2017-03-21

पीलिया रोग की जानकारी और घरेलू उपचार

    पीलिया ( jaundice ) अपने आप में कोई बीमारी नहीं है बल्कि ये शरीर में होने वाली गलत हलचल का एक संकेत है। यह रोग सूक्ष्म वायरस के कारण होता है। ये वायरस मुख्यतः वायरल हेपेटाइटिस ए , हेपेटाइटिस बी व हेपेटाइटिस सी होते है। इनमें से हेपेटाइटिस बी के प्रभाव सबसे अधिक घातक हो सकते है। शुरू में जब ये रोग मामूली होता है तो पता नहीं चलता। जब ये उग्र रूप धारण कर लेता है तब इस रोग का शरीर पर प्रत्यक्ष प्रभाव नजर आने लगता है । त्वचा का रंग पीला हो जाता है। आँखें पीली दिखती है। नाखून पीले नजर आते है। पेशाब गहरा पीला आता है। इसी से इसकी पहली पहचान हो जाती है। इन सब लक्षणों का कारण खून में बिलरुबिन की मात्रा का बढ़ जाना होता है।
लाल रक्त कणो के टूटने से बिलरुबिन बनता है जिसका निस्तारण लिवर द्वारा और मल व पेशाब द्वारा होता रहता है। पीलिया होने पर बिलरुबिन का निस्तारण सही तरीके से नहीं हो पाता तो खून में इसकी मात्रा बढ़ जाती है इसलिए शरीर में पीलापन दिखाई देता है।
खून की जाँच कराने से निश्चय हो जाता है।
जाँच और परीक्षण
डॉक्टर रोग का निर्धारण रोगी के शारीरिक परीक्षण और चिकित्सीय इतिहास के आधार पर करता है। पीलिया की गंभीरता कई जाँचों से पता चलती है: लिवर फंक्शन टेस्ट
रक्त परीक्षण जिसमें बिलीरुबिन की जाँच, सम्पूर्ण रक्त परीक्षण (सीबीसी), हेपेटाइटिस ए, बी, सी की जाँच।
आकृति आधारित जाँचें-पेट का अल्ट्रासाउंड, कंप्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी) स्कैन, और/या मैग्नेटिक रेजोनेंस कोलेंजियोपेन्क्रिएटोग्राफी (एमआरसीपी) जाँचें।

बिलीरुबिन क्या है?
बिलीरुबिन (जिसे पहले हीमेटोइडिन कहा जाता था), हीम के विखंडन मेटाबोलिस्म से उत्पन्न पीले रंग का पदार्थ है। हीम, हेमोग्लोबिन में पाया जाता है, जो कि लाल रक्त कणिकाओं का मुख्य घटक है। आमतौर पर पुरानी और क्षतिग्रस्त आरबीसी तिल्ली में विखंडित होती हैं और इस प्रकार उत्पन्न हुआ हीम बिलीरुबिन में बदल जाता है।
पीलिया का सर्वव्यापी लक्षण है त्वचा और आँखों के सफ़ेद हिस्से (स्क्लेरा) पर पीलापन होना। आमतौर पर इस पीलेपन की शुरुआत सिर से होती है और पूरे शरीर पर फ़ैल जाती है। पीलिया के अन्य लक्षणों में हैं: खुजली होना (प्रुराइटस), थकावट, पेट में दर्द, वजन में गिरावट, उल्टी, बुखार, सामान्य से अधिक पीला मल और गहरे रंग का मूत्र।
आँखों का सफ़ेद हिस्सा (स्क्लेरा) पीला क्यों हो जाता है?
सीरम बिलीरुबिन का आँख के स्क्लेरा में अधिक मात्रा में उपस्थित इलास्टिन नामक प्रोटीन के प्रति आकर्षण होता है। स्क्लेरा में इक्टेरस की उपस्थिति कम से कम (3 ग्राम/डेसीलिटर) मात्रा के सीरम बिलीरुबिन को सूचित करती है।
कौन से आहारों को पूरी तरह त्याग देना चाहिए?
   तले और वसायुक्त आहार, अत्यधिक मक्खन और सफाईयुक्त मक्खन, माँस, चाय, कॉफ़ी, अचार, मसाले और दालें तथा सभी प्रकार की वसा जैसे घी, क्रीम और तेल का त्याग करना चाहिए क्योंकि इनमें कोलेस्ट्रॉल और फैटी एसिड होते हैं जिनका चयापचय लिवर में होता है। 
*चूंकि पीलिया के दौरान लिवर पर दबाव या जोर होता है, इसलिए रेशेयुक्त आहार, फलों का रस और सादा भोजन ही लिया जाना चाहिए।
लक्षण
पीलिया का सर्वव्यापी लक्षण है त्वचा और आँखों के सफ़ेद हिस्से (स्क्लेरा) पर पीलापन होना। आमतौर पर इस पीलेपन की शुरुआत सिर से होती है और पूरे शरीर पर फ़ैल जाती है।
पीलिया के अन्य लक्षणों में हैं:
खुजली होना (प्रुराइटस)।
थकावट
पेटदर्द
वजन में कमी।
उल्टी
बुखार
सामान्य से अधिक पीला मल।
गहरे रंग का मूत्र।
पीलिया के कारण
यह रोग गन्दगी के कारण फैलता है। मल के निस्तारण की पर्याप्त व्यवस्था ना होने वाली जगहों पर पर अधिक फैलता है। मक्खी इसे फैलाने में मदद करती है। खुले में बिकने वाले सामान पर मक्खियां बैठती है तो उनके साथ इस रोग के वायरस खाने पीने के सामान पर फेल जाते है।ऐसे सामान को खाने पर पीलिया हो जाता है। अगस्त , सितम्बर महीने में इसीलिये ये रोग अधिक होता है। पीलिया ग्रस्त रोगी के झूठे भोजन ,
पानी आदि के कारण भी ये हो सकता है।
रोग ग्रस्त व्यक्ति का रक्त दुसरे व्यक्ति को चढ़ जाने से हेपेटाइटिस बी नामक पीलिया हो जाता है। रोगग्रस्त व्यक्ति को लगी सीरिंज , ब्लेड या ऐसे व्यक्ति के साथ यौन क्रिया करने से भी ये हो सकता है।
पीलिया तब होता है जब सामान्य मेटाबोलिज्म की कार्यक्षमता में अवरोध हो या बिलीरुबिन का उत्सर्जन हो।
वयस्कों का पीलिया अक्सर निम्न का सूचक होता है:

    अत्यधिक शराब पीना।
    संक्रमण।
    लिवर का कैंसर।
    सिरोसिस (लिवर पर घाव होना)।
    पित्ताशय की पथरी (सख्त वसा से निर्मित कोलेस्ट्रॉल की पथरी या बिलीरुबिन द्वारा निर्मित पिगमेंट की पथरी)।
    हेपेटाइटिस (लिवर की सूजन जो इसकी कार्यक्षमता घटाती है)।
    पैंक्रियास का कैंसर।
    लिवर में परजीवियों की उपस्थिति।
    रक्त विकार, जैसे कि हीमोलायटिक एनीमिया (शरीर में लाल रक्त कणिकाओं की कम हुई मात्रा, जो थकावट और कमजोरी उत्पन्न करती है)।
    किसी औषधि या उसकी अधिक मात्रा से विपरीत प्रतिक्रिया, जैसे कि एसिटामिनोफेन।
    परहेज और आहार 
    लेने योग्य आहार
    सब्जियों का ताजा निकला रस (चुकंदर, मूली, गाजर, और पालक), फलों का रस (संतरा, नाशपाती, अंगूर और नीबू) और सब्जियों का शोरबा।
    *ताजे फल, जैसे सेब, अन्नानास, अंगूर, नाशपाती, संतरे, केले, पपीता, आदि। खासकर अन्नानास विशेष रूप से उपयोगी होता है।
    *पीलिया के उपचार हेतु जौ का पानी, नारियल का पानी अत्यंत प्रभावी होते हैं।
    *नीबू के रस के साथ अधिक मात्रा में पानी पीने से लिवर की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की रक्षा होती है।
    *पीलिया की चिकित्सा हेतु लिए जाने वाले प्रभावी आहारों में फलों के रस का विशेष स्थान है। गन्ने, नीबू, मूली, टमाटर आदि का रस लिवर के लिए अत्यंत सहायक होता है।
    *आँवला भी विटामिन सी का उत्तम स्रोत है। आप अपने लिवर की कोशिकाओं को स्वच्छ करने हेतु कच्चा, धूप में सुखाया हुआ या रस के रूप में आँवला ले सकते हैं।
    *अनाज जैसे ब्रेड, चपाती, सूजी, जई का आटा, गेहूँ का दलिया, चावल आदि कार्बोहायड्रेट के बढ़िया स्रोत हैं और पीलिया से पीड़ित व्यक्ति को दिये जा सकते हैं।
    पीलिया होने पर क्या नहीं खाएं
    *चिकनाई ( घी , तेल ) , तेज मिर्च मसाले , उड़द व चने की दाल , बेसन , तिल , हींग , राई *, मैदा से बने सामान , तली वस्तु आदि।
    *अशुद्ध व बासी खाना , मांस , शराब , चाय कॉफी भी न लें। तेज गर्मी से और अधिक शारीरिक मेहनत से बचना चाहिए।
    पीलिया होने पर क्या खाएं
    *साफ सुथरा गन्ने का रस , नारियल पानी , नारंगी या संतरे का रस , मीठे अनार का रस ,फालसे का जूस , फलों में चीकू , पपीता , खरबूजा , आलूबुखारा , पतली छाछ । चपाती बिना घी लगी खा सकते है। दलिया , जौ की चपाती या सत्तू , मूंग की दाल का पानी थोड़ा सा काला नमक व काली मिर्च डालकर ले सकते है। सब्जी में लौकी तोरई , टिण्डे , करेला , परवल , पालक आदि ले सकते है।
    *रोज सात दिनों तक जौ का सत्तू खाकर ऊपर से गन्ने का रस पीने से Piliya ठीक हो जाता है।
    * नाश्ते में अंगूर ,सेवफल पपीता ,नाशपती तथा गेहूं का दलिया लें । दलिया की जगह एक रोटी खा सकते हैं।
    * मुख्य भोजन में उबली हुई पालक, मैथी ,गाजर , दो गेहूं की चपाती और ऐक गिलास छाछ लें।
    * करीब दो बजे नारियल का पानी और सेवफल का जूस लेना चाहिये।
    * रात के भोजन में एक कप उबली सब्जी का सूप , गेहूं की दो चपाती ,उबले आलू और उबली पत्तेदार सब्जी जैसे मेथी ,पालक ।
    * रात को सोते वक्त एक गिलास मलाई निकला दूध दो चम्मच शहद मिलाकर लें।

    * दही में हल्दी मिलाकर खाने से पीलिया में आराम मिलता है।
    .*  थोड़ा सा खाने का चूना ( चने बराबर ) पके हुए केले के साथ सुबह खाली पेट चार पांच 
    दिन खाने से ठीक होता है।
    * टमाटर में विटामिन सी पाया जाता है, इसलिये यह लाइकोपीन में रिच होता है, जो कि एक प्रभावशाली एंटीऑक्‍सीडेंट हेाता है। इसलिये टमाटर का रस लीवर को स्‍वस्‍थ्‍य बनाने में लाभदायक होता है।
    * तीन चम्मच प्याज के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह खाली पेट लेने से आराम मिलता है।
    * एक गिलास पानी में एक बड़ा चम्मच पिसा हुआ त्रिफला रात भर के लिए भिगोकर रख दें। सुबह इस पानी को छान कर पी जाएँ। ऐसा 12 दिनों तक करें।
    * लौकी को भून ले। इसमें पिसी हुई मिश्री मिलाकर खाएँ। साथ ही लौकी का रस आधा कप मिश्री मिलाकर पीएं। दिन में तीन बार पांच सात दिन लेने से पीलिया ठीक हो जाता है।
    * धनिया के बीज को रातभर पानी में भिगो दीजिये और फिर उसे सुबह पी लीजिये। धनिया के बीज वाले पानी को पीने से लीवर से गंदगी साफ होती है।
    *संतरे का रस सुबह खाली पेट रोज पीने से पीलिया में आराम मिलता है।
    * एक गिलास गन्ने के रस में चौथाई कप आंवले का रस मिलाकर पीने से पीलिया ठीक होता है।
    * पीलिया का आयुर्वेद में अचूक इलाज है। आयुर्वेद चिकित्सकों के अनुसार यदि मकोय की पत्तियों को गरम पानी में उबालकर उसका सेवन करें तो रोग से जल्द राहत मिलती है। मकोय पीलिया की अचूक दवा है और इसका सेवन किसी भी रूप में किया जाए स्वास्थ्य के लिए लाभदायक ही होता है।
    *मूली का वो हिस्सा जहाँ से पत्ते शुरू होते है यानि टहनी और पत्ते दोनों को पीसकर रस निकाल लें। आधा कप इस रस में एक चम्मच मिश्री मिलाकर सुबह खाली पेट पांच सात दिन पीने से पीलिया ठीक हो जाता है।
    *दालों का उपयोग बिल्कुल न करें क्योंकि दालों से आंतों में फुलाव और सडांध पैदा हो सकती है। लिवर के सेल्स की सुरक्षा की दॄष्टि से दिन में ३-४ बार निंबू का रस पानी में मिलाकर पीना चाहिये।
    *पीपल के कोमल पत्ते पीलिया में बहुत फायदेमंद साबित होते है। चार पांच पीपल के नए पत्ते ( कोंपल ) एक चम्मच मिश्री या शक्कर के साथ बारीक पीस लें इसे एक गिलास पानी में डालकर हिला लें। बारीक चलनी से छान ले। ये शरबत सुबह और शाम को दो बार पिएं। चार पांच दिन पीने से जरूर फायदा नजर आएगा। सात दिन तक पी सकते है।
    * इस रोग से पीड़ित रोगियों को नींबू बहुत फायदा पहुंचाता है। रोगी को 20 ml नींबू का रस पानी के साथ दिन में 2 से तीन बार लेना चाहिए।
    *जब आप पीलिया से तड़प रहे हों तो, आपको गन्‍ने का रस जरुर पीना चाहिये। इससे पीलिया को ठीक होने में तुरंत सहायता मिलती है।
    * पीलिया के रोगी को लहसुन की पांच कलियाँ एक गिलास दूध में उबालकर दूध पीना चाहिए , लहसुन की कलियाँ भी खा लें। इससे बहुत लाभ मिलेगा।


    2017-03-14

    मशरूम खाने के औषधीय गुण उपचार फायदे

      

      मशरूम एक पौष्टिक, स्वास्थ्यवर्धक एवं औषधीय गुणों से युक्त रोगरोधक सुपाच्य खाध पदार्थ है। चीन के लोग इसे महौषधि एवं रसायन सदृश्य मानते हैं जो जीवन में अदभुत शकित का संचार करती है। रोम निवासी मशरूम को र्इश्वर का आहार मानते हैं । यह पोषक गुणों से भरपूर शाकाहारी जनसंख्या के लिये महत्वपूर्ण विकल्प है तथा पौष्टिकता की दृष्टि से शाकाहारी एवं मांसाहारी भोजन के बीच का स्थान रखता है। मशरूम का 21वीं सदी में उत्तम स्वास्थ्य के लिये भोजन में प्रमुख स्थान होगा। सब्जियों को उगाने से लेकर आकर्षक रंग-रूप तक लाने में रासायनिक खाद, कीटनाशी, फफूँदनाशी या जल्दी बढ़ाने वाले हार्मोन आदि का असन्तुलित मात्रा में प्रयोग किया जाता है जोकि मानव स्वस्थ्य के लिये हानिकारक होती हैं । इन सब्जियों के साथ रासायनिक तत्व हमारे शरीर में पहुँचकर धीरे-धीरे रोगरोधी तन्त्र को कमजोर बनाते हैं। अत: इस सन्दर्भ में मशरूम की उपयोगिता बढ़ती जा रही है
    सब्जी के तौर पर इस्तेमाल किया जाने वाले मशरूम के खाने से शरीर को कई तरह के फायदे होते हैं। जिन लोगों को मशरूम सब्जी के तौर पर पसंद नहीं है। वो मशरूम को आचार, सूप पाउडर, केंडी, बिस्कुट, बड़िया, मुरब्बा के रुप में इस्तेमाल कर सकते हैं। देश के कई इलाकों में मशरूम को कुकरमुत्ते के नाम से भी जाना है। इस नाम के साथ ही लोगों को भ्रम होता है कि यह कुत्ते के मूत्र से पैदा होता है। वहीं कई लोग इसे मांशाहारी बताते हैं, जो कि पूरी तरह से गलत है। मशरूम एक शाकाहारी भोजन है। इसे कोई भी खा सकता है। इसके साथ ही मशरूम बाकायदा खेती होती है। जिसे कम तापमान पर उगाया जाता है। वैसे तो मशरूम बाजार में पूरे साल मौजूद रहता है। लेकिन मैदानी इलाकों में ठंड के मौसम में इसे आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।मशरूम में कई ऐसे जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं जिनकी शरीर को बहुत आवश्यकता होती है. साथ ही ये फाइबर का भी एक अच्छा माध्यम है. कई बीमारियों में मशरूम का इस्तेमाल दवाई के तौर पर किया जाता है. हेल्थ कॉन्शस लोगों के लिए भी यह अच्छा होता है, क्योंकि इसमें कैलोरीज ज्यादा नहीं होतीं.
        मशरूम में कई महत्वपूर्ण खनिज और विटामिन पाए जाते हैं. इनमें विटामिन बी, डी, पोटैशियम, कॉपर, आयरन और सेलेनियम की पर्याप्त होती है. इसके अलावा, मशरूम में choline नाम का एक खास पोषक तत्व पाया जाता है जो मांसपेशियों की सक्रियता और याददाश्त बरकरार रखने में बेहद फायदेमंद रहता है.
       *मशरूम या कुकुरमुत्ता को एक प्रकार का कवक माना जाता है जो बरसात के दिनों में सड़े-गले कार्बनिक पदार्थ पर अनायास ही दिखने लगता है। मशरूम खाने से कोलेस्ट्रॉल लेवल कंट्रोल करने के साथ ही ब्रेस्ट कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर और डायबिटीज जैसी कई गंभीर बीमारियों से दूर रखता है। मशरूम खाने से मोटापा कम होन के साथ ही बॉडी की इम्यूनिटी भी बढ़ती है।
       
    *मशरूम में एंटी-ऑक्सीडेंट भूरपूर होते हैं. इनमें से खास है ergothioneine, जो बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम करने और वजन घटाने में सहायक होता है.
    *. मशरूम में मौजूद तत्व रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं. इससे सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियां जल्दी-जल्दी नहीं होतीं. मशरूम में मौजद सेलेनियम इम्यून सिस्टम के रिस्पॉन्स को बेहतर करता है.
    *मशरूम में बहुत कम मात्रा में कोलेस्ट्रॉल होता है और इसके सेवन से काफी वक्त तक भूख नहीं लगती.
    *कैंसर में फायदेमंद Beneficial In Cancer
    यह प्रोस्‍टेट और ब्रेस्‍ट कैंसर से बचाता है। इसमें बीटा ग्‍लूकन और कंजुगेट लानोलिक एसिड होता है जो कि एक एंटी कासिजेनिक प्रभाव छोड़ते हैं। यह कैंसर के प्रभाव को कम करते हैं।
    *हीमोग्लोबिन रखे ठीक, खून की कमी को दूर करने में लाभकारी Beneficial In Removing Blood Loss
    मशरूम का सेवन रक्त में हीमोग्लोबिन के स्तर को बनाये रखता है। इसके अलावा इसमें बहुमूल्य फोलिक एसिड प्रचुर मात्रा में होता है जो केवल मांसाहारी खाध पदार्थो में होता है। अत: लौह तत्व एवं फोलिक एसिड के कारण यह रक्त की कमी की शिकार अधिकांश शाकाहारी ग्रामीण महिलाओं एवं बच्चों के लिये ये सर्वोत्तम आहार है।के अलावा मशरूम को बालों और त्वचा के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है. वहीं कुछ स्टडीज में मशरूम के सेवन से कैंसर होने की आशंका कम होने की बात तक कही गई है.
    *हृदय रोग में फायदेमंद Beneficial In Heart Disease
    Mushroom Ke Fayde मशरूम में हाइ न्‍यूट्रियंट्स पाये जाते हैं इसलिये ये दिल के लिये अच्‍छे होते हैं। इसमें कुछ तरह के एंजाइम और रेशे पाए जाते हैं जो कि कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को कम करते हैं।
     
    *मोटापा कम करे मोटापा कम करने के घरेलू उपाय Motapa Rokne Me Madad Karta Hai.
    *इसमें लीन प्रोटीन होता है जो कि वजन घटाने में बडा़ कारगर होता है। मोटापा कम करने वालों को प्रोटीन डाइट पर रहने को बोला जाता है, जिसमें मशरूम खाना अच्‍छा माना जाता है।
    *हीमोग्लोबिन रखे ठीक
    मशरूम का सेवन रक्त में हीमोग्लोबिन के स्तर को बनाये रखता है। इसके अलावा इसमें बहुमूल्य फोलिक एसिड प्रचुर मात्रा में होता है जो केवल मांसाहारी खाध पदार्थो में होता है। अत: लौह तत्व एवं फोलिक एसिड के कारण यह रक्त की कमी की शिकार अधिकांश शाकाहारी ग्रामीण महिलाओं एवं बच्चों के लिये ये सर्वोत्तम आहार है।
    Mushroom में विटामिन बी होता है जो कि भोजन को ग्‍लूकोज़ में बदल कर ऊर्जा पैदा करता है। विटामिन बी2 और बी3 इस कार्य के लिये उत्‍तम हैं।
    हड्डियों को मिलेगी मजबूती 
    *Mushroom विटामिन डी का भी एक बहुत अच्छा माध्यम है। यह विटामिन हड्डियों की मजबूती के लिए बहुत जरूरी होता है। नियमित तौर पर मशरूम खाने पर हमारी आवश्यकता का 20 प्रतिशत विटामिन डी हमें मिल जाता है।
    पेट के विकार करे दूर
     
    *ताजे मशरूम में पर्याप्त मात्रा में रेशे (लगभग 1 प्रतिशत) व कार्बोहाइड्रेट तन्तु होते हैं, इसका सेवन करने से कब्ज, अपचन, अति अम्लीयता सहित पेट के विभिन्न विकारों से बचाव होता है। साथ ही इसके सेवन से शरीर में कोलेस्ट्राल एवं शर्करा का अवशोषण भी कम होता है।
    * मशरूम विटामिन डी का भी एक बहुत अच्छा माध्यम है. यह विटामिन हड्डियों की मजबूती के लिए बहुत जरूरी होता है. नियमित तौर पर मशरूम खाने पर हमारी आवश्यकता का 20 प्रतिशत विटामिन डी हमें मिल जाता है.
    *ट्यूमर को रोके
    मशरूम में कालवासिन, क्यूनाइड, लेंटीनिन, क्षारीय एवं अम्लीय प्रोटीन की उपस्थिति मानव शरीर में टयूमर बनने से रोकती है। साथ ही इसमें लगभग 22-35 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है। जो पौधों से प्राप्त प्रोटीन से कही अधिक होती है तथा यह शाकभाजी व जन्तु प्रोटीन के मध्यस्थ का दर्जा रखता है।
    *इसमें प्यूरीन, पायरीमिडीन, क्यूनान, टरपेनाइड इत्यादि तत्व भी होते है जो जीवाणुरोधी क्षमता प्रदान करते
    *मधुमेह का घरेलू उपचार 
    मधुमेह का घरेलू उपचार मशरूम वह सब कुछ देगा जो मधुमेह रोगी को चाहिये। इसमें विटामिन, मिनरल और फाइबर होता है। साथ ही इमसें फैट, कार्बोहाइड्रेट और शुगर भी नहीं होती, जो कि मधुमेह रोगी के लिये जानलेवा है। यह शरीर में इनसुलिन को बनाती है।

    पर्याप्त नींद मधुमेह रोग मे फायदेमंद

    Image result for पर्याप्त नींद  मधुमेह रोग मे फायदेमंद
       आपको जानकार झटका लग सकता है कि कम सोने से पुरूषों को मधुमेह यानि डायबिटीज होने का खतरा बढ़ सकता है।
       हाल ही में हुए एक अध्ययन से यह पता चला है कि जो पुरूष, कम सोते हैं वो उनके शरीर में शुगर की मात्रा असंतुलित हो जाती है और उनमें मधुमेह की समस्या होने की संभावना रहती है। इसलिए, हर पुरूष को कम से कम 7 घंटे की नींद लेना आवश्यक होता है।
       ऐसा अध्ययन के निष्कर्ष से स्पष्ट हुआ है कि जो पुरूष पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं उनके शरीर का ब्लड सुगर लेवल हाई हो जाता है जबकि जो महिलाएं कम सोती हैं वो सामान्य नींद लेने वाली महिलाओं की अपेक्षा हारमोन इंसुलिन के लिए कम उत्तरदायी होती हैं।
     खूब खाने और सोने वाले लोगों के मोटे होने की बात कही जाती थी अब पता चला है कम सोने और रात में जगने वाले लोग ना सिर्फ मोटे होते हैं बल्कि डायबिटिज के शिकार भी|
    रात की पालियों में काम करने वाले और लगातार विमान में सफर करने वालों को डायबिटिज का ज्यादा खतरा है. अमेरिका में हुई एक रिसर्च से इस बात का पता चला है. बोस्टन के ब्रिघम एंड वीमेन्स हॉस्पीटल का कहना है कि कम सोना या अनियमित तरीके से सोना किसी भी इंसान के सर्केडियन रिदम या बायलॉजिकल क्लॉक बिगाड़ देता हैं. इसकी वजह से पेनक्रियास से निकलने वाली इंसुलिन की मात्रा पर असर पड़ता है और खून में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है. खून में शुगर की बढ़ी मात्रा डायबिटिज का कारण बन सकती है. रिसर्च में शामिल लोगों के मेटाबॉलिज्म की दर में भी फर्क देखा गया, यह कम हो गया. कम मेटाबोलिज्म से मोटापे की समस्या भी हो सकती है
         

    रिसर्च करने वाली टीम का नेतृत्व न्यूरोसाइंटिस्ट और नींद पर रिसर्च कर रहे ओरफ्यू बक्सटॉन कर रहे थे. इस टीम ने अस्पताल में 21 लोगों पर छह हफ्ते तक निगाह बनाए रखी. इन लोगों ने इस दौरान इस बात की छानबीन की कि ये लोग कब और कितनी देर तक सोते हैं, इसके साथ ही उन्होंने खाया क्या है. शुरूआत में रिसर्च करने वालों ने इन लोगों को हर रात 10 घंटे तक सोने दिया. बाद में हर 24 घंटे के लिए इसे घटा कर 5-6 घंटे कर दिया गया और वो भी दिन और रात के अलग अलग समय में बांट कर. तीन हफ्ते तक इस तरह से चला.
       नींद में कमी और सर्केडियन रिदम की गड़बड़ी वाले मरीजों की मेटाबॉलिज्म की दर में कमी का साफ मतलब है कि निष्क्रिय रहने के दौरान उनके शरीर में सामान्य की तुलना में कम कैलोरी खर्च हुई. रिसर्च करने वालों के मुताबिक यह कमी जितनी है उसके कारण एक साल में छह किलो तक वजन बढ़ सकता है. डॉक्टरों ने यह भी देखा कि इन लोगों के खून में खाना खाने के बाद शुगर की मात्रा भी बढ़ गई थी. जाहिर है कि इसका सीधा संबंध पेंक्रियाज से निकलने वाले इंसुलिन से है. कुछ मामलों में तो शुगर की मात्रा डायबिटिज के ठीक पहले मौजूद रहने वाली मात्रा के करीब पहुंच गई थी.
      रिसर्च के आखिरी चरण में नौ दिनों तक जब इन लोगों को सामान्य तरीके से सोने दिया गया तो सारी गड़बड़ियां खुद ही ठीक हो गईं. यह रिसर्च साइंस जरनल में छपी है इसके साथ ही पहले भी कई रिसर्च में यह बात सामने आ चुकी है कि रात को काम करने वाले लोगों के डायबिटिज का शिकार होने की आशंका बहुत ज्यादा होती है. बक्सटॉन का कहना है, "सबूत सामने है कि पर्याप्त रूप से सोना सेहत के लिए बेहद जरूरी है और पूरी तरह से इसके कारगर होने के लिए पहली कोशिश रात में सोने की होनी चाहिए." तो स्वस्थ और सेहतमंद रहना है तो घोड़े बेच कर सोइये और वो भी रात में|

    2017-03-13

    कमर दर्द (कटि शूल) के रामबाण उपचार



        हमारे शरीर के विभिन्न भागों में अनेक प्रकार की बीमारियां होती रहती हैं. जिसके परिणाम स्वरूप कई बार शरीर में दर्द भी हो जाता हैं. शरीर के किसी भी भाग में दर्द होने पर हमारे शरीर में बेचैनी हो जाती हैं. शरीर के किसी भी भाग में दर्द होने पर हम अक्सर दर्द से राहत पाने के लिए दर्द की टेबलेट का सेवन करते हैं. जिनका सेवन करने से कभी – कभी हमारे शरीर पर इन दवाइयों का अवांछित प्रभाव भी पड़ जाता हैं. अधिक पेनकिलर का सेवन करने से हमारे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों जैसे दिल, लीवर व किडनी में रोग उत्पन्न होने की आशंका रहती हैं. आधुनिक चिकित्सा की दवाइयों को खाने से दर्द तो आराम हो जाता हैं. लेकिन एक दर्द को ठीक करने के चक्कर में शरीर में अनेक रोग उपज जाते हैं. जिससे नुकसान हमारे शरीर का ही होता हैं. इसलिए जरूरत से ज्यादा दवाइयों का सेवन नहीं करना चाहिए . अगर आपके शरीर में किसी भी प्रकार का दर्द हो तो आप उसे ठीक करने के लिए घरेलू उपायों को अपना सकते हैं.
       लगभग ८०% लोग अपने जीवन में कभी न कभी कमर दर्द से परेशान होते हैं। कमर दर्द नया भी हो सकता है और पुराना रोग भी हो सकता है। नया रोग कमर की मांसपेशियों का असंतुलित उपयोग करने से उत्पन्न होता है। रोग पुराना होने पर वक्त बेवक्त कमर दर्द होता रहता है और उसके कारण का पता नहीं चलता है। यह दर्द कभी-कभी इतना भयंकर होता है कि रोगी तडफ़ उठता है,बैठना-उठना और यहां तक कि बिस्तर में करवट बदलना भी कठिन हो जाता है।सतही तौर पर देखने पर कमर में होने वाला दर्द भले ही एक सामान्य सी मेडिकल स्थिति लगता है, लेकिन इसे नज़रअंदाज करने से समस्या काफी बढ़ सकती है।
       अधिकतर कमर दर्द की समस्या दिन भर काम करने वाली ग्रहणियों को होती हैं. लेकिन हम यह बिल्कुल निश्चित होकर नहीं कह सकते. कमर के दर्द की समस्या से आजकल हर उम्र का व्यक्ति परेशान रहता हैं. आजकल बच्चों से लेकर बड़े – बूढों को भी कमर दर्द की शिकायत होती हैं.
     
    कमर में दर्द होने के कारण
       कमर में दर्द होने का कारण अधिक देर तक एक ही अवस्था में बैठकर काम करना भी हो सकता हैं. भारी वजन उठाने के कारण मांसपेशियों में अधिक खिचावं आ जाता हैं. जिससे कमर में दर्द हो जाता हैं. हमेशा ऊँची ऐडी की सेंडिल या जूतों को पहनने के कारण भी कमर में दर्द हो जाता हैं. कभी - कभी अधिक नर्म गद्दों पर सोने से भी कमर में दर्द की समस्या उत्पन्न हो जाती हैं. अधिक देर तक ड्राइव करने के कारण भी लोगों को कमर में दर्द की शिकायत हो जाती हैं. बुजुर्गों के कमर में दर्द बढ़ती उम्र के कारण हो जाता हैं. जैसे – जैसे वृद्ध लोगों की उम्र बढती जाती हैं. वैसे ही उनके जोड़ों में दर्द, कमर में दर्द तथा पीठ के दर्द की समस्या उत्पन्न हो जाती हैं.
    कमर के दर्द के लक्षण
      ज्यादातर लोगों की कमर के निचले तथा मध्य हिस्से में ज्यादा दर्द होता हैं. कमर का दर्द कई लोगों के कमर के दोनों ओर तथा कूल्हों में भी होता हैं. जिससे किसी भी काम को करने में बहुत ही परेशानी होती हैं.
      * शरीर के अंगों जैसे गुर्दे में इन्फ़ेक्शन,पोरुष ग्रंथि की व्याधि,स्त्रियों में पेडू के विकार ,मूत्राषय के रोग और कब्ज की वजह से कमर दर्द हो सकता है। गर्भवती स्त्रियों में कमर दर्द आम तौर पर पाया जाता है। गर्भ में बच्चे के बढने से भीतरी अंगों पर दवाब बढने से कमर दर्द हो सकता है।
    कमर दर्द में लाभकारी घरेलू उपचार किसी भी आनुषंगिक दुष्प्रभाव से मुक्त हैं और असरदार भी है। 
    कमर दर्द के सरल उपचार -
    *नीचे रखी कोई वस्तु उठाते वक्त पहिले अपने घुटने मोडें फ़िर उस वस्तु को उठाएं।
    कमर दर्द के लिए आप आईसक्यूब ले सकते हैं। बर्फ के टुकड़े को एक साफ कपड़े में रखें और कमर के जिस हिस्से में दर्द है, वहां बर्फ से सेक करें।कमर पर बर्फ 20 मिनट से ज्यादा न रखें। आप अधिक समय तक रखेंगे, तो हो सकता है कि दर्द ठीक होने की बजाय बढ़ जाए।
    *अगर आपको लगता है कि बर्फ रखने के बावजूद आपको कमर दर्द से राहत नहीं मिली है, तो आप एक घंटे बाद फिर कमर पर बर्फ लगाएं। अगर दर्द कुछ कम हो रहा है, तो आप यह प्रोसेस अगले दो दिनों तक दोहराएं। इससे आपको कमर दर्द में राहत जरूर मिलेगी।
    *कमर पर बर्फ रखते समय ध्यान रखें कि बर्फ कमर से न फिसले। बर्फ पेट पर आसानी से रखी जा सकती है, मगर कमर पर रखने के लिए सपोर्ट की आवश्यकता होती है।
     
    *भोजन में पर्याप्त लहसुन का उपयोग करें। लहसुन कमर दर्द का अच्छा उपचार माना गया है।
    *गूगल कमर दर्द में अति उपयोगी घरेलू चिकित्सा है। आधा चम्मच गूगल गरम पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करें।
    *चाय बनाने में ५ कालीमिर्च के दाने,५ लौंग पीसकर और थौडा सा सूखे अदरक का पावडर डालें। दिन मे दो बार पीते रहने से कमर दर्द में लाभ होता है।
    * सख्त बिछोने पर सोयें। औंधे मुंह पेट के बल सोना हानिकारक है।
    कमर के दर्द को दूर करने के लिए 500 ग्राम धतूरे के पत्तों का रस लें. 15 ग्राम अफीम लें. *ग्राम सेंधा नमक लें. अब इन तीनों को मिलाकर एक गाढ़ा मिश्रण तैयार कर लें. कमर के दर्द को दूर करने के लिए इस मिश्रण से दिन में 4 या 5 बार मालिश करें. आपको कमर के दर्द से आराम मिलेगा.
    * २ ग्राम दालचीनी का पावडर एक चम्मच शहद में मिलाकर दिन में दो बार लेते रहने से कमरदर्द में शांति मिलती है।
    * कमर दर्द पुराना हो तो शरीर को गर्म रखें और गरम वस्तुएं खाऎं।
    *कमर के दर्द से छुटकारा पाने के लिए आप खजूर और मेथी के दानों का प्रयोग कर सकते हैं. कमर के दर्द को दूर करने के लिए 10 ग्राम खजूर को पानी में डालकर उबाल लें. अब 4 ग्राम मेथी लें और उसे पीस लें. उबले हुए खजूर के पानी में मेथी के चुर्ण को मिलाकर इसका सेवन करें. खजूर और मेथी के मिश्रण को पीने से कमर दर्द ठीक हो जायेगा.
    * दर्द वाली जगह पर बर्फ़ का प्रयोग करना हितकारी उपाय है। इससे भीतरी सूजन भी समाप्त होगी। कुछ रोज बर्फ़ का उपयोग करने के बाद गरम सिकाई प्रारंभ कर देने के अनुकूल परिणाम आते हैं।
    *कमर के दर्द से राहत पाने के लिए आप कमल ककड़ी के चुर्ण का भी प्रयोग कर सकते हैं. इसके लिए 100 ग्राम कमल ककड़ी का चुर्ण लें. अब एक बर्तन में दूध डाले और उसे उबालने के लिए रख दे. अब कमल ककड़ी के चुर्ण को दूध में डालकर थोड़ी देर पका लें. अब दूध का सेवन करें. इस दूध का सेवन करने से कमर के दर्द में काफी राहत मिलेगी.
    * भोजन मे टमाटर,गोभी,चुकंदर,खीरा ककडी,पालक,गाजर,फ़लों का प्रचुर उपयोग करें।
    *अजवायन और गुड़ का उपयोग करके भी कमर के दर्द से राहत पाई जा सकती हैं. इसके लिए 200 ग्राम अजवायन लें और उसे पीस लें. अब 200 ग्राम गुड़ लें और उसे भी पीस लें. अब एक डिब्बा ले और उसमें इन दोनों के चुर्ण को डालकर रख दें. रोजाना एक चम्मच चुर्ण का सेवन करें. कमर के दर्द को जल्दी दूर करने के लिए इस चुर्ण का दिन में दो बार सेवन करें.
    * नमक मिलें गरम पानी में एक तौलिया डालकर निचोड़ लें। पेट के बल लेटकर दर्द के स्थान पर तौलिये द्वारा भाप लेने से कमर दर्द में राहत मिलती है।
     

    *सोंठ और गोखरू का प्रयोग करने से भी कमर का दर्द ठीक हो जाता हैं. कमर के दर्द को ठीक करने के लिए गोखरू और सोंठ की बराबर – बराबर मात्रा लें और इनका क्वाथ बना लें. अब इस क्वाथ का सेवन करें. सोंठ और गोखरू से बने क्वाथ को दिन में दो बार पीने से कमर का दर्द ठीक हो जायेगा.
    *रोज सुबह सरसों या नारियल के तेल में लहसुन की तीन चार कलियॉ डालकर (जब तक लहसुन की कलियाँ काली न हो जायें) गर्म कर लें फिर ठंडा कर इसकी पीठ कमर में मालिश करें।
    *सोंठ और अरंड मूल का क्वाथ बनाकर पीने से भी कमर का दर्द ठीक हो जाता हैं. कमर के दर्द को ठीक करने के लिए सोंठ और अरंड मूल का क्वाथ बना लें. फिर इसमें पीसी हुई हिंग और काला नमक डालें और इन्हें अच्छी तरह मिला लें. अब इसका सेवन करें. सोंठ और अरंड मूल के क्वाथ का सेवन करने से आपको कमर के दर्द से छुटकारा मिलेगा.

    * कढ़ाई में दो तीन चम्मच नमक डालकर इसे अच्छे से सेक लें। थोड़े मोटे सूती कपड़े में यह गरम नमक डालकर पोटली बांध लें। कमर पर इसके द्वारा सेक करें।
    *सुबह शाम दिन में दो बार दो-दो छुहारे खाते रहें एैसा नियमित कुछ दिनों तक करने से कमर दर्द में राहत मिलती है।
    *देशी घी में अदरक का रस मिलाकर पीते रहें, कुछ दिनों तक सेवन करने से कमर दर्द की शिकायत दूर हो जाती है।
    *गरम पट्टी को कमर पर बांधने से कमर दर्द मे राहत मिलती है, आप गरम पानी में थोड़ा सेंधा नमक डालकर नहाने से भी कमर और पीठ दर्द में राहत मिलती है ।
    *कमर दर्द में कच्चे आलू की पुल्टिस बांधने से कमर से संबंधित दर्द समाप्त हो जाता है। लेकिन नियमित इस का प्रयोग करेगें तभी।
    *तिल के तेल की कमर पर मालिश करने से कमर दर्द ठीक हो जाता है। तिल के तेल को हल्की आंच में गरम करें और फिर इस तेल को कमर दर्द वाली जगह पर हल्के हाथों से मालिश करें। कमर दर्द में जल्द ही राहत मिलेगी।
    *गेहूं की बनी रोटी जो एक ओर से नहीं सिकी हो उस पर तिल के तेल को चुपड़कर कमर दर्द वाली जगह पर रखने से कमर दर्द जल्दी ठीक होता है।
    *मेथी का प्रयोग खाने में करते रहने से भी कमर दर्द में राहत मिलती है। मेथी के लडुओं को सेवन नियमित करते रहने से कमर दर्द नहीं होता।
    *यदि कमर में दर्द अधिक है तो आप मेथी के तेल की मालिश कमर पर जरूर करें लाभ मिलेगा।
    *200 ग्राम दूध में 5 ग्राम एरंड की गिरी को पकाकर, दिन में दो बार सेवन करने से कमर दर्द की पीड़ा जल्दी ठीक हो जाती है।

    विशिष्ट परामर्श-
    गठिया , संधिवात , कटि-शूल,साईटिका ,घुटनो की पीड़ा जैसे वात रोगों मे वैध्य श्री दामोदर 98267-95656 की जड़ी- बूटी निर्मित औषधि सर्वाधिक असरदार साबित होती है| पुराने गठिया रोग भी इस औषधि से ठीक हो जाते हैं| बिस्तर पकड़े रोगी भी दर्द मुक्त गतिशीलता प्राप्त करते हैं|


    2017-03-08

    मोटापा घटाने और पेट कम करने के घरेलू उपाय::Home remedies for reducing obesity and reducing belly fat

      

       अनियमित और मसालेदार भोजन के अलावा आरामपूर्ण जीवनशैली के चलते तोंद एक वैश्विक समस्या बन गई है जिसके चलते डायबिटीज और हार्टअटैक का खतरा बढ़ जाता है। तोंद कई अन्य रोगों को भी जन्म देती है। इसके चलते.
       मोटापा शरीर के लिए बीमारी का घर होता है। मोटापा शरीर में जमा होनेवाली अतिरिक्त चर्बी होती है जिससे वजन बढ़ जाता है और यही मोटापा कई बीमारियों का घर बनता है। मोटापे का मतलब है, शरीर में बहुत ज्यादा चर्बी होना। जबकि ज्यादा वजनदार होने का मतलब है, वजन का सामान्य से ज्यादा होना
        *वजन कम करना और चर्बी को गला देना दोनों ही अलग अलग बातें हैं। आज कल हम तरह तरह के जंक फूड खाते रहते हैं , जिनमें खाघ पदार्थ और पोषण के नाम पर कुछ भी नहीं होता, लेकिन हां, इससे फैट खूब मिल जाता है। यही फैट आपके शरीर में जम जाता है जो कई दिनों तक रहने से विष का रूप ले लेता है। कुछ घरेलू उपायों से आप इस चर्बी तथा टॉक्‍सिन को अपने शरीर से निकाल सकते हैं। जब आप शरीर से इस फैट को निकालेगें तो आपके शरीर की सफाई भी होगी, जिससे पेट साफ रहेगा और त्‍वचा दमकने लगेगी।
      *कमर और पेट के आसपास इकट्ठा हुई अतिरिक्त चर्बी से किडनी और मूत्राशय में भी दिक्कतें होना शुरू हो जाती हैं। रीढ़ की हड्डी पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है और जिसके चलते आए दिन कमर दर्द और साइड दर्द होता रहता है।
    *भोजन में गेहूं के आटे की चपाती लेना बन्द करके जौ-चने के आटे की चपाती लेना शुरू कर दें। इसका अनुपात है 10 किलो चना व 2 किलो जौ। इन्हें मिलाकर पिसवा लें और इसी आटे की चपाती खाएं। इससे सिर्फ पेट और कमर ही नहीं सारे शरीर का मोटापा कम हो जाएगा।
      सैर करें फिट रहे-
     कमर और पेट के आसपास की चर्बी को दूर करने के लिए रोजाना सुबह सैर पर जाएं और रात के खाने के बाद भी सैर करना ना भूलें। इससे पेट और कमर की अतिरिक्त कैलोरी कम करने में मदद मिलेगी। क्‍योंकि नियमित रूप से सैर पर जाने से 25 फीसदी कैलोरीज बर्न होती है। पेट जल्दी कम करना है तो तीस मिनट के वॉक सेशन रखें। स्पीड से चलें। लगातार स्पीड से ना चल सके तो बीच में इंटरवल लें। थोड़ी देर तेजी से चलें और फिर स्पीड कम कर लें।
    *प्रातः एक गिलास ठंडे पानी में 2 चम्मच शहद घोलकर पीने से भी कुछ दिनों में मोटापा कम होने लगता है। दुबले होने के लिए दूध और शुद्ध घी का सेवन करना बन्द न करें। वरना शरीर में कमजोरी, रूखापन, वातविकार, जोड़ों में दर्द, गैस ट्रबल आदि होने की शिकायतें पैदा होने लगेंगी। पेट व कमर का आकार कम करने के लिए सुबह उठने के बाद या रात को सोने से पहले नाभि के ऊपर के उदर भाग को 'बफारे की भाप' से सेंक करना चाहिए इस हेतु एक तपेली पानी में एक मुट्ठी अजवायन और एक चम्मच नमक डालकर उबलने रख दें। जब भाप उठने लगे, तब इस पर जाली या आटा छानने की छन्नी रख दें। दो छोटे नैपकिन या कपड़े ठण्डे पानी में गीले कर निचोड़ लें और तह करके एक-एक कर जाली पर रख गरम करें और पेट पर रख कर सेंकें। प्रतिदिन 10 मिनट सेंक करना पर्याप्त है। कुछ दिनो में पेट का आकार घटने लगेगा।

    *ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाली वस्तुओं से परहेज करें। शक्कर, आलू और चावल में अधिक कार्बोहाइड्रेट होता है। ये चर्बी बढ़ाते हैं।


    *तनाव मोटापे की एक बड़ी वजह है। आधुनिक समय में शायद ही कोई ऐसा हो जिसे तनाव न हो क्योंकि तनाव आज के लाइफस्टाइल की देन है। अक्सर तनाव व चिंताग्रस्त होने की वजह से लोगों को ज्यादा भूख लगती है। शरीर की चयापचय प्रक्रिया धीमी हो जाती है नतीजतन शरीर में एकत्र कैलोरी का नष्ट होना मुश्किल हो जाता है। इस वजह से मोटापा बढ़ता है।
    *ग्रीन टी जरूर पिये-
     आप चाय पीने के बहुत शौकीन हैं, तो आप दूध की चाय पीने के बजाय एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर ग्रीन टी, लेमन टी या फिर ब्लैक टी पिये।
    पेट कम करने के लिए संतुलित आहार का सेवन जरूरी है। खाने में विटामिन-सी युक्त आहार जैसे नींबू, अंगूर, बेर और संतरे को शामिल करें क्योंकि यह फैट को जल्द से जल्द बर्न करके शरीर को शेप में लाने में मदद करते हैं। साथ ही गाजर, पत्ता गोभी, ब्रोकली, सेब और तरबूज
    *केवल गेहूं के आटे की रोटी की बजाए गेहूं, सोयाबीन और चने के मिश्रित आटे की रोटी ज्यादा फायदेमंद है।
    *सप्ताह में एक दिन उपवास करें-
    यदि आप खाने-पीने के बहुत शौकीन हैं और अपनी इस आदत से भी परेशान हैं, तो इसका सबसे आसान तरीका ये है कि आप सप्ताह में कम से कम एक बार उपवास जरूर करें। आप चाहें तो सप्ताह में एक दिन तरल पदार्थों पर भी रह सकते हैं, जैसे- पानी, नींबू पानी, दूध, जूस, सूप इत्यादि या किसी दिन सिर्फ सलाद या फल भी ले सकते हैं।


    *मोटापा कम नहीं हो रहा हो तो खाने में कटी हुई हरी मिर्च या काली मिर्च को शामिल करके बढ़ते वजन पर काबू पाया जा सकता है। एक रिसर्च में पाया गया कि वजन कम करने का सबसे बेहतरीन तरीका मिर्च खाना है। मिर्च में पाए जाने वाले तत्व कैप्साइसिन से भूख कम होती है। इससे ऊर्जा की खपत भी बढ़ जाती है, जिससे वजन कंट्रोल में रहता है
    *सब्जियों और फलों में कैलोरी कम होती है, इसलिए इनका सेवन अधिक मात्रा में करें। *केला और चीकू न खाएं। इनसे मोटापा बढ़ता है। पुदीने की चाय बनाकर पीने से मोटापा कम होता है।
    खान-पान संतुलित रखें-
    यदि आप जंकफूड खूब खाते हैं या फिर आपको तला खाना बहुत पसंद है तो जनाब अब इनसे परहेज करना शुरू कर दें। खाने में खासतौर पर सामान्य आटे के बजाय जौ और चने के आटे को मिलाकर चपाती खांए, इससे आप जल्द ही स्लिम ट्रि‍म होंगे। रोजाना कुछ ग्राम बादाम खाने से कमर की साइज 24 सप्ताह में साढ़े छह इंच कम हो सकती है। तो आज से ही तय करें कि रोजाना सौ ग्राम नट्स अपनी डाइट में जरूर से शामिल करेंगे। यह कैलोरी से भरपूर होने के साथ ही फाइबर युक्त भी होते हैं। भोजन में संतुलित कैलोरीज लें। आपको दिनभर में कम से कम 2000 कैलोरी जरूर ले।
    *रोज पत्तागोभी का जूस पिएं। पत्तागोभी में चर्बी घटाने के गुण होते हैं। इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म सही रहता है।
    *सुबह उठकर शौच से निवृत्त होने के बाद निम्नलिखित आसनों का अभ्यास करें या प्रातः 2-3 किलोमीटर तक घूमने के लिए जाया करें। दोनों में से जो उपाय करने की सुविधा हो सो करें।
    भुजंगासन, शलभासन, उत्तानपादासन सर्वागासऩ, हलासन, सूर्य नमस्कार। इनमें शुरू के पाँच आसनों में 2-2 मिनट और सूर्य नमस्कार पांच बार करें तो पांच मिनट यानी कुल 15 मिनट लगेंगे।
    *पपीता नियमित रूप से खाएं। यह हर सीजन में मिल जाता है। लंबे समय तक पपीता के सेवन से कमर की अतिरिक्त चर्बी कम हो जाती है।
    *छोटी पीपल का बारीक चूर्ण पीसकर उसे कपड़े से छान लें। यह चूर्ण तीन ग्राम रोजाना सुबह के समय छाछ के साथ लेने से बाहर निकला हुआ पेट अंदर हो जाता है।
    *आंवले व हल्दी को बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को छाछ के साथ लेंं। कमर एकदम पतली हो जाएगी।
     
    *बादाम का सेवन :
    रोज बादाम का सेवन आपका वजन घटा सकता है। पुरड्यू यूनिव‌र्सिटी के शोध की मानें तो बादाम में मौजूद विटामिन ई और मोनोसैचुरेटेड फैट्स न सिर्फ शरीर में मौजूद सैचुरेटेड फैट्स को कम करने में मदद करता है बल्कि ओवर डाइटिंग से भी बचाता है। रोज हल्के भुने बादाम का सेवन बेहतरीन नाश्ता है जिसे लेने के बाद दिनभर स्नैक्स खाने का मन नहीं करता है वहीं यह शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है।
    *खाने के साथ टमाटर और प्याज का सलाद काली मिर्च व नमक डालकर खाएं। इनसे शरीर को विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन के, आयरन, पोटैशियम, लाइकोपीन और ल्यूटिन मिलेेगा। इन्हें खाने के बाद खाने से पेट जल्दी भर जाएगा और वजन नियंत्रित हो जाएगा।
    पूरी नींद ले-
    सोने संतुलित खाना और नियमित रूप से एक्सरसाइज से पेट की चर्बी कम होती है, लेकिन ऎसा तभी होता है जब आप अच्छी नींद भी ले। सोने के मामले में लापरवाही से तनाव के लिए जिम्मेदार हार्मोन्स रिलीज होते हैं और पेट पर चर्बी भी बढ़ती है। रात में 6 से 7 घंटे सोने वाले लोगों में पेट का फैट कम होता है। इससे ज्यादा या कम नींद लेने वाले लोगों को तोंद की समस्या ज्‍यादा होती है।
    *गरम पानी में नींबू का रस और शहद घोलकर रोज सुबह खाली पेट पिएं। इससे पेट सही रहेगा और मोटापा दूर होगा।
    *भोजन के अन्त में पानी पीना उचित नहीं, बल्कि एक-डेढ़ घण्टे बाद ही पानी पीना चाहिए। इससे पेट और कमर पर मोटापा कम होता है। भूख से थोड़ा कम ही खाए। इससे पाचन भी ठीक होता है और पेट बड़ा नहीं होता।
    *लौकी जूस 
        यह एक पौष्टिक सब्‍जी है। इसे पीने से पेट भर जाता है, इसमें फाइबर होता है और यह पेट को ठंडक पहुंचाती है। इसे पीने से घंटो तक पेट भरा रहता है और मोटापा भी कंट्रोल होता है।
    *धनिया जूस 
    इस जूस को पीने से किडनी सही रहती है और मोटापा भी कंट्रोल रहता है। इसे पीने से पेट देर तक भरा रहता है और यह शरीर की शुद्धी करती है।
    *लाल मिर्च और अदरक 
    ताजी अदरक को कूट कर उसमें लाल मिर्च मिला दें और इसका सेवन करें। यह दोनों मसाले मोटाप घटाने के लिये सबसे उत्‍तम उपचार हैं। यह फेफड़ों को भी साफ करते हैं और मोटापा भी घटाते हैं।

    2017-03-07

    अम्लपित्त(एसिडिटी) रोग में घरेलू,आयुर्वेदिक उपचार

       तेजी से बदल रही लाइफ स्टाइल और फास्ट फूड कल्चर ने कई रोगों को बढ़ावा दिया है। एसिडिटी उन्हीं में से एक है। देर तक भूखे रहना, फास्ट फूड खाना, अनियमित दिनचर्या एसिडिटी के कुछ प्रमुख कारण हैं। एसिडिटी बढने के कई कारण होते हैं जैसे कि समय पर भोजन न करना। अजीर्ण होने पर भी गरिष्ठ भोजन करना। ज्यादा मिर्च-मसाले वाला भोजन का सेवन करना। भोजन करने के बाद दिन में सोना। चटपटे और बाजार के चीजों का अत्यधिक सेवन अर्थात जंक फूड बहुत ज्याद खाना। पानी कम पीना। ज्यादा देर तक खाली पेट रहना। इसके अलावा अधिक समय तक मानसिक रूप से तनावग्रस्त रहने से भी एसिडिटी बढ़ती है।
       एसिडिटी रोग या अम्लपित्त से अधिकतर कई लोग परेशान होते हैं। और उन्हें यह समझ में नहीं आता है कि वे क्या करें। खाना खाने के बाद खट्टी डकार व पेट में गैस आदि बनने लगती है। एसिडिटी होने पर आप किसी भी चीज का ठीक तरह से आंनंद नहीं उठा पाते हैं। 
    अम्लपित्त (एसिडिट) का कारण
    जो लोग हमेशा विरोधी पदार्थ जैसे-दूध-मछली, घुइयां-पूड़ी, दूध-दही, खट्टा-मीठा, कड़वा-तिक्त आदि खाते रहते हैं, उनको अम्लपित्त का रोग बहुत जल्दी हो जाता है| इसके अलावा जो व्यक्ति दूषित भोजन, खट्टे पदार्थ, आमाशय में गरमी उत्पन्न करने वाले तथा पित्त को बढ़ाने वाले (प्रकुपित करने वाले) भोजन का सेवन करते हैं, उन्हें यह रोग होता है| अधिक धूम्रपान करने तथा शराब, गांजा, भांग, अफीम आदि का सेवन करने वाले लोगों को भी अम्लपित्त घेर लेता है|
    भूख न होने पर भी खाना खाते रहना
    बासी और वसायुक्त खाना खाने से
    पेशाब को देर तक रोके रखना
    चटपटे और खट्टे पदार्थों का सेवन करना
    नशीली चीजों का सेवन अधिक करना।
    अम्लपित्त/एसिडिटी के मुख्य लक्ष्ण
    भोजन का ठीक तरह से न पचना
    थकवाट होना।
    खट्टी डकारें आना
    उबकाई आना
    पेट में जलन होना
    खाना खाने का मन न होना
    खाना खाने के बाद उल्टी आना
    नीला या हरा पित्त निकलना
    जी मिचलाना
    सीने में जलन
    गले में जलन होना
    घबराहट होना
    सांस लेने में परेशानी
    जैसे प्रमुख लक्ष्ण दिखाई देते हैं।
    अम्लपित्त (एसिडिट) की पहचान
    इस रोग में भोजन ठीक से नहीं पचता| अचानक थकावट का अनुभव होता है| हर समय उबकाई आती रहती है| खट्टी डकारें आती हैं| शरीर में भारीपन मालूम पड़ता है| गले, छाती और पेट में जलन होती है| भोजन करने की बिलकुल इच्छा नहीं होती| जब पित्त बढ़ जाता है तो वह ऊपर ओर बढ़ने लगता है| उस समय पित्त की उल्टी हो जाती है| पित्त में हरा, पीला, नीला या लाल रंग का पतला पानी (पित्त) बाहर निकलता है| पित्त निकल जाने के बाद रोगी को चैन पड़ जाता है| कई बार खाली पेट भी पित्त बढ़ जाता है और उल्टी हो जाती है| इस रोग में हर समय जी मिचलाता रहता है|
    एसिडिटी निवारक घरेलू नुस्खे -
    गाजर व पेठा
    गाजर, फालसे या पेठा आदि का सेवन किसी न किसी तरह खाने से अम्लपित्त ठीक हो जाती है।
    लौंग का सेवन
    खाना खाने के बाद सुबह और शाम के समय में एक.एक लौंग का सेवन करने से एसिडिटी यानि अम्लपित्त की समस्या ठीक होती है।


    सेंधा नमक और काली मिर्च
    सेंधा नमक और काली मिर्च को बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें और सुबह और शाम आधा.आधा चम्मच इसका का सेवन करें। इस उपाय से अम्लपित्त शांत हो जाता है।
    अजवाइन
    एक नींबू के रस में पिसी हुई अजवाइन के साथ मिलाकर पानी में घोलकर पीने से अम्लपित्त शांत हो जाता है।अम्लपित्त (एसिडिट) का कारण
    जो लोग हमेशा विरोधी पदार्थ जैसे-दूध-मछली, घुइयां-पूड़ी, दूध-दही, खट्टा-मीठा, कड़वा-तिक्त आदि खाते रहते हैं, उनको अम्लपित्त का रोग बहुत जल्दी हो जाता है| इसके अलावा जो व्यक्ति दूषित भोजन, खट्टे पदार्थ, आमाशय में गरमी उत्पन्न करने वाले तथा पित्त को बढ़ाने वाले (प्रकुपित करने वाले) भोजन का सेवन करते हैं, उन्हें यह रोग होता है| अधिक धूम्रपान करने तथा शराब, गांजा, भांग, अफीम आदि का सेवन करने वाले लोगों को भी अम्लपित्त घेर लेता है|
       एसिडिटी के लक्षणों में हैं सीने और छाती में जलन। खाने के बाद या प्रायरू सीने में दर्द रहता है, मुंह में खट्टा पानी आता है। इसके अलावा गले में जलन और अपचन भी इसके लक्षणों में शामिल होता है। जहां अपचन की वजह से घबराहट होती है, खट्टी डकारें आती हैं। वहीं खट्टी डकारों के साथ गले में जलन-सी महसूस होती है। यदि आपको एसिडिटी की समस्या है, तो आप इस दौरान होने वाले असहनीय दर्द से जरूर वाकिफ होंगे और इस दर्द से छुटकारा पाने के लिए दवाओं का इस्तेमाल भी करते होंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिना दवा लिए प्राकृतिक उपचार से एसिडिटी के दर्द से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है।
    अम्लपित्त (एसिडिट) की पहचान
    इस रोग में भोजन ठीक से नहीं पचता| अचानक थकावट का अनुभव होता है| हर समय उबकाई आती रहती है| खट्टी डकारें आती हैं| शरीर में भारीपन मालूम पड़ता है| गले, छाती और पेट में जलन होती है| भोजन करने की बिलकुल इच्छा नहीं होती| जब पित्त बढ़ जाता है तो वह ऊपर ओर बढ़ने लगता है| उस समय पित्त की उल्टी हो जाती है| पित्त में हरा, पीला, नीला या लाल रंग का पतला पानी (पित्त) बाहर निकलता है| पित्त निकल जाने के बाद रोगी को चैन पड़ जाता है| कई बार खाली पेट भी पित्त बढ़ जाता है और उल्टी हो जाती है| इस रोग में हर समय जी मिचलाता रहता है|
    अम्लपित्त (एसिडिट) के घरेलु नुस्खे इस प्रकार हैं:
    धनिया, जीरा और गुनगुना पानी:
    धनिया और जीरे का समभाग पीसकर चूर्ण बना लें| उसमें से आधा-आधा चम्मच चूर्ण दिन में चार बार गुनगुने पानी के साथ लें|

    आंवला:
    एक चम्मच आंवले का चूर्ण लेने से पेट में पित्त नहीं बनता|
    इमली:
    इमली के शरबत में शक्कर डालकर पिने से पित्त शान्त हो जाता है|
     

    पुदीना, कालीमिर्च, नमक, धनिया और जीरा:

    यदि गरमी में पित्त बढ़ जाए तो पुदीने के रस में जरा-सी कालीमिर्च, भुने हुए जीरे का चूर्ण, नमक तथा धनिया का चूर्ण मिलाकर सेवन करें|
    शहद, हरड़ और गुनगुना पानी:

    एक चम्मच शहद में एक चुटकी हरड़ का चूर्ण मिलाकर चाट लें| ऊपर से गुनगुना पानी पिएं|
    करौंदा, शहद और इलायची:

    दो चम्मच करौंदे के रस में एक चम्मच शहद और एक लाल इलायची का चूर्ण मिलाकर सेवन करें|
    सोंठ, धनिया और पानी:

    सोंठ तथा धनिया 25-25 ग्राम लेकर पीस लें| इसकी तीन खुराक बनाएं| दिन में तीनों खुराक का पानी में काढ़ा बनाकर सेवन करें|
    अदरक और सूखा धनिया:

    अदरक एक छोटी गांठ और एक चम्मच सूखा धनिया लेकर चटनी बनाएं| सुबह-शाम इस चटनी का सेवन करने से पित्त शान्त हो जाता है|

    यवक्षार और शहद:

    1 ग्राम यवक्षार को शहद में मिलाकर तीन खुराक के रूप में सुबह, दोपहर और शाम को चाटें|

    मूली और शक्कर:

    मूली के दो चम्मच रस में शक्कर मिलाकर पीने से खट्टी डकारें आनी बंद हो जाती हैं|

    गिलोय:

    गिलोय के चूर्ण को चक्कर के साथ खाने से पित्त कम हो जाता है|

    चना साग और पानी:

    चने का साग पानी में भिगो दें| फिर थोड़ी देर बाद पानी सहित भाग को चबा जाएं|
    गिलोय:
    गिलोय के चूर्ण को चक्कर के साथ खाने से पित्त कम हो जाता है|
    मुलेठी
    मुलेठी का चूर्ण से बना काढ़ा पीने से अम्लपित्त शांत हो जाता है।
    नारियल पानी
    कच्चा नरियल का पानी पीते रहने से भी अम्लपित्त शांत हो जाता है।
    मूली का रस
    मिश्री को मूली के रस के साथ मिलाकर पीने से कुछ ही दिनों में अम्लपित्त रोग की समस्या दूर हो जाती है।
    आलू का प्रयोग
    उबला या सिका हुआ आलू नियमित खाते रहने से थोड़े ही दिनों में आपकी अम्लपित्त की समस्या दूर हो जाएगी।


    करौंदा, शहद और इलायची:

    दो चम्मच करौंदे के रस में एक चम्मच शहद और एक लाल इलायची का चूर्ण मिलाकर सेवन करें|
    यवक्षार और शहद:
    1 ग्राम यवक्षार को शहद में मिलाकर तीन खुराक के रूप में सुबह, दोपहर और शाम को चाटें|
    धनिया, जीरा और गुनगुना पानी:
    धनिया और जीरे का समभाग पीसकर चूर्ण बना लें| उसमें से आधा-आधा चम्मच चूर्ण दिन में चार बार गुनगुने पानी के साथ लें|
    पपीते का सेवन
    पपीते के रस का सेवन रोज करें। क्योंकि यह अम्लपित्त को दबा देता है। जिससे अम्लपित्त नहीं बनता है।
    अनार और अदरक
    पांच ग्राम अनार का रस और पांच ग्राम अदरक के रस को बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से एसिडिटी खत्म होती है।
    शहद, हरड़ और गुनगुना पानी:
    एक चम्मच शहद में एक चुटकी हरड़ का चूर्ण मिलाकर चाट लें| ऊपर से गुनगुना पानी पिएं|
    नींबू का प्रयोग
    गुन गुने पानी में एक नींबू निचोड़ करए खाना खाने के एक घंटे के बाद पीने से अम्लपपित्त ठीक हो जाता है।
    सब्जियां और दाल
    मूंग की दाल, चावल, परवल, घिया, हरा धनिया और टिंडे का सेवन किसी न किसी रूप में करते रहें।
     
    नीबू और पानी:
    आधे नीबू का रस एक गिलास पानी में मिलाकर पीने से पित्त में काफी आराम मिलता है|
    कालीमिर्च और देशी घी:
    *शीतपित की खराबी में 3 ग्राम कालीमिर्च के चूर्ण में दो चम्मच देशी घी मिलाकर सेवन करें|
    अदरक और सूखा धनिया:
    अदरक एक छोटी गांठ और एक चम्मच सूखा धनिया लेकर चटनी बनाएं| सुबह-शाम इस चटनी का सेवन करने से पित्त शान्त हो जाता है|
    *नीम की छाल का चूर्ण या रात में भीगाकर रखी छाल का पानी छानकर पीना रोग को शांत करता है।
    अम्लपित्त रोग में किन चीजों से परहेज करना चाहिए-
    इस रोग में कफ-पित्त नाशक पदार्थ तथा उबला पानी बहुत फायदेमंद है| परन्तु मट्ठे का सेवन न करें| पुरानी मूंग, पुराना जौ, परवल, अनार, आंवला, नारियल का पानी, धान की खील, पेठे का मुरब्बा, आंवले का मुरब्बा, पपीता आदि अम्लपित्त में लाभकारी हैं| बेसन तथा मैदे की बनी चीजें नहीं खानी चाहिए| गोभी, मूली, आलू, भसींड, टमाटर, बैंगन आदि सब्जियों का प्रयोग भी न करें| बासी, रखा हुआ भोजन, मिर्च-मसालेदार भोजन तथा देर से पचने वाली चीजें जैसे-खोया, रबड़ी, घुइयां, मिठाइयां, दालमोठ, पकौड़ी आदि का सेवन नहीं करना चाहिए|
    तेज मिर्च मसाले वाली चीजों को ना खाएं।
    शराब से दूर रहें।
    अधिक गर्म काफी व चाय ना पीएं।
    मांसाहार का सेवन ना करें
    दही व छाछ का भी सेवन नहीं करना चाहिए।
    उडद व तुवर की दाल भी ना खाएं।

    अफीम के गुण ,फायदे,उपयोग ::Opium use,benefits

       

      अफीम च्यवन ऋषि के समय से ही औषधीय उपयोग में आती रही है। यह आयुर्वेदिक व यूनानी दोनो चिकित्सा पद्धतियों में वात रोगों, अतिसार, अनिद्रा व वाजीकरण चिकित्सा में आशुफलदायी रुप में प्रयोग होती रही है और तो और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ऐलौपेथ ने भी इस औषधि के गुणों का प्रभाव अंगीकार करते हुये इसके मार्फीन,कोडीन,थांबेन, नार्कोटीन,पापावटीन तथा एल्कोलाइड्स को अपने फार्मोकोपिया में शामिल किया है।
       इसे आफूक, अहिफेन (संस्कृत), अफीम (हिन्दी), आफिम (बंगला), अफू (मराठी), अफीण (गुजराती), अफमून (अरबी) तथा पेपेवर सोम्नीफेरम (लैटिन) कहते हैं।
    इसका पौधा 3-4 फुट ऊँचा, हरे रेशों से युक्त और चिकने काण्डवाला होता है। इसके पत्ते लम्बे, डंठलरहित, गुड़हल के पत्तों से कुछ मिलते-जुलते, आगे के हिस्से में कटे होते हैं। फूल सफेद रंग के और कटोरीनुमा बड़े सुहावने होते हैं। इसके फल छोटे और अनार की आकृति के होते हैं। जड़ साधारणतया छोटी होती है|
    सायंकाल इस पौधे (खसखस) के कच्चे फलों के चारों ओर चीरा लगा देने पर दूसरे दिन प्रात: वहाँ दूध के समान निर्यास पाया जाता है। उसे खुरचकर सुखा लेने पर अफीम बन जाती है। सूखे फल को ‘डोडा’ (पोश्त) कहा जाता है। इसके बीज राई की तरह काले या सफेद रंग के होते हैं, जिन्हें ‘पोस्तादाना’ (खसखस) कहते हैं। पोश्ता लगभग 14 प्रकार का होता है।इसमें मार्फिन, नर्कोटीन, कोडीन, एपोमॉर्फीन, आपिओनियन, पापावरीन आदि क्षारतत्त्व (एल्केलाइड) तथा लेक्टिक एसिड, राल, ग्लूकोज, चर्बी व हल्के पीले रंग का निर्गन्ध तेल होता है
    अफीम के गुण : यह स्वाद में कड़वी, कसैली, पचने पर कटु तथा गुण में रूखी होती है। इसका मुख्य प्रभाव नाड़ी-संस्थान पर मदकारी (नशा लानेवाला) होता है। यह नींद लानेवाली, वेदना-रोधक, श्वास-केन्द्र की अवसादक, शुक्रस्तम्भक और धातुओं को सुखानेवाली है।
    प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में अफीम से बनने वाले अनेकों योगों का वर्णन है
    1.कामिनी विद्रावण रस( भैषज्य रत्नावली) 
    , 2- ग्रहणी कपाट रस(रसयोग सागर),
    3- वेदनान्तक रस (रस तरंगिणी)---
    रस तरंगिणी शुद्ध अफ़ीम3 ग्राम, कपूर तीन ग्राम, खुरासानी यवानी 6 ग्राम, रस सिन्दूर 6 ग्राम, लेकर सबको खरल में डालकर भाँग की पत्तियों के स्वरस में खरल कर दें ।जब गोली बनाने योग्य हो जाऐं तो 250 मिलीग्राम की गोलियाँ बना लें इसमें से 2 गोली को गर्म पानी या दूध से देने पर अनेकों प्रकार के दर्दों में राहत मिल जाती है।
    4- निद्रोदय रस (योग रत्नाकर)-
    शुद्ध अफीम6 ग्राम,वंशलोचन 6 ग्राम, रस सिन्दूर 6 ग्राम व आमलकी चूर्ण- 12 ग्राम लेकर सबको लेकर भाँग की पत्तियों के स्वरस में 3 बार भावनाऐं देते हुय खरल करे और जब गोलियां बनाने योग्य हो जाऐ तब 250 मिली ग्राम की गोलियाँ बनाकर सुखा लें। एक गोली दूध से लेने पर ही नींद आ जाती है।
    5- शंखोदर रस (योग रत्नाकर)-
    शंख भस्म 40 ग्राम, शुद्ध अफीम- 10 ग्राम, जायफल व सुहागे का फूला 10 -10 ग्राम लेकर सबको मिला लें और जल के साथ मर्दन करके 125 मिली ग्राम की गोलियाँ बना कर रख लें इसमें से 1-1 गोली मख्खन व गर्म जल के साथ लेने से अतिसार, संग्रहणी, पेट दर्द, आदि में पूर्ण लाभ होता है।
    6- समीर गज केशरी रस(रसराज सुन्दर)-
    शुद्ध अफीम , शुद्ध कुचला, काली मिर्च चूर्ण, सभी 50-50 ग्राम लेकर सबको खरल करके 125 -125 मिली ग्राम की गोलियाँ बना कर रख लें इसमें से 1 गोली खाकर ऊपर से पान खाना चाहिये यह बात व्याधि नाशक, विसूचिका , अरूचि, अपस्मार, आदि पाचन तंत्र की व्याधियों को हर लेने वाली महौषधि है।
    7- महावातराज रस(सिद्ध भैषज्य संग्रह-
    इस महौषधि को निर्मित करने के लिए धतूरे के बीज, शुद्ध पारा, शुद्ध गंधक, लौह भस्म, सभी 20- 20 ग्राम लेकर ,अभ्रक भस्म,लौंग, जावित्री,जायफल,इलायची बीज,भीमसेनी कपूर, काली मिर्च, चन्द्रोदय या रस सिन्दूर प्रत्येक 10 -10 ग्राम लेकर अफीम 120 ग्राम लें।पहले पारे व गंधक की कज्जली बना कर लौह भस्म, अभ्रक भस्म, और चन्द्रोदय मिला कर खूब मर्दन करें फिर शेष औषधियों का चूर्ण मिलाक र बाद में अफीम मिलाऐं इसे धतूरे के रस में एक दिन खरल कर 125 मिली ग्राम की गोलियाँ बना ले।आधे से एक गोली जल अथवा रोग के अनुसार अनुपान से दिन में दो बार देनी चाहियें ।न्यूमोनिया, श्वांस, अतिसार , खाँसी, मधुमेह व गृधशी या सायटिका में इस औषधि के परिणाम आशुफलप्रद हैं।
    विभिन्न शूल : 
    अफीम को तेल या घी में मिलाकर वेदना-स्थानों पर (बवासीर के मस्से, नेत्र, पसली के दर्द) तथा शिर:शूल में भी सिर पर लेप करें। लेकिन कान के दर्द में तेल ही डालें, घृत नहीं।
     
    नजला : 
    एक तोला खसखस घी के साथ कड़ाही में भूनें। फिर चीनी मिला हलुआ बनाकर लें। प्रात:काल इसके सेवन से पुराना सिरदर्द और प्रतिश्याय (नजला) दूर हो जाते हैं।
    दस्त : 
    चार रत्ती अफीम एक छुहारे के अन्दर रख उसे आग में भुने। फिर उसे पीसकर, मूँग के बराबर 1-1 रत्ती की गोली बना लें। इसके सेवन से मरोड़ देकर आँवसहित होनेवाले दस्तों में लाभ होता है। बच्चों को आधी मात्रा देनी चाहिए। पोस्त (फल के छिलके या ‘पोस्त-डोंडा’) उबालकर पीने से अतिसार और पतले दस्त रुक जाते हैं। अधिक मात्रा में यह मादक हो जाता है।
    मोतियाबिन्द : 
    चौथाई रत्ती अफीम और 3 रत्ती केसर की गोली बनाकर बादाम के हलुए के साथ खाने से पुराना सिरदर्द, बार-बार होनेवाला नजला और जुकाम रुक जाता है। आँखों में मोतियाबिन्द उतर रहा हो, तो वह भी इससे रुक जाता है। दो सप्ताह इसके सेवन के बाद केवल बादाम और केसर का सेवन करें, अफीम निकाल दें। आवश्यकता होने पर पुन: इसे लें। यह अनुभूत प्रयोग है।
    चोट, मोच या सूजन -
    अफीम 2 रत्ती और एलुआ 1 तोला अदरख के रस में पीसकर धीमी अग्नि पर पका लेप बना लें। कपड़े पर रखकर किसी प्रकार की चोट, मोच या सूजन पर लगा दें तो निश्चित आराम होगा।
    सिर दर्द :
     आधा ग्राम अफीम और 1 ग्राम जायफल को दूध में मलकर, इस तैयार लेप को मस्तक पर लगाएं या फिर आधा ग्राम अफीम को 2 लौंग के चूर्ण के साथ हल्का गर्म करके खोपड़ी (सिर) पर लेप लगाने से सर्दी और बादी से उत्पन्न सिर दर्द दूर होगा।
    गर्भस्राव (गर्भ से रक्त के बहने पर) : 
    40 मिलीग्राम अफीम पिण्ड को खजूर के साथ मिलाकर दिन में गर्भस्राव से पीड़ित स्त्री को 3 बार खिलाएं। इससे गर्भस्राव शीघ्र रुकेगा।
    स्वरदोष (गला खराब होने पर) : 
    अजवायन और अफीम के डोडे समान मात्रा में पानी में उबाकर छान लें और फिर छाने हुए पानी से गरारे करने से स्वरदोष में आराम होगा।
    कमर का दर्दं : 
    एक चम्मच पोस्त के दानों को समान मात्रा में मिश्री के साथ पीसकर एक कप दूध में मिलाकर दिन में 3 बार सेवन करने से लाभ होगा।
    अतिसार (दस्त) में :
     
    आम की गिरी का चूर्ण 2 चम्मच, अफीम लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग मिलाकर एक चौथाई चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार सेवन कराएं।
    अफीम और केसर को समान मात्रा में लेकर पीस लें तथा लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग की गोलियां बना लें। इसे शहद के साथ देने से अतिसार में लाभ होता है।
    अफीम को सेंककर खिलाने से दस्त में आराम मिलता है।
    लगभग 4 से 9 ग्राम तक पोस्त के डोडे पीसकर पिलाने से दस्त मिटता है।
    आमातिसार (आंवयुक्त पेचिश) :
    भुनी हुई लहसुन की कली में लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग अफीम मिलाकर खाने से इस रोग में राहत में मिलती है।
    5 ग्राम अफीम, मोचरस, बेलगिरी, इन्द्रजौ, गुलधावा, आम की गुठली की गिरी को 10-10 ग्राम लें। प्रत्येक औषधि को अलग-अलग पीसकर चूर्ण बना लें। फिर सबको एकत्रकर उसमें अफीम मिला लें। लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग चूर्ण को लस्सी के साथ सेवन करने से पेचिश के रोगी का रोग ठीक हो जाता है।
    उल्टी :
    कपूर, नौसादर और अफीम बराबर मात्रा में मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां शहद के साथ बना लें। दिन में 3 बार 1-1 गोली पानी के साथ लें।
    अफीम, नौसादर और कपूर को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर रख लें। फिर इसके अंदर पानी डालकर मूंग के बराबर की छोटी-छोटी गोलियां बना लें। इस 1-1 गोली को ठंडे पानी के साथ खाने से उल्टी और उबकाई आना बंद हो जाती है।
    अनिद्रा (नींद का कम आना) :
     गुड़ और पीपलामूल का चूर्ण बराबर की मात्रा में मिला लें। इसकी 1 चम्मच की मात्रा में अफीम की लगभग 1 ग्राम का चौथाई भाग मात्रा मिलाकर रात्रि में भोजन के बाद सेवन करने से लाभ होता है।
    नपुंसकता लाने वाला : 
    कुछ लोग भ्रमवश अफीम का प्रयोग संभोग व सेक्स की ताकत बढ़ाने के लिए करते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि अफीम खाने से कुछ दिन व्यक्ति नामर्द हो जाता है और उसकी संभोग (सेक्स) शक्ति क्षीण हो जाती है।
    मस्तक पीड़ा : 
    1 ग्राम अफीम और 2 लौंग को पीसकर लेप करने से बादी और सर्दी के कारण उत्पन्न मस्तक पीड़ा मिटती है।
     
    आंखों के रोग -
    आंख के दर्द और आंख के दूसरे रोगों में इसका लेप बहुत लाभकारी है।
    नकसीर (नाक से खून आने पर) : अफीम और कुंदरू गोंद दोनों बराबर मात्रा में पानी के साथ पीसकर सूंघने से नकसीर बंद होती है।
    केश (बाल) -
     अफीम के बीजों को दूध में पीसकर सिर पर लगाने से इसमें होने वाली फोड़े फुन्सियां एवं रूसी साफ हो जाती है।
    दंतशूल (दांत का दर्द) -
    लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग अफीम और लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग नौसादर, दोनों को दांतों में रखने से दाड़ की पीड़ा मिटती है और दांत के छेद में रखने से दांतों का दर्द मिटता है।
    अफीम और नौसादर बराबर की मात्रा में मिलाकर कीड़ा लगे दांत के छेद में दबाकर रखने से दांत दर्द में राहत मिलती है।
    प्रतिषेध : 
    अफीम के अधिक प्रयोग से तन्द्रा, निद्रा, हृदय का अवसाद होने लगे तो तुरन्त राई-नमक मिलाकर दें तथा वमन करा दें। अरहर की कच्ची दाल पानी में पीसकर या हींग पानी में घोलकर पिला देने से भी तुरन्त आराम पहुँचता है।
    सावधानी-
    यह मादक द्रव्य है। अधिक प्रयोग से विषाक्त प्रभाव सम्भव है। अत: अत्यावश्यक होने पर ही इसका प्रयोग करें। फिर भी कभी अधिक मात्रा में नहीं। अतिआवश्यक होने पर ही बच्चों, वृद्धों तथा सुकुमार स्त्रियों को बड़ी सावधानी एवं कम मात्रा में ही इसे दिया जाय।
    यूनानी मतानुसार : 
    अफीम मस्तिष्क की शक्ति को उत्तेजित करती है, शरीर की शक्ति व गर्मी को बढ़ाने से आनन्द और संतोष की अनुभूति प्रदान करती है। आदत पड़ने पर निर्भरता बढ़ाना, शारीरिक अंगों की पीड़ा दूर करने की प्रकृति, कामोत्तेजक, स्तम्भन शक्ति बढ़ाने वाली, आधासीसी, कमर दर्द, जोड़ों के दर्द, बहुमूत्र, मधुमेह, श्वास के रोग, अतिसार तथा खूनी दस्त में गुणकारी है।

    2017-03-05

    शहद के घरेलू,आयुर्वेदिक प्रयोग,उपयोग उपचार ;; Honey's Ayurvedic Usage benefits,Treatment



       शहद या मधु हमेशा से रसोई में इस्तेमाल होने वाला एक स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ रहा है, साथ ही सदियों से एक महत्वपूर्ण औषधि के रूप में भी उसका इस्तेमाल होता है। दुनिया भर में हमारे पूर्वज शहद के कई लाभों से अच्छी तरह परिचित थे। एक औषधि के रूप में उसका इस्तेमाल सबसे पहले सुमेरी मिट्टी के टेबलेटों में पाया गया है जो करीब 4000 साल पुराने हैं। लगभग 30 फीसदी सुमेरी चिकित्सा में शहद का इस्तेमाल होता था। भारत में शहद सिद्ध और आयुर्वेद चिकित्सा का एक महत्वपूर्ण अंग है जो चिकित्सा की पारंपरिक पद्धतियां हैं। प्राचीन मिस्र में इसे त्वचा और आंखों की बीमारियों में इस्तेमाल किया जाता था और जख्मों तथा जलने के दागों पर प्राकृतिक बैंडेज के रूप में लगाया जाता था।
       आयुर्वेद में ऐसी मान्यता है कि अलग-अलग स्थानों पर लगने वाले छत्तों के शहद के गुण वृक्षों के आधार पर होते हैं। जैसे नीम पर लगे शहद का उपयोग आँखों के लिए, जामुन का मधुमेह, सहजने का हृदय, वात तथा रक्तचाप के लिए बेहतर होता है। इसके अलावा भी शहद का सेवन कई रोगों में उपयोगी है।
    हम सभी जानते हैं कि दूध पीने से सेहत में कितना निखार आता है लेकिन गर्म दूध पीने से हमें क्‍या लाभ पहुंचता है, ये बहुत कम लोगों को पता है। और इस गर्म दूध में अगर शहद मिल जाए तो यह एक औषधि से कम नही है।
       शरीर को स्वस्थ, निरोग और उर्जावान बनाए रखने के लिए शहद का रोजाना सेवन बहुत अच्छा माना जाता है। आयुर्वेद में इसे अमृत माना गया है। यूं तो सभी मौसमों में शहद का सेवन लाभकारी है, लेकिन सर्दियों में तो शहद का प्रयोग विशेष लाभकारी होता है क्योंकि शरीर को इससे ऊर्जा प्राप्त होती है।
      शहद बहुत ही लाभकारी प्राकृतिक औषधी है। इसके सेवन से शरीर निरोगी रहता है। रोजाना दो चम्मच शहद सेवन करने के अनेकों लाभ हैं। इसे खाने से पाचन शक्ति मजबूत होती है। इसके सेवन से खुब भूख लगती है। बुढ़ापे में इसके सेवन से जवानी सा सामथ्र्य व शक्ति मिलती है। शहद कई तरह के विटामिन्स से भरपूर है। शहद में विटामिन ए, बी, सी, पाए जाते हैं।
       इसके अलावा आयरन, कैल्शियम, सोडियम फास्फोरस, आयोडीन भी पाए जाते हैं। इसीलिए प्रतिदिन शहद का सेवन करने से शरीर में शक्ति और ताजगी बनी रहती है। शहद रोजाना खाने से सेहत बनती है और शरीर मोटा होता है। शरीर की दुर्बलता दूर करने के लिए रात को बिना चीनी के एक गिलास दूध में शहद डालकर पीने से शरीर सुडौल, पुष्ट व बलशाली बनता है।शहद का सेवन रोज करने से शरीर फुर्तीला और उर्जावान बनता है।
      शरीर पर पड़े खरोंचों को जल्दी ठीक करने के लिए शहद मलना चाहिए। यह खरोचों के निशान भी हल्के कर देता है।
      पके आम के रस में शहद मिलाकर देने से पीलिया में लाभ होता है।
    अदरक के रस में या अडूसे के काढ़े में शहद मिलाकर देने से खाँसी में आराम मिलता है।
    बच्चों को गहरी नींद सोने में मदद करता है शहद
    खांसी की वजह से बच्चे बे-वजह परेशान रहते हैं और वे रात को ठीक तरह से सो भी नहीं पाते हैं। ऐसे में रात को सोने से पहले बच्चों को शहद देना चाहिए। इस उपाय से बच्चे को खांसी नहीं होगी और वह गहरी नींद ले सकता है।
    कीमोथैरेपी
    शहद सेवन श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या को कम होने से रोकाता है। प्रतिदिन दो चम्मच शहद पीने से यह कीमोथैरेपी में असरदायक होता है।
    शहद : रक्तचाप में फायदेमंद
    शहद का नियमित सेवन सर्कुलेटरी सिस्टम और रक्त की केमिस्ट्री में संतुलन को पाने में न सिर्फ आपकी मदद करता है, बल्कि आपको ऊर्जावान और फुर्तीला भी बनाए रखता है। *अगर आपको निम्न रक्तचाप की शिकायत है और अगर आप नीचे बैठे-बैठे अचानक उठने की कोशिश करते हैं तो आपको चक्कर आ जाते हैं। निम्न रक्तचाप का मतलब दिमाग में ऑक्सीजन का कम मात्रा में पहुंचना है। इसी तरह से अगर आप अपना सिर नीचे करते हैं और आपको चक्कर आते हैं तो इसका मतलब है कि आपको उच्च रक्तचाप की समस्या है। या तो उच्च रक्तचाप की वजह से या फिर ऑक्सीजन की कमी की वजह से आपको चक्कर आते हैं। 
    *जिन बच्चों को शकर का सेवन मना है, उन्हें शकर के स्थान पर शहद दिया जा सकता है।
       रोजान एक चम्मच शहद से दिमागी कमजोरियां दूर होती है।उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में शहद कारगर है।रक्त को साफ करने यानी रक्त शुद्धि के लिए भी शहद का सेवन करना चाहिए। शहद से मांसपेशियां बलवती होती हैं। दिल को मजबूत करने, और हृदय संबंधी रोगों से बचने के लिए प्रतिदिन शहद खाना अच्छा रहता है। शहद, मलाई और बेसन का उबटन लगाने से चेहरे पर चमक आ जाती है।
    एक छोटा चम्मच शहद मे एक बादाम घिस कर मिला लें और रोज छोटे बच्चों को चटा देने से वे मजबूत कांतिवान मोटे हो जाते है ।
      बच्चों को खांसी होने पर एक चम्मच शहद मे एक चुटकी हल्दी मिलाकर सोते समय व सुबह खाली पेट चटा दे दो तीन दिनों मे खांसी गायब हो जाएगी ।
    ऊर्जा प्रदान करता है- शहद प्राकृतिक रूप से कार्बोहाइड्रेड का स्रोत होता है और इसमें फ्रूकटोस होता है जो ग्लूकोज़ की तुलना में कम स्वीटनर होता है। इसलिए किसी भी वर्कआउट के बाद शहद खाने से तुरन्त ऊर्जा मिल जाती है।
    योगाभ्यासियों के लिए शहद
      जो लोग योग का अभ्यास करते हैं उनके लिए शहद बेहद फायदेमंद होता है। शहद के सेवन से शरीर के रसायन यानि कैमिकल संतुलित रहता है। सुबह के समय में योग शुरू करने से पहले गुनगुने पानी में शहद मिलाकर पीने से शरीर के सारे अंग सक्रिय हो जाते हैं।शहद एक्सरसाइज करने वालों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। ये रक्त में शर्करा की मात्रा को बैलेंस रखता है। मांसपेशियों की शक्ति पुनःलौटाता है। ग्लाइकोजेन की क्षति पूर्ती करता है। तुरंत शक्ति देता है।
       आयुर्वेद में नपुंसकता और बांझपन की समस्याओं के लिए शहद एक दवा के रूप में लेने की सलाह दी जाती है। हल्‍के गुनगुने दूध के साथ शहद पीने से प्रजनन क्षमता का स्‍तर शून्‍य से 60 मिलियन शुक्राणुओं की संख्‍या तब बढ़ जाती है। स्‍वाभाविक रूप से दूध एक हर्बल उपचार है जो कि शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने में मदद करता है।
       खाँसी के लिए औषधि के रूप में काम करता है- कभी-कभी सोने के समय खाँसी होने लगती है उस वक्त खाँसी के तकलीफ से राहत दिलाने में शहद बहुत असरदार रूप में काम करता है। क्योंकि यह जीवाणु को मारने में सक्षम होता है।
    शहद मे अदरक का रस और एक चुटकी दालचीनी पावडर मिलाकर चाटने से जोड़ों मे आराम मिलता है । खांसी होने पर भी इस प्रयोग को आजमाए सौ प्रतिशत आराम मिल जाएगा ।
       घाव के लिए औषधि के रूप में काम करता है- शहद में जो एन्टीबैक्टिरीअल, एन्टी-फंगल, और एन्टी-ऑक्सिडेंट गुण होता है वह किसी भी तरह के घाव को ठीक करने में मदद करता है।
    10 ग्राम शहद प्रतिदिन खाने से दिल स्वस्थ रहता है।
    शहद शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। शहद और दूध को एक साथ पीने से आपकी त्वचा में रौनक आती है।
       सर्दियों में यदि ठंड की वजह से सिर में दर्द हो रहा हो तो शहद में दालचीनी का पाउडर मिलाकर उसका लेप सिर पर लगाएं।
      गठिया के दर्द से राहत पाने के लिए शहद और दालचीनी को बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करें।
    तनाव कम करने के लिए रोज एक चम्मच शहद में दालचीनी मिलाकर सेवन करें।
    गर्म पानी में दालचीनी और शहद को मिलाकर पीने से सर्दी और जुकाम ठीक होता है।
    भोजन से अरुचि होने पर एक चम्मच खट्टे अनार का रस और एक बड़ा चम्मच शहद और सेंधा नमक मिलाकर खिलाने से भोजन मे रुचि पैदा हो जाती है ।
    * एक चुटकी छोटी हरड़ का पावडर और एक चम्मच शहद मिलाकर खाने से अम्ल पित्त शांत हो जाता है ।
    * आधा नींबू का रस एक चम्मच शहद मिलाकर चाट लें अम्ल पित्त मे आराम हो जाएगा *
    शहद और दो बूंद नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे की कांति लौट आती है।
    * एक चम्मच प्याज का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर बालों पर लगाने से बाल झड़ना बंद हो जाते हैं ।
    * रोजाना शहद खाने से मांसपेशियां मजबूत होती हैं। शहद का सेवन करने से पाचन तंत्र मजबूत होता है।
    शहद का नियमित सेवन खोई हुई शक्ति वापस लौटाता है, और शरीर को सुन्दर, स्फूर्तिवान,बलवान, दीर्घजीवी और सुडौल बनाता है
    *शहद रोज खाने से आंखों की ज्योति बढ़ती है। आंखें स्वच्छ व चमकीली बनती है।
    * ठंडे पानी में शहद मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से त्वचा का रंग साफ होता है तथा चेहरे पर लालिमा एवं कांति भी आ जाती है।
    शहद कामशक्ति वर्धक माना गया है, इसका सेवन पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन और महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन बनाने के प्रक्रिया को तेज करता है.
    * त्वचा सम्बन्धी रोग हो या कहीं जल-कट गया हो तो शहद लगाएं। जादू सा असर दिखाई देगा|
    *कब्जियत में टमाटर या संतरे के रस में एक चम्मच शहद डालकर सेवन करें, लाभ होगा।
    अनिद्रा (insomnia) की बीमारी से राहत दिलाने में मदद करता है- आदिकाल से अनिंदा के बीमारी के घरेलु इलाज के रूप में शहद का इस्तेमाल किया जाता रहा है। रात को सोने से पहले एक गिलास दूध में एक छोटा चम्मच शहद डालकर पीने से अच्छी नींद आती है।
    • जले हुए घाव के जलन से राहत दिलाता है- शहद का एन्टी-इन्फ्लैमटोरी (anti-inflammatory) और एन्टी-बैक्टिरीअल गुण जलन के दर्द से जल्दी राहत दिलाने में बहुत मदद करता है साथ ही घाव को भी ठीक करने में मदद करता है। शहद एक हाइपरस्मोटिक एजेंट है इसलिए इसे घाव पर लगाने से यह घाव का तरल निकाल देता है, उस स्थान से बैक्टीरिया नष्ट करके शीघ्र भरपाई करता है .
    घाव पर शहद सीधे लगाने की बजाय इसे पट्टी या रुई पर लगाकर फिर घाव पर लगायें.
    * नींबू के पत्तों का रस और शहद समान मात्रा मे लेकर खिलाने से पेट के कीड़े मर जाते है 
    *त्रिफला एक छोटी चम्मच और एक चम्मच शहद मिलाकर रात्री के समय खाने के बाद चाट लिया करें और ऊपर से दूध पी लें , पेट के सभी रोगों से छुटकारा मिल जाएगा ।
    * बीस ग्राम शहद दस ग्राम गाय का मक्खन मिलाकर दिन मे दो बार खाने से टी बी रोग ठीक हो जाता है ।
    * अकरकरा का चूर्ण एक ग्राम दस ग्राम शहद मिलाकर चाटने से हिचकी दूर हो जाती है ।सांस लेने की परेशानी, कफ की समस्या आदि में शहद का सेवन बेहद उपयोगी है।
    शहद खाने से हृदय रोग और कैंसर रोग कभी नहीं होता है।
    चीनी की तुलना में शहद में 20 प्रतिशत कम कैलोरी होती है। यह मोटापा भी कम करता है।
    शहद त्वचा की नमी को बरकरार रखता है जिस वजह से चेहरा मुलायम बना रहता है।
    शहद को चेहरे पर लगाने से यह त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटा देता है और त्वचा का फिर से टाइट करने लगता है जिस वजह से झुर्रियां जल्दी से नहीं पड़ती हैं।
    सूर्य की किरणों से त्वचा पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है जिस वजह से इंसान कम उम्र में बूढ़ा लगने लगता है ऐसे में शहद के इस्तेमाल से आप इन दिक्कतों से बच सकते हो।
    होठों पर शहद लगाने से होंठ नरम और चिकने बनते हैं और होंठ फटने की परेशानी भी दूर होती है।
    शहद का नियमित रूप में सेवन करने से हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है जिस से शरीर में खून की कमी दूर होती है।
      शहद कभी खराब नहीं होता है। आप इसे बंद करके लंबे समय तक रख सकते हो। गहरे रंग के शहद में अधिक मात्रा में एंटीआक्सीडेंट होता है।
    शरीर में मौजूद हानिकारक तत्वों को शहद बाहर निकालता है। इसी वजह से त्वचा में प्राकृतिक चमक वापस आती है और वह लंबे समय तक रहती है।
    सुंदर और बेदाग त्वचा के लिए शहद को नींबू पानी में मिलाकर सेवन करें। एैसा करने से आपकी फिगर भी आकर्षक बनती है।
      शहद में कई तरह के विटामिन्स मौजूद होते हैं और शहद में सबसे अधिक विटामिन सी की मात्रा पाई जाती है जो शरीर को कई तरह के रोगों से बचाने के काम आती है। इसलिए शहद को रोग प्रतिरोधक कहा गया है।
    शहद को खाने से बढ़ा हुआ कालेस्ट्राल कम होता है।
    शहद सूजन, पाचन की समस्या और कब्ज जैसी परेशानियों को दूर करता है। यह प्रोबायोटिक होता है जो पाचन को ठीक रखता है। शहद का सेवन करने से एलर्जी का खतरा कम होता है।
      शहद को गुनगुने पानी को मिला कर पीने से खून में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता है और आयरन की कमी भी पूरी होती है।
      शहद में एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं। जिसकी वजह से यह घाव का उपचार करने में फायदेमंद होता है।
    • कैंसर से लड़ने में मदद करता है- शहद का एन्टी-ऑक्सिडेंट गुण कैंसर संबंधी लक्षणों को रोकने में मदद करता है और कैंसर से लड़ने में सहायता करता है।
    • हृदयरोग से दूर रखता है- शहद में फ्लेवोनॉयड और एन्टी-ऑक्सिडेंट गुण होता है जो हृदय के बीमारी से लड़ने में मदद करता है। और दिल को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
    सावधानी :-
    अधिक गर्म पानी, गर्म दूध, अधिक धूप में बच्चों को शहद का प्रयोग हानिकारक साबित होता है। साथ ही घी की समान मात्रा प्रयोग करने पर यह विष की भाँति कार्य करने लगता है। इसलिए इन स्थितियों में इसका प्रयोग सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए।
    चाय और कॉफी में कभी नैचुरल स्वीटनर के रूप में शहद का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
    • मछली और मांस के व्यंजन में शहद का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

    2017-03-04

    सालम पंजा के गुण औषधीय उपयोग ::Medicinal uses of salam panja


    सालमपंजा' एक बहुत ही गुणकारी, बलवीर्यवर्द्धक, पौष्टिक और यौन शक्ति को बढ़ाकर नपुंसकता नष्ट करने वाली वनौषधि है।
    यह बल बढ़ाने वाला, शीतवीर्य, भारी, स्निग्ध, तृप्तिदायक और मांस की वृद्धि करने वाला होता है। यह वात-पित्त का शमन करने वाला, रस में मधुर होता है।
    विभिन्न भाषाओं में नाम : ,
    संस्कृत- मुंजातक। हिन्दी- सालमपंजा। मराठी- सालम। गुजराती- सालम। तेलुगू- गोरू चेट्टु। इंग्लिश- सालेप। लैटिन- आर्किस लेटिफोलिया।
    परिचय : 
    सालम हिमालय और तिब्बत में 8 से 12 हजार फीट की ऊंचाई पर पैदा होता है। भारत में इसकी आवक ज्यादातर ईरान और अफगानिस्तान से होती है। सालमपंजा का उपयोग शारीरिक, बलवीर्य की वृद्धि के लिए, वाजीकारक नुस्खों में दीर्घकाल से होता आ रहा है।
    यौन दौर्बल्य : 
    सालमपंजा 100 ग्राम, बादाम की मिंगी 200 ग्राम, दोनों को खूब बारीक पीसकर मिला लें। इसका 10 ग्राम चूर्ण प्रतिदिन कुनकुने मीठे दूध के साथ प्रातः खाली पेट और रात को सोने से पहले सेवन करने से.शरीर की कमजोरी और दुबलापन दूर होता है, यौनशक्ति में खूब वृद्धि होती है और धातु पुष्ट एवं गाढ़ी होती है। यह प्रयोग महिलाओं के लिए भी पुरुषों के समान ही लाभदायक, पौष्टिक और शक्तिप्रद है, अतः महिलाओं के
    लिए भी सेवन योग्य है।
    वात प्रकोप : 
    सालमपंजा और पीपल (पिप्पली) दोनों का महीन चूर्ण मिलाकर आधा-आधा चम्मच चूर्ण सुबह-शाम बकरी के कुनकुने मीठे दूध के साथ सेवन करने से कफ व श्वास का प्रकोप शांत होता है। सांस फूलना, शरीर की कमजोरी, हाथ-पैर का दर्द, गैस और वात प्रकोप आदि ठीक होते हैं।
    रतिवल्लभ चूर्ण : 
    सालमपंजा, बहमन सफेद, बहमन लाल, सफेद मूसली, काली मूसली, बड़ा गोखरू सब 50-50 ग्राम। छोटी इलायची के दाने, गिलोय सत्व, दालचीनी और गावजवां के फूल-सब 25-25 ग्राम। मिश्री 125 ग्राम। सबको अलग-अलग खूब कूट-पीसकर महीन चूर्ण करके मिला लें और शीशी में भर लें।
    *सालम पंजा व विदारीकन्द को ब्राबर मात्रा मे पीस कर 5 ग्राम चूर्ण में पिसी मिसरी व घी मिला लें। इस चूर्ण को खाने के बाद इसके ऊपर से मीठा ग्रम दूध पीने से वृद्ध पुरुष की भी संभोग करने की क्षमता वापस लौट आती है।
    इस चूर्ण को 1-1 चम्मच सुबह व रात को कुनकुने मीठे दूध के साथ दो माह तक सेवन करने से यौन दौर्बल्य और यौनांग की शिथिलता एवं नपुंसकता दूर होती है। शरीर पुष्ट और बलवान बनता है।
    विदार्यादि चूर्ण : 
    विन्दारीकन्द, सालमपंजा, असगन्ध, सफेद मूसली, बड़ा गोखरू, अकरकरा सब 50-50 ग्राम खूब महीन चूर्ण करके मिला लें और शीशी में भर लें।
    इस चूर्ण को 1-1 चम्मच सुबह व रात को कुनकुने मीठे दूध के साथ सेवन करने से यौन शक्ति और स्तंभनशक्ति बढ़ती है। यह योग बना-बनाया इसी नाम से बाजार में मिलता है। .
    शुक्रमेह :
     सालम पंजा, सफेद मूसली एवं काली मूसली तीनों 100-100 ग्राम लेकर कूट-पीसकर खूब बारीक चूर्ण करके मिला लें और शीशी में भर लें। प्रतिदिन आधा-आधा चम्मच सुबह और रात को सोने से पहले कुनकुने मीठे दूध.के साथ सेवन करने से शुक्रमेह, स्वप्नदोष, शीघ्रपतन, कामोत्तजना की कमी आदि दूर होकर यौनशक्ति की वृद्धि होती है।प्रदर रोग : सलमपंजा, शतावरी, सफेद मूसली और असगन्ध सबका 50-50 ग्राम चूर्ण लेकर मिला लें। इस चूर्ण को एक-एक चम्मच सुबह व रात को कुनकुने मीठे दूध के साथ सेवन करने से पुराना श्वेतप्रदर और इसके कारण होने वाला कमर दर्द दूर होकर शरीर पुष्ट और निरोगी होता है।
    जीर्ण अतिसार : 
    सालमपंजा का खूब महीन चूर्ण 1-1 चम्मच सुबह, दोपहर और शाम को छाछ के साथ सेवन करने से पुराना अतिसार रोग ठीक होता है। एक माह तक भोजन में सिर्फ दही-चावल का ही सेवन करना चाहिए। इस प्रयोग कोलाभ होने तक जारी रखने से आमवात, पुरानी पेचिश और संग्रहणी रोग में भी लाभ होता है।

    2017-03-03

    कड़ी पत्ता के स्वास्थ्य लाभ और उपयोग :: Health benefits and uses of curry leaves


    कड़ी पत्ता: प्रायः भारत के हर भाग और हर घर में पाया जाने वाला पौधा है। इसे मीठी नीम भी कहा जाता है। इसे सभी प्रकार के भोजन में तड़के के रूप में खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है। कड़ी पत्‍ता या फिर जिसको हम मीठी नीम के नाम से भी जानते हैं, भोजन में डालने वाली सबसे अहम सामग्री मानी जाती है। यह खास तौर पर साउथ इंडिया में काफी पसंद किया जाता है। अक्‍सर लोग इसे अपनी सब्‍जियों और दाल में पड़ा देख, हाथों से उठा कर दूर कर देते हैं। पर आपको ऐसा नहीं करना चाहिये। कड़ी पत्‍ते में कई मेडिकल प्रोपर्टी छुपी हुई हैं। यह हमारे भोजन को आसानी से हजम करता है और अगर इसे मठ्ठे में हींग और कुडी़ पत्‍ते को मिला कर पीया जाए तो भोजन आसानी से हजम हो जाता है।लेकिन कन्नड़ भाषा में इसे काला नीम कहा जाता है। कड़ी पत्ता ना केवल खाने का जयका बढ़ता है, बल्कि सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है। इससे मधुमेह, लिवर जैसी बड़ी बीमारिया भी दूर होने लगती है। आप शायद नहीं जानते होंगे लेकिन जो लोग अपना वजन कम करना चाहते है, उनके लिए भी यह फायदेमंद है। दक्षिण भारत और पश्चिमी-तट के राज्यों में कई तरह के व्यंजन में इसकी पत्तियों का उपयोग बहुतायत किया जाता है। इसका उपयोग आयुर्वेद में जड़ी-बूटी के रूप में किया जाता है। इसमें कई तरह के औषधीय गुण जैसे ऐंटी-डायबिटीक, ऐंटीऑक्सीडेंट, ऐंटीमाइक्रोबियल पाये जाते है। कड़ी पत्ते के सेवन से दस्त में फायदा मिलता है, इससे पाचन तंत्र सुधरता है आदि। मधुमेह के रोगियों के लिए तो यह बहुत ही ज्यादा फायदेमंद है। कढ़ी पत्ता लम्बे और स्वस्थ बालों के लिए भी बहुत लाभप्रद माना जाता है।
    कड़ी पत्ता या मीठा नीम सब्जी , दाल आदि में खुशबू और स्वाद के लिए तड़के में डाला जाता है। इसकी चटनी भी बनाई जाती है। कढ़ी पत्ता सिर्फ खुशबू और स्वाद ही नहीं देता बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी कढ़ी पत्ता बहुत लाभदायक होता है। इसकी ताजा पत्तियों में एक अलग ही खूशबू होती है। यह खुशबू फ्रिज में या बाहर रखने पर नहीं मिल पाती इसलिए ताजा तोड़ी हुई पत्ती ही उपयोग में लेनी चाहिए।
    *करी पत्ते का इस्तेमाल मुख्य रूप से किसी भी व्यंजन का स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए किया जाता है. करी पत्ते में मौजूद पोषक तत्व कई लिहाज से स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं. शुगर को कंट्रोल में रखकर यह वजन भी बढ़ने नहीं देता. इसे त्वचा और बालों के लिए भी अच्छा माना जाता है. करी पत्ते के कुछ फायदे तो ऐसे होते हैं जिन पर आप भरोसा भी नहीं कर पाएंगे:
    *कढ़ी पत्ता के फूल सफ़ेद रंग के छोटे और ख़ुशबूदार होते हैं। इसमें काले रंग के छोटे फल
    लगते है। कढ़ी पत्ते के बीज ज़हरीले होते हैं।
    बालों की जड़ों को मज़बूत बनायें ज़रूरत से ज्यादा केमिकल का इस्तेमाल और प्रदूषण की वजह से बालों को काफी नुक्सान होता है। करी पत्ते में वो सारे पोषण तत्व पाये जाते हैं, जो बालों को स्वस्थ रखते हैं। करी पत्तों को पीस कर इसका लेप बना लें फिर इसे सीधे बालों की जड़ों में लगाएं या आप करी पत्ते को खा भी सकते हैं, अगर आपको इसके कड़वे स्वाद से कोई परेशानी नहीं है। इससे आपके बाल काले, लंबे और घने हो जाएंगें साथी ही बालों की जड़ें भी मज़बूत होंगी।
    *कुछ लोग कढ़ी पत्ता सब्जी से बाहर निकाल कर रख देते है जबकि इसे खा लेना चाहिए। कढ़ी पत्ता बहुत पोष्टिक होता है। करी पत्ता से प्रोटीन , कैल्शियम , मैग्नेशियम , फॉस्फोरस , आयरन , कॉपर आदि मिलते है। इसके अलावा इससे विटामिन C , विटामिन A ,कड़ी पत्ता खाने से त्वचा, बाल और स्वास्थ्य को कितने फायदे मिलते हैं! कड़ी पत्ता ब्लड-शुगर लेवल को कम करने में सहायता करता है जो मधुमेह रोगियों के लिए भी बहुत फायदेमंद साबित होता है। यहाँ तक लीवर को स्वस्थ रखने के लिए कड़ी पत्ता का जूस पिया जाता है,जो लीवर के लिए लाभकारी होता है। यह तो कड़ी पत्ते के फायदों के बारे में बता रहे हैं लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि कड़ी पत्ता से वज़न को भी आसानी से घटाया जा सकता है। इन पत्तों के सेवन से आपके शरीर का जमा फैट निकल जाता है और इसमें जो फाइबर होता है वह शरीर से विषाक्त पदार्थों या टॉक्सिन को निकाल देता है। इसका रेचक (laxative) गुण खाने को जल्दी हजम करवाता है,
    *एनीमिया के खतरे को कम करता है:
     करी पत्ते में भरपूर मात्रा में आयरन और फॉलिक एसिड होता है. आयरन जहां शरीर के लिए एक प्रमुख पोषक तत्व है वहीं फॉलिक एसिड इसके अवशोषण में सहायक होता है. इस वजह से यह एनीमिया से बचाव करने में कारगर है.लीवर शरीर का बहुत महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। कई प्रकार के काम करता है। स्वस्थ रहने के लिए लीवर का निरंतर बिना रुके सही तरीके से काम करना जरुरी होता है। करी पत्ता लीवर को सशक्त बनाता है । यह लीवर को बेक्टिरिया तथा वायरल इन्फेक्शन से बचाता है। इसके अलावा यह फ्री रेडिकल्स , हेपेटाइटिस , सिरोसिस आदि कई प्रकार की बीमारियों से लीवर को बचाता है।
    कड़ी पत्ते से घटाए वजन
    यह जानकर आपको आश्चर्य होगा की कड़ी पत्ते से आप आपका वजन भी कम कर सकते है| दरहसल इसके पत्तों के सेवन से आपके शरीर का जमा फैट बाहर निकल जाता है और इसमें मौजूद फाइबर शरीर से विषाक्त पदार्थों या टॉक्सिन को निकाल देता है। इसके इस्तेमाल से आपके शरीर की जमी हुई चर्बी कम होने लगेगी, और वजन भी आसानी से कम हो जायेगा|
    आँखें
    करी पत्ता में पर्याप्त मात्रा में विटामिन A होता है। विटामिन A आँखों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कमी से रतोंधी
    नामक बीमारी हो सकती है , आँखों की रौशनी कम हो सकती है और भी बहुत सी परेशानियां हो सकती है।
    गर्मी में ठंडक पहुँचाये
    गर्मियों में अक्सर पेट में जलन और दर्द होने की समस्या होने लगती है, तो उसके लिए आपको कुछ नहीं करना है बस जो छाछ की लस्सी आप पीते है, उसमे आपको कड़ी पत्ते डालकर सेवन करना है, इससे आपको पेट में जल्द ही ठंडक महसूस होने लगेगी।
    *दिल से जुड़ी समस्याओं में: करी पत्ता कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने में मददगार होता है. यह ब्लड में गुड कोलेस्ट्रोल की मात्रा बढ़ाकर दिल से जुड़ी बीमारियों से बचाने में भी मदद करता है.
    बालों को ग्रोथ के लिए: 
    करी पत्ते में मौजूद पोषक तत्व बालों को जल्दी सफेद नहीं होने देते और बालों का झड़ना भी कम करते हैं. यह डैंड्रफ जैसी समस्याओं में भी कारगर होता है.
    तनाव दूर करने को भोजन में शामिल करे कड़ी पत्ते
    भोजन में इसको नियमित रूप से शामिल करेंगे उतना आपका तनाव और दूर होगा, सिर्फ यही नहीं इससे आपके बालो को काला होने में भी मदद मिलेगी।
    एंटीऑक्सीडेंट
    करी पत्ता में कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट तथा फेनोल्स पाए जाते है जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाते है। करी पत्ता के विशेष तत्व
    ल्यूकेमिया , प्रोस्टेट कैंसर तथा कोलोरेक्टल कैंसर आदि से बचाव करने में सक्षम पाए गए है। कई प्रकार के विटामिन की मौजूदगी भी
    ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस तथा फ्री रेडिकल्स के नुकसान से बचाते है।
    कड़ी पत्ते से मिलने वाले अन्य लाभ इन्हे भी जाने
    कड़ी पत्ते से बाल झड़ने की समस्या भी कम होती है।
    कड़ी पत्ते आँखों की ज्योति बढ़ाने के लिए फायदेमंद होता है।
    इसका सेवन डायरिया, डिसेंट्री, पाइल्स, पाचन आदि में असरदारी है।
    कड़ी पत्ते के पेस्ट को जले और कटे स्थान पर लगाने से लाभ मिलता है।
    आँखों की बीमारियों में लाभकारी है कड़ी के पत्ते, यह नेत्र ज्योति को भी बढाता है।
    कड़ी पत्ते को आवले के तेल में मिलाने से यह बालो में टॉनिक का काम करता है।
    यदि जहरीले कीड़े ने काट लिया हो तो इसके फलों के रस को निम्बू के रस के साथ मिलाकर लगाने से लाभ मिलता है।
    मतली और अपच जैसी समस्‍या के लिए कड़ी पत्‍ते का उपयोग बहुत लाभकारी होता है। इसको तैयार करने के लिए कड़ी पत्‍ते का रस ले कर उसमें नींबू निचोडें और उसमें थोड़ा सी चीनी मिलाकर प्रयोग करें।
    अगर आप अपने बढ़ते हुए वजन से परेशान हैं और कोई उपाय नहीं सूझ रहा है। तो रोज कुछ पत्‍तियां कड़ी नीम की चबाएं। इससे आपको अवश्‍य फायदा होगा।
    कड़ी पत्‍ता हमारी आंखों की ज्‍योती बढाने में भी काफी फायदेमंद है। साथ ही यह भी माना जाता है कि यह कैटरैक्‍ट जैसी भंयकर बीमारी को भी दूर करती है।
    अगर आपके बाल झड़ रहें हों या फिर अचानक सफेद होने लग गए हों तो कड़ी पत्‍ता जरुर खाएं।
    कड़ी पत्ते से बाल झड़ने की समस्या भी कम होती है।
    कड़ी पत्ते आँखों की ज्योति बढ़ाने के लिए फायदेमंद होता है।
    इसका सेवन डायरिया, डिसेंट्री, पाइल्स, पाचन आदि में असरदार है।
    कड़ी पत्ते के पेस्ट को जले और कटे स्थान पर लगाने से लाभ मिलता है।
    आँखों की बीमारियों में लाभकारी है कड़ी के पत्ते, यह नेत्र ज्योति को भी बढाता है।
    कड़ी पत्ते को आवले के तेल में मिलाने से यह बालो में टॉनिक का काम करता है।
    इसके हरे पत्ते में शरीर के लिए फायदेमंद तत्व आयरन, कॉपर, जिंक, केल्शियम, विटामिन ए और बी, अमीनो एसिड, फोलिक एसिड आदि मौजूद होते है।
    कड़ी पत्ते का सेवन कोलेस्ट्रोल को कम करने में मददगार है।
    यह इन्फेक्शन से लड़ने में मदद करता है।
    कड़ी पत्ते किडनी के लिए लाभकारी होते है।
    यदि जहरीले कीड़े ने काट लिया हो तो इसके फलों के रस को निम्बू के रस के साथ मिलाकर लगाने से लाभ मिलता है।
    यह बालो को काला करने के साथ ही सफ़ेद होने से और झड़ने से भी रोकता है।
    इसके पत्तों का पेस्ट बनाकर बालों में लगाने से जुओं से छुटकारा मिलता है।
    वजन कम करने के लिए रोजाना कुछ मीठी नीम की पत्तियाँ चबाना फायदेमंद होता है।
    कड़ी पत्ते में एंटी ओक्सीडेंट होते है जो और केंसर कोशिकाओं को बढ़ने नहीं देते है।
    कड़ी पत्ते पेन्क्रीआज़ के बीटा सेल्स को एक्टिवेट करके मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद करते है।