26.3.16

सोयाबीन के फायदे // Benefits of Soyabeen







सोयाबीन में कुछ ऐसे तत्त्व पायें जाते है। जो कैंसर से बचाव का कार्य करते है। क्योकि इसमें कायटोकेमिकल्स पायें जाते है, खासकर फायटोएस्ट्रोजन और 950 प्रकार के हार्मोन्स। यह सब बहुत लाभदायक है। इन तत्त्वों के कारण स्तन कैंसर एवं एंडोमिट्रियोसिस जैसी बीमारियों से बचाव होता है। यह देखा गया है कि इन तत्त्वों के कारण कैंसर के टयूमर बढ़ते नही है और उनका आकार भी घट जाता है। सोयाबीन के उपयोग से कैंसर में 30 से 45 प्रतिशत की कमी देखी गई है।
*अध्ययनों से पता चला है कि सोयायुक्त भोजन लेने से ब्रेस्ट (स्तन) कैंसर का खतरा कम हो जाता है। महिलाओं की सेहत के लियें सोयाबीन बेहद लाभदायक आहार है। ओमेगा 3 नामक वसा युक्त अम्ल महिलाओं में जन्म से पहले से ही उनमें स्तन कैंसर से बचाव करना आरम्भ कर देता है। जो महिलायें गर्भावस्था तथा स्तनपान के समय ओमेगा 3 अम्ल की प्रचुरता युक्त भोजन करती है, उनकी संतानों कें स्तन कैंसर की आशंका कम होती है। ओमेगा-3 अखरोट, सोयाबीन व मछलियों में पाया जाता है। इससे दिल के रोग होने की आंशका में काफी कमी आती है। इसलिये महिलाओं को गर्भावस्था व स्तनपान कराते समय अखरोट और सोयाबीन का सेवन करते रहना चाहियें।
*उच्च रक्त चाप : रोज कम नमक में भुने आधा कप सोयाबीन का 8 हफ्तों तक सेवन करने से ब्लड़प्रेशर काबू मे रहता है। इसका स्वाद बढ़ाने के लियें इसमें कालीमिर्च भी डालकर सकते हैं। सिर्फ आधा कप रोस्टेड सोयाबीन खाने से महिलाओं का बढ़ा हुआ ब्लडप्रेशर कम होने लगता है। लगातार 8 हफ्ते तक सोयाबीन खाने से महिलाओं का 10 प्रतिशत सिस्टोलिक प्रेशर, 7 प्रतिशत डायस्टोलिक और सामान्य महिलाओं का 3 प्रतिशत ब्लडप्रेशर कम हो जाता है। तो आप भी एक मुट्ठी सोयाबीन को 8 से 12 घण्टे पानी में भिगोकर रख दें और सुबह ही गर्म कर के खायें।

*मानसिक रोगों में :

सोयाबीन में फॉस्फोरस इतनी होती है कि यह मस्तिष्क (दिमाग) तथा ज्ञान-तन्तुओं की बीमारी, जैसे-मिर्गी, हिस्टीरिया, याददाश्त की कमजोरी, सूखा रोग (रिकेट्स) और फेफड़ो से सम्बन्धी बीमारियों में उत्तम पथ्य का काम करता है। सोयाबीन के आटे में लेसीथिन नमक एक पदार्थ तपेदिक और ज्ञान-तन्तुओं की बीमारी में बहुत लाभ पहुंचता है। भारत में जो लोग गरीब है। या जो लोग मछली आदि नही खा सकते है, उनके लियें यह मुख्य फास्फोरस प्रदाता खाद्य पदार्थ है। इसको खाना गरीबों के लियें सन्तुलित भोजन होता है।

*मूत्ररोग : 

सोयाबीन का रोजाना सेवन करने से मधुमेह (डायबिटीज) के रोगी का मूत्ररोग (बार-बार पेशाब के आने का रोग) ठीक हो जाता है।

*मधुमेह (डायबिटीज) : 

सोयाबीन मोटे भारी-भरकम शरीर वालों के तथा मधुमेह (डायबिटीज) वाले लोगों के लियें उत्तम पथ्य है। सोया आटे की रोटी उत्तम आहार है।

दूध को बढ़ाने के लियें :

 दूध पिलाने वाली स्त्री यदि सोया दूध (सोयाबीन का दूध) पीये तो बच्चे को पिलाने के लिये उसके स्तनों में दूध की मात्रा बढ़ जाती है।

*रजोनिवृत्ति : 

महिलाओं में जब रजोनिवृत्ति (मासिकधर्म) होती है, उस समय स्त्रियों को बहुत ही कष्ट होते हैं। रजोनिवृत्त महिलाएं हडि्डयों में तेजी से होने वाले क्षरण से मुख्य रूप से ग्रसित होती है, जिसके कारण उन्हें आंस्टियो आर्थराइटिस बीमारी आ जाती है। घुटनों में दर्द रहने लगता है। यह इसलियें होता है, क्योंकि मासिक धर्म बंद होने से एस्ट्रोजन की कमी हो जाती है क्योकि सोयाबीन में फायटोएस्ट्रोजन होता है। जो उस द्रव की तरह काम करता है, इसलियें 3-4 महीने तक सोयाबीन का उपयोग करने से स्त्रियों की लगभग सभी कठिनाइयां समाप्त हो जाती है।
*महिलाओ को सोयाबीन न केवल अच्छे प्रकार का प्रोटीन देती है बल्कि मासिकधर्म के पहले होने वाले कष्टों-शरीर में सूजन, भारीपन, दर्द, कमर का दर्द, थकान आदि में भी बहुत लाभ करती है हड्डी के कमजोर होने पर : सोयाबीन हडि्डयों से सम्बन्धित रोग जैसे हडि्डयों में कमजोरी को दूर करता है। सोयाबीन को अपनाकर हम स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सकते हैं। अस्थिक्षारता एक ऐसा रोग है जिसमें हडि्डयां कमजोर हो जाती हैं और उसमें फैक्चर हो जाता है। हडि्डयो में कैल्श्यिम की मात्रा कम हो जाती है। इसका परिणाम यह होता है कि *हडि्डयां टूटती ज्यादा है और बनती कम है। 

दिल के रोग में

सोयाबीन में 20 से 22 प्रतिशत वसा पाई जाती है। सोयाबीन की वसा में लगभग 85 प्रतिशत असन्तृप्त वसीय अम्ल होते हैं, जो दिल के रोगियों के लियें फायदेमंद है। इसमें ‘लेसीथिन’ नामक प्रदार्थ होता है। जो दिल की नलियों के लियें आवश्यक है। यह कोलेस्ट्रांल को दिल की नलियों में जमने से रोकता है।
सोयाबीन खून में कोलेस्ट्रोल की मात्रा को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए यह दिल के रोगियों के लिये फायदेमंद है। ज्यादातर दिल के रोगों में खून में कुछ प्रकार की वसा बढ़ जाती है, जैसे-ट्रायग्लिसरॉइड्स, कोलेस्ट्रॉल और एलडीएल, जबकि फायदेमंद वसा यानी एचडीएल कम हो जाती है। सोयाबीन में वसा की बनावट ऐसी है कि उसमें 15 प्रतिशत सन्तृप्त वसा, 25 प्रतिशत मोनो सन्तृप्त वसा और 60 प्रतिशत पॉली असन्तृप्त वसा है। खासकर 2 वसा अम्ल, जो सोयाबीन में पायें जाते हैं। यह दिल के लियें काफी उपयोगी होते हैं। सोयाबीन का प्रोटीन कोलेस्ट्रल एवं एलडीएल कम रखने में सहायक है। साथ ही साथ शरीर में लाभप्रद कोलेस्ट्रॉल एचडीएल भी बढ़ाता है।
*सोया प्रोटीन और आइसोफ्लेवोंस से भरपूर आहार का सेवन रजोनिवृत्त महिलाओं में हड्डियों को कमजोर होने और हड्डियों के क्षरण से संबंधित बिमारी ओस्टियोपोरोसिस के खतरे से बचा सकता है. एक अध्ययन में यह दावा किया गया है. इंग्लैंड के हुल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन के मुताबिक, सोयाबीन खाद्य उत्पादों में आइसोफ्लेवोंस नामक रसायन होता है जो कि संरचना में इस्ट्रोजन हार्मोन जैसा होता है और महिलाओं को ओस्टियोपोरोसिस के खतरे से बचा सकता है.
*अध्ययन के दौरान प्रारंभिक रजोनिवृत्ति की अवस्था वाली 200 महिलाओं को छह महीनों तक आइसोफ्लेवोंस सहित सोया प्रोटीन युक्त अनुपूरक आहार या केवल सोया प्रोटीन दिया गया.
उसके बाद शोधकर्ताओं ने महिलाओं के रक्त में कुछ प्रोटीनों की जांच करके हड्डियों में हुए परिवर्तन का अध्ययन किया.
*शोधकर्ताओं ने पाया कि केवल सोया प्रोटीन लेने वाली महिलाओं की तुलना में आइसोफ्लेवोंस युक्त सोया आहार लेने वाली महिलाओं में हड्डियों के क्षरण की रफ्तार धीमी पड़ गई थी और उनमें ओस्टियोपोरोसिस का खतरा कम हो गया था.
*केवल सोया लेने वाली महिलाओं की तुलना में आइसोफ्लेवोंस के साथ सोया लेने वाली महिलाओं में हृदय रोग का खतरा भी कम पाया गया.
*अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता थोझुकट सत्यापालन के मुताबिक, “हमें ज्ञात हुआ कि रजोनिवृत्ति की प्रारंभिक अवस्था के दौरान महिलाओं की हड्डियों का स्वास्थ्य सुधारने के लिए सोया प्रोटीन और आइसोफ्लेवोंस सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है.
*महिलाओं में रजोनिवृत्ति के तत्काल बाद के वर्षो में हड्डियों का क्षरण सबसे तेजी से होता है क्योंकि इस अवधि में हड्डियों को सुरक्षित रखने वाले इस्ट्रोजन हार्मोन का उनके शरीर में बनना कम हो जाता है.


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23.3.16

चना खाने के फायदे // Benefits of horse gram





आयुर्वेद में चने की दाल और चने को शरीर के लिए स्वास्थवर्धक बताया गया है। चने के सेवने से कई रोग ठीक हो जाते हैं। क्योंकि इसमें प्रोटीन, नमी, कार्बोहाइड्रेट, आयरन, कैल्शियम और विटामिन्स पाये जाते हैं। चना दूसरी दालों के मुकाबले सस्ता होता है और सेहत के लिए भी यह दूसरी दालों से पौष्टिक आहार है। चना शरीर को बीमारियों से लड़ने में सक्षम बनाता है। साथ ही यह दिमाग को तेज और चेहरे को सुंदर बनाता है। चने के सबसे अधिक फायदे इन्हे अंकुरित करके खाने से होते है।

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*चने में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, नमी, चिकनाई, रेशे, कैल्शियम, आयरन व विटामिन्स पाए जाते हैं। चने के सेवन से सुंदरता बढ़ती है साथ ही दिमाग भी तेज हो जाता है।
* 25 ग्राम काले चने रात में भिगोकर सुबह खाली पेट सेवन करने से डायबिटीज दूर हो जाती है।
* गर्म चने रूमाल या किसी साफ कपड़े में बांधकर सूंघने से जुकाम ठीक हो जाता है। रातभर भिगे हुए चनों से पानी को अलग कर उसमें अदरक, जीरा और नमक को मिक्स कर खाने से कब्ज और पेट दर्द से राहत मिलती है।



* मोटापा घटाने के लिए रोजाना नाश्ते में चना लें। शरीर को सबसे ज्यादा पोषण काले चनों से मिलता है। काले चने अंकुरित होने चाहिए। क्योंकि इन अंकुरित चनों में सारे विटामिन्स और क्लोरोफिल के साथ फास्फोरस आदि मिनरल्स होते हैं जिन्हें खाने से शरीर को कोई बीमारी नहीं लगती है। काले चनों को रातभर भिगोकर रख लें और हर दिन सुबह दो मुट्ठी खाएं। कुछ ही दिनों में फर्क  दिखने लगेगा।

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*अंकुरित चना 3 साल तक खाते रहने से कुष्ट रोग में लाभ होता है।चने का सत्तू भी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद औषघि है। शरीर की क्षमता और ताकत को बढ़ाने के लिए गर्मीयों में आप चने के सत्तू में नींबू और नमक मिलकार पी सकते हैं। यह भूख को भी शांत रखता है।
* गर्भवती को उल्टी हो तो भुने हुए चने का सत्तू पिलाएं।
*चना पाचन शक्ति को संतुलित और दिमागी शक्ति को भी बढ़ाता है। चने से खून साफ होता है जिससे त्वचा निखरती है।

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*पथरी की समस्या अब आम हो गई है। दूषित पानी और दूषित खाना खाने से पथरी की समस्या बढ़ रही है। गाल ब्लैडर और किड़नी में पथरी की समस्या सबसे अधिक हो रही है। एैसे में रातभर भिगोए चनों में थोड़ा शहद मिलाकर रोज सेवन करें। नियमित इन चनों का सेवन करने से पथरी आसानी से निकल जाती है। इसके अलावा आप आटे और चने का सत्तू को मिलाकर बनी रोटियां भी खा सकते हो।

* सर्दियों में चने के आटे का हलवा अस्थमा में फायदेमंद होता है।
* चने के आटे की नमक रहित रोटी 40 से 60 दिनों तक खाने से त्वचा संबंधित बीमारियां जैसे-दाद, खाज, खुजली आदि नहीं होती हैं।अधिक काम और तनाव की वजह से पुरूषों में कमजोरी होने लगती है। एैसे में अंकुरित चना किसी वरदान से कम नहीं है। पुरूषों को अंकुरित चनों को चबा-चबाकर खाने से कई फायदे मिलते हैं। इससे पुरूषों की कमजोरी दूर होती है। भीगे हुए चनों के पानी के साथ शहद मिलाकर पीने से पौरूषत्व बढ़ता है। और नपुंसकता दूर होती है।

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*लंबे समय से चली आ रही कफ की परेशानी में भुने हुए चनों को रात में सोते समय अच्छे से चबाकर खाएं और इसके बाद दूध पी लें। यह कफ और सांस की नली से संबंधित रोगों को ठीक कर देता है।

* शहद मिलाकर पीने से नपुंसकता समाप्त हो जाती है।पीलिया की बीमारी में चने की 100 ग्राम दाल में दो गिलास पानी डालकर अच्छे से चनों को कुछ घंटों के लिए भिगो लें और दाल से पानी को अलग कर लें अब उस दाल में 100 ग्राम गुड़ मिलाकर 4 से 5 दिन तक रोगी को देते रहें। पीलिया मे  लाभ जरूरी मिलेगा।
*चने के पौधे के सूखे पत्तों का धुम्रपान करने से हिचकी तथा आमाशय की बीमारियों में लाभ होता है।

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 

*. चीनी के बर्तन में रात को चने भिगोकर रख दे। सुबह उठकर खूब चबा-चबाकर खाएं इसके लगातार सेवन करने से वीर्य में बढ़ोतरी होती है व पुरुषों की कमजोरी से जुड़ी समस्याएं खत्म हो जाती हैं। भीगे हुए चने खाकर दूध पीते रहने से वीर्य का पतलापन दूर हो जाता है।
* दस ग्राम चने की भीगी दाल और 10 ग्राम शक्कर दोनों मिलाकर 40 दिनों तक खाने से धातु पुष्ट हो जाती है।



*बार-बार पेशाब जाने की बीमारी में भुने हूए चनों का सेवन करना चाहिए। गुड़ व चना खाने से भी मूत्र से संबंधित समस्या में राहत मिलती है। रोजाना भुने चनों के सेवन से बवासीर ठीक हो जाता है।
*चने को आप खाने में जरूर इस्तेमाल करें। यह किसी दवा से कम नहीं है। चने खाने से एक नहीं कई फायदे मिलते हैं तो क्यों नहीं अंकुरित चनों का इस्तेमाल रोज किया जा सकता है।

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आलू खाने के फायदे// Benefits of Potato







आलू पौष्टिक तत्वों से भरा होता है। आलू में सबसे ज्यादा मात्रा में स्टॉर्च पाया जाता है। आलू क्षारीय होता है, जिसे खाने से शरीर में क्षारों की मात्रा बरकरार रहती है। आलू में सोडा, पोटाश, और विटामिन ए और डी पर्याप्त मात्रा में होता है।
*आलू को हमेशा छिलके समेत पकाना चाहिए। क्योंकि, आलू का सबसे अधिक पौष्टिक भाग छिलके के एकदम नीचे होता है, जो प्रोटीन और खनिज से भरपूर होता है। आलू को उबालकर या भूनकर खाया जाता है, इसलिए इसके पौष्टिक तत्व आसानी से पच जाते हैं। आइए हम आपको आलू के गुणों के बारे में बताते हैं।
*विटामिन ‘सी’-आलू में विटामिन ‘सी’ बहुत होता है। इसको मीठे दूध में भी मिलाकर पिला सकते हैं। आलू को छिलके सहित गर्म राख में भूनकर खाना सबसे अधिक गुणकारी है या इसको छिलके सहित पानी में उबालकर खायें। पानी, जिसमें आलू उबाले गए हों, को न फेंकें बल्कि इसी पानी में आलुओं की सब्जी बना लें। इस पानी में मिनरल और विटामिन अधिक होते हैं।



*किडनी फेल रोग का अचूक इलाज*

*बेरी-बेरी (Beri-Beri)-बेरी-बेरी का अर्थ है-चल नहीं सकता। इस रोग से जंघागत नाड़ियों में क्षीणता का लक्षण विशेष रूप से होता है। आलू पीसकर, दबाकर, रस निकालकर एक चम्मच की एक खुराक के हिसाब से नित्य चार बार पिलायें। कच्चे आलू को चबाकर रस की निगलने से भी समान लाभ मिलता है
गुर्दे की पथरी होने पर आलू का प्रयोग करना चाहिए। पथरी के रोगी को केवल आलू खिलाकर और बार-बार अधिक पानी पिलाकर पथरी को निकाला जा सकता है।



गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका के अचूक उपचार


*आलू को गोला काटकर आंखों पर रखने से आंखों के आसपास की झुर्रियां समाप्त होती हैं।
*अम्लता (Acidity)—जिन बीमारों के पाचनांगों में अम्लता (खट्टापन) की अधिकता है, खट्टी डकारें आती हैं और वायु अधिक बनती है, उनके लिए गर्म-गर्म राख या रेत में भुना हुआ आलू बहुत लाभदायक है। भुना हुआ आलू गेहूँ की रोटी से आधी देर में पच जाता है और शरीर को गेहूँ की रोटी से भी अधिक पौष्टिक पदार्थ पहुँचाता है। पुरानी कब्ज़ और अंतड़ियों की सड़ाँध दूर करता है। आलू में पोटेशियम साल्ट होता है जो अम्लपित को रोकता है। आलू की प्रकृति क्षारीय है जो अम्लता को कम करती है। अम्लता के रोगी भोजन में नियमित आलू खाकर अम्लता को दूर कर सकते हैं।



हाथ पैर और शरीर का कांपना कारण और उपचार


*आंखों का जाला एवं फूला:-कच्चा आलू साफ-स्वच्छ पत्थर पर घिसकर सुबह-शाम आंख में काजल की भांति लगाने से पांच से छ: वर्ष पुराना जाला और चार वर्ष तक का फूला तीन महीने में साफ हो जाता है।
चेहरे की रंगत के लिए आलू बहूत फायदेमंद होता है। आलू को पीसकर त्‍वचा पर लगाने से रंग गोरा हो जाता है।
*सौंदर्यवर्धक-आलू का रस त्वचा को निखारने के लिए उपयोगी है, क्योंकि इसमें पोटेशियम, सल्फर और क्लोरीन की प्रचुर मात्रा होती है। आलू का रस त्वचा पर लगायें, धोयें।
*आलू के रस को शहद में मिलाकर बच्चों को पिलाने से बच्चों का विकास अच्छे से होता है।

मूत्राषय प्रदाह(cystitis)के सरल उपचार

बच्चों का पौष्टिक भोजन-आलू का रस दूध पीते बच्चों और बड़े बच्चों को पिलाने से वे मोटे-ताजे हो जाते हैं। आलू के रस में मधु मिलाकर भी पिला सकते हैं। आलू का रस निकालने की विधि यह है कि आलुओं को ताजे पानी में अच्छी तरह धोकर छिलके सहित कद्दूकस करके इस लुगदी को कपड़े में दबाकर रस निकाल लें। इस रस को एक घण्टे तक ढककर रख दें। जब सारा कचरा-गूदा नीचे जम जाए तो ऊपर का निथरा रस अलग करके काम में लें।
*गठिया-चार आलू सेंककर छिलके उतारकर नमक-मिर्च डालकर नित्य खाये। इससे गठिया ठीक हो जाती है।
*गुर्दे या वृक्क (किडनी) के रोगी भोजन में आलू खाएं। आलू में पोटैशियम की मात्रा बहुत अधिक पाई जाती है और सोडियम की मात्रा कम। पोटैशियम की अधिक मात्रा गुर्दों से अधिक नमक की मात्रा निकाल देती है। इससे गुर्दे के रोगी को लाभ होता है। आलू खाने से पेट भर जाता है और भूख में सन्तुष्टि अनुभव होती है। आलू में वसा (चर्बी) यानि चिकनाई नहीं पाई जाती है। यह शक्ति देने वाला है और जल्दी पचता है। इसलिए इसे अनाज के स्थान पर खा सकते हैं।"

वीर्य की मात्रा बढ़ाने और गाढ़ा करने के उपाय

*उच्च रक्तचाप के रोगी भी ओलू खायें तो रक्तचाप सामान्य बना रहता है। पानी में नमक डालकर आलू उबालें। छिलका होने पर आलू में नमक कम पहुँचता है और आलू नमकयुक्त भोजन बन जाता है। इस प्रकार यह उच्च रक्तचाप में लाभ करता है। आलू में मैग्नीशियम पाया जाता है जो उच्च रक्तचाप को कम करता है।
विसर्प (छोटी-छोटी फुंसियों का दल):-यह एक ऐसा संक्रामक रोग है जिसमें सूजनयुक्त छोटी-छोटी फुन्सियां होती हैं, त्वचा लाल दिखाई देती है तथा साथ में बुखार भी रहता है। इस रोग में पीड़ित अंग पर आलू को पीसकर लगाने से फुन्सियां ठीक हो जाती हैं और लाभ होता है।
*चोट लगने पर आलू का प्रयोग करना चाहिए। कभी-कभी चोट लगने के बाद त्वचा नीली पड़ जाती है। नीले पडे जगह पर कच्चा आलू पीसकर लगाने से फायदा होता है।



हाइड्रोसील(अंडकोष वृद्धि) के घरेलू और होम्योपैथिक उपचार

दाद के रोग में:-कच्चे आलू का रस पीने से दाद ठीक हो जाता है।
*आलू खाने से पेट भर जाता है और भूख में संतुष्टि अनुभव होती है। आलू में व्रसा (चर्बी) या चिकनाई नहीं पाई जाती है। यह शक्ति देने वाला है, जल्दी पचता है। इसलिए इसे अनाज के स्थान पर खा सकते हैं।
हृदय की जलन:-*इस रोग में आलू का रस पीएं। यदि रस निकाला जाना कठिन हो तो कच्चे आलू को मुंह से चबाएं तथा रस पी जाएं और गूदे को थूक दें। आलू का रस पीने से हृदय की जलन दूर होकर तुरन्त ठंडक प्रतीत होती है।
*झुर्रियों से बचाव के लिए आलू बहुत फायदेमंद होता है। झुर्रियों पर कच्चे आलू को पीसकर लगाने से झुर्रियां समाप्त होती हैं।

*मोटापा-आलू मोटापा नहीं बढ़ाता। आलू को तलकर तीखे मसाले, घी आदि लगाकर खाने से जो चिकनाई पेट में जाती है, वह चिकनाई मोटापा बढ़ाती है। आलू को उबालकर या गर्म रेत या राख में भूनकर खाना लाभप्रद और निरापद है।
*त्वचा की एलर्जी या फिर त्वचा रोग होने पर आलू का प्रयोग करना चाहिए। कच्चे आलू का रस लगाने से त्वचा रोग में फायदा होता है।
*अगर अं‍तडियों से सडांध आ रही हो तो भुने हुए आलू का प्रयोग करना चाहिए। इससे पेट की कब्ज और अंतडियों की सडांध दूर होती है।

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22.3.16

खिचड़ी खाने के फायदे // Benefits of eating khichdi





वैसे तो खिचड़ी को कई प्रकार से बनाया जा सकता है, लेकिन मूंग दाल की खिचड़ी एक प्रचलित व बेहद पौष्टिक व्यंजन होता है। इसे बहुत ही आसानी से और कम समय में बनाया जाता है। स्वाद ही नहीं खिचड़ी सेहत के गुणों से भी भरपूर होती है। इसलिये जब कोई बीमार हो जाता है तो डॉक्टर भी उसे सुपाच्य मूग दाल की खिचड़ी खाने की ही सलाह देते हैं। खिचड़ी पौष्टिक होने के साथ साथ बहुत ही हल्की और आसानी से पचने वाली डिश होती है। साथ ही इसका धार्मिक महत्व भी है और उत्तर भारत में मकरसंक्रान्ति के पर्व पर मूंग दाल की खिचड़ी बनाई जाती है।

 लंबाई बढ़ाने के जबर्दस्त उपाय

*खिचड़ी आयुर्वेदिक आहार का एक मुख्य भोजन है, क्योंकि इसमें तीन दोषों, वत्ता, पित्त और कफ को संतुलित करने की क्षमता होती है। यह क्षमता ही खिचड़ी को त्रिदोषिक आहार बनाती है। शरीर को शांत व डीटॉक्सीफाई करने के अलावा खिचड़ी की सामग्री में ऊर्जा, प्रतिरक्षा और पाचन में सुधार करने के लिए आवश्यक बुनियादी तत्वों का सही संतुलन होता है।
*मूंग दाल खिचड़ी के बारे में कौन नहीं जानता है। क्योंकि आमतौर पर लोग इसको बुखार होने पर या पेट खराब होने पर खाते हैं। आज भी मुझे माँ के हाथ की बनी मूंग दाल की खिचड़ी का स्वाद याद है। लेकिन इसको आप बीमार होने पर ही नहीं किसी भी वक्त खा सकते हैं। इसको बनाना जितना आसान है उतना ही यह पौष्टिकता से भरपूर होता है। मूंग दाल फाइबर से भरपूर होने के कारण इसको खाने के बाद भूख देर से लगती है। अगर आपको कुछ भी खाने का मन नहीं कर रहा है तो फटाफट टेस्टी मूंग दाल की खिचड़ी बनायें और पेट भर कर खायें ।

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*चावल और मूंग दाल की खिचड़ी खाने से दिमाग का विकास होता है और साथ ही यह खिचड़ी शक्तिवर्धक भी होती है |
*सुपाच्य भोजन होने के नाते खिचड़ी फैट व आलस्य नहीं पैदा कतरती है। यही कारण है कि धार्मिक लोगों व मौंक्स का खिचड़ी प्रमुख आहार होता है। पर्याप्त प्रोटीन देने के साथ रक्त में शर्करा की स्थिरता बनाए रखने में सहायक खिचड़ी मन की शांति और शांति की भावनाओं को सुविधाजनक बनाने में मदद करती है।
*खिचड़ी पेट और आंतों को स्मूथ बनाती है। सुपाच्य और हल्की होने की वजह से ही बीमारी में खिचड़ी खाने की सलाह दी जाती है। इसके सेवन से विषाक्त भी साफ होते हैं। नरम और पौष्टिक होने की वजह से यह बच्चों और बुजुर्ग दोनों के लिये बेहतर भोजन है।

फिशर होने के कारण लक्षण और उपचार

*खिचड़ी पेट और आंतों को स्मूथ बनाती है। सुपाच्य और हल्की होने की वजह से ही बीमारी में खिचड़ी खाने की सलाह दी जाती है। इसके सेवन से विषाक्त भी साफ होते हैं। नरम और पौष्टिक होने की वजह से यह बच्चों और बुजुर्ग दोनों के लिये बेहतर भोजन है।
*खिचड़ी एक पौष्टिक भोजन है, जिसमें पोषक तत्वों का सही संतुलन होता है। चावल, दाल और घी का संयोजन आपको कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन सी, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस और पोटेशियम प्रदान करता है। कई लोगों इसके पोषण मूल्य को बढ़ाने के लिए इसमें सब्जियां भी मिला देते हैं।

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पुदीने के फायदे // Benefits of Mint









पुदीने में कई औषधीय गुण होते हैं। सिरदर्द हो रहा हो या पेट में कोई तकलीफ पुदीना बेस्ट है। हिचकी आना भी बंद हो जाती हैं। इसकी चटनी भी बहुत स्वादिष्ट होती है। पुदीना अच्छे एंटीबॉयटिक की तरह भी काम करता है। यहीं नहीं सौंदर्य निखार के लिए पुदीना कारगर है।
हैजे में पुदीना, प्याज का रस, नींबू का रस बराबर-बराबर मात्रा में मिलाकर पिलाने से लाभ होता है। उल्टी-दस्त, हैजा हो तो आधा कप पुदीना का रस हर दो घंटे से रोगी को पिलाएँ।
पुदीने में मौजूद फाइबर कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करता है और मैगनीशियम हड्डियों को ताकत देता है। उल्टी होने पर आधा कप पोदीना हर दो घंटे में रोगी को पिलाएं। उल्टी आना बंद हो जाएगी।
* आंत्रकृमि में पुदीने का रस दें।
* अजीर्ण होने पर पुदीने का रस पानी में मिलाकर पीने से लाभ होता है।
पुदीने का रस काली मिर्च व काले नमक के साथ चाय की तरह उबालकर पीने से जुकाम, खांसी व बुखार में राहत मिलती है।


गोखरू के औषधीय गुण और प्रयोग


* पेटदर्द और अरुचि में 3 ग्राम पुदीने के रस में जीरा, हींग, कालीमिर्च, कुछ नमक डालकर गर्म करके पीने से लाभ होता है।
पुदीने का रस किसी घाव पर लगाने से घाव जल्दी भर जाते हैं। यह चर्म रोगों को भी समाप्त करता है। चर्म रोग होने प
र पुदीना के पत्तों का लेप लगाने से आराम मिलता है।
* प्रसव के समय पुदीने का रस पिलाने से प्रसव आसानी से हो जाता है।
माहवारी समय पर न आने पर पुदीने की सूखी पत्तियों के चूर्ण को शहद के साथ समान मात्रा में मिलाकर दिन में दो-तीन बार नियमित रूप से लें।
* बिच्छू या बर्रे के दंश स्थान पर पुदीने का अर्क लगाने से यह विष को खींच लेता है और दर्द को भी शांत करता है।


वीर्य की मात्रा बढ़ाने और गाढ़ा करने के उपाय 

पुदीने का रस काली मिर्च व काले नमक के साथ चाय की तरह उबालकर पीने से जुकाम, खांसी व बुखार में राहत मिलती है।
* दस ग्राम पुदीना व बीस ग्राम गुड़ दो सौ ग्राम पानी में उबालकर पिलाने से बार-बार उछलने वाली पित्ती ठीक हो जाती है।
* पुदीने को पानी में उबालकर थोड़ी चीनी मिलाकर उसे गर्म-गर्म चाय की तरह पीने से बुखार दूर होकर बुखार के कारण आई निर्बलता भी दूर होती है।
* धनिया, सौंफ व जीरा समभाग में लेकर उसे भिगोकर पीस लें। फिर 100 ग्राम पानी मिलाकर छान लें। इसमें पुदीने का अर्क मिलाकर पीने से उल्टी का शमन होता है।


पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा  का  अचूक  इलाज 

* पुदीने के पत्तों को पीसकर शहद के साथ मिलाकर दिन में तीन बार चाटने से अतिसार सें राहत मिलती है।
* तलवे में गर्मी के कारण आग पड़ने पर पुदीने का रस लगाना लाभकारी होता है।
* हरे पुदीने की 20-25 पत्तियाँ, मिश्री व सौंफ 10-10 ग्राम और कालीमिर्च 2-3 दाने इन सबको पीस लें और सूती, साफ कपड़े में रखकर निचोड़ लें। इस रस की एक चम्मच मात्रा लेकर एक कप कुनकुने पानी में डालकर पीने से हिचकी बंद हो जाती है।
* ताजा-हरा पुदीना पीसकर चेहरे पर बीस मिनट तक लगा लें। फिर ठंडे पानी से चेहरा धो लें। यह त्वचा की गर्मी निकाल देता है।


दिव्य औषधि कस्तुरी के अनुपम प्रयोग 

* हरा पुदीना पीसकर उसमें नींबू के रस की दो-तीन बूँद डालकर चेहरे पर लेप करें। कुछ देर लगा रहने दें। बाद में चेहरा ठंडे पानी से धो डालें। कुछ दिनों के प्रयोग से मुँहासे दूर हो जाएँगे तथा चेहरे की कांति खिल उठेगी।
*अगर आपकी त्वचा सांयली है, तो पुदीने का फेशियल आपके लिए सही रहेगा। इसको बनाने के लिए दो बड़े चम्मच ताजा पीसे पुदीने के साथ दो बड़े चम्मच दही और एक बड़ा चम्मच ओटमील लेकर गाढ़ा घोल बनाएं। इसे चेहरे पर दस मिनट तक लगाएं और चेहरे को धो लें। इसके रस को चेहरे पर लगाने से कील और मुंहासे दूर होता है। पोदीने के रस को मुल्तानी मिट्टी में मिलाकर चेहरे पर लेप करने से चेहरे की झांइयां समाप्त हो जाती हैं और चेहरे की चमक बढ जाती है। शराब में पुदीने की पत्तियों को पीसकर चेहरे पर लगाने से चेहरे के दाग, धब्बे, झांई मिट जाते हैं।


पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 


* पुदीने का सत निकालकर साबुन के पानी में घोलकर सिर पर डालें। 15-20 मिनट तक सिर में लगा रहने दें। बाद में सिर को जल से धो लें। दो-तीन बार इस प्रयोग को करने से बालों में पड़ गई जुएँ मर जाएँगी।
*अधिक गर्मी में जी मिचलाए तो एक चम्मच सूखे पुदीने की पत्तियों का चूर्ण और आधी छोटी इलायची के चूर्ण को एक गिलास पानी में उबालकर पीने से लाभ होता है। हैजा होने पोदीना, प्याज का रस और नींबू का रस बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से लाभ मिलता है।
* पुदीने के ताजे पत्तों को मसलकर मूर्छित व्यक्ति को सुंघाने से मूर्छा दूर होती है।


गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि


*पुदीने की पत्तियों को सुखाकर बनाए गए पाउडर को मंजन की तरह प्रयोग करने से मुंह की दुर्गंध दूर होती है और मसूड़े मजबूत होते हैं।
* पुदीने के रस को नमक के पानी के साथ मिलाकर कुल्ला करने से गले का भारीपन दूर होता है और आवाज साफ होती है।
* पुदीने और सौंठ का क्वाथ बनाकर पीने से सर्दी के कारण होने वाले बुखार में राहत मिलती है।


किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचा



21.3.16

गुलाब जल के फायदे //Benefits of Rose Water



   


गुलाब जल एक प्राकृतिक सौंदर्य प्रसाधन है जिसको लगातार लगाने से कई तरह की स्किन संबधी समस्याएँ खतम हो जाती हैं। चाहे सन बर्न हो गया हो या फिर स्किन को साफ करना हो, गुलाब जल काफी फायदेमंद होता है। साथ ही पुरूष इसे दाढ़ी बनाने के पश्चात प्रयोग कर सकते हैं|
टोनर- गुलाब जल के प्रयोग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह एक बेहतरीन टोनर भी है। यह एक प्राकृतिक अस्ट्रिन्जन्ट होता है इसलिए यह टोनर के रुप में प्रयोग किया जाता है। रोज़ रात को इसे अपने चेहरे पर लगाएं और देखे की आपकी स्किन कुछ ही दिनों में टाइट हो जाएगी और झुर्रियां चली जाएगीं।

मुंहासों को दूर करने के लिए गुलाब जल से बेहतर कुछ भी नहीं -

मुंहासों की समस्या को दूर करने के लिए गुलाब जल का इस्तेमाल करना बहुत ही फायदेमंद होता है. यह त्वचा को साफ करने के साथ ही अपने एंटी-बैक्टीरियल गुण से संक्रमण भी दूर करता है.
आज की बदलती और अव्यवस्थित जीवन शैली में मुंहासों की समस्या काफी सामान्य हो गई है. त्वचा पर मौजूद सूक्ष्म रंध्रों (पोर्स) के बंद हो जाने से, ऑयली त्वचा होने की वजह से, बैक्टीरिया का संक्रमण होने की वजह से, तनाव के चलते, हॉर्मोन्स के असंतुलित हो जाने की वजह से और शराब व सिगरेट के अति सेवन की वजह से मुहासों की समस्या हो जाती है.

गुलाब जल त्वचा के प्राकृतिक पीएच स्तर को बनाए रखने में मददगार होता है और मुंहासों के बनने के लिए उत्तरदायी बैक्टीरिया को पनपने से रोकता है. हालांकि यह बेहद धीमी गति से अपना असर दिखाता है, इसलिए अगर आप मुंहासों की समस्या के लिए गुलाब जल का इस्तेमाल कर रहें हैं तो आपको पर्याप्त धैर्य रखने की जरूरत होगी. जिन लोगों की त्वचा अति संवेदनशील है, उनके लिए गुलाब जल के इस्तेमाल से बेहतर कुछ भी नहीं.
गुलाब जल को आप रुई में भिगोकर भी चेहरे पर लगा सकते हैं लेकिन आप चाहें तो गुलाब जल को इन तरीकों से भी इस्तेमाल में ला सकते हैं -
संतरे के छिलके के पाउडर को गुलाब जल में मिलाकर लगाएं-
संतरे के छिलके को धूप में सुखाकर उसे पीस लें. यह पाउडर त्वचा में निखार लाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसमें पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है जो मुंहासों की समस्या को दूर करने में मददगार होता है. इस पाउडर में थोड़ी सी मात्रा में गुलाब जल मिलाकर एक पेस्ट तैयार कर लें. इस पेस्ट को प्रभावित जगह पर लगाकर कुछ देर के लिए छोड़ दें. उसके बाद गुनगुने पानी से चेहरा साफ कर लें.
गुलाब जल तैयार करने की विधि-
1) सबसे पहले एक कंटेनर में पानी लें और उसमें गुलाब की ताजा पंखुडियों को डाल कर उबलने के लिए रखें। 

2) जब यह भली प्रकार से उबल जाए तब बरतन को कवर करके ठंडा होने के लिए रख दें। अब इसको फ्रिज में 24 घंटे के लिए ठंडा होने के लिए रखें।

3) अब इसको फ्रीज़ से निकाल कर पानी छान लें और किसी हवा बंद शीशी में रख दें। यह हमेशा ताजा बना रहे इसके‍ लिए इसको फ्रिज में ही रखें।
अदरक के साथ गुलाब जल को मिलाकर लगाना भी है फायदेमंद-
अदरक में एंटी-बैक्टीरियल गुण पाया जाता है. यह मुंहासों की समस्या के लिए बेहद कारगर उपाय है. मुंहासों की समस्या को दूर करने के लिए और भविष्य में उन्हें पनपने से रोकने के लिए इस मिश्रण का इस्तेमाल करना बेहद फायदेमंद होता है.

मुलतानी मिट्टी के साथ गुलाब जल का मिश्रण-
रूप निगा।खारने के लिए मुलतानी मिट्टी का इस्तेमाल सदियों से किया जाता रहा है. इसे गुलाब जल के साथ मिलाकर लगाने से एक ओर जहां त्वचा में निखार आता है वहीं त्वचा से जुड़ी कई समस्याएं भी दूर हो जाती हैं.
नींबू के साथ गुलाब जल मिलाकर-
नींबू में अम्लीय गुण होता है जबकि गुलाब जल में ठंडक देने का. जब इन दोनों को साथ में मिलाया जाता है तो यह एक बेहतरीन उत्पाद बन जाता है. मुंहासों को बढ़ने से रोकने और उनकी रोकथाम के लिए यह एक बेहतरीन उत्पाद है.नींबू के रस की जितनी भी मात्रा आप लें, गुलाब जल की मात्रा उसकी दोगुनी होनी चाहिए. इस मिश्रण को चेहरे पर पंद्रह मिनट तक लगाकर छोड़ दें और फिर साफ पानी से चेहरा साफ कर लें.

*रुई लें और उसे गुलाब जल में डुबो कर अपने पूरे चेहरे और गर्दन पर लगाएं। यह न केवल चेहरे को अंदर से साफ करेगा बल्कि रोम छिद्र को भी खोलेगा और स्किन को फ्रेश बना देगा।

सिरदर्द में भी फायदेमंद-
सिरदर्द से परेशान लोग जो रोजाना गोली लेकर काम चलाते हैं वे फ्रिज में रखे एकदम ठंडे गुलाबजल में भीगे कपड़े या रूई को 40-45 मिनट तक सिर पर रखें। काफी आराम मिलेगा|

18.3.16

पाईनेपल(अनानास) जूस के फायदे //Health Benefits of pineapple juice







अनानास का फल बहुत स्वादिष्ट होता है | इसके कच्चे फल का स्वाद खट्टा तथा पके फल का स्वाद मीठा होता है । इसके फल में थाइमिन,राइबोफ्लेविन,सुक्रोस,ग्लूकोस,कैफीक अम्ल,सिट्रिक अम्ल,कार्बोहाईड्रेट तथा प्रोटीन पाया जाता है | आज हम आपको अनानास के कुछ औषधीय गुणों से अवगत कराएंगे -
*पाइनेपल में एंटीऑक्सीडेंट्स काफी अधिक मात्रा में होते हैं और शरीर को साफ रखकर सेल्स क्षय को रोकते हैं। ये एंटीऑक्सीडेंट्स विभिन्न बीमारियों जैसे कि गठिया, ह्रदय संबंधी रोग और कई तरह के कैंसर से बचाते हैं।


गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि



.* पाइनेपल में बहुतायत में मैग्निशियम पाया जाता है जिससे हड्डियों और टिशूज में ताकत आती है। एक कप पाइनेपल ज्यूस से आपको 73 % मैग्निशियम मिल जाता है और सिर्फ 27 % की और आवश्यकता बची रह जाती है।


*आंखों के लिए फायदेमंद-

अनानास अपने विशिष्ट गुणों के कारण आंखों की दृष्टि के लिए भी उपयोगी होता है। पूर्व में हुए शोधों के मुताबिक दिन में तीन बार इस फल को खाने से बढ़ती उम्र के साथ कम होती आंखों की रोशनी का खतरा कम हो जाता है।

*प्रोस्टेट बढ़ने से मूत्र रुकावट की अचूक  औषधि*



* मसूडों और दांतों को स्वस्थ रखने में पाइनेपल बहुत कारगर है। इसके ज्यूस से दांत मजबूत बनते हैं।
*इसमें मैक्यूलर डीजेनेरेशन को रोकने की क्षमता होती है। मैक्यूलर डीजेनेरेशन उम्र से जुड़ी ऐसी बीमारी है जिसमें धीरे-धीरे आंख का सेंट्रल विजन खत्म हो जाता है।

*हड्डियों को मजबूत बनाता है

अनानास में प्रचुर मात्रा में मैग्नीशियम पाया जाता है। यह शरीर की हड्डियों को मजबूत बनाने और शरीर को *ऊर्जा प्रदान करने का काम करता है। एक कप अनानास का जूस पीने से दिनभर के लिए जरूरी मैग्नीशियम के 73 प्रतिशत की पूर्ति होती है।

*पित्ताश्मरी(Gallstone) की अचूक औषधि*

*पाइनेपल को सूजन कम करने के लिए बहुत कारगर समझा जाता है। इसी कारण से यह गठिया रोगियों के लिए बहुत लाभदायक है। इसके उपयोग से हड्डियों में ताकत आती है।
* पाइनेपल में होने वाला विटामिन C इम्मयून सिस्टम को मज़बूत करता है और विभिन्न प्रकार की बीमारियों से आपको बचाए रखता है।
* अनानास फल के रस में मुलेठी, बहेड़ा और मिश्री मिलाकर सेवन करने से दमे और खाँसी में लाभ होता है|
*यदि शरीर में खून की कमी हो तो अनानास खाने व रस पीने से बहुत लाभ होता है | इसके सेवन से रक्तवृद्धि होती है और पाचनक्रिया तेज़ होती है |

*किडनी फेल रोग का अचूक इलाज* 

* अनानास के पके फल के बारीक टुकड़ों में सेंधानमक और कालीमिर्च मिलाकर खाने से अजीर्ण दूर होता है |
*अनानास के पत्तों का काढ़ा बनाकर उसमें बहेड़ा और छोटी हरड़ का चूर्ण मिलाकर देने से अतिसार और जलोदर में लाभ होता है |
* अनानास के पत्तों के रस में थोड़ा शहद मिलाकर रोज़ २ मिली से १० मिली तक सेवन करने से पेट के कीड़े ख़त्म हो जाते हैं |
*पके हुए अनानास का रस निकालकर उसे रूई में भिगो कर मसूड़ों पर लगाने से दांतों का दर्द ठीक होता है 7. *अगर आप उच्च रक्त चाप से ग्रस्त हैं तो आपको पाइनेपल को अपनी डाइट का हिस्सा जरूर बनाना चाहिए। इसमें पोटेशियम काफी मात्रा में होता है और सोडियम की मात्रा कम होती है। इसी वजह से यह शरीर में रक्त के प्रवाह की गति को नियंत्रित करता है।


शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 

* पाइनेपल में पचने वाले एंज़ाइम्स जैसे ब्रोमेलेन होते हैं। अपनी डाइट में इसे शामिल करके आप पेट के कीडों से भी छुटकारा पा सकते हैं।
*विटामिन A की कमी से आपके नाखून कमजोर और सूखे हो जाते हैं। इससे भी ज्यादा विटामिन B की कमी से आपके नाखूनों में दरारें पड़ जाती हैं और वे टूट जाते हैं। पाइनेपल के नियमित उपयोग से इन दोनों ही विटामिंस संबंधी जरूरतें पूरी होती हैं और आपके नाखून स्वस्थ और खूबसूरत बने रहते हैं।
*. अगर आप भी बार बार होठों के सूखने और परत झड़ने से परेशान हैं तो आप पाइनेपल को अपनाकर इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।


पित्त पथरी (gallstone) के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार 

किडनी निष्क्रियता की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि



सैंधा नमक के फायदे




भारत मे अधिकांश लोग समुद्र से बना नमक खाते है जो की शरीर के लिए हानिकारक और जहर के समान है । समुद्री नमक तो अपने आप मे बहुत खतरनाक है लेकिन उसमे आयोडिन नमक मिलाकर उसे और जहरीला बना दिया जाता है , आयोडिन की शरीर मे मे अधिक मात्र जाने से नपुंसकता जैसा गंभीर रोग हो जाना मामूली बात है।
*नमक को सेहत का दुशमन माना जाता है और अधिक नमक खाना सेहत पर गलत असर डाल सकता है। इसलिए सभी डाक्टर नमक के अधिक सेवन करने से मना करते हैं। लेकिन एक एैसा नमक भी है जो आपको कई गंभीर बीमारियों से बचा सकता है। आयुर्वेद में सेंधा नमक को सबसे उत्तम माना गया है। सेंधा नमक लाखों साल पुराना समुद्री नमक है जो पृथ्वी की गहराइयों में दबकर बनता है। यह नमक स्वास्थवर्धक और भोजन का स्वाद बढ़ाने वाला होता है। बहुत ही कम लोगों को इस बारे में पता है कि सेंधा नमक इंसान को कई रोगों से बचा सकता है।

बालों के झड़ने और गंजेपन के रामबाण उपचार 

*उत्तम प्रकार का नमक सेंधा नमक है, जो पहाडी नमक है । आयुर्वेद की बहुत सी दवाईयों मे सेंधा नमक का उपयोग होता है।आम तौर से उपयोग मे लाये जाने वाले समुद्री नमक से उच्च रक्तचाप ,डाइबिटीज़,लकवा आदि गंभीर बीमारियो का भय रहता है । इसके विपरीत सेंधा नमक के उपयोग से रक्तचाप पर नियन्त्रण रहता है । इसकी शुद्धता के कारण ही इसका उपयोग व्रत के भोजन मे होता है ।

*सेंधा नमक के उपयोग से रक्तचाप पर नियन्त्रण रहता है । इसकी शुद्धता के कारण ही इसका उपयोग व्रत के भोजन मे होता है । इसके सेवन से शरीर में ब्लड प्रेशर, चर्म रोग, फेफड़ा, नेत्र रोग, मोटापा, शरीर में जकड़न सहित बीस घातक बीमारियां होती हैं। अगर आपको लगता है कि समुंद्री नमक में आयोडीन होता है और इसलिये यह शरीर के लिये बहुत अच्‍छा होता है तो, आप गलत हैं।


*पित्ताश्मरी(Gallstone) की अचूक औषधि*

*ऐतिहासिक रूप से पूरे उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप में खनिज पत्थर के नमक को 'सेंधा नमक' या 'सैन्धव नमक' कहा जाता है जिसका मतलब है 'सिंध या सिन्धु के इलाक़े से आया हुआ'। अक्सर यह नमक इसी खान से आया करता था। सेंधे नमक को 'लाहौरी नमक' भी कहा जाता है क्योंकि यह व्यापारिक रूप से अक्सर लाहौर से होता हुआ पूरे उत्तर भारत में बेचा जाता था।
*भारत मे 1930 से पहले कोई भी समुद्री नमक नहीं खाता था विदेशी कंपनीया भारत मे नमक के व्यापार मे आज़ादी के पहले से उतरी हुई है ,उनके कहने पर ही भारत के अँग्रेजी प्रशासन द्वारा भारत की भोली भली जनता को आयोडिन मिलाकर समुद्री नमक खिलाया जा रहा है सिर्फ आयोडीन के चक्कर में ज्यादा नमक खाना समझदारी नहीं है,

*किडनी फेल रोग का अचूक इलाज* 

* सेंधा नमक हड्डियों को मजबूत रखता है।

* मांसपेशियों में ऐंठन की समस्या सेंधा नमक के सेवन से ही ठीक हो सकती है।
* नियमित सेंधा नमक का सेवन करने से प्राकृतिक नींद आती है। यह अनिंद्रा की तकलीफ को दूर करता है।
*. यह साइनस के दर्द को कम करता है।
*शरीर में शर्करा को शरीर के अनुसार ही संतुलित रखता है।

* पाचन तंत्र को ठीक रखता है।
*यह शरीर में जल के स्तर की जांच करता है जिसकी वजह से शरीर की क्रियाओं को मदद मिलती है।
* पित्त की पत्थरी व मूत्रपिंड को रोकने में सेंधा नमक और दूसरे नमकों से बेहद उपयोगी है।
* पानी के साथ सेंधा नमक लेने से रक्तचाप नियंत्रित रहता है।

*सेंधा नमक समुद्री नमक होता है इसलिए इसमें सेहत को ठीक रखने के लिए बेहद उपयोगी खनिज तत्व होते हैं। सेंधा नमक और दूसरे आयोडीनयुक्त नमक से बेहद सस्ता भी और फायदेमंद भी होता है।
*. सेंधा नमक का सेवन दमा के रोगीयों के लिए बेहद फायदेमंद होता है।

*यह नमक वजन को नियंत्रित करता है क्योंकि यह शरीर में पाचक रसों का निर्माण करता है। जिससे खाना जल्दी पच जाता है और कब्ज भी दूर हो जाती है।
* सेंधा नमक को पानी के साथ लेने से कोलेस्ट्रोल कम होता है और हाई ब्लडपे्शर भी नियंत्रित रहता है। इसलिए यह दिल के दौरे को रोकने में मदद करता है साथ ही अनियमित दिल की धड़़कनों को नियंत्रित करता है।

नई और पुरानी खांसी के रामबाण उपचार 

* डायबिटीज के मरीजों को सेंधा नमक अपने भोजन में जरूर शामिल करना चाहिए। 

*मानसिक तनाव कम करे

तनाव को कम करने के लिए सेंधा नमक का सेवन बेहद जरूरी है क्योंकि यह तनाव का सामना करने वाले *हार्मोन्स सेरोटोनिन और मेलाटोनिन को शरीर में बनाए रखता है। और इसके नियमित सेवन से तनाव रहित नींद भी आती है।
*सेंधा नमक खून के विकार को भी दूर करता है। इसकी तासीर ठंडी होती है।

शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 

*सेंधा नमक का नियमित सेवन करने से फेफड़ों के रोग, चर्म रोग और शरीर की जकड़न आदि नहीं होते हैं।
*पायरिया की समस्या से दांतों में काले धब्बे बन जाते है। ऐसे में सरसों के तेल में सेंधा नमक मिलाकर दांतों पर मलें। इस उपाय को कुछ दिनों तक लगातार करते रहें।
*नाखूनों के पीलेपन को हटाता है सेंधा नमक।
*सेंधा नमक कफ और वात दोष को भी खत्म करता है।




*काला और सेंधा नमक में 84 मिनरल्स होते हैं इसके अलावा इसमें Trace Minerals भी होते हैं इन Trace Minerals के कारण ही सोडियम शरीर को निरोगी बनाता है।
*आयोडीन के नाम पर हम जो नमक खाते हैं उसमें कोर्इ तत्व नहीं होता। आयोडीन और फ्रीफ्लो नमक बनाते समय नमक से सारे तत्व निकाल लिए जाते हैं और उनकी बिक्री अलग से करके बाजार में सिर्फ सोडियम वाला नमक ही उपलब्ध होता है जो आयोडीन की कमी के नाम पर पूरे देश में बेचा जाता है, जबकि आयोडीन की कमी सिर्फ पर्वतीय क्षेत्रों में ही पार्इ जाती है इसलिए आयोडीन युक्त नमक केवल उन्ही क्षेत्रों के लिए जरुरी है।
आयोडीन हमें आलू, अरवी के साथ-साथ हरी सब्जियों से भी मिल जाता है।
*सैंधा नमक सफ़ेद और लाल रंग मे पाया जाता है । सफ़ेद रंग वाला नमक उत्तम होता है। यह ह्रदय के लिये उत्तम, दीपन और पाचन मे मदद रूप, त्रिदोष शामक, शीतवीर्य अर्थात ठंडी तासीर वाला, पचने मे हल्का है । इससे पाचक रस बढ़्ते हैं। रक्त विकार आदि के रोग जिसमे नमक खाने को मना हो उसमे भी इसका उपयोग किया जा सकता है। यह पित्त नाशक और आंखों के लिये हितकारी है । दस्त, कृमिजन्य रोगो और रह्युमेटिज्म मे काफ़ी उपयोगी होता है
*सेंधा नमक /काला नमक / डेले वाले नमक में सोडियम की मात्रा कम होती है और मैग्नीशियम, कैल्शियम, पोटेशियम आदि का अनुपात सन्तुलित होता है इसलिये यह नमक हल्का, सुपाच्य और शरीर के लिए लाभदायक होता है।
*सेंधा नमक रक्त विकार आदि के रोग जिसमें नमक खाने को मना हो उसमे भी इसका उपयोग किया जा सकता है। यह पित्त नाशक और आंखों के लिये हितकारी है । दस्त, कृमिजन्य रोगो और रह्युमेटिज्म मे काफ़ी उपयोगी होता है ।


गोमूत्र और हल्दी से केन्सर का इलाज

*वात रोगों के प्राकृतिक ,आयुर्वेदिक घरेलू उपचार*

मोतियाबिंद के घरेलू प्राकृतिक उपचार

आँखों का चश्मा हटाने का अचूक घरेलू उपाय

17.3.16

जौ खाने के फायदे //Benefits of barley




      हमारे ऋषियों-मुनियों का प्रमुख आहार जौ ही था। वेदों द्वारा यज्ञ की आहुति के रूप में जौ को स्वीकारा गया है। जौ को भूनकर, पीसकर, उस आटे में थोड़ा-सा नमक और पानी मिलाने पर सत्तू बनता है। कुछ लोग सत्तू में नमक के स्थान पर गुड़ डालते हैं व सत्तू में घी और शक्कर मिलाकर भी खाया जाता है। गेंहू , जौ और चने को बराबर मात्रा में पीसकर आटा बनाने से मोटापा कम होता है और ये बहुत पौष्टिक भी होता है .राजस्थान में भीषण गर्मी से निजात पाने के लिए सुबह सुबह जौ की राबड़ी का सेवन किया जाता है .

कलौंजी(प्याज के बीज) के औषधीय उपयोग

बढ़ते कोलेस्ट्रॉल को लेकर परेशान हैं तो ऎसा करें
जौ कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और हृदय  रोगों से बचाता है।
अगर आपको ब्लड प्रेशर की शिकायत है और आपका पारा तुरंत चढ़ता है तो फिर जौ को दवा की तरह खाएँ। हाल ही में हुए एक अध्ययन में दावा किया गया है कि जौ से ब्लड प्रेशर कंट्रोल होता है।कच्चा या पकाया हुआ जौ नहीं बल्कि पके हुए जौ का छिलका ब्लड प्रेशर से बहुत ही कारगर तरीके से लड़ता है।
रोटी: 
जौ, गेहूं और चने को मिक्स करके बनाए हुए आटे की रोटी डायबिटीज, ब्लड प्रेशर , मोटापा, कोलेस्ट्रॉल और हृदय  रोगों में बहुत फायदेमंद होती है।
इस मिक्स आटे में गेहूं 60 प्रतिशत, जौ 30 प्रतिशत और चना 10 प्रतिशत होना चाहिए। रोटी के अलावा जौ से बना दलिया भी स्वादिष्ट व शरीर के लिए पौष्टिक होता है।

*किडनी में क्रिएटिनिन और यूरिया की समस्या के घरेलू उपचार* 

त्वचा: 
जौ के आटे में बेसन, संतरे के छिलके का पाउडर, हल्दी, चंदन पाउडर और गुलाब जल मिलाकर बनाया गया उबटन त्वचा की चमक बनाए रखता है।
*सत्तू भी फायदेमंद: 
भुने हुए जौ को पीसकर पानी व मिश्री मिलाकर बनाया सत्तू गर्मी में अमृत के समान है। जौ से बनी आयुर्वेद की दवा यवक्षार को आयुर्वेद की अन्य दवाओं के साथ लेने से गुर्दे की पथरी निकल जाती है और पेशाब की जलन भी दूर होती है। यदि यवक्षार को 1-2 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ कुछ दिन लिया जाए तो खांसी से आराम मिलता है।*जौ में विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, मैगनीज, सेलेनियम, जिंक, कॉपर, प्रोटीन, अमीनो एसिड, डायट्री फाइबर्स और कई तरह के एंटी-ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. जौ एक बहुत ही फायदेमंद अनाज है. आप चाहे तो इसे अपने रोज के आहार में शामिल कर सकते हैं या फिर एक औषधि के रूप में भी ले सकते हैं.

नसों में होने वाले दर्द से निजात पाने के तरीके 

*हर रोज जौ का पानी पीने से एक ओर जहां स्वास्थ्य से जुड़ी बहुत सी समस्याएं दूर हो जाती हैं वहीं कई बीमारियों के होने का खतरा भी बहुत कम हो जाता है. इसके साथ ही ये शरीर को स्वस्थ रखने में भी बहुत कारगर होता है. कई लोग जौ को भाप द्वारा पकाकर भी इस्तेमाल करते हैं. पर जौ का पानी स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक फायदेमंद होता है
.
    जौ का पानी तैयार करने के लिए कुछ मात्रा में जौ ले लीजिए और उसे अच्छी तरह साफ कर लीजिए. उसके बाद इसे करीब चार घंटे तक पानी में भिंगोकर छोड़ दीजिए. उसके बाद इस पानी को तीन से चार कप पानी में मिलाकर उबाल लीजिए. पर इसे धीमी आंच पर ही उबलने दें.लगभग 45 मिनट बाद गैस बंद कर दीजिए और इस पानी को ठंडा होने दीजिए. जब ये ठंडा हो जाए तो इसे एक बोतल में भर लीजिए और दिनभर एक से दो गिलास पीते रहें|
* पथरी- 
जौ का पानी पीने से पथरी निकल जायेगी। पथरी के रोगी जौ से बने पदार्थ लें।
* अगर आपको यूरीन से जुड़ी कोई समस्या है तो जौ का पानी आपके लिए बहुत फायदेमंद होगा. इसके अलावा किडनी से जुड़ी ज्यादातर समस्याओं में जौ का पानी बहुत कारगर होता है.

मर्दानगी(सेक्स पावर) बढ़ाने के नुस्खे 


*मूत्रावरोध- 
जौ का दलिया दूध के साथ सेवन करने से मूत्राशय सम्बन्धि अनेक विकार समाप्त हो जाते है।

आँव रोग (पेचिश) के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार

*अतिसार- 
जौ तथा मूग का सूप लेते रहने से आंतों की गर्मी शांत हो जाती है। यह सूप लघू, पाचक एंव संग्राही होने से उरःक्षत में होने वाले अतिसार (पतले दस्त) या राजयक्ष्मा (टी. बी.) में हितकर होता है।
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शरीर का वजन बढ़ाने के लिये-
 जौ को पानी भीगोकर, कूटकर, छिलका रहित करके उसे दूध में खीर की भांति पकाकर सेवन करने से शरीर पर्यात हूष्ट पुष्ट और मोटा हो जाता है।
*ब्लड कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने के लिए भी जौ का पानी बहुत फायदेमंद होता है. कोलेस्ट्रॉल लेवल कम होने की वजह से दिल से जुड़ी कई तरह की समस्याएं होने का खतरा कम हो जाता है. इससे दिल भी स्वस्थ रहता है्.
*मधुमेह के रोगियों के लिए जौ का पानी बहुत फायदेमंद होता है. ये शरीर में शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में बहुत सहायक होता है


बंद नाक खोलने और कफ़ निकालने के अनुपम नुस्खे

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*मधुमेह (डायबटीज)- 
   छिलका रहित जौ को भून पीसकर शहद व जल के साथ सत्तू बनाकर खायें अथवा दूध व घी के साथ दलिया का सेवन पथ्यपूर्वक कुछ दिनों तक लगातार करते करते रहने से मधूमेह की व्याधि से छूटकारा पाया जा सकता है।
*जौ का पानी पीने से शरीर के भीतर मौजूद विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं. जिससे चेहरे पर भी निखार आता है. साथ ही ये इम्यून सिस्टम को भी बेहतर बनाए रखता है.
* जलन- 
गर्मी के कारण शरीर में जलन हो रही हो, आग सी निकलती हो तो जौ का सत्तू खाने चाहिये। यह गर्मी को शान्त करके ठंडक पहूचाता है और शरीर को शक्ति प्रदान करता है।
*जौ की राख को पानी में खूब उबालने से यवक्षार बनता है जो किडनी को ठीक कर देता है
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11.3.16

लाल मिर्च के फायदे // Benefits of Red peeper





सामान्यत: मिर्च स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं माना गया है। हरी मिर्च और लाल मिर्च के बिना भारतीय भोजन का स्वाद अधूरा है। लेकिन लाल मिर्च पर किए गए शोधों और आयुर्वेद के अनुसार लाल मिर्च का सेवन नुकसानदायक नहीं बल्कि फायदेमंद भी है तो आइए आज हम आपको बताते हैं लाल मिर्च के कुछ ऐसे ही गुणों और आयुर्वेदिक उपयोगों के बारे में। लाल मिर्च कई तरह के उपयोगी तत्व भी पाएं जाते हैं। जैसे अमीनो एसिड, एस्कार्बिक एसिड, फोलिक एसिड, सिट्रीक एसिड, मैलिक एसिड, मैलोनिक एसिड, सक्सीनिक एसिड, शिकिमिक एसिड, आक्जेलिक एसिड, क्युनिक एसिड, कैरोटीन्स , क्रिप्तोकैप्सीन, बाई-फ्लेवोनाईड्स, कैप्सेंथीन, कैप्सोरूबीन डाईएस्टर, आल्फा-एमिरिन, कोलेस्टराल, फ़ाय्तोईन, फायटोफ्लू, कैप्सीडीना, कैप्सी-कोसीन, आदि तत्व पाएं जाते हैं।
लाल मिर्च सिर्फ आपके भोजन में तीखा स्वाद ही नहीं लाती बल्कि यह सेहत से जुड़ी कुछ आपातकालीन स्थि‍तियों में भी बेहद प्रभावकारी है। लाल मिर्च के यह बेमिसाल फायदे, आपके कभी भी काम आ सकते हैं, जरूर जानिए -


गेहूं के जवारे हैं अच्छे स्वास्थय की कुंजी. 




*लाल मिर्च खाना मोटापा कम करने और भोजन के बाद अधिक कैलोरी जलाने में मददगार हो सकता है।
* लाल मिर्च पर किए गए वैज्ञानिक शोध से पता चला है कि इसमें से तत्व मौजूद हैं जो शरीर में उठने वाले दर्द के निवारण के लिए लाभदायक होती है।
* लाल मिर्च की लुगदी बना लें जिस ओर की आंख लाल हो या दर्द हो उसी पैर के अंगूठे पर व लुगदीका लेप करें, यदि दोनों आंख में हो रही हों तो दोनों में करें- 2 घंटे में आंख ठीक हो जायेगी।
*अशुद्ध पानी से पेट में होने वाली परेशानी है तो लाल मिर्च की चटनी को घी में छोंककर खाने से गंदे पानी का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है।
*अगर किसी को सांप कांट ले तो मिर्च खिलाने से विष खत्म होगा।
*विच्छू के काटने पर लाल मिर्च का लेप लगायें ठंडक पड़ जायेगी।


पेट दर्द मे घरेलू उपाय 

* गर्मी में हरी मिर्च खाने से इसके बीज अगर आपके पेट में हैं तो हैजा का डर नहीं होता है।
* हरी मिर्च खाने के साथ खायें। अचार खायें इसमें विटामिन सी पर्याप्त मात्रा में होता है।
* यदि गले में इन्फेंकशन हो गया हो या खांसी हो तो लाल मिर्च की चटनी अवश्य ग्रहण करें।
*आपको जिस तरह पसंद हो वैसे लाल मिर्च खायें। लाल मिर्च बेसन में डालकर पकोड़े बनाकर खाएं।
*अगर आपकी नाक बंद हो गई है या फिर सर्दी के कारण नाक अधि‍क बह रही है, तो लाल मिर्च आपके लिए फायदेमंद हो सकती है। जरा सी लाल मिर्च पानी के साथ घोलकर पीने से आपकी बंद नाक खुल सकती है और बहती नाक भी बंद हो सकती है।
*पिसी हुई लाल मिर्च का रक्तवाहियों में रक्त के थक्के बनने से रोकाता है और सेवन हार्ट अटैक की संभावना को कम करता है। इसके अलावा अवांछि‍त तत्वों को बाहर निकालने के साथ ही आंतों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाता है।


एक्ज़ीमा के घरेलु उपचार 


*शरीर के अंदरुनी हिस्से में चोट, आघात या रक्त का बहाव होने पर लाल मिर्च का प्रयोग किया जा सकता है। जरा-सी लाल मिर्च को पानी में घोलकर पीने पर यह काफी फायदेमंद साबित होगा। गर्दन की अकड़न में भी यह फायदेमंद है।
*मांसपेशि‍यों में सूजन, किसी प्रकार की जलन, कमर या पीठ दर्द या फिर शरीर के किसी भी भाग में होने वाला दर्द लाल मिर्च के प्रयोग से ठीक किया जा सकता है। इसमें मौजूद विटामिन सी, फ्लेवेनॉइड्स, पोटेशि‍यम और मैंगनीज लाभदायक है।
*लाल मिर्च का एक बड़ा फायदा यह है कि त्वचा पर कोई चोट, घाव या फिर अन्य कारण से खून का बहना नहीं रुक रहा हो, तो बस एक चुटकी लाल मिर्च लगाने से खून बहना बंद हो जाता है। लाल मिर्च के हीलि‍ंग पावर के कारण ऐसा होता है। हालांकि ऐसा करने पर आपको जलन या तकलीफ हो सकती है, लेकिन बहते खून को रोकने के लिए यह एक अच्छा विकल्प है।


किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

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