17.6.26

“करेला Health Benefits: मधुमेह से सौंदर्य तक”



1. करेला का परिचय

करेला एक बेलनुमा पौधा है, जो गर्म और उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में आसानी से उगता है। इसके फल का स्वाद कड़वा होता है, लेकिन यही कड़वाहट इसे औषधीय गुणों से भरपूर बनाती है। आयुर्वेद में करेला को “कषाय रस प्रधान” माना गया है। इसमें विटामिन A, C, आयरन, कैल्शियम, फॉस्फोरस और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।

2. करेला और मधुमेह

  • करेला को प्राकृतिक इंसुलिन कहा जाता है।

  • इसमें चारांटिन (Charantin) और पॉलिपेप्टाइड‑P जैसे तत्व होते हैं, जो रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

  • नियमित रूप से करेले का जूस या पत्तियों का काढ़ा लेने से टाइप‑2 डायबिटीज़ के रोगियों को लाभ मिलता है।

  • करेला डायबिटीज़ में उपयोग

उपयोग विधियाँ:

  1. पत्तियों का काढ़ा — 6 चम्मच पत्तियाँ, 2 गिलास पानी, 15 मिनट उबालें।

  2. सूखा करेला पाउडर — 3‑6 ग्राम दिन में दो बार।

  3. ताज़ा जूस — 10‑15 मिलीलीटर प्रतिदिन।

3. वजन घटाने में करेला

  • करेला इंसुलिन को सक्रिय करता है, जिससे शुगर फैट में परिवर्तित नहीं होती।

  • 100 ग्राम करेले में केवल 34 कैलोरी होती है।

  • नींबू के रस के साथ करेले का जूस पीने से वजन तेजी से घटता है।

  • करेला वजन घटाने में

4. हृदय स्वास्थ्य और कोलेस्ट्रॉल

  • करेला LDL (खराब कोलेस्ट्रॉल) को कम करता है।

  • HDL (अच्छा कोलेस्ट्रॉल) बढ़ाता है।

  • इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कम होता है।

  • करेला हृदय स्वास्थ्य

5. करेला की चाय

  • लीवर डिटॉक्स, आंतों की सफाई और अपच दूर करने में सहायक।

  • विटामिन C और विटामिन A से भरपूर।

  • आंखों की रोशनी और इम्यूनिटी के लिए लाभकारी।

  • करेला की चाय

बनाने की विधि: करेले के स्लाइस उबालें, छानें, शहद मिलाकर सेवन करें।

6. त्वचा और सौंदर्य लाभ

  • करेला त्वचा को जवां और चमकदार बनाता है।

  • एंटीबैक्टीरियल गुण मुंहासे और संक्रमण से बचाते हैं।

  • संतरे के रस के साथ मिलाकर क्लीनज़र के रूप में उपयोग करें।

  • करेला त्वचा लाभ

7. रक्त शोधन और रोग प्रतिरोधक क्षमता

  • करेला प्राकृतिक रक्त शोधक है।

  • एंटीऑक्सीडेंट्स और रोगाणुरोधी गुण शरीर को शुद्ध करते हैं।

  • त्वचा रोग, फोड़े‑फुंसी और रक्त विकार में लाभकारी।

  • करेला रक्त शोधन

8. अन्य रोगों में करेला

  • कफ और पाचन शक्ति बढ़ाने में सहायक।

  • लकवा, उल्टी‑दस्त, हैजा, लीवर रोग, पीलिया, गठिया और दमा में लाभकारी।

  • करेला अन्य रोगों में

9. सावधानियाँ

  • जिगर और गुर्दे की बीमारी वाले लोग करेले का सेवन न करें।

  • गर्भवती महिलाओं को भी अत्यधिक सेवन से बचना चाहिए।

  • करेला सावधानियाँ

“करेला — स्वाद में कड़वा लेकिन सेहत में अमृत! मधुमेह नियंत्रण, वजन घटाने, कोलेस्ट्रॉल कम करने, त्वचा की सुंदरता और रक्त शोधन में करेला है रामबाण। इस वीडियो में जानिए करेले के औषधीय गुण, उपयोग विधियाँ और सावधानियाँ।”

*औषधीय गुणों से भरपूर हारसिंगार(पारिजात) सायटिका ,संधिवात में रामबाण असर पौधा

*घुटनों के बीच गेप बढ़ना ग्रीस खत्म होना दर्द होने के उपचार

*प्रोस्टेट ग्रंथि वृद्धि से मूत्रबाधा का 100%सफल इलाज

*किडनी की पथरी का अचूक हर्बल इलाज ,Kidney stone

*किडनी खराब :वृक्क अकर्मण्यता की अचूक हर्बल औषधि:Kidney Failure

*पित्ताशय की पथरी (Gallstones) का रामबाण हर्बल उपचार

*अश्वगंधा अनगिनत रोगों मे रामबाण: स्त्री-पुरुषों के गुप्त रोगों का समाधान

*गठिया,संधिवात के अनुभूत आयुर्वेदिक घरेलू उपचार // Gout, Arthritis Treatment

*स्त्री रोगों की मुख्य घरेलू औषधियाँ

*संधिवात,कमरदर्द,गठिया, साईटिका के अचूक हर्बल उपचार

*गुर्दे खराब की रामबाण औषधि:Kidney failure medicine

14.6.26

पसीना और बदबू से परेशान? जानिए पैरों की देखभाल के नुस्खे

 


प्रस्तावना

पैरों के तलवे हमारे शरीर का वह हिस्सा हैं, जिन पर पूरा शरीर का भार टिका होता है। जब तलवे स्वस्थ रहते हैं तो चलना-फिरना, दौड़ना और रोज़मर्रा के काम करना आसान हो जाता है। लेकिन यदि तलवों में जलन, दर्द या अत्यधिक पसीना आने लगे तो यह न केवल असुविधा पैदा करता है बल्कि कई गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकता है। मेडिकल भाषा में शरीर के किसी हिस्से में अत्यधिक पसीना आने को हाइपरहाइड्रोसिस कहा जाता है। यह सामान्य गर्मी से जुड़ा पसीना नहीं होता बल्कि शरीर के अंदरूनी असंतुलन का परिणाम होता है।

❤️ दिल से जुड़ी बीमारियाँ और तलवों में पसीना

दिल हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। जब दिल कमजोर होता है या उसमें कोई रोग उत्पन्न होता है, तो शरीर कई तरह से संकेत देता है। अचानक तेज पसीना आना, खासकर तलवों में, दिल की बीमारी का एक चेतावनी संकेत हो सकता है।

  • दिल की धड़कन असामान्य होने पर तलवों में पसीना आता है।

  • ब्लड प्रेशर असंतुलित होने पर भी तलवों में नमी महसूस होती है।

  • हार्ट अटैक से पहले कई बार रोगी को तलवों में ठंडा पसीना आता है।

🔎 तलवों में पसीने के अन्य कारण

दिल की बीमारियों के अलावा भी कई कारण हैं जिनसे तलवों में पसीना आता है:

  • फंगल इंफेक्शन

  • दवाइयों का अधिक सेवन

  • सांस लेने में कठिनाई

🧬 थायरॉइड और तलवों का पसीना

थायरॉइड ग्रंथि गले में स्थित होती है और यह हार्मोन का उत्पादन करती है। जब इसमें असंतुलन होता है तो शरीर के कई हिस्सों पर असर पड़ता है।

  • थायरॉइड बढ़ने पर तलवों में पसीना अधिक आता है।

  • हार्मोन असंतुलन से खाना निगलने और बोलने में कठिनाई होती है।

  • महिलाओं में थायरॉइड की संभावना अधिक होती है।

🦠 संक्रमण और तलवों में पसीना

संक्रमण भी एक बड़ा कारण है।

  • बैक्टीरियल संक्रमण से तलवों में नमी और बदबू आती है।

  • फंगल संक्रमण से तलवों में खुजली और पसीना बढ़ जाता है।

  • वायरल संक्रमण से शरीर का तापमान असंतुलित होता है और तलवों में पसीना आता है।

🍬 डायबिटीज और तलवों का पसीना

डायबिटीज में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है जिससे नसें कमजोर हो जाती हैं।

  • खाना खाने के बाद तलवों में पसीना आना डायबिटीज का संकेत हो सकता है।

  • हाई ब्लड शुगर से किडनी और नसों पर असर पड़ता है।

  • डायबिटीज रोगियों में तलवों का पसीना आम समस्या है।

👩‍🦳 मेनोपॉज और तलवों का पसीना

मेनोपॉज के दौरान महिलाओं में हार्मोनल बदलाव होते हैं।

  • पीरियड्स बंद होने पर हॉट फ्लैशेज और पसीना बढ़ जाता है।

  • तलवों में पसीना आना मेनोपॉज का सामान्य लक्षण है।

🌿 घरेलू उपाय और नुस्खे

  1. बड़ी सौंफ – शरीर का तापमान सामान्य रखती है।

  2. बेकिंग सोडा पेस्ट – पीएच संतुलित कर पसीना कम करता है।

  3. एप्पल साइडर सिरका – रोगाणुरोधी गुणों से पसीना और दुर्गंध रोकता है।

  4. नमक का पानी – पैरों को भिगोने से पसीना और बदबू कम होती है।

  5. तेज पत्ता – पैरों में लगाने से पसीना घटता है।

  6. नींबू का रस – कसैले गुणों से पसीना नियंत्रित करता है।

  7. चंदन पाउडर – शीतलता और कसैले गुणों से पसीना रोकता है।

  8. कपूर – ठंडी तासीर से पसीना कम करता है।

  9. काली चाय – टैनिन की वजह से प्राकृतिक कसैला प्रभाव डालती है।

🧘 जीवनशैली में बदलाव

  • पैरों को हमेशा साफ और सूखा रखें।

  • कॉटन के मोज़े पहनें।

  • तंग जूते पहनने से बचें।

  • संतुलित आहार लें और पानी पर्याप्त मात्रा में पिएं।

  • नियमित व्यायाम करें।

निष्कर्ष

पैरों के तलवों में पसीना आना कई कारणों से हो सकता है। यह कभी-कभी सामान्य होता है लेकिन यदि यह लगातार बना रहे तो यह गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकता है। समय पर जांच और सही इलाज से इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

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13.6.26

मखाना: रहस्यमयी सुपरफूड जो बदल दे आपकी सेहत की कहानी

 


प्रस्तावना

क्या आप जानते हैं कि छोटे‑से दिखने वाले मखाने में कितनी बड़ी शक्ति छिपी है? भारत में इसे "फॉक्स नट्स" या "लोटस सीड्स" कहा जाता है। यह न केवल स्वादिष्ट स्नैक है बल्कि आयुर्वेद में इसे औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। मखाना को सुपरफूड का दर्जा इसलिए मिला है क्योंकि इसमें प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स की भरपूर मात्रा होती है।

मखाने का इतिहास और परंपरा

मखाने का उपयोग भारत में सदियों से होता आया है। बिहार के मिथिला क्षेत्र को मखाने की खेती के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। धार्मिक अनुष्ठानों और व्रत‑उपवास में मखाने का सेवन शुभ माना जाता है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसे वात, पित्त और कफ को संतुलित करने वाला आहार बताया गया है।

पोषण तत्व

मखाने में पाए जाने वाले प्रमुख पोषक तत्व:

  • प्रोटीन – शरीर की कोशिकाओं को मजबूत करता है।

  • फाइबर – पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है।

  • कैल्शियम – हड्डियों और दांतों को मजबूती देता है।

  • मैग्नीशियम – हृदय और नसों के लिए लाभकारी।

  • आयरन – खून की कमी दूर करता है।

  • एंटीऑक्सीडेंट्स – शरीर को टॉक्सिन्स से मुक्त करते हैं।

मधुमेह में मखाना

डायबिटीज़ के मरीजों के लिए मखाना आदर्श स्नैक है। इसमें गुड फैट्स होते हैं और सैचुरेटेड फैट्स की मात्रा बहुत कम होती है। यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है और हार्ट हेल्थ को भी बेहतर बनाता है।

तनाव कम करने में मखाना

मानसिक तनाव आज की सबसे बड़ी समस्या है। मखाने में मौजूद मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स तनाव को कम करने में सहायक होते हैं। रात को दूध के साथ मखाना खाने से नींद अच्छी आती है और मानसिक शांति मिलती है।

हड्डियों और दांतों की मजबूती

मखाना और दूध का संयोजन हड्डियों को मजबूत करता है। इसमें मौजूद कैल्शियम गठिया और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं से बचाव करता है। बच्चों और बुजुर्गों दोनों के लिए यह बेहद लाभकारी है।

कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण

मखाने में फाइबर की उच्च मात्रा और लो सोडियम कंटेंट होता है। यह हाई कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करता है और हृदय रोगों से बचाव करता है।

वजन घटाने में सहायक

जो लोग वजन कम करना चाहते हैं, उनके लिए मखाना बेहतरीन विकल्प है। इसमें फाइबर और प्रोटीन की भरपूर मात्रा होती है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और बार‑बार खाने की आदत कम होती है।

पाचन और कब्ज से राहत

फाइबर युक्त मखाना कब्ज की समस्या को दूर करता है। यह मल को भारी बनाता है और पेट को साफ रखने में मदद करता है।

शरीर को डिटॉक्स करना

मखाने में डिटॉक्सिफाइंग गुण होते हैं। यह शरीर से टॉक्सिन्स निकालकर स्किन और स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।

यौन स्वास्थ्य में लाभकारी

पुरुषों के लिए मखाना किसी औषधि से कम नहीं है। इसके सेवन से यौन स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और ऊर्जा स्तर बढ़ता है।

मखाना खाने के तरीके

  • खीर में डालकर

  • नमकीन स्नैक के रूप में

  • भुने हुए स्नैक

  • दूध के साथ

  • सब्जी या करी में

सावधानियां

  • अधिक मात्रा में सेवन न करें।

  • डायबिटीज़ के मरीज डॉक्टर की सलाह से सेवन करें।

  • बच्चों को सीमित मात्रा में दें।

निष्कर्ष

मखाना वास्तव में एक रहस्यमयी सुपरफूड है। यह न केवल स्वादिष्ट है बल्कि शरीर को मधुमेह, तनाव, हड्डियों की कमजोरी और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं से बचाता है। यदि आप स्वस्थ जीवनशैली अपनाना चाहते हैं तो मखाना को अपनी डाइट में ज़रूर शामिल करें।

*औषधीय गुणों से भरपूर हारसिंगार(पारिजात) सायटिका ,संधिवात में रामबाण असर पौधा

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*गठिया,संधिवात के अनुभूत आयुर्वेदिक घरेलू उपचार // Gout, Arthritis Treatment

*स्त्री रोगों की मुख्य घरेलू औषधियाँ

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12.6.26

पीला कनेर : आयुर्वेद का चमत्कारी पौधा | कब्ज, त्वचा रोग, जोड़ों का दर्द और नपुंसकता का इलाज

 

🌼 पीला कनेर : आयुर्वेद का चमत्कारी पौधा

परिचय

आयुर्वेद में हजारों वर्षों से जड़ी-बूटियों का उपयोग रोगों के उपचार में किया जाता रहा है। इन जड़ी-बूटियों में से एक है पीला कनेर। कनेर के फूल कई रंगों में पाए जाते हैं – लाल, सफेद और पीले। लेकिन पीला कनेर विशेष रूप से औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है। गाँवों और कस्बों में लोग इसे "करवीर" या "कनेर" नाम से जानते हैं।

यह पौधा देखने में सुंदर होता है, इसके फूल पीले रंग के होते हैं और घर-आँगन की शोभा बढ़ाते हैं। लेकिन इसकी असली ताकत इसके औषधीय गुणों में छिपी है। आयुर्वेद में इसे त्वचा रोग, कब्ज, बुखार, मलेरिया, जोड़ों के दर्द, मासिक धर्म की समस्या और यहाँ तक कि नपुंसकता जैसी गंभीर समस्याओं में भी उपयोगी बताया गया है।

  • Grow a Vibrant Yellow Oleander Plant: Care Tips & Guide
  • Yellow Oleander – Forestry.com

🌿 पीले कनेर के प्रमुख औषधीय उपयोग

कब्ज की समस्या

आजकल कब्ज एक आम समस्या है। पीले कनेर की पत्तियों और छाल का काढ़ा बनाकर पीने से कब्ज दूर होती है।

  • तरीका: पत्ते और छाल को पानी में उबालकर काढ़ा तैयार करें।

  • लाभ: पेट साफ होता है और मल त्याग आसान हो जाता है।

मलेरिया और मिर्गी

मलेरिया से पीड़ित लोगों को पीले कनेर का काढ़ा लाभ देता है। मिर्गी के रोगियों को भी इससे राहत मिल सकती है। ⚠️ लेकिन ध्यान रहे – हर व्यक्ति की शारीरिक तासीर अलग होती है। इसलिए इसका सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करें।

त्वचा रोग

  • मस्से, दाग-धब्बे और दाद में कनेर की छाल का पेस्ट लगाना लाभकारी है।

  • खुजली और चर्म रोगों में कनेर के पत्तों से बने तेल का लेप करने से आराम मिलता है।

  • कुष्ठ रोग में भी कनेर का उपयोग किया जाता है।

बुखार

जिन लोगों को बार-बार बुखार आता है, वे कनेर का काढ़ा पी सकते हैं। इससे शरीर की गर्मी संतुलित होती है और बुखार कम होता है।

जोड़ों और पीठ दर्द

  • कनेर के पत्तों को पीसकर तेल में मिलाकर लेप करने से जोड़ों का दर्द दूर होता है।

  • फूलों को मीठे तेल और जैतून के तेल में मिलाकर मालिश करने से पीठ और बदन दर्द में आराम मिलता है।

लिंग की कमजोरी

पुरुषों में स्तंभन दोष (इरेक्शन की कमजोरी) दूर करने के लिए सफेद और पीले कनेर की जड़ से बने तेल का उपयोग किया जाता है।

  • नियमित मालिश से नसों की कमजोरी दूर होती है।

  • दामोदर चिकित्सालय द्वारा विकसित हर्बल औषधि भी इस समस्या में लाभकारी बताई जाती है। 📞 संपर्क: 9826795656

मासिक धर्म की परेशानी

महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान दर्द और बेचैनी को कम करने के लिए पीले कनेर के फूलों का काढ़ा उपयोगी है।

सिर दर्द

  • कनेर के फूल और आँवले को पीसकर माथे पर लेप करने से सिर दर्द दूर होता है।

  • सूखे पत्तों को सूंघने से छींक आती है और सिर दर्द कम होता है।

📊 सारणी : पीले कनेर के उपयोग और लाभ

समस्याउपयोगलाभ
कब्जपत्तों-छाल का काढ़ापेट साफ
मलेरियाकाढ़ाबुखार कम
त्वचा रोगछाल का पेस्टदाद, मस्से दूर
जोड़ों का दर्दपत्तों का तेलदर्द में राहत
पीठ दर्दफूलों का तेलबदन दर्द दूर
नपुंसकताजड़ का तेलस्तंभन दोष दूर
मासिक धर्मफूलों का काढ़ादर्द कम
सिर दर्दफूल-आँवला लेपसिर दर्द दूर

⚠️ सावधानियाँ

पीला कनेर औषधीय पौधा है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा नुकसान पहुँचा सकती है।

  • उल्टी, दस्त, सिर दर्द

  • पेट दर्द, जी मिचलाना

  • दिल की समस्या

  • कमजोरी

👉 इसलिए इसका उपयोग हमेशा सीमित मात्रा में और आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से ही करें।

🎯 निष्कर्ष

पीला कनेर केवल एक सुंदर फूल वाला पौधा नहीं है, बल्कि यह आयुर्वेद का खजाना है। सही मात्रा और सही तरीके से उपयोग करने पर यह कब्ज, मलेरिया, त्वचा रोग, बुखार, जोड़ों का दर्द, मासिक धर्म की समस्या और नपुंसकता जैसी कई परेशानियों में लाभ देता है।

लेकिन याद रखें – अति हर चीज़ की बुरी होती है। इसलिए इसका सेवन या प्रयोग हमेशा विशेषज्ञ की देखरेख में ही करें।

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*प्रोस्टेट ग्रंथि वृद्धि से मूत्रबाधा का 100%सफल इलाज

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*किडनी खराब :वृक्क अकर्मण्यता की अचूक हर्बल औषधि:Kidney Failure

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*अश्वगंधा अनगिनत रोगों मे रामबाण: स्त्री-पुरुषों के गुप्त रोगों का समाधान

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10.6.26

हरसिंगार (पारिजात): दिव्य औषधीय पौधा और इसके चमत्कारिक लाभ

 



हरसिंगार का पौधा आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है। इसके फल, पत्ते, बीज, फूल और यहां तक कि इसकी छाल तक का इस्तेमाल विभिन्न रोगों के उपचार में किया जाता है। हरसिंगार के फूलों से लेकर पत्त‍ियां, छाल एवं बीज भी बेहद उपयोगी हैं। इसकी चाय, न केवल स्वाद में बेहतरीन होती है बल्कि सेहत के गुणों से भी भरपूर है। इस चाय को आप अलग-अलग तरीकों से बना सकते हैं और सेहत व सौंदर्य के कई फायदे पा सकते हैं।
हरसिंगार की चाय बनाने के लिए इसकी दो पत्तियां और एक फूल के साथ तुलसी की कुछ पत्त‍ियां लीजिए और इन्हें 1 गिलास पानी में उबालें। जब यह अच्छी तरह से उबल जाए तो इसे छानकर गुनगुना ठंडा करके पी लें। आप चाहें तो स्वाद के लिए शहद या मिश्री भी डाल सकते हैं। यह खांसी में फायदेमंद है। जोड़ों में दर्द में हरसिंगार
हरसिंगार के 6 से 7 पत्ते तोड़कर इन्हें पीस लें। पीसने के बाद इस पेस्ट को पानी में डालकर तब तक उबालें जब तक कि इसकी मात्रा आधी न हो जाए। अब इसे ठंडा करके प्रतिदिन सुबह खालीपेट पिएं। नियमित रूप से इसका सेवन करने से जोड़ों से संबंधित अन्य समस्याएं भी समाप्त हो जाएगी। कई बीमारियाँ भगाने वाला पौधा हारसिंगार
खांसी - खांसी हो या सूखी खांसी, हरसिंगार के पत्तों को पानी में उबालकर पीने से बिल्कुल खत्म की जा सकती है। आप चाहें तो इसे सामान्य चाय में उबालकर पी सकते हैं या फिर पीसकर शहद के साथ भी प्रयोग कर सकते हैं।

साइटिका मे पारिजात

दो कप पानी में हरसिंगार के लगभग 8 से 10 पत्तों को धीमी आंच पर उबालें और आधा रह जाने पर इसे अंच से उतर लें। ठंडा हो जाने पर इसे सुबह शाम खाली पेट पिएं। एक सप्ताह में आप फर्क महसूस करेंगे।

बवासीर -

हरसिंगार को बवासीर या पाइल्स के लिए बेहद उपयोगी औषधि माना गया है। इसके लिए हरसिंगार के बीज का सेवन या फिर उनका लेप बनाकर संबंधित स्थान पर लगाना फायदेमंद है। परिजात के फायदे
त्वचा के लिए - 
हरसिंगार की पत्त‍ियों को पीसकर लगाने से त्वचा संबंधी समस्याएं समाप्त होती हैं। इसके फूल का पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाने से चेहरा उजला और चमकदार हो जाता है। दर्द - हाथ-पैरों व मांसपेशियों में दर्द व खिंचाव होने पर हरसिंगार के पत्तों के रस में बराबर मात्रा में अदरक का रस मिलाकर पीने से फायदा होता है।

प्रतिरोधक क्षमता -

हरसिंगार के पत्तों का रस या फिर इसकी चाय बनाकर नियमित रूप से पीने पर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और शरीर हर प्रकार के रोग से लड़ने में सक्षम होता है। इसके अलावा पेट में कीड़े होना, गंजापन, स्त्री रोगों में भी बेहद फायदेमंद है।

गठिया रोग के उपचार के लिए

आयुर्वेद के जाने माने वैध्य डॉ . दयाराम आलोक ने अनुसंधान किया है कि परिजात के पत्ते गठिया के रोगियों के लिए बहुत ही असरदार होता है। गठिया रोग यानी जिनको जोड़ो में दर्द रहता है या शरीर के किसी भाग में सूजन है तो उनके लिए परिजात के पत्ते बहुत ही लाभकारी होते हैं। गठिया रोग में परिजात के पत्ते का सेवन कुछ इस प्रकार करते हैं परिजात के 5-7 पत्तियां तोड़कर पीस लें और उसे एक गिलास पानी में डालकर इतना उबालें उबालें कि पानी की मात्रा आधा हो जाए इसका इसको ठंडा होने दें ठंडा होने के बाद इसे सुबह में खाली पेट पी लें इसे पीने के बाद कम से कम एक घंटा तक खाना ना खाएं।
बूढ़े लोगों में अर्थराइटिस (Arthritis) की समस्या आम बात है लेकिन आजकल यह वयस्कों को भी प्रभावित कर रही है। अर्थराइटिस के बेतहाशा दर्द और सूजन से निजात दिलाने में हरसिंगार की पत्तियां बहुत ही ज्यादा कारगर साबित होती हैं। अगर आप अर्थराइटिस से पीड़ित हैं तो हरसिंगार के पत्ते के पावडर को एक कप पानी में उबालकर और इसे ठंडा करके पीने से अर्थराइटिस के दर्द में राहत मिलता है। हरसिंगार का उपयोग प्रतिदिन करने से यह समस्या पूरी तरह दूर हो जाती है। जोड़ों का दर्द और गठिया में पारिजात
हरसिंगार, जिसे पारिजात भी कहा जाता है, गठिया के दर्द और सूजन को कम करने में मदद कर सकता है। इसके पत्तों का काढ़ा या लेप बनाकर जोड़ों पर लगाने से आराम मिलता है। हरसिंगार की चाय भी गठिया के लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकती है 

सूजन को करे कम

शरीर में किसी भी प्रकार की सूजन (inflammation) की समस्या होने पर अगर आप हरसिंगार के पत्तों का इस्तेमाल करते हैं, तो यह फायदेमंद होता है। क्योंकि इसमें मौजूद एंटी इंफ्लेमेटरी गुण सूजन को कम करने में मदद करता है। साथ ही इसका सेवन साइटिक के दर्द में भी आराम पहुंचता है।


तनाव

हरसिंगार का पौधा एंटीडिप्रेसेंट गुण से समृद्ध होता है। ऐसे में इसके सेवन से आप तनाव और अवसाद से खुद को बचा सकते हैं। इसके लिए आपको हरसिंगार की चाय का सेवन करना होगा, जो आपको रिलैक्स रखने में मदद कर सकती है। वहीं, इसकी मदद से आप अपना मूड भी ठीक कर सकते हैं 

सामान्य बुखार ,डेंगू ,मलेरिया में फायदेमंद 

हारसिंगार

डेंगू और चिकनगुनिया से जूझने वालों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया जाता है, लेकिन आप हरसिंगार के सेवन से इसके कुछ लक्षणों और इससे संबंधित परेशानियों को कम कर सकते हैं। इसमें एंटीवायरल, एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो आपको डेंगू और चिकनगुनिया मच्छरों के कारण होने वाले बुखार से बचाते हैं। साथ ही जोड़ों में होने वाले दर्द को कम कर सकते हैं। इसके अलावा, हरसिंगार डेंगू में घटने वाले प्लेटलेट काउंट को भी बढ़ाने में मदद कर सकता है

डायबिटीज ( Diabetes )

हरसिंगार का पेड़ डायबिटीज के रोगियों के लिए बहुत लाभदायक होता है। डायबिटीज से ग्रसित लोग परिजात के पत्ते का 15-25 मिली काढ़ा बनाकर इसका सेवन करें । हरसिंगार के पत्ते का काढ़ा कैसे बनाएं
हरसिंगार के पत्ते का काढ़ा बनाने के लिए सबसे पहले हम हरसिंगार का पत्ता 7-8 लेंगे फिर उसको पिसेगे पिसने बाद 1गिलास पानी ले फिर उस पेस्ट को अच्छा से घोल लें ओर उसे धीमी आंच पर पकाने वास्ते छोड़ दें जब पानी उबालकर आधा हो जाय तो उसे ठंडा होने के लिए छोड़ दें फिर उसे सूबह उठकर खाली पेट उस काढ़ा को पिले फिर उसका उपयोग 1 हपते करने जोड़ो का दर्द से राहत मिलती हैं। हरसिंगार के पत्ते का चाय कैसे बनाए
हरसिंगार की चाय बनाने के लिए दो कप पानी हरसिंगार के दो पत्ते तीन फूल के साथ तुलसी के साथ कुछ पत्ते तुलसी के साथ कुछ पत्तियां लीजिए इसको अच्छी तरह धीमी आंच पर उबालें आधी चाय उबलने के बाद गुड़ का छोटा सा टुकड़ा डालें और इससे 2 मिनट इसे धीमी आंच पर पकाएं 2 मिनट और यह चाय बनकर तैयार है यह चाय पीने से बुखार में राहत मिलती है यह चाय का सेवन प्रत्येक 2 दिन बाद करनी चाहिए।

हरसिंगार के पत्ते के फायदे

हरसिंगार का उपयोग अस्थमा रोगों के इलाज के लिए किया जाता है। अध्ययनों के अनुसार हरसिंगार के पत्ते में एंटी अस्थमैटिक और एंटी अलर्जिक गुण पाए जाते हैं जो कि अस्थमा रोग के इलाज के लिए काफी फायदेमंद है। आप इसका उपयोग करने के लिए हरसिंगार के फूलों तथा हरसिंगार के पत्ते का उपयोग कर सकते हैं, इन्हें सुखा कर पाउडर बना लें और इसका इस्तेमाल करें। हरसिंगार के पत्ते के फायदे शरीर की पाचन क्रियाओं में भी होते हैं , हरसिंगार के पत्तियों के रस के उपयोग से पेट में मौजूद भोजन को पचाने में बहुत ही मदद करता है, हरसिंगार में एंटी स्पस्मोडिक (Anti Spasmodic) गुण भी पाए जाते हैं जो कि शरीर की पाचन तंत्र को स्वास्थ्य और तंदुरुस्त रखने में मदद करते हैं । हरसिंगार में एंटीएंफ्लेमेट्री के गुण भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो कि गठिया मरीजों के लिए उपयोगी होता है ।हरसिंगार का अर्क गठिया को बढ़ने से रोक सकता है, हरसिंगार में एंटी आर्थराइटिस गुण भी मौजूद होते हैं ।"
*औषधीय गुणों से भरपूर हारसिंगार(पारिजात) सायटिका ,संधिवात में रामबाण असर पौधा

*घुटनों के बीच गेप बढ़ना ग्रीस खत्म होना दर्द होने के उपचार

*प्रोस्टेट ग्रंथि वृद्धि से मूत्रबाधा का 100%सफल इलाज

*किडनी की पथरी का अचूक हर्बल इलाज ,Kidney stone

*किडनी खराब :वृक्क अकर्मण्यता की अचूक हर्बल औषधि:Kidney Failure

*पित्ताशय की पथरी (Gallstones) का रामबाण हर्बल उपचार

*अश्वगंधा अनगिनत रोगों मे रामबाण: स्त्री-पुरुषों के गुप्त रोगों का समाधान

*गठिया,संधिवात के अनुभूत आयुर्वेदिक घरेलू उपचार // Gout, Arthritis Treatment

*स्त्री रोगों की मुख्य घरेलू औषधियाँ

*संधिवात,कमरदर्द,गठिया, साईटिका के अचूक हर्बल उपचार

*गुर्दे खराब की रामबाण औषधि:Kidney failure medicine

पाइल्स को जड़ से खत्म करने के घरेलू नुस्खे

 

बवासीर (पाइल्स): कारण, लक्षण, उपचार और रोकथाम



परिचय

बवासीर, जिसे अंग्रेज़ी में Hemorrhoids कहा जाता है, गुदा और मलाशय की नसों में सूजन की स्थिति है। यह रोग पुरुषों और महिलाओं दोनों में आम है, विशेषकर 50 वर्ष की आयु के बाद। बवासीर के कारण गुदा क्षेत्र में दर्द, खुजली, जलन, रक्तस्राव और गांठ जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।

बवासीर के प्रकार

बवासीर के लक्षण

बवासीर के कारण

घरेलू उपाय

आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक उपचार

आहार और पोषण

जीवनशैली में बदलाव

रोकथाम के उपाय

निष्कर्ष

बवासीर एक सामान्य लेकिन परेशान करने वाली समस्या है। सही आहार, जीवनशैली में सुधार और घरेलू उपायों से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। यदि लक्षण गंभीर हों तो चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है।

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प्रोस्टेट ग्रंथि वृद्धि: लक्षण, कारण और रामबाण हर्बल उपचार


 



प्रोस्टेट नामक ग्रंथि केवल पुरुषों के शरीर में ही पाई जाती है। यह ग्रंथि उम्र बढ़ने के साथ आकार में बड़ी हो जाने से पेशाब करने में तकलीफ होती है। यह तकलीफ आमतौर पर 60 साल के पश्चात् अर्थात् बड़ी उम्र के पुरुषों में ही पाई जाती है।
  प्रोस्टेट एक छोटी सी ग्रंथि होती है जिसका आकार अ्खरोट के बराबर होता है। यह पुरुष के मूत्राषय के नीचे और मूत्रनली के आस-पास होती है।

प्रोस्टेट किन पुरुषों में बढ़ता है?

उम्र 50 के बाद लगभग 50 प्रतिशत पुरुषोंमे और 80 उम्र के बाद 90 प्रतिशत पुरुषों में बढ़ता है।
जिनके पिता, दादा को यह विकार था, वे इस विकार से पिडीत हो सकते हैं।
मोटे लोग
हृदय रोग वाले लोग
टाइप-2 मधुमेह वाले लोग
जिन लोगों में व्यायाम की कमी होती है
कामोत्तेजना की समस्या वाले पुरुष

प्रास्टैट ग्रन्थि बढ़ने के लक्षण :

रात को बार-बार पेशाब करने जाना।
पेशाब की धार धीमी और पतली हो जाना।
पेशाब करने के प्रारंभ में थोड़ी देर लगना।
रुक रुककर पेशाब का होना।
पेशाब लगने पर जल्दी जाने की तीव्र इच्छा होना किन्तु, उस पर नियंत्रण नहीं होना और कभी-कभी कपड़ों में पेशाब हो जाना।
*पेशाब करने के बाद भी बूँद-बूँद पेशाब का आना।
 *जैसे ही प्रोस्टेट  ग्रन्थि  बढती है मूत्र नली पर दवाब बढता है और पेशाब में रुकावट की स्थिति बनने लगती है। *पेशाब पतली धार में ,थोडी-थौडी मात्रा में लेकिन बार-बार आता है कभी-कभी पेशाब टपकता हुआ बूंद बूंद जलन के साथ भी आता है। 
*कभी-कभी पेशाब दो फ़ाड हो जाता है। 
*रोगी मूत्र रोक नहीं पाता है। 
* अंडकोषों में दर्द उठता रहता है।
यह रोग ७० के उम्र के बाद उग्र हो जाता है। पेशाब पूरी तरह रूक जाने पर चिकित्सक केथेटर लगाकर यूरिन बेग में मूत्र का प्रावधान करते हैं।
 बुजुर्गों को परेशान करने वाली इस बीमारी को नियंत्रित करने वाले कुछ घरेलू उपचार यहां प्रस्तुत कर रहे हैं  जिनका समुचित प्रयोग करने से इस व्याधि से मुक्ति पाई जा सकती है।
* दिन में ३-४ लिटर पानी पीने की आदत डालें। लेकिन शाम को ६ बजे बाद जरुरत मुताबिक ही पानी पियें ताकि रात को बार बार पेशाब के लिये न उठना पडे।.

* अलसी को मिक्सर में चलाकर पावडर बनालें । यह पावडर २० ग्राम की मात्रा में पानी में घोलकर दिन में दो बार पीयें। बहुत लाभदायक उपचार है।
*कद्दू मे जिन्क पाया जाता है जो इस रोग में लाभदायक है। कद्दू के बीज की गिरी निकालकर तवे पर सेक लें। इसे मिक्सर में पीसकर पावडर बनालें। यह चूर्ण २० से ३० ग्राम की मात्रा में नित्य पानी के साथ लेने से प्रोस्टेट सिकुडकर मूत्र खुलासा होने लगता है।

* चर्बीयुक्त ,वसायुक्त पदार्थों का सेवन बंद कर दें। मांस खाने से भी परहेज करें।
*हर साल प्रोस्टेट की जांच कराते रहें ताकि प्रोस्टेट केंसर को प्रारंभिक हालत में ही पकडा जा सके।

*चाय और काफ़ी में केफ़िन तत्व पाया जात है। केफ़िन मूत्राषय की ग्रीवा को कठोर करता है और प्रोस्टेट रोगी की तकलीफ़ बढा देता है। इसलिये केफ़िन तत्व वाली चीजें इस्तेमाल न करें।
* सोयाबीन में फ़ायटोएस्टोजीन्स होते हैं जो शरीर मे टेस्टोस्टरोन का लेविल कम करते हैं। रोज ३० ग्राम सोयाबीन के बीज गलाकर खाना लाभदायक उपचार है।

*विटामिन सी का प्रयोग रक्त नलियों के अच्छे स्वास्थ्य के लिये जरूरी है। ५०० एम जी की ३ गोली प्रतिदिन लेना हितकर माना गया है। 
* दो टमाटर प्रतिदिन अथवा हफ़्ते में कम से कम दो बार खाने से प्रोस्टेट केंसर का खतरा ५०% तक कम हो जाता है। इसमें पाये जाने वाले लायकोपिन और एन्टिआक्सीडेंट्स केंसर पनपने को रोकते हैं।
*गोक्षुरा में मूत्रवर्धक गुण होते हैं जो मूत्र स्राव को बढ़ाते हैं और मूत्र प्रवाह के दौरान सूजन और जलन को कम करते हैं। गोक्षुरा में एंटीऑक्सीडेंट गुण भी होते हैं जो सूजन को भी कम करते हैं।

प्रोस्टेट खतरनाक कब होता है?

प्रोस्टेट का बढ़ना खतरनाक हो सकता है अगर यह मूत्र प्रवाह को बाधित करता है। इस स्थिति के कारण मूत्र प्रतिधारण, मूत्राशय में संक्रमण या यहां तक ​​कि गुर्दे में संक्रमण भी हो सकता है। कुछ मामलों में, गंभीर प्रोस्टेट वृद्धि मूत्र प्रवाह को पूरी तरह से अवरुद्ध कर सकती है या गुर्दे की विफलता का कारण बन सकती है।

प्रोस्टेट में क्या नहीं खाना चाहिए?

प्रोस्टेट संबंधी समस्याओं जैसे बढ़े हुए प्रोस्टेट या प्रोस्टेट कैंसर से बचने के लिए, आपको कुछ खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए। इन खाद्य पदार्थों में लाल मांस, प्रसंस्कृत मांस, डेयरी उत्पाद, शराब, कैफीन, और बहुत अधिक नमक शामिल हैं।
दामोदर हॉस्पिटल &रिसर्च सेंटर की हर्बल औषधि से  इस रोग को जड़ से खत्म  किया जा सकता है . 

सावधानी: 

किसी भी औषधि तत्व को इस्तेमाल करने से पहिले किसी चिकित्सा विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित  है |
चैनल को subscribe  करना न भूलें | धन्यवाद आभार !

विशिष्ट परामर्श-


प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने मे हर्बल औषधि सर्वाधिक कारगर साबित हुई हैं| यहाँ तक कि लंबे समय से केथेटर नली लगी हुई मरीज को भी केथेटर मुक्त होकर स्वाभाविक तौर पर खुलकर पेशाब आने लगता है| प्रोस्टेट ग्रंथि के अन्य विकारों (मूत्र    जलन , बूंद बूंद पेशाब टपकना, रात को बार -बार  पेशाब आना,पेशाब दो फाड़)  मे रामबाण औषधि है|  केंसर की नोबत  नहीं आती| आपरेशन  से बचाने वाली औषधि हेतु वैध्य श्री दामोदर से
98267-95656
पर संपर्क कर सकते हैं|
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