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14.6.19

चुकंदर एक फायदे अनेक



अपने गहरे लाल रंग के लिए लोकप्रिय चुकंदर स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ानी हो या सौंदर्यता बरकरार रखनी हो, चुकंदर हर तरीके से फायदा पहुंचाता है। यह जीनस बीटा वल्गेरिस की किस्मों में से एक है और पौधे का जड़ वाला हिस्सा होता है। इसका सेवन अक्सर सलाद और जूस के रूप में किया जाता है।
भोजन के साथ सलाद के तौर पर सेवन करने के अलावा चुकंदर का प्रयोग औषधि और फूड कलर के रूप में भी किया जाता है। इसका रंग इतना गहरा होता है कि सेवन करने के बाद जीभ भी लाल रंग की नजर आती है। विभिन्न भाषाओं में इसके अलग-अलग नाम हैं, जैसे अंग्रेजी में बीटरूट, स्पेनिश में ला रेमोलाचा (la remolacha) और चीनी भाषा में हांग कै टू (Hong cai tou)। इस लेख में हम चुकंदर के विभिन्न शारीरिक फायदों और इसे इस्तेमाल करने के तरीकों को बारे में विस्तार से बताएंगे।
*डायबिटीज एक वैश्विक बीमारी है, जो शरीर में इंसुलिन की कमी के कारण होती है, और सही समय पर रोकथाम के अभाव में इसके परिणाम घातक भी हो सकते हैं। इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के मुताबिक 2012 तक दुनिया भर में मधुमेह से प्रभावित लोगों की संख्या 382 मिलियन थी और ऐसा माना जा रहा है, कि 2035 तक यह आंकड़ा 592 मिलियन तक पहुंच जाएगा । ऐसे में आपका सावधान रहना बेहद जरूरी है।चकुंदर खाने के फायदों में मधुमेह पर नियंत्रण भी शामिल है। डायबिटीज के प्राकृतिक इलाज के रूप में आप चुकंदर का सेवन कर सकते हैं। यह एक गुणकारी खाद्य पदार्थ है। रोजाना इसका सेवन करने से रक्त शर्करा संतुलित हो जाती है। डायबिटीज के मरीजों के लिए यह काफी फायदेमंद हो सकता है। चुकंदर, फाइटोकेमिकल्स और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले बायोएक्टिव यौगिक जैसे पॉलीफेनोल्स, फ्लेवोनोइड्स और एंथोकायनिन का एक बड़ा स्रोत है। ये सभी तत्व मधुमेह के स्तर को कम करने का काम करते हैं।
*हृदय स्वास्थ्य
हृदय को ठीक रखने के लिए भी चुकंदर के कई फायदे हैं। शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है हृदय, जिसका स्वस्थ रहना हर हाल में जरूरी है। इससे जुड़ी कोई भी तकलीफ मौत का कारण सकती है। चुकंदर का रोजाना सेवन हृदय को स्वस्थ रखने का काम करता है। इसमें मौजूद नाइट्रेट तत्व रक्तचाप को सामान्य कर हृदय रोगों और हृदयाघात से बचाता है । एक अध्ययन के अनुसार, बीटरूट मायोकार्डियल इन्फार्कशन से बचाता है । चुकंदर में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस और हृदय रोग से जुड़े इंफ्लेमेशन को कम करने का काम करता है । इसमें मौजूद जरूरी विटामिन्स और मिनरल्स हृदय को स्वस्थ रखते हैं। दिल के रोगों से बचने के लिए आप चुकंदर का सेवन रोजाना कर सकते हैं।
*उच्च रक्तचाप एक गंभीर शारीरिक समस्या है, जिसमें धमनियों में रक्त का दबाव सामान्य से अधिक बढ़ जाता है । स्ट्रोक, हृदय रोग, आंखों की समस्या, किडनी खराब होना आदि हाई ब्लड प्रेशर के घातक परिणाम हो सकते हैं। सही स्वास्थ्य के लिए धमनियों में रक्त का प्रवाह सामान्य रहना बहुत जरूरी है। उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के कई आधुनिक उपाय मौजूद हैं, लेकिन अगर आप प्राकृतिक उपचार की खोज में हैं, तो आप चुकंदर का सेवन कर सकते हैं। बीट रूट में नाइट्रेट नामक तत्व पाया जाता है , जो हाई बीपी को कम करने का काम करता है। उच्च रक्तचाप के देसी उपचार के रूप में आप रोजाना चुकंदर का जूस या इसे सलाद के रूप में ले सकते हैं।
*कैंसर मानव शरीर में कहीं भी हो सकता है, जो खरबों कोशिकाओं से बना होता है। आमतौर पर कोशिकाएं विकसित होती हैं और नई कोशिकाओं को बनाने के लिए विभाजित होती हैं, क्योंकि शरीर को उनकी आवश्यकता होती है। वहीं, जब कोशिकाएं पुरानी हो जाती हैं या क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, तो उनकी जगह नई कोशिकाएं विकसित होती हैं, लेकिन जब कैंसर होता है, तो यह प्रक्रिया टूट जाती है ।
कैंसर से बचने के लिए आप चुकंदर का सेवन कर सकते हैं। चुकंदर एक गुणकारी खाद्य पदार्थ है, जो आपको कर्करोग जैसी घातक बीमारी से बचा सकता है। एक अध्ययन में पाया गया है कि बीटरूट फेफड़ाें और स्किन कैंसर को शरीर में विकसित होने से रोकता है । एक अन्य अध्ययन में इस बात की भी पुष्टि की गई है कि गाजर और चुकंदर का जूस एक साथ मिलाकर पीने से शरीर में ब्लड कैंसर की आशंका को खत्म किया जा सकता है
*एनीमिया
हीमोग्लोबिन एक आयरन युक्त प्रोटीन है, जो लाल रक्त कोशिकाओं को फेफड़ों से ऑक्सीजन को शरीर के बाकी हिस्सों तक ले जाने में मदद करता है। अगर आपको एनीमिया है, तो शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त रक्त मिलने में कमी होने लगती है। परिणामस्वरूप आपको थकान या कमजोरी महसूस हो सकती है। आपको सांस की तकलीफ, चक्कर आना या सिरदर्द हो सकता है। चुकंदर आयरन से भरपूर होता हैं, जो शरीर में आयरन की आपूर्ति करने का काम करता है। इसके सेवन से एनीमिया में धीरे-धीरे सुधार होने लगता है। भविष्य में एनीमिया के डर से बचने के लिए आप रोजाना थोड़ी मात्रा में चुकंदर का सेवन कर सकते हैं।
*पाचन क्रिया
शरीर को पोषित रखने के लिए पाचन क्रिया का मजबूत रहना बहुत जरूरी है। जब पोषक तत्व आंत द्वारा अवशोषित हो जाते हैं, तो वो रक्त प्रवाह के जरिए लिवर तक पहुंचते हैं। फिर लिवर का काम होता है सभी पोषक तत्वों और विटामिन्स की प्रोसेसिंग करना, जिससे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह होता है ।
पाचन क्रिया की मजबूती के लिए आप चुकंदर का सेवन कर सकते हैं। चुंकदर में ग्लूटामाइन नाम का एमिनो एसिड होता है, जो भोजन को पचने में मदद करने के साथ-साथ इम्यून सिस्टम को ठीक रखता है
*बढ़ाता है ऊर्जा
चुकंदर शरीर को कई रूप में फायदा पहुंचाता है। शरीर को ऊर्जावान बनाने के लिए आप इसका सेवन कर सकते हैं। चुकंदर प्राकृतिक रूप से आयरन का एक बड़ा स्रोत है, जो शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं और ऊर्जा के विकास में मदद करता है। यह आतों में कैंडिडा (एक प्रकार का संक्रमण) को पनपने से रोकता है, जो ऊर्जा के स्तर को कम करने का काम करता है। शरीर में ऊर्जा के लिए लिवर का सही काम करना जरूरी है। चुकंदर में फ्लेवोनोइड, सल्फर और बीटा कैरोटीन भी होते हैं, जो लिवर की कार्य प्रणाली को सुचारू रूप से चलाने में मदद करते हैं 
* लिवर को रखता है स्वस्थ
बीट के फायदों में लिवर स्वास्थ्य भी शामिल है। शरीर को पोषित करने के लिए लिवर का स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है। लिवर से जुड़ी समस्याओं से बचने के लिए आप चुकंदर का रोजाना सेवन कर सकते हैं। बीटरूट हाई फैट वाले भोजन से होने वाली लिवर की क्षति को कम करने में मदद करता है। इसमें फ्लेवोनॉयड्स भी पाया जाता है, जो मेटाबॉलिज्म को बनाए रखने में सहायता करता है 

*मजबूत दांत और हड्डियां
हड्डियां हमारे शरीर को मजबूती प्रदान करती हैं और हमारे आकार को बनाने में मदद करती हैं। शरीर के पूरे वजन को संभालने के लिए हड्डियों का मजबूत रहना बहुत जरूरी है। इसके अलावा, हड्डियां शरीर के अंगों की रक्षा भी करती हैं, जैसे खोपड़ी मस्तिष्क की रक्षा करती है और चेहरे का आकार बनाती है। पसलियां एक पिंजरे का निर्माण करती हैं, जिससे हृदय और फेफड़े सुरक्षित रहते हैं। वहीं, पेलविस मूत्राशय, आंतों के हिस्से और महिलाओं के प्रजनन अंगों की रक्षा करने का काम करता है।
हड्डियों की मजबूती के लिए शरीर में कैल्शियम का होना बहुत जरूरी है और चुकंदर कैल्शियम का अच्छा स्रोत है। रोजाना इसका सेवन न सिर्फ आपकी हड्डियों, बल्कि आपके दांतों को भी मजबूत बनाने में मदद करेगा।
*त्वचा के लिए
चुकंदर का रस एंटीऑक्सीडेंट का बेहतरीन स्रोत है, जो त्वचा के लिए एक प्रभावशाली एंटी-एजिंग एजेंट के रूप में काम करता है। इसमें विटामिन-सी भी पाया जाता है, जो त्वचा को झुर्रियों और सूखेपन से बचाने में मदद करता है (25)। चुकंदर आपकी त्वचा को नर्म और कोमल बना सकता है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि यह मृत कोशिकाओं की शीर्ष परत को हटा देता है। चुकंदर का रस पीने से आपकी त्वचा हाइड्रेट रहती है।
15. बालों के लिए
चुकंदर में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन-ए, विटामिन-सी, कैल्शियम, आयरन और पोटैशियम की मात्रा अधिक होती है। यह शरीर को कई मायनों में लाभ पहुंचाता है। बालों के स्वास्थ्य के लिए भी आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। यह बाल झड़ने और स्कैल्प में खुजली से निजात दिलाने का काम करता है। चुकंदर में कैरोटीनॉयड नामक तत्व पाया जाता है, जो बालों की गुणवत्ता, वृद्धि, मोटाई और चमक में सुधार करता है ।
* कोलेस्ट्रॉल
कोलेस्ट्रॉल शरीर के मेटाबॉलिज्म के लिए आवश्यक है। साथ ही यह बाइल एसिड, स्टेरॉयड हार्मोन और विटामिन-डी के संकलन के लिए जिम्मेदार होता है । वहीं, अगर शरीर में इसका स्तर अधिक हो जाए, तो कई प्रकार से नुकसान हो सकता है। अधिक कोलेस्ट्रॉल हृदय रोग व स्ट्रोक का कारण बन सकता है, जिससे मौत भी हो सकती है।
बीट के फायदों में कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण भी शामिल है। कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने और इसके घातक परिणामों से बचने के लिए आप चुकंदर का सेवन कर सकते हैं। चुकंदर में कैलोरी की मात्रा कम होती है और इसमें शून्य कोलेस्ट्रॉल होता है ।
गर्भावस्था
गर्भावस्था के दौरान आप चुकंदर का सेवन कर सकते हैं। इसमें फोलेट के साथ-साथ मैंगनीज, पोटैशियम, विटामिन-सी, फास्फोरस, कॉपर और आयरन भी पाया जाता है। ये सभी तत्व गर्भावस्था के दौरान मां और बच्चे को स्वस्थ रखने का काम करते हैं। एक अध्ययन में पाया गया है कि रोजाना 500ml चुकंदर का जूस पीने से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। चुकंदर फोलिक एसिड का भी एक बड़ा स्रोत है, जो बच्चे में न्यूरल ट्यूब दोष को रोकने में मदद करता है 
 वजन घटाने में मददगार
चुकंदर स्वस्थ खनिज और विटामिन से भरपूर होता हैं। चुकंदर के रस में फाइबर की मात्रा अधिक होती है और अधिक फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ वजन कम करने में मदद करते हैं (22)। हाई फाइबर फूड्स में कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है, इसलिए ये पेट भरने का काम करने के साथ-साथ शरीर को मोटापे से भी बचाते हैं।
* मोतियाबिंद

मोतियाबिंद आंख से जुड़ी बीमारी है, जो 60 साल की उम्र के बाद ज्यादा देखने को मिलती है। इस बीमारी के कारण देखने की क्षमता कमजोर हो जाती हैं। अगर आप बुढ़ापे में ऐसी बीमारी से बचना चाहते हैं, तो विटामिन-सी से युक्त चुकंदर का सेवन रोजाना जूस या सलाद के रूप में कर सकते हैं। विटामिन-सी आंखों को स्वस्थ रखने का काम करता है।
* यौन स्वास्थ्य
चुकंदर खाने के फायदों में यौन स्वास्थ्य भी आता है। बीट में अच्छी मात्रा में बोरॉन मौजूद होता है । यह खनिज सीधे सेक्स हार्मोन के उत्पादन से संबंधित है।
*सफेद चुकंदर को पानी में उबाल कर छान लें। यह पानी फोड़े, जलन और मुहांसों के लिए काफी उपयोगी होता है। खसरा और बुखार में भी त्वचा को साफ करने में इसका उपयोग किया जा सकता है.
कब्ज और बवासीर-
चुकंदर का नियमित सेवन करेंगे, तो कब्ज की शिकायत नहीं होगी। बवासीर के रोगियों के लिए भी यह काफी फायदेमंद होता है। रात में सोने से पहले एक गिलास या आधा गिलास जूस दवा का काम करता है.
चुकंदर खाने के फायदों को जानने के बाद अब पता करते हैं कि इसमें कौन-कौन से पौष्टिक तत्व होते हैं।
चुकंदर के उपयोग – 
चुकंदर का सेवन आप निम्नलिखित रूपों में कर सकते हैं –
कच्चा – बीट्स को आप कच्चा खा सकते हैं। इसे काटकर और फिर उस पर हल्का नमक और नींबू छिड़क कर खाएं।
पनीर के साथ भुना हुआ – बीट को तब तक भूनें, जब तक कि वह नरम और रसदार न हो जाए। भूने हुए चुकंदर के साथ पनीर मिलाकर खाएं।
जूस- आप चुकंदर का जूस निकाल कर रोजाना पी सकते हैं।
सलाद के रूप में – भोजन के साथ सलाद के रूप में भी आप चुकंदर का सेवन कर सकते हैं। आप इसके साथ प्याज भी मिला सकते हैं।
सब्जी – बीट को आप अन्य सब्जी की तरह बनाकर भी खा सकते हैं।
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23.3.16

आलू खाने के फायदे// Benefits of Potato







आलू पौष्टिक तत्वों से भरा होता है। आलू में सबसे ज्यादा मात्रा में स्टॉर्च पाया जाता है। आलू क्षारीय होता है, जिसे खाने से शरीर में क्षारों की मात्रा बरकरार रहती है। आलू में सोडा, पोटाश, और विटामिन ए और डी पर्याप्त मात्रा में होता है।
*आलू को हमेशा छिलके समेत पकाना चाहिए। क्योंकि, आलू का सबसे अधिक पौष्टिक भाग छिलके के एकदम नीचे होता है, जो प्रोटीन और खनिज से भरपूर होता है। आलू को उबालकर या भूनकर खाया जाता है, इसलिए इसके पौष्टिक तत्व आसानी से पच जाते हैं। आइए हम आपको आलू के गुणों के बारे में बताते हैं।
*विटामिन ‘सी’-आलू में विटामिन ‘सी’ बहुत होता है। इसको मीठे दूध में भी मिलाकर पिला सकते हैं। आलू को छिलके सहित गर्म राख में भूनकर खाना सबसे अधिक गुणकारी है या इसको छिलके सहित पानी में उबालकर खायें। पानी, जिसमें आलू उबाले गए हों, को न फेंकें बल्कि इसी पानी में आलुओं की सब्जी बना लें। इस पानी में मिनरल और विटामिन अधिक होते हैं।



*किडनी फेल रोग का अचूक इलाज*

*बेरी-बेरी (Beri-Beri)-बेरी-बेरी का अर्थ है-चल नहीं सकता। इस रोग से जंघागत नाड़ियों में क्षीणता का लक्षण विशेष रूप से होता है। आलू पीसकर, दबाकर, रस निकालकर एक चम्मच की एक खुराक के हिसाब से नित्य चार बार पिलायें। कच्चे आलू को चबाकर रस की निगलने से भी समान लाभ मिलता है
गुर्दे की पथरी होने पर आलू का प्रयोग करना चाहिए। पथरी के रोगी को केवल आलू खिलाकर और बार-बार अधिक पानी पिलाकर पथरी को निकाला जा सकता है।



गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका के अचूक उपचार


*आलू को गोला काटकर आंखों पर रखने से आंखों के आसपास की झुर्रियां समाप्त होती हैं।
*अम्लता (Acidity)—जिन बीमारों के पाचनांगों में अम्लता (खट्टापन) की अधिकता है, खट्टी डकारें आती हैं और वायु अधिक बनती है, उनके लिए गर्म-गर्म राख या रेत में भुना हुआ आलू बहुत लाभदायक है। भुना हुआ आलू गेहूँ की रोटी से आधी देर में पच जाता है और शरीर को गेहूँ की रोटी से भी अधिक पौष्टिक पदार्थ पहुँचाता है। पुरानी कब्ज़ और अंतड़ियों की सड़ाँध दूर करता है। आलू में पोटेशियम साल्ट होता है जो अम्लपित को रोकता है। आलू की प्रकृति क्षारीय है जो अम्लता को कम करती है। अम्लता के रोगी भोजन में नियमित आलू खाकर अम्लता को दूर कर सकते हैं।



हाथ पैर और शरीर का कांपना कारण और उपचार


*आंखों का जाला एवं फूला:-कच्चा आलू साफ-स्वच्छ पत्थर पर घिसकर सुबह-शाम आंख में काजल की भांति लगाने से पांच से छ: वर्ष पुराना जाला और चार वर्ष तक का फूला तीन महीने में साफ हो जाता है।
चेहरे की रंगत के लिए आलू बहूत फायदेमंद होता है। आलू को पीसकर त्‍वचा पर लगाने से रंग गोरा हो जाता है।
*सौंदर्यवर्धक-आलू का रस त्वचा को निखारने के लिए उपयोगी है, क्योंकि इसमें पोटेशियम, सल्फर और क्लोरीन की प्रचुर मात्रा होती है। आलू का रस त्वचा पर लगायें, धोयें।
*आलू के रस को शहद में मिलाकर बच्चों को पिलाने से बच्चों का विकास अच्छे से होता है।

मूत्राषय प्रदाह(cystitis)के सरल उपचार

बच्चों का पौष्टिक भोजन-आलू का रस दूध पीते बच्चों और बड़े बच्चों को पिलाने से वे मोटे-ताजे हो जाते हैं। आलू के रस में मधु मिलाकर भी पिला सकते हैं। आलू का रस निकालने की विधि यह है कि आलुओं को ताजे पानी में अच्छी तरह धोकर छिलके सहित कद्दूकस करके इस लुगदी को कपड़े में दबाकर रस निकाल लें। इस रस को एक घण्टे तक ढककर रख दें। जब सारा कचरा-गूदा नीचे जम जाए तो ऊपर का निथरा रस अलग करके काम में लें।
*गठिया-चार आलू सेंककर छिलके उतारकर नमक-मिर्च डालकर नित्य खाये। इससे गठिया ठीक हो जाती है।
*गुर्दे या वृक्क (किडनी) के रोगी भोजन में आलू खाएं। आलू में पोटैशियम की मात्रा बहुत अधिक पाई जाती है और सोडियम की मात्रा कम। पोटैशियम की अधिक मात्रा गुर्दों से अधिक नमक की मात्रा निकाल देती है। इससे गुर्दे के रोगी को लाभ होता है। आलू खाने से पेट भर जाता है और भूख में सन्तुष्टि अनुभव होती है। आलू में वसा (चर्बी) यानि चिकनाई नहीं पाई जाती है। यह शक्ति देने वाला है और जल्दी पचता है। इसलिए इसे अनाज के स्थान पर खा सकते हैं।"

वीर्य की मात्रा बढ़ाने और गाढ़ा करने के उपाय

*उच्च रक्तचाप के रोगी भी ओलू खायें तो रक्तचाप सामान्य बना रहता है। पानी में नमक डालकर आलू उबालें। छिलका होने पर आलू में नमक कम पहुँचता है और आलू नमकयुक्त भोजन बन जाता है। इस प्रकार यह उच्च रक्तचाप में लाभ करता है। आलू में मैग्नीशियम पाया जाता है जो उच्च रक्तचाप को कम करता है।
विसर्प (छोटी-छोटी फुंसियों का दल):-यह एक ऐसा संक्रामक रोग है जिसमें सूजनयुक्त छोटी-छोटी फुन्सियां होती हैं, त्वचा लाल दिखाई देती है तथा साथ में बुखार भी रहता है। इस रोग में पीड़ित अंग पर आलू को पीसकर लगाने से फुन्सियां ठीक हो जाती हैं और लाभ होता है।
*चोट लगने पर आलू का प्रयोग करना चाहिए। कभी-कभी चोट लगने के बाद त्वचा नीली पड़ जाती है। नीले पडे जगह पर कच्चा आलू पीसकर लगाने से फायदा होता है।



हाइड्रोसील(अंडकोष वृद्धि) के घरेलू और होम्योपैथिक उपचार

दाद के रोग में:-कच्चे आलू का रस पीने से दाद ठीक हो जाता है।
*आलू खाने से पेट भर जाता है और भूख में संतुष्टि अनुभव होती है। आलू में व्रसा (चर्बी) या चिकनाई नहीं पाई जाती है। यह शक्ति देने वाला है, जल्दी पचता है। इसलिए इसे अनाज के स्थान पर खा सकते हैं।
हृदय की जलन:-*इस रोग में आलू का रस पीएं। यदि रस निकाला जाना कठिन हो तो कच्चे आलू को मुंह से चबाएं तथा रस पी जाएं और गूदे को थूक दें। आलू का रस पीने से हृदय की जलन दूर होकर तुरन्त ठंडक प्रतीत होती है।
*झुर्रियों से बचाव के लिए आलू बहुत फायदेमंद होता है। झुर्रियों पर कच्चे आलू को पीसकर लगाने से झुर्रियां समाप्त होती हैं।

*मोटापा-आलू मोटापा नहीं बढ़ाता। आलू को तलकर तीखे मसाले, घी आदि लगाकर खाने से जो चिकनाई पेट में जाती है, वह चिकनाई मोटापा बढ़ाती है। आलू को उबालकर या गर्म रेत या राख में भूनकर खाना लाभप्रद और निरापद है।
*त्वचा की एलर्जी या फिर त्वचा रोग होने पर आलू का प्रयोग करना चाहिए। कच्चे आलू का रस लगाने से त्वचा रोग में फायदा होता है।
*अगर अं‍तडियों से सडांध आ रही हो तो भुने हुए आलू का प्रयोग करना चाहिए। इससे पेट की कब्ज और अंतडियों की सडांध दूर होती है।

पित्त पथरी (gallstone) के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार 

किडनी निष्क्रियता की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि