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2018-01-24

मेथी के इतने फायदे नहीं जानते होंगे आप!




घर पर आसानी से मिल जाने वाली मेथी में इतने सारे गुण है कि आप सोच भी नहीं सकते है। यह सिर्फ एक मसाला नहीं है बल्कि एक ऐसी दवा है जिसमें हर बीमारी को खत्म करने का दम है। आइए आज हम आपको मेथी के पानी के कुछ चमत्कारिक फायदे  बताते हैं।

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करें ये काम-
एक पानी से भरा गिलास ले कर उसमें दो चम्‍मच मेथी दाना डाल कर रातभर के लिये भिगो दें। सुबह इस पानी को छानें और खाली पेट पी जाएं। रातभर मेथी भिगोने से पानी में एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी ऑक्‍सीडेंट गुण बढ जाते हैं। इससे शरीर की तमाम बीमारियां चुटकियों में खत्म हो जाती है। आइए आपको बताते है कौन सी है वो खतरनाक 7 बीमारियां जो भाग जाएंगी इस पानी को पीने से।
वजन कम करे-


यदि आप भिगोई हुई मेथी के साथ उसका पानी भी पियें तो आपको जबरदस्‍ती की भूख नहीं लगेगी। रोज एक महीने तक मेथी का पानी पीने से वजन कम करने में मदद मिलती है।

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मधुमेह-
मेथी में galactomannan होता है जो कि एक बहुत जरुरी फाइबर कम्‍पाउंड है। इससे रक्‍त में शक्‍कर बड़ी ही धीमी गति से घुलती है। इस कारण से मधुमेह नहीं होता।
कोलेस्‍ट्रॉल लेवल घटाए-
बहुत सारी स्‍टडीज़ में प्रूव हुआ है कि मेथी खाने से या उसका पानी पीने से शरीर से खराब कोलेस्‍ट्रॉल का लेवल कम होकर अच्‍छे कोलेस्‍ट्रॉल का लेवल बढ़ता है।

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ब्लड प्रेशर होगा कंट्रोल-
मेथी में एक galactomannan नामक कम्‍पाउंड और पोटैशियम होता है। ये दो सामग्रियां आपके ब्‍लड प्रेशर को कंट्रोल करने में बड़ी ही सहायक होती हैं।
गठिया रोग से बचाए-
इसमें एंटीऑक्‍सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होने के नातेए मेथी का पानी गठिया से होने वाले दर्द में भी राहत दिलाती है।

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कैंसर से बचाए-
मेथी में ढेर सारा फाइबर होता है जो कि शरीर से विषैले तत्‍वों को निकाल फेंकती है और पेट के कैंसर से बचाती है।किडनी स्‍टोनअगर आप भिगोई हुई मेथी का पानी 1 महीने तक हर सुबह खाली पेट पियेंगे आपकी किडनी से स्‍टोन जल्‍द ही निकल जाएंगे।



2016-11-30

मेथी के दानों से बेहतर होगी सेक्स लाइफ// Fenugreek seeds for better sex life




   मेथी दाना, भारत के घर-घर में मसाले के रूप में उपयोग किया जाता है लेकिन मेथीदाना का यह गुण सिर्फ हमारे आयुर्वेद में ही छुपा था कि यह सेक्स लाइफ को बेहतर बनाता है। फिर भी अपनी यौन क्रियाओं को बढ़ाने की इच्छा रखने वाले भारतीय पुरुष अक्सर पश्चिम के उत्पादों की तरफ देखते हैं। किंतु अब इसकी जरूरत नहीं है, क्योंकि इस भारतीय मसाले के बारे में विदेशों में सिद्ध हो गया है कि मेथी इसमें सक्षम है|
गौरतलब है कि भारत में कढ़ी और सब्जियों में इस्तेमाल की जाने वाली मेथी मुख्य तौर पर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में उगाई जाती है। बालों के लिए भी मेथीदाना को गलाकर पेस्ट बनाकर उपयोग किया जाता है। इससे बाल मुलायम, काले और चिकने होते हैं। इसके साथ में ये पुरुषों के लिए अत्यंत लाभकारी है.

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मेथी के बीजों का काढ़ा-
मेथी के बीजों का काढ़ा मधुमेह और ब्लड प्रेशर के रोगियों को लाभ पहुंचाता है।
*कभी-कभी रोगी कोलेस्ट्रॉल घटाने वाली एलोपैथिक दवाइयां नहीं सहन कर सकते। ऐसे में यदि वे चाय के पानी में थोड़ा-सा मेथी का काढ़ा डाल कर पिएं तो फायदा होगा।
*कहा जाता है कि यदि गर्भावस्था में मेथी के बीज खाएं या इनका काढ़ा दो या तीन बार लें तो बच्चे के जन्म के बाद पर्याप्त मात्रा में शिशु को दूध मिलेगा और आप अपने शिशु को सही मात्रा में दूध पिला सकेंगी व दूध की कमी नहीं होगी। 
मेथी के बीजों का काढ़ा बनाने का एक आसान तरीका- 
चाय के दो चम्मच मेथी के बीज, एक प्याला पानी में उबालें। इसे दस मिनट तक धीमी आंच पर उबलने दें। अब इसे गैस से उतार लें। ठंडा होने के बाद यह काढ़ा दिन में तीन बार लें।

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*यदि आपको पथरी की शिकायत है तो सर्दियों में सुबह सबसे पहले मेथी के काढ़े वाला पानी पिएं। यह पथरी गलाने में मदद करता है।
*ताजा अनुसंधान बताते हैं कि मेथी के बीज में पाया जाने वाला सैपोनीन पुरुषों में पाए जाने वाले टेस्टोस्टेरॉन हॉरमोन में उत्तेजना पैदा करता है। स्वस्थ सेक्स लाइफ के लिए गुणकारी मेथी का प्रचलन इसे पढ़कर बढ़ तो सकता है लेकिन यह सावधानी जरूरी है कि अत्यधिक मात्रा में इसका सेवन न करें यह गर्म तासीर की वस्तु है। अधिक मात्रा में लेने से यह त्वचा के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
• शिशु के जन्म की प्रक्रिया को आसान करता है-
मेथी शिशु के जन्म की प्रक्रिया को आसान बनाने में बहुत मदद करता है। यह शिशु के जन्म के समय गर्भाशय के संकुचन को बढ़ाकर जन्म की प्रकिया को आसान करने में मदद करता है। इसके कारण यह प्रसव वेदना को कम करने में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन एक बात का ध्यान रखें गर्भधारण के अवस्था में अत्यधिक मात्रा में मेथी न खायें, इससे गर्भपात होने का खतरा बढ़ जाता है।

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• स्तन के आकार को बढ़ाता है-
अगर आप स्तन के छोटे आकार को लेकर शर्मिंदा महसूस करते हैं तो मेथी को अपने रोज के आहार में शामिल करें। इसका एस्ट्रोजेन हार्मोन स्तन के आकार को बढ़ाने में मदद करता है।

2016-06-13

मेथी दाना के फायदे





       

मेथी दाना 5 से 10 ग्राम  रोजाना प्रात:खाली पेट ,धीरे धीरे चबा चबा कर खाते रहे तो व्यक्ति सदा निरोग और चुस्त बना रहेगा और मधुमेह,जोड़ो के दर्द,शोथ,रक्तचाप,बलगमी बीमारियों,अपचन आदि अनेकानेक रोगों से बचाव होगा।वृद्धावस्था की व्याधिया यथा सायिटका ,घुटनों का दर्द,हाथ पैरो का सुन्न पड़ जाना,मांसपेशियों मे खिचाव,भूख न लगना,बार बार मूत्र आना,चक्कर आना इत्यादि उसके पास नहीं फटकेगी।ओज,कान्ति और स्फ्रुती में वृदि होकर व्यक्ति दीर्घायु होगा।

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यधपि अलग अलग बीमारियों इलाज के लिए मेथीदाना का प्रयोग कई प्रकार से किया जाता हैं जैसे -मेथीदाना भिगोकर उसका पानी पीना या भिगोये मेथीदाना को घोटकर पीना,उसे अंकुरित करके चबाना या रस निकालकर पीना,उसे उबालकर उसका पानी पीना या सब्जी बनाकर खाना,खिचड़ी या कड़ी पकाते समय उसे डालकर सेवन करना,साबुत मेथीदाना प्रात चबाकर खाना और रात्रि में पानी संग निगलना,भूनकर या वैसे हे उसका दलिया या चूर्ण बनाकर ताज़ा पानी के साथ फक्की लेना,मेथीदाना के लड्डू बनाकर खाना आदि परन्तु मेथी का सेवन का निरापद और अच्छा तरीका हैं -उसका काढा या चाय बनाकर पीना।
मेथी का काढा या चाय बनाने की विधि -
पाँच ग्राम एक डेढ़ चमच मेथीदाना (दरदरा मोटा कूटा हुआ )200 ग्राम पानी में डाल कर धीमी आंच उबलने रख दे।लगभग दस मिनट उबलने के बाद जब पानी 150 ग्राम रह जाए तब बर्तन को आग पर से नीचे उतार ले।पीने लायक गर्म रहने पर इसे स्वच्छ कपडे से छानकर चाय की भांति घुट घुट कर गरम गरम पी ले।यदि कोई व्यक्ति कड़वा काढ़ा न पी सके तो तो वह इसमें थोड़ा गरम दूध और गुड या खांड मिला कर चाय के रूप में भी ले सकता हैं।बलगमी खांसी,छाती के दर्द और पुराने हृदय रोग में थोड़े गरम मेथी के काढ़े में एक दो चमच शहद मिलकर लेना विशेष लाभप्रद रहता हैं,परन्तु शहद मिलाते समय काढ़ा गुनगुना रहना चाहिए न की गरम।

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काढ़ा बनाने के लिए यदि रात में एक कांच के गिलास में पानी में मेथीदाना भिगोने को रखने के बाद सवेरे उसी पानी में भिगोया मेथीदाना उबाल कर उसका काढ़ा बनाया जाये तो वह जल्दी भी बनेगा तथा मेथीदाना का सत्व ज्यादा आने के कारण वह काढ़ा ज्यादा गुण कारी भी रहेगा।यह मेथीदाना का काढ़ा (बिना इसमें कुछ मिलाये)दिन में दो बार,प्रथम सवेरे नाश्ते से लगभग आधा घंटे पहले और रात्रि में सोने से पहले पीना चाहिए।इसे निरन्तर पीते रहने से आंव नहीं बन पायेगी, क्योकि मेथीदाना विशेष रूप से आँव नाशक और पाचन क्रिया सुधारक हैं।
विशेष-
1) मेथी उष्ण रूक्ष लघु गुणों से युक्त होने के कारण आँव नाषक,कफ निस्सारक और वातनाशक हैं।मेथी पाचन अंगों,श्वसन संस्थान,रक्त वाहनियो,आंतो एवं भीतरी त्वचा (झिल्ली )से चिपकी हुईआँव या चिकनाई और संचित गंदंगी और विषो को देह से बाहर कर देती हैं।और भीतरी अवव्यो की शुद्दि प्रदान करके अंगो की सूजन,जलन और पीड़ा मिटाकर उन्हें पुनः आरोग्य प्रदान कर कार्यक्षम बनाती हैं।

मेथी के प्रयोग से पाचन-क्रिया सुधरने से शरीर में रस आदि का निर्माण ठीक से होने लगता लगता हैं। मल बंध कर आता हैं,पेट ठीक प्रकार से साफ़ होने लगता हैं,यकृत आदि अंग सशक्त बनते हैं और उनकी शिथिलिता दूर होती हैं,जिससे शरीर मे स्फूर्ति, ताकत का अनुभव होने लगता हैं।

2) .मेथी के बीज की रासायनिक बनावट कांड-लीवर आयल के सामान हैं,अतः शाकाहारियो के लिए मेथी मछली के तेल का अच्छा विकल्प हैं और उसी की तरह यह खून की कमी (अनीमिया )दुर्बलता,स्नायु -रोग घुटनों का दर्द-संधिवात सूखा रोग छूत के रोग पश्चात् बनने कमजोरी,बहुमुत्रता,मधुमेह आदि रोगों में बहुत लाभदायक हैं।
3) पाचन संस्थान के रोगों यथा-शूल,अफारा अग्निमाध्य अरुचि,आमातिसार(पेचिश),तिल्ली व जिगर की बढ़ोतरी ,अल्सर,कोलोटिएस आदि के अतरिक्त श्वसन संस्थान के रोग यथा -बलगमी खांसी,दमा,श्वसन अंगो में सूजन,ब्रांकाईटीज़ ,छाती के पुराने रोगों आदि में मेथी का सेवन लाभकारी हैं।अंगो में प्रदाह एवं सूजन मिटाकर उन्हें पुनः कार्यक्षम बनाने का गुण होने के कारण मेथी आंत्र -पुच्छ प्रदाह ,टॉन्सिल एवं सिनासिटेस आदि रोगों को दूर करने में सहायता करती व उससे बचाव भी।

महिलाओं की पीरियड्स की गड़बड़ियो,लिकोरिया,गर्भाशय में सूजन में लाभ करती हैं तथा आर्तव संबंधी अंगों की शुद्दि कर उनकी सूजन मिटाकर महिलाओ को आरोग्य प्रदान करती हैं।प्रसूति में शिथिल बने हुए अंगो को शुद्द करती हैं और मां के दूध के प्रवाह की रूकावटो को दूर करती हैं।मेथी पौषक तत्वों से भरपूर होने के कारण सामान्य शक्तिवर्धक (टॉनिक )का कार्य करती हैं।
4).आधुनिक खोजो से सिद्द हो चूका हैं की मेथी के प्रयोग से मूत्र और रक्त की शर्करा में कमी आती हैं,रक्त में काल्सत्रोल का स्तर घट जाता हैं और उच्च रक्त चाप संतुलित होता हैं।अंकुरित मेथीदाना में कैंसर को नियंत्रित करने वाली विशेष विटामिन बी-17 भी विशिष्ट मात्रा में पाया जाता हैं तथा अंकुरित मेथी का रस अमाशय के अल्सर,आंतो की सूजन आदि रोगियों के अत्यधिक लाभकारी सिद्द हुआ हैं।





5.) कफ और वात प्रकृति वाले व्यक्तियों के लिए मेथी के बीज किसी वरदान से कम नहीं हैं फिर भी मेथी का सेवन करते समय निमंलिखित सावधानिया रखना जरूरी हैं।
सावधानिया -
*पित्त पृकृति वालो को या जिन्हें रक्तपित,रक्त प्रदर,खुनी बवासीर,नकसीर,मूत्र में रक्त आना या शारीर में कही से भी खून गिरने की शिकायत हो उन्हें मेथी का प्रयोग नहीं करना चाहिए,क्योकि मेथी उषण और खुश्क होती हैं।तेज गर्मी के मौसम में भी मेथी का प्रयोग करना उचित नहीं हैं।
*जिन्हें गरम तासीर की वस्तुए अनुकूल नहीं पडती हो तथा जिनके शारीर में दाह अथवा आग की लपटों जैसी जलन महसूस होती हो।

*जो रोगी अंत्यंत दुर्बल व कृशकाय हो,चक्कर आने की बीमारी से पीड़ित हो तथा लगातार धातु क्षय के कारण जिनका शारीर सूखकर मात्र हड्डियों का पिंजर रह गया हो।

चिकित्सा आलेख-

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2016-04-01

अलसी के तेल के फायदे //Health benefits of linseed oil





भारत देश के कुछ प्रांतों में अलसी का तेल खाद्य तेलों के रूप में आज भी प्रचलन में है। धीरे-धीरे अलसी को हम भूलते जा रहे हैं, परंतु अलसी पर हुए नए शोध-अध्ययनों ने बड़े चमत्कारी प्रभाव एवं चैंकाने वाले तथ्य दुनिया के सामने लाए हैं। आज सारे संसार में इसके गुणगान हो रहे हैं। विशिष्ट चिकित्सकों की सलाह में भी अलसी के चमत्कारों की महिमा गाई जा रही है।
*अलसी की तरह अलसी के बीजों में मौजूद ढेर सारा तेल भी अनेक प्रकार की औषधियों का भंडार  है।
*अलसी में 23 प्रतिशत ओमेगा-3 फैटी एसिड, 20 प्रतिशत प्रोटीन, 27 प्रतिशत फाइबर, लिगनेन, विटामिन बी ग्रुप, सेलेनियम, पोटेशियम, मेगनीशियम, जिंक आदि होते हैं। जिसके कारण अलसी शरीर को स्वस्थ रखती है व आयु बढ़ाती है। इन्हीं गुणों  के कारण अलसी को सुपर  फूड भी कहा जाता है।

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*अलसी का तेल खाने की लालसा और चर्बी को कम करती है और शरीर में बी.एम.आर. और शक्ति व स्टेमिना बढ़ाती है। साथ ही इसका सेवन आलस्य दूर और वजन कम करने में सहायता करता है। साथ ही ओमेगा-3 और प्रोटीन मांस-पेशियों का विकास करते हैं अतः बॉडी बिल्डिंग के लिये भी श्रेष्ठ प्रकार का  पूरक आहार    है अलसी।
*अलसी की तरह अलसी के बीजों में मौजूद ढेर सारा तेल भी अनेक प्रकार की औषधियों का भंडार  है। इसमें विटामिन ई और ओमेगा 3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा इसमें अनेकों तत्व जैसे पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, लोहा, कॉपर, ​जिंक, प्रोटीन, विटामिन बी आदि भी पाये जाते हैं।
*हड्डी टूटने के बाद जुड़ने पर भी उस जगह  की मांसपेशियां अकड़ जाती हैं। उस परिस्थिति में अलसी के तेल की लगातार मालिश करने से मांसपेशियां मुलायम हो जाती है।
*अलसी के शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट ओमेगा-3 व लिगनेन त्वचा के कोलेजन की रक्षा करते हैं और त्वचा को आकर्षक, कोमल, नम, बेदाग व गोरा बनाते हैं। अलसी सुरक्षित, स्थाई और उत्कृष्ट भोज्य सौंदर्य प्रसाधन है जो त्वचा में अंदर से निखार लाता है|
*अलसी में विद्यमान ओमेगा-3 फैट, जिंक और मेगनीशियम आपके शरीर में पर्याप्त टेस्टोस्टिरोन हार्मोन और उत्कृष्ट श्रेणी के फेरोमोन ( आकर्षण के हार्मोन) स्रावित होंगे। टेस्टोस्टिरोन से आपकी कामेच्छा चरम स्तर पर होगी। आपके साथी से आपका प्रेम, अनुराग और परस्पर आकर्षण बढ़ेगा। आपका मनभावन व्यक्तित्व, मादक मुस्कान और षटबंध उदर देख कर आपके साथी की कामाग्नि भी भड़क उठेगी।
*वसा रहित होने के कारण अलसी के तेल से बना खाना दिल के रोगों से दूर रखता है। अलसी का तेल व बीज कोलेस्ट्रोल को कम करने के साथ हृदय संबंधी अन्य रोगों से बचाता है। साथ ही अलसी का तेल एनजाइना व हाइपरटेंशन से भी बचाता है।
*अलसी का तेल शर्करा  को नियंत्रित ही नहीं करता, बल्कि मधुमेह के दुष्प्रभावों से सुरक्षा और उपचार भी करता है। अलसी में रेशे भरपूर 27 प्रतिशत लेकिन  शर्करा  की मात्रा मात्र 1.8 प्रतिशत यानी न के बराबर होती है। इसलिए यह शून्य-शर्करा आहार कहलाती है और मधुमेह के लिए आदर्श आहार है।
*आयुर्वेद के अनुसार, हर बीमारी की जड़ हमारा पेट है और पेट को साफ रखने में अलसी का तेल इसबगोल से भी अधिक  प्रभावशाली होता है। पेट से जुड़ी बीमारियां जैसे आई.बी.एस., अल्सरेटिव कोलाइटिस, अपच, बवासीर, मस्से आदि का भी उपचार करती है अलसी|  देखेंगे की अलसी के सेवन से कैसे प्रेम और यौवन की रासलीला सजती है, जबर्दस्त अश्वतुल्य स्तंभन होता है, जब तक मन न भरे सम्भोग का दौर चलता है, देह के सारे चक्र खुल जाते हैं, पूरे शरीर में दैविक ऊर्जा का प्रवाह होता है और सम्भोग एक यांत्रिक क्रीड़ा न रह कर एक आध्यात्मिक उत्सव बन जाता है, समाधि का रूप बन जाता है।
*अलसी के तेल और चूने के पानी का इमल्सन आग से जलने के घाव पर लगाने से घाव बिगड़ता नहीं और जल्दी भरता है।
*अलसी तेल के सेवन से झुंझलाहट या क्रोध नहीं आता, मन प्रसन्‍न रहता है इसलिए इसे फीलगुड फूड भी कहा जाता है। इसके सेवन से सकारात्‍मक सोच बनी रहती है और आपके तन, मन और आत्मा को शांत और सौम्य कर देती है।
*डायबिटीज़ के रोगियों के पैर में घाव हो जाते हैं जो जल्दी भरते नहीं हैं, ऐसी स्थिति में अलसी के तेल की मालिश करने से रक्‍त संचार सुचारू रूप से होता है एवं घाव भी जल्दी भर जाते हैं। साथ ही आग से जले हुए घाव पर इस तेल का फोहा लगाने से जलन और दर्द में तुरन्त राहत मिलती है।बवासीर, भगदर, फिशर आदि रोगों में अलसी का तेल (एरंडी के तेल की तरह) लेने से पेट साफ हो मल चिकना और ढीला निकलता है। इससे इन रोगों की वेदना शांत होती है।
*अलसी के तेल का पनीर के साथ इस्‍तेमाल करने से डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, अर्थराइटिस, हार्ट अटैक, अस्थमा और डिप्रेशन आदि जैसी बीमारियों से राहत पाई जा सकती है। अलसी के तेल का पनीर के साथ उपयोग करने से सल्फर युक्त प्रोटीन मिलता है।

2016-03-26

सोयाबीन के फायदे // Benefits of Soyabeen





सोयाबीन में कुछ ऐसे तत्त्व पायें जाते है। जो कैंसर से बचाव का कार्य करते है। क्योकि इसमें कायटोकेमिकल्स पायें जाते है, खासकर फायटोएस्ट्रोजन और 950 प्रकार के हार्मोन्स। यह सब बहुत लाभदायक है। इन तत्त्वों के कारण स्तन कैंसर एवं एंडोमिट्रियोसिस जैसी बीमारियों से बचाव होता है। यह देखा गया है कि इन तत्त्वों के कारण कैंसर के टयूमर बढ़ते नही है और उनका आकार भी घट जाता है। सोयाबीन के उपयोग से कैंसर में 30 से 45 प्रतिशत की कमी देखी गई है।
*अध्ययनों से पता चला है कि सोयायुक्त भोजन लेने से ब्रेस्ट (स्तन) कैंसर का खतरा कम हो जाता है। महिलाओं की सेहत के लियें सोयाबीन बेहद लाभदायक आहार है। ओमेगा 3 नामक वसा युक्त अम्ल महिलाओं में जन्म से पहले से ही उनमें स्तन कैंसर से बचाव करना आरम्भ कर देता है। जो महिलायें गर्भावस्था तथा स्तनपान के समय ओमेगा 3 अम्ल की प्रचुरता युक्त भोजन करती है, उनकी संतानों कें स्तन कैंसर की आशंका कम होती है। ओमेगा-3 अखरोट, सोयाबीन व मछलियों में पाया जाता है। इससे दिल के रोग होने की आंशका में काफी कमी आती है। इसलिये महिलाओं को गर्भावस्था व स्तनपान कराते समय अखरोट और सोयाबीन का सेवन करते रहना चाहियें।
*उच्च रक्त चाप : रोज कम नमक में भुने आधा कप सोयाबीन का 8 हफ्तों तक सेवन करने से ब्लड़प्रेशर काबू मे रहता है। इसका स्वाद बढ़ाने के लियें इसमें कालीमिर्च भी डालकर सकते हैं। सिर्फ आधा कप रोस्टेड सोयाबीन खाने से महिलाओं का बढ़ा हुआ ब्लडप्रेशर कम होने लगता है। लगातार 8 हफ्ते तक सोयाबीन खाने से महिलाओं का 10 प्रतिशत सिस्टोलिक प्रेशर, 7 प्रतिशत डायस्टोलिक और सामान्य महिलाओं का 3 प्रतिशत ब्लडप्रेशर कम हो जाता है। तो आप भी एक मुट्ठी सोयाबीन को 8 से 12 घण्टे पानी में भिगोकर रख दें और सुबह ही गर्म कर के खायें।

पथरी की चमत्कारी औषधि से डॉक्टर की बोलती बंद!

*मानसिक रोगों में : सोयाबीन में फॉस्फोरस इतनी होती है कि यह मस्तिष्क (दिमाग) तथा ज्ञान-तन्तुओं की बीमारी, जैसे-मिर्गी, हिस्टीरिया, याददाश्त की कमजोरी, सूखा रोग (रिकेट्स) और फेफड़ो से सम्बन्धी बीमारियों में उत्तम पथ्य का काम करता है। सोयाबीन के आटे में लेसीथिन नमक एक पदार्थ तपेदिक और ज्ञान-तन्तुओं की बीमारी में बहुत लाभ पहुंचता है। भारत में जो लोग गरीब है। या जो लोग मछली आदि नही खा सकते है, उनके लियें यह मुख्य फास्फोरस प्रदाता खाद्य पदार्थ है। इसको खाना गरीबों के लियें सन्तुलित भोजन होता है।
*मूत्ररोग : सोयाबीन का रोजाना सेवन करने से मधुमेह (डायबिटीज) के रोगी का मूत्ररोग (बार-बार पेशाब के आने का रोग) ठीक हो जाता है।
*मधुमेह (डायबिटीज) : सोयाबीन मोटे भारी-भरकम शरीर वालों के तथा मधुमेह (डायबिटीज) वाले लोगों के लियें उत्तम पथ्य है। सोया आटे की रोटी उत्तम आहार है।
दूध को बढ़ाने के लियें : दूध पिलाने वाली स्त्री यदि सोया दूध (सोयाबीन का दूध) पीये तो बच्चे को पिलाने के लिये उसके स्तनों में दूध की मात्रा बढ़ जाती है।
*रजोनिवृत्ति : महिलाओं में जब रजोनिवृत्ति (मासिकधर्म) होती है, उस समय स्त्रियों को बहुत ही कष्ट होते हैं। रजोनिवृत्त महिलाएं हडि्डयों में तेजी से होने वाले क्षरण से मुख्य रूप से ग्रसित होती है, जिसके कारण उन्हें आंस्टियो आर्थराइटिस बीमारी आ जाती है। घुटनों में दर्द रहने लगता है। यह इसलियें होता है, क्योंकि मासिक धर्म बंद होने से एस्ट्रोजन की कमी हो जाती है क्योकि सोयाबीन में फायटोएस्ट्रोजन होता है। जो उस द्रव की तरह काम करता है, इसलियें 3-4 महीने तक सोयाबीन का उपयोग करने से स्त्रियों की लगभग सभी कठिनाइयां समाप्त हो जाती है।
*महिलाओ को सोयाबीन न केवल अच्छे प्रकार का प्रोटीन देती है बल्कि मासिकधर्म के पहले होने वाले कष्टों-शरीर में सूजन, भारीपन, दर्द, कमर का दर्द, थकान आदि में भी बहुत लाभ करती हैहड्डी के कमजोर होने पर : सोयाबीन हडि्डयों से सम्बन्धित रोग जैसे हडि्डयों में कमजोरी को दूर करता है। सोयाबीन को अपनाकर हम स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सकते हैं। अस्थिक्षारता एक ऐसा रोग है जिसमें हडि्डयां कमजोर हो जाती हैं और उसमें फैक्चर हो जाता है। हडि्डयो में कैल्श्यिम की मात्रा कम हो जाती है। इसका परिणाम यह होता है कि *हडि्डयां टूटती ज्यादा है और बनती कम है।
दिल के रोग में : सोयाबीन में 20 से 22 प्रतिशत वसा पाई जाती है। सोयाबीन की वसा में लगभग 85 प्रतिशत असन्तृप्त वसीय अम्ल होते हैं, जो दिल के रोगियों के लियें फायदेमंद है। इसमें ‘लेसीथिन’ नामक प्रदार्थ होता है। जो दिल की नलियों के लियें आवश्यक है। यह कोलेस्ट्रांल को दिल की नलियों में जमने से रोकता है।
सोयाबीन खून में कोलेस्ट्रोल की मात्रा को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए यह दिल के रोगियों के लिये फायदेमंद है। ज्यादातर दिल के रोगों में खून में कुछ प्रकार की वसा बढ़ जाती है, जैसे-ट्रायग्लिसरॉइड्स, कोलेस्ट्रॉल और एलडीएल, जबकि फायदेमंद वसा यानी एचडीएल कम हो जाती है। सोयाबीन में वसा की बनावट ऐसी है कि उसमें 15 प्रतिशत सन्तृप्त वसा, 25 प्रतिशत मोनो सन्तृप्त वसा और 60 प्रतिशत पॉली असन्तृप्त वसा है। खासकर 2 वसा अम्ल, जो सोयाबीन में पायें जाते हैं। यह दिल के लियें काफी उपयोगी होते हैं। सोयाबीन का प्रोटीन कोलेस्ट्रल एवं एलडीएल कम रखने में सहायक है। साथ ही साथ शरीर में लाभप्रद कोलेस्ट्रॉल एचडीएल भी बढ़ाता है।
*सोया प्रोटीन और आइसोफ्लेवोंस से भरपूर आहार का सेवन रजोनिवृत्त महिलाओं में हड्डियों को कमजोर होने और हड्डियों के क्षरण से संबंधित बिमारी ओस्टियोपोरोसिस के खतरे से बचा सकता है. एक अध्ययन में यह दावा किया गया है. इंग्लैंड के हुल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन के मुताबिक, सोयाबीन खाद्य उत्पादों में आइसोफ्लेवोंस नामक रसायन होता है जो कि संरचना में इस्ट्रोजन हार्मोन जैसा होता है और महिलाओं को ओस्टियोपोरोसिस के खतरे से बचा सकता है.
*अध्ययन के दौरान प्रारंभिक रजोनिवृत्ति की अवस्था वाली 200 महिलाओं को छह महीनों तक आइसोफ्लेवोंस सहित सोया प्रोटीन युक्त अनुपूरक आहार या केवल सोया प्रोटीन दिया गया.
उसके बाद शोधकर्ताओं ने महिलाओं के रक्त में कुछ प्रोटीनों की जांच करके हड्डियों में हुए परिवर्तन का अध्ययन किया.
*शोधकर्ताओं ने पाया कि केवल सोया प्रोटीन लेने वाली महिलाओं की तुलना में आइसोफ्लेवोंस युक्त सोया आहार लेने वाली महिलाओं में हड्डियों के क्षरण की रफ्तार धीमी पड़ गई थी और उनमें ओस्टियोपोरोसिस का खतरा कम हो गया था.
*केवल सोया लेने वाली महिलाओं की तुलना में आइसोफ्लेवोंस के साथ सोया लेने वाली महिलाओं में हृदय रोग का खतरा भी कम पाया गया.
*अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता थोझुकट सत्यापालन के मुताबिक, “हमें ज्ञात हुआ कि रजोनिवृत्ति की प्रारंभिक अवस्था के दौरान महिलाओं की हड्डियों का स्वास्थ्य सुधारने के लिए सोया प्रोटीन और आइसोफ्लेवोंस सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है. “
*महिलाओं में रजोनिवृत्ति के तत्काल बाद के वर्षो में हड्डियों का क्षरण सबसे तेजी से होता है क्योंकि इस अवधि में हड्डियों को सुरक्षित रखने वाले इस्ट्रोजन हार्मोन का उनके शरीर में बनना कम हो जाता है.

2016-03-17

जौ खाने के फायदे //Benefits of barley




      हमारे ऋषियों-मुनियों का प्रमुख आहार जौ ही था। वेदों द्वारा यज्ञ की आहुति के रूप में जौ को स्वीकारा गया है। जौ को भूनकर, पीसकर, उस आटे में थोड़ा-सा नमक और पानी मिलाने पर सत्तू बनता है। कुछ लोग सत्तू में नमक के स्थान पर गुड़ डालते हैं व सत्तू में घी और शक्कर मिलाकर भी खाया जाता है। गेंहू , जौ और चने को बराबर मात्रा में पीसकर आटा बनाने से मोटापा कम होता है और ये बहुत पौष्टिक भी होता है .राजस्थान में भीषण गर्मी से निजात पाने के लिए सुबह सुबह जौ की राबड़ी का सेवन किया जाता है .

कलौंजी(प्याज के बीज) के औषधीय उपयोग

बढ़ते कोलेस्ट्रॉल को लेकर परेशान हैं तो ऎसा करें
जौ कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और हृदय  रोगों से बचाता है।
अगर आपको ब्लड प्रेशर की शिकायत है और आपका पारा तुरंत चढ़ता है तो फिर जौ को दवा की तरह खाएँ। हाल ही में हुए एक अध्ययन में दावा किया गया है कि जौ से ब्लड प्रेशर कंट्रोल होता है।कच्चा या पकाया हुआ जौ नहीं बल्कि पके हुए जौ का छिलका ब्लड प्रेशर से बहुत ही कारगर तरीके से लड़ता है।
रोटी: 
जौ, गेहूं और चने को मिक्स करके बनाए हुए आटे की रोटी डायबिटीज, ब्लड प्रेशर , मोटापा, कोलेस्ट्रॉल और हृदय  रोगों में बहुत फायदेमंद होती है।
इस मिक्स आटे में गेहूं 60 प्रतिशत, जौ 30 प्रतिशत और चना 10 प्रतिशत होना चाहिए। रोटी के अलावा जौ से बना दलिया भी स्वादिष्ट व शरीर के लिए पौष्टिक होता है।

*किडनी में क्रिएटिनिन और यूरिया की समस्या के घरेलू उपचार* 

त्वचा: 
जौ के आटे में बेसन, संतरे के छिलके का पाउडर, हल्दी, चंदन पाउडर और गुलाब जल मिलाकर बनाया गया उबटन त्वचा की चमक बनाए रखता है।
*सत्तू भी फायदेमंद: 
भुने हुए जौ को पीसकर पानी व मिश्री मिलाकर बनाया सत्तू गर्मी में अमृत के समान है। जौ से बनी आयुर्वेद की दवा यवक्षार को आयुर्वेद की अन्य दवाओं के साथ लेने से गुर्दे की पथरी निकल जाती है और पेशाब की जलन भी दूर होती है। यदि यवक्षार को 1-2 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ कुछ दिन लिया जाए तो खांसी से आराम मिलता है।*जौ में विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, मैगनीज, सेलेनियम, जिंक, कॉपर, प्रोटीन, अमीनो एसिड, डायट्री फाइबर्स और कई तरह के एंटी-ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. जौ एक बहुत ही फायदेमंद अनाज है. आप चाहे तो इसे अपने रोज के आहार में शामिल कर सकते हैं या फिर एक औषधि के रूप में भी ले सकते हैं.

नसों में होने वाले दर्द से निजात पाने के तरीके 

*हर रोज जौ का पानी पीने से एक ओर जहां स्वास्थ्य से जुड़ी बहुत सी समस्याएं दूर हो जाती हैं वहीं कई बीमारियों के होने का खतरा भी बहुत कम हो जाता है. इसके साथ ही ये शरीर को स्वस्थ रखने में भी बहुत कारगर होता है. कई लोग जौ को भाप द्वारा पकाकर भी इस्तेमाल करते हैं. पर जौ का पानी स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक फायदेमंद होता है
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    जौ का पानी तैयार करने के लिए कुछ मात्रा में जौ ले लीजिए और उसे अच्छी तरह साफ कर लीजिए. उसके बाद इसे करीब चार घंटे तक पानी में भिंगोकर छोड़ दीजिए. उसके बाद इस पानी को तीन से चार कप पानी में मिलाकर उबाल लीजिए. पर इसे धीमी आंच पर ही उबलने दें.लगभग 45 मिनट बाद गैस बंद कर दीजिए और इस पानी को ठंडा होने दीजिए. जब ये ठंडा हो जाए तो इसे एक बोतल में भर लीजिए और दिनभर एक से दो गिलास पीते रहें|
* पथरी- 
जौ का पानी पीने से पथरी निकल जायेगी। पथरी के रोगी जौ से बने पदार्थ लें।
* अगर आपको यूरीन से जुड़ी कोई समस्या है तो जौ का पानी आपके लिए बहुत फायदेमंद होगा. इसके अलावा किडनी से जुड़ी ज्यादातर समस्याओं में जौ का पानी बहुत कारगर होता है.

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*मूत्रावरोध- 
जौ का दलिया दूध के साथ सेवन करने से मूत्राशय सम्बन्धि अनेक विकार समाप्त हो जाते है।

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*अतिसार- 
जौ तथा मूग का सूप लेते रहने से आंतों की गर्मी शांत हो जाती है। यह सूप लघू, पाचक एंव संग्राही होने से उरःक्षत में होने वाले अतिसार (पतले दस्त) या राजयक्ष्मा (टी. बी.) में हितकर होता है।
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शरीर का वजन बढ़ाने के लिये-
 जौ को पानी भीगोकर, कूटकर, छिलका रहित करके उसे दूध में खीर की भांति पकाकर सेवन करने से शरीर पर्यात हूष्ट पुष्ट और मोटा हो जाता है।
*ब्लड कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने के लिए भी जौ का पानी बहुत फायदेमंद होता है. कोलेस्ट्रॉल लेवल कम होने की वजह से दिल से जुड़ी कई तरह की समस्याएं होने का खतरा कम हो जाता है. इससे दिल भी स्वस्थ रहता है्.
*मधुमेह के रोगियों के लिए जौ का पानी बहुत फायदेमंद होता है. ये शरीर में शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में बहुत सहायक होता है


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*मधुमेह (डायबटीज)- 
   छिलका रहित जौ को भून पीसकर शहद व जल के साथ सत्तू बनाकर खायें अथवा दूध व घी के साथ दलिया का सेवन पथ्यपूर्वक कुछ दिनों तक लगातार करते करते रहने से मधूमेह की व्याधि से छूटकारा पाया जा सकता है।
*जौ का पानी पीने से शरीर के भीतर मौजूद विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं. जिससे चेहरे पर भी निखार आता है. साथ ही ये इम्यून सिस्टम को भी बेहतर बनाए रखता है.
* जलन- 
गर्मी के कारण शरीर में जलन हो रही हो, आग सी निकलती हो तो जौ का सत्तू खाने चाहिये। यह गर्मी को शान्त करके ठंडक पहूचाता है और शरीर को शक्ति प्रदान करता है।
*जौ की राख को पानी में खूब उबालने से यवक्षार बनता है जो किडनी को ठीक कर देता है
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