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7.11.16

भोजन कब,कैसे,कितना खाएं ?: Food when, how, how much to eat?



भोजन से केवल भूख ही शांत नहीं होती बल्कि इसका प्रभाव तन, मन एवं मस्तिष्क पर पड़ता है। अनीति (पाप) से कमाए पैसे के भोजन से मन दूषित होता है (जैसा खाओ अन्न वैसा बने मन) वहीं तले हुए, मसालेदार, बासी, रूखे एवं गरिष्ठ भोजन से मस्तिष्क में काम, क्रोध, तनाव जैसी वृत्तियां जन्म लेती हैं। भूख से अधिक या कम मात्रा में भोजन करने से तन रोगग्रस्त बनता है।

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*भोजन से ऊर्जा के साथ-साथ सप्त धातुएं (रक्त, मांस, मज्जा, अस्थि आदि) पुष्ट होती हैं। केवल खाना खाने से ऊर्जा नहीं मिलती, खाना खाकर उसे पचाने से ऊर्जा प्राप्त होती है। परंतु भागदौड़ एवं व्यस्तता के कारण.मनुष्य शरीर की मुख्य आवश्यकता भोजन पर ध्यान नहीं देता।   \
*एक प्रसिद्ध लोकोक्ति है,'सुबह का खाना स्वयं खाओ, दोपहर का खाना दूसरों को दो और रात का भोजन दुश्मन को दो।' वास्तव में हमें सुबह 10 से 11 बजे के बीच भोजन कर लेना चाहिए ताकि दिनभर कार्य करने के लिए ऊर्जा मिल सके |

 

*अच्छी भूख लगने पर ही खाना खाये|
 *बिना भूख लगे खाना बीमारियो को बुलावा देने के समान है|
 *चिन्ता,गुस्सा, डर ,जल्दी इस प्रकार की स्थिति में भोजन न करे |
*दोपहर में भोजन करने के बाद थोड़ी देर आराम अवश्य करे|
 *पहले से भरे पेट को और ठूँस-ठूँसकर न भरे|


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* दिन में अन्न का भोजन एक बार या ज्यादा से ज्यादा 2 बार करे |
* अपनी पाचन तंत्र शक्ति से थोड़ा कम ही खाए.||
 *भोजन को अच्छी तरह चबा चबाकर खाए|
* फलो या सलाद में नमक का प्रयोग न करे|.
 

**फलो को हमेशा धोकर काटे क्योकि काटने के बाद धोने से पोषण तत्व पानी में ही निकल जाते है|
*इसी तरह काट कर रखने से इनके पोषण तत्व वायु के द्वारा निकल जाते है|
*ज्यादा गर्म जयादा ठंडा खाना न खाए|


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*टीवी देखते या अखबार पढ़ते हुए खाना नहीं खाना चाहिए। स्वाद के लिए नहीं, स्वास्थ्य के लिए भोजन करना चाहिए।   
*कुछ लोग सुबह चाय-नाश्ता करके रात्रि में भोजन करते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं होता।  
*दिन का भोजन शारीरिक श्रम के अनुसार एवं रात का भोजन हल्का व सुपाच्य होना चाहिए। रात्रि का भोजन *सोने से दो या तीन घंटे पूर्व करना चाहिए। तीव्र भूख लगने पर ही भोजन करना चाहिए। । नियत समय पर भोजन करने से पाचन अच्छा होता है।
*स्वादलोलुपता में भूख से अधिक खाना बीमारियों को आमंत्रण देना है। भोजन हमेशा शांत एवं प्रसन्नाचित्त होकर करना चाहिए  
*भोजन करते समय मौन रहना चाहिए। इससे भोजन में लार मिलने से भोजन का पाचन अच्छा होता है।   

क्या-क्या न खाएं -

रात्रि को दही, सत्तू, तिल एवं गरिष्ठ भोजन नहीं करना चाहिए। दूध के साथ नमक, दही, खट्टे पदार्थ, मछली, कटहल का सेवन नहीं करना चाहिए। शहद व घी का समान मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए।