12.4.16

बच्चों के सूखा रोग के उपचार // How to cure Marasmas





अगर बच्चा एक साल का हो जाने पर भी खडे़ होने में असमर्थ (खड़ा न हो सके) हो तो ऐसी हालत में बच्चे को सूखा रोग (रिकेट्स) होने की संभावना ज्यादा रहती है। बच्चे को उठने या बैठने में परेशानी, उदर विकार (पेट की बीमारी), खांसी-जुकाम, माथे पर पसीना, शिरगत तालु या कलान्तराल (फोन्टेनेल) का देर से भरना, दांतों का सफेद होना या दूध के दांतों का देर से निकलना, उदर (पेट) में गैस भरना, हाथ-पैरों की वक्रता (टेढ़ा-मेढ़ा) होना, विकृत वक्ष (छाती में खराबी) इस रोग के सामान्य लक्षण हैं।
यह रोग निम्न प्रकार का माना गया है-


दिव्य औषधि कस्तुरी के अनुपम प्रयोग 

पहिले प्रकार का रोग : सूखा रोग मिथ्या आहार-विहार (दूषित भोजन के कारण) के कारण होता है। इस भोजन से वातादि दोष (पेट में गैस) मां के दूध को भी दूषित कर देते हैं। उस दूध के पीने का असर बच्चे के शरीर रस, खून मांस, मेद (पेट) आदि पर पड़ता है और बच्चा सूखने लगता है।
दूसरे प्रकार का रोग :
बच्चे के बढ़ने के लिए अच्छे भोजन की जरूरत पड़ती है। मां के दूध में ये तत्व पूरी मात्रा में नहीं होते हैं अथवा अन्न और दूध दोनों का सेवन करने वाले बच्चों को पौष्टिक तत्त्वों से युक्त भोजन नहीं मिलता और रोगी सूखने लगता है।
तीसरे प्रकार का रोग :
फेफड़ों के विकार बच्चे के रोगों का कारण उसे कफ (बलगम), खांसी, प्रभृति विकारों की वृद्धि होना है। सही उपचार न हो पाने के कारण रोग बढ़ते जाते हैं और बच्चे का शरीर सूखता चला जाता है।
चौथे प्रकार का सूखा रोग : यह रोग अक्सर दूषित अन्न खाने वाले बच्चों को होता है। खराब भोजन के करने से किसी बुरे रोग का लगना और सही उपचार न हो पाने के कारण रोग पुराना हो जाने के कारण शरीर के अंगों का खराब हो जाना इस रोग का मुख्य कारण हैं।


गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

विभिन्न औषधियों से उपचार: टमाटर: बच्चे को कच्चे लाल टमाटर का रस एक महीने तक रोजाना पिलाने से सूखा रोग (रिकेट्स) में आराम आता है और बच्चा सेहतमंद और अच्छा हो जाता है। सूखा रोग में टमाटर का सेवन बच्चों के लिए बहुत ही लाभकारी है।
अंगूर:
अंगूर का रस जितना ज्यादा हो सके बच्चे को पिलाना लाभकारी है। इस रस को टमाटर के रस के साथ मिलाकर पिलाने से भी बच्चा सेहतमंद और तन्दुरुस्त होता है।
बादाम:
रात को तीन बादाम भिगोकर और सुबह उसे पीसकर दूध में मिलाकर बच्चे को पिलाने से सूखा रोग (रिकेट्स) ठीक हो जाता है।
अमचूर: अमचूर को भिगोकर उसमें शहद मिलाकर रोजाना दो बार बच्चे को चटाने से सूखा रोग में आराम आता है।


*किडनी फेल रोग का अचूक इलाज* 

बैंगन: बैंगन को अच्छी तरह से पीसकर उसका रस निकालकर उसके अंदर थोड़ा सा सेंधा
नमक मिला लें। इस एक चम्मच रस को रोजाना दोपहर के भोजन के बाद कुछ दिनों तक बच्चे को पिलाने से सूखा रोग (रिकेट्स) में आराम आता है।
नागरमोथा:
नागरमोथा, पीपल, अतीस और काकड़ासिंगी को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। फिर इस चूर्ण में से एक चुटकी चूर्ण लेकर शहद के साथ बच्चे को चटाने से बुखार, अतिसार (दस्त), खांसी तथा सूखा रोग (रिकेट्स) दूर हो जाता है।
आधुनिक चिकित्सा मे सूखारोग के लिए निम्न उपाय बताए गए हैं-
बढ़ते बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन
बढ़ते बच्चों को पौष्टिक भोजन की बहुत जरूरत होती है। बच्चों के शरीर में जब प्रोटीन और कैलोरी की कमी होती है (कुपोषण), तो उनमें मेरास्मास और क्वाशियॉरकर जैसी बीमारियां होती हैं।
मेरास्मास और क्वाशियारकर किसे होता है ?
यह 1-5 साल तक की आयु के बच्चे को होता है।



मेरास्मास के लक्षण

यह बीमारी पैर में सूजन के साथ शुरू होती है और फिर हाथ तथा शरीर फूलने लगता है। त्वचा खुरदरी होती है, सिर पर बाल कम होते हैं और उनका रंग लाल भूरा होता है। यह मेरास्मास के लक्षण हैं। इससे ग्रस्त बच्चे बीमार और थके-थके नजर आते हैं।


क्वाशियारकर के लक्षण


इस बीमारी से ग्रस्त बच्चे कमजोर और दुबले होते हैं। बच्चों को शुरुआती दिनों में डायरिया हो सकता है। उनकी त्वचा रूखी होती है।
इन बीमारियों से ग्रस्त बच्चों के इलाज के लिए सलाह
बच्चों को नियमित रूप से कैलोरी और प्रोटीन युक्त पौष्टिक भोजन दें। बहुत अधिक संक्रमित बच्चों को तत्काल डॉक्टर से पास ले जायें।
मेरास्मास और क्वाशियारकर से प्रभावित बच्चों का आहार
राष्ट्रीय पोषण संस्थान, हैदराबाद ने मिक्स नामक पौष्टिक भोजन विकसित किया है, जिसमें सभी पौष्टिक तत्वों का मिश्रण है। यह मिश्रण घर में भी तैयार किया जा सकता है।पौष्टक मिश्रण में उपयोग की जानेवाली पदार्थ-

भुना हुआ गेहूं- 40 ग्राम
पत्तेदार अनाज- 16 ग्राम
भुनी मूंगफली- 10 ग्राम
जैगरी- 20 ग्राम
इस मिश्रण को पीस लें और अच्छी तरह मिला लें। इसमें 330 ग्राम कैलोरी और 11.3 ग्राम प्रोटीन होता है।
इस मिश्रण को दूध या पानी के साथ खिलायें। मेरास्मास या क्वाशियारकर से ग्रस्त बच्चों को इसे खिला कर इसका परीक्षण किया गया है।


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अलसी के तेल के फायदे //Health benefits of linseed oil





भारत देश के कुछ प्रांतों में अलसी का तेल खाद्य तेलों के रूप में आज भी प्रचलन में है। धीरे-धीरे अलसी को हम भूलते जा रहे हैं, परंतु अलसी पर हुए नए शोध-अध्ययनों ने बड़े चमत्कारी प्रभाव एवं चैंकाने वाले तथ्य दुनिया के सामने लाए हैं। आज सारे संसार में इसके गुणगान हो रहे हैं। विशिष्ट चिकित्सकों की सलाह में भी अलसी के चमत्कारों की महिमा गाई जा रही है।
*अलसी की तरह अलसी के बीजों में मौजूद ढेर सारा तेल भी अनेक प्रकार की औषधियों का भंडार है।
*अलसी में 23 प्रतिशत ओमेगा-3 फैटी एसिड, 20 प्रतिशत प्रोटीन, 27 प्रतिशत फाइबर, लिगनेन, विटामिन बी ग्रुप, सेलेनियम, पोटेशियम, मेगनीशियम, जिंक आदि होते हैं। जिसके कारण अलसी शरीर को स्वस्थ रखती है व आयु बढ़ाती है। इन्हीं गुणों के कारण अलसी को सुपर फूड भी कहा जाता है।
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*अलसी का तेल खाने की लालसा और चर्बी को कम करती है और शरीर में बी.एम.आर. और शक्ति व स्टेमिना बढ़ाती है। साथ ही इसका सेवन आलस्य दूर और वजन कम करने में सहायता करता है। साथ ही ओमेगा-3 और प्रोटीन मांस-पेशियों का विकास करते हैं अतः बॉडी बिल्डिंग के लिये भी श्रेष्ठ प्रकार का पूरक आहार है अलसी।
*अलसी की तरह अलसी के बीजों में मौजूद ढेर सारा तेल भी अनेक प्रकार की औषधियों का भंडार है। इसमें विटामिन ई और ओमेगा 3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा इसमें अनेकों तत्व जैसे पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, लोहा, कॉपर, ​जिंक, प्रोटीन, विटामिन बी आदि भी पाये जाते हैं।
*हड्डी टूटने के बाद जुड़ने पर भी उस जगह की मांसपेशियां अकड़ जाती हैं। उस परिस्थिति में अलसी के तेल की लगातार मालिश करने से मांसपेशियां मुलायम हो जाती है।
*अलसी के शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट ओमेगा-3 व लिगनेन त्वचा के कोलेजन की रक्षा करते हैं और त्वचा को आकर्षक, कोमल, नम, बेदाग व गोरा बनाते हैं। अलसी सुरक्षित, स्थाई और उत्कृष्ट भोज्य सौंदर्य प्रसाधन है जो त्वचा में अंदर से निखार लाता है|
*अलसी में विद्यमान ओमेगा-3 फैट, जिंक और मेगनीशियम आपके शरीर में पर्याप्त टेस्टोस्टिरोन हार्मोन और उत्कृष्ट श्रेणी के फेरोमोन ( आकर्षण के हार्मोन) स्रावित होंगे। टेस्टोस्टिरोन से आपकी कामेच्छा चरम स्तर पर होगी। आपके साथी से आपका प्रेम, अनुराग और परस्पर आकर्षण बढ़ेगा। आपका मनभावन व्यक्तित्व, मादक मुस्कान और षटबंध उदर देख कर आपके साथी की कामाग्नि भी भड़क उठेगी।
*वसा रहित होने के कारण अलसी के तेल से बना खाना दिल के रोगों से दूर रखता है। अलसी का तेल व बीज कोलेस्ट्रोल को कम करने के साथ हृदय संबंधी अन्य रोगों से बचाता है। साथ ही अलसी का तेल एनजाइना व हाइपरटेंशन से भी बचाता है।
*अलसी का तेल शर्करा को नियंत्रित ही नहीं करता, बल्कि मधुमेह के दुष्प्रभावों से सुरक्षा और उपचार भी करता है। अलसी में रेशे भरपूर 27 प्रतिशत लेकिन शर्करा की मात्रा मात्र 1.8 प्रतिशत यानी न के बराबर होती है। इसलिए यह शून्य-शर्करा आहार कहलाती है और मधुमेह के लिए आदर्श आहार है।
*आयुर्वेद के अनुसार, हर बीमारी की जड़ हमारा पेट है और पेट को साफ रखने में अलसी का तेल इसबगोल से भी अधिक प्रभावशाली होता है। पेट से जुड़ी बीमारियां जैसे आई.बी.एस., अल्सरेटिव कोलाइटिस, अपच, बवासीर, मस्से आदि का भी उपचार करती है अलसी| देखेंगे की अलसी के सेवन से कैसे प्रेम और यौवन की रासलीला सजती है, जबर्दस्त अश्वतुल्य स्तंभन होता है, जब तक मन न भरे सम्भोग का दौर चलता है, देह के सारे चक्र खुल जाते हैं, पूरे शरीर में दैविक ऊर्जा का प्रवाह होता है और सम्भोग एक यांत्रिक क्रीड़ा न रह कर एक आध्यात्मिक उत्सव बन जाता है, समाधि का रूप बन जाता है।
*अलसी के तेल और चूने के पानी का इमल्सन आग से जलने के घाव पर लगाने से घाव बिगड़ता नहीं और जल्दी भरता है।
*अलसी तेल के सेवन से झुंझलाहट या क्रोध नहीं आता, मन प्रसन्‍न रहता है इसलिए इसे फीलगुड फूड भी कहा जाता है। इसके सेवन से सकारात्‍मक सोच बनी रहती है और आपके तन, मन और आत्मा को शांत और सौम्य कर देती है।
*डायबिटीज़ के रोगियों के पैर में घाव हो जाते हैं जो जल्दी भरते नहीं हैं, ऐसी स्थिति में अलसी के तेल की मालिश करने से रक्‍त संचार सुचारू रूप से होता है एवं घाव भी जल्दी भर जाते हैं। साथ ही आग से जले हुए घाव पर इस तेल का फोहा लगाने से जलन और दर्द में तुरन्त राहत मिलती है।बवासीर, भगदर, फिशर आदि रोगों में अलसी का तेल (एरंडी के तेल की तरह) लेने से पेट साफ हो मल चिकना और ढीला निकलता है। इससे इन रोगों की वेदना शांत होती है।
*अलसी के तेल का पनीर के साथ इस्‍तेमाल करने से डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, अर्थराइटिस, हार्ट अटैक, अस्थमा और डिप्रेशन आदि जैसी बीमारियों से राहत पाई जा सकती है। अलसी के तेल का पनीर के साथ उपयोग करने से सल्फर युक्त प्रोटीन मिलता है।