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18.7.18

सिर्फ दवाई से ही नहीं रत्नों से भी होता है रोग निवारण //Disease prevention is not only with medicines

                                             


ज्योतिष शास्त्र में रत्नों द्वारा चिकित्सा का विधान है। हालांकि किसी भी रोग का इलाज आर्युवेदिक औषधियों और अंग्रेजी दवाओं से ही संभव है। लेकिन रत्न चिकित्सा भी इस तरह के रोगों के लिए लाभकारी सिद्ध होती है। ऐसे ही कुछ रोगों के इलाज के लिए रत्न बेहतर साबित हो सकते हैं।


रोग : सफेद दाग

कारण : सफेद दाग त्वचा संबंधी रोग के कारण होते हैं। इस रोग में त्वचा पर सफेद चकते बन जाते हैं। जब चंद्र राशि में चंद्र, मंगल, शनि का योग बनता है तब यह रोग उत्पन्न होता है। बुध की शत्रु राशि पर होने पर भी यह संभावना प्रबल हो जाती है।
निवारण : इस रोग की स्थिति में हीरा, पुखराज धारण करना चाहिए।
 
रोग : भूलने की बीमारी

कारण : इस रोग में बीती हुई बहुत सी घटनाएं या बातें याद नहीं रहती, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में जब लग्न एवं लग्नेश पाप युक्त होते हैं तो इस प्रकार की स्थिति होती है। सूर्य और बुध जब मेष राशि पर होता है तो स्मृति दोष उत्पन्न होता है। साढ़े साती के समय जब शनि की महादशा चलती है तो भूलनने की समस्याएं प्रकट होती है।
निवारण : रत्न चिकित्सा पद्धति के अनुसार ऐसे व्यक्तियों को मोती एवं माणिक्य धारण करना चाहिए।

रोग : दंत रोग

कारण : ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दांतो का स्वामी गुरु होता है। कुंडली में गुरु पीड़ित होने से दांतो की परेशानी से सामना करना पढ़ सकता है।
निवारण: मूंगा या पुखराज पहनकर इस रोग का इलाज कर सकते है, लोहे का कड़ा भी धारण किया जा सकता है।

रोग : उच्च रक्तचाप

कारण : चंद्रमा ह्दय का स्वामी है। चंद्रमा के क्षीण होने पर इस रोग की संभावना प्रकट होती है। पाप ग्रह, राहु, केतु जब चंद्रमा के साथ उपस्थित रहते हैं तब रक्तचाप का रोग होता है।

निवारण : इस रोग में मूंगा धारण करना चाहिए। चंद्र का रत्न मोती, मून स्टोन और ओपल भी धारण किया जा सकता है।

रोग : त्वचा रोग
कारण: शुक्र त्वचा का स्वामी ग्रह है, गुरु या मंगल क्षीण होने पर त्वचा संबंधी रोग( दाद, खाज, खुजली, एक्जीमा) उत्पन्न हो जाते हैं।
निवारण : इस रोग में स्फटिक, हीरा और मूंगा धारण करना चाहिए।

रोग : मधुमेह या डायबिटीज
कारण : ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मधुमेह यानी डायबिटीज का सामना उस स्थिति में होता है जब कर्क, वृश्चिक या मीन राशि में पाप ग्रह की संख्या दो या उससे अधिक रहती है। अष्टमेश एवं षष्ठेश दोनों एक दूसरे के विपरीत घरों में हो तो भी मधुमेह का रोग होता है।
निवारण : रत्न चिकित्सा के अनुसार मुगा या पुखराज धारण करना चाहिए।





आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचा



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