26.12.16

निकली हुई तोंद से मुक्ति पाने का रामबाण नुस्खा // how to overcome Protruding belly


आज के अनियमित जीवन और खान पान से कई लोग अपनी बढ़ी हुई तोंद से परेशान और शर्मिंदगी महसूस करते हैं| निकली हुई तोंद से छुटकारा पाने हेतु खीरे के जूस का एक रामबाण नुस्खा लिखता हूँ-
खीरे के जूस की सामग्री :
* दो खीरे
* दो छोटे चम्मच नींबू का रस
* अदरक का एक छोटा टुकड़ा
* दो छोटे चम्मच चीनी
*एक छोटा चम्मच- भुना जीरा पाउडर
* तीन से चार पुदीना पत्ती
* काला व सफेद नमक स्वादानुसार


पेट मे गेस बनने के घरेलू,आयुर्वेदिक उपचार 


बनाने की विधि -
खीरे को धोलें और छोटा छोटा काट कर छिलके सहित जूसर में डालें। अदरक और पुदीना भी जूसर में डाल दें और जूस निकाल लें। इसमें चीनी, नींबू का रस, भुना जीरा पाउडर, काला व सफेद नमक स्वादानुसार डालकर अच्छी तरह हिलाएं। फिर एक गिलास  झट से पी जाए और इसका कमाल देखे, देखते ही देखते तोंद हो जायेगी गायब |

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विशिष्ट परामर्श-


यकृत,प्लीहा,आंतों के रोगों मे अचूक असर हर्बल औषधि "उदर रोग हर्बल " चिकित्सकीय  गुणों  के लिए प्रसिद्ध है|पेट के रोग,लीवर ,तिल्ली की बीमारियाँ ,पीलिया रोग,कब्ज  और गैस होना,सायटिका रोग ,मोटापा,भूख न लगना,मिचली होना ,जी घबराना ज्यादा शराब पीने से लीवर खराब होना इत्यादि रोगों मे प्रभावशाली  है|बड़े अस्पतालों के महंगे इलाज के बाद भी  निराश रोगी  इस औषधि से ठीक हुए हैं| औषधि के लिए वैध्य दामोदर से 9826795656 पर संपर्क करें|





24.12.16

घमोरियों (अलाई) के रामबाण उपचार // home remedies for prickly heat


गर्मियों का मौसम शुरू होती ही अनेक बीमारियों का आगमन होने लगता है. गर्मी में लापरवाही के कारण शरीर में निर्जलीकरण,लू लगना, चक्कर आना ,घबराहट होना ,नकसीर आना, उलटी-दस्त, घमोरियां जैसी कई बीमारिया हो जाती हैं. गर्मियों में पसीना अधिक मात्रा में बहता है यदि पसीने को साफ न किया जाये तो वह सुख जाता है, जिसके कारण पसीने की ग्रंथियां बंद हो जाती है जो घमोरियों का रूप ले लेती हैं.
लक्षण:गर्मी के मौसम में बहुत छोटी छोटी ढ़ेर सारी लाल फुंसियां चेहरे या पीठ पर हो जाती है , ये ही घमोरियां ( ghamoriya ) होती है। इन्हे अलाई ( Alai ) भी कहते है। अंग्रेजी ये prickly heat कहलाती है। इनमे सुई चुभने जैसा अहसास होता है और खुजली भी चलती है। अधिकतर घमौरी हाथ पैरो, छाती तथा बगल में निकलती हैं. इस रोग के होने के कारण हमारे शरीर में खुजली होने के साथ हल्की सी चुभन भी होती है. यह एक प्रकार का चर्म रोग माना जाता हैं. जो गर्मियों के अतिरिक्त बरसात के दिनों में भी व्यक्तियों की त्वचा पर हो जाता है. गर्मी में हमारे शरीर को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचता है, जिसके कारण हम काफी परेशान रहते हैं तथा हमारा किसी काम में मन नहीं लगता, इसलिए इन सभी बीमारियों से बचने के लिए जितना हो सके गर्मी से बचने की कोशिश करनी चाहिए. घरेलू उपाय आजमा कर हम गर्मी में धूप से बच सकते है और अपने शरीर को स्वस्थ रख सकते हैं.

नीम और तुलसी का पेस्ट


कुछ नीम की तथा तुलसी की साफ़ पत्तियों को लेकर धो ले. अब इन पत्तियों को बारीक पीस कर इनका पेस्ट बन लीजिए और इस पेस्ट को घमोरियो वाले स्थान पर लगाए. सूखने के बाद धो दे. कुछ दिन ऐसा लगातार करे. नीम और तुलसी का पेस्ट लगाना फायदेमंद होता है.

अचूक औषधि है मुल्‍तानी मिट्टी

गर्मियों में होने वाली घमौरियों के उपचार में मुल्तानी मिट्टी अचूक औषधि है। घमौरी होने पर मुल्‍तानी मिट्टी का लेप बनाकर लगाने से लाभ मिलता है। या मुल्तानी मिट्टी में गुलाब जल मिलाकर घमौरियों पर लगाने से जल्द राहत मिलेगी। मुलतानी मिट्टी के लेप से घमौरी में होने वाली जलन और खुजली में भी राहत मिलती है।

स्वस्थ त्वचा का घरेलू नुस्खा

नमक, हल्दी और मेथी तीनों को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें, नहाने से पांच मिनट पहले पानी मिलाकर इनका उबटन बना लें। इसे साबुन की तरह पूरे शरीर में लगाकर 5 मिनट बाद नहा लें। सप्ताह में एक बार प्रयोग करने से घमौरियों, फुंसियों तथा त्वचा की सभी बीमारियों से मुक्ति मिलती है। साथ ही त्वचा मुलायम और चमकदार भी हो जाती है

मोतियाबिंद के  घरेलू प्राकृतिक उपचार 

संतरे के छिलके का प्रयोग

संतरा अनेक गुणों से भरपूर होता है साथ ही संतरे का छिलका भी अनेक रोगों का समाधान होता है. घमोरियां होने पर संतरे के छिलकों को सुखाकर उसका पाउडर बना लें. इस पाउडर में गुलाबजल मिलाकर अच्छी तरह मिला लें. अब इस मिश्रण को घमोरियों वाले स्थान पर लगाए. इससे घमोरियां ठीक होने लगेंगी.

सरसों के तेल का प्रयोग

सरसों का तेल अनेक रोगों का रामबाण इलाज माना जाता है. घमोरियां होने पर 2 चम्मच सरसों के तेल में 2 चम्मच पानी मिलाकर सुबह और शाम मालिश करे. यह प्रक्रिया करने से घमोरियां दूर होने लगती है.

खीरे का प्रयोग

खीरे में अनेक शक्तिशाली गुण पाये जाते है. यह घमोरियों का सबसे आसान इलाज है. एक गिलास पानी में निम्बू का रस डाले और इस पानी में खीरे के पतले-पतले टुकड़े काटकर दाल दीजिये. अब इन टुकड़ो को घमोरियों वाले स्थान पर लगाए. यह प्रक्रिया करने से घमोरियों जल्दी ठीक होने लगेंगी तथा जलन तथा खुजली से छुटकारा मिलेगा.

घमौरियों के लिए का रामबाण इलाज एलोवेरा

एलोवेरा अपने हीलिंग गुणों के कारण जाना जाता है और यह अधिकांश लोगों के लिए त्वचा की समस्याओं जैसे घमौरियों के लिए का रामबाण इलाज होता है। एलोवेरा का रस या सत्व लगाने से घमौरियां जल्दी ठीक होती हैं।

चंदन पाउडर का जादू


चंदन की लकड़ी के लेप में एंटी-इंफ्लेमेटरी और ठंडक पहुंचाने वाला गुण होते है। इसका सुगंध लेप त्वचा की घमौरियों वाली जलन पर ताजगी भरे मलहम का काम करता है। चंदन पाउडर और धनिया पाउडर को बराबर मात्रा में मिलाकर इनमें गुलाबजल मिलाकर गाढ़ा लेप बनाएं तथा इस लेप को शरीर पर कुछ देर लगाकर ठंडे पानी से धो लें।

आइस पैक लगाएं
*प्लास्टिक की थैली में आइस क्यूब्स भरकर घमौरयों पर लगाने से आराम मिलता है। आइस पैक लगाते समय यह सावधानी जरूर रखें कि इसे सीधे त्वचा के संपर्क में लाने की बजाय कपड़े में लपेट लें। 5-10 मिनट तक इसे लगाएं। आइस पैक चार से छह घंटे के अंतराल मे फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है।

घमौरी होने पर प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार:-

लगभग 5 लीटर पानी में नीम की पत्तियां डालकर दस मिनट उबाल लें। इस पानी को नहाने के पानी में मिलाकर नहायें। घमोरियां( ghamory ) ठीक हो जाएगी।नीम की छाल को चन्दन की तरह पानी के साथ घिसकर घमोरियों ( Alaiya ) पर लगाने से ये ठीक होती है।
एक कप जई का महीन आटा नहाने के एक बाल्टी पानी में घोल लें। इस पानी से घमोरियों को धीरे धीरे धोने से घमोरियों ( ghamori )में आराम मिलता है।एक कप पानी में एक चम्मच बेकिंग सोडा घोल लें। इसमें एक साफ कपड़ा भिगोकर निचो लें। इस कपडे को दस मिनट घमोरियों पर रखे। इस तरह दिन में तीन चार बार एक सप्ताह तक करने से घमोरियां ( Alaiya ) ठीक हो जाएँगी।

गुलाब की पंखड़ियों का प्रयोग

गर्मियों में अधिकांश लोगो को घमोरियां हो जाती है. गुलाब की पंखुड़िया मुहासो से निपटने के लिए बहुत ही अच्छा उपाय है. गुलाब के फूलों का तेल लगभग 12 मिली, थोड़ा सा कपूर, तीन ग्राम फिटकरी को आपस में मिला लीजिए. इस पेस्ट को मुहासो वाले स्थान पर लगा ले. इससे आपको फायदा मिलेगा.
गर्मी में सूती और हलके रंग के कपडे पहनने चाहिये| 
*बाहर निकलते समय चेहरा और सर पर रुमाल या साफी से ढक कर निकलना चाहिये.*गर्मियों में प्याज का सेवन करना चाहिए तथा जेब में प्याज रखना चाहिये|
*बाजार की ठंडा मतलब आम(केरी) का पना, खस,चन्दन गुलाब फालसा संतरा का सरबत ,ठंडाई सत्तू, दही की लस्सी,मट्ठा,गुलकंद का सेवन करना चाहिये|
*लोकी ,ककड़ी ,खीरा, तोरे,पालक,पुदीना ,नीबू ,तरबूज आदि का सेवन अधिक करना चाहिये
*गर्मियों में शीतल पानी का सेवन करना अनिवार्य होता है. 2 से 3 लीटर रोजाना पानी पिए.
*घमोरियों वाली जगह पर आर्टिफिशियल ज्वेलरी पहनने से बचें|



वैसे यह रोग कुछ दिनों में अपने आप ही ठीक हो जाता है लेकिन यदि रोगी व्यक्ति इससे अधिक परेशान हो तो *इस रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार किया जा सकता है। घमौरियों का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को रात के समय में अपने पेड़ू पर गीली मिट्टी की गर्म पट्टी बांधनी चाहिए। यदि रोगी व्यक्ति को कब्ज की शिकायत हो तो उसे प्रतिदिन सुबह के समय में एनिमा क्रिया करनी चाहिए ताकि उसका पेट साफ हो सके। इसके बाद रोगी को दिन में 2 बार अपने शरीर पर मिट्टी की गीली पट्टी का लेप करना चाहिए और जब यह लेप सूख जाए तब स्नान करना चाहिए।
*  इस रोग से पीड़ित रोगी को उत्तेजक पदार्थ वाला भोजन नहीं करना चाहिए। रोगी को हमेशा सादा भोजन ही करना चाहिए। 
बारिश के पानी में स्नान करन से घमौरी का रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है। 
*रोगी व्यक्ति को एक बर्तन में पानी भरकर उसमें नीम की पत्तियां डालकर उबालना चाहिए। फिर इस पानी को गुनगुना करके स्नान करना चाहिए। इस स्नान को प्रतिदिन दिन में 2 बार करने से घमौरियां ठीक हो जाती हैं। 
*रोगी व्यक्ति को सुबह के समय में नीम की 4-5 कच्ची पत्तियां चबाने से बहुत अधिक लाभ मिलता है।

किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि 

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार


23.12.16

सफ़ेद दाग जड़ से मिटाने के रामबाण नुस्खे // White spots Removal Tips


सफेद दाग एक तरह का त्वचा रोग है, जो किसी एलर्जी या त्वचा की समस्या के कारण होता है। कई बार ये जेनेटिक भी होता हे। पूरी दुनिया के दो प्रतिशत लोग इस बीमारी के शिकार हैं और भारत में तो चार प्रतिशत लोग इस से पीड़ित हैं। भारतीय समाज में तो इसे छुआ-छूत की बीमारी के तौर पर माना जाता है। इसे ठीक करने के लिए काफी धैर्य की जरूरत है। इसलिए डॉक्टर को दिखाने के साथ-साथ कुछ घरेलू उपायों से इस प्रॉब्लम को जल्द दूर किया जा सकता है। सफेद दाग को अंग्रेजी में ल्यूकोडरमा कहा जाता है। यह एक प्रकार का त्वचा का रोग है जिसमें त्वचा के रंग में सफेद चकते पड़ जाते हैं। ल्योकोडरमा यानी की सफेद दाग। यह शरीर के जिस हिस्से में होता है उसी जगह सफेद रंग के दाग बनने लगते हैं। धीरे-धीरे यह दाग बढ़ने लगते हैं। भारत में 2 फीसदी आबादी इस समस्या से परेशान है। समाज में यह धारण बन गई है की यह कुष्ठ रोग है पर यह कुष्ठ रोग नहीं होता। यह न तो कैंसर है, न ही कोढ़ रोग है|
सफेद दाग के मुख्य कारण है-
1. अत्याधिक चिंता करना और तनाव लेना
2. पेट में गैस की समस्या
3. लीवर की समस्या
4. विपरीत भोजन की वजह से जैसे मछली के साथ दूध का सेवन करना
5. आनुवंशिक समस्या
6. जलने या चोट लगना
7. पाचन तंत्र में कीड़े होना
8. कैलिश्यम की कमी
9. खून में खराबी
10. पेट में कीड़े होना आदि


वैवाहिक जीवन की मायूसी दूर  करें इन जबर्दस्त  नुस्खों से

सफेद दाग होना एक आम समस्या है यह दाग हाथों, पैरों, चेहरे, होठों आदि पर छोटे रूप में होते हैं फिर ये बडे़ सफेद दाग का रूप ले लेते हैं।यह संक्रामक रोग छोटे बच्चों को भी हो सकता है। सफेद दाग का इलाज आयुर्वेद में उपल्ब्ध है। अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। आयुर्वेद के अनुसार पित्त दोष की वजह से सफेद दाग की समस्या होती है।

 सफेद दाग के कारगर रामबाण इलाज इस प्रकार है-
सफेद धब्बों  को दूर करने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है अपनी जीवन शैली और खान पान में परिवर्तन लाना।


:*करेले की सब्जी का सेवन अधिक से अधिक करना-

*खट्टे पादार्थ, ज्यादा नमक, मछली और दही आदि का परहेज करें|इनकी मनाही है|


अनार का प्रयोग -

अनार त्वचा रोग से संबंधित रोगों के लिए फायदेमंद होता है। सफेद दाग की समस्या से छुटकारा पाने के लिए आप अनार की पत्तियों को तोड़कर सुखा लें और उसका चूर्ण बना लें। इसके बाद इस चूर्ण की एक फंकी एक गिलास पानी मे मिलाकर पीने से सफेद दाग से जल्द ही राहत मिलती है।

शरीर को साफ रखें-

कई बार लोग यूरीन को रोक कर रखते हैं, जो कि बहुत गलत है। इससे शरीर के अंदर गंदे पदार्थों का जमावड़ा बन जाता है जिससे शरीर को नुकसान होता है। इसलिए हमेशा शरीर के विषैले तत्व को बाहर निकालें और शरीर को शुद्ध रखें।

हरड़ -

हरड़ को घिसकर लहसुन के रस में मिलाकर इसके पेस्ट को सफेद दाग पर लगाएं। एैसा करने से सफेद दाग ठीक हो जाते हैं।

उड़द की दाल-

रात में आप उड़द की दाल को पानी में भिगों लें और उसे दरदरा पीसकर नियमित कम से कम पाच महीनों तक सफेद दाग वाले हिस्से पर लगाएं इस उपाय से आपको सफेद दाग से मुक्ति मिलेगी।

तांबे में रखा हुआ पानी-

सफेद दाग की समस्या को ठीक करने के लिए आप रात के समय में तांबे के लोटे में साफ पानी भर दें। और सुबह के समय एकदम खाली पेट इस पानी को पीएं। इस उपाय को लगातार कुछ महीनों तक करें। आपको इससे फायदा मिलेगा।
*नदी घाटी में मिलने वाली लाल मिट्टी और अदरक लाल मिट्टी जो नदी के किनारे मिलती है इसके प्रयोग से भी सफेद दाग से मुक्ति पाई जा सकती है। लाल मिट्टी में काॅपर पाया जाता है जो शरीर से सफेद दाग को खत्म करता है।

कैसे बनाएं लाल मिट्टी का पेस्ट-

सबसे पहले आप अदरक का पेस्ट बना लें कम से  कम पचास ग्राम। अब आप इस पेस्ट में लाल मिट्टी दो चम्मच डालकर इसे अच्छी तरह से मिलाकर पुनः पेस्ट बना लें। और इस लाल मिट्टी के बने पेस्ट को सफेद दाग वाली जगह पर लगाएं।

तुलसी तेल -

तुलसी के तेल से भी सफेद दाग ठीक होता है। आप रोज तुलसी के तेल से सफेद दाग के उपर मालिश करें।

सरसों तेल-

सरसों तेल स्किन से लेकर बालों तक के लिए फायदेमंद है। इस तेल में हल्दी पाउडर मिलाकर उसे सफेद दाग पर लगाएं। सूखने के बाद ठंडे पानी से धो लें। साबुन का इस्तेमाल कम से कम करें। चिकनाहट मिटाने के लिए बेसन का इस्तेमाल करें।
*गर्म दूध में पीसी हल्दी को डालकर दिन में 2 बार पीने से 5 महीने में सफेद दाग से मुक्ति मिल जाती है।
*1 चम्मच हल्दी पाउडर, 2 चम्मच सरसों का तेल को मिलाएं फिर इस पेस्ट को सफेद चक्तों वाली जगह पर लगाएं और 15 मिनट तक रखने के बाद उस जगह को धो लें एैसा दिन में 3 से 4 बारी करते रहें।

अदरक की पत्तियां -

अदरक की पत्तियों से बने पेस्ट को पानी के साथ मिलाकर लेप तैयार करें। और फिर इस लेप को सफेद दाग वाली जगह पर सुबह और शाम में समय लगाएं।

बथुआ

ज्यादा से ज्यादा अपने खाने में बथुआ शामिल करें। रोज बथुआ उबाल कर उसके पानी से शरीर के सफेद दाग को धोएं। कच्चे बथुआ का रस दो कप निकाल कर, उसमें आधा कप तिल का तेल मिलाकर धीमी आंच पर पकाएं। जब केवल तेल रह जाएं तो उसे उतार लें। अब इसे रोज दाग पर लगाएं।

नारियल का तेल -

सफेद दाग दूर करने के लिए नारियल तेल से दिन में तीन बार मालिश करें। इससे शरीर में सफेद चकते कम होने लगते हैं।
*2 चम्मच अखरोट का पाउडर उसमें थोड़ा सा पानी मिलाकर पेस्ट बनाएं और इसे 20 मिनट तक लगा कर रखें दिन में 3 से 4 बार  एैसा करें।
साबुन और डिटरजेंट का इस्तेमाल न करें।
*मूली और मांस के साथ दूध न पीएं।
* नींद पूरी लें, कम से कम 8 घंटे की नींद लें।
*गाजर, लौकी और दालें अधिक से अधिक सेवन करें। 
*एलोवेरा का जूस पीएं।
 *7 बादाम नित्य सेवन करें। 
*सफेद तिल को खाने में इस्तेमाल करें।
* पालक, गाय का घी, खजूर का इस्तेमाल करते रहें।
*नीम की पत्तीयों का पेस्ट बनाएं उसे छननी में डालकर उसका रस निकाल लें फिर उसमें 1 चम्मच शहद डालें और मिलाकर दिन में 3 बार पीएं।

टमाटर का सेवन न करें -

सफेद दाग की समस्या से ग्रसित लोगों को टमाटर और टमाटर से संबंधित किसी भी तरह की चीज का सेवन नहीं करना चाहिए। यानि की आपको कच्चा पका टमाटर और टमाटर की चटनी से भी परहेज करना चाहिए।
सफेद दाग की समस्या कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। आयुर्वेदिक उपायों के जरिए इसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। साथ ही यह बीमारी छूने से किसी से हाथ मिलाने से, या फिर शारीरिक संबंध बनाने से भी नहीं फैलती है।


पित्त पथरी (gallstone) के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार 

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15.12.16

भिंडी के हैरान करने वाले फायदे //Okra surprising benefits

    


भिंडी कोई मौसमी पौधा नहीं है यह हर मौसम में उगाया जाता है और खाया जाता है यह खाने में कई तरीको से इस्तेमाल किया जाता है जैसे के सब्जी , आचार या सूप में | यह खाने में उतना ही स्वादिष्ट लगता है चाहे वो गर्मियों का सीजन हो या सर्दियों का |
भिंड़ी जो दुनिया के कई हिस्सों में “लेड़िज फिंगर या Okra” के रुप में जाना जाता है | अगल अलग देशो में इसका नाम बेशक अलग हों लेकिन काम एक जैसा ही है| इसे अक्सर कैरिबियन से लेकर चीन तक के व्यंजनों में उपयोग किया जाता है और इसकी लोकप्रियता हर समय बढ़ती जा रही है, खासकर जब से इस सब्जी का इस्तेमाल अचार के रुप में, सूप की एक सामग्री के तौर पर किया जाता है, इसे इसके तेल के लिए भी उपयोग किया जाता है जिसे निकाला जा सकता है तथा भिंड़ी के तेल के रुप में इस्तेमाल किया जाता है।
भिंडी कैसे डाइबीटिज को कंट्रोल करता है

शीतकाल मे बढ़ाएं अपनी यौन शक्ति

लो ग्लाइसेमिक इन्डेक्स- जिन भोज्य पदार्थों मे लो ग्लाइसेमिक इन्डेक्स होता है तो शुगर के निकलने की गति को कम करता है।

विटामिन और मिनरल का स्रोत- 

भिंडी में विटामिन सी होता है जो इम्युनिटी को बढ़ाता है। जो लोग मधुमेह के कारण कई प्रकार के इन्फेक्शन और रोग से पीड़ित होते हैं, उनको रोकने में मदद करता है।

एन्टी-डाइबीटिक गुण-

कई अध्ययनों से यह पता चला है कि सब्ज़ियों में एक प्रकार का एन्जाइम होता है जो कार्बोहाइड्रेट को मेटाबॉलाइज करने, इन्सुलिन लेवल के उत्पादन को बढ़ाने, अग्न्याशय (pancreas) में बीटा सेल्स को बेहतर बनाने में जो इन्सुलिन के उत्पादन को बढ़ाने में सहायता करता है।

कोलन कैंसर

कोलन कैंसर को दूर करने में भिंडी बहुत फायदेमंद होती है। यह आंतों में मौजूद विषैले तत्‍वों को दूर करने का काम करती है। इससे आंतें पहले से बेहतर तरीके से काम करती हैं और उनके काम करने की क्षमता बढ़ जाती है। इससे कोलन कैंसर का खतरा कम हो जाता है।

वेट कंट्रोल-

क्या आपको पता है कि वज़न को कंट्रोल रखने से भी डाइबीटिज के समस्याओं से बचा जा सकता है और इसको मैनेज किया जा सकता है। भिंडी में लो कैलोरी होने के कारण ये वेट को कंट्रोल करने में अहम् भूमिका निभाता है- 100 ग्राम भिंडी में मात्र 33 कैलोरी होता है।

एन्टीऑक्सिडेंट का अच्छा स्रोत- 

न्यूट्रिशन जर्नल में प्रकाशित अध्ययन से यह पता चला है कि दूसरे सब्ज़ियों की तुलना में ओकरा या भिंडी में एन्टीऑक्सिडेंट का गुण ज्यादा होने का फ्री रैडिकल्स से होने वाले क्षति को रोकता है और कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोककर शरीर के ज़रूरी ऑर्गन्स को बचाता है, जो ब्लड-शुगर के लेवल के असंतुलन के कारण होता है।

वीर्य की मात्रा बढ़ाने और गाढ़ा करने के उपाय 

भिंडी को अपने डायट में कैसे करेंगे शामिल-

ओकरा वाटर-

भिंडी को अच्छी तरह से धोकर पहले टुकड़ों में काट लें। अब टुकड़ों को एक गिलास पानी में रात भर डुबोकर रख दें। अगले दिन सुबह इस पानी को पी लें। यह पानी इन्सुलिन जैसा ही काम करता है और ब्लड-शुगर लेवल को निंयत्रित करता है।

उबला हुआ भिंडी

भिंडी को उबालकर उस पर नमक और नींबू डालकर स्नैक की तरह खा सकते हैं।

कब्‍ज-

भिंडी कब्‍ज को भी दूर करती है। यह डायटरी फाइबर का सबसे अच्‍छा स्रोत मानी जाती है, जो हमारी पाचन क्रिया के लिए काफी लाभकारी होती है। यह घुलनशील फाइबर शरीर में मौजूद पानी में घुल जाते हैं, जिससे हमारी पाचन क्रिया दुरुस्‍त हो जाती है ।

   सब्ज़ी के रूप में भिंडी- 

आलू भिंडी, भिंडी मसाला, मिक्सड वेज़टबल भिंडी आप किसी भी तरह से भिंडी खा सकते हैं। हाँ, तेल और मसाले का ध्यान रखें, ताकि सब्ज़ी की पौष्टिकता बनी रहे।
भिंडी के टेस्ट के बारे में तो आपको बेशक पता होगा लेकिन भिंडी के पानी Okra water के फयदों के बारे में आपको नहीं पता होगा | भिंडी के पानी से शुगर , किडनी की बीमारियाँ , दमा और कोलेस्ट्रॉल जैसे जानलेवा बीमारियों का इलाज़ संभव है |
अब  बताते हैं  भिंडी का पानी कैसे तैयार किया जाए |



सामग्री
4 भिंडी
1 कप साफ़ पानी
विधि
पहले भिंडी का उपरी और निचला हिस्सा काट दीजिये और भिंडी को बीच में से काट दीजिये | फिर भिंडी को एक कप पानी में डाल दीजिये और पूरी रात ऐसे ही छोड़ दीजिये | और दूसरे दिन इस मिश्रण का निचोड़ एक गिलास में निकाल लीजिये और उस निचोड़ में थोडा साफ़ पानी डाल लीजिये |
रोजाना सुबह खाली पेट (खाने से आधा घंटा पहले) इस मिश्रण के सेवन से आपको कुछ ही दिनों में हैरान करने वाले नतीजे प्राप्त होंगे |

किडनी निष्क्रियता की हर्बल औषधि

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

पित्त पथरी (gallstone) की अचूक औषधि


10.12.16

शिलाजीत का प्रयोग बनाए मर्दों को लम्बी रेस का घोडा//Increase the masculinity with shilaajeet


     आयुर्वेद में शिलाजीत के काफी ज्यादा स्वास्थ्य लाभ पाए गए है शीलाजीत देखने में काले तारकोल की तरह होता है यह पत्थर की शिला ओमे पैदा होता है इसलिए इसे शिलाजीत कहते हैं शिलाजीत एक गुणकारी औषधि है जो कई बीमारियों में फायदेमंद पाया गया है शीलाजीत काफी फायदेमंद है बस साथ ही इसके कुछ सावधानी बरतनी पड़ती है
     शिलाजीत का सेवन दूध पानी या फिर फलों के रस के साथ किया जा सकता है अगर आप इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में थक गए हैं और शरीर थोड़ी सी उर्जा चाहता है तो आप शिलाजीत का सेवन नियमित रूप से शुरू कर सकते हैं आइए जानते हैं कि शिलाजीत के क्या क्या लाभ होते हैं
1. शिलाजीत से शरीर में तुरंत ऊर्जा आती है इसे प्रोटीन और विटामिन ज्यादा मात्रा में हमारे शरीर को प्राप्त होता है
2.शिलाजीत आपके शरीर की सूजन को मिटाता है अगर आप को शरीर में सूजन गठिया का  दर्द  है तो शिलाजीत का प्रयोग काफी लाभप्रद  पाया गया है |
3. अगर आप मानसिक रुप से कमजोर है और आप मानसिक मजबूती चाहते हैं तो शीलाजीत को घी के साथ सेवन करें इससे आपको काफी लाभ मिलेगा और आप तनाव मुक्त रहेंगे
4. शिलाजीत आपको हड्डी की बीमारी से भी दूर रखता है यह हमारी हड्डियों को मजबूत करता है और गठीया तथा जोड़ों के दर्द में आराम दिलाता है |
5.दूध या शहद के साथ अगर आप इसका सेवन करें सूरज उगने से पहले तो यह काफी फायदेमंद होता है और इसको खाने के 3-4 घंटे बाद ही कुछ और चीज खाने चाहिए |
किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार6.शिलाजीत नपुंसकता को खत्म करता है और यह स्वप्न दोष को भी दूर करता है स्पर्म  काउण्ट मे बढ़ोतरी होती है|
7.शिलाजीत के अंदर उच्च ऊर्जा और काफी अच्छे गुण पाए गए हैं जो कि नई कोशिकाओं को दोबारा बनाते हैं और पुरानी कोशिकाओं को खत्म करते हैं जिससे कि आप की उम्र कम लगती है
8.. जिन लोगों को शीघ्रपतन की समस्या है वे शिलाजीत का इस्तेमाल कर सकते हैं उन्हें इसके कुछ दिनों तक नियमित सेवन करना चाहिए इससे शीघ्रपतन की समस्या है उनकी खत्म हो जाती है|मर्दों को लंबी रेस का घोडा  बनाती है शिलाजीत|
9. शिलाजीत सेक्स पावर को बढ़ाता है और आपकी यौन इच्छा में भी वृद्धि करता है इसके प्रयोग अत्यंत लाभकारी होता है लेकिन किसी डॉक्टर की सलाह के बिना हमें इस्तेमाल नहीं करना चाहिए वरना यह आपको नुकसान पहुंचा सकता है
10.जब आप शिलाजीत का सेवन करें तो आपको मसालेदार खाना सिगरेट शराब खटाई युक्त खाने को नहीं खाना चाहिए आपको रात में ज्यादा देर तक नहीं जागना चाहिए और दिन में भी आपको नहीं सोना चाहिए


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5.12.16

चूना (Lime) के औषधीय गुण // Medicinal use of lime



चूना पत्थर अनेक किस्मों में उपलब्ध है। यह रंग, विन्यास, कठोरता और टिकाऊपन में विभिन्न गुणों का होता है। सघन कणवाले गहन ओर मणिभीय पत्थर गृहनिर्माण के लिये उत्कृष्ट होते हैं। ये कार्यसाधक, दृढ़ और टिकाऊ होते हैं। चूना पत्थर पर तनु अम्ल की क्रिया बड़ी सरलता से होती है, अत: औद्योगिक नगरों के निकट गृहनिर्माण के लिये यह पत्थर ठीक नहीं होता। बनावट और अन्य गुणों की विभिन्नता के कारण चूना पत्थर की दृढ़ता विभिन्न होती है। इसलिये गृहनिर्माण के पूर्व पत्थर की परीक्षा कर लेनी चाहिए।

नसों में होने वाले दर्द से निजात पाने के तरीके 

बहुत बड़ी मात्रा में चूना पत्थर का चूने के निर्माण में उपयोग होता है। १०० किलोग्राम चूने के पत्थर से लगभग ६५ किलोग्राम चूना प्राप्त होता है। शुद्ध चूना पत्थर याखड़िया से, जिसमें छ: प्रतिशत से अधिक सिलिका(Silica) , ऐल्यूमिना(Aelumina) तथा अन्य अपद्रव्य न हों, उत्कृष्ट चूना प्राप्त होता है। चार से सात प्रतिशत संयुक्त सिलिका ऐल्यूमिना वाले मिट्टीयुक्त चूना पत्थर से मध्यम श्रेणी का जलचूना और ११-२५ प्रतिशत संयुक्त सिलिकावाले चूनापत्थर से सर्वोत्कृष्ट श्रेणी का जलचूना प्राप्त होता है।
खाने का चूना बहुत ही गुणकारी और लाभकारी होता है लेकिन इस बारे में सब नहीं जानते हैं. खाने का चूना हमें बिमारियों से दूर रखता है और हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है| अब जानते हैं कि किस तरह चूना हमारे लिए लाभकारी होता है|

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स्मरण शक्ति मजबूत करने के लिए  : 

चूने का प्रयोग करने से स्मरण शक्ति भी बढ़ती है लेकिन चूने का प्रयोग ज्यादा नहीं किया जाना चाहिये, इसलिए केवल चावल के दाने के बराबर चूना ही प्रयोग में लायें| इससे कम बुद्धि वाले व्यक्तियों की याद करने की क्षमता तेज़ होती है. जिन बच्चों का दिमाग देर से काम करता है उनका दिमाग तेज़ी से कम करने लगता है और जिनको धीमा याद होता है उनको जल्दी याद होने लगता है| चूना पढने वाले विद्यार्थियों के लिए बहुत ही गुणकारी और लाभकारी होता है इसको सोने से पहले लें इसका प्रयोग दिमाग को तंदरूस्त और मानसिक बिमारियों से भी दूर रखता है. इसके अलावा IQ लेवल बढ़ाने में भी चूना बहुत लाभकारी होता है|

लम्बाई बढ़ाने में 

जिन इंसानों की लम्बाई नहीं बढती है या फिर कम होती है उनको नाम मात्र चूना दही में मिलाकर खायें. ऐसा करने से लम्बाई बढ़ जाती है. इसके अलावा आप एक चावल के जितना चूना दाल में मिलाकर खायें लम्बाई बढ़ जाती है. आजकल के व्यक्ति अपनी लम्बाई से बहुत परेशान है कि उनकी लम्बाई नहीं बढ़ रही है और तरह तरह के नुस्खे और दवाइयां अपना रहें हैं लकिन आराम नहीं हो रहा है तो वे एक बार जरूर चूने का प्रयोग करें|

बहनों को अपने मासिक धर्म

के समय अगर कुछ भी तकलीफ होती हो तो उसका सबसे अच्छी दवा है चूना।
हमारे घर में जो माताएं है जिनकी उम्र पचास वर्ष हो गयी और उनका मासिक धर्म ((Menstrual)) बंद हुआ उनकी सबसे अच्छी दवा है चूना — गेहूँ के दाने के बराबर चूना हर दिन खाना दाल में, लस्सी में, नही तो पानी में घोल के पीना।
जब कोई माँ गर्भावस्था में है तो चूना रोज खाना चाहिए क्योंकि गर्भवती (Pregnant) माँ को सबसे ज्यादा केल्शियम (Calcium) की जरुरत होती है और चूना केल्शियम का सबसे बड़ा भंडार है। गर्भवती माँ को चूना खिलाना चाहिए


अनार के रस में –

अनार का रस एक कप और चूना गेहूँ के दाने के बराबर ये मिलाके रोज पिलाइए नौ महीने तक लगातार दीजिये तो चार फायदे होंगे – पहला फायदा होगा के माँ को बच्चे के जनम के समय कोई तकलीफ नही होगी और नॉर्मल डीलिवरी होगा, दूसरा बच्चा जो पैदा होगा वो बहुत हृष्ट पुष्ट और तंदुरुस्त होगा, तीसरा फ़ायदा वो बच्चा जिन्दगी में जल्दी बीमार नही पड़ता जिसकी माँ ने चूना खाया और चौथा सबसे बड़ा लाभ है वो बच्चा बहुत होशियार होता है बहुत Intelligent और Brilliant होता है उसका IQ बहुत अच्छा होता है।


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पीलिया

जो व्यक्ति पीलिया से ग्रसित हो जाते हैं उनको चावल के दाने के बराबर चूना पानी या जूस के साथ दें ऐसा करने से पीलिया में लाभ मिलता है.

शुक्राणु बढ़ाने में - 

अगर किसी लड़के के शुक्राणु नहीं बनते है या फिर बढ़ते नहीं हैं तो चूना शुक्राणु बनाने और बढ़ाने में लाभकारी होता है. जिन लड़कियों में अंडे नहीं बनते हैं उनको गन्ने के जूस के साथ चूना मिलाकर खिलाने से अंडे बनने लगते हैं. चूना नपुसंकता के रोग को दूर करने में भी गुणकारी साबित होता है|

मासिक धर्म की समस्या

जिन लड़कियों में मासिक धर्म की समस्या होती है या फिर माहवारी चक्र में बदलाव या फिर माहवारी चक्र का रुक जाना इस तरह की परेशानियाँ होती हैं उनके लिए चूना बहुत ही गुणकारी होता है|

दर्द में आराम :

जिन व्यक्तियों को किसी भी कारण से वात की समस्या होने लगती है जिस कारण से कमर में, घुटनों में, हाथों में और कन्धों में दर्द होना शुरू हो जाता है उनको चूना पानी में मिलाकर पिलायें ऐसा करने से दर्द में आराम मिलता है|

शरीर में जब खून 

कम हो जाये तो Lime जरुर लेना चाहिए, एनीमिया है खून की कमी है उसकी सबसे अच्छी दवा है ये Lime, Limeपीते रहो गन्ने के रस में, या संतरे के रस में नही तो सबसे अच्छा है अनार के रस में – अनार के रस में Lime पिए खून बहुत बढता है, बहुत जल्दी खून बनता है – एक कप अनार का रस गेहूँ के दाने के बराबर Lime सुबह खाली पेट।
अगर आपके घुटने में घिसाव (Wear Knee)आ गया और डॉक्टर कहे के घुटना बदल दो तो भी जरुरत नहीं चूना खाते रहिये और हरसिंगार के पत्ते का काढ़ा (Decoction of leaves harsingaar) खाइए घुटने बहुत अच्छे काम करेंगे।

चूना घुटने का दर्द 

ठीक करता है, कमर का दर्द (ठीक lumbar puncture) करता है, कंधे का दर्द (Shoulder Pain) ठीक करता है, एक खतरनाक बीमारी है “Spondylitis” वो चुने से ठीक होता है।
कई बार
हमारे रीढ़ की हड्डी (Spinal Cord) में जो मनके(Beaded) होते है उसमें दूरी बढ़ जाती है Gap आ जाता है – ये चूना ही ठीक करता है उसको; रीड़ की हड्डी की सब बीमारिया चूने से ठीक होता है।
अगर आपकी
हड्डी टूट जाये तो टूटी हुई हड्डी को जोड़ने की ताकत सबसे ज्यादा चूने में है। चूना खाइए सुबह को खाली पेट।
अगर मुंह में ठंडा गरम पानी लगता है तो चूना खाओ बिलकुल ठीक हो जाता है।
मुंह में अगर छाले हो गए है तो चूने का पानी पियो तुरन्त ठीक हो जाता है।

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3.12.16

नमक के पानी से नहाने के फायदे // The benefits of salt water bath





दिनभर की भागदौड़ के बाद रात को रिलैक्स की जरूरत होती है। अगर शरीर की थकावट रात को भी दूर न हो तो सारा दिन बेकार जाता है लेकिन ऐसे में आप नमक वाले पानी से नहाकर अपने शरीर की थकान के साथ-साथ कई पेरशानियां दूर कर सकते है।
नमक ज्यादातर सिर्फ खाने में ही काम में लिया जाता है। लेकिन यदि इसे नहाने के पानी में मिलाकर नहाएं तो यह रंग गोरा करने समेत कइ तरह के फायदे भी करता है। नमक में मौजूद मैग्नीशियम, कैल्शियम, सोडियम जैसे मिनरल्स होते हैं जो शरीर को इन्फेक्शन से बचाते हैं। 
नमक के पानी से नहाने पर रंग गोरा होता है। यह स्किन की डेड सेल्स को निकाल देता है तथा स्किन को सॉफ्ट और चमकदार बनाकर रंग निखारता है।

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 मसल्स पैन में राहत

शाम को नमक के पानी से नहाने से मसल्स पैन में राहत मिलती है और मसल्स को रिलैक्स फिल होता है।

 इंफैक्शन

नमक के पानी में भरपूर मैग्नीशियम, सोडियम और कैल्शियम होता है। जब आप नमक के पानी से नहाते है तो ये पानी स्किन के पोर्स में जाकर सफाई करते है। इससे स्किन इंफैक्शन का खतरा कम हो जाता है।

 डैंड्रर्फ

नमक के पानी में मौजूद तत्व फंगल इंफैक्शन को रोकने का काम करते है। रोज नमक के पानी से नहाने से डैंड्रर्फ से छुटकारा मिलता है।

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यह आपकी त्वचा के लिए अच्छा है-

यदि अपने प्राकृतिक और शुद्ध रूप से इस्तेमाल किया जाए तो नमक के पानी में कई मिनरल्स और पोषक तत्व होते हैं जो आपकी त्वचा को जवां बनाते हैं| मैग्नीशियम, कैल्शियम, ब्रोमाइड, सोडियम जैसे मिनरल्स त्वचा के रोम छिद्रों में प्रवेश करते हैं| ये त्वचा की सतह को साफ़ कर इसे स्वस्थ और चमकदार बनाते हैं|


 मॉइश्चराइजर-

नमक के पानी से नहाने से स्किन मॉइश्चराइजर होती है। इससे स्किन सेल्स की अच्छी ग्रोथ होती है। इससे झुर्रिंयों की समस्या भी दूर होती है।

 फेयरनेस-

नमक का पानी स्किन के डेड सैल्स को निकालने में मदद करता है। रोज नमक के पानी से नहाने से स्किन सॉफ्ट और शाइनी होती है।

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* नमक के पानी से नहाने पर हड्डियों के दर्द में राहत मिलती है। रोज नमक के पानी से नहाने पर ज्वॉइंट पेन की समस्या भी दूर होती है।

त्वचा की नई परत लाने में मददगार-

त्वचा पर चमड़ी उतरकर नई चमड़ी आने से भी त्वचा स्वस्थ रहती है| फोस्फेट्स जैसे नमक के पानी से नहाने से डिटर्जेंट की भांति सफाई होती है और चमड़ी उतरकर नई चमड़ी आती है| इससे त्वचा नरम और मुलायम रहती है|
* नमक के पानी से नहाने से ब्लउ सर्कुलेशन सही रहता है तथा इससे ब्रेन फंक्शंस बेहतर होते हैं।
*नमक के पानी से नहाने से ब्लउ सर्कुलेशन सही रहता है तथा इससे ब्रेन फंक्शंस बेहतर होते हैं। तनाव दूर होकर दिमाग को शांति मिलती है।


यह डिटॉक्सीफिकेशन बढ़ाता है-

नमक के पानी से नहाने से त्वचा से जहरीले तत्व बाहर निकलते हैं| गर्म पानी त्वचा के रोम छिद्रों को खोलता है| इससे मिनरल्स त्वचा के अंदर जाकर गहराई तक सफाई करते हैं| नमक का पानी जहरीले और नुकसानकारी पदार्थों और बैक्टीरिया को त्वचा से बाहर निकालता है और इसे जवां बनाता है|

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* नमक के पानी से नहाने से मसल्स को आराम मिलता है तथा मसल्स पेन से राहत मिलती है।
* नमक के पानी में भरपूर मग्नीशियम, कैल्शियम, सोडियम जैसे खनिज-लवण होते हैं। ये स्किन की तह तक जाकर सफाई करते हैं जिससें स्किन में इन्फेक्शन का खतरा टलता है।
* नमक के पानी से नहाने पर स्किन मॉइश्चराइज होती है। इससे स्किन सेल्स की अच्छी ग्रोथ होने के साथ ही वो हेल्दी भी बनती है। इससे स्किन के दाग और झुर्रियां भी दूर होती है।

यह त्वचा को जवां बनाये रखता है-

नियमित रूप से नमक के पानी से नहाने से दाग और झुर्रियां कम होती हैं| त्वचा नरम और मुलायम बनती है| यह त्वचा को फुलावट भरा बनाता है और स्किन मॉइस्चर का संतुलन बनाये रखता है|
* नमक के पानी में मौजूद तत्व स्किन की फंगस को हटा देते हैं तथा डैंड्रफ की समस्या से छुटकारा दिलाते हैं।
*नमक के पानी से नहाने पर थकान और स्ट्रेस दूर होते हैं। दिमाग को शांति मिलती है तथा रात को अच्छी नींद आती है।

मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है-

नमक के पानी से स्नान शारीरिक के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है| इस पानी से स्नान करने के बाद आप ज्यादा शांत, खुश और आराम महसूस करेंगे| यह एक शानदार स्ट्रेस बस्टर है| यह मानसिक शांति भी बढ़ाता है|
 *नमक के पानी से नहाने पर बालों के बैक्टीरिया खत्म होते हैं तथा बाल हेल्दी और चमकदार होते हैं।
 *नमक के पानी में मौजूद तत्व शरीर का ऑयल लेवल कंट्रोल करते हैं। यह शरीर में एसिडिटी की समस्या को दूर करने में मदद करता है।


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1.12.16

गर्भावस्था मे सूखे मेवे खाने के फायदे//The benefits of eating nuts during pregnancy

मेवों में आवश्यक विटामिन और खनिज प्रचुर मात्रा में होते हैं। ये गर्भावस्था के दौरान आपकी पोषण संबंधी जरुरतों को पूरा करने में मदद कर सकते हैं।
मेवे फाइबर से भरपूर होते हैं, विशेषतः बाहर से भूरे आवरण वाले मेवे। फाइबर गर्भावस्था में आमतौर पर होने वाली कब्ज की समस्या में आराम देता है।
बादाम, अखरोट जैसे मेवे आयरन और प्रोटीन के भी अच्छे स्त्रोत हैं। अगर आप शाकाहारी हैं, तो आपके लिए ये विशेष रुप से फायदेमंद हो सकते हैं।
पर्याप्त मात्रा में आयरन का सेवन रक्त की कमी (एनीमिया) को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है। विटामिन सी आयरन को कुशलता पूर्वक अवशोषित करने में शरीर की सहायता करता है। इसलिए शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ाने के लिए मेवों का सेवन संतरे के रस या नींबू पानी के साथ करें।


आँखों  का चश्मा  हटाने का अचूक  घरेलू उपाय

यह ध्यान रखिए कि मेवों में अत्याधिक वसा और कैलोरी होती है, विशेषतः अगर वे तले हुए या चीनी से लेपित हैं। एक स्वस्थ और संतुलित आहार के लिए, यह बेहतर है कि मेवों को उनकी प्राकृतिक अवस्था में और अन्य किसी भी खाद्य पदार्थ की तरह नियंत्रित मात्रा में ही खाया जाए। मुट्ठी भर मेवे एक दिन के लिए पर्याप्त हैं।

नीचे दिए गए रेखा-चित्र में दर्शाया गया है कि सबसे सामान्य मेवों में कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं और वे कैसे आप व आपके गर्भ में बढ़ रहे शिशु की मदद करते हैं:मेवे
पोषक तत्व का नाम
यह पोषक तत्व किसमें लाभकारी है
बादाम,
खजूर
अंजीर
कैल्शियम 



कान दर्द,कान पकना,बहरापन के उपचार


कैल्शियम गर्भावस्था के दौरान हाइपरटेंशन और प्री-एक्लेमप्सिया के जोखिम को कम कर देता है। यह आपके शिशु की मजबूत हड्डियां व दांत, स्वस्थ नसें व मांसमेशियां विकसित करने में मदद करता है।
काजू,
खुबानी,
चिलगोजा,
पिस्ता,
अखरोट
तांबा (कॉपर) 

कॉपर शरीर में संग्रहित आयरन का उपयोग करने में शरीर की मदद करता है। अंगों और मांसपेशियों के सुचारु रुप से काम करने के लिए भी यह महत्वपूर्ण है।
खजूर,
खुबानी,
सूखे सेब,
सूखे केले,
अंजीर,
मूंगफली,
किशमिश 


पेट मे गेस बनने के घरेलू,आयुर्वेदिक उपचार 

फाइबर (रेशेदार खाद्य पदार्थ)
फाइबर ह्दय रोग और मधुमेह को रोकने में मदद करता है। यह वजन को नियंत्रित करता है और पाचन में सुधार लाता है। गर्भावस्था में कब्ज जैसी आम शिकायत को रोकने में मदद करता है और रक्तचाप को कम रखने में भी सहायक है।
खजूर,
अंजीर,
किशमिश
आयरन
शरीर में आयरन की पर्याप्त मात्रा खून की कमी एनीमिया से बचाती है।
बादाम,
काजू,
मूंगफली,
पिस्ता,
अखरोट
मैंगनीज 


सांस फूलने(दमा) के लिए प्रभावी घरेलू उपचार

मैंगनीज स्वस्थ हड्डियों के लिए महत्पवूर्ण है। यह आपके और आपके शिशु के वजन को ठीक रखने में मदद करता है। यह आपके शिशु का अपने स्तर से छोटे होने का खतरा भी कम करता है। यह आपके चयापचय, थाइराइड, रक्त शर्करा और सामान्य कंकाल विकास को नियमित करने में मदद करता है।
बादाम,
काजू,
सूखे केले,
चिलगोजा,
किशमिश
मैग्नीशियम
हड्डियों के विकास व रखरखाव और नसों व मांसपेशियों के समुचित कार्य को सुनिश्चित करता है। मल त्याग में भी मदद करता है।
अखरोट
ओमेगा 3 फैट
आपके अजन्मे शिशु के मस्तिष्क और आंखों के विकास में मदद करता है।
काजू,
मूंगफली
फॉस्फोरस 


वीर्य की मात्रा बढ़ाने और गाढ़ा करने के उपाय 

स्वस्थ हड्डियों के गठन में मदद करता है। रक्त के थक्के बनाता है और दिल की सामान्य लय विकसित करता है।
खजूर,
खुबानी,
सूखे सेव,
सूखे केले,
किशमिश
पोटेशियम
मांसपेशियों पर नियंत्रण और रक्तचाप में सुधार करता है। यह हाइपरटेंशन को रोकने में मदद के लिए जाना जाता है।
बादाम,
मूंगफली,
पिस्ता
प्रोटीन
वजन बढ़ाने में मदद करता है और शिशु के जन्म के समय का वजन बढ़ाने में मददगार 

शिशु का अपने स्तर से छोटे होने का जोखिम भी काफी हद तक कम करता है।
बादाम
राइबोफ्लेविन
ऊर्जा उत्पादन और शिशु की हड्डियों, मांसपेशियों और मस्तिष्क के विकास में सहायक है।
खुबानी
विटामिन ए

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

आंखों , त्वचा और हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक।
सूखे केले,
पिस्ता
विटामिन बी 6
एनीमिया की रोकथाम में मदद करता है। दिल की बीमारियों और उच्च कोलेस्ट्रोल को ठीक करता है।
सूखे केले
विटामिन सी
प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है और ह्दय रोग को रोकने में मदद करता है। यह भी शिशु के मस्तिष्क के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
बादाम,
खुबानी,
मूंगफली,
चिलगोजा
विटामिन ई
गर्भावस्था के बाद के चरणों में उच्च-रक्तचाप (प्री-एक्लेम्पसिया) के कारण होने वाली समस्याओं को रोक सकता है।
चिलगोजा
विटामिन के
सामान्य रक्त थक्कों के विकास और हड्डियों के लिए प्रोटीन बनाने के लिए आवश्यक।
चिलगोजा


पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा का अचूक इलाज

*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका के अचूक उपचार

पित्त पथरी (gallstone) की अचूक औषधि

30.11.16

मेथी के दानों से बेहतर होगी सेक्स लाइफ// Fenugreek seeds for better sex life




   मेथी दाना, भारत के घर-घर में मसाले के रूप में उपयोग किया जाता है लेकिन मेथीदाना का यह गुण सिर्फ हमारे आयुर्वेद में ही छुपा था कि यह सेक्स लाइफ को बेहतर बनाता है। फिर भी अपनी यौन क्रियाओं को बढ़ाने की इच्छा रखने वाले भारतीय पुरुष अक्सर पश्चिम के उत्पादों की तरफ देखते हैं। किंतु अब इसकी जरूरत नहीं है, क्योंकि इस भारतीय मसाले के बारे में विदेशों में सिद्ध हो गया है कि मेथी इसमें सक्षम है|
गौरतलब है कि भारत में कढ़ी और सब्जियों में इस्तेमाल की जाने वाली मेथी मुख्य तौर पर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में उगाई जाती है। बालों के लिए भी मेथीदाना को गलाकर पेस्ट बनाकर उपयोग किया जाता है। इससे बाल मुलायम, काले और चिकने होते हैं। इसके साथ में ये पुरुषों के लिए अत्यंत लाभकारी है.

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

मेथी के बीजों का काढ़ा-
मेथी के बीजों का काढ़ा मधुमेह और ब्लड प्रेशर के रोगियों को लाभ पहुंचाता है।
*कभी-कभी रोगी कोलेस्ट्रॉल घटाने वाली एलोपैथिक दवाइयां नहीं सहन कर सकते। ऐसे में यदि वे चाय के पानी में थोड़ा-सा मेथी का काढ़ा डाल कर पिएं तो फायदा होगा।
*कहा जाता है कि यदि गर्भावस्था में मेथी के बीज खाएं या इनका काढ़ा दो या तीन बार लें तो बच्चे के जन्म के बाद पर्याप्त मात्रा में शिशु को दूध मिलेगा और आप अपने शिशु को सही मात्रा में दूध पिला सकेंगी व दूध की कमी नहीं होगी। 
मेथी के बीजों का काढ़ा बनाने का एक आसान तरीका- 
चाय के दो चम्मच मेथी के बीज, एक प्याला पानी में उबालें। इसे दस मिनट तक धीमी आंच पर उबलने दें। अब इसे गैस से उतार लें। ठंडा होने के बाद यह काढ़ा दिन में तीन बार लें।

पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 

*यदि आपको पथरी की शिकायत है तो सर्दियों में सुबह सबसे पहले मेथी के काढ़े वाला पानी पिएं। यह पथरी गलाने में मदद करता है।
*ताजा अनुसंधान बताते हैं कि मेथी के बीज में पाया जाने वाला सैपोनीन पुरुषों में पाए जाने वाले टेस्टोस्टेरॉन हॉरमोन में उत्तेजना पैदा करता है। स्वस्थ सेक्स लाइफ के लिए गुणकारी मेथी का प्रचलन इसे पढ़कर बढ़ तो सकता है लेकिन यह सावधानी जरूरी है कि अत्यधिक मात्रा में इसका सेवन न करें यह गर्म तासीर की वस्तु है। अधिक मात्रा में लेने से यह त्वचा के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
• शिशु के जन्म की प्रक्रिया को आसान करता है-
मेथी शिशु के जन्म की प्रक्रिया को आसान बनाने में बहुत मदद करता है। यह शिशु के जन्म के समय गर्भाशय के संकुचन को बढ़ाकर जन्म की प्रकिया को आसान करने में मदद करता है। इसके कारण यह प्रसव वेदना को कम करने में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन एक बात का ध्यान रखें गर्भधारण के अवस्था में अत्यधिक मात्रा में मेथी न खायें, इससे गर्भपात होने का खतरा बढ़ जाता है।

वात रोग (जोड़ों का दर्द ,कमर दर्द,गठिया,सूजन,लकवा) को दूर करने के उपाय* 

• स्तन के आकार को बढ़ाता है-
अगर आप स्तन के छोटे आकार को लेकर शर्मिंदा महसूस करते हैं तो मेथी को अपने रोज के आहार में शामिल करें। इसका एस्ट्रोजेन हार्मोन स्तन के आकार को बढ़ाने में मदद करता है।

27.11.16

मौत को छोड कर हर मर्ज की औषधि है कलौंजी // Benefits of Nigella seeds


मिठाईयों पर लगने वाली काले रंग की कलौंजी तो सबने देखी होंगी। इसका इस्तेमाल मीठी चाशनी में किया जाता है। लेकिन शायद ही किसी ने इस बात की तरफ ध्यान दिया होगा कि यह कलोंजी महज स्वाद के अलावा बहुत से फायदे कराती है। सिवाय मौत से बचने के अलावा कलौंजी हमारे शरीर को हर तरह से ख़राब होने से बचाती है। आइए जानते है काले रंग कि इस कलौंजी के छोटे से बीजों के बड़े फायदे - ये हैं फायदे कलौंजी के बीजों का सीधा सेवन किया जा सकता है। एक छोटा चम्मच कलौंजी को शहद में मिश्रित करके इसका सेवन करें। पानी में कलौंजी उबालकर छान लें और इसे पीएं। कलौंजी को रीठा के पत्तों के साथ काढ़ा बनाकर पीने से गठिया रोग समाप्त होता है। दूध ब्रेड में ऐसे करें इस्तेमाल दूध में कलौंजी को उबालें। ठंडा होने दें फिर इस मिश्रण को पीएं। कलौंजी को ग्राइंड करें तथा पानी तथा दूध के साथ इसका सेवन करें। कलयुग में धरती पर संजीवनी है कलौंजी, अनगिनत रोगों को चुटकियों में ठीक करती है।
 कैसे करें इसका सेवन?
• कलौंजी के बीजों का सीधा सेवन किया जा सकता है।
एक छोटा चम्मच कलौंजी को शहद में मिश्रित करके इसका सेवन करें।
• पानी में कलौंजी उबालकर छान लें और इसे पिएँ।
• दूध में कलौंजी उबालें। ठंडा होने दें फिर इस मिश्रण को पिएँ।
• कलौंजी को ग्राइंड करें व पानी तथा दूध के साथ इसका सेवन करें।
• कलौंजी को ब्रैड, पनीर तथा पेस्ट्रियों पर छिड़क कर इसका सेवन करें।
 ये किन-किन रोगों में सहायक है?
1. टाइप-2 डायबिटीज:
प्रतिदिन 2 ग्राम कलौंजी के सेवन के परिणामस्वरूप तेज हो रहा ग्लूकोज कम होता है। इंसुलिन रैजिस्टैंस घटती है,बीटा सैल की कार्यप्रणाली में वृद्धि होती है तथा ग्लाइकोसिलेटिड हीमोग्लोबिन में कमी आती है।
2. उच्च रक्तचाप:
100 या 200 मि.ग्रा. कलौंजी के सत्व के दिन में दो बार सेवन से हाइपरटैंशन के मरीजों में ब्लड प्रैशर कम होता है।
रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) में एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार पीने से रक्तचाप सामान्य बना रहता है। तथा 28 मि.ली. जैतुन का तेल और एक चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर पूर शरीर पर मालिश आधे घंटे तक धूप में रहने से रक्तचाप में लाभ मिलता है। यह क्रिया हर तीसरे दिन एक महीने तक करना चाहिए।
३. गंजापन:
जली हुई कलौंजी को हेयर ऑइल में मिलाकर नियमित रूप से सिर पर मालिश करने से गंजापन दूर होकर बाल उग आते हैं।
4. त्वचा के विकार:
कलौंजी के चूर्ण को नारियल के तेल में मिलाकर त्वचा पर मालिश करने से त्वचा के विकार नष्ट होते हैं।
5. मुँहासे:
सिरके में कलौंजी को पीसकर रात को सोते समय पूरे चेहरे पर लगाएं और सुबह पानी से चेहरे को साफ करने से मुंहासे कुछ दिनों में ही ठीक हो जाते हैं।
6. स्फूर्ति:
स्फूर्ति (रीवायटल) के लिए नांरगी के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सेवन करने से आलस्य और थकान दूर होती है।
7. गठिया:
कलौंजी को रीठा के पत्तों के साथ काढ़ा बनाकर पीने से गठिया रोग समाप्त होता है।
8. जोड़ों का दर्द:
एक चम्मच सिरका, आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय पीने से जोड़ों का दर्द ठीक होता है।
9. आँखों के सभी रोग:
आँखों की लाली, मोतियाबिन्द, आँखों से पानी का आना, आँखों की रोशनी कम होना आदि। इस तरह के आँखों के रोगों में एक कप गाजर का रस, आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर दिन में 2बार सेवन करें। इससे आँखों के सभी रोग ठीक होते हैं। आँखों के चारों और तथा पलकों पर कलौंजी का तेल रात को सोते समय लगाएं। इससे आँखों के रोग समाप्त होते हैं। रोगी को अचार, बैंगन, अंडा व मछली नहीं खाना चाहिए।
10. स्नायुविक व मानसिक तनाव:
एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल डालकर रात को सोते समय पीने से स्नायुविक व मानसिक तनाव दूर होता है।
11. गांठ:
कलौंजी के तेल को गांठो पर लगाने और एक चम्मच कलौंजी का तेल गर्म दूध में डालकर पीने से गांठ नष्ट होती है।
12. मलेरिया का बुखार:
पिसी हुई कलौंजी आधा चम्मच और एक चम्मच शहद मिलाकर चाटने से मलेरिया का बुखार ठीक होता है।
13 मिर्गी:
2007 में हुए एक अध्ययन के अनुसार मिर्गी से पीड़ित बच्चों में कलौंजी के सत्व का सेवन दौरे को कम करता है।
14. स्वप्नदोष:
यदि रात को नींद में वीर्य अपने आप निकल जाता हो तो एक कप सेब के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार सेवन करें। इससे स्वप्नदोष दूर होता है। प्रतिदिन कलौंजी के तेल की चार बूंद एक चम्मच नारियल तेल में मिलाकर सोते समय सिर में लगाने स्वप्न दोष का रोग ठीक होता है। उपचार करते समय नींबू का सेवन न करें।
15. पीलिया:
एक कप दूध में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर प्रतिदिन 2 बार सुबह खाली पेट और रात को सोते समय 1 सप्ताह तक लेने से पीलिया रोग समाप्त होता है। पीलिया से पीड़ित रोगी को खाने में मसालेदार व खट्टी वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए।
16. कैंसर का रोग:
एक गिलास अंगूर के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 3 बार पीने से कैंसर का रोग ठीक होता है। इससे आंतों का कैंसर, ब्लड कैंसर व गले का कैंसर आदि में भी लाभ मिलता है। इस रोग में रोगी को औषधि देने के साथ ही एक किलो जौ के आटे में 2 किलो गेहूं का आटा मिलाकर इसकी रोटी, दलिया बनाकर रोगी को देना चाहिए। इस रोग में आलू, अरबी और बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए। कैंसर के रोगी को कलौंजी डालकर हलवा बनाकर खाना चाहिए।
17. दांत:
कलौंजी का तेल और लौंग का तेल 1-1 बूंद मिलाकर दांत व मसूढ़ों पर लगाने से दर्द ठीक होता है। आग में सेंधानमक जलाकर बारीक पीस लें और इसमें 2-4 बूंदे कलौंजी का तेल डालकर दांत साफ करें। इससे साफ व स्वस्थ रहते हैं।
दांतों में कीड़े लगना व खोखलापन: रात को सोते समय कलौंजी के तेल में रुई को भिगोकर खोखले दांतों में रखने से कीड़े नष्ट होते हैं।
18 . नींद:
रात में सोने से पहले आधा चम्मच कलौंजी का तेल और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से नींद अच्छी आती है।
19. लकवा:
कलौंजी का तेल एक चौथाई चम्मच की मात्रा में एक कप दूध के साथ कुछ महीने तक प्रतिदिन पीने और रोगग्रस्त अंगों पर कलौंजी के तेल से मालिश करने से लकवा रोग ठीक होता है।
20. कान की सूजन, बहरापन:
कलौंजी का तेल कान में डालने से कान की सूजन दूर होती है। इससे बहरापन में भी लाभ होता है।
21. सर्दी-जुकाम:
कलौंजी के बीजों को सेंककर और कपड़े में लपेटकर सूंघने से और कलौंजी का तेल और जैतून का तेल बराबर की मात्रा में नाक में टपकाने से सर्दी-जुकाम समाप्त होता है। आधा कप पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल व चौथाई चम्मच जैतून का तेल मिलाकर इतना उबालें कि पानी खत्म हो जाए और केवल तेल ही रह जाए। इसके बाद इसे छानकर 2 बूंद नाक में डालें। इससे सर्दी-जुकाम ठीक होता है। यह पुराने जुकाम भी लाभकारी होता है।
22. कलौंजी को पानी में उबालकर इसका सत्व पीने से अस्थमा में काफी अच्छा प्रभाव पड़ता है।
23. छींके:
कलौंजी और सूखे चने को एक साथ अच्छी तरह मसलकर किसी कपड़े में बांधकर सूंघने से छींके आनी बंद हो जाती है।
24. पेट के कीडे़:
दस ग्राम कलौंजी को पीसकर 3 चम्मच शहद के साथ रात सोते समय कुछ दिन तक नियमित रूप से सेवन करने से पेट के कीडे़ नष्ट हो जाते हैं।
25. प्रसव की पीड़ा:
कलौंजी का काढ़ा बनाकर सेवन करने से प्रसव की पीड़ा दूर होती है।
26 पोलियों का रोग:
आधे कप गर्म पानी में एक चम्मच शहद व आधे चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय लें। इससे पोलियों का रोग ठीक होता है।
27. मासिकधर्म:
• कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से मासिकधर्म शुरू होता है। इससे गर्भपात होने की संभावना नहीं रहती है।
• जिन माताओं बहनों को मासिकधर्म कष्ट से आता है उनके लिए कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में सेवन करने से मासिकस्राव का कष्ट दूर होता है और बंद मासिकस्राव शुरू हो जाता है।
कलौंजी का चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में शहद मिलाकर चाटने से ऋतुस्राव की पीड़ा नष्ट होती है।
• मासिकधर्म की अनियमितता में लगभग आधा से डेढ़ ग्राम की मात्रा में कलौंजी के चूर्ण का सेवन करने से मासिकधर्म नियमित समय पर आने लगता है।
• यदि मासिकस्राव बंद हो गया हो और पेट में दर्द रहता हो तो एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम पीना चाहिए। इससे बंद मासिकस्राव शुरू हो जाता है।
कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन 2-3 बार सेवन करने से मासिकस्राव शुरू होता है।
28. कब्ज:
चीनी 5 ग्राम, सोनामुखी 4 ग्राम, 1 गिलास हल्का गर्म दूध और आधा चम्मच कलौंजी का तेल। इन सभी को एक साथ मिलाकर रात को सोते समय पीने से कब्ज नष्ट होती है।
29. खून की कमी: एक कप पानी में 50 ग्राम हरा पुदीना उबाल लें और इस पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह खाली पेट एवं रात को सोते समय सेवन करें। इससे 21 दिनों में खून की कमी दूर होती है। रोगी को खाने में खट्टी वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए।
30. पेट दर्द:
किसी भी कारण से पेट दर्द हो एक गिलास नींबू पानी में 2 चम्मच शहद और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार पीएं। उपचार करते समय रोगी को बेसन की चीजे नहीं खानी चाहिए। या चुटकी भर नमक और आधे चम्मच कलौंजी के तेल को आधा गिलास हल्का गर्म  पानी मिलाकर पीने से पेट का दर्द ठीक होता है। या फिर 1 गिलास मौसमी के रस में 2 चम्मच शहद और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार पीने से पेट का दर्द समाप्त होता है।
31. सिर दर्द:
कलौंजी के तेल को ललाट से कानों तक अच्छी तरह मलनें और आधा चम्मच कलौंजी के तेल को 1 चम्मच शहद में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से सिर दर्द ठीक होता है। कलौंजी खाने के साथ सिर पर कलौंजी का तेल और जैतून का तेल मिलाकर मालिश करें। इससे सिर दर्द में आराम मिलता है और सिर से सम्बंधित अन्य रोगों भी दूर होते हैं।
कलौंजी के बीजों को गर्म करके पीस लें और कपड़े में बांधकर सूंघें। इससे सिर का दर्द दूर होता है।
कलौंजी और काला जीरा बराबर मात्रा में लेकर पानी में पीस लें और माथे पर लेप करें। इससे सर्दी के कारण होने वाला सिर का दर्द दूर होता है।
32. उल्टी:
आधा चम्मच कलौंजी का तेल और आधा चम्मच अदरक का रस मिलाकर सुबह-शाम पीने से उल्टी बंद होती है।
33. हर्निया:
तीन चम्मच करेले का रस और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह खाली पेट एवं रात को सोते समय पीने से हार्निया रोग ठीक होता है।
34. मिर्गी के दौरें:
एक कप गर्म पानी में 2 चम्मच शहद और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने से मिर्गी के दौरें ठीक होते हैं। मिर्गी के रोगी को ठंडी चीजे जैसे- अमरूद, केला, सीताफल आदि नहीं देना चाहिए।

35. गर्भवती महिलाओं को वर्जित:
*गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं कराना चाहिए क्योंकि इससे गर्भपात हो सकता है।*
36. स्तनों का आकार:
कलौंजी आधे से एक ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से स्तनों का आकार बढ़ता है और स्तन सुडौल बनता है।
37. स्तनों में दूध:
कलौंजी को आधे से 1 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम खाने से स्तनों में दूध बढ़ता है।
38. स्त्रियों के चेहरे व हाथ-पैरों की सूजन:
कलौंजी पीसकर लेप करने से हाथ पैरों की सूजन दूर होती है।
39. बाल लम्बे व घने:
50 ग्राम कलौंजी 1 लीटर पानी में उबाल लें और इस पानी से बालों को धोएं इससे बाल लम्बे व घने होते हैं।
40. बेरी-बेरी रोग:
बेरी-बेरी रोग में कलौंजी को पीसकर हाथ-पैरों की सूजन पर लगाने से सूजन मिटती है।
41. भूख का अधिक लगना:
50 ग्राम कलौंजी को सिरके में रात को भिगो दें और सूबह पीसकर शहद में मिलाकर 4-5 ग्राम की मात्रा सेवन करें। इससे भूख का अधिक लगना कम होता है।
42. नपुंसकता:
कलौंजी का तेल और जैतून का तेल मिलाकर पीने से नपुंसकता दूर होती है।
43. खाज-खुजली:
50 ग्राम कलौंजी के बीजों को पीस लें और इसमें 10 ग्राम बिल्व के पत्तों का रस व 10 ग्राम हल्दी मिलाकर लेप बना लें। यह लेप खाज-खुजली में प्रतिदिन लगाने से रोग ठीक होता है।
44. नाड़ी का छूटना:
नाड़ी का छूटना के लिए आधे से 1 ग्राम कालौंजी को पीसकर रोगी को देने से शरीर का ठंडापन दूर होता है और नाड़ी की गति भी तेज होती है। इस रोग में आधे से 1 ग्राम कालौंजी हर 6 घंटे पर लें और ठीक होने पर इसका प्रयोग बंद कर दें। कलौंजी को पीसकर लेप करने से नाड़ी की जलन व सूजन दूर होती है।
45. हिचकी:
एक ग्राम पिसी कलौंजी शहद में मिलाकर चाटने से हिचकी आनी बंद हो जाती है। तथा कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में मठ्ठे के साथ प्रतिदिन 3-4 बार सेवन से हिचकी दूर होती है। या फिर कलौंजी का चूर्ण 3 ग्राम मक्खन के साथ खाने से हिचकी दूर होती है। और यदि
3 ग्राम कलौंजी पीसकर दही के पानी में मिलाकर खाने से हिचकी ठीक होती है।
46. स्मरण शक्ति:
लगभग 2 ग्राम की मात्रा में कलौंजी को पीसकर 2 ग्राम शहद में मिलाकर सुबह-शाम खाने से स्मरण शक्ति बढ़ती है।
47. पेट की गैस:
कलौंजी, जीरा और अजवाइन को बराबर मात्रा में पीसकर एक चम्मच की मात्रा में खाना खाने के बाद लेने से पेट की गैस नष्ट होता है।
48. पेशाब की जलन:
250 मिलीलीटर दूध में आधा चम्मच कलौंजी का तेल और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से पेशाब की जलन दूर होती है।


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