25.1.19

मोटापा छूमंतर मूंग दाल के पानी से

                                         




मूंग की दाल हर कोई चाव से खाना पसंद करता है। घरों में मूंग की दाल की कई तरह की वरायटी बनाई जाती है। मूंग की दाल हमारी सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद है क्योंकि इसमें काफी मात्रा में पौष्टिक तत्व होते हैं। इसके सेवन से अनीमिया दूर करने के साथ ही वजन कम करने में भी मदद मिलती है।  मूंग की दाल में भारी मात्रा में कैल्शियम, मैग्नेशियम, पोटैशियम और सोडियम होता है। इसमें अच्छी मात्रा में विटमिन-सी, कार्ब्स और प्रोटीन के साथ डायटरी फाइबर भी है। मूंग की दाल के फायदों पर डालें एक नजर-

बच्चों के लिए हेल्दी 

मूंग की दाल का पानी छोटे बच्चों के लिए भी काफी स्वास्थयवर्धक होता है। दाल का पानी आसानी से पच जाता है। इसे पीने से शिशु की इम्यून पावर यानी रोगों से लड़ने की क्षमता भी बढ़ती है। 

हल्की होती है दाल 

कई बार होता है कि शरीर से काफी मात्रा में पसीना बह जाने के कारण इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। मूंग की दाल का पानी पीने से शरीर में एनर्जी की पूर्ति होती है। ये शरीर और मस्तिष्क के लिए भी काफी फायदेमंद होती है। 

वजन होता है कम 

अगर आप वजन घटाने को लेकर परेशान हैं तो मूंग दाल का पानी आपकी हर चिंता का हल है। ये न सिर्फ आपकी कैलरी कम करती है बल्कि इसका पानी पीने से लंबे वक्त तक भूख का भी अहसास नहीं होता है। इसे पीने से न सिर्फ आप एनर्जेटिक फील करते हैं बल्कि आसानी से वजन भी कम कर सकते हैं।

दस्त होने पर 

अगर आपको दस्त या डायरिया की समस्या हो गई है तो इसके लिए आप एक कटोरी मूंग दाल का पानी पी लीजिए। ये न सिर्फ आपके शरीर में पानी की आपूर्ति को पूरा करेगा बल्कि मूंग दाल का पानी पीने से दस्त की समस्या भी कम हो जाएगी।

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19.1.19

जानिए सेहत के पाँच दुश्मन



हम खाना इसलिए खाते हैं, ताकि हमें जरूरी पोषक तत्व और ऊर्जा मिल सके। लेकिन कई खाद्य पदार्थ सेहत को लाभ नहीं, बल्कि नुकसान पहुंचाते हैं। इनमें चीनी, नमक, मैदा जैसी चीजें शामिल हैं, जिन्हें विशेषज्ञ व्हाइट पॉइजन की संज्ञा देते हैं। ये किस तरह सेहत के लिए नुकसानदेह साबित होते हैं
चीनी, नमक, मैदा, सफेद चावल और गाय का पॉस्चराइज्ड दूध ऐसे खाद्य पदार्थ हैं, जिनमें पोषकता बिल्कुल नहीं होती है। इन्हें खाने से काफी नुकसान होता है। हां, थोड़ी मात्रा में नमक का सेवन हमारे लिए जरूरी है, लेकिन अधिक मात्रा में इसका सेवन सेहत को कई तरह से नुकसान पहुंचाता है। इन पांचों का रंग सफेद होता है। इसलिए इन्हें व्हाइट पॉइजन यानी सफेद जहर भी कहते हैं।

चीनी

चीनी को ‘फूडलेस फूड’ कहा जाता है। कैलरी के नाम पर यह खाली तो होती ही है, कोई विटामिन या मिनरल्स भी नहीं होते, जो हमारे लिए आवश्यक हैं। चीनी का अधिक मात्रा में सेवन करने से मोटापे और डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। इसकी वजह से आगे चलकर हार्ट अटैक, कैंसर, ब्रेन स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

क्यों है हानिकारक सफेद चीनी 


सफेद चीनी को रिफाइंड शुगर भी कहा जाता है। इसे रिफाइन करने के लिए सल्फर डाई ऑक्साइड, फास्फोरिक एसिड, कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड और एक्टिवेटेड कार्बन का उपयोग किया जाता है। रिफाइनिंग के बाद इसमें मौजूद विटामिन्स, मिनरल्स, प्रोटीन, एंजाइम्स और दूसरे लाभदायक पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं, केवल सूक्रोज ही बचता है और सूक्रोज की अधिक मात्रा शरीर के लिए घातक होती है।


इनसे होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं 


चीनी की अधिकता के कारण मेटाबॉलिज्म से संबंधित रोग जैसे कोलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर, इंसुलिन रेजिस्टेंस और उच्च रक्तचाप हो जाते हैं।
चीनी के अधिक सेवन से पेट पर वसा की परतें अधिक मात्रा में जमती हैं।
इसके कारण मोटापा, दांतों का सड़ना, डायबिटीज और इम्यून सिस्टम खराब होने जैसी समस्याएं हो जाती हैं।
इसका अधिक सेवन शरीर में कैल्शियम के मेटाबॉलिज्म को गड़बड़ा देता है। चीनी बालों, हड्डियों, रक्त और दांतों से कैल्शियम को सोख लेती है।
अधिक मात्रा में चीनी हमारे पाचन तंत्र को भी प्रभावित करती है।
शरीर में विटामिन बी की कमी हो जाती है और तंत्रिका तंत्र पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
रिफाइंड शुगर के कारण मस्तिष्क में रासायनिक क्रियाएं होती हैं, जिससे सेरेटोनिन रसायन का स्राव हो सकता है, जो हमें अच्छा अनुभव करवाता है, लेकिन थोड़ी देर बाद ही हम थका हुआ, चिड़चिड़ा और अवसादग्रस्त अनुभव करते हैं।

क्या हैं इसके विकल्प 


डायबिटीज से पीड़ित लोगों को प्राकृतिक रूप से मीठी चीजों जैसे फलों आदि का सेवन करना चाहिए। स्वस्थ लोगों को भी चीनी के बजाय गुड़, शहद, खजूर, फलों, फलों का जूस आदि का सेवन करना चाहिए। शहद चीनी का सबसे बेहतर प्राकृतिक विकल्प है। इसमें केवल फ्रुक्टोज या ग्लुकोज नहीं होता है, बल्कि कई मिनरल्स और विटामिन्स भी होते हैं।

नमक

कई लोग स्वास्थ्य से ज्यादा स्वाद को महत्व देते हैं। उन्हें नमकीन और मसालेदार चीजों का स्वाद कुछ ज्यादा ही भाता है, लेकिन ये चीजें हमारे स्वास्थ्य के लिए खतरा बढ़ा देती हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार नमक यानी टेबल सॉल्ट प्रतिदिन 5 ग्राम से कम ही लेना चाहिए।
नमक से बढ़ता खतरा
सामान्य मात्रा में नमक का सेवन हमारे शरीर के सुचारू रूप से कार्य करने के लिए आवश्यक है, लेकिन अधिक मात्रा में नमक का सेवन गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा देता है। अधिक नमक खाने से हाइपर टेंशन और हाई ब्लड प्रेशर हो जाता है। लगातार हाइपर टेंशन के बने रहने से हृदय रोग, स्ट्रोक और गुर्दे की बीमारियां होने की आशंका बढ़ जाती हैं। ज्यादा नमक खाने से रक्त में आयरन की मात्रा कम हो जाती है और इससे पेट में एसिडिटी बढ़ जाती है, जिससे भूख नहीं लगने पर भी भूख का एहसास होता है। इससे हम अधिक मात्रा में कैलरी का सेवन करते हैं जिससे मोटापा बढ़ता है।

नमक का सेवन कैसे करें कम

भोजन में अधिक नमक न खाएं।
नमकीन स्नैक्स कम से कम खाएं।
दही में नमक न डालें।
तला हुआ भोजन कम खाएं।
सलाद बिना नमक के खाएं।
पापड़, चटनी और प्रोसेस्ड फूड कम खाएं।


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17.1.19

बाल फिर से उगाने के अनुपम उपाय

                           


बाल जल्दी उगाने के लिए आपको सबसे पहले बालों की देखभाल करनी होगी। यदि आप बालों की सफाई नहीं रखेंगे, और उन तक पोषक तत्व नहीं पहुंचाएंगे, तब तक बाल जल्दी नहीं बढ़ेंगे।
  यह आम धारणा है कि बालों के झड़ना शुरु होने के बाद बाल दोबारा नहीं उगते हैं। जबकि ऐसा नहीं है। आपको यदि कोई गंभीर बीमारी है या फिर किमोथेरेपी या दवा की साइड इफेक्ट की वजह से बाल झड़ रहें हैं तो बालों का झड़ना नहीं रुक सकता और हेयर रिग्रोथ  की संभावना कम होती है।
लेकिन यदि इनमें से कोई भी कारण नहीं है, आप अंदर से सेहतमंद हैं और बालों की उचित देखभाल कर रहे हैं तो हेयर रिग्रोथ निश्चित रुप से होगी। हेयर रिग्रोथ तभी संभव है जब बालों की जड़ और उनकी कोशिकाओं को पोषण मिल रही हो।
बालों की जड़ों को पोषण में सबसे असरदार है - कुदरती उपाय। कुदरती जड़ी-बूटियों से बने तेल, पत्ते और औषधियों में ऐसे नायाब गुण होते हैं जो हेयर रिग्रोथ में काफी मदद करते हैं।
हालांकि मेडिकल साइंस अब इतना विकसित कर गया है कि गंजे सिर में भी स्टेम शेल थेरेपी से बाल उगाए जा रहे हैं। बालों का प्रत्यारोपण भी किया जा रहा है, लेकिन यह उपाय काफी महंगे हैं और यह सब जगह आसानी से उपलब्ध भी नहीं है।
यही कारण है कि हेयर रिग्रोथ के लिए कुदरती और आयुर्वेदिक उपाय सबसे ज्यादा प्रचलन में है। 

बाल जल्दी उगाने के लिए सबसे उत्तम उपाय पर्याप्त जल पीना है। प्रतिदिन 4 से 5 लीटर पानी पीना अनिवार्य होता है जोकि हमारे शरीर में जल के स्तर को संतुलित करता है। जल हमारे बालों को नमी प्रदान करता है जिससे कि बाल घने और मज़बूत बनते हैं।
जल शरीर में मौजूद हानिकारक तत्वों को नष्ट करने में सहायक होता है और एक स्वस्थ शरीर का निर्माण करता है। पर्याप्त जल 
स्वस्थ बाल उगाने में मदद करता है|

का तेल और बायोटिन थेरेपी 

बालों के झड़ने की बड़ी वजह तनाव, अवसाद (Dejection) और विटामिन बी-7 (बायोटिन) की कमी होती है। इस समस्या को खत्म करने के लिए बालों की जड़ (Scalp) में अरंडी का तेल लगाएं और बायोटिन की गोलियां खाना जरुरी है। यह सबसे आसान थेरेपी है।
पहली बार इसे आजमाने वाले अरंडी के तेल में नारियल तेल, जैतून का तेल या फिर कोई ऐसा तेल मिला लें जो आसानी से अरंडी के तेल में मिल जाए। अरंडी का तेल थोड़ी मोटा और गाढ़ा होता है और इसे पतला बनाने के लिए अन्य तेलों को मिलाना जरुरी होता है। जब तेल तैयार हो जाए तो इससे बालों की जड़ों की मालिश करें।
अरंडी के तेल की मालिश के साथ-साथ विटामिन बी7 या बायोटिन  की गोलियां भी नियमित रुप से खाते रहेंगे तो 3 से 6 महीने के अंदर बेहतर नतीजे आएंगे। बालों का बढ़ना शुरु हो जाएगा। ध्यान रहे विटामिन बी7 की गोलियां 5 एमजी से ज्यादा एक दिन में नहीं खाएं। ओवरडोज से साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं।

विटामिन ई थेरेपी 

विटामिन बी7 के अलावां विटामिन ई भी बालों की वृद्धि में काफी पोषण देती है। पुरुष और स्त्री दोनों के बालों के पोषण के लिए विटामिन ई थेरेपी जरुरी है। यह बालों के झड़ने की बीमारी को भी रोकता है। विटामिन ई की गोलियां खाने या विटामिन ई युक्त तेल बालों की जड़ में लगाने से बालों की जड़ में रक्त संचार की गति तेज होती है और बाल फिर से ग्रोथ होने लगते हैं।

गंजेपन को दूर करने और हेयर रिग्रोथ के लिए कुछ जरुरी दवाएं 

पुरुषों के गंजेपन को दूर करने से लिए एलोपैथ में अब दवाएं भी बनने लगी हैं। इन दवाओं को फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन से मान्यता भी मिल चुकी है। गंजेपन के इलाज और हेयर रिग्रोथ के लिए तीन दवाएं मुख्य रुप से प्रचलन में हैं।
Dutasteride – इसे पुरुषों के गंजेपन के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है। यह बालों की जड़ों की वृद्धि में काफी मदद करता है।
Finasteride – यह भी पुरुषों के गंजेपन के इलाज में खाया जाता है।
Minoxidil – यह क्रीम के रुप में आता है और इसे सिर पर लगाई जाती है।
नोट: किसी भी दवा को लेने से पहले योग चिकित्सक से परामर्श आवश्यक है।



हेयर रिग्रोथ के कुछ घरेलू और कुदरती उपाय


एलोवेरा मास्क और नारियल तेल 

एलोवेरा के जूस और नारियल तेल का मिश्रण हेयर रिग्रोथ में काफी असरदार होता है। दोनों को कुछ इस तरह मिलाएं कि यह पेस्ट की तरह बन जाए। फिर इस पेस्ट को हेयर मास्क की तरह लगाएं। मास्क लगाने के बाद बालों की जड़ की मसाज भी करें। काफी फायदा दिखेगा।


आयुर्वेदिक हेयर वाश

आधा किलो शिकाकाई, मेथी एक पाव, करी पत्ता, तुलसी पत्ता और रीठा 100 ग्राम लें। इस सभी को मिला कर बालों को धोने लायक शैंपू बनाएं। इससे बालों की कई परेशानी दूर होने के साथ बालों में वृद्धि भी होगी।


भृंगराज

भृंगराज के तेल से बालों की मालिश करें। इससे बहुत जल्दी बाल आने लगेंगे।

जटामांसी 


इस जड़ी-बूटी का इस्तेमाल आयुर्वेद में हेयर ग्रोथ के दवा के रुप में किया जाता है। इसे आप कैप्सूल की तरह खा भी सकते हैं और इसे सीधे बालों की जड़ में लगा भी सकते हैं।


प्याज और लहसुन 

प्याज और लहसुन में सल्फर की मात्रा पाई जाती है जो हेयर रिग्रोथ में काफी मदद करती है। इसके लिए कुछ ख़ास नहीं करना है, बस प्याज को काटकर जूस निकाल लेना है और इस जूस से बालों के जड़ की मालिश 15 मिनट तक करनी है।
दूसरी तरफ आपको कुछ लहसुन के दाने के जूस निकाल कर उसे नारियल तेल में मिला देना है। फिर उसे कुछ देर तक उबालना है। जब यह ठंढा हो जाए तो इससे बालों के जड़ की मालिश करनी है।


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13.1.19

लौंग के फायदे और औषधीय उपयोग

  
                                             
लौंग में होने वाला एक खास तरह का स्वाद इसमें होने वाले एक तत्व युजेनॉल की वजह से होता है, यही तत्व इसमें होने वाली एक खास तरह की गंध को पैदा करता है। हालांकि लौंग हर मौसम में हर उम्र के व्यक्तियों के लिए लाभदायक है पर सर्दी के मौसम में इसकी खास उपयोगिता है क्योंकि इसकी तासीर बहुत गर्म होती है। लौंग के तेल की तासीर काफी गर्म होती है और इस कारण इसे बहुत सावधानी से इस्तेमाल करना चाहिए। जब आप अपनी त्वचा पर इसे लगाएं तो सीधे तौर पर बिना किसी चीज़ के साथ मिलाए न लगाएं। 
 लौंग वैसे तो सदाबाहर औषधि है, लेकिन इसकी तासीर गर्म होने की वजह से गर्मियों की तुलना में सर्दियों में इसका सेवन अधिक किया जाता है। लौंग में फॉस्फॉरस, पोटैशियम, प्रोटीन, आयरन, सोडियम, कार्बोहाइड्रेट्स, कैल्शियम और हाइड्रोक्लोरिक ऐसिड भरपूर मात्रा में होता है। लौंग में विटमिन 'ए' और 'सी' के साथ ही मैग्नीशियम और फाइबर भी मौजूद होता है। ठंड में लौंग की चाय पीना सेहत के लिए अच्छा होता है। जानें, लौंग की चाय के फायदों के बारे में...
*लौंग की चाय से पाचन संबंधी समस्याओं को दूर किया जा सकता है। लौंग की चाय पाचन तंत्र को उत्तेजित करती है और ऐसिडटी को कम करती है। खाना खाने से पहले लौंग की चाय पीने से लार के उत्पादन की प्रक्रिया उत्तेजित होती है जो भोजन पाचने में मददगार होती है। 
*खांसी और बदबूदार सांसों के इलाज के लिए लौंग बहुत कारगर है। लौंग का नियमित इस्तेमाल इन समस्याओं से छुटकारा दिलाता है। आप लौंग को अपने खाने में या फिर ऐसे ही सौंफ के साथ खा सकते हैं।


दर्द करे छूमंतर

लौंग की चाय दांत दर्द को दूर करने में सहायक है। इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। लौंग का तेल भी दांत दर्द से आराम दिलाता है। दर्द के समय अगर एक लौंग मुंह में रख लें और उसके मुलायम होने के बाद हल्के-हल्के चबाएं तो दांत दर्द ठीक हो जाता है। सिर दर्द होने पर लौंग का तेल माथे पर लगाने से राहत मिलती है।

कफ हटाए

साइनस या चेस्ट में कफ की समस्या को दूर करने में लौंग की चाय मददगार होती है। अगर आपको साइनस की शिकायत है तो रोजाना सुबह लौंग की चाय पीने से इंफेक्शन खत्म होता है और साइनस से राहत मिलती है। लौंग में मौजूद यूगेनॉल भरी हुई चेस्ट से फौरन राहत प्रदान करने में सहायक होता है।
*लौंग में दिमागी स्ट्रेस को कम करने का भी गुण होता है। लौंग को आप तुलसी, पुदीना और इलायची के साथ इस्तेमाल करके खुशबुदार चाय बना सकते हैं और चाहें तो यही मिक्स आप शहद के साथ इस्तेमाल करके भी स्ट्रेस से छुटकारा पा सकते हैं। 
*लौंग के इस्तेमाल से बनी चाय से बालों को बहुत फायदा होता है। लौंग की चाय को बाल कलर करने और शैम्पू करने के बाद लगाना चाहिए। इसे ठंडा करने के बाद ही बालों पर इस्तेमाल करना चाहिए। आपके बालों को सुंदर बनाने में यह बहुत कारगर है।

अस्थमा हो तो


लौंग को पानी में उबालकर काढ़ा बना लें। इसमें शहद मिलाकर दिन में तीन बार पीने से अस्थमा रोगियों को काफी लाभ होता है। लौंग के तेल का अरोमा भी श्वास रोगों से राहत दिलाने में मददगार होता है। इसे सूंघने मात्र से ही जुकाम, कफ, दमा, ब्रोंकाइटिस, साइनसाइटिस आदि समस्याओं में तुरंत राहत मिलती है।
*लौंग के उपयोग से उलटी आने की समस्या, जी घबराना और मॉर्निंग सिकनेस में आराम मिलता है। लौंग के तेल को इमली, थोडी सी शक्कर के साथ पानी के साथ पीना चाहिए।

संक्रमण करे दूर

आयुर्वेदाचार्य डॉ चंद्र मोहन बताते हैं, एंटीसेप्टिक गुणों के कारण लौंग कई तरह की त्वचा संबंधी समस्याओं और संक्रमणों को दूर करने में सहायक है। लौंग में कई प्रकार के तेल मौजूद होते हैं जो शरीर के विषैले तत्वों को दूर करते हैं। इसे घाव पर लगाने से इंफेक्शन नहीं होता और घाव जल्दी भरता है।

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8.1.19

सर्दी के मौसम मे करें ये उपाय


                                            


ठण्‍ड का कहर बढ़ता जा रहा है। आए दिन तापमान में गिरावट के नए रिकॉर्ड बनते जा रहे हैं । ऐसे में ठंड की मार से बचने के लिए क्‍या किया जाए यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है। आइए जानते हैं कुछ घरेलू उपाय जिनके उपयोग से आप ठण्‍ड के कहर को जरा कम कर सकते हैं।     
               
1. बिस्तर छोड़ने के पहले व्यायाम -

जैसे ही आप बिस्तर से उठते हैं अपने शरीर को तानिए और ढीला छोड़िए। फिर से तानिए और ढीला छोड़िए। चार-पांच बार इस क्रिया को दोहराइए। ऐसा करने से शरीर में गर्मी के तापक्रम में वृद्धि होगी। यदि आपके पास समय है तो एक ही स्थान पर खड़े होकर कुछ देर जॉगिंग कीजिए। ऐसा करने से भी शरीर में चुस्ती-फुर्ती आएगी और आपके अगले काम फटाफट होंगे।


2. पैदल चलिए - 

यदि आप कामकाजी हैं व ऑफिस आपके घर से ज्यादा दूर नहीं है तो संभव हो सके तो आप पैदल ही जाइए। इससे रक्त संचार बढ़ेगा, जो सर्दी को कम करेगा। इस मौसम में लिफ्ट का प्रयोग कम से कम कीजिए। दिन में दो-चार बार सीढ़ियां अवश्य चढ़िए। इससे शरीर का व्यायाम भी होगा और गर्मी भी आएगी। यदि आपका काम पैदल चलने का अधिक नहीं है तो जब भी समय मिले घर में ही तेज चाल से कुछ देर चलिए। पैदल चलना शरीर को गर्मी पहुंचाता है।

3. उबटन स्नान और ताजगी -

 स्नान में साबुन को अधिक महत्व न दीजिए। कोई-सा भी उबटन लगाइए। बांहों, पैरों, घुटनों, पीठ एवं गर्दन को उबटन से रगड़िए, उसके बाद नहाइए। फिर खुरदरे तौलिए से बदन पोंछिए। इस तरह के स्नान से ताजगी, चुस्ती और गर्मी महसूस होगी।


4 गर्म कपड़े भरपूर पहनें - 

मौसम के अनुसार कपड़ों का चयन कीजिए। शोख रंगों को अपनाइए। सर्दी से बचाव का बढ़िया तरीका है एक ही भारी-भरकम गर्म लबादे के बजाए पतली तह वाले कई गर्म कपड़े पहनिए। अंदर के वस्त्र कॉटन के ही हों तो बेहतर होगा। दस्ताने और मौजे पहनने से कतराइए नहीं इनसे आपको आराम भी मिलेगा और त्वचा की सुरक्षा भी होगी।

5. डटकर खाइए - 

इन दिनों भूख अधिक लगती है और भूखे पेट सर्दी अधिक लगती है। सुबह पौष्टिक नाश्ता भरपूर कीजिए। खाने में भरपूर ऊर्जा प्रदान करने वाला भोजन कीजिए। इसमें प्रोटीन, पनीर, दूध, अनाज, आलू, ताजे फल और हरी सब्जियों का सेवन कीजिए। गरमागरम सूप लेना भी इन दिनों अच्छा रहता है।
6.सर्दियों के मौसम में खजूर के फायदे के बारे में आप अपने बुजुर्गों से सुनते आए होंगे। जी, खजूर की तासीर गर्म होती है और इसलिए इसे सर्दियों के लिए बेहद मुफीद माना जाता है। खजूर को गर्म दूध के साथ खाने से सर्दी से तत्‍काल राहत मिलती है। यह न केवल बच्‍चों बल्कि हर उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद होता है। आप चाहें तो खजूर का हलवा बनाकर भी खा सकते हैं। हालांकि इसके अधिक सेवन से बचना चाहिए


7. मॉइश्चराइजर बेहतरीन साथी - 

इन दिनों सर्द हवाओं के साथ-साथ धूप का व्यापक प्रभाव भी त्वचा पर पड़ता है। अतः कोल्ड क्रीम के साथ मॉइश्चराइजर का भी प्रयोग करें। त्वचा की नमी बनाए रखने के लिए पेट्रोलियम, लेनोलिन, मिनरल ऑइल, ग्लिसरीन आदि का भी प्रयोग करें। ये नमी प्रदान करने वाले तत्व त्वचा की रक्षा भी करेंगे। 
10 प्रतिदिन चेहरे की सफाई क्लींजिग मिल्क से करें। विंटर केयर लोशन कोल्ड क्रीम व मॉइश्चराइजर दोनों की कमी पूरा करता है। किसी अच्छी कंपनी का लोशन इन दिनों के लिए चुन लें। आपकी त्वचा पर मौसम का अतिरिक्त प्रभाव नहीं पड़ेगा।

8. हाथ-पैरों को बचाएं - 

एड़ियां व होंठों को फटने से बचाएं। पैरों की मालिश करके सर्दी से बचाएं। घर में स्लीपर के साथ मोजे पहने रहें। बिवाई नहीं पड़ेगी। होंठों पर वैसलीन व चैपस्टिक लगाते रहें, इससे ये सूखेंगे नहीं।

9.तुलसी, लौंग अदरक रखें ठण्‍ड को दूर

तुलसी, लौंग, अदरक और काली मिर्च का दूध व चाय के साथ प्रयोग करना चाहिए। ये औषधियां ठण्‍ड के मौसम में बेहद लाभकारी साबित होती हैं। जानकार बताते हैं कि इनके सेवन से न सिर्फ ठंड से बचने में मदद मिलती है, बल्कि ये सर्दी, जुकाम से भी राहत दिलाने का काम करती हैं।

10. शोख कलर पहनिए -

 शोख कपड़ों के साथ-साथ मेकअप भी शोख रंगों से कीजिए। ब्राउन या लाल रंग के विभिन्न शेड लिपस्टिक के इन दिनों खूब फबेंगे। यदि आप आंखों का मेकअप करती हैं तो स्लेटी, भूरे, सुनहरे और तेज रंग के आई शेडो का इस्तेमाल करें।

11. कमरे का तापक्रम - 

बहुत अधिक गरम या एयर कंडीशनरयुक्त रूम में न सोएं। इससे आप सर्दी से तो बच जाएंगे, पर सुबह उठने पर आप अपने आपको तरोताजा महसूस करने की अपेक्षा सुस्ती से घिरा पाएंगे।

13.सूर्योदय के बाद ही सुबह व्‍यायाम के लिए घर से निकलें। घर से निकलते समय पूरे शरीर को गर्म कपड़ों से ढक लें।

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5.1.19

सर्दी के मौसम मे हार्ट फेल्योर का ख़तरा क्यों बढ़ जाता है?


सर्दी के मौसम में दिल के रोगों के मामले बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि तापमान कम होने के कारण सर्दियों में धमनियां सिकुड़ जाती हैं। सर्दियों के मौसम में अस्पताल में भर्ती होने की दर व हृदय गति रुकने (हार्ट फेल) मरीजों की मृत्युदर में अधिकता देखी गई है। इन दिनों अपने दिल का ख्याल कैसे रखें, इसके लिए चिकित्सकों ने कुछ उपाय सुझाए हैं।
 दिल को सेहतमंद रखने वाली एक्सरसाइज करें, नमक और पानी की मात्रा कम कर दें, क्योंकि पसीने में यह नहीं निकलता है। रक्तचाप की जांच कराते रहें, ठंड की परेशानियों जैसे-कफ, कोल्ड, फ्लू आदि से खुद को बचाए रखें और जब आप घर पर हों तो धूप लेकर या फिर गर्म पानी की बोतल से खुद को गर्म रखें।
ठंड का मौसम किस तरह हार्ट फेलियर मरीजों को प्रभावित करता है जिसपर चिकित्सक ने कहा कि हार्ट फेलियर वाली स्थिति तब होती है, जब हृदय शरीर की आवश्यकता के अनुसार ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पयार्प्त खून पंप नहीं कर पाता है। इसकी वजह से ह्दय कमजोर हो जाता है या समय के साथ हृदय की मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं।
ठंड के मौसम में तापमान कम हो जाता है, जिससे ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाते हैं, जिससे शरीर में खून का संचार अवरोधित होता है। इससे हृदय तक ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है, जिसका अर्थ है कि हृदय को शरीर में खून और ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए अतिरिक्त श्रम करना पड़ता है। इसी वजह से ठंड के मौसम में हार्ट फेलियर मरीजों के अस्पताल में भतीर् होने का खतरा बढ़ जाता है।


सर्दी में इन बातों का रखें ध्यान-

उच्च रक्तचाप: ठंड के मौसम में शारीरिक कार्यप्रणाली पर प्रभाव पड़ सकता है, जैसे सिम्पैथिक नर्वस सिस्टम (जोकि तनाव के समय शारीरिक प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने में मदद करता है) सक्रिय हो सकता है और कैटीकोलामाइन हॉर्मेन का स्राव हो सकता है। इसकी वजह से हृदय गति के बढ़ने के साथ रक्तचाप उच्च हो सकता है और रक्त वाहिकाओं की प्रतिक्रिया कम हो सकती है, जिससे ह्दय को अतिरिक्त काम करना पड़ सकता है। इस कारण हार्ट फेलियर मरीजों को अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ सकता है।

वायु प्रदूषण: 

ठंडा मौसम, धुंध और प्रदूषक जमीन के और करीब आकर बैठ जाते हैं, जिससे छाती में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है और सांस लेने में परेशानी पैदा हो जाती है। आमतौर पर हार्ट फेल मरीज सांस लेने में तकलीफ का अनुभव करते हैं और प्रदूषक उन लक्षणों को और भी गंभीर बना सकते हैं, जिसकी वजह से गंभीर मामलो में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ सकता है।

कम पसीना निकलना:

कम तापमान की वजह से पसीना निकलना कम हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप शरीर अतिरिक्त पानी को नहीं निकाल पाता है और इसकी वजह से फेफड़ों में पानी जमा हो सकता है, इससे हार्ट फेलियर मरीजों में ह्दय की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।कैसे होता है हार्ट फेल्योर
ठंड का मौसम किस तरह हार्ट फेलियर मरीजों को प्रभावित करता है जिसपर चिकित्सक ने कहा कि हार्ट फेलियर वाली स्थिति तब होती है, जब हृदय शरीर की आवश्यकता के अनुसार ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त खून पंप नहीं कर पाता है। इसकी वजह से ह्दय कमजोर हो जाता है या समय के साथ हृदय की मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं।
उन्होंने कहा, "ठंड के मौसम में तापमान कम हो जाता है, जिससे ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाते हैं, जिससे शरीर में खून का संचार अवरोधित होता है। इससे हृदय तक ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है, जिसका अर्थ है कि हृदय को शरीर में खून और ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए अतिरिक्त श्रम करना पड़ता है। इसी वजह से ठंड के मौसम में हार्ट फेलियर मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने का खतरा बढ़ जाता है।"


हार्ट फेलियर के लिए खतरे के कुछ कारण

1. हाई ब्लड प्रेशर: 

ठंड के मौसम में शारीरिक कार्यप्रणाली पर प्रभाव पड़ सकता है, जैसे सिम्पैथिक नर्वस सिस्टम (जोकि तनाव के समय शारीरिक प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने में मदद करता है) सक्रिय हो सकता है और कैटीकोलामाइन हॉमेर्न का स्राव हो सकता है। इसकी वजह से हृदय गति के बढ़ने के साथ रक्तचाप उच्च हो सकता है और रक्त वाहिकाओं की प्रतिक्रिया कम हो सकती है, जिससे ह्दय को अतिरिक्त काम करना पड़ सकता है। इस कारण हार्ट फेलियर मरीजों को अस्पताल में भतीर् करवाना पड़ सकता है।

2. वायु प्रदूषण :

ठंडा मौसम, धुंध और प्रदूषक जमीन के और करीब आकर बैठ जाते हैं, जिससे छाती में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है और सांस लेने में परेशानी पैदा हो जाती है। आमतौर पर हार्ट फेल मरीज सांस लेने में तकलीफ का अनुभव करते हैं और प्रदूषक उन लक्षणों को और भी गंभीर बना सकते हैं, जिसकी वजह से गंभीर मामलो में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ सकता है।

3. कम पसीना निकलना : 

कम तापमान की वजह से पसीना निकलना कम हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप शरीर अतिरिक्त पानी को नहीं निकाल पाता है और इसकी वजह से फेफड़ों में पानी जमा हो सकता है, इससे हार्ट फेलियर मरीजों में ह्दय की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

4. विटामिन-डी की कमी : 

सूरज की रोशनी से मिलने वाला विटामिन-डी, हृदय में स्कार टिशूज को बनने से रोकता है, जिससे हार्ट अटैक के बाद, हार्ट फेल में बचाव होता है। सर्दियों के मौसम में सही मात्रा में धूप नहीं मिलने से, विटामिन-डी के स्तर को कम कर देता है, जिससे हार्ट फेल का खतरा बढ़ जाता है।

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