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17.10.19

आंतों की कमजोरी के घरेलू उपाय



आंत हमारे शरीर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. हम जो भी खाते हैं वो पचने के बाद हमारे आंतों से होकर ही गुजरता है. हमारे पचे हुए भोजन का अंतिम हिस्सा आंत में अवशिष्ट पदार्थ के रूप में तब तक जमा रहता हैं जब तक उसे मल के रूप में शरीर से निकाल नहीं दिया जाता. यही कारण है कि आंतों का स्‍वस्‍थ होना बेहद आवश्यक है. अब तक आप ये समझ ही चुके होंगे कि हमारे शरीर में आंत आहार नली का ही एक भाग है जो कि पेट से गुदा तक फैली होती है. इसलिए इसके अस्‍वस्‍थ होने का सीधा असर हमारे स्‍वास्‍थ्‍य पर पड़ता है.
हमारी पाचन प्रणाली या शरीर के आंतरिक अंगों में आंतों का विशेष स्‍थान है। आंतों की कमजोरी का सीधा प्रभाव हमारे स्‍वास्‍थ्‍य पर पड़ता है क्‍योंकि यह पाचन तंत्र का अभिन्‍न अंग है। हमारे द्वारा खाए जाने वाले सभी खाद्य पदार्थ पाचन प्रक्रिया के द्वारा इन्‍हीं आंतों से होकर गुजरते हैं। पाचन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद अपशिष्‍ट पदार्थ आंतों में तब तक जमा रहता है जब तक इसे मल के रूप में बाहर नहीं कर दिया जाता है। इससे स्‍पष्‍ट होता है कि आंत हमारी आहार प्रणाली का एक हिस्‍सा है जो पेट और गुदा से जुड़ा हुआ है। लेकिन जब हमारी आंत अस्‍वस्‍थ होती है तब हमें कई प्रकार की पाचन संबंधी समस्‍याओं का सामना करना पड़ सकता है।
आंतों का सही तरीके से काम न करना या अस्‍वस्‍थ रहना ही आंतों की कमजोरी कहलाता है। यह एक बहुत ही आम समस्‍या है जो लगभग हर व्‍यक्ति की बड़ी आंता को प्रभावित करता है। आंतों की कमजोरी होने के कारण कब्‍ज, दस्‍त, गैस, पेट की सूजन, पेट दर्द और ऐंठन जैसी समस्‍याएं होती हैं। आंतों का कमजोर होना ऐसी समस्‍या है जो व्‍यक्ति को लंबे समय तक प्रभावित करता है। यदि इस प्रकार की समस्‍या किसी व्‍यक्ति को लंबे समय तक बनी रहती है तो आप इसे घरेलू उपाय और कुछ जीवनशैली परिवर्तन के माध्‍यम से दूर कर सकते हैं। कुछ मामलों में आपको डॉक्‍टरी परामर्श और दवाओं की भी आवश्‍यकता हो सकती है।
आंतों के कमजोर होने या अस्‍वस्‍थ रहने के सही और सटीक कारणों के बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। लेकिन अध्‍ययनों से पता चलता है कि आंतों के खराब स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत से कारक जिम्‍मेदार होते हैं। आंतों की कमजोरी का प्रमुख कारण सुस्‍त और निष्क्रिय जीवन शैली होती है। क्‍योंकि ऐसी स्थिति में भोजन करने के बाद शारीरिक परिश्रम की कमी के कारण भोजन देर से पचता है जिससे आंतों की कार्य क्षमता में कमी आती है। लेकिन यदि आप अपने दैनिक जीवन नियमित योग और व्‍यायाम करते हैं तो इस प्रकार की समस्‍या से बच सकते हैं। आइए जाने आंतों को स्‍वस्‍थ रखने और आंतों की कार्य क्षमता को बढ़ाने के घरेलू उपाय क्‍या हैं।
आंतों की कमजोरी के घरेलू उपाय
यदि आप भी पाचन संबंधी समस्‍याओं से परेशान हैं तो यह आपकी आंतों की कमजोरी का कारण हो सकता है। लेकिन आपको घबराने की आवश्‍यकता नहीं है लेकिन इस समस्‍या का समय पर इलाज किया जाना आवश्‍यक है। आंतों का कमजोर होना या पाचन समस्याओं का होना आपके खराब खान-पान, गंदी जीवनशैली और सुस्‍त दिनचर्या होता है। लेकिन आप कुछ आसान से टिप्‍स और घरेलू उपाय को अपना कर अपनी आंतों को मजबूती दिला सकते हैं। ऐसा करने के लिए आपको आंत की सफाई करने वाले खाद्य पदार्थों की जानकारी होना आवश्‍यक है। आइए जाने हम अपनी आंतों की कमजोरी को दूर करने के लिए किन घरेलू उपाय को अपना सकते हैं।
पर्याप्‍त पानी पिएं
पाचन संबंधी समस्‍याओं या आंत की कमजोरी का प्रमुख कारण पानी की कमी होता है। यदि आप अपनी आंतों की मजबूती या आंतों का बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य चाहते हैं तो पर्याप्‍त मात्रा में पानी का सेवन करें। पानी की उचित मात्रा पाचन संबंधी समस्‍याओं का सबसे अच्‍छा घरेलू उपाय है। क्‍योंकि शरीर को खाद्य पदार्थ पचाने और उनसे पोषक तत्‍वों की प्राप्‍त करने में पानी अहम भूमिका निभाता है। शरीर में पानी की कमी के कारण मल के कड़े होने और अन्‍य पाचन संबंधी समस्‍याओं की संभावना बढ़ जाती है।


लेकिन शा‍रीरिक गतिविधि, उचित व्‍यायाम, पौष्टिक भोजन और पर्याप्‍त पानी का नियमित सेवन आपकी आंतों को स्‍वस्‍थ रखता है।
अदरक
प्राचीन समय से ही पाचन संबंधी समस्‍याओं के इलाज में अदरक का उपयोग किया जा रहा है। यदि आप कमजोर आंत वाले रोगी हैं तब भी अदरक आपके लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। क्‍योंकि अदरक में ऐसे गुण होते हैं जो आंतों की उचित सफाई में सहायक होते हैं। अदरक में जिंजेरोल (gingerols) नामक एक घटक होता है। यह पेट के संकुचन को गति देने में सहायक होता है। जिससे उन खाद्य पदार्थों को स्‍थानां‍तरित करने में मदद मिली है जो पेट के माध्‍यम से अधिक तेजी से अपच पैदा करते हैं। इसके अलावा अदरक में ऐसे घटक भी होते हैं जो मतली, उल्‍टी और दस्‍त जैसे लक्षणों को भी कम कर सकते हैं। आप भी अपनी आंतों की कमजोरी के इलाज के लिए अदरक का उपयोग कर सकते हैं।
पुदीना
मुंह की बदबू दूर करने के साथ ही पुदीना आपके बेहतर पाचन के लिए भी अच्‍छा होता है। आप अपनी कमजोर आंतों के घरेलू उपचार के रूप में पुदीना का भी उपयोग कर सकते हैं। पुदीना का इस्‍तेमाल उल्‍टी और दस्‍त को रोकने में भी किया जाता है। शोध के अनुसार पुदीना आंतों में मांसपेशीय ऐंठन को और आंतों की सूजन को कम करने में सहायक होता है। इसके अलावा यह गैस, अपच और पेट दर्द जैसी समस्‍याओं को ठीक कर सकता है।
फाइबर युक्‍त खाद्य
पेट संबंधी समस्‍याओं के दौरान रोगी को वसायुक्‍त और संसाधित खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए। क्‍योंकि इस प्रकार के खाद्य पदार्थ कब्‍ज और अन्‍य समस्‍याओं को बढ़ा सकते हैं। इस प्रकार की समस्‍याओं से बचने के लिए आप अपने आहार में अधिक से अधिक फाइबर युक्‍त खाद्य पदार्थों को शामिल करें।
युक्‍त खाद्य पदार्थों में अधिक से अधिक हरी सब्‍जीयां, ताजे और मौसमी फल साबुत अनाज आदि का सेवन किया जा सकता है। इस प्रकार के भोजन को करने से आंतों के स्‍वस्‍थ्‍य को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।धूम्रपान और शराब से बचें
अधिक मात्रा में धूम्रपान और शराब का सेवन करना भी आपकी आंतों को नुकसान पहुंचा सकता है। धूम्रपान करने से गले की परेशानीयां बढ़ सकती है जिससे पेट संबंधी समस्‍याएं हो सकती हैं। इसके अलावा अधिक मात्रा में शराब का सेवन करने से आपके पाचन तंत्र में भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है। क्‍योंकि यह आपके यकृत और पेट की आंतरिक परत को नुकसान पहुंचा सकता है। यही कारण है कि आंतों की कमजोरी वाले रोगी को धूम्रपान और शराब का सेवन न करने की सलाह दी जाती है।
दही-
अध्‍ययनों के अनुसार आंत्र संबंधी रोगों का उपचार करने में दही एक अच्‍छा उपाय है। हमारी आतों में अच्‍छे और बुरे दोनों प्रकार के बैक्‍टीरिया होते हैं। लेकिन आंतों में खराब बैक्‍टीरिया की मात्रा अधिक हो जाने के कारण आंतों को नुकसान हो सकता है। ऐसी स्थिति में प्रोबायोटिक आंतों में अच्‍छे बैक्‍टीरिया के स्‍तर को बढ़ाने में सहायक होते हैं। जिससे अच्‍छे और खराब बैक्‍टीरिया में संतुलन बनता है। इसके अलावा प्रोबायोटिक में मौजूद अच्‍छे बैक्‍टीरिया पाचन संबंधी समस्‍याओं को भी आसानी से दूर कर सकते हैं। यदि आप भी आंतों के कमजोर होने या आंतों के चिपकने जैसी समस्‍या से परेशान हैं तो प्रोबायोटिक आधारित खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
अधिक भोजन न करें
पाचन संबंधी समस्‍याओं का प्रमुख कारण आंतों की कमजोरी होती है। ऐसी स्थिति में रोगी को पर्याप्‍त मात्रा में पौष्टिक आहार लेना चाहिए। लेकिन उन्‍हें इस बात का ध्‍यान रखना चाहिए कि अधिक मात्रा में और दिन में कई बार भोजन नहीं करना चाहिए। क्‍योंकि ऐसा करने पर आपकी पाचन प्रणाली में दबाव बढ़ता है जिससे भोजन पचाने की क्षमता में कमी आ सकती है। परिणाम स्‍वरूप अपशिष्‍ट पदार्थ लंबे समय तक आंतों में रूका रहता है। जो आंतों के संक्रमण और उन्‍हें कमजोर कर सकता है।

नियमित रूप से खाओ, लेकिन लगातार नहीं
हर समय खाते रहने की आदत आंतों के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अच्‍छी नहीं होती है. क्‍योंकि आंतों को साफ, बैक्‍टीरिया और अपशिष्ट मुक्त करने के लिए, पाचन को आराम देने की जरूरत होती है. हर दो घंटे के बाद कुछ मिनट के लिए आपकी आंतें, मौजूद चिकनी मसल्‍स पाचन तंत्र के माध्‍यम से बैक्‍टीरिया और अपशिष्‍ट को बाहर निकालती है. लेकिन खाते समय यह प्रक्रिया रूक जाती है. इसलिए आंतों को स्‍वस्‍थ रखने के लिए दो भोजन के बीच थोड़ा सा अंतराल होना जरूरी होता है.

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