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18.6.17

उच्च रक्तचाप का होम्योपैथिक व घरेलू उपचार // (High Blood Pressure Homeopathy Treatment)




  ह्रदय की प्रत्येक धड़कन के समय जो अधिकतम दबाव (प्रेशर) होता है, उसे ‘सिस्टोलिक प्रेशर’ कहते हैं, जिसमें हृदय के निचले भाग के कोष में आकुंचन होता है। दो धड़कनों के मध्य काल का जो समय होता है, उस वक्त कम-से-कम जो दबाव होता है, उसे ‘डायस्टोलिक प्रेशर’ कहते हैं। इन दोनों के संतुलित दबाव को ‘ब्लड-प्रेशर’ कहते हैं। 
   आम तौर से शिशु का रक्तचाप 80/50 मिमी. मरकरी, युवकों का 120/80 मिमी. मरकरी और प्रौढ़ों का 140/90 मिमी.मरकरी होना सामान्य स्थिति होती है। इसमें पहली बड़ी संख्या सिस्टोलिक और दूसरी छोटी संख्या डायस्टोलिक प्रेशर की सूचक होती है। एक सामान्य फार्मूला यह भी माना जाता है कि अपनी आयु के वर्षों में 90 जोड़ लीजिए।योगफल के आस-पास ही आपका सामान्य सिस्टोलिक प्रेशर होना चाहिए।

गुदा के रोग: भगंदर, बवासीर की होम्योपैथिक चिकित्सा 

    इस रोग में शरीर में रक्त का दबाव अस्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। इस रोग में सिर-दर्द, चक्कर आना, आलस्य, अनिद्रा, हृदय-शूल आदि लक्षण प्रकटते हैं । यह रोग मुख्यतः अधिक मानसिक श्रम, चिंता, उदररोग, नशा करना, मधुमेह, मोटापा, अधिक भोग आदि कारणों से होता है।उच्च रक्तचाप क्यों होता है : ‘शारीरिक कारण’ एवं*मानसिक कारण’।

शीघ्रपतन का होमियोपैथिक इलाज 

शारीरिक कारण :

च्च रक्तचाप अथवा हाई ब्लड प्रेशर अथवा हाइपरटेंशन के विषय में निम्न शारीरिक कारण मिल सकते हैं-
1. रक्तवाहिनी शिराओं का मार्ग संकीर्ण हो जाए अथवा शिराएं कठोर हो जाएं।
2. गुर्दे में कोई विकार या किसी व्याधि का होना।
3. लिवर के माध्यम से होने वाले रक्त प्रवाह में बाधा उपस्थित होने से पोर्टल वेन में दबावं उत्पन्न होने के कारण।
   रक्त में कोलेस्ट्राल नामक तत्त्व की मात्रा सामान्य स्तर से ज्यादा हो जाने पर या शरीर में चर्बी ज्यादा बढ़ने से (मोटापा होने से), पैतृक प्रभाव से, वृद्धावस्था के कारण आई निर्बलता से, गुदे या जिगर की खराबी होने आदि कारणों से उच्च रक्तचाप होने की स्थिति बनती है। ये सब शारीरिक कारण होते हैं।


कान दर्द,कान पकना,बहरापन के उपचार


मानसिक कारण : 
मनुष्य का मन बड़ा संवेदनशील होता है, उस पर जो व्यक्ति स्वभाव से भावुक भी होते हैं, उनकी संवेदनशीलता और भी ज्यादा बढ़ी हुई रहती है। ऐसे में यदि उनको कोई चिंता, शोक, क्रोध, ईष्र्या या भय का मानसिक आघात लगे, तो उनके दिल की धड़कन बढ़ जाती है, स्नायविक संस्थान तनाव से भर उठता है। अत:इस प्रकार के अनेकों मानसिक वेगों से बचना आवश्यक है।

उच्च रक्तचाप का लक्षण

सिरदर्द, सिर में भारीपन, तनाव एवं चक्कर आना, थकावट होना, चेहरे पर तनाव मालूम देना, हृदय की धड़कन बढ़ना, सांस लेने में असुविधा होना, स्वभाव में चिड़चिड़ापन होना, अनिद्रा, घबराहट, बेचैनी होना आदि लक्षण उच्च रक्तचाप के कारण हो सकते हैं।
शारीरिक कारण उत्पन्न करने वाला गलत आहार विहार न करके उचित और निश्चित समय पर सादा सुपाच्य आहार लें, पाचन शक्ति ठीक रखें, शरीर पर मोटापा न चढ़ने दें, ऐसे पदार्थों का सेवन न करें, जो रक्त में कोलेस्ट्राल और मोटापा बढ़ाते हों। श्रम के कार्य किया करें या व्यायाम अथवा योगासनों का नियमित अभ्यास किया करें। वजन घटाने के लिए फल, सलाद आदि का प्रयोग अधिक करें।

बचाव

  मानसिक कारण उत्पन्न करने वाले कारणों से बचकर रहें। चिन्ता न करके ‘चिन्तन’ करना चाहिए। ‘चिन्ता’ और ‘चिन्तन’ में बहुत फर्क होता है। मन की इच्छा के विपरीत और पीड़ादायक सोच-विचार करने को चिन्ता करना कहते हैं। योगासनों में ‘शवासन’ सर्वोत्तम रहता है।

एनाकार्डियम 30, 3x- 


यह दवा भी उक्त रोग को बहुत ही आसानी से दूर कर देती है । अधिकांश चिकित्सक 3x शक्ति दिये जाने के पक्ष में हैं लेकिन मैंने 30 शक्ति को भी उपयोगी पाया है ।

एकोनाइट 30—

रोगी का मन घबराया हो, बेचैनी हो, मृत्यु या समाज डर, चेहरा पीला पड़ जाये, नब्ज तेज चले, त्वचा गर्म और सूखी, सिर मानो फट जायेगा, सिर चकराये जिससे सिर को हिला भी न सके तो इन लक्षणों में देनी चाहिये ।

बेलाडोना 30, 200–

 सिर-दर्द, चक्कर आना, कनपटियों में दर्द, त्वचा गर्म, नाड़ी तेज तो यह दवा आश्चर्यजनक लाभ पहुँचाती है। रोगी का चेहरा और नेत्र लाल रहते हैं ।

औरतों मे सफ़ेद पानी जाने की प्रभावी औषधि 

क्रेटेगस Q-

यह दवा भी उच्च रक्तचाप को नियन्त्रित करती है । कमजोरी आ जाये, हाथ-पैर ठण्डे पड़ जायें, नब्ज तेज चले, साँस भी अनियमित हो जाये, निराशा हो तो प्रयोग करनी चाहिये ।

कोनियम मैकुलेटम 6, 200–

 बड़ी आयु के अविवाहित स्त्री-पुरुषों को उच्च रक्तचाप, मस्तिष्क में कमजोरी, स्मरणशक्ति दुर्बल, हृदय धड़कना तेज हो जाये, पैर कॉपने लगें जिससे खड़ा होना कठिन हो जाये, सिर में भारीपन के साथ दर्द, चक्कर आना, शरीर की ग्रन्थियों में सूजन, कामेच्छा को दबाने या अति भोग से रोग का होना- इन लक्षणों में दें ।

सँगुनेरिया Q, 200–

नाड़ियों का फूल जाना, हथेलियों और पैरों में जलन, सिर-दर्द जो सूर्य के अनुसार बढ़े व घटे, दर्द का दाँयी ओर अधिक होना, लेटने से दर्द में आराम हो, रजोनिवृत्ति के समय स्त्रियों को उच्च रक्तचापइन लक्षणों में देनी चाहिये ।

रोवोल्फिया सपॅन्टिना Q-

 यह उच्च रक्तचाप की अत्युत्तम दवा है । यह दवा मूत्र-वृद्धि करके रक्तचाप को नियन्त्रित करती है । इस दवा का नियमित सेवन करने से यह रोग निश्चित रूप से नष्ट हो जाता है । प्रायः प्रत्येक लक्षण में यह दवा दी जा सकती है ।

जेल्सीमियम 1M- 

रोगी को सिर में तनाव का दर्द, सिर भारी होना, घबराहट, सदैव तन्द्रा बनी रहे, हताशा, दु:खद समाचार सुनकर रोग बढ़नाइन लक्षणों में देनी चाहिये ।

उच्च रक्तचाप के घरेलू उपचार

प्राकृतिक चिकित्सा में तुलसी की पत्ती, नीम की पांच पत्ती एवं तीन काली मिर्च आपस में मिलाकर गोली बनाकर नित्य सेवन करें।
 
अमेरिका की एक महिला डाक्टर ए. विगमोर ने गेहूं के छोटे-छोटे पौधों का रस पिलाकर असाध्य से असाध्य उच्च रक्तचाप के रोगियों को ठीक करने का दावा किया है।
प्रात: काल मौन होकर भ्रमण करना फायदेमंद रहता है, किन्तु अधिक तेजी से न घूमें, वरना उच्च रक्तचाप बना रहेगा। उच्च रक्तचाप के रोगियों के लिए ‘शवासन ‘बहुपयोगी है।

शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 

कारपुरावल्‍ली -
कोलियस फोर्सखेल्‍ली, कारपुरवावल्‍ली पौधा है, जो दक्षिण भारत के कई घरों के बगीचों में पाया जाता है। शोध अध्‍ययन में पाया गया है कि धमनियों की नाजुक मांसपेशियों को इससे आराम मिलता है और इससे ब्‍लड़ प्रेशर भी कम होता है। यह भी कहा जाता है कि दिल को मजबूत बनाने में और धड़कन को कम करने में भी यह लाभकारी होता है।
लहसुन -
लहसुन उन रोगियों के लिए लाभकारी होता है जिनका ब्‍लड़प्रेशर हल्‍का सा बढ़ा रहता है। ऐसा माना जाता है कि लहसुन में एलिसीन होता है, जो नाइट्रिक ऑक्‍साइड के उत्‍पादन हो बढ़ाता है और मांसपेशियों की धमनियों को आराम पहुंचाता है और ब्‍लड़प्रेशर के डायलोस्टिक और सिस्‍टोलिक सिस्‍टम में भी राहत पहुंचाता है।
सहजन - 
सहजन का एक नाम ड्रम स्‍टीक भी होता है। इसमें भारी मात्रा में प्रोटीन और गुणकारी विटामिन और खनिज लवण पाएं जाते है। अध्‍ययन से पता चला है कि इस पेड़ के पत्‍तों के अर्क को पीने से ब्‍लड़प्रेशर के सिस्‍टोलिक और डायलोस्टिक पर सकारात्‍मक प्रभाव पड़ता है। इसे खाने का सबसे अच्‍छा तरीका इसे मसूर की दाल के साथ पकाकर खाना है।

नई और पुरानी खांसी के रामबाण उपचार 

आंवला - 
परम्‍परागत तौर पर माना जाता है कि आंवला से ब्‍लड़प्रेशर घटता है। वैसे आंवला में विटामिन सी होता है जो रक्‍तवहिकाओं यानि ब्‍लड़ वैसेल्‍स को फैलाने में मदद करता है और इससे ब्‍लड़प्रेशर कम करने में मदद मिलती है। आवंला, त्रिफला का महत्‍वपूर्ण घटक है जो व्‍यवसायिक रूप से उपलब्‍ध है।
फ्लैक्‍ससीड या अलसी - 
फ्लैक्‍ससीड या लाइनसीड में एल्‍फा लिनोनेलिक एसिड बहुतायत में पाया जाता है जो कि एक प्रकार का महत्‍वपूर्ण ओमेगा - 3 फैटी एसिड है। कई अध्‍ययनों में भी पता चला है कि जिन लोगों को हाइपरटेंशन की शिकायत होती है उन्‍हे अपने भोजन में अलसी का इस्‍तेमाल शुरू करना चाहिए। इसमें कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा भी बहुत ज्‍यादा नहीं होती है और ब्‍लड़प्रेशर भी कम हो जाता है।
मूली - 
यह एक साधारण सब्‍जी है जो हर भारतीय घर के किचेन में मिलती है। इसे खाने से ब्‍लड़प्रेशर की बढ़ने वाली समस्‍या का निदान संभव है। इसे पकाकर या कच्‍चा खाने से बॉडी में उच्‍च मात्रा में मिनरल पौटेशियम पहुंचता है जो हाई - सोडियम डाईट के कारण बढ़ने वाले ब्‍लड़प्रेशर पर असर ड़ालता है।
 
इलायची - 
बायोकैमिस्‍ट्री और बायोफिजिक्‍स के एक भारतीय जर्नल में एक अध्‍ययन प्रकाशित किया गया जिसमें बताया गया कि बेसिक हाइपरटेंशन के 20 लोग शामिल थे, जिन्‍हे 3 ग्राम इलायची पाउडर दिया गया। तीन महीने खत्‍म होने के बाद, उन सभी लोगों को अच्‍छा फील हुआ और इलायची के 3 ग्राम सेवन से उनको कोई साइडइफेक्‍ट भी नहीं हुआ। इसके अलावा, अध्‍ययन में यह भी बताया गया कि इससे ब्‍लड़प्रेशर भी प्रभावी ढंग से कम होता है। इससे एंटी ऑक्‍सीडेंट की स्थिति में भी सुधार होता है जबकि इसके सेवन से फाइब्रिनोजेन के स्‍तर में बिना फेरबदल हुए रक्‍त के थक्‍के भी टूट जाते है।

गुर्दों की सेहत   के प्रति रहें सतर्क

दालचीनी - 
दालचीनी केवल इंसान को केवल दिल की बीमारियों से नहीं बल्कि डायबटीज से बचाता है। ओहाई के एप्‍लाईड हेल्‍थ सेंटर में 22 लोगों पर अध्‍ययन किया गया, जिनमें से आधे लोगों को 250 ग्राम पानी में दालचीनी को दिया गया जबकि आधे लोगों को कुछ और दिया गया। बाद में यह पता चला कि जिन लोगों ने दालचीनी का घोल पिया था, उनके शरीर में एंटीऑक्‍सीडेंट की मात्रा ज्‍यादा अच्‍छी थी और ब्‍लड सुगर भी कम थी।
निम्न रक्तचाप : कारण और लक्षण
जब हृदय से धमनियों में प्रवाहित रक्त का दबाव कम होता है (सामान्य से कम), तो इसे निम्न रक्तचाप कहते हैं। इसके लक्षण हैं कमजोरी महसूस होना, मिचली आना और कभी-कभी जब रक्तचाप बहुत कम हो जाए, तो बेहोश मरीज को कम्पन भी महसूस होती है। निम्न रक्तचाप चोट के कारण रक्त बहने, पेट में अल्सर के फट जाने, नाक से गम्भीर रक्तस्राव हो जाने, विषाक्त भोजन खा लेने, रक्तक्षीणता होने आदि कारणों से हो सकता है।

चक्कर आना के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार 

निम्न रक्तचाप का उपचार
निम्न रक्तचाप के उपचार का पहला कदम उसका मूल कारण पता लगाना है। अगर रक्तचाप अचानक घट जाता है, तो इसका कारण रक्तस्राव होगा, जैसा कि जख्मी होने पर होता है। ऐसी हालत में सर्वश्रेष्ठ यही है कि मरीज को अस्पताल ले जाया जाए और वहां उसे खून चढ़ाया जाए। अगर यह रक्तक्षीणता के कारण है, तो इसका उपचार रक्तक्षीणता दूर करके ही हो सकता है। 15-15 मिलि. ब्रांडी में गर्म जल मिलाकर लेने से तात्कालिक रूप से रक्तचाप बढ़ जाता है।
   निम्न रक्तचाप के मरीज को संतुलित पौष्टिक आहार देना चाहिए, जिसमें प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट पर्याप्त हों। सूखे फल, पनीर, काला चना, आम, केला, सेब, अंगूर जैसे फल और सब्जियां, सभी प्रकार की फलियां मरीज को देना उत्तम रहता है। निम्न रक्तचाप के मरीज को कठोर श्रम वाले व्यायाम से बचना चाहिए।
होमियोपैथिक औषधियों में ‘विस्कम एल्बम’, ‘डिजिटेलिस’ आदि औषधियां लाभदायक एवं प्रभावी हैं।
बाई करवट लेटने पर दम घुटता है, सांस फूलना, धीमी नाड़ी, रक्तचाप कम, जोड़ों में दर्द, दोनों टांगों एवं नितम्बों में ऐंठन, दर्द, पूरा शरीर आग में जल रहा है ऐसा महसूस होना, बिस्तर में अधिक परेशानी (लेटने पर, मुख्य रूप से बाईं तरफ), जाड़े का मौसम अधिक कष्टप्रद आदि लक्षण मिलने पर ‘विस्कम एल्बम’ दवा का मूल अर्क 5-10 बूंद दिन में दो-तीन बार लेना चाहिए।
   हिलने-डुलने पर हृदयगति रुक जाएगी, तो निम्न रक्तचाप के रोगी को ‘डिजिटेलिस’ औषधि निम्नशक्ति में प्रयोग करनी चाहिए। एड्रीनेलीन 6 निम्न रक्तचाप की उत्तम औषधि है।






आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचा