2018-05-08

तुलसी की जड़ के आयुर्वेदिक और तांत्रिक प्रयोग // Ayurvedic and Tantric experiments of basil root

                                                          

  तुलसी आमतौर पर सभी हिंदू परिवार के घरों में होती है क्योंकि शास्त्र के अनुसार तुलसी को पूजनीय और पवित्र माना गया है। तुलसी घर में होने से कई प्रकार के देवी और चिकित्सीय लाभ प्राप्त होते हैं तुलसी के कई प्रकार के प्रयोग होते हैं। कुछ प्रयोग सामान्य है तो कुछ आयुर्वेद से जुड़े हैं।

छोटे स्तनों को उन्नत और सूडोल बनाए
    

 अगर आपको किसी से डर है या किसी भी तरह की घबराहट है तो इस छोटे से उपाय से आपको चमत्कारिक रूप से फायदा मिलेगा. आपकी घबराहट या डर किसी शत्रु का हो या किसी भी तरह के भूत प्रेत या जिन्नात का हर तरह के डर के लिए बस तुलसी की जड़ ही काफी है|
      सिर्फ   रविवार   को छोड़ कर आप किसी भी दिन ये क्रिया कर सकते है|
   किसी तुलसी की जड़ निकाल लें जिसमें चने जितनी गाँठ हो. उसको गंगा जल से स्वच्छ करके अपने पूजा वाले स्थान पर रखें. अब पूजा के बाद एक सफ़ेद रुमाल में उसको अच्छे से पैक करके अपनी कमीज की ऊपर वाली जेब में रखें हमेशा. ध्यान रहें डेली जब पूजा करते हो तब उसको निकाल कर पूजा स्थान पर रखें और फिर बाद में वापिस कमीज की जेब में रख लें|


किडनी फेल रोग का अचूक इलाज 

   इसके साथ साथ आप एक काम और कर सकते है| अपने सोने के बिस्तर पर सफ़ेद चादर सेट करें. ये बिलकूल सात्विक और साधारण सा उपाय है लेकिन इसका प्रभाव आपको तत्काल दिखाई देगा|
    यदि कोई व्यक्ति सभी कार्यों में सफलता प्राप्त करना चाहता है तो वह तुलसी की जड़ को विधि पूर्वक यानी तुलसी की जड़ को निमंत्रण देकर अपने घर ले आए यानी कि जब आप कहीं से तुलसी ला रहे हो इस समय आप अपने मन में यह बोले यह बोले-“हे माता तुलसी हमारे घर में आप पधारे इसके बाद घर पहुंचकर तुलसी जड़ को गंगाजल से धो लें इसके बाद इस का पूजन करें पूजन के बाद इस जल को दाएं हाथ पर पीले कपड़े में लपेटकर बादली पूजन करते समय किसी भी तुलसी मंत्र का जप कर ले।


धतूरा के औषधीय उपयोग 

   यह एक तांत्रिक उपाय है और इसे करने पर आपको धन संबंधित कार्यों में विशेष सफलता प्राप्त होगी। यदि किसी व्यक्ति को अचानक धन हानि होने लग जाए या स्वास्थ खराब हो जाए या किसी की बुरी नजर लग जाए तो उस समय तुलसी का यह तांत्रिक उपाय अवश्य करें जो हम आपको बता रहे हैं उपाय के अनुसार तुलसी के 7 पत्ते और साथ काली मिर्च मुट्ठी में लें इसके बाद जिस व्यक्ति की नजर उतारनी है उसे लेटा दे और मुट्ठी बांध उसके सिर से पैर तक 21 बार ओम मंत्र बोलकर वार लें।   

वात रोग (जोड़ों का दर्द ,कमर दर्द,गठिया,सूजन,लकवा) को दूर करने के उपाय* 

इसके बाद काली मिर्च पीड़ित व्यक्ति को चबाने को दे और तुलसी के पत्ते को मसलकर निगलने को दे। अंत में प्रभावित व्यक्ति को लेकर उसके तलवे को किसी कपड़े से 7 बार या 11 बार झाड़ने यदि आप मालामाल होना चाहते हैं तो घर के मुख्य दरवाजे के दोनों और तुलसी के पौधे गमले में लगाए। प्रतिदिन तुलसी की देखभाल करें इस उपाय से आपके घर में धन आने लगेगा और पैसों की तंगी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी दरवाजे के दोनों और तुलसी का पौधा लगाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा नहीं आएगी और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती जाएगी यह आपके लिए काफी लाभदायक सिद्ध होगी।





2018-04-29

लीवर की सूजन का जूस द्वारा उपचार //Any swelling on the liver, these juices make it perfectly healthy

                                               
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    लीवर हमारे शरीर का बहुत ही महत्तवपूर्ण हिस्सा है और सहनशील भी । सहनशील इसलिये क्योकि इस पर सूजन आने के बाद भी ये लगभग सही तरह से अपना काम करता है और खुद को अपने आप से ठीक करने के प्रयास भी करता रहता है । किंतु लीवर की सूजन की समस्या हो जाने पर हमको इसे ठीक करने के प्रयास जरूर करने चाहिये । 
लीवर की सूजन मिटाने वाले जूस-

गाजर और ऑवले का जूस 

लीवर की सुजन के लिये गाजर और ऑवले का जूस बहुत ही लाभकारी होता है । यह जूस बनने का तरीका बहुत सरल है । इस जूस को बनाने के लिये लाल गाजरों का जूस 150 मिलीलीटर और ताजे ऑवले का जूस 20 मिलीलीटर लेकर मिलाना है और इस जूस में 2 ग्राम सेंधा नमक ( वो नमक जो हम व्रत में खाते हैं ) मिलाकर रोज एक बार नाश्ते में पीना है । इस जूस का सेवन करने से एक सप्ताह में लीवर की सूजन की समस्या में आराम आने लगता है और एक महीने लगभग में लीवर की सूजन लगभग ठीक ही हो जाती है । यह जूस सामान्य व्यक्तियों के लिए भी उपकारी सिद्ध होगा|

पथरी की चमत्कारी औषधि से डॉक्टर की बोलती बंद!



पालक और चकुंदर का जूस 


लीवर की सूजन की समस्या के लिये दूसरा जूस होता है पालक और चकुंदर का जूस बनाकर पीना । इस जूस को बनाने के लिये सबसे पहले पालक के ताजे पत्तों को धोकर और कूटकर 100 मिलीलीटर जूस निकालें और फिर चकुंदर का जूस 30 मिलीलीटर निकालें इन दोनों को मिलाकर इसमें चुटकी भर काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर पीने से यह लीवर की सूजन की समस्या की बहुत उत्तम दवा बन जाती है । इस जूस का सेवन लगातार रोज किया जा सकता है ।


बालों के झड़ने और गंजेपन के रामबाण उपचार 

इसके लिए ज़रूरी सामान यह उपाय भी बेहद लाभकारी सिद्ध हुआ है-
गाजर का रस – एक कप
पालक का रस – एक कप
काली मिर्च – 1 ग्राम.

गाजर का रस एक छोटा गिलास और पालक का रस एक चाय का प्याला भर परस्पर मिलाकर उसमें बहुत हल्का सा नमक व काली मिर्च डालकर पिए । इन दोनों रसों का सेवन इतनी ही मात्रा में दिन में दोनों समय सुबह और शाम करें ।
इस जूस का सेवन सप्ताह में 3 दिन करे। इसके बाद ये नीचे लिखा हुआ जूस पियें.
गाजर और खीरे का जूस एक एक कप लीजिये, अभी इन दोनों के मिले-जुले रस का प्रयोग सुबह शाम करें इसे भी दिन में दो बार लें इन रसों का सेवन सूर्यास्त से पहले करने से लीवर की सूजन में लाभ होता है। ये प्रयोग सप्ताह के 4 दिन करना है.

शीघ्र पतन से निजात पाने के उपचार 

इस प्रकार से एक हफ्ता ये प्रयोग करने के बाद फिर से ३ दिन दोबारा पहला प्रयोग और 4 दिन दूसरा प्रयोग करें. ऐसा करने से एक महीने के अन्दर आपका लीवर बिलकुल हेल्थी होगा. और हाँ लीवर की कैसी भी समस्या हो इसमें निम्बू का बेहद अहम् रोल है. निम्बू का सेवन जितना ज्यादा हो सके इस रोग में ज़रूर करना चाहिए. इसके साथ में अगर आप कुछ कर सकते हैं तो वो है भूमि आंवला. भूमि आंवला का रस अक्सर बरसात में मिल जाता है, क्यूंकि भूमि आंवला एक खरपतवार है, जो अक्सर ही खेतों में उग जाती है. इस सीजन में इसके पंचांग अर्थात पुरे पौधे को जड़ समेत लेकर इसका जूस निकाल लीजिये, और ये जूस पीने से हेपेटाइटिस a,b,c और Jaundice सभी में बहुत लाभ होता है.   
 सेब का    सिरका
लीवर की सूजन को कम करने के लिए 1 चम्मच सेब के सिरका और 1 चम्मच शहद को 1 गिलास पानी में मिलाकर पीएं। इससे शरीर से विषैला पदार्थ बाहर निकलेंगे और सूजन कम होगी।   

2018-03-13

गीली पट्टी के अनुपम फायदे :प्राकृतिक चिकित्सा


पेडू की गीली पट्टी
   दर्द के साथ पेट के सभी रोगों जैसे पेट की सूजन, कब्‍ज के अलावा अनिद्रा, बुखार एवं महिलाओं की सभी समस्‍याओं के लिए रामबाण चिकित्सा है। इसे रात्रि भोजन के दो घंटे बाद पूरी रात तक लपेटा जा सकता है। सूती कपडे की पट्टी इतनी चौड़ी होनी चाहिए कि पेडू सहित नाभि के तीन अंगुल ऊपर तक आ जाये एवं इतनी लंबी कि पेडू के तीन-चार लपेट लग सकें। सूती पट्टी को भिगोकर, निचोड़कर पेडू से नाभि के तीन उंगली ऊपर तक लपेट दें। एक से दो घंटा या सारी रात इसे लपेट कर रखें।

किडनी फेल रोग का अचूक इलाज 

   प्राकृतिक चिकित्सा में साधारण सी दिखने वाली क्रियाएं शरीर पर अपना रोगनिवारक प्रभाव छोडती हैं | किसी सूती या खादी के कपडे की पट्टी को सामान्य ठन्डे जल में भिगोकर , निचोड़कर अंग विशेष पर लपेटने के पश्चात् उसके ऊपर से ऊनी कपडे की [सूखी] पट्टी इस तरह लपेटी जाती है कि अन्दर वाली सूती/खादी पट्टी पूर्ण रूप से ढक जाये 
सिर की गीली पट्टी –
लाभ :- सिर की गीली पट्टी से कान का दर्द , सिरदर्द व सिर की जकड़न दूर होती है |
साधन :-
एक मोटे खद्दर के कपडे की पट्टी जो कि इतनी लम्बी हो कि गले के पीछे, के ऊपर से कानों को ढकते हुए आँखों और मस्तक को पूरा ढक ले |
ऊनी कपडे कि पट्टी [ खादी की पट्टी से लगभग दो इंच चौड़ी और दोगुनी लम्बी ]


मूत्राषय प्रदाह(cystitis)के सरल उपचार


विधि :-
खद्दर की पट्टी को ठन्डे पानी में भिगोकर निचोड़ लें तत्पश्चात इस पट्टी को आँखें,मस्तक एवं पीछे कानों को ढकते हुए एक राउण्ड लपेट दें | अब इसके ऊपर ऊनी पट्टी को लगभग दो राउण्ड इस तरह लपेट दें कि नीचे वाली गीली पट्टी अच्छी तरह से ढक जाये | लगभग एक घंटा इस पट्टी को लगायें |
गले की गीली पट्टी-

लाभ :- इस पट्टी को रोगनिवारक प्रभाव पूरे शरीर पर पड़ता है | गले की पट्टी से गले के ऊपर-नीचे की अनावश्यक गर्मी समाप्त होती है |
टांसिलायिटिस, गले के आस-पास की सूजन, गला बैठना,घेंघा जैसे रोगों में लाभकारी है |

*सिर्फ आपरेशन नहीं ,प्रोस्टेट वृद्धि की 100% अचूक हर्बल औषधि *

साधन –
एक सूती पट्टी -गले की चौडाई जितनी चौड़ी एवं इतनी लम्बी कि गले में तीन-चार लपेट लग जाएँ |
गले में तीन-चार लपेट लगने भर की लम्बी, ऊनी पट्टी या मफलर |
विधि :-
सूती पट्टी को ठन्डे पानी में भिगोकर , निचोड़कर गले में तीन-चार लपेटे लगा दें ऊपर से ऊनी पट्टी या मफलर लपेट लें | समय – ४५ मिनट से १ घंटा |

लाभ- छाती के सभी रोग जैसे -खांसी,निमोनिया,क्षय [ फेफड़ों का ] दमा, कफ,पुरानी खांसी में लाभकारी |

*किडनी में क्रिएटिनिन और यूरिया की समस्या के घरेलू उपचार* 

छाती की पट्टी :-
सावधानी –
अत्यंत निर्बल रोगी को पट्टी देते समय सूती/खादी पट्टी को गुनगुने पानी में भिगोकर,निचोड़कर प्रयोग करना चाहिए |
फेफड़ों के रक्तस्राव की अवस्था में पट्टी का प्रयोग कम समय के लिए एवं फेफड़ों की कैविटी [ जैसा कि क्षय में होता है ] भरने हेतु अधिक समय के लिए पट्टी का प्रयोग करना चाहिए |
साधन- खद्दर या सूती कपडे की एक पट्टी जो कि छाती की चौडाई के बराबर चौड़ी हो एवं लम्बाई इतनी कि छाती से पीठ तक घुमाते हुए तीन राउण्ड लग जाएँ |
ऊनी या गर्म कपडे की पट्टी जो नीचे की सूती/खद्दर की पट्टी को ढक ले |
विधि :-
खद्दर या सूती पट्टी को ठन्डे पानी में भिगोकर निचोड़ लें , अब इसे पूरी छाती पर पसलियों के नीचे तक लपेट दें | इस पट्टी के ऊपर ऊनी पट्टी लपेट दें | यह पट्टी रोग की अवस्था के अनुसार १ से ४ घंटे तक बांधी जा सकती है |

फिशर होने के कारण लक्षण और उपचार

धड की गीली पट्टी-
लाभ :- योनि की सूजन, आमाशायिक रोग, पेट-पेडू का दर्द व सूजन, लीवर,तिल्ली के रोगों में अत्यंत लाभकारी है |
विधि :-
यह भी छाती पट्टी की तरह लपेटनी होती है बस इस पट्टी की चौडाई नाभि के नीचे तक बढ़ा लेनी चाहिए एवं पट्टी के दौरान रोगी को लिटाकर सिर खुला रखकर पैर से गर्दन तक कम्बल उढ़ा देना चाहिए | एक से दो घंटा इस पट्टी का प्रयोग करना चाहिए |

स्नायु संस्थान की कमज़ोरी  के नुस्खे

पेडू की गीली पट्टी
लाभ :- पेट के समस्त रोगों,पुरानी पेचिस, कोलायिटिस,पेट की नयी-पुरानी सूजन,अनिद्रा,बुखार एवं स्त्रियों के गुप्त रोगों की रामबाण चिकित्सा है |इसे रात्रि भोजन के दो घंटे बाद पूरी रात तक लपेटा जा सकता है |
साधन –
खद्दर या सूती कपडे की पट्टी इतनी चौड़ी जो पेडू सहित नाभि के तीन अंगुल ऊपर तक आ जाये एवं इतनी लम्बी कि पेडू के तीन-चार लपेट लग सकें |
सूती कपडे से दो इंच चौड़ी एवं इतनी ही लम्बी ऊनी पट्टी |

पेट मे गेस के अनुपम नुस्खे 

विधि :-
उपर्युक्त पट्टियों की विधि से सूती/खद्दर की पट्टी को भिगोकर,निचोड़कर पेडू से नाभि के तीन अंगुल ऊपर तक लपेट दें ,इसके ऊपर से ऊनी पट्टी इस तरह से लपेट दें कि नीचे वाली गीली पट्टी पूरी तरह से ढक जाये |एक से दो घंटा या सारी रात इसे लपेट कर रखें |
जोड़ों की गीली पट्टी-
शरीर के विभिन्न जोड़ों के दर्द एवं सूजन की अवस्था में एक घंटे के लिए जोड़ के आकर के अनुसार गीली फिर ऊनी पट्टी का प्रयोग करें |





पेट की पट्टी लगाने की विधि
विधि- एक सफ़ेद मोटा सूती कपड़ा ( चदरनुमा) लगभग एक मीटर चौड़ा और 2 1/2 मीटर लम्बा लेकर उसे लम्बाई में चार तहकर ले ! लगभग 9 इंच चौड़ी 2 1/2 मीटर लम्बी पट्टी बनाये और साधारण ठन्डे पानी में निचोड़कर व्यक्ति अपने पूरे पेट पर (नाभि को बीच में रखकर आधी पट्टी ऊपर और आधी नाभि से नीचे होनी चाहिए) कमर से घुमाकर लपेट ले जैसे नहाने के बाद तौलिया लपेटते है ! यदि सर्दी बहुत है अथवा रोगी बहुत कमजोर है तो गीली पट्टी के ऊपर कोई पतला तौलिया या ऊनी कपड़ा लपेटे ! आवश्यकता के अनुसार ऊपर से कपड़े पहन कर अपना कोई भी दैनिक कार्य या आराम करे ! यह पट्टी 20 -40 मिनट तक दिन में तीन या चार बार लगायें ! यह पट्टी भोजन के पहले लगाना अधिक अच्छा है परन्तु ऐसा संभव न हो तो दिन में किसी भी समय लगाई जा सकती है ! केवल इस बात का ध्यान रखना है कि जिस समय पट्टी लगाई हुई हो. उस समय कुछ खाना-पीना नहीं है यदि खाना ठीक से न पचता हो तो पट्टी को खाना खाने के बाद लगाने पर खाना हजम करने में सहायता मिलती है ! आपातकाल स्थिति एवं तीव्र रोग की अवस्था में शरीर पर बंधी गीली पट्टी के भाग को वायु के संपर्क में रहने दें! अर्थात गीली पट्टी को सामान्य कपड़ो से न ढके ! प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों में गीली मिटटी का प्रयोग आमतौर पर बताया जाता है! परन्तु आजकल के व्यस्त जीवन में उपयुक्त मिटटी को ढूंढना, घर में रखना, साफ करना असुविधाजनक है ! मिटटी की पट्टी में भी विशेष लाभ तो पानी से ही होता है ! यही लाभ गीले कपड़े की पट्टी से लिया जा सकता है! यह करने में भी आसान है


2018-03-12

चावल के पानी (माँड़) के फायदे // Benefits of rice water

                                  

      क्या आपके घर में भी चावल का पानी यूं ही फेंक दिया जाता है? अगर हां, तो शायद आपको पता नहीं है कि चावल का पानी सेहत के लिए कितना फायदेमंद होता है. यह पानी रोजाना पीने से कई बीमारियों को दूर किया जा सकता है. इसके साथ ही ये शरीर को ताकत देने का भी काम करता है.
बुखार में फायदेमंद -वायरल इंफेक्शन या बुखार होने पर अगर आप चावल के पानी का सेवन करते हैं, तो शरीर में पानी की कमी नहीं होगी, साथ ही आपके शरीर को जरूरी हेल्दी एलिमेंट भी मिलते रहेंगे जो आपको जल्दी ठीक होने में मदद करेंगे.


*औरतों मे सफ़ेद पानी जाने की प्रभावी औषधि 

हाई ब्‍लड प्रेशर को करे कंट्रोल- चावल का पानी हाई ब्‍लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है. चावल में सोडियम की कम मात्रा होती है जो हाई ब्‍लड प्रेशर और हाइपरटेंशन के मरीजों के लिए जरूरी है.तुरंत दे एनर्जी यह आपके शरीर के लिए ऊर्जा का बेहतरीन सोर्स है जो कार्बोहइड्रेट से भरपूर है. सुबह के समय इस पानी को पीना एनर्जी बूस्ट करने के बढ़ि‍या तरीका है. आप चावल के पानी में घी और नमक डालकर पी सकते हैं. यह सेहत के लिए बहुत अच्‍छा है.


*बालों के झड़ने और गंजेपन के रामबाण उपचार 

*कब्ज से राहत
चावल का पानी फाइबर से भरपूर होता है और आपके मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने में मदद करता है. इसके अलावा यह आपके पाचन तंत्र को बेहतर कर डाइजेशन सुधारता है और अच्छे बैक्टेरिया को एक्टिव करता है, जिससे कब्ज की दिक्कत नहीं होती.
*त्‍वचा को चमकदार बनाए- त्वचा की चमक बढ़ने के लिए चावल के पानी का उपयोग किया जा सकता है. चावल के पानी से आप चमकदार त्वचा पा सकते हैं.


7 दिनों में स्तनों का ढीलापन दूर करने के घरेलु नुस्खे
   

 *डी-हाइड्रेशन से बचाए- शरीर में पानी की कमी होना डी-हाइड्रेशन के रूप में सामने आता है. खासतौर से गर्मियों में यह समस्या अधि‍क होती है. चावल का पानी आपके शरीर में पानी की कमी होने से बचाता है.
डायरिया से बचाव बच्चे हों या फिर बड़े, दोनों के लिए डायरिया जैसी समस्या के लिए चावल का पानी बेहद फायदेमंद है. समस्या की शुरुआत में ही चावल के पानी का सेवन करना आपको इसके गंभीर परिणामों से बचा सकता है.


2018-03-07

अकरकरा जड़ी बूटी के आयुर्वेदिक गुण लाभ उपयोग

अकरकरा के पौधे के बारे में कुछ जरूरी जानकारी :-
यह पेड़ भारत में बहुत  कम पाया जाता है | यह पेड़ मुख्य रूप से अरब देश में पाया जाता है | जब बारिश का मौसम शुरू होता है तो इसके छोटे - छोटे पेड़ स्वयं ही उग जाते है |यदि इसकी जड़ को मुंह में चबाते है तो गर्मी लगने लगती है और जीभ पर लेने से जीभ जलनेलगती है | अकरकरा के पौधे को मुख्य रूप से औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है | 
इसको  अलग - अलग स्थान पर अलग - अलग नाम से जानते है |
जैसे :- संस्कृत भाषा में :- आकारकरभ
हिंदी भाषा में :- अकरकरा
पंजाबी भाषा में :- अकरकरा
इस पौधे का स्वरूप :- अकरकरा का पौधा झाड़ीदार और रोयदार होता है | इसके फूल का रंगसफेद और बैंगनी और पीला होता है | इसकी डंठल भुत ही नाजुक होती है | महाराष्ट्र में इसकीडंडी का आचार बनाया जाता है | इसके आलावा इसके डंठल का उपयोग सब्जी बनाने के लिएभी किया जाता है |


अकरकरा का एक औषधि में प्रयोग :- अकरकरा के पौधे के गुण :- यह बल में वृद्धि करता है | इसमें ५० % इंसुलिन की मात्रा पीजाती है | इसमें एक तत्व होता है तो एक क्रिश्टल के रूप में प्राप्त होते है | इसके उपयोग सेप्रतिशाय नामक रोग का नाश होता है | यह मनुष्य की नाड़ियों को बल प्रदान करता है |

किडनी फेल रोग का अचूक इलाज 

मंद्बुधि के लिए :- अकरकरा और ब्राह्मी को एक समान मात्रा में लें | इन दोनों को बारीक़पीसकर चूर्ण बना लें | इस चूर्ण को रोजाना एक चम्मच की मात्रा में खाएं इससे मंद्बुधि तीव्रहोती है |
सिर का दर्द :- अकरकरा की जड़ को बारीक़ पीसकर हल्का गर्म करके लेप तैयार करें | इस लेपको सिर पर लगाने से सिर का दर्द ठीक हो जाता है |
दंत शूल :- अकरकरा और कपूर को एक समान मात्रा में लेकर बारीक़ पीस लें | इस पिसे हुएचूर्ण का मंजन करने से दातों का दर्द ठीक हो जाता है | इसके आलावा अकरकरा की जड़ कोदांत से चबाने से दाड का दर्द मिट जाता है |
2. अकरकरा की जड़ का क्वाथ से कुल्ला करने से या गरागरा करने से दांत का दर्द ठीक होजाता है और साथ ही साथ हिलते हुए दांत भी जम जाते है |
अकरकरा की जड़
हकलाना :- अकरकरा की जड़ को पीसकर बारीक़ चूर्ण बना लें | इसमें काली मिर्च और शहदमिलाकर जीभ पर मलने से जीभ का सूखापन और जड़ता दूर हो जाती है | अगर कोई व्यक्तिज्यादा हकलाता और या तोतला बोलता है तो उसे कम से कम 4 या 6 हफ्ते तक प्रयोग करें |

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि 

कंठ का रोग :- अकरकरा के पत्ते को पानी में डालकर गर्म कर लें | इस पानी से कुल्ला करनेसे तालू , दांत और गले के रोग ठीक हो जाते है |
हिचकी :- अकरकरा के एक ग्राम चूर्ण को शहद के साथ चटाने से हिचकी जैसी समस्या ठीक होजाती है |
कंठ्य स्वर के लिए :- अकरकरा के चूर्ण की 250 से 400 मिलीग्राम की मात्रा में फंकी लेनेसे बच्चो का कंठ्य स्वर सुरीला हो जाता है |
अपस्मार :- अकरकरा और ब्राह्मी को एक साथ क्वाथ बनाकर मिर्गी वाले रोगी को पिलाने से मिर्गी ठीक हो जाती है |

नई और पुरानी खांसी के रामबाण उपचार 

अकरकरा के पत्तों को सिरके के साथ पीसकर इसमें शहद मिलाकर चाटने से अपस्मार का वेगरुक जाता है |
हृदय के रोग :- अकरकरा की जड़ और अर्जुन की छाल को बराबर की मात्रा में लेकर पीस लें |इन दोनों के चूर्ण को दिन में कम से कम दो बार आधा -आधा चम्मच खाने से दिल की धड़कन, घबराहट और कमजोरी में लाभ मिलता है |
सौंठ , अकरकरा और कुलंजन की 25 मिलिग्राम की मात्रा को 400 मिलीलीटर पानी मेंमिलाकर उबल लें | जब इस पानी का चौथा हिस्सा रह जाये तो इसे हृदय के रोगी को पिलाने सेहृदय रोग कम हो जाता है | यदि इसे लगातार कई महीनों तक रोगी को देते है तो यह बीमारीजड़ से दूर हो जाती है |

अकरकरा के फूल
बुखार :- अकरकरा की जड़ को पीस लें | इस पिसे हुए चूर्ण में जैतून मिलाकर मंद अग्नि परपका लें | इस पके हुए तेल से मालिश करने से पसीना आता है जिससे तेज बुखार ठीक हो जाताहै |

पित्ताश्मरी(Gallstone) की अचूक औषधि

साँस की बीमारी के लिए :-अकरकरा की जड़ का चूर्ण बना लें और इस चूर्ण को किसी कपड़े मेंसे छान लें | छन्ने हुए चूर्ण को नाक से सूंघे इससे साँस का अवरोध दूर हो जाता है 
पेट का दर्द :- अकरकरा की जड़ का पीसकर बारीक़ चूर्ण बना लें इस चूर्ण में पिपली का चूर्ण भी मिला दें इन दोनों के मिश्रण की आधे चम्मच की मात्रा को भोजन के बाद लेने से पेट का दर्दठीक हो जाता है |
मासिक धर्म :- अकरकरा की जड़ का क्वाथ बना लें | इस क्वाथ को सुबह - शाम पीने सेमासिक धर्म उचित प्रकार से होने लगता है |
पक्षाघात :-अकरकरा की जड़ को बारीक़ पीसकर इसे महुए के तेल में मिलाकर मालिश करने सेपक्षाघात में लाभ मिलता है |
अकरकरा की जड़ के चूर्ण की 500 मिलीग्राम की मात्रा को शहद के साथ लेने से पक्षाघातठीक हो जाता है | इस दवा को रोजाना सुबह और शाम के समय खाएं |


बिदारीकन्द के औषधीय उपयोग 

आलस दूर करने के लिए :- अकरकरा की जड़ का 100 मिलीग्राम क्वाथ का सेवन करने सेआलस्य दूर हो जाता है |

अकरकरा के पत्ते
गृध्रसी :- अकरकरा की जड़ को अखरोट के तेल में मिलाकर मालिश करने से गृध्रसी का रोगठीक हो जाता है |
इंद्री :- अकरकरा की 10 ग्राम की मात्रा का चूर्ण को 50 ग्राम काढ़े के रस में पीसकर लेप करने से इंद्री मोटी हो जाती है |
विशेष बात :- अकरकरा की मात्रा को किसी अच्छे वैद्य से पूछ कर उपयोग करें | अन्यथा हानि पंहुच सकती है |

2018-02-17

चेहरे की झुर्रियां दूर करने के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपाय


                               

    आप निम्नलिखित सरल व आयुर्वेदिक तरीको को नियमित रूप से अपनाकर अपने चेहरे की झुर्रियों को काफी हद तक दूर रख सकती है तथा बढती उम्र में भी अपनी त्वचा को खुबसूरत व जवां रखकर दुसरो के बीच आकर्षण का केंद्र बन सकती है.
1. झुर्रियों के लिए सबसे बड़ा उपचार है कि त्वचा को शुष्क न होने दें. इसके लिए किसी आयुर्वेदिक ग्लिसरीनयुक्त क्रीम का प्रयोग किया जा सकता है. यदि चेहरे की स्निग्धा बनी रहेगी तो झुर्रियां देर में पड़ेगी, इसलिए ऐसी क्रीम का प्रयोग करें जो चेहरे को स्निग्ध बनाये रखें.
इसके अलावा नाईट क्रीम के प्रयोग से भी झुर्रियों को दूर रखा जा सकता है.


छोटे स्तनों को उन्नत और सूडोल बनाए

2. एक चमच्च ताज़ा ऑरेंज जूस में एक चमच्च प्लेन दही मिलाएं और इस मिश्रण को अपने चेहरे पर १० से १५ मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें. उसके बाद हलके गुनगुने पानी से चेहरा धो लें.
3. एक चमच्च कोकोनट मिल्क के साथ एक चमच्च कोर्न स्टार्च और एक चमच्च पाइनएप्पल जूस मिलाएं. यह लेप धूप से हुए नुकसान को कम करता है.  कोकोनट मिल्क में लैक्टिक एसिड होता है, जो त्वचा को मुलायम बनता है.
4. त्वचा में ताजगी बनाएं रखने के लिए उड़द की दाल के पाउडर में गुलाबजल, ग्लिसरीन और बादाम रोगन मिलाकर चेहरे पर लगायें.


पथरी की चमत्कारी औषधि से डॉक्टर की बोलती बंद!

    उपरोक्त लिखे उपाय सामान्य त्वचा वाले व्यक्तियों के लिए अधिक उपयोगी सिद्ध होंगें.
5. एक चमच्च बेकिंग सोडा लें इसमें एक चमच्च दही मिलाएं और इस मिश्रण को चेहरे पर दो मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें. फिर धीरे धीरे त्वचा की हाथ से मसाज करें और हलके गुनगुने पानी से अच्छी तरह धो लें. यह मिश्रण त्वचा के पोर साफ़ करता है और रुखी त्वचा को बिना किसी जलन के मुलायम बनाता है.
6. अपनी त्वचा को संतुलित बनाये रखने के लिए नियमित रूप से गुलाब जल का प्रयोग करें. 


नई और पुरानी खांसी के रामबाण उपचार 

7. आधा चमच्च जैतून के तेल में डेढ़ चमच्च अच्छी प्रकार मसला हुआ पपीता मिलाएं और इसको ठंडा होने के लिए रख दें. इसके बाद त्वचा पर इसकी मसाज करें और 5 मिनट लगाकर छोड़ दें. फिर सूती कपड़े से बहुत आराम से इसे साफ़ करें.


   

2018-01-24

मेथी के इतने फायदे नहीं जानते होंगे आप!




घर पर आसानी से मिल जाने वाली मेथी में इतने सारे गुण है कि आप सोच भी नहीं सकते है। यह सिर्फ एक मसाला नहीं है बल्कि एक ऐसी दवा है जिसमें हर बीमारी को खत्म करने का दम है। आइए आज हम आपको मेथी के पानी के कुछ चमत्कारिक फायदे  बताते हैं।

पथरी की चमत्कारी औषधि से डॉक्टर की बोलती बंद!

करें ये काम-
एक पानी से भरा गिलास ले कर उसमें दो चम्‍मच मेथी दाना डाल कर रातभर के लिये भिगो दें। सुबह इस पानी को छानें और खाली पेट पी जाएं। रातभर मेथी भिगोने से पानी में एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी ऑक्‍सीडेंट गुण बढ जाते हैं। इससे शरीर की तमाम बीमारियां चुटकियों में खत्म हो जाती है। आइए आपको बताते है कौन सी है वो खतरनाक 7 बीमारियां जो भाग जाएंगी इस पानी को पीने से।
वजन हो कम


यदि आप भिगोई हुई मेथी के साथ उसका पानी भी पियें तो आपको जबरदस्‍ती की भूख नहीं लगेगी। रोज एक महीने तक मेथी का पानी पीने से वजन कम करने में मदद मिलती है।
मधुमेह-
मेथी में galactomannan होता है जो कि एक बहुत जरुरी फाइबर कम्‍पाउंड है। इससे रक्‍त में शक्‍कर बड़ी ही धीमी गति से घुलती है। इस कारण से मधुमेह नहीं होता।
कोलेस्‍ट्रॉल लेवल घटाए-
बहुत सारी स्‍टडीज़ में प्रूव हुआ है कि मेथी खाने से या उसका पानी पीने से शरीर से खराब कोलेस्‍ट्रॉल का लेवल कम होकर अच्‍छे कोलेस्‍ट्रॉल का लेवल बढ़ता है।

*वात रोग (जोड़ों का दर्द ,कमर दर्द,गठिया,सूजन,लकवा) को दूर करने के उपाय 

ब्लड प्रेशर होगा कंट्रोल-
मेथी में एक galactomannan नामक कम्‍पाउंड और पोटैशियम होता है। ये दो सामग्रियां आपके ब्‍लड प्रेशर को कंट्रोल करने में बड़ी ही सहायक होती हैं।
गठिया रोग से बचाए-
इसमें एंटीऑक्‍सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होने के नातेए मेथी का पानी गठिया से होने वाले दर्द में भी राहत दिलाती है।
कैंसर से बचाए-
मेथी में ढेर सारा फाइबर होता है जो कि शरीर से विषैले तत्‍वों को निकाल फेंकती है और पेट के कैंसर से बचाती है।किडनी स्‍टोनअगर आप भिगोई हुई मेथी का पानी 1 महीने तक हर सुबह खाली पेट पियेंगे आपकी किडनी से स्‍टोन जल्‍द ही निकल जाएंगे।



2018-01-20

आक के पौधे से नपुंसकता का स्थायी इलाज// Permanent cure of impotence with madar plant



     नपुंसकता  दूर करने के लिए कुछ छुहारे लें इन छुहारों की गुठली निकालकर अलग कर ले। गुठलियों के स्थान पर आक के पौधे का दूध भर कर इस पर आटा लगाकर आग पर पकने के लिए रख दें । जब आटा पक कर जल जाये तो छुहारे निकाल कर पीस ले । फिर इसकी छोटी - छोटी गोलियाँ बनाकर रात को सोते समय खाएं और ऊपर से दूध पी ले । इस उपयोग से स्तम्भन में लाभ मिलता है और गुप्तांग में कठोरता भी आएगी |  


 किडनी फेल रोग का अचूक इलाज 

शिश्न के रोग का उपचार करने के लिए शहद और गाय के घी में आक के पौधे का दूध बराबर मात्रा में मिलाकर किसी शीशी में ४-५ घंटे तक रख दें । फिर इसकी मालिश करे किन्तु सुपारी और इंद्री की सीवन से बचा कर रखें । और ऊपर से एरंड का पत्ता और पान बांधकर कुछ देर रखे । इस प्रकार लगातार सात दिनों तक मालिश करें । फिर १५ दिन बाद, एक महीने में २ बार मालिश करे । इससे शिश्न के सारे रोगो को फायदा मिलता है |

वीर्य की मात्रा बढ़ाने और गाढ़ा करने के उपाय 

    आक के पौधे की जड़ को छाया में सुखाकर इसे पीस ले । लगभग २० ग्राम की मात्रा का चूर्ण को आधा किलो दूध में उबालकर इसकी दही जमा दें । फिर इस दही में से घी निकल ले । इस प्रकार का तैयार घी को खाने से नामर्दी की शिकायत दूर हो जाती है ।

2018-01-13

शारीरिक कमजोरी का होम्योपैथिक इलाज




    भारत का हर तीसरा चौथा व्यक्ति कमजोरी एवं दुबलेपन से पीड़ित है। इसका एक कारण गरीबी, भुखमरी, तंगहाली, खाने का अभाव, अधिक शारीरिक एवं मानसिक श्रम और खान-पान में उचित पोषक तत्त्वों का अभाव हो सकता है। भली-भांति शारीरिक परीक्षण करने पर बहुत-से रोगियों में डायबिटीज, टी.बी., आमाशय-आंतों के रोग, परजीवी कीड़े, खून में कमी जैसी व्याधियां पाई जाती है। समुचित उपचार करने पर कमजोरी दूर करने में आशातीत सफलता मिलती है।
कमजोरी महसूस करने के कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण कारण इस प्रकार हैं –

*किडनी फेल रोग का अचूक इलाज* 

हृदय रोगों से कमजोरी : 
बच्चों में जोड़ों के दर्द तथा बुखार से उत्पन्न हृदय रोग के कारण संकरे हुए हृदय के वॉल्व से, कोरेनरी हृदय रोग से, उच्च रक्तचाप से, वायरल बुखार के हृदय की मांसपेशी पर दुष्प्रभाव से, फेफड़ों के कोष्ठों की सूजन से एवं फेफड़ों के दीर्घकालिक रोगों से जब हृदय फेल होने लगता है, तो रोगी कमजोरी की शिकायत करते हैं। हृदय फेल्योर के रोगी में कुछ अंग्रेजी दवाओं लेसिक्स वगैरह के दुष्प्रभाव भी होते हैं। ऐसे रोगियों को अल्कोहल तथा अल्कोहल प्रधान टॉनिकों से बचना चाहिए। रोगी को आराम कराकर कम नमक वाला सुपाच्य भोजन दें और त्वरित उपचार कराएं।

शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 

   गुर्दो के दीर्घकालिक संक्रामक रोग (क्रोनिक पाइलो नेफराइटिस); गुर्दे की पुरानी सूजन (नेफराइटिस), दोनों गुर्दो में पथरियां (स्टोन्स), मूत्रवाहिनी (यूरेटर) में पथरियां, डायबिटीज का गुर्दो पर दुष्प्रभाव, प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ा हुआ आकार समुचित उपचार के अभाव में धीरे-धीरे गुर्दो की कार्यप्रणाली को नष्ट करके उनकी कार्यक्षमता घटाते रहते हैं, जिससे क्रॉनिक रीनल फेल्योर की दशा उत्पन्न हो जाती है, जिसमें रोगी अत्यधिक कमजोरी के अलावा बहुत कम मूत्र होने, खून की कमी, जी मिचलाना, उल्टियां होना, भूख नहीं लगना, छाती में दर्द, घबराहट, सिरदर्द, हाथ-पैरों में दर्द एवं हाथ-पैरों में अवांछनीय गति इत्यादि की शिकायत करते हैं। प्राय: इन रोगियों का ब्लडप्रेशर अधिक मिलता है और त्वचा का रंग पीला बादामी-सा हो जाता है तथा रक्त में ब्लड यूरिया एवं क्रिटेनीन जैसे विषैले तत्त्वों की मात्रा बढ़ने के साथ-साथ शरीर में सूजन भी आ जाती है। इन रोगियों को भी शराब तथा प्रोटीनयुक्त टॉनिक नहीं लेने चाहिए. बल्कि ग्लूकोज, चीनी व चावल लाभदायक माने जाते हैं।

वात रोग (जोड़ों का दर्द ,कमर दर्द,गठिया,सूजन,लकवा) को दूर करने के उपाय* 


गुर्दा फेल होने से कमजोरी : 
  


संक्रामक रोगों से कमजोरी :
लिवर, आंत, मूत्र तंत्र, श्वसन तंत्र, स्रायु तंत्र में दीर्घकालीन संक्रामक रोग होने पर संक्रमण करने वाले बैक्टीरिया, वायरस, प्रोटोजोआ कुछ विषैले पदार्थों का स्राव करते हैं, जिनसे भूख कम हो जाती है और रक्त भी ठीक प्रकार से नहीं बन पाता, जिससे रोगी कमजोरी बने रहने की शिकायत करते हैं। ऐसी स्थिति में संबंधित संक्रामक रोग का उचित उपचार आवश्यक है।

हस्त  मेथुन जनित यौन दुर्बलता के उपचार 

कैंसर से कमजोरी : 
   लिवर, आमाशय, बड़ी आंत, गुर्दा, बच्चेदानी, फेफड़े, हड्डी इत्यादि के कैंसर के रोगी विभिन्न कारणों से कुछ महीनों से कमजोरी रहने की शिकायत करते हैं। इनका संदेह होने पर रोगी की भली-भांति शारीरिक परीक्षा करवानी चाहिए। ल्युकीमिया (रक्त कैंसर) के निदान के लिए रक्त की जांच आवश्यक है।
कुछ दवाओं से भी कमजोरी : आवश्यकता से अधिक इंसुलिट के सेवन से, कुछ अंग्रेजी दवाओं-जैसे लेसिक्स आदि के अधिक प्रयोग से, स्टीरॉयड दवाओं के अनाप-शनाप सेवन से भी रोगी कमजोरी की शिकायत करते हैं। इसलिए उपरोक्त दवाओं का अधिक प्रयोग हितकर नहीं है।
मानसिक रोगों में कमजोरी : 
   डिप्रेशन, शिजोफ्रेनिया, घबराहट इत्यादि से रोगी कमजोरी बने रहने की शिकायत करते हैं, जिनका उपचार मूल कारण के अनुसार ही करना ठीक रहता है, न कि कैप्सूल अथवा टॉनिक आदि का सेवन करना।
कैसे दूर करें दुबलापन : वैसे यदि उपरोक्त वर्जित कारणों का निराकरण कर दिया जाए, तो काफी हद तक कमजोरी और दुबलेपन से छुटकारा मिल सकता है, किन्तु इन सबके साथ ही यदि हम अपने आहार-विहार पर अधिक ध्यान दें, दिनचर्या को व्यवस्थित रखें, हल्के-फुल्के व्यायाम करते रहें, तनावयुक्त रहते हुए हँसते-हँसते रहें, तो कमजोरी एवं दुबलेपन से निजात पाई जा सकती है।

हस्त  मेथुन जनित यौन दुर्बलता के उपचार 

सदैव भूख लगने पर ही खाएं,खूब चबा-चबाकर खाएं, भूख से सदा थोड़ा कम खाएं, भोजन के साथ पानी कम लें, अधिक मिर्च-मसाले का भोजन न करें, चाय, कॉफी, ठंडे पेय से बचे, तली हुई चीजों का पूर्ण त्याग करें, चाय-चीनी, चिकनाई कम लें, चोकरयुक्त आटे की रोटी खाएं, दालें छिलकायुक्त खाएं, सब्जियां सादी रीति से बनाकर खाएं, सलाद (नीबू, खीरा, ककड़ी, गाजर, मूली, अदरक आदि) अधिक खाएं, प्रातः काल नाश्ते में अंकुरित मुंग-चना और दलिया लें, प्रातः सोकर उठने के बाद पानी पिया करें, दिनभर पानी खूब पियें, तीसरे पहर मौसम के फल लें, रात में सोते समय दूध लें, दोपहर को रोटी, दाल, सब्जी व दही लें, रात्रि में रोटी एवं सब्जी लें, हरी सब्जियां अधिक खाएं, तली हई वस्तुएं अधिक खा लेने अथवा अन्य कोई अनाप-शनाप वस्तु खा लेने के बाद उपवास करें।

    प्राकृतिक चिकित्सकों का मत है कि वजन बढ़ाने के लिए दो-तीन दिन सिर्फ फलाहार करें। फलों के साथ चोकर मिलाकर खाएं, कब्जं दूर करने के लिए पपीता खाएं। फलाहार से भूख अधिक लगती है, पाचन-शक्ति बढ़ती है।

कलौंजी(प्याज के बीज) के औषधीय उपयोग

     शिथिलता, दुबलापन एवं कमजोरी दूर करने में व्यायाम का महत्त्व आहार से कम नहीं है। हल्के-फुल्के व्यायाम, जैसे प्रात:काल में ‘जॉगिंग’ करना, हल्के-फुल्के खेल (बैडमिंटन, टेबल टेनिस, फुटबाल आदि) थोड़ी देर खेलना सेहत के लिए फायदेमंद होता है।
    नशीली वस्तुएं-जैसे चाय, तम्बाकू, बीड़ी, सिगरेट, पान, शराब आदि से अनेक व्याधियां हो जाती हैं और स्वस्थ व्यक्ति भी दुबला होता जाता है। अश्लील साहित्य एवं चिंतन भी न सिर्फ मानसिक, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य को भी शिथिल करता है।

नई और पुरानी खांसी के रामबाण उपचार 

कमजोरी का होमियोपैथिक इलाज
• रतिरोगों के कारण कमजोरी एवं दुबलापन हो, तो ‘एग्नसकैस्टस’, ‘फॉस्फोरिक एसिड’

• गुर्दे संबंधी परेशानी हो, तो ‘लाइकोपोडियम’, ‘बरबेरिस’
• हारमोन स्राव की गड़बड़ी से कमजोरी जुड़ी हो, तो ‘बेरयटकार्ब’, ‘आयोडियम’, ‘थायरोइडिनम’
• नसों संबंधी परेशानी के कारण कमजोरी महसूस होती हो, तो ‘फाइवफॉस’, ‘कालीफॉस’
• रक्तहीनता के कारण कमजोरी व दुबलापन हो, तो ‘चाइना’ व ‘फेरमफॉस’ एवं ‘नेट्रमम्यूर’ औषधियां उपयोगी एवं अत्यंत लाभप्रद हैं।
चूंकि होमियोपैथिक चिकित्सा पद्धति में रोग के नाम से ज्यादा रोग एवं रोगी के लक्षणों का अधिक महत्त्व है। अतः लक्षणों के आधार पर कमजोरी एवं दुबलेपन की निम्न औषधियां अत्यधिक कारगर रही हैं –
• यदि दस्त वगैरह की वजह से कमजोरी हो, तो ‘चाइना’

स्त्रियों के योन रोग : कारण लक्षण और उपचार

• बुखार वगैरह हो, तो ‘आर्सेनिक’, ‘ब्रायोनिया’
• मांसपेशियों में टूटन हो, दर्द हो, तो ‘बेलिस पेरेनिस’; पिकारिक एसिड’
• गर्भाशय संबंधी परेशानी की वजह से कमजोरी हो, तो ‘सीपिया’,
• हृदय संबंधी रोगों के कारण कमजोरी हो, तो ‘डिजिटेलिस’,’जेलसीमियम’
 किसी रोग के बाद कमजोरी हो, तो ‘एवेना सैटाइवा’
• भूख न लगती हो, तो ‘एल्फा-एल्फा’, ‘रसटॉक्स’

*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*

• प्राणशक्ति लगभग जा चुकी हुई, त्वचा ठंडी, रोगी मृतप्राय पड़ा रहता है, नाड़ी अनियमित, त्वचा पर नीलापन, बिना तेज पंखे की हवा के रोगी सांस ले ही नहीं सकता। कभी-कभी काला रक्तस्राव, मसूड़ों से, नाक से खून, गैस अधिक बनना, चेहरा पीला होना आदि लक्षण मिलने पर ‘कमजोरी’ की प्रचण्ड अवस्था में ‘काबोंवेज’ उक्त दवा 3 × से 200 शक्ति में देनी चाहिए। इसके अलावा ‘म्यूरियाटिक एसिड’ और ‘आर्सेनिक’ भी कमजोरी की उत्तम दवाएं हैं। ये 30 शक्ति में लें।


2017-12-22

डेंगू बुखार के आयुर्वेदिक,घरेलू उपचार // Ayurvedic, home remedies of dengue fever




    आज के समय में डेंगू एक बहुत ही भयंकर संक्रामक बीमारी बनकर उभरी है। डेंगू एक उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पायी जाने वाली बीमारी है जो एडीज इजिप्टी मच्छरों के काटने से होता है। डेंगू बुखार को ब्रेक बोन बुखार के नाम से भी जाना जाता है। इस प्रजाति यानि डेंगू के मच्छर ज्यादातर दिन में काटते है, और साफ़ पानी में पैदा होते है। डेंगू का इलाज (Dengue Treatment in Hindi) समय पर करना बहुत आवश्यक है, नहीं तो कई बार समय पर इलाज न होने के कारण रोगी की मृत्यु भी हो सकती है।
इसीलिए हम आपको बताने जा रहे है डेंगू के कुछ इलाज और उपचारो के बारे में:-
घरेलू इलाज
बाबा रामदेव
आयुर्वेदिक इलाज
डेंगू बुख़ार एक खतरनाक संक्रमण है जो डेंगू वायरस के कारण होता है। दूसरे विश्व युद्ध के बाद से यह रोग एक बड़ी समस्या बन चुका है। वर्ष 1960 से, काफी लोग डेंगू बुख़ार से पीड़ित हो रहे हैं। डेंगू वायरस से बचने के लिये कोई वैक्सीन अभी तक उपलब्ध नहीं है। इसीलिए जितना हो सके इस रोग से बचने के प्रयास करने चाहिए।
डेंगू की समस्या वयस्कों से अधिक शिशुओं तथा बच्चों में होने की अधिक संभावना होती है।
डेंगू बुखार (dengue fever in hindi) मुख्‍य रूप से तीन प्रकार का होता है- साधारण डेंगू बुखार, डेंगू हैमरेजिक बुखार (DHF) और डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS)।

संधिवात (आर्थराईटिज)  के घरेलू,आयुर्वेदिक उपाय

साधारण डेंगू बुखार को क्‍लासिकल डेंगू भी खा जाता हैं, और यह सामान्‍यत: पांच से सात दिनों तक रहता है। इसमें रोगी को ठंड लगने के बाद तेज बुखार, सिर, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, आंखों के पिछले हिस्से में दर्द, जी मिचलाना, कमजोरी लगना, भूख न लगना के लक्षण नजर आते हैं।
डेंगू का इलाज
हर साल जुलाई से अक्टूबर के महीने में डेंगू का प्रकोप ज्यादा रहता है। इसीलिए इस समय में सतर्क रहना चाहिए। आम तौर पर डेंगू का इलाज चिकित्सकीय प्रक्रिया से करवाने में ही फायदा रहता है परन्तु इसके अलावा कई आयुर्वेदिक और घरेलू तरीको से भी डेंगू का इलाज (dengue treatment) आसानी से किया जा सकता है।
तो आईये विस्तार में चर्चा करते है डेंगू के इलाज के बारे में:-
डेंगू का घरेलू इलाज
डेंगू एक (dengue fever in hindi) विषाणु-जनित रोग है जिसके लक्षण कई अन्य बिमारिओ जैसे टाइफाइड और मलेरिया से मिलते जुलते होते है जिसके कारण डॉक्टर्स समय पर सटीक निदान नहीं कर पाते है ऐसे में घरेलू उपाय और इलाज बड़े कारगर साबित होते है।

हाइड्रोसील(अंडकोष वृद्धि) के  घरेलू  और होम्योपैथिक उपचार

धनिये के पत्तो का जूस (Juice of Coriander Leaves)

डेंगू के इलाज में धनिये के पत्तो के रस का सेवन करना बहुत फायदेमंद रहता है। और इसे डेंगू का सबसे अच्छा घरेलू इलाज/उपचार भी माना गया है। आप इन पत्तियों को नियमित आहार के हिस्से के रूप में शामिल कर सकते हैं या नीचे दिए गए चरणों का पालन कर सकते हैं।
चरण 1: धनिया की पत्तियों का कटोरा लें और उन्हें अच्छी तरह धो लें।
चरण 2: पानी का कटोरा लें और धनिया के पत्तों को मिला लें।
चरण 3: मिश्रण को ब्लेंडर में रखो।
चरण 4: अब इस रस का सेवन दिन में अधिक से अधिक करे।
धनिये की पत्तियों में विटामिन सी की अधिक मात्रा होती है, और वे रोगप्रतिरक्षा बढ़ाने में सहायता करते हैं।

*किडनी फेल रोग का अचूक इलाज* 

अनार का रस (Pomegranate Juice)
डेंगू का बुखार होने पर शरीर में खून की कमी के साथ प्लैटलैट्स कि संख्या भी कम होने लगती है। जिसके कारण जी मचलने लगता है। ऐसे में अनार के रस का सेवन बेहद लाभकारी रहता है। अनार खून कि कमी को दूर करने के साथ साथ प्लेटलेट की संख्या बढ़ाने में भी मदद करता है।
इसके अलावा अनार के सेवन से कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को भी कम किया जा सकता है।
मेथी (Fenugreek)
डेंगू बुखार के इलाज में मेथी की पत्तिया लेने से बुखार कम होने लगता है, और शरीर में तेज़ हो रहे दर्द में आराम मिलता है जिससे रोगी को आराम मिलता है। विश्वभर में डेंगू के इलाज के लिए यूज़ में ली जाने वाली यह एक विख्यात घरेलू उपाय है। आप पत्तियों को पानी में भिगो सकते हैं और फिर इसे पी सकते हैं या आप मेथी पाउडर का इस्तेमाल पानी में मिलाकर कर सकते है।
बाबा रामदेव द्वारा दिया गया डेंगू का इलाज

हस्त  मेथुन जनित यौन दुर्बलता के उपचार 

पपीते की पत्तियों का रस
कुछ लोगो का मानना है की डेंगू बुखार (dengue fever) में पपीते की पत्तियों के रस का सेवन केवल एक भ्रम है, परन्तु कई शोध पत्रों और अद्ध्यनो ने यह साबित किया है कि डेंगू में पपीता के पत्ते का रस बेहद फायदेमंद है और सबसे अच्छा घरेलू इलाज में से एक है।
डेंगू बुखार के इलाज के लिए पपीते के पत्तो का रस इस प्रकार बनाये;
चरण 1: सबसे पहले ताजा पपीता का पत्ता लें और इसे टुकड़ो में काट लें।
चरण 2: 10 मिलीलीटर ठंडे पानी के साथ पत्ते मिलाएं।
चरण 3: मिश्रण को अच्छे से मिलाये और छान ले।
चरण 4: दिन में चार बार इस रस का सेवन करे।

बंद नाक खोलने और कफ़ निकालने के अनुपम नुस्खे

पपीते में मौजूद कार्बनिक यौगिकों और पोषक तत्व शरीर में रक्त कोशिकाओं को बढ़ा सकते हैं; विटामिन सी के विशाल संसाधन प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्तेजित करने में सहायता कर सकते हैं, और एंटीऑक्सिडेंट रक्त से अन्य विषाक्त पदार्थों को नष्ट करने का अपना काम करते हैं।
डेंगू बुखार (dengue fever) में पपीते के पत्तो के रस का सेवन को डेंगू के प्राकृतिक इलाज (Dengue natural Treatment) होने के रूप में जाना जाता है।
इस समय में पपीते की पत्तियों का इस्तेमाल न करे;
आप गर्भवती हैं या स्तनपान करवा रही है।
पपीन नामक यौगिक के लिए एलर्जी है।
आपको लाटेकस (Latex) से एलर्जी है।
आप सर्जरी से गुजर चुके हैं या जल्द ही कोई सर्जरी होने वाली है।

*पित्ताश्मरी(Gallstone) की अचूक औषधि*

नीम के पत्तों का रस (Neem Leaves’ Juice)
नीम के पत्ते कई बीमारियों के लिए उपयोगी माना जाता है और डेंगू उनमें से एक है। डेंगू के इलाज के लिए नीम के पत्तों का उपयोग इस प्रकार करे:
चरण 1: सबसे पहले ताजे नीम के पत्तों का एक छोटा कटोरा और ठंडे पानी का कटोरा लें।
चरण 2: पत्तियों को अच्छे से पीस कर और उन्हें फ़िल्टर करें।
चरण 3: इस मिश्रण का लगभग 10 मिलीलीटर तीन से चार बार ले।
बुखार धीरे-धीरे कम हो जाएगा। बुखार के कम होने के अगले दो से तीनो दिनों के बाद तक इसका सेवन करे।
बार बार पानी पिए (Drink Plenty of Water)
किसी भी प्रकार के बुखार जिसके कारण शरीर में पानी की कमी होती है, उसमे तरल पदार्थो का सेवन अधिक से अधिक करना चाहिए। इसीलिए डेंगू में जितना हो सके बार बार पानी पिए। डेंगू में तेज़ बुखार और शरीर दर्द के कारण रक्त संचार के साथ शरीर डिहाइड्रेट हो जाता है। ऐसे में शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए अधिक से अधिक पानी (गर्म पानी बेहतर होगा) का उपयोग बहुत लाभकारी होता है।
ऐसा करने से शरीर में ताकत बनी रहती है जिससे सिरदर्द और दर्द में थोड़ी राहत मिलती है। इसी के साथ पानी शरीर से विषाक्त पदार्थों को जलाने के साथ हानिकारक रोगज़नक़ों के प्रभावों को खत्म करने में भी सहायता करता है।

*प्रोस्टेट बढ़ने से मूत्र रुकावट की अचूक  औषधि*

डेंगू का आयुर्वेदिक इलाज
गिलोय (Giloy) से करे डेंगू का इलाज
गिलोय से डेंगू के इलाज के लिए सबसे पहले आप गिलोय बेल की डंडी ले, और डंडी के छोटे छोटे टुकड़े करें। अब इसे दो गिलास पानी मे उबालें, जब पानी आधा रह जाए तो इसे उबालना बंद कर दें। अब इसे ठंडा होने दे और ठंडा होते ही इसे रोगी को पिलाये। करीब 45 मिनट के बाद बॉडी में ब्लड प्लेटलेट्स बढ़ना शुरू हो जाएंगे।
हल्दी (Turmeric) से करे डेंगू का उपचार
हल्दी को आपकी चयापचय शक्ति यानी मेटाबोलिज्म और हीलिंग प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए भी जाना जाता है। डेंगू के इलाज में आप हल्दी का सेवन आप दूध के साथ कर सकते हैं।

गेहूं के जवारे हैं अच्छे स्वास्थय की कुंजी. 

तुलसी की पत्तियों से बनी चाय

जैसा की उष्ण कटिबंधीय देशों में पारंपरिक विश्वास या ये माना जाता है कि, उबली हुई तुलसी का पानी पीने से न केवल डेंगू के लक्षण कम होते है बल्कि ये बुखार के प्रकोप को भी रोक सकता है। तुलसी के पत्तियों से बनी चाय से इस प्रकार करे डेंगू का इलाज:
चरण 1: सबसे पहले पंद्रह तुलसी के पत्तों को लें और उन्हें पानी में उबाल लें।
चरण 2: अब इस मिश्रण को ठंडा होने दे।
चरण 3: अब इस मिश्रण का हर दिन चार से पांच बार सेवन करे।
तुलसी कि पत्तो से बने पानी को पीने से पसीना अधिक आता है, जिसके परिणामस्वरूप मच्छर आपको नहीं काटते है। इसके अलावा तुलसी के पत्तो में सिनामाइक एसिड (Cinnamic acid) पाया जाता है, जो रक्त संचार (Blood Pressure), साँस लेने की समस्याओं में सुधार आदि में मदद करता है।
इसके अलावा तुलसी के पानी में २ ग्राम काली मिर्च मिलाकर इसका सेवन करने से आपकी रोगप्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है।
तुलसी की पत्तियों का इस्तेमाल वे व्यक्ति न करे;
जिन्ह ब्लीडिंग डिसऑर्डर है।
जिन्हे लौ ब्लड प्रेशर है