2016-09-16

जीरा खाएं मोटापा घटाएं 15 दिन में 5 kg वजन कम करें | Cumin Benefits for ...

जीरा खाएं 
मोटापा घटाएं 
15 दिन में
 5 kg वजन कम करें

जीरा खाएं मोटापा घटाएं 15 दिन में 5 kg वजन कम करें | Cumin Benefits for Quick Weight Loss
जीरे का पानी कैसे वजन कम करता है जबरदस्त उपाय
वजन कम करना एक समस्या की तरह है जीरे का रोज सेवन करने से घटता है वजन यह फेट के अवशोषण को बाधित करता है जीरे के सेवन से पाचन तंत्र होता है दरुस्त |
जीरा खाएं वजन घटाएं :-



जीरा एक ऐसा मसाला है जो खाने में बेहतरीन स्वाद और खुशबू देता है इसकी उपयोगिता केवल खाने तक ही सिमित नहीं है बल्कि इसके कई स्वास्थ्य लाभ भी है कई रोगों में दवा के रूप में इसका इस्तेमाल किया जाता है जीरे में मैंगनीज, लोह तत्व ,मैग्नीशियम ,कैलशियम , जिनक और फास्फोरस भरपूर मात्रा में है इसे मेक्सिको ,इंडिया और अमेरिका में बहुत इस्तेमाल किया जाता है इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कई यह बड़ी तेजी से वजन कम करता है
वजन कम करने के साथ ही यह बहुत सारी अन्य बीमारियों से भी बचाता है जैसे कोलोस्ट्रोल कम करता है - हर्टअटैक से बचाता है - स्मरण शक्ति बढ़ाता है - खून कई कमी दूर करता है - पाचन तंत्र ठीक कर गैस व् ऐठन ठीक करता है For More Details Visit https://www.healthtreatment.in

जीरा कैसे 15 दिन में 5 किलो वजन कम करता है
जीरा पानी बनाने कई विधि :-
दो बड़े चम्मच जीरा एक गिलास पानी में भिगो कर रात भर के लिए रख दे
सुबह उसे उबाल ले और गर्म चाय कई तरह घूंट-घूंट भर के पिए बचा हुआ जीरा भी चबा ले इसके रोजाना सुबह खाली पेट सेवन से शरीर के किसी भी कोने से अनावशयक चर्बी बाहर निकल जाती है
दही के साथ जीरा पाउडर :-
जीरे को आप वजन कम करने के लिए किसी भी तरह से खा सकते है
50 ग्राम दही में एक चम्मच जीरा पाउडर मिलाकर हर रोज खाएं
जीरे को इस्तेमाल करने के और तरिके :-
नींबू , अदरक और जीरा :-
अदरक और नींबू दोनों जीरे के वजन कम करने की क्षमता को बढ़ाती है इसके लिए गाजर और थोड़ी सब्जियों को उबाल ले इसमें अदरक को कद्दूकस कर ले और ऊपर से जीरा और नींबू का रस डाले और इसे रात को खाएं
चर्बी को कम करता है :-



जीरे में मौजूद पौषक तत्व और एंटी आक्सिडेंट चयापचय को बढ़ाता है जिससे पेट की चर्बी कम करने में मदद मिलती है
जीरा पाचन किर्या को बढ़ाता और गैस से बचाता है जीरा खाने को पाचन में मदद करता है जिससे गैस कम बनती है ऐठन और पेट फूलना ख़राब पाचन की समस्या है जीरा गैस को बनने से रोकता है जिससे पेट में अच्छे से खाना पच जाता है
हार्ट अटैक से बचाता है जीरा :-
ख़राब कोलेस्ट्रॉल और फेट को शरीर में बनने से रोकता है जीरा इसलिए यह वजन कम करने में मदद करता है साथ ही हार्ट अटैक से भी बचाता है जीरा
वेजिटेबल सूप बनाए और इसमें एक चम्मच जीरा डाले
3 ग्राम जीरा पाउडर को पानी में मिला इसमें कुछ बुँदे शहद कई डाले और  पी जाये
ब्राउन राईस बनाए और इसमें जीरा डाले - यह सिर्फ आपका स्वाद नहीं बढ़ाएगा बल्कि आपका वजन भी कम करेगा


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2016-09-11

काजू खाने के फायदे ,लाभ



सूखे मेवों में काजू का नाम पहले स्‍थान पर आता है। काजू भले ही थोड़ा महंगा हो लेकिन इसे नियमित रूप से खाने के कई स्‍वास्‍थ्‍य वर्धक फायदे हैं। काजू खाने से अनेक प्रकार की बीमारियां कंट्रोल में आती हैं तथा त्‍वचा भी खूबसूरत बनती है। काजू को हद से ज्‍यादा भी नहीं खाना चाहिये। काजू से शरीर का मेटाबॉलिज्‍़म ठीक होता है तथा दिल की बीमारी भी दूर रहती है।स्वादिष्ट और पौष्टिक से भरपूर काजू को ड्रायफ्रूट्स का राजा माना जाता है। महंगे होने के बावजूद यदि आप इसे नियमित रूप से खाते हैं तो इसके अनेक फायदे हैं। थकान को दूर करने और त्वचा की खूबसूरती बढ़ाने में सहायक काजू के बारे कहा जाता है कि सौ दवाइयां खाने की बजाए यदि आप काजू खाते हैं तो आपके शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद रहेगा।
मैगनीशियम, पोटैशियम, कॉपर, आयरन, मैगनीज, जिंक और सीलियम से भरपूर काजू खाने से शरीर को उर्जा मिलती है और मेटाबॉलिज्म ठीक होता है तथा दिल की बीमारी भी दूर रहती है। काजू का सूखे मेवे के रूप में सेवन किया जाता है। काजू से अनेक तरह की मिठाइयां व अन्य व्यंजन तैयार किए जाते है। सब्जियों में काजू डालकर उन्हें अधिक स्वादिष्ट बनाया जाता है।
* काजू को पानी के साथ पीसकर नमक के साथ चटनी बनाकर सेवन करने से अजीर्ण और अफारा की समस्या दूर होती है।
*प्रोटीन से भरपूर काजू में किशमिश मिलाकर खाने से शारीरिक दुर्बलता दूर होती है।
* काजू में मेगनीशियम होता है इसलिए इसका सेवन करने से हड्डियों को मजबूती मिलती है।
* काजू खाने से शरीर में वसा की कमी पूरी होती है। शरीर में शक्ति, स्फूर्ति और उत्साह विकसित होता है।
एनीमिया दूर करे
काजू में मौजूद कॉपर शरीर में एंजाइम गतिविधि, हार्मोन का उत्पादन, मस्तिष्क का कार्य आदि संभालने में मदद करता है। कॉपर रेड ब्‍लड सेल्‍स को बढ़ा कर एनीमिया जैसी बीमारी को दूर करता है।
* नियमित रूप से काजू के सेवन से दांतों को मजबूती मिलती है और मसूड़े भी स्वस्थ्य रहते हैं।
वजन संतुलित रहे



*काजू में अधिक ऊर्जा होती है और इसमें dietry fibre की मात्रा भी अधिक होती है इसलिए इसको खाने से शरीर का वजन संतुलित रहता है।
*काजू के सेवन से शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ती है क्योंकि काजू में लौह तत्व अधिक मात्रा में होता है।
*एनीमिया के रोगी को काजू का सेवन कराने से बहुत लाभ होता है। काजू खून की कमी को दूर करता है।
*डॉक्टर के अनुसार काजू खाने से पाचनशक्ति तीव्र होती है और अधिक भूख भी लगती है
डायबटीज़ कम करे
मधुमेह यानी डायबटीज़ को कम करने के लिए काजू काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। एक नए अध्ययन में खुलासा हुआ है कि काजू इंसुलिन की मात्रा बढ़ाता है, जिससे मधुमेह नियंत्रित रहता है।
* काजू को पानी में डालकर रखें। तीस मिनट बाद उसी पानी में पीसकर सेवन करने से शारीरिक निर्बलता दूर होती है।
शरीर बनाए मजबूत
काजू में मेगनीशियम पाया जाता है जो कि हड्डी में मजबूती लाता है। हमारे शरीर को रोजाना 300-750 mg मैगनीशियम की आवश्‍यकता पड़ती है।* कुष्ट रोग के कारण उत्पन्न त्वचा की शून्यता काजू की तेल की मालिश से दूर होती है।
* काजू का तेल शरीर पर मलने से रुखापन दूर होता है और त्वचा अधिक कोमल व मुलायम होती है।

रंगत निखाारे
त्वचा के लिए भी काजू काजू को दूध में मिलाकर रगड़ने से त्वचा सुंदर और मुलायम बनती है। इससे रंगत भी निखरती है। काजू का नियमित सेवन आपके बालों को झड़ने से रोकते हैं।




* काजू में मौजूद मोनो सैचुरेटड फैट दिल की बीमारियों के खतरे को कम करता है।
कैंसर से बचाए
काजू में एंटी ओक्सिडेंट जैसे विटामिन ई और सेलनियम भी होते हैं जो कि कैंसर से बचाव करता है। इसके साथ ही इसमें जिंक होता है जो कि संक्रमण से लड़ने में मदद करता है।
*. काजू के सेवन से वीर्य वृद्धि होने से कामशक्ति विकसित होती है।
* काजू पेट के कीड़े और अर्श की समस्या को नष्ट करता है।
दिल के लिये फायदेमंद




*काजू में मोनो सैचुरेटड फैट होता है जो की दिल को स्वस्थ रखता है और दिल की बीमारियों के खतरे को कम करता है। इसमें बिल्‍कुल भी कोलेस्‍ट्रॉल नहीं होता है।
बी पी रखे कंट्रोल में
इन मेवों में सोडियम बहुत ही कम और पोटैशियम हाई मात्रा में होता है, जिससे ब्‍लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है।
काजू खाने के नुकसान
* अधिक मात्रा में काजू के सेवन से नाक से खून निकलने की संभावना बढ़ जाती है।
*काजू के फल के छिलकों का तेल अधिक दाहक और त्वचा पर जख्म बना देता है।
*गर्मी के महीने में काजू का सेवन नहीं करना चाहिए। गर्मी के दिनो में काजू के सेवन से शरीर का तापमान बढ़ जाता है।
*अधिक मात्रा में काजू खाने से दस्त की विकृति हो सकती है। दस्त के रोगी को काजू का सेवन नहीं करना चाहिए।

2016-09-07

भूख कम करने के उपचार

  


अक्सर जहां लोग भूख बढ़ाने के तरीके ढ़ूंढ़ते रहते हैं वही कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो भूख को कंट्रोल में रखने के उपाय भी ढूंढते रहते हैं. भूख लगना एक नेचुरल क्रिया है. वह कभी भी लग सकती है. डाइयेटिंग हर कोई नहीं कर सकता. डाइटिंग के शुरुआत में समय-समय पर भूख लगती रहती है. अगर आप रोजाना अपनी डायट से ज्यादा भोजन ले रहें हैं तो इसका मतलब है कि आपके खानपान में किसी प्रकार की समस्‍या है. अधिक भूख लगने की वजह से आप कुछ न कुछ खा लेते हैं और इसका असर आपके स्‍वास्‍थ्‍य पर पड़ता है. जिसके कारण चिड़चिड़ापन तथा क्रोध आदि होने लगता है.
 स्वादिष्ट नाश्ता करने के आधे घंटे बाद आपको दोबारा भूख लगती है। आप चिप्स खा लेते हैं। फिर कुछ ही मिनटों में फिर से भूख लगती है तो फ्रिज में रखा केक खा लेते हैं। लेकिन ये क्या, आपको फिर कुछ देर में भूख लगने लगी।
ऐसा आपके साथ पहली बार नहीं हो रहा है। ये अब हर बार की बात हो चुकी है। आपको फिक्र होती है कि ऐसे में आपका वजन बढ़ जाएगा और होता भी यही है। आप ये सोचते हैं – आपकी इस बार-बार लगने वाली भूख का कारण क्या हो सकता है? और इससे ज्यादा जरूरी बात ये कि आप किस तरह से इस भूख पर नियंत्रण कर सकते हैं।
शरीर को उचित पोषण ना मिलने के कारण भूख अधिक लगने लगती है. जिससे हम समय समय पर कुछ ना कुछ खा लेते हैं जो हमारे शरीर में मोटापे को बढ़ाता है. यह मोटापा धीरे-धीरे गर्दन, हाथ और पैरों तक फैलने लगता है. जिससे शरीर पूरी तरह से चरबी युक्त हो जाता है तथा व्यक्ति को चलने फिरने या कोई कार्य करने में भी दिक्कतों के साथ-साथ कई गंभीर बीमारीयों के होने का खतरा भी अधिक बढ़ जाता है. इन समस्याओं से बचने के लिए जरुरी है की हम अपनी भूख को कंट्रोल में रखें और पोष्टिक आहार का सेवन करें.

*अगर आपने जिम में अधिक वक्त बिताया हो या अतिरिक्त मील तक दौड़े हों तो बहुत अधिक भूख लगना सामान्य है। अगर आप गर्भवती हैं तो भी जाहिर है आपकी भूख बढ़ जाएगी। इसके अलावा, जब आप किसी बीमारी से उबर रहे होते हैं तब भी आप ज्यादा खाने लगते हैं। लेकिन जरूरत से ज्यादा भूख लगना दूसरी बीमारियों का लक्षण भी हो सकता है। वैज्ञानिकों ने इस समस्या को हाइपरफेजिया या पॉलीफेजिया नाम दिया है। आइये जानते हैं हाइपरफेजिया के कारण क्या क्या हो सकते हैं।
तनाव
ध्यान दें कि जब आप तनाव में होते हैं तो क्या तभी आपको खाने की अधिक इच्छा होती है? लगातार तनाव और चिंता अत्यधिक भूख का निश्चित कारण हो सकते हैं। जब हम मस्तिष्क पर दबाव डालते हैं तो कॉर्टिकोट्रोपिन-रिलीज हार्मोन (सीआरएच) और अड्रेनालाइन का निर्माण होने लगता है जो भूख बढ़ा देता है। लेकिन अगर तनाव बना रहता है, तो अड्रेनल ग्लैंड्स हार्मोन कॉर्टिसोल रिलीज करते हैं, जो भूख बढ़ाते हैं। अगर तनाव और अधिक लंबे समय तक बना रहता है तो कॉर्टिसोल अत्यधिक भूख का बड़ा कारण बन सकता है।
आनुवांशिक समस्याएं
प्रेडर विली सिंड्रोम (पीडब्ल्यूएस) जैसी आनुवांशिक समस्याएं भी अत्यधिक भूख का कारण बन सकती है। इस बीमारी में भूख बढ़ने के साथ साथ मोटापा भी बढ़ता है, छोटा कद रह जाता है और साथ ही मानसिक मंदता के लक्षण भी सामने आते हैं। पीडब्ल्यूएस मोटापे का सबसे सामान्य आनुवांशिक रूप है, लेकिन इससे अत्यधिक भूख क्यों बढ़ती है ये अभी तक साफ नहीं हो पाया है। रिसर्चरों का कहना है कि ऐसा घ्रेलिन (ghrelin) नाम के एक हार्मोन के कारण होता है।11) क्रोमोज़ोमल एब्नॉर्मैलिटी
*क्रोमोज़ोमल एब्नॉर्मैलिटी जो कि एक और आनुवांशिक बीमारी है, भी अत्यधिक भूख का कारण हो सकती है। ये बात सभी जानते हैं कि जितनी ऊर्जा आपको प्राप्त हो रही है और जितनी आप खर्च कर रहे हो, यदि उनके बीच में असंतुलन है तो मोटापे की समस्या हो सकती है। मस्तिष्क का एक हिस्सा जिसे हाईपोथैलेमस कहते हैं, इन दो कारकों को नियंत्रित करते हैं। हाईपोथैलेमस में बहुत सारे छोटे छोटे न्यूक्लाइड होते हैं जो ऐसे हार्मोन्स का निर्माण करते हैं जो शरीर के तापमान, भूख, मूड और अन्य कार्यों को चलाते हैं। इन्हीं में से एक न्यूक्लाइड भूख पर नियंत्रण करता है। लेकिन जब इनमें समस्या होती है तो आप बहुत अधिक भूख महसूस करते हैं और ओवरइटिंग कर लेते हैं।
हाइपोग्लाइसीमिया
हाइपोग्लाइसीमिया या लो ब्लड शुगर भी एक और कारण है बहुत अधिक भूख लगने का। हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षण हैं: भूख, थकान, सिर दर्द, ठंडा पसीना, कंफ्यूजन और चक्कर आना। इसका कारण होता है जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज करना, जरूरी कार्बोहाइड्रेट न लेना और भूखा रहना। इस तरह की स्थिति में हाइपोग्लाइसीमिया कम वक्त के लिए बोता है और ब्लड शुगर का स्तर आपके कुछ खा लेने के बाद ठीक हो जाता है। लेकिन अगर आपको पहले से ही लीवर की बीमारी है तो हाइपोग्लाइसीमिया अधिक गंभीर रूप धारण कर लेता है और आपको हर वक्त भूख लगती रहती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बॉडी आमतौर पर लीवर में शुगर का निर्माण करती है ताकि ब्लड शुगर का स्तर न गिरे। पर अगर आपको लीवर की बीमारी होगी तो वो शुगर का निर्माण नहीं कर पाएगा।
दही का सेवन भूख कम करने के लिए
गर्मियों में दही या मट्ठा का सेवन अधिक मात्रा में करें इससे आपको बार-बार भूख नहीं लगेगी. दिन में कम से कम 4 बार इसका सेवन करें. इसके अलावा सुबह खाली पेट गरम पानी में 2 चम्मच शहद डालकर पीने से भी भूख कम लगती है.
गाजर का सेवन भूख कम करने के लिए
प्रतिदिन खाने से पहले गाजर खाए. खाना खाने से पहले गाजर के सेवन से भूख कम लगती है. जिसके कारण वजन कम करने में सहायता मिलती है.
लौकी का जूस भूक कम करने के लिए
लौकी में अनेक प्रकार के पौष्टिक गुण पाये जाते हैं. इसमें फाइबर होता है और यह पेट को ठंडक पहुंचाती है. इसे पीने से घंटो तक पेट भरा रहता है और भूक कम लगती है.
खाने के लिए छोटी प्लेट का इस्तेमाल भूख कम करने के लिए
भूख कभी भी लग सकती है. इस समस्या से निपटने के लिए आप खाने के लिए हमेशा छोटी प्लेट का ही इस्तेमाल करें. इससे आपको जितना प्लेट में दिखेगा उतना ही भोजन करेंगे.

मेंटल हेल्थ डिसॉर्डर
मेंटल हेल्थ डिसॉर्डर जैसे बायपोलर डिसॉर्डर और मस्तिष्क में केमिकल के असंतुलन से जुड़ा हुआ मैनिक डिप्रेशन, हार्मोनल डेफिशियेंसी और जेनेटिक कारणों से खाना खाने की इच्छा बहुत अधिक बढ़ सकती है। बायपोलर डिसॉर्डर में बहुत सारे मूड स्विंग्स, बहुत अधिक एनर्जी लेवल और इंपल्सिवनेस की समस्या होती है। वहीं दूसरी तरफ डिप्रेशन में अधिक समय तक उदासी, कम एनर्जी लेवल और ध्यान केंद्रित करने में मुश्किल होती है।
टाइप टू डाइबिटीज़
टाइप टू डाइबिटीज़ से भी आपको लगातार भूख महसूस हो सकती है। हालांकि ये समझना आसान है कि लो ब्लड शुगर होने पर अधिक भूख लगती है लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है कि हाई ब्लड शुगर होने पर भी आपको भूख लगे? यही है डाइबिटीज़। हाई ब्लड शुगर भूख का कारण बनती है, भले ही आपके शरीर को खाने की जरूरत न हो। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आपके शरीर का हर सेल ब्लड से शुगर लेने के लिए इंसुलिन पर निर्भर करता है। अगर इंसुलिन पर्याप्त मात्रा में न हो या ठीक प्रकार से काम न कर रहा हो तो शुगर ब्लड में मिल जाती है लेकिन वो सेल्स में नहीं जा पाती, जहां उसकी जरूरत होती है। इस कारण से सेल्स मस्तिष्क में ये संदेश भेजते हैं कि उन्हें अधिक खाने की जरूरत है। और इसी वजब से आपको हर वक्त भूख लगती है
खाने से पहले पानी भूक कम करने के लिए
पानी हमारे स्वास्थ के लिए बहुत उपयोगी होता है. स्वस्थ शरीर के लिए पानी को अधिक मात्रा में पीना आवशयक होता है. जब भी आप खाना खाते हैं तो उससे पहले दो गिलास पानी पिए. ऐसा करने से भोजन के समय हम खाना कम खाते हैं. जिससे शरीर स्वस्थ रहता है.
सुबह का नाश्ता जरूर करें भूक कम करने के लिए
सुबह का नाश्ता अवश्य करना चाहिए. सुबह के नाश्ता करने के बाद हमें भूख कम लगती है. इसलिए सुबह के नास्ता के समय चना, मूंग और सोयाबीन को अधिक से अधिक खाये. अंकुरित अनाज में आपको भरपूर मात्रा में पौष्टिक तत्व आपको मिलेगें. जिसके कारण भूख नहीं लगेगी.
इटिंग डिसॉर्डर
इटिंग डिसॉर्डर जैसे कि बुलिमिया, अत्यधिक भूख के कारण बनते हैं। बुलिमिया में अनियंत्रित ढंग से खाने की समस्या होती है। आमतौर पर जितना खाते हैं उससे कम। बहुत अधिक खाने की ये अवस्था आगे जाकर उल्टी की शिकायत में भी बदल सकती है। एक और इटिंग डिसॉर्डर लगातार खाते रहने का भी है। ये बचपन से ही शुरू हो जाता है जब बच्चा उदास होकर खाने का रुख करता है।
पेट के कीड़े
कई बार अत्यधिक भूख आंत के कीड़ों की ओर संकेत भी करती है। ये कीड़े, खासतौर पर टेपवॉर्म आपके अंदर लंबे समय तक रह सकता है और आपको इसका पता भी नहीं चलेगा। ये परजीवी आपके शरीर से सभी आवश्यक पोषण ले लेते हैं और आपको फैट व शुगर दे देते हैं। आपको बहुत अधिक भूख लगनी शुरू हो जाती है और अधिक खाने लगते हैं।
पीएमएस
पीएमएस यानी प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम का एक सामान्य लक्षण खाने की इच्छा होना है। ये सिंड्रोम मेंस्ट्रुअल साइकिल के दूसरे चरण में होता है और एक दो दिन तक रहता है। इसमें भूख लगने के साथ साथ पेट में मरोड़, सिर दर्द और कब्ज जैसी समस्याएं भी हो जाती हैं।
हाइपरथाइरॉइडिज्म
अत्यधिक भूख की समस्या हाइपरथाइरॉइडिज्म और ग्रेव्स डिज़ीज़ (इम्यून से जुड़ा विकार) जो थायरॉइड को प्रभावित करती है, से भी जुड़ी हुई है। थायरॉइड मेटाबॉलिक रेट बढ़ाने के लिए काम करता है इसलिए ओवरऐक्टिव थायरॉइड से हारपरएक्टिविटी, इन्सॉमिया या लगातार भूख लगना जैसी समस्याएं हो जाती हैं। हालांकि ज्यादा खाने के बावजूद भी वजन ज्यादा नहीं बढ़ता क्योंकि ओवरएक्टिव थायरॉइड की वजह से कैलोरी बहुत जल्दी बर्न होती हैं।
गर्भ से जुड़ा कारण
गर्भ के अंदर का प्रतिकूल वातावरण भी अत्यधिक भूख का कारण बन सकता है। ऑकलैंड यूनीवर्सिटी के रिसर्चरों ने हाइपरफेजिया का एक रोचक कारण बताया है। उन्होंने पाया कि अत्यधिक भूख भ्रूण के कारण भी हो सकती है। इसके पीछे का सिद्धांत ये कहता है कि मां के गर्भ की विपरीत परिस्थितियां जैसे कुपोषण, गर्भ में होने वाले मेटाबॉलिक और हार्मोनल बदलाव इसके कारण हो सकते हैं।
कई बार अत्यधिक भूख से निपटने के लिए परिवार व दोस्तों का भावनात्मक समर्थन और काउंसलिंग की जरूरत होती है। अगर लगातार अत्यधिक भूख की स्थिति रहे तो अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लें। चिकित्सीय सहायता न लेने से ये समस्या गंभीर हो सकती है और आपको स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है।
दवाएं
*कुछ दवाइयों की वजह से भी अधिक भूख लगने की समस्या हाइपरफेजिया हो सकती है। कोर्टिकोस्टेरोइड्स (corticosteroids), साइप्रोफेटेडाइन (cyproheptadine) और ट्राईसाइक्लिक एंटीडिप्रेसेंट दवाओं का सेवन करने वाले लोगों को ये समस्या हो सकती है।

2016-08-22

प्याज की चाय के फायदे



प्याज़ की चाय प्याज़ के छिलके से बनती है। इसके बाहरी स्तर में उच्च मात्रा में क्वेरसेटिन नाम का पिग्मेंट होता है जिसके कई तरह के औषधीय गुण होते हैं। ये धमनी में रक्त का थक्का बनने से रोककर हाइपरटेंशन के खतरे को कम करने के साथ अनिद्रा की बीमारी से भी कुछ हद तक राहत दिलाता है। प्याज में बाहरी छिलके में एन्टी ऑक्सिडेंट, एन्टी फंगल और एन्टी कैंसरकारी गुण भी होता है।
• क्वेरसेटिन में एन्टी कैंसरकारी गुण होने के कारण ये फ्री रैडिकल्स को नष्ट करने में मदद करता है। अध्ययन में ये पाया गया है कि कैसर के सेल्स को बढ़ने से रोककर ये कोलोन कैंसर को ठीक करने में सहायता करता है।
• प्याज के छिलकर में घुलनशील फाइबर होने के कारण ये कोलोन को साफ रखने में बहुत मदद करता है। ये घुलनशील फाइबर स्किन और आंत से टॉक्सिन को बाहर निकालकर कैंसर सेल्स के उत्पादन को रोकता है।
• 2011 के अध्ययन के अनुसार प्याज का छिलका ग्लूकोज़ रेसपोन्स को बेहतर करके इन्सूलिन रेजिटेंट को बढ़ाकर टाइप-2 डाइबिटीज़ में राहत दिलाने में सहायता करता है।
प्याज के छिलके को अपने डायट में शामिल करने पर आप इन बीमारियों के राहत पा सकते हैं –
• टाइप-2 डाइबिटीज़
• कार्डियोवसकुलर डिज़ीज
• गैस्ट्रोइंटेसटिनल प्रॉबल्म
• कोलोन कैंसर
• वज़न का बढ़ना
प्याज की चाय बनाने की विधि
• एक प्याज को अच्छी तरह से धो लें। उसके बाद उसके छिलकों को अच्छी तरह से निकाल लें।
• एक ग्लास के जार में छिलकों को रख दें और उसके ऊपर से उबलता हुआ पानी डालकर 15 मिनट के लिए जार को बंद कर दें।
• अब प्याज की चाय को छानकर पी लें।
नोट- ये चाय प्रेगनेंट महिला और दूध पिलानेवाली मां को न दें।

2016-08-21

कनेर के पौधे के उपयोग ,उपचार









कनेर का पौधा भारत में हर स्थान पर पाया जाता है | इसका पौधा भारत के मंदिरों में , उद्यान में और घर में उपस्थित वाटिकाओं में लगायें जाते है | कनेर के पौधे की मुख्य रूप से तीन प्रजाति पाई जाती है | जैसे :- लाल कनेर , सफेद कनेर और पीले कनेर | इन प्रजाति पर सारा साल फूल आते रहते है | जंहा पर सफेद और पीली कनेर के पौधे होते है वह स्थान हरा – भरा बसंत के मौसम की तरह लगता है |
कनेर का पौधा एक झाड़ीनुमा होता है | इसकी ऊंचाई 10 से 12 फुट की होती है | कनेर के पौधे की शखाओं पर तीन – तीन के जोड़ें में पत्ते लगे हुए होते है | ये पत्ते 6 से ९ इंच लम्बे एक इंच चौड़े और नोकदार होते है | पीले कनेर के पौधे के पत्ते हरे चिकने चमकीले और छोटे होते है | लेकिन लाल कनेर और सफेद कनेर के पौधे के पत्ते रूखे होते है
कनेर के पौधे को अलग – अलग स्थान पर अलग अलग नाम से जाना जाता है | जैसे :-
१. संस्कृत में :- अश्वमारक , शतकुम्भ , हयमार ,करवीर
२. हिंदी में :- कनेर , कनैल
३. मराठी में :- कणहेर
४. बंगाली में :- करवी
५. अरबी में :- दिफ्ली
६. पंजाबी में :- कनिर
७. तेलगु में :- कस्तूरीपिटे
आदि नमो से जाना जाता है |
कनेर के पौधे में पाए जाने वाले रासायनिक घटक :- कनेर का पौधा पूरा विषेला होता है | इस पौधे में नेरीओडोरिन और कैरोबिन स्कोपोलिन पाया जाता है | इसकी पत्तियों में हृदय पदार्थ ओलिएन्डरन पाया जाता है | पीले कनेर में पेरुबोसाइड नामक तत्व पाया जाता है | इसकी भस्म में पोटाशियम लवण की मात्रा पाई जाती है |

कनेर के पौधे के गुण :- इसके उपयोग से कुष्टघन , व्रण , व्रण रोपण आदि बीमारियाँ ठीक की जाती है | इसके आलावा यह कफवात का शामक होता है | इसके उपयोग से विदाही , दीपन और पेट की जुडी हुई समस्या ठीक हो जाती है | यदि कनेर को उचित मात्रा मे प्रयोग किया जाता है तो यह अमृत के समान होती है लेकिन यदि इसका प्रयोग अधिक मात्रा में किया जाता है तो यह जहर बन जाता है | कनेर का उपयोग रक्त की शुद्धी के लिए भी किया जाता है | यह एक तीव्र विष है जिसका उपयोग मुत्रक्रिछ और अश्मरी आदि रोगों को दूर करने के लिए किया जाता है |
कनेर का औषधि के रूप में प्रयोग:-
दूब घास(Cynodon
dactylon) के पंचाग (फल,
फूल, जड़, तना, पत्ती) तथा
कनेर के पत्तोँ को पीस कर
कपड़े मेँ रखकर रस निकालेँ
और सिर के गंजे स्थान पर
लगायेँ तो सिर्फ 15 दिनोँ मेँ
ही उस स्थान पर नये बाल
दिखाई देने शुरू हो जाते हैँ।
तथा पूरे सिर मेँ तेल की
तरह इस रस का प्रयोग करेँ
तब सफेद बाल काले होने
लगते हैँ ।
नेत्र रोग :- आँखों के रोग को दूर करने के लिए पीले कनेर के पौधे की जड़ को सौंफ और करंज के साथ मिलाकर बारीक़ पीसकर एक लेप बनाएं | इस लेप को आँखों पर लगाने से पलकों की मुटाई जाला फूली और नजला आदि बीमारी ठीक हो जाती है |
हृदय शूल :- कनेर के पौधे की जड़ की छाल की 100 से 200 मिलीग्राम की मात्रा को भोजन के बाद खाने से हृदय की वेदना कम हो जाती है |
दातुन :- सफेद कनेर की पौधे की डाली से दातुन करने से हिलते हुए दांत मजबूत हो जाते है | इस पौधे का दातुन करने से अधिक लाभ मिलता है |
सिर दर्द :- कनेर के फूल और आंवले को कांजी में पीसकर लेप बनाएं | इस लेप को अपने सिर पर लगायें | इस प्रयोग से सिर का दर्द ठीक हो जाता है |
अर्श :- कनेर की जड़ को ठन्डे पानी में पीसकर लेप बनाएं | दस्त होने के बाद जो अर्श बाहर निकलता है उस पर यह लेप लगा लें | अर्श रोग का प्रभाव समाप्त हो जाता है |
*कनेर के 60-70 ग्राम पत्ते (लाल या पीली दोनों में से कोई भी या दोनों ही एक साथ ) ले के उन्हें पहले अच्छे से सूखे कपडे से साफ़ कर लें ताकि उनपे जो मिटटी है वो निकल जाये.,. अब एक लीटर सरसों का तेल या नारियल का तेल या जेतून का तेल ले के उसमे पत्ते काट काट के डाल दें. अब तेल को गरम करने के लिए रख दें. जब सारे पत्ते जल कर काले पड़ जाएँ तो उन्हें निकाल कर फेंक दें और तेल को ठण्डा कर के छान लें और किसी बोटल में भर के रख लें.....
पर्योग विधि :- रोज़ जहाँ जहाँ पर भी बाल नहीं हैं वहां वहां थोडा सा तेल ले के बस 2 मिनट मालिश करनी है और बस फिर भूल जाएँ अगले दिन तक. ये आप रात को सोते हुए भी लगा सकते हैं और दिन में काम पे जाने से पहले भी... बस एक महीने में आपको असर दिखना शुरू हो जायेगा.. सिर्फ 10 दिन के अन्दर अन्दर बाल झड़ने बंद हो जायेंगे या बहुत ही कम... और नए बाल भी एक महीने तक आने शुरू हो जायेंगे......
नोट : ये उपाय पूरी तरह से tested है.. हमने कम से कम भी 10 लोगो पे इसका सफल परीक्षण किया है. एक औरत के 14 साल से बाल झड़ने बंद नहीं हो रहे थे. इस तेल से मात्र 6 दिन में बाल झड़ने बंद हो गये. 65 साल तक के आदमियों के बाल आते देखे हैं इस प्रयोग से जिनका के हमारे पास data भी पड़ा है.. आप भी लाभ उठायें और अगर किसी को फरक पड़े तो कृपया हमे जरुर बताये...
चेतावनी: कनेर के पौधे में जो रस होता है वो बहुत ज़हरीला होता है. तो ये सिर्फ बाहरी प्रयोग के लिए है 
 सफेद कनेर के पौधे के पीले पत्तों को अच्छी तरह सुखाकर बारीक़ पीस लें | इस पिसे हुए पत्ते को नाक से सूंघे | इससे आपको छीक आने लगेगी जिससे आपका सिर का दर्द ठीक हो जायेगा |
कनेर के ताजा फूल की ५० ग्राम की मात्रा को 100 ग्राम मीठे तेल में पीसकर कम से कम एक सप्ताह तक रख दें | एक सप्ताह के बाद इसमें 200 ग्राम जैतून का तेल मिलाकर एक अच्छा सा मिश्रण तैयार करें | इस तेल की नियमित रूप से तीन बार मालिश करने से कामेन्द्रिय पर उभरी हुई नस की कमजोरी दूर हो जाती है इसके साथ पीठ दर्द और बदन दर्द को भी राहत मिलती है |
सफेद कनेर :
सफेद कनेर की जड़ की छाल बारीक पीसकर भटकटैया के रस में खरल करके 21 दिन इन्द्री की सुपारी छोड़कर लेप करने से तेजी आ जाती है।
पक्षघात के रोग में :- सफेद कनेर के पौधे की जड़ की छाल , सफेद गूंजा की दाल तथा काले धतूरे के पौधे के पत्ते आदि को एक समान मात्रा में लेकर इनका कल्क तैयार कर लें | इसके बाद चार गुना पानी में कल्क के बराबर तेल मिलाकर किसी बर्तन में धीमी आंच पर पकाएं | जब केवल तेल रह जाये तो किसी सूती कपड़े से छानकर मालिश करें | इससे पक्षाघात का रोग ठीक हो जाता है |
चर्म रोग :- सफेद कनेर के पौधे की जड़ का क्वाथ बनाकर राई के तेल में उबालकर त्वचा पर लगाने से त्वचा सम्बन्धी रोग दूर हो जाते है |
कुष्ठ रोग :- कनेर के पौधे की छाल का लेप बनाकर लगाने से चर्म कुष्ठ रोग दूर होता है |
अफीम की आदत से छुटकारे के लिए :- कनेर के पौधे की जड़ का बारीक़ चूर्ण तैयार कर लें | इस चूर्ण को 100 मिलीग्राम की मात्रा में दूध के साथ दें | इससे कुछ हफ्तों में ही अफीम की आदत छुट जाएगी |
कृमि की बीमारी :- कनेर के पत्तों को तेल में पकाकर घाव पर बांधने से घाव के कीड़े मर जाते है |
कनेर के पौधे के पत्तों का क्वाथ से नियमित रूप से नहाने से कुष्ठ रोग काफी कम हो जाता है |
कनेर के पौधे के पत्तों को बारीक़ पीस लें | अब इसमें तेल मिलाकर लेप तैयार कर लें | शरीर में जंहा पर भी जोड़ों का दर्द है उस स्थान पर लेप लगा लें | इससे दर्द कम हो जाता है |
खुजली के लिए :- कनेर के पौधे के पत्तों को तेल में पका लें | इस तेल को खुजली वाले स्थान पर लगाने से एक घंटे के अंदर खुजली का प्रभाव कम हो जाता है |
पीले कनेर के पौधे की पत्तियां या जैतून का तेल में बनाया हुआ महलम को खुजली वाले स्थान पर लगायें | इससे हर तरह की खुजली ठीक हो जाती है |
सर्पदंश के लिए :- कनेर की जड़ की छाल को 125 से 250 मिलीग्राम की मात्रा में रोगी को देते रहे इसके आलावा आप कनेर के पौधे की पत्ती को थोड़ी – थोड़ी देर के अंतर पे दे सकते है | इस उपयोग से उल्टी के सहारे विष उतर जाता है |
दाद के रोग के लिए :- सफेद कनेर के पौधे की जड़ की छाल का तेल बनाकर लगाने से कुष्ट रोग और दाद का रोग ठीक होता है |

2016-07-17

विधारा के गुण लाभ उपचार:Healing properties of elephant creeper



विधारा को घाव बेल भी कहते हैं . यह बेल सर्दी में भी हरी भरी रहती है . वर्षा ऋतु में इसके फूल आते हैं . इसके अन्दर एक बड़ा ही अनोखा गुण है . यह मांस को जल्दी भर देता है या कहें कि जोड़ देता है . आदिवासी लोग विधारा के पत्तों में मांस के टुकड़ों को रख देते थे कि अगले दिन पकाएंगे . अगले दिन वे पाते थे कि मांस के टुकड़े जुड़ गए हैं . यह बड़ी ही रहस्यभरी घटना है . यह सच है कि किसी भी प्रकार के घाव पर इसके ताज़े पत्तों को गर्म करके बांधें तो घाव बहुत जल्दी भर जाता है .
सबसे अधिक मदद ये gangrene में करता है . शुगर की बीमारी में कोई भी घाव आराम से नहीं भरता है . gangrene होने पर तो पैर गल जाते हैं और अंगुलियाँ भी गल जाती हैं . अगर pus भी पड़ जाए तो भी चिंता न करें . इसकी पत्तियों को कूटकर उसके रस में रुई डुबोकर घावों पर अच्छी तरह लगायें . उसके बाद ताज़े विधारा के पत्ते गर्म करके घावों पर रखें और पत्ते बाँधें . हर 12 घंटे में पत्ते बदलते रहें . बहुत जल्द घाव ठीक हो जायेंगे . ये बहुत पुराने घाव भी भर देता है. Varicose veins की बीमारी भी इससे ठीक होती है .

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Bedsore हो गए हों तो रुई से इसका रस लगायें . किसी भी तरह की ब्लीडिंग हो ; periods की, अल्सर की , आँतों के घाव हों , बाहर या अंदर के कोई भी घाव हों तो इसके 2-3 पत्तों का रस एक कप पानी में मिलाकर प्रात:काल पी लें . हर तरह का रक्तस्राव रुक जाएगा . कहीं भी सूजन या दर्द हो तो इसका पत्ता बाँधें .
इसके बीज भूनकर उसका पावडर गर्म पानी या शहद के साथ लें तो बलगम और खांसी खत्म होती है . लक्ष्मी विलास रस में भी इसे डालते हैं . लक्ष्मी विलास रस की दो-दो गोली सवेरे शाम लेने से सर्दी दूर होती है . शरीर में दर्द हो या arthritis की समस्या हो तो इसकी 10 ग्राम जड़ का काढा पीयें .

 वानस्पतिक नाम : Argyreia nervosa.

· प्रचलित नाम:Elephant Creeper, अधोगुडा, घाव बेल, समुद्र सोख, Hawaiian Baby Woodrose, Woolly Morning Glory.




आयुर्वेद में गुण:
· रस (Taste) – कटु (Pungent), तिक्त (Bitter), कषाय (Astringent)
· गुण (Characteristics) - लघु (Light); स्निग्ध (Unctuous)
· वीर्य (Potency) - उष्ण (Hot)
· विपाका (Post digestion effect) - मधुर (Sweet) 

आयुर्वेद में प्रभाव:
· त्रिदोषों पर प्रभाव (Effect on Tridosha): विधारा मूल का प्रभाव प्रमुखतः कफ़ और वात दोषों पर होता है अतः इसका उपयोग वात, कफ़ और वात-कफ़ प्रधान/कारक रोगों में प्रभावी/लाभकारी होता है Vidhara mool pacifies Kapha and Vata Doshas in the body so it can be used effectively in management of all the diseases which originate from aggravation of Kapha/ Vata or both.).
· रसायन: विधारा मूल शरीर की प्रत्येक कोशिका तक कार्य करती है और उन्हें बल प्रदान करती है. यह एक उच्च कोटि का वाजीकरण रसायन है.
· वृष्य: यौन उत्तेजना वर्धक, वीर्य के गुण बढ़ता है, शुक्राणुओं कि संख्या बढ़ाता है, गर्भाशय की जलन/सूजन लाभकारी है.
· आमवातहर: वात जनित रोगों एवं गठिया आदि रोगों में विशेष लाभकारी है.
· अर्शहारा: बवासीर/अर्श/हैमोरोइड में लाभकारी
· शोथहर: विधारा मूल सभी प्रकार की सूजन या दर्द में राहत प्रदान करता है.
· मेहाप्रनुत: विधारा मूल सभी प्रकार के मूत्र रोगों में लाभकारी होता है. यह मूत्र विसर्जन के द्वारा शरीर से शर्करा का निष्कासन करता 

है, अतः मधुमेह में लाभकारी होता है.

· आयुष्कर: शरीर के सभी दोषों को दूर कर मनुष्य की आयु वर्धन करता है.
· मेधावर्धक: मस्तिष्क को बल प्रदान करता है तथा तर्क एवं स्मरण शक्ति को बढ़ाता है.
· कान्तिकर: त्वचा को कांतिमय तथा निर्दोष करता है.
यह घाव को जल्दी भर देता है या मांस को जोड़ देता है। जब पत्ती के निचली बालों वाली या रोंएदार सतह को सूजन या घाव वाले हिस्से पर लगाते हैं तो यह उसे पका कर मवाद या पीप निकालने में मददगार होता है, जबकि ऊपरी चिकनी सतह घाव भरने में मदद करता है|
विधारा मूल गैंग्रीन/कोथ/मांस के सड़ने के इलाज में सर्वाधिक उपयोगी है. गैंग्रीन/कोथ होने पर पैर गल जाते हैं और अंगुलियाँ भी गल जाती हैं पस भी पड़ जाए तो भी चिंता न करें. ये गैंग्रीन/कोथ के पुराने से पुराने घावों को ठीक कर देता है.
रक्त वाहिनियों/सिराओं में सूजन व नसों में खिंचाव (Varicose veins) या चिक चढ़ जाने की बीमारी भी इससे ठीक होती है.
शय्या व्रण या शय्या क्षत (Bedsore) के फोड़े/घाव में यह अत्यंत लाभकारी होता है.
माहवारी/मासिक धर्म में, अल्सर में, आँतों के घाव में, शरीर के बाहर या अंदर के कोई भी घाव में इसके प्रयोग से रक्तस्राव रुक जाता है.
किसी भी प्रकार सूजन या दर्द हो तो इसका पत्ता बाँधें, आराम मिलता है.
इसके प्रयोग से बलगम और खांसी खत्म होती है.
शीतकाल में उपयोगी शक्तिवर्धक चूर्ण बनाने की विधि बता रहा हूँ | इस चूर्ण का उपयोग करने से पहले 3 दिनों तक एक कप गुनगुने दूध में 2 चम्मच अरंड का तेल मिलाकर सुबह-शाम लेने से पेट साफ़ कर लें. यह चूर्ण बनाने के लिए 50 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण, 50 ग्राम विधारा चूर्ण, 50 ग्राम मुलैठी चूर्ण, 25 ग्राम सौंठ चूर्ण, 25 ग्राम गिलोय सत्व, 50 ग्राम सफ़ेद मूसली चूर्ण और 50 ग्राम सतावर चूर्ण को एक साथ मिलाकर रखे. इस 1 चम्मच चूर्ण को गुनगुने दूध के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम लेना शीतकाल में लाभदायक है|



2016-07-16

चिरोंजी के फायदे The advantages of Chironji


चिरौंजी को भला कौन नहीं जानता। यह हर घर में एक सूखे मेवे की तरह प्रयोग की जाती है। इसका प्रयोग भारतीय पकवानों, मिठाइयों और खीर व सेंवई इत्यादि में किया जाता है। चिरौंजी को चारोली के नाम से भी जाना जाता है। चारोली का वृक्ष अधिकतर सूखे पर्वतीय प्रदेशों में पाया जाता है। दक्षिण भारत, उड़ीसा, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, छोटा नागपुर आदि स्थानों पर यह वृक्ष विशेष रूप से पैदा होता है।
चारोली का उपयोग अधिकतर मिठाई में जैसे हलवा, लड्डू, खीर, पाक आदि में सूखे मेवों के रूप में किया जाता है।
मीठी चीजों में खासतौर पर इस्तेमाल होने वाली चिरौंजी में कई ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. चिरौंजी में प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा पाई जाती है. इसके अलावा इसमें विटामिन सी और बी भी पर्याप्त मात्रा में होता है. वहीं इससे निर्मित तेल में अमीनो एसि‍ड और स्टीएरिक एसि‍ड भी पाया जाता है.
हालांकि यह एक महंगा ड्राई फ्रूट है पर इससे होने वाले स्वास्थ्य लाभ वाकई बेजोड़ हैं.
चिरौंजी स्‍वास्‍थ्‍य और सौंदर्य दोनों के लिहाज से बहुत अच्‍छी मानी जाती है
चिरौंजी का लेप लगाने से चेहरे के मुंहासे, फुंसी और अन्‍य चर्म रोग दूर होते हैं। चिरौंजी को खाने से ताकत मिलती है, पेट में गैस नहीं बनती एंव शिरःशूल को मिटाने वाली होती है। चिरौंजी का पका हुआ फल मधुर, स्निग्ध, शीतवीर्य तथा दस्तावार और वात पित्त, जलन, प्यास और ज्वर का शमन करने वाला होता है।
खूनी दस्‍त रोके-
5-10 ग्राम चारोली को पीसकर दूध के साथ लेने से खूनी दस्त में लाभ होता है।
खांसी में-
खांसी में चिरौंजी का काढ़ा बनाकर सुबह-शाम पीने से लाभ मिलता है।
चिरौंजी पौष्टिक भी होती है, इसे पौष्टिकता के लिहाज से बादाम के स्थान पर इस्तेमाल कर सकते हैं।
किसी को शारीरिक कमजोरी हो तो उसके लिए चिरौंजी खाना बहुत फायदेमंद होता है. यह शारीरिक कमजोरी को दूर करने के साथ ही क्षमता का विकास भी करता है.
बालों को काला करे
चिरौंजी का तेल बालों को काला करने के लिए उपयोगी है
चेहरे को सुंदर बनाने के लिये
चिरौंजी को गुलाब जल के साथ पीस कर चेहरे पर लेप लगाएं। फिर जब यह सूख जाए तब इसे मसल कर धो लें। इससे चेहरा चिकना, सुंदर और चमकदार बन जाएगा।
सर्दी-जुकाम में भी इसका सेवन फायदेमंद होता है. इसे दूध के साथ पकाकर प्रयोग में लाने से इस तकलीफ में फायदा होता है|.
चमकती त्वचा - चारोली को गुलाब जल के साथ सिलबट्टे पर महीन पीस कर लेप तैयार कर चेहरे पर लगाएँ। लेप जब सूखने लगे तब उसे अच्छी तरह मसलें और बाद में चेहरा धो लें। इससे आपका चेहरा चिकना, सुंदर और चमकदार हो जाएगा। इसे एक सप्ताह तक हर रोज प्रयोग में लाए। बाद में सप्ताह में दो बार लगाते रहें। इससे आपका चेहरा लगेगा हमेशा चमकदार।
गीली खुजली - अगर आप गीली खुजली की बीमारी से पीड़ित हैं तो 10 ग्राम सुहागा पिसा हुआ, 100 ग्राम चारोली, 10 ग्राम गुलाब जल इन तीनों को साथ में पीसकर इसका पतला लेप तैयार करें और खुजली वाले सभी स्थानों पर लगाते रहें। ऐसा करीबन 4-5 दिन करें। इससे खुजली में काफी आराम मिलेगा व आप ठीक हो जाएँगे।


मुंहासों को दूर करे
संतरे के छिलके और चिरौंजी को दूध के साथ पीस कर चेहरे पर लेप लगाएं। जब लेप सूख जाए तब चेहरे को धो लें। एक हफ्ते तक प्रयोग के बाद भी असर न दिखाई दे तो लाभ होने तक इसका प्रयोग जारी रखें।
चिरौंजी में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है. कुछ मात्रा में इसके सेवन से शरीर की प्रोटीन की आवश्यकता पूरी हो जाती है. आप चाहें तो इसे कच्चे रूप में भी खा सकते हैं या फिर किसी भी स्वीट डिश के साथ पकाकर ले सकते हैं.


*चिरौंजी बीज, कैलोरी में अपेक्षाकृत कम होते हैं। यह प्रोटीन और वसा का एक अच्छा स्रोत हैं। इनमे फाइबर की भी अच्छी मात्रा होती हैं।इसके अतिरिक्त इसके विटामिंस जैसे की, विटामिन सी , विटामिन बी 1, विटामिन बी 2 और नियासिन आदि भी होते है। खनिज जैसे की, कैल्शियम, फास्फोरस और लोहे भी इन बीजों में उच्च मात्रा में पाए जाते हैं।
*चिरौंजी (मेवे के रूप में), एक टॉनिक है। यह मदुर, बलवर्धक, वीर्यवर्धक, वाट और पित्त को कम करने वाली, दिल के लिए अच्छी, विष को नष्ट करने वाली और आम्वर्धक है

  1. *शीत पित्ती - शरीर पर शीत पित्ती के ददोड़े या फुंसियाँ होने पर दिन में एक बार 20 ग्राम चिरौंजी को खूब चबा 
    कर खाएँ। साथ ही दूध में चारोली को पीसकर इसका लेप करें। इससे बहुत फायदा होगा। यह नुस्खा शीत पित्ती में बहुत उपयोगी है।
    *सांस की समस्याओं respiratory ailments के उपचार में भी किया जाता है। यह श्लेष्मा phlegm/mucous को ढीला करने में भी मदद करता है और नाक और छाती की जकडन में राहत देता है। यह एंटीऑक्सिडेंट antioxidant है। चिरौंजी की बर्फी खाने से शरीर में बल की वृध्धि होती है और दुर्बलता जाती है ।
    चिरौंजी पित्त, कफ तथा रक्त विकार नाशक है ।
    *चिरौंजी भारी, चिकनी, दस्तावर, जलन, बुखार और अधिक प्यास को दूर करती है ।
    चिरौंजी को खाने से शरीर में गरमी कम होती और ठंडक मिलती है। It is cooling in nature. इसके १०-२० ग्राम दाने चबाने से शीत-पित्त या छपाकी में राहत मिलती है।

2016-07-15

जायफल के फायदे Benefits of nutmeg


अखरोट की तरह दिखने वाला जायफल एक स्‍पाइसी मसाला है, जिसके प्रयोग से खाने का स्‍वाद और ज्‍यादा बढ़ जाता है। जायफल को स्‍वास्‍थ्‍य के लिहाज से भी गुणकारी माना जाता है। ये स्किन और सेक्‍स से जुड़ी समस्‍याओं में अहम भूमिका निभाता है। आइए जानते हैं क‍ि जायफल के और क्‍या-क्‍या स्‍वास्‍थ्‍य लाभ हैं।
*सर में बहुत तेज दर्द हो रहा हो तो बस जायफल को पानी में घिस कर लगाएं।
* सर्दी के मौसम के दुष्प्रभाव से बचने के लिए जायफल को थोड़ा सा खुरचिये, चुटकी भर कतरन को मुंह में रखकर चूसते रहिये। यह काम आप पूरे जाड़े भर एक या दो दिन के अंतराल पर करते रहिये। यह शरीर की स्वाभाविक गरमी की रक्षा करता है, इसलिए ठंड के मौसम में इसे जरूर प्रयोग करना चाहिए।
*आपको किन्हीं कारणों से भूख न लग रही हो तो चुटकी भर जायफल की कतरन चूसिये इससे पाचक रसों की वृद्धि होगी और भूख बढ़ेगी, भोजन भी अच्छे तरीके से पचेगा।
* दस्त आ रहे हों या पेट दर्द कर रहा हो तो जायफल को भून लीजिये और उसके चार हिस्से कर लीजिये एक हिस्सा मरीज को चूस कर खाने को कह दीजिये। सुबह शाम एक-एक हिस्सा खिलाएं।
* फालिज का प्रकोप जिन अंगों पर हो उन अंगों पर जायफल को पानी में घिसकर रोज लेप करना चाहिए, दो माह तक ऐसा करने से अंगों में जान आ जाने की संभावना देखी गयी है।

  • * प्रसव के बाद अगर कमर दर्द नहीं ख़त्म हो रहा है तो जायफल पानी में घिसकर कमर पे सुबह शाम लगाएं, एक सप्ताह में ही दर्द गायब हो जाएगा।
    *फटी एडियों के लिए इसे महीन पीसकर बीवाइयों में भर दीजिये। 12-15 दिन में ही पैर भर जायेंगे।
    *जायफल के चूर्ण को शहद के साथ खाने से ह्रदय मज़बूत होता है। पेट भी ठीक रहता है।
    * अगर कान के पीछे कुछ ऎसी गांठ बन गयी हो जो छूने पर दर्द करती हो तो जायफल को पीस कर वहां लेप कीजिए जब तक गाठ ख़त्म न हो जाए, करते रहिये।
    *अगर हैजे के रोगी को बार-बार प्यास लग रही है, तो जायफल को पानी में घिसकर उसे पिला दीजिये।
    *जी मिचलाने की बीमारी भी जायफल को थोड़ा सा घिस कर पानी में मिला कर पीने से नष्ट हो जाती है।
    *इसे थोडा सा घिसकर काजल की तरह आँख में लगाने से आँखों की ज्योति बढ़ जाती है और आँख की खुजली और धुंधलापन ख़त्म हो जाता है।
    *जायफल के लेप के बजाय जायफल के तेल का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
    * दांत में दर्द होने पर जायफल का तेल रुई पर लगाकर दर्द वाले दांत या दाढ़ पर रखें, दर्द तुरंत ठीक हो जाएगा। अगर दांत में कीड़े लगे हैं तो वे भी मर जाएंगे।
    - पेट में दर्द हो तो जायफल के तेल की 2-3 बूंदें एक बताशे में टपकाएं और खा लें। जल्द ही आराम आजाएगा। जायफल को पानी में पकाकर उस पानी से गरारे करें। मुंह के छाले ठीक होंगे, गले की सूजन भी जाती रहेगी।
    * जायफल को कच्चे दूध में घिसकर चेहरें पर सुबह और रात में लगाएं। मुंहासे ठीक हो जाएंगे और चेहरे निखारेगा।
    *एक चुटकी जायफल पाउडर दूध में मिला कर लेने से सर्दी का असर ठीक हो जाता है। इसे सर्दी में प्रयोग करने से सर्दी नहीं लगती।
    * सरसों का तेल और जायफल का तेल 4:1 की मात्रा में मिलाकर रख लें। इस तेल से दिन में 2-3 बार शरीर की मालिश करें। जोड़ों का दर्द, सूजन, मोच आदि में राहत मिलेगी। इसकी मालिश से शरीर में गर्मी आती है, चुस्ती फुर्ती आती है और पसीने के रूप में विकार निकल जाता है।
    *जायफल, सौंठ और जीरे को पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को भोजन करने से पहले पानी के साथ लें। गैस और अफारा की परेशानी नहीं होगी।
    * दस जायफल लेकर देशी घी में अच्छी तरह सेंक लें। उसे पीसकर छान लें। अब इसमें दो कप गेहूं का आटा मिलाकर घी में फिर सेकें। इसमें शक्कर मिलाकर रख लें। रोजाना सुबह खाली पेट इस मिश्रण को एक चम्मच खाएं, बवासीर से छुटकारा मिल जाएगा।
    * नीबू के रस में जायफल घिसकर सुबह-शाम भोजन के बाद सेवन करने से गैस और कब्ज की तकलीफ 

  • * दूध पाचन : शिशु का दूध छुड़ाकर ऊपर का दूध पिलाने पर यदि दूध पचता न हो तो दूध में आधा पानी मिलाकर, इसमें एक जायफल डालकर उबालें। इस दूध को थोडा ठण्डा करके कुनकुना गर्म, चम्मच कटोरी से शिशु को पिलाएँ, यह दूध शिशु को हजम हो जाएगा।
    * यह शक्ति भी बढाता है।
    * जायफल आवाज में सम्मोहन भी पैदा करता है।
    *जायफल और काली मिर्च और लाल चन्दन को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर चेहरे पर लगाने से चेहरे की चमक बढ़ती है, मुहांसे ख़त्म होते हैं।
    किसी को अगर बार-बार पेशाब जाना पड़ता है तो उसे जायफल और सफ़ेद मूसली 2-2 ग्राम की मात्र में मिलाकर पानी से निगलवा दीजिये, दिन में एक बार, खाली पेट, 10 दिन लगातार। *बच्चों को सर्दी-जुकाम हो जाए तो जायफल का चूर्ण और सोंठ का चूर्ण बराबर मात्रा में लीजिये फिर 3 चुटकी इस मिश्रण को गाय के घी में मिलाकर बच्चे को सुबह शाम चटायें।
    * चेहरे पर या फिर त्वचा पर पड़ी झाईयों को हटाने के लिए आपको जायफल को पानी के साथ पत्थर पर घिसना चाहिए। घिसने के बाद इसका लेप बना लें और इस लेप का झाईयों की जगह पर इस्तेमाल करें, इससे आपकी त्वचा में निखार भी आएगा और झाईयों से भी निजात मिलेगी।
    * चेहरे की झुर्रियां मिटाने के लिए आप जायफल को पीस कर उसका लेप बनाकर झुर्रियों पर एक महीने तक लगाएंगे तो आपको जल्द ही झुर्रियों से निजात मिलेगी।
    * आंखों के नीचे काले घेरे हटाने के लिए रात को सोते समय रोजाना जायफल का लेप लगाएं और सूखने पर इसे धो लें। कुछ समय बाद काले घेरे हट जाएंगे।
    *अनिंद्रा का स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और इसका त्वचा पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। त्वचा को तरोताजा रखने के लिए भी जायफल का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए आपको रोजाना जायफल का लेप अपनी त्वचा पर लगाना होगा। इससे अनिंद्रा की शिकायत भी दूर होगी और त्वचा भी तरोजाता रहेगी।
    *कई बार त्वचा पर कुछ चोट के निशान रह जाते हैं तो कई बार त्वचा पर नील और इसी तरह के घाव पड़ जाते हैं। जायफल में सरसों का तेल मिलाकर मालिश करें। जहां भी आपकी त्वचा पर पुराने निशान हैं रोजाना मालिश से कुछ ही समय में वे हल्के होने लगेंगे। जायफल से मालिश से रक्त का संचार भी होगा और शरीर में चुस्ती-फुर्ती भी बनी रहेगी।
    *अनिद्रा के लिए सही- जायफल सेरोटोनिन (serotonin) का उत्‍पादन बढ़ाकर अच्‍छी नींद में मदद करता है। इसमें मौजूद मायरिस्टिसिन ( myristicin) गुण तनाव के लिए जिम्‍मेदार कारक एंजाइम्‍स (enzymes) को बढ़ने से रोकते हैं। अनिद्रा से निपटने के लिए सोने से पहले दूध के गिलास में जायफल का पाउडर ज़रूर मिलाएं।
    *दिमाग के लिए सही- जायफल में मौजूद मायरिस्टिसिन ( myristicin) अल्जाइमर रोग के लिए जिम्मेदार कारक एंजाइम (enzyme) के खिलाफ काम करता है। इसके अलावा ये तनाव को कम करता है और यादाशत को बढ़ाता है। 

*इम्‍यूनिटी बढ़ाएगा- इसमें मौजूद पोषक तत्‍व इम्‍यूनिटी को बढ़ाकर स्‍वास्‍थ्‍य को सही रखते हैं। जायफल में पाए जाने वाले मिनरल्‍स और विटामिन एंटी-इन्फ्लैमटोरी और एंटीऑक्सीडेंट के प्रभाव को रोकने में सहायक हैं, जिससे आपका स्‍वास्‍थ्‍य दुरुस्‍त रहता है।
*पाचन क्रिया के लिए सही- इसमें मौजूद फाइबर पेट में दर्द, कब्‍ज और एसिडिटी होने से रोकते हैं। इसके पाउडर को सलाद, कस्‍टर्ड और आइसक्रीम पर छिड़कर खाने से इन परेशानियों से बचा जा सकता है।
सेक्‍स क्षमता बढ़ाएगा- जायफल के पाउडर को चाय और दूध में मिलाकर पीने से सेक्‍स लाइफ बेहतर बनेगी। ये नेचुरल ऐफ्रोडीज़ीएक (aphrodisiac) की तरह काम करता है जिससे हार्मोन सेरोटोनिन पर प्रभाव पड़ता है और सेक्‍स उत्‍तेजना बढ़ती है।
*स्किन प्रॉब्‍लम्‍स करेगा दूर- धब्बे, मुँहासे और झुर्रियों से छुटकारा पाने के लिए अपने खाने में जायफल शामिल करें। इसमें एंटीसेप्टिक और एंटी-इनफ्लमेटरी गुण होते हैं जो स्किन को साफ रखते हैं। इसका पाउडर दूध के साथ मिलाकर स्किन पर लगाएं
*दांतों को बनाएगा मजबूत- इसमें मौजूद एंटी बैक्टीरियल गुण से दांतों के दर्द, सांस की गंध और मसूड़ों की समस्‍या से छुटकारा मिलता है। इसके लिए आप जायफल के तेल को कॉटन की सहायता से मुंह के प्रभावित हिस्‍से पर लगा सकते हैं।