20.10.18

टीबी रोग को समूल खत्म करने के घरेलू नुस्खे

                             


टीबी का घरेलू उपचार : 

टीबी एक ऐसी बीमारी है जो मायकोइक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया के कारण फैलती है। यह ज्यादातर फेफ़डों में होती है और इससे रोगी को खांसी, कफ और बुखार हो जाता है। यह एक तरह का छूत का रोग है जिसका अगर शुरूआत में ही इलाज न किया गया तो यह रोगी के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। वैसे तो टीबी कोई आनुवांशिक रोग नहीं है और यह किसी को भी हो सकती है लेकिन जब परिवार में किसी एक सदस्य को टीबी हो जाए तो बाकि लोगों को काफी परहेज रखना पड़ता है क्योंकि रोगी के खांसने और छिकनें से जीवाणु फैल जाते हैं जिससे दूसरे सदस्य को भी यह समस्या हो सकती है। इस बीमारी का इलाज काफी धीमा है। रोगी को ठीक होने में काफी समय लग जाता है। ऐसे में डॉक्टरों की दवाओं के साथ टी बी का घरेलू इलाज भी कर सकते हैं जिससे टीबी के रोगी को फायदा होगा। आइए जानिए इसके कारण, लक्षण और घरेलू नुस्खों के बारे में


टीबी के कारण

अधिक धूम्रपान
शराब का सेवन
साफ-सफाई न रखना
प्रदूषित हवा में सांस लेना
टीबी के लक्षण
भूख न लगना
वजन कम हो जाना
बुखार
लगातार खांसी आना और इसके साथ बलगम व खून निकलना
गर्दन की ग्रंथियों में सूजन या फोड़ा होना
सीने में दर्द
सांस तेज होना
थकान, कमजोरी

टीबी के घरेलू उपाय

1. लहसुन

इसमें काफी मात्रा में सल्फयूरिक एसिड पाया जाता है जो टीबी के कीटाणुओं को खत्म करने में मदद करता है। इसके लिए आधा चम्मच लहसुन, 1 कप दूध और 4 कप पानी को एक साथ उबालें। जब यह मिश्रण 1 चौथाई रह जाए तो इसे दिन में 3 बार पीने से टीबी रोग में फायदा होता है। इसके अलावा गर्म दूध में लहसुन मिलाकर भी पीया जा सकता है। इसके लिए दूध में लहसुन की कलियां उबालें और फिर इसका सेवन करें।


2. केला

इसके लिए 1 पके हुए केले को मसलकर नारियल पानी में मिलाएं और इसके बाद इसमें शहद और दही मिलाएं। इसे दिन में दो बार खाने से रोगी को फायदा होता है। इसके अलावा कच्चे केले का जूस बनाकर भी रोजाना पी सकते हैं।

3. आंवला

कच्चे आंवले को पीसकर इसका जूस बना लें और इसमें 1 चम्मच शहद मिलाकर रोजाना सुबह पीने से फायदा होता है।

4. संतरा

इसके लिए ताजा संतरे के जूस में नमक और शहद मिलाकर रोजाना सुबह-शाम पीएं। इसके अलावा संतरा खाने से भी टी बी के रोगी को फायदा होता है।

5. काली मिर्च

फेफड़ों में जमा कफ और खांसी को दूर करने में काली मिर्च काफी फायदेमंद होती है। इसके लिए थोड़े से मक्खन में 8-10 काली मिर्च फ्राई करें और इसमें 1 चुटकी हींग मिलाकर पीस लें। इस मिश्रण को तीन बराबर भागों में बांटकर दिन में 7-8 बार लें।

6. अखरोट

इसको पीस कर पाउडर बना लें और इसमें कुछ पीसी हुए लहसुन की कलियां मिलाएं। अब इसमें घर में बना हुआ ताजा मक्खन मिलाकर खाएं। 

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7.10.18

100 साल स्वस्थ जीवन के रहस्य


                                                      


 पहले के लोग निरोगी रहकर 100 वर्ष से भी ज्यादा ‍जिंदा रहकर जिंदगी का लुफ्त उठा लेते थे, लेकिन आजकल का व्यक्ति तो 60 के बाद धक्के खाने लगता है और मुश्किल से ही 80 पार कर पाता है। शोध से पता चला है कि अच्छी और सक्रिय जीवनशैली का फायदा उम्र के किसी भी पड़ाव में मिल सकता है।
हालांकि आज भी ऐसे कई लोग हैं जो अपनी उम्र का शतक लगाकर ढेर सारे अनुभव और शांति अपने साथ ले जाते हैं और ऐसे ही लोग को प्रकृति पूर्ण जीवन के लिए पुन: गर्भ उपलब्ध करा देती है। प्रकृति का चक्र पूरा करना बेहद जरूरी है। कोई फल बगैर पके वृक्ष से नीचे गिर गया है तो उसे नीचे भी वही प्रक्रिया पूर्ण करना होगी या फिर वह दुर्गति का शिकार होगा और नए जीवन के लिए भटकता रहेगा। तो जानते हैं सौ वर्ष जिंदा रहने के पांच राज.

अच्छा भोजन : अच्छा भोजन चयन करना जरूरी है। ज्यादा मिर्च और तेल का भोजन नहीं करना चाहिए। बेसन और मैदे से बने आइटम तो त्याग ही देना चाहिए। किसी भी प्रकार का नशा नहीं करना चाहिए। सम्यक आहार लेला चाहिए अर्थात न ज्यादा और न कम।
   भोजन करते वक्त जितनी भूख है उससे दो रोटी कम खाएं। भोजन में सलाद का ज्यादा प्रयोग करें। भोजन बैठकर (पालथी मारकर) ही करें। भोजन करते वक्त मन प्रसन्नचित्त रखें। ऐसा भोजन न करें, जिससे दांतों और आंतों को अतिरिक्त श्रम करना पड़े। भोजन करने के एक घंटे बाद ही पानी पीएं। यह भी ध्यान रखें क‍ि थाली में हाथ न धोएं। रात्रि का भोजन बहुत कम ही करें।
    कहते हैं कि खान-पान में मात्रा जानने वाले, संभोग में नियम पालने वाले और अन्य बातों और इंद्रियों में संयम और सम्यकता समझने वाले को जब आंधी आती है तो सिर्फ छूकर चली जाती है, इससे विपरीत उक्त बातों का पालन न करने वाले को जड़ सहित उखाड़कर फेंक देती है।

जल-वायु : धरती की जलवायु अच्छी होगी तो धरती पर सेहतमंद होगी उसी तरह हमारे शरीर के भीतर की जल वायु का शुद्ध और तरोताजा होना जरूरी है। प्रदूषित जल और वायु से जहां भोजन खराब होता है वहीं इससे गंभीर रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है।
जल : पानी (जल) पीएं छानकर। ध्यान रहे पानी हलका और मीठा पीएं। जब प्यास लगे तब पानी पीएं। पानी बैठकर ही पीएं। पानी गिलास से पीएं या फिर हाथों की अंजुली बनाकर ही पीएं। ऊपर से मुंह में पानी डालकर पीने के अपने नुकसान हैं। जिस पात्र में पानी भरा जाता है व पात्र ईशान कोण में रखा हो, उसके आसपास की जगह साफ हो।
वायु : भोजन कुछ दिन न मिले तो जीवन चल जाएगा। पानी कुछ घंटे न मिले तो भी चल जाएगा, लेकिन हवा हमें हर पल चाहिए। जिस तरह दूषित भोजन और पानी स्वत: ही निकल जाते हैं या कभी-कभार निकालने का प्रयास करते हैं, उसी तरह शरीर के फेफड़ों और पेट में एकत्रित दूषित वायु को निकालने का प्रयास ‍करें। हलके प्रेशर से सांस बाहर फेंक दें, फिर पूरी गहराई से सांस भीतर खींचें, भ्रस्त्रिका और कपालभाति के इस हिस्से को जब भी समय मिले करते रहें। छींक आए तो पूरी ताकत से छींकें।
    शहरी प्रदूषण के कारण शरीर में दूषित वायु के होने की स्थिति में भी उम्र क्षीण होती है और रोगों की उत्पत्ति होती है। पेट में पड़ा भोजन दूषित हो जाता है, जल भी दूषित हो जाता है तो फिर वायु क्यों नहीं। यदि आप लगातार दूषित वायु ही ग्रहण कर रहे हैं तो समझो कि समय से पहले ही रोग और मौत के निकट जा रहे हैं।


नींद : नींद एक डॉक्टर है और दवा भी। आपकी नींद कैसी होगी, यह निर्भर करता है इस पर क‍ि आप दिनभर किस तरह से जीएं। जरूरी है कार्य, विचार, आहार और व्यवहार पर गंभीर मंथन करना। यदि यह संतुलित और सम्यक रहेगा तो भरपूर ‍नींद से स्वास्थ्‍य में लाभ मिलेगा। यह भी ध्यान रखें क‍ि ज्यादा या कम नींद से सेहत और मन पर विपरीत असर पड़ता है। अच्छे स्वप्नों के लिए अच्छी दिनचर्या को मैनेज करें। इससे स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।
झपकी ध्यान : यदि अत्यधिक कार्य के कारण आपकी नींद पूरी नहीं हो रही है तो सिर्फ एक मिनट का झपकी ध्यान करें। ऑफिस या घर में जब भी लगे तो 60 सेकंड की झपकी मार ही लें। इसमें साँसों के आवागमन को तल्लीनता से महसूस करें। गहरी-गहरी सांस लें। यह न सोचें क‍ि कोई देख लेगा तो क्या सोचेगा। हां आफिस में इसे सतर्कता से करें, वरना बॉस गलत समझ बैठेंगे। इस ध्यान से आप स्वयं को हर वक्त तरोताजा महसूस करेंगे।
मन और मस्तिष्क : मानसिक द्वंद्व, चिंता, दुख: या दिमागी बहस हमारी श्वासों की गति को अनियंत्रित करते हैं, जिससे खून की गति भी असंतुलित हो जाती है। इसका सीधा असर हृदय, फेफड़े और पेट पर होता है और यह गंभीर रोग का कारण भी बन सकता है। मानसिक द्वंद्व या दुख हामारी उम्र घटाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
    सुख-दुख से परे मन और मस्तिष्क को शांत और प्रसन्न चित्त रखने के लिए आप सुबह और शाम को 10 मिनट का ध्यान करें। ध्यान करना जरूरी है। ध्‍यान से मस्तिष्क और मन को अतिरिक्त ऊर्जा मिलती है और इसके नियमित अभ्यास से किसी भी प्रकार की समस्या और दुख से व्यक्ति मुक्त हो जाता है।

मौन : मौन से मन की आंतरिक्त शक्ति और रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। कुछ क्षण ऐसे होते हैं जबकि हम खुद-ब-खुद मौन हो जाते हैं। ऐसा कुछ विशेष परिस्थिति में होता है, लेकिन मौन रहने का प्रयास करना और यह सोचते हुए क‍ि मौन में कम से कम सोचने का प्रयास करूंगा, ज्यादा से ज्यादा देखने और श्‍वासों के आवागमन को महसूस करने का प्रयास करूंगा, एक बेहतर शुरुआत होगी। दो घंटे की व्यर्थ की बहस से 10 मिनट का मौन रिफ्रेश कर विजन पावर बढ़ाएंगा।
नियमित व्यायाम : वैज्ञानिकों का कहना है कि 70 साल का कोई व्यक्ति यदि नियमित व्यायाम करता है, तो इस बात की पूरी संभावना है कि वह 100 वर्ष की उम्र तक जिए।
    आर्काइव्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन में प्रकाशित शोध के परिणाम कहते हैं कि लंबी उम्र के लिए हमारे जीन सिर्फ 30 प्रतिशत तक जिम्मेदार होते हैं बाकी का काम तो जीवन शैली करती है।
इसलिए आप योगासन या हल्की-फुल्की कसरत करें और इस बता को अच्छी तरह से तय कर लें कि किसी भी कीमत में पेट और कमर की चर्बी न बढ़ने पाएं|


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1.10.18

कबाबचीनी (शीतल चीनी ) के गुण,उपयोग,फायदे




यह काली मिर्ची जैसी होती है। इसे कच्ची अवस्था में तोड़कर सुखा लेते हैं। इसे मुंह में रखने पर जीभ पर ठंडक मालूम होती है, इसीलिए इसे शीतलचीनी भी कहते हैं।
इसका प्रचलित नाम कबाबचीनी है। यह सुगंधयुक्त होती है, अतः इसे मुंह में रखकर चबाने और चूसने से मुंह सुगन्धित हो जाता है।
यह भारत में मैसूर प्रान्त में और विदेशों में जावा, सुमात्रा, श्रीलंका आदि देशों में पैदा होती है। इसका तेल निकाला जाता है जो उड़नशील और सुगंधित होता है। यह बाजार में पंसारी या जड़ी-बूटी बेचने वाली दुकान पर आसानी से मिल जाती है।
विभिन्न भाषाओं में नाम : संस्कृत- कंकोलं। हिन्दी- शीतलचीनी, कबाबचीनी। मराठी- कंकोल। गुजराती- तड़मिरे, चणकबात। बंगला- कोकला, शीतलचीनी। तेलुगू- टोकामिरियालू, कबाबचीनी। तमिल- वलमिलाकू। मलयालम- चीनीमुलक। कन्नड़- गंधमेणसु, बालमेणस। फारसी- कबाबचीनी। इंग्लिश- क्यूबेब। लैटिन- पाइपर क्यूबेबा।
गुण : यह स्वाद में चरपरी, तीक्ष्ण, कड़वी, रुचिकर, मूत्रल, दीपन, पाचन, हल्की, वृष्य, ऊष्णवीर्य और हृदयरोग, कफ वात तथा अंधत्व को दूर करने वाली होती है।
उपयोग : सुगंधित मसाले के रूप में, औषधि के रूप में, मुखलेप, उबटन में सुगंध के लिए इसका उपयोग होता है।



* कबाबचीनी का उपयोग कुछ उत्तम आयुर्वेदिक योगों में भी किया जाता है, जैसे अश्वगंधा पाक, कौंच पाक, मकरध्वज वटी, सालम पाक आदि।पुराना सुजाक : कबाबचीनी का चूर्ण 100 ग्राम और सोडा बाईकार्ब 100 ग्राम या पिसी फिटकरी 50 ग्राम मिलाकर इस मिश्रण को 1-1 चम्मच सुबह-शाम दूध-पानी की लस्सी के साथ सेवन करना चाहिए। एक कप उबलता पानी लेकर एक चम्मच कबाबचीनी का चूर्ण डालकर ढंक दें। 15-20 मिनट बाद छानकर ठंडा कर लें। इसमें 5 बूंद चंदन तेल डालकर पीने से पेशाब खुलकर होता है और वेदना मिटती है। चाहे तो इसमें आधा चम्मच पिसी मिश्री भी डालकर पी सकते हैं।
*कबाबचीनी,चोटी इलायची,वंशलोचन,पिपली  10 ग्राम प्रत्येक लेकर महीन चूर्ण बनाएँ|इसमे 40 ग्राम मिश्री मिलाके आधा चम्मच सुबह शाम एक कप दूध के साथ लेने से स्वप्न दोष समाप्त होकर वीर्य गाढ़ा होता है|
*पुराना सुजाक : कबाबचीनी का चूर्ण 100 ग्राम और सोडा बाईकार्ब 100 ग्राम या पिसी फिटकरी 50 ग्राम मिलाकर इस मिश्रण को 1-1 चम्मच सुबह-शाम दूध-पानी की लस्सी के साथ सेवन करना चाहिए। एक कप उबलता पानी लेकर एक चम्मच कबाबचीनी का चूर्ण डालकर ढंक दें। 15-20 मिनट बाद छानकर ठंडा कर लें। इसमें 5 बूंद चंदन तेल डालकर पीने से पेशाब खुलकर होता है और वेदना मिटती है। चाहे तो इसमें आधा चम्मच पिसी मिश्री भी डालकर पी सकते हैं।

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