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26.2.17

कटसरैया ( पियाबासा )जड़ी बुटी के गुण, उपयोग




 इसे कोरांटी या काटा कोरांटी भी कहते है.
यह अनेक रंगों में जैसे सफ़ेद , लाल , बैंगनी , पीला आदि में मिलता है.
इसे गमले में लगाने पर भी यह बहुत सुन्दर लगता है. यह आपके घर की शोभा को तो बढ़ाएगा ही साथ ही स्वास्थ्य भी देगा.
*दांतों और मसुढ़ों के लिए इसके पत्तों के साथ उबाले पानी से गरारे करें.
* दांतों में किसी भी तरह की समस्या के लिए इसके पत्तों को खूब चबा चबा कर या तो निगल ले या बाहर निकाल दें. इससे हिलते हुए दांत भी मज़बूत हो जाते है, दर्द मिट जाता है.


गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

*गर्भवती नारियों को इसके जड़ के रस में दालचीनी, पिप्पली, लौंग का २-२ ग्राम चूर्ण और एक चौथाई ग्राम केसर मिलाकर खिलाने से अनेक रोगों और कष्टों से मुक्ति मिलती है, तन स्वस्थ और मन प्रसन्न रहता है, पैर सूजना, जी मिचलाना, मन खराब रहना, लीवर खराब हो जाना, खून की कमी, ब्लड प्रेशर, आदि तमामतर कष्ट दूर ही रहते हैं. बस सप्ताह में दो बार पी लिया करें.
*कुष्ठ रोग में इसके पत्तो का चटनी जैसा लेप बनाकर लगा लीजिये.
*मुंह में छले पड़े हों या दाँत में दर्द होता हो या दाँत में से खून आ रहा हो या मसूढ़े में सूजन /दर्द हो तो बस इसके पत्ते चबा लीजिये,उसका रस कुछ देर तक मुंह में रहने दीजिये फिर चाहें तो निगल लें, चाहें तो बाहर उगल दें. कटसरैया की दातुन भी कर सकते हैं.
*चेहरे पर रगड़ कर लगा कर सो जाएं, चार दिनों में ही असर दिखाई देगा. मुंहासे वाली फुंसियां भी इससे नष्ट होती हैं.


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*शरीर में कहीं सूजन हो तो पूरे पौधे को मसल कर रस निकाल लीजिये और उसी रस का प्रयोग सूजन वाले स्थान पर बार-बार कीजिये.*पत्तो का रस पीने से बुखार नष्ट होता है, पेट का दर्द भी ठीक हो जाता है. रस २५ ग्राम लीजियेगा .
*घाव पर पत्ते पीस कर लेप कीजिये. पत्तो की राख को देशी घी में मिलाकर जख्मों में भर देने से जख्म जल्दी भर जाते हैं,कीड़े भी नहीं पड़ते और दर्द भी नही होता.
* मुंह की दुर्गन्ध और कम या ज़्यादा लार की समस्या के लिए एक दो पत्तियां और अकरकरा का आधा फूल चबाएं इससे मुख शुद्धि हो जाती है. 


स्मरण शक्ति बढाने के सरल उपचार

*पीयाबासे का एक दो चम्मच रस और चुटकी भर सौंठ लेने से दस्त , खुनी दस्त भी रुक जाते है.
* खांसी विशेषकर सूखी खांसी में इसके पत्तों का क्वाथ लें. बच्चों को इसके पत्तों का २-३ चम्मच रस शहद के साथ पिला दें.
*सब कुछ सामान्य होने पर भी गर्भधारण ना हो पाने पर इसके १० ग्रा. पंचांग को गाय के दूध के साथ लेने से स्त्री पुरुष दोनों को लाभ होता है.
* इसके पत्तों का लेप सुजन , दर्द , दाद - खुजली आदि को दूर करता है.


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दूसरा पीले फूलों वाला पौधा या झाडी होती है, इसकी ऊँचाई चार फिट के अन्दर ही देखी गई है. इसका एक नाम कटसरैया भी है. कहीं-कहीं पियावासा भी बोलते हैं. ये झाड़ियाँ कंटीली होती हैं. इसके पत्ते भी ऊपर वाले वासा से मिलते जुलते होते हैं. किन्तु इस पौधे के पत्ते और जड़ ही औषधीय उपयोग में लिए जाते हैं.
इसमें पोटेशियम की अधिकता होती है इसी कारण यह औषधि दाँत के रोगियों के लिए और गर्भवती नारियों के लिए अमृत मानी गयी है.

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