26.12.19

विक्स वेपोरब के कमाल के फायदे



सर्दी आते ही सब विक्स का इस्तेमाल अपनी बंद नाक और गले के आराम के लिए करते है। लेकिन क्या आपको पता है की विक्स वेपोरब के इस्तेमाल करने के और भी बहुत सारे तरीके हैं। विक्स वेपोरब का उपयोग स्ट्रेच मार्क्स के निशान हटाने और वजन क म करने के लिए किया जा सकता है जी हाँ विक्स विक्स वापोरोब में नीलगिरी के तेल, देवदार के पत्ते के तेल, पेट्रोलोलम, कपूर और टर्पेन्टाइन तेल का संयोजन होता है। जो हमे कई स्वास्थ्य समस्याओं के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करती है।
स्ट्रेच मार्क्स के निशान हटाने के लिए विक्स का प्रयोग
कई कारणों से स्ट्रेच मार्क्स के निशान हो सकते हैं इसमें गर्भावस्था सबसे आम है। स्ट्रेच मार्क्स के निशान विकास की गति के दौरान भी हो सकते हैं या कम समय में वजन कम करने के कारण भी हो सकते हैं।
माने या नहीं, विक्स की अनगिनत समीक्षाओं का कहना है कि यह गर्भावस्था के बाद स्ट्रेच मार्क्स के निशान या ढीले त्वचा के लिए यह इरेज़र की तरह है। मेन्थॉल, तेल और अन्य त्वचा शीतलन सामग्री का संयोजन खिंचाव के निशान के सबसे जिद्दी होने की चमक को कम करने के लिए बिल्कुल सही है! इस विधि का उपयोग करने वाले बहुत से लोग इसके बारे में बताते है, कि विक्स वेपोरब के इस्तेमाल से कुछ ही दिनों के भीतर आप स्ट्रेच मार्क्स से छुटकारा पा सकते है जबकि विक्स वेपोरब के निर्माता दावा नहीं करते हैं कि इसका उत्पाद वास्तव में खिंचाव के निशान को कम कर सकता है या उपचार के रूप में इसका उपयोग करने की सिफारिश कर सकता है।
त्वचा के स्ट्रेच मार्क्स या स्कार्फिंग के लिए, उत्पाद में नीलगिरी की एंटी इन्फ्लामेंट्री तत्व होते है, जिसमें महिलाओं का कहना है कि इसका उपयोग करने के एक सप्ताह के भीतर, उनके खिंचाव के निशान 60 से 100 प्रतिशत चले गए थे। चूंकि विक्स वेपोरब में नीलगिरी के तेल, देवदार के पत्ते के तेल, पेट्रोलोलम, कपूर और टर्पेन्टाइन तेल का संयोजन होता है, ये तेल गठबंधन करते हैं और अत्यधिक खिंचाव वाली त्वचा को नरम बनाते हैं, और ड्राईनेस को भी कम करता है जो खिंचाव के निशान को दूर करता है।
स्ट्रेच मार्क्स हटाने के लिए विक्स वेपोरब का उपयोग करने के दो तरीके हैं यदि आप खिंचाव के निशान की दृश्यता को कम करना चाहते हैं, प्रभावित क्षेत्र पर विक्स वेपोरब को हल्के होथों से रगड़े। आप नियमित रूप से दो सप्ताह के बाद सकारात्मक परिणाम देखेंगे।
अपने सभी स्ट्रेच मार्क्स पर इसे रगड़ें और अपने कूल्हों के चारों तरफ एक चिपकने वाले पनी का टुकड़ा रखें। बाद में, टाइट लेगिंग्स (tight leggings) पहने और इसे रात भर के लिए छोड़ दें। जब आप जागते हैं तो स्ट्रेच मार्क्स चले जाना चाहिए। अगर वे गायब नहीं होते हैं, तो आप इसे अगली रात दोहरा सकते हैं।
वज़न कम करने के लिए विक्स वेपोरब का प्रयोग आप अपना वजन कम करने के लिए 2 चम्मच विक्स, 1 चम्मच बेकिंग सोडा (खाने का सोड़ा) आधा चम्मच कपूर पाउडर, और 2 चम्मच एल्कॉहल का एक मिश्रण बना लें। ध्यान रहे की इस मिश्रण में इतना विक्स वेपोरब मिलाएं कि पेस्ट जैसा बन जाएं।
एक बर्तन में इन सभी सामग्री को मिलाएं और इस पेस्ट को अपने पेट पर लगाएं। 5 मिनट के लिए धीरे मालिश करें और फिर अपने पेट को प्लास्टिक शीट से लपेट लें। इसे 1-2 घंटे के लिए ऐसे ही छोड़ दें। इस बीच आप फिजीकल एक्सरसाइज करेंगें तो इसका असर डबल हो जायेगा, एक्सरसाइज करने के थोड़ी देर बाद इसे खोलकर पानी से धो लीजिए। यह विधि तुरंत परिणाम नहीं देती है, अच्छे रिजल्ट पाने के लिए लगभग 7 दिनों के लिए आपको यह करने की आवश्यकता हो सकती है।
विक्स वेपोरब के कुछ और प्रयोग जो आप कर सकते है –
अगर आपके हाथो या पैरो के नाखुनो में फंगस या पैरो की उंगलियो में खारवे या फंगस हो गई है तो आप वहाँ पर भी इसका इस्तेमाल कर सकते है।
पेट में गैस की वजह से दर्द 
अगर किसी के पेट में गैस की वजह से दर्द हो रहा है तो थोड़ा सा विक्स अपने पेट तथा नाभि के आस-पास लगा लें। कुछ ही देर में गैस्ट्रिक प्रॉब्लम दूर हो जाएगी और पेटदर्द से आराम आ जाएगा।

जब आपके सिर में हल्का सा दर्द हो तो आप हल्के हाथ से माथे पर इसकी मालिश कर सकते है
अगर आपको मच्छर, मक्खियां परेशान कर रहे हैं तो आप थोड़ा सा विक्स वेपोरब थोड़ी सी रूई में लगाकर अपने पास रख लें। विक्स वेपोरब की मेंथॉल खुशबू से ही मच्छर-मक्खियां आपके पास नहीं आएंगे। 
विक्स वेपोरब के हैरान कर देने वाले फायदे
vicks की बोतल को अगर खुले में रख देते है तो उस जगह के आस पास मक्खिया नही आएगी।
अगर पैरों में मौजे पहनने पर बदबू आती है तो रात को सोते समय पैरों में हल्की सी विक्स लगाकर मौजे पहन कर सो जाएं। सुबह उठ कर पैर ठंडे पानी से धो लें। एक ही दिन में पैरों की बदबू दूर हो जाएगी।
अगर आपके कान में दर्द है तो थोड़ी सी vicks रुई में लगा कर अपने कान के पास रख ले इस में मौजूद मेंथोल अपना काम करेगा और आपको दर्द से आराम मिल जायेगा।
 मांस-पेशियों में खिंचाव
खेलते समय या कोई काम करते समय अगर शरीर की मांस-पेशियों में खिंचाव के कारण दर्द हो रहा है तो प्रभावित हिस्से तथा उसके आस-पास के हिस्से में विक्स वेपोरब लगा लें। इससे कुछ ही मिनट में आराम आ जाएगा। पीठ दर्द में भी विक्स वेपोरब से राहत मिलती है।
अगर आपकी त्वचा कहीं से कट गई है तो आप वहां पर भी vicks लगा सकते है यह बहुत दर्द करेगा पर आप इन्फेक्शन से बचे रहेगे।
अगर कोई ताज़ा खरोच लग गई हो तो vicks veporub में थोडा सा नमक मिला के लगाये |चोट का रंग नही बिगड़ेगा।

19.12.19

खाने के बाद 30-40 मिनट पैदल चलने से मोटापा और हार्ट रोग रहेंगे दूर


पैदल चलना (Walking) अपने आप में एक बेहतरीन एक्सरसाइज है। सुबह से लेकर रात तक जब भी समय और मौका मिले, आपको पैदल जरूर चलना चाहिए। रेगुलर वॉक करने से आप न सिर्फ शारीरिक रूप से फिट रहते हैं, बल्कि शरीर की कई बीमारियों की भी 'टाटा बाय-बाय' कह सकते हैं। जी हां, शायद आपको जानकर हैरानी होगी कि सिर्फ 3 मिनट पैदल चलकर आप अपना बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर कंट्रोल कर सकते हैं। इसी तरह 5 मिनट पैदल चलकर आप अपने खराब मूड को ठीक कर सकते हैं।
दरअसल प्रकृति ने आपका शरीर आराम करने के लिए नहीं बनाया गया है। अगर आप दिन भर एक ही जगह बैठे-बैठे या लेटे हुए गुजार देते हैं, तो आपका शरीर कई तरह की बीमारियों का शिकार बनता जाता है। इसलिए अपने बॉडी पार्ट्स को मूव करते रहना और थोड़ा-बहुत काम करते रहना बेहद जरूरी है। अगर आप जिम जाकर वर्कआउट नहीं कर सकते हैं, सुबह उठकर पार्क में एक्सरसाइज नहीं कर सकते हैं, घर में योगासन भी नहीं कर सकते हैं, तो कम से कम आपको पैदल तो चलना ही चाहिए। आइए आपको बताते हैं दिन में थोड़ा-थोड़ा पैदल चलना आपके लिए कैसे फायदेमंद साबित होता है।
10 मिनट चलकर घटा सकते हैं ब्लड प्रेशर

शोध बताते हैं कि अगर आप हाइपरटेंशन (हाई ब्लड प्रेशर) के शिकार हैं, तो दिन में 3-4 बार 10 मिनट तेज गति से पैदल चलने से आपका ब्लड प्रेशर कंट्रोल हो सकता है। ये ऐसे लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है, जो काफी बिजी रहते हैं। ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करना इसलिए जरूरी है क्योंकि इसके कारण आपको हार्ट अटैक, किडनी फेल्योर और स्ट्रोक आदि गंभीर स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।
5 मिनट पैदल चलने से आपका बिगड़ा मूड सही हो जाता है
इस बात को आपने भी महसूस किया होगा कि जब आप बहुत अधिक टेंशन में हों, तो उठकर थोड़ी दूर पैदल चलने से आपकी टेंशन कम हो जाती है। दरअसल पैदल चलना आपके मूड को सही करता है। जब भी आपका मूड थोड़ा खराब हो, कमरे से बाहर निकलें और 5-7 मिनट चीजों-लोगों को देखते हुए पैदल चलें। इससे आपका मूड तुरंत सही हो जाएगा और तनाव भी कम होगा। शोध बताता है कि जो लोग ऑफिस में देर तक बैठकर काम करते हैं, वो अगर अपनी सीट से उठकर हर 1-2 घंटे में 5 मिनट पैदल चलें, तो उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ती है।
5-10 मिनट पैदल चलने से बढ़ती है आपकी क्रिएटिविटी

अगर आप कोई क्रिएटिव आइडिया खोज रहे हैं या कोई समस्या सुलझा रहे हैं, जो आपको काफी देर से उलझाए हुए है, तो 5 मिनट पैदल चलें और आप पाएंगे कि आप ज्यादा बेहतर सोच पा रहे हैं। जी हां, रिसर्च बताती है कि पैदल चलने से आपकी क्रिएटिविटी बेहतर होती है और आप ज्यादा बेहतर सोच सकते हैं।
रात के खाने के बाद 15 मिनट पैदल चलें, कंट्रोल होगा ब्लड शुगर
रात के खाने के बाद आपको तुरंत लेटना या बैठना नहीं चाहिए। खाने के बाद 15 मिनट पैदल चलने से आप अपने ब्लड शुगर को बढ़ने से रोक सकते हैं। जी हां, अमेरिकन डायबिटीज सेंटर के डायबिटीज केयर नाम के जर्नल में छपे अध्ययन के अनुसार आप रात के खाने के बाद सिर्फ 15 मिनट पैदल चलकर, दिनभर अपना ब्लड शुगर कंट्रोल रख सकते हैं।
खाने के बाद 30-40 मिनट पैदल चलने से मोटापा और हार्ट रोग रहेंगे दूर
रोजाना खाना खाने के बाद अगर आप सिर्फ 30 मिनट पैदल चलते हैं, तो इससे आपका मोटापा कम होता है और शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी घटती है। इसके अलावा अगर आप खाने के बाद 40 मिनट पैदल चलते हैं, तो आप कार्डियोवस्कुलर बीमारियों (हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट और स्ट्रोक आदि) के खतरे को कम कर सकते हैं।
अध्ययन से पता चलता है कि सुबह की गई नियमित सैर जोड़ों के दर्द और अकड़न से निजात दिला सकती है । सुबह की सैर हड्डियों के साथ-साथ मांसपेशियों की क्षमता को भी बढ़ाती हैं। ऑस्टियोपोरोसिस के मरीजों के लिए सुबह की सैर फायदा पहुंचा सकती है। इसके अलावा, कुछ अध्ययन बताते हैं कि रजोनिवृत्ति के बाद जो महिलाएं रोजाना एक मील चलती हैं, उनमें हड्डियों का घनत्व रोजाना कम चलने वाली महिलाओं की तुलना में अधिक रहता है।
डिप्रेशन से मुक्ति
इस समय की सबसे बड़ी बीमारियों में डिप्रेशन को गिना जाता है। यह कई मानसिक व शारीरिक रोगों का कारण बन सकता है और सबसे घातक परिणाम मृत्य भी हो सकता है। यह एक धातक विकार है, लेकिन अच्छी खबर यह है कि अगर आप सुबह भ्रमण पर निकलते हैं, तो आप तनाव मुक्त हो सकते हैं। सुबह की ताजगी भरी सैर मन-मस्तिष्क को शांत करने में मदद करेगी।
शोध में पता चलता है कि अगर तनाव से ग्रसित इंसान रोज 20 से 40 मिनट की सैर करे, तो वो अपने तनाव का स्तर कम कर सकता है। इसलिए, डिप्रेशन से मुक्त होने के लिए आप रोजाना नियमित सुबह की सैर कर सकते हैं
हृदय स्वास्थ्य
मॉर्निंग वॉक का सबसे बड़ा फायदा हृदय का ध्यान रखना भी है। सुबह की नियमित सैर आपको मजबूत बनाती है, जिससे आपको हृदय से जुड़े रोगों से लड़ने में मदद मिलती है। हृदय की बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए सुबह की सैर अच्छा विकल्प हो सकता है।
शोध से पता चलता है कि मात्र चलने से हृदय संबंधी जोखिम 31 प्रतिशत और इससे मरने का जोखिम 32 प्रतिशत तक कम हो सकता है। यह लाभ पुरुष और महिलाओं दोनों पर लागू होता है। हृदय स्वास्थ्य को बरकरार रखने के लिए आप रोज सुबह की सैर का आनंद ले सकते हैं

मधुमेह नियंत्रण

Pinit
मधुमेह अनियंत्रित जीवनशैली के कारण होनी वाली आम बीमारियों में से एक है। वहीं, अगर आप सुबह घूमने जाते हैं, तो आप इस समस्या को कुछ हद तक कम कर सकते हैं। शोध के अनुसार, सुबह 30 मिनट की सैर ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के साथ-साथ टाइप-2 डायबिटीज से निजात दिलाने में मदद कर सकती है (5)।
 कैंसर से बचाव
विशेषज्ञों का मानना है कि कैंसर का खतरा सुस्त और व्यस्त जीवनशैली की वजह से भी हो सकता है। ऐसे में सुबह की सैर कई तरह के कैंसर को दूर रखने में मदद करती है। सुबह की ताजगी भरी सैर आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने का काम करती, जिससे कैंसर से लड़ने में मदद मिलती है।
यहां हम यह नहीं कर रहे हैं कि मॉर्निंग वॉक कैंसर का सटीक इलाज है, लेकिन यह कैंसर की आशंका को कम कर सकती है। शोध बताते हैं कि सुबह की सैर स्तन, किडनी, ओवेरियन और सर्वाइकल से जुड़े कैंसर से लड़ने में मदद कर सकती है|
बढ़ती है मस्तिष्क की कार्यक्षमता
मस्तिष्क की कार्यप्रणाली के लिए भी सुबह की सैर जरूरी है। नियमित व्यायाम जैसे मॉर्निंग वॉक आपकी याददाश्त को बढ़ा सकता है और मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बेहतर कर सकता है (9)। जब आप चलते हैं, तो मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है और रक्त की आपूर्ति (Supply) में तेजी आती है, जिससे याददाश्त मजबूत होती है |
 वजन घटाने में मदद
अनियंत्रित खान-पान और खराब जीवनशैली मोटापे का सबसे बड़ा कारण है। जब हम बिना शारीरिक परिश्रम के किसी भी वक्त भोजन का सेवन करने लग जाते हैं, तो इससे शरीर का वजन बढ़ने लगता है। बाद में यही मोटापा कई बीमारियों का कारण बन सकता है। अगर आप इसे कम करना चाहते हैं, तो रोजाना नियमित रूप से मॉर्निंग वॉक करें। प्रतिदिन 30-40 मिनट की सैर आपकी अतिरिक्त कैलोरी को कम करने में मदद करेगी।

18.12.19

यात्रा के दौरान मितली उल्टी आने के उपाय व उपचार


बस या कार में यात्रा करते हुए जी मचलना या उल्टी आना, ऐसी परेशानी बहुत लोगों को होती है. असल में ऐसा मस्तिष्क के जबरदस्त हुनर के चलते होता है.हममें से कई लोग यात्रा के दौरान होने वाली मतली या उल्टी के कारण, बस में या कार में सफर करना अवॉयड करते हैं। मोशन सिकनेस बीमारी (Motion sickness)(यात्रा संबंधी मतली) एक ऐसी स्थिति है जिसमें आँखों के द्वारा मूवमेंट को भापना और वेस्टिबुलर सिस्टम की मूवमेंट की भावना के बीच के अंतर के कारण होता है। इसके कई कारण हो सकते हैं जिनके बारे में हम आमतौर पर ध्यान नहीं देते। यात्रा के दौरान उल्टी को कार सिकनेस (बीमारी), सिमुलेशन सिकनेस या एयर सिकनेस के रूप में भी समझा जा सकता है।
बस, कार, विमान या पानी के जहाज में यात्रा करने के दौरान शरीर और मस्तिष्क के बीच एक असमंजस की स्थिति बन जाती है. कार्डिफ यूनिवर्सिटी के न्यूरोसाइंटिस्ट डॉक्टर डिएन बर्नेट के मुताबिक यात्रा के दौरान दिमाग को ऐसा लगता है जैसे शरीर में जहर फैल रहा है. जान बचाने के लिए मस्तिष्क हरकत में आता है. जी मचलने लगता है और उल्टी सी आने लगती है. इस तरह दिमाग शरीर से विषैले तत्वों को बाहर करने की कोशिश करता है.
चक्कर आना, थकान और मतली, मोशन सिकनेस के सबसे आम लक्षण हैं। सोपाइट सिंड्रोम (Sopite syndrome), जिसमें एक व्यक्ति थकान या थकावट महसूस करता है, मोशन सिकनेस से भी जुड़ा हुआ है। ग्रीक में “मतली”(nausea) का अर्थ सी-सिकनेस (See-sick syndrome) है। अगर मतली पैदा करने वाली गति का समाधान नहीं होता है, तो पीड़ित को आमतौर पर उल्टी हो जाएगी। उल्टी से अक्सर कमजोरी और मतली की भावना से छुटकारा नहीं मिलता है, जिसका मतलब है कि जब तक मतली का इलाज नहीं किया जाता है तब तक व्यक्ति को उल्टियां आती रहेगी।
मोशन सिकनेस आमतौर पर पेट के खराब होने का कारण बनती है। इसके अन्य लक्षणों में ठंडा पसीना और चक्कर आना शामिल है। मोशन सिकनेस वाले व्यक्ति को सिरदर्द, और पीले पड़ने की शिकायत हो सकती है। मोशन सिकनेस के परिणामस्वरूप निम्न लक्षणों का अनुभव करना भी आम है:
यात्रा सम्बन्धी मतली के गंभीर लक्षणों में शामिल हैं:
हल्की बेचैनी
उबासी लेना
पसीना आना
असुविधा की एक सामान्य भावना
अच्छी तरह से महसूस नहीं करना (malaise)
हल्की सांस लेना (सांस की कमी)
सिर चकराना
जी मिचलाना
उल्टी
पीलापन
उनींदापन
सरदर्द
किसी को भी यात्रा के दौरान उल्टी (मोशन सिकनेस) हो सकती है, लेकिन यह बच्चों और गर्भवती महिलाओं में सबसे आम है। यह संक्रामक नहीं है।
2 से 12 वर्ष की उम्र के बच्चों को मोशन सिकनेस से ग्रस्त होने की सबसे अधिक संभावना है। गर्भवती महिलाओं को भी इसका सामना करने की संभावना अधिक होती है।
आपकी इंद्रियों के बीच में संघर्ष होने पर आपको मोशन सिकनेस की बीमारी होती है। मान लें कि आप मेले में एक झूले पर हैं, और यह आपको चारों ओर और ऊपर घुमाया जा रहा है। आपकी आंखें एक चीज को देखती हैं, आपकी मांसपेशियों को कुछ और महसूस होता है, और आपके कान के भीतर कुछ और समझ आता है।
आपका दिमाग उन मिश्रित संकेतों को एक साथ नहीं ले सकता है। यही कारण है कि आप को चक्कर आना और बीमार महसूस होने जैसा लगता है।
सफर के दौरान उल्टियां होने पर (मोशन सिकनेस) अधिकांश मामले में आप खुद इलाज कर सकते हैं।
बहुत गंभीर मामले, और जो प्रगतिशील रूप से बदतर हो जाते हैं, जैसे कान में असंतुलन और तंत्रिका तंत्र की बीमारियों में, अपने चिकित्सक से जाकर मिले।
मोशन सिकनेस का निदान करने में मदद के लिए, डॉक्टर आपके लक्षणों के बारे में पूछेगा और पता लगाएगा कि आम तौर पर समस्या का कारण क्या होता है (जैसे नाव में सवारी करना, विमान में उड़ना, या कार में सफर करना और गाड़ी चलाना)।
मोशन सिकनेस के लक्षण आमतौर पर तब बंद हो जाते हैं जब आप रुक जाते हैं। लेकिन यह हमेशा सच नहीं है। ऐसे लोग हैं जो यात्रा खत्म होने के कुछ दिनों बाद भी लक्षण से पीड़ित रहते हैं। अतीत में यात्रा के दौरान उल्टी (मोशन सिकनेस) वाले ज्यादातर लोग अपने डॉक्टर से पूछते हैं कि अगली बार सफर के दौरान उल्टियां होने पर क्या करें और कैसे रोकें। निम्नलिखित उपचार आपकी यात्रा के दौरान उल्टी और मतली ठीक करने में मदद कर सकते हैं:
एक्यूप्रेशर में सुइयों को डालने के बजाये उंगली के दबाव से मतली में राहत मिलती है। कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि एक्यूप्रेशर एक्यूपंक्चर के समान मोशन सिकनेस के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है।
सफर के दौरान उल्टियां होने पर ताजा, ठंडी हवा भी मोशन सिकनेस में थोड़ी राहत दे सकती है। यदि आप कार, बस, ट्रेन में सफर कर रहें हैं तो खिड़की से ताजी हवा ले सकते हैं।
च्यूइंग गम मोशन सिकनेस को कम करने का एक आसान तरीका है। सफर के दौरान उल्टियां होने पर सामान्य और हल्की कार सिकनेस से मुक्त होने के लिए यह एक सरल विधि है। च्यूइंग गम या लौंग या इलायची चबाने से कार में वोमिटिंग के हल्के प्रभाव से छुटकारा पाने में मदद मिलती है।
यात्रा के दौरान उल्टी रोकने के लिए एक आम सुझाव है कि चलती गाड़ी की खिड़की से बाहर यात्रा की दिशा में क्षितिज (सामने की तरफ) की ओर देखे। यह गति की द्रश्य में नयापन लाकर आपके संतुलन की भावना को फिर से चालू करने में मदद करता है।
यात्रा या हवाई यात्रा के दौरान उल्टी रोकने के लिए जहाज में, आंखों को बंद करना उपयोगी होता है, इसलिए यदि संभव होतो झपकी लें। यह आंखों और आंतरिक कान के बीच के इनपुट संघर्ष को हल करता है।
एक बार यात्रा खत्म होने के बाद मोशन सिकनेस बीमारी आमतौर पर दूर हो जाती है। लेकिन अगर आप को अभी भी चक्कर आ रहे हैं, सिरदर्द है, उल्टी, सुनने में कमी या छाती में दर्द है, तो अपने डॉक्टर से मिले।
यात्रा के दौरान मितली होने पर, यात्रा के दौरान आप कहां बैठते हैं इससे भी फर्क पड़ता है। कार की आगे की सीट, ट्रेन-बस में खिड़की वाली सीट, नाव में ऊपरी डेक या विमान में विंग सीट आपको यात्रा के दौरान उल्टी के बिना एक आसान सवारी का मजा दे सकती है। यात्रा करते वक्त खिड़की के बहार दाए और बाए दिशा में देखें। वाहन में कुछ पढ़ने या देखने की कोशिश ना करें, और यात्रा के पहले भारी भोजन, शराब और अन्य सॉफ्ट ड्रिंक्स से बचें। इसके अलावा यात्रा के दौरान उल्टी से बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पियें।
यात्रा में उल्टी- घबराहट से बचने के घरेलू उपाय
अदरक:
अदरक में ऐंटीमैनिक गुण होते हैं। एंटीमैनिक एक ऐसा पदार्थ है जो उल्टी और चक्कर आने से बचाता है। सफर के दौरान जी मिचलाने पर अदरक की गोलियां या फिर अदरक की चाय का सेवन करें। इससे आपको उल्टी नहीं आएगी। अगर हो सके तो अदरक अपने साथ ही रखें। अगर घबराहट हो तो इसे थोड़ा-थोड़ा खाते रहें।
प्याज का रस
सफर में होने वाली उल्टियों से बचने के लिए सफर पर जाने से आधे घंटे पहले 1 चम्मच प्याज के रस में 1 चम्मच अदरक के रस को मिलाकर लेना चाहिए। इससे आपको सफर के दौरान उल्टियां नहीं आएंगी। लेकिन अगर सफर लंबा है तो यह रस साथ में बनाकर भी रख सकते हैं।
लौंग
सफर के दौरान जैसे ही आपको लगे कि जी मिचलाने लगा है तो आपको तुरंत ही अपने मुंह में लौंग रखकर चूसनी चाहिए। ऐसा करने से आपका जी मिचलाना बंद हो जाएगा।लौंग को भूनकर इसे पीस लें और किसी डिब्बी में भरकर रख लें। जब भी सफर में जाएं या उल्टी जैसा मन हो तो इसे सिर्फ एक चुटकी मात्रा में चीनी या काले नमक के साथ लें और चूसें।
रुमाल में पुदीना रख लें
पुदीना पेट की मांसपेशियों को आराम देता है और इस तरह चक्कर आने और यात्रा के दौरान तबीयत खराब लगने की स्थिति को भी खत्म करता है। पुदीने का तेल भी उल्टियों को रोकने में बेहद मददगार है। इसके लिए रुमाल पर पुदीने के तेल की कुछ बूंदे छिड़कें और सफर के दौरान उसे सूंघते रहें। सूखे पुदीने के पत्तों को गर्म पानी में मिलाकर खुद के लिए पुदीने की चाय बनाएं। इस मिश्रण को अच्छे से मिलाएं और इसमें 1 चम्मच शहद मिलाएं। कहीं निकलने से पहले इस मिश्रण को पिएं।
नींबू
नींबू में मौजूद सिट्रिक ऐसिड उलटी और जी मिचलाने की समस्या को रोकते हैं। एक छोटे कप में गर्म पानी लें और उसमें 1 नींबू का रस व थोड़ा सा नमक मिलाएं। इसे अच्छे से मिलाकर पिएं। आप नींबू के रस को गर्म पानी में मिलाकर या शहद डालकर भी पी सकते हैं। यात्रा के दौरान होने वाली परेशानियों को दूर करने का यह एक कारगर इलाज है।

9.12.19

सर्दी के मौसम के फलों से तंदुरुस्ती बढ़ाएँ



 सभी मौसम के सीजनल फलों का सेवन करना स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बेहद फायदेमंद होता है। लेकिन क्‍या आप सर्दियों में खाये जाने वाले फल और उनके लाभ जानते हैं? कई बार हम फलों की तासीर जाने बिना ही उनका उपभोग कर लेते हैं जिससे हम सर्दी और खांसी की तरह ही अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं का शिकार हो सकते हैं। जबकि ठंडी के मौसम में हमें गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। वैसे तो सर्दियों के मौसम में ही सबसे ज्‍यादा फल और सब्जियां मिलती हैं। ऐसी स्थिति में यह निश्चित करना मुश्किल होता है कि सर्दियों में क्‍या खाना चाहिए और क्‍या नहीं।
सर्दी के मौसम में हमारे शरीर को विभिन्‍न प्रकार के खनिज पदार्थ और पोषक तत्‍वों की अतिरिक्‍त मात्रा की आवश्‍यकता होती है। हालांकि इस मौसम में अधिक कैलोरी और वसा वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए। सर्दी के सीजन में हमारे शरीर को विटामिन, मिनरल, फोलेट, एंटीऑक्‍सीडेंट और एंटी-बैक्‍टीरियल गुणों से भरपूर खाद्य पदार्थों का पर्याप्‍त सेवन करना चाहिए। इन पोषक तत्‍वों को प्राप्‍त करने के लिए आपको सर्दियों में मिलने वाले लगभग सभी प्रकार के फलों का सेवन करना चाहिए। इन फलों को सेवन करने का फायदा वजन घटाने, मधुमेह को रोकने, कैंसर की रोकथाम करने, त्‍वचा सौंदर्य और बालों के लिए भी होता है। ये सभी फल हमें सर्दी के दौरान होने वाली समस्‍याओं से लड़ने की शक्ति देते हैं और शरीर की ऊर्जा को बढ़ाने में मदद करते हैं।
सामान्‍य रूप से सर्दियों में खाये जाने वाले फलों के लिए कोई निश्चित समय निर्धारित नहीं किया गया है। इसका मतलब यह है कि आप अपनी सुविधा के अनुसार इन्‍हें कभी भी खा सकते हैं। लेकिन जानकारों का मानना है कि सुबह के नाश्‍ते के समय और दोपहर के भोजन के कुछ समय पहले इनका सेवन करना अच्‍छा होता है। खाली पेट फलों का सेवन अधिक लाभकारी माना जाता है। इसलिए भोजन करने के बाद फलों का सेवन करने से बचना चाहिए।
ठंडी के मौसम में फल खाने का सबसे अच्‍छा समय भोजन करने के लगभग 15 से 20 मिनिट पहले या भोजन करने के लगभग 1 से 2 घंटे बाद होता है। ऐसा करने पर इन्‍हें पचाने में आसानी होती है साथ ही इनके पूरे पोषक तत्‍वों और खनिज पदार्थों का उपयोग किया जा सकता है। सर्दियों के मौसम में खाये जाने वाले फलों को रात के समय खाने से बचना चाहिए।
फल तो हमें हर मौसम में प्राप्‍त होते हैं जो हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होते हैं। लेकिन सर्दियों में कुछ विशेष फलों का सेवन करना हमारे स्‍वास्‍थ्‍य के बहुत ही लाभकारी हो सकता है। आइए जाने सर्दियों में कौन-कौन से फलों का सेवन करना चाहिए।


खजूर



खजूर एक छोटा और अनोखा फल है जिसके बहुत से फायदे होते हैं। इस अद्भुद फल में कई प्रकार के विटामिन और खनिज पदार्थों की उच्‍च मात्रा होती है। जिसके कारण सर्दियों में मौसम में विशेष रूप से खजूर का सेवन किया जाता है। खजूर में आयरन और कैल्सियम की उच्‍च मात्रा एनीमिया के उपचार में मदद कर सकती है। साथ ही उन लोगों के लिए भी खजूर फायदेमंद होता है जिनकी हड्डियों भंगुर या हड्डी का घनत्‍व कम होता है।
ठंडी में खजूर खाने का सबसे बड़ा फायदा इसमें मौजूद फाइबर के कारण होता है। जो कि आपकी पाचन संबंधी समस्‍याओं को दूर करने में प्रभावी होता है। यदि आप सर्दी के मौसम में कब्‍ज से परेशान हैं तो खजूर आपके लिए सबसे अच्‍छे घरेलू उपाय साबित हो सकते हैं।

पपीता


अक्‍सर बीमार होने पर डॉक्‍टर हमें पपीता का सेवन करने की सलाह देते हैं। क्‍योंकि पपीता में ऐसे पोषक तत्‍व और खनिज पदार्थ होते हैं जो हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं। हालांकि पपीता साल के 12 महिने बाजार में उपलब्‍ध होता है। लेकिन सर्दी के मौसम में पपीता खाना अधिक फायदेमंद होता है। क्‍योंकि पपीता में न केवल विटामिन सी बल्कि विटामिन बी की भी अच्‍छी मात्रा होती है। इसके अलावा इसमें बहुत से एंटीऑक्‍सीडेंट और खजिन पदार्थ भी होते हैं। जिनमें हृदय और पाचन संबंधी समस्‍याओं को रोकने की क्षमता होती है। इसलिए आप पपीता को न केवल सर्दी में बल्कि पूरे साल तक उपभोग कर सकते हैं।

नाशपाती

सर्दियों के सीजन में इम्‍यूनिटी पावर को बेहतर बनाना सरल होता है, क्योंकि इस समय हमारा डायजेशन सिस्‍टम ज्यादा अच्‍छे से काम करता है। सर्दी के मौसम में आप अपने आहार में नाशपाती को भी शामिल कर सकते हैं। ठंड के सीजन में यदि आप अपनी और अपने बच्‍चों की सुरक्षा सर्दी और वायरल फ्लू से करना चाहते हैं तो नाशपाती एक अच्‍छा विकल्‍प है। क्‍योंकि इसमें कई प्रकार के विटामिन, खनिज पदार्थ और अन्‍य पोषक तत्‍व होते हैं। जो हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में सहायक होते हैं।

सेब


अक्‍सर सर्दियों के मौसम में फलों की बहार आ जाती है। जिसके कारण बाजार में कई रंगों के फल दखाई देने लगते हैं। सेब भी उन्‍हीं फलों में से एक है। अंग्रेजी में कहा भी जाता है कि ‘’ एन एप्पल अ डे कीप्स द डॉक्टर अवे’’ (An apple a day keeps the doctor away) क्‍योंकि सेब है ही ऐसा अद्भुद फल। सेब में ग्लूकोज के स्तर को हमारे शरीर में कम करने और कैंसर से लड़ने की क्षमता देता है। सर्दियों में सेब का सेवन करने से हमारे सारे सिस्टम को डिटोक्सिंग करने में मदद मिलती है। आप भी सर्दियों में खाये जाने वाले फलों की सूची में सेब को शामिल कर सकते हैं।



ठंडी के मौसम अक्‍सर आवला न खाने की सलाह दी जाती है। कारण कि इसका सेवन करने से सर्दी हो सकती है। लेकिन लोगों को शायद पता नहीं है कि आंवला में रोग प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाने की क्षमता होती है। आंवला में विटामिन ए, सी और बहुत से खनिज पदार्थ उच्‍च मात्रा में होते हैं। नियमित आधार पर आंवला का सेवन करने से रक्‍त शर्करा के स्‍तर को भी नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। आप अपने आहार में आंवले को कई प्रकार से शामिल कर सकते हैं। जैसे आंवले का अचार या आंवले का मुरब्‍बा या कच्‍चे ही आंवले के रूप में।

नींबू


नींबू में विटामिन सी की सबसे अधिक मात्रा होती है। विटामिन सी एक प्रकार का एंटीऑक्‍सीडेंट है जो हमारे शरीर को फ्री रेडिकल्‍स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करता है। सर्दियों के मौसम में आप अपने आहार के साथ ताजा नींबू के रस का उपयोग कर सकते हैं। यह आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

संतरा


ठंडी के मौसम में खाये जाने वाले फलों में संतरा सबसे प्रमुख है। क्‍योंकि इन दिनों पूरे बाजार में केवल संतरा का सुनेहरा रंग अलग ही दिखाई देता है। ठंड में फ्लू और सर्दी से बचने के लिए आप संतरा का सेवन कर सकते हैं। सभी लोग जानते हैं कि संतरा विटामिन सी के सबसे अच्‍छे स्रोत में से एक है। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि ऑरेंज में फाइटोकेमिकल्‍स (phytochemicals) भी होते हैं जिनमें कैंसर रोधी (Anti-Cancer) गुण होते हैं। इसके अलावा संतरा में मौजूद अन्‍य पोषक तत्‍व किड़नी संबंधी बीमारियों से लड़ने में भी सहायक होते हैं। अच्‍छी बात यह है कि संतरा आज कल केवल सर्दियों में ही नहीं बल्कि इसके अलावा साल के कुछ महिनों में प्राप्त किये जा सकते हैं। आप अपने शरीर को विभिन्‍न प्रकार की बीमारियों से बचाने और इम्‍यूनिटी बढ़ाने के लिए संतरे का नियमित सेवन कर सकते हैं।

केला


सर्दियों के मौसम में खाये जाने वाले फलों में केला को भी शामिल किया जा सकता है। अधिकांश लोगों का मानना होता है कि ठंडी के मौसम में केला खाने से सर्दी हो सकती है। जबकि इसमें ऐसे पोषक तत्‍व और खनिज पदार्थ होते हैं जो हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बए़ाने में मदद कर सकते हैं। आप अपने शरीर स्‍वस्‍थ रखने के लिए सर्दियों के मौसम में केला को नियमित आहार के रूप में जगह दे सकते हैं। यह आपके लिए बेहतरीन आहार साबित हो सकता है।



सर्दी के मौसम में स्‍वस्‍थ रहने का सबसे अच्‍छा घरेलू उपाय अनार का नियमित सेवन करना हो सकता है। अनार में एलैजिक एसिड, एलैजिटानिंस, प्यूनिसिक एसिड, फ्लेनॉयड, एंथोसायनिन जैसे भिन्न-भिन्न प्रकार के सैकड़ों बायोएक्टिव यौगिक पाये जाते हैं जो स्वास्थ्य के लिए कई मायनों में गुणकारी होते हैं। विभिन्न बीमारियों के इलाज में अनार का उपयोग वर्षों से किया जा रहा है। अनार का उपयोग परजीवी और माइक्रोबियल संक्रमण, डायरिया, अल्सर, रक्तस्राव और श्वसन संबंधी समस्याओं के इलाज में किया जाता है। अनार प्रोबायोटिक बैक्टीरिया को उत्तेजित करता है जिससे यह संक्रमण से लड़ने में सक्षम होता है और बीमारियों से हमें छुटकारा दिलाता है। हालांकि अनार भी ऐसा फल है जो 12 महिने उपलब्‍ध होता है। लेकिन ठंडी में इस फल का नियमित सेवन करने के लाभ बहुत अधिक होते हैं।

शकरकंद

सर्दियों के मौसम में शकरकंद भी पर्याप्‍त मात्रा में मिलता है। हालांकि यह फल न होकर एक कंद है। लेकिन सर्दियों में मौसम में इसका पर्याप्‍त सेवन करना आपको कई स्‍वास्‍थ्‍य लाभ दिला सकता है। शकरकंद में विटामिन ए और विटामिन सी की पर्याप्‍त मात्रा होती है। इसके अलावा शकरकंद की गर्म तासीर हमारे शरीर को सर्दियों के मौसम में गर्म रखने में मदद कर सकती है। यह फाइबर का सबसे अच्‍छा स्रोत होता है जो पाचन संबंधी समस्‍याओं को दूर करने में सहायक होता है। आप भी इस मौसम में अपने शरीर को स्‍वस्‍थ रखने के लिए शकरकंद का नियमित सेवन कर सकते हैं।

शरीफा या सीताफल

कस्टर्ड एप्पल, जिसे शरीफा या सीताफल के रूप में भी जाना जाता है, एक मीठा फल है, जो दुनिया भर में व्यापक रूप से उगाया जाता है। भारत में इसे आमतौर पर ‘सीताफल’ के रूप में जाना जाता है। यह व्यापक रूप से सर्दियों के मौसम में उपलब्ध होता है और भारत के स्थानीय बाजारों में बेचा जाता है। नियमित रूप से सीताफल का सेवन आपकी त्वचा को प्राकृतिक रूप से सुंदर बनाने में मदद कर सकता है। इस फल में प्रचुर मात्रा में मौजूद विटामिन ए त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करती है।

अमरूद


सर्दियों के मौसम में अमरूद भी बहुत देखने मिलते हैं। पके हुए अमरूद देखकर कोई भी इन्‍हें खाने का मन बना सकता है। लेकिन क्‍या आप अमरूद खाने के फायदे जानते हैं। सर्दियों में अमरूद खाना आपकी सेहत के लिए बहुत ही अच्‍छा माना जाता है। क्‍योंकि अमरूद में फोलेट, फाइबर, विटामिन और कई प्रकार के एंटीऑक्‍सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं। जिसके कारण सर्दियों में होने वाली बहुत सी स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं की रोकथाम करने में अमरूद आपकी मदद कर सकती है।



सिंघाड़ा एक जलीय फल है जिसे वॉटर चेस्‍टनट्स (Water Chestnut) भी कहा जाता है। यह सर्दीयों के मौसम में विशेष रूप से भारतीय बाजारों में मिलता है। सिंघाड़ा के फायदे इसमें उपस्थित पोषक तत्‍वों और स्‍वाद के कारण स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत अधिक होते हैं। पानी में पैदा होने वाले फल सिंघाड़ा सर्दियों के मौसम में अक्सर बाजार में देखने को मिलता है। सिघाड़े में साइट्रिक एसिड, कर्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फैट, निकोटेनिक एसिड, रीबोफ्लेविन, थायमाइन, विटामिन्स-ए, सी, मैगनीज तथा फास्फोरस आदि होते हैं। सिंघाड़ा सर्दियों में खाये जाना वाला एक अच्छा फल है।

बेर


ठंड के मौसम में मिलने वाला एक खास और खट्टा-मीठा फल है ‘बेर’। यह फल खाने में जितना स्वादिष्ट होता है, इसके फायदे भी उतने ही अधिक होते है। पकी हुई बेर का नाम सुनते ही आपके मुंह में पानी आना लाजमी है क्‍योंकि यह फल है ही इतना स्‍वादिष्‍ट। बेर खाने के फायदे वजन कम करने, हृदय स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ाने, कैंसर रोकने, रक्‍तचाप नियंत्रित करने, पेट की समस्‍याओं आदि के लिए होते हैं।


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3.12.19

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