29.6.16

एज स्पॉट(उम्र के धब्बे) हटाने के उपचार // How to remove age spot ?

                                           


चेहरे पर भूरे धब्‍बों के लिए मुख्‍यतौर पर सूरज की अल्‍ट्रावायलेट किरणें जिम्‍मेदार होती हैं। सूर्य की इन पराबैगनी किरणों से चेहरे पर पड़ने से त्‍वचा पर मेलानोसाइट्स नामक कोशिकाओं का उत्‍पादन होता है। इसी सेल्‍स के ज्‍यादा उत्‍पादन होने से चेहरे पर ब्राउन स्‍पॉट यानी भूरे रंग के धब्‍बे बनते हैं। इन धब्‍बों को कई अन्‍य नामों से भी जाना जाता है - ब्‍लैक स्‍पॉट, लिवर स्‍पॉट, एज (उम्र) स्‍पॉट, सन स्‍पॉट आदि।

ब्राउन स्‍पॉट को हटाने के तरीके -

एलोवेरा -

एलोवेरा यानी घृतकुमारी में रोग-निवारक गुण कूट-कूटकर भरे हैं। इसका सेवन जहां कई बीमारियों से बचाने में मदद करता है, वहीं चेहरे पर इसे लगाने से दाग-धब्‍बे दूर करने में मदद मिलती है। एलोवेरा जैल लेकर धब्‍बों वाली जगह पर लगाइए, चेहरे पर लगभग आधे घंटे तक जेल को लगा रहने दीजिए और उसके बाद सामान्‍य पानी से अपना चेहरा धो लीजिए। नियमित रूप से एक महीने तक इस क्रिया को दिन में दो बार दोहराइए। सुबह खाली पेट 3-4 चम्मच एलोवेरा का रस पीने से दिन-भर शरीर में शक्ति व चुस्ती-स्फूर्ति बनी रहती है।

पिपली  के गुण प्रयोग लाभ 

छाछ -

छाछ में मौजूद लैक्टि एसिड त्‍वचा के लिए बहुत फायेदमंद होता है। बटरमिल्‍क का प्रयोग करके चेहरे के ब्राउन धब्‍बों से निजात पायी जा सकती है। कॉटन का एक छोटा टुकड़ा लेकर उसमें छाछ की कुछ बूंदें गिरा लीजिए, उसके बाद कॉटन की सहायता से धब्‍बों वाली जगह पर छाछ लगाइए। लगभग 10‍ मिनट बाद सामान्‍य पानी से चेहरा धो लीजिए। वे लोग जिनकी त्‍वचा तैलीय है अथवा जो लोग मुंहासों की समस्‍या से परेशान हैं, तो बटरमिल्‍क में नींबू का रस मिलाकर भी चेहरे के दाग-धब्‍बों पर लगा सकते हैं। एक-एक चम्‍मच छाछ और टमाटर का रस मिलाकर भूरे धाग वाले हिस्‍से पर लगाने से धब्‍बे हट जाते हैं।

हाथ पैर और शरीर का कांपना कारण और उपचार

नींबू का रस -

नींबू विटामिन-सी का सबसे अच्‍छा स्रोत माना जाता है। यह चेहरे से भूरे धब्‍बों को हटाने में बहुत मदद करता है। ताजे नींबू के जूस को धब्‍बे वाली जगह पर लगाइए। इसे लगभग एक घंटे तक लगा रहने दीजिए, उसके बाद ठंडे पानी से चेहरे को साफ कर लीजिए। दो महीने तक धब्‍बों वाली जगह पर नींबू का रस नियमित रूप से लगाने से धब्‍बे हट जाते हैं। जिसकी त्‍वचा संवेदनशील हो वह नींबू के रस के साथ गुलाबजल या शहद को मिलाकर प्रयोग करे। इसके अलावा आप नींबू के रस के साथ चीनी मिलाकर भी प्रभावित क्षेत्र पर लगाया जा सकता है।

दही -

दूध के मुकाबले दही सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद है। दही में कैल्शियम, प्रोटीन, लैक्टोज, आयरन, फास्फोरस पाया जाता है। चेहरे से भूरे धब्‍बों को हटाने में भी दही फायदेमंद होता है। रात को सोने से पहले दही लेकर धब्‍बे वाली जगहों पर लगाइए, लगभग 20 मिनट बाद चेहरे को ठंडे पानी से धो लीजिए। सकारात्‍मक परिणाम पाने के लिए इस क्रिया को नियमित रूप से एक-दो महीने प्रयोग कीजिए।
चेहरे से धब्‍बे हटाने के लिए इन उपायों को अपनाने के अलावा धूप में टहलना कम कीजिए, ज्‍यादा मात्रा में पानी पीजिए, नियमित योग और व्‍यायाम कीजिए। धूप में बाहर जाने से पहले अच्‍छी क्‍वालिटी की सनस्‍क्रीम का प्रयोग अवश्‍य करें। इसके अलावा भी आपके धब्‍बे नही हट रहे हों तो एक बार चिकित्‍सक से संपर्क अवश्‍य कीजिए।


पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा  का  अचूक  इलाज 

*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 

28.6.16

त्रिफला आयुर्वेद की महान औषधि



त्रिफला आयुर्वेद में कई रोगों का सटीक इलाज करता है। यह 3 औषधियों से बनता है। बेहड, आंवला और हरड इन तीनों के मिश्रण से बना चूर्ण त्रिफला कहा जाता है। ये प्रकृति का इंसान के लिए रोगनाशक और आरोग्य देने वाली महत्वपूर्ण दवाई है। जिसके बारे में हर इंसान को पता होना चाहिए। ये एक तरह की एन्टिबायोटिक है। त्रिफला आपको किसी भी आयुर्वेदिक दुकान पर मिल सकता है। लेकिन आपको त्रिफला का सेवन कैसे करना है और कितनी मात्रा में करना है ये भी आपको पता होना चाहिए। हाल में हुए एक नए शोध में इस बात का खुलासा हुआ है की त्रिफला के सेवन से कैंसर के सेल नहीं बढ़ते । त्रिफला के नियमित सेवन से चर्म रोग, मूत्र रोग और सिर से संबन्धित बीमारियां जड़ से ख़त्म करती है।

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 

 *संयमित आहार-विहार के साथ त्रिफला का सेवन करने वाले व्यक्तियों को ह्रदयरोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, नेत्ररोग, पेट के विकार, मोटापा आदि होने की संभावना नहीं होती। यह कोई 20 प्रकार के प्रमेह, विविध कुष्ठरोग, विषमज्वर व सूजन को नष्ट करता है। अस्थि, केश, दाँत व पाचन- संसथान को बलवान बनाता है। इसका नियमित सेवन शरीर को निरामय, सक्षम व फुर्तीला बनाता है।  गर्म पानी से सोते समय एक चम्मच लेने से क़ब्ज़ नही रहता!त्रिफला के फायदे-
*.रात को सोते वक्त 5 ग्राम (एक चम्मच भर) त्रिफला चुर्ण हल्के गर्म दूध अथवा गर्म पानी के साथ लेने से कब्ज दूर होती है।

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

*.त्रिफला व ईसबगोल की भूसी दो चम्मच मिलाकर शाम को गुनगुने पानी से लें इससे कब्ज दूर होती है।
*इसके सेवन से नेत्रज्योति में आश्चर्यजनक वृद्धि होती है।
सुबह पानी में 5 ग्राम त्रिफला चूर्ण साफ़ मिट्टी के बर्तन में भिगो कर रख दें, शाम को छानकर पी लें। शाम को उसी त्रिफला चूर्ण में पानी मिलाकर रखें, इसे सुबह पी लें। इस पानी से आँखें भी धो ले। मुँह के छाले व आँखों की जलन कुछ ही समय में ठीक हो जायेंगे।
*शाम को एक गिलास पानी में एक चम्मच त्रिफला भिगो दे सुबह मसल कर नितार कर इस जल से आँखों को धोने से नेत्रों की ज्योति बढती है।
*एक चम्मच बारीक़ त्रिफला चूर्ण, गाय का घी 10 ग्राम व शहद 5 ग्राम एक साथ मिलाकर नियमित सेवन करने से आँखों का मोतियाबिंद, काँचबिंदु, द्रष्टि दोष आदि नेत्ररोग दूर होते हैं। और बुढ़ापे तक आँखों की रोशनी अचल रहती है।

शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 

*त्रिफला के चूर्ण को गौमूत्र के साथ लेने से अफारा, उदर शूल, प्लीहा वृद्धि आदि अनेकों तरह के पेट के रोग दूर हो जाते हैं।
त्रिफला शरीर के आंतरिक अंगों की देखभाल कर सकता है, त्रिफला की तीनों जड़ीबूटियां आंतरिक सफाई को बढ़ावा देती हैं।
*चर्मरोगों में (दाद, खाज, खुजली, फोड़े-फुंसी आदि) सुबह-शाम 6 से 8 ग्राम त्रिफला चूर्ण लेना चाहिए।
*एक चम्मच त्रिफला को एक गिलास ताजे पानी में दो- तीन घंटे के लिए भिगो दे, इस पानी को घूंट भर मुंह में थोड़ी देर के लिए डाल कर अच्छे से कई बार घुमाये और इसे निकाल दे। कभी कभार त्रिफला चूर्ण से मंजन भी करें इससे मुँह आने की बीमारी, मुंह के छाले ठीक होंगे, अरूचि मिटेगी और मुख की दुर्गन्ध भी दूर होगी।
*त्रिफला, हल्दी, चिरायता, नीम के भीतर की छाल और गिलोय इन सबको मिला कर मिश्रण को आधा किलो पानी में जब तक पकाएँ कि पानी आधा रह जाए और इसे छानकर कुछ दिन तक सुबह शाम गुड या शक्कर के साथ सेवन करने से सिर दर्द कि समस्या दूर हो जाती है।

बवासीर  के  रामबाण  उपचार 

*त्रिफला एंटिसेप्टिक की तरह से भी काम करता है। इस का काढ़ा बनाकर घाव धोने से घाव जल्दी भर जाते है।
*त्रिफला पाचन और भूख को बढ़ाने वाला और लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या में वृद्धि करने वाला है।
*मोटापा कम करने के लिए त्रिफला के गुनगुने काढ़े में शहद मिलाकर ले। त्रिफला चूर्ण पानी में उबालकर, शहद मिलाकर पीने से चरबी कम होती है।
*त्रिफला का सेवन मूत्र-संबंधी सभी विकारों व मधुमेह में बहुत लाभकारी है। प्रमेह आदि में शहद के साथ त्रिफला लेने से अत्यंत लाभ होता है।
*त्रिफला की राख शहद में मिलाकर गरमी से हुए त्वचा के चकतों पर लगाने से राहत मिलती है।
*5 ग्राम त्रिफला पानी के साथ लेने से जीर्ण ज्वर के रोग ठीक होते है।
*5 ग्राम त्रिफला चूर्ण गोमूत्र या शहद के साथ एक माह तक लेने से कामला रोग मिट जाता है।
*टॉन्सिल्स के रोगी त्रिफला के पानी से बार-बार गरारे करवायें।

पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 

त्रिफला दुर्बलता का नास करता है और स्मृति को बढाता है। दुर्बलता का नास करने के लिए हरड़, बहेडा, आँवला, घी और शक्कर मिला कर खाना चाहिए।
*त्रिफला, तिल का तेल और शहद समान मात्रा में मिलाकर इस मिश्रण कि 10 ग्राम मात्रा हर रोज गुनगुने पानी के साथ लेने से पेट, मासिक धर्म और दमे की तकलीफे दूर होती है इसे महीने भर लेने से शरीर का सुद्धिकरन हो जाता है और यदि 3 महीने तक नियमित सेवन करने से चेहरे पर कांती आ जाती है।
*त्रिफला, शहद और घृतकुमारी तीनो को मिला कर जो रसायन बनता है वह सप्त धातु पोषक होता है। त्रिफला रसायन कल्प त्रिदोषनाशक, इंद्रिय बलवर्धक विशेषकर नेत्रों के लिए हितकर, वृद्धावस्था को रोकने वाला व मेधाशक्ति बढ़ाने वाला है। दृष्टि दोष, रतौंधी (रात को दिखाई न देना), मोतियाबिंद, काँचबिंदु आदि नेत्ररोगों से रक्षा होती है और बाल काले, घने व मजबूत हो जाते हैं।
*डेढ़ माह तक इस रसायन का सेवन करने से स्मृति, बुद्धि, बल व वीर्य में वृद्धि होती है।

*किडनी फेल रोग का अचूक इलाज* 

त्रिफला के नुकसान-
यदि आप त्रिफला का प्रयोग बिना डाक्टर के परामर्श के करते हैं तो इससे डायरिया हो सकता है। क्योंकि यह शरीर में पानी की कमी करता है। और इंसान को डायरिया हो जाता है।
ब्लड प्रेशर-
त्रिफला का अधिक सेवन से ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव होने लगता है। और ब्लड प्रेशर के मरीजों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
कई बार कुछ लोग पेट साफ करने के लिए त्रिफला का सेवन करने लगते हैं लेकिन ऐसे में वे नियमित रूप से त्रिफला का सेवन करने लगते हैं जिस वजह से उन्हें अनिद्रा  और बेचैनी की समस्या हो सकती है।
*इसमें कोइे दो राय नहीं है कि त्रिफला सेहत के लिए बेहद असरकारी और फायदेमंद दवा है। 

पिपली के गुण प्रयोग लाभ 

23.6.16

माईग्रेन दर्द की आयुर्वेदिक चिकित्सा // Migraine home remedies




माईग्रेन (अर्धावभेदक-आधासीसी) क्या है?
सिरदर्द एक आम रोग है और प्रत्येक व्यक्ति को कभी न कभी इसे मेहसूस करता ही है।इस रोग के विशेषग्य इसके कारण के मामले में एकमत न होकर अलग-अलग राय रखते हैं। सभी की राय है कि माईग्रेन के विषय में और अनुसंधान की आवश्यकता है। अभी तक माईग्रेन की तीव्रता का कोइ वैज्ञानिक  माप नहीं है।
माईग्रेन एक रक्त परिसंचरण (vascular) तंत्र की व्याधि है। मस्तिष्क की रुधिर वाहिकाओं का आकार बढ जाने से याने खून की नलिकाएं फ़ैल जाने से इस रोग का संबंध माना जाता है। इन रुधिर वाहिकाओं पर नाडियां(नर्व्ज) लिपटी हुई होती हैं। जब रक्त वाहिकाएं फ़ैलकर आकार में बढती हैं तो नाडियों पर तनाव बढता है और फ़लस्वरूप नाडियां एक प्रकार का केमिकल निकालती हैं, जिससे दर्द और सूजन पैदा होते हैं, यही माईग्रेन है।
माईग्रेन अक्सर हमारे सिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम पर हमला करता है। इस नाडीमंडल की अति सक्रियता से आंतों में व्यवधान होकर अतिसार, वमन भी शिरोवेदना के साथ होने लगते हैं। इससे आमाशय स्थित भोजन भी देरी से आंतों में पहुंचता है। माईग्रेन की मुख मार्ग से ली गई दवा भी भली प्रकार अंगीकृत नहीं हो पाती है। प्रकाश और ध्वनि के प्रति असहनशीलता पैदा हो जाती है। रक्त परिवहन धीमा पडने से चर्म पीला पड जाता है और हाथ एवं पैर ठंडे मेहसूस होते हैं।
माईग्रेन का सिरदर्द गर्मी, मानसिक तनाव, अपर्याप्त नींद से बढ जाता है। करीब 70 प्रतिशत माईग्रेन रोगियों का पारिवारिक इतिहास देखें तो उनके नजदीकी रिश्तेदारों में इस रोग की मौजूदगी मिलती है। पुरुषों की बनिस्बत औरतों में यह रोग ज्यादा होता है। इस रोग को आधाशीशी भी कहते हैं ।यह ज्यादातर सिर के बांये अथवा दाहिने भाग में होता है। कभी-कभी यह दर्द ललाट और आंखों पर स्थिर हो जाता है। सिर के पिछले भाग में गर्दन तक भी माईग्रेन का दर्द मेहसूस होता है। माईग्रेन का सिरदर्द 4 घंटे से लेकर 3-4 दिन की अवधि तक बना रह सकता है। बहुत से माईग्रेने रोगियों में सिर के दोनों तरफ़ दर्द पाया जाता है। माईग्रेन एक बार बांयीं तरफ़ होगा तो दूसरी बार दांये भाग में हो सकता है। माईग्रेन का दर्द सुबह उठते ही प्रारंभ हो जाता है और सूरज के चढने के साथ रोग भी बढता जाता है। दोपहर बाद दर्द में कमी हो जाती है। ऐसा देखने में आया है कि 60 साल की उम्र के बाद यह रोग हमला नहीं करता है।
इस रोग के इलाज में माडर्न दवाएं ज्यादा सफ़ल नहीं हैं। साईड ईफ़ेक्ट ज्यादा होते हैं। निम्नलिखित उपाय निरापद और कारगर हैं--
1) बादाम 10-12 नग प्रतिदिन खाएं। यह माईग्रेन का बढिया उपचार है।
2) बन्द गोभी को कुचलकर एक सूती कपडे में बिछाकर मस्तक (ललाट) पर बांधें। रात को सोते वक्त या दिन में भी सुविधानुसार कर सकते हैं। जब गोभी का पेस्ट सूखने लगे तो नया पेस्ट बनाककर पट्टी बांधें। मेरे अनुभव में यह माईग्रेन का सफ़ल उपाय हैं।
3) अंगूर का रस 200 मिलि सुबह-शाम पीयें। बेहद कारगर नुस्खा है।
4) नींबू के छिलके कूट कर पेस्ट बनालें। इसे ललाट पर बांधें । जरूर फ़ायदा होगा।
5.अंगूर का रस और पालक का रस दोनों करीब 300 मिलि पीयें आधाशीशी में गुणकारी है।
6) गरम जलेबी 200 ग्राम नित्य सुबह खाने से भी कुछ रोगियों को लाभ हुआ है। 
7) आधा चम्मच सरसों के बीज का पावडर 3 चम्मच पानी में घोलक्रर नाक में रखें । माईग्रेन का सिरदर्द कम हो जाता है।
8) सिर को कपडे से मजबूती से बांधें। इससे खोपडी में रक्त का प्रवाह कम होकर सिरदर्द से राहत मिल जाती है।
9) माईग्रेन रोगी देर से पचने वाला और मसालेदार भोजन न करें।
10) विटामिन बी काम्प्लेक्स का एक घटक नियासीन है। यह विटामिन आधाशीशी रोग में उपकारी है। 100 मिलि ग्राम की मात्रा में रोज लेते रहें।
11) तनाव मुक्त जीवन शैली अपनाएं।
12) हरी सब्जियों और फ़लों को अपने भोजन में प्रचुरता से शामिल करें।
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  हर्बल चिकित्सा के अनमोल आलेख-
पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा  का  अचूक  इलाज 

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22.6.16

सफ़ेद मूसली के गुण और उपयोग// The benefits of safed musli



सफ़ेद मूसली एक औषधीय शाकीय पौधा है | सफेद मूसली का उपयोग आयुर्वेदिक औषधी में किया जाता है। जड़ो का उपयोग टॅानिक के रूप में किया जाता है। इसमें समान्य दुर्बलता को दूर करने का गुण होता है। इसका उपयोग गाठिया वात, अस्थमा, अधिश्वेत रक्ता, बवासीर और मधुमेह के उपचार में किया जाता है। इसमें स्पर्मेटोनिक गुण होता है इसलिए नपुंसकता के उपचार में इसका उपयोग किया जाता है। जन्म संबंधी और जन्मोत्तर रोगों के उपचार में यह सहायक होती है। वियाग्रा के एक विकल्प के रूप में भी इसका प्रयोग किया जाता है। सफ़ेद मूसली के सामने सब फ़ीके हैं, जिन्सेंग भी |वियाग्रा के बहुत सारे साइड इफेक्ट हैं किन्तु सफेद मूसली का कोई साइड इफेक्ट नहीं पाया गया है क्योकि यह आयुर्वेदिक औषधि है और सीधे वानस्पतिक रूप से ही उपयोग होता है |


शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 


*एक फार्मास्युटिकल्स कंपनी अपनी वेबसाइट पर ये दावा करते हैं कि मूसली पावर एक्स्ट्रा के कोई ज्ञात नकारात्मक साइड इफेक्ट नहीं हैं और क्योंकि यह पूरी तरह कार्बनिक हर्बल सामग्री से बनाया जाता है, इसलिये मानव उपभोग के लिए सुरक्षित है। कंपनी दावा करती है कि इस उत्पाद को उच्च रक्तचाप, रुमेटी गठिया वाले तथा स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए भी इसका सेवन सुरक्षित है, हालांकि इस संबंध में उन्होंने कोई चिकित्सकीय प्रमाण नहीं दिया।
*आदिवासी अंचलों में आदिवासी हर्बल जानकार प्रतिदिन 2 से 4 ग्राम सफ़ेद मूसली की जडों के चूर्ण के सेवन की सलाह देते हैं। ऐसा माना जाता है कि ये चूर्ण पुरुषों में सेक्स से संबंधित कई विकारों को दुरुस्त कर देता है। 


हस्त  मेथुन जनित यौन दुर्बलता के उपचार 


*सफ़ेद मूसली को बतौर सेक्स मेडिसिन बहुत प्रचारित किया गया लेकिन इसके अन्य औषधीय गुणों पर कम ही चर्चा होती है। यदि जानकारों की माने तो यदि आपको पेशाब में जलन की शिकायत रहती है तो सफेद मूसली की जड़ों के चूर्ण के साथ इलायची मिलाकर दूध में उबालते हैं और पेशाब में जलन की शिकायत होने पर रोगियों को दिन में दो बार पीने की सलाह देते हैं। इन्द्रायण की सूखी जड़ का चूर्ण और सफेद मूसली की जड़ों के चूर्ण की समान मात्रा (1-1 ग्राम) लेकर इसे एक गिलास पानी में डालकर खूब मिलाया जाए और मरीज को प्रतिदिन सुबह दिया जाए। ऐसा सात दिनों तक लगातार करने से पथरी गलकर बाहर आ जाती है। अक्सर बदन दर्द की शिकायत करने वाले लोगों को प्रतिदिन इसकी जड़ों का सेवन करना चाहिए, फायदा होता है। 

*सफ़ेद मुसली पुरुषों को शारीरिक तौर पर पुष्ट बनाने के अलावा इनके वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या बढाने में मददगार है। यही नहीं, कई शोध परिणाम ये भी बताते हैं कि डायबिटीस के बाद होने वाली नपुंसकता की शिकायतों में भी सफ़ेद मुसली क्लिनिकल तौर पर सकारात्मक असर करते दिखाई दी।
*सफेद मूसली शीघ्रपतन के देसी इलाज के काफी मशहूर है। कौंच के बीज, सफेद मूसली और अश्वगंधा के बीजों को बराबर मात्रा में मिश्री के साथ मिलाकर बारीक चूर्ण बनाकर एक चम्मच चूर्ण सुबह और शाम एक कप दूध के साथ लेने से शीघ्रपतन और वीर्य की कमी जैसी समस्याएं दूर हो जाती हैं। 

*सालों से विभिन्न दवाइयो के निर्माण में भी सफेद मूसली का उपयोग किया जाता है। मूलतः यह एक ऐसी जडी-बूटी है जिससे किसी भी प्रकार की शारीरिक शिथिलता को दूर करने की क्षमता होती है। यही कारण है की कोई भी आयुर्वेदिक सत्व जैसे च्यवनप्राश आदि इसके बिना संम्पूर्ण नहीं माने जाते हैं।
*यह इतनी पौष्टिक तथा बलवर्धक होती है की इसे शिलाजीत की संज्ञा भी दी जाती है। चीन, उत्तरी अमेरिका में पाये जाने वाले इस पौधे, जिसका वानस्पतिक नाम पेनेक्स जिंन्सेग है का विदेशों में फलेक्स बनाये जाने पर भी काम कर रहे हैं। 

*सफेद मुसली पुरुषों को शारीरिक तौर पर पुष्ट बनाने के अलावा वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने में भी मदद करती है। यही नहीं, कई शोध अपने परिणाम बताते हैं कि डायबिटीस के बाद होने वाली नपुंसकता में भी सफेद मुसली सकारात्मक असर करती पाई गई है।
*कामोत्तेजना बढ़ाने में भी मूसली काफी लाभदायक होती है। इसके लिये कौंचबीज चूर्ण, सफेद मूसली, तालमखाना, अश्वगंध चूर्ण को बराबर मात्रा में तैयार कर 10 ग्राम ठंडे दूध के साथ सेवन करना होता है। ये काफी कारगर नुस्खा माना जाता है।
*आदिकाल से इसे एक महत्वपूर्ण टोनिक और सेहत दुरुस्त करने वाली जडी के तौर पर इस्तमाल किया जाता रहा है। तमाम पौराणिक लेखों से लेकर कई अत्याधुनिक शोधों ने भी इसकी असर क्षमता को प्रमाणित किया है।

*कोरिया, चीन और भूटान जैसे देशों में पाए जाने वाले जिंसेंग ने भारतीय बाजार में पैठ जमाना शुरु कर दिया है, कई सेहत से जुडे उत्पादों में जिंसेंग को समाहित कर भारत देश में खूब प्रचारित करके बेचा भी जा रहा है। 
*इस चूर्ण का सेवन लम्बे समय तक करने पर भी किसी तरह की परेशानी नहीं। चाहे वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या कम हो, नपुंसकता की शिकायत हो या स्वप्नदोष, मूसली हमेशा हर्बल जानकारों द्वारा सुझाई जाती है

पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा  का  अचूक  इलाज 

*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*


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गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि


पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 




जोड़ों, घुटनों,गठिया ,संधिवात के दर्द की घरेलू ,हर्बल चिकित्सा


                                                


जोड़ की पीड़ा, घुटनों का दर्द,संधिवात या गठिया की समस्या को ठीक करने के लिए
निम्न अनुभूत उपचार करके लाभ उठान चाहिए-…
1) भोजन द्वारा इलाज के अंतर्गत रोजाना ३-४ खारक खाते रहने से घुटनों की शक्ति को
बढ़ाया जा सकता है| अस्थियों को मजबूत बनाए रखने के लिए केल्शियम का सेवन करना उपकारी है| केल्शियम की ५०० एम् जी की गोली सुबह शाम लेते रहें| | दूध ,दही,ब्रोकली और मछली में पर्याप्त केल्शियम होता है|
2) घुटनों के लचीलेपन को बढाने के लिए दाल चीनी,जीरा,अदरक और हल्दी का उपयोग
उत्तम फलकारी है| इन पदार्थों में ऐसे तत्त्व पाए जाते हैं जो घुटनों की सूजन और दर्द का
निवारण करते हैं|
3) मैथी दाने, सौंठ और हल्दी समान मात्रा में मिलाकर, पीसकर नित्य सुबह-शाम भोजन
करने के बाद गरम पानी से, दो-दो चम्मच फ़की लेने से लाभ होता है|
4) रोज सुबह भूखे पेट एक चम्मच कुटे हुए मैथी दाने में 1 ग्राम कलौंजी मिलाकर एक बार फाँकी लें|
5) घुटनों में दर्द को कम करने के लिए गरम या ठंडे पेड से सिकाई की जरूरत हो सकती है|
6) घुटनों में तीव्र पीड़ा होने पर आराम की सलाह डी जाती है ताकि दर्द और सूजन कम
हो सके\ फिजियो थेरपी में चिकित्सक विभिन्न प्रक्रियाओं के द्वारा घुटनों के दर्द
और सूजन को कम करने का प्रयास करते है|
7) तीस  की उम्र के बाद मैथी दाने की फाँकी लेने से शरीर के जोड़ मजबूत बने रहते हैं तथा बुढ़ापे तक मधुमेह, ब्लड प्रेशर और गठिया जैसे रोगों से बचाव होता है|
8) मैथी दानों को तवे या कढ़ाही में गुलाबी होने तक सेकें. ठंडा होने पर पीस लें. रोज
सुबह खाली पेट आधा चम्मच, एक गिलास पानी के साथ लें|
9) मैथी दानों को दरदरा कूटकर सर्दियों में 2 चम्मच और गर्मी में एक चम्मच की फाँकी
सुबह-सुबह खाली पेट पानी के साथ लें|
10) नीम का तेल एवं अरंडी का तेल बराबर मात्रा में मिलाकर सुबह-शाम इसकी मालिश
कीजिए.

11) मैथी दाने हमेशा सुबह खाली पेट जबकि दोपहर और रात में खाना खाने के बाद, आधा चम्मच मात्रा, पानी के साथ फाँकने से सभी जोड़ मजबूत रहेंगे और जोड़ों में किसी भी प्रकार का दर्द कभी नहीं होगा|
12) हल्दी-चूर्ण, गुड़, मैथी दाना पाऊडर और पानी सामान मात्रा में मिलाकर, गरम करके
इनका लेप, रात को घुटनों पर करें व पट्टी बाँधकर रातभर बंधे रहने दें. सुबह पट्टी हटा कर
साफ कर लें. कुछ ही दिनों में जबरदस्त फायदा महसूस होने लग जाएगा|
13) अलसी के दानों के साथ 2 अखरोट की मिगी सेवन करने से जोड़ों के दर्द में आराम
मिलता है|
14) मैथी के लड्डू खाने से हाथ-पैर और जोड़ों के दर्दो में आराम मिलता है|
15) अँकुरित मैथी दाने खाएँ और उसके खाने के बाद आधे घंटे तक कुछ न खाएँ.

16) अगर कैल्शियम की कमी से जोड़ों का दर्द हो तो खाने वाला चूना खाईए. गेंहू के
दाने के आकार का चूना दही या दूध में घोल कर दिन में एक बार के हिसाब से, 90 दिन
तक लीजिए. ध्यान रखें 90 दिन से अधिक नहीं लेना है|
17) मैथी के बीज संधिवात की पीड़ा निवारण करते हैं| एक चम्मच मैथी बीज रात भर
साफ़ पानी में गलने दें | सुबह पानी निकाल दें और मैथी के बीज अच्छी तरह चबाकर
खाएं| शुरू में तो कुछ कड़वा लगेगा लेकिन बाद में कुछ मिठास प्रतीत होगी| भारतीय
चिकित्सा में मैथी बीज की गर्म तासीर मानी गयी है| यह गुण जोड़ों के दर्द दूर करने में
मदद करता है|
18) गरम तेल से हल्की मालिश करना घुटनों के दर्द में बेहद उपयोगी है|ये तेल बना के आप हमेशा के लिए रखेँ :
लहसुन – 50 ग्राम
अजवाइन – 25 ग्राम
लौंग – 10 ग्राम
उपरोक्त तीनो चीजो को 200 ग्राम सरसों के तेल में पका के जला दे और ठंडा होने पे
कांच की शीशी में छान कर रख ले ,इस तेल से घुटनों या जोड़ों की मालिश करने से दर्द में
तुरंत राहत मिल जाती है| इस तेल में संधिवात की सूजन दूर करने के गुण हैं| घुटनों की पीड़ा निवारण की यह असरदार चिकित्सा है|

19) प्याज अपने सूजन विरोधी गुणों के कारण घुटनों की पीड़ा में लाभकारी हैं| दर असल
प्याज में फायटोकेमीकल्स पाए जाते हैं जो हमारे इम्यून सिस्टम को ताकतवर बनाते हैं|
प्याज में पाया जाने वाला गंधक जोड़ों में दर्द पैदा करने वाले एन्जाईम्स की उत्पत्ति
रोकता है| एक ताजा रिसर्च में पाया गया है कि प्याज में मोरफीन की तरह के पीड़ा
नाशक गुण होते हैं|
20) अगर घुटनों की चिकनाई ख़तम हुई हो गई हो और जोड़ो के दर्द में किसी भी प्रकार
की दवा से आराम ना मिलता हो तो ऐसे लोग हारसिंगार (पारिजात) पेड़ के 12 पत्तों
को कूटकर 1 गिलास पानी में उबालें. जब पानी एक चौथाई बच जाए तो बिना छाने
ही ठंडा करके पी लें. 90 दिन में चिकनाई पूरी तरह वापिस बन जाएगी. अगर कुछ कमी
रह जाए तो 1 महीने का अंतर देकर फिर से 90 दिन तक इसी क्रम को दोहराएँ. निश्चित
लाभ की प्राप्ति होती है|
21) गाजर में जोड़ों में दर्द को दूर करने के गुण मौजूद हैं |चीन में सैंकडों वर्षों से गाजर का
इस्तेमाल संधिवात पीड़ा के लिए किया जाता रहा है| गाजर को पीस लीजिए और
इसमें थोड़ा सा नीम्बू का रस मिलाकर रोजाना खाना उचित है| यह घुटनों के
लिगामेंट्स का पोषण कर दर्द निवारण का काम करता है|
22) प्रतिदिन नारियल की गिरी का सेवन करें|इससे घुटनों को ताकत आती है|
23) लगातार 20 दिनों तक अखरोट की गिरी खाने से घुटनों का दर्द समाप्त होता है।
24) बिना कुछ खाए प्रतिदिन प्रात: एक लहसन कली, दही के साथ दो महीने तक लेने से
घुटनों के दर्द में चमत्कारिक लाभ होता है।



विशिष्ट परामर्श-  



संधिवात,कमरदर्द,गठिया, साईटिका ,घुटनो का दर्द आदि वात जन्य रोगों में जड़ी - बूटी निर्मित हर्बल औषधि ही अधिकतम प्रभावकारी सिद्ध होती है| रोग को जड़ से निर्मूलन करती है| रोगी के व्यक्तिगत लक्षणों के आधार पर  निर्मित औषधि से बिस्तर पकड़े पुराने रोगी भी दर्द मुक्त गतिशीलता हासिल करते हैं| औषधि के लिए वैध्य श्री दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क कर सकते हैं| 



    



21.6.16

पिताशय की पथरी के घरेलू उपचार //Home remedies to dissolve gall stones













     
गाल ब्लाडर में पथरी (gallstones) बनना एक भयंकर पीडादायक रोग है। इसे ही पित्त पथरी कहते हैं। पित्ताषय में दो तरह की पथरी बनती है।
प्रथम कोलेस्ट्रोल निर्मित पथरी।
दूसरी पिग्मेन्ट से बननेवाली पथरी।
ध्यान देने योग्य है कि लगभग८०% पथरी कोलेस्ट्रोल तत्व से ही बनती हैं।वैसे तो यह रोग किसी को भी और किसी भी आयु में हो सकता है लेकिन महिलाओं में इस रोग के होने की सम्भावना पुरुषों की तुलना में लगभग दूगनी हुआ करती है।पित्त लिवर में बनता है और इसका भंडारण गाल ब्लाडर में होता है।यह पित्त वसायुक्त भोजन को पचाने में मदद करता है। जब इस पित्त में कोलेस्ट्रोल और बिलरुबिन की मात्रा ज्यादा हो जाती है,तो पथरी निर्माण के लिये उपयुक्त स्थिति बन जाती है।


गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि


पथरी रोग में मुख्य रूप से पेट के दायें हिस्से में तेज या साधारण दर्द होता है।भोजन के बाद पेट फ़ूलना,अजीर्ण होना,दर्द और उल्टी होना इस रोग के प्रमुख लक्षण हैं।
प्रेग्नेन्सी,मोटापा,मधुमेह,,अधिक बैठे रेहने की जीवन शैली, तेल घी अधिकता वाले भोजन,और शरीरमें खून की कमी से पित्त पथरी रोग होने की सम्भावना बढ जाती है।
दो या अधिक बच्चों की माताओं में भी इस रोग की प्रबलता देखी जाती है।
  अब मैं कुछ आसान घरेलू नुस्खे प्रस्तुत कर रहा हूं जिनका उपयोग करने से इस भंयकर रोग से होने वाली पीडा में राहत मिल जाती है और निर्दिष्ट अवधि तक इलाज जारी रखने पर ३ से ४ एम एम तक की पित्त पथरी से मुक्ति मिल जाती है।


सोरायसिस(छाल रोग) के आयुर्वेदिक उपचार 

१) गाजर और ककडी का रस प्रत्येक १०० मिलिलिटर की मात्रा में मिलाकर दिन में दो बार पीयें। अत्यन्त लाभ दायक उपचार है।
२) नींबू का रस ५० मिलिलिटर की मात्रा में सुबह खाली पेट पीयें। यह उपाय एक सप्ताह तक जारी रखना उचित है।
३) सूरजमुखी या ओलिव आईल ३० मिलि खाली पेट पीयें।इसके तत्काल बाद में १२० मिलि अन्गूर का रस या निम्बू का रस पीयें। इसे कुछ हफ़्तों तक जारी रखने पर अच्छे परिणाम मिलते हैं।

४) नाशपती का फ़ल खूब खाएं। इसमें पाये जाने वाले रसायनिक तत्व से पित्ताषय के रोग दूर होते हैं।

रोग व क्‍लेश दूर करने के आसान मंत्र

५) विटामिन सी याने एस्कोर्बिक एसिड के प्रयोग से शरीर का इम्युन सिस्टम मजबूत बनता है।यह कोलेस्ट्रोल को पित्त में बदल देता है। ३-४ गोली नित्य लें।
2013 में हुए एक अध्ययन के अनुसार, शरीर में भरपूर मात्रा में विटामिन सी पथरी की समस्‍या कम करता है। एक लाल शिमला मिर्च में लगभग 95 मिलीग्राम विटामिन सी होता है, यह मात्रा पथरी को रोकने के लिए काफी होती है। इसलिए अपने आहार में शिमला मिर्च को शामिल करें।।
६) पित्त पथरी रोगी भोजन में प्रचुर मात्रा में हरी सब्जीयां और फ़ल शामिल करें। ये कोलेस्ट्रोल रहित पदार्थ है।


पथरी की चमत्कारी औषधि से डॉक्टर की बोलती बंद!


७) तली-गली,मसालेदार चीजों का परहेज जरुरी है।
8) शराब,चाय,काफ़ी एवं शकरयुक्त पेय हानिकारक है।
९) एक बार में ज्यादा भोजन न करें। ज्यादा भोजन से अधिक मात्रा में कोलेस्ट्रोल निर्माण होगा जो हांनिकारक है।
१०) आयुर्वेद में उल्लेखित कतिपय औषधियां इस रोग में लाभदायक साबित हो सकती हैं।कुटकी चूर्ण,त्रिकटु चूर्ण,आरोग्य वर्धनी वटी,फ़लत्रिकादि चूर्ण,जैतुन का तैल ,नींबू का रस आदि औषधियां व्यवहार में लाई जाती हैं।


शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 

११) सर्जरी में पित्त पथरी नहीं निकाली जाती है बल्कि पूरे पित्ताशय को ही काटकर निकाल दिया जाता है जिसके दुष्परिणाम रोगी को जीवन भर भुगतने पड़ते हैं| अत: जहां तक हो सके औषधि से चिकित्सा करना श्रेष्ठ है|
१२) पुदीने में टेरपेन नामक प्राकृतिक तत्‍व होता है, जो पित्त से पथरी को घुलाने के लिए जाना जाता है। यह पित्त प्रवाह और अन्य पाचक रस को उत्तेजित करता है, इसलिए यह पाचन में भी सहायक होता है। पित्त की पथरी के लिए घरेलू उपाय के रूप में पुदीने की चाय का इस्‍तेमाल करें।


पित्त पथरी (gallstone) के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार 

किडनी निष्क्रियता की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि



विशिष्ट परामर्श- 



 सिर्फ हर्बल औषधि  ही पित्ताशय की पथरी  मे एक कारगर  विकल्प है| वैध्य श्री दामोदर की हर्बल औषधि से न केवल गाल स्टोन  से निजात मिलती है ,पथरी के भयंकर कष्ट ,पेट मे गेस ,जी मिचलाना आदि उपद्रवों से भी  इलाज के शुरू के दिनों मे ही राहत मिल जाती है|गाल स्टोन रोगी आपरेशन से बच जाता है| वैध्य श्री दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क किया जा सकता है|





20.6.16

आहार ही औषधि है // Make your diet a remedy

                      *भोजन द्वारा स्वास्थ्य * 

                                                                                                                                     

 


       

इस आलेख में दैनिक उपयोग में आने वाले फ़लों,सब्जियों और कतिपय अन्य पदार्थों में निहित रोग निवारक गुणो का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया गया है।
केला: ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है,हड्डियों को मजबूत बनाता है,हृदय की सुरक्षा करता है,अतिसार में लाभदायक है, खांसी में हितकारी है।
जामुन: केन्सर की रोक थाम , हृदय की सुरक्षा,कब्ज मिटाता है,स्मरण शक्ति बढाता है,रक्त शर्करा नियंत्रित करता है।डायबीटीज में अति लाभदायक।

सेवफ़ल: हृदय की सुरक्षा करता है,दस्त रोकता है,कब्ज में फ़ायदेमंद है,फ़ेफ़डे की शक्ति बढाता है.


चुकंदर: वजन घटाता है,ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है,अस्थिक्षरण रोकता है,केंसर के विरुद्ध लडता है,हृदय की सुरक्षा करता है।



पत्ता गोभी: बवासीर में हितकारी है,हृदय रोगों में लाभदायक है,कब्ज मिटाता है, वजन घटाने में सहायक है।, केंसर में फ़ायदेमंद है।



गाजर:
नेत्र ज्योति वर्धक है, केंसर प्रतिरोधक है, वजन घटाने मं सहायक है, कब्ज मिटाता है, हृदय की सुरक्षा करता    है।


 फ़ूल गोभी-
हड्डियों को मजबूत बनाता है, स्तन केंसर से बचाव करता है, प्रोस्टेट ग्रंथि के केंसर में भी उपयोगी है, चोंट,खरोंच ठीक करता है।






लहसुन-
 कोलेस्टरोल घटाती है, रक्त चाप घटाती है, कीटाणुनाशक है,केंसर से लडती है।






शहद-घाव भरने में उपयोगे है, पाचन क्रिया सुधारती है, एलर्जी रोगों में उपकारी है, अल्सर से मुक्तिकारक है, तत्काल स्फ़ूर्ती देती है।





नींबू:
त्वचा को मुलायम बनाता है,केंसर अवरोधक है, हृदय की सुरक्षा करता है,,ब्लड प्रेशर नियंत्रित करता है, स्कर्वी रोग नाशक है।

अंगूर:
रक्त प्रवाह वर्धक है, हृदय की सुरक्षा करता है, केंसर से लडता है, गुर्दे की पथरी नष्ट करता है, नेत्र ज्योति वर्धक है।






आम:
 केंसर से बचाव करता है,थायराईड रोग में हितकारी है, पाचन शक्ति बढाता है, याददाश्त की कमजोरी में हितकर है।


प्याज:
फ़ंगस रोधी गुण हैं, हार्ट अटेक की रिस्क को कम करता है। जीवाणु नाशक है,केंसर विरोधी है। खराब कोलेस्टरोल को घटाता है।





अलसी के बीज-
मानसिक शक्ति वर्धक है, रोग प्रतिकारक शक्ति को ताकत देता है, डायबीटीज में उपकारी है, हृदय की सुरक्षा करता है, डायजेशन को ठीक करता है।





संतरा:
हृदय की सुरक्षा करता है, रोग प्रतिकारक शक्ति उन्नत करता है,, श्वसन पथ के विकारों में लाभकारी है, केंसर में हितकारी है।



टमाटर:
कोलेस्टरोल कम करता है, प्रोस्टेट ग्रंथि के स्वास्थ्य के लिये उपकारी है,केंसर से बचाव करता है, हृदय की सुरक्षा करता है।.



पानी:

गुर्दे की पथरी नाशक है, वजन घटाने में सहायक है, केसर के विरुद्ध लडता है, त्वचा के चमक बढाता है।
अखरोट:


मूड उन्नत करन में सहायक है, मेमोरी पावर बढाता है,केंसर से लडता है, हृदय रोगों से बचाव करता है,कोलेस्टरोल घटाने मं मददगार है।



तरबूज:
स्ट्रोक रोकने में उपयोगी है, प्रोस्टेट के स्वास्थ्य के लिये हितकारी है, रक्तचाप घटाता है, वजन कम करने में सहायक है।



अंकुरित गेहूं:

बडी आंत की केंसर से लडता है, कब्ज प्रतिकारक है, स्ट्रोक से रक्षा करता है, कोलेस्टरोल
कम करता है, पाचन सुधारता है।





चावल:
किडनी स्टोन में हितकारी है, डायबीटीज में लाभदायक है,स्ट्रोक से बचाव करता है, केंसर से लडता है, हृदय की सुरक्षा करता है।





आलू बुखारा:

हृदय रोगों से बचाव करता है, बुढापा जल्द आने से रोकता है, याददाश्त बढाता है,












कोलेस्टरोल घटाता है, कब्ज प्रतिकारक है।




पाएनेपल:




अतिसार(दस्त) रोकता है, वार्ट्स(मस्से) ठीक करता है, सर्दी,ठंड से बचाव करता है, अस्थिक्षरण रोकता है। पाचन सुधारता है।




जौ,जई:


कोलेस्टरोल घटाता है,केंसर से लडता है, डायबीटीज में उपकारी है,,कब्ज प्रतिकारक् है ,त्वचा पर शाईनिंग लाता है।

*किडनी में क्रिएटिनिन और यूरिया की समस्या के घरेलू उपचार* 


अंजीर:



रक्त चाप


नियंत्रित करता है, स्ट्रोक्स से बचाता है, कोलेस्टरोल कम करता है, केंसर से लडता है,वजन घटाने में सहायक है।

शकरकंद:

आंखों की रोशनी बढाता है,मूड उन्नत करता है, हड्डिया बलवान बनाता है, केंसर से लडता है।

पित्त पथरी (gallstone) के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार 

किडनी निष्क्रियता की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

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मस्से के आयुर्वेदिक उपचार // Wart removal home remedies


             


       
मस्से वैसे तो कोई तकलीफ़ नहीं देते लेकिन खासकर चेहरे के मस्से रंग रूप को विकृत कर देते है। ये त्वचा पर उगते उभरते हैं और अवांछित
प्रतीत होते हैं। मस्से गर्दन,हाथ,पीठ ,चिन,पैर आदि किसी भी जगह हो सकते हैं।
मस्से पिगमेंट कोषिकाओं के समूह होते हैं। ये काले भूरे रंग के होते हैं। कुछ मस्से आनुवांशिक होते हैं लेकिन अधिक धूप में रहने से भी मस्से पनप सकते हैं। अधिकतर मस्से केंसर रहित होते हैं।


मस्से का उपचार ऐसे करें-


१) मस्से पर आलू काटकर उसकी फ़ांक रगडनी चाहिये। कुछ रोज में मस्से झडने लगेगे।
२) जलती हुई अगरबत्ती का गुल मस्से को छुआएं और तुरंत हटालें। लगातार कुछ दिन ऐसा उपचार करने से मस्से सूखकर झड जाते हैं।
३) केले के छिलके का भीतरी हिस्सा मस्से पर रगडें। हितकारी उपचार है।
४) प्याज का रस नियमित रूप से मस्से पर लगाते रहने से मस्से दूर होते हैं।


५) एक लहसुन की कली चाकू से काटकर उसे मस्से पर रगडें। धीरे-धीरे मस्से सूखकर झडने लगते हैं।
६) खट्टे सेवफ़ल का रस मस्से पर दिन में तीन बार लगाने और ऊंगली से मालिश करने से मस्से समाप्त होते हैं।
७) मीठा सोडा अरंडी के तेल में मिलाकर पेस्ट जैसा बनाकर रोज रात को सोते वक्त मस्सों पर ऊंगली से लगाने और उस पर पट्टी बांधने और सुबह में पट्टी खोलने के अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं।
 




९) रात को सोते वक्त और सुबह के समय मस्सों पर शहद लगाने के लाभकारी परिणाम मिले हैं।
१०) विटामिन सी,विटामिन ए और विटामिन ई का नियमित सेवन करने से मस्सों से निजात मिल जाती है और स्वास्थ्य भी उन्नत हो जाता है।
११) पोटेशियम युक्त सेव,केला,अंगूर,आलू,,पालक ,टमाटर का प्रचुर मात्रा में उपयोग करने से मस्से नष्ट होते हैं।

१२) थूहर का दूध या कार्बोलिक एसीड मस्सों पर लगाना कारगर चिक्त्सा मानी गई है।
१३) नागरवेल के पान के डंठल का रस मस्से पर लगाना परम हितक्री उपचार है।
१४) ग्वार पाठा (एलोवेरा) से मस्से की चिकित्सा की जा सकती है। एलोवेरा के रस में रूई का फ़ाया (काटन बाल) एक मिनट के लिये भिगोएं फ़िर इसे मस्से पर रखें और चिपकने वाली पटी (एढीसिव टेप। से स्थिर कर दें। यह प्रक्रिया दिन में कई बार करना उचित है। ३-४ हफ़्ते में मस्से साफ़ हो जाएँगे|
१६) मस्से वाले भाग को पाईनेपल जूस में रखें। इसमें मस्से नष्ट करने वाले एन्जाईम होते है।


१७) ताजा अंजीर लें। इसे कुचलकर -मसलकर इसकी कुछ मात्रा मस्से पर लगावें और ३० मिनिट तक लगा रहने दें फ़िर गरम पानी से धोलें। ३-४ हफ़्ते में मस्से समाप्त होंगे।
१८) बरगद के पेड़ के पत्तों का दूध मस्सों के उपचार के लिए बहुत ही असरदार होता है। इस प्रयोग से त्वचा सौम्य हो जाती है और मस्से अपने आप गिर जाते हैं।
19) केले के छिलके को अंदर की तरफ से मस्से पर रखकर उसे एक पट्टी से बांध लें। और ऐसा दिन में दो बार करें और लगातार करते रहें जब तक कि मस्से ख़तम नहीं हो जाते।



एक्ज़ीमा के घरेलु उपचार 

२०) अरंडी का तेल नियमित रूप से मस्सों पर लगायें। इससे मस्से नरम पड़ जायेंगे, और धीरे धीरे गायब हो जायेंगे। अरंडी के तेल के बदले कपूर के तेल का भी प्रयोग कर सकते हैं।
२१) एक बूँद ताजे मौसमी का रस मस्से पर लगा दें, और इसे भी पट्टी से बांध लें। ऐसा दिन में लगभग 3 या 4 बार करें। ऐसा करने से मस्से गायब हो जायेंगे।कसीसादी तेल मस्सों पर रखकर पट्टी से बांध लें।
२२) होम्योपैथी में मस्से नष्ट करने की कई कारगर औषधियां हैं जो लक्षणों की समानता के आधार पर व्यवहार में लाई जाती हैं। नीचे कुछ होम्योपैथिक दवाएं लिख रहा हूं जो मस्से के ईलाज में प्रयुक्त होती हैं :-
थूजा 1m ,कास्टिकम 1m, कल्केरिया कार्ब 1m, डल्कामारा 1m, फ़ेरम पिक्रिकम 30, एसिड नाईट्रिक1m, नेट्रम कार्ब6, नेट्रम म्युरियेटिकम6, एन्टिमोनियम6, सीपिया 200

पित्त पथरी (gallstone) के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार 

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