19.11.15

मूली के फायदे // Benefits of radishes



  सलाद हो या फिर सब्जी, मूली का प्रयोग ठंड के दिनों में हर घर में किया जाता है। सर्दी के मौसम मे मूली का भरपूर सेवन कीजिए, क्योंकि यह सेहतऔर सौंदर्य दोनों के लिए गुणकारी है। यहाँ बताएँगे सेहत के लिए मूली के फायदे -
गुर्दे संबंधी विकारों  के लिए मूली का रस और मूली दोनों ही रामबाण उपाय है। मूली के रस में सेंधा नमक मिलाकर नियमित रूप से पीने पर गुर्दे सा होते हैं और गुर्दे की पथरी भी समाप्त हो जाती है।
मूली आपकी भूख को बढ़ाती है और आपके पाचन तंत्र को बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करती है। गैस की परेशानी में खाली पेट मूली के टुकड़ों का सेवन फायदेमंद होता है।
दातोंका  पीलापन खत्म करना हो तो मूली के छोटे-छोटे टुकड़ों में नींबू का रस डालकर दांतों पर रगड़ें या कुछ देर तक चबाते रहें और थूक दें। इस तरह से दांतों का पीलापन कम होगा। मूली के रस का कुल्ला करने पर भी दांत मजबूत होंगे।
प्रतिदिन खाने के साथ मूली का प्रयोग करने से यकृत  और गुर्दे  स्वस्थ रहते हैं और मजबूत होते हैं। कब्ज या बवासीर की परेशानी में भी मूली बेहद उपयोगी  है। पेट संबंधी कई  समस्याओं का हल मूली के उपयोग से  हो सकता है|
 कैल्श‍ियम की भरपूर मात्रा होने से मूली आपकी हड्ड‍ियों को मजबूत करने में सहायक है। इसे खाने से जोड़ों में दर्द से भी राहत मिलती है और सूजन से भी।
रक्तसंचार को नियंत्रित करने के मामले में भी मूली का उपयोग किया  जाता है|। यह कोलेस्ट्रॉल भी कम करती है और ब्लडप्रेशर भी नियंत्रित करती है। डाइबिटीज के मरीजों के लिए मूली बेहतरीन दवा है।
लगातार हिचकी आने से परेशान हैं तो मूली के पत्ते आपकी मदद कर सकते हैं। मूली के मुलायम पत्तों का चबाकर चूसने से हिचकी आना तुरंत बंद हो जाएगा। इतना ही नहीं मुं‍ह की दुर्गंध से भी छुटकारा मिलेगा।
मोटापे से परेशान लोगों के लिए मूली लाभकारी है। इसके लिए मूली के रस में नींबू और सेंधा नमक मिलाकर पिएं। इसके सेवन से धीरे-धीरे मोटापा कम होने लगता है। दमा के मरीजों के लिए भी मूली के रस का काढ़ा पीना बहुत उपकारी है|
त्वचा को बेदाग, नर्म और मुलायम बनाने के लिए मूली के पत्तों का रस त्वचा पर लगाएं। इसके अलावा इसका पेस्ट बनाकर भी लगा सकते हैं। यह रूखी और खुश्क त्वचा से  को  मुलायम और बेदाग  बनाती है| निजात दिलाएगा और त्वचा को बेदाग बनाएगा। 


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12.11.15

अजवायन के रोग नाशक प्रयोग // Uses of Thyme to cure diseases


भारतीय खानपान में अजवाइन का प्रयोग सदियों से होता आया है। आयुर्वेद के अनुसार अजवाइन पाचन को दुरुस्त रखती है। यह कफ, पेट तथा छाती का दर्द और कृमि रोग में फायदेमंद होती है। साथ ही हिचकी, जी मचलाना, डकार, बदहजमी, मूत्र का रुकना और पथरी आदि बीमारी में भी लाभप्रद होती है।
सामान्य परिचय -
अजवाईंन की खेती सारे भारतवर्ष में होती है लेकिन पश्चिम बंगाल, दक्षिणी प्रदेश और पंजाब में अधिकता से पैदा होता है। इसके पौधे एक दो फुट ऊंचे और पत्ते छोटे आकार में कुछ कंटीले होते हैं। डालियों पर सफेद फूल गुच्छे के रूप में लगते हैं, जो पककर एवं सूख जाने पर अजवाइन के दानों में परिवर्तित हो जाते हैं। ये दाने ही हमारे घरों में मसाले के रूप में और औषधियों में उपयोग किए जाते हैं।
जरूरी सावधानियाँ -
1. अजवाइन पित्त प्रकृति वालों में सिर दर्द पैदा करती है और दूध कम करती है।
2. अजवाइन ताजी ही लेनी चाहिए क्योंकि पुरानी हो जाने पर इसका तैलीय अंश नष्ट हो जाता है जिससे यह वीर्यहीन हो जाती है। काढ़े के स्थान पर रस या फांट का प्रयोग बेहतर है।
3. अजवाइन का अधिक सेवन सिर में दर्द उत्पन्न करता है।
मात्रा (खुराक) : अजवाइन 2 से 5 ग्राम, तेल 1 से 3 बूंद तक ले सकते हैं।
गुण -
अजवाइन की प्रशंसा में आयुर्वेद में कहा गया है-“एका यमानी शतमन्न पाचिका” अर्थात इसमें सौ प्रकार के अन्न पचाने की ताकत होती है।
आयुर्वेदिक मतानुसार-
अजवाइन पाचक, तीखी, रुचिकारक (इच्छा को बढ़ाने वाली), गर्म, कड़वी, शुक्राणुओं के दोषों को दूर करने वाली, वीर्यजनक (धातु को बढ़ाने वाला), हृदय के लिए हितकारी, कफ को हरने वाली, गर्भाशय को उत्तेजना देने वाली, बुखारनाशक, सूजननाशक, मूत्रकारक (पेशाब को लाने वाला), कृमिनाशक (कीड़ों को नष्ट करने वाला), वमन (उल्टी), शूल, पेट के रोग, जोड़ों के दर्द में, वादी बवासीर (अर्श), प्लीहा (तिल्ली) के रोगों का नाश करने वाली गर्म प्रकृति की औषधि है।

यूनानी मतानुसार -
अजवाइन आमाशय, यकृत, वृक्क को ऊष्णता और शक्ति देने वाली, आर्द्रतानाशक, वातनाशक, कामोद्वीपक (संभोग शक्ति को बढ़ाने वाली), कब्ज दूर करने वाली, पसीना, मूत्र, दुग्धवर्द्धक, मासिक धर्म लाने वाली, तीसरे दर्जे की गर्म और रूक्ष होती है।
विभिन्न रोगों में अजवाइन से उपचार:-
1 पेट में कृमि (पेट के कीड़े) होने पर -
1) अजवायन के लगभग आधा ग्राम चूर्ण में इसी के बराबर मात्रा में कालानमक मिलाकर सोते समय गर्म पानी से बच्चों को देना चाहिए। इससे बच्चों के पेट के कीड़े मर जाते हैं। कृमिरोग में पत्तों का 5 मिलीलीटर अजवाइन का रस भी लाभकारी है।
2) अजवाइन को पीसकर प्राप्त हुए चूर्ण की 1 से 2 ग्राम को खुराक के रूप में छाछ के साथ पीने से पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।
3) अजवाइन के बारीक चूर्ण 4 ग्राम को 1 गिलास छाछ के साथ पीने या अजवाइन के तेल की लगभग 7 बूंदों को प्रयोग करने से लाभ होता है।
4) अजवाइन को पीसकर प्राप्त रस की 4 से 5 बूंदों को पानी में डालकर सेवन करने आराम मिलता है।
5) आधे से एक ग्राम अजवाइन का बारीक चूर्ण करके गुड़ के साथ मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें। इसे दिन में 3 बार खिलाने से छोटे बच्चों (3 से लेकर 5 साल तक) के पेट में मौजूद कीड़े समाप्त हो जाते हैं।
6) अजवाइन का आधा ग्राम बारीक चूर्ण और चुटकी भर कालानमक मिलाकर सोने से पहले 2 गाम की मात्रा में पिलाने से पेट में मौजूद कीड़े समाप्त हो जाते हैं।
7) अजवाइन का चूर्ण आधा ग्राम, 60 ग्राम छाछ के साथ और बड़ों को 2 ग्राम चूर्ण और 125 मिलीलीटर छाछ में मिलाकर पिलाने से लाभ होता है। अजवाइन का तेल 3 से 7 बूंद तक देने से हैजा तथा पेट के कीड़े नष्ट हो जाते हैं।
8) 25 ग्राम पिसी हुई अजवाइन आधा किलो पानी में डालकर रात को रख दें। सुबह इसे उबालें। जब चौथाई पानी रह जाये तब उतार कर छान लें। ठंडा होने पर पिलायें। यह बड़ों के लिए एक खुराक है। बच्चों को इसकी दो खुराक बना दें। इस तरह सुबह, शाम दो बार पीते रहने से पेट के छोटे-छोटे कृमि मर जाते हैं।
9) अजवाइन के 2 ग्राम चूर्ण को बराबर मात्रा में नमक के साथ सुबह-सुबह सेवन करने से अजीर्ण (पुरानी कब्ज), जोड़ों के दर्द तथा पेट के कीड़ों के कारण उत्पन्न विभिन्न रोग, आध्मान (पेट का फूलना और पेट में दर्द आदि रोग ठीक हो जाते हैं।
10) पेट में जो हुकवर्म नामक कीडे़ होते हैं, उनका नाश करने के लिए अजवाइन का बारीक चूर्ण लगभग आधा ग्राम तक खाली पेट 1-1 घंटे के अंतर से 3 बार देने से और मामूली जुलाब (अरंडी तैल नही दें) देने से पेट के कीड़े निकल जाते हैं। यह प्रयोग, पीलिया के रोगी और निर्बल पर नहीं करना चाहिए।


2. गठिया का दर्द -


1) जोड़ों के दर्द में पीड़ित स्थानों पर अजवाइन के तेल की मालिश करने से राहत मिलेगी।
2) गठिया के रोगी को अजवाइन के चूर्ण की पोटली बनाकर सेंकने से रोगी को दर्द में आराम पहुंचता है।
3) जंगली अजावयन को अरंड के तेल के साथ पीसकर लगाने से गठिया का दर्द  ठीक होता है।
4) अजवाइन का रस आधा कप में पानी मिलाकर आधा चम्मच पिसी सोंठ लेकर
ऊपर से इसे पीलें। इससे गठिया का रोग ठीक हो जाता है।
5) 2-3 ग्राम दालचीनी पिसी हुई में 3 बूंद अजवाइन का तेल डालकर सुबह-शाम
सेवन करें। इससे गठिया- दर्द् ठीक होता है।
3. मिट्टी या कोयला खाने की आदत -
एक चम्मच अजवाइन का चूर्ण रात में सोते समय नियमित रूप से 3 हफ्ते तक खिलाएं। इससे बच्चों की मिट्टी खाने की आदत छूट जाती है।
4. पेट में दर्द -
एक ग्राम काला नमक और 2 ग्राम अजवाइन गर्म पानी के साथ सेवन कराएं।
5. स्त्री रोगों में -
प्रसूता (जो स्त्री बच्चे को जन्म दे चुकी हो) को 1 चम्मच अजवाइन और 2 चम्मच गुड़ मिलाकर दिन में 3 बार खिलाने से कमर का दर्द दूर हो जाता है और गर्भाशय की शुद्धि होती है। साथ ही साथ भूख लगती है व शारीरिक शक्ति में वृद्धि होती है तथा मासिक धर्म की अनेक परेशानियां इसी प्रयोग से दूर हो जाती हैं। नोट : प्रसूति (डिलीवरी) के पश्चात योनिमार्ग में अजवाइन की पोटली रखने से गर्भाशय में जीवाणुओं का प्रवेश नहीं हो पाता और जो जीवाणु प्रवेश कर जाते हैं वे नष्ट हो जाते है। जीवाणुओं को नष्ट करने के लिए योनि-मार्ग से अजवाइन का धुंआ भी दिया जाता है तथा अजवाइन का तेल सूजन पर लगाया जाता है।
6. खांसी -
1) एक चम्मच अजवाइन को अच्छी तरह चबाकर गर्म पानी का सेवन करने से लाभ होता है।
2) रात में चलने वाली खांसी को दूर करने के लिए पान के पत्ते में आधा चम्मच अजवाइन लपेटकर चबाने और चूस-चूसकर खाने से लाभ होगा। 1 ग्राम साफ की हुई अजवाइन को लेकर रोजाना रात को सोते समय पान के बीडे़ में रखकर खाने से खांसी में लाभ मिलता है।
3) जंगली अजवाइन का रस, सिरका तथा शहद को एक साथ मिलाकर रोगी को रोजाना दिन में 3 बार देने से पुरानी खांसी, श्वास, दमा एवं कुक्कुर खांसी (हूपिंग कफ) के रोग में लाभ होता है।
4) अजवाइन के रस में एक चुटकी कालानमक मिलाकर सेवन करें। और ऊपर से गर्म पानी पी लें। इससे खांसी बंद हो जाती है।
5) अजवाइन के चूर्ण की 2 से 3 ग्राम मात्रा को गर्म पानी या गर्म दूध के साथ दिन में 2 या 3 बार लेने से भी जुकाम सिर दर्द, नजला, मस्तकशूल (माथे में दर्द होना) और कृमि (कीड़ों) पर लाभ होता है।
6) कफ अधिक गिरता हो, बार-बार खांसी चलती हो, ऐसी दशा में अजवाइन का बारीक पिसा हुआ चूर्ण लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग, घी 2 ग्राम और शहद 5 ग्राम में मिलाकर दिन में 3 बार खाने से कफोत्पित्त कम होकर खांसी में लाभ होता है।
7) खांसी तथा कफ ज्वर यानि बुखार में अजवाइन 2 ग्राम और छोटी पिप्पली आधा ग्राम का काढ़ा बनाकर 5 से 10 मिलीलीटर की मात्रा में सेवन करने से लाभ होता है।
8) 1 ग्राम अजवाइन रात में सोते समय मुलेठी 2 ग्राम, चित्रकमूल 1 ग्राम से बने काढ़े को गर्म पानी के साथ सेवन करें।
9) 5 ग्राम अजवाइन को 250 मिलीलीटर पानी में पकायें, आधा शेष रहने पर, छानकर नमक मिलाकर रात को सोते समय पी लें।
10) खांसी पुरानी हो गई हो, पीला दुर्गन्धमय कफ गिरता हो और पाचन क्रिया मन्द पड़ गई हो तो अजवाइन का जूस दिन में 3 बार पिलाने से लाभ होता है।
7. बिस्तर में पेशाब करना -
सोने से पूर्व 1 ग्राम अजवाइन का चूर्ण कुछ दिनों तक नियमित रूप से खिलाएं।
8. बार पेशाब आना-
1) 2 ग्राम अजवाइन को 2 ग्राम गुड़ के साथ कूट-पीसकर, 4 गोली बना लें, 3-3 घंटे के अंतर से 1-1 गोली पानी से लें। इससे बहुमूत्र रोग दूर होता है।
2) अजवाइन और तिल मिलाकर खाने से बहुमूत्र रोग ठीक हो जाता है।
3) गुड़ और पिसी हुई कच्ची अजवाइन समान मात्रा में मिलाकर 1-1 चम्मच रोजाना 4 बार खायें। इससे गुर्दे का दर्द भी ठीक हो जाता है।
4) जिन बच्चे को रात में पेशाब करने की आदत होती है उन्हें रात में लगभग आधा ग्राम अजवाइन खिलायें।

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आंवला के फायदे // Amla 's benefits

आंवले का फल हो या इसका जूस, सेहत के लिए कितना फायदेमंद है, इसका उल्लेख  आयुर्वेद से लेकर एलोपैथ तक विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों में आपको मिलेगा ही।
विभिन्न भाषाओं में नाम : संस्कृत- आमलकी धात्री। हिन्दी- आंवला। मराठी- काम्वट्ठा, आंवला। गुजराती- आँवला। कन्नड़-मलयालम- नेल्लि। तमिल- नेल्लिकाई। तेलुगू- उशीरिकई, उसरकाम। फारसी- आमलज। इंग्लिश- एम्बलिक माइरोबेलेन। लैटिन- एम्बिलिका आफिसिनेलिस। 
उपयोग -
 त्रिफला की 3 औषधियों में से आंवला एक है। इसे सूखे चूर्ण के रूप में अन्य औषधियों के साथ नुस्खे के रूप में और अचार, चटनी, मुरब्बे के रूप में सेवन किया जाता है। च्यवनप्राश, ब्राह्मरसायन, धात्री लौह और धात्री रसायन आदि आयुर्वेदिक योग तैयार करने में आंवला काम आता है। यह अनेक रोगों को नष्ट करने वाला पोषक, धातुवर्द्धक और रसायन है। आयुर्वेद ने इसे 'अमृतफल' कहा है। 
लिखता हूँ आंवला  के गुण जो आपकी सेहत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है-


मोटापा  मे हितकारी- 

आंवले के सेवन से शरीर में प्रोटीन का स्तर अधिक होता है और नाइट्रोजन का संतुलन रहता है जिससे फैट्स बर्न होता है और वजन घटाने में मदद मिलती है।

पेट के रोगों मे अमृत तुल्य -

आंवला में फाइबर की अधिकता है। यह गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक को साफ रखता है और शरीर के टॉक्सिन दूर रखता है। 

एसीडिटी  की समस्या मे लाभकारी-

इसका कसैला स्वाद शरीर में पाचन ठीक रखने वाले एन्जाइम्स को सक्रिय रहता है जिससे एसिडिटी कम करने में आसानी होती है।

डायबीटीज़  मे उपयोगी-

आंवले के सेवन से शरीर में शुगर का स्तर संतुलित रहता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स क्रीएटिनाइन के सीरम का स्तर सामान्य करता है और शरीर में ऑक्सीडेटिव तत्व को कम करता है जिससे ग्लूकोज नियंत्रित रहता है।

त्वचा के लिए उत्तम -

आंवले में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स अच्छी मात्रा में हैं जो त्वचा को सेहतमंद रखते हैं और शरीर के टॉक्स‌िन दूर करते हैं। इसके नियमित सेवन से मुहांसे और झुर्रियों की समस्या कम हो जाती है।


बालों के लिए  फायदेमंद-

आंवले में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स अच्छी मात्रा में हैं जो बालों के प्राकृतिक रंग को बरकरार रखते हैं और यह बालों के लिए प्राकृतिक कंडिशनर का काम करता है।

कोलेस्ट्रॉल घटाने के लिए -


इसमें विटामिन सी, अमीनो एसिड व पेसटिन हैं जो शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर घटाते हैं और गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाते हैं। यह आर्ट्रीज व रक्त कोशिकाओं में फैट्स जमने से भी बचाव करता है।

केन्सर से बचाव-

आंवला में एंटीऑक्सीडेंट्स अच्छी मात्रा में है जो कार्सिनोजेनिक कोशिकाओं को बढ़ने से रोकते हैं और कैंसर से बचाव करते हैं।

मूड ठीक रखता है-

आंवले में एंटीऑक्सीडेंट्स अधिक हैं जो दिमाग की कोशिकाओं को नष्ट होने से बचाते हैं और इसमें मौजूद नियोपाइनफ्राइन नामक तत्व मूड से जुड़ी क्रियाओं को नियंत्रित रखता है।

मोतियाबिंद ,रतौंधी मे लाभप्रद -

इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स रेटीन को ऑक्सीडाइज होने से बचाकते हैं। इसके नियमित सेवन से मोतियाबिंद व रतौंधी जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है। 

गठिया मे सेवनीय-


इसमें एंटी इन्फ्लामेट्री गुण है जो गठिया में होने वाले दर्द और सूजन को कम करने में मददगार है। इसमें मौजूद विटामिन सी शरीर में कैल्शियम के पाचन में मदद करता है जिससे ऑस्टियोपोरोसिस जैसे रोगों से बचना आसान हो सकता है।
एक साबुत आंवला दाल या शाक बनते समय शुरू से ही डाल दीजिए तो यह दाल-शाक बनने के दौरान पक जाएगा। आंवले को ठण्डा होने पर मसलकर इसमें शकर या मिश्री मिलाकर भोजन के साथ शाक की तरह खाते जाइए। इस प्रकार आप एक आंवला प्रतिदिन भोजन के साथ तब तक खाते रहिए जब तक आपको हरा व ताजा आंवला मिलता रहे।

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11.11.15

कष्ट साध्य रोगों की मंत्र -चिकित्सा //Spells doom diseases






कई बार देखा गया है कि कोई भयंकर रूप से बीमार हो गया है लेकिन सभी प्रकार की चिकित्सीय जांच किसी बीमारी का कोई लक्षण नहीं बताती तो हो सकता हो कि जातक प्रेत बाधा से पीड़ित हो।
किसी भी प्रेत बाधा से मुक्त होने लिए लगातार 21 दिन तक प्रतिदिन सूर्यास्त के समय गाय का आधा किलो दूध लें तथा उसमें नौ बूंद शुद्ध शहद और 10 बूंद गंगाजल डालें। शहद और गंगाजल मिश्रित दूध को शुद्ध बर्तन में रखकर शुद्ध वस्त्र पहनकर हर-हर गंगे बोलते हुए घर में छिड़काव करें।
छिड़काव करने के बाद मुख्य दरवाजे पर आकर शेष बचे हुए दूध को धार बांधकर वहीं पर गिरा दें और बोलें-
संकट कटे मिटे सब पीरा
जो सुमिरे हनुमत बलवीरा

यह क्रिया 21 दिन तक करते रहें।
अब हम कुछ मंत्रों का उल्लेख  करेंगे जो रोग व्याधि -मुक्ति  मे  सहायक होते हैं-

कैंसर रोग


ॐ नम: शिवाय शंभवे कर्केशाय नमो नम:

यह मंत्र किसी भी तरह के कैंसर रोग में लाभदायक होता है।

मस्तिष्क रोग


ॐ उमा देवीभ्यां नम:।

यह मंत्र मस्तिष्क संबंधी विभिन्न रोगों जैसे सिरदर्द, हिस्टीरिया, याददाश्त जाने आदि में लाभदायी माना जाता है।


मूत्राषय प्रदाह(cystitis)के सरल उपचार



आंखों के रोग

ॐ शंखिनीभ्यां नम:।

इस मंत्र से जातक को मोतियाबिंद सहित रतौंधी, नेत्र ज्योति कम होने आदि की परेशानी में लाभ मिलता है।

हृदय रोग

ॐ नम: शिवाय संभवे व्योमेशाय नम:।

हृदय संबंधी रोगों से अधिकांश लोग पीड़ित होते हैं। इसलिए अगर वे इस मंत्र का जप करें, तो उन्हें लाभ मिलता है।


वीर्य की मात्रा बढ़ाने और गाढ़ा करने के उपाय 


स्नायु रोग

ॐ धं धर्नुधारिभ्यां नम:।




कान संबंधी रोग

ॐ व्हां द्वार वासिनीभ्यां नम:।

कर्ण विकारों को दूर करने में यह मंत्र आश्चर्यजनक भूमिका निभाता है।



कफ संबंधी रोग




श्वास (दमा) रोग

ॐ नम: शिवाय संभवे श्वासेशाय नमो नम:।


पक्षाघात (लकवा) रोग

ॐ नम: शिवाय शंभवे खगेशाय नमो नम:।


इन मंत्रों की शक्ति से रोग भागते हैं मंत्रों में गजब की शक्ति होती है। इनका नियमित जप न केवल जातक को मानसिक शांति देता है, बल्कि उन्हें होने वाली गंभीर बीमारियों को भी दूर भगा सकता हैं अब आप कितना करते है यह तो आप पर निर्भर करता हैं। इसमे कोई अतिशोक्ति नही यदि कुछ रोग जड से सामाप्त हो जाये। 


फिशर होने के कारण लक्षण और उपचार


हर समस्या का बस एक उपाय : गायत्री मंत्र

वेदों का सर्वश्रेष्ठ मंत्र : गायत्री मंत्र

गायत्री मंत्र:-

ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।

शास्त्रों के अनुसार गायत्री मंत्र को वेदों का सर्वश्रेष्ठ मंत्र बताया गया है। इसके जप के लिए तीन समय बताए गए हैं। गायत्री मंत्र का जप का पहला समय है प्रात:काल, सूर्योदय से थोड़ी देर पहले मंत्र जप शुरू किया जाना चाहिए। जप सूर्योदय के पश्चात तक करना चाहिए।

मंत्र जप के लिए दूसरा समय है दोपहर का। दोपहर में भी इस मंत्र का जप किया जाता है।

तीसरा समय है शाम को सूर्यास्त के कुछ देर पहले मंत्र जप शुरू करके सूर्यास्त के कुछ देर बाद तक जप करना चाहिए। इन तीन समय के अतिरिक्त यदि गायत्री मंत्र का जप करना हो तो मौन रहकर या मानसिक रूप से जप करना चाहिए। मंत्र जप तेज आवाज में नहीं करना चाहिए।

लंबाई बढ़ाने के जबर्दस्त उपाय


गायत्री मंत्र का अर्थ -

सृष्टिकर्ता प्रकाशमान परामात्मा के तेज का हम ध्यान करते हैं, वह परमात्मा का तेज हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर चलने के लिए प्रेरित करें।

अथवा
उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अंत:करण में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करें।


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पित्त पथरी (gallstone) की अचूक औषधि 

सेक्स का महारथी बनाने और मर्दानगी बढ़ाने वाले अचूक नुस्खे