स्राव (बलगम, पीव) आदि में पर्याप्त लाभ मिलता है।
नीम
नीम, सम्भालू के पत्ते और सोंठ सभी का काढ़ा बनाकर योनि मार्ग (जननांग) में लगाने से गर्भाशय की सूजन नष्ट हो जाती है।
बादाम रोगन
बादाम रोगन एक चम्मच, शर्बत बनफ्सा 3 चम्मच और खाण्ड पानी में मिलाकर सुबह के समय पीएं तथा बादाम रोगन का एक फोया गर्भाशय के मुंह पर रखें इससे गर्मी के कारण उत्पन्न गर्भाशय की सूजन ठीक हो जाती है।
निर्गुण्डी को किसी भी प्रकार के बाहरी भीतरी सूजन के लिए इसका उपयोग किया जाता है यह औषधि वेदना शामक और मज्जा तंतुओं को शक्ति देने वाली है वैसे आयुर्वेद में सुजन उतारने वाली और भी कई औषधियों का वर्णन आता है पर निर्गुण्डी इन सब में अग्रणी है और सर्वसुलभ भी-नीम,(निर्गुन्डी) सम्भालु के पत्ते और सोंठ सभी का काढ़ा बनाकर जननांग में लगाने से सुजन ख़त्म हो जाती है-

बजूरी शर्बत या दीनार
बजूरी या दीनार को दो चम्मच की मात्रा में एक कप पानी में सोते समय सेवन करना चाहिए। इससे गर्भाशय की सूजन मिट जाती है।
पानी
गर्भाशय की सूजन होने पर पेडू़ (नाभि) पर गर्म पानी की बोतल को रखने से लाभ मिलता है।
एरण्ड
एरण्ड के पत्तों का रस छानकर रूई भिगोकर गर्भाशय के मुंह पर 3-4 दिनों तक रखने से गर्भाशय की सूजन मिट जाती है।
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2017-08-19

अजवायन का पानी से 15 दिनों में 5 किलो वजन कम करें!// Reduce 5 kg weight with AJWAIN water in 15 days!



अजवायन का पानी 15 दिनों में 5 किलो वजन कम कर सकता है इस रामबाण उपाय को आजमाए और मोटापे से छुटकारा पाए
अजवायन का प्रयोग न सिर्फ घरों में मसालों के रूप में किया जाता है बल्कि छोटी मोटी पेट की बीमारिया भी इसके उपयोग से दूर हो जाती है खाना खाने के बाद हाजमा बेहतर बनाना हो तो इसका चूर्ण बना कर खाइये और फिर फायदा देखिये वैसे तो अजवायन बड़े ही काम की चीज है मगर इसका एक फायदा मोटापे को भी कम करने के काम आता है अजवायन का पानी हर रोज सुबह खाली पेट पीने से मोटापा प्राकृतिक रूप से कम हो जाता है|
अजवायन के पानी से लाभ :-
*. सिरदर्द और कंजेस्शन से छुटकारा दिलाता है अजवायन का पानी
*उल्टियां व् कच्चे जी को रोकता है अजवायन का पानी
*. दाद दर्द को दूर करता है अजवायन का पानी
*. पाचन क्रिया बेहतर बनाता है अजवायन का पानी
* वजन घटाने में मददगार है अजवायन का पानी
अजवायन पानी बनाने की विधि :-
50 ग्राम अजवायन ले हर रोज रात को अजवायन को एक गिलास पानी में रातभर भिगो कर छोड़ दे और फिर सुबह उस पानी को छान ले उसके बाद पानी में एक चम्मच शहद मिक्स करें और खाली पेट पीले अजवायन के पानी को लगातार 45 दिन तक पिए वैसे तो आपको इसका असर 15 दिन में दिखना शुरू हो जायेगा परन्तु यदि प्रभावी परिणाम चाहिए तो 45 दिन तक इसका सेवन करें
सावधानिया :-
* आलू,शक्कर,फ़ास्ट फ़ूड और ऑइली फ़ूड न खाए
*चावल पूरी तरह छोड़ दे और रोटियों की संख्या घटा दे याने आप रोटियों की संख्या आधी कर दे
* भोजन करने के १ घंटे तक पानी न पिए