17.7.16

विधारा के गुण लाभ उपचार//Healing properties of elephant creeper



     विधारा को घाव बेल भी कहते हैं| यह बेल सर्दी में भी हरी भरी रहती है| वर्षा ऋतु में इसके फूल आते हैं |इसके अन्दर एक बड़ा ही अनोखा गुण है |यह मांस को जल्दी भर देता है या कहें कि जोड़ देता है |आदिवासी लोग विधारा के पत्तों में मांस के टुकड़ों को रख देते थे कि अगले दिन पकाएंगे | अगले दिन वे पाते थे कि मांस के टुकड़े जुड़ गए हैं |यह बड़ी ही रहस्यभरी घटना है | यह सच है कि किसी भी प्रकार के घाव पर इसके ताज़े पत्तों को गर्म करके बांधें तो घाव बहुत जल्दी भर जाता है |


वैवाहिक जीवन की मायूसी दूर  करें इन जबर्दस्त  नुस्खों से

*सबसे अधिक मदद ये gangrene में करता है | शुगर की बीमारी में कोई भी घाव आराम से नहीं भरता है . gangrene होने पर तो पैर गल जाते हैं और अंगुलियाँ भी गल जाती हैं . अगर pus भी पड़ जाए तो भी चिंता न करें | इसकी पत्तियों को कूटकर उसके रस में रुई डुबोकर घावों पर अच्छी तरह लगायें | उसके बाद ताज़े विधारा के पत्ते गर्म करके घावों पर रखें और पत्ते बाँधें | हर 12 घंटे में पत्ते बदलते रहें | बहुत जल्द घाव ठीक हो जायेंगे . ये बहुत पुराने घाव भी भर देता है| Varicose veins की बीमारी भी इससे ठीक होती है |


*पित्ताश्मरी(Gallstone) की अचूक औषधि*


*Bedsore हो गए हों तो रुई से इसका रस लगायें . किसी भी तरह की ब्लीडिंग हो , periods की, अल्सर की , आँतों के घाव हों | बाहर या अंदर के कोई भी घाव हों तो इसके 2-3 पत्तों का रस एक कप पानी में मिलाकर प्रात:काल पी लें | हर तरह का रक्तस्राव रुक जाएगा . कहीं भी सूजन या दर्द हो तो इसका पत्ता बाँधें |
*इसके बीज भूनकर उसका पावडर गर्म पानी या शहद के साथ लें तो बलगम और खांसी खत्म होती है | लक्ष्मी विलास रस में भी इसे डालते हैं | लक्ष्मी विलास रस की दो-दो गोली सवेरे शाम लेने से सर्दी दूर होती है | शरीर में दर्द हो या arthritis की समस्या हो तो इसकी 10 ग्राम जड़ का काढा पीयें |


शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 



वानस्पतिक नाम : Argyreia nervosa.


· प्रचलित नाम:Elephant Creeper, अधोगुडा, घाव बेल, समुद्र सोख, 

Hawaiian Baby Woodrose, Woolly Morning Glory.




आयुर्वेद में गुण:
· रस (Taste) – कटु (Pungent), तिक्त (Bitter), कषाय (Astringent)
· गुण (Characteristics) - लघु (Light); स्निग्ध (Unctuous)
· वीर्य (Potency) - उष्ण (Hot)
· विपाका (Post digestion effect) - मधुर (Sweet)
आयुर्वेद में प्रभाव:
· त्रिदोषों पर प्रभाव (Effect on Tridosha): विधारा मूल का प्रभाव 

प्रमुखतः कफ़ और वात दोषों पर होता है अतः इसका उपयोग वात, कफ़ और
 वात-कफ़ प्रधान/कारक रोगों में प्रभावी/लाभकारी होता है Vidhara mool 
pacifies Kapha and Vata Doshas in the body so it can be used 
effectively in management of all the diseases which 
originate from aggravation of Kapha/ Vata or both.).
 रसायन:
विधारा मूल शरीर की प्रत्येक कोशिका तक कार्य करती है और उन्हें बल प्रदान 

करती है. यह एक उच्च कोटि का वाजीकरण रसायन है|

किडनी फेल्योर(गुर्दे खराब) रोगी घबराएँ नहीं,ये है अनुपम औषधि.

वृष्य:

यौन उत्तेजना वर्धक, वीर्य के गुण बढ़ता है, शुक्राणुओं कि संख्या बढ़ाता है, गर्भाशय 

की जलन/सूजन लाभकारी है|
आमवातहर:
वात जनित रोगों एवं गठिया आदि रोगों में विशेष लाभकारी है|
अर्शहर:
बवासीर/अर्श/हैमोरोइड में लाभकारी
शोथहर:


विधारा मूल सभी प्रकार की सूजन या दर्द में राहत प्रदान करता है|


मेहाप्रनुत: 


विधारा मूल सभी प्रकार के मूत्र रोगों में लाभकारी होता है. यह मूत्र विसर्जन के द्वारा 

शरीर से शर्करा का निष्कासन करता है, अतः मधुमेह में लाभकारी होता है|

*सिर्फ आपरेशन नहीं ,प्रोस्टेट वृद्धि की 100% अचूक हर्बल औषधि *

· आयुष्कर:
 शरीर के सभी दोषों को दूर कर मनुष्य की आयु वर्धन करता है|
· मेधावर्धक: मस्तिष्क को बल प्रदान करता है तथा तर्क एवं स्मरण शक्ति को बढ़ाता है|
· कान्तिकर: त्वचा को कांतिमय तथा निर्दोष करता है|
*यह घाव को जल्दी भर देता है या मांस को जोड़ देता है। जब पत्ती के निचली बालों वाली या
 रोंएदार सतह को सूजन या घाव वाले हिस्से पर लगाते हैं तो यह उसे पका कर मवाद या पीप

 निकालने में मददगार होता है, जबकि ऊपरी चिकनी सतह घाव भरने में मदद करता है|
*विधारा मूल गैंग्रीन/कोथ/मांस के सड़ने के इलाज में सर्वाधिक उपयोगी है. गैंग्रीन/कोथ होने पर
 पैर गल जाते हैं और अंगुलियाँ भी गल जाती हैं पस भी पड़ जाए तो भी चिंता न करें. ये 
गैंग्रीन/कोथ के पुराने से पुराने घावों को ठीक कर देता है|

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 

*रक्त वाहिनियों/शिराओं में सूजन व नसों में खिंचाव (Varicose veins) या चिक चढ़
 जाने की बीमारी भी इससे ठीक होती है|
*शय्या व्रण या शय्या क्षत (Bedsore) के फोड़े/घाव में यह अत्यंत लाभकारी होता है|
*माहवारी/मासिक धर्म में, अल्सर में, आँतों के घाव में, शरीर के बाहर या अंदर के 
कोई भी घाव में इसके प्रयोग से रक्तस्राव रुक जाता है|
*किसी भी प्रकार सूजन या दर्द हो तो इसका पत्ता बाँधें, आराम मिलता है|
*इसके प्रयोग से बलगम और खांसी खत्म होती है|

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि


*शीतकाल में उपयोगी शक्तिवर्धक चूर्ण बनाने की विधि बता रहा हूँ | इस चूर्ण का उपयोग 

करने से पहले 3 दिनों तक एक कप गुनगुने दूध में 2 चम्मच अरंड का तेल मिलाकर
 सुबह-शाम लेने से पेट साफ़ कर लें. यह चूर्ण बनाने के लिए 50 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण, 50 ग्राम
 विधारा चूर्ण, 50 ग्राम मुलैठी चूर्ण, 25 ग्राम सौंठ चूर्ण, 25 ग्राम गिलोय सत्व, 50 ग्राम सफ़ेद
 मूसली चूर्णऔर 50 ग्राम सतावर चूर्ण को एक साथ मिलाकर रखे. इस 1 चम्मच चूर्ण 
को गुनगुने दूध के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम लेना शीतकाल में लाभदायक है|

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16.7.16

चिरोंजी के फायदे //The advantages of Chironji


       चिरौंजी को भला कौन नहीं जानता। यह हर घर में एक सूखे मेवे की तरह प्रयोग की जाती है। इसका प्रयोग भारतीय पकवानों, मिठाइयों और खीर व सेंवई इत्यादि में किया जाता है। चिरौंजी को चारोली के नाम से भी जाना जाता है। चारोली का वृक्ष अधिकतर सूखे पर्वतीय प्रदेशों में पाया जाता है। दक्षिण भारत, उड़ीसा, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, छोटा नागपुर आदि स्थानों पर यह वृक्ष विशेष रूप से पैदा होता है।
चारोली का उपयोग अधिकतर मिठाई में जैसे हलवा, लड्डू, खीर, पाक आदि में सूखे मेवों के रूप में किया जाता है।
   मीठी चीजों में खासतौर पर इस्तेमाल होने वाली चिरौंजी में कई ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. चिरौंजी में प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा पाई जाती है. इसके अलावा इसमें विटामिन सी और बी भी पर्याप्त मात्रा में होता है. वहीं इससे निर्मित तेल में अमीनो एसि‍ड और स्टीएरिक एसि‍ड भी पाया जाता है.
   हालांकि यह एक महंगा ड्राई फ्रूट है पर इससे होने वाले स्वास्थ्य लाभ वाकई बेजोड़ हैं.
चिरौंजी स्‍वास्‍थ्‍य और सौंदर्य दोनों के लिहाज से बहुत अच्‍छी मानी जाती है
चिरौंजी का लेप लगाने से चेहरे के मुंहासे, फुंसी और अन्‍य चर्म रोग दूर होते हैं। चिरौंजी को खाने से ताकत मिलती है, पेट में गैस नहीं बनती एंव शिरःशूल को मिटाने वाली होती है। चिरौंजी का पका हुआ फल मधुर, स्निग्ध, शीतवीर्य तथा दस्तावार और वात पित्त, जलन, प्यास और ज्वर का शमन करने वाला होता है।

खूनी दस्‍त रोके-

5-10 ग्राम चारोली को पीसकर दूध के साथ लेने से खूनी दस्त में लाभ होता है।

खांसी में-

खांसी में चिरौंजी का काढ़ा बनाकर सुबह-शाम पीने से लाभ मिलता है।
चिरौंजी पौष्टिक भी होती है, इसे पौष्टिकता के लिहाज से बादाम के स्थान पर इस्तेमाल कर सकते हैं।
किसी को शारीरिक कमजोरी हो तो उसके लिए चिरौंजी खाना बहुत फायदेमंद होता है. यह शारीरिक कमजोरी को दूर करने के साथ ही क्षमता का विकास भी करता है.

बालों को काला करे

चिरौंजी का तेल बालों को काला करने के लिए उपयोगी है

चेहरे को सुंदर बनाने के लिये

चिरौंजी को गुलाब जल के साथ पीस कर चेहरे पर लेप लगाएं। फिर जब यह सूख जाए तब इसे मसल कर धो लें। इससे चेहरा चिकना, सुंदर और चमकदार बन जाएगा।
सर्दी-जुकाम में भी इसका सेवन फायदेमंद होता है. इसे दूध के साथ पकाकर प्रयोग में लाने से इस तकलीफ में फायदा होता है|.

चमकती त्वचा -

चारोली को गुलाब जल के साथ सिलबट्टे पर महीन पीस कर लेप तैयार कर चेहरे पर लगाएँ। लेप जब सूखने लगे तब उसे अच्छी तरह मसलें और बाद में चेहरा धो लें। इससे आपका चेहरा चिकना, सुंदर और चमकदार हो जाएगा। इसे एक सप्ताह तक हर रोज प्रयोग में लाए। बाद में सप्ताह में दो बार लगाते रहें। इससे आपका चेहरा लगेगा हमेशा चमकदार।

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गीली खुजली -

अगर आप गीली खुजली की बीमारी से पीड़ित हैं तो 10 ग्राम सुहागा पिसा हुआ, 100 ग्राम चारोली, 10 ग्राम गुलाब जल इन तीनों को साथ में पीसकर इसका पतला लेप तैयार करें और खुजली वाले सभी स्थानों पर लगाते रहें। ऐसा करीबन 4-5 दिन करें। इससे खुजली में काफी आराम मिलेगा व आप ठीक हो जाएँगे। 

मुंहासों को दूर करे

संतरे के छिलके और चिरौंजी को दूध के साथ पीस कर चेहरे पर लेप लगाएं। जब लेप सूख जाए तब चेहरे को धो लें। एक हफ्ते तक प्रयोग के बाद भी असर न दिखाई दे तो लाभ होने तक इसका प्रयोग जारी रखें।
चिरौंजी में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है. कुछ मात्रा में इसके सेवन से शरीर की प्रोटीन की आवश्यकता पूरी हो जाती है. आप चाहें तो इसे कच्चे रूप में भी खा सकते हैं या फिर किसी भी स्वीट डिश के साथ पकाकर ले सकते हैं.


आँखों  का चश्मा  हटाने का अचूक  घरेलू उपाय


*चिरौंजी बीज, कैलोरी में अपेक्षाकृत कम होते हैं। यह प्रोटीन और वसा का एक अच्छा स्रोत हैं। इनमे फाइबर की भी अच्छी मात्रा होती हैं।इसके अतिरिक्त इसके विटामिंस जैसे की, विटामिन सी , विटामिन बी 1, विटामिन बी 2 और नियासिन आदि भी होते है। खनिज जैसे की, कैल्शियम, फास्फोरस और लोहे भी इन बीजों में उच्च मात्रा में पाए जाते हैं।
*चिरौंजी (मेवे के रूप में), एक टॉनिक है। यह मदुर, बलवर्धक, वीर्यवर्धक, वात और पित्त को कम करने वाली, दिल के लिए अच्छी, विष को नष्ट करने वाली और आम्वर्धक है

*शीत पित्ती - शरीर पर शीत पित्ती के ददोड़े या फुंसियाँ होने पर दिन में एक बार 20 ग्राम चिरौंजी को खूब चबा कर खाएँ। साथ ही दूध में चारोली को पीसकर इसका लेप करें। इससे बहुत फायदा होगा। यह नुस्खा शीत पित्ती में बहुत उपयोगी है।

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

*सांस की समस्याओं के उपचार में भी किया जाता है। यह श्लेष्मा को ढीला करने में भी मदद करता है और नाक और छाती की जकडन में राहत देता है। यह एंटीऑक्सिडेंटहै। चिरौंजी की बर्फी खाने से शरीर में बल की वृद्धि  होती है | चिरौंजी पित्त, कफ तथा रक्त विकार नाशक है ।
*चिरौंजी भारी, चिकनी, दस्तावर, जलन, बुखार और अधिक प्यास को दूर करती है ।चिरौंजी को खाने से शरीर में गरमी कम होती और ठंडक मिलती है।. इसके १०-२० ग्राम दाने चबाने से शीत-पित्त या छपाकी में राहत मिलती है।

पिपली के गुण प्रयोग लाभ

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वर्षा ऋतु के रोग और आयुर्वेदिक घरेलू उपचार

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15.7.16

जायफल के फायदे // Benefits of nutmeg


अखरोट की तरह दिखने वाला जायफल एक स्‍पाइसी मसाला है, जिसके प्रयोग से खाने का स्‍वाद और ज्‍यादा बढ़ जाता है। जायफल को स्‍वास्‍थ्‍य के लिहाज से भी गुणकारी माना जाता है। ये स्किन और सेक्‍स से जुड़ी समस्‍याओं में अहम भूमिका निभाता है। आइए जानते हैं क‍ि जायफल के और क्‍या-क्‍या स्‍वास्‍थ्‍य लाभ हैं।
*सर में बहुत तेज दर्द हो रहा हो तो बस जायफल को पानी में घिस कर लगाएं।

* सर्दी के मौसम के दुष्प्रभाव से बचने के लिए जायफल को थोड़ा सा खुरचिये, चुटकी भर कतरन को मुंह में रखकर चूसते रहिये। यह काम आप पूरे जाड़े भर एक या दो दिन के अंतराल पर करते रहिये। यह शरीर की स्वाभाविक गरमी की रक्षा करता है, इसलिए ठंड के मौसम में इसे जरूर प्रयोग करना चाहिए।
*आपको किन्हीं कारणों से भूख न लग रही हो तो चुटकी भर जायफल की कतरन चूसिये इससे पाचक रसों की वृद्धि होगी और भूख बढ़ेगी, भोजन भी अच्छे तरीके से पचेगा।


पेट मे गेस बनने के घरेलू,आयुर्वेदिक उपचार 

* दस्त आ रहे हों या पेट दर्द कर रहा हो तो जायफल को भून लीजिये और उसके चार हिस्से कर लीजिये एक हिस्सा मरीज को चूस कर खाने को कह दीजिये। सुबह शाम एक-एक हिस्सा खिलाएं।
* फालिज का प्रकोप जिन अंगों पर हो उन अंगों पर जायफल को पानी में घिसकर रोज लेप करना चाहिए, दो माह तक ऐसा करने से अंगों में जान आ जाने की संभावना देखी गयी है।

* प्रसव के बाद अगर कमर दर्द नहीं ख़त्म हो रहा है तो जायफल पानी में घिसकर कमर पे सुबह शाम लगाएं, एक सप्ताह में ही दर्द गायब हो जाएगा।
*फटी एडियों के लिए इसे महीन पीसकर बीवाइयों में भर दीजिये। 12-15 दिन में ही पैर भर जायेंगे।
*जायफल के चूर्ण को शहद के साथ खाने से ह्रदय मज़बूत होता है। पेट भी ठीक रहता है।
* अगर कान के पीछे कुछ ऎसी गांठ बन गयी हो जो छूने पर दर्द करती हो तो जायफल को पीस कर वहां लेप कीजिए जब तक गाठ ख़त्म न हो जाए, करते रहिये।

  • रतनजोत के औषधीय प्रयोग,उपयोग,लाभ


  • *अगर हैजे के रोगी को बार-बार प्यास लग रही है, तो जायफल को पानी में घिसकर उसे पिला दीजिये।
    *जी मिचलाने की बीमारी भी जायफल को थोड़ा सा घिस कर पानी में मिला कर पीने से नष्ट हो जाती है।
    *इसे थोडा सा घिसकर काजल की तरह आँख में लगाने से आँखों की ज्योति बढ़ जाती है और आँख की खुजली और धुंधलापन ख़त्म हो जाता है।
    *जायफल के लेप के बजाय जायफल के तेल का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
    * दांत में दर्द होने पर जायफल का तेल रुई पर लगाकर दर्द वाले दांत या दाढ़ पर रखें, दर्द तुरंत ठीक हो जाएगा। अगर दांत में कीड़े लगे हैं तो वे भी मर जाएंगे।

    *पेट में दर्द हो तो जायफल के तेल की 2-3 बूंदें एक बताशे में टपकाएं और खा लें। जल्द ही आराम आजाएगा। जायफल को पानी में पकाकर उस पानी से गरारे करें। मुंह के छाले ठीक होंगे, गले की सूजन भी जाती रहेगी।

    भटकटैया (कंटकारी)के गुण,लाभ,उपचार

  • * जायफल को कच्चे दूध में घिसकर चेहरें पर सुबह और रात में लगाएं। मुंहासे ठीक हो जाएंगे और चेहरे निखारेगा।
    *एक चुटकी जायफल पाउडर दूध में मिला कर लेने से सर्दी का असर ठीक हो जाता है। इसे सर्दी में प्रयोग करने से सर्दी नहीं लगती।

    * सरसों का तेल और जायफल का तेल 4:1 की मात्रा में मिलाकर रख लें। इस तेल से दिन में 2-3 बार शरीर की मालिश करें। जोड़ों का दर्द, सूजन, मोच आदि में राहत मिलेगी। इसकी मालिश से शरीर में गर्मी आती है, चुस्ती फुर्ती आती है और पसीने के रूप में विकार निकल जाता है।
    *जायफल, सौंठ और जीरे को पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को भोजन करने से पहले पानी के साथ लें। गैस और अफारा की परेशानी नहीं होगी।

    मिर्गी रोग के प्रभावी उपचार

    * दस जायफल लेकर देशी घी में अच्छी तरह सेंक लें। उसे पीसकर छान लें। अब इसमें दो कप गेहूं का आटा मिलाकर घी में फिर सेकें। इसमें शक्कर मिलाकर रख लें। रोजाना सुबह खाली पेट इस मिश्रण को एक चम्मच खाएं, बवासीर से छुटकारा मिल जाएगा।
    * नीबू के रस में जायफल घिसकर सुबह-शाम भोजन के बाद सेवन करने से गैस और कब्ज की तकलीफ


  • * दूध पाचन : 

    शिशु का दूध छुड़ाकर ऊपर का दूध पिलाने पर यदि दूध पचता न हो तो दूध में आधा पानी मिलाकर, इसमें एक जायफल डालकर उबालें। इस दूध को थोडा ठण्डा करके कुनकुना गर्म, चम्मच कटोरी से शिशु को पिलाएँ, यह दूध शिशु को हजम हो जाएगा।
    * यह शक्ति भी बढाता है।
    * जायफल आवाज में सम्मोहन भी पैदा करता है।


     नींबू के रस से करें रोग निवारण

    *जायफल और काली मिर्च और लाल चन्दन को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर चेहरे पर लगाने से चेहरे की चमक बढ़ती है, मुहांसे ख़त्म होते हैं।
    किसी को अगर बार-बार पेशाब जाना पड़ता है तो उसे जायफल और सफ़ेद मूसली 2-2 ग्राम की मात्र में मिलाकर पानी से निगलवा दीजिये, दिन में एक बार, खाली पेट, 10 दिन लगातार। *बच्चों को सर्दी-जुकाम हो जाए तो जायफल का चूर्ण और सोंठ का चूर्ण बराबर मात्रा में लीजिये फिर 3 चुटकी इस मिश्रण को गाय के घी में मिलाकर बच्चे को सुबह शाम चटायें।
    * चेहरे पर या फिर त्वचा पर पड़ी झाईयों को हटाने के लिए आपको जायफल को पानी के साथ पत्थर पर घिसना चाहिए। घिसने के बाद इसका लेप बना लें और इस लेप का झाईयों की जगह पर इस्तेमाल करें, इससे आपकी त्वचा में निखार भी आएगा और झाईयों से भी निजात मिलेगी।


    अतिसार रोग  के सरल उपचार 

    * चेहरे की झुर्रियां मिटाने के लिए आप जायफल को पीस कर उसका लेप बनाकर झुर्रियों पर एक महीने तक लगाएंगे तो आपको जल्द ही झुर्रियों से निजात मिलेगी।
    * आंखों के नीचे काले घेरे हटाने के लिए रात को सोते समय रोजाना जायफल का लेप लगाएं और सूखने पर इसे धो लें। कुछ समय बाद काले घेरे हट जाएंगे।
    *अनिंद्रा का स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और इसका त्वचा पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। त्वचा को तरोताजा रखने के लिए भी जायफल का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए आपको रोजाना जायफल का लेप अपनी त्वचा पर लगाना होगा। इससे अनिंद्रा की शिकायत भी दूर होगी और त्वचा भी तरोजाता रहेगी।
    *कई बार त्वचा पर कुछ चोट के निशान रह जाते हैं तो कई बार त्वचा पर नील और इसी तरह के घाव पड़ जाते हैं। जायफल में सरसों का तेल मिलाकर मालिश करें। जहां भी आपकी त्वचा पर पुराने निशान हैं रोजाना मालिश से कुछ ही समय में वे हल्के होने लगेंगे। जायफल से मालिश से रक्त का संचार भी होगा और शरीर में चुस्ती-फुर्ती भी बनी रहेगी।


    *अनिद्रा के लिए सही- 

    जायफल सेरोटोनिन (serotonin) का उत्‍पादन बढ़ाकर अच्‍छी नींद में मदद करता है। इसमें मौजूद मायरिस्टिसिन ( myristicin) गुण तनाव के लिए जिम्‍मेदार कारक एंजाइम्‍स (enzymes) को बढ़ने से रोकते हैं। अनिद्रा से निपटने के लिए सोने से पहले दूध के गिलास में जायफल का पाउडर ज़रूर मिलाएं।
    *दिमाग के लिए सही- जायफल में मौजूद मायरिस्टिसिन ( myristicin) अल्जाइमर रोग के लिए जिम्मेदार कारक एंजाइम (enzyme) के खिलाफ काम करता है। इसके अलावा ये तनाव को कम करता है और यादाशत को बढ़ाता है। 


    *इम्‍यूनिटी बढ़ाएगा-

     इसमें मौजूद पोषक तत्‍व इम्‍यूनिटी को बढ़ाकर स्‍वास्‍थ्‍य को सही रखते हैं। जायफल में पाए जाने वाले मिनरल्‍स और विटामिन एंटी-इन्फ्लैमटोरी और एंटीऑक्सीडेंट के प्रभाव को रोकने में सहायक हैं, जिससे आपका स्‍वास्‍थ्‍य दुरुस्‍त रहता है। 

    *पाचन क्रिया के लिए सही- 

    इसमें मौजूद फाइबर पेट में दर्द, कब्‍ज और एसिडिटी होने से रोकते हैं। इसके पाउडर को सलाद, कस्‍टर्ड और आइसक्रीम पर छिड़कर खाने से इन परेशानियों से बचा जा सकता है।


    सेक्‍स क्षमता बढ़ाएगा- 

    जायफल के पाउडर को चाय और दूध में मिलाकर पीने से सेक्‍स लाइफ बेहतर बनेगी। ये नेचुरल ऐफ्रोडीज़ीएक (aphrodisiac) की तरह काम करता है जिससे हार्मोन सेरोटोनिन पर प्रभाव पड़ता है और सेक्‍स उत्‍तेजना बढ़ती है।
    *स्किन प्रॉब्‍लम्‍स करेगा दूर- धब्बे, मुँहासे और झुर्रियों से छुटकारा पाने के लिए अपने खाने में जायफल शामिल करें। इसमें एंटीसेप्टिक और एंटी-इनफ्लमेटरी गुण होते हैं जो स्किन को साफ रखते हैं। इसका पाउडर दूध के साथ मिलाकर स्किन पर लगाएं 


    *दांतों को बनाएगा मजबूत- 


    इसमें मौजूद एंटी बैक्टीरियल गुण से दांतों के दर्द, सांस की गंध और मसूड़ों की समस्‍या से छुटकारा मिलता है। इसके लिए आप जायफल के तेल को कॉटन की सहायता से मुंह के प्रभावित हिस्‍से पर लगा सकते हैं। 

    पिपली के गुण प्रयोग लाभ

    हस्त मेथुन जनित यौन दुर्बलता के उपचार

    वर्षा ऋतु के रोग और आयुर्वेदिक घरेलू उपचार

    बवासीर के रामबाण उपचार

    13.7.16

    खून की कमी(रक्ताल्पता)के उपचार

                                        

       अक्सर थकान, कमजोरी रहना, त्वचा का रंग पीला पड़ जाना, हाथ-पैरों में सूजन आदि एनीमिया के लक्षण हैं। इस समस्या से पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं ज्यादा परेशान रहती हैं। जिन लोगों के खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा बहुत कम हो जाती है, वो लोग एनीमिया के शिकार हो जाते हैं।
    *एनीमिया के रोगी को लौह तत्व, विटामिन बी, फोलिक एसिड की कमी होती है। कभी-कभी अनुवांशिक कारणों से भी यह रोग हो सकता है। यदि आपके शरीर में भी खून की कमी है तो अपने आहार पर खास ध्यान दें। चलिए, जानते हैं किन चीजों को खाने से खून बढ़ जाता है और एनीमिया दूर हो जाता है।
    *भुट्टे एनीमिया के रोगियों के लिए पौष्टिक होते हैं। इन्हें सेंककर खाने से इसके दाने बड़े स्वादिष्ट लगते हैं। मक्के के दाने उबाल कर खाने से खून बढ़ता है।
    * मूंगफली के दाने गुड़ के साथ चबा-चबा कर खाएं।
    *शरपुंखा की पत्तियों और फलियों से लगभग 20 मिली रस में 2 चम्मच शहद मिला लें। इस मिश्रण को सुबह-शाम लें। इससे खून साफ होता है और बढ़ता है।
    *एक गिलास सेब का जूस लें। उसमें एक गिलास चुकंदर का रस और स्वादानुसार शहद मिलाएं। इसे रोजाना पिएं। इस जूस में लौह तत्व अधिक मात्रा में होता है।
    *2 चम्मच तिल 2 घंटों के लिए पानी में भिगो दें। पानी छान कर तिल को पीसकर पेस्ट बना लें। इसमें 1 चम्मच शहद मिलाएं और दिन में दो बार इसे खाएं।
    पके हुए आम के गूदे को अगर मीठे दूध के साथ लिया जाए तो आपका खून बढ़ जाता है।
    *दिन में दो बार ठंडे पानी से नहाएं। सुबह के समय सूरज की रोशनी में बैठें।
    * चाय और कॉफी पीना थोड़ा कम कर दें, क्योंकि यह शरीर को आयरन सोखने से रोकता है।

    * अनंतमूल, दालचीनी और सौंफ की समान मात्रा लेकर चाय बनाकर पिएं। दिन में एक बार लें। खून की कमी दूर हो जाएगी।
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