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7.3.17

अम्लपित्त(एसिडिटी) रोग में घरेलू,आयुर्वेदिक उपचार

   तेजी से बदल रही लाइफ स्टाइल और फास्ट फूड कल्चर ने कई रोगों को बढ़ावा दिया है। एसिडिटी उन्हीं में से एक है। देर तक भूखे रहना, फास्ट फूड खाना, अनियमित दिनचर्या एसिडिटी के कुछ प्रमुख कारण हैं। एसिडिटी बढने के कई कारण होते हैं जैसे कि समय पर भोजन न करना। अजीर्ण होने पर भी गरिष्ठ भोजन करना। ज्यादा मिर्च-मसाले वाला भोजन का सेवन करना। भोजन करने के बाद दिन में सोना। चटपटे और बाजार के चीजों का अत्यधिक सेवन अर्थात जंक फूड बहुत ज्याद खाना। पानी कम पीना। ज्यादा देर तक खाली पेट रहना। इसके अलावा अधिक समय तक मानसिक रूप से तनावग्रस्त रहने से भी एसिडिटी बढ़ती है।
   एसिडिटी रोग या अम्लपित्त से अधिकतर कई लोग परेशान होते हैं। और उन्हें यह समझ में नहीं आता है कि वे क्या करें। खाना खाने के बाद खट्टी डकार व पेट में गैस आदि बनने लगती है। एसिडिटी होने पर आप किसी भी चीज का ठीक तरह से आंनंद नहीं उठा पाते हैं। 

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अम्लपित्त (एसिडिट) का कारण
जो लोग हमेशा विरोधी पदार्थ जैसे-दूध-मछली, घुइयां-पूड़ी, दूध-दही, खट्टा-मीठा, कड़वा-तिक्त आदि खाते रहते हैं, उनको अम्लपित्त का रोग बहुत जल्दी हो जाता है| इसके अलावा जो व्यक्ति दूषित भोजन, खट्टे पदार्थ, आमाशय में गरमी उत्पन्न करने वाले तथा पित्त को बढ़ाने वाले (प्रकुपित करने वाले) भोजन का सेवन करते हैं, उन्हें यह रोग होता है| अधिक धूम्रपान करने तथा शराब, गांजा, भांग, अफीम आदि का सेवन करने वाले लोगों को भी अम्लपित्त घेर लेता है|
भूख न होने पर भी खाना खाते रहना
बासी और वसायुक्त खाना खाने से
पेशाब को देर तक रोके रखना
चटपटे और खट्टे पदार्थों का सेवन करना
नशीली चीजों का सेवन अधिक करना।
अम्लपित्त/एसिडिटी के मुख्य लक्ष्ण

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भोजन का ठीक तरह से न पचना
थकवाट होना।
खट्टी डकारें आना
उबकाई आना
पेट में जलन होना
खाना खाने का मन न होना
खाना खाने के बाद उल्टी आना
नीला या हरा पित्त निकलना
जी मिचलाना
सीने में जलन
गले में जलन होना
घबराहट होना
सांस लेने में परेशानी
जैसे प्रमुख लक्ष्ण दिखाई देते हैं।

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अम्लपित्त (एसिडिट) की पहचान
इस रोग में भोजन ठीक से नहीं पचता| अचानक थकावट का अनुभव होता है| हर समय उबकाई आती रहती है| खट्टी डकारें आती हैं| शरीर में भारीपन मालूम पड़ता है| गले, छाती और पेट में जलन होती है| भोजन करने की बिलकुल इच्छा नहीं होती| जब पित्त बढ़ जाता है तो वह ऊपर ओर बढ़ने लगता है| उस समय पित्त की उल्टी हो जाती है| पित्त में हरा, पीला, नीला या लाल रंग का पतला पानी (पित्त) बाहर निकलता है| पित्त निकल जाने के बाद रोगी को चैन पड़ जाता है| कई बार खाली पेट भी पित्त बढ़ जाता है और उल्टी हो जाती है| इस रोग में हर समय जी मिचलाता रहता है|
एसिडिटी निवारक घरेलू नुस्खे -
गाजर व पेठा
गाजर, फालसे या पेठा आदि का सेवन किसी न किसी तरह खाने से अम्लपित्त ठीक हो जाती है।
लौंग का सेवन
खाना खाने के बाद सुबह और शाम के समय में एक.एक लौंग का सेवन करने से एसिडिटी यानि अम्लपित्त की समस्या ठीक होती है।

सेंधा नमक और काली मिर्च
सेंधा नमक और काली मिर्च को बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें और सुबह और शाम आधा.आधा चम्मच इसका का सेवन करें। इस उपाय से अम्लपित्त शांत हो जाता है।

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अजवाइन
एक नींबू के रस में पिसी हुई अजवाइन के साथ मिलाकर पानी में घोलकर पीने से अम्लपित्त शांत हो जाता है।अम्लपित्त (एसिडिट) का कारण
जो लोग हमेशा विरोधी पदार्थ जैसे-दूध-मछली, घुइयां-पूड़ी, दूध-दही, खट्टा-मीठा, कड़वा-तिक्त आदि खाते रहते हैं, उनको अम्लपित्त का रोग बहुत जल्दी हो जाता है| इसके अलावा जो व्यक्ति दूषित भोजन, खट्टे पदार्थ, आमाशय में गरमी उत्पन्न करने वाले तथा पित्त को बढ़ाने वाले (प्रकुपित करने वाले) भोजन का सेवन करते हैं, उन्हें यह रोग होता है| अधिक धूम्रपान करने तथा शराब, गांजा, भांग, अफीम आदि का सेवन करने वाले लोगों को भी अम्लपित्त घेर लेता है|
   एसिडिटी के लक्षणों में हैं सीने और छाती में जलन। खाने के बाद या प्रायरू सीने में दर्द रहता है, मुंह में खट्टा पानी आता है। इसके अलावा गले में जलन और अपचन भी इसके लक्षणों में शामिल होता है। जहां अपचन की वजह से घबराहट होती है, खट्टी डकारें आती हैं। वहीं खट्टी डकारों के साथ गले में जलन-सी महसूस होती है। यदि आपको एसिडिटी की समस्या है, तो आप इस दौरान होने वाले असहनीय दर्द से जरूर वाकिफ होंगे और इस दर्द से छुटकारा पाने के लिए दवाओं का इस्तेमाल भी करते होंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिना दवा लिए प्राकृतिक उपचार से एसिडिटी के दर्द से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है।

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अम्लपित्त (एसिडिट) की पहचान
इस रोग में भोजन ठीक से नहीं पचता| अचानक थकावट का अनुभव होता है| हर समय उबकाई आती रहती है| खट्टी डकारें आती हैं| शरीर में भारीपन मालूम पड़ता है| गले, छाती और पेट में जलन होती है| भोजन करने की बिलकुल इच्छा नहीं होती| जब पित्त बढ़ जाता है तो वह ऊपर ओर बढ़ने लगता है| उस समय पित्त की उल्टी हो जाती है| पित्त में हरा, पीला, नीला या लाल रंग का पतला पानी (पित्त) बाहर निकलता है| पित्त निकल जाने के बाद रोगी को चैन पड़ जाता है| कई बार खाली पेट भी पित्त बढ़ जाता है और उल्टी हो जाती है| इस रोग में हर समय जी मिचलाता रहता है|
अम्लपित्त (एसिडिट) के घरेलु नुस्खे इस प्रकार हैं:
धनिया, जीरा और गुनगुना पानी:
धनिया और जीरे का समभाग पीसकर चूर्ण बना लें| उसमें से आधा-आधा चम्मच चूर्ण दिन में चार बार गुनगुने पानी के साथ लें|

आंवला:
एक चम्मच आंवले का चूर्ण लेने से पेट में पित्त नहीं बनता|
इमली:
इमली के शरबत में शक्कर डालकर पिने से पित्त शान्त हो जाता है|
 

पुदीना, कालीमिर्च, नमक, धनिया और जीरा:

यदि गरमी में पित्त बढ़ जाए तो पुदीने के रस में जरा-सी कालीमिर्च, भुने हुए जीरे का चूर्ण, नमक तथा धनिया का चूर्ण मिलाकर सेवन करें|


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शहद, हरड़ और गुनगुना पानी:

एक चम्मच शहद में एक चुटकी हरड़ का चूर्ण मिलाकर चाट लें| ऊपर से गुनगुना पानी पिएं|
करौंदा, शहद और इलायची:

दो चम्मच करौंदे के रस में एक चम्मच शहद और एक लाल इलायची का चूर्ण मिलाकर सेवन करें|
सोंठ, धनिया और पानी:

सोंठ तथा धनिया 25-25 ग्राम लेकर पीस लें| इसकी तीन खुराक बनाएं| दिन में तीनों खुराक का पानी में काढ़ा बनाकर सेवन करें|
अदरक और सूखा धनिया:

अदरक एक छोटी गांठ और एक चम्मच सूखा धनिया लेकर चटनी बनाएं| सुबह-शाम इस चटनी का सेवन करने से पित्त शान्त हो जाता है|

यवक्षार और शहद:

1 ग्राम यवक्षार को शहद में मिलाकर तीन खुराक के रूप में सुबह, दोपहर और शाम को चाटें|

मूली और शक्कर:

मूली के दो चम्मच रस में शक्कर मिलाकर पीने से खट्टी डकारें आनी बंद हो जाती हैं|


थकान दूर करने के उपाय


गिलोय:

गिलोय के चूर्ण को चक्कर के साथ खाने से पित्त कम हो जाता है|

चना साग और पानी:

चने का साग पानी में भिगो दें| फिर थोड़ी देर बाद पानी सहित भाग को चबा जाएं|
गिलोय:
गिलोय के चूर्ण को चक्कर के साथ खाने से पित्त कम हो जाता है|
मुलेठी
मुलेठी का चूर्ण से बना काढ़ा पीने से अम्लपित्त शांत हो जाता है।
नारियल पानी
कच्चा नरियल का पानी पीते रहने से भी अम्लपित्त शांत हो जाता है।
मूली का रस
मिश्री को मूली के रस के साथ मिलाकर पीने से कुछ ही दिनों में अम्लपित्त रोग की समस्या दूर हो जाती है।
आलू का प्रयोग
उबला या सिका हुआ आलू नियमित खाते रहने से थोड़े ही दिनों में आपकी अम्लपित्त की समस्या दूर हो जाएगी।


करौंदा, शहद और इलायची:

दो चम्मच करौंदे के रस में एक चम्मच शहद और एक लाल इलायची का चूर्ण मिलाकर सेवन करें|
यवक्षार और शहद:
1 ग्राम यवक्षार को शहद में मिलाकर तीन खुराक के रूप में सुबह, दोपहर और शाम को चाटें|

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धनिया, जीरा और गुनगुना पानी:

धनिया और जीरे का समभाग पीसकर चूर्ण बना लें| उसमें से आधा-आधा चम्मच चूर्ण दिन में चार बार गुनगुने पानी के साथ लें|

पपीते का सेवन
पपीते के रस का सेवन रोज करें। क्योंकि यह अम्लपित्त को दबा देता है। जिससे अम्लपित्त नहीं बनता है।

अनार और अदरक

पांच ग्राम अनार का रस और पांच ग्राम अदरक के रस को बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से एसिडिटी खत्म होती है।
शहद, हरड़ और गुनगुना पानी:

एक चम्मच शहद में एक चुटकी हरड़ का चूर्ण मिलाकर चाट लें| ऊपर से गुनगुना पानी पिएं|

नींबू का प्रयोग

गुन गुने पानी में एक नींबू निचोड़ करए खाना खाने के एक घंटे के बाद पीने से अम्लपपित्त ठीक हो जाता है।

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सब्जियां और दाल
मूंग की दाल, चावल, परवल, घिया, हरा धनिया और टिंडे का सेवन किसी न किसी रूप में करते रहें।

नीबू और पानी:

आधे नीबू का रस एक गिलास पानी में मिलाकर पीने से पित्त में काफी आराम मिलता है|

कालीमिर्च और देशी घी:

*शीतपित की खराबी में 3 ग्राम कालीमिर्च के चूर्ण में दो चम्मच देशी घी मिलाकर सेवन करें|

अदरक और सूखा धनिया:

अदरक एक छोटी गांठ और एक चम्मच सूखा धनिया लेकर चटनी बनाएं| सुबह-शाम इस चटनी का सेवन करने से पित्त शान्त हो जाता है|
*नीम की छाल का चूर्ण या रात में भीगाकर रखी छाल का पानी छानकर पीना रोग को शांत करता है।

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अम्लपित्त रोग में किन चीजों से परहेज करना चाहिए-
इस रोग में कफ-पित्त नाशक पदार्थ तथा उबला पानी बहुत फायदेमंद है| परन्तु मट्ठे का सेवन न करें| पुरानी मूंग, पुराना जौ, परवल, अनार, आंवला, नारियल का पानी, धान की खील, पेठे का मुरब्बा, आंवले का मुरब्बा, पपीता आदि अम्लपित्त में लाभकारी हैं| बेसन तथा मैदे की बनी चीजें नहीं खानी चाहिए| गोभी, मूली, आलू, भसींड, टमाटर, बैंगन आदि सब्जियों का प्रयोग भी न करें| बासी, रखा हुआ भोजन, मिर्च-मसालेदार भोजन तथा देर से पचने वाली चीजें जैसे-खोया, रबड़ी, घुइयां, मिठाइयां, दालमोठ, पकौड़ी आदि का सेवन नहीं करना चाहिए|
तेज मिर्च मसाले वाली चीजों को ना खाएं।
शराब से दूर रहें।
अधिक गर्म काफी व चाय ना पीएं।
मांसाहार का सेवन ना करें
दही व छाछ का भी सेवन नहीं करना चाहिए।
उडद व तुवर की दाल भी ना खाएं।
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