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7.3.17

अफीम के गुण ,फायदे//Opium use,benefits

   

  अफीम च्यवन ऋषि के समय से ही औषधीय उपयोग में आती रही है। यह आयुर्वेदिक व यूनानी दोनो चिकित्सा पद्धतियों में वात रोगों, अतिसार, अनिद्रा व वाजीकरण चिकित्सा में आशुफलदायी रुप में प्रयोग होती रही है और तो और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ऐलौपेथ ने भी इस औषधि के गुणों का प्रभाव अंगीकार करते हुये इसके मार्फीन,कोडीन,थांबेन, नार्कोटीन,पापावटीन तथा एल्कोलाइड्स को अपने फार्मोकोपिया में शामिल किया है।

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

   इसे आफूक, अहिफेन (संस्कृत), अफीम (हिन्दी), आफिम (बंगला), अफू (मराठी), अफीण (गुजराती), अफमून (अरबी) तथा पेपेवर सोम्नीफेरम (लैटिन) कहते हैं।
इसका पौधा 3-4 फुट ऊँचा, हरे रेशों से युक्त और चिकने काण्डवाला होता है। इसके पत्ते लम्बे, डंठलरहित, गुड़हल के पत्तों से कुछ मिलते-जुलते, आगे के हिस्से में कटे होते हैं। फूल सफेद रंग के और कटोरीनुमा बड़े सुहावने होते हैं। इसके फल छोटे और अनार की आकृति के होते हैं। जड़ साधारणतया छोटी होती है|
सायंकाल इस पौधे (खसखस) के कच्चे फलों के चारों ओर चीरा लगा देने पर दूसरे दिन प्रात: वहाँ दूध के समान निर्यास पाया जाता है। उसे खुरचकर सुखा लेने पर अफीम बन जाती है। सूखे फल को ‘डोडा’ (पोश्त) कहा जाता है। इसके बीज राई की तरह काले या सफेद रंग के होते हैं, जिन्हें ‘पोस्तादाना’ (खसखस) कहते हैं। पोश्ता लगभग 14 प्रकार का होता है।इसमें मार्फिन, नर्कोटीन, कोडीन, एपोमॉर्फीन, आपिओनियन, पापावरीन आदि क्षारतत्त्व (एल्केलाइड) तथा लेक्टिक एसिड, राल, ग्लूकोज, चर्बी व हल्के पीले रंग का निर्गन्ध तेल होता है
अफीम के गुण : यह स्वाद में कड़वी, कसैली, पचने पर कटु तथा गुण में रूखी होती है। इसका मुख्य प्रभाव नाड़ी-संस्थान पर मदकारी (नशा लानेवाला) होता है। यह नींद लानेवाली, वेदना-रोधक, श्वास-केन्द्र की अवसादक, शुक्रस्तम्भक और धातुओं को सुखानेवाली है।


पेट मे गेस के अनुपम नुस्खे 


प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में अफीम से बनने वाले अनेकों योगों का वर्णन है
1.कामिनी विद्रावण रस( भैषज्य रत्नावली) 
, 2- ग्रहणी कपाट रस(रसयोग सागर),
3- वेदनान्तक रस (रस तरंगिणी)---
रस तरंगिणी शुद्ध अफ़ीम3 ग्राम, कपूर तीन ग्राम, खुरासानी यवानी 6 ग्राम, रस सिन्दूर 6 ग्राम, लेकर सबको खरल में डालकर भाँग की पत्तियों के स्वरस में खरल कर दें ।जब गोली बनाने योग्य हो जाऐं तो 250 मिलीग्राम की गोलियाँ बना लें इसमें से 2 गोली को गर्म पानी या दूध से देने पर अनेकों प्रकार के दर्दों में राहत मिल जाती है।
4- निद्रोदय रस (योग रत्नाकर)-
शुद्ध अफीम6 ग्राम,वंशलोचन 6 ग्राम, रस सिन्दूर 6 ग्राम व आमलकी चूर्ण- 12 ग्राम लेकर सबको लेकर भाँग की पत्तियों के स्वरस में 3 बार भावनाऐं देते हुय खरल करे और जब गोलियां बनाने योग्य हो जाऐ तब 250 मिली ग्राम की गोलियाँ बनाकर सुखा लें। एक गोली दूध से लेने पर ही नींद आ जाती है।

*प्रोस्टेट बढ़ने से मूत्र रुकावट की अचूक  औषधि*

5- शंखोदर रस (योग रत्नाकर)-
शंख भस्म 40 ग्राम, शुद्ध अफीम- 10 ग्राम, जायफल व सुहागे का फूला 10 -10 ग्राम लेकर सबको मिला लें और जल के साथ मर्दन करके 125 मिली ग्राम की गोलियाँ बना कर रख लें इसमें से 1-1 गोली मख्खन व गर्म जल के साथ लेने से अतिसार, संग्रहणी, पेट दर्द, आदि में पूर्ण लाभ होता है।
6- समीर गज केशरी रस(रसराज सुन्दर)-
शुद्ध अफीम , शुद्ध कुचला, काली मिर्च चूर्ण, सभी 50-50 ग्राम लेकर सबको खरल करके 125 -125 मिली ग्राम की गोलियाँ बना कर रख लें इसमें से 1 गोली खाकर ऊपर से पान खाना चाहिये यह बात व्याधि नाशक, विसूचिका , अरूचि, अपस्मार, आदि पाचन तंत्र की व्याधियों को हर लेने वाली महौषधि है।
7- महावातराज रस(सिद्ध भैषज्य संग्रह-
इस महौषधि को निर्मित करने के लिए धतूरे के बीज, शुद्ध पारा, शुद्ध गंधक, लौह भस्म, सभी 20- 20 ग्राम लेकर ,अभ्रक भस्म,लौंग, जावित्री,जायफल,इलायची बीज,भीमसेनी कपूर, काली मिर्च, चन्द्रोदय या रस सिन्दूर प्रत्येक 10 -10 ग्राम लेकर अफीम 120 ग्राम लें।पहले पारे व गंधक की कज्जली बना कर लौह भस्म, अभ्रक भस्म, और चन्द्रोदय मिला कर खूब मर्दन करें फिर शेष औषधियों का चूर्ण मिलाक र बाद में अफीम मिलाऐं इसे धतूरे के रस में एक दिन खरल कर 125 मिली ग्राम की गोलियाँ बना ले।आधे से एक गोली जल अथवा रोग के अनुसार अनुपान से दिन में दो बार देनी चाहियें ।न्यूमोनिया, श्वांस, अतिसार , खाँसी, मधुमेह व गृधशी या सायटिका में इस औषधि के परिणाम आशुफलप्रद हैं।

*किडनी में क्रिएटिनिन और यूरिया की समस्या के घरेलू उपचार*

विभिन्न शूल : 

अफीम को तेल या घी में मिलाकर वेदना-स्थानों पर (बवासीर के मस्से, नेत्र, पसली के दर्द) तथा शिर:शूल में भी सिर पर लेप करें। लेकिन कान के दर्द में तेल ही डालें, घृत नहीं।

नजला : 

एक तोला खसखस घी के साथ कड़ाही में भूनें। फिर चीनी मिला हलुआ बनाकर लें। प्रात:काल इसके सेवन से पुराना सिरदर्द और प्रतिश्याय (नजला) दूर हो जाते हैं।

दस्त : 

चार रत्ती अफीम एक छुहारे के अन्दर रख उसे आग में भुने। फिर उसे पीसकर, मूँग के बराबर 1-1 रत्ती की गोली बना लें। इसके सेवन से मरोड़ देकर आँवसहित होनेवाले दस्तों में लाभ होता है। बच्चों को आधी मात्रा देनी चाहिए। पोस्त (फल के छिलके या ‘पोस्त-डोंडा’) उबालकर पीने से अतिसार और पतले दस्त रुक जाते हैं। अधिक मात्रा में यह मादक हो जाता है।

मोतियाबिन्द : 


चौथाई रत्ती अफीम और 3 रत्ती केसर की गोली बनाकर बादाम के हलुए के साथ खाने से पुराना सिरदर्द, बार-बार होनेवाला नजला और जुकाम रुक जाता है। आँखों में मोतियाबिन्द उतर रहा हो, तो वह भी इससे रुक जाता है। दो सप्ताह इसके सेवन के बाद केवल बादाम और केसर का सेवन करें, अफीम निकाल दें। आवश्यकता होने पर पुन: इसे लें। यह अनुभूत प्रयोग है।

चोट, मोच या सूजन -

अफीम 2 रत्ती और एलुआ 1 तोला अदरख के रस में पीसकर धीमी अग्नि पर पका लेप बना लें। कपड़े पर रखकर किसी प्रकार की चोट, मोच या सूजन पर लगा दें तो निश्चित आराम होगा।

सिर दर्द :

 आधा ग्राम अफीम और 1 ग्राम जायफल को दूध में मलकर, इस तैयार लेप को मस्तक पर लगाएं या फिर आधा ग्राम अफीम को 2 लौंग के चूर्ण के साथ हल्का गर्म करके खोपड़ी (सिर) पर लेप लगाने से सर्दी और बादी से उत्पन्न सिर दर्द दूर होगा।

गर्भस्राव (गर्भ से रक्त के बहने पर) :

40 मिलीग्राम अफीम पिण्ड को खजूर के साथ मिलाकर दिन में गर्भस्राव से पीड़ित स्त्री को 3 बार खिलाएं। इससे गर्भस्राव शीघ्र रुकेगा।

स्वरदोष (गला खराब होने पर) : 

अजवायन और अफीम के डोडे समान मात्रा में पानी में उबाकर छान लें और फिर छाने हुए पानी से गरारे करने से स्वरदोष में आराम होगा।

कमर का दर्दं : 

एक चम्मच पोस्त के दानों को समान मात्रा में मिश्री के साथ पीसकर एक कप दूध में मिलाकर दिन में 3 बार सेवन करने से लाभ होगा।

अतिसार (दस्त) में :


आम की गिरी का चूर्ण 2 चम्मच, अफीम लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग मिलाकर एक चौथाई चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार सेवन कराएं।
अफीम और केसर को समान मात्रा में लेकर पीस लें तथा लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग की गोलियां बना लें। इसे शहद के साथ देने से अतिसार में लाभ होता है।
अफीम को सेंककर खिलाने से दस्त में आराम मिलता है।
लगभग 4 से 9 ग्राम तक पोस्त के डोडे पीसकर पिलाने से दस्त मिटता है।

आमातिसार (आंवयुक्त पेचिश) :

भुनी हुई लहसुन की कली में लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग अफीम मिलाकर खाने से इस रोग में राहत में मिलती है।
5 ग्राम अफीम, मोचरस, बेलगिरी, इन्द्रजौ, गुलधावा, आम की गुठली की गिरी को 10-10 ग्राम लें। प्रत्येक औषधि को अलग-अलग पीसकर चूर्ण बना लें। फिर सबको एकत्रकर उसमें अफीम मिला लें। लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग चूर्ण को लस्सी के साथ सेवन करने से पेचिश के रोगी का रोग ठीक हो जाता है।

उल्टी :

कपूर, नौसादर और अफीम बराबर मात्रा में मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां शहद के साथ बना लें। दिन में 3 बार 1-1 गोली पानी के साथ लें।
अफीम, नौसादर और कपूर को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर रख लें। फिर इसके अंदर पानी डालकर मूंग के बराबर की छोटी-छोटी गोलियां बना लें। इस 1-1 गोली को ठंडे पानी के साथ खाने से उल्टी और उबकाई आना बंद हो जाती है।

अनिद्रा (नींद का कम आना) :

 गुड़ और पीपलामूल का चूर्ण बराबर की मात्रा में मिला लें। इसकी 1 चम्मच की मात्रा में अफीम की लगभग 1 ग्राम का चौथाई भाग मात्रा मिलाकर रात्रि में भोजन के बाद सेवन करने से लाभ होता है।

नपुंसकता लाने वाला : 

कुछ लोग भ्रमवश अफीम का प्रयोग संभोग व सेक्स की ताकत बढ़ाने के लिए करते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि अफीम खाने से कुछ दिन व्यक्ति नामर्द हो जाता है और उसकी संभोग (सेक्स) शक्ति क्षीण हो जाती है।

मस्तक पीड़ा : 

1 ग्राम अफीम और 2 लौंग को पीसकर लेप करने से बादी और सर्दी के कारण उत्पन्न मस्तक पीड़ा मिटती है।

आंखों के रोग -

आंख के दर्द और आंख के दूसरे रोगों में इसका लेप बहुत लाभकारी है।
नकसीर (नाक से खून आने पर) : अफीम और कुंदरू गोंद दोनों बराबर मात्रा में पानी के साथ पीसकर सूंघने से नकसीर बंद होती है।

केश (बाल) -

 अफीम के बीजों को दूध में पीसकर सिर पर लगाने से इसमें होने वाली फोड़े फुन्सियां एवं रूसी साफ हो जाती है।

दंतशूल (दांत का दर्द) -

लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग अफीम और लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग नौसादर, दोनों को दांतों में रखने से दाड़ की पीड़ा मिटती है और दांत के छेद में रखने से दांतों का दर्द मिटता है।
अफीम और नौसादर बराबर की मात्रा में मिलाकर कीड़ा लगे दांत के छेद में दबाकर रखने से दांत दर्द में राहत मिलती है।

प्रतिषेध : 

अफीम के अधिक प्रयोग से तन्द्रा, निद्रा, हृदय का अवसाद होने लगे तो तुरन्त राई-नमक मिलाकर दें तथा वमन करा दें। अरहर की कच्ची दाल पानी में पीसकर या हींग पानी में घोलकर पिला देने से भी तुरन्त आराम पहुँचता है।

सावधानी-

यह मादक द्रव्य है। अधिक प्रयोग से विषाक्त प्रभाव सम्भव है। अत: अत्यावश्यक होने पर ही इसका प्रयोग करें। फिर भी कभी अधिक मात्रा में नहीं। अतिआवश्यक होने पर ही बच्चों, वृद्धों तथा सुकुमार स्त्रियों को बड़ी सावधानी एवं कम मात्रा में ही इसे दिया जाय।

यूनानी मतानुसार : 

अफीम मस्तिष्क की शक्ति को उत्तेजित करती है, शरीर की शक्ति व गर्मी को बढ़ाने से आनन्द और संतोष की अनुभूति प्रदान करती है। आदत पड़ने पर निर्भरता बढ़ाना, शारीरिक अंगों की पीड़ा दूर करने की प्रकृति, कामोत्तेजक, स्तम्भन शक्ति बढ़ाने वाली, आधासीसी, कमर दर्द, जोड़ों के दर्द, बहुमूत्र, मधुमेह, श्वास के रोग, अतिसार तथा खूनी दस्त में गुणकारी है।

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4.6.16

अतिसार की चिकित्सा // Home treatment of diarrhea






असंतुलित और अनियमित खान-पान से,दूषित पानी उपयोग करने से,खाली पेट चाय पीने से, अधिक ठंडे पदार्थों के सेवन करने से,अखाद्य और विजातीय पदार्थ भक्छण करने से ,पाचन क्रिया ठीक न होने से,लिवर की प्रक्रिया में व्यवधान आने से प्राय: अतिसार रोग की उत्पत्ति होती है।इस रोग में रोगी को आम युक्त पानी जैसे पतले दस्त होने लगते हैं। बार-बार शोच के लिये जाना पडता है। रोग लम्बा चलने पर रोगी बहुत दुर्बल हो जाता है और ईलाज नहीं लेने पर रोगी की मृत्यु भी हो जाती है।




अतिसार रोग के लक्षण -

रोगी को बार-बार मल त्यागने जाना,नाभी के आस पास व पेटमें मरोड का दर्द होना,गुड गुडाहट की आवाज के साथ दस्त होना,दस्त में बिना पचा हुआ आहार पदार्थ निकलना,हवा के साथ वेग से दस्त बाहर निकलना,पसीना, बेहोश हो जाना, दस्तों में शरीर का जल निकल जाने से डिहाईड्रेशन की हालत पैदा हो जाना-ये अतिसार रोग के प्रमुख लक्षण हैं।

अब यहां अतिसार की सरल चिकित्सा लिख रहा हूं। अतिसार को तुरंत रोकने का प्रयास घातक भी हो सकता है। आहिस्ता-आहिस्ता अतिसार नियंत्रित करना उत्तम है।



1) अतिसार रोग दूर करने का एक साधारण उपाय है केला दही के साथ खाएं। इससे दस्त बहुत जल्दी नियंत्रण में आ जाते हैं।
२) एक नुस्खा बनाएं। आधा चम्मच निंबू का रस,आधा चम्मच अदरक का रस और चौथाई चम्मच काली मिर्च का पवडर मिश्रण करलें। यह नुस्खा दिन में दो बार लेना उचित है।



३) अदरक की चाय बनाकर पीने से अतिसार में लाभ होता है और पेट की ऐंठन दूर होती है।
४) भूरे चावल पोन घंटे पानी में उबालें।छानकर चावल और पकाये हुए चावल का पानी पीयें। दस्त रोकने का अच्छा उपाय है
५) आम की गुठली का पावडर पानी के साथ लेने से अतिसार ठीक होता है।



६) निंबू बीज सहित पीस लें और पेस्ट बनालें। एक चम्मच पेस्ट दिन में तीन बार लेने से अतिसार में फ़ायदा होता है।

भटकटैया (कंटकारी)के गुण,लाभ,उपचार


७) अदरक इस रोग की अच्छी दवा मानी गई है। करीब १०० मिलि गरम पानी में अदरक का रस एक चम्मच मिलाकर गरम-गरम पीयें। अतिसार में अच्छे परिणाम आते हैं
८) एक खास बात याद रखें कि अतिसार रोगी पर्याप्त मात्रा में शुद्ध जल पीता रहे। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होगी। विजातीय पदार्थ पेशाब के जरिये बाहर निकलते रहेंगे।




९) सौंफ़ और जीरा बराबर मात्रा में लेकर तवे पर स्रेक लें और पावडर बनालें। ५ ग्राम चूर्ण पानी के साथ हर तीन घंटे के फ़ासले से लेते रहें। बहुत गुणकारी उपाय है।



१०) जीरा तवे पर सेक लें। पाव भर खट्टी छाछ में २-३ ग्राम जीरा-पावडर डालकर और इसमे आधा ग्राम काला नमक मिलाकर दिन में तीन बार पीने से अतिसार का ईलाज होता है।
११) ५० ग्राम शहद पाव भर पानी में मिलाकर पीने से दस्त नियंत्रण में आ जाते हैं।
१२) आधा चम्मच मैथी के बीज,आधा चम्मच जीरा सिका हुआ और इसमें ५० ग्राम दही मिलाकर पीने से अतिसार रोग में बहुत लाभ होता
१३) अदरक का रस नाभि के आस -पास लगाने से अतिसार में लाभ होता है|


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१४) कच्चा पपीता उबालकर खाने से दस्त में आराम लग जाता है|
१५) मिश्री और अमरूद खाना हितकारी है|

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22.3.16

पुदीने के फायदे // Benefits of Mint









पुदीने में कई औषधीय गुण होते हैं। सिरदर्द हो रहा हो या पेट में कोई तकलीफ पुदीना बेस्ट है। हिचकी आना भी बंद हो जाती हैं। इसकी चटनी भी बहुत स्वादिष्ट होती है। पुदीना अच्छे एंटीबॉयटिक की तरह भी काम करता है। यहीं नहीं सौंदर्य निखार के लिए पुदीना कारगर है।
हैजे में पुदीना, प्याज का रस, नींबू का रस बराबर-बराबर मात्रा में मिलाकर पिलाने से लाभ होता है। उल्टी-दस्त, हैजा हो तो आधा कप पुदीना का रस हर दो घंटे से रोगी को पिलाएँ।
पुदीने में मौजूद फाइबर कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करता है और मैगनीशियम हड्डियों को ताकत देता है। उल्टी होने पर आधा कप पोदीना हर दो घंटे में रोगी को पिलाएं। उल्टी आना बंद हो जाएगी।
* आंत्रकृमि में पुदीने का रस दें।
* अजीर्ण होने पर पुदीने का रस पानी में मिलाकर पीने से लाभ होता है।
पुदीने का रस काली मिर्च व काले नमक के साथ चाय की तरह उबालकर पीने से जुकाम, खांसी व बुखार में राहत मिलती है।


गोखरू के औषधीय गुण और प्रयोग


* पेटदर्द और अरुचि में 3 ग्राम पुदीने के रस में जीरा, हींग, कालीमिर्च, कुछ नमक डालकर गर्म करके पीने से लाभ होता है।
पुदीने का रस किसी घाव पर लगाने से घाव जल्दी भर जाते हैं। यह चर्म रोगों को भी समाप्त करता है। चर्म रोग होने प
र पुदीना के पत्तों का लेप लगाने से आराम मिलता है।
* प्रसव के समय पुदीने का रस पिलाने से प्रसव आसानी से हो जाता है।
माहवारी समय पर न आने पर पुदीने की सूखी पत्तियों के चूर्ण को शहद के साथ समान मात्रा में मिलाकर दिन में दो-तीन बार नियमित रूप से लें।
* बिच्छू या बर्रे के दंश स्थान पर पुदीने का अर्क लगाने से यह विष को खींच लेता है और दर्द को भी शांत करता है।


वीर्य की मात्रा बढ़ाने और गाढ़ा करने के उपाय 

पुदीने का रस काली मिर्च व काले नमक के साथ चाय की तरह उबालकर पीने से जुकाम, खांसी व बुखार में राहत मिलती है।
* दस ग्राम पुदीना व बीस ग्राम गुड़ दो सौ ग्राम पानी में उबालकर पिलाने से बार-बार उछलने वाली पित्ती ठीक हो जाती है।
* पुदीने को पानी में उबालकर थोड़ी चीनी मिलाकर उसे गर्म-गर्म चाय की तरह पीने से बुखार दूर होकर बुखार के कारण आई निर्बलता भी दूर होती है।
* धनिया, सौंफ व जीरा समभाग में लेकर उसे भिगोकर पीस लें। फिर 100 ग्राम पानी मिलाकर छान लें। इसमें पुदीने का अर्क मिलाकर पीने से उल्टी का शमन होता है।


पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा  का  अचूक  इलाज 

* पुदीने के पत्तों को पीसकर शहद के साथ मिलाकर दिन में तीन बार चाटने से अतिसार सें राहत मिलती है।
* तलवे में गर्मी के कारण आग पड़ने पर पुदीने का रस लगाना लाभकारी होता है।
* हरे पुदीने की 20-25 पत्तियाँ, मिश्री व सौंफ 10-10 ग्राम और कालीमिर्च 2-3 दाने इन सबको पीस लें और सूती, साफ कपड़े में रखकर निचोड़ लें। इस रस की एक चम्मच मात्रा लेकर एक कप कुनकुने पानी में डालकर पीने से हिचकी बंद हो जाती है।
* ताजा-हरा पुदीना पीसकर चेहरे पर बीस मिनट तक लगा लें। फिर ठंडे पानी से चेहरा धो लें। यह त्वचा की गर्मी निकाल देता है।


दिव्य औषधि कस्तुरी के अनुपम प्रयोग 

* हरा पुदीना पीसकर उसमें नींबू के रस की दो-तीन बूँद डालकर चेहरे पर लेप करें। कुछ देर लगा रहने दें। बाद में चेहरा ठंडे पानी से धो डालें। कुछ दिनों के प्रयोग से मुँहासे दूर हो जाएँगे तथा चेहरे की कांति खिल उठेगी।
*अगर आपकी त्वचा सांयली है, तो पुदीने का फेशियल आपके लिए सही रहेगा। इसको बनाने के लिए दो बड़े चम्मच ताजा पीसे पुदीने के साथ दो बड़े चम्मच दही और एक बड़ा चम्मच ओटमील लेकर गाढ़ा घोल बनाएं। इसे चेहरे पर दस मिनट तक लगाएं और चेहरे को धो लें। इसके रस को चेहरे पर लगाने से कील और मुंहासे दूर होता है। पोदीने के रस को मुल्तानी मिट्टी में मिलाकर चेहरे पर लेप करने से चेहरे की झांइयां समाप्त हो जाती हैं और चेहरे की चमक बढ जाती है। शराब में पुदीने की पत्तियों को पीसकर चेहरे पर लगाने से चेहरे के दाग, धब्बे, झांई मिट जाते हैं।


पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 


* पुदीने का सत निकालकर साबुन के पानी में घोलकर सिर पर डालें। 15-20 मिनट तक सिर में लगा रहने दें। बाद में सिर को जल से धो लें। दो-तीन बार इस प्रयोग को करने से बालों में पड़ गई जुएँ मर जाएँगी।
*अधिक गर्मी में जी मिचलाए तो एक चम्मच सूखे पुदीने की पत्तियों का चूर्ण और आधी छोटी इलायची के चूर्ण को एक गिलास पानी में उबालकर पीने से लाभ होता है। हैजा होने पोदीना, प्याज का रस और नींबू का रस बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से लाभ मिलता है।
* पुदीने के ताजे पत्तों को मसलकर मूर्छित व्यक्ति को सुंघाने से मूर्छा दूर होती है।


गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि


*पुदीने की पत्तियों को सुखाकर बनाए गए पाउडर को मंजन की तरह प्रयोग करने से मुंह की दुर्गंध दूर होती है और मसूड़े मजबूत होते हैं।
* पुदीने के रस को नमक के पानी के साथ मिलाकर कुल्ला करने से गले का भारीपन दूर होता है और आवाज साफ होती है।
* पुदीने और सौंठ का क्वाथ बनाकर पीने से सर्दी के कारण होने वाले बुखार में राहत मिलती है।


किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचा



17.3.16

जौ खाने के फायदे //Benefits of barley




      हमारे ऋषियों-मुनियों का प्रमुख आहार जौ ही था। वेदों द्वारा यज्ञ की आहुति के रूप में जौ को स्वीकारा गया है। जौ को भूनकर, पीसकर, उस आटे में थोड़ा-सा नमक और पानी मिलाने पर सत्तू बनता है। कुछ लोग सत्तू में नमक के स्थान पर गुड़ डालते हैं व सत्तू में घी और शक्कर मिलाकर भी खाया जाता है। गेंहू , जौ और चने को बराबर मात्रा में पीसकर आटा बनाने से मोटापा कम होता है और ये बहुत पौष्टिक भी होता है .राजस्थान में भीषण गर्मी से निजात पाने के लिए सुबह सुबह जौ की राबड़ी का सेवन किया जाता है .

कलौंजी(प्याज के बीज) के औषधीय उपयोग

बढ़ते कोलेस्ट्रॉल को लेकर परेशान हैं तो ऎसा करें
जौ कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और हृदय  रोगों से बचाता है।
अगर आपको ब्लड प्रेशर की शिकायत है और आपका पारा तुरंत चढ़ता है तो फिर जौ को दवा की तरह खाएँ। हाल ही में हुए एक अध्ययन में दावा किया गया है कि जौ से ब्लड प्रेशर कंट्रोल होता है।कच्चा या पकाया हुआ जौ नहीं बल्कि पके हुए जौ का छिलका ब्लड प्रेशर से बहुत ही कारगर तरीके से लड़ता है।
रोटी: 
जौ, गेहूं और चने को मिक्स करके बनाए हुए आटे की रोटी डायबिटीज, ब्लड प्रेशर , मोटापा, कोलेस्ट्रॉल और हृदय  रोगों में बहुत फायदेमंद होती है।
इस मिक्स आटे में गेहूं 60 प्रतिशत, जौ 30 प्रतिशत और चना 10 प्रतिशत होना चाहिए। रोटी के अलावा जौ से बना दलिया भी स्वादिष्ट व शरीर के लिए पौष्टिक होता है।

*किडनी में क्रिएटिनिन और यूरिया की समस्या के घरेलू उपचार* 

त्वचा: 
जौ के आटे में बेसन, संतरे के छिलके का पाउडर, हल्दी, चंदन पाउडर और गुलाब जल मिलाकर बनाया गया उबटन त्वचा की चमक बनाए रखता है।
*सत्तू भी फायदेमंद: 
भुने हुए जौ को पीसकर पानी व मिश्री मिलाकर बनाया सत्तू गर्मी में अमृत के समान है। जौ से बनी आयुर्वेद की दवा यवक्षार को आयुर्वेद की अन्य दवाओं के साथ लेने से गुर्दे की पथरी निकल जाती है और पेशाब की जलन भी दूर होती है। यदि यवक्षार को 1-2 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ कुछ दिन लिया जाए तो खांसी से आराम मिलता है।*जौ में विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, मैगनीज, सेलेनियम, जिंक, कॉपर, प्रोटीन, अमीनो एसिड, डायट्री फाइबर्स और कई तरह के एंटी-ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. जौ एक बहुत ही फायदेमंद अनाज है. आप चाहे तो इसे अपने रोज के आहार में शामिल कर सकते हैं या फिर एक औषधि के रूप में भी ले सकते हैं.

नसों में होने वाले दर्द से निजात पाने के तरीके 

*हर रोज जौ का पानी पीने से एक ओर जहां स्वास्थ्य से जुड़ी बहुत सी समस्याएं दूर हो जाती हैं वहीं कई बीमारियों के होने का खतरा भी बहुत कम हो जाता है. इसके साथ ही ये शरीर को स्वस्थ रखने में भी बहुत कारगर होता है. कई लोग जौ को भाप द्वारा पकाकर भी इस्तेमाल करते हैं. पर जौ का पानी स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक फायदेमंद होता है
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    जौ का पानी तैयार करने के लिए कुछ मात्रा में जौ ले लीजिए और उसे अच्छी तरह साफ कर लीजिए. उसके बाद इसे करीब चार घंटे तक पानी में भिंगोकर छोड़ दीजिए. उसके बाद इस पानी को तीन से चार कप पानी में मिलाकर उबाल लीजिए. पर इसे धीमी आंच पर ही उबलने दें.लगभग 45 मिनट बाद गैस बंद कर दीजिए और इस पानी को ठंडा होने दीजिए. जब ये ठंडा हो जाए तो इसे एक बोतल में भर लीजिए और दिनभर एक से दो गिलास पीते रहें|
* पथरी- 
जौ का पानी पीने से पथरी निकल जायेगी। पथरी के रोगी जौ से बने पदार्थ लें।
* अगर आपको यूरीन से जुड़ी कोई समस्या है तो जौ का पानी आपके लिए बहुत फायदेमंद होगा. इसके अलावा किडनी से जुड़ी ज्यादातर समस्याओं में जौ का पानी बहुत कारगर होता है.

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*मूत्रावरोध- 
जौ का दलिया दूध के साथ सेवन करने से मूत्राशय सम्बन्धि अनेक विकार समाप्त हो जाते है।

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*अतिसार- 
जौ तथा मूग का सूप लेते रहने से आंतों की गर्मी शांत हो जाती है। यह सूप लघू, पाचक एंव संग्राही होने से उरःक्षत में होने वाले अतिसार (पतले दस्त) या राजयक्ष्मा (टी. बी.) में हितकर होता है।
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शरीर का वजन बढ़ाने के लिये-
 जौ को पानी भीगोकर, कूटकर, छिलका रहित करके उसे दूध में खीर की भांति पकाकर सेवन करने से शरीर पर्यात हूष्ट पुष्ट और मोटा हो जाता है।
*ब्लड कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने के लिए भी जौ का पानी बहुत फायदेमंद होता है. कोलेस्ट्रॉल लेवल कम होने की वजह से दिल से जुड़ी कई तरह की समस्याएं होने का खतरा कम हो जाता है. इससे दिल भी स्वस्थ रहता है्.
*मधुमेह के रोगियों के लिए जौ का पानी बहुत फायदेमंद होता है. ये शरीर में शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में बहुत सहायक होता है


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*मधुमेह (डायबटीज)- 
   छिलका रहित जौ को भून पीसकर शहद व जल के साथ सत्तू बनाकर खायें अथवा दूध व घी के साथ दलिया का सेवन पथ्यपूर्वक कुछ दिनों तक लगातार करते करते रहने से मधूमेह की व्याधि से छूटकारा पाया जा सकता है।
*जौ का पानी पीने से शरीर के भीतर मौजूद विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं. जिससे चेहरे पर भी निखार आता है. साथ ही ये इम्यून सिस्टम को भी बेहतर बनाए रखता है.
* जलन- 
गर्मी के कारण शरीर में जलन हो रही हो, आग सी निकलती हो तो जौ का सत्तू खाने चाहिये। यह गर्मी को शान्त करके ठंडक पहूचाता है और शरीर को शक्ति प्रदान करता है।
*जौ की राख को पानी में खूब उबालने से यवक्षार बनता है जो किडनी को ठीक कर देता है
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