23.10.16

इन 7 आहार के सेवन से मक्‍खन की तरह पिघलेगी चर्बी

     बढ़ते वजन से परेशान ज्‍यादातर लोगों के लिए वजन घटाने की कोशिश एक मुद्दे की तरह होती है। इसके लिए वह जिम, योग और विशेष प्रकार की डाइट को भी अपनाते हैं। इन तरीकों में से अधिकांश बहुत प्रभावी होते हैं। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि कुछ खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल कर आप आसानी से फैट कम करने में सफल हो सकते हैं। हालांकि आपको इस बात पर विश्‍वास नहीं हो रहा होगा लेकिन यह सच है ऐसे खाद्य पदार्थ चयापचय को बढ़ाकर, फैट की रिहाई करने वाले हार्मोंन को उत्‍तेजित कर, शरीर के विषैले पदार्थों को बाहर कर फैट घटाने में मदद करते हैं। इसलिए इन खाद्य पदार्थों को अपने स्‍वस्‍थ आहार योजना का हिस्‍सा बनाना बहुत महत्‍वपूर्ण है। यहां जल्‍दी से फैट को कम करने वाले ऐसे ही जादुई आहार के बारे में जानकारी दी गई है।

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साबुत अनाज फैट को कम करने का एक स्मार्ट विकल्प है। अनाजों को अपने आहार में शामिल करने से शरीर के विषैले तत्‍व बाहर निकलते हैं और शरीर का फैट कम होता हैं। साबुत अनाज सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते है। इसमें विटामिन ई, विटामिन बी और अन्य तत्व जैसे जिंक, सेलेनियम, कॉपर, आयरन, मैगनीज एवं मैग्नीशियम आदि प्राप्‍त किया जा सकते हैं। साथ ही इनमें फाइबर भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है।

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केले को हमेशा से ही वजन बढ़ाने वाला खाद्य पदार्थ माना जाता है। लेकिन आपको यह जानकर बहुत आश्‍चर्य होगा कि केला फैट को जलाने वाला फल है। इस फल में मौजूद प्रतिरोधी स्‍टार्च पेट में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया के कारण, पेट में फैटी एसिड में परिवर्तित हो जाती है। यह चयापचय फैट में मदद कर फैट को रोकने में मदद करता है। वजन कम करने के लिए आप इसे स्‍मूदी या फ्रूट सलाद के रूप में ले सकते हैं।
नारियल का तेल मध्यम श्रृंखला ट्राइग्लिसराइड्स से समृद्ध होता है। यह फैटी एसिड शरीर द्वारा जल्‍दी पच जाता है, इसतरह से यह शरीर में जमा नहीं होता, लेकिन शरीर द्वारा ऊर्जा के उत्पादन के उपयोग कर सकते हैं। वजन घटाने के उद्देश्‍य को पूरा करने के लिए नारियल का तेल खाना पकाने के लिए तेल का एक बेहतरीन विकल्‍प है।

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बादाम के फायदे के बारे में भला कौन नहीं जानता। प्रोटीन से भरपूर यह नट्स मांसपेशियों के निर्माण के साथ-साथ शरीर में फैट को भी जमा नहीं होने देते। फैट को जलाने में मदद करने के कारण बादाम को चयापचय को बढ़ावा देने के लिए भी जाना जाता है। पेंसिलवेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के क्लाएर बेरीमैन के अनुसार, कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थों के बजाय हर रोज नाश्ते में बादाम का सेवन करने से हृदय संबंधी रोगों का खतरा तो कम होता ही है। साथ ही शरीर में जमने वाली अतिरिक्त वसा को भी नियंत्रण में रखा जा सकता है। बादाम को हर रोज नाश्ते में शामिल कर मेटाबॉलिक और हृदय रोगों के खतरों को आसानी से कम किया जा सकता है। बादाम को आप कच्‍चे या पानी में भिगोकर भी खा सकते हैं।

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लाल मिर्च में फैट को जलाने के प्रभाव होते हैं। मिर्च कैप्सेसिन से भरपूर होने के कारण ऑक्सीकरण द्वारा पेट वसा को कम करने में मदद करता है। यह चयापचय को बढ़ाकर शरीर से कैलोरी को जलाने में मदद करती है। ब्रिटेन में हुए एक शोध के अनुसार, लाल मिर्च शरीर में व्याप्त अवांछित कैलोरी जलाने एवं मोटापा घटाने में मददगार साबित होती है। मिर्च में मौजूद कैप्सेसिन तत्व, मिर्च को गर्मी देकर भूख कम करता है और कैलॉरी को जलाते हुए ऊर्जा की खपत बढ़ा सकता है।

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ब्रोकली खाने से न केवल स्‍वास्‍थ्‍य और पोषण मिलता है, बल्कि इस‍में लो कैलोरी होने की वजह से वजन भी कम होता है। ब्रोकोली में मौजूद फिटोनुट्रिएंट एंजाइम को उत्‍तेजित कर, वसा कोशिकाओं में वसा को जलाने के लिए उत्तेजित करता है। अब आप जब भी सब्‍जियां खरीदने जाएं, तो ब्रोकली को कभी नजरअंदाज न करें। आप इसका सेवन सब्‍जी या सलाद के रूप में कर सकते हैं।


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दालें भारतीय भोजन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्‍सा है और इसके विभिन्‍न प्रकार के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ होते हैं। यह आयरन का अच्‍छा स्रोत है और इसकी कमी चयापचय को धीमा कर सकती है। अपने आहार में नियमित रूप से दालों को शामिल कर चयापचय दर को बनाये रखने और फैट को प्रभावी रूप से कम करने में मदद मिलती है। अकुरित दालों को आप सलाद के रूप में भी ले सकते हैं।

20.10.16

पपीते के बीज के ये फायदे जानकर आंखें फटी रह जाएंगी -


पपीता पेट और त्वचा के लिए बेहद लाभदायक माना जाता है। पपीते की तरह इसके बीजों के की भी कई स्वास्थ्य लाभ हैं। इनका इस्तेमाल दाद संक्रमण, कैंसर और बच्चों में पेट के कीड़े जैसी विभिन्न समस्याओं से निपटने के लिए किया जा सकता है।
पपीते के बीज भी उतने ही अनमोल और पोषण से भरपूर हैं, जितना पपीता। आइए जानते हैं, पपीते के बीजों के खास गुण –
1 एंटी बैक्टीरियल – पपीते के बीज, एंटी बैक्टीरियल होते हैं, जो बीमारी फैलाने वाले जीवाणुओं से आपकी रक्षा करते हैं।
2 कैंसर से बचाव – पपीते के बीज में पाए जाने तत्व कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से आपकी रक्षा करते हैं। कैंसर से बचने के लिए पपीते के सुखाए गए बीजों को पीसकर प्रयोग किया जा सकता है ।
3 इंफेक्शन या एलर्जी – इंफेक्शन होने या शरीर के किसी भाग में जलन, सूजन या दर्द होने पर पपीते के बीज राहत देने का कार्य करते हैं।

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4 लीवर – लीवर की समस्याओं से निजात दिलाकर पपीते के बीज उसे मजबूत बनाने का काम भी करते हैं। यह लीवर के लिए बेहतर दवा साबित होते हैं।
5 किडनी – पपीते के बीज किडनी के लिए भी बेहद फायदेमंद होते हैं। किडनी स्टोन और किडनी के ठीक तरीके से क्रियान्वयन में पपीते के बीज कारगर हैं।
6 बुखार – बुखार आने पर पपीते के बीज का सेवन काफी फायदेमंद होता है। इसमें मौजूद एंटी बैक्टीरियल तत्व बार- बार फैलने वाले जीवाणुओं से रक्षा करते हैं, और आपको स्वस्थ रखने में मदद करते हैं ।

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7 पाचन तंत्र –
पाचन तंत्र की मजबूती के लिए पपीते के बीज रामबाण इलाज है। इसके सेवन से पाचन ठीक से होता है, और पाचन संबंधी सारी समस्याएं खत्म हो जाती है।
सावधानी –
हालांकि गर्भवती महिलाओं को पपीते के बीज खाने से परहेज करना चाहिए. इससे गर्भपात होने का खतरा रहता है. इसके अलावा बहुत छोटे बच्चों को भी इसे खाने से परहेज करना चाहिए. पपीते के बीजों का सेवन करने के दौरान इस बात का ख्याल हमेशा रखना चाहिए कि इसकी मात्रा संतुलित हो|


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19.10.16

सिर्फ दो औषधियों के जरिये आप पा सकते है सफेद दांत सिर्फ 1 मिनिट में




बेहद व्यस्त दिनचर्या के चलते हम अपने शरीर के महत्वपूर्ण अंगों की सही से देखभाल नहीं कर पाते जिनमें दांत एक है | हम सब पीले दांतों से परेशान है और सफेद दांतों के बारे में भूलते जा रहे है | आज के दिनों में सफेद दांत होना अति आवश्क है |अगर आपके पास सफेद दांत है तो आप खुल के हस पायेगे, किसी के नजदीक जा पायेगे | अगर आपके दांत पीले और गंदे हैं तो आप अपनी इज्जत की खातिर हसना भूल जायेगे,, शर्म के मारे किसी के नजदीक नहीं जा पायेगें |

सहवास अवधि  बढ़ाने के नुस्खे 

आज हम आयुर्वेद के खजाने से आपके लिए एक आसान और बेहद असरदार नुख्सा लेकर आये है |< यह सिर्फ एक नुख्सा ही नहीं है—- यह है आपकी मुस्कान वापिस लाने वाला रास्ता | यह नुख्सा जितना आसान है उतना ही असरदार | आइये देखते है के कैसे आप पा सकते हो सफेद – सुंदर दांत सिर्फ एक मिनिट में |
एक बर्तन में थोडा सा बेकिंग सोडा डाल कर उस में ताजा निकला हुआ नीम्बू का रस मिला कर अच्छे से मिक्स कर लें | 


हाई ब्लड प्रेशर  के सरल उपचार

इन दोनों औषधियों को तब तक उंगली से मिलाते रहें जब तक आपको एक गाढ़ा पेस्ट नहीं मिल जाता है | जब पेस्ट बन कर तयार हो जाए उसके बाद इस पेस्ट को अपने दांतों पर लगाये | वह पेस्ट दांतों के लिए बलीच का काम करेगा | पेस्ट को दांतों पर लगाने के एक मिनिट बाद दांतों को ब्रश कर के साफ़ कर लें |परिणाम देखकर आप दंग रह जाएँगे|

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16.10.16

सुबह नमक वाला पानी पीने के चमत्कारी फायदे // Amazing Benefits Of Salt Water Every Morning





स्वस्थ जीवन और निरोगी काया कौन नहीं चाहता है। यदि स्वस्थ जीवन चाहते हैं तो रोज सुबह उठकर काला नमक या सेंधा नमक को पानी में मिलाकर पीएं। इस पानी को अंग्रेजी में सोल वाटर कहते हैं। नमक वाले पानी को पीने से ब्लड शुगर, मोटापा और ब्लड प्रेशर आदि बीमारियों से मुक्ति मिलेगी ही साथ यह आपको अन्य घातक बीमारियों से भी बचाता है। आपको पानी में केवल काला नमक व सेंधा नमक ही मिलाना है। किचन में मैजूद साधा नमक न मिलाएं। 80 से ज्यादा खनिज काले नमक में होते हें जो शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। आइये जानते हैं नमक वाला पानी कैसे आपको कई तरह की बीमारियों से छुटकारा दिलवाता है।
कैसे बनाएं नमक वाला पानी?


बिदारीकन्द के औषधीय उपयोग 

1 गिलास गुनगुने पानी में एक छोटी चम्मच काला नमक को मिलाएं। और इसे अच्छे से मिलाएं। अब यह पानी पीने लायक बन गया है।


नमक वाले पानी पीने के फायदे

त्वचा की समस्या में-

नमक वाला पानी पीने से त्वचा से संबंधित सभी परेशानियां जैसे एक्ने, एक्जिमा और रैश की परेशानी दूर होती है। नमक के पानी में क्रामिया होता है जो त्वचा की हर समस्या से लड़ता है।


पाचन तंत्र को ठीक रखना

नमक वाला पानी मुंह में लार वाली ग्रंथियों को सक्रिय करने में मदद करता है। लार पेट के अंदर प्राकृतिक नमक, हाइड्रोक्लोरिक एसिड और प्रोटीन को पचाने वाले एंजाइम को उत्तेजित करने में सहायता करती है। इससे खाया गया भोजन टूट कर आराम से पच जाता है। इसके अलावा इंटेस्टाइनिल ट्रैक्ट और लिवर में भी एंजाइम को उत्तेजित होने में मदद मिलती है, जिससे खाना पचने में आसानी होती है।



नींद समस्या में

नींद की समस्या आजकल कई लोगों में देखी जा रही है। एैसे में रोज सुबह नमक वाला पानी पीना चाहिए। नींद लाने में नमक हमारी तंत्रिका को आराम देता है और दो खतरनाक हार्मोन्स एड्रनलाईन और कोर्टिसोल को नमक कम कर देता है जिस वजह से रात को शांत व अच्छी नींद आती है।


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वजन घटाएं

यह पाचन को दुरुस्त करके शरीर की कोशिकाओं तक पोषण पहुंचाता है, जिससे मोटापा कंट्रोल करने में मदद मिलती है।
काले नमक का पानी पीना न सिर्फ सेहत के लिए अच्छा होता अपितु यह चेहरे से जुड़ी हर दिक्कत को भी दूर करता है। सुबह उठकर अपनी आदत में थोड़ा बदलाव लाएं और नमक के पानी को पीने की आदल डालें।
काले नमक का पानी पीना न सिर्फ सेहत के लिए अच्छा होता अपितु यह चेहरे से जुड़ी हर दिक्कत को भी दूर करता है। सुबह उठकर अपनी आदत में थोड़ा बदलाव लाएं और नमक के पानी को पीने की आदल डालें।


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बनाए हड्डी मजबूत

शायद ही आपको पता होगा कि हमारा शरीर भी हड्डियों से खनिज और कैल्शियम को खींचता है। इससे धीरे-धीरे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। लेकिन नमक वाले पानी में जो तत्व पाए जाते हैं वे कैल्शियम की कमी को पूरा करते हैं और हड्डियों को भी मजबूत बनाते हैं।










अगर आप स्‍वस्‍थ जीवन जीना चाहते हैं तो नियमित रूप से सुबह पानी में काला नमक मिलाकर पीना शुरू कर दें।

सहवास अवधि  बढ़ाने के नुस्खे 

जी हां, इस लिक्विड को सोल वॉटर कहते हैं, और इसे पीने से ब्‍लड शुगर, ब्‍लड प्रेशर, एनर्जी में सुधार, मोटापा और अन्‍य तरह की बीमारियां तुरंत ठीक हो जाती है। लेकिन नमक पानी लेते समय इस बात का ध्‍यान रखें कि इसमें आपको सादे नमक का प्रयोग नहीं करना है, अथवा यह फायदे की जगह आपको नुकसान पहुचायेगा। काले नमक में 80 मिनरल और जीवन के लिए जरूरी सभी आवश्यक प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं।



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5.10.16

डाइबिटीज़ (शुगर) मे कद्दू खाने के लाभ// Benefits of pumpkin in Diabetes

डायबटीज एक कॉम्प्लीकेटेड बीमारी है जिसमें हर बार एतहियात बरतनी पड़ती है। यह बीमारी साइलेंट किलर होती है, इसमें शरीर में ब्लड़ सुगर की मात्रा, नियंत्रण में नहीं रहती है। डायबटीज से ग्रसित व्यक्तियों को खाने-पीने के मामले में बेहद सावधानी बरतनी पड़ती है। इस बीमारी से ग्रसित होने पर प्रीर्जवेटिव फूड खाने से बचना चाहिए।

पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 

अगर आप डायबटीज से ग्रसित है तो मसूर की दाल, ब्रोकली, सॉल्मन, चिया सीड और सारडीनाइस आदि का सेवन करें, जो आपके लिए फायदेमंद होता है। इस आर्टिकल में हम आपको बताना चाहते है कि कद्दू का सेवन, डायबटीज के रोग में फायदेमंद होता है। आप इसे कई तरीके से सेवन कर सकते हैं, इसको भाप में पकाकर खाने से अधिक लाभ मिलता है, आप चाहें तो इसे लोहे की कढ़ाई में पकाकर खाएं, इससे आपको आयरन भी मिलेगा और आपको सब्जी में स्वाद भी आएगा। कद्दू का सूप, पाइस और पूरी भी बनती है।

*किडनी फेल रोग का अचूक इलाज*

अगर आप डायबिटीज़ और ब्लड प्रेशर के मरीज़ हैं तो भूल जाइये कि आप अपनी पसंद का कोई भी खाना खा सकते हैं। इन बीमारियों के साथ जीने के लिए आपको काफी परहेज़ करना पड़ता है। और जिसको ये दोनों बीमारियां एक साथ हो जाएं उसके लिए मामला और मुश्किल हो जाता है। जिस खाने की चीज़ में नमक और ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज़्यादा होता है, वो आपके लिए बिल्कुल मना हो जाते हैं। ऐसे में चटपटे स्नैक्स जैसे नमकीन, पैकेट बंद चिप्स, फ्रेंच फ्राइज़ वगैरह तो आप भूल ही जाइये।
डायबटीज मरीजों को कद्दू के सेवन के निम्नलिखित लाभ हैं:
1) भरपूर मात्रा में विटामिन सी कद्दू में विटामिन सी पर्याप्त मात्रा में होता है। इससे शरीर में इंसुलिन की मात्रा अच्छी हो जाती है और बढ़ी हुई डायबटीज नियंत्रण में आ जाती है।
2) आयरन और असंतृप्त वसा कद्दू के बीजों में आयरन की पर्याप्त मात्रा होती है और इसमें वसा भी नहीं होता है जो दिल के लिए भी अच्छा होता है। अगर आप इसके क्रंची स्नैक भी बनाकर खाएं, तब भी आपको किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होगा।
3) एंटीऑक्सीडेंट शरीर में इंसुलिन की मात्रा कम होने पर डायबटीज की शिकायत हो जाती है, ऐसे में एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में मिलने पर इस कमी की भरपाई की जा सकती है। कई शोध अध्ययनों से ये बात सामने आई है कि कदृदू खाने से उपापचय दुरूस्त रहता है और कुछ हद तक बीमारी सही भी हो जाती है।
4) फॉलिक एसिड कद्दू में फॉलिक एसिड भरपूर मात्रा में होता है, जो शरीर में नाईट्रिक एसिड की मात्रा को घटाता है। यह आपके शरीर की प्रक्रिया को सुचारू बनाता है। यह कद्दू का विशेष लाभ है।

*प्रोस्टेट बढ़ने से मूत्र रुकावट की अचूक  औषधि*

ब्लड प्रेशर में लाभ

अगर आप अपना ब्लड प्रेशर कंट्रोल में लाइन के लिए एंटी-हाइपरटेंसिव दवाएं ले रहे हैं और फिर भी कुछ फायदा नहीं हो रहा तो आपको कद्दू के बीजों के तेल का इस्तेमाल करना चाहिए। एक अध्ययन के अनुसार, कद्दू के बीज में से तत्व होते हैं जो आपका ब्लड प्रेशर कम करते हैं, और दिल के लिए अच्छे होते हैं। कद्दू के बीज नाइट्रिक ऑक्साइड का उत्पादन करते हैं जो दिल की धड़कन को नियमित करता है, जिससे दिल की बीमारियों का जोखिम कम होता है।

डायिबिटीज़ में लाभ

अगर आप अपनी डायबिटीज़ को नैचुरली कंट्रोल में रखना चाहते हैं तो डायट में कद्दू के बीज खाना शुरू करें। एक अध्ययन में, ये बात सामने आई है कि कद्दू के बीज और अलसी के बीज का मिक्सचर डायबिटीज़ के दौरान शरीर में पैदा होने वाले कुछ एंजाइम स्तरों को कंट्रोल करता है, जिससे डायबिटीज़ कंट्रोल में आ जाती है।

किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

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आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचा






4.10.16

बाल रोगों की घरेलू।आयुर्वेदिक चिकित्सा

                                                     

    पसली का दर्द :
सुगन्धबाला, मिश्री और शहद को मिलाकर चावलों को पानी के साथ पिलाने से बच्चों के सभी तरह के अतिसार (दस्त), प्यास, वमन (उल्टी) और बुखार समाप्त हो जाते हैं।सफेद कमल के केसर को पीसकर उसमें मिश्री और शहद को मिलाकर चावलों के पानी के साथ पिलाने से बच्चों का प्रवाहिका रोग समाप्त हो जाता है।
बेल की जड़ का काढ़ा बनाकर उसमें खीलों का चूर्ण और मिश्री डालकर सेवन करना चाहिए। इससे बच्चों की उल्टी और दस्त में लाभ मिलता है।कुलिंजन को घिसकर छाछ में मिलाकर और उसमें थोड़ी सी हींग डालकर कढ़ी बना लें और बच्चों को खिलायें। इससे बच्चों का अतिसार (दस्त) रोग समाप्त हो जाता है।एक से डेढ़ ग्राम काकड़ासिंगी का चूर्ण शहद के साथ चाटने से बच्चों का अतिसार (दस्त) रोग ठीक हो जाता है।
थोड़े से प्याज के रस में बाजरे के बराबर अफीम घोलकर देने से दस्त बंद हो जाते हैं।यदि बच्चे को हरे दस्त आते हैं तो नरकचूर को पीसकर मां अपने दूध में मिलाकर बच्चे को सुबह और रात को पिलायें इससे हरे दस्त बंद हो जाते हैं।

स्तनों का दूध बढ़ाने के उपाय 

सफेद जीरा, बीज निकाला हुआ मुनक्का, हरा पोदीना और कालानमक को मिलाकर बारीक पीस लें और बच्चे को दिन में तीन से चार बार चटाएं इससे दस्त ठीक हो जाता है।
*प्याज के थोड़े से रस में बाजरे के बराबर अफीम घोलकर पिलाने से दस्त बंद हो जाते हैं।हींग को पानी में घोलकर गुदा में लगाने से बच्चों के गुदा मार्ग से कीड़े खत्म हो जाते हैं या नीम के तेल से भी बहुत जल्दी आराम आ जाता है।
*अगर खूनी दस्त हो तो तुख्मे और लुआव रेशा खत्मी पिलायें।छोटे बच्चों को दस्त हो तो गर्म दूध में चुटकी भर पिसी हुई दालचीनी मिलाकर पिलाने से दस्त बंद हो जाते हैं।
*छोटे बच्चों की नाभि पर साबुन के साथ घृतकुमारी के गूदे का लेप करने से दस्त साफ हो जाते हैं।गूलर के दूध की 5-6 बूंदें शक्कर के साथ बच्चे को देने से बच्चों के आंव (दस्त) बंद हो जाते हैं।बच को जलाने से प्राप्त कोयले की लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग राख पानी में घोलकर बच्चों को पिलाने से बच्चों का अतिसार समाप्त हो जाता है।

*अरंडी के तेल के गुण और उपयोग 

खस के चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर पीस लें। इसे आधा चम्मच की मात्रा में 3 बार खाने से दस्त खत्म हो जाते हैं।कुलंजन की जड़ की गांठ को पत्थर पर छाछ के साथ घिसकर थोड़ा-सा हींग मिलाकर, हल्का गरम करके बच्चों को आधा चम्मच चटाने से बच्चों के अतिसार में लाभ होगा।

बच्चों के पेट को साफ करना :

लगभग 6 ग्राम एलुवा, 6 ग्राम उसारी रेवन्द, 2 ग्राम हींग को भूनकर पानी के साथ पीसकर मूंग के बराबर की छोटी-छोटी गोली बनाकर रख लें। इस एक गोली को मां के दूध में मिलाकर पिलाने से बच्चे के पेट में जमा हुआ दूध दस्त के साथ बाहर निकल जायेगा।लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग भुना हुआ सोहागा और लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग उसारा रेवन्द को दूध के साथ पिलाने से दस्त साफ हो जाते हैं।

बढ़ी हुई तिल्ली प्लीहा के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार

बच्चों के फोड़े :

यदि बच्चों को फोड़े-फुंसी बहुत ज्यादा होते हैं तो पत्थरचटा की जड़ को पीसकर लगाने से फोड़े बैठ जाते हैं।पत्थरचटा की जड़ 20 ग्राम को 250 मिलीलीटर पानी में पीसकर उबाले जब यह लगभग 50 मिलीलीटर रह जाये तो इसे उतारकर और छानकर बच्चे को पिलाने से फोड़े-फुंसी दुबारा नहीं होते हैं।

बदहजमी :

दिन में तीन बार बच्चे को एक-एक उंगली शहद चटाएं। इससे बच्चों की पाचनशक्ति ठीक हो जाती है।आधा ग्राम भुना हुआ सुहागा मां के दूध में मिलाकर सुबह पिलाएं। इससे बच्चों का पेट फूलना ठीक हो जायेगा।लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग भुनी हुई हींग मां के दूध में मिलाकर दें। इससे पेट दर्द ठीक हो जायेगा।सेंधानमक, सोंठ, हींग तथा भारंगी इन सबको मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को घी के साथ बच्चों को खिलाने से `अफारा´ और `बादी´ का दर्द दूर होता है।बदहजमी होने पर कभी-कभी रात को बच्चे उठकर रोने लगते हैं। इसके लिए बच्चे को शहद चटायें तथा सौंफ और पोदीना मिलाकर पिलाएं।

मलेरिया की जानकारी और विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों से इलाज 

पसली का दर्द : 

सरसों के तेल में हींग, लहसुन डालकर पकायें और इस तेल से बच्चे की पसलियों में मालिश करें। इससे पसलियों का दर्द बंद हो जाता है। अभ्रक की राख मूंग के बराबर दूध और शहद में मिलाकर बच्चे को खिलायें। इससे पसली का दर्द दूर हो जाता है। पसली चलना छोटे बच्चों की पसली चलने पर अफीम को गर्म करके लेप करें अफीम न मिलने पर सूअर की चर्बी भी पिला सकते है। लगभग 1-1 ग्राम गुलबनफसा, गुल नीलोफर, गुलाब के फूल, मकोय, उन्नाव, लिसौड़ा, मुनक्का, 10 ग्राम गुलकन्द और 3 ग्राम अमलतास के गूदे को लगभग 90 मिलीलीटर पानी में मिला लें और उबलने के लिए रख दें। उबलने पर जब पानी आधा रह जाये, तब इसे पानी में ही अच्छी तरह से मलकर छान लें। फिर इसमें मिश्री मिलाकर दिन में 2-4 बार पिलाएं और 10 मिलीलीटर प्याज के रस में 3 ग्राम एलुआ को गर्म करके बच्चे की पसलियों पर लेप करें। इससे बच्चा जल्दी ठीक हो जायेगा। बच्चे के पेट पर एरण्डी का तेल मलकर, उसके ऊपर बकायन की पत्तियां गर्म करके बांधने से `डब्बे का रोग´ (पसली का रोग) दूर हो जाता है।

काली मिर्च के फायदे

 कान का दर्द 

सरसों के तेल में 4-5 लहसुन की कलियां और मटर के दाने के बराबर हींग डालकर पका लें। यह तेल कर्ण शूल (कान के दर्द) को जल्दी दूर करता है। शराब की 3-4 बूंदे गर्म करके कान में डालने से कान का दर्द बंद हो जाता है। सिरसा के पत्तों के रस को गर्म करके कान में डालने से कान का दर्द बंद हो जाता है। 3 बूंदे तारपीन के तेल की कान में डालने से कान का दर्द बंद हो जाता है। लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग लाल फिटकरी को प्याज के रस में गर्म करके कान में डालने से कान का दर्द बंद हो जाता है। कान में दर्द हो तो पोदीना का रस डालें या हरी मकोय का रस कान में डालें। 

आंखों का लालीपन : 

*लगभग 3-3 ग्राम फिटकरी, सेंधानमक और मिश्री को उबाले हुए पानी में मिलाकर शीशी में भर लें। इस रस को गर्मी की वजह से आई हुई आंख में डालने से बहुत लाभ होता है। यह रस आंखों का लालपन भी दूर कर देता है। *अफीम, भुनी हुई हल्दी, भुना हुआ सुहागा को उबाले हुए पानी में मिलाकर घोल बना लें। इस घोल की 4 बूंद आंखों में डालने से सर्दी में आई हुई आंख का दर्द, आंखों का सूजना और लाल होना दूर हो जाता है। 
*यदि बच्चे की आंख दुखती हो तो रसौत को घिसकर लेप करें तथा इसके काजल का प्रयोग करें। 

हर प्रकार की खांसी और कफ की समस्या के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार 

आंखों का फूला : 

लगभग 1 ग्राम भुनी हुई फिटकरी, 1 ग्राम भुना हुआ सुहागा, 1 ग्राम तूतिया, 1 ग्राम कचिया और 10 ग्राम मिश्री को एक साथ अच्छी तरह से पीसकर शीशी में भरकर रख लें। इस चूर्ण को थोड़ी सी मात्रा में लेकर सलाई से आंखों में लगाने से आंखों का माड़ा-फूली और आंखों से धुंधला दिखाई देना दूर हो जाता है। 

बच्चों के दस्त : 

*मंजीठ, धाय के फूल, सिरवाली (सरिवा) और पठानी लोध्र को मिलाकर उसका काढ़ा बना लें। इस काढे़ को ठंडा करके उसके अन्दर शहद मिलाकर पिलाने से बच्चों का अतिसार (दस्त) ठीक हो जाता है।
 *बायविडंग, अजमोद और पीपल या चावल के दानों का चूर्ण गुनगुने पानी के साथ मिलाकर पिलाने से बच्चों का आमातिसार (आंव-मरोड़ी के दस्त) ठीक हो जाता है।

पिपली  के गुण प्रयोग लाभ

* अतिसार और आमातिसार (ऑवयुक्त दस्त) में दो ग्राम अतीस के चूर्ण की फंकी देकर 8 घण्टे तक पानी में भिगोई हुई दो ग्राम सौंठ को पीसकर पिलाने से लाभ होता है। जब तक अतिसार नहीं मिटे तब तक नित्य देना चाहिए।
* धाय के फूल, लोध्र, बेलगिरी, नागरमोथा, मंजीठ और नेत्रवाला को मिलाकर काढ़ा बनाकर पिलाने से अथवा इन सबको पीसकर-छानकर इसके चूर्ण को शहद में मिलाकर चटनी की तरह चटाने से बच्चों का अतिसार पूरी तरह से ठीक हो जाता है। 
*बेलगिरी, धाय के फूल, नेत्रवाला, लोध्र और गजपीपल का काढ़ा बना लें जब यह काढ़ा ठंडा हो जाए तो उसमें शहद मिलाकर बच्चों को पिलायें। इससे अतिसार (दस्त) में लाभ मिलता है। 
*सोंठ, अतीस, नागरमोथा, सुगन्धवाला और इन्द्रजौ को मिलाकर काढ़ा बनाकर सुबह-सुबह पिलाने से बच्चों के सभी तरह के दस्त बंद हो जाते हैं। इसको `नागरादि´ काढ़ा भी कहते हैं। यह बच्चों के अतिसार (बच्चों के दस्त) में बहुत लाभकारी होता है। 

शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 

*लज्जालु, धाय के फूल, लोध्र और सारिवा को मिलाकर उसका काढ़ा बना लें। इसके बाद इसमें शहद मिलाकर बच्चों को दें। इससे पतले दस्त आना बंद होते हैं। मोचरस, लज्जावती की जड़ और कमल की केसर को मिलाकर तीनों को मिलाकर लगभग 10 ग्राम इकट्ठा कर लें और 10 ग्राम चावल भी लें। इसे 100 मिलीलीटर पानी में मिलाकर बच्चे को खिलाने से रक्तातिसार (खूनी दस्त) में आराम आ जाता है।
* धान की खीलें, मुलेठी, खांड और शहद को एक साथ मिलाकर चावलों के पानी के साथ बच्चों को पिलाने से बच्चों का प्रवाहिका रोग ठीक हो जाता है। धनिया, अतीस, काकड़ासिंगी और गजपीपल को मिलाकर इनका चूर्ण बनाकर शहद के साथ मिलाकर चटाने से बच्चों के अतिसार (दस्त) और वमन (उल्टी) रोग समाप्त हो जाते हैं। 
*सुगन्धबाला, मिश्री और शहद को मिलाकर चावलों को पानी के साथ पिलाने से बच्चों के सभी तरह के अतिसार (दस्त), प्यास, वमन (उल्टी) और बुखार समाप्त हो जाते हैं। सफेद कमल के केसर को पीसकर उसमें मिश्री और शहद को मिलाकर चावलों के पानी के साथ पिलाने से बच्चों का प्रवाहिका रोग समाप्त हो जाता है।
 *बेल की जड़ का काढ़ा बनाकर उसमें खीलों का चूर्ण और मिश्री डालकर सेवन करना चाहिए। इससे बच्चों की उल्टी और दस्त में लाभ मिलता है। 

आँखों  का चश्मा  हटाने का अचूक  घरेलू उपाय

*कुलिंजन को घिसकर छाछ में मिलाकर और उसमें थोड़ी सी हींग डालकर कढ़ी बना लें और बच्चों को खिलायें। इससे बच्चों का अतिसार (दस्त) रोग समाप्त हो जाता है। 
*एक से डेढ़ ग्राम काकड़ासिंगी का चूर्ण शहद के साथ चाटने से बच्चों का अतिसार (दस्त) रोग ठीक हो जाता है। थोड़े से प्याज के रस में बाजरे के बराबर अफीम घोलकर देने से दस्त बंद हो जाते हैं। यदि बच्चे को हरे दस्त आते हैं तो नरकचूर को पीसकर मां अपने दूध में मिलाकर बच्चे को सुबह और रात को पिलायें इससे हरे दस्त बंद हो जाते हैं। 
*सफेद जीरा, बीज निकाला हुआ मुनक्का, हरा पोदीना और कालानमक को मिलाकर बारीक पीस लें और बच्चे को दिन में तीन से चार बार चटाएं इससे दस्त ठीक हो जाता है।
* प्याज के थोड़े से रस में बाजरे के बराबर अफीम घोलकर पिलाने से दस्त बंद हो जाते हैं। हींग को पानी में घोलकर गुदा में लगाने से बच्चों के गुदा मार्ग से कीड़े खत्म हो जाते हैं या नीम के तेल से भी बहुत जल्दी आराम आ जाता है।
* अगर खूनी दस्त हो तो तुख्मे और लुआव रेशा खत्मी पिलायें। छोटे बच्चों को दस्त हो तो गर्म दूध में चुटकी भर पिसी हुई दालचीनी मिलाकर पिलाने से दस्त बंद हो जाते हैं। छोटे बच्चों की नाभि पर साबुन के साथ घृतकुमारी के गूदे का लेप करने से दस्त साफ हो जाते हैं। 

हाथ पैर और शरीर का कांपना कारण और उपचार

*गूलर के दूध की 5-6 बूंदें शक्कर के साथ बच्चे को देने से बच्चों के आंव (दस्त) बंद हो जाते हैं। बच को जलाने से प्राप्त कोयले की लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग राख पानी में घोलकर बच्चों को पिलाने से बच्चों का अतिसार समाप्त हो जाता है।
* खस के चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर पीस लें। इसे आधा चम्मच की मात्रा में 3 बार खाने से दस्त खत्म हो जाते हैं। 
*कुलंजन की जड़ की गांठ को पत्थर पर छाछ के साथ घिसकर थोड़ा-सा हींग मिलाकर, हल्का गरम करके बच्चों को आधा चम्मच चटाने से बच्चों के अतिसार में लाभ होगा। बच्चों के पेट को साफ करना : लगभग 6 ग्राम एलुवा, 6 ग्राम उसारी रेवन्द, 2 ग्राम हींग को भूनकर पानी के साथ पीसकर मूंग के बराबर की छोटी-छोटी गोली बनाकर रख लें। इस एक गोली को मां के दूध में मिलाकर पिलाने से बच्चे के पेट में जमा हुआ दूध दस्त के साथ बाहर निकल जायेगा। 
लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग भुना हुआ सोहागा और लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग उसारा रेवन्द को दूध के साथ पिलाने से दस्त साफ हो जाते हैं। 

मुह के छाले से परेशान है तो ये उपाय करे

बच्चों के फोड़े : 

*यदि बच्चों को फोड़े-फुंसी बहुत ज्यादा होते हैं तो पत्थरचटा की जड़ को पीसकर लगाने से फोड़े बैठ जाते हैं। *पत्थरचटा की जड़ 20 ग्राम को 250 मिलीलीटर पानी में पीसकर उबाले जब यह लगभग 50 मिलीलीटर रह जाये तो इसे उतारकर और छानकर बच्चे को पिलाने से फोड़े-फुंसी दुबारा नहीं होते हैं।

 बदहजमी

दिन में तीन बार बच्चे को एक-एक उंगली शहद चटाएं। इससे बच्चों की पाचनशक्ति ठीक हो जाती है। आधा ग्राम भुना हुआ सुहागा मां के दूध में मिलाकर सुबह पिलाएं। इससे बच्चों का पेट फूलना ठीक हो जायेगा। लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग भुनी हुई हींग मां के दूध में मिलाकर दें। इससे पेट दर्द ठीक हो जायेगा। सेंधानमक, सोंठ, हींग तथा भारंगी इन सबको मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को घी के साथ बच्चों को खिलाने से `अफारा´ और `बादी´ का दर्द दूर होता है। बदहजमी होने पर कभी-कभी रात को बच्चे उठकर रोने लगते हैं। इसके लिए बच्चे को शहद चटायें तथा सौंफ और पोदीना मिलाकर पिलाएं।


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