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28.1.17

बरगद के पेड़ के औषधीय उपयोग// Medicinal use of the banyan tree

  

   विशाल  छायादार बरगद का पेड़ तो लगभग आप सभी ने देखा होगा। और आपने इस पेड़ पर लगने वाले छोटे-छोटे फल भी देखे होंगे। इसकी जड़ों की लताओं को पकड़ कर आपने खूब झूला भी झूला होगा। लेकिन आज तक इसका इस्तेमाल कभी नहीं किया होगा जैसे घर में नीम, आम, गुलाब आदि का करते हैं।
बरगद के पेड़ का औषधीय और धार्मिक दोनों ही महत्व हैं। बरगद के पेड़ के कभी भी नष्ट न होने के कारण इसे अक्षय वट भी कहा जाता है। यह भारत का राष्ट्रीय वृक्ष है। इसका वानस्पतिक नाम फाइकस बेंघालेंसिस है। इसे तमाम औषधियों में उपयोग किया जाता है। इसके अलावा इसके पत्तों से निकलने वाले दूध को भी उपचार में प्रयोग किया जाता है।
    बरगद के  फल आपके पौरुष शक्ति बढ़ाने में  मददगार है। इसके इस्तेमाल से शीघ्र पतन, स्वपनदोष, कमजोरी, प्रमेह, वीर्य का पतलापन और वीर्य के अन्य विकार दूर होते हैं। साथ ही यह काम शक्ति और स्पर्म बढ़ाने वाला होता है जिससे आप अपने विवाहित जीवन में भरपूर आनंद ले सकते हैं। यह इस्तेमाल बेहद सस्ता और चमत्कारिक परिणाम देने वाला है। यह इस्तेमाल स्पर्म की बीमारी और कमजोरी से ग्रस्त रोगियों के लिए अच्छे से अच्छे नुस्खों से कहीं अच्छा है।
फल के इस्तेमाल का तरीका
बरगद में काम शक्तिवर्धक और शुक्रवर्धक गुण पाए जाते हैं। बरगद के पेड़ में लाल लाल छोटे छोटे बेर के समान फल लगते हैं। बरगद के पेड़ के ये लाल लाल पके हुए फल हाथ से तोड़ें। जमीन पर गिरे हुए न लें। इनको जमीन पर कपड़ा बिछा कर छाया में सुखाएं। सूखने के बाद पत्थर पर पीसकर पाउडर बना लें। सुखाते समय पीसते समय लोहे का उपयोग नहीं होना चाहिए। लोहे से इन्हें नहीं छूना है। इस पाउडर के तोल के बराबर पीसी हुई मिश्री मिला लें। मिश्री भी पत्थर पर ही पीसें। भली प्रकार मिश्री और बरगद के फलों के पाउडर को मिलाकर मिट्टी के बर्तन में सुरक्षित रखें। इसकी आधी चम्मच सुबह शाम दो बार गर्म दूध से फंकी लें। इससे शीघ्र पतन समाप्त होकर काम शक्ति प्रबल हो जाती है। विवाहित जीवन का भरपूर आनंद आता है। शारीरिक स्वास्थय अच्छा होकर चेहरे पर लाली चमकने लगती है। इस सस्ते लेकिन मेहनत से भरपूर प्रयोग को करके देखें।
*बच्चे पैदा करने वाले कीटाणु (स्पर्म) यदि वीर्य में ना हो तो इस प्रयोग से बच्चे पैदा करने वाले कीटाणु वीर्य में पैदा हो जाते हैं। आदमी बच्चे पैदा करने योग्य हो जाता है। शुक्राणुओं के न होने से जो पुरुष बच्चे पैदा करने के अयोग्य घोषित कर दिए गए हैं, वो इस प्रयोग को ज़रूर करें, और ये प्रयोग करने के बाद अपना अनुभव ज़रूर बताएं, जिस से और लोगों को भी ये प्रयोग करने की प्रेरणा ले सकें।

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* बरगद के फल का इस्तेमाल पौरुष शक्ति बढ़ाने के लिए किया जाता है। जहां अधिकतर लोग पौरुष शक्ति बढ़ाने के लिए वियाग्रा जैसी महंगी दवाई का इस्तेमाल करते हैं वहीं गांव में अब भी लोग बरगद के फल का इस्तेमाल करते हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि वियाग्रा के कई सारे साइडइफेक्ट भी होते हैं जबकि बरगद के इस फल का कोई साइडइफेक्ट भी नहीं होता।

गुप्त रोग दूर करे-

बरगद का ये फल पौरुष शक्ति बढ़ाने के साथ कई सारे गुप्त रोग भी ठीक कर करता है। इसका इस्तेमाल करने से शीघ्र पतन, स्वपनदोष, कमजोरी, प्रमेह, वीर्य का पतलापन और वीर्य संबंधी अन्य सारी समस्याएं दूर हो जाती हैं। साथ ही ये सेक्स से संबंधी हर तरह की समस्या को दूर करता है।

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लो मोबीलिटी की समस्या ठीक करे-

बीते कई सालों में पुरुषों में लो मोबिलिटी की समस्या काफी सामने आई है। इस समस्या में पुरुषों का स्पर्म महिला के शरीर में ज्यादा दिन तक रह नहीं पाता जिससे महिलाओं को गर्भधारण करने में समस्या होती है। साथ ही इस कारण कई बार पुरुषों को शीघ्रपतन की भी समस्या होती है। ऐसे में लोग विवाहित जीवन का भरपूर आनंद नहीं ले पाते। इस समस्या के उपचार के लिए लोग बड़े-बड़े हकीमों और चिकित्सकों से इलाज कराते हैं। लेकिन कोई परिणाम नहीं निकलता।  जबकि इस समस्या के लिए बरगद का फल बड़ा कारगर है। इसका इस्तेमाल बहुत ही सस्ता और चमत्कारिक परिणाम देने वाला है। ये तुरंत स्पर्म की क्वांटिटी और क्वालिटी में बढ़ोतरी करता है जिससे आप अपने वैवाहिक जीवन का भरपूर आनंद उठा पाते हैं। इसका इस्तेमाल स्पर्म की बीमारी और कमजोरी से ग्रस्त रोगियों के लिए रामबाण इलाज है।

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नाक से खून बहना :

बरगद की सूखी हुई जड़ को बारीक पीस लें। अब इसमें से आधी चम्मच पाउडर को लस्सी के साथ पीने से नाक से खून बहना बंद हो जाता है। नाक में बरगद के दूध की दो बूंद डालने से भी नकसीर (नाक से खून बहना) ठीक हो जाता है।

पतले दस्त-

यदि बच्चे को पतले दस्त हो रहे हैं तो नाभि में बरगद का दूध लगाने से दस्त में आराम मिलता है। इसके अलावा एक बताशे में दो से तीन बूंद बरगद का दूध डालकर दिन में तीन चार बार रोगी को खिलाने से भी दस्त में आराम मिलता है।


कमर दर्द में -

   कमर दर्द में सिकाई करने के बाद बरगद के दूध की मालिश करने से कुछ ही दिन में आराम मिलने लगता है। ऐसा दिन में कम से कम तीन बार करना होता है। इसके अलावा बरगद का दूध अलसी के तेल में मिलाकर मालिश करने से भी कमर दर्द से छुटकरा मिलता है।यदि आपके शरीर का कोई हिस्सा जल जाता है तो बरगद का पेड़ उसमें भी राहत देता है। बरगद के पत्ते को पीसकर, उसमें जरूरत के मुताबिक दही मिला लें। अब इस लेप को जले हुए भाग पर लगाने से जलन दूर होती है। जले हुए स्थान पर बरगद की कोपल या कोमल पत्तों को गाय के दही में पीसकर लगाने से भी आराम मिलता है।

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चोट, मोच और सूजन-

बरगद का दूध चोट, मोच और सूजन पर दिन में दो से तीन बार लगाने और मालिश करने से काफी आराम मिलता है। यदि कोई खुली चोट है तो बरगद के पेड़ के दूध में आप हल्दी मिलाकर चोट वाली जगह बांध लें। घाव जल्द भर जाएगा।

वीर्य का पतलापन, प्रमेह,स्वप्नदोष

 बरगद की कली, डंठल को तोड़कर इससे निकलने वाले दूध की पांच बूंदें एक बताशे पर टपका कर खा जाएं। इस प्रकार चार बताशे हर रोज खाएं। यह सूर्योदय से पहले खाएं। नित्य दूध की एक बूंद बढ़ाते जाएं। इस प्रकार दस दिन लेकर फिर एक बूंद रोज कम करते जाएं। इस प्रकार 20 दिन यह इस्तेमाल करने से वीर्य का पतलापन,प्रमेह,स्वप्नदोष ठीक हो जाता हैं|

बिवाई-

हाथों की फटी हुई हथेली हो या एडिया (बिवाई), दोनों के ही उपचार में बरगद के पेड़ का दूध काफी कारगर है। ताजे-ताजे दूध को एडियों की फटी हुई दरारों पर भरकर मालिश करते रहने से कुछ ही दिनों में वह ठीक हो जाती हैं। घांव में दूध भरने से पहले एडियों को गर्म पानी से धो लें

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बार-बार पेशाब आना -


बरगद के पेड़ की छाल को सुखाकर उसका चूर्ण बना लें। अब इसमें से आधा चम्मच चूर्ण का एक कप गुनगुने पानी के साथ दिन में 3-4 बार सेवन करें। ऐसा लगातार 15 दिन तक करने से बार-बार पेशाब आने के रोग में फायदा होगा। बरगद के फल के बीज को बारीक पीसकर चौथाई चम्मच सुबह के समय गाय के दूध के साथ खाने से भी रोग ठीक हो जाता है।

बाल मजबूत-

बरगद के सूखे हुए पत्तों को जलाने पर बनी 20 ग्राम राख को अलसी के 100 मिलीलीटर तेल में मिलाकर मालिश करते रहने से सिर के उड़े हुए बाल उग आते हैं। कोमल पत्तों के रस में बराबर मात्रा में सरसों का तेल मिलाकर आग पर पकाकर गर्म कर लें, इस तेल को बालों में लगाने से बाल मजबूत बनते हैं।

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12.5.16

मालिश के लाभ // Benefits of massage






कमर दर्द रहता है? पैरों की सूजन और दर्द सोने नहीं देते? दवा खाते-खाते थक चुके हैं या फिर दिन भर के काम के बाद शरीर की थकान बेचैन करती है तो किसी अच्छे विशेषज्ञ से मालिश करवाना दवा और व्यायाम की तरह ही राहत देता है। परंपरागत आयुर्वेदिक मालिश से लेकर इन दिनों कई मसाज थेरेपी चलन में हैं-
मालिश तन और मन को तनावमुक्त करने और उसे ताजगी देने का अचूक नुस्खा माना जाता है। मालिश का इतिहास 5000 साल से भी पुराना माना जाता है। दुनियाभर में करीब 200 तरह की मालिश की जाती हैं। नवजात शिशु से लेकर गर्भवती महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों के लिए खास तरह की मसाज थेरेपी हैं। यही नहीं सिर, चेहरे, गर्दन, हाथों, पैरों, कमर के लिए भी अलग-अलग तरह की मसाज हैं। नियमित मालिश कराने वाले खुद को अधिक युवा, ऊर्जावान व स्वस्थ अनुभव करते हैं।
मालिश के प्रकार -
आम धारणा है कि किसी तेल का उपयोग करते हुए हथेलियों और उंगलियों से शरीर को रगड़ना और दबाव डालना मालिश करना होता है, जबकि ऐसा नहीं है। हर तरह की मसाज की अलग तकनीक होती है और उसके लाभ भी। प्रचलित मसाज के तरीके…

अभयानगम

आयुर्वेदिक मसाज को अभयानगम कहते हैं। इस मालिश में भाप स्नान कराया जाता है और चिकित्सकीय गुणों वाले हर्बल तेल से मालिश की जाती है। एक साथ दो थेरेपिस्ट बड़े तालमेल के साथ यह मालिश करते हैं। इसमें लगभग 45 मिनट का समय लगता है। कितना दबाव व स्ट्रोक दिया जाएगा, यह व्यक्ति विशेष की स्थिति पर निर्भर करता है। मालिश के बाद अंत में भाप दी जाती है।
लाभ: ‘शरीर को ऊर्जा मिलती है व इम्यून तंत्र मजबूत होता है।
‘नींद अच्छी आती है। त्वचा मुलायम होती है व उसमें कसाव आता है।

तेलधारा

तेलधारा एक प्रसिद्ध केरल मसाज है। इसमें पूरे शरीर को कुनकुने औषधीय गुणों से युक्त तेल की धारा से नहला दिया जाता है। इसके बाद दो से तीन थेरेपिस्ट हल्के हाथों से पूरे तालमेल के साथ मसाज करते हैं।
लाभ: ‘उत्तेजना कम होती है। दर्द में आराम मिलता है। अवसाद दूर होता है। ‘रक्तदाब नियंत्रित रहता है। जोड़ों का दर्द, लकवा व तंत्रिका तंत्र से जुड़े रोगों के उपचार में राहत मिलती है।

स्वीडिश मसाज थेरेपी

यह सबसे प्रचलित मसाज थेरेपी है। इसमें लंबे व हल्के स्ट्रोक लगाए जाते हैं, मांसपेशियों की सबसे ऊपरी परत पर थपथपाने वाले स्ट्रोक भी लगाए जाते हैं। हथेली व उंगलियों की मदद से गोलाकार गतियां दी जाती हैं। मसाज लोशन या तेल का उपयोग किया जाता है। यह बड़ी धीमी और आरामदायक होती है।
लाभ: ‘खून में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है। ‘मांसपेशियों से विषैले पदार्थ दूर होते हैं व तनाव में कमी आती है। जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है। शरीर को ऊर्जा मिलती है। चोटिल होने की स्थिति में भी यह मालिश की जाती है।

अरोमा थेरेपी

इसमें व्यक्ति की जरूरत के अनुसार एक या दो खुशबूदार पौधों के तेल का उपयोग किया जाता है। यह मसाज भावनात्मक तनाव को कम करने के लिए जानी जाती है। शरीर को ऊर्जा मिलती है।

हॉट स्टोन मसाज

यह मसाज गर्म और चिकने पत्थरों से की जाती है। इन पत्थरों को शरीर के निश्चित बिंदुओं पर रखा जाता है, ताकि कड़ी हो चुकी मांसपेशियों को ढीला किया जा सके और शरीर में ऊर्जा के केंद्रों को संतुलित किया जा सके। पत्थरों की गर्मी बहुत आराम पहुंचाती है। हॉट स्टोन मसाज उनके लिए बहुत उपयोगी है, जिन्हें मांसपेशियों में खिंचाव व अकड़न महसूस हो रही हो। गर्म पत्थरों के जरिए शरीर में अंदर तक गर्मी पहुंचायी जाती है।

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डीप टिश्यु मसाज

डीप टिश्यू मसाज मांसपेशियों की गहरी परत को आराम पहुंचाने के लिए की जाती है। इसमें बहुत धीमे, लेकिन गहरे स्ट्रोक लगाए जाते हैं। इस मसाज के बाद ढेर सारा पानी पीने को कहा जाता है, जिससे टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं। यह मांसपेशियों की जकड़न, खिंचाव,पॉश्चर बिगड़ने, कमर दर्द और किसी चोट से उबरने में बड़ी कारगर है। इसके बाद एक-दो दिन तक शरीर में हल्का दर्द रह सकता है।
लाभ: ‘मांसपेशियों को आराम पहुंचाती है। तनाव व दर्द में आराम मिलता है।
‘रक्तदाब को कम करती है। खून का संचार सही होता है।

शियात्सु

यह मालिश की जापानी विधि है। शियात्सु का मतलब होता है ‘फिंगर प्रेशर’। इसमें शरीर पर उंगलियों से दबाव डाला जाता है। एक्युप्रेशर बिंदुओं पर दो से आठ सेकेंड के लिए रुका जाता है, ताकि ऊर्जा का प्रवाह सुधारा जा सके। पहली बार करवाने वालों को इससे आश्चर्यजनक रूप से सुखद अनुभव होता है। इससे शरीर के कुछ खास बिंदुओं पर दबाव पड़ता है। दर्द का अनुभव नहीं होता।

लाभ

‘सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। मांसपेशियों के दर्द में कमी होती है।
‘यह अनिद्रा और अवसाद से निबटने में सहायता करती है।

थाई मसाज

थाई मसाज की शुरुआत तो भारत में हुई, लेकिन यह थाईलैंड में इतनी लोकप्रिय हुई कि इसका नाम ही थाई मसाज पड़ गया। यह प्राचीन हीलिंग थेरेपी का ही एक रूप है। इसमें शरीर के विशेष ऊर्जा बिंदुओं को धीरे-धीरे दबाया जाता है। इसमें दबाव और खिंचाव भी शामिल होते हैं। यह मसाज बिना तेल के की जाती है। शरीर के कई हिस्सों को स्ट्रेच किया जाता है, जैसे हाथों और पैरों की उंगलियों को खींचना, उंगलियों को चटकाना, पीठ पर कोहनियों से दबाव डालना आदि। यह मसाज लेटे-लेटे योग करने के समान है, इसलिए इसे थेरेपी भी कहते हैं। इस मसाज से शरीर को ऊर्जा मिलती है। तनाव कम होता है और लचीलापन बढ़ता है। शरीर को आराम पहुंचाने के साथ ही आंतरिक कार्यप्रणाली में सुधार होता है।

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मालिश के लाभ

‘आधुनिक शोधों में भी यह बात सामने आयी है कि मालिश के बाद ऊतकों की मरम्मत का काम तेज हो जाता है। मांसपेशियों का तनाव व दर्द कम होता है। मांसपेशियों को फुलाने वाले रसायन साइटोकाइनेस का निर्माण कम होता है।
‘मांसपेशियों, ऊतकों और लिगामेंट्स में रक्त का संचार बढ़ता है।
‘मसाज तनाव को कम कर क्रोध, हताशा और अवसाद को कम करती है और अप्रत्यक्ष रूप से सिरदर्द, पाचन तंत्र संबंधी गड़बडि़यों, अनिद्रा, अल्सर, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और स्ट्रोक को रोकने में भी मददगार होती है।
‘शरीर का पॉश्चर सुधरता है। त्वचा की रंगत में सुधार आता है।
‘जोड़ों का दर्द कम होता है और उनका लचीलापन बढ़ता है।
‘तनाव पैदा करने वाले हार्मोन, कार्टिसोल का स्तर कम होता है। मूड अच्छा करने वाले हार्मोन सेरेटोनिन का स्तर बढ़ता है।

मालिश से अधिकतम लाभ के लिए:

‘मालिश हमेशा बंद कमरे में या ऐसे स्थान पर करें, जहां धूप आ रही हो।
‘मालिश करने के तुरंत बाद न नहाएं। कम से कम 15 मिनट का अंतराल रखें। थोड़ी देर धूप में बैठने से तेल अवशोषित हो जाता है।
‘मालिश के तुरंत बाद कूलर या एसी वाले कमरे में न जाएं।
‘मालिश किसी विशेषज्ञ से ही कराएं। अधिक दबाव या दर्द होना मालिश होना नहीं है।
कौन सा तेल है बेहतर
आमतौर पर मालिश करने के लिए उसी तेल का इस्तेमाल किया जाता है, जो उस मसाज तकनीक के अनुरूप हो। कई बार तेल का चयन व्यक्ति विशेष की जरूरत के अनुसार भी किया जाता है। कई तेलों को दो तीन तेलों में जड़ी-बूटियों के मिश्रण से भी तैयार किया जाता है।
अलसी का तेल: त्वचा से संबंधित रोगों के उपचार में यह तेल काफी कारगर है। रक्त संचार भी नियमित होता है।

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नारियल का तेल : यह तेल मसाज के लिए इस्तेमाल होने वाले सबसे प्रचलित तेलों में से एक है। इसका उपयोग थकान दूर करने और शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ाने के लिए किया जाता है। यह त्वचा की सुंदरता भी बढ़ाता है।
रोजमेरी तेल : यह रक्त संचरण को सुधारने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। बालों के विकास और मानसिक सक्रियता बढ़ाने के लिए इस तेल का इस्तेमाल होता है।
सरसों का तेल: सभी प्रकार की सूजन में गर्म सरसों के तेल से मसाज करना फायदा पहुंचाता है। जिन लोगों की तिल्ली या प्लीहा बढ़ा हुआ है, अगर वो कुनकुने सरसों के तेल से मालिश करें तो उन्हें आराम मिलेगा। सर्दी और कफ से परेशानी होने पर सरसों के तेल में कुछ लहसुन की कलियों को डाल कर गर्म कर लें। खासकर छाती पर मालिश करने से सर्दी और कफ में आराम मिलता है।
जैतून का तेल: कमजोर, बूढ़े बच्चों और बीमार लोगों के लिए जैतून के तेल से मालिश करने की सलाह दी जाती है। यह सूजन, दर्द, मांसपेशियों का कड़ापन दूर करता है और त्वचा में निखार लाता है।
तिल का तेल : आयुर्वेद में इस तेल का बहुत उपयोग किया जाता है। सामान्य मसाज के लिए यह सबसे उपयोगी माना जाता है। त्वचा के अलावा इसे जोड़ों के दर्द में फायदेमंद माना जाता है।
जिंजर ऑयल: मांसपेशियों का कड़ापन दूर करने के लिए अदरक के तेल में इलायची मिला कर मसाज करें। अगर शरीर कड़ा हो गया हो तो जिंजर ऑयल से मालिश करने से लचीलापन बढ़ता है।
मालिश की सही तकनीक
मसाज को या तो पैरों से शुरू किया जा सकता है या सिर से। अगर आप पैरों से शुरू करते हैं तो इसके बाद टांगों, फिर हाथों, पेट, कमर, छाती, गर्दन, कंधे, चेहरे और अंत में सिर की मसाज करनी चाहिए।
जो भी तेल आप मसाज के लिए इस्तेमाल करें, उसे पहले कुनकुना गर्म कर लें। पहले इस तेल को उस भाग पर लगाएं, जिसकी मसाज करनी है। फिर धीरे-धीरे हथेलियों से मसाज करें, जब तक कि तेल त्वचा में अवशोषित न हो जाए। इसके बाद हथेलियों और उंगलियों द्वारा ऊपर की ओर स्ट्रोक लगाएं। स्ट्रोक्स की गति एक समान (न बहुत तेज, न बहुत धीमी) होनी चाहिए। और प्रेशर केवल मांसपेशियों पर लगाना चाहिए, हड्डियों पर नहीं। शरीर के अलग-अलग भागों की मसाज करने के लिए उंगलियों और हाथों की मूवमेंट अलग-अलग होती है, इसलिए मसाज प्रशिक्षित व्यक्ति से ही कराएं।

मालिश  के मामले मे सावधानियाँ -

चिकित्सा जगत हालांकि शरीर पर मालिश के सकारात्मक प्रभावों को मानता है, पर पूरी तरह मान्यता नहीं देता। ठीक तरह से या प्रशिक्षित लोगों द्वारा मालिश न किए जाने पर कई बार राहत मिलने की जगह दर्द बढ़ जाता है।
‘मसाज कराने के दूसरे दिन शरीर में दर्द हो सकता है, विशेषकर डीप टिश्यू मसाज के बाद, क्योंकि इसमें धीमे, लेकिन दबाव वाले स्ट्रोक लगाए जाते हैं।
‘कई बार मसाज के बाद खून में शर्करा का स्तर कम हो जाता है।
‘डीप टिश्यू मसाज में अगर थेरेपिस्ट ज्यादा प्रेशर लगा दे तो तंत्रिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है, विशेषकर गर्दन और कंधे के क्षेत्र की तंत्रिकाओं को।
ये लोग मसाज से रहें दूर

*किडनी फेल रोग का अचूक इलाज* 

‘ जिन लोगों को त्वचा का संक्रमण है या खुले जख्म हैं या फिर तुरंत सर्जरी हुई है।
‘कीमोथेरेपी और रेडिएशन के तुरंत बाद, जब तक कि डॉक्टर ने न सुझाया हो।
‘जिन लोगों में खून में थक्का बनने की समस्या है, उन्हें मालिश नहीं करवानी चाहिए या विशेषज्ञों की राय से ही ऐसा करना चाहिए।
‘ हृदय रोगियों को भी खास सावधानी रखने की जरूरत है।
‘गर्भवती महिलाएं भी बिना डॉक्टर से सलाह लिए मसाज न कराएं। उन्हीं से मालिश करवाएं, जिन्होंने इसमें प्रमाण-पत्र हासिल किया हुआ है।
‘शरीर के जिस हिस्से में फ्रेक्चर हुआ हो, उस हिस्से में भी तुरंत मालिश नहीं करानी चाहिए।

बरतें सावधानी

‘ मसाज करवाने से पहले भारी खाना न खाएं।
‘कम से कम दस मिनट के लिए अपने शरीर को ढीला छोड़ दें। साफ-सफाई का ध्यान रखें।

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