16.9.18

जावित्री मसाले के औषधीय गुण

                                                                    

जावित्री (Mace Spice – javitri) एक मसाला है जिसका वैज्ञानिक नाम मिरिस्टिका फ्रेग्रेंस (Myristicafragrans) है। इसे जायफल की जुड़वां बहन के नाम से भी पुकारा जाता है। यह एक सुनहरे रंग का मसाला है जो कड़े छिल्‍के (hard shell) से जायफल को ढकता है। इस मसाले का आयुर्वेद नाम जतिसास्‍य या जतिफाला है और यह कई पोषक तत्‍वों से भरपूर होता है। जावित्री के फायदे अनिद्रा, खून का जमना (congestion), अस्‍थमा आदि के लिए हैं। जावित्री को पाउडर बनाकर मसाले के रूप में उपयोग किया जाता है जो कई प्रकार के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ प्रदान करने में मदद करता है।
*अपने पोषक तत्‍वों के कारण जावित्री को आयुर्वेदिक औषधी के रूप में जाना जाता है। जावित्री में तांबा और आयरन बहुत अच्‍छी मात्रा में होते हैं। जावित्री में विटामिन ए, विटामिन बी 1 , विटामिन सी, विटामिन बी 2 और कैल्शियम(Calcium), मैग्‍नीशियम, फॉस्‍फोरस, मैंगनीज और जस्‍ता जैसे खनिजों जैसे कई विटामिन अच्‍छी मात्रा में उपलब्‍ध होते हैं। जावित्री में कई आवश्‍यक शीघ्रवाष्‍पशील तेल (essential volatile oils) होते हैं जैसे कि सफ्रोल, मैरिस्टिकिन, एमिमिसिन, युजीनॉल और फिक्स्ड तेल ट्रिमिरीस्‍टीन (fixed oil trimyristine) बहुत ही स्‍वस्‍थ्‍य मसाले के रूप में होता है।

तनाव करें छूमंतर

आजकल की जीवनशैली के चलते हर दूसरा व्‍यक्ति तनाव से ग्रस्‍त हैं। ऐसे में आपकी रसोई में मौजूद ये मसाला तनाव को दूर भगाता हैं। यह प्रभावशाली तरीके से तनाव और चिन्ता को दूर कर आपको शांत महसूस कराता है। तनाव दूर करने के साथ-साथ यह आपके मस्तिष्‍क को तेज करने में भी मदद करता है।
*मैस मसाले का एक और स्‍वास्‍थ्‍य लाभ रक्‍त परिसं‍चरण (blood circulation) को बढ़ावा देने की क्षमता है। जावित्री आपकी त्‍वचा और बालों को स्‍वस्‍थ रखने में मदद करता है और आपको अन्‍य संक्रमण और खतरों से बचाता है। रक्‍त परिसंचरण अच्‍छा होने से मधुमेह (diabetes) और अन्‍य दिल से संबंधित बीमारियों के खतरे को कम करता है।

अर्थराइटिस का दर्द दूर करें

जावित्री में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेंटरी गुणों के कारण यह जोड़ों में दर्द और सूजन को दूर करने में मदद करता है। अगर आप भी अर्थराइटिस से परेशान रहते हैं तो 2 ग्राम जावित्री और थोड़ी सी सोंठ मिलाकर गर्म पानी के साथ खाने से अर्थराइटिस का दर्द दूर हो जाता है।
*इस मसाले में पोटेशियम (potassium) की अच्‍छी मात्रा होती है जो हृदय को स्‍वस्‍थ्‍य बनाए रखने में मदद करती हैं। सभी प्रकार की कार्डियोवैस्‍कुलर समस्‍याओं को दूर करने के लिए यह सबसे अच्‍छा विकल्‍प है। यह मसाला वासोडिलेटर (vasodilator) के रूप में कार्य करता है और रक्‍त वाहिकाओं को आराम दिलाने में सहायक होता है। जावित्री के फायदे उच्‍च रक्‍तचाप को नियंत्रित करने के लिए भी होते हैं जो पूरे शरीर में स्‍वस्‍थ्‍य रक्‍त *परिसंचरण (blood circulation) बनाए रखता है। यदि आप उच्‍च रक्‍तचाप की समस्‍या से जूझ रहे हैं तो आप जावित्री का उपयोग कर सकते हैं।

सर्दी जुकाम का इलाज

इस मसाले से आप अपनी सर्दी और जुकाम का इलाज भी कर सकते हैं। यह आपको फ्लू और वायरल रोगों से बचाता है और आपके शरीर को रोगों से सुरक्षित रखता है। इसका उपयोग खांसी के सिरप को तैयार करने के लिए भी किया जाता है। जावित्री अस्थमा के रोगियों के लिए बहुत अच्छा होता है।
*दांतों को स्‍वस्‍थ्‍य (Healthy Teeth) बनाने के लिए जावित्री का उपयोग बहुत ही फायदेमंद होता है। इसके साथ आप अपने मुंह की बदबू के उपचार के लिए भी इसका उपयोग कर सकते हैं। जावित्री के फायदे सभी प्रकार की दांत समस्‍याओं को दूर करने में मदद करते हैं। जावित्री मसाला दांतों और मसूढ़ों के दर्द को दूर करने का प्राकृतिक उपाय है और बहुत से दंत मंजनों में इसका उपयोग किया जाता है।


*आजकल की भाग दोड़ भरी जिन्दंगी में मानसिक तनाव एक ऐसे बीमारी है जो किसी को बक्श नहीं रही है| तनाव एक ऐसा शब्द बन गया है जो सुबह से उठते ही हर कोई महसूस करता है| आज हम जानेंगे तनाव के कारण, लक्षण एवं तनाव से बचने के उपाय| तनाव मुख्या रूप से दो प्रकार के होते है| अच्छा तनाव और बुरा तनाव, दोनों मे अंतर इतना है की एक तनाव तरक्की की तरफ ले जाता है और दूसरा समय और जिन्दंगी नष्ट करता है| अच्चा तनाव के कारण हम अपने काम को सही तरीके से और समय पर कर पाते है| वही दूसरी ओर बुरे तनाव के कारण हम अपनी सेहत को नुकसान पंहुचाते है और मानसिक बीमारियों को बुलाते है|
*मस्तिष्‍क स्‍वास्‍थ्‍य (Brain health) को बढ़ावा देने और मस्तिष्‍क के कार्यों को उत्‍तेजित करना जावित्री के प्रमुख स्‍वास्‍थ्‍य लाभों में से एक है। मस्तिष्‍क स्‍वास्‍थ्‍य के लिए जावित्री के फायदे सिर्फ इतने ही नहीं है, बल्कि यह तंत्रिका मार्गों को भी स्‍वस्‍थ्‍य बनाता हैं क्‍योंकि इसमें माइरिस्टिन और मेकेलिग्‍न (myristicin and macelignan) होते हैं। साथ ही यह आपके संज्ञानात्‍मक कार्यों को बढ़ाने वाले तत्‍व होते हैं। इन्‍ही उपयोगिताओं के कारण जावित्री मस्तिष्कि के लिए बहुत अधिक फायदेमंद होती है।

मुंह स्वास्थ्य के लिए अच्‍छा

जावित्री में एंटीबैक्‍टीरियल और एंटिफंगल गुण होते हैं। जो बैक्‍टीरिया के विकास को रोकते है जिससे सांसों की बदबू दूर होती है और मसूड़े स्वस्थ रहते है। युजनोल की उपस्थिति के कारण दांत दर्द कम करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। यहां तक कि बहुत सारे टूथपेस्ट्स और ओरल केयर उत्पादों में एक जावित्री एक आम घटक है।
*मानसिक तनाव आजकल लोगो पर इतना हावी हो चुका है की लोगो को मनोचिकित्सक का सहारा लेना पड़ रहा है| यह एक भयंकर बीमारी का रूप ले रही है जिसका इलाज काफी कठिन है|
*इस मसाले का सेवन करने का एक और फायदा यह है‍ कि यह सर्दी और खांसी (Cold and Cough) से आपकी रक्षा करता है। इस मसाले का सेवन करने से यह फ्लू और वायरल बीमारियों से आपको बचाता है। इस मसाले में मौजूद गुणों के कारण यह आपके मस्ति‍ष्‍क, अस्‍थमा (asthma) और अन्‍य श्वसन संबंधी समस्‍याओं का उपचार करने में मदद करता है। यदि आप जावित्री के फायदे नहीं जानते थे, तो अब आप इसका उपयोग कर लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं।

त्‍वचा के लिए उत्‍कृष्‍ट

सेहत के साथ-साथ जावित्री त्‍वचा के लिए भी बहुत अच्‍छा होता है। जी हां जावित्री मसाले का इस्‍तेमाल पुराने समय से ही त्‍वचा देखभाल के लिए किया जाता है। इसमें मौजूद एंटी-बैक्‍टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और सुखदायक गुण त्‍वचा की अच्‍छे से देखभाल करते हैं। यह जलन को कम और त्‍वचा को अच्‍छे से हाइड्रेट्स करता है। साथ ही जावित्री मुंहासे के निशान और ब्लैकहैड्स को दूर करता है। यह पोर्स को साफ और मृत त्वचा को निकालने में मदद करता है।
*आप अपने गुर्दे को स्‍वस्‍थ्‍य रखने के लिए जावित्री का उपभोग कर सकते हैं। इसमें गुर्दे की रक्षा करने की क्षमता होती है। यह आपके शरीर में गुर्दे के पत्‍थरों के विकास को रोकने में मदद करता है, और यदि आपको गुर्दे की पथरी(kidney stone) है तो यह उन्‍हें दूर करने में भी मदद करता है। गुर्दे के संक्रमण और अन्‍य संबंधित समस्‍याओं को दूर करने का जावित्री एक प्राकृतिक उपाय है।
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14.9.18

मौन मे बड़ी शक्ति है आजमा के देखो !


“चुप रहना” एक ऐसी शक्ति है जो हमें किसी भी बात को गहराई से समझने की और काम करने की ऊर्जा देती है l चुप रहने से हमारा mind ज्यादा काम करने लगता है और हम ठीक समय पर सही निर्णय लेने में सक्षम होते हैं l यह हमारी आत्मिक शक्ति का मुख्य स्त्रोत है, जो आज कल के समय में हमारे लिए बहुत ही मुश्किल है l यह हमारे मन को शांत करता है l शांत रहने से हम अंदर से यानि दिल से सच्ची खुशी का महसूस करते हैं, जिसका अंदाज़ा हम खुद भी नहीं लगा सकते l इससे हमारी संकल्प शक्ति भी बढ़ती है l इसलिए जो लोग कम बोलते हैं, उनके द्वारा कही गई बातें जल्दी सच हो जाती हैं क्योंकि वे लोग सकारात्मक विचारों के होते हैं और उनका मन अंदर से बहुत शांत होता है l जब किसी परेशानी का हल असंभव सा दिखाई देता है तो कुछ देर चुप रहकर अकेले में बैठ कर उसे बड़ी आसानी से हल किया जा सकता है l चुप रहकर ही भगवान या परमात्मा से भी सीधी बात की जा सकती है l जीवन में खुश रहने के लिए चुप यानि शान्ति का विशेष महत्व होता है l

मौन धारण करना एक बड़ी साधना है़ यह हमारे सोचने की शक्ति को बढ़ाता है़ इसलिए साधना के सभी पंथ में मौन की अहमियत स्वीकार की गयी है़ मनोविज्ञानी और करियर विशेषज्ञ भी स्मरण शक्ति बढ़ाने, एकाग्रता, शांति और सकारात्मक सोच के लिए जीवन में मौन धारण करने की सलाह देते हैं़ जब हम कुछ समय मौन रहते हैं, तो स्वयं से बात करते हैं़ आत्ममूल्यांकन करते हैं इससे नयी मानसिक ऊर्जा प्राप्त होती है़ इस छोटे-से उपाय से आप अपने जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं़ बढ़ती है याददाश्त डॉक्टरों की माने तो टहलना सबसे बढ़िया व्यायाम है. इससे तन और मन दोनों तंदुरुस्त रहता है. एकांत में किसी प्राकृतिक स्थान पर टहलने का एक अलग आनंद है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह टहलने से हमारे दिमाग के उस हिस्से का विकास होता है, जो हमारी याददाश्त को मजबूत करता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रकृति के करीब रहने से हमारा स्थान संबंधी याददाश्त तेज होता है, जैसा हमारे पूर्वजों का था़ जब वह भोजन की तलाश में शिकार पर निकलते थे. विशेषज्ञ मानते हैं कि एकांत में दिमाग शांत रहता है. वह यादों को सहेजने का काम करता है. अक्रियाशीलता को बाइपास करें हमारी काम करने की जो संस्कृति है, उसमें सिर्फ उत्पादकता की बात की जाती है. हमेशा पूछा जाता है कि आपका देश आपके लिए क्या कर सकता है या आप अपने देश के लिए क्या कर सकते हैं इस सवाल के मूल में एक ही तत्व रहता है - क्या किया जा सकता है?  
एकांत हमें उत्पादकता के इस चंगुल से कुछ समय के लिए आजादी हमें ब्रेक दिलाती है. कई बार यह एकांत ही बहुत ज्यादा उत्पादक हो जाता है. एक कंपनी है प्रोमेगा. इस कंपनी के कार्यस्थल पर ही 'थर्ड स्पेस' का निर्माण किया है, जहां कर्मचारी काम के दौरान ही नेचुरल लाइट में सॉलिट्यूड ब्रेक (एकांत के क्षण) ले सकते हैं. इससे कर्मचारियों की सेहत सुधरी और कंपनी की उत्पादकता भी बढ़ी. एक्शन को मिलती है मजबूती मनोविश्लेषक केली मैकगोनिगल का मानना है कि जब हम मौन रहते हैं, तभी दिमाग में सकारात्मक विचार आते हैं, जिसे बाद में हम अमल में लाते हैं. इससे हमारे भीतर सकारात्मक प्रवृत्ति बढ़ती है. भविष्य की समस्याओं का समाधान एलेन वाट्स का मानना है कि हम निराशावादी इसलिए हो जाते हैंं, क्योंकि हम भविष्य में जीते हैं, जो सिर्फ एक भ्रम है. मौन हमें वर्तमान में लाता है, जहां हम खुशी का अनुभव करते हैं. मौन की मदद से ही हम भविष्य के भ्रम से निकलने में कामयाब हो सकते हैं. बढ़ती है संवेदनशीलता क्या आप दस दिन तक मौन रहने के बारे में सोच सकते हैं? बहुत से लोगों के लिए यह पानी पर चलने जैसा है. लेकिन, विपासना के साइलेंस रिट्रीट में यही होता है. इसमें भाग लेने वालों को लिखने-पढ़ने तक की मनाही होती है. वह एक-दूसरे से आइ कांटैक्ट भी नहीं कर सकते हैं. एक बार सौ वैज्ञानिकों का दल विपासना के इस तरह के रिट्रीट में शोध के लिए गया था. उन्होंने पाया कि चुप रहने से हमारी संवेदनशीलता दूसरे तरीके से बढ़ने लगती है. हमारी संवेदनशीलता दृष्टि में, सोच में, भावनाओं में समाहित हो जाती है. दिगाम भी तेज होता है शरीर का सबसे जटिल और ताकतवर हिस्सा दिमाग है़ जिस तरह से मांसपेशियों को कसरत करने से फायदा पहुंचता है, वैसे दिमाग को मौन से फायदा होता है. मौन एक तरह से दिमाग की सर्विसिंग कर देता है. जागरूकता बढ़ती है जब कभी भी हम अपने बच्चों या प्रियजनों पर सख्ती करते हैं, तो बाद में पछताते हैं. यह तभी होता है, जब हम बिना सोचे-समझे यह करते हैं. यहीं पर मौन काम करता है. वह हमें जागरूक करता है, सचेत करता है. इससे हमारी गतिविधियां हमारे नियंत्रण में रहती हैं, हम उनके नियंत्रण में नहीं रहते हैं. जब हम जागरूक रहते हैं, तब हमारे ऊपर हमारा नियंत्रण रहता है. किसी बाहरी चीज से हम प्रभावित नहीं होते है. यह शक्ति हमें मौन से मिलती है. दिमाग भी तेज होता है मान लें कि आप किसी शांत जगह पर ध्यान के लिए बैठे हैं और तभी आपको खुजली होने लगती है. विशेषज्ञ मानते हैं कि आपको खुजली नहीं करनी चाहिए. इससे आपको व्यवधान में भी ध्यान लगाने की आदत पड़ जायेगी. इससे एकाग्रता बढ़ेगी.

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12.9.18

मांसपेशियों मे खिंचाव और एंठन के उपचार

                                               



      कभी काम करते-करते, तो कभी खेलते या दौड़ते हुए और कभी यूं ही सामान्य अवस्था में अचानक मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है। यह खिंचाव कुछ समय की पीड़ा भी हो सकती है और लंबी समस्या भी। जानिए इस बारे में और भी।
   मांसपेशियों का दर्द किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है, लेकिन तीस से चालीस वर्ष की आयुवर्ग के युवाओं में यह समस्‍या तेजी से बढ़ रही है। मांसपेशियों में जरूरत से ज्‍यादा दबाव पड़ने के कारण उनमें दर्द होता है।
     आजकल की व्‍यस्‍त और भाग-दौड़ भरी दिनचर्या में मांसपेशियों में दर्द एक आम समस्‍या बन गई है। । मांसपेशियों में जरूरत से ज्‍यादा दबाव पड़ने के कारण उनमें दर्द होता है। इसके कारण मात्र कुछ विशेष मांसपेशियों में दर्द होता हे जो काम करते समय या इसके बाद शुरू हो सकता है। कामकाजी युवक-युवतियों के इसकी चपेट में आने से कार्य क्षमता भी प्रभावित होती है। यहां ऐसे कुछ नुस्खे दिए जा रहे हैं, जिन्हें आजमाकर आपको दर्द से राहत मिल सकती है।
     पूरे शरीर में फैली मांसपेशियां शरीर की ताकत होती हैं। ये शरीर को मजबूती देने के साथ ही लचीलापन भी देती हैं। ऐसे में इनमें होने वाला खिंचाव पीड़ा के साथ ही बहुत बेचैनी भी पैदा कर देता है। मसल्स में खिंचाव का मतलब है मसल्स का जरूरत से ज्यादा खिंच जाना या फट जाना। ऐसा तब होता है जब मांसपेशियों का अत्यधिक प्रयोग लगातार किया जाए, उन्हें बहुत थका दिया जाए या गलत तरीके से मसल्स का उपयोग किया जाए।
     मांसपेशियों के खिंचाव की समस्या यूं किसी भी मसल में हो सकती है लेकिन मुख्यतौर पर यह लोअर बैक, कंधे, गर्दन तथा घुटने के पीछे की मसल्स में ज्यादा होती है। सामान्य खिंचाव में घरेलू इलाज जैसे बर्फ की सिकाई, गर्म सिकाव या साधारण सूजन दूर करने वाली दवाओं से आराम हो सकता है लेकिन गंभीर खिंचाव के केसेस में उचित इलाज की जरूरत हो सकती है। गंभीर केसेस में कई बार छोटी ब्लड वेसल्स को भी नुकसान पहुंच सकता है।
लक्षण जो उभरते हैं
मसल्स के खिंचने पर तेज दर्द के साथ ही कुछ अन्य लक्षण भी नजर आते हैं। इनमें शामिल हैं-
प्रभावित जगह पर सूजन
यदि किसी खुली चोट की वजह से मसल्स फटी या टूटी हैं तो खुला घाव नजर आन
त्वचा का लाल हो जाना या नील पड़ जाना
चलने-फिरने में कठिनाई आना
बेचैन करने वाला दर्द और आराम के दौरान भी दर्द का बने रहना
प्रभावित स्थान पर त्वचा के रंग का बदल जाना, अकड़न महसूस होना
मसल्स स्पाज्म यानी मांसपेशियों में ऐंठन
कमजोरी महसूस होना।
मिल सकता है आराम
साधारण मसल्स खिंचाव में जहां थोड़े आराम और इलाज से कुछ हफ्तों में लाभ मिल सकता है वहीं गंभीर मामलों में पर्याप्त इलाज के साथ लगभग कुछ महीनों का समय ठीक होने के लिए लग सकता है। इसलिए मसल्स में खिंचाव के बाद कुछ दिनों में सामान्य इलाज से लाभ न मिले तो तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करें। जितना जल्दी उपाय करेंगे तकलीफ उतनी ही जल्दी ठीक होगी।
थकान भरी शारीरिक गतिविधियों के बाद ऑक्सीजन की कमी से मांसपेशियों में खिंचाव की समस्या हो सकती है। मांसपेशियों में खिंचाव के कारण वह सिकुड़ जाती हैं, जिससे उनमें रक्त प्रवाह ठीक से नहीं हो पाता। और उनमें दर्द होने लगता है। लेकिन सही तरीके से दर्द वाले स्‍थान पर मालिश करने से रक्‍त प्रवाह में सुधार होता है और दर्द से राहत मिलती है।
ओवर-द-काउंटर दर्द निवारक दवाएं जैसे इबुप्रोफेन या एसिटामिनोफेन मांसपेशियों में दर्द को दूर करने में आपकी मदद कर सकती हैं। इबुप्रोफेन नॉन-स्‍टेरायडल एंटी-इंफ्लेमेंटरी दवा है, जो सूजन को कम करने में मदद करती है। इसके अलावा, क्रीम या औषधीय दर्द से राहत देने वाले पैच जैसे अर्निका, बेंगे, टाइगर बाम, सलोपस भी मांसपेशियों में दर्द से राहत दिलाने में कारगर होते हैं। अमेरिकन अकादमी आफ फैमिली फिजिशियन के डॉक्‍टरों की रिपोर्ट के अनुसार, ओवर-द-काउंटर दर्द निवारक स्‍वस्‍थ वयस्‍कों में मांसपेशियों में दर्द और पीड़ा को दूर करने के लिए सु‍रक्षित होती है।
इन बातों पर करें गौर
नियमित व्यायाम या फिजिकल एक्टिविटी का नियम बनाए रखें। शरीर को जितना लचीला बनाए रखेंगे, मसल्स उतनी ही अच्छी स्थिति में रहेंगी
लंबे समय तक खड़े या बैठे रहने, एक ही स्थिति में रहकर किसी काम को करने या किसी भी तरह से मांसपेशियों को आवश्यकता से अधिक थकाने से बचाना
व्यायाम करने से पहले वॉर्म अप जरूर करना
एकदम से बहुत ज्यादा व्यायाम न करना
सही पोषण न लेना
शरीर को एक्टिव बनाए रखना
पैरों को आराम देने और फिसलने से बचाने वाले फुटवेयर पहनें। कोशिश करें कि रोजमर्रा के जीवन में आरामदायक, कुशन वाले, बिना हील के जूते या फुटवेयर चुनें।

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9.9.18

सफ़ेद मूसली के उपयोग

                                                                                                                                                                                                                   
                       


 (क्लोरोफिटम बोरेवियायनम), जिसे व्हाईट मुस्ली भी कहा जाता है, आयुर्वेद और हर्बल विज्ञान में प्रयोग किया जाने वाला एक शक्तिशाली कामोत्तेजक और स्ट्रिंग एडेडोजेनिक जड़ी बूटी है। परंपरागत रूप से यह गठिया, कैंसर, मधुमेह, जीवन शक्ति बढ़ाने और यौन प्रदर्शन में सुधार के लिए इस्तेमाल किया गया था। यह विशेष रूप से उन पुरुषों के लिए निर्धारित है जिनके कम शुक्राणुओं की संख्या और कम कामेच्छा है।
आयुर्वेदिक अभ्यास में सफेद मुस्ली या क्लोरोफिटम बोरेवियायनम जड़ पाउडर का उपयोग किया जाता है। यह विभिन्न आयुर्वेदिक योगों के रूप में भी प्रयोग किया जाता है जिसमें मुस्ली पाक शामिल है। यह पुरुष कमजोरी, शारीरिक दुर्बलता, स्तंभन दोष, ऑलिगॉस्पर्मिया, रात का उत्सर्जन, आदि के उपचार में उपयोगी है।
सफेद मूसली के लाभ
1. थकान और कमजोरी के लिए: शक्कर (गन्ना ब्राउन शुगर) के साथ सफेद मुस्ली थकान को कम करने में मदद करता है और शरीर को ताकत देता है।
2. वजन बढ़ाने के लिए: आप वजन बढ़ाने के लिए दूध के साथ इसे ले सकते हैं।
3. अल्पशुक्राणुता के लिए: यह अल्पशुक्राणुता के उपचार के लिए बहुत उपयोगी है और गिनती, मात्रा, द्रवीकरण समय और गतिशीलता को बेहतर बनाता है। यह सीरम टेस्टोस्टेरोन का स्तर और वृषण कार्य भी सुधारता है।
4. स्वप्नदोष के इलाज के लिए: अगर रोगी रात में उत्सर्जन के बाद कमजोरी, पीठ दर्द और शक्ति या ऊर्जा की कमी महसूस करता है, तो शक्कर के साथ सफ़ेद मूसली पाउडर का कुछ हफ्तों तक इस्तेमाल किया जाना चाहिए।


5. स्तम्भन दोष के इलाज के लिए:


यह लिंग ऊतक को ताकत प्रदान करता है, कठोरता में सुधार करता है, और लंबे समय तक उत्सर्जन को बनाए रखने में मदद करता है। यह मुख्य रूप से ताकत प्रदान करता है, टेस्टो पर कार्य करता है, हार्मोन प्रोफ़ाइल में सुधार करता है, और शुक्राणुजनन को प्रेरित करता है।
6. गठिया और संयुक्त दर्द के लिए: इसमे अनुत्तेजक गुण है, जो गठिया में होने वाली संयुक्त सूजन को कम करने में मदद करतें हैं।
7. यह मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने और तनाव और अवसाद का सामना करने में मदद करता है।
8. महिलाओं के लिए यह जड़ी-बूटी योनि के  सूखापन से छुटकारा पाने में मदद कर सकती है।
9. यह स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए भी उपयोगी है क्योंकि इससे दूध की गुणवत्ता में सुधार होता है।
10. यह शरीर के निर्माण के लिए एक स्वास्थ्य- पूरक के रूप में भी प्रयोग किया जाता है।
*यह अल्पशुक्राणुता के उपचार के लिए बहुत उपयोगी है और शुक्राणुओं की संख्या, वीर्य की मात्रा, सम्भोग का समयऔर गतिशीलता को बेहतर बनाता है। सफेद मूसली टेस्टोस्टेरोन (पुरषों का सेक्स होर्मोन) का स्तर को बढ़ाता है और वृषण के कार्य (वीर्य उत्पादन) को भी सुधारता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सफेद मूसली के नियमित सेवन से वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या बढ़ती है। इससे आपको कई तरह की सेक्स समस्याओं में आराम मिलता है। अगर आप भी शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाना के कोशिश कर रहे है तो आपको इसका इस्तेमाल जरुर करना चाहिए|
*अगर आप अपनी सेक्स क्लिफे को सही से एन्जॉय नहीं कर पा रहे है और उतेज्जना की कमी से जूझ रहे है तो आपको सफ़ेद मूसली का सेवन मिश्री और दूध के साथ करना चाहिए इससे आपकी शरीर की कामोत्तेजना फिर से पहले जैसी हो जाएगी |
*सफ़ेद मूसली  का सेवन लिंग के ऊतक को ताकत प्रदान करता है, और उसकी कठोरता में सुधार करता है, और लंबे समय तक उत्सर्जन को बनाए रखने में मदद करता है। यह मुख्य रूप से टेस्टेरोंन पर कार्य करता है जो मेल सेक्स होर्मोन होता है जिससे लिंग को ताकत मिलती है इसके नियमित सेवन से शुक्राणुजनन को बढ़ाया जाता है।
*अगर आपको कोई दुबला पतला बोलता है तो आप उनको आपकी बॉडी क्या है दिखाने के लिए आपको सफेद मुसली का इस्तमाल से अपने दुबलेपन का इलाज कर सकते हो. इसके लिए आपको अश्वगंधा,शतावरी,सफेद मुसली और मुलहठी इन सब को 50 -50 ग्राम लेकर इनका चूर्ण बनाके इसमें १०० ग्राम मिश्री को पीसकर मिला दे . इसको रोज सुबह शाम मतलब दिन में दो बार ४० दिन तक पिने से आपका शरीर मजबूत और शक्तिशाली बन जाता है.

*अगर आपको पेशाब करने में दर्द होता है तो हो सकता है कि सेक्स की वजह से आपको कोई समस्या हुई हो। इसके लिए आपको सफेद मूसली का सेवन करना चाहिए आपको बार बार पेशाब जाना पड़ता हो तो इस के लिए आपको 2 ग्राम जायफल का चूर्ण और 5 ग्राम मुसली का चूर्ण या मुसली की पाउडर पानी के साथ पिने से आपकी बार बार मूत्र आने की समस्या दूर हो जायेगी.
महिलाओं के लिए यह जड़ीबूटी योनि में सूखापन से छुटकारा पाने में मदद कर सकती है। इसके इस्तमाल से आप लम्बे समय तक जवान रहती है
यह स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए भी उपयोगी है क्योंकि इससे दूध की गुणवत्ता में सुधार होता है। महिला के स्तनों का दूध शुद्ध करने और ब्रैस्ट का दूध को बढाता है.
गर्भावस्था में सफेद मुसली का थोडा इस्तमाल करने से बच्चे की और माँ के लिए nutritive tonic की तरह काम करता है
*कौंच के बीज, सफेद मूसली और अश्वगंधा के बीजों को बराबर मात्रा में मिश्री के साथ मिलाकर बारीक चूर्ण बनाकर एक चम्मच चूर्ण सुबह और शाम एक कप दूध के साथ लेने से शीघ्रपतन और वीर्य की कमी जैसी समस्याएं दूर हो जाती हैं। सालों से विभिन्न दवाइयो के निर्माण में भी सफेद मूसली का उपयोग किया जाता है। मूलतः यह एक ऐसी जडी-बूटी है जिससे किसी भी प्रकार की शारीरिक शिथिलता को दूर करने की क्षमता होती है। यही कारण है की कोई भी आयुर्वेदिक सत्व जैसे च्यवनप्राश आदि इसके बिना संम्पूर्ण नहीं माने जाते हैं।
यह इतनी पौष्टिक तथा बलवर्धक होती है की इसे शिलाजीत की संज्ञा भी दी जाती है। चीन, उत्तरी अमेरिका में पाये जाने वाले इस पौधे, जिसका वानस्पतिक नाम पेनेक्स जिंन्सेग है का विदेशों में फलेक्स बनाये जाने पर भी काम कर रहे हैं। सफेद मुसली पुरुषों को शारीरिक तौर पर पुष्ट बनाने के अलावा वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने में भी मदद करती है। यही नहीं, कई शोध अपने परिणाम बताते हैं कि डायबिटीस के बाद होने वाली नपुंसकता में भी सफेद मुसली सकारात्मक असर करती पाई गई है।


दुष्प्रभाव:


हालांकि अधिकांश दुष्प्रभाव सामान्य होते हैं और ठीक हो सकते हैं सफेद मुसली का अत्यधिक सेवन सही नहीं है।
इसमें मौजूद फाइबर, नमी को कम करके मल को कड़ा करता है। आप आंत में एक रूकावट का अनुभव कर सकते हैं जिसके कारण कब्ज, ऐंठन और दर्द हो सकता है ।
आँख की सूजन, चिड़चिड़ापन और खुजली गले, त्वचा पर खुजली, जी मचलना, हल्कापन, चक्कर आना, सिरदर्द, सांस लेने में कठिनाई कुछ सामान्य साइड इफ़ेक्ट हो सकते है|


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