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25.5.17

गर्भपात के कारण लक्षण और बचने के उपाय


    मातृत्व ग्रहण करना किसी भी स्त्री के लिए एक खुशनुमा अनुभव होता है। वैसे तो शादी को ही महिला का दूसरा जन्म माना जाता है लेकिन जब वो एक पत्नी, एक बेटी, एक बहु के दायरे से बाहर आकर एक मां बनती है तो उसका जीवन पूरी तरह बदल जाता है।
गर्भधारण करते ही महिला अपने होने वाले बच्चे के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ जाती है। साथ ही उसका परिवार भी आने वाली खुशियों की राह देखने लगता है। लेकिन अगर इन खुशियों की राह में कोई बाधा आ जाए तो उसे सहन करना किसी के लिए भी आसान नहीं होता।
  कई महिलाओं का गर्भावस्था धारण करने के कुछ हफ्तों के बाद गर्भपात हो जाता हैं. जिससे बच्चों से जुडी उनकी सारी उम्मीदें खत्म हो जाती हैं. 
गर्भपात- 

गर्भावस्था के 24 हफ्तों के अंदर शिशु का पेट में ही समाप्त हो जाना कहलाता हैं. एक महिला जब गर्भावस्था में होती हैं. तो उसके परिवार की सारी उम्मीदें उससे जुड़ जाती हैं. लेकिन जैसे ही उसका अनचाहा गर्भपात हो जाता हैं. तो उससे जुडी लोगों की उमीदें तो खत्म होती ही हैं. साथ ही साथ गर्भपात के कारण महिला के शरीर में कुछ ऐसी समस्याएं हो जाती हैं. जिससे वह बहुत ही बहुत ही परेशान हो जाती हैं. कुछ ऐसी भी महिलाएं होती हैं. जिनका का बार – बार गर्भपात हो जाता हैं. जिसका असर उनके शरीर के साथ साथ मस्तिष्क पर भी पड़ता हैं. अगर किसी महिला को गर्भावस्था के शुरूआती दिनों में गर्भपात हो जाये तो गर्भपात होना आम हैं. शुरूआती दिनों में गर्भपात होने का कारण महिला के गर्भ में भूर्ण का पूर्ण विकसित न होना हो सकता हैं. लेकिन अगर किसी महिला का बार – बार गर्भपात हो रहा हैं. तो इसकी कोई गम्भीर वजह हो सकती हैं.

गर्भपात होने के कारण-

* गर्भावस्था के शुरूआती दिनों में गर्भपात होने का कारण क्रोमोजोम की समस्या हो सकती हैं. यह कोई खास समस्या नहीं हैं. क्रोमोजोम की समस्या बिना किसी वजह के ही उत्पन्न हो जाती हैं. इस समस्या के होने पर महिला के गर्भ में भूर्ण पूरी से विकसित नहीं हो पाता.
* महिला की अधिक उम्र भी गर्भपात की एक वजह हो सकती हैं. महिला की अधिक आयु होने पर उसके गर्भ के शिशु में कुछ असामान्य गुणसूत्रों की संख्या अधिक पाई जाती हैं. जिसके कारण महिला का गर्भपात हो जाता हैं.
*गर्भपात होने का एक कारण ह्यूस सिंड्रोम भी हो सकता हैं. यह सिंड्रोम अक्सर लूपुस जैसी बीमारी के होने पर प्रकट हो जाता हैं. जो की गर्भपात होने की एक बहुत ही बड़ी समस्या हैं.
* गर्भपात होने की वजह लिस्तिरेइओसिस और टोक्सोप्लाजमोसिज नामक संक्रमण भी हो सकते हैं.
* गर्भपात होने का एक कारण महिला की जीवनशैली भी हो सकती हैं. गर्भपात अधिक मात्रा में कैफीन का सेवन करने से भी हो सकता हैं. गर्भपात अगर किसी महिला को शराब पीने की आदत हो या ध्रूमपान करने की आदत हो तो भी हो सकता हैं.
* महिला का गर्भपात होने की एक वजह महिला को किसी प्रकार की बीमारी होना भी हो सकता हैं. यह सम्भावना उन महिलओं में अधिक होती हैं जिनका वजन लगातार बढ़ता जाता हैं. वजन बढने से परेशान महिलाओं में से अधिकतर को मधुमेह या थायराइड की बिमारी होती हैं. इन दोनों रोगों में से किसी एक रोग से ग्रस्त महिला में यह रोग अनियंत्रित हो जाता हैं. तो गर्भपात की सम्भावना बढ़ जाती हैं.
*गर्भपात होने के कारण एंटी फोस्फो लिपिड सिंड्रोम या स्टिकी रक्त सिंड्रोम (चिपचिपा रक्त) हो सकते हैं. इन दोनों सिंड्रोम की वजह से रक्त के थक्के रक्त वाहिकाओं में जम जाते हैं. जिसके कारण गर्भपात हो जाता हैं.
* यौन संचारित संक्रमण होने पर भी गर्भपात हो सकता हैं. महिला को यौन संचारित संक्रमण होने पर पोलिसिस्टिक या फिर क्लैमाइडिया नामक दो अंडाशय से सम्बन्धित दोष उत्पन्न हो जाते हैं. ये दोनों महिला के हार्मोन्स को प्रभावित करते हैं. जिससे गर्भपात होने की सम्भावना महिला में बढ़ जाती हैं.

गर्भपात होने के लक्षण-

* गर्भपात होने की स्थिति में मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्त स्त्राव होता हैं. अधिक रक्त स्त्राव के होने पर खून के थक्के की भी समस्या उत्पन्न हो जाती हैं.
* गर्भपात होने की स्थिति में महिला के शरीर के हार्मोन्स का स्तर कम होने लगता हैं. ऐसे में महिला को अधिक कमजोरी महसूस होती हैं.
* गर्भपात होने पर डॉक्टर द्वारा जाँच करने पर शिशु की धड़कन को नहीं सूना जा सकता हैं.

गर्भपात रोकने के लिए उपचार-

* गर्भपात की समस्या से बचने के लिए महिलाएं पीपल की बड़ी कंटकारी की जड एवं भैंस के दूध का उपयोग कर सकते हैं. गर्भपात को रोकने के लिए पीपल की बड़ी कंटकारी की जड को अच्छी तरह से पीस लें. अब एक गिलास भैंस का दूध लें और उसके साथ पीपल की बड़ी कंटकारी की जड़ के चुर्ण को फांक लें. रोजाना दूध के साथ इस चुर्ण का सेवन करने से गर्भपात होने की सम्भावना कम हो जाती हैं.
एक गिलास दूध में एक गाजर का रस मिलाकर उबालें। जब दूध आधा रह जाए तो इसका सेवन कर लीजिए। ऐसा प्रतिदिन करना फायदेमंद होगा। जिन्हें बार-बार गर्भपात होता है वे अभी से इसका सेवन प्रारंभ कर दें।
* गर्भपात को रोकने के लिए आप हरी दूब के पंचांग का भी प्रयोग कर सकते हैं. इसके लिए हरी दूब के पंचांग(जड़, तना, पत्ती, फूल तथा फल) को लें. अब दूब के पंचांग को अच्छी तरह से पीस लें. पिसने के बाद दूब के पंचांग में थोड़ी मिश्री और दूध को मिला लें. मिलाने के बाद इस मिश्रण से बना हुआ 250 से 300 ग्राम शर्बत का सेवन गर्भावस्था के दौरान करें. आपको लाभ होगा.
*अनार के ताजा पत्तों (100 ग्राम) को पीसकर उसे पानी में छान लें। उस पानी को गर्भवती महिला को पिला दीजिए और बचे हुए लेप को पेट के निचले भाग यानि पेडू पर लगा दें। ऐसा करने से रक्तस्राव रुक जाएगा।
* गर्भपात को रोकने के लिए आप मूली के बीजों का तथा भीमसेनी की कपूर का भी प्रयोग कर सकते हैं. इसके लिए मूली के बीजों को अच्छी तरह से पीस लें. अब मूली के बीजों के चुर्ण को भीमसेनी कपूर तथा गुलाब के अर्क में मिला लें. अब इस चुर्ण को अपनी योनी में मलें. इस चुर्ण का प्रयोग गर्भावस्था में करने से महिला को बहुत ही फायदा होता हैं. अगर किसी महिला को गर्भा स्त्राव की समस्या हैं. तो वह इस चुर्ण का प्रयोग करके अपनी इस समय से छुटकारा पा सकती हैं.
*ऐसी स्त्री जिसके गर्भपात का खतरा बना रहता है उसे गर्भधारण करते ही रोजाना 250 ग्राम दूध में आधी चम्मच सोंठ, चौथाई चम्मच मुलहठी मिलाकर पिलाना चाहिए।
* गर्भपात को रोकने के लिए महिलाएं गाय के दूध और जेठीमधु का भी इस्तेमाल कर सकती हैं. गर्भपात को रोकने के लिए गाय का दूध लें और जेठीमधु लें. अब इन दोनों को मिलाकर काढ़ा तैयार कर लें. अब इस को पी लें. आप इस काढ़े को अपनी नाभि के निचे के भाग पर भी लगा सकते हैं. काढ़े का सेवन करने से तथा काढ़े को नाभि के निचेले भाग पर लगाने से महिला को गर्भावस्था के दौरान किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी.
शिवलिंगी के बीज और पुत्र जीवक की गिरी का चूर्ण बनाकर गाय के दूध के साथ रोज सुबह शौच के बाद और नाश्ते से पहले एक चम्मच लें। इसके अलावा रात में सोने से पहले एक चम्मच दूध के साथ अवश्य लें।
* गर्भपात की समस्या से बचने के लिए महिलाएं नागकेसर, वंशलोचन तथा मिश्री का भो प्रयोग कर सकती हैं. इस समस्या से निदान पाने के लिए इन तीनों को मिलाकर खूब महीन चुर्ण पीस लें. अब एक गिलास दूध लें और उसके साथ 4 ग्राम चुर्ण रोजाना खाएं. आपको लाभ होगा.
*अगर आपको ये अंदजा होने लगता है कि गर्भपात होने वाला है तो तुरंत एक चम्मच फिटकरी को कच्चे दूध के साथ पानी में मिलाकर लेने से गर्भपात रुक जाता है।
* महिलाएं गर्भपात होने से रोकने के लिए पके हुए केले का भी सेवन कर सकती हैं. गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को रोजाना एक पके हुए केले को मथकर उसमें शहद मिलाकर खाना चाहिए. इससे गर्भाशय को लाभ होता हैं. तथा गर्भपात होने का भय भीं नहीं रहता.
*अंकुरित भोजन में विटामिन ई प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है, इसके अलावा सूखे मेवों का सेवन भी अवश्य किया जाना चाहिए। गर्भास्था में नींबू और नमक वाली शिकंजी बहुत फायदेमंद होती है।
* अगर किसी महिला को गर्भ तारने के बाद गर्भ स्त्राव होने की समस्या से परेशान हैं. तो वह अशोक के पेड़ की छाल का उपयोग कर इस समस्या से निजात प् सकती हैं. इसके लिए अशोक के पेड़ की छाल को लें और उसका क्वाथ बना लें. अब इस क्वाथ का सेवन रोजाना करें. आपको गर्भ स्त्राव की समस्या से छुटकारा मिल जायेगा.
*गर्भपात का भय अगर लगातार बना रहता है तो ऐसे हालात में काले चने का काढ़ा बहुत लाभप्रद है।
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