29.7.18

भांग के नुकसान हैं तो कुछ फायदे भी हैं//Benefits of hemp

                                                           


*एक तरफ जहां भांग पीना सेहत के लिए नुकसानदायक माना जाता है, वहीं भांग को औषधि‍ या जड़ी-बूटी के रूप में भी जाना जाता है। यदि आप भांग के नुकसान ही जानते हैं, तो इसके कुछ फायदे जानकर आप हैरान हो जाएंगे.
*एक ओर जहां भांग का अत्यधि‍क सेवन सिरदर्द का कारण बन सकता है, वहीं सिरदर्द का इलाज भी भांग के पास है। जी हां, भांग की पत्त‍ियों का अर्क निकालकर, इसकी कुछ बूंदे कान में डालने से सिरदर्द पूरी तरह से खत्म हो जाता है
*पाचनशक्ति‍ को बढ़ाने के लिए भांग फायदेमंद है। साथ ही किसी प्रकार का घाव हो जाने पर, भांग की पत्त‍ियों का लेप बनाकर घाव पर लगाएं। ऐसा करने पर घाव जल्दी भर जाएगा और किसी प्रकार की अन्य परेशानी भी नहीं होगी।

*कम मात्रा में भांग का सेवन आपकी इंद्रि‍यों और संवेदनाओं की तीव्रता में इजाफा करती है। जैसे यह स्पष्ट सुनाई देने और दिखाई देने में मददगार है। इसका सेवन आपके खराब मूड को सुधारने का काम भी करता है।
*भांग के बीज प्रोटीन और 20 अमीनो एसिड से भरपूर हैं, जो कैलोरी को जलाने वाली मांसपेशियों के विकास के लिए अहम हैं। कसरत के बाद भांग के कुछ बीजों का जूस या शेक पीना फायदेमंद होता है
*यदि आपकी त्वचा अत्यधि‍क रूखी या खुरदुरी है, तो भांग की पत्त‍ियों का इस्तेमाल त्वचा को चिकना बनाने में मदद करेगा। इसकी पत्त‍ियों को पीसकर लेप तैयार करें और इसे त्वचा पर लगाएं।

सावधानी-

अगर आप भी भांग का शौक फरमाते हैं तो जरा सावधान रहिएगा, कहीं यह आपकी प्रजनन क्षमता को खत्म ही ना कर दे। एक बड़े अध्ययन में दावा किया गया है कि भांग का सेवन करने वाले पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है, क्योंकि इससे उनके शुक्राणुओं का आकार प्रभावित होता है।
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आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचा







28.7.18

बच्चों की चोट के घरेलू उपचार //Home remedies for children's injuries

                                             

    अपने बच्चे को किसी भी प्रकार की चोट लगने पर बिना घबराए ,पहले यह देखे की उसे किस प्रकार की चोट लगी हैं यह समझते हुए उसका प्राथमिक ईलाज करे और अपने बच्चे को राहत दिलाये यदि हो सके तो आर्निका 30 खिलाये और यदि चोट गंभीर हो तो डॉक्टर के पास ले जाए।
प्राथमिक चिकित्सा की जानकारी किसी की जान बचा सकती है। मगर सावधानी और बचाव सबसे जरुरी है। छोटे बच्चों को इस बात की जानकारी या एहसास नहीं होता की उन्हें किन चीज़ों से चोट लग सकती है। मगर बड़ों को ख्याल रखना चाहिए की जहाँ बच्चे खेल रहें हो वहां कोई ऐसी वस्तु न हो जिससे बच्चो को चोट लगे। हानिकारक वस्तुएं जैसे की कीटनाशक या फिर फिनायल बच्चों की पहुँच से दूर रखें। टेबल कुर्सी भी इस तरह रखें की बच्चे उसपे चढ़ कर कूदें नहीं। घर पे सीढ़ी हो तो उसपे गेट लगवा लें ताकि बच्चे सीढ़ी पर ऊपर निचे बिना बड़ों के निगरानी के न खेलें। कुछ सावधानियां बरत कर आप अपने बच्चे को कई प्रकार के चोट से बचा सकती हैं। प्राथमिक चिकित्सा के माध्यम से चोट पर तुरंत काबू पाया जा सकता है , लगातार बहने वाले खून को रोका जा सकता है तथा बच्चे की गंभीर स्थिति को साधारण स्थिति में बदला जा सकता है।
*यदि आप के बच्चे को इस तरह की चोट लग गई हो जहाँ से लगातार खून बह रहा हो तो, सबसे पहले खून रोकने का उपाय करना चाहिए। जैसे - फिटकरी को रगड़े या दुब को पीस कर घाव पर लगाने से खून बहना बंद हो जायेगा। बर्फ के टुकड़ें को घाव वाली जगह पर रगड़ने से खून बहना बंद हो जाता हैं।
खून बहने के स्थान पर यदि खून जम जाए तो पुदीने का रास बच्चे को पिलाना चाहिए।

*सुगन्धित परफ्यूम लगाने से बहता हुआ खून रुक जाता है।
*कभी - कभी बच्चा इस तरह गिर जाता है की उसके माथे या सिर के पीछे के भाग में गोला सा गुरमा निकल आता है ,उसपर तुरंत बर्फ रगडने से यह चोट ठीक हो जाता है।
*हल्दी ,प्याज , भांग की पत्ती पीसकर उसमे सरसो का तेल डालकर गर्मकर उस फूले हुए हिस्से पर लगाने से चोट पर आराम मिलता हैं। कुछ परिस्तिथियाँ ऐसी होती है की बच्चे की हाथ या पैर की हड्डी टूट या सरक जाती है, उस समय हल्दी दूध में मिलाकर पिलाने से चोट ओर दर्द दोनों में राहत मिलती है। 
*स्पिरिट लगाने से भी बहता हुआ खून बंद हो जाता हैं।
*बच्चे को चोट लगने पर इस बात का ध्यान रखे की कही उसे अंदरूनी चोट तो नहीं लग गई है, ऐसा होने पर लहसुन हल्दी और गुड़को मिलाकर लेप करने से चोट ठीक हो जाती है।
*लहसुन की कली को नमक के साथ पीसकर उसकी पुल्टिस बनाकर बांधने से चोट ओर दर्द में आराम मिलता है।
*नमक को तवे पर सेक कर मोटे कपडे में बांधकर दर्द वाली जगह पर सेकने से आराम मिलता है।
*चोट- मोच के दर्द में पोस्ता के दाने को पीसकर लगाने से आराम मिलता है। तिलके तेल में कपूर मिलाकर लगाने से आराम मिलता है।
*जमे हुए खूनपर पुदीना पीसकर लगाने से आराम मिलता है।

26.7.18

भूख बढ़ाने वाली आयुर्वेदिक औषधियाँ//Ayurvedic medicines to increase appetite

                                             


आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में भूख बढ़ाने की विभिन्न दवा उपलब्ध है | इनका उपयोग करके भी आप अपनी समस्या से निजात पा सकते है | यहाँ हमने आयुर्वेद की सर्वमान्य एवं प्रशिद्ध दवाओं की सूचि दी है जो भूख न लगने की समस्या में अचूक दवा साबित होती है |

शिवाक्षार पाचन चूर्ण

भूख न लगने की समस्या, अजीर्ण, अपच एवं अरुचि में आयुर्वेद का सबसे अधिक प्रसिद्ध चूर्ण है | इसका प्रयोग किया जा सकता है | अगर आपको पाचन की खराबी के कारण भूख नहीं लगती तो निश्चित ही इस चूर्ण का उपयोग करना चाहिए | निरंतर 10 दिन के प्रयोग से ही आपकी भूख बढ़ने लगेगी | पतंजलि, डाबर, बैद्यनाथ, आदि सभी कम्पनियाँ इसका निर्माण करती है |

हिंग्वाष्टक चूर्ण

भूख बढ़ाने के लिए हिंग्वाष्टक चूर्ण भी रामबाण औषधीय दवा सिद्ध होती है | अगर आपको भूख कम लगने की समस्या के साथ – साथ गैस, पेट दर्द, कब्ज, पेट में कीड़े एवं अजीर्ण एवं अपच की समस्या भी है तो निश्चित रूप से हिंग्वाष्टक चूर्ण के सेवन से इन समस्याओं से पूर्णत: निजात पाया जा सकता है

अग्निकुमार रस

अग्नि कुमार रस का सेवन भूख बढ़ाने के लिए किया जा सकता है एवं इसके परिणाम भी अच्छे मिलते है | यह आयुर्वेद के रस प्रकरण की औषधि है | इसका सेवन भूख न लगने, कमजोर पाचन, अजीर्ण, अपच में किया जा सकता है | अगर आप इसका सेवन भूख बढ़ाने के लिए कर रहें है तो 1 से 2 गोली सौंफ अर्क या चिकित्सक के निर्देशानुसार करें |

*अग्निमुख चूर्ण

अग्निमंध्य, पाचन का ठीक ढंग से काम न करना, खट्टी डकारें आना आदि में अग्निमुख चूर्ण का सेवन कर सकते है | इसका निर्माण सोंठ, जीरा, काला नमक एवं सेंधा नमक आदि से होता है | अत: भूख कम लगने की बीमारी में 1 से 3 ग्राम की मात्रा में भोजन के बाद पानी के साथ सेवन किया जा सकता है | 5 – 7 खुराक में ही भूख बढ़ने लगेगी |

* चित्रकादी वटी

मन्दाग्नि के साथ साथ , आंतो में सुजन, उदर के विकार एवं आमातिसार आदि रोगों में उपयोग की जाती है | चित्रक, हिंग, पीपल एवं यवक्षार आदि औषध द्रवों से इसका निर्माण किया जाता है 
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भूख बढ़ाने वाले औषध योग एवं चूर्ण का करे घर पर निर्माण

* अग्निवर्धक चूर्ण

अग्नि को बढ़ाने वाला यह चूर्ण आप घर पर ही बना सकते है , इसके लिए आपको निम्न चीजों की आवश्यकता होगी |
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भुना हुआ जीरा 100 ग्राम
पीसी हुई सोंठ 50 ग्राम
कालीमिर्च 50 ग्राम
निम्बू का सत 50 ग्राम
काला नमक 50 ग्राम
सेंधा नमक 150 ग्राम
पिपरमेंट – 2 ग्राम
इन सभी को कूट पीसकर महीन चूर्ण बना ले एवं शीशी में भर ले | यह अग्निवर्धक चूर्ण तैयार हो गया | इसका इस्तेमाल नित्य भोजन के पश्चात आधा – आधा चम्मच की मात्रा में पानी के साथ करें | नित्य प्रयोग से भोजन अच्छी तरह पचने लगेगा और खुल कर भूख लगेगी | गैस एवं आफरे की समस्या में भी आराम पहुंचाता है |
2. त्रिफला चूर्ण-
आंवला , हरड एवं बहेड़ा – इन तीनो को सामान मात्रा में लेकर कूट पीसकर चूर्ण बना ले | त्रिफला चूर्ण सम्पूर्ण शरीर के कायाकल्प के काम आता है | नित्य प्रयोग से पाचन की क्रिया सुधरती है एवं भूख बढती है | इसे आयुर्वेद में त्रिदोष शामक औषधि माना जाता है | अत: यह सभी प्रकार के अन्य रोगों में भी लाभदायक सिद्ध होता है |
 लवण भास्कर चूर्ण भी एक उत्तम योग है जिसके प्रयोग से सभी प्रकार के पेट के रोग दूर होते है | भूख बढ़ाने के लिए आप इसका इस्तेमाल कर सकते है |
 पंचकोल चूर्ण
दीपन एवं पाचन गुणों से युक्त इस चूर्ण का इस्तेमाल भी आप भोजन में रूचि जगाने के लिए कर सकते है | भूख बढ़ाने के साथ – साथ पेट की विभिन्न रोग जैसे – आफरा, पेट दर्द एवं अपचन में लाभ देता है |

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20.7.18

पोहा है वजन कम करनेवाला सेहतमंद नाश्ता

                                                                                     
                                                       



पोहा पीटे हुए चावल से बना एक स्‍वस्‍थ नाश्ता है। यह आसानी से तैयार होने वाला स्‍वादिष्‍ट और अधिक मात्रा में सब्जियों की मौजूदगी के कारण बेहद पौष्टिक होता है। भारत के विभिन्न राज्यों में, पोहा अलग अलग तरीकों से तैयार किया जाता है और कई घरों का तो यह एक प्रधान नाश्ता है।
भारत में पोहा सुबह के नाश्ते के तौर पर खासा पसंद किया जाता है। लंबे समय से भारतीय पोहे का सुबह के नाश्ते में सेवन कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर अब बाजार में ओट और कीनोआ जैसे नाश्ते के तौर पर सेवन किए जाने वाले आहार भी मौजूद हैं, इनको बनाने वाली कंपनिया दावा करती हैं कि इनसे आप तेजी से वजन कम कर सकते हैं। लेकिन इन सब के बीच विशषज्ञों का मानना है कि पोहा सबसे सेहतमंद नाश्ता है। पोहे में 76.9 फीसदी कार्बोहाइड्रेट्स और 23.1 फीसदी प्रोटीन होता है। जो कि इसे एक सेहतमंद नाश्ता बनाता है, जो आपको सुबह-सुबह ऊर्जा देता है।
हल्का आहार :
अधिकांश स्‍वास्‍थ्‍य के प्रति जागरूक लोग वजन घटाने वाले आहार में कुछ समय के लिए पोहा को शामिल कर इसके प्रभाव को देखते हैं। यह आहार पेट के लिए हल्‍का होता है और आमतौर पर कम मात्रा में परोसा जाता है साथ ही यह एक स्‍वस्‍थ जीवन शैली को आगे बढ़ने में मदद करता है। इस आहार को नींबू के साथ परोसा जाता है। पोहे पर नींबू के रस की मौजूदगी इसे अतिरिक्‍त स्‍वास्‍थ्‍य लाभ प्रदान करती हैं।
- पोहा खाने से पेट से संबंधित समस्याएं नहीं होंगी क्योंकि इसमें बहुत ही कम मात्रा में ग्लूटीन पाया जाता है.
- डायबिटीज के मरीज को पोहा खिलाने से भूख कम लगती है साथ ही ब्लडप्रेशर लेवल में रहता है.
- पोहे में बहुत ज्यादा मात्रा में कैलोरी पायी जाती है. इसे कई तरीके से बनाया जाता है. जहां वेजीटेबल पोहा में 244 किलो कैलोरी होती है वहीं मूंगफली पोहा में 549 किलो कैलारी शामिल होती है.
पोहा भारत का एक मशहुर नाश्ता है, जिसे चावल से बनाया जाता है। वे कहती हैं कि यह अपने आप में एक पूर्ण आहार है। इसमें भारी मात्रा में कार्बोहाइड्रेट्स, आयरन और फाइबर होते हैं। साथ ही पोहे में एंटी ऑक्सीडेंट और जरूरी विटामिन की भी जरूरी मात्रा में होती है। वे कहती हैं कि यह सुबह के नाश्ते के लिए या दिन में किसी भी समय स्नैक की तरह खाया जा सकता है। इसके अलावा इसमें कार्ब्स की मात्रा बहुत कम होती है। साथ ही इसमें इंसुलिन न होने के कारण पोहा वजन कम करने में भी मदद करता है।
क्योंकि पोहा को चावलों को पीटकर बनाया जाता है। जिसके कारण ये आासनी से पच जाता है, जिस कारण पेट पर दबाव नहीं रहता और आपको पूरे दिन पेट फुला हुआ महसूस नहीं होता।
अगर आप सोचते हैं पोहा सिर्फ ब्रेकफास्ट मील है तो यह काफी नहीं है. पोहे में ऐसे कई गुण हैं जो आपको हेल्दी रखने में काफी मददगार हैं. जानिए एक्सपर्ट क्या कहते हैं पोहे के बारे में.
- पोहे में भरपूर मात्रा में आयरन पाया जाता है. इसको खाने से शरीर में हीमोग्लोबिन और इम्यूनिटी पावर बढ़ती है.
- पोहे में सबसे ज्यादा सब्जियों का इस्तेमाल किया जाता है. जिस कारण यह खनिज, विटामिन और फाइबर का खजाना हो जाता है.
- अगर पोहे में सोयाबीन, सूखे मेवे और अंडा मिलाकर खाया जाए तो विटामिन के साथ ही प्रोटीन भी मिलेगा.
- पोहे में अच्छी मात्रा में कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है. जिससे शरीर को ऊर्जा मिलती है. इससे शरीर को बीमीरियों से लड़ने में मदद मिलती है.
पोहे को पचाने में शरीर को ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ती. यह आसानी से पचने वाला खाना है.
- वहीं एक्सपर्ट का मानना है कि पोहे को ब्रेकफास्ट में खाने से इसका फायदा कई गुना बढ़ जाता है.
कार्बोहाइड्रेट से भरपूर
आप पोहे पर भरोसा कर इसे कार्बोहाइड्रेट के लिए अपना प्राथमिक स्रोत बना सकते हैं। पीटा चावल अन्य कार्बोहाइड्रेट विकल्पों की तुलना में स्वस्थ होता है। आप चिप्स या अन्य नाश्ते की तुलना में नाश्ते में इसे खा सकते हैं। पर्याप्त कार्बोहाइड्रेट के बिना, आप अपनी दैनिक गतिविधियों को नहीं कर सकते हैं। एक और अच्छी खबर, पोहा फाइबर से भी समृद्ध होता है।
पोषक तत्व से भरपूर
पोहे में अनेक प्रकार की सब्जियों को मिलाने के कारण इसमें विटामिन और मिनरल की अधिकता पाई जाती है। आप इसे स्‍वादिष्‍ट और प्रोटीन युक्‍त बनाने के लिए इसमें मूंगफली और अंकुरित दालों को भी मिला सकते हैं। कुछ लोग पोहे को प्रोटीन से भरपूर बनाने के लिए इसमें अंडा भी मिला देते हैं। आप इसे अपने बच्‍चे के लंच बॉक्‍स में भी पैक कर सकते हैं।
ग्लूटेन का कम स्तर
पोहा में ग्‍लूटेन के कम स्‍तर के कारण, कम ग्‍लूटेन खाद्य पदार्थों का उपभोग करने वाले डॉक्‍टर की सलाह से इसे अपने आहार में शामिल कर सकते हैं। पोहा मधुमेह रोगियों द्वारा भी सेवन किया जा सकता है। यह पोहे के स्वास्थ्य लाभ में से एक है।
मधुमेह रोगियों के लिए
खून में शुगर के धीमी गति से बढ़ावा देने के कारण पोहा मधुमेह रोगियों के लिए भोजन का अच्‍छा विकल्प माना जाता है। साथ ही यह आपको लंबे समय तक पूर्ण महसूस करता है। एक बार इसके सेवन से आप भूख के कष्‍ट और अस्वास्थ्यकर मिठाई और जंक फूड को दूर रखने में पर्याप्‍त होता है। इसके पोषक मूल्य में वृद्धि करने के लिए आप इसमें सोया मिला सकते हैं।

किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि

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18.7.18

सिर्फ दवाई से ही नहीं रत्नों से भी होता है रोग निवारण //Disease prevention is not only with medicines

                                             


ज्योतिष शास्त्र में रत्नों द्वारा चिकित्सा का विधान है। हालांकि किसी भी रोग का इलाज आर्युवेदिक औषधियों और अंग्रेजी दवाओं से ही संभव है। लेकिन रत्न चिकित्सा भी इस तरह के रोगों के लिए लाभकारी सिद्ध होती है। ऐसे ही कुछ रोगों के इलाज के लिए रत्न बेहतर साबित हो सकते हैं।


रोग : सफेद दाग

कारण : सफेद दाग त्वचा संबंधी रोग के कारण होते हैं। इस रोग में त्वचा पर सफेद चकते बन जाते हैं। जब चंद्र राशि में चंद्र, मंगल, शनि का योग बनता है तब यह रोग उत्पन्न होता है। बुध की शत्रु राशि पर होने पर भी यह संभावना प्रबल हो जाती है।
निवारण : इस रोग की स्थिति में हीरा, पुखराज धारण करना चाहिए।
 
रोग : भूलने की बीमारी

कारण : इस रोग में बीती हुई बहुत सी घटनाएं या बातें याद नहीं रहती, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में जब लग्न एवं लग्नेश पाप युक्त होते हैं तो इस प्रकार की स्थिति होती है। सूर्य और बुध जब मेष राशि पर होता है तो स्मृति दोष उत्पन्न होता है। साढ़े साती के समय जब शनि की महादशा चलती है तो भूलनने की समस्याएं प्रकट होती है।
निवारण : रत्न चिकित्सा पद्धति के अनुसार ऐसे व्यक्तियों को मोती एवं माणिक्य धारण करना चाहिए।

रोग : दंत रोग

कारण : ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दांतो का स्वामी गुरु होता है। कुंडली में गुरु पीड़ित होने से दांतो की परेशानी से सामना करना पढ़ सकता है।
निवारण: मूंगा या पुखराज पहनकर इस रोग का इलाज कर सकते है, लोहे का कड़ा भी धारण किया जा सकता है।

रोग : उच्च रक्तचाप

कारण : चंद्रमा ह्दय का स्वामी है। चंद्रमा के क्षीण होने पर इस रोग की संभावना प्रकट होती है। पाप ग्रह, राहु, केतु जब चंद्रमा के साथ उपस्थित रहते हैं तब रक्तचाप का रोग होता है।

निवारण : इस रोग में मूंगा धारण करना चाहिए। चंद्र का रत्न मोती, मून स्टोन और ओपल भी धारण किया जा सकता है।

रोग : त्वचा रोग
कारण: शुक्र त्वचा का स्वामी ग्रह है, गुरु या मंगल क्षीण होने पर त्वचा संबंधी रोग( दाद, खाज, खुजली, एक्जीमा) उत्पन्न हो जाते हैं।
निवारण : इस रोग में स्फटिक, हीरा और मूंगा धारण करना चाहिए।

रोग : मधुमेह या डायबिटीज
कारण : ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मधुमेह यानी डायबिटीज का सामना उस स्थिति में होता है जब कर्क, वृश्चिक या मीन राशि में पाप ग्रह की संख्या दो या उससे अधिक रहती है। अष्टमेश एवं षष्ठेश दोनों एक दूसरे के विपरीत घरों में हो तो भी मधुमेह का रोग होता है।
निवारण : रत्न चिकित्सा के अनुसार मुगा या पुखराज धारण करना चाहिए।





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प्राकृतिक चिकित्सा मे कटि स्नान के स्वास्थ्य लाभ


                                                             


साधन :-
टब, छोटा स्टूल, छोटा तौलिया, कम्बल, पानी |
जल का तापमान :-कटि स्नान में प्रयोग में लाये जाने वाले जल का तापमान शरीर के तापमान से कम रहना चाहिए तभी जल का प्रभाव शरीर पर हो सकेगा | सामान्यतः गर्मी के दिनों में जल का तापमान 55 डिग्री फारनहाईट तथा सर्दियों में ७५ से ८४ डिग्री फारनहाईट रहना चाहिए | ठन्डे जल का तापमान बढ़ाने के लिए उसमे अलग से गर्म पानी मिला देना चाहिए |
कटि स्नान करने का समय :-
कटि स्नान प्रारंभ में पांच मिनट से शुरू करके प्रतिदिन एक -एक मिनट बढ़ाते हुए पंद्रह मिनट तक किया जा सकता है | बच्चों व् कमजोर व्यक्तियों को पांच मिनट से अधिक नही लेना चाहिए | प्रातः खाली पेट कटि स्नान करना चाहिए |

पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 


कटि स्नान करने की विधि :-

टब में लगभग 12 से 14 इंच गहराई तक पानी भरें जिससे कि टब में बैठने पर पानी उपर नाभि तक एवं नीचे आधी जंघाओं तक आ जाये |
टब में अधलेटी अवस्था [ जैसे आराम कुर्सी पर बैठते हैं ] में बैठ जाएँ | दोनों पैर टब के बाहर चौकी पर रख लें | ध्यान रहे कि पानी से पैर न भीगने पायें |
रोयेंदार तौलिये से पेडू पर दायें से बाएं अर्ध चंद्राकर घर्षण करें [ मालिश करें ] |
कटि स्नान के बाद शरीर में गर्मी लाने के लिए लगभग 15 -20 मिनट टहलें,व्यायाम करें अथवा कम्बल ओढ़कर लेट जाएँ |
विशेष :-
यदि कमजोरी अधिक हो तो सिर को छोडकर टब सहित पूरा शरीर एक कम्बल से ढक लें |
कटि स्नान करते समय तब में पीछे से पीठ को बीच-बीच में हिलाते रहें, इससे रीढ़ के स्नायु उद्दीप्त होंगे फलस्वरूप शरीर में चेतनता आयेगी और रोगप्रतिरोधक क्षमता में भी वृद्धि होगी |

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

कटि स्नान से शरीर में होने वाली प्रतिक्रिया :-

साधारण सी दिखने वाली इस क्रिया का प्रभाव सम्पूर्ण शरीर पर पड़ता है | यदि यह कहा जाय कि “कटि स्नान प्राकृतिक चिकित्सा की संजीवनी बूटी है |” तो अतिशयोक्ति नही होगा |

पानी का तापमान शरीर के तापमान से कम होने के कारण टब में बैठते ही पेडू की अतिरिक्त गर्मी कम होकर पूरे पाचन तंत्र में संकुचन की स्थिति उत्पन्न होती है जिससे कई अंग जैसे लीवर,क्लोम ग्रंथि,आमाशय, छोटी आंत आदि में सक्रियता आती है और वे पर्याप्त मात्रा में पाचक रसों को स्रवित करना प्रारंभ कर देते हैं जिससे पाचन तंत्र की मजबूती के साथ ही जीर्ण कब्ज, जो सभी रोगों की जननी है , से भी छुटकारा मिलता है | इसके अतिरिक्त रीढ़ की हड्डी में पानी का स्पर्श होने से स्नायुविक रोग भी दूर हो जाते हैं |
कटि स्नान से लाभ :-


छोटी व् बड़ी आंत के अधिकांशतः सभी रोग कटि स्नान से दूर हो जाते हैं |
पीलिया रोग में स्टीम बाथ के तुरंत बाद २-३ मिनट कटि स्नान करने के उपरांत पूर्ण स्नान करने से पित्त पर्याप्त मात्रा में निकलता है एवं पीलिया समाप्त हो जाता है |
कटि स्नान जननेंद्रिय की दुर्बलता एवं वीर्य के पतलेपन को दूर करता है |
बबासीर , आंत, गर्भाशय की रक्तस्राव की अवस्था में कटि स्नान अत्यंत हितकारी है | रक्तस्राव की अवस्था में कटि स्नान लेते समय यह ध्यान रहे कि दोनों पैर चौकी पर रखने की बजाय किसी बर्तन में गर्म पानी में डुबोकर रखें |इस क्रिया को करने से पेडू में स्थित अतिरिक्त रक्त पैरों में उतर जाता है तथा पानी की ठंडक से पेडू सिकुड़ने लगता है, फलस्वरूप रक्तस्राव बंद हो जाता है |
पेडू की अतिरिक्त गर्मी के फलस्वरूप मल में जो स्वाभाविक नमी होती है, वह सूख जाती है जिसके कारण मल आंत में सूखकर कड़ा हो जाता है, इसी अवस्था को जीर्ण कब्ज या कोष्ठबद्धता कहते हैं | कटि स्नान से पेट की अतिरिक्त गर्मी पानी में निकल जाती है एवं कब्ज से मुक्ति मिलती है |

दर्द रहित पेडू की पुरानी सूजन में विशेष लाभकारी है |
नये एक्जिमा में कटि स्नान अत्यंत लाभकारी है |

*किडनी में क्रिएटिनिन और यूरिया की समस्या के घरेलू उपचार* 

नियमित कटि स्नान करने से शरीर की जीवनीशक्ति आश्चर्यजनक रूप से बढ़ जाती है जिससे कैंसर, लकवा, क्षय जैसे भयंकर रोगों से बचाव होता है |
अनिद्रा, हिस्टीरिया, चिडचिडापन, स्नायुविक रोगों में कटि स्नान अति लाभप्रद है |

स्त्री रोगों में कटि स्नान से लाभ :-

स्त्रियों के लगभग सभी रोगों में कटि स्नान बहुत लाभकारी है |
गर्भाशय की स्थानभ्रष्टता एवं जब गर्भाशय आदि अन्दर से बाहर आते मालूम हों तो कटि स्नान से आश्चर्यजनक रूप से लाभ पहुंचता है |
पुराने रक्तप्रदर, श्वेतप्रदर में कटि स्नान लाभ करता है |
गर्भवती स्त्री प्रसव से दो माह पूर्व से ही कटि स्नान लेना प्रारंभ कर दे तो बिना कष्ट के सामान्य रूप से प्रसव होगा |

गर्भपात के लक्षण दिखाई पड़ने पर यदि २० से ३० मिनट तक कटि स्नान लिया जाय तो गर्भपात रुक सकता है | इस अवस्था में सावधानीपूर्वक पेट को बहुत धीरे -धीरे रगड़ना आवश्यक है |

लो ब्लड प्रेशर होने पर तुरंत करें ये पाँच उपाय 

बाल रोगों में कटि स्नान से लाभ :-
बच्चों को कटि स्नान करने से उनकी स्मरण शक्ति व् बुद्धि का विकास होता है |
बच्चों को सोते समय बिस्तर में पेशाब करना एक ऐसा रोग है जिससे बच्चे में इस रोग के आलावा हीनभावना आनी प्रारंभ हो जाती है | इन बच्चों को यदि नियमित कटि स्नान कराना प्रारंभ कर दिया जाय तो कुछ ही दिनों में रोग से छुटकारा मिल जाता है |
सावधानियां :-

कटि स्नान खाली पेट ही लें |
पानी और शरीर का तापमान समान नही होना चाहिए |
पहले दिन ही अधिक ठन्डे जल से कटि स्नान नहीं करना चाहिए बल्कि प्रथम दो-तीन दिन सामान्य जल [ 
कटि स्नान ऐसी जगह में करना चाहिए, जहाँ पर ठंडी हवा के झोंके न आ रहे हों |

कटि स्नान लेने के डेढ़-दो घंटे तक स्नान नहीं करना चाहिए |
एपेंडिक्स, गर्भाशय, मूत्राशय, बड़ी आंत, जननेंद्रिय के विभिन्न अवयवों की नई सूजन तथा ह्रदय रोग की ख़राब स्थिति में कभी भी ठन्डे पानी से कटि स्नान नहीं करना चाहिए |
न्युमोनिया, गठिया, दमा, साईटिका के तीव्र दर्द में कटि स्नान नही लेना चाहिए |

शरीर के तापमान से थोडा कम तापमान का जल ] का प्रयोग करें तत्पश्चात क्रमशः प्रतिदिन जल के तापमान को कम करते जाएँ |सामान्यतः कटि स्नान लम्बे समय तक करने पर भी कोई हानि नही है बल्कि लम्बे समय तक ही क्यों इसे अपनी जीवन शैली में ही सम्मिलित कर लेना चाहिए, ताकि आपका शरीर स्वस्थ्य एवं जीवन सुखमय रहे |

किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि 

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार




17.7.18

प्राकृतिक चिकित्सा मे गीली पट्टियों का चमत्कार// The wonders of wet bandage in natural medicine

                                           

    प्राकृतिक चिकित्सा में साधारण सी दिखने वाली क्रियाएं शरीर पर अपना रोगनिवारक प्रभाव छोडती हैं | किसी सूती या खादी के कपडे की पट्टी को सामान्य ठन्डे जल में भिगोकर , निचोड़कर अंग विशेष पर लपेटने के पश्चात् उसके ऊपर से ऊनी कपडे की [सूखी] पट्टी इस तरह लपेटी जाती है कि अन्दर वाली सूती/खादी पट्टी पूर्ण रूप से ढक जाये | इस लेख में रोगनिवारण हेतु विभिन्न "जल पट्टी लपेट" के विषय में जानकारी प्रस्तुत है -
1. सिर की गीली पट्टी -
लाभ : सिर की गीली पट्टी से कान का दर्द , सिरदर्द व सिर की जकड़न दूर होती है |
साधन
एक मोटे खद्दर के कपडे की पट्टी जो कि इतनी लम्बी हो कि गले के पीछे, के ऊपर से कानों को ढकते हुए आँखों और मस्तक को पूरा ढक ले |

*किडनी में क्रिएटिनिन और यूरिया की समस्या के घरेलू उपचार*

ऊनी कपडे कि पट्टी [ खादी की पट्टी से लगभग दो इंच चौड़ी और दोगुनी लम्बी ]विधि :
खद्दर की पट्टी को ठन्डे पानी में भिगोकर निचोड़ लें तत्पश्चात इस पट्टी को आँखें,मस्तक एवं पीछे कानों को ढकते हुए एक राउण्ड लपेट दें | अब इसके ऊपर ऊनी पट्टी को लगभग दो राउण्ड इस तरह लपेट दें कि नीचे वाली गीली पट्टी अच्छी तरह से ढक जाये | लगभग एक घंटा इस पट्टी को लगायें |

2. पेडू की गीली पट्टी : 
लाभ : पेट के समस्त रोगों,पुरानी पेचिस, कोलायिटिस,पेट की नयी-पुरानी सूजन,अनिद्रा,बुखार एवं स्त्रियों के गुप्त रोगों की रामबाण चिकित्सा है |इसे रात्रि भोजन के दो घंटे बाद पूरी रात तक लपेटा जा सकता है |
साधन : 
खद्दर या सूती कपडे की पट्टी इतनी चौड़ी जो पेडू सहित नाभि के तीन अंगुल ऊपर तक आ जाये एवं इतनी लम्बी कि पेडू के तीन-चार लपेट लग सकें |

स्नायु संस्थान की कमज़ोरी  के नुस्खे

सूती कपडे से दो इंच चौड़ी एवं इतनी ही लम्बी ऊनी पट्टी |विधि :
उपर्युक्त पट्टियों की विधि से सूती/खद्दर की पट्टी को भिगोकर,निचोड़कर पेडू से नाभि के तीन अंगुल ऊपर तक लपेट दें ,इसके ऊपर से ऊनी पट्टी इस तरह से लपेट दें कि नीचे वाली गीली पट्टी पूरी तरह से ढक जाये |एक से दो घंटा या सारी रात इसे लपेट कर रखें |
3 जोड़ों की गीली पट्टी : 
शरीर के विभिन्न जोड़ों के दर्द एवं सूजन की अवस्था में एक घंटे के लिए जोड़ के आकर के अनुसार गीली फिर ऊनी पट्टी का प्रयोग करें |

4. गले की गीली पट्टी :
लाभ : इस पट्टी को रोगनिवारक प्रभाव पूरे शरीर पर पड़ता है | गले की पट्टी से गले के ऊपर-नीचे की अनावश्यक गर्मी समाप्त होती है |

पेट दर्द मे घरेलू उपाय 

टांसिलायिटिस, गले के आस-पास की सूजन, गला बैठना,घेंघा जैसे रोगों में लाभकारी है |
साधन :
एक सूती पट्टी -गले की चौडाई जितनी चौड़ी एवं इतनी लम्बी कि गले में तीन-चार लपेट लग जाएँ |
गले में तीन-चार लपेट लगने भर की लम्बी, ऊनी पट्टी या मफलर |विधि :
सूती पट्टी को ठन्डे पानी में भिगोकर , निचोड़कर गले में तीन-चार लपेटे लगा दें ऊपर से ऊनी पट्टी या मफलर लपेट लें | समय – ४५ मिनट से १ घंटा |
5. छाती की पट्टी :
लाभ : छाती के सभी रोग जैसे -खांसी,निमोनिया,क्षय [ फेफड़ों का ] दमा, कफ,पुरानी खांसी में लाभकारी |
सावधानी :
अत्यंत निर्बल रोगी को पट्टी देते समय सूती/खादी पट्टी को गुनगुने पानी में भिगोकर,निचोड़कर प्रयोग करना चाहिए |

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 

फेफड़ों के रक्तस्राव की अवस्था में पट्टी का प्रयोग कम समय के लिए एवं फेफड़ों की कैविटी [ जैसा कि क्षय में होता है ] भरने हेतु अधिक समय के लिए पट्टी का प्रयोग करना चाहिए |साधन :
खद्दर या सूती कपडे की एक पट्टी जो कि छाती की चौडाई के बराबर चौड़ी हो एवं लम्बाई इतनी कि छाती से पीठ तक घुमाते हुए तीन राउण्ड लग जाएँ |
ऊनी या गर्म कपडे की पट्टी जो नीचे की सूती/खद्दर की पट्टी को ढक ले |विधि :
खद्दर या सूती पट्टी को ठन्डे पानी में भिगोकर निचोड़ लें , अब इसे पूरी छाती पर पसलियों के नीचे तक लपेट दें | इस पट्टी के ऊपर ऊनी पट्टी लपेट दें | यह पट्टी रोग की अवस्था के अनुसार १ से ४ घंटे तक बांधी जा सकती है |
6. धड की गीली पट्टी :
लाभ :- योनि की सूजन, आमाशायिक रोग, पेट-पेडू का दर्द व सूजन, लीवर,तिल्ली के रोगों में अत्यंत लाभकारी है |
विधि :
यह भी छाती पट्टी की तरह लपेटनी होती है बस इस पट्टी की चौडाई नाभि के नीचे तक बढ़ा लेनी चाहिए एवं पट्टी के दौरान रोगी को लिटाकर सिर खुला रखकर पैर से गर्दन तक कम्बल उढ़ा देना चाहिए | एक से दो घंटा इस पट्टी का प्रयोग करना चाहिए |
पिपली के गुण प्रयोग लाभ 

थायराईड ग्रंथि के रोग और प्राकृतिक,आयुर्वेदिक उपचार // Thyroid gland disease and natural, Ayurvedic treatment


                                                     

मानव शरीर में दो प्रकार की ग्रंथियां होती हैं, एक वे जो हार्मोन्स को नलिकाओं के माध्यम से शरीर के विभिन्न अवयवों तक पहुंचाती हैं| दूसरी वे ग्रंथियां हैं जिनके हार्मोन सीधे रक्त के साथ मिलकर शरीर के आन्तरिक अवयवों तक पहुंचकर विभिन्न शारीरिक क्रियाओं का नियमन एवं संचालन करते हैं | इन्हें अन्तःस्रावी ग्रंथि कहा जाता है |
अन्तःस्रावी ग्रंथियों का कार्य : जिस प्रकार किसी रासायनिक क्रिया में किसी उत्प्रेरक [ CATALYST ] को मिला दिया जाये तो उसकी प्रतिक्रिया तुरंत व् आसान हो जाती है;
ठीक उसी प्रकार अन्तःस्रावी ग्रंथियों से जो हार्मोन निकलते हैं वे सीधे रक्त में मिलकर ‘ उत्प्रेरक ‘ का कार्य करते हैं तथा शरीर में होने वाली रासायनिक क्रियाओं को बेहद आसान बना देते हैं |
हमारे शरीर में निम्न अन्तःस्रावी ग्रंथियां होती हैं
१- पियुष [ PITUITARY ]
२- अवटुका [ THYROID ]
३- परावटुका [ PARATHYROID ]
४- अधिवृक्क [ ADRENAL ]
५- बाल ग्रंथि [ THYMUS GLAND ]
६- क्लोम की द्वीपिका [ ISLETS OF LANGERHANS ]
७- अंड ग्रंथि [ TESTES ] पुरुषों में
८- डिम्ब ग्रंथि [ OVARY ] स्त्रियों में
अन्तःस्रावी ग्रंथियों का महत्व :
मनुष्य के पुरे जीवन काल में अन्तःस्रावी ग्रंथियां बहुत ही सीमित मात्रा में हार्मोन स्रवित करती हैं, परन्तु यह हमारे जीवन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण तथा आवश्यक हैं | उदहारणस्वरुप एक सामान्य स्त्री की ” डिम्ब ग्रंथि ” से जीवन पर्यंत – एक डाक टिकट जितना आकार के कागज के भार के बराबर हार्मोन निकलता है , परन्तु यही हार्मोन एक बालिका को स्त्री एवं स्त्री को माँ बनाने के लिए जिम्मेदार होता है | इसी प्रकार -” थायरायड ग्रंथि “ से जीवन भर में मात्र चाय के एक चम्मच जितना हार्मोन निकलता है, परन्तु इसकी कमी या अधिकता – बौनापन या अत्यधिक लम्बाई के साथ ही शरीर में अन्य अनेक परेशानियाँ उत्पन्न कर देता है |इस लेख में हम थायरायड ग्रंथि एवं इस से उत्पन्न रोगों की प्राकृतिक,योग एवं एक्युप्रेशर चिकित्सा की जानकारी दे रहे हैं 
थायरायड/पैराथायरायड ग्रंथियां :थायरायड ग्रंथि गर्दन के सामने की ओर,श्वास नली के ऊपर एवं स्वर यन्त्र के दोनों तरफ दो भागों में बनी होती है | एक स्वस्थ्य मनुष्य में थायरायड ग्रंथि का भार 25 से 50 ग्राम तक होता है | यह ‘ थाइराक्सिन ‘ नामक हार्मोन का उत्पादन करती है | पैराथायरायड ग्रंथियां, थायरायड ग्रंथि के ऊपर एवं मध्य भाग की ओर एक-एक जोड़े [ कुल चार ] में होती हैं | यह ” पैराथारमोन ” हार्मोन का उत्पादन करती हैं | इन ग्रंथियों के प्रमुख रूप से निम्न कार्य हैं-
थायरायड ग्रंथि के कार्य :
थायरायड ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोन शरीर की लगभग सभी क्रियाओं पर अपना प्रभाव डालता है | थायरायड ग्रंथि के प्रमुख कार्यों में -
बालक के विकास में इन ग्रंथियों का विशेष योगदान है |
यह शरीर में कैल्शियम एवं फास्फोरस को पचाने में उत्प्रेरक का कार्य करती है |
शरीर के ताप नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका है |
शरीर का विजातीय द्रव्य [ विष ] को बाहर निकालने में सहायता करती है |
थायरायड के हार्मोन असंतुलित होने से निम्न रोग लक्षण उत्पन्न होने लगते हैं –
अल्प स्राव [ HYPO THYRODISM ]
थायरायड ग्रंथि से थाईराक्सिन कम बन ने की अवस्था को ” हायपोथायराडिज्म ” कहते हैं, इस से निम्न रोग लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं -
शारीरिक व् मानसिक वृद्धि मंद हो जाती है |
बच्चों में इसकी कमी से CRETINISM नामक रोग हो जाता है |
१२ से १४ वर्ष के बच्चे की शारीरिक वृद्धि ४ से ६ वर्ष के बच्चे जितनी ही रह जाती है |
ह्रदय स्पंदन एवं श्वास की गति मंद हो जाती है |
हड्डियों की वृद्धि रुक जाती है और वे झुकने लगती हैं |
मेटाबालिज्म की क्रिया मंद हो जाती हैं |
शरीर का वजन बढ़ने लगता है एवं शरीर में सुजन भी आ जाती है |
सोचने व् बोलने की क्रिया मंद पड़ जाती है |
त्वचा रुखी हो जाती है तथा त्वचा के नीचे अधिक मात्रा में वसा एकत्र हो जाने के कारण आँख की पलकों में सुजन आ जाती है |
शरीर का ताप कम हो जाता है, बल झड़ने लगते हैं तथा ” गंजापन ” की स्थिति आ जाती है |
थायरायड ग्रंथि का अतिस्राव
इसमें थायराक्सिन हार्मोन अधिक बनने लगता है | इससे निम्न रोग लक्षण उत्पन्न होते हैं —-
शरीर का ताप सामान्य से अधिक हो जाता है |
ह्रदय की धड़कन व् श्वास की गति बढ़ जाती है |
अनिद्रा, उत्तेजना तथा घबराहट जैसे लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं |
शरीर का वजन कम होने लगता है |
कई लोगों की हाँथ-पैर की उँगलियों में कम्पन उत्पन्न हो जाता है |
गर्मी सहन करने की क्षमता कम हो जाती है |
मधुमेह रोग होने की प्रबल सम्भावना बन जाती है |
घेंघा रोग उत्पन्न हो जाता है |
शरीर में आयोडीन की कमी हो जाती है |
पैराथायरायड ग्रंथियों के असंतुलन से उत्पन्न होने वाले रोग
जैसा कि पीछे बताया है कि पैराथायरायड ग्रंथियां ” पैराथार्मोन “ हार्मोन स्रवित करती हैं | यह हार्मोन रक्त और हड्डियों में कैल्शियम व् फास्फोरस की मात्रा को संतुलित रखता है | इस हार्मोन की कमी से – हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं, जोड़ों के रोग भी उत्पन्न हो जाते हैं | 
पैराथार्मोन की अधिकता से – रक्त में, हड्डियों का कैल्शियम तेजी से मिलने लगता है,फलस्वरूप हड्डियाँ अपना आकार खोने लगती हैं तथा रक्त में अधिक कैल्शियम पहुँचने से गुर्दे की पथरी भी होनी प्रारंभ हो जाती है

विशेष :-
थायरायड के कई टेस्ट जैसे - T -3 , T -4 , FTI , तथा TSH द्वारा थायरायड ग्रंथि की स्थिति का पता चल जाता है | कई बार थायरायड ग्रंथि में कोई विकार नहीं होता परन्तु पियुष ग्रंथि के ठीक प्रकार से कार्य न करने के कारण थायरायड ग्रंथि को उत्तेजित करने वाले हार्मोन -TSH [ Thyroid Stimulating hormone ] ठीक प्रकार नहीं बनते और थायरायड से होने वाले रोग लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं |

थायरायड की प्राकृतिक चिकित्सा :-
1 – गले की गर्म-ठंडी सेंक
साधन :– गर्म पानी की रबड़ की थैली, गर्म पानी, एक छोटा तौलिया, एक भगौने में ठण्डा पानी |

विधि :— सर्वप्रथम रबड़ की थैली में गर्म पानी भर लें | ठण्डे पानी के भगौने में छोटा तौलिया डाल लें | गर्म सेंक बोतल से एवं ठण्डी सेंक तौलिया को ठण्डे पानी में भिगोकर , निचोड़कर निम्न क्रम से गले के ऊपर गर्म-ठण्डी सेंक करें -
 


३ मिनट गर्म ——————– १ मिनट ठण्डी
३ मिनट गर्म ——————– १ मिनट ठण्डी
३ मिनट गर्म ——————– १ मिनट ठण्डी
३ मिनट गर्म ——————– ३ मिनट ठण्डी
इस प्रकार कुल 18 मिनट तक यह उपचार करें | इसे दिन में दो बार – प्रातः – सांय कर सकते हैं |
2- गले की पट्टी लपेट :-
साधन :- १- सूती मार्किन का कपडा, लगभग ४ इंच चौड़ा एवं इतना लम्बा कि गर्दन पर तीन लपेटे लग जाएँ |
२- इतनी ही लम्बी एवं ५-६ इंच चौड़ी गर्म कपडे की पट्टी |
विधि :- सर्वप्रथम सूती कपडे को ठण्डे पानी में भिगोकर निचोड़ लें, तत्पश्चात गले में लपेट दें इसके ऊपर से गर्म कपडे की पट्टी को इस तरह से लपेटें कि नीचे वाली सूती पट्टी पूरी तरह से ढक जाये | इस प्रयोग को रात्रि सोने से पहले ४५ मिनट के लिए करें |
3 -गले पर मिटटी कि पट्टी:-
साधन :- १- जमीन से लगभग तीन फिट नीचे की साफ मिटटी |
२- एक गर्म कपडे का टुकड़ा |
विधि :- लगभग चार इंच लम्बी व् तीन इंच चौड़ी एवं एक इंच मोटी मिटटी की पट्टी को बनाकर गले पर रखें तथा गर्म कपडे से मिटटी की पट्टी को पूरी तरह से ढक दें | इस प्रयोग को दोपहर को ४५ मिनट के लिए करें |
विशेष :- मिटटी को ६-७ घंटे पहले पानी में भिगो दें, तत्पश्चात उसकी लुगदी जैसी बनाकर पट्टी बनायें |
4 – मेहन स्नान
विधि :-
एक बड़े टब में खूब ठण्डा पानी भर कर उसमें एक बैठने की चौकी रख लें | ध्यान रहे कि टब में पानी इतना न भरें कि चौकी डूब जाये | अब उस टब के अन्दर चौकी पर बैठ जाएँ | पैर टब के बाहर एवं सूखे रहें | एक सूती कपडे की डेढ़ – दो फिट लम्बी पट्टी लेकर अपनी जननेंद्रिय के अग्रभाग पर लपेट दें एवं बाकी बची पट्टी को टब में इस प्रकार डालें कि उसका कुछ हिस्सा पानी में डूबा रहे | अब इस पट्टी/ जननेंद्रिय पर टब से पानी ले-लेकर लगातार भिगोते रहें | इस प्रयोग को ५-१० मिनट करें, तत्पश्चात शरीर में गर्मी लाने के लिए १०-१५ मिनट तेजी से टहलें |
आहार चिकित्सा
सादा सुपाच्य भोजन,मट्ठा,दही,नारियल का पानी,मौसमी फल, तजि हरी साग – सब्जियां, अंकुरित गेंहूँ, चोकर सहित आंटे की रोटी को अपने भोजन में शामिल करें |
परहेज :-
मिर्च-मसाला,तेल,अधिक नमक, चीनी, खटाई, चावल, मैदा, चाय, काफी, नशीली वस्तुओं, तली-भुनी चीजों, रबड़ी,मलाई, मांस, अंडा जैसे खाद्यों से परहेज रखें |
योग चिकित्सा
उज्जायी प्राणायाम :-
पद्मासन या सुखासन में बैठकर आँखें बंद कर लें | अपनी जिह्वा को तालू से सटा दें अब कंठ से श्वास को इस प्रकार खींचे कि गले से ध्वनि व् कम्पन उत्पन्न होने लगे | इस प्राणायाम को दस से बढाकर बीस बार तक प्रतिदिन करें |
प्राणायाम प्रातः नित्यकर्म से निवृत्त होकर खाली पेट करें |
थायरायड की एक्युप्रेशर चिकित्सा
एक्युप्रेशर चिकित्सा के अनुसार थायरायड व् पैराथायरायड के प्रतिबिम्ब केंद्र दोनों हांथो एवं पैरों के अंगूठे के बिलकुल नीचे व् अंगूठे की जड़ के नीचे ऊँचे उठे हुए भाग में स्थित हैं
थायरायड के अल्पस्राव की अवस्था में इन केन्द्रों पर घडी की सुई की दिशा में अर्थात बाएं से दायें प्रेशर दें तथा अतिस्राव की स्थिति में प्रेशर दायें से बाएं [ घडी की सुई की उलटी दिशा में ] देना चाहिए | इसके साथ ही पियुष ग्रंथि के भी प्रतिबिम्ब केन्द्रों पर भी प्रेशर देना चाहिए |
विशेष :-प्रत्येक केंद्र पर एक से तीन मिनट तक प्रतिदिन दो बार प्रेशर दें |पियुष ग्रंथि के केंद्र पर पम्पिंग मैथेड [ पम्प की तरह दो-तीन सेकेण्ड के लिए दबाएँ फिर एक दो सेकेण्ड के लिए ढीला छोड़ दें ] से प्रेशर देना चाहिए |

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15.7.18

दिमागी तनाव और भय दूर करने का मंत्र

                                             


 प्रति‍दिन की भगदौड़ भरी दिनचर्या में काम और घर परिवार से जुड़ी कई बाते आपको मानसिक रूप से थका देती है और तनाव का कारण बनती हैं। अगर आप मानसिक तनाव के शि‍कार हैं और इससे छुटकारा पाना चाहते हैं, तो यह मंत्र करेगा आपकी मदद। जानिए कौन सा है यह मंत्र - 

किसी प्रकार का अज्ञात   
भय या असुरक्षा की भावना होने पर भी आप इंस मंत्र का जाप कर सकते हैं। इसके अलावा 11 बुधवार तक लगातार 1 नारियल नीले वस्त्र में लपेटकर किसी भि‍खारी को दान करने से भी आपको भय से छुटकारा मिलेगा।
यदि आप अत्यधि‍क तनाव या मानस‍िक भार का अनुभव करते हैं तो नित्य मानसिक रूप से निम्न मंत्र का जाप अवश्य करें। जानिए मंत्र - 
मंत्र : 
ॐ अतिक्रकर महाकाय, कल्पान्त दहनोपम
भैरवाय नमस्तुभ्यमनुज्ञां दातुमहसि!!


तनाव दूर करने के अन्य उपाय -


 आप चाहे कितना भी जरुरी काम कर रहे हो काम के बीच हर घंटे के बाद 5 मिनट का ब्रेक जरूर ले अगर आप काम के बीच में थोड़ा आराम करेंगे तो आपका ध्यान इधर उधर नहीं जायेगा।इस उपरोक्त उपाय से एक ओर जहां आपको मानसिक तनाव/ भय/ दबाव इत्यादि से मुक्ति मिलेगी वहीं परिवार में अगर कोई नकारात्मक‍ विचारधारा का है तो उसके विचारों में भी परिवर्तन आना आरंभ होगा।
     जिनके जीवन में अधिक तनाव रहता हो उन्हें दिन में कुछ समय अकेले बिताने का प्रयास करना चाहिए। कुछ लोग अकेले सैर करना पसंद करते हैं। कुछ लोगों को अकेले पुस्तक पढ़ने से शांति मिलती है। कई बार अँधेरे कमरे में लेटना ही मन को शांत रखने के लिए काफी होता है, किंतु बहुत ज्यादा अकेले रहना भी ठीक नहीं, विशेषत उन लोगों के लिए जो जल्दी हताश हो जाते हैं।

एक्ज़ीमा के घरेलु उपचार

 कुर्सी पर आरामदेह मुद्रा में बैठ जाइए। आँखें बंद कीजिए और अपनी मांसपेशियों को ढीला छोड़ दीजिए। धीमी गति से साँस लेते रहें। मन ही मन कोई भी एक शब्द या मंत्र बार-बार दोहराते रहें। यदि आपका मन भटक जाए तो वापस उसी शब्द या मंत्र पर आ जाएँ। इसे दस से बीस मिनट तक करें।
  मूड खराब होने पर किसी पालतू जानवर के साथ कुछ समय बिताये। घर के पालतू जानवरों से जगाव और स्नेह होता है ये हमें खुशी और प्यार देते है। इसलिए अपने आपके टेंशन से दूर रखना हो या फ्रेश करना हो ये उपाय काफी अच्छे है।

किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि

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9.7.18

सेक्स का महारथी बनाने और मर्दानगी बढ़ाने वाले नुस्खे


                                                 


आज की भाग दौड़ भरी जिन्दगी मे अक्सर लोगों को सेक्स संबन्धित समस्याए हो जाती हैं जिसके चलते अक्सर पुरुष, शीघ्रपतन व सेक्स पावर में कमी की समस्या के लिए परेशान रहते हैं। अगर आप अपनी प्रेमिका को बिस्तर पर चरम सुख प्रदान नहीं कर पा रहे तो परेशान न हो क्योकि आज हम आपको ऐसा नुस्खा बताने वाले हैं जो सेक्स से पहले अगर मर्द खा ले तो उसकी सेक्स क्षमता अचानक से बढ़ जाती है-
सफेद प्याज आपको बना देगा सेक्स का महारथी
अगर कोई पुरूष लगातार कई दिनों तक सफ़ेद प्याज का मुरब्बा खाता है तो उसकी सेक्स पॉवर कई गुना बढ जाती है पहले जमाने में सफ़ेद प्याज का मुरब्बा राजा और अधिक शादियां करने वाले लोग खाते थे। बस ध्यान रखने वाली बात यह है कि मुरब्बा सही विधि से बनाया गया हो। सेक्स से पहले इसको इस्तेमाल करने से तत्काल फायदा मिलता है।
कई गुना बढ़ जाएगी सेक्स पावर
एक किलो प्याज के रस में आधा किलो उड़द की काली दाल मिलाकर पीस कर पेस्ट बना लें। इसे सुखाकर एक किलो प्याज के रस में मिलाकर फिर से पीस लें। इस पेस्ट को दस ग्राम मात्रा में लेकर गाय के दूध में पकाएं और मिश्री डाल कर पी लें। इसका सेवन एक से दो माह तक नियमित सुबह-शाम करने से कमजोरी दूर होती है और सेक्स पावर में बढ़ोतरी होती है।

100 ग्राम अजवाइन को सफेद प्याज के रस में भिगोकर सुखा लें और अच्छी तरह सूख जाने पर इसका बारीक पाउडर बना लें। इस पाउडर को पांच ग्राम घी और पांच ग्राम मिश्री के साथ सेवन करें। इसको एक माह तक लेने पर शीघ्रपतन की समस्या से राहत मिलती है।
एक किलो प्याज का रस, एक किलो शहद और आधा किलो मिश्री मिलाकर डिब्बे में पैक कर लें। इसे पंद्रह ग्राम की मात्रा में एक माह तक नियमित सेवन करें। इस योग के प्रयोग से सेक्शुअल डिजायर में वृद्धि होती है।
धूम्रपान, शराब खट्टी चीजो, फ़ास्ट फ़ूड, कोल्ड ड्रिंक्स, आदि का सेवन ना करे। इस प्रयोग का सम्पूर्ण फायदा लेने के लिए प्रयोग काल के 21 दिन सम्भोग नहीं करना चाहिए। इस प्रयोग से ऐसी ताक़त मिलेगी जिसका कोई जवाब नहीं। ये प्रयोग उन लोगो के लिए ही बताया हैं जो लोग अपनी शादी शुदा ज़िंदगी से परेशान हैं।

किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि

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प्राकृतिक चिकित्सा से रोगों का इलाज



                                                             

प्रकृतिक चिकित्सा के अंतर्गत प्रकृति के पांच तत्वों के द्वारा इलाज किया जाता है और इस इलाज की पद्धति को बेहद असरदार भी माना जाता है। 
   प्राकृतिक चिकित्सा यानि प्रकृति में पाई जाने वाली चीजों से इलाज करने की पद्धति। यह उतनी ही पुरानी है जितनी की स्वयं प्रकृति। होम्योपैथी, एक्यूपंचर आदि इसी की शाखाएं मानी जाती हैं। इन चिकित्सा पद्धतियों में जल, मिट्टी, हवा, सूरज, भोजन आदि का प्रयोग बीमारियों को जड़ से मिटाने का प्रयास किया जाता है। आइए जानें इस पद्धति में मशहूर थैरेपी।

मड थेरेपी

   प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार मिट्टी में पृथ्वी तत्व पाया जाता है जिसकी सहायता से शरीर जीवंत और ऊर्जावान बना रहता है। इसके लिए एकदम साफ, रसायन रहित और जमीन से कम से कम दो से चार फीट नीचे से निकाली गई मिट्टी इस्तेमाल में ली जाती है।

जल चिकित्सा

   पानी को खुद में एक दवाई माना जाता है। वाटर थैरेपी या जल चिकित्सा का जापान में काफी इस्तेमाल होता है। इस थेरेपी के अन्तर्गत रोग के इलाज के लिए गर्म टावल से शरीर को ढ़ंकना, हॉट बाथ, स्टीम बाथ आदि का इस्तेमाल किया जाता है। इसके प्रयोग से पेट में होने वाली समस्याओं, बुखार, तनाव आदि का सफल इलाज किया जा सकता है।
   अनिद्रा या तनाव के रोगियों के लिए जल चिकित्सा के अंतर्गत सोने से पहले नहाने की सलाह दी जाती है।
 
सूर्य चिकित्सा या सूर्य की किरणों से की जाने वाली चिकित्सा
                                  

   सूर्य चिकित्सा के दौरान रोगों के इलाज के लिए सूरज की किरणों में पाए जाने वाले सात रंगों का प्रयोग किया जाता है। सूर्य चिकित्सा का सिद्धांत है कि अगर शरीर स्वस्थ है तो शरीर का प्राकृतिक रंग बरकरार रहेगा। लेकिन बीमार होने की सूरत में शरीर अपना रंग बदल लेता है। इसी के आधार पर सूर्य चिकित्सा के दौरान रोगियों का इलाज होता है।

छोटे स्तनों को बड़े और आकर्षक बनाने के उपाय


वैसे भी यह सर्वमान्य है कि सूर्य की किरणों के प्रभाव से कई रोगों के जीवाणु स्वत: ही समाप्त हो जाते हैं।

डाइट थैरेपी

   पेट से जुड़ी समस्याओं और मोटापे आदि में इस थैरेपी से लोगों को बहुत जल्दी फायदा पहुंचता है। प्राकृतिक चिकित्सा का मानना है कि मनुष्य के शरीर के बीमार होने का एक मूल कारण इसका गलत खान-पान भी है। पेट में जंक फूड या खराब खाने से विषैले पदार्थ जमा होने लगते हैं और अंत में जाकर यही किसी भी रोग का मुख्य कारण बनते हैं।

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आंखों के इन्फेक्शन के घरेलू उपचार // Home remedies for eye infection

                                                                   

आंखों के इन्फेक्शन के घरेलू उपचार 


आंखों में संक्रमण होना बहुत आम बात हैं और यह किसी भी उम्र और लिंग के किसी भी व्‍यक्ति को प्रभावित कर सकता है। आंखो में संक्रमण का उपचार मुख्य रूप से संक्रमण के कारणों पर निर्भर करता है। कुछ घरेलू उपायों द्धारा भी आंखों के संक्रमण का इलाज किया जा सकता है जो प्राकृतिक होने के साथ-साथ बहुत प्रभावी भी होते है। आइए आंखों में संक्रमण के इलाज के लिए ऐसे ही कुछ घरेलू उपायों के बारे में जानें।

सेब का सिरका

सेब का सिरका प्रभावी रूप से आंखों के बैक्‍टीरियल संक्रमण को दूर कर सकता है। सेब के सिरके में मेलिक एसिड होता है जो बैक्‍टीरियल संक्रमण के खिलाफ लड़ता है। इसको इस्‍तेमाल करने के लिए एक कप पानी में एक चम्‍मच सिरके को मिलाये और कॉटन की मदद से अपनी आंखों को साफ कर लें।

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शहद

आंखों के संक्रमण के लिए शहद को सबसे प्रभावी इलाज माना जाता है, यहां तक की यह औषधीय आई ड्रॉप के नाम से भी जाना जाता है। आंखों में संक्रमण होने पर आप इससे गुलाबजल में मिलाकर इस्‍तेमाल कर सकते है। इसके अलावा 3-4 चम्‍मच शहद को पानी में मिलाकर आंखों को धोने से संक्रमण से राहत मिलती है।

तुलसी

अनेक रोगों का इलाज तुलसी से किया जा सकता है। तुलसी आंखों के इफेक्‍शन को दूर करने में भी बहुत लाभकारी होती है। आंखों के संक्रमण यानी कंजक्टिवाइटिस से निपटने के लिए एक कटोरी पानी में तुलसी की दो-तीन पत्तियां रात को भिगो दें। सुबह इस पानी से आंखों को धो लें, फायदा होगा।


 
धनिये का पानी

धनिये की कुछ सूखी पत्तियों को लेकर पानी में उबाल लें। अब इस पानी को कुछ देर ठंडा होने के लिए रख दें। इस पानी को संक्रमित आंखों को धोने के लिए इस्‍तेमाल करें। यह उपाय न केवल आपको जलन से राहत देने में मदद करेगा, बल्कि दर्द और सूजन को कम करने में भी मदद करेगा।

आंवला

आंवला, आंखों में संक्रमण के इलाज करने के लिए एक और प्रभावी घरेलू औषधि है। आंखों में संक्रमण को दूर करने क‍े लिए एक कप आंवले के रस में दो चम्‍मच शहद मिलाकर दिन में दो बार पीने से लाभ होता है।

नमक

थोड़ा सा नमक लेकर उसे उबलते पानी में मिलाये। इस पानी में रूई को भिगोकर प्रभावित क्षेत्र में लगाये। यह‍ आंखें के संक्रमण के लिए सबसे आसान उपाय माना जात है और अभी तक यह कंजक्टिवाइटिस के उपचार के लिए सबसे उपयोगी उपायों में से एक है।

सौंफ के बीज

थोड़े से सौंफ के बीज लेकर उबाल लें। उबालने के बाद पानी को ठंडा होने के लिए रख दें। अब इस पानी का संक्रमित आंखों को धोने के लिए एक दिन में कम से कम दो बार इस्‍तेमाल करें। इस उपाय से आपके दर्द, लालिमा और सूजन को कम करने में मदद मिलेगी।

करी पत्ते

करी पत्ते के ताजा रस का इस्‍तेमाल मोतियाबिंद जैसे आंखों के विकारों को रोकने के लिए किया जा सकता है। करी पत्ते के ताजा रस को आंखों के आस-पास फैलाने से आंखे तेजी होती है और मोतियाबिंद के प्रारंभिक विकास को रोकती है।

दही

दही, कंजक्टिवाइटिस के लिए सबसे अधिक लाभकारी उपचार में से एक है। संक्रमण से राहत पाने के लिए आंख के प्रभावित क्षेत्र पर दही का लेप करने से फायदा होता है।

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