17.9.17

खांसी मे तुरंत राहत पाने के उपचार // Cures for immediate relief in cough



    मौसम बदलते ही, हर घर में सर्दी या जुकाम का होना एक आम बात हो जाती है। वातावरण में मौजूद वायरस, बदलते मौसम में काफी सक्रिय हो जाता है, जिसके कारण जुकाम या सांस की अन्य बीमारियां होती हैं. सामान्य ज़ुकाम के लिए कोई इलाज नहीं है, लेकिन इसके लक्षणों का इलाज किया जा सकता है। यह, मनुष्यों में सबसे अधिक होने वाला संक्रामक रोग है। औसत वयस्क को प्रतिवर्ष दो से तीन बार ज़ुकाम होता है। औसत बच्चे को प्रतिवर्ष छह से लेकर बारह बार ज़ुकाम होता है। लेकिन शुरुआत में ही अगर कुछ घरेलू उपाय कर लिए जाएं तो इस पर आसानी से काबू पाया जा सकता है। तो आइये जानते है कुछ घरेलु और आसान उपाय। 


*अदरक -

अदरक को १ ग्लास पानीमे १/२ रहने तक उबाल ले और उसमे १ चम्मच शहद मिलाकर पिये।
अदरक के छोटे छोटे टुकड़े करके  उसे दिनभर चूसते रहे आराम मिलेगा।


*लहसुन -

१ कप पानी में ३-४ लहसुन की कलियों को उबाल ले और ठंडा होने पर इसमें १ चम्मच शहद मिलाकर ले।


 प्याज -

१/२ चम्मच प्याज का रस और १/२ चम्मच शहद मिलाकर लेने से खांसी में आराम मिलता है।


*चाय -

चाय में १/२ चम्मच हल्दी , १/२ चम्मच काली मिर्च पाउडर , तुलसी की कुछ पत्तियाँ और अदरक मिलाकर पिने से काफी हदतक आराम मिलता है। 


* गाजर -

१ कप गाजर के ज्यूस में १ चम्मच शहद मिलाकर दिन में ३-४ बार ले।


*बादाम -

४-५ बादाम को रात में पानी में भिगोंकर सुबह इसका पेस्ट बनाये और १ चम्मच बटर में मिलाकर रोज सुबह -शाम जब तक आपको आराम न हो तबतक लेते रहे।


 तुलसी -


तुलसी के रस में अदरक का रस और शहद मिलाकर लेने से भी खांसी में राहत मिलती है।


* काली मिर्च -

काली मिर्च कफ में बहुत  आराम देती है। इसे पीसकर १ चम्मच घी में १/४ मिलाकर लेने से बहुत जल्दी आराम मिलता है।
कुनकुने दूध में भी इसे मिलाकर पिने से खांसी में राहत मिलती है।


किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचा


13.9.17

प्रोस्टेट बढ़ने पर आपरेशन जरूरी नहीं ,करें ये उपचार



प्रोस्टेट ग्रन्थि एक बहुत ही छोटी ग्रन्थि होती है | इस ग्रन्थि का आकार एक अखरोट की भांति होता है | यह ग्रन्थि पुरुषों में पाई जाती है | यह पुरुषो के मूत्राशय के नीचे मुत्र् नली के पास होती है | इसमें पुरुषों के सेक्स हार्मोन्स की एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है | जब किसी भी पुरुष की आयु 50 साल की हो जाती है या इससे उपर हो जाती है तो इस ग्रन्थि का आकार बढ़ने लगता है | जैसे – जैसे प्रोस्टेट ग्रन्थि बढती है , इसका सीधा प्रभाव मूत्र नली पर पड़ता है | मूत्र नली का दबाव बढ़ता है जिसके कारण पेशाब के रुकावट की स्थित बन जाती है | जब यह स्थिति बन जाती है | तब पेशाब रुक –रुक कर एक पतली धार में और थोड़ी – थोड़ी मात्रा में आता है | कभी – कभी तो पेशाब टपक – टपक कर आता है और जलन होती है | कभी – कभी तो रोगी अपने मूत्र के वेग को रोक नही पाता है | जिससे रोगी को रात के समय में भी पेशाब करने के लिए नींद से उठना पड़ता है | इस रोग का अधिक प्रभाव लगभग 60 से ७० साल की उम्र मे हो जाता है | 
इस उम्र तक जाते – जाते यह रोग और भी उग्र हो जाता है | इस रोग में पेशाब पूरी तरह से रुक जाने की संभावना भी बन जाती है | ऐसी अवस्था में रोगी को किसी अच्छे डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए | डॉक्टर एक केथेटर नली लगाकर यूरिन बैग में मूत्र करने की व्यवस्था कर देते है | इस रोग का प्रकोप लगभग 50 % पुरुषों में देखने को मिलता है | यह रोग मनुष्य को 60 साल की उम्र के बाद होने लगता है | और समय बीतने के साथ – साथ इस रोग और भी प्रबल हो जाता है | 80 साल से 90 साल तक यह रोग पूरी तरह से व्यक्ति को जकड़ लेता है | जब किसी व्यक्ति की प्रोस्टेट ग्रन्थि बढ़ जाती है तो इसके बारे में कैसे मालूम करते है | इसके क्या लक्षण होते है | इस बात की जानकारी हम आपको दे रहे है |

प्रोस्टेट ग्रन्थि के बढ़ने के लक्षण :-

मूत्र करने में कठनाई महसूस करना |
पेशाब की धार चालू होने में देरी लगना |
रात के समय उठ – उठकर पेशाब के लिए जाना |
थोड़ी – थोड़ी मात्रा में पेशाब का आना
मूत्राशय का पूरी तरह से खाली ना होना | इस रोग में मूत्राशय में थोड़ी सा मूत्र शेष रह जाता है | इस इक्कठे हुए मूत्र में रोगाणु जन्म लेने लगते है | इसके कारण किडनी खराब होने लगती है |
पेशाब करने के बाद पेशाब की बुँदे टपकती रहती है | इसके आलावा आप अपने मूत्र पर काबू भी नही पा सकता है |
इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को हमेशा यह लगता है कि उसे पेशाब आया है | लेकिन बाथरूम जाने के बाद पेशाब रुक रुककर आता है |
पेशाब में जलन होती है |
संभोग करते समय बहुत दर्द होता है और वीर्य भी निकलता रहता है |
प्रोस्टेट ग्रन्थि के बढ़ने से अंडकोष में दर्द भी होता है |
इस रोग को ठीक करने के लिए आज के समय में भी कोई औषधी नही बनी है | इस रोग का कोई भी सफल इलाज नही है | इस रोग से पीड़ित रोगी को ओपरेशन करने की सलाह दी जाती है | इस बीमारी से छुटकारा पाने के लिए ओपरेशन में बहुत पैसे खर्च करने पड़ते है | लेकिन फिर भी यह रोग दोबारा हो सकता है |मैं अपने दीर्घ चिकित्सा अनुभव के आधार पर कुछ बहुत ही असरदार आयुर्वेदिक घरेलू उपचार यहा लिख देता हूँ |इन उपायों के चलते आप आपरेशन की त्रासदी से बच जाएँगे|
   *एक दिन में कम से कम 3 से 4 लीटर पानी पीना चाहिए | परन्तु शाम के समय अपनी जरूरत के अनुसार ही पानी पीयें | ऐसा करने से रात के समय पेशाब करने के लिए बार – बार नही उठना पड़ेगा |
*अलसी के बीजों को अच्छी तरह से पीसकर उसका पावडर बना लें | इस पावडर को रोजाना 15 ग्राम की मात्रा में पानी एक साथ घोलकर पीने से इस रोग को लाभ मिलता है | यह एक असरदार उपाय है |
*कद्दू में जिंक की मात्रा अधिक होता है | कडू के बीजों को तवे पर अच्छी तरह से सेंक लें | भुने हुए बीजों को पीसकर उसका पावडर बना लें | इस पावडर की 15 से 20 ग्राम की मात्रा को रोजाना पानी के साथ खाएं | इस उपचार को करने से रोगी का मूत्र खुलकर आने लगता है |
*जिस भोजन में वसा की मात्रा अधिक हो या जो भोजन चर्बी को बढ़ाने वाला हो उस भोजन से परहेज करें | विशेष तौर पर मांस का सेवन बंद कर दें |
*कैफीन युक्त चीजों का उपयोग ना करें | चाय और कॉफ़ी में अधिक कैफीन होता है | जो प्रोस्टेट ग्रन्थि की तकलीफ को और भी बढ़ा देता है | केफीन का प्रयोग करने से मूत्राशय की ग्रीवा कठोर हो जाती है | जो इस रोग के लिए हानिकारक होता है |
*जो व्यक्ति इस रोग से पीड़ित है उसे अपना चेक अप करवाते रहना चाहिए | ताकि यह रोग आगे और ना बढ़ सके |
*इस रोग में रोगी को सोयाबीन का सेवन करना चाहिए | क्योंकि सोयाबीन में कुछ ऐसे तत्व होते है जो हमारे शरीर में टेस्टोंस्टोरन के लेवल को कम करता है | इसलिए हमे रोजाना लगभग 35 से 40 ग्राम सोयाबीन के बीजों को गलाकर खाना चाहिए | यह एक बहुत ही अच्छा उपाय है |
*रोगी को विटामिन सी का अधिक प्रयोग करना चाहिए | इसका सेवन करने से खून संचार की नलियाँ स्वस्थ रहती है और अच्छी तरह से कार्य करती है | इसलिए रोगी को प्रतिदिन विटामिन सी की एक गोली का सेवन करना चाहिए |
*जो लोग इस रोग से पीड़ित है , उन्हें रोजाना दो टमाटर का सेवन करना चाहिए | यदि रोजाना नही खा सकते तो हफ्ते में कम से कम 3 से 4 बार अवश्य खाएं | इस उपाय को करने से प्रोस्टेट ग्रन्थि में होने वाला कैंसर नही होता है | टमाटर में लायकोपिन नामक तत्त्व होता है जो कैंसर की रोकथाम करने के लिए बहुत ही आवश्यक होता है |
*जो लोग इस रोग से पीड़ित है उन्हें नियमित समय के अन्तराल पर सेक्स करना  उचित है|इससे प्रोस्टेट ग्रंथि ठीक रहती है | रोगी व्यक्ति हो या स्वस्थ व्यक्ति दोनों को ही ना तो सेक्स अधिक करना चाहिए और ना ही कम करना चाहिए | महीने में कम से कम 4 से 6 बार सेक्स करे | इससे दोनों का स्वास्थ्य ठीक रहता है |
विशिष्ट परामर्श-

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने मे हर्बल औषधि सर्वाधिक कारगर साबित हुई हैं| यहाँ तक कि लंबे समय से केथेटर नली लगी हुई मरीज को भी केथेटर मुक्त होकर स्वाभाविक तौर पर खुलकर पेशाब आने लगता है| प्रोस्टेट ग्रंथि के अन्य विकारों (मूत्र    जलन , बूंद बूंद पेशाब टपकना, रात को बार -बार  पेशाब आना,पेशाब दो फाड़)  मे रामबाण औषधि है|  प्रोस्टेट केंसर की नोबत  नहीं आती| आपरेशन  से बचाने वाली औषधि हेतु वैध्य श्री दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क कर सकते हैं|









10.9.17

स्तनों को सुंदर सूडोल बनाने के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपाय // Home remedies for beautiful chest





   सुडौल व उन्नत वक्ष आपके सौन्दर्य में चार-चाँद लगा सकते है. इस बात में कोई दोराय नहीं है की सुन्दर एवम् सुडौल वक्ष प्रक्रति की देन है परन्तु फिर भी उनकी उचित देखभाल से इन्हें सुडौल व गठित बनाया जा सकता है. इससे आपके व्यक्तित्व में भी निखार आ जाता है. अधिकतर महिलाये अपने छोटे ब्रैस्ट को विकसित करना चाहती है उनके लिए दिए गये घरेलु नुस्खे काफी कारगर सिद्ध होंगे. अविकसित वक्ष न तो स्त्री को ही पसंद होते है न ही उनके पुरुष साथी को.
*कुछ स्त्रियां अपने घर में बिल्कुल मेहनत का काम नहीं करती इस वजह से उनकी छाती के क्षेत्र में ब्लड का सरकुलेशन सही तरीके से नहीं हो पाता और उनके वक्षों का साइज़ छोटा रह जाता .हैं छोटे स्तनों को सुडौल व आकर्षक बनाने के लिए अगर हो सके तो आप किचन में मसाला पीसने या चटनी पीसने के लिए मिक्सर का प्रयोग ना करते हुए सिल-बट्टे का प्रयोग करें स्तनों को बढ़ाने के लिए यह एक प्रकार की बहुत ही अच्छी एक्सरसाइज है.


ज्यादा पसीना होता है तो  करें ये उपचार 

*स्तनों को उचित आकार देने के लिए अपने दोनों हाथों पर को दीवार पर रखे और इस तरह जोर लगाएं जैसे आप दीवार को धक्का दे रहे हों. और ध्यान रखें कि आप की कोहनी दीवार में धक्का या जोर लगते समय बिल्कुल सीधी होना चाहिए. और आप इस तरह से लगभग रोजाना 5 मिनट की एक्सरसाइज कर लिया करें ऐसा करने से आपको एक महीने में ही फर्क दिखने लगेगा.
*वक्षों का आकार सही न रहने के पीछे अनेक कारण हो सकते है. किसी लम्बी बीमारी से ग्रसित होने के कारण भी वक्ष बेडौल हो सकते है, इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान तथा प्रसव के बाद भी स्तनों का बेडौल हो जाना एक आम बात है. ऐसी अवस्था में स्त्रियों के लिए उचित मात्रा में पौष्टिक व संतुलित आहार लेना अति आवश्यक हो जाता है. उनके भोजन में प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, विटामिन्स, मिनरल्स तथा लौह तत्व भरपूर मात्रा में होने चाहिए. इसके साथ साथ ऐसी स्त्रियों को अपने स्तनों पर जैतुन का लगाकर मालिश करनी चाहिये. ऐसा करने से स्तनों में कसाव आ जाता है. मालिश करने की दिशा निचे से उपर की ओर होने चाहिए.
*मालिश करने के बाद ठन्डे व ताज़े पानी से नहाना उचित रहेगा. ऐसा करने से न केवल वक्ष विकसित व सुडौल होने लगेंगे इसके अलावा आपके रक्त संचार की गति में भी तीव्रता आयगी.
वक्ष सौन्दर्य के लिए कुछ सरल उपाय व व्यायाम:-
* सबसे पहले घुटनों के बल बैठ जाए और दोनों हाथों को सामने लाकर हथेलियों को आपस में मिलाकर पुरे बल से आपस में दबाएँ जिससे स्तनों की मांसपेशियों में खिंचाव होगा. फिर इसके बाद धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए अपनी हथेलियों को ढीला कर दें. इस प्रक्रिया को नियमित रूप से १० से १५ बार करे. ( वक्षों को नहीं दबाना ह२. इसके अलावा दोनों हाथों को सामने की ओर फैलाते हुए हथेलियों को दिवार से सटाकर पांच मिनट तक दीवारे पर दबाव डालें. ऐसा करने से वक्ष की मांसपेशियों में खिचांव होगा, जिससे वक्ष पुष्ट हो जायंगे.
*घुटनों के बल चौपाया बन जाए, फिर दोनों कोहनियों को थोडा-सा मोड़ते हुए शारीर के उपरी भाग को निचे की ओर झुकाएं.

माईग्रेन(आधाशीशी) रोग का सरल उपचार

अपने शरीर का पूरा भार निचे की ओर डाले. तथा पुनः प्रथम अवस्था में आ जाए. इस व्यायाम को ६ से ८ बार दोहराएँ.
* आप व्यायाम के अलावा एक नुस्खे को अपनाकर भी ढीले पड़े स्तनों में कसावट लाई जा सकती है. इसके लिए अनार के छिलकों को छाया में सुखा लें. फिर इन सूखे हुए छिलको का महीन (बारीक़) चूर्ण बना लें, अब इस चूर्ण को नीम के तेल में मिलाकर कुछ देर के लिए पका लें. फिर इसे कुछ देर ठंडा होने के लिए छोड़ दें, ठंडा हो जाने के बाद दिन में एक बार इस लेप को वक्षों पर लगायें और तकरीबन एक से दो घंटा लगे रहने के बाद इस लेप को सादे पानी से साफ़ कर लें. इसके नियमित उपयोग से कुछ दी दिनों में आपको लाभ अवश्य दिखने लगेगा.
*जो स्त्रियाँ बच्चों को स्तनपान कराती है उन स्त्रियों को अपने वक्षों को देख-रेख की ओर और अधिक ध्यान देने की आवश्कता होती है. क्युकि बच्चों को स्तनपान कराने से स्तनों में ढीलापन आ जाता है. इसके अलावा उनके लिए कुछ बातों की और ध्यान देना भी जरूरी होता है. उन्हें कभी भी बच्चों को लेटकर स्तनपान नहीं कराना चाहिए, हमेशा बैठकर ही बच्चों को दूध पिलाना चाहिए. साथ ही इस बात का भी विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए कि स्तनपान करने के लिए दोनों स्तनों का बारी-बारी से उपयोग करना चाहिए. ऐसा न करने से वक्षों के आकार में भिन्नता आ जाती है. जिससे आपके सम्पूर्ण सौन्दर्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.
*स्तनों का आकार बढ़ाने के लिए तिल भी एक बहुत अच्छा विकल्प है अपने ब्रेस्ट को सही साइज देने के लिए आप तिल को थोड़ी मात्रा में रोज खाएं और यदि संभव हो तो इसके तेल से अपने स्तनों पर रोज़ाना मालिश करें. एस करने से भी बहुत जल्दी फायदा होता है. तिल में कैल्शियम प्रोटीन और फास्फोरस प्रचुर मात्रा में पाया जाता है और यह आपके वक्ष का आकार बढ़ाने में मदद करता है.

चक्कर आना के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार 

*अगर आप शारीरिक रूप से भी कमजोर हैं तो आप ऐसा खाना खाएं जिसमें शक्कर की मात्रा ज्यादा हो और यह आपके शरीर को भी सुडौल बनाएगी और आपके स्तनों को भी.
*वॉशिंग मशीन की जगह कपड़े अपने हाथों से रगड़ रगड़ कर धोने से से भी आपके चेस्ट की एक्सरसाइज होती है और फल स्वरुप आपके ब्रेस्ट का साइज सही हो जाता है.
*आप अपने घर में सफाई के लिए जो झाड़ू लगाती हैं उसमें भी आपके ब्रेस्ट की एक्सरसाइज होती है. अगर आप अपने घर में झाड़ू नहीं लगातीं तो आज ही खुद अपने घर की झाड़ू देना शुरू कर दें इससे आपकी एक्सरसाइज भी हो जाएगी और आपके ब्रेस्ट के लिए भी ये फायदेमंद साबित होगा.
*अपने ब्रेस्ट को सही आकार देने के लिए आप स्वास्थ्यवर्धक वसा का अच्छे से सेवन करें, ऐसा करने से आपके स्तनों का आकार बढ़ने की संभावना बन जाती है स्वास्थ्यवर्धक वसा जैसे कि अंडे, पनीर, बटर, नाशपाती, घी इस तरह की चीजें जिन में वसा की मात्रा अधिक होती है और यह आपके स्तनों तक सीधा पहुंचता है और उनका आकार प्राकृतिक रूप से सही होना शुरू कर देता है.
स्तनों का आकार बढ़ाने में प्याज का प्रयोग
स्तनों का आकार बढ़ाने में प्याज का प्रयोग आप घरेलू नुस्खे के तौर पर कर सकती हैं प्याज के रस में थोड़ी हल्दी और शहद मिला लें और रात को सोते समय अपने दोनों स्तनों पर उसको मॉल लें, और अगली सुबह उठकर इन्हे ठंडे पानी से धो लें इसके प्रयोग से आपके ढीले लटके हुए स्तन एकदम टाइट हो जाते हैं और अगर आपके स्तनों का आकार सामान्य से छोटा है तो यह उन को सुडौल बनाने में बड़ा करने में आपके लिए काफी लाभकारी साबित हो सकता है. वक्षों को कैसे बढ़ाएं यह प्रयोग थोड़ा मुश्किल इसीलिए हो सकता है क्योंकि रात में आपको प्याज के रस की गंध का सामना करना पड़ता है.
*अगर आपका वजन ज्यादा नहीं है तो आप रोजाना बिना नागा किए नियमित रूप से दो केले खा लिया करें आपके स्तनों का आकार आकर्षक बनाने के लिए केले से सस्ता और आसान उपाय कोई दूसरा नहीं है. इसमें वसा की मात्रा बहुत अधिक होती है और यह आपके स्तनों को बढ़ाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है और अगर आप दुबली-पतली हैं तो यह आपके शरीर को भी सुडौल बनाने में मदद करता है|





आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचा


2.9.17

मैग्नीशियम के स्वास्थ्य लाभ और उपचार



मैग्नीशियम क्या है-

मैग्नीशियम आपके शरीर को सुचारू रूप से चलाने के लिए जरूरी होता हैं। शरीर की मजबूती और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए इसकी बहुत ही जरूरत होती है। यदि शरीर में मैग्नीशियम की कमी हो तो बॉडी में थकान महसूस होने लगती है तथा जोड़ों में दर्द और त्वचा संबंधित समस्या का सामना करना पड़ता है। तो आइए जानते हैं कि शरीर में मैग्नीशियम को कैसे बढ़ाया जाए।
पूरे शरीर का आधे से अधिक मैग्नीशियम हमारी हड्डियों में पाया जाता है जबकि बाकी शरीर में हाने वाली अन्‍य जैविक क्रियाओं में सहयोग करता है। आमतौर पर एक स्वस्थ खुराक में मैग्‍नीशियम की पर्याप्त मात्रा होनी अनिवार्य है। मैग्‍नीशियम की अधिकता से डायरिया और कमी से न्यूरोमस्कुलर की समस्या हो सकती है। यह हरी सब्जियों में के साथ सूखे मेवे में पाया जाता है। इस लेख में जानिए मैग्‍नीशियम के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ के बारे में। मैग्नीशियम एक प्रकार का रासायनिक तत्व है जो शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है। यह कैल्शियम और बेरियम की तरह एक क्षारीय तत्व है। मैग्‍नीशियम आदमी के शरीर में पाए जाने वाले पांच प्रमुख तत्वों में से एक है।

हाथ पैर और शरीर का कांपना कारण और उपचार

हाइपरटेंशन मे लाभ -
मैग्‍नीशियम रक्‍तचाप को विनियमित करने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है, यह हाइपरटेंशन से बचाव करता है। इसलिए रक्‍तचाप को सुचारु करने के लिए ताजे फल और हरी सब्जियों का सेवन कीजिए।
आस्टियोपोरोसिस से बचाव-
यदि हड्डियों में मैग्‍नीशियम की कमी हो गई तो इसके कारण हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस की संभावना भी बढ़ जाती है। पूरे शरीर का आधे से अधिक मैग्नीशियम हमारी हड्डियों में पाया जाता है। कई शोधों में भी यह बात सामने आयी है कि मैग्‍नीशियम हड्डियों की बीमारी खासकर आस्टियोपोरोसिस से बचाता है।
दिल के लिए उपयोगी -
मैग्‍नीशियम दिल के लिए बहुत फायदेमंद है। कोरोनरी हार्ट डिजीज से बचाव के लिए मैग्‍नीशियम का सेवन कीजिए। यदि शरीर में मैग्‍नीशियम की कमी हो जाये तो दिल के दौरे का खतरा अधिक होता है। इसलिए दिल को मजबूत बनाने के लिए मैग्‍नीशियम का सेवन भरपूर मात्रा में कीजिए।
याददाश्‍त करे तेज-
खाने में यदि मैग्‍नीशियम की पर्याप्‍त मात्रा है तो इससे याददाश्‍त मजबूत होती है। विज्ञान पत्रिका न्यूरॉन में छपे एक शोध के अनुसार, याददाश्त को बढ़ाने के लिए मैग्नीशियम की मात्रा बढ़ाना कारगर उपाय हो सकता है। मैग्नीशियम मस्तिष्क सहित शरीर के अनेक ऊतकों के सही ढंग से काम करने के लिए अनिवार्य है। इसलिए याददाश्‍त की क्षमता को बढ़ाने के लिए मैग्‍नीशियम का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

छोटे वक्ष को उन्नत और सूडोल बनाएँ

मधुमेह से बचाव-
एक शोध में यह बात सामने आयी है कि यदि शरीर में मैग्‍नीशियम की कमी हो जाये तो इसके कारण टाइप-2 डायबिटीज होने की संभावना अधिक होती है। इसलिए यदि मधुमेह जैसी खतरनाक बीमारी से बचना है तो मैग्‍नीशियमयुक्‍त आहार का सेवन अवश्‍य कीजिए।
मैग्नीशियम के स्रोत
खजूर-
खजूर पौष्टिक होने के साथ-साथ बहुत ही स्वादिष्ट होते हैं। सर्दियों का मेवा कहे जाने वाला खजूर न केवल स्वास्थ्य को दुरुस्त करता है बल्कि कई रोगों को भी भगाता है। जिनके शरीर में मैग्नीशियम की कमी है उन्हें खजूर का सेवन करना चाहिए। 100 ग्राम खजूर में लगभग 43 मिलीग्राम मैग्नीाशियम पाया जाता है। खजूर एक ऐसा फल जो मधुर, शीतल, पौष्टिक और तुरंत शक्ति देने वाला आहार है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस आदि प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
 केला-
केले के सेवन से घटती पोटेशियम की मात्रा संतुलित होने लगती है। इससे शरीर में पानी का स्तर भी नियमित होता है। केले के सेवन के फलस्वरूप मानसिक तनाव से राहत और शरीर को मजबूती मिलती है। यही नहीं, केले में पोटेशियम के अलावा मैग्नीशियम भी पाया जाता है। यदि आप एक केले का सेवन करते हैं तो उसमें 30 से 32 मिलीग्राम मैग्नीशियम पाया जाता है जो शरीर के लिए काफी लाभदायक माना जाता है। इससे शरीर की धमनियों में खून पतला रहने के कारण खून का बहाव सही रहता है।
बादाम-
आपको बता दें कि एक बार बादाम खाने से शरीर को लगभग 75 मिलीग्राम मैग्नीतशियम मिलता है। मैग्नीशियम के अलावा बादाम में विटामिन और मिनरल्स जैसे जिंक, कैल्शियम, विटामिन ई और ओमेगा- 3 फैटी एसिड से भरपूर मात्रा में पाया जाता है। आप रात को बादाम को भिगोकर प्रतिदिन 5 खा सकते हैं।
सोयाबीन-
सोयाबीन का नियमित रूप से सेवन करने न केवल शारीरिक वृद्धि होती है बल्कि कब्ज दूर होता है और दूसरी बीमारियां दूर भागती हैं। इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन, मिनरल और एमिनो एसिड उच्च मात्रा में पाया जाता है। सोयाबीन मैग्नीशियम की कमी को पूरा करता है। इसे भिगोकर अंकुरित करके खाने से भी काफी लाभ होता है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली को बनाए स्वेस्थ बनाये रखने, दिल की धड़कन को सामानय बनाये रखने, हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाये रखने में मदद करता है।
पालक-
पालक डायबटीज और कैंसर के रोगियों के लिए बहुत गुणकारी सब्जी है। यदि आप नियमित रूप से पालक का सेवन करते हैं तो इससे न केवल आपकी आयरन की कमी पूरी होगी बल्कि शरीर को मैग्नीशियम भी प्राप्त होगा।
अलसी-
वजन कम करने में, बालों और त्वचा के लिए, सर्दी, फ्लू, पाचन तंत्र, उच्च रक्तचाप आदि के उपचार में अलसी बहुत ही काम आता है। इसलिए इसे बहुमुखी सुपर आहार का नाम दिया जाता है। इसके अलावा आप एक चम्म च अलसी से दैनिक जरूरत के अनुसार 39 मिलीग्राम मैग्नीमशियम की पूर्ति कर सकते हैं। मैग्नीशियम के अलावा इसमें विटामिन बी, ओमेगा-3 फैटी एसिड एवं कैल्शियम, कॉपर, आयरन, जिंक, पोटेशियम आदि पाये जाते हैं।
मछली-
शरीर में मैग्नीशियम की कमी को पूरा करने के लिए सप्ताह में कम से कम एक मछली का सेवन करना चाहिए। विटामिन डी, विटामिन बी -12, ओमेगा-3 फैटी एसिड और मैग्नीाशियम से भरपूर मछली में दैनिक आहार के लिए मैग्नीसशिम की लगभग 53 मिलीग्राम और 367 कैलोरी होती है।
दही-
अगर कोई हड्डियों और ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या से ग्रसित है उसे रोजाना दही का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा दही के सेवन से कैल्शियम और मैग्नी शियम दोनों पर्याप्तस मात्रा में शरीर में पहुंच जाते हैं। इसलिए इसका सेवन करना चाहिए।





आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचा




1.9.17

नीचे के बाल हटाने के उपाय //How to Clean the hair of private parts



          सामान्यतः महिलायों का यें मानना होता है कि गुप्तांगों या बगलों या फिर पुरे शरीर के बाल बेकार अर्थात् अवांछित होते है, विशेषकर जब बात फैशन की हो, परन्तु वास्तविकता कुछ और है, वास्तव में यें बाल हमारे कोमल अंगों की सुरक्षा का काम करते है. बगलों के बाल सर्दियों में उसके आस-पास की त्वचा को गर्मी प्रदान करते है. गर्मियों में बगल में पसीना अपेक्षाकृत ज्यादा आता है क्यूंकि पुरे दिन में हमारे द्वारा हाथ या बांह का प्रयोग/संचालन ज्यादा होता है. यें बाल पसीना सोखने का भी काम करते है. अत: ऐसा मानना गलत होगा कि हमारे शरीर पर इनका कोई उपयोग या काम नहीं है. पसीने के कारण हाथों के आस-पास की त्वचा में दुर्गन्ध रम जाती है, जिससे ना केवल हमे बल्कि हमारे साथ रहने वालों को भी परेशानी होती है और सामने वाले पर हमारा अच्छा प्रभाव नहीं पड़ता. इसीलिए आवश्यक है कि रोजाना नहाते समय बगल को भी साबुन लगाकर अच्छे से साफ़ करें ताकि बगल में मैल व दुर्गन्ध बसी न रहे.


किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि 

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार